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ओम स्थापक य च धर्मस्य सर्वधर्म स्वरूपिणी अवतार वरिष्ठ राम कृष्णाय ते नम स्वामी जी के राजयोग का अभ्यास कर रहे थे अभी जो टॉपिक है अभी तक हमने देखा कि स्वामी जी दो तत्व के बारे में बताते हैं आकाश और प्राण और स्वामी जी कहते हैं कि स्थूल जितने भी पदार्थ हैं वो सब बने हैं आकाश से और जो एनर्जी है ये स्थूल पदार्थ को चलन शक्ति देती है चलित करती है उनको नियमन करती है वोह एनर्जी या फोर्स है प्राण और यह एस्टेब्लिश करने के बाद स्वामी जी हमको कहते हैं कि थियोरेटिकली पहले तो थिरी बताते हैं स्वामी जी कहते हैं कि यदि हम यह प्राण को नियम करना सीख ले देखिए कि जितने भी पदार्थ हैं वह बने हैं आकाश से और आकाश को कंट्रोल करने वाला है प्राण तो यदि हम प्राण को कंट्रोल कर दे तो तो हम पूरे आकाश रूपी जितने भी पदार्थ है उनको कंट्रोल कर पाएंगे यह तो ऐसा हो गया कि एक राजा है पूरा राज्य चलाता है अभी मान लीजिए कि मैंने राजा को कंट्रोल करना सीख लिया कैसे भी करके राजा को मैंने अपने वश में लाना सीख लिया तो मैं राजा के माध्यम से पूरे राज्य पर राज कर सकता हूं भले ही चाहे मैं राजा ना हूं अर्थात कि मेरे पास में वह शक्ति नहीं राज्य चलाने की किंतु राजा को कंट्रोल कर लिया तो राजा के माध्यम से मैं राज्य कर सकता हूं तो यहां पर भी ऐसा है व ऐसा तो संभव नहीं मेरे तो यह दो हाथ है ये दोनों हाथों से मैं जो हाथ में पकड़ में आएगा उसी चीज को उसी पदार्थ को मैं कंट्रोल कर पाऊंगा ये पेन है यह किताब है ना कि ये कंप्यूटर है ना कि ये टेबल है इतना ही मेरे से कंट्रोल होगा किंतु प्राण जो है वह विश्व में जितने भी पदार्थ आकाश रूपी है उन सबको कंट्रोल कर सकता है तो प्राण को कंट्रोल करने से पूरा विश्व हमारे कंट्रोल में आ जाएगा स्वामी जी कहते हैं कि हम सूर्य चंद्र नक्षत्रों की गति भी परिवर्तित कर सकते हैं यहां से दूर जो भी हो सकता है निरीक्षण कर सकते हैं जितनी भी जादुई शक्तियां जितने भी मिरेकल्स हमने पुराणों में पढ़े हैं हमने बाइबल में पढ़े हैं दुनिया भर के जितने भी ग्रंथ है उसमें पड़े हैं वह सब सही सही हो सकते हैं दिस इज नॉट मियर अ फ्लाइट ऑफ फैंसी इसके पीछे में एक सॉलिड साइंस है तो यहां तक हमने पढ़ा और फिर अभी देखते हैं कि प्राण को नियमन कैसे किया जाए तो मेथड ऑफ प्राणायाम ग्रोज टू सटल यह टाइटल मैंने दिया है इस पैसेज का देखते हैं स्वामी जी क्या कहते हैं द मोस्ट ओबवियस मेनिफेस्टेशन ऑफ दिस प्राणा इन ह्यूमन बॉडी इज द मोशन ऑफ द लंग्स अभी हमने देख स्वामी जी पहले तो कहते हैं कि प्राणायाम अर्थात कि प्राण को नियमन कर लो प्राणायाम के माध्यम से तो पूरा जगत कंट्रोल में आ जाएगा तो अ यह प्राण को नियमन कैसे किया जाए इसका थोड़ा सा मैकेनिज्म समझाते हैं हमारे शरीर में प्राण की जो गति है उसका सबसे जो सबसे सिंपल जो हमको दिखाई दे रहा है वो है हमारे सांस यह जो हम ब्रीदिंग करते हैं श्वास उच्छवास करते हैं यही है प्राण का सबसे ओबवियस सबसे ज्यादा विजुअल मेनिफेस्टेशन इफ दैट स्टॉप्स एज ए रूल ऑल द अदर मेनिफेस्टेशन ऑफ फोर्स इन द बॉडी विल इमीडिएट स्टॉप जिस क्षण हमारी सांस रुक गई उसी क्षण प्राण का जितना भी कार्य है हमारे शरीर के भीतर में सब रुक जाएगा यहां पे हमको थोड़ा सा यह देखने की जरूरत है कि शरीर के भीतर में प्राण के कार्य कौन-कौन से हैं तो यहां पर हमने देखा था कि पंच प्राण है पांच प्राण है अ जो कि हमारे शरीर को चालित करते हैं उसमें से एक तो है प्राण प्राण अपान व्यान उदान और समान यह पंच प्राण है उसमें से जो पहला प्राण है प्राण इसका नाम ही है प्राण वो है हमारे हृदय और फेप्स से जुड़ा है और हमारी श्वास उच्छवास की क्रिया को नियमन करता है दूसरा है अपान वो कि उत्सर्जन और प्रजनन के साथ में जुड़ा है हम जो मल त्याग करते हैं प्रजनन क्रिया जो है वह यह अपान वायु कंट्रोल करता है व्यान जो है मांसपेशियां जो हमारी है मसल और यह जो रुधिर का यह जो सर्कुलेशन है ब्लड सर्कुलेशन इसके साथ में जुड़ा है उदान है वो गले और वाणी को कंट्रोल करता है समान जो है पाचन प्रणाली और डाइजेशन के साथ में डाइजेशन सिस्टम जो है हमारी उसको कंट्रोल करता है तो यह पांचों प्राणों के अपने-अपने कार्य है तो जो प्राण वायु जो है प्राण वायु यह ब्रीदिंग को कंट्रोल करता है अपनी ये जो फेसे के जो मसल्स है अपने लंग्स के जो मसल है हार्ट बीट्स जो है उनको कंट्रोल करता है और उनको कंट्रोल करने से हम लोग सांस ले सकते हैं मान लीजिए कि लंग्स को सडन पैरालिसिस हो गया तो इमीडिएट हमारी सांस रुक जाएगी क्यों क्योंकि हम लोग इस लंग्स के माध्यम से ही जो मस्कुलर एक्शन जो है लंग्स की उसी के माध्यम से ही तो हम सांस लेते हैं अर्थात कि यह लंग्स को कंट्रोल करना उससे यह सांस और उच्छवास की क्रिया श्वास और प्रश् वास की क्रिया कंट्रोल होती है जब हम यह जो जाते हैं है योगा क्लास में और हमको जब इंस्ट्रक्शन इंस्ट्रक्टर जो होता है वह कहता है कि चलो अभी यह पूरक करो फिर यह कुंभक करो फिर यह रेचक करो तो यह पूरक इतना मात्रा में करना है कुंभक इतनी मात्रा में करना है और रेचक इतनी मात्रा में करना है तो यह जो पूरक रेचक और कुंभक का जो प्रमाण है उसको जो हम नियमन करते हैं वह तो लंग्स के माध्यम से ही करते हैं जब कहा जाएगा कि अभी सांस लो पूर करो तो हम फेंसों को फुलाए और सांस हमारे लंग्स के भीतर में जाएगी अभी कहेंगे कुंभक तो हम लंग्स को रोक रखेंगे जिससे कि सांस ना बाहर आए ना भीतर जाए और जब रे चक करने को कहेंगे तब हम अपने लंग्स को कंप्रेस करेंगे जिससे कि सांस बाहर आए अर्थात कि अपने लंग्स के माध्यम से ही तो हम यह पूरक कुंभक रेचक की साइकिल जो है उसको नियमन करते हैं अर्थात कि प्राणायाम क्या है एक्चुअली एक्चुअली प्राण क्या है तो प्राण वह शक्ति है जो कि हमारे लंग्स को कंट्रोल करती है नहीं कि हम लंग्स के द्वारा जिसको ग्रहण करते हैं वह प्राण है वह तो सिर्फ हवा है लंग्स के माध्यम से फेप्स के माध्यम से अपने शरीर में जो हम ग्रहण करते हैं वह तो हवा है ऑक्सीजन है कार्बन डाइऑक्साइड ये कार्बन मोनोऑक्साइड यह जो हवा में जितने भी पार्टिकल्स है वो तो हम हवा अपने नाक के माध्यम से नासिका के माध्यम से अपने लंग्स के माध्यम से ग्रहण करते हैं असली प्राण तो वो है जो कि अपने लंग्स को नियमित करता है आज ऐसी कौन सी शक्ति आज मैं कहता हूं मुझे अपने हाथ को चलाना है तो मैं कैसे चला रहा हूं मुझे खाना डाइजेस्ट करना है मैं कैसे डाइजेस्ट कर रहा हूं हमको लगता है यह सब ऑटोमेटिक हो रहा है ऑटोमेटिक होने के लिए भी तो इसके पीछे कोई ना कोई शक्ति चाहिए जैसे कि हम गाड़ी चलाते हैं कार चलाते हैं अभी मैंने कार को फर्स्ट गियर में से सेकंड गियर में डाला तो फिर अभी हमको लगता है कि मैंने सिर्फ ये हैंडल घुमाया तो उसी से गाड़ी सेकंड गियर में चली गई थर्ड गियर में चली गई नहीं इसके भीतर में गियर बॉक्स है वो गियर बॉक्स जो है वो एक्चुअली वह गियर को चेंज करता है यह जो हैंडल है गाड़ी गियर का वो तो सिर्फ उसको इंस्ट्रक्शन देता है कि अभी तुमको गियर चेंज करने हैं एक्चुअली गियर चेंज तो गियर बॉक्स करता है फिर यह गियर बॉक्स के माध्यम से यह जो पेट्रोल कितना इंजन के भीतर में जाएगा कितना नहीं जाएगा वह तो पूरा इंटरनल कंबन इंजन यह सब डिसाइड करता है तो भीतर में एक पूरा मैकेनिज्म है हम लोग जो स्टीयरिंग से जो गाड़ी चलाते हैं और फिर यह ब्रेक लगाते हैं एक्सलरेटर देते हैं यह गियर चेंज करते हैं वो तो सब गाड़ी के भीतर में रहे हुए जो कल्प उर्ज है जो मैकेनिज्म है उनको सिर्फ इंस्ट्रक्शन ही पहुंचाते हैं गाड़ी तो एक्चुअली चलती है भीतर के इंजंस के माध्यम से भीतर के मैकेनिज्म के माध्यम से तो वैसे ही मेरा मन आदेश तो देता है मेरे शरीर को कि हां अभी पूरक करो कुंभक करो रेचक करो मेरा मन अपने हाथों से आहार तो ग्रहण करता है किंतु आहार ग्रहण करने के बाद में डाइजेशन कौन करेगा यह जो अपने फेप्स को जो इंस्ट्रक्शन दिया वो इंस्ट्रक्शन का पालन कौन करेगा मेरे शरीर में ये जो ब्लड सर्कुलेशन हो रहा है मल त्याग हो रहा है यह मैं वाणी का उच्चारण कर रहा हूं यह मैं अपने मन से अपने शरीर को कहता हूं कि तुम यह सब करो किंतु ये इंस्ट्रक्शन का पालन करने वाला है कौन तो वह पालन करने वाले यह पंच प्राण है पंच एंजन है फाइव एंजन है हमारे शरीर के भीतर में जो कि यह एक के बाद एक कार्य करते हैं और यह पांचों एंजन में भी यह जो यह अल्टीमेटली तो प्राण रूप जो सुपर एंजन है उसी के विभिन्न विभिन्न वह सब फंक्शंस है तो हमारे शरीर के भीतर में हमारे संपूर्ण शरीर को नियंत्रित करने वाला एंजन या तो मैकेनिज्म है प्राण और अपना मन इस प्राण को आदेश करता है कि हां अभी तुमको यह कार्य करना है अभी यह कार्य करना है और बहुत सारे आदेश जो होते हैं वह सबकॉन्शियस आदेश होते हैं जैसे कि खाना डाइजेस्ट करने का अभी मैं सुबह को ब्रेकफास्ट करके आया तो मैं जब उसका अपनी दांतों से जो मैं उसको चिबा रहा हूं फिर मैं अपने मन को नहीं कहता मन मेरे शरीर को डायरेक्टली नहीं कहता कि अभी इसको डाइजेस्ट करना है जो भी शरीर के भीतर में जा रहा है वो डाइजेस्ट हो जाता है तो क्या वो ऑटोमेटिक होता है ऑटोमेटिक नहीं सबकॉन्शियसली ये जो मन है वो प्राण है इनके बीचे बीच का एक एक ब्रिज है सबकॉन्शियस लेवल पे ये सब इंस्ट्रक्शन उसका आदान प्रदान होता है कुछ-कुछ इंस्ट्रक्शन जो होती है इसको मैं कॉन्शियस लेवल पर देता हूं कुछ-कुछ इंस्ट्रक्शन होती है जिसको कि सबकॉन्शियस लेवल पे देता हूं और कुछ-कुछ इंस्ट्रक्शन होती है जो कि सुपरकॉन्शियस लेवल पे दी जाती है यहां पे ही स्वामी जी ने यह समाधि अवस्था का वर्णन किया है तो यह समाधि अवस्था में स्वामी जी क्या कहते हैं कि माइंड कैन एजिस्ट ऑन ए स्टिल हायर प्लेन यह जो अपना मन है वह एक सर्वोच्च स्टेट पे वो विराजमान हो सकता है सबकॉन्शियस और कॉन्शियस से वोह स्टेट है इसको हम सुपरकॉन्शियस कहते हैं व्हेन द माइंड हैज अटेंड टू दैट स्टेट व्हिच इज कॉल्ड समाधि परफेक्ट कंसंट्रेशन परफेक्ट सुपरकॉन्शियस निस इट गोज बियोंड द लिमिट्स ऑफ रीजन एंड कम्स फेस टू फेस विद फैक्ट्स व्हिच नो इंस्टिंक्ट और रीजन कैन एवर नो जब हम सुपरकॉन्शियस लेवल पे चले जाते हैं तो यह जो वैश्विक एंजन है उसके साथ में हम जुड़ जाते हैं फिलहाल मेरा मन जो है कॉन्शियस लेवल पे मेरे शरीर के भीतर में जो प्राण रूपी एंजन है व्यष्टि एंजन उसके साथ में जुड़ा हुआ है तो यह व्यष्टि एंजिन यह जो मेरा देह है उसको चालित करता है उसको गवन करता है किंतु देयर इज अ कॉस्मिक एंजन कॉस्मिक प्राण और जिस क्षण में सुपरकॉन्शियस लेवल मेरा मन सुपरकॉन्शियस लेवल पर स्थित हो जाएगा यह जो कॉस्मिक एंजीन यह कॉस्मिक समष्टि प्राण के साथ में जुड़ जाएगा और यह समष्टि प्राण के साथ में जुड़कर के जो समष्टि प्राण के साथ में जुड़े हुए स्पेस टाइम मैटर एनर्जी जो कुछ भी है इस विश्व ब्रह्मांड में सबको कंट्रोल कर पाएगा यहां तक कि इसके बाद का टॉपिक स्वामी जी लेते हैं प्राणिक हीलिंग यह टॉपिक एक आएगा प्राणिक हीलिंग में स्वामी जी क्या कहते हैं प्राण के द्वारा हम जो बीमार व्यक्ति है उसको सुस्त कर सकते हैं उसको हम क्योर कर सकते हैं यह कोई चमत्कार या जादू कुछ नहीं है हमारे भीतर में रहे हुए प्राण के द्वारा हम वैश्विक प्राण को कांटेक्ट करेंगे यह तो ऐसा हो गया कि जैसे कि हमारे घर में कोई बीमार है तो हमने डॉक्टर को कहा कि डॉक्टर महाशय आप इस बीमार व्यक्ति को ठीक कर दीजिए और डॉक्टर ने उसको मेडिसिन दिया और यह बीमार जो अपना संबंधी था मित्र था वो क्यों हो गया यहां पर जो डॉक्टर का कार्य करता है हमारे बीच में और पेशेंट के बीच में वह है यह वैश्विक प्राण यह वैश्विक प्राण को हम आदेश करेंगे अपने भीतर में रहे हुए प्राण के माध्यम से वैश्विक प्राण को आदेश करेंगे कि ये बीमार व्यक्ति के प्राण को जाकर के उसकी मरम्मत कर दो वैश्विक प्राण उस बीमार व्यक्ति के प्राण को नियमन करके उसकी बीमारी ठीक कर देगा ये जो बीमारी होती है डिसीज होती है वो प्राण के इंबैलेंस से अपने शरीर में होती है अपने शरीर में जिस तरह से प्राण का बैलेंस मेंटेन करना यह सब स्वामी जी बाद में डिटेल में कहेंगे हम लोग करेंगे ये डिस्कस प्राणिक हीलिंग क्या है तो अभी देखिए कि ये जो टॉपिक स्वामी जी कह रहे हैं प्राणायाम के बारे में तो थिरी हमने समझ ली है कि यह जो मेरे भीतर में प्राण रूपी एंजीन है इस प्राण रूपी एंजन से मैं अपने फेप्स को या तो फिर अपने लंग्स को नियमन करता हूं कंट्रोल करता हूं यह लंग्स जो सांस लेना कुंभक करना रेचक करना यह सब क्रियाएं करेगा इसके माध्यम से यह जो वैश्विक प्राण इसके माध्यम से मेरा मन जो है वह कॉन्शियस से सुपरकॉन्शियस की ओर जाएगा और यह सुपरकॉन्शियस स्टेट में यह वैश्विक प्राण है उसका नियमन करना सीखेगा कंट्रोल करना सीखेगा और इसके माध्यम से हम बाकी सब चीजें कर पाएंगे तो यह हो गया ग्रोस टू सटल यह जो फेसो की गति को नियमन करके यह ग्रोस है यह बड़ी स्थूल गति है किंतु यह स्थूल से सूक्ष्म की ओर की यह यात्रा है देयर आर पर्सन हु कैन ट्रेन देम सेल्व इन सच ए मैनर दैट द बॉडी विल लीव ऑन इवन व्हेन दिस मोशन हैज स्टॉप्ड ऐसे लोग हैं जिन्होंने अपने श्वास प्रश् वास की क्रिया को इस तरह से ल में करके रखे हैं कि यदि श्वास प्रश् वास रुक जाए शरीर परमानेंट कुंभक में चला जाए किंतु फिर भी शरीर जीवित रहेगा क्यों क्योंकि शरीर को जीने के लिए सिर्फ ऑक्सीजन नहीं चाहिए शरीर को जीने के लिए प्राण का बैलेंस चाहिए जब अपने शरीर में प्राण का बैलेंस होगा शरीर को ना ही डिसीज होगा यह जो ज मृत्यु जरा और व्याधि जरा अर्थात की वृद्धावस्था था व्याधि अर्थात की डिसीज और जो मृत्यु अर्थात की डेथ यह तीनों जो है बुढ़ापा आना बीमार होना और मृत्यु होना यह तीनों चीजों से हम बच जाएंगे यदि हम अपने शरीर के भीतर के प्राण को बैलेंस कर पाए स्वामी जी कहते हैं वो ऐसे लोग हैं जिन्होंने अपने को कुंभक करके भी अपने शरीर को बचाने में बचाने की जिनमें सामर्थ्य है रार सम पर्सन हु कैन बरी देम सेल्फ फॉर डेज एंड यट लिव विदाउट ब्रीदिंग ऐसे लोग हैं जिनको कि वह मिट्टी में गाड़ दो किंतु फिर भी कितने ही सालों साल तक वह जीवित रहेंगे यह ठाकुर ने इस तरह का एक उदाहरण दिया था कि भू कैलाश के में भू कैलास बोलकर के एक जगह है वेस्ट बंगाल में कहां पे मुझे पता नहीं वह मैप में देखना होगा किंतु वह है ठाकुर बता रहे थे वहां पर यह लोग खोद काम कर रहे थे एक गु गुा मिली खुदाई करते करते गुफा में जाकर देखा तो एक योगी समाधि स्थ होकर के बैठा था अब यह गुफा तो डट गई थी मिट्टी के भीतर में अर्थात कि वहां पर ना ही पानी ना ही आहार ना ही श्वास लेने की हवा कुछ भी नहीं फिर भी वह समाधि स्त होकर के बैठा था और वह जीवित भी था अभी यह जिन लोगों ने साधु को खोजा होगा योगी को यह लोग बड़े ही जड़ बुद्धि के थे तो कैसे भी करके उसको समा धि में से हश में ले आए उसको शराब पिलाया ना कि मारपीट की ना जो भी किया तो धीरे-धीरे करके जैसे ही वह समाधि में से बाहर आया वैसे ही उसको जो शौक लगा क्योंकि समाधि में से बाहर आने की भी प्रक्रिया है ये इन लोगों ने जो अत्याचारी लोग थे जिस तरह से उनको समाधि में से उनको व्यथित करवाया समाधि में से बाहर ले आए वह इतना क्रूर था कि जैसे ही वह समाधि भंग हुई उसका मृत्यु हो गया तो यह घटना ठाकुर ने स्वयं कथामृत में इसका वर्णन है तो यह अल्टीमेटली पॉसिबल है दूसरा उदाहरण है हमारे पास में यह पहारी बाबा का वह एक कहां पे वह गुफा में रहते थे वह लोग कहते हैं कि खाना खाते हैं कि नहीं खाते पता नहीं इसलिए उनका नाम हुआ था पहारी बाबा जो पवन खाके जीते हैं उनको कहते हैं पहारी बाबा तो ऐसे साधु उनके बारे में वर्णन है ऐसे साधुओं को स्वामी जी ने देखा भी है टू रीच द सटल वी मस्ट टेक द हेल्प ऑफ द ग्रोसर यदि हमको सूक्ष्म को पहुंचना है तो हमको स्थूल की मदद लेनी होगी एंड सो स्लोली ट्रैवल टुवर्ड्स द मोस्ट सटल अंट्स की ओर जाना है जब तक कि हम यह वैश्विक प्राण को पकड़ ना ले अपने हाथों से प्राणायाम रियली मींस कंट्रोलिंग दिस मोशन ऑफ द लंग्स एंड दिस मोशन इज एसोसिएटेड विद द ब्रेथ प्राणायाम का अर्थ है अपने फेफ सों की यह जो फेफड़ों की यह जो गति है यह जो मैकेनिज्म है अपने लंग्स का जिसको फुला करके हम सांस लेते हैं जिसको कि स्टॉप करके कुंभक करते हैं जिसको कि कंप्रेस करके रेचक करते हैं इस स्थूल गति के माध्यम से सक्ष्म प्राण का नियमन करना है एक कहानी स्वामी जी ने बताई थी कि एक राजा ने अपने मंत्री के ऊपर में नाराज होकर के इसको एक बड़े ही लंबे टावर के टॉप फ्लोर जो था उसमें उसको केद कर दिया ग्राउंड प रखा होता तो कैसे भी करके वह जेल तोड़ कर के भाग जाता यह मंत्री होते हैं तो मंत्री लोगों के बहुत सारे ये जो चमचे लोग भी होते हैं पावर जिनके पास में होता है तो होते हैं तो 10 लोग आसपास घूमने वाले तो ग्राउंड फ्लोर पर रखा होता तो किसी ना किसी को वो ब्राइब ब्राइब देकर के पैसा देकर के छूट जाता किंतु टॉप फ्लोर पे उसको बंदी बना कर के रखा है तो अब यह मंत्री भी किंतु बड़ा चालक था वैसे ही तो मंत्री नहीं हुआ था उसने कैसे भी करके अपनी पत्नी को मैसेज किया कि एक काम करो कि एक ये होता है ना एक बग ये जो जिसको कि एक छोटा सा कीट कहते हैं एक छोटा सा कीट लेकर के तुम आओ मेरे पास में फिर इस कीट के साथ में एक पतला रेशम का धागा लेके आना फिर यह धागे के साथ में दूसरा एक धागा ऐसा करके एक लंबा इंस्ट्रक्शन उसने दिया कैसे भी करके दिया तो उसकी पत्नी भी उस समय आ गई उसने कहा कि देखो यह जो ये कीट है उसकी नाक के ऊपर में थोड़ा सा ये गुड़ वगैरह है कुछ उसके नाक के ऊपर में लगा दो तो उसकी सुगंध की वजह से ये कीट जो है सीधा वो जो लंबा ये टावर था ना उसकी दीवाल पे चढ़ना शुरू करेगा तो अभी जैसे ये कीट दीवाल के ऊपर में चढ़ना शुरू करता है तो पत्नी को कहा कि जो पतला सा जो धागा जो है इसके पीट इसके पैरों के साथ में बांध दो अब यह कीट ऊपर चढ़ रहा है चढ़ रहा है टावर बहुत लंबा है उसकी पत्नी तो ऊपर तक नहीं पहुंच पाएगी जेल की दीवार तक वो जेल की जो ये खिड़की होती है वहां तक तो यह कीट के माध्यम से वो पतला सा धागा जो है वह ऊपर जा रहा है जा रहा है कीट जैसे ही वह खिड़की के पास आ गया लंबे टावर के टॉप फ्लोर की तो वैसे ही मंत्री ने क्या किया कीट को हटा कर के वह धागा जो है उसको उसने दीवाल के साथ में वो उसके साथ में बांध दिया फिर कहा यह जो रेशम का पतला धागा जो है उसके साथ में थोड़ा सा एक मोटा धागा बांध दो फिर ये जैसे ही उसकी पत्नी ने पतले धागे के साथ में थोड़ा सा मोटा धागा बांध दिया तो वैसे ही उसने ये पतला धागा धीरे-धीरे धीरे करके खींचना शुरू किया अभी ये जो कीट था ये तो कोई ज्यादा वेट वहन नहीं कर पाएगा बड़ा ही पतला बड़ा ही सूक्ष्म धागा ही वो वहन कर पाएगा तो ये सूक्ष्म धागे में दूसरे धागे को खींचने की शक्ति कितनी होगी बहुत कम तो थोड़ा सा मोटा धागा उसके साथ में बांधना है बहुत ज्यादा बड़ा नहीं तो यह जब थोड़ा सा मोटा धागा बांधा यह फिर मंत्री ने सूक्ष्म धागे को धीरे-धीरे खींच करके थोड़ा सा मोटा धागा ऊपर में ले लिया फिर उसको भी फिर कहा कि ये जो थोड़ा सा मोटा धागा है उसको उसके साथ में अ एक रस्सी बांध दो तो अभी जैसे ही उसकी पत्नी ने रस्सी बांध दी तो यह मोटे धागे की मदद से यह मंत्री ने उस रस्सी को ऊपर खींच लिया अभी रस्सी में इतनी ताकत है कि मंत्री का भार वो वहन कर पाए तो रस्सी को उस उसने वहीं वह सलाखों के साथ में बांध दिया फिर रस्सी की मदद से वह जो लंबा टावर था उसके टॉप फ्लोर से धीरे-धीरे करके वो ग्राउंड फ्लोर पे निकल आया तो ये यहां पे वैसे सूक्ष्म से स्थूल को धरने की बात है किंतु इसी उदाहरण के माध्यम से स्वामी जी कहते हैं कि एक चीज से हम दूसरी चीज को कैसे धरे तो यह हो गया स्थूल से सूक्ष्म को पकड़ने का एक उपाय नॉट दैट ब्रीद इज प्रोड्यूस इट ऑन द कंट्री इट इज प्रोड्यूस ब्रीद अभी यह देखना है कि प्राणायाम क्या करता है प्राणायाम क्या अपनी ये जो सांस लेते हैं सांस निकालते हैं इसकी मदद से क्या प्राण खड़ा होता है अपने शरीर के भीतर में प्राण जीवन प्राण जीवित होता है या हम प्राण ग्रहण करते हैं नहीं एक्चुअली हम जो सांस से जो लेते हैं वोह तो सिर्फ हवा ही लेते हैं वो हम प्राण ग्रहण नहीं करते प्राण के माध्यम से हम हवा को ग्रहण करते हैं नहीं कि हवा के माध्यम से प्राण को ग्रहण करना तो यह जो कंफ्यूजन है कि जब भी प्राणायाम सीखते हैं तो प्राण को अपने शरीर के भीतर में लो प्राण को कुंभक करो प्राण को बाहर निकालो एक्चुअली हवा को ही शरीर के भीतर में लेना है हवा को ही कुंभक करना है हवा का ही रेचक करना है प्राण तो क्या है यह पूरक रेचक कुंभक की साइकिल को जो नियमन करता है वह तो प्राण है तो ये प्राण इज मूविंग द लंग्स द मूवमेंट ऑफ द लंग्स ड्रॉ इन द एयर प्राण जो है वह अपने फेसो की क्रिया को गति को नियमन करता है और यह फेफ सों की गति हवा को भीतर में लेती है सो प्राणायाम इज नॉट ब्रीथिंग बट कंट्रोलिंग दैट मस्कुलर पावर व्हि मूव्स द लंग तो प्राणायाम है वह श्वास उच्छवास की क्रिया नहीं है प्राणायाम है अ अर्थात कि श्वास लेने से हम प्राण को भीतर में नहीं लेते प्राणायाम तो है यह पूरी जो सिस्टम है जो पूरा मैकेनिज्म है पूरक रेचक कुंभक का उसको नियमन करने वाली शक्ति दैट मस्कुलर पावर व्हिच गोज आउट थ्रू द नर्व्स टू द मसल्स एंड फॉर्म देम एंड फ्रॉम देम टू द लंग्स मेकिंग देम मूव इन ए सर्टेन मैनर इज द प्राणा व्हिच वी हैव टू कंट्रोल इन द प्रैक्टिस ऑफ प्राणायाम यह जो हमारे भीतर में जो एंजन है यह जो शक्ति है जो हमारे फेसो को कंट्रोल करती है हमारी डाइजेशन सिस्टम को कंट्रोल करती है हमारा ब्लड सर्कुलेशन कंट्रोल करती है शौ चक्रिया को नियमन करती है वाणी को अंजाम देती है यह जो सब क्रियाओं को कंट्रोल करने वाला एंजीन जो है वो एंजीन को कि हमको धीरे-धीरे करके अपने कंट्रोल में लाना है नियमन में लाना है और उसी को कहते हैं प्राणायाम मेकिंग देम मूव इन अ सर्टेन मैनर इज द प्राणा व्हिच वी हैव टू कंट्रोल इन द प्रैक्टिस ऑफ प्राणायाम बहुत बार ऐसा होता है कि जब नो सिखिया होता है तो उसको गाड़ी चलाने के बारे में ज्यादा कुछ पता नहीं है उसको यह नहीं पता है कि आप गाड़ी को रिवर्स में ले सकते हैं उसको यह नहीं पता है कि गाड़ी को आप फास्ट चला सकते हैं ब्रेक लगा सकते हैं एक्सीलरेटर देकर के फास्ट कर सकते हैं गियर देकर के उसका यह जो ए पेट्रोल इंटेक है इंजन के भीतर में उसको कंट्रोल कर सकते हैं उसको तो सिर्फ इतना पता है कि यह जो व्हील जो होता है उसको यह जो गवर्निंग व्हील जो होता है उसको ऐसा करने से गाड़ी ऐसी जाएगी और ऐसा करने से गाड़ी ऐसी जाएगी इतना ही उसको पता है अर्थात कि प्रॉब्लम क्या है कि गाड़ी के भीतर में जो मैकेनिज्म है जो इंजन है उसमें बहुत सारी कैपेसिटी होती है किंतु यह जो नो सख्या ड्राइवर है उसको अभी तक पता नहीं कि किस तरह से गियर को लगाना है किस तरह से क्लच इस्तेमाल करना है किस तरह से फास्ट करना है स्लो जाना है वह अभी तो सीख रहा है तो वैसे ही अपना यह जो व्यष्टि प्राण है हमारे देह के भीतर में उसमें बहुत सारी कैपेसिटी है हमको पता ही नहीं है यह कैपेसिटी क्या क्या है यह जो भीतर का एंजन है अपने देह को क्या से क्या नहीं कर सकता चाहे तो अपने देह को सुपरमैन बना देगा यदि प्राण को हम ठीक से नियमन कर ले प्राण को कंट्रोल कर ले तो यह प्राण बिना आहार के भी शरीर को टिका पाएगा यदि हम वैश्विक प्राण को कंट्रोल में ले आए तो हम सूर्य चंद्र नक्षत्रों की गति को परिवर्तित कर देंगे जो कि हमको जादू चमत्कार जैसा लगता है नो सख्या होगा वो किसी वो जो f1 फार्मूला रेस होती है ना उसका ड्राइवर जो कैसे वो डेरिंग वाले होते हैं वैसे वो मने 100 किलोमीटर पर ववर 150 किमी पर आवर की स्पीड से वो गाड़ी को भगाते हैं जो नौ सख्या होता है बेचारा 10 किमी ना कि 15 किमी पर आवर की स्पीड में ही वो थोड़ा सा डर जाता है अरे भाई बहुत जल्दी फास्ट जा रही है बहुत फास्ट जा रही है यदि रास्ते में कोई आ गया मुझे ब्रेक लगाना नहीं आया तो क्या होगा एक्सीडेंट हो जाएगा तो हम लोग ये सब नौ सखे ड्राइवर जैसे हैं और ये भगवान कृष्ण है ना कि फिर ये जो बड़े बड़े योगी थे वे लोग f1 फार्मूला रेसिंग ड्राइवर जैसे हैं वो अपने देह के साथ में इस विश्व के साथ में जो चाहे वह कर सकते हैं उनके जो वैश्विक प्राण और दैहिक प्राण दोनों उनके परफेक्ट कंट्रोल में है तो हम तो अभी-अभी हमको तो यह पता चला है कि हां भाई प्राण रूपी एक इंजन है जिसके माध्यम से हम अपना हार्ट है अपना ब्लड सर्कुलेशन है अपना डाइजेशन है मल त्याग है वाणी है सबको हम अंजाम दे सकते सकते हैं अपने लंग्स की जो एक्शन है अपना हार्ट जो है सबको कंट्रोल कर सकते हैं मान लीजिए कि सही सही में मुझे प्राणायाम की क्रिया प्राणायाम आ गया प्राणायाम के माध्यम से प्राण को कंट्रोल करना सीख लिया तो मान लीजिए कि यदि ऐसा डिटेक्ट हुआ कि हां मेरे आर्टेरिया ब्लॉकेज है बायपास सर्जरी करनी पड़ेगी तो मैं सिर्फ प्राण की एक्शन के माध्यम से ही जो बायपास जो जो आर्टरी ब्लॉकेज है उसको मैं हटा सकता हूं वहां जो प्लेक जमा हो गया है वह जो कोलेस्ट्रोल जमा हो गया है उसको मैं सिर्फ प्राण की शक्ति से ही उसको क्लीन कर दे सकता हूं यदि मुझे बुखार आया है तो प्राण की शक्ति से ही जो प्राण का इंबैलेंस हो गया है तो प्राण के इंबैलेंस को बैलेंस करके ही मैं अपने को क्योर कर सकता हूं प्राणिक हीलिंग और फिर लगता है कि रास्ते से जा रहा हूं एकाएक वो जो स्वामी जी की कहानी है ना कि राज स्वामी जी और वह मिसेस वो जो इटी स्टडी और मिस मलर ये तीन लोग रास्ते से जा रहे थे लंडन में एक बेल आ गया जोर-जोर से दौड़ता हुआ और बेल के सिंग जो होते हैं वह तो बड़े ही पावरफुल होते हैं धारदार होते हैं जिसको लगे वह तो सीधा गया परलोक में तो ये इट स्टडी तो भाग खड़ा हुआ और यह मिस मलर बेचारी वो जो लेडीज के कपड़े तो ऐसे है कि दौड़ भी नहीं सकते उसमें तो और फिर वोह ब्रिटेन में उस समय विक्टोरिया के समय के वो जो ड्रेस उसका फोटोग्राफ जद देखा होगा ये जैसे कि ये जोसेफाइन मैक्लाउड के और ये बेटी ले गेट के सब फोटोग्राफ यदि आपने देखे होंगे तो पता होगा कि किस तरह के ड्रेस वो विक्टोरियन लेडीज पहना करती थी उसमें तो दौड़ना भी संभव नहीं है तो अभी स्वामी जी सोचे कि अभी मैं जद दौड़ के भाग गया तो मिस मलर का तो हो गया मृत्यु तो वहां प खड़े रहे और फिर वो साहस से कि जदी बुल आता है तो मैं उसको उसके सिंग से धरू किंतु देखिए कि यह जो बेल दौड़ता दौड़ता आया स्वामी जी के सामने एकाएक देखा कि अरे नहीं स्वामी जी के ऊपर में अटैक नहीं करना है फिर वही से वो मुड़ कर के चला गया ये जो फेस द ब्रूट है ये फेस द ब्रूट के पीछे मैकेनिज्म क्या है हम तो कहते हैं कि हां ठीक है जो राक्षस आता है आपके सामने उसका सामना करो जो डर जो होते हैं ना ये जो राक्षस होते हैं जो पशु होते हैं शिकारी पशु ये लोग डर को भांप लेते हैं हमारे भीतर में डर है समझ जाते हैं और जैसे ही भीतर में डर देखेंगे और जोर से पीछे हमारे आएंगे किंतु जैसे ही हमारे भीतर में ये साहस शौर्य वीर्य को देखेंगे वे लोग भी थोड़े से थम जाएंगे थोड़ा सा रुक जाएंगे कि डर क्यों नहीं रहा है मामला क्या है क्या इसके पास में छुपा हुआ हथियार है क्या क्या ये ट्रैप बना कर के रखा है हमको पकड़ने के लिए क्या है यह तो ये पशु भी इससे चौक जाते हैं तो ये मैकेनिज्म क्या है इसके पीछे का इसके पीछे का मैकेनिज्म है प्राण प्राण को यदि हमने गवर्न किया तो हमारे भीतर वाला प्राण सीधे कॉस्मिक प्राण को पकड़ता है कॉस्मिक प्राण फिर यह पशु के भीतर वाले प्राण को पकड़ता है पशु के मन में डर खड़ा करता है पशु के मन में संदेह खड़ा करता है और यह पशु भी वहां से मुड़ कर के चला जाता है तो ये पूरा मैकेनिज्म है अभी तक हमने देखा कि ये गाड़ी बाहर से देखी ये गाड़ी स्पीड से जाती है तो कभी रिवर्स जाती है कभी लेफ्ट टन लेती है तो कभी यू टन लेती है तो कभी ये वो उसके जो गियर है उसको यह करता है तो अभी तक हमने गाड़ी को बाहर से देखा अभी ये जो गाड़ी के भीतर का जो इंजन है भीतर का जो मैकेनिज्म है वो स्वामी जी समझा रहे हैं सभी चीजें सभी पदार्थ आकाश के बने हैं और आकाश को प्राण कंट्रोल कर सकता है यदि हमने प्राण को कंट्रोल कर दिया तो सभी चीजों के ऊपर में हमारा विजय प्राप्त होना अवश्य संभवी है ये जो वर्ल्ड पार्लिमेंट ऑफ रिलीजन में स्वामी जी ने जो प्रवचन दिया सिस्टर्स एंड ब्रदर्स ऑफ अमेरिका तो यह जो उन लोगों के ऊपर में जो असर हुई कि अरे यह तो जैसे कि हमको अपने खुद के आत्मीय मान कर के संबोधन कर रहा है बाकी जितने भी धर्म गुरु है वो किसी ईश्वर को इवोक करेंगे ना कि फिर क्या सब बड़ी-बड़ी पमप स बातें करेंगे हाइपोक्रिटिकल सब यह सब हवाहवा में कहेंगे यहां पे एक ऐसा व्यक्ति है जिनको हम पहचानते भी नहीं है किंतु प्रथम ही सूत्र में उसने हमारे हृदय को झंझर करके रख दिया है तो यह स्वामी जी प्रथम सेंटेंस में ही उनके हृदय को कैसे स्पर्श कर पाए यह प्राण के माध्यम से ये ऑडियंस के भीतर में भी प्राण है स्वामी जी जी के भीतर में भी प्राण है और कॉस्मिक प्राण से सभी के तंतु बंधे हुए हैं एक दूसरे के साथ में वो जो ठाकुर कहते हैं ना लक्ष्मी दीदी ठाकुर को कहती है एक बार कि अभी तो मुझे फिर से आना नहीं है पृथ्वी पे तो ठाकुर ने कहा जाओगी कहां पे कोलोमर दोल यदि ये कलमी अर्थात कि ये जो कमल के फूल होते हैं पानी के भीतर में जो उगते हैं लीली जिसको कहते हैं उनकी जड़ जो होती है सब एक दूसरे के साथ में बदी होती है एकटा के टान ले सुबाई टेने आश में एक फूल को आप खींचें तो जितने भी फूल है सब जड़े तो बंधी हुई है एक फूल को खींचने से सभी फूल खींच के चले आएंगे यहां पे ऐसा है अपने भीतर के प्राण को नियमन कर लिया उसके अर्थ कि हम कॉस्मिक प्राण को कांटेक्ट कर सकते हैं और कॉस्मिक प्राण के माध्यम से दूसरों के भीतर में जितने भी प्राण है उनको भी कंट्रोल कर सकते हैं यह टॉपिक भी स्वामी जी बाद में कवर करेंगे कि किस तरह से जो बड़े-बड़े पॉलिटिशियन होते हैं बड़े-बड़े ओरेट होते हैं लोगों को किस तरह से प्रभावित कर देते हैं ये लोगों को प्रभावित करने की शक्ति भी प्राण से आती है लोगों को क्योर करने की शक्ति भी प्राण से आती है यह इतना यह सुपर पावर है प्राण रूपी साइंस कि इसको जितना हम समझे उतना मुश्किल है मतलब उतना ही हमारी आंखें खुलती जाएगी कि अबे अभी तक तो हमको क्या यह मैकेनिज्म ही नहीं पता था हम लोग वैसे वेदांत में बहुत सारी बातें करते हैं फिर यह हम आयुर्वेद वगैरह सीखते हैं उसके बारे में जानते हैं धनुर्वेद में हम शस्त्रों का अभ्यास करते हैं किंतु इस सबके पीछे प्राण रूपी जो मैकेनिज्म है वह तो हमको पता ही नहीं है जैसे ही इस मैकेनिज्म को समझ लिया इस सृष्टि के जितने भी रहस्य है हमारे सामने उद्घाटित हो गए व्हेन द प्राणा हैज बिकम कंट्रोल्ड धन वि शल इमीडीएटली फाइंड दैट ऑल दी अदर एक्शंस ऑफ द प्राणा इन द बॉडी विल स्लोली कम अंडर कंट्रोल जैसे ही हमने प्राण को कंट्रोल करना सीख लिया पता चलेगा कि शरीर के भीतर में जितनी भी एक्शन है यह ब्लड सर्कुलेशन है हृदय का हार्ट बीट्स है डाइजेशन सिस्टम है यह नर्वस सिस्टम जो है ये एंजाइम्स एंड ये जो यह सब है सब कुछ हमारे कंट्रोल में आ जाएगा आई माइसेल्फ हैव सीन मैन हु हैव कंट्रोल्ड ऑलमोस्ट एवरी मसल ऑफ द बॉडी मैंने अपनी नजरों से ऐसे लोगों को देखा है जिन्होंने अपने शरीर के सभी अवयवों पर नियमन पा लिया है एंड व्हाई नॉट और क्यों नहीं इफ आई हैव कंट्रोल ओवर सर्टेन मसल्स व्हाई नॉट ओवर एवरी मसल एंड नर्व ऑफ दी बॉडी यदि मुझे यह हाथ हिलाने की क्षमता मेरे पास में है तो यह जद मैं अपने हाथ को अपनी मर्जी के साथ से हिला सकता हूं अपनी मर्जी के अनुसार कार्य करवा सकता हूं तो मैं हृदय को ऐसा क्यों नहीं कर सकता मैं मैं अपने लंग्स के सा साथ में ऐसा क्यों नहीं कर सकता इंटेस्टाइन के साथ में या किडनी के साथ में या लिवर के साथ में मैं ऐसा क्यों नहीं कर सकता यदि मैं अपना हाथ को आदेश दूंगा कि इस वस्तु को पकड़ कर के मुझे मेरे मुंह में आहार करने के लिए प्रदान करो खाना रोटी है तो रोटी को ग्रहण करो उठा कर के मेरे मुंह में उसको प्रदान करो यदि मैं अपने हाथ को यह आदेश दे सकता हूं एक पेन उठा कर के मेरे लिए यह ये सब लिखो ये ये आदेश मैं अपने हाथ को दे सकता हूं पैर को मैं कह सकता हूं कि मुझे यहां से जाकर के बेलर मट जाना है तो उसके लिए जहां जितना जाना पड़े चलना पड़े गाड़ी में बैठना पड़े गाड़ी में उतर गाड़ी में से उतरना पड़े यह सब तुम करो तो यह आदेश पैरों को दे सकता हूं तो यही आदेश में अपने लंग्स को अपने हार्ट को क्यों नहीं दे सकता बिल्कुल दे सकता हूं व्हाट इंपॉसिबल इज देयर इसमें क्या असंभव है एट प्रेजेंट द कंट्रोल इज लॉस्ट एंड द मोशन हैज बिकम ऑटोमेटिक फिलहाल ऐसा है कि यह कंट्रोल हम हमने खो दिया है और यह जो क्रिया प्रक्रिया ऑटोमेटिक या तो सबकॉन्शियस हो गई है वी कैन नॉट मूव अवर इयर्स एट विल बट वी नो दैट एनिमल्स कैन अपने कानों को हम अपनी इच्छा से हिला नहीं सकते किंतु हाथी को देखिए हाथी जब वो हाथी अपनी इच्छा से अपने कानों को हिला सकता है वो जैसे कि वह मक्खी को भगाने के लिए इसका इस्तेमाल कर सकता है तो यह पशु यदि अपने कानों को अपनी इच्छा के अनुसार हिला पाएंगे तो हम क्यों नहीं वी हैव नॉट दैट पावर बिकॉज वी डू नॉट एक्सरसाइज इट हमारे पास वह शक्ति नहीं क्योंकि हम इसका इस्तेमाल नहीं करते दिस इज व्हाट इज कॉल्ड अटेविया म ये जो शक्तियों का खोना इसको कहते हैं एट विज्म जैसे कि हम बंदर थे पेड़ के ऊपर में रहते थे तो हमारी पूंछ थी य पूंछ की मदद से एक के बाद एक डालियों को पकड़ करके हम जंप लगाया करते थे उसके बाद में जमीन पर चलना शुरू किया पूंछ की आवश्यकता नहीं रही तो पूंछ चली गई किंतु ठाकुर के बारे में हमको पता है जब महावीर भाव से साधना करते थे महावीर हनुमान की तो उस समय उनकी पूंछ भी निकलना शुरू हो गई थी तो इवोल्यूशन ने हमको जो जो शक्तियां दी है उस शक्तियों का हम इस्तेमाल नहीं करते बोलकर के वह सबकॉन्शियस लेवल पे चली जाती है मन के सबकॉन्शियस पार्ट से इंस्ट्रक्शन पाती है तो यदि अभी जैसे कि मान लीजिए कि हमारे घर में जैसे मान लीजिए मैं बहुत बड़ी कंपनी का सीईओ हूं तो अभी मेरी कंपनी में मान लीजिए 101000 लोग काम करते हैं तो अभी यह तो पॉसिबल नहीं है कि एवरी क्लार्क एवरी लो लेवल एंप्लॉई जो है उसको जाकर के मैं इंस्ट्रक्शन दूं कि यहां पे जाकर के इस तरह से क्लीन करना है यहां पे इस तरह से झाड़ू पोंछा लगाना है यह प्रिंट आउट ले रहे हो तो प्रिंटर का सेटिंग यह सब करना है 101 हज लोगों की कंपनी के सीईओ के पास में यह सब थोड़ी ना टाइम रहता है कि वह कौन सा क्लर्क कौन सा जनिटर कौन सा साफ सफाई करने वाला वाला क्या कर रहा है वो तो क्या करेगा एक वो जो वाइस प्रेसिडेंट है या तो फिर डिपार्टमेंट इंचार्ज है उनका अपॉइंटमेंट कर देगा अी यह डिपार्टमेंट इंचार्ज जो है वो ठीक करेगा कि उसके कार्य में उसके डिपार्टमेंट में क्या होना है सीईओ सिर्फ डिपार्टमेंट इंचार्ज के साथ में ही बात करेगा कोई मार्केटिंग इंचार्ज है कोई प्रोडक्शन इंचार्ज है कोई मैन्युफैक्चरिंग इंचार्ज है कोई यह फिर वो एडवर्टाइजमेंट इंचार्ज है तो वो इंचार्ज जो भी होता हैं उनके साथ में बात करके कंपनी को चलाता है वो जो इंचार्ज के अंडर में जो एंप्लॉई आते हैं उनके साथ में बात नहीं करता तो धीरे-धीरे ऐसा होगा कि जो लो लेवल एंप्लॉई है उनका सीईओ के साथ में संपर्क ही पूरा खत्म हो जाएगा वो पहचानते भी नहीं है कि सीईओ कौन है नाम देखा होगा चेहरा देखा होगा उसके साथ में पर्सनल कभी बात नहीं हुई किंतु यह सीईओ यदि चाहे तो वो पार्टिकुलर डिपार्टमेंट में जाकर के पार्टिकुलर एंप्लॉई के साथ में बात कर सकता है उसको वो कमांड दे सकता है एज अ सीईओ उसके पास में वो पावर है बस बात वही है कि वह दूसरी बड़ी-बड़ी चीजों के साथ में वह ऐसा बिजी है कोई सेलिब्रिटी आती है कोई फंक्शन में जाना है कोई मीटिंग में जाना है ट्रेवलिंग करना है उसमें इतना बिजी रहता है कि लो लेवल एंप्लॉई के साथ में इंटरेक्ट करने का उसके पास में समय नहीं रहता तो वैसे ही अपना कॉन्शियस लेवल माइंड जो है वह बाकी जगत को लेके इतना बिजी है कि फिर वह सबकॉन्शियस लेवल पे बहुत सारे फंक्शन हमने डेलीगेट कर दिए हैं ये डाइजेशन सिस्टम जो है ब्लड सर्कुलेशन सिस्टम जो है नर्व नर्वस सिस्टम जो है यह जितनी भी स सिस्टम्स अपने शरीर में है उसको हमने सबकॉन्शियस लेवल पर डेलीगेट कर दी है उसका अर्थ यह नहीं कि हम चाहे तो फिर उसको कॉन्शियस कंट्रोल के भीतर में ना ला पाए क्योंकि मन के पास में वह शक्ति है तो जिस तरह से मन इस सबकॉन्शियस फंक्शंस को यह कॉन्शियस लेवल पे ले आ सकता है वैसे ही मन सुपरकॉन्शियस लेवल पे उठ करर के सुपरकॉन्शियस जितने भी फंक्शंस है उसको भी मैनेज कर सकता है मन कौन से लेवल पे है वो बात है सुपरकॉन्शियस को कॉन्शियस लेवल पे ले आना है या कॉन्शियस को सुपरकॉन्शियस पे ले जाना है या तो सबकॉन्शियस को कॉन्शियस पे ले जाना है यह सब अपने मन के द्वारा ये गियर चेंज जिसको कहते हैं वह गियर चेंज हम कर सकते हैं फंक्शनालिस को एक के बाद एक अपने कंट्रोल में ला सकते हैं यहां पे स्वामी जी कहते हैं कि मैंने अपनी नजरों से ऐसे लोगों को देखा है जो कि अपने शरीर के प्रत्येक मसल को अपने कंट्रोल में ला सकते हैं तो इस तरह के दो उदाहरण तो बड़े ही स्पष्ट है एक तो है ठाकुर दूसरे है पहारी बाबा ठाकुर के बारे में हमने देखा है कि जब वह गोपी भाव से मधुर भाव की साधना कर रहे थे तो स्त्रियों की तरह उनके शरीर में भी वह मासिक आना शुरू हो गया था तो यह सब कहानियां हमने लीला प्रसंग में पढ़ी है जैसे जिससे जिस तरह की साधना ठाकुर करते थे उस तरह के विकार उस तरह की अ चेंजेज उनके शरीर में आते थे जिसको कि हम वैसे असंभव मानते हैं यह कैसे हो सकता है किंतु फिर भी ठाकुर के शरीर में वह सब क्रियाएं दिखाई दे रही थी तो यह अपने मन के द्वारा अपने शरीर के ऐसे फंक्शंस पर कंट्रोल चालू करना जो कि हमको पहली नजर से अस्वाभाविक या असंभव दिखते हो वो भी संभव है वो जो काश्मीर की वो कहानी कि जहां पर स्वामी जी को बुलाया गया कि एक व्यक्ति के ऊपर में भूत का आवेश हुआ है तो स्वामी जी ने जाकर के देखा कि वो जैसे एकदम वो जड़ होकर के बैठा था और फिर एक व्यक्ति ने जलता हुआ कोयला उसके हाथ में रख दिया तो स्वामी जी ने कहा पहले तो मैं टेस्ट करता हूं ये लोग नाटक तो नहीं कर रहे जलता कोयला कहते हैं किंतु सिर्फ उसके ऊपर में कुछ चालाकी तो नहीं स्वामी जी ने जैसे ही उसको स्पर्श किया देखने के लिए कि कितना गर्म है वैसे ही उनका हाथ जल गया अभी ऐसा मतलब गर्म कोयला उस व्यक्ति के हाथ में रखा उसको कुछ नहीं हो रहा है तो स्वामी जी कहते हैं कि अभी मैं क्या करूं मैं कैसे उसको बचाओ बस मैंने उसके सर पर थोड़ा सा जप कर लिया और मैं चलाया और हुआ भी ऐसा ठाकुर की ऐसी इच्छा कि वो आदमी जप करने से ही ठीक हो गया तो बस उसके बाद में गांव वालों ने तो स्वामी जी को जो सर के ऊपर में चढ़ा दिया है तो यह सब भी संभव है किंतु इसके पीछे की जो इंजन है वो इंजन है प्राण अभी एक आदमी ठीक करता है कि मुझे कार को लेकर के कहां पर जाना है कार को लेकर के मुझे इस शहर में जाना है उस शहर में जाना है कार के साथ में जो उसका जो यूटिलिटी है वह एक व्यक्ति ठीक करता है उसका ड्राइवर ठीक करता है किंतु कार खुद जो जिस मैकेनिज्म से चलती है जिस इंजन के द्वारा जिस गियर और क्लच बॉक्स के द्वारा गियर बॉक्स के द्वारा कार चलती है वो तो उसके भीतर का एंजन ठीक करता है वैसे ही इस देह के माध्यम से इस शरीर के माध्यम से हम ईश्वर की आराधना करें ना कि फिर इसको बुरी संगत में डाल कर के बुरे कार्य करें वह सब हम ठीक कर र हमारे मन को ठीक करना है हमारे विल पावर को ठीक करना है स्वामी जी का जो वेदांत है बेसिकली मन की शक्तियां विल पावर की शक्तियों के ऊपर में बेज है किंतु इससे थोड़ा सा भीतर में जाए तो यह मन है या विल पावर है एक्चुअली कैसे काम करता है भीतर का सीक्रेट क्या है सीक्रेट एंजन क्या है तो वो एंजन है प्राण ये जो गियर बॉक्स कहो ना कि ये क्लच बॉक्स कहो ये सब इंटरनल कंबन एंजन यह है अपना प्राण इस प्राण के माध्यम से ही अपना विल पावर अपना सारा कार्य समाप्त करता है अगेन वी नो दैट मोशन व्हिच हैज बिकम लेटेंट कैन बी ब्रॉट बैक टू मेनिफेस्टेशन ऐसी जो अपने शरीर की क्रियाएं जिसके ऊपर में से हमने संतुलन खो बैठा है उसको हम अपने कंट्रोल में ला सकते हैं बाय हार्ड वर्क एंड प्रैक्टिस सर्टेन मोशंस ऑफ द बॉडी व्हिच आर ऑलमोस्ट डोरम कैन बी ब्रॉट बैक अंडर परफेक्ट कंट्रोल मेहनत करके और प्रयास करके अपने शरीर की ऐसी सब क्रियाए जिसके ऊपर में से हमने संतुलन अपने कंट्रोल खो बैठा है अपने कंट्रोल में ला सकते हैं जैसे कि अपना हार्ट बीट है चाहूं तो हार्ट बीट को बढ़ा सकता हूं उसको कम कर सकता हूं रोक भी सकता हूं रीजनिंग धस वी फाइंड देयर इज नो इंपॉसिबल इवन ऑन द अदर हैंड एवरी प्रोब बिलिटी दैट ईच पार्ट ऑफ द बॉडी कैन बी ब्रोट अंडर परफेक्ट कंट्रोल शरीर के जितने भी अंग है अवयव है सबको संपूर्ण रूप से अपने कंट्रोल में ला सकते हैं ऐसा होने से नहीं हमको कभी पेट में दर्द की गोली लेनी पड़ेगी ही हार्ट में दर्द हो रहा है उसकी गोली लेनी पड़ेगी नहीं इनडाइजेशन की गोली लेनी पड़ेगी ही अस्थमा की लेनी पड़ेगी क्यों क्योंकि हार्ट लीवर लंग्स हा ये सब कुछ अपने अपने कंट्रोल में आ जाएगा सस योगी डज थ्रू प्राणायाम प्राणायाम के माध्यम से योगी यह सब करता है पर हैप्स सम ऑफ यू हैव रेड दैट इन प्राणायाम व्हेन ड्राइंग इन ब्रेथ यू मस्ट फिल योर ल बॉडी विद प्राण आपने शायद ऐसा पढ़ा होगा किसी-किसी किताबों में किसी-किसी टीचर के पास में सुना होगा कि जब आप पूरक करते हैं सांस भीतर में लेते हैं अपने पूरे शरीर को प्राण से भर दो इन द इंग्लिश ट्रांसलेशंस प्राणा इज गिवन इज ब्रेथ एंड यू आर इंक्लाइंड टू आस्क हाउ दैट कैन बी डन अभी इन इंग्लिश ट्रांसलेशन जो होता है किताबों का उसमें लिखा है कि अपने पूरे शरीर को हवा से भर दो तो आप पूछेंगे कि यह कैसा संभव है अपने पूरे शरीर को हवा हवा तो सिर्फ अपने लंग्स में ही जाएगी ना ही वह अपने इंटेस्टाइन में जाएगी ना ही वह अपने लिवर में जाएगी ना ही अपने हार्ट में जाएगी ना ही अपने हाथ पैर में जाएगी ना ही अपने ब्रेन में जाएगी तो यह हवा से अपने पूरे शरीर को कैसे से भर दो तो स्वामी जी कहते हैं कि इंग्लिश ट्रांसलेशन की यह गलती है द फॉल्ट इज विद द ट्रांसलेटर यह ट्रांसलेटर की गलती है एवरी पार्ट ऑफ द बॉडी कैन बी फिल्ड विथ प्राणा दिस वाइटल फोर्स एंड व्हेन यू आर एबल टू डू दैट यू कैन कंट्रोल द होल बॉडी अपने पूरे शरीर को सांस लेने की एक्शन के माध्यम से यह एक लीवर है जैसे ही मैंने लीवर को एक पहले गियर में से दूसरे गियर में डाला तो यह जो गियर बॉक्स होता है वह कैसे पूरे एंजन को वो कंट्रोल करता है तो वोह तो एक क्रिया मात्र है एक इंस्ट्रक्शन मात्र है वह जो हैंडल को घुमाना तो वैसे ही सांस भीतर में लेना वो तो सिर्फ एक एक्शन मात्र है एक इंस्ट्रक्शन मात्र है जिसके माध्यम से हम प्राण को आदेश देते हैं कि पूरे शरीर में व्याप्त हो जाओ पूरे शरीर में फैलना किसको है हवा को नहीं हवा तो सिर्फ अपने लंग्स में ही जाएगी इससे बाहर नहीं जाएगी अपने पूरे शरीर में फैलना तो है प्राण को पूरे शरीर को कवर करना तो प्राण को है यह चेतन शक्ति दिस वाइटल फोर्स दिस लाइफ फोर्स एंड व्हेन यू आर एबल टू डू दैट जब हम यह करना सीख लेंगे हम अपने पूरे शरीर को कंट्रोल करना सीख लेंगे तो यह टॉपिक यहां पर होता है समाप्त इसके बाद का टॉपिक जो है वह है प्राणिक हीलिंग तो उसको हम अभी कल देखेंगे ओम शांति शांति शांति हरि ओ तस्त श्री राम कृष्णर्पण मस्तु व जो इंग्लिश में कहावत है वेर द एंजल फयर टू ट्रीड देर फलस रश ब्लाइंड जोक बड़े बड़े विद्वान लोग जिस टॉपिक को हाथ में लेने से डरते मूर्ख लोग उसको पहले पकड़ लेते अच्छा अय के बारे में जो है देखिए ठाकुर सबसे बड़ा उदाहरण है स्वामी जी जब सबसे पहले ठाकुर के पास आए थे ठाकुर ने वैसे ही उनके मन के भीतर में झांक कर के उनका पास्ट वर्तमान फ्यूचर सब कुछ देख लिया था तो यह तो प्राण की शक्ति के माध्यम से ही संभव था किंतु यही ठाकुर को जब हृदय ने मनाया कि आप एक काम कीजिए मामा की आप मां के पास में से मां काली के पास में से कुछ सिद्धाई मांगिए कुछ सिद्धि प्राप्त कीजिए तो ठाकुर मां को कहने को गए मां अभी हृदय कहता है कुछ सिद्धि दे दो तो मां ने उनको क्या दिखा दिया मां काली ने कि एक बूढ़ी वैश्या है पीछे फिर कर के वह शौच करती है तो ठाकुर इतने नाराज हो गए जो नाराज होकर के हृदय के पास जाकर के झगड़ करके कहते कि तुम्हारी वजह से मुझे ऐसा विभ स दृश्य देखना पड़ा तो देखिए कि ठाकुर ने अपनी प्राण की शक्ति को लिवरेज किया था यहां पर देखिए दो बात है एक तो है कि ड्राइवर है और इंजन है राइट ड्राइवर क्या करता है ड्राइवर डेस्टिनेशन ठीक करता है इंजन सिर्फ गाड़ी को चलाता है वो मैकेनिज्म है मशीन लेवल पे ये जो हम प्रोग्रामिंग की लैंग्वेज जो होती है ना हम कंप्यूटर को यह माउस चला करके आदेश देते हैं कि यह फंट है उसको बड़ी कर दो बोल्ड कर दो या कलर चेंज कर दो तो यह तो बड़ा ही एक इंटरेक्ट माध्यम है किंतु इसके पीछे जो कोड रन होता है वो कोड फिर वो फंट को बोल्ड करता है या कलर चेंज करता है वो मशीन लेवल इस्ट इशन है तो यहां पर प्राण जो है वो मशीन लेवल इंस्ट्रक्शन है जो कि हम चमत्कार जैसे दिखते हैं ठाकुर ने स्वामी जी के हृदय में झांका हमको तो वेदांत यही कहता है कि ठाकुर के पास में वोह शक्ति थी कि स्वामी जी का जो जिसके भी संस्कार चेंज कर ते स्वामी जी का खुद का उदाहरण काली महाराज का काली महाराज का भक्ति मार्ग लेकर के जा रहे थे एकाएक स्वामी जी को स्पर्श किया और भक्ति में से ज्ञान में उनका मन परिवर्तित हो गया तो यह सब शक्तियों का प्रयोग है तो शक्ति है वह पता है शक्ति कैसे प्राप्त करनी है वह पता है किंतु शक्ति एक्चुअली मशीन लेवल पर कैसे काम करती है वह समझाने वाला यह प्राण का विज्ञान है तो यहां पर दो डिस्टिंक्शन है एक तो है वेदांत वेदांत इज अ हायर लेवल थिंकिंग जो कि डिटरमाइंड करता है कि शक्ति प्रयोग क्या है शक्ति का किस तरह से प्रयोग होना चाहिए शक्तियों को प्राप्त किस तरह से करना है प्राप्त करना है सत्य और ब्रह्मचर्य से ठाकुर ने कहा कि कर्म ज्ञान भक्ति ध्यान यह चार साधनाएं हैं चार योग है उनके माध्यम से आप शक्तियों को प्राप्त कर सकते हैं तो वह शक्ति प्राप्त कैसे की जाए शक्ति का प्रयोग किस तरह से किया जाए शक्ति का प्रयोग क्या एथिकल है अन एथिकल है वह सब वेदांत बताता है और शक्ति एक्चुअली मशीन लेवल पे इंजन लेवल पर कैसे कार्य करती है वह प्राणायाम का विज्ञान बताता है अभी जद प्रश्न यह है कि शक्ति प्राप्त करके उसको किस तरह से लिवरेज की जाए किस तरह से उसको अपने कार्य में लगा दिया जाए तो वोह वेदांत हमको बड़ा ही स्पष्ट रूप से कहती है कि आध्यात्मिक साधना और आध्यात्मिक साधना में सहाय यह दो करने के लिए आप शक्तियों का इस्तेमाल कर सकते हैं किंतु वैशक भोग प्राप्त करने के लिए या फिर दूसरों को वैशक भोग की प्राप्ति करवाने के लिए हम शक्ति का प्रयोग योग नहीं कर सकते वह अन एथिकल है उसके दुष्परिणाम आ सकते हैं कर्म के बंधन में हम और ज्यादा फंसते जाएंगे तो यह मामला बड़ा क्लियर है वेदांत हमको बताता है कि शक्ति क्या है शक्ति का प्रयोग एथिकल प्रयोग क्या है अन एथिकल प्रयोग क्या है और प्राणायाम एक्चुअल मैकेनिज्म है शक्ति व्यवहार का शक्ति का इस्तेमाल करने का अभी वेदांत की दृष्टि से देखिए कि ठाकुर ने अपनी शक्तियों को कैसे लिवरे किया था जो भी उनके पास में आता था उनका अंतर मन में झांक कर के उनकी क्या बाधाएं हैं शी ठाकुर समझ लेते थे इसकी यह यहां पर अंतराय है इसका यहां पर अंतराय है और शक्ति प्रयोग करके ठाकुर उनके अंतराय दूर कर दिया करते थे यह हम बहुत सारे उदाहरण के माध्यम से देखा है वो तो एक है दूसरा कि देखिए कि तंत्र साधना के समय ठाकुर ने कैसा संयम अपने पर बरता था एक नग्न स्त्री की गोद में जाकर के बैठ कर के जप करने को भैरवी ब्राह्मणी ने ठाकुर को कहा था तो वो भी ठाकुर जाकर के मां का नाम लेकर के बैठ गए और जैसे ही बैठ करर के जप करने का प्रारंभ किया वैसे ही उनका मन ईश्वरीय भाव में पूरा निमग्न हो गया तो यह सब शक्तियों का प्रयोग है ठाकुर कहते हैं जिस पेड़ के नीचे बैठ कर के मैं तपस्या किया करता था उस पेड़ के पत्ते झुलस जाते थे हनुमान भाव की साधना करता था तो वो पूंछ चली आती थी तो ये शक्तियों का प्रयोग कैसे किया जाए अपने ऊपर में और दूसरों के ऊपर में तो वह आध्यात्मिक साधना के माध्यम से मान लीजिए एक बहुत अच्छा टीचर है तो टीचर के पास में जद यह शक्तियां होती है और सिर्फ यह माने योगिक टीचर या वेदांत का टीचर नहीं मैथमेटिक्स सिखाता है भारत देश के यदि भारत देश का उत्थान करना है उसके लिए शक्ति का प्रयोग कैसे किया जाए यदि यह प्रश्न हो तो हम लोग सोचेंगे हमको मिलिटरी पावर चाहिए हमको इकोनॉमिकल पावर चाहिए हमको ये पॉलिटिकल पावर चाहिए यह चाहिए अपना इंफ्रास्ट्रक्चर होना चाहिए जस्टिस सिस्टम ठीक से कार्य करनी चाहिए यह सब चीजों में शक्ति व्यय करने की वजह है यदि एजुकेशन सिस्टम में टीचर के पास में यह शक्ति होती है कि प्राइमरी लेवल से ही बच्चे के पास में कहां पे क्या प्रॉब्लम है पढ़ाई-लिखाई करने में उसको यदि वह हेल्प कर पाए बच्चा यदि एक सुष सबल मेंटली और फिजिकली एक नागरिक हो पाए तो वह नागरिक फिर वह भारत का कितना कल्याण करेगा आपको पता है वह स्टेटिस्टिक्स कितने डेंजरस है मान लीजिए कि 100 बच्चे प्राइमरी स्कूल में एडमिशन लेते हैं तो बाय द हाई स्कूल 70 पर बच्चे ड्रॉप आउट हो जाते हैं 70 पर ड्रॉप आउट रेशियो हाई स्कूल तक है और ग्रेजुएशन तक पहुंचने में 80 टू 85 पर ड्रॉप आउट रेशियो है क्यों क्योंकि एजुकेशन सिस्टम इस तरह से बनी है कि बच्चे को सीखने में वो कोई इंटरेस्ट ही नहीं आता इतना सब रिजडन हुआ है तो फिर जद ये एजुकेशन को इंटरेस्टिंग बनाया जाए टीचर के पास में यह शक्ति है कि एकदम हंसते बातें करते करते इंट इंटरेस्टिंग वो बड़े ही डिफिकल्ट सब्जेक्ट है ट्रिगोनोमेट्री है कैलकुलस है या तो फिर यह ऑर्गेनिक केमिस्ट्री है ना किय फिर ये कोडिंग है मैथमेटिक्स है ऐसे एकदम डिफिकल्ट सब्जेक्ट है हंसते-हंसते बहुत ही सरल बना कर के बच्चे को सिखा सके बच्चे का भविष्य बना सके बच्चा ग्रेजुएट होकर के पीएचडी होकर के रिसर्च करे रिसर्च करने के बाद में कोई बढ़िया सा इनोवेशन करें नोबेल प्राइज प्राप्त हो इंडिया को नोबेल प्राइज कितने है भारत में जो भारत में से चल गए वि देश में जो रह रहे है उनको नोबेल प्राइज मिलते हैं भारत में किसको नोबेल प्राइज नहीं मिलता क्यों जितने भी पीएचडी थीसिस है सीधे कॉपी पेस्ट है व कॉपी पेस्ट के अलावा एक भी पीएचडी थीसिस नहीं लिखा जाता भारत में तो यह रिसर्च डेवलपमेंट इनोवेशन के नाम पे बिल्कुल जीरो है जो कि यूरोप में होता है जो कि अमेरिका में होता है जापान में होता है इवन चाइना में देखिए एआई के ऊपर में जितने भी मेजर रिसर्च पेपर है रेफरल जर्नल्स में पब्लिश होते हैं वो चाइना में होते हैं ज्यादा से ज्यादा सो दिस इज हाउ वी शुड लिवरेज पावर फॉर द बेटरमेंट ऑफ इंडिया देखिए यह पॉइंट भी कोई डिफिकल्ट नहीं है मान लीजिए अभी प्राण को लिवरेज कैसे किया जाए अपनी साधना के लिए पहले तो प्राण को कंट्रोल कैसे करें व प्रश्न तो यही आता है तो प्राण को कंट्रोल कैसे करना इसके बारे में स्वामी जी ने प्राणायाम के बारे में बताया है किंतु प्राणायाम भी इससे भी बेटर एक उपाय ठाकुर ने जो बताया है वह है भाव अभी भाव जो जो है वो है आनंद अभी जैसे कि एक बालक का मां के प्रति जो भाव है उसकी बालक भाव की साधना करते करते हमारे हृदय में वह आनंद प्रकट होता है वो आनंद जो है वो इस प्राण को कंट्रोल कर सकता है प्राण को पकड़ने के लिए हमको कुछ ना कुछ तो मैकेनिज्म तो चाहिए तो वो है यह आनंद अभी मैं अपना खुद का उदाहरण बताता हूं मैं सुबह को या शाम को मंगल आरती से वापस आता हूं कथामृत पढ़ने का एक मेरा पुराना हैबिट है बाकी जो कुछ भी करना है पहले थोड़े समय आधे घंटे तक तो एटलीस्ट कथामृत पढ़ना है और कथामृत पढ़ते-पढ़ते मुझे इतना आनंद आता है भीतर से कि ऐसा लगता है कि जैसे मैं पूरे जगत को भूल गया हूं जैसे पूरे जगत की जितनी भी समस्या है साधु है फिर भी यह सब रहेगा ही रहेगा संसार में भी जितना रहता है वैसा साधुओं का रहता है तो यह जितनी भी समस्याएं हैं जितने भी मन के भीतर के द्वंद है जितने भी लोभ प्रलोभन है सब कुछ में कथामृत पढ़ते पढ़ते विस्मृत हो जाता हूं उसके बाद में जैसे हम ठाकुर का नाम जप करते हैं तो यह जो मैकेनिज्म है ना कथामृत पढ़ना या नाम जप करना उससे प्रकट होता है आनंद और यह आनंद का प्रकट होना वह सबसे पहली निशानी है कि आप आध्यात्मिकता के रास्ते पर आप मैच्योर हो रहे हैं यदि कथामृत पढ़ते-पढ़ते आप बोर हो जाए ठाकुर का नाम जप करते-करते बोर हो जाए आपको आलस आने लगे या ये एक एकने एक रूटीन जैसा लगने लगे उसका अर्थ है कि हमने अभी तक प्राण को पकड़ा ही नहीं है कथामृत का पाठ और ठाकुर का नाम का जप या तो फिर एक लीला ध्यान होता है लीला चिंतन रूपी एक ध्यान होता है जिसमें कि हम इमेजिन करते हैं कि जैसे कि मैं भी मास्टर महाशय की तरह दक्षिणेश्वर में बैठा हूं और जिस तरह से मास्टर महाशय ठाकुर की लीलाओं का दर्शन करते थे मैं भी वहां पर बैठ कर के यहां पे चांदनी है वहां पे चांद का प्रकाश आ रहा है गार्डन है गंगा बह रही है वहां के मां के मंदिर में मां की आराधना हो रही है संध्या आरती का समय है और घंटी वगैरह बज रही ये जो सब डिटेल इमेजिनेशन करते हैं वो सब करने से प्रकट होता है आनंद और ये आनंद का प्राग्यवारे को नियमन करता जाएगा इससे सबसे बड़ा फायदा क्या होगा कि इंद्रिय संयम सबसे पहला होगा माने होने का प्रारंभ होगा सद्गुण राशि प्रकट होगी मन के जितने भी कु भाव है वैर है मन के भीतर में वह चला जाएगा सबके प्रति मैत्री करुणा मुदिता उपेक्षा वाला भाव प्रकट होगा किंतु यह जो आनंद है दैट इज द मेन इंग्रेडिएंट्स करने से तभी हुआ यह प्राण को लिव बच करना मैं जब पीपीटीसी में था पीपीटीसी यानी कि बिल्कुल पहली बार जो लड़का आता है जॉइन करने के लिए तो बेलून मट में पीपीटीसी में रखा जाता है दैट इज प्री प्रोफेशनल ट्रेनिंग सेंटर एक तो मेन ट्रेनिंग सेंटर होता है जो कि 3 साल के बाद में दो साल के लिए भेजा जाता है सबको किंतु प्री प्रोफेशनल ट्रेनिंग होता है जो कि नए आए हुए लड़कों को वहां पर रखा जाता है छ महीना आठ महीना एक साल के लिए देखने के लिए कि वो मोनेस्ट्री हो पाएंगे कि नहीं तो वहां पर एक डोरमेट्री में पांच हम ब्रह्मचारी लोग रहते थे और वहां पर नियम ऐसा था कि आपको जब रात को आते हैं संध्या आरती के बाद में और भोजन से पहले रात्रि के दो घंटा के आसपास मिलता है तो बिल्कुल जो बड़ी लाइट जो है ना ट्यूब लाइट उसको ऑन नहीं करना है सभी के पास में एक-एक डेस्क होता है पांचों ब्रह्मचारी का अपना-अपना एक बेड और एक डेस्क एसआई यूनिट उनको दिया है तो डेस्क लैंप सिर्फ ऑन करना है तो मैं क्या करता था डेस्क लैंप ऑन करके सिर्फ कथामृत पढ़ता था उस समय तो अभी मेरे बगल में जो मेरा ब्रह्मचारी था पड़ोसी मेरा ब्रह्मचारी बगल वाले बेड पे तो उस समय नहीं किंतु जब हम ट्रेनिंग सेंटर में थे उस समय उसने बताया था कि तुम जब रात को आते थे आरती के बाद में कथामृत पढ़ते थे तो तुम्हारे चेहरे पर हंसी देख कर के मुझे बड़ा आनंद आता था मैंने कहा क्या मैं हंसता था बोल तुमको समझ में नहीं आता तुम एकदम हंसते हसते कथामृत पढ़ते थे मुझे भी पता नहीं तो ये जो चेहरे का एक्सप्रेशन है ना ये जो आनंद आता है भीतर से मैं सिर्फ मेरी बात नहीं कर रहा हूं मतलब मैंने ऐसे कितने साधुओं को देखा है हमारे एक आचार्य थे मुझे बंगाली सीखने का सबसे बड़ा इंटरेस्ट कैसे प्रकट हुआ पता है हमारे एक आचार्य थे तो आचार्य थे वैसे वेलफेयर इंचार्ज वहां पर एक वेलफेयर डिपार्टमेंट था बेलूरमठ में तो वेलफेयर डिपार्टमेंट की ओर से क्या होता है कि यह जो दुर्गा पूजा में इतनी सारी साड़ियां वगैरह आती है ना मां दुर्गा को ऑफर करने की के लिए तो हजारों साड़ियां आती है तो फिर इस साड़ियों को फिर गरीब बस्ती में जाकर के बांटना होता है और फिर बेलूरमठ में गिफ्ट भी बहुत आती है तो ये सब गिफ्ट का हम साधु लोग क्या करेंगे तो गरीब की बस्तियों में जाकर के बांटेंगे तो एक वेलफेयर डिपार्टमेंट था वहां पे एक साधु थे उनका कमर में इतना सीरियस प्रॉब्लम था कि वह ठीक से चल नहीं पाते थे ना ही ठीक से वो मुड़ पाते थे ऐसा पूरा शरीर को मुड़ना पड़ता था ऐसा उनका स्टिफैन तो वो हमारे मां का क्लास लेते थे गंभीरानंद जी की मां की पुस्तक जो हम आज पढ़ रहे हैं वो क्लास वो लेते थे तो ऐसा नहीं है कि वो बहुत विद्वान है कुछ नहीं वो सि वो किताब खोल के बंगाली में पढ़ते थे सिर्फ वो पढ़ते-पढ़ते हंसते थे मने मां के प्रसंग ऐसे है ना वो हंसी आ जाएगी वो मन प प्रसन्नता छा जाएगी तो उनको प्रसन्न देख कर के हम सब लोग प्रसन्न हो जाते थे उस समय ना ही मुझे बंगाली आती थी ना ही मुझे ठाकुर मां स्वामी जी के बारे में इतना डिटेल में नॉलेज था किंतु महाराज की जो प्रसन्नता है ना वो संक्रमित इनफेक्शियस थी महाराज प्रसन्न हो कर के पढ़ रहे हैं मैं प्रसन्न हो जाता तब से मैंने सोचा नहीं बंगाली तो एकदम अच्छे से पढ़ना पड़ेगा वरना नहीं काम चलेगा तो यह जो चेहरे की प्रसन्नता है मन का आनंद है दिस आर द रियल साइंस कि प्राण जो है वह भी आपके कंट्रोल में आना शुरू हुआ है हां