Sri Ramakrishna as We Saw Him : Swami Shivananda
घोषाल एंड ठाकुर इमीडिएटली सेड दैट यस आई नो रामकान घोषाल ही यूज़्ड टू कम टू विजिट दक्षिणेश्वर काली मंदिर रेगुलरली एंड ही वाज़ दी एटर्नी ऑफ़ रानी रासमणि एंड देन वी सो दैट हाउ रानी रासमणि हैज़ टू प्रोएक्टिवली डिफेंड हर इंटरेस्ट अगेंस्ट द रूल्स ऑफ़ कंपनी एंड हाउ इट वाज़ वेरी इज़ी एट दैट टाइम फॉर दिस ब्रिटिश गवर्नमेंट टु अह टेक अवे द प्रॉपर्टी एंड एव्रीथिंग एल्स ऑफ़ इंडियंस बिकॉज़ दे इट वाज़ देयर इट वाज़ देयर किंगडम इट वाज़ देयर एंपायर एंड वी वेर जस्ट स्लेव्स इट वाज़ देयर गवर्नमेंट। सो नाउ डज़ ऑफ कोर्स गवर्नमेंट कैन नॉट जस्ट टेक अवे द प्रॉपर्टी। द ऑल दिस प्रॉपर प्रोसीजर्स हैज़ टू बी फॉललोड। ओके। इन दोज़ डेज नाउ महापुरुष महाराज सेज़ फर्दर दैट इन दोज़ डेज आई वाज़ लिविंग इन कोलकाता गोइंग होम ओनली। ओकेजनली माय फादर वाज़ वेरी प्लेज़्ड व्हेन आई टोल्ड हिम अबाउट श्री रामकृष्णा एंड ही केम वन डे टू सी ठाकुर ऑन अनदर ओकेजन ठाकुर सेड योर फादर स्पिरिचुअल प्रैक्टिससेस वेयर अटेंडेड विथ सम डिजायर फॉर वर्ल्डली ऑब्जेक्ट्स एज अ रिजल्ट ऑफ़ हिज़ स्पिरिचुअल प्रैक्टिसेस ही अमास्ड मच वेल्थ बट आल्सो स्पेंट इट नोबली नाउ यू नो इट हैपन समटाइ्स दैट व्हेन पीपल गो टू अह टेंपल टेंपल एंड प्रे फॉर प्रे टू देयर इष्ट देवता और प्रे टू गॉड दे ऑलवेज हैव सम हिडन डिजायर इन देयर माइंड नॉट लाइक स्वामी विवेकानंद स्वामी जी वेंट टू मदर्स का मदर कालिश टेंपल एंड सेड इन सस्पाइट ऑफ सच अ डिफिकल्टी इन ह होम ही वेंट ऑन आस्किंग ज्ञान दाव भक्ति दाऊ वैराग्य दा प्लीज गिव मी ज्ञान नॉलेज डिवोशन एंड रन सो दिस इज़ स्वामी विवेकानंद बट मेनी ऑफ़ दी हाउसहोल्डर डिवोटीज व्हेन व्हेन दे गो टू गॉड दे दे ऑलवेज हैव सम हिडन डिजायर इन देयर माइंड दैट यस माय सन इज देयर प्लीज गिव हिम सम गुड जॉब और माय डॉटर इज देयर फाइंड सम गुड फैमिली फॉर हर थिंग्स लाइक दैट इज ऑलवेज एट द बैंक ऑफ एट द बैक ऑफ माइंड ऑफ मेनी डिवोटीज। सो ठाकुर सेस हियर दैट रामकानाई वाज़ अ ग्रेट साधका ऑफ मदर काली बट हिज भक्ति वाज़ आल्सो सकाम भक्ति। देयर आर टू टाइप्स ऑफ भक्तिस। देयर आर टू टाइप्स ऑफ डिवोशंस। वन इज सकाम डिवोशन। सकाम भक्ति, अनदर इज निष्काम भक्ति। व्हाट इज सकाम भक्ति? दैट एट द बैक ऑफ आवर माइंड देयर इज़ ऑलवेज सम डिजायर फॉर वर्ल्डली प्रोग्रेस, सम वर्ली अचीवमेंट्स, वर्ल्ली सक्सेस। बट निष्काम भक्ति, वी लव गॉड फॉर द सेक ऑफ़ लव। व्हाट हैपेंस? व्हेन अ बेबी इज़ वेरी स्मॉल, ही लव्स हिज मदर। बिकॉज़ ही इज़ अह शी इज़ हिज़ मदर। नॉट फॉर एनीथिंग एल्स दैट लव इज़ प्योर लव लव बिटवीन अ मदर एंड अ बेबी बट एज़ इट ऑलवेज हैपेंस दैट रिलेशनशिप बिटवीन से दैट फैमिली मेंबर्स समटाइम्स रिलेटिव्स नेबर्स एंड फ्रेंड्स देयर इज़ ऑलवेज सम अनदर एस्पेक्ट आल्सो इनवॉल्वड अ पर्सन व्हेन ही हैज़ फ्रेंडशिप विथ अनदर पर्सन ही थिंक्स दैट ही इज़ आल्सो सक्सेसफुल ही इज़ वेरी चार्मिंग ही हैज़ गुड पर्सनालिटी ही ही ही टॉक्स इन अ वेरी नाइस वे थिंग्स लाइक दैट। सो व्हेन वी मेक सम वर्ल्ड सम रिलेशनशिप देयर इज़ ऑलवेज सम अह देयर इज़ सम ऑलवेज सम वर्ल्ली डिजायर अटैच्ड टू दैट रिलेशनशिप। बट वी नो दैट रिलेशनशिप बिटवीन अ मदर एंड बेबी इज़ प्योर एंड होली। सो सिमिलरली इफ आवर रिलेशनशिप विद गॉड इज प्योर परफेक्ट दैट वी लव गॉड फॉर द सेक ऑफ लव बिकॉज़ वी लव द वे दैट गोपीस हैव लव फॉर श्री कृष्णा दैट गोपीस से दैट वी डू नॉट वी डू नॉट नीड एनीथिंग फ्रॉम कृष्णा वी सिंपली लव हिम। सो दिस लव विदाउट एनी एक्सपेक्टेशन इज़ द हाईएस्ट डिवोशन। हाईएस्ट स्टेज ऑफ डिवोशन एंड वंस वी अटेन दैट आवर इवोल्यूशन आवर प्रोग्रेस ऑन स्पिरिचुअल पाथ बिकम्स वेरी इजी बट हियर रामकानाई घोषाल ही हैड सम वर्ल्डली डिजायर इन हिज़ माइंड दैट ही वांटेड टू बी सक्सेसफुल ही वांटेड टू बी रिच ही वांटेड टू बी फेमस पॉपुलर सो ऑल बिकॉज़ ऑफ़ ऑल दोज़ डिजायर्स मदर काली गे ग्रांटेड हिम वेल्थ एंड ही ऑल्सो स्पेंट ऑल दिस वेल्थ वेरी नोबली। हेल्पिंग पुअर पीपल हेल्पिंग डोनेटिंग इन सम टेंपल्स हेल्पिंग सम साधुस एटसेट्रा दीज़ आर द नोबल वेज़ ऑफ़ स्पेंडिंग आवर वेल्थ नाउ महापुरुष महाराज फर्दर सेस व्हेन आई फर्स्ट स्टार्टेड विजिटिंग ठाकुर आई ऑफन फेल्ट इंक्लाइंड टू क्राई वन नाइट आई वाज़ क्राइंग अनकंट्रोलेबली बाय द रिवर साइड नियर द बकुल ट्री ही यूज्ड टू यू नो दैट व्हेन पर्सन क्राइस व्हेन देयर इज़ अ स्ट्रांग इमोशन इज़ देयर इन हिज़ हार्ट। द स्ट्रांग इमोशन मेक्स अस क्राई। वेदर दैट स्ट्रांग इमोशन इज़ बिकॉज़ ऑफ़ सम से सैड इंसिडेंट बिकॉज़ ऑफ़ सम रिग्रेट और बिकॉज़ समवन वेरी नियर टू अस हैज़ अह सफर्ड सम अह ट्रैजेडी लाइक देयर इज़ अ डेथ इन फॅमिली समथिंग लाइक दैट। ओर देयर इज़ अ ग्रेट लव। दिस ग्रेट लव आल्सो मेक्स अस क्राई। एंड हियर ठाकुर सेज़ समथिंग वेरी नाइस। व्हेन देयर आर द टियर्स ऑफ़ सफरिंग दे कम आउट फ्रॉम दिस साइड ऑफ़ आवर आईज। द साइड व्हिच इज़ नियर टू आवर नो नोज़। एंड व्हेन देयर आर टियर्स ऑफ़ लव दे कम आउट फ्रॉम आउटर अह डायरेक्शन ऑफ़ आवर आईज़। फ्रॉम दिस साइड। सो, व्हेन अ पर्सन इज़ क्राइंग, वी कैन सी दैट दीज़ आर द टियर्स ऑफ़ सफरिंग। दे विल कम आउट फ्रॉम दिस साइड ऑफ़ आवर आई। एंड इफ दिस आर टियर्स ऑफ लव दे विल कम आउट फ्रॉम दिस साइड ऑफ द आई। दिस ठाकुर हैज़ सेड। सो महापुरुष महाराज लाइक टू क्राई ही वांटेड टू क्राई नॉट बिकॉज़ ही वास सफरिंग फ्रॉम समथिंग ही सम डिसीज और देयर वास सम ट्रबल इन हिस होम बिकॉज़ दिस इमोशन फॉर गॉड दिस भाव साधना इन वैष्णव शास्त्र दिस भाव साधना इज़ वेरी वेल एक्सप्लेंड एंड दिस भावा और रेदर लेट मी से दिस स्ट्रांग इमोशंस दीज़ आर द ट्रू कीज़ टू अनलॉक स्पिरिचुअल गेट्स यू नो इन इन अह ओल्डर टाइम इट यूज्ड टू हैपन दैट ध्रुव स्टुड ऑन वन लेग एंड डीड तपस्या फॉर थाउजेंड्स ऑफ इयर्स। द ठाकुर हिमसेल्फ सेज़ दैट हाउ ऋषिज़ यूज़्ड टू डू तपस्या। दे विल गो टू सम फॉरेस्ट इन द मॉर्निंग विदाउट ईटिंग एनीथिंग एल्स एंड इन द ड्यूरिंग द डे टाइम दे विल ईट सम फ्रूट और सम से रूट वेजिटेबल एंड दे विल स्पेंड देयर एंटायर डे इन तपस्या एंड व्हेन दे विल रिटर्न दे विल ईट अगेन समथिंग वेरी लिटल एंड दे वुड गो टू स्लीप लाइक वाइज़ दे हैड टू डू तपस्या इयर्स आफ्टर इयर्स आफ्टर इयर्स एंड देन देयर विल बी सम स्पिरिचुअल प्रोग्रेस इन देयर लाइफ्स सो दैट वाज़ द ओल्डर वे ऑफ़ डूइंग साधना दैट डूइंग वेरी डिफिकल्ट तपस्या यू नो वी रीड इन भगवान बुद्धस लाइफ दैट हाउ फॉर 12 इयर्स ही एकिस्टेड ही लिव्ड ऑन वेरी लिटिल फूड ही विल ईट ओनली सम वेरी लिटिल फूड एंड देन द होल डे ही विल एंगेज इन सम और अनदर सॉर्ट ऑफ़ तपस्या ओनली देन बट इवन देन ही कुडंट अटेंड निर्वाणा वन डे ही फॉल डाउन ही फेल डाउन बिकॉज़ ही वाज़ंट ईटिंग मच। सो ऑल हिज़ फैट हैज़ मेल्टेड अवे। हिज़ स्केलेटन वी कैन सी हिज़ बोनस प्रोपिंग आउट ऑफ हिज़ रिब केज। वी कैन सी प्रोपिंग आउट ऑफ हिज़ चेस्ट दैट मच ही हैज़ थिनड एंड दैट मच ही हैज़ बिकम वीक। सो वन डे ही फेल डाउन एंड बिकम अनकॉन्शियस। देन वन वूमन हु वाज़ हु यूज़्ड टू सेल मिल्क शी सॉ दैट भगवान बुद्ध इज़ लाइंग ऑन द अर्थ देन शी केम एंड शी गव सम पायस प्रसाद। पायसम टू भगवान बुद्ध भगवान ईट दैट एंड ही गेन रिन्यूड एनर्जी एंड देन ही रियलाइज़ दैट डूइंग तपस्या इटसेल्फ इज़ नॉट द सॉल्यूशन टू अटेन निर्वाणा ही सेड दैट मध्यम पंथा दैट मिडिल पाथ इज़ नेसेसरी एंड दैट इज़ व्हाई दिस प्रैक्टिस ऑफ़ कंपैशन टुवर्ड्स एवरीवन एल्स इज़ इट हैज़ सच एन इंपोर्टेंस इन द बुद्धिज़्म। सो, फॉर देम दिस इमोशन इज़ कंपैशन। फॉर अस दिस इमोशन टू मेक आवर साधना इज़ियर टू बियर दैट इज़ डिवोशन और दैट एज़ इन वैष्णव शास्त्र सेस दैट एनी काइंड ऑफ रिलेशन विथ गॉड लाइक भगवान महावीर हेड टुवर्ड्स भगवान राम दास्य भाव और ऋषिज़ हेड टुवर्ड्स राम शांत भाव और दैट कृष्णा हैज़ टुवर्ड्स ह मदर यशोदा बालक भाव संतान भाव और मदर यशोदा हेड टुवर्ड्स कृष्णा मातृ भाव एंड गोपीस हैव टुवर्ड्स कृष्णा दैट इज़ मधुर भाव। सो ऑल दिस भाव आर इन वन वे और अदर दे हेल्प अस इन एडवांसिंग इन आवर स्पिरिचुअल जर्नी। सो दैट इज़ व्हाई दिस ठाकुर हिमसेल्फ वी कैन सी इन हिज़ लाइफ देयर आर सो मेनी ही वाज़ द किंग ऑफ़ द किंगडम ऑफ़ भाव। भावराज्य राजा छिलेनोनी। एज़ इट इज़ सेड अबाउट हिम। ही वास द किंग ऑफ द किंगडम ऑफ इमोशन एंड देयर इज नो वंडर दैट व्हेन महापुरुष महाराज और अदर्स अदर डिवोटीज दिस बॉयज हु यूज़्ड टू गो टू श्री रामकृष्ण दे हैड दे हैड डेवलप सच अ स्ट्रांग डिवोशन टुवर्ड्स मदर काली और एनी इष्ट देवता दैट दे वरशिप एंड लेटर ऑन ऑफ कोर्स टुवर्ड्स श्री रामकृष्ण हिमसेल्फ। सो दिस डेवलपमेंट ऑफ़ स्ट्रांग इमोशन इज़ वेरी नेसेसरी इफ वी वांट टू प्रोग्रेस रैपिडली इन आवर स्पिरिचुअल जर्नी। अदरवाइज व्हाट विल हैपन इफ वी सिंपली रिलाई ऑन ट्रेडिशनल मींस वी मे नॉट गो दैट फास्ट अहेड ओके दिस मच फॉर इंग्लिश नाउ हिंदी
श्रीरामकृष्ण कथामृत : तृतीय दर्शन
श्री रामकृष्ण कथामृत अच्छा कल हमने देखा परसों दिन कि किस तरह से ठाकुर कहते हैं कि विश्वास के सहारे हमारे हनुमान जी जो है समुंदर लांघ गए किंतु भगवान राम को जो है खुद को एक सेतु बांधना पड़ा था। तो यह विश्वास का कमाल है और हमको अच्छा यह भी बात है कि यदि मां सीता भी चाहती तो उनको भी तो समुंदर लाकर करे वो आसानी से आ सकती थी। किंतु हमको अल्टीमेटली यह देखना है कि जो ठाकुर जो कहते हैं यहां पे भगवान राम के बारे में या तो फिर किसी भी भगवान के बारे में यह सब एक लीला है हमको यह बताने के लिए कि किस तरह से हमको हमारा आध्यात्मिक जीवन का ठीक से गठन करना चाहिए। यह जो भगवान राम के बारे में कहा जाता है कि वो पुरुषोत्तम थे। अर्थात उनका यह जो राज्य धर्म का उन्होंने जो ठीक-ठीक से पालन किया जो पुत्र धर्म है कि पिता ने जो वचन दिया है उस वचन का पालन करने के लिए उन्होंने स्वयं स्वचेष्ट होकर के राज्य का त्याग करके 14 वर्ष का वनवास स्वीकार किया। तो ये पुत्र धर्म का किस तरह से पालन किया? पति धर्म जो है मां सीता को जब रावण ले गया तो क्यों उन्होंने इतना सब कष्ट करके वह इतना एक पूरी सेना खड़ी की वो पूरा एक सेतु बने किया बांधा और फिर किस तरह से रावण से युद्ध करके मां सीता को फिर से मुक्ति प्रदान की। तो ये पति धर्म ये जितने भी धर्म जो है हमारे शास्त्र में कहे गए हैं उन सबका ठीक-ठीक पालन भगवान राम ने किया है। यहां तक कि राज्य धर्म का किस कठोर हद से उन्होंने पालन किया। एक धोबी ने जब कह दिया कि मां सीता के चरित्र के सामने आंगुली अंगुली ये मां सीता के चरित्र के बारे में कुछ कह दिया तो इमीडिएटली जो है भगवान राम ने मां सीता का त्याग किया। अभी जैसे देखिए हम लोगों के साथ में जैसा होता है कि हम लोग सब समय कंट्राडिक्शन खोजते हैं। तो भगवान राम के जीवन में भी हमको एक तरह का कंट्राडिक्शन दिखा कि जो पति धर्म है उसका पालन करने के लिए उन्होंने रावण के चंगुल से मां सीता को छुड़ाया। तो वो पति धर्म और पालन करने के लिए उनको छुड़ाया और राज्य धर्म का पालन करने के लिए मां सीता का त्याग भी किया। तो कौन सा बड़ा है? कि पति धर्म बड़ा है ना कि राज्य धर्म बड़ा है। तो अभी यह जो डलेमा जो है वो हम सबको हमारे जीवन में ऐसा होता ही आएगा कि हमने ठीक कर दिया कि हम जो है धर्म के पथ पर चलेंगे। किंतु कभी-कभी हमारे मन में यह कंट्राडिक्शन हमारे सामने ये खड़ा होगा। यह भी धर्म का रास्ता है। यह भी धर्म का रास्ता है। किंतु जो है दोनों रास्ते एक दूसरे के ऑोजिट है। तो फिर मुझे कौन सा रास्ता अपनाना है? तो ये जो हमारे शास्त्र है ये जो हमारे पुराण है ये जो ठाकुर मास्वामी जी की बातें हैं वो उस कठिन समय में हमको गाइड करती है कि हमको किस तरह से डिसीजन लेना है। किंतु हमको ये बात याद रखना है कि यहां पे कोई स्टैंडर्ड फार्मूला नहीं है कि ये दो क्फ्लिक्ट सामने हो तो फिर आपको ये कंफ्लिक्ट को पा अपनाना है और इस इसको त्याग करना है। ऐसा जैसे वो रामायण वो महाभारत और सीरियल आती थी ना वो हम दूरदर्शन पे देखते थे वो बहुत साल पहले तो वहां पे वो दो तीर आते हैं। एक वो राम तीर फेंकते हैं। वो फिर वो एक रावण तीर फेंकता है। फिर वो तीर साम सामने आते हैं। फिर वो जिसमें से जिसका पावरफुल तीर है वो वो उसको दूसरे तीर को जो फेंक देता है और वो पावरफुल तीर बच जाता है। तो ऐसे ही ये जो कंफ्लिक्ट्स जो है वो दोनों तीर की तरह सामने-सामने आएंगे और जो फिर हमको देखना है कि जो हमारे लिए श्रेष्ठ धर्म कौन सा है। तो ऐसा नहीं है कि ये अधर्म है वो अधर्म है या तो फिर ये धर्म है कि ये ये धर्म जो है उसकी जो प्रायोरिटी है वो दूसरे धर्म से ज्यादा है तो जिसका प्रायोरिटी ज्यादा होगा जिसका वो जो मतलब मूल्यांकन ज्यादा होगा उस पर्टिकुलर समय के लिए उस पर्टिकुलर व्यक्ति के लिए फिर उसका पालन करना है दूसरे को छोड़ देना है तो राम के जीवन में भी हम देखें कि वाली को किस तरह से पीछे से उन्होंने वो तीर मार करके मार दिया तो फिर हम पूछ सकते हैं कि भगवान राम को ऐसा करने की क्यों जरूरत पड़ी? यदि उनको यदि अपने वो जो वाली और सुग्रीव की फाइट में यदि हाथ लगाना ही है तो वो सुग्रीव को कह देते भाई तुम निकल जाओ मैं ही वाली को देख लेता हूं। पहले तो मुंह पे बोला कि सुग्रीव फाइट करेगा। फिर पीछे से जाकर के उन्होंने ही वाली का वध कर दिया। वाली का खुद वध कर देते। सामने जाकर के कर देते। सुग्रीव को बीच में इन्वॉल्व करने की, सुग्रीव को पिटाई करने की क्या जरूरत थी? बेचारे ने मार भी बहुत खाया और फिर ये बदनाम भी हो गए कि हां हां भाई राम का मदद लेकर के उन्होंने वाली को जीता है। किंतु ये जितने भी कंट्राडिक्शन है वो हमको बताते हैं। ठाकुर के जीवन में भी मां के जीवन में भी ठाकुर कहते हैं कि टाका माटी माटी टाका वो जो पैसा जो है उसका जो कीमत जो है उसका मूल्यांकन है ये जो मिट्टी का जो ये है उससे ज्यादा नहीं है। ऐसा बोल करके उन्होंने पैसे को मां गंगा में वो स्वाहा कर दिया। उसमें फेंक दिया। और मां जो है मां शारदा देवी जो भी मां को दक्षिणा देते थे रुपए देते थे तो मां क्या करती थी अपने सर पर उसको लगाते थी फिर वो बॉक्स में उसको संग्रह करके रख देती थी जब स्वामी विवेकानंद ने कहा कि कोलकाता में प्लेग है और हम प्लेग प्लेग के रोगियों की सेवा करने के लिए हमने तो सेवा का व्रत लिया है। भगवान श्री रामकृष्ण ने स्वयं कहा है कि हम लोग जो है कर्म योग का इस तरह से हम जो है स्थापना करेंगे। हम कर्म योग का फॉलो करेंगे। तो पैसे तो है नहीं उस समय रोगियों की सेवा करने के लिए। स्वामी विवेकानंद ने जाहिर कर दिया कि बेलूर मठ बेच देंगे किंतु बेलूर मठ बेचकर जो पैसा आएगा उससे रोगियों की सेवा होगी। किंतु सेवा तो होती ही रहेगी। उस समय मां शारदा देवी ने कहा स्वामी जी को बुलाकर के ये मठ क्या तुम्हारा है कि तुम जो बेचोगे। देखिए कैसी बड़ी बात कर दी। स्वामी जी ने मेहनत करके इतने पूरा अमेरिका घूम-घूम करके उन्होंने पैसे इकट्ठे किए। छोटी सी उम्र में उनको जो है वो डायबिटीज हो गया। उनको अस्थमा हो गया। वो अमेरिका की जो क्लाइमेट और इंडिया की क्लाइमेट जो क्लेश हुई और उन्होंने दिन रात जो प्रवचन करके लोगों को इकट्ठा किया। लोगों से भिक्षा मांगी कि हां भाई मुझे वहां पे भारतवासियों की सेवा करने के लिए मठ बनाना है तो पैसा दीजिए। अपने को बेइज्जत होना पड़ा। अमेरिका में जाते थे। कितने लोग बोलते थे उनको कितना उनका अस्मान करते थे। फिर भी अपने मुंह पे सब समय स्मित रख के किसी के मन में अपने किसी के प्रति कटु वाक्य नहीं कर करके किसी को श्राप नहीं दे के सबको आशीर्वाद दे दे के कितना ही असम्मान सह करके उन्होंने इतना पैसा इकट्ठा किया कि बेलून मठ हो पाए और मां ने एक बात में कह दिया क्या बेलून मठ तुम्हारा है तुम बेचोगे और स्वामी जी ने हाथ जोड़ के मान लिया कि नहीं बेलून मठ मेरा नहीं है बेलून मठ है भगवान श्री रामकृष्ण का तो देखिए ये जो कॉन्फ्लिक्ट जब वो स्वामी जी कह सकते थे कि नहीं ठाकुर ने ही तो कहा है कि हमको ये जो है जो दरिद्र नारायण है मूर्ख नारायण है ये जो रोगी नारायण है उसकी सेवा करनी है। रामकृष्ण मिशन के सेंटर में जाएंगे तो यह सब आपको लिखा हुआ दिखेगा। किंतु कोई भी सेंटर जो है कभी भी अपनी एसेट बेच के सेवा नहीं करता। हम जो है हम लोग भक्तों को कहते हैं आप हमको डोनेशन दीजिए। आप हमको दान दक्षिणा दीजिए जिससे कि हम यह जो रोगी नारायण है, दरिद्र नारायण है, मूर्ख नारायण है इनकी सेवा कर पाए। और कोई-कोई डिवोटी सोचते भी होंगे। ये लोग पूरे ऐसे लग्जरी में रहते हैं। गाड़ी है, इतना बड़ा मंदिर है, इतनी अच्छी ऑफिस है, सब कुछ इनके पास में बैंक बैलेंस भी है, सबको पता है। तो उसमें से वो पैसा निकाल के सेवा नहीं करेंगे। हमसे पैसा मांगेंगे। किंतु ये जो ट्रेडिशन है मां शारदा देवी ने स्वयं शुरू करवाई है कि जो सेवा होगी ये जो प्रॉपर्टी है ये जो एसेट्स है ये सब तो ठाकुर की है। इवन हम लोग जो है यहां पे सिर्फ जो है सेवक के रूप में हम लोग यहां पे मालिक नहीं है। जिस दिन बोला जाएगा निकल जाओ तो ये पहने हुए कपड़े लेकर के मुझे जो है जो मेरी किताबें हैं उसको लेकर के मुझे चले जाना होगा। यहां पे मैंने पब्लिकेशन डिपार्टमेंट में इतना सा लाखों रुपए का फंड कलेक्ट किया होगा। इतनी किताबें बेची होगी। उससे मेरा कुछ नहीं है। ये सब यहां पे रहेगा। मुझे चले जाना है। तो ये जो जिस तरह से धर्म का पालन करना है। धर्म क्या है? वो हमारे ये जो शास्त्रों में बहुत कुछ लिखा हुआ है कि यह धर्म है, वह धर्म है, यह धर्म है। किंतु जब हम वास्तविक जीवन में धर्म का पालन करते हैं, उस समय जो कंट्राडिक्शंस खड़ी होती है, उस समय जो विरोधाभास खड़ा होता है, उसका जो उकेल है, उसका जो सॉल्यूशन है, वो हमको अवतार का जीवन पढ़ करके हमको मालूम होता है कि किस तरह से उनके जीवन में इस तरह के कंट्राडिक्शंस आए, इस तरह के विरोधाभास आए, और उन्होंने किस तरह के नियमों से उस विरोधाभासों का सॉल्यूशन लाया। हमको भी अपने जीवन में इस तरह से एक कॉमन सेंस लगा के धर्म का पालन करना है। अच्छा ठाकुर आगे कहते हैं जिसका ईश्वर पर विश्वास है वह यदि महापातक करे गो ब्राह्मण स्त्री हत्या भी करे तो भी इस विश्वास के बल से वह बड़े-बड़े पापों से मुक्त हो सकता है। वह यदि कहे कि ऐसा काम कभी ना करूंगा तो उसे फिर किसी बात का भय नहीं। यहां पे उन्होंने कौन से विश्वास की बात कही? वो जो पिछली बार हमने डिस्कस किया था कि एक आदमी समुद्र से जा रहा था। विभीषण ने उसको ये राम नाम लिखकर के वो जो लिख दे दिया तो फिर उस विश्वास के कि विभीषण ने कोई बड़ा मंत्र दिया होगा। वो जा रहा था। फिर जैसे ही देखा मंत्र में सिर्फ राम नाम है तो वो बेचारा डूब गया। पत्थर तैर गए किंतु आदमी डूब गया। पत्थरों को ये फर्क नहीं पड़ती कि हां वो इसमें उनके ऊपर में राम नाम अच्छा पत्थरों पे भी राम नाम लिखा था देख किंतु पत्थर को यह फिक्र नहीं है कि सिर्फ राम नाम लिखा है। मेरी तो एक्सपेक्टेशन और भी बहुत कुछ थी। सिर्फ राम नाम से क्या होगा? पत्थर ऐसा नहीं सोचते बोल के पत्थर तैर गए। अच्छा यहां पे एक कंट्राडिक्शन भी है। कि निवेदिता ने ही निवेदिता ने ही स्वामी जी को कहा था कि भारत कितना सुंदर देश है। यहां पे कोई चोरी भी नहीं करता। मैंने नहीं देखा कि कोई चोर भी है। तो स्वामी जी ने क्या कहा पता है? शायद कोई चोर भी होता यहां पे। क्यों ऐसा कहा कि जो कुछ नहीं करना, चोरी भी नहीं करना वो तमस का लक्षण है। तमस से उठकर के हमको रजस में जाना है। अर्थात अति कार्य्य प्रवृत्ति में हमको व्यस्त होना है। जब हम अपने को कार्यक्षम करेंगे, तभी जो है रजस से सत्व का मार्ग खुलेगा। तो स्वामी जी कहते हैं कि ये जो तमस में डूबे हुए भारतवासी है वो यदि चोरी डकैती भी करें तो भी उनमें थोड़ा सा रजस जागृत होगा। फिर यह रजस जो है उनको सत्व की ओर ले जाएगा। ये जैसे अमेरिका के बारे में स्वामी जी ने कहा। स्वामी जी कहते हैं वहां पे भोगों का चुड़ांत हुआ है। इतने भोग कर लिए हैं उन लोगों ने कि अभी जो है भोग से अभी उनको जो है धीरे-धीरे योग का रास्ता जो है उनके लिए खुलता जाएगा। तो ये जो अपने जीवन में रजस चाहिए उसके बिना जो है हम सत्व का महत्व सत्व का ये जो प्रभाव हम नहीं समझ पाएंगे जो आदमी तामसिक है लेजी है आलसी है वो जो कि एकदम निम्न तरह के उसके विचार है वो किस तरह से अपने मन को एकाग्र करेगा किस तरह से अपनी संकल्प शक्ति को वो डेवलप करेगा किस तरह से जो है वो अपने जीवन को एक श्रेष्ठत्व की ओर ले जाएगा इसलिए पहले रजस बाद में सत्व तो अब जब निवेदिता ने स्वामी जी को कहा कि भारत में कोई चोर भी नहीं है तो स्वामी जी ने कहा कि शायद कोई चोर होते। साथ-साथ में ही उन्होंने एक दूसरे डिसाइपल को कहा था कि देखो कोई कहता है ना कि मैं धर्म का पालन नहीं कर पा रहा हूं। मैं सब समय सत्य वचन नहीं कर पा रहा हूं। मैं सब समय जो है अहिंसा का पालन नहीं कर पा रहा हूं। तो इससे कोई डरने की बात नहीं है। स्वामी जी ने क्या कहा कि गाय जो है वो भी मिथ्या वचन नहीं कहती। ये जो टेबल जो है वो भी गलत हिंसा नहीं करता। ये जो पत्थर जो है वो भी कोई झूठ बात नहीं कहता किंतु गाय गाय ही रहेगी। पत्थर पत्थर ही रहेगा। जबकि इंसान जो है इंसान भले ही चाहे वो गलत बात भी कहे भले ही चाहे वो हिंसा भी करे किंतु उसके भीतर में पोटेंशियल डिविनिटी है और वो ठीक-ठीक तरह से तपस्या करेगा तो वो ईश्वर प्राप्ति भी कर सकता है। स्वयं ईश्वर हो सकता है। अहम ब्रह्मास्मि जो वेद में कहा गया है कि जो ईश्वर या तो ब्रह्म जो है वही मेरा सही-सही सत्य स्वरूप है। तो हमारे पास में वो रास्ता खुला है। तो अभी हम देखेंगे कि राम का नाम जिस पत्थर पे लिखा गया पत्थर तैर गया। किंतु ये जो आदमी है उसको राम नाम पर विश्वास नहीं होगा तो डूब गया। किंतु यदि इस आदमी को राम नाम पे ठीक-ठीक विश्वास होता तो वो स्वयं राम भगवान हो सकता है क्योंकि उसके भीतर में वही डिविनिटी है। वही ईश्वरत्व वही देवत्व है जो कि भगवान राम में था। किंतु पत्थर जो है वो पत्थर ही रहेगा। तो ये डिफरेंस है हमारे में और जो मनुष्य नहीं है इन लोगों में। इसीलिए कहते हैं कि इवन देवताओं को यदि ईश्वर प्राप्ति करनी है तो पृथ्वी पर मनुष्य जन्म लेना होगा। तभी कहीं जाकर के साधना करके वे लोग जो है ब्रह्म ज्ञान प्राप्त कर सकते हैं। अच्छा ठाकुर आगे कहते हैं जिस ये हमने फिर से पढ़ता हूं। जिसका ईश्वर पर विश्वास है वह यदि महापातक करे गो ब्राह्मण स्त्री हत्या भी करे तो भी इस विश्वास के बल से वह बड़े-बड़े पापों से मुक्त हो सकता है। वह यदि कहे कि ऐसा काम कभी ना करूंगा तो उसे फिर किसी बात का भय नहीं। यह कहकर श्री रामकृष्ण ने इस मर्म का गीत गाया। दुर्गा दुर्गा अगर जपू में आ दुर्गा दुर्गा बोले नाम करी मने बंगाली में भूल गया। मैं एक समय था मैं बंगाली जितने भी भजन थे ठाकुर के सब मुझे बिल्कुल मुखस्थ थे। वो बेल मठ में वो डेली उसका वो हम लोग भजन कीर्तन करते थे। तो वो मुझे किताब रखने की हाथ में जरूरत नहीं पड़ती थी। किंतु अभी क्या है मैं बहुत दिनों से अभी मैंने मंदिर में जाना भी छोड़ दिया है और भजन वगैरह गाना भी छोड़ दिया है। इसलिए अभी यह सब भजन जो है वो विस्मृत हो गया। दुर्गा दुर्गा अगर जपूं मैं जब मेरे निकलेंगे प्राण देखूं कैसे नहीं तारती कैसे हो करुणा की खान गो ब्राह्मण की हत्या करके करके भी मदिरा का पान जरा नहीं परवाह पापों की लूंगा निश्चय पद निर्वाण अर्थात मैं यदि मां दुर्गा का नाम लेता हूं तो मैं कितने ही चाहे पाप कर लूं मैं हक से मां को कह सकता हूं कि मां तुमको मुझे मुक्ति देनी ही होगी। ऑफ कोर्स यह जो भजन में जो कहा गया है उसका पालन करने के लिए आपको किंतु वो लोहे का सीना चाहिए। वो जो गिरीश घोष कहता था ना कि मुझे यदि यह पता होता कि श्री रामकृष्ण जैसे पाप करने वाले होते तो मैं कितना ही पाप और कर लेता। अभी तो भगवान रामकृष्ण आकर के मेरे पाप कर नहीं लेने वाले हैं। अभी उसने हंसी मजाक में ऐसा कह तो दिया किंतु सही-सही भगवान रामकृष्ण की कृपा पाने के लिए क्या करना पड़ा? वो जो ब कलमा देना पड़ा वो जो पावर ऑफ एटर्नी देना पड़ा ठाकुर कहते हैं कि तुमको जो है तुम अपने से कुछ नहीं कर पाओगे जो मैं कहूंगा वही करना है तो अभी जा उनके घर में मृत्यु हो गया उनकी लड़की का कि किसी रिलेटिव का तो वो गिरीश घोष रो भी नहीं पा रहे कहते हैं कि मेरे पास में खुद से करने के लिए थोड़ा सा भी वो अभी भी कुछ नहीं बचा है। मैं वही मुझे वही संपूर्ण शरणागत होने से भगवान रामकृष्ण जो कहेंगे वही करना है। तो ये जो संपूर्ण शरणागति है वो आनी चाहिए। तब कहीं जाकर के मां जो है आपके पाप कर्म हर लेती है। अदरवाइज ये जो कर्म का सिद्धांत है कि जो कर्म किया उसका जो फल है वो तो भुगतना ही पड़ेगा तो वो तो भुगतना ही पड़ेगा। किंतु संपूर्ण शरणागति अभी संपूर्ण शरणागति करने के लिए जिस तरह से तपस्या करनी पड़ती है तो उससे लगेगा अरे भैया पाप कर्म करके उसका फल भुगत लो वो अच्छा है बेटर देन कि ये तपस्या करना ऐसे ये जो रामचंद्र दत्त है ये जो गिरीश घोष है इन लोगों के जीवन में हमको लगता है वैसे कथामृत पढ़ के अरे वाह बहुत बढ़िया इन लोगों का तो लाइफ है कि ठाकुर के पास आए बढ़िया सा भजन कीर्तन किया और ठाकुर के आशीर्वाद प्राप्त किए और उनका तो हो गया अभी हम लोग जो है कि प्रतिदिन सुबह को उठो रात को बैठकर के जप ध्यान करो। यह दिन भर कर्म करते रहो। हमारा तो निस्तार नहीं है। हम लोगों को कभी-कभी ऐसा लगेगा। किंतु इन डायरेक्ट डिसाइल डायरेक्ट डिसाइपल तो नहीं यह गुरु गृहस्थ भक्त है। उनका जीवन हम यदि पढ़ेंगे तो हमको पता चलेगा कि ठाकुर ने उनसे किस तरह की तपस्या करवा ली है। माने बिना तपस्या के निस्तार नहीं है। वो या तो इस जन्म में हो या पिछले जन्म में होगी या तो अगले जन्म में है। अजामिल के बारे में कहते हैं ना ठाकुर खुद कहते हैं कि वो अजामिल जो है उसने पूरा जीवन जो है विष्णु को वो धिक्कारता रहा। विष्णु को जो है वो जो है उसके बारे में अपशब्द कहता रहा किंतु मृत्यु के समय उसने अपने लड़के को नारायण का नाम देकर के पुकारा। लड़के का नाम नारायण था। तो वो आखिरी समय नारायण का नाम लेने से उसको मुक्ति मिल गई। तो बोलेंगे कि अरे आखिरी समय नारायण का नाम लेने से मुक्ति मिल जाती है। तो जीवन भर यह सब करने की क्या जरूरत है? कर्म ज्ञान, भक्ति, ध्यान, तपस्या, ज्ञान, भक्ति, त्याग, वैराग्य। तो ठाकुर कहते हैं कि उसके बाद के जन्मों में उसने इतनी तपस्या की थी। इतनी तपस्या की थी कि जो आशीर्वाद है वो चरितार्थ हो गया था। अपने डायरेक्ट डिसाइपल के जीवन में भी जब ये रामचंद्र दत्त ने ये जो काकुड़गाची मठ की स्थापना की काकुड़गाची आश्रम की तब वो बड़ा हंसी मजाक करके कहते रहते थे कि अरे आप लोग जो है ये जो डायरेक्ट डिसाइपल को लड़कों को कहते रहते थे कि आप लोग क्यों इस तरह से तपस्या करते हैं? क्यों आपने भरान नगर मठ की स्थापना की? क्यों सन्यास ग्रहण किया? अच्छे से तो ठाकुर का आशीर्वाद मिल गया। अभी घर में जाकर के संसार करो। उनके आशीर्वाद से अपने माता-पिता की सेवा करो। संसार धर्म का पालन करो। ऐसा ये लोग हंसी मजाक करके कटाक्ष करके लड़कों को कहते रहते थे। किंतु फिर महापुरुष महाराज ने खुद कहा है कि हम लोग क्यों तपस्या कह रहे हैं? क्योंकि यह जो आशीर्वाद मिला है वो अपना करने के लिए। अर्थात मुझे जो मिला है वो तो एक ग्रेस है वो एक आशीर्वाद है वो तो ठाकुर का आशीर्वाद है किंतु यदि संघ की स्थापना करनी है हजारों हजारों साल के लिए यदि ये जो पृथ्वी वासी जो है उनके जो दुख दर्द करुणामय जीवन को उनके जो ताप दग्ध जीवन को उनको जो है सुकून पहुंचाना है तो वो खुद जब आशीर्वाद करेंगे तो कब कर सकेंगे कि जब उन्होंने तपस्या की है। खुद की तपस्या से भगवान श्री रामकृष्ण के आशीर्वाद को चरितार्थ किया सफल सफल किया और फिर उस सफलता पाने के बाद में ही वे लोग जो है संघ को आगे ले जा सकते हैं। अदर वाइज जैसे गृहस्थ भक्तों के साथ हुआ। वे लोग तो बिखर गए। ठाकुर का नाम लिया उस समय ठाकुर के पास आते थे। बाद में तो मठ में आते थे। वही एक मिलनाजुलना होता था। अदर वाइज सब तो अपने संसार में बिजी थे। तो वे लोग बिखर गए। किंतु लड़के लोग जो है इकट्ठा रहे और वहां से ही यह जो गंगा है त्रिवेणी जो मां है जो गंगा सरस्वती और कावेरी ये जो पूरा जो आशीर्वाद का प्रवाह जो है हमारे शास्त्र से लेकर के ठाकुर मां स्वामी जी से लेकर के स्वामी जी की ये जो फिलॉसोफी है उससे लेकर के यह जो हमारा जो अमृत प्रवाह है वो उनकी तपस्या से प्रवाहित हुआ है। नहीं कि सिर्फ रामकृष्ण के आशीर्वाद से भगवान रामकृष्ण के आशीर्वाद तो है ही है। डायरेक्ट डिसाइपल की तपस्या का भी उसमें बहुत बड़ा अवदान है। अच्छा तो आज यहीं तक कल फिर से मिलेंगे। ओम शांति शांति शांति हरि ओम तत्सत श्री राम कृष्णपणमस्तु