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Swami Vivekananda My Plan Of Campaign ·

मेरी क्रान्तिकारी योजना : स्वामी विवेकानन्द : भारतीय व्याख्यान || 18 Feb 2026

मङ्गलाचरण

ओम स्थापकाय च धर्मस्य सर्व धर्म स्वरूपिणे अवतार वरिष्ठाय राम कृष्णाायते नमः स्वामी विवेकानंद के भारत में दिए हुए भाषणों का एआई जो समरी करता है वो हम देख रहे थे कल हमने ऑलरेडी देखा कि किस तरह से स्वामी स्वामी जी कहते हैं कि इफ देयर इज

spiritual + community + civilization - framework to understand slavery

एनी क्राइंग सीन इन इंडिया एट दिस टाइम इट इज दिस स्लेवरी और यह जो स्लेवरी है उसके जो विभिन्न आयाम है एस्पेक्ट है उसके बारे में हम डिस्कस कर रहे थे। देखिए स्पिरिचुअल डायमेंशन है। जैसे हमने ऑलरेडी एक हमारा फ्रेमवर्क है कि ह्यूमन लाइफ या तो ह्यूमन स्पीशीज ये ह्यूमन ह्यूमैनिटी इटसेल्फ मनुष्य प्रजा है। उसके तीन एस्पेक्ट है। तीन डायमेंशन है। एक तो है मेरा स्पिरिचुअल लाइफ। दूसरा है मेरा कम्युनिटी लाइफ और तीसरा है सिविलाइजेशनल लाइफ। सिविलाइजेशन का अर्थ ये जो देश है, राष्ट्र है ये जो ओवर ए लॉन्ग पीरियड ऑफ टाइम ये जो उसका राइज भी होता है, फॉल भी होता है। आज आप देखिए वेस्टर्न सिविलाइजेशन इतनी स्ट्रांग थी। एटलीस्ट 10 साल पहले एकाएक अभी ऐसा लग रहा है कि चाइनीस सिविलाइजेशन अभी स्ट्रांग हो रही है। इक्वली स्ट्रांग हो रही है। इंडियन सिविलाइजेशन एक समय में क्या कहेंगे? सोने की चिड़िया के रूप में पहचानी जाती थी। यह यूरोपियन एक्सप्लोरर्स इंडिया को खोजते-खुजते अमेरिका पहुंच गए थे। और जब अमेरिका जाकर के उनको ऐसा ही लगा इंडिया पहुंच गए हैं बोलकर के वहां के जो नेटिव है अमेरिकन नॉर्थ अमेरिका साउथ अमेरिका के उसको उन्होंने नाम दे दिया इंडियन। तो देखिए कि भारत भी एक समय था कि सिविलाइजेशनल ग्लोरी उसके पास में थी। फिर हजार साल की गुलामी आ पड़ी और फिर अभी भारत धीरे-धीरे फिर से राइज हो रहा है। तो यह राइज एंड फॉल ऑफ सिविलाइजेशन होता है। कम्युनिटी लाइफ में भी देखिए कि कभी हमारा कम्युनिटी लाइफ हेल्दी है। अपने फैमिली है, अपने फ्रेंड्स है, इन केस अपने कलीग्स है, क्लासमेट है वगैरह के साथ में अपना अच्छा रिलेशन होता है कभी-कभी और कभी-कभी उनके साथ में रिलेशन बिगड़ता है। कोई-कोई लोग जो है कम्युनिटी लाइफ में काफी सक्सेसफुल होते हैं इस अर्थ में कि उनका एक बहुत बड़ा मित्र मंडल होता है। फ्रेंड सर्कल होता है। और कोई-कोई लोग है कम्युनिटी लाइफ में पूरे मिजरेबली फेल होते हैं। ना ही उनका फ्रेंड सर्कल होता है। रिलेटिव्स के साथ में भी अच्छा नहीं बनता। तो यह हो गया कम्युनिटी लाइफ और आध्यात्मिक जीवन तो हमको पता ही है कि ईश्वर के साथ में मेरा संबंध। तो यह तीन एस्पेक्ट है। यदि हमको मनुष्य को मनुष्य का मनुष्य प्रजा जो है ह्यूमन स्पीशीज जो है उसको यदि समझना है तो आप सिर्फ एक इंडिविजुअल ह्यूमन को लेने को जाएंगे कि हां यह बंगाली है। इसको बंगाली लैंग्वेज आती है। यह उसने यह स्टडी किया है और यह यह जॉब कर रहा है। इस तरह से सिर्फ देखने को जाएंगे तो उस व्यक्ति का संपूर्ण असेसमेंट आकलन नहीं होगा। आपको यह भी देखना होगा कि उसके फ्रेंड्स रिलेटिव्स के साथ में उसका किस तरह का रिलेशन है और फिर बंगाल आज का जो बंगाल है उसमें वो किस तरह से बंगाल राज्य जो है उसका क्या वो सब डायनेमिक्स है विद इन दिस डायनेमिक्स ओनली आप उसको ठीक-ठीक स्टडी कर पाते हैं तो और फिर ईश्वर के साथ में यदि ईश्वर के ऊपर में विश्वास ना भी करें तो एक कॉन्शियसनेस जो है उसका वह कॉन्शियसनेस हेल्दी है ना कि अनहेल्ी है। यह एक बहुत बड़ा फैक्टर है। चलो मैं स्पिरिचुअल एस्पेक्ट का डिस्कशन करता हूं। मैं कहूंगा कि रिलीजन या आध्यात्मिकता को यहां से दूर रखें। देन वह बात आ जाती है कि उसकी कॉन्शियसनेस हेल्दी है कि अनहेल्ी है। छोटी-छोटी बातों पे वह अपना टेंपर गवा बैठता है। शॉर्ट टेंपर है, कोरुलस है। लोगों के साथ में झगड़ा करता है। छोटी-छोटी बातों पे ईर्षान्वित हो जाता है। घमंडी है ना कि फिर उसका जो साइकोलॉजी या कॉन्शियसनेस है, हेल्दी कॉन्शियसनेस है। दूसरों के प्रति उसके मन में मैत्री, करुणा, मुदिता, उपेक्षा इस तरह की पॉजिटिव इमोशंस है। इसके भीतर में एक डेप्थ है, विज़डम है। तो यह देखिए कि इंडिविजुअल का स्टडी और यह इंडिविजुअल जिस कम्युनिटी का पार्ट है जिस कम्युनिटी के साथ में उसका इंटरेक्शन हो रहा है उसका स्टडी और वो जिस सिविलाइजेशन का पार्ट है उस सिविलाइजेशन का स्टडी ये तीनों यदि हम करेंगे तब कहीं जाकर के एक प्रॉपर उस व्यक्ति का बायोग्राफी लिखा जाएगा। आप स्वामी जी का बायोग्राफी पढ़ेंगे तो देखिए कि तीनों एस्पेक्ट यूजुअली कवर हुए हैं। इंडिविजुअली स्वामी जी की आध्यात्मिक जर्नी के बारे में लिखा गया है। फिर यह जो सोशल एस्पेक्ट है कि यह गुरु भाई है या स्वामी जी के परिवारजन है इनके साथ में स्वामी जी का कैसा इंटरेक्शन था? और फिर इन जनरल कि हां उस समय के बंगाल की क्या परिस्थिति थी? उस समय के भारत की क्या परिस्थिति थी? स्वामी जी जब अमेरिका गए तो यह ग्लोबल डायनेमिक्स किस तरह से काम करता था। यह ओवरऑल स्टडी जब आप करेंगे तभी आप स्वामी जी को ठीक-ठीक समझ पाएंगे। तो एक वेल रिटेन बायोग्राफी जो होता है किसी भी व्यक्ति का उसमें ये तीनों लेवल के स्टडीज होते हैं। तो यहां

Slavery on spiritual level

पर जब स्वामी जी कहते हैं कि भारत में यह गुलामी जो है एक बहुत बड़ा पाप है हमारे लिए। इस बात का अर्थ क्या करना है? तीन लेवल पर गुलामी को समझना है। एक तो है आध्यात्मिक गुलामी जो हमारा इंडिविजुअल कॉन्शियसनेस का प्रश्न है। यहां पर गुलामी क्या है? देखिए कि मैं एक्सटर्नल जो इवेंट्स है उसके वश होकर के कार्य करता हूं। जैसे ही किसी को मैंने अपने फील्ड में आगे बढ़ते देखा फट करके मेरे मन में ईर्ष्या प्रकट हो गई। द्वेष प्रकट हो गया। किसी ने मेरा थोड़ा सा भी अपमान किया या मुझे थोड़ा सा भी इग्नोर किया। फट करके मेरे मन में क्रोध प्रकट हो गया। मेरे मन में यह एक लालसा है कि मैं कैसे भी करके अपने को प्रमोट करूं और यदि अपने को प्रमोट करने में मुझे दूसरों को हानि करनी पड़ती है, दूसरों का अहित करना पड़ता है, झूठ बोलना पड़ता है, चीटिंग करनी पड़ती है, तो भी वह चलेगा। कैसे भी मुझे अपने को प्रमोट करना है। यह जो अपनी यह जो बेस इंस्टिंक्ट है, इसके जब हम वशवर्ती हो जाएंगे, इसके गुलाम हो जाएंगे, तो वह हो गया स्पिरिचुअल स्लेवरी। देखिए स्वामी जी एक बहुत पावरफुल स्टेटमेंट देते हैं। यह जो आज लिविंग इन ट्यून वि नेचर यह वगैरह जो बातें चलती है, स्वामी जी कहते हैं, नेचर इज ऑलवेज ट्राइंग टू क्रश यू। यू हैव टू फाइट दिस नेचर एंड यू विल हैव टू विन दिस बैटल। तो किंतु यहां पे स्वामी जी ये एक्सटर्नल एनवायरमेंट की बात नहीं करते। स्वामी जी यह जो इंटरनल नेचर है हमारा पशुवत जो स्वभाव है इसकी बात करते हैं। इसके साथ में हमको कैसे भी करके फाइट करनी है। यह जो अपना पशु स्वभाव है वह हमको सब समय पशुत्व की ओर खींचता है। किंतु यह अपना दिव्य स्वभाव भी है साथ में जो कि हमको दिव्यता की ओर खींचता है। कौन इस बैटल में जीतता है? दिव्यता जीतती है ना कि पशुत्व जीतता है। यह वो जो क्रिश्चियन वो इमेजरी होती है ना क्रिश्चियन स्टोरीज वगैरह जो होती है उसमें इस तरह का वो दिखाते हैं कि एक डेविल है और एक एंजल है। तो डेविल लाल कलर का होता है। उसके ये सिंह होते हैं। होन होते हैं सर के ऊपर में और हाथ में एक त्रिशूल जैसा होता है। तो वह डेविल एक कंधे पे आकर के उस आदमी के कान में कुछ बोलता है। उसको बुरा करने के लिए उकसाता है। फिर एक एंजल होता है। सफेद कलर के कपड़े पहने हैं। पंख है उसके सर के ऊपर में वह जो एक रिंग जैसा होता है। वह एक दूसरे कंधे पर बैठा है। और वह उसको उसके कान में जाकर के उसको अच्छे कार्य करने के लिए उकसाता है। तो यह डेविल और यह एंजेल यह दोनों उसको दो कान में दो तरह की बातें करते हैं। फिर आप वह आदमी किसको सुनेगा? डेविल को सुनेगा तो वह बुरा कार्य करेगा। एंजेल को सुनेगा तो अच्छा कार्य करेगा। किंतु यहां पे देखिए ये डेविल या एंजेल दे आर जस्ट अ प्रोजेक्शन ऑफ आवर माइंड। अल्टीमेटली तो हम मैं यदि बुरा कार्य करता हूं तो मैं और किसी को शैतान या डेविल या राक्षस इसको जाकर के मैं दोष नहीं दे पाऊंगा। मेरी जो गलती है उसके लिए मैं दोष किसको दूं? अभी आजकल ये जो सब स्कैंडल बाहर आ रहा है ना वो अमेरिका में तो कोई कहता है मुझे पता ही नहीं था कि यह इतना सब गड़बड़ कर रहा था। तो यह पता नहीं था। पता करने का किसका काम है? आप पब्लिक लाइफ में किसी के साथ इंटरेक्ट करते हैं और यदि आपको नहीं पता है कि वह आदमी कैसा है तो वह पता करने का काम तो आपका है। मुझे पता नहीं था और मैंने गड़बड़ कर दी। दैट इज नॉट एन एक्सक्यूज। खास करके पब्लिक लाइफ में और खास करके आपका यदि एक प्रॉमिनेंट पोजीशन रहता है। एक प्राइवेट सिटीजन गलती करता है वो फर्क नहीं पड़ता। पब्लिक लाइफ में आप रहते हैं प्रोमिनेंट प्लेस पे गलती करेंगे और फिर कहेंगे कि गलती हो गया तो ऐसा तो नहीं चलेगा। गड़बड़ करेंगे और फिर कहेंगे गलती हो गया तो ऐसा नहीं चलेगा। दैट इज नॉट एन एक्सक्यूज। राइट? तो यहां पर भी अपने मन में दो आवाज है। अब ये दोनों आवाज तो अल्टीमेटली अपनी ही कॉन्शियसनेस का मैनिफेस्टेशन है। कोई भी घटना होती है। मेरा जो पशु मन है वो पशु मन कहता है कि हां इसका मुझे सेल्फ प्रमोट करने के लिए अपना जगत में सांसारिक मेरा प्रगति हो। इसके लिए मुझे इस घटना का बेनिफिट लेना है। जबकि यह जो दिव्य मन है, दिव्य मन कहता है कि नहीं भले ही चाहे तुम अपना कल्याण के लिए सोचो वो सेल्फ इंटरेस्ट एज अ हमारा फंडामेंटल नेचर है। किंतु इस तरह से अपना इंटरेस्ट मत बढ़ाओ कि जिससे कि दूसरों का अकल्याण हो। तो फिर यह जो मेरे मन के दो हिस्से है पशु मन और यह दिव्य मन वो मैं किसको सुनूंगा और किसको मैं फॉलो करूंगा यह हो गया मेरा मेरी यह जो स्ट्रेंथ है मैं फ्री हूं ना कि मैं गुलाम हूं यदि मैं गुलाम हूं तो यह पशु मन है वो मेरे पर राज्य कर रहा है मैं उसका गुलाम हो गया हूं और मैं फ्री हूं इसका अर्थ है कि पशु मन जो है मेरा पाशव स्वभाव है पाशवी स्वभाव जो है मेरा उसकी चंगुल से मुक्त होकर के मैं यह जो है दिव्य एक गुणावली है वैल्यूस जो है उसको मैं फॉलो कर रहा हूं। तो यह हो गया स्पिरिचुअल लेवल पे स्लेवरी। कम्युनिटी

Slavery on community level

लेवल पे स्लेवरी का क्या अर्थ है? देखिए भारत में यह जो कास्टिज्म है नात जात प्रथा ये कम्युनिटी लेवल पे बहुत ही स्ट्रांग था उस समय में कि यदि यह उस कास्ट का है तो उसके साथ में कोई रिलेशन नहीं रखना उसको अपने घर में खाने को नहीं बुलाना इसके साथ में यह शादी वगैरह का कोई व्यवहार नहीं करना उसको गांव का कुआं है उसमें से पानी नहीं लेने देना तो वह जो सेग्रगेशन जो भारत में हो गया था स्ट्रेटिफिकेशन हो गया था सोशल स्ट्रेटिफिकेशन वो था कि सोशल लेवल पर गुलामी उसको तोड़ना था और सिविलाइजेशनल

Slavery on civilization level. India’s spiritual evolution

लेवल पर तो हमको पता ही है कि किस तरह से यह विदेशी आक्रमणों की वजह से हम लोग बार-बार जो है हमारी सभ्यता एक तरह से रिप्रेस होती रही। हमारी सभ्यता का शोषण होता रहा और हम कुछ भी नहीं कर पाए। ये ये इतना बड़ा आश्चर्य है कि भारत में देखिए ऐसा देखिए दो तरह का भारत का हिस्ट्री है पिछले 1000 साल का एक तो पॉलिटिकल हिस्ट्री है जो पढ़ने से हम डिप्रेशन में ही चले जाएंगे दूसरा है स्पिरिचुअल हिस्ट्री एक के बाद एक संत महापुरुष एक के बाद एक आध्यात्मिक माइलस्टोनस भारत ने अचीव किए हैं। अनफॉर्चूनेटली क्यों वह माइलस्टोन जो है उस समय पॉलिटिकल पावर में कन्वर्ट नहीं हुए इसके बारे में हमारा एक एनालिसिस ऑलरेडी था कि यदि कोई एक नया ट्रेट इवॉल्व होना है। अब जैसे कि ठाकुर जब हनुमान महावीर हनुमान की के दास्य भाव की साधना कर रहे थे। महावीर हनुमान को अनुसरण करके रघुवीर के प्रति दास्य भाव की साधना ठाकुर जब कर रहे थे तो इतना इंटेंसली उसमें डूब गए थे कि फिर उनकी पूंछ का जो हिस्सा है करोड़ रज्जू का आखिर का हिस्सा जहां पर यूजुअली यह जो बंदर लोगों को पशुओं को पूंछ निकलती है तो वो हिस्सा 1 इंच बढ़ गया था महावीर हनुमान की तरह और जब यह भाव का उपश शम हुआ तो साथ में ही यह हिस्सा एक इंच बड़ा हुआ। पूंछ की तरह वो फिर से सिकुड़ गया। वो नॉर्मल साइज में आ गया। तो एक इंटेंस अपना 100% प्राण शक्ति आपको उसमें डाल देना है। तभी यह इवोल्यूशन होगा। ये इवोल्यूशन जो है पूरी मनुष्य सभ्यता पे संपूर्ण मानव जाति के ऊपर में इसका असर होता है। यह हमको पता है। आजकल का ये जो मॉडर्न एंथ्रोपोलॉजी या तो फिर इवोल्यूशनरी साइंस हमको कहता है कि ये जो एप लाइक जो प्रजातियां थी अफ्रीका में काफी थी किंतु ईस्ट अफ्रीका में समवेयर अराउंड केन्या की ये जो एप था होमो इरेक्टस उसमें से यह होमोसेपियंस का इवोल्यूशन हुआ और जैसे ही यह इवोल्यूशन हुआ यह एक सिंगल पॉइंट घटना होगी होगी शायद कि कहीं पे एक ट्राइब के भीतर में यह इवोल्यूशनरी स्पार्क जैसे कि हुआ और उस ट्राइब में होमो इरेक्टस में से जो नई जो संतति थी नए बच्चे जो जन्म लेना प्रारंभ किए वो होमो सेपियंस होते गए। तो यह जो होमोसेपियंस का एक जो छोटा सा ट्राइब था वो ट्राइब फिर मल्टीप्लाई होकर के इमीग्रेशन के थ्रू पूरे विश्व में फैल गया। ईस्ट अफ्रीका से यह इमीग्रेशन प्रारंभ हुआ। यहां पे यह मिडिल ईस्ट होते या एक जब नॉर्थ में जितना आगे बढ़ा उसकी दो ब्रांच हो गई। एक ब्रांच यूरोप की ओर गई। वेस्ट में गई। दूसरी ब्रांच एशिया की ओर आई। ईस्ट की ओर आई तो देखिए कि ईस्ट में भी नॉर्थ एशिया साउथ एशिया फिर यहां पे यूरोप भी तो देखिए कि इस तरह से यह जो होमोसेपियंस एक जो स्पार्क था इवोल्यूशनरी स्पार्क उस इवोल्यूशनरी स्पार्क के द्वारा नई स्पीशीज का जन्म होता है। नई स्पीशीज का इवोल्यूशन होता है। और यह स्पीशीज जो है पूरे विश्व में छा जाती है। यदि वह सुपीरियर स्पीशीज है तो जिसको कि म्यूटेशन कहते हैं माने अपने पिता और बच्चा इन दोनों के बीच में यदि चेंज हो जाता है तो उसको कहते हैं म्यूटेशन तो ट्रेट्स फिजिकल ट्रेट मेंटल ट्रेट चेंज होती है तो इसको कहते हैं म्यूटेशन तो ये म्यूटेशन दो तरह के होते हैं। पॉजिटिव भी होते हैं, नेगेटिव भी होते हैं। तो नेगेटिव म्यूटेशन तो हमने देखे ही है। ये जो जेनेटिक डिफेक्ट के साथ में बच्चों का जन्म होता है तो ये तो हमने देखा है डॉन सिंड्रोम है ना कि फिर ये कोई भी शरीर का अंग है ठीक से काम नहीं करता है। इस तरह के बच्चों का लालनपालन करना उनको बड़ा करना फिर यह लोग समाज में कुछ पॉजिटिव कंट्रीब्यूट कर पाएंगे। यह बहुत ही डाउटफुल रहता है। बहुत ही कष्टकर उनका लाइफ रहता है। तो वह तो हमको पता है कि एक नेगेटिव म्यूटेशन होता है। तो एक पॉजिटिव म्यूटेशन जब होता है तो ये पॉजिटिव म्यूटेशंस की ये जो हारमाला जो है उसकी जो सीरीज ऑफ पॉजिटिव म्यूटेशन है वो फिर इवेंचुअली स्पीशीज इवोल्यूशन में परिणत होती है। एक के बाद एक पॉज़िटिव म्यूटेशन होते ही गए तो फिर उसका जो फ़ादर जो है वह यदि भले ही चाहे एप हो किंतु उसका जो संतान है वो ह्यूमन होगा सीरीज ऑफ़ म्यूटेशन के बाद में ओवर ए लॉन्ग पीरियड ऑफ़ टाइम 1 लाख साल ना कि 10 लाख साल ना 50 लाख साल इवोल्यूशन लॉन्ग टाइम पे जियोलॉजिकल टाइम इसको कहते हैं। जियोलॉजिकल टाइम आपका सीधा लाखों सालों में ही मेजर होता है। 10 लाख के 10 लाख साल के बाद में ये होमोइरेक्टस में से होमोसेपियंस बना। ये सीरीज ऑफ पॉजिटिव म्यूटेशन वो चलता रहेगा। तो देखिए कि यह जो ठाकुर का जो आना हुआ इट्स अ सीरीज ऑफ पॉजिटिव म्यूटेशंस। यदि मैं इवोल्यूशनरी साइंस की लैंग्वेज को यहां पे यूज़ करूं। देखिए ठाकुर इज़ नॉट जस्ट एन अवतार। ठाकुर इज़ अ नेक्स्ट स्टेप इन ह्यूमन इवोल्यूशन। यह जो ठाकुर की ये जो मानसिक ये जो ट्रेट्स जो है उनकी ये जो साइकोलॉजिकल उनकी जो वैल्यूस जो है उनकी जो साइकोलॉजिकल कैरेक्टरिस्टिक जो है उसको पूरी पृथ्वी पर स्प्रेड होना होगा। अदरवाइज क्या होगा? पता है कि जो लोग ठाकुर की वैल्यूस को फॉलो करते हैं, वे लोग इस युद्ध जगत रूपी संग्राम में जीत जाएंगे। और जो लोग ठाकुर को फॉलो नहीं करते हैं, धीरे-धीरे देखेंगे कि वो लोगों की सिविलाइजेशन की अधोगति होगी। जितनी भी बार अवतार आए हैं इतनी बार ऐसा हुआ है। जो अवतार के फॉलोअ है सब तरह के युद्ध में जीतते हैं। सब तरह के वो फाइट में जीत जाते हैं। वो रिसोर्स के लिए जो होता है फाइट ये अवतार के फॉलोअ ही जीतते हैं। जीसस जब भी आए जैसे ही आए जीसस के फॉलोअर्स देखिए कि बहुत पावरफुल हो गए। यूरोप की बात, अमेरिका की बात। ये इस्लाम का भी यही है। बुद्धिज्म का भी यही है। तो क्या है कि जब भी भारत में भी देखिए भगवान राम भगवान कृष्ण जब भी अवतार आते हैं तो अवतार को फॉलो करके ये अवतार क्या है? इज अ सॉर्ट ऑफ एन इवोल्यूशनरी लीप इन ह्यूमन स्पीशीज ह्यूमन प्रोग्रेशन। इसको आपको फॉलो करना ही होगा। ये जो अफ्रीका में यह जो इवोल्यूशन हुआ होमो इरेक्टस से होमोसेपियंस का तो जो लोग होमोसेपियंस को फॉलो करके माने होमोसेपियंस की जो प्रजातियां थी वे लोग बच गए वे लोग सर्वाइव हुए और ये जो होमो इरेक्टस और बाकी जो एप लाइक प्रजातियां थी धीरे-धीरे करके उनका एक्सटिंशन हो गया। तो किंतु वहां पर क्या था कि जेनेटिकली ही वह फिजिकल ट्रेट ट्रांसमिट होती थी। यदि आप होमोसेपियंस की संतति नहीं है तो फिर वो फिजिकल ट्रेट आप में नहीं आएगी। तो इट इट इज अ चांस कि आप एज अ होमो इरेक्टस जन्म लेते हैं ना कि होमो सेपियंस के उस लीनिएज में जन्म लेते हैं। वो चांस है। किंतु फॉर्चूनेटली स्पिरिचुअल ट्रेट जो है वो माने वो बर्थ मने वो जेनेटिक नहीं है। फादर में स्पिरिचुअलिटी है तो बच्चे में आएगा। ठाकुर के जो फॉलोअ है उनके जो बच्चे होंगे उन्हीं के भीतर में ठाकुर की भक्ति आएगी। फॉरर्चूनेटली यह जो स्पिरिचुअल ट्रेट वो जेनेटिकली ट्रांसमिट नहीं होती। डीएनए के माध्यम से ट्रांसमिट नहीं होती। यह आप अपने माइंड को रिइजीनियर कर सकते हैं। दैट इज अ ब्यूटी ऑफ दिस स्पिरिचुअल ट्रेट। फिजिकल ट्रेट जब इवॉल्व होती है आपको उसके फैमिली में जन्म लेना होगा। होमोसेपियंस के फैमिली में जन्म लेंगे तभी आप होमोसेपियंस की फिजिकल ट्रेट आप में आएगी। होमो इरेक्टस के फैमिली में जन्म लेंगे तो आपके भीतर में होमो इरेक्टस की ट्रेट आएगी। जो पंखी है तो उसका बच्चा पंखी ही होगा। पेड़ है तो उसका बच्चा पेड़ ही होगा। यदि यह घोड़ा है तो उसका बच्चा घोड़ा ही होगा। बंदर है तो बंदर का बच्चा बंदर ही होगा। उसके बाद में बंदर में से एक बार मनुष्य में इवोल्यूशन हुआ तो आप यह अपेक्षा नहीं कर सकते कि फिर से बार में 10 लाख साल वेट करके फिर से इवॉल्व होऊंगा। एक बार इवोल्यूशन हो गया तो बस मामला खत्म। अभी वे लोग जीत की ओर जा रहे हैं। बाकी सभी लोग हार की ओर जा रहे हैं। तो यह देखिए कि फिजिकल ट्रेड ट्रांसमिशन जब इवोल्यूशनर इवोल्यूशन में होता था। आपका गुड फॉर्च्यून तभी है कि यदि आप उस फैमिली में जन्म लें। किंतु आध्यात्मिक ट्रेट है। उसका ट्रांसमिशन प्राप्त होने के लिए आपको उस फैमिली में ठाकुर का जो डिवोटी थे उस समय के बलराम बाबू है। चलो डायरेक्ट डिसाइपल का तो कोई फैमिली नहीं था। किंतु अब जैसे कि ठाकुर के परिवारजन है या तो फिर यह गृहस्थ यह जो सब थे उनके शिष्य उनके फैमिली में जन्म लेंगे तभी आपके मन के भीतर में ठाकुर के प्रति श्रद्धा होगी। इस तरह का अभी नहीं है। आध्यात्मिक ट्रेड आप अपने मन को रीइजीनियर करके इवॉल्व कर सकते हैं। तो यह जो अपने मन को रिइजीनियर करना टू फॉलो अ इवोल्यूशनरी सुपीरियर बीइंग। यह जो अवतार है उनके भीतर में इस तरह की मानसिक ट्रेट्स है। इस तरह की मानसिक लाक्षणिकताएं हैं जो कि बाकी सबसे ही डिफरेंट है। फंडामेंटली डिफरेंट है। तो देखिए कि एक्चुअली जब यह इवोल्यूशनरी लीप जब आता है इवोल्यूशनरी नेक्स्ट स्टेप जब लेना होता है तब वो जो सिविलाइजेशन है या तो वो जो ट्राइब है पहले के समय में ट्राइब आज के समय में नेशंस या तो सोसाइटी उसको प्रचंड तपस्या के भीतर में से पसार होना है। स्वामी जी खुद कहते हैं कि ठाकुर भारत की 10,000 साल की आध्यात्मिकता का एक एसेंस रूप है। उसका निचोड़ स्वरूप है। जो 10,000 साल से भारत ने आध्यात्मिकता के ऊपर में ही अपना प्राणशक्ति व्यय किया। आध्यात्मिकता के भीतर में ही अपना प्राणशक्ति इन्वेस्ट किया। आध्यात्मिकता को ही लेकर के अपना सिविलाइजेशन जो गठित किया उसका यह जो गोल्डन फल जो है वह है रिजल्ट जो है वो है श्री रामकृष्ण। अभी

Sri Ramakrishna’s core teaching: Brahma satya & Jagat Satya + Kama kanchana tyaga

हमको चाहिए कि अपनी यह जो मानसिक ट्रेट्स जो है लाक्षणिकताएं जो है वो ठाकुर की लाक्षणिकताओं के साथ में मिलाए तो फिर क्या है यह इवोल्यूशनरी तपस्या हमने की है पिछले लंबे समय से उसका फल हमको मिलेगा। यदि हम ठाकुर के अनुसार अपने मन को रिइजीनियर नहीं करें। जगत मिथ्या ईश्वर सत्य और ऑफ कोर्स इसका अर्थ यह नहीं कि जगत के साथ में पूरा नाता तोड़ दे। जगत के साथ में जो नाता है उसको सुसंस्कृत करना है। अविद्या के संसार में से विद्या के संसार में जाना है। यह जो रामकृष्ण भावधारा का सबसे बड़ा लर्निंग है। पहले ऐसा होता था कि मुझे आध्यात्मिक बनना है तो जगत छोड़कर के नर्मदा के किनारे चले जाओ। हिमालय में कहीं पर चले जाओ। अकेले-अकेले तपस्या करो। अब तपस्या में सिद्धि प्राप्त करो। वो आप आज भी कर सकते हैं। किंतु ठाकुर का कहना है या तो फिर कहेंगे रामकृष्ण भावधारा समग्र ठाकुर मां स्वामी जी तीनों का जीवन एक साथ में स्टडी करेंगे तो पता चलेगा कि वो जो ट्रेडिशनल तपस्या थी ठाकुर ने खुद तो कर ली नेति नेति निर्विकल्प समाधि इति इति इस अर्थ में कि यह जगत मिथ्या है। जगत का त्याग करना है। न इति न इति यह जगत ब्राह्मण नहीं है। जगत में जो लोग रह रहे हैं मनुष्य पशुपंखी पेड़-पौधे वह भी ब्राह्मण नहीं है। ब्रह्म साक्षात्कार करना है तो मनुष्यों का भी त्याग करना है। पेड़-पौधे का भी त्याग करना है। सब जो कुछ भी है जगत में सबका त्याग करके तपस्यामय जीवन यापन करना है। इवेंचुअली निर्विकल्प समाधि प्राप्त होगी। ब्रह्मण के साथ में एकाकारित्व स्थापित होगा। ब्रह्मण के साथ में एकत्व स्थापित होगा। और उसके बाद में इति इति करके जगत में वापस आना है। यह देखकर के जिस ब्रह्म का साक्षात्कार मैंने जिस ब्राह्मण के साथ में एक रूपता मैंने निर्विकल्प समाधि में प्राप्त की थी वही ब्राह्मण से यह पूरा जगत बना हुआ है। यही पेड़ पौधे भी ब्राह्मण ही है। नाम रूप अलग है। मनुष्य भी ब्राह्मण है। बस नाम रूप अलग है। नेम फॉर्म अलग है। विभिन्न विभिन्न मुखोटे मात्र पहने हैं। भीतर में एकमात्र रियलिटी है। डिवाइन रियलिटी है। तो वह एक ट्रेडिशनल पाथ हो गया। किंतु फिर आप मां और स्वामी जी का जीवन देखिए। ठाकुर ने जिस तरह से दोनों को तैयार किया है वो जो नेक्स्ट जो जनरेशन होगी उनको क्या पाथ फॉलो करना है तो ठाकुर का जैसे था नेति नेति निर्विकल्प समाधि इति इति अभी जो मां और स्वामी जी ने जो पाथ हमारे लिए तैयार किया है इति इति निर्विकल्प समाधि इति इति अर्थात कि पहले से ही अपने हृदय के करुणा के द्वार खोल देने हैं। शिव ज्ञान जीव सेवा जो संदेश स्वामी जी ने हमको दिया और मां का मातृ हृदय देखिए मां की कहानियां एक के बाद एक आप पढ़ेंगे उनके भीतर में कितनी करुणा थी तो यह जो मां का मातृ हृदय और स्वामी जी का यह फिलॉसोफिकल अंडरस्टैंडिंग कि शिव ज्ञान जीव सेवा यह दोनों को मिलाकर के हमारे लिए इति इति पाथ तैयार होता है। इति इति पाथ से ही लोगों की सेवा करके लोगों के प्रति सहानुभूति रख के किंतु साथ में ही काम कांचन का त्याग करना है। देखिए यह डिस्क्रिमिनेशन रखना है। वो जो एक ब्लैंकेट डिनायल था नेति नेति पाथ में जगत के प्रति कामना वासना का भी त्याग करना है और जगत को भी त्याग करना है। दोनों को त्याग करना है। अभी है कि जगत के प्रति कामना वासना है। उसका त्याग करना है। जगत का त्याग नहीं करना है। यह विवेक जो है विवेक प्राधान्य है इति इति मार्ग का। वरना तो पता चला कि सेवा करते-करते जिनकी सेवा करते थे उन्हीं के माया के चंगुल में फंस करके आपने अपनी आध्यात्मिक शक्तियां गवा बैठी तो वह तो फिर काम नहीं करेगा। यानी कि आज की जो साधना है वह विवेक रूपी साधना है। एक तो हमारे मन में यह विवेक जागृत रहना चाहिए कि मैं जिनकी सेवा कर रहा हूं उनके साथ में कोई माया का अटैचमेंट ना हो जाए। एक हाथ उनसे दूरी बनाए रखनी है। उनके प्रति करुणा भी रखनी है और उनसे एक हाथ दूरी भी बनाए रखनी है। यह मेरा रांची में एक मेरा बहुत ही एक पक्का अंडरस्टैंडिंग हो गया था। हम लोग बा मैं तो प्रतिदिन गांव में जाता था। प्रतिदिन ट्राइबल लोगों के साथ में मेरा वार्तालाप होता था। उन्हीं के साथ में कार्य करना है। तो फिर क्या है? यह फ्रेंडशिप हो जाता है। अभी फ्रेंडशिप होने के बाद में फिर उनके संसार का जो कुछ भी है वह हमको बताते रहेंगे कि मेरे घर में ऐसा हुआ, मेरे घर में ऐसा हुआ। तो फिर क्या है गुड न्यूज़ होगा तो हम भी खुश हो जाएंगे। बैड न्यूज़ होगा तो हमको भी दुख होगा। किंतु एक समय मैंने देखा कि देखो इतना भी मैं इनवॉल्व होने को जाऊंगा उनकी फैमिली लाइफ में, उनकी डे टू डे लाइफ में तो फिर मैं तो सिर्फ एक सोशल वर्कर नहीं हूं। मैं तो साधु भी हूं। तो मेरा यह जो सेकंड लाइफ जो है साधु होने का उसमें फिर गड़बड़ होना शुरू हो जाएगा। तो फिर धीरे-धीरे करके उन लोगों की जो पर्सनल बातें हैं वह सुनना मैंने बंद कर दिया था। या तो फिर एक कान से सुनता था तो दूसरे से निकाल देता था। अभी कभी-कभी ना यह कठोर लगता है। कभी-कभी यह बड़ा क्रूल लगता है कि आप किसी के साथ में कार्य कर रहे हैं। उसके साथ में पर्सनल रिलेशन नहीं बनाएंगे क्या? किंतु देखिए कि यहां पर ही तो विवेक जागृत करना है। यहां पे ही तो पूरी हमारी शक्ति देखिए यदि ये नहीं करेंगे प्योर नेति नेति पाथ को फॉलो करेंगे ठाकुर की तरह क्या अपने में वो शक्ति है वो भैरव की ओर इशारा करके अपने मन को कहे कि देखो वो भैरव जैसे पत्थर की तरह स्थिर होकर बैठा है वैसे ही तुमको मेडिटेशन करना है और जैसे ही मैं ध्यान करने को बैठा वो खटखट करके आवाज होती है मेरे जितने भी जॉइंट है वह लॉक हो गए हैं और फिर जब तक जप समाप्त नहीं होता। ध्यान की समाप्ति नहीं होती तब तक यह जॉइंट खुलेंगे नहीं और ध्यान भंग करके खड़े होने की शक्ति मेरे में रहेगी नहीं। मैं ध्यान कर रहा हूं। मेरे सामने मेरे ही आकार वाला एक सुपुरुष बैठा है। साधु त्रिशूल लेकर के कहेगा यदि ध्यान समाप्त नहीं करोगे तो ये तुम्हारे सीने में यह त्रिशूल मार दूंगा। ये ये कैपेसिटी क्या अपने में है? जो ठाकुर ने किया इट इज विद इन द रियल्म ऑफ इंपॉसिबल। वो हमारी क्षमता ही नहीं है करने की। यहां पर फिर भी यह इति इति वाला पाथ जो है इति इति वाला मार्ग है। दिस इज विद इन द रियल्म ऑफ पॉसिबल। अपना घमंड ही तो सामने आता है। दूसरों के प्रति सहानुभूति प्रदर्शित करने में हम झिझकते हैं। क्यों? क्योंकि घमंड बीच में आता है। दूसरों के साथ में जब रिलेशन रखते हैं तो उनको सहाय करते हैं किंतु उनके साथ में माया के आकर्षण में ना फंसे। इसके लिए क्या आड़े आता है? तो हमारा अविवक विवेक को जागृत कीजिए। हृदय में सहानुभूति को जागृत कीजिए। देखिए यह जो इति इति वाली साधना है दैट इज विद इन द रियल्म ऑफ पॉसिबल। आम आदमी के बस की बात है जो प्योर नेति नेति साधना ठाकुर ने की है आम आदमी के बस की बात ही नहीं है तो जब आप यह कहेंगे कि अच्छा लोगों की सेवा भी करनी है और उनके प्रति सहानुभूति भी रखनी है एट द सेम टाइम उनका यह जो फैमिली जो अफेयर्स है उसमें इनवॉल्व नहीं होना है तो फिर हाउ इज इट पॉसिबल तो यहां पे आपका यह विवेक जागृत रखना है और यदि विवेक भी आप जागृत नहीं रख सकते तो फिर भले संसार में पड़े रहेंगे दूसरा क्या उपाय है इस माने इससे भी जो सहज उपाय जो आप अवलंबन करने को जाएंगे अंगूठी पहनना है ग्रह शांति करवाना है ये तो कीजिए बहुत सारे लोग करते हैं गलत कुछ नहीं है किंतु फिर उसका एक लंबा ट्रेजेक्टरी है। उसका एक अपना एक दूसरे तरह के फल मिलते हैं। सो वी हैव टू डिसाइड

cycle of evolution = diversity + mass extinction

कि ठाकुर ने आकर के एक इवोल्यूशनरी लीप लिया है हमारे लिए। तो इस इवोल्यूशनरी जो लीप है यदि हम इसको फॉलो करेंगे तो क्या होगा कि वी विल सर्वाइव। और यदि ठाकुर को नहीं फॉलो करेंगे देन वी विल गो एक्सटिंक्ट। यह जो एक्सटिंशन है मैं एक स्टडी कर रहा था इवोल्यूशन का। इवोल्यूशन में एक बड़ा ही डेंजरस कांसेप्ट है। वो है एक्सटिंशन। 200 300 करोड़ साल में एक बार एक्सटिंशन होता है। मास एक्सटिंशन अभी तक छह मास एक्सटिंशन हो चुके हैं। एक्सटिंशन का क्या अर्थ है? डायवर्सिटी एंड एक्सटिंशन। तो डायवर्सिटी का क्या अर्थ है? कि एक समय आता है इवोल्यूशन बड़ा ही बहुत ही विराट डायवर्सिटी हमारे सामने फेंकता है। विभिन्न तरह की स्पीशीज जन्म लेती है। यदि यह बैक्टीरिया है तो उसकी 1000 तरह का डिफरेंट-डिफरेंट बैक्टीरिया यह जो फंगस है तो 10,000 तरह की फंगस ये जो जमीन पर चलने वाले पशु है तो 10,000 स्पीशीज उसकी डिफरेंट-डिफरेंट टाइप की एक विराट डायवर्सिटी इवोल्यूशन हमारे सामने फेंकता है। किंतु उसके बाद में आता है एक्सटिंशन। यह जो डायवर्सिटी है उसमें से जिनके भीतर में प्रॉपर फिजिकल ट्रेट है वे बचेगी और एक्सटिंशन के भीतर में बाकी 70 टू 80% स्पीशीज का विनाश हो जाएगा। देखिए कितना भयानक लॉजिक है इवोल्यूशन का। एक तो बहुत सारे डिफरेंट-डिफरेंट टाइप की स्पीशीज को जन्म देगा और कुछ समय के बाद में जो स्पीशीज सर्वाइव योग्य है वही स्पीशीज टिकेगी और एक ऐसा एक्सटिंशन फेंकेगा कि बाकी सब स्पीशीज नष्ट हो जाएगी। सो ये इवोल डायवर्सिटी एंड एक्सटिंशन डायवर्सिटी एंड एक्सटिंशन इस साइकिल में इवोल्यूशन होता है। इवोल्यूशन ऐसे स्टेडी पेस में नहीं होता। एक विस्फोट के साथ में बहुत सारी स्पीशीज आती है और दूसरे विस्फोट के साथ में बहुत सारी स्पीशीज नष्ट भी हो जाती है। वो जो भगवान बैठे थे मां के साथ में तो एक भूम करके भड़ाका धमाका हुआ तो मां पार्वती ने जो भी है मां पार्वती ने भगवान शिव को पूछा ये क्या हुआ? तो भगवान ने उत्तर दिया कि रावण का जन्म हुआ। अच्छा फिर थोड़ी देर के बाद धूम करके दूसरा धड़ाका हुआ। तो अब क्या हुआ? तो रावण का मृत्यु हुआ। तो यह ऐसा एक विस्फोट के साथ में बहुत सारी स्पीशीज जन्म लेती है। दूसरे विस्फोट के साथ में बहुत सारी स्पीशीज एक्सटिंक हो जाती है। वही सर्वाइव करेगी जिसकी फिजिकल ट्रेट जो है वो काम की है। सर्वाइवल ऑफ द फिटेस्ट जिसको कहते हैं। तो यहां पे भी ऐसा है। यह सिविलाइजेशनल डायवर्सिटी, साइकोलॉजिकल डायवर्सिटी, कॉन्शियसनेस डायवर्सिटी वह इवोल्यूशन एक बार फेंकता है और उसके बाद में आएगा एक्सटिंशन। यह फर्स्ट वर्ल्ड वॉर, सेकंड वर्ल्ड वॉर ये जो माने महा भयानक घटना है। जो कि स्पीशीज, जो सोसाइटीज, जो नेशंस जिनके भीतर में पॉजिटिव ट्रेट थी वो बचेंगे। बाकी सबका हो जाएगा निकंदन, एक्सटिंशन। तो टुडे आल्सो देखिए हम लोग एक डायवर्सिटी के युग में जी रहे हैं। बहुत तरह के डिफरेंट टाइप की साइकोलॉजिकल कॉन्शियसनेस डायवर्सिटी सोसाइटी में है। वी हैव टू अब ठाकुर के पास आ गए हैं। हमने राइट डिसीजन ले लिया है टू रीच द राइट फॉलो द राइट पर्सन। किंतु अभी अपने पास में दो चॉइस है। या तो ठाकुर के जो उपदेश है उसके अनुसार अपने को रिइजीनियर करें। अपनी कॉन्शियसनेस को अपनी साइकोलॉजी को रिइजीनियर करें। यदि कर पाएंगे देन इसके बाद में जब एक्सटिंशन आएगा तो उसमें हम बच पाएंगे। यदि नहीं करेंगे ठाकुर को फॉलो तो फिर यह जो एक्सटिंशन जो आएगा उसमें नहीं बच पाएंगे। और एक्सटिंशन आएगा। यह मास एक्सटिंशन जिसको कहते हैं बहुत बड़ी दुर्घटना जिसमें बहुत सारे लोग मर जाते हैं। ठाकुर ना करे कि ऐसा हो। राइट? हम तो ऐसा नहीं चाहेंगे। हम तो चाहेंगे सभी का कल्याण हो। सभी फले फले माने जो भी आप फॉलो करते हैं, जिसको भी आप फॉलो करना चाहते हैं, यू फॉलो दैट? जो भी आपका माइंडसेट है, मेंटालिटी है एंड सर्वाइव हैप्पीली इन द वर्ल्ड। किंतु यह इवोल्यूशनरी हिस्ट्री जो है इस तरह का कोई गारंटी नहीं देता। इवोल्यूशनरी हिस्ट्री इज वेरी क्लियर डायवर्सिटी एक्सटिंशन। डायवर्सिटी एक्सटिंशन बस इसी साइकिल में इवोल्यूशन चलता है। तो नेक्स्ट एक्सटिंशन जब आएगा देन वही लोग टिकेंगे जो कि इस डायवर्सिटी के युग में जो प्रॉपर एक फिजिकल ट्रेट या मेंटल ट्रेट थी उसको फॉलो करेंगे। उसी डीएनए के साथ में जन्म लेंगे तो भी तभी वे लोग बचेंगे। सो लेट अस मेक अ स्मार्ट चॉइस। देखिए युद्ध है विराट भयानक युद्ध है। विराट दुर्घटनाएं हैं। इट्स अ पार्ट इन पार्सल ऑफ ह्यूमन लाइफ। उस समय यदि सर्वाइव करना है। उस हमारे लिए एक प्रचंड मानसिक शक्ति चाहिए। प्रचंड विल पावर चाहिए। एक स्ट्रांग नेटवर्क चाहिए। एक स्पिरिचुअल स्ट्रेंथ चाहिए, स्पिरिचुअल डायनेमिज्म चाहिए। तो आज के युग में यह कहां से आएगा? और कोई नहीं है ठाकुर के अलावा जो कि यह स्ट्रेंथ, विल पावर, डायनेमि, स्ट्रांग नेटवर्क जो कि हमको दे पाए। ठाकुर ही है। इस युग के तारणहर्ता, तारणकार। तो देखिए कि ठाकुर को फॉलो करना दैट इज नॉट जस्ट अ स्पिरिचुअल नेसेसिटी। इट इज़ आल्सो अ नेसेसिटी ऑफ़ सर्वाइवल। गुलामी हम किसको कहेंगे? यदि हम अपना यह जो बिष्टियल नेचर है, पशुवत स्वभाव है, इसको पकड़ करके अपने को यह नेक्स्ट इवोल्यूशनरी लिप के साथ में, नेक्स्ट इवोल्यूशनरी स्टेप के साथ में रिइजीनियर नहीं करेंगे तो हम गुलाम रह गए। जब एक्सटिंशन आएगा तो हम लोग भी वो इतिहास के फन्नों में वो अदृश्य हो जाएंगे। और यदि हम फॉलो कर पाए देन वी आर फ्री एंड बिकमिंग फ्री वी विल सर्वाइव फॉर द नेक्स्ट डायवर्सिटी एंड नेक्स्ट साइकिल ऑफ इवोल्यूशन। तो यह एक हो गया। इसके बाद में देखिए। अच्छा यह एक नया टॉपिक चालू होता है। इसको कि अभी हम कल देखते हैं। ओम शांति शांति शांति हरि ओम तत्सत श्री राम कृष्णपणमस्तु

प्रश्न: क्या mass extinction (सामूहिक विनाश) से बचने के लिए हमें केवल आध्यात्मिक बनना जरूरी है, या विशेष रूप से ठाकुर का अनुसरण करना अनिवार्य है?

ठाकुर इन पर्टिकुलर क्योंकि देखिए कि पहले पहले भी अब जैसे जीसस है राइट जीसस को फॉलो करना इट वाज नेसेसरी इन ऑर्डर टू सर्वाइव वो जो उस समय की जो हिस्ट्री आप पढ़ेंगे ना तो कांसेप्ट बड़ा ही क्लियर हो जाता है कि चर्च का सुप्रीमसी हुआ क्यों? क्योंकि वहां की राज्य शासन व्यवस्था है सब कुछ धीरे-धीरे करके टूट रहा था। अभी प्रश्न यह है कि जीसस ने जो कहा वो नया कुछ नहीं था। उसमें से बहुत कुछ तो बुद्धिस्ट मिशनरी ने वहां पर ले गए थे। एक चीज उसमें से काफी कुछ जुडाइज्म से आया था। यानी कि यह बुद्धिज्म जुडाइस्म यह दोनों का मिश्रण हमको जीसस के टीचिंग्स में दिखता है। सो टीचिंग्स इटसेल्फ वेर नॉट न्यू। बस वही है कि अवतार जब आते हैं उनकी एक स्पेशल आध्यात्मिक शक्ति होती है। दैट वी हैव टू इंबाइब।

प्रश्न: दूसरे धर्म-सम्प्रदायों से भी हमने यही सुना है—“अगर तुम हमें नहीं मानोगे, तो तुम्हारा विनाश निश्चित है।” क्या आप भी वही बात कह रहे हैं की बचना है तो हमें फॉलो करो? एक सम्प्रदाय तो यहाँ तक कहता है कि “आधी रात होने में केवल पाँच मिनट बाकी हैं, और जैसे ही आधी रात होगी, प्रलय आ जाएगा।”

ना आई एग्री विद यू। अच्छा यह जो घड़ी का उदाहरण है ना वह पता है एक्चुअली डम्स डे क्लॉक करके एक है तो यह जो न्यूक्लियर वॉच एक ग्रुप है तो न्यूक्लियर थ्रीट किस लेवल पे है बोल के वे लोग एक डमस्टे वॉच मेंटेन करते हैं तो मिडनाइट यदि होगा दैट मींस कि न्यूक्लियर एपोकलिप्स इमिनेंट है होने ही वाला है और हमेशा वे लोग उसका कांटा जो है मिडनाइट से 2 मिनट 3 मिनट दूर रखते हैं जितना दूर रखेंगे मिडनाइट्स मिडनाइट रिप्रेजेंट्स न्यूक्लियर एपोकलिप्स जितना वह मिनट का कांटा उससे दूर रहेगा 2 मिनट 2ाई मिनट 3 मिनट उतना वो अभी हम सेफ हैं। तो जस्ट रिसेंटली ये अभी क्या है जितनी भी न्यूक्लियर ट्रीटीज थी वो सब अभी एक्सपायर हो चुकी है। तो रिसेंटली साइंटिस्ट लोगों ने वो कांटा को पास में रखा है। तो कहते हैं दिस इज द नियरेस्ट टू द न्यूक्लियर एपोकालिफ्स। ये डूम्स डेक लोग है। सो दैट इज सो बट सी आई एग्री विद यू। और मैं आप ही के मत का था। अभी तक मेरा जैन बैकग्राउंड है। मुझे पता है कि कोई एक रिलीजन को फॉलो करना ब्लाइंडली फॉलो करना। सो क्या है कि आप दूसरे लोगों को एलियनेट कर देंगे। और मेरा खुद का जो स्टडी है, मेरा जो बिलीफ है, इज एक्सट्रीमली लिबरल इन दैट सेंस कि सबके प्रति सहानुभूति होनी चाहिए। माने ये सहानुभूति करुणा इज अ फंडामेंटल बिलीफ विद इन रामकृष्ण सिस्टम। राइट? तो ऐसा कैसे कहे कि हमको फॉलो करेंगे वो बचेंगे। बाकी को फॉलो करेंगे वे लोग एक्सटिंक्ट हो जाएंगे। किंतु देखिए कीपिंग दिस असाइड हिस्ट्री का लेसन जो है वह बड़ा क्लियर है कि जो अवतार को फॉलो करते हैं वही लोग एक्सटिंशन में बचते हैं। डिजास्टर आएगा ही आएगा। अवतार के आने के बाद में ही डिजास्टर आता है। व्हिच इज अ वेरी वेल नोन फिनोमिना। सभी अवतार के साथ में यही हुआ है और फिर डिजास्टर आएगा तो अवतार के फॉलोअर्स ही उसमें बचे हैं। सो हम लोग चाहे जो भी कहे माने वी वांट टू डिनाई दिस बीइंग एक्सट्रीमली लिबरल। हमको यह इनस्केपेबल लॉजिक ऑफ हिस्ट्री को तो स्वीकार करना पड़ेगा कि यह जो जीसस के समय का जो मेडिटेरेनियन वर्ल्ड था तो उस समय सेफ्टी और सिक्योरिटी थी क्योंकि यह रोमन एंपायर फिर भी फंक्शनल था। जीसस के जाने के 200 300 साल के बाद में ही यह सेफ्टी ऑफ रोमन एंपायर है वह टूट गया। रोमन एंपायर डिॉल्व हो गया। उसके बाद में जो बार्बेरिज्म स्टार्ट हुआ है उसमें एक ही पावर बचा है वो है चर्च। चर्च के साथ में जो एसोसिएटेड राजा जमींदार थे वे लोग बचे बाकी सबका एक्सटिंशन हो गया। दैट वाज़ द रीज़न कि चर्च का पावर मिडीवल एजेस में इतना ज्यादा क्यों था। आज भले ही चाहे वह लोग सेकुलरिज्म सेकुलरिज्म करें वेस्टर्न सिविलाइजेशन हमको बड़ा बखूबी पता है कि यह क्रिश्चियनिटी के साथ में वहां के लोगों का कितना क्लोज रिश्ता है। अ सेम थिंग हैपेंड इन अरेबिया और बहुत सारी ट्राइब्स थी। बहुत सारे सेक्ट्स थे। किंतु विद इन अ फ्यू इयर्स ऑफ़ अराइवल ऑफ़ मोहम्मद देखिए कि अरेबियन जो एक डिजास्टर यह जो युद्ध वगैरह हुए मुस्लिम लोग ही बचे हैं। उसके अलावा बाकी सबका एक्सटिंशन हो गया। सेम थिंग अबाउट बुद्धिज्म एंड सेम थिंग आज भी वही रिपीट ही होगा। वेदर वी लाइक इट ऑ नॉट। बीइंग अ लिबरल मैं फंडामेंटली लिबरल हूं। मैं तो चाहता हूं कि सभी लोग बचे किंतु हिस्ट्री हमको इस तरह का कोई भरोसा नहीं देती। सो नाउ इट इज अप टू अस कि आप किसको फॉलो करते हैं अवतार के रूप में। मेरा यह चॉइस गलत हो सकता है शायद कि चलो ठाकुर रियल अवतार नहीं है। शायद ब्रह्माकुमारी वाले बेटर उनका जो होगा वो वाले रियल अवतार होंगे और उनको फॉलो करके हम बच जाएंगे। सो दैट चॉइस माइट बी रोंग मेरा। किंतु यह जो कंक्लूजन है दैट इज नॉट रोंग।

प्रश्न: हर धर्म करुणा और सहानुभूति का ही संदेश देता है। इसलिए भरोसा यही है कि प्रलय के बाद जो भी धर्म बचेगा, उसमें सभी धर्मों का सार निहित होगा।

देखिए प्रिंसिपल्स के लिए आपको किसी रिलीजन को फॉलो करना ऐसा भी नहीं है। जस्ट कल ही मैं अजय बंगा वो जो वर्ल्ड बैंक का जो ये है ऐड उसका एक इंटरव्यू देख रहा था ब्लूमबर्ग को दिया है। वो कहता है कि मैं जब स्टूडेंट था तब आईक्यू के बारे में बहुत बात होती थी। जब मैं यह मास्टर कार्ड का सीईओ था तब ईक्यू के बारे में बात हुई। इमोशनल कोशंट कि इमोशनल बैलेंस होना चाहिए। इमोशनल हेल्थ होनी चाहिए। इन दैट सेंस क्या सबके साथ में सद व्यवहार करना है। अभी किंतु मैं देखता हूं कि डिक्यू इज़ वेरीेंट कांसेप्ट दिस इज़ डिसेंसिक कोशंट। सो सी इफ यू हैव दिस डिसेंसिक कोशंट राइट? तो आप इफ यू आर अ सेक्युलर आप नास्तिक हैं। डज़ नॉट मैटर। यू आर अ गुड ह्यूमन बीइंग एंड लॉजिकली यू शुड सर्वाइव। राइट? बट अगेन हिस्ट्री डजेंट एग्री विथ दिस। अवतार इज़ एन अवतार इज़ अ फिनोमिना कंप्लीटली डिफरेंट अपार्ट फ्रॉम ऑल अदर ये कहते हैं ना फिजिक्स में कहते हैं ना कि जब आप ब्लैक होल में एंटर करेंगे ना सिंगुलरिटी में फिजिक्स के सब नियम टूट जाएंगे। उसके बाद में सिंगुलरिटी का ब्लैक होल का अपना एक सेपरेट सेट ऑफ वो नियम कहो कि नियम के परे कहो। सो अवतार इज़ लाइक दैट। एक जो यूजुअल स्पिरिचुअल फिनोमिना रूल्स जो होते हैं अवतार के आने से सब टूट जाते हैं। देन इट इज़ अवतार इज़ अ सॉर्ट ऑफ़ अ स्पिरिचुअल सिंगुलरिटी।

प्रश्न: हर धर्म करुणा और सहानुभूति का ही संदेश देता है। इसलिए भरोसा यही है कि प्रलय के बाद जो भी धर्म बचेगा, उसमें सभी धर्मों का सार निहित होगा।

ना क्यों? अभी आज तो आ सकता है ना। अभी वो जो टारडिस पता है ना वो साइंस फिक्शन कांसेप्ट डॉक्टर हु का माने वो हायर डायमेंशन में क्या होता है कि बाहर से आप देखेंगे तो टेलीफोन बूथ है। भीतर में देखेंगे बहुत बड़ा स्पेसशिपिप है। हां म फिजिक्स में दिस इज़ अ विद इन अ रियल ऑफ़ पॉसिबिलिटी। ये जो हायर डायमेंशंस जो थिंकिंग है उनका मैथमेटिक्स है दैट लिटरली अलाउस यू कि बाहर से शेप छोटा है भीतर में से बड़ा है क्योंकि वो डिफरेंट डायमेंशन पे वो अस्तित्व है उसका। सो दैट इज लिटरली ट्रू विद इन फिजिक्स मैथमेटिक्स।

प्रश्न: ज्ञानयोग के “कॉस्मोस, मैक्रोकोस्म और माइक्रोकोस्म” वाले प्रवचन में ‘इन्वोल्यूशन’ का उल्लेख है—क्या आप उसी इवोल्यूशन–इन्वोल्यूशन की ओर संकेत कर रहे थे?

किंतु मैं उस पॉइंट ऑफ व्यू से नहीं बोल रहा था। आज मतलब स्वामी जी का कांसेप्ट इनवोल्यूशन का क्या है पता है? दैट इज नॉट डिवोल्यूशन। डिवोल्यूशन इज़ सेपरेट। इनवोल्यूशन इज़ सेपरेट। इस अर्थ में कि वृक्ष का इवोल्यूशन होता है बीज में से। और फिर यह जो वृक्ष है ना उसका इनवॉल्यूशन होता है वो बीज में। दैट इज कि पूरे वृक्ष का डीएनए बीज में आ जाता है। राइट? दैट इज अ साइकिल ऑफ क्रिएशन। और जो डिवोल्यूशन है दैट इज अ सेपरेट कांसेप्ट कि आज एक मनुष्य है कुकर्म करता है तो फिर नेक्स्ट जन्म जो होगा वो गरीब के घर में होगा या कोई माने कोई ना कोई फिजिकल प्रॉब्लम के साथ में होगा। दैट इज अ स्लाइड डाउन ऑन द इवोल्यूशनरी पाथ। सो शायद आप डिववोल्यूशन की यदि बात करते हैं दैट इज़ अ सेपरेट कांसेप्ट एंड इनवोल्यूशन इज़ अ सेपरेट कांसेप्ट। किंतु आज जो मैं कह रहा था दैट वास प्योरली फ्रॉम द पॉइंट ऑफ व्यू ऑफ यह जो इवोल्यूशनरी साइंस नॉट कीपिंग स्वामी जीसस आइडियाज इन माइंड दिस

प्रश्न: “नेति–नेति” का मार्ग कठिन है, पर इसमें आध्यात्मिक प्रगति तेज़ होती है और यह सेफ भी है; जबकि “इति–इति” सरल है, पर प्रगति अपेक्षाकृत धीमी रहती है और फिसलन के चांस ज्यादा है।

मैं ऐसा कहूंगा इजी है ऐसा नहीं कह के कहूंगा इट इज विद इन अ रियल ऑफ पॉसिबल सी फॉर एवरीवन बोर्ड की एग्जाम में फर्स्ट नंबर लाना इज अ रियल ऑफ पॉसिबल किंतु बहुत कम लोग ला पाते हैं। राइट? सो इट इज़ नॉट इजी बट इट इज़ विद इन द रियल मूव पॉसिबल। दैट इज़ व्हाट आई विल से। देखिए फर्स्ट ऑफ ऑल जो हिमालय के साधुओं की बात की नॉट नेसेसरी दे आर एक्चुअली फॉलोविंग प्रॉपर नेति नेति पाथ। वो जो स्वामी जी की फेमस कहानी है हिमालय में गए थे। एक साधु कंबल ओढ़ के सो रहा था। खर्राटे बुला रहा था। बैठा था किंतु खर्राटे बुला रहा है। अब यदि उसके खर्राटों की आवाज नहीं सुनेंगे लगेगा ध्यान कर रहा है। तो स्वामी जी ने नाराज हो के कहा इसके कंधे पे हल जोत दो। माने जाओ खेत में जाकर मेहनत करो तब तो कंबल ओढ़ के सो रहे हो हिमालय में आकर के तो दैट इज वन थिंग कि नॉट नेसेसरी कि आप हिमालय में है तो आप नेति नेति फॉलो कर रहे हैं। ठाकुर नेति नेति फॉलो किया। दैट वी शुड अंडरस्टैंड कि काम कांचन संपूर्ण रूप से त्याग और प्रचंड साधना दैट इज़ नेति नेति पाथ। दूसरा है कि हम लोग यहां पे रामकृष्ण सन्यास परंपरा नेति नेति पाथ नहीं है। वी हैव टू बी वेरी क्लियर। दिस इज़ इति पाथ ओनली। क्योंकि जो आप नेति नेति कहते हैं वो हो गया विध्वत सन्यास। हमारा है विविधिशा सन्यास। विविध सन्यास अर्थात कि हम लोग परफेक्ट होने के लिए आए हैं। विद्वत सन्यास यानी कि कामकांचन त्याग कर लिए हैं। अभी आपको तपस्या करनी है। सो यहां पे हम कान काम कांचन का त्याग करने को आए हैं। दैट इज विविध दिशा सन्यास। सो दैट इज अगेन कि आज आई डू नॉट नो तोतापुरी को एक देखा ठाकुर के गुरु थे। ठाकुर को एक देखा एक स्वामी जी को देखा। मां तो है ही है कि जो लोग ट्रूली नेति नेति पात के अधिकारी है और कोई नेति नेति पाथ का अधिकारी नहीं। फिर वह कंबल ओढ़ के खर्राटे बुलाने जैसा हो गया। नाम है नेति नेति का भीतर में पूरा तमस पड़ा हुआ है। दैट पाथ इज विद इन द रियल्म ऑफ इंपॉसिबल फॉर ए कॉमन मैन। आप एक्स्ट्रा ऑर्डिनरी है। आप ट्राई कीजिए। किंतु ट्राई करते-करते तमस में ना डूब जाइए। दैट एक बहुत बड़ा खतरा है। राइट? यहां पर संसार की ओर फिसलन है। वहां पर तमस की ओर फिसलन है। सो डेंजर इज इक्वल इन बोथ पाथ ओनली थिंग इज दिस इज विद इन द रियल्म ऑफ पॉसिबल दैट इज विद इन द रियल्म ऑफ इंपॉसिबल स्वामी ठाकुर ने जो किया उसका कहां वो कोई म उसके आसपास में भी हम नहीं फरकने वाले हैं माने फिसलन जितनी यहां पे है उतनी वहीं पे ही है नेवर से दैट दैट इज अ सेफर पाथ फास्टर पाथ ऑफ कोर्स ऑफ कोर्स ऑफकोर्स माने अब दास्य भाव की साधना करते हैं आपको पूछ आना शुरू हो जाए इससे से मैंने इवोल्यूशन जो 10 लाख साल का इवोल्यूशन 10 महीने में हो जाए उससे फास्टर क्या हो सकता है? दैट आई एग्री विद यू अ फास्टर पाथ।

प्रश्न: “नेति–नेति” का मार्ग कठिन है, पर इसमें आध्यात्मिक प्रगति तेज़ होती है और यह सेफ भी है; जबकि “इति–इति” सरल है, पर प्रगति अपेक्षाकृत धीमी रहती है और फिसलन के चांस ज्यादा है।

देखिए हमारे पास में कोई रेफरेंस पॉइंट ही नहीं है ना। आज शिव ज्ञान जीव सेवा की बात करें। मां का पूरा जीवन पड़ा हुआ है। एज अ रेफरेंस पॉइंट। स्वामी जी का पूरा जीवन पड़ा है। अखंडानंद जी का जीवन पड़ा है। और सिर्फ इतना ही नहीं अपने संघ के बाहर कितने महापुरुष है कि जिन्होंने अपना जीवन विनोबा भाव जीवन उत्सर्ग किया लोक कल्याण के लिए। वी हैव इनफ रेफरेंस पॉइंट टू अंडरस्टैंड व्हाट स्वामी जी इस सेइंग। ठाकुर ने जो किया ना ही वेद वेदांत में उसका कोई रेफरेंस मिलता है। इस तरह का क्या उपनिषद में पढ़ा है कि आपने वो ब्रह्म साधना माने वो क्या महावाक्य विचार शुरू करने से यह सब होगा फिजिकल नहीं उपनिषद में भी नहीं लिखा शंकराचार्य ने भी नहीं लिखा देयर इज नो रेफरेंस पॉइंट सो क्या बात करें उसके बारे में ना इसमें क्या होगा ना अपना अनुभव ही अल्टीमेटली गाइड है जैसे-जैसे हायर रियल हायर माइलस्टोनस क्रॉस करते जाएंगे यह अपने भीतर में अनपक होता जाएगा देखिए रामकृष्ण संघ के जो प्रेसिडेंट महाराज हैं शांतानंद जी वगैरह जो इल्यूमिन साल है वो उनके भीतर में बहुत सारा कुछ अनपेक हुआ होगा किंतु क्योंकि ठाकुर ने उसके बारे में कुछ नहीं कहा हम लोग क्यों कहने को जाएंगे लोग तैयार नहीं है इसके लिए बोल के वे लोग चुप हो जाते हैं

प्रश्न: जैसे शिकायत-पेटी होती है, वैसे ही हमें एक “आध्यात्मिक अनुभव-पेटी” चाहिए, जहाँ हमारे साधु अपने अनुभव गुमनाम रूप से साझा कर सकें—हमें चाहिए एनोनिमस बॉक्स

एक्चुअली पूरा हिंदू शास्त्र एनोनिमस बॉक्स ही है। वशिष्ठ ने ये किया, वशिष्ठ ने वो किया। वशिष्ठ पदवी मात्र है। वेदव्यास पदवी मात्र है। शंकराचार्य पदवी मात्र है। यह पूरा एनोनिमस बॉक्स जैसा है। सब अच्छे विचार वो शंकराचार्य के नाम पर चला दे रहे हैं। स्वामी जी खुद कहते हैं ना कि ये जो विदेश में जाएंगे ना विदेश एस सच नहीं कि इन जनरल कि एक आदमी है वो लिखेगा अपना एक किताब। फिर उसमें लिखेगा कि उसका वो जो इंट्रोडक्शन में इस किताब के भीतर में लिखे हुए विचारों के बारे में मैं अकेला दाई हूं। आई एम ओनली द रिस्पांसिबल पर्सन। स्वामी जी खुद ये कहते हैं कि जो क्रेडिट लेने की जो वासना है जो ऑथर्स की कितनी स्ट्रांग है। जबकि भारत में ऐसा जनरेशन आफ्टर जनरेशन ऋषि मुनि आफ्टर ऋषि मुनि होते गए जो कि एक पदवी के पीछे अपने को छुपा करके इतनी अच्छी-अच्छी किताब लिखते गए। इवन वेदव्यास इवन वेदव्यास हु इज़ इज़ दिस अ सिंगल पर्सन और फिर ये सीरीज ऑफ़ पर्संस हु नोज़? है ना? एक्चुअली ये तो नाम तो है ही नहीं। सो इट्स इट्स अ सॉर्ट ऑफ़ अह माने डिस्क्रिप्शन ऑफ़ अ पोस्ट कि सीईओ का पोस्ट हां है ना? तो वेदव्यास इज़ व्हाट इज़ अ मीनिंग ऑफ़ वेदव्यास। जिन्होंने वेद का जो विस्तार किया ही इज़ अ वेदव्यास। तो ये तो एक इट्स अ डिस्क्रिप्शन ऑफ़ अ पोस्ट। हां। वशिष्ठ इज़ अ डिस्क्रिप्शन ऑफ अ पोस्ट। ये जो आपने एनोनिमस बॉक्स की बात कही इसलिए ना मेरा खुद का जो बिलीफ है, ये याज्ञवल्क्य वगैरह, भरद्वाज जो ऋषि मुनि है, दे आर नॉट अ सिंगल पर्सन। दे मस्ट बी अ कलेक्शन ऑफ पर्संस जो कि बहुत सारी स्टोरीज को इकट्ठा करके फिर यहां पे कहा गया है। दैट इज व्हाट आई बिलीव। देखिए इसीलिए तो भारत में बहुत बार होता है ना कि इंडिया का प्रॉपर हिस्ट्री नहीं लिखा है। हिस्ट्री पढ़ना है तो मुगल राजा का पढ़ना है। ये जो सब एकदम स्कैटर ब्रेन जो विचार थे आई एम सो फॉर्चूनेट कि मेरा हिस्ट्री में इंटरेस्ट भी है और मैं रामकृष्ण मिशन में हूं। सो आई कैन प्रॉपर्ली अंडरस्टैंड इंडियास हिस्ट्री। वरना तो क्या था कि मैं भारत का हिस्ट्री पढ़ता ही नहीं था। फ्रीडम मूवमेंट से मैंने स्टार्ट किया पढ़ना। उससे पहले का पढ़ना ही नहीं है। पढ़ करके ही मैं डिप्रेशन में चला जाऊंगा। किंतु आज मेरे पास में वह एक एक्सपेंडेड विज़न है कि इंडियास हिस्ट्री इज़ अ स्पिरिचुअल हिस्ट्री। नहीं की है पॉलिटिकल हिस्ट्री। हमने अपनी प्राण शक्ति पूरी स्पिरिचुअलिटी में डाल दी है।

प्रश्न: हमने कितने विदेशी आक्रमण झेले—फिर भी अडिग रहे!

ना किंतु अभी तो मामला उलट गया है ना। नाउ इट इज नॉट सिंपली अ मैटर ऑफ सर्वाइवल। नाउ इट्स अ मैटर ऑफ एक्सीलेंस। अवतार देखिए जैसे इवोल्यूशन में होता है। वंस होमोसेपियंस आ गया फिर इधर पक्का है कि नाउ इट विल सर्वाइव और बाकी सबका एक्सटेंशन हो जाएगा। इवोल्यूशनरी यह जो ये है ना प्रवाह इट्स अ प्रेटी सर्टेन इन दैट वे। तो ठाकुर आ गए हैं। अभी बात सिर्फ सर्वाइवल का नहीं हमारा। नाउ वी विल एक्सेल एंड बाकी जो ठाकुर को नहीं फॉलो करते हैं। दे विल गो एक्सटिंक्ट। दिस इज नाउ रिटन इन स्टोन। अभी और कुछ होने वाला नहीं है। सो दैट वे वी आर वेरी क्लियर अगेन आपके पॉइंट ऑफ व्यू से थोड़ा सा और मेरे खुद के मैं प्री रामकृष्ण मिशन जो मेरा पॉइंट ऑफ व्यू था आज मैं अपने को सुनूंगा वहां पर बैठकर के तो मुझे भी लगेगा ये किस तरह का फनेटिज्म इसमें देखिए मैं यू विल नॉट बिलीव इट कि मैं बिल्कुल पहली बार मेलूर मठ में आया था। एक्चुअली मैं चेन्नई जॉइ किया किंतु मैं ग्रेजुएट नहीं हूं। रामकृष्ण मिशन में ज्वॉइ करने के लिए आपको ग्रेजुएशन होना चाहिए। तो चेन्नई वाले महाराज ने तो मुझे ले लिया। किंतु जैसे मेरा फोन बेलूर मठ में गया इमीडिएटली मैसेज आया कि अरे इसको तो ग्रेजुएट है नहीं तो इसको बेलूरमठ में भेजो ऑब्जरवेशन के लिए। तो मैं बेलूर मठ आया सुहितानंद जी की ऑफिस में प्रवेश किया। देयर इज़ माय फर्स्ट फेस टू फेस विद समवन ऑन हायर पोजीशन बेलूर मठ में ट्रस्टी के साथ। तो जैसे ही मैं उनकी ऑफिस में जाकर बैठा उनकी कुर्सी के सामने द फर्स्ट सेंटेंस फर्स्ट ना सेकंड सेंटेंस ही बोलते हैं वी आर ब्लाइंड फॉलोवर्स ऑफ विवेकानंद तो जैसे ही मैंने सुना मेरी नजर के सामने वो पूरा नाजी हिस्ट्री हिटलर का हिस्ट्री वो आ गया। हिटलर ने जो अत्याचार किए उसके बाद में वो जो न्यूरेमबर्ग ट्रायल वहां पे जितने नाजी लोगों को पकड़ पकड़ के लाए बोला तुमने ये इतना भयानक अत्याचार किया तुम्हारे में थोड़ा सा भी डिसेंस ही नहीं है। तो वो कहता है वी आर सिंपली फॉलोविंग द ऑर्डर्स। तो मैंने कहा हाय रे ये ब्लाइंड फॉलोविंग का अर्थ ही है कि वो लोग फेनेटिसिज्म में डूबेंगे। ब्लड शेड में डूबेंगे। मैं कहां पे आ गया? टुडे आई फील लाइक दैट आई एम अ ब्लाइंड फॉलोअ ऑफ़ ठाकुर मां स्वामी जी। दैट इज़ दैट इज दैट। किंतु ये तो समझ में आना चाहिए ना कि ही इज़ देखिए जो लोग हिटलर को फॉलो करते थे। ऐसा तो नहीं कि सभी के सभी मूर्ख थे। राइट? उसमें डिसेंट लोग भी होंगे। जर्मनी जिस जर्मनी ने आइंस्टाइन को प्रोड्यूस किया द ग्रेटेस्ट साइंटिस्ट राइट? बाक है ना कि फिर ये जो मोज़ार्ट है ना कि ये जो म कल्चरल फील्ड में साइंटिफिक फील्ड में जो वन ऑफ द बेस्ट ऑफ द बेस्ट टैलेंट को जिस देश ने प्रोड्यूस किया वे लोग तो मूर्ख लोगों का देश नहीं होंगे। एट द सेम टाइम दे फॉललोड हिटलर ब्लाइंडली। तो मैं आई एम अ वाइस पर्सन दैट और मेरा एक अंडरस्टैंडिंग है हिस्ट्री का मेरा एक साइकोलॉजिकल इंसाइट है दैट इज नेवर अ गारंटी कि मैं किसी पागल को नहीं फॉलो करूंगा ठाकुर खुद तो इस इसको यह करते थे ना एंडोस जैसे आपने कहा वो ठीक ही कहा वो जो मास्टर महाशय वो दुर्गा पूजा के कुछ दिन नहीं आए तो ठाकुर ने पूछा कहां गए थे तो के मैं केशवसेन के वहां पर गया था दुर्गा की दुर्गा पूजा की बड़ी सुंदर व्याख्या सुनी कि जब मां दुर्गा को अपने हृदय में बिठाएंगे तो लक्ष्मी सरस्वती और फिर यह गणेश कार्तिक यानी श्री विजय सब आपके साथ में आ जाएगा। वेरी नाइस डेफिनेशन मैंने सुना। तो ठाकुर ने ये सुन के फिर मास्टर महाशय को कहा देखो तुम इधर-उधर मत जाना सिर्फ यहां पे आना। सो यू आर राइट कि विदाउट कमिटमेंट यू विल नेवर गो डीपर इन दैट। देखिए अपना ये इनेट कंपास है। इवोल्यूशन अल्टीमेटली क्या है? यह जो अपनी इनेट एबिलिटी है दैट मेक्स अस सर्वाइव ना कि यह जो इनेट कंपास किसको फॉर्म मेरा तो रामकृष्ण या हिंदूइज़्म में कोई बैकग्राउंड ही नहीं है। राइट? मैं आप विश्वास नहीं करेंगे। सर्वप्रथम शिव मंदिर में गया हूं विजिट के लिए या दर्शन के लिए। दैट इज दक्षिणेश्वर। मैं बेलून मठ जाइन करने के बाद में प्रथम वो जो द्वादश शिव मंदिर है वो मेरा प्रथम विजिट है शिव मंदिर का। क्योंकि बीइंग अ जैन जैन देरासर में गया हूं और फिर मेरा एक नास्तिक मेंटालिटी डेवलप हो गया। तो मैं वहां पे भी जाना बंद कर दिया। हिंदू मंदिर का एज एस सच विजिट ही नहीं किया मैंने। तो देखिए कि ये अपना एक इनर कंपास रहता है कि जो कि हमको रियल पर्सन को फॉलो करना हम किसको फॉलो करते हैं? इवोल्यूशन में मेरा भी तो कुछ होना चाहिए ना। जस्ट मैंने ठाकुर को फॉलो किया बोलकर के मैं बच गया। इट इज नॉट लाइक दैट। मेरा भीतर का क्या कहता है मन? दैट आल्सो हैज़ टू मैटर ना। ओम