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Swami Vivekananda Raja Yoga ·

राजयोग : Ch.3 प्राण : स्‍वामी विवेकानन्द : 12 June 2024

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ओम स्थापक च धर्मस्य सर्व धर्मा स्वरूपने अवतार वरिष्ठ राम कृष्णा यते नमः स्वामी विवेकानंद का राजयोग कल हमने देखा कि किस तरह से स्वामी जी बता रहे हैं कि जद सभी चीजों को जनरलाइज किया जा सकता है वेद में जैसे कि पूरे विश्व ब्रह्मांड को जनरलाइज किया है ब्रह्मण के रूप में तो वैसे ही जितना भी मैटर एनर्जी और इंटरेक्शन यानी कि फोर्सेस है उन सबको हम प्राण के रूप में जनरलाइज कर सकते हैं प्राण अर्थात की फोर्स और मैटर और एनर्जी अर्थात की आकाश और साथ में ही स्वामी जी कहते हैं ही हु हैज कंट्रोल द प्राण हैज कंट्रोल हिज ओन माइंड एंड ऑल द माइंड्स ट एजिस्ट जिसने प्राण को कंट्रोल किया है वह सिर्फ अपने मन को ही नहीं कंट्रोल नहीं कर सकता वह सबके मन को कंट्रोल कर सकता है माने देखिए कि कितनी यह किस तरह की अ पावर किस तरह का यह एक एडवांटेज एक मनुष्य को देता है मनुष्य प्राण को कंट्रोल करने से अपने मन को तो संयमित कर ही सकता है कंट्रोल कर ही सकता है सभी के मन को कंट्रोल कर सकता है अपने शरीर को तो कंट्रोल कर ही सकता है सभी के शरीर को कंट्रोल कर सकता है और इतना ही नहीं सूर्य चंद्र सितारे तारे पेड़ पौधे पशु पक्षी पत्थर वगैरह जो कुछ भी है मेटल सब कुछ कंट्रोल कर सकता है अभी यह बात पढ़ कर के हमको लगेगा कि अच्छा ठीक है स्वामी जी यह सब कहते हैं तो अब दो चीज है पहली बात तो हमने ऐसा करते हुए किसी को देखा नहीं खुद ठाकुर मा स्वामी जी को ऐसा करते हुए नहीं देखा एक चीज दूसरा कि यह सब सही सही है भी कि नहीं किसको पता स्वामी जी भी क्या थियोरेटिकल स्पेक्युलेटिव स्वामी जी के जीवन में इनफ घटनाएं हैं ऐसी सफिशिएंट घटनाएं है कि जिससे कि हमको लगे कि नहीं इस तरह के सुपर नेचुरल पावर्स है और इस तरह के पावर्स को आप हार्नेस कर सकते हैं आप इस्तेमाल कर सकते हैं अभी प्रश्न अच्छा यह तो एक प्रश्न हो गया उसका समाधान कि इस तरह की शक्तियां है ठाकुर महा स्वामी जी के पास में भी थी बस उन्होंने चूज किया उन्होंने यह ठीक किया कि इसका इस्तेमाल वे लोग किसी अपने खुद के बेनिफिट के लिए नहीं करेंगे जगत के कल्याण के लिए करेंगे इसीलिए जब स्वामी जी यह कहते हैं कि ठाकुर आकर के ब्रह्म कुंडलिनी जागृत करके गए हैं तो कॉस्मिक लेवल पर ठाकुर ने क्या काम किया है यह काल कलयुग के चक्र की गति को तोड़ कर के सतयुग की ओर जिस तरह से इसको मोड़ दिया है यह सब ठाकुर ने किया होगा वह हमको समझ में नहीं आएगा जब तक हमारा उस लेवल का अंडरस्टैंडिंग डेवलप ना हो तो ओके अब हम मान लेते हैं कि इस तरह की शक्ति है ठाकुर और स्वामी जी ने और मां ने भी शायद इसका इस्तेमाल किया होगा किंतु इस तरह से किया होगा इतना सूक्ष्म रूप से किया होगा कि पूरे सिविलाइजेशन की गति को परिवर्तित कर दिया और यह कितना बड़ा चमत्कार है जैसे कि मान लीजिए एक व्यक्ति बीमार है तो उसको उस आपने इस तरह की किसी शक्ति का प्रयोग करके उसकी बीमारी को ठीक कर दिया चलो यह बहुत अच्छी बात है ब्रह्मांड में कोई एक तारा इधर से उधर घूम रहा है उसको आपने इस तरह की शक्ति का इस्तेमाल करके उसी उसकी गति परिवर्तित कर दी ना कि उसका और कुछ कर दिया वह भी ठीक है किंतु पूरे मानव समाज की गति को आपको परिवर्तित करना कि यह अधोमुख हमारे समाज की गति थी दिन प्रतिदिन यह विदेशी सत्ता कारो के उनके शोषण की वजह से भारतीय समाज धीरे-धीरे करके उसका मतलब एक्सप्लोइट टेशन हो रहा था गरीबी और बेकारी और महामारी और अकाल यह सब दिन प्रतिदिन बढ़ते ही जाते थे और हम लोग बिल्कुल डिस एंपावर्ड हो गए थे संपूर्ण रूप से असहाय हो गए थे कुछ चा कर के भी कुछ नहीं कर पाते थे देखिए कि अफगानिस्तान और भारत के बीच में कितना बड़ा कंट्रास्ट है अफगानिस्तान में आप जाकर के देखिए कि वे लोग पहाड़ में रहते हैं उन लोगों के पास में नॉलेज या तो कल्चर ना कि विद्या ना कि सिविलाइजेशन जैसा इतना खास भारत की तरह तो डेवलप नहीं हुआ किंतु जो जो लोग अफगानिस्तान गए हैं उनके ऊपर राज करने के लिए सबको मुंह की खानी पड़ी है मने ये ब्रिटिश एंपायर से स्टार्ट करें ब्रिटिश लोग वहां प गए तो उनको भी उनकी भी पिटाई हो गई ये रशियन लोगों ने सोवियत यूनियन ने अफगानिस्तान पर हमला किया तो उनको भी मुख अपना चेहरा छुपा कर के वहां से भागने की बारी आ गई और आखिर में अमेरिका के साथ में क्या हुआ वोह एयरपोर्ट के ऊपर में सभी लोग वोह चढ़ते रनवे के ऊपर में वह विमान दौड़ रहा है उसके पहियों को लोग चिपक करके बैठ गए हैं इस तरह की अपमानजनक अवस्था में आज का सुपर पावर अमेरिका उसको वहां से भागना पड़ा तो अमेरिका सोवियत यूनियन ब्रिटिश एंपायर ऐसी तीन-तीन महासत्ता हों को जो लोग आएगा हमारी पिटाई करेगा जो चाहे वह कर लेगा तो ऐसी दयनीय परिस्थिति में हमारी भारतीय सिविलाइजेशन थी तो इस सिविलाइजेशन की गति को परिवर्तित करना आज हमारे पास में हमारी मिलिटरी पावर कहो ना कि हमारा इकोनॉमिक पावर कहो अपनी यह पॉलिटिकल स्ट्रेंथ कहो पॉलिटिकल इंस्टिट्यूशन आज इतना बड़ा इलेक्शन हम लोगों ने सक्सेसफुल करके दिखाया बिना किसी प्रॉब्लम के यह दिखाता है कि अपने इंस्टीट्यूशंस और अपनी साइंस और टेक्नोलॉजी यूनिवर्सिटीज यह सब कितना मने पावरफुल हो गए हैं तो 100 साल में हम कहां थे और कहां पर आ गए तो यह तो बात बिल्कुल ठीक है कि ठाकुर ने माने और स्वामी जी ने उनके पास में यह शक्तियां थी और इस शक्तियों का इस्तेमाल भी किया और पूरे जन मानव की सेवा के लिए किया हित के लिए किया सिर्फ अपने खुद के दिखावे के लिए नहीं किया तो यह एक बात हो गई अभी गोइंग फर्द आगे चलते हुए हमको यह क्या सोचना चाहिए क्या हम यह माने कि ठाकुर मां और स्वामी जी के जाने के बाद में इस तरह की शक्तियां भी उनके साथ में लुप्त हो गई है आजकल हम बड़े-बड़े जो लोग देखते हैं जो लोग बहुत सारे लोगों को सम्मोहित कर सकते हैं वो चाहे फिल्म के एक्टर और एक्ट्रेसेस हो ना कि ये राजनेता हो ना कि ये फिर बड़े-बड़े बिजनेसमैन हो मैंने सेलिब्रिटीज जिनको कहते हैं आजकल सेलिब्रिटी कल्चर एक सेलिब्रिटी यानी कि इन्फ्लुएंस या तो फिर सेलिब्रिटी तो ये इन्फ्लुएंस है उनके उने थाउजेंड्स एंड मिलियंस ऑफ फॉलोअर्स है तो उनके पास में यह प्राण शक्ति है बाद में स्वामी जी कहेंगे कि आपको लगता है कि आपके पास में इस पार्टिकुलर शक्ति है किंतु सभी शक्तियों को बोयल डाउन करें सभी शक्तियों का आप प्रॉपर एनालिसिस करें तो एट द एंड ऑफ द डे आपको पता चलेगा कि इसके पीछे प्राण की ही शक्ति है तो अच्छा अभी गोइंग फॉरवर्ड हम यह प्राण के बारे में जो सीखे प्राणायाम के बारे में जो समझे इसका कैसे इस्तेमाल करें क्या मैं अपने जीवन में इसको मैं अपना प्राणायाम की प्रैक्टिस करके क्या मैं यह सब शक्तियां अर्जन कर पाऊंगा शायद नहीं प्रॉब्लम क्या है कि जो टफ डिसिप्लिन चाहिए जो एक टफ एक रूटीन चाहिए जिसके भीतर में रह कर के यह सब विद्या एं अर्जन करनी होती है वह समय तो अभी मेरा चला गया इस उम्र में कोई नई विद्या संपूर्ण शून्य से स्टार्ट करके मैं नहीं सीख पाऊंगा किंतु इसका जो एक यूटिलिटी एक यूटिलाइजेशन मुझे दिखता है कि हमारी एजुकेशन सिस्टम को संपूर्ण रूप से रीडिजाइन किया जाए अभी आज वेस्टर्न आइडियाज और आइडिया के ऊपर में हमारी एजुकेशन सिस्टम चल रही है जिसमें कि हम लोग देखते हैं कि रीडिंग राइटिंग एंड एरिथ मेे िक थ्री आर तो वो भी सही और इवेंचर जाकर के आप क्या सीखते हैं तो यह स्किल सीखते हैं एक के बाद एक जैसे कि कार्पेंट्री है ना कि जैसे कि ये मेटालर्जी है ना कि ये इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग वगैरह है ये जो सब स्किल्स सीखते हैं जो कि नेचुरल स्किल्स से नेचुरल पदार्थ नेचुरल मटेरियल के साथ में काम करने की हम लोग इसके साथ में एक इनर कंपोनेंट भी ऐड कर सकते हैं एक कंपोनेंट ऑफ कॉन्शसनेस ये कॉन्शसनेस स्टडीज जो है उसको भी इसके साथ में ऐड कर सकते हैं पहली कक्षा से ही बाल मंदिर से ही बच्चे को यह प्राणायाम योग ध्यान यह सब सिखाया जाए योग और वेदांत दोनों सिखाया जाए तो वह जब ग्रेजुएट होगा यह लड़का तो वह कितना उसका डेवलपमेंट हो गया होगा आज मैं सपने में भी नहीं सोच सकता इस तरह का ध्यान यह लड़का ग्रेजुएट होने के बाद कर पाएगा यानी कि यह वेदांत और योग यह दोनों ही एजुकेशन सिस्ट के एक महत्व वेरी इंपॉर्टेंट कंपोनेंट होने चाहिए अति महत्त्वपूर्ण पार्ट होने चाहिए तभी कहीं जाकर के यह विद्या हमारे पुरखों ने जो अर्जन की ठाकुर महा स्वामी जी ने इसको पुनः जीवित किया इसका पुनः प्रतिष्ठा की वो उसका कुछ फायदा हमारे जन समाज को होगा यानी कि ये माने हम लोग जो यह सब पढ़ रहे हैं शायद हमको आज थियोरेटिकल लगता है हमारे खुद के जीवन में यह थियोरेटिकल लगता है किंतु हम एक आने वाला एक ऐसा भविष्य का गणतर कर सकते हैं जो कि इस थिरी को प्रैक्टिकल करके बना सके अच्छा अभी थोड़ा सा आगे पढ़ते हैं स्वामी जी क्या कहते हैं हाउ टू कंट्रोल द प्राण इज द वन आइडिया ऑफ प्राणायाम प्राण को कंट्रोल कैसे करें वही प्राणायाम का हेतु है प्राणायाम का आदर्श है ऑल द ट्रेनिंग एंड एक्सरसाइजस इन दिस रिगार्ड आर फॉर दैट वन एंड जो कोई भी ट्रेनिंग और एक्सरसाइज हम प्राणायाम में करेंगे उसका हेतु सिर्फ एक ही है कि प्राण का नियमन ईच मैन मस्ट बिगिन वेयर ही स्टैंड्स प्रत्येक व्यक्ति को जो वहां प जहां पर खड़ा है वहां से उसको स्टार्ट करना होगा यानी कि पहली कक्षा में जो लड़का या लड़की जहां पे है वहां से ये स्टार्ट कर सकते हैं मस्ट लर्न हाउ टू कंट्रोल द थिंग्स दैट आर नियरेस्ट टू हिम जो चीज उसके सबसे करीब है उसी को कंट्रोल करके वह प्रारंभ करें दिस बॉडी इज वेरी नियर टू अस नियरर देन एनीथिंग इन द एक्सटर्नल यूनिवर्स यह शरीर हमारे सबसे ज्यादा करीब है इस ब्रह्मांड में सभी चीजों से हम सबसे ज्यादा करीब हैय य शरीर द प्राण च इज वर्किंग इन दिस माइंड एंड बॉडी इज द नियरेस्ट टू अस ऑफ ल द प्राण इन दिस यूनिवर्स इस मन और शरीर में जो प्राण कार्यरत है वह विश्व ब्रह्मांड के जितने भी प्राण है जितने भी फोर्सेस है उन सभी फोर्सेस से तकरीबन सबसे नजदीकी फोर्स यही प्राण है दिस लिटल वेव ऑफ द प्राण च रिप्रेजेंट्स अवर ओन एनर्जीस मेंटल एंड फिजिकल इज द नियरेस्ट टू अस ऑफ ऑल द वेव्स ऑफ द इनफाइनों को रिप्रेजेंट करती है शारीरिक और मानसिक दोनों व सभी लहरियों से जो कि इस अनंत समुद्र प्राण रूपी अनंत समुद्र में जो अनंत लहरियां उठ रही है उसमें से सबसे नजदीकी सबसे पास की लहरी है जो हमारे शरीर और मन का यह प्राण है इफ वी कैन सक्सीडेंस लहरी प्राण रूपी जो कि मेरे शरीर के भीतर में है उसको यदि मैं कंट्रोल कर पाऊं तो कॉस्मो के भीतर में यूनिवर्स के भीतर में जितनी भी फोर्सेस है उन सबको मैं कंट्रोल कर पाऊं स्वामी जी इतना सुंदर तरीके से इतना सहज रूप से लिखते हैं और कहते हैं कि हमको लगता है कि अच्छा चलो ठीक है सुबह को उठते हैं दो तीन बार व पूरक रेचक कुंभक कर लेते हैं और हो गया प्राण अपने कंट्रोल में ब अच्छी बात है देखो कि मनुष्य का जीवन ही ना आशा के ऊपर में बना हुआ है कभी-कभी हमको लगता है चारों र से एक के बाद एक ऐसी क्राइसिस आती है सिचुएशन ऐसी खड़ी हो जाती है कि हम लोग एक हमको लगता है कि जैसे कुछ भी मेरे हाथ में नहीं है हमको लगता है कि पूरा जगत मेरे विरोध में जा रहा है हमको लगता है कि मैं इस परिस्थिति में क्या कुछ भी नहीं कर पाऊंगा किंतु यह सब आशा की किरण है मैंने अ आखिर में एट द एंड ऑफ द डे धर्म क्या है ईश्वर क्या है यह जो आजकल की मॉडर्न सुपर हीरो स्टोरीज है वह क्या है यह जो सुपरमैन की स्टोरी जितने लिखी यह आज की यह जो सुपर हीरो जनरे अर्थात कि यह सुपर हीरो स्टोरीज लिखने का मॉडर्न सुपर हीरो स्टोरीज लिखने का प्रारंभ हुआ था सुपरमैन की स्टोरी से तो उसके वोह जो लेखक थे उन लोगों के साव मैंने उसका एक लेखक था कि दो था मैं एग्जैक्ट भूल गया कि उसका क्या था कि वह फिजिकली थोड़ा सा वीक था और कॉलेज में सब लोग उसका मजाक उड़ाया करते थे उसकी मैंने उसको मैंने यह किया करते थे सब समय उसको हेरेस किया करते थे तो उसको लगता था कि जब यह लोग मेरी इस तरह से यह कर रहे हैं मेरे साथ में तब कोई ऐसा एक व्यक्ति आएगा जो कि बड़ा ही स्ट्रांग है बड़ा ही उसके पावर है उसके पास में और यह मेरे जितने बुलीज है बुलीज अर्थात कि उनको उसकी उसको कष्ट देने वाले लोग वो सबकी पिटाई कर देगा ऐसा करके वोह सोचा करता था तो अभी उसी में कि यह व्यक्ति किस तरह का होगा जो कि मुझे आकर के बचाएगा उसकी कल्पना करते-करते उसने सुपरमैन की कल्पना की कि जिसके पास में अनंत मने प्रचंड शक्ति है जिसके पास में जो कि हवा में उड़ मने मनुष्य कल्पना करते हैं ना हम लोग सोचते हैं कि मुझे क्या चाहिए मुझे किस तरह की शक्ति चाहिए मुझे किस तरह का नेच सुपर नेचुरल पावर चाहिए तो मुझे उड़ना मैं उड़ना चाहता हूं मुझे यदि कोई गोली भी मारे तो मुझे कुछ ना हो जो हजार लोग भी यदि मेरे साथ में फाइट करने को आ जाए तो मैं सबकी पिटाई कर दू तो यह जो फ्लाइट ऑफ फैंसी जो है अने कल्पना की उड़ान उसी कल्पना का रंग पूर करके उसने ये सुपरमैन कॉमिक्स की रचना की और बाद में यह पूरा सुपर हीरो ये आजकल का पूरा जो मॉडर्न स्टोरी टेलिंग टेक्निक है आज की यह जो पूरा मॉडर्न सिनेमा है कॉमिक्स है ये स्टोरीज है बच्चों की यह सब कुछ इसी के ऊपर में बना है बाद में धीरे-धीरे करके एक शोफ नवर करके एक जर्मन फिलोसोफर था उसने यह सब एक स्टार्ट किया था वो उसका था कि यह मिलिट्री परेड होती थी तो वह देख कर के बड़ा इंप्रेस हो जाता था कि हां ऐसे सोल्जर्स होने चाहिए फिजिकली स्ट्रांग है और एक साथ में कदम पे कदम बड़ा मिला करके देश की रक्षा के लिए वे लोग परेड करते हैं तो मुझे भी आर्मी में जाना है मुझे भी इस तरह से फिजिकली स्ट्रांग होना है मुझे भी देश की रक्षा करनी है किंतु प्रॉब्लम क्या है वोह फिजिकली वीक था वो चश्मे का आंखों का नंबर चश्मा पहनना पड़ता था तो आंखें वीक होने की वजह से वगैरह वगैरह यह सब फिजिकल वीकनेस उसको मिलिट्री सर्विस के लिए लोगों ने रिजेक्ट कर दिया था तो फिर वहीं प बैठ कर के उसने एक रमन की कल्पना की अर्थात कि वही रमन यानी कि सुपरमैन का प्रेडिसेसर उसका माने पूर्वज तो जब मनुष्य कमजोर होता है तब हमेशा वह ऐसी कल्पनाएं चलाता है कि किसी के पास में सुपर पावर है वो आक के मेरी रक्षा करेगा ये हमने देखा कि स्वामी जी का एक फेवरेट थीम है द इवोल्यूशन ऑफ दी कांसेप्ट ऑफ गॉड ईश्वर के बारे में ईश्वर की धारणा का क्रम विकास इवोल्यूशन सबसे पहले हमने ईश्वर को किस रूप में समझा और जाना जब हम जंगल में रहते थे तब हमने देखा कि कभी भी यह फ्लड आते हैं कभी भी यह सांप का दंश या तो फिर शेर आकर के मेरे जो प्रियजन है उनको वह खत्म कर देता है उनका उ उनको मार देता है कभी भी मैंने मैं जो एक फैमिली लेकर के बैठा हूं तो मेरे प्रियजनों का जो हेल्थ है उनका वेल बीइंग है वह कभी भी कुछ भी हो सकता है मने कोई सांप आक के दंश लेगा मेरा आधा शरीर पैरालाइज हो जाएगा मैं कितने डिसएडवांटेज में जी रहा हूं उस समय हमने इस तरह के ईश्वर की कल्पना की कि जो कि सर्वशक्तिमान है आकाश में बादलों के ऊपर में रहता है उसकी बड़ी-बड़ी लंबी दाढी है और हाथ में एक त्रिशूल है और वो हम उसको जद ये हम लोगों को जो चीज प्रिय है उस चीजों को यदि हम उस देवताओं को ऑफर करेंगे उनको यदि हम इस यह सबब चीजों का प्रलोभन देंगे तो यह देवता आकर के मेरे संकट के समय मेरी रक्षा करेंगे तो यह मनुष्य जब अपने को कमजोर समझना शुरू करता है तभी से वह एक ऐसी शक्ति की खोज करता है जो शक्ति उसको जीवन संघर्ष में सहाय रूप हो किंतु यहां पर स् जी और म स्वामी जी अर्थात की वेदांत धीरे-धीरे करके यह जो कल्पना है ईश्वर की वह परिवर्तित होती गई एक ऐसा ईश्वर जो कि बहुत ही शक्तिमान है शारीरिक शक्ति उसमें बहुत है वहां से लेकर के एक प्रेममय ईश्वर जो कि हमको सभी को सद्भाव से भाईचारे से रहने का वह संदेश देता है हमको भक्ति शरणागति और प्रेम सिखाता है वहां से लेकर के ईश्वर हमारे हृदय में स्थित है वह एक कल्पना कि मैं ही ईश्वर हूं मैं और यह जो जो आत्मन है या तो फिर जीवात्मा है यह दोनों एक ही है तत्वम असी अहम ब्रह्मास्मि विच इज द हाईएस्ट कल्मिनेशन ऑफ रिलीजियस थॉट धार्मिक विचार का या तो फिर ईश्वर के बारे में हमारी अवधारणा का सर्वोच्च कदम जो है सर्वोच्च यह शिखर है वह है अद्वैत वेदांत ये जो पूरी एक जर्नी है हम लोग सोचते हैं कि हमको तारण का तारण हर्ता मने एक एक हम यह जो भवसागर में जो डूब रहे हैं उस डूबते हुए बचाने वाले एक सर्वशक्तिमान ईश्वर से लेकर के ईश्वर मेरे ही भीतर में है यह जो हमारी एक पूरी अवधारणा है इसी का एक दूसरा स्वरूप है यह प्राण की थिरी य हमको पढ़ कर के कितना अच्छा लगता है कि हां चलो आध्यात्मिक जीवन में जदी में सर्वोच्च शिखर पर जो यह है ब्राह्मण वही मेरे भीतर में है ऑन वन हैंड तो मटेरियल वर्ल्ड में जो कुछ भी सर्वोच्च है वो भी भी उसको मैं मेरे भीतर में जो प्राण है उससे नियमन कर सकता हूं अर्थात कि देखिए कि हमारे भीतर में दो शक्तियां विराजमान है अभी तक हम समझते थे कि हमारे भीतर में एक जीवात्मा है जीवात्मा क्या है तो वह जो ब्रह्मण का एक किरण जो कि इस शरीर मन को मन बुद्धि चित्त अहंकार को वो प्रकट कर प्रकाशित करता है वह उज्जवल करता है हमने यह जो कॉस्मो माइक्रो कजम में देखा कि किस तरह से हमारे भीतर में यह मन बुद्धि चित्त अहंकार रूपी एक सूक्ष्म शरीर है और यह सूक्ष्म शरीर के पीछे में एक चेतन शक्ति है यह चेतन शक्ति इस सूक्ष्म शरीर को प्रकाशित करती है चालित करती है उसकी उसके भीतर में प्राण प्रतिष्ठा करती है किस तरह से एक डेड बॉडी और एक जीवंत मनुष्य के भीतर में दोनों के बीच में यह एक डिफरेंस है तो यह सूक्ष्म शरीर जो कि ब्रह्मण की शक्ति से चालित है मन के प्रकाश से प्रकाशित है वह यदि हमारे भीतर में है यानी कि आध्यात्मिक जगत का जो सर्वोच्च सिद्धांत व यदि हमारे भीतर में है तो जद ये तो साथ-साथ में ही मटेरियल वर्ल्ड जो है यह बाह्य जगत है उसका भी जो सर्वोच्च सिद्धांत है प्राण उसी प्राण का रिमोट कंट्रोल वह भी मेरे भीतर में है अर्थात कि मेरे भीतर में अभी दो शक्तियां है एक शक्ति है जो कि ब्रह्मण के साथ में कनेक्टेड है और दूसरी शक्ति है यह कॉस्मो के साथ में या तो फिर ब्रह्मांड के साथ में कनेक्टेड है एक शक्ति है जो कि इनर यूनिवर्स को कंट्रोल करती है और दूसरी शक्ति है जो कि आउटर यूनिवर्स को कंट्रोल करती है अर्थात कि यह सूक्ष्म शरीर और यह प्राण यह दोनों का यह क्रॉस रोड्स है इन दोनों की यह जो त्रिवेणी है त्रिवेणी तो नहीं कहेंगे इन दोनों का जो संगम है यह संगम है यह प्रयागराज है मनुष्य का जीवन या तो फिर ये मनुष्य का शरीर हमारे भीतर में दो शक्तियां विराजमान है एक है यह सूक्ष्म शरीर जो कि आत्मन के प्रकाश से प्रकाशमान है और यह प्राण जो कि विश्व के जो जितने भी प्राण है उसका यह रिमोट कंट्रोल है द योगी हु हैज डन सस गेंस परफेक्शन जिसने अपने भीतर के प्राण के ऊपर में कंट्रोल पा लिया है वह योगी परफेक्शन प्राप्त करता है या तो फिर संपूर्णता प्राप्त करता है पुरुषोत्तम भगवान राम हम कहते हैं ना तो परफेक्ट मेन किसको कहेंगे पुरुषोत्तम भगवान राम को तो यहां पर भी यदि योगी अपने भीतर में प्राण पर संयम प्राप्त कर ले तो वह भी पुरुषोत्तम हो सकता है परफेक्ट मैन हो सकता है नो लंगर इज ही अंडर एनी पावर और किसी शक्ति के वह वश में नहीं है कोई भी उसको डरा नहीं सकता ना ही उसको बीमारी डरा सकती है ना ही उसको वृद्धावस्था डरा सकती है ना ही उसको मृत्यु का भय डरा सकता है क्योंकि मृत्यु उसकी हथेली में है बिकम ऑलमोस्ट ऑलमाइटी ऑलमोस्ट ऑल नोइंग वह सर्वशक्तिमान बन जाएगा सर्व ज्ञाता बन जाएगा किंतु यह सर्वशक्तिमान और सर्व ज्ञाता के सामने स्वामी जी ने एक एडजेक्टिव रखा है वो है ऑलमोस्ट तकरीबन लगभग वह सर्वशक्तिमान हो जाएगा ऑलमोस्ट सर्व ज्ञाता हो जाएगा ऑलमोस्ट क्यों यूज किया है क्योंकि ब्रह्मांड के बारे में आप जितना भी कुछ जान ले ब्रह्मांड के ऊपर में आपका जितना भी पावर आ जाए अल्टीमेटली तो ब्रह्मांड इट सेल्फ एक माया का आवरण है ब्रह्मण के ऊपर में तो यह ब्रह्मांड रूपी माया का आवरण छेद करके भेद करके इसके भीतर में रही हुई सर्वोच्च सत्ता ब्रह्मण को जब तक हम न जान ले तब तक संपूर्ण तोव नहीं आएगा तब तक ये ऑलमोस्ट रूपी एडजेक्टिव सामने लगा रहेगा ठाकुर कहते हैं कि सप्तम भूमि पर चले जाइए ईश्वर का दर्शन ब्रह्मण का दर्शन इस तरह से होगा कि जैसे कि बिल्कुल स्पष्ट दिख रहे हैं किंतु फिर भी बीच में एक काच का आवरण है जैसे कि काच के दरवाजे से सामने खड़े रहकर के भीतर का सब कुछ दिखता है लैटन के भीतर में दिए की ज्योत बड़ी स्पष्ट दिखती है किंतु लैटन के ऊपर में काच का शीशे का आवरण है तो वैसे ही एक व्यवधान आखिरी रह जाएगा इसीलिए स्वामी जी कहते हैं ऑलमोस्ट ऑल पावरफुल ऑलमोस्ट ऑल नोइंग वी सी सेक्टस इन एवरी कंट्री हु हैव अटेम्प्टेड दिस कंट्रोल ऑफ प्राण सभी देशों में इस तरह के संप्रदाय हम देखते हैं जिन्होंने इस प्राण शक्ति पर संयम प्राप्त करने का कंट्रोल प्राप्त करने का प्रयास किया हो इन दिस कंट्री देर आर माइंड हीलर्स फेथ हीलर्स स्पिरिचुअलिस्ट क्रिश्चियन साइंटिस्ट हिप्नोटिस्ट एटस इस कंट्री में अर्थात कि अमेरिका में स्वामी जी अमेरिका में यह बात कर रहे थे तो इस कंट्री में अमेरिका में यह माइंड हीलर अर्थात कि मन से दूसरों के रोग ठीक करने वाले लोग हैं फेथ हीलर अर्थात कि अपनी श्रद्धा से अपने फेथ से लोगों को ठीक करने वाले लोग हैं स्पिरिचुअलिस्ट यानी कि ये प्रेत तत्व में जो लोग विश्वास करते हैं अपना जो सबसे फेमस स्पिरिचुअलिस्ट प्रेत तत्व में विश्वास करने वाले थे अपने निरंजन महाराज व ठाकुर के पास आए ठाकुर ने कहा अभी इसके सर पर इस तरह का भूत सवार हुआ है जो कि इसको कभी छोड़ने वाला नहीं है क्रिश्चन साइंटिस्ट यह क्रिश्चियन साइंटिस्ट बोलकर के एक पंथ था उस समय का हिप्नोटिस्ट जो कि लोगों को हिप्नोटाइज करके उनके मन को ठीक करने वाले कंट्रोल करने वाले लोग थे एट्स वगैरा वगैरा एंड एजामिन दिस डिफरेंट बॉडीज हम यह सभी पथ कि जयदिश करें निरीक्षण करें वी शैल फाइंड एट द बैक ऑफ ईच दिस कंट्रोल ऑफ द प्राण इन सभी के पीछे इस प्राण के ऊपर में नियमन करने वाला तत्व ही हमको मिलेगा दिखेगा वेदर दे नो इट और नॉट यदि उनको पता है या नहीं है इफ यू बोयल ऑल देयर थिरी डाउन द रेसिड विल बी ट उनकी जितनी भी थिरी है उन सबको आप मने उसको बोयल करके उसका सार तत्व देखेंगे तो उसका सार तत्व यही प्राण के ऊपर में नियमन वही आपको दिखेगा इट इज द वन एंड द सेम फोर्स दे आर मैनिपुलेटिंग ओनली अननोइंग एक ही शक्ति है जिसको कि विभिन्न रूप से यह लोग कंट्रोल करने का प्रयास कर रहे हैं जस्ट उनको पता नहीं कि यह शक्ति सही सही में क्या है दे है उस टंबल्ड ऑन द डिस्कवरी ऑफ ए फोर्स एंड आर यूजिंग इट अनकॉन्शियसली विदाउट नोइंग इट्स नेचर उन्होंने इस शक्ति की खोज कर ली है और बिना उस शक्ति के सही स्वरूप को समझे वो लोग इसका इस्तेमाल कर रहे हैं बट इट इज द सेम एज द योगी यू एंड च कम्स फ्रॉम प्राण किंतु वह वही शक्ति है जिसका इस्तेमाल योगी करता है और वह सब आती है प्राण से द प्राण इज द वाइटल फोर्स इन एवरी बीइंग समस्त विश्व में समस्त पदार्थों में समस्त जीवों में प्राण ही एक चेतन शक्ति है थॉट इज द फाइनेस्ट्राइड प्राण का सर्वोच्च मेनिफेस्टेशन है सर्वोच्च परिणति है थॉट अगेन एस वी सी इज नॉट ऑल अच्छा अभी यह थोट के बारे में थोड़ा सा हम देख लेते हैं यहां पर स्वामी जी कहते हैं कि मनुष्य के जो विचार है वह प्राण का ही एक तरह से रूपांतरण है अभी आज के युग में एक समय था जबक एक मिलिटरी पावर बड़ा ही उसका एक माना जाता था कि उसकी बड़ी महत्ता है जो बड़े-बड़े जनरल होते थे बड़े-बड़े राजनेता होते थे बड़े-बड़े विश्व विजेता होते थे जैसे कि यह नेपोलियन है ना कि ये एलेक्जां है न कि अपना ये जो राजा अशोक थे न कि चंद्र गुप्त थे उनका बोलबाला था कि हां उन्होंने विश्व पर विजय किया बहुत सारे देशों से युद्ध किया वगैरह वगैरह किंतु आज का जो युग है वह इंफॉर्मेशन एज है वह माहिती का युग है और आज के युग में सबसे ज्यादा वैल्यू सबसे जदा ज्यादा महत्व किन लोगों का है जो कि यह आईआईटी या तो आईआईएम से पास आउट होते हैं जिनके पास में बड़ी यह हाईटेक डिग्रियां होती है उन लोगों का महत्व है आज के जमाने में आज के जमाने में यदि आप किसी बड़े अच्छे कोचिंग कोच को पकड़ेंगे यह मने परीक्षा पास करने वाले कंपटिंग कोच के पास में जाएंगे तो वे लोग आपको क्या कहेंगे किय क्रिएटिविटी जो है मनुष्य की वह आज हमारी सबसे बड़ी एसेट है यदि आपके पास में आउट ऑफ द बॉक्स थिंकिंग करने की कैपेसिटी है टाइट कॉर्नर में यदि माथा ठंडा रख कर के पर रास्ता निकालने की जद आपके पास में यह कैपेसिटी है यदि आपको अपने आइडियाज मार्केटिंग कर सकते हैं उसको यदि आप वायरल बना सकते हैं यदि आप एक इन्फ्लुएंस बन सकते हैं तो आपका सबसे ज्यादा सन्मान है अभी कुछ दिनों पहले मैं देख रहा था कि वो बिल गेट्स कहीं एक चाय वाले के पास में खड़े रहकर वह चाय पी रहा है तो कुछ दिनों के बाद में देखा वह चाय वाला इतना फेमस हो गया है वो दुबई ने कहां पर वह जो दुनिया का सबसे बड़ा वो जो यह है ना व स्काई स्क्रैपर बुर्ज खलीफा उसमें यह लोग ले गए थे उसमें उसको ले जाकर के उसका सम्मान किया क्यों क्योंकि वह एक ऐसा इन्फ्लुएंस हो गया है जिसकी पोस्ट सभी लोग पढ़ते हैं तो ये जो आइडियाज है लोगों को इन्फ्लुएंस करने की शक्ति और यह नया-नया विचार करने की शक्ति जैसे कि न्यूटन जैसे कि अल्बर्ट आइंस्टाइन जैसे कि जेम्स क्लार्क मैक्सवेल जैसे कि लॉर्ड रुथ फोर्ड जैसे कि हाइजनबर्ग जिन्होंने फंडामेंटल डिस्कवरीज की साइंस में और उसी डिस्कवरीज के ऊपर में आज का मॉडर्न सिविलाइजेशन टिका हुआ है आज की मॉडर्न साइंस एंड टेक्नोलॉजी उसी इनोवेशंस और डिस्कवरीज के ऊपर में चल रही है तो इस लेवल की शक्ति वह कहां से आएगी व रों की शक्ति है आज सुंदर पिचाई के पास में ऐसा क्या है सत्य नडेला के पास में ऐसा क्या है गुलाम था जिस देश अभी कुछ सालों पहले चंद दिनों पहले उसी गुलाम देश में से अमेरिका वाले अपनी सबसे बड़ी से बड़ी मल्टीनेशनल कंपनी को चलाने के लिए यह लोग भारत में से उनको ले जाते हैं उनके पास कौन सी शक्ति है तो पावर ऑफ थॉट पावर ऑफ आइडियाज पावर ऑफ क्रिएटिविटी पावर ऑफ इन्फ्लुएंस पीपल तो यह जो पावर है वह आज के इंफॉर्मेशन युग में इसका सबसे ज्यादा महत्व है और स्वामी जी कहते हैं कि यदि प्राण को कंट्रोल कर पाए तो हमारे पास में वह शक्ति आ जाएगी कि प्राण को चैनला इज करके आप अपनी क्रिएटिविटी इनोवेशन कैपेसिटी आउट ऑफ द बॉक्स थिंकिंग करने की कैपेसिटी लोगों को इन्फ्लुएंस करने की कैपेसिटी को आप कई गुना बढ़ा सकते हैं आज अने सभी क्षेत्र में जिस क्षेत्र में आप जाएंगे उस क्षेत्र में आप विजय प्राप्त करेंगे यह शक्ति प्राण के नियमन से हमारे पास में आती है तो यह स्वामी जी का कितना बड़ा स्टेटमेंट है माने स्पिरिचुअलिटी के क्षेत्र में तो छोड़ ही दीजिए बहुत बार ऐसा होता है ना ठाकुर वो जो उदाहरण देते थे गौर और नीताई का अभी भगवान का नाम लेने को बोलेंगे तो वे लोग लोग बोलेंगे अरे भगवान नाम कहां पे लेना मुझे वो सब चीजों में इंटरेस्ट नहीं है तो वे लोगों ने एक ट्रिक अपनाई मागर मा छेर झोल जुगती मेयर कोल बोल हरि बोल अर्थात कि मागर माछ वो एक खास तरह की मछली है जिसका जूस वो बड़ा ही टेस्टी लगता है एक युवती लड़की है जिसको जिसके साथ में बात करने के लिए सभी लोग आतुर रहते हैं तो पहले तो यह दो बात याद करवा दी मागर मा छेर झोल जुगती में कोल फिर ये दोनों की बात हो गई तो आखिर में बोल दो बोल हरि बोल ये दोनों का नाम लेकर आखिर में हरि का नाम दिलवा दिया तो स्वामी जी भी देखिए कि एक तरह से हमको प्रलोभन कर रहे हैं एक तरह से हमको ये एक कैरोट दिखा रहे हैं स्टिक एंड कैरोट का एक थिरी है ना स्टिक अर्थात कि लोगों को डर दिखा कर के कुछ करवाना कैरोट अर्थात कि लोगों को प्रलोभन दिखा कर के कुछ करवाना तो स्वामी जी एक तरह का प्रलोभन हमारे सामने खड़ा कर रहे हैं कि जद प्राणायाम का अभ्यास करेंगे तो आज के युग में सफल होंगे यह जो परीक्षा जैसे ही आती है तो बच्चे के मां-बाप कैसे अपने बच्चे को यह शंख पुष्पी है ना कि ये जीन सेन है ना कि क्या-क्या सब आजकल चलता है ब्रेन को अफेक्ट करने वाली दवाई यह सब लेने के लिए आतुर हो जाते हैं इधर-उधर दौड़ते हैं हजारों लाखों रुपया खर्च करते हैं तो साथ-साथ में यदि प्राणायाम भी सिखा दे तो कितना अच्छा रहेगा और एक बार प्राणायाम सीखने की शुरुआत की एक बार योग वेदांत की थिरी को समझने की शुरुआत की तो वे लड़के जिनमें ऑलरेडी सार तत्व है जिन लोगों के अच्छे संस्कार ऑलरेडी बने हुए हैं वे लोग ऑटोमेटिक आध्यात्मिकता की ओर आकर्षित होंगे तो यह एक तरह से प्रलोभन देकर के ईश्वर के रास्ते पर लोगों को ले आने का स्वामी जी का ट्रिक है ऐसा हम कह सकते हैं तो आज पर फिर से मिते हैं श शांति शांति ह तसत श्री राम कृष्ण पर मस्तु एक्चुअली मैं जब यह जो जिसको की ट्रेडिशनल पंडित कहते हैं ना उन लोगों का वड़ोदरा में एक यूनिवर्सिटी है जिसका नाम है एमएस यूनिवर्सिटी बड़ी ही रेपुटेड यूनिवर्सिटी है तो वहां पर इस तरह के योगा क्लासेस चलते हैं वहां से मैंने टीचर्स ट्रेनिंग कोर्स किया है और टीचर्स ट्रेनिंग कोर्स में एक साल ना कि डेढ़ साल का था सब कुछ बहुत ही डिटेल में हमको सिखाया था योगासन प्राणायाम सब कुछ किंतु जब ठाकुर का मैंने सबसे पहली बार पढ़ने की शुरुआत की तो ठाकुर कहते ये जो हठ योग वगैरह है वो अपने मन को जड़ बना देते हैं यह सब चीजों से दूर रहो तो जैसे ही यह पढ़ा तो मैंने प्रैक्टिस करना छोड़ दिया मुझे क्या पता कि ठाकुर और स्वामी जी के आइडियाज में ये सब कंट्रक्शन है ठाकुर कुछ स्वामी जी कुछ यदि स्वामी राजयो वगैरह पहले से ही पढ़ा होता तो वो मैं चालू रखता प्रया या राजकोट में भी यहां पर वोह हम योगासन वगैरह सिखाते हैं अच्छे योग टीचर आते हैं और वह क्लासेस बड़े पॉपुलर भी है जो लोग पब्लिक पॉलिसी में जो है पब्लिक पॉलिसी डिस्कस करते हैं इस तरह से जो नॉन गवर्नमेंट ऑर्गेनाइजेशन से जो लोग एजुकेशन सिस्टम के साथ में कनेक्टेड है उन सबको सीरियसली सोचना चाहिए क्योंकि भारत के साथ में अभी जो बार-बार एक प्रॉब्लम हो रहा है हमारा हायर एजुकेशन सिस्टम बहुत ही अच्छा है सो वर्ल्ड क्लास हायर एजुकेशन सिस्टम है किंतु प्राइमरी एंड ये जो हाई स्कूल लेवल एजुकेशन है ना वो बिल्कुल उसका स्टैंडर्ड यह है माने जब प्राइवेट स्कूल्स वगैरह में जाएंगे जहां पर लाखों रुपया ले लेंगे वहां की एक बात है किंतु ज्यादातर लोग जो गांव के लेवल पर जो छोटे-छोटे टाउन है जहां पर कि भारत की सबसे ज्यादा जनस क्या है वहां के स्कूलों की अवस्था देखेंगे तो सही में बहुत ही खराब है तो उसके बारे में तो अभी मने एक लार्ज स्केल कैंपेन कोई जद चलाए और तो क्या हो सकता है देखिए कि ग्रॉस मेनिफेस्टेशन जिसको कहेंगे इस शक्ति का कि जैसे हम मूवीज वगैरह में देखते हैं मैंने वह जो जादुई चमत्कार वगैरह मैंने जादुई छड़ी घुमाई या तो यह जो फोर्स है उसकी मदद से यह किताब मेरे सामने पड़ी थी वो हवा में उड़ी और मेरे हाथ में आ गई इस तरह का ग्रोस मेनिफेस्टेशन इन लोगों ने पास होगी यह शक्ति उन्होंने शायद इसका इस्तेमाल नहीं किया किंतु इसका जो सटल मेनिफेस्टेशन है सूक्ष्म मेनिफेस्टेशन है कि लोगों के मन की गति को परिवर्तित कर देना कल्पतरु दिन को लोगों को स्पर्श करके आध्यात्मिक जागृति करवा देना यह पूरे भारत देश की गति मति को बदल देना यह सब तो हमने देखा ही है इस तरह का सूक्ष्म मेनिफेस्टेशन कहो ना कि ये हायर लेवल मेनिफेस्टेशन को यहां स्वामी जी ने ही कहा ना कि थॉट इज द हाईएस्ट मेनिफेस्टेशन ऑफ प्राण यानी कि आप सूर्य चंद्र तारों की गति को बदल दे वह जो प्राण का मेनिफेस्टेशन है उससे भी कहीं ज्यादा ग्रेटर मेनिफेस्टेशन है यह क्रिएटिविटी जैसे कि अल्बर्ट आइंस्टाइन ने जिस तरह से थिरी ऑफ जनरल रिलेटिविटी खोजा जिसकी मदद से हमने इस तरह के मैथमेटिकल इक्वेशन कैलकुलेशन किए कि पूरे विश्व ब्रह्मांड का प्रारंभ कहां से हुआ अंत कैसे हो रहा है एक्सपेंशन या कंट्रक्शन कैसे हो रहा है वो समझ में वो समझ में आए दैट मींस व्हाट कि ये विचार इज द हाईएस्ट मेनिफेस्टेशन ऑफ प्राण तो यह विचार के लेवल की शक्ति तो हमने ठाकुर में भर भर के देखी है कहां वह अभन ब्राह्मण जिनको कि कई पाठशाला में वो पाठशाला में रखा था पिताजी ने तो वहां से वह भाग करके वो माणिक राजा के आम्र कानंद में चले जाते थे नौटंकी करने के लिए आजकल तो वही कहेंगे ना कि क्या नौटंकी कर रहे पिताजी ज देखेंगे कि उनका बच्चा स्कूल में से भाग कर के व नाटक वगैरह कर रहा है तो कैसे नाराज हो जाएंगे तो ठाकुर तो यही सब किए है वही ठाकुर के सामने यह केशव सेन जैसे विश्व विख्यात लोग चुपचाप बैठे रहे प्रत्येक शब्दों को सुने सामने कुछ ना बोले दैट मींस दैट पावर इज मेनिफेस्टेड कह सकते हैं बिल्कुल कह सकते हैं और अभी हमको तो स्पेक्युलेटिव श्य कह सकते हैं ये चंद्र जिसके पास में ये मैजिकल पावर थे उससे वो फिर यह पहारी बाबा पहारी बाबा बिल्कुल थोड़ा सा अन्न ग्रहण करके गुफा में रहते थे तो फिर वो एनर्जी कहां से आती थी वह प्राण के भीतर में से ही आई होगी ऐसा भी तो हम कह सकते हैं तो हम लोग देखिए कुछ ठीक तो कुछ नहीं कह पाएंगे कि हां यह ऐसा ही है क्योंकि हमने ना ही इस विषय का बहुत डिटेल में अभ्यास किया है ना ही हमने इस विषय का कोई प्रैक्टिकल कुछ किया है हालांकि मैंने जैसे कहा कि योगा टीचर्स ट्रेनिंग कोर्स मैंने किया है उसमें प्राणायाम कुछ सीखा था पूरक रेचक कुंभक ये भ्रामरी ये वो किंतु वो सब तो क्या है ऊपर ऊपर से है तो हम स्पेक्युलेटिव प्राण का ही एक मेनिफेस्टेशन होगा स्वामी जी को हम स्वामी जी का मोटिवेशन क्या होगा यह सब पढ़ाने में कि स्वामी जी हमको ट्रिक कर रहे हैं माने एक तरह से हमको भ्रमित कर रहे हैं कि यह सब पावर की बात सुनकर के इससे मोहित होक के तुम इस रास्ते पर आओ क्योंकि मैंने बहुत सारे लोगों को देखा है आजकल का बात सेफ नहीं है स्वामी जी के समय में भी यह राजा प्यारी मोहन ने की ऐसे कुछ लोग थे जो कि जब स्वामी जी भारत वापस लौटे अमेरिका से तो उन्होंने यह सब राजयोग पढ़ कर के इतने ऑलरेडी प्रभावित हो गए थे कि स्वामी जी के साथ में बात करने के लिए उनसे शिक्षा लेने के लिए बड़े आतुर थे क्यों क्योंकि ऑलरेडी उनको लगता था कि जरे जद प्राणायाम की शक्ति आ जाए तो हम क्या से क्या ना कर दें हमारी ये जो राजा है हमारे विरोधी उनका तो हम पूरा खात्मा ही कर देंगे तो हो सकता है यह सब इस तरह के मोटिवेशन ओवर ए लॉन्ग पीरियड ऑफ टाइम बहुत सारे लोगों के होंगे वो एक बात है हम वी कैन ऑलवेज स्पेक्युलेटिव जी ने कहा ना कि आत्मन मोक्षार्थम जगत हिताय च तो ये जब जगत हिताय च वाला कांसेप्ट कंपोनेंट स्वामी जी ने जब ऐड किया अपनी भावधारानी के गुरु भाई ही वो थोड़े से नाराज हो गए नाराज इस तरह से हो गए कि ठाकुर ने तो यह सब कहा नहीं है प्योर स्पिरिचुअलिटी हम जो यह देखते हैं वेदांत में या तो वैष्णव भावधारानी हां चित्त शुद्धि के लिए आप लोगों पर दया रखें लोगों का कल्याण करें किंतु वो तो सिर्फ वही एक चित्त शुद्धि का माध्यम है चित्त शुद्धि करने के बाद में आपको ट्रेडिशनल स्मरण मनन निदिद्यासन रूपी साधना करनी पड़ेगी और उसी साधना अल्टीमेटली आपको ईश्वर प्राप्ति होगी जबकि स्वामी जी ने कहा कि कर्मयोग इट सेल्फ इज अ पाथ टू अटन ईश्वर सिर्फ प्योर कर्म योग करके आप ईश्वर को प्राप्त कर सकते हैं यह स्वामी जी का एक रेवोल्यूशन कांसेप्ट है तो यदि यह कांसेप्ट आध्यात्मिकता के साथ में आध्यात्मिक भावधारानी ऐड कर सकते हैं तो इस आईडिया को भी कि प्राण की शक्ति तो हम लोग इस तरह से नहीं देख सकते कि प्राण की शक्ति से से प्राणायाम से मैं अपने को इतना पावरफुल बना दूं कि मैं जगत कल्याण का जो यह मेरा कार्य है उसको मैं बड़े अच्छे रूप से कर पाऊं मोर एफिशिएंटली कर पाऊं बेटर वे में कर पाऊं उन्हें लार्जर स्केल कर पाऊं तो ये भी तो एक आइडिया हमको ख्याल में रखना है कि यदि जगत का कल्याण करना होगा खुद को तो एंपावर करना पड़ेगा खुद को भी तो भीतर में कुछ चाहिए मेरे पास में ऐसा क्या है कि मैं लोगों को दूं मैं जब रांची में गांव में काम कर रहा था ट्राइबल एरिया में तो मुझे सब समय यह बात मेरी खुद की एक शॉर्टकमिंग फील होती थी इन लोगों की नीड इतनी सारी है और मेरे पास में है क्या देने को ऑफकोर्स आई एम ए पार्ट ऑफ एन ऑर्गेनाइजेशन तो ऑर्गेनाइजेशनल मैं जो कुछ भी फैसिलिटेशन करवाना है ट्रेनिंग करवानी है गवर्नमेंट एजेंसीज के पास में जो जो भी स्कीम है उस स्कीम्स का बेनिफिट इनको दिलवाना है आपस में सबको इकट्ठा करके एक ऑर्गेनाइज्ड बॉडी तैयार करवानी है वो मैं करवा रहा हूं किंतु मैं हमेशा फिर भी फील करता था इंडिविजुअली मेरे पास में ऐसी कौन सी स्किल है व्हिच कैन ट्रांसलेट इनटू ए बेटर सर्विस राइट तो इस तरह से भी हम प्राणायाम को देख सकते हैं कि आई कैन बिल्ड अप माय सेल्फ सो दैट आई कैन बिकम ए बेटर इंस्ट्रूमेंट ऑफ श्री राम कृष्णा हां मैंने ये वेस्टर्न रेनेसा को आप देखिए रेनेसा फिर ये इंडस्ट यलाइल किस तरह से ह्यूमन स्पिरिट जंप किया कहां ये ओल्डर सिविलाइजेशन इंडिया है चाइना है जापान है एक समय था कि यह सब ग्रेट सिविलाइजेशन कही जाती थी अरेबियन सिविलाइजेशन ये पर्शिया वगैरह यह सब पीछे रह गई और यह वेस्टर्न सिविलाइजेशन सडन य सबसे आगे चली गई तो नेचुरली की प्राण शक्ति है यहां पर प्राण शक्ति ही तो मनुष्य को एंपावर करती है क्योंकि कुंभक रेचक इज नॉट द ओनली वे टू कंट्रोल प्राण एकाग्रता इज द रियल वे अभी जैसे न्यूटन को देख न्यूटन ने किसी ने पूछा न्यूटन को कि आपने किस तरह से यह सब आइडियाज डिस्कवर किए तो उन्होंने उसने कहा कि दिन रात सतत इसके ऊपर में सोचते सोचते यह सब आइडिया डेवलप तो एकाग्रता इज अ रियल पावर अने सोना तो भूल गए वो जो वाचस्पति मिश्र उसने वो वेदांत के ऊपर में टीका लिखना शुरू किया शादी के दिन टीका लिखना शुरू किया कितने साल बीत गए 20 2 साल और फिर वो टी खत्म किया देखा कि सामने एक स्त्री उसकी सेवा करने के लिए खड़ी है तो पूछा तुम कौन हो तो बोला मैं तुम्हारी पत्नी हूं तो तुम्हारा नाम क्या है तो भामती तो उसने अपनी टीका का नाम दिया भामती टीका