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Sri Ramakrishna's Disciples ·

Swami Akhandananda 17 June 2023 स्मृति कथा : स्वामी अखण्डानन्द लिखित

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राहुल स्वामी अखंडानंद जी महाराज मूर्ति कथा मराठी क्या बात हुई ठाकुर ने उनको दीक्षा भी दिया और उनकी जिक्र के ऊपर में अपनी उंगली से एक मंत्र पी लिख दिया इतना हमने ऑलरेडी देखा अभी आगे देखते हैं अखंडानंद जी महाराज जी चैप्टर का इस चैप्टर का नाम है सच स्नेहा शिक्षा शोषण पूर्वक ठाकुर अखंडानंद जी को किस तरह से सीखने हैं तो महाराज जी लिखने हैं एक दिन एकादशी का दिन था अखंडानंद जी महाराज अपने हाथ में एक कदबुच लेकर के वाटर मिलन जिसको बोलते हैं वो लेकर के ठाकुर के पास में दोपहर को उपस्थित हुए ग्रीष्मो कल गर्मी का समय था एक-एक ग्रीष्मयर प्रचंड रूतरे मुख लाल हुए थे वो वैसे ही तो वो बच्चे थे मैंने उम्र में कम थे 15-16 साल की उम्र थी ठाकुर ने कहा था की इसका आभार और मैंने उसका और भी छोटा होना जब ठाकुर ने कहा अखंडानंद जी को के तुमने मुझे पहले देखा है और खानदान जी कहते हैं हां मैं जब बिल्कुल छोटा था तब आपको देखा था तो ठाकुर हंसने लगे वैसे ही तो ठाकुर के सामने बच्चे हैं ऊपर से वो कहते हैं मैं और भी बच्चा था तब देखा था तो वैसे ही उम्र कम है और दोपहर में गर्मी में आए हैं कोलकाता से वो हाथ में वाटर मिलन है चेहरा पूरा लाल हो गया है और वो पसीने से बदन जो है पूरा भीगी गया है ठाकुर कचीगिए तोर मूष्ठी दिए प्रणाम करते ही टिनी भारी खुशी हुई वाटर मिलन जो है वो तरबूज वो उनके पैरों में रखकर के प्रणाम किया तो ठाकुर बड़े खुश हो गए देखो ठाकुर ने खुद मास्टर महाशय को बोला था की जब मेरे पास में आते हो तो एक पैसे का कुछ लेकर के आना अर्थात ही ईश्वर के पास या तो गुरु के पास कुछ जाते हैं तो हमेशा दक्षिण लेक जाना है ये ठाकुर ने सिखाया था तो सभी को सिखाया था अभी ये तो क्या है अखंडानंद जी को तो ये सब बोलने की भी जरूर नहीं ब्राह्मण कुमार है ब्राह्मण के लड़के हैं वो संस्कार उनके पहले से ही है तो जब भी ठाकुर के पास आते थे तो ऐसा कुछ छोटा सा वो लेकर के आते थे तो जब वो तरबूज लेकर के आए उनके पास में वाटरमेलन और ठाकुर के पैरों में रखा ठाकुर बड़े खुश हो गए एक तो है की वो उनको मिलने के लिए भी आए हैं दूसरा की वो जो हमारी परंपरा जो है गुरु के पास कुछ लेकर के जाना उसकी भी उन्होंने रक्षा की है तो यह दोनों देख कर के ठाकुर बड़े खुश हुए और अखंडानंद जी को बता पूछा क्या अभी तुम यहां पर कालीबाड़ी में खाओगे तो अखंडानंद जी ने उत्तर दिया जी ने अभी इसका करण क्या था इसका करण यह था की जैसे हमने ठाकुर की खुद की कहानी में पड़ा है लीला प्रसंग में पड़ा है की जब कालीबाड़ी का निर्माण शुरू हुआ था तब रश्मानी ने वो सभी ब्राह्मणों को इकट्ठा करके वह जो उनके पास से ये सब वो विधि वगैरा के बड़े में पूछा था उसमें रामकुमार ज्योत तो रामकुमार को उसे सब पसंद ए गया रामकुमार के साथ में कम करना उनका जो ओपिनियन है अभिप्राय है सुन करके तो राष्ट्रमणि ने रामकुमार को ठाकुर के बड़े भाई को काली वादी में कुचक के रूप में रख दिया था तो अभी यह तो अभी रामकुमार तो वहां पर र रहे हैं कालीबाड़ी में पूजा भी कर रहा है सब कुछ कर रहे हैं ठाकुर का ऐसा है की रानी रश्मोनी तो कई वर्ष वन छोटी जाट कई जा शक्ति है मैन ब्राह्मण से वह नीचे जाति है तो ठाकुर कहते हैं की मैं इनके घर का इनके पकाया हुआ खाना या तो इनकी इनका जो मंदिर है उसका खाना में क्यों खाऊंगा बोलकर के क्या करते थे वो वहां से वो ये कच्छ अंडा ले लेते थे दान वगैरा ले लेते थे वहां के कालीबाड़ी के भंडार से और वो गंगा के किनारे बैठ करके अपने से अपना खाना जो है भारत वगैरा राइस अपने से वो पाक दिया करते थे या तो फिर वो ठाकुर खुद कहते हैं की वो दक्षिणेश्वर में किसी ब्राह्मण के घर पे चले जाएंगे जाकर के कुछ बोलेंगे भी नहीं वैसे ही चुपचाप बैठे रहेंगे फिर उनको अभी तो अभी क्या है ठाकुर तो देखने में एकदम उनका चेहरा तो इतना खूबसूरत था वो तो दिव्या शक्ति जो है चेहरे पे चालान वो झलक रही थी तो जी किसी भी की घर में जाएंगे तो वहां की वो जो माताजी है वो बड़ी औरत है वो उनको बड़ा वो उनके ऊपर में प्रेम हो जाता बच्चे की तरह मत रबा उनके हर है वह पर इस फुट पता था ठाकुर को बिल्कुल बच्चे की तरह बिठाकर के लोग उनको खिलाने हो ठाकुर की उम्र भी उसे समय कितनी होगी 15 16 17 साल ऐसी कुछ होगी एग्जैक्ट में भूल गया तो 36 से लेकर के 54 ये जितना होता है उतना होगा ठाकुर की उम्र तो अभी क्या है की 54 55 तो ठाकुर भी ऐसा करते थे की वो कालीबाड़ी का खाना नहीं खाएंगे तो यहां पे भी वो अखंडानंद जी का ऐसा था की अखंडानंद जी का तो पहले से ही था स्वापक भविष्य अभी शान अपने खुद से हाथों से बनाया हुआ और उन्होंने जो ऑफिशल ना होगा वही वो जो राइस वगैरा जो होता है वही खाएंगे और कुछ नहीं खाएंगे तो ऐसे वो सब उनके कड़े वो नीति नियम थे जिसमें वो रहते थे वो बाल ब्रह्मचारी थे बोल करके इसलिए जब ठाकुर ने पूछा की क्या कालीबाड़ी में खाना खाओगे तो अखंडानंद जी ने का दिया नहीं मैं यहां पे नहीं खाऊंगा अब देखिए कभी कभी आज किसी को हंसी आएगी की ये जो ब्राह्मण लोग जो है यह सब पुराने रीति रिवाज फॉलो कर रहे इसका क्या लाभ है यदि आप अपने अपने हाथ से खाना बनाएंगे तो इटलीस अब जो धन है अन्ना है तरकारी है वगैरा तो आप और किसी से खरीदने हैं जो की ब्राह्मण नहीं है जो पकता है धन वगैरा तरकारी वगैरा वे लोग भी तो ब्राह्मण नहीं है तो उन्होंने जो खाना जो अन्य पकाया है वो आप उंग्रहण करके उसको अब पाक करके खाता हैं तो फिर क्या आपका वो र गया ऐसा कुछ लॉजिक आप दे सकते हैं किंतु देखिए स्वामी जी ने खुद कहा है की आज का ये जो मॉडर्न जो एक लड़का जो है जो की ब्रिटिश सभ्यता से पश्चिम सभ्यता से इतना वो चकाचौं तो हो गया है की वो अपने पुरखा के सभी नीति नियम और अपने पुरखा की जो अपनी परंपरा है अपनी वो जो ग्रेट ये जो साधन पद्धतियां है हमारे पुरखा के प्रति ये जो कहानी है रामायण महाभारत की यह कहानी कहो ना की हमारी संस्कृति का हो हमारी परंपरा कहो ना की हमारी साधन पद्धति का हो बड़े गुण कहो हमारे देवी-देवता सबको वह उसके ऊपर में वो कटाक्ष वृत्ति उसकी ए गई है मैन स्वामीजी उसे समय कहते थे 1893 1896 उसे समय की बात है जब उसे समय ऐसा था आज तो और भी ज्यादा कितना है अभी तो क्या है की कटाक्ष वगैरा भी कोई जरूर नहीं है अब आजकल लड़के तो कंपलीटली इग्नोर करता है आप देखेंगे की अब हम लोग कभी रामकृष्ण मिशन में रहते हैं तो यहां पे वो सब श्रद्धालु जान आते हैं तो उनको देखकर के लगेगा अरे भैया देखो समझ में कितनी श्रद्धा भक्ति है भगवान के प्रति सिर्फ रामकृष्ण मिशन में नहीं किसी भी मंदिर में चले जाइए अभी वो बड़ा राम मंदिर बना रहा है अपने को बन रहा है तो क्या है की सब जगह पे देखेंगे की वो ऐसे मंदिर में तो इतने सारे लोग आते हैं तो फिर लोगों की श्रद्धा भक्ति क्यों नहीं है तो पता ही ये किस तरह का है बहुत सारे लोग अपने रामकृष्ण मिशन में तो नहीं यहां तो जिम श्रद्धालु भक्ति आते हैं किंतु ये जो ट्रेडिशनल मंदिर होते हैं ना बहुत सारे समय लोग इसलिए जाते हैं जिससे की वो जो कष्ट है जो अनिष्ट है जो अशुभ थे उनके जीवन में वह कट जाए और कुछ शुभ उनको प्राप्त हो तो अशुभ चला जाए शुभ की प्रताप हो इसके लिए वो मंदिर में जाते हैं ऐसा नहीं है की वो ईश्वर के ऊपर में कोई जेनुइन श्रद्धा है तो सभी ऐसे नहीं होता है किंतु ऐसा एक परसेंटेज है इस सोसाइटी में तो ये जो अपने धर्म या तो साधन पद्धति के प्रति ये जो एक प्रकार की आश्रद्धा ए जाना ये जो है ना ये बड़ा ही डेंजरस है इस समाज के लिए और इसके लिए हम लोग खुद कम जिम्मेवार नहीं है हम लोगों को तो एक आदर्श स्थापित करना है हमारे जीवन से हमारी वाणी से हमारे उद्देश्य और ये इस तरह से वो प्रचार वो क्लास वगैरा करके तो सभी लोग नहीं कर पाते हैं या तो फिर इसका प्रॉपर इसका प्रोपेगेशन नहीं होता है वॅटीवर डी रीजन हम लोग जो है समाज के कितने परसेंटेज तक पहुंचने होंगे 1% 2% किंतु देखिए की भारत की 140 करोड़ की पापुलेशन है सभी चाहे हिंदू नेवी हो किंतु वो भारतीय संस्कृति में भारत की पूर्णिमा भूमि ने उन्होंने जन्माग्रहण किया है इस मिट्टी से उनका देख तो बना है तो ये पूनिया भूमि के जी मिट्टी से जिनका दे तो बंता है वो सबके भीतर में मां सीता का मां राम का संस्कार तो होगा ही होगा एन हो ऐसा हो ही नहीं सकता तो फिर अभी इसी पूनिया भूमि में सीता और राम के ऊपर में भगवान राम और मां सीता के ऊपर में किस तरह की अभद्र यह सब टिकट टिप्पणियां या तो फिर ये जो सब एंटरटेनमेंट उनके ऊपर में जो बनते हैं तो देख करके हमको खुद को हृदय में व्यथा हनी चाहिए की अरे हमारी संस्कृति की इस तरह से वो उसको क्या कहेंगे उसको टच नगद उसकी करके ये लोग किस तरह से प्रेजेंट कर सकते हैं तो जो भी है अभी नहीं होता है लोगों के मां में तो क्या करेंगे ऐसा ही अभी एक दूर चला है ऐसा ये कल ही उनका समय चला एक्चुअली देखिए ये मेरे मां में बहुत बार आता है की ठाकुर के आने से तो सतयुग आरंभ हो गया स्वामी जी ने हो रहा है तो फिर यह कलियुग की इतनी साड़ी यह निशानियां क्यों दिखाई देती है कलयुग के इतने सारे संज्ञाएं क्यों दिखाई देती है तो इसका एक सीधा सा रीजन है की क्या है की देखिए समाज में जो शुभ और अशुभ इस्ट और अनिष्ट गुड और इविल ये दोनों का जो प्रमाण है हमेशा 50-50 रहेगा वो ना ही बढ़ेगा ना ही कम होगा ऐसा स्वामी जी ने का के गए हैं तो फिर क्या है ना की आप चाहे जितना भी अच्छा कर ले उसके साथ-साथ में बड़ा रहेगा ही राम राज्य में जी तरह से वो रावण भी था और वो जो एक ऐसा भी व्यक्ति था जो की मां सीता की चरित्र के ऊपर में जिसने संदेह प्रकट किया था तो ऐसे लोग राम के राज्य में थे तो आज आज भी मतलब रामकृष्ण के राज्य में भी ऐसे लोग थे तो भी क्या करेंगे सतयुग का क्या अर्थ होता है ऐसा नहीं है की सतयुग का अर्थ यह की समाज में से अनिष्ट है या अशुभ है संपूर्ण रूप से चला जाए है उसको एक सहज रास्ता मिल जाता है मैं अपने खुद की बात करूं मैं मेरा कोई बैकग्राउंड नहीं है धर्म में मेरा कोई बैकग्राउंड नहीं है की मैं बचपन से ऐसा कोई रामायण महाभारत की कहानी पढ़ना था जैसा एक एक सेकुलर हाउसहोल्ड होता है ऐसा मेरा भी था की वो चलो भाई बीच-बीच में एक जाना होता है मंदिर में तो चले जाते थे किंतु ऐसा कोई विशेष लगाऊं ना ही मेरे फैमिली में से किसी का तो नहीं मेरा था मैं अपने को पूरा एक सेकुलर मानता था की वह धर्म वगैरा तो कौन करेगा तो जिनका की या तो फिर कोई बहुत बड़ी समस्या ए गई है जिससे की वो छटना चाहता है या तो फिर वो भी वो ठाकुर के पास ईश्वर के पास जान का समय हो गया है तो थोड़ा बहुत पूनिया का वो जो एक है बैंक बैलेंस जमा कर दें तो वो थोड़ा धर्म वगैरा करेगा हमको यंग लड़कों को यह सब करने की क्या जरूर है मेरा ऐसा मानना था और मैंने कहा भी था जब मैं साधु होने के लिए यहां पे ए रहा था उसके आगे दो-तीन दिन पहले एक दो मित्र मेरे घर पे आए थे और यही बात मुझे का रहे थे अभी क्या है की हम लोग तो बीच-बीच में थोड़ा बहुत डिस्कशन ज्यादा था तो मेरी बात मुझे सुना रहे थे तब मैं मां में किंतु हंस रहा था की देखो की मैं कहां पे था और कहां पे ए गया तो सतयुग में ये है की यदि आपके मां में एक जुनूंस पार्क रहेगा ना भले ही चाहे आपको पता भी नहीं है तो वो स्पार्क जो है ईश्वर की प्रति जान का ये मोक्ष तो जिसको कहते हैं अपने शास्त्र में ईश्वर के प्रति श्रद्धा भक्ति का यदि एक छोटा सा तेल का भी अपने हृदय में है चिंगारी भी है तो उसको इस तरह से हवा मिलेगी उसको इस तरह से इंजन मिलेगा की वो चिंगारी जो है वो अपनी वो घुमागनी में प्रज्वलित होकर के वो उठ जाएगी ये सतयुग का वो प्रभाव है ये सतयुग का परिणाम है यदि मैं कलयुग में जन्म लेट तो मैं हो सकता है कभी भी धर्म के अध्यात्म के रास्ते पे ना आता जैसे की मैं इस सतयुग में ए पाया हूं तो ऐसा नहीं है की सतयुग में अनिष्ट है या तो जो की अशुभ है वो पूर्ण रूप से मिट्टी जाता है अशोक का जो 50-50 प्रमाण है इस समाज में इस पृथ्वी पे वो तो हमेशा बना रहेगा वो सत्य युग हो अटरिया युग हो ना की द्वापर हो एन की काली हो एन की तरह हो वही है की सतयुग में धर्म के प्रति जिसकी अपने सब कॉन्शियस मन में भी यदि एक इच्छा है एक ऐसी वासना है की ना में ईश्वर के इस ईश्वर के बड़े में चिंतन करूं ईश्वर की प्रताप करूं या तो फिर ये मृत्यु के पैर क्या है जैसे वो नचिकेता का है ना तीन नचिकेता और यह सांभर नचिकेता यह के राज्यों में जाता है तो फिर उनको पूछता है की वो कहता है की मैंने बहुत लोगों से सुना है बहुत विभिन्न ओपिनियन मैंने सुन हैं किंतु मैं ठीक-ठीक मृत्यु के देवता से जानना चाहता हूं की मृत्यु के पैर क्या है लोग विद्वान ब्राह्मण लोग 10 तरह के 10 बातें करते हैं और वही लोग कंफ्यूज है इसलिए जो यह हैं जो मृत्यु का देवता इस के मुंह से मैं सुना चाहता हूं की मृत्यु अरे क्या है तो इस देखिए की नचिकेता क्योंकि वो सतयुग में जी रहा था भगवान यह से स्वयं वो वार्तालाप कर सकता था आप का सकते हैं की ये इमेजिनेशन है या कल्पना है जो आप चाहे उसको का सकते हैं कोई रहेगा बिल्कुल श्रद्धा पूर्वक की नहीं भगवान यह हैं और नचिकेता ने सही उनको जो है उनकी पार्ट वंदना की थी और हम बाद वंदना तो नहीं कहेंगे एक्चुअली क्या है की यह तो बेचारा वो डर गया था की किस तरह से नचिकेताभ बाल ब्रह्मचारी है उसके राज्य में तीन दिन रुक है तो फिर बिना उसका स्वागत किया हुए बिना वो जो मेहमान के रूप में उसकी जो खातिर करनी चाहिए बिना उसके जो रहा है तो यदि श्राप दे देगा तो मेरा क्या होगा की हम बेचारा डर गया था और तीन दिन रुक था तो तीन वरदान दिए थे तो जो भी है वो सत्य युग में नचिकेता के पास में वो वो अपॉर्चुनिटी था की भगवान यह से मिले ये अपनी श्रद्धा से हम इसको 100% सही भी मां सकते हैं कोई रहेगा की नहीं ये एक अप है एक कहानी है जो की हमको शिक्षा देने के लिए बनाई गई है अब जो भी उसको चाहे मैन किंतु ये माना नहीं कर सकते की जी ऋषि ने इसको लिखा है उसे ऋषि के मां में ये घटना जो है उसमें आकर ली होगी ये घटना जो है उसमें एक वो जो वो सही में वो घाटी होगी जैसे की वो कृष्णा के बड़े में ठाकुर और स्वामी जी का जो सम्मान है ना की भगवान स्वामी जी कहते हैं नरेंद्र तो पता है की वो एक फॉरेनर्स को पढ़ना था सब वेस्टर्न फिलॉस्फर्स को तो वेस्टर्न फिलॉस्फर्स क्या बोलते हैं की ये जो पूरा हिंदू धर्म है अंदर श्रद्धा के ऊपर में बना हुआ है तो ठीक है तो स्वामी जी के मां में ऐसी सब परिकल्पना आई थी थोड़ी बहुत बहुत ज्यादा नहीं लेकिन थोड़ी बहुत तो थी तो अभी बोल दिया एक दिन की भगवान कृष्णा है की भी नहीं की इसको पता तो ठाकुर क्या कहते हैं की देखो तुम कृष्णा लीला में विश्वास करो एन करो किंतु जो भगवान व्यास ने और व्यास मनी ने कृष्णा लीला का जो ये आलेखन किया है उनके मां में तो ये लीला हुई होगी तो यदि वास्तव क्या है और मां के भीतर में जो चल रहा है क्या वास्तविक इस माया के राज्य में आप क्या कहेंगे वो जो किसान की कहानी है ठाकुर कहते हैं की वो किसान सोया हुआ था सुबह के उठा तो उसकी बीबी रो रही है जोर-जोर से का रही है की अरे जी सुनो हमारे दो बच्चे थे वो हमारा एक जवान लड़का था वो बेचारा मा गया तो किसान रन इन रहा है चुपचाप बैठा है सोच रहा है तो उसकी बीबी बड़ी नाराज हो गई अरे तुम जोर से चिल्ला के कहती है नाराज हो करके आप किस तरह के पत्थर दिल इंसान है की आपका एक मंत्र लड़का जवान लड़का मा गया आपकी आंखों में आंसू नहीं है चेहरे पे विश्वास नहीं है क्या हुआ आपके साथ में तब किसान क्या कहता है की देखो मैं जब सो रहा था तब मुझे सपनों में आया की मैं राजा बना हुआ हूं और मेरे चार-पांच बहुत ही सुंदर नौजवान राजकुमार है तो अभी सपना भांग हो गया है तो अभी मैं सोच रहा हूं की मेरे जो चार-पांच राजकुमार थे उसको गवाने का मैं शौक करूं ना की एक जो किसान का एक गवार लड़का था मेरा उसको घूमने का शौक करूं क्या सही क्या गलत है मैं राजा था सपना में वह सही है ना की ये मैं जागृत अवस्था में किसान हूं वो सही है कौन रहेगा की जागृत अवस्था या स्वप्नवस्था दोनों में से क्या सही क्या गलत शास्त्र तो कहता है दूरी ये अवस्था है स्वप्न जागरण और सूसूक्ति दिन के पैर टूटी अवस्था जो है वही सही अवस्था है इस में हमको सही-सही ये सृष्टि का स्वरूप मेरा खुद का जो असली स्वरूप है वो तुरिया अवस्था में वो तो हमको ज्ञात होता है नहीं किया स्वप्न जागृत और सूसूक्ति ने तो संसार में शुभ और अशुभ का 50-50 परसेंटेज जो प्रमाण है वह बना ही रहेगा सतयुग में जो एक चीज होती है जैसे यह जो नरेंद्र था ये गंगाधर महाराज थे यह विज्ञान महाराष्ट्र राज्य महाराष्ट्र बाबूराम महाराज थे योगेंद्र महाराज थे यह लुक के मां में एक जिज्ञासा वृत्ति था निरंजन महाराज वो तो क्या थे भूत प्रेत यूमिडियम थे उसे समय ऐसा होता था की वो किसी मीडियम को बिठाते हैं मीडियम क्या करेगा आप किसी मीडियम के पास में जाइए और उसको बोलिए की मेरे जो अमृत अमृत पिताजी है उसके साथ में मेरी बात करवा दीजिए तो वो क्या करेगा की वो ऐसा वो संपर्क आंख बैंड करके वो ट्रांस में चला जाएगा ना कुछ वो मैन सुक की अवस्था में चला जाएगा और फिर कुछ अगड़म बगड़म बातें करेगा फिर आकर के बोलेगा की हां आपके अमृत जो संबंधी है उसके साथ में मैंने बात की है और वो आपको ऐसा बता रहा है ये सब पूरा मतलब दो नंबर ही लोगों को मतलब ठगने वाला ये सब मामला है तो निरंजन महाराज इस तरह से मीडियम थे अभी वो थकते नहीं थे लोगों को वो जिम नहीं मानते थे की वो मारुताल लोगों के साथ में बात कर सकते हैं तो जो भी है अभी ये तो बच्चे थे और ये सब जिज्ञासा था जब ठाकुर के पास में गए तो ठाकुर ने उनको क्या कहा की बच्चे अभी तुमको सही भूतनी पड़ा है अभी ये बुद्ध तुमको छोड़ने वाला नहीं मां काली ने स्वयं निरंजन महाराज को पड़ा था तो अभी ठाकुर नहीं होते सतयुग नहीं हुआ होता तो निरंजन महाराज वही वह भूत-प्रेत के साथ में बात करके वो किस दिशा में चले जाते क्या पता तो अभी नरेंद्र है निरंजन महाराज ये सब तो ठाकुर के सॉन्ग स्पर्श में आकर के ही उनकी अध्यात्म सही-सही अध्यात्म जगत क्या है सही सही आध्यात्मिकता क्या है उनको पता चला तो वैसे ही हम सबके साथ में इस तरह से है की मेरे साथ में भी ज्यादातर लोगों के साथ में यदि ठाकुर ना होते तो पता नहीं हमारे साथ में क्या होता हम किस रास्ते पे चलते हैं ठाकुर के आने से सत्य युग आरंभ हुआ है और हमारे मां में एकदम अल्प मंत्र जिज्ञासा भी जल्दी है एक अल्प मंत्र एक इच्छा भी यदि है की हां मैं धर्म क्या है अध्यात्म क्या है ईश्वर क्या है आत्मन क्या है उसको समझना का पर्यटन करो या तो फिर उसे मार्ग पर उसे रास्ते पे चलने का पर्यटन करो जैसे ही हमने सोचा वैसे ही ठाकुर हाजिर हो गए हमारा कान पड़ा और पहले बेटा चलो अभी सही रास्ते पर तुमको चलना होगा और बेसिक किस तरह हमको पड़ा है उत्तम वैद्य ने पड़ा है वो मंदा वैद्य होता है तो क्या करता है वो औषध देकर के चला जाता है वो मध्य वैद्य क्या करता है वो बोल देता है अच्छा बेटा दवाई खाओ औषध खाओ तुम्हारे लिए अच्छा है और उत्तम विद्या क्या करता है वो पेशेंट को दर्दी को जमीन पे पटकता है उसके साइन पे उसकी छाती पे पर रखना है जोर जबरदस्ती मुंह खुलना है और दवाई मिला देता है तो हमको उत्तम विद्या ने पड़ा है और जब तक हमारा निस्तार नहीं होता वो हम्मा हम्मा में से तू हूं तू हूं वो बोलना शुरू नहीं करेंगे तब तक जो है हमारी जान छुटने वाली नहीं है तो ये है सतयुग का आना मतलब इसलिए जब हम जब भी सोचते हैं अरे भाई समझ में इतना अनिष्ट है दुराचार है अनाचार है इतना इम्मोरल लोग इस तरह से बिहेव करते हैं तो ठाकुर के आने से क्या लाभ हुआ सत्य युग के पुनः प्रारंभ से क्या लाभ हुआ तो जो सत्य युक्त आरंभ हो चुका है उसकी सबसे बड़ी निशानी हम खुद है समाज नहीं हम हम इस रास्ते पर चले हैं हम ठाकुर के रास्ते पे चले हैं तो क्या अपनी क्या कोई औकात थी की हम उनके चरणों में आकर के उनके आशीर्वाद ग्रहण कर पे कहां पड़े रहते कृपा करके हम इसकी इस रास्ते पे ले हैं हमारी जो औकात है उसको बढ़ाया है तो हमारी जो ठाकुर के श्री चरण में बैठे हैं वही एकमात्र निशानी है वही सर्वश्रेष्ठ वो संज्ञा है की वो की हम लोग जो है वो सत्य युग में जी रहे हैं ठाकुर के आने से सत्य योग पुनः आरंभ हो चुका है है तो इसीलिए अब गंगाधर महाराज जो यह सब वह स्वापक भविष्य एन करते थे बोल दिया ठाकुर को सीधा-सीधी की कालीबाड़ी में नहीं खाऊंगा तो ये सब चीज क्या है की उसके ऊपर में मुझे पहले थोड़ा सा हंसी आई थी किंतु लगता है की भाई चलो जो लोग परंपरा का पालनपुर करते रहते हैं उनको भी प्रणाम है क्योंकि वरना आसानी से का सकते हैं कालीबाड़ी में बढ़िया सा मछली वगैरा मिश्रण वगैरा मिलेगा ठाकुर के आशीर्वाद भी मिलेंगे मां काली के आशीर्वाद भी मिलेंगे वो छोड़ कर के कहानी वो गंगा के किनारे जाएंगे वो अग्नि प्रज्वलित करेंगे गंगा का पानी लेक आएंगे वो धन चावल वगैरा जो भी है वो वहां क्या वो जो भंडार है वहां से भिक्षा करके लेंगे वो पूरा दोपहर को खाना पकाएंगे अभी शन्नो पकाएंगे तब कहानी जाकर के भजन कहेंगे आहार करेंगे इतना कष्ट करने की क्या जरूर है कालीबाड़ी में मछली मिष्ठान का लिया और फिर दोपहर को आराम से विश्राम किया ठाकुर के पास बैठ करके दो कप लगा है तो वह नहीं यह सब कर रहे हैं तो इस उनकी जो निष्ठा है उसको भी हमारा प्रणाम है उसे दिन रात को वह रुक गए थे इसलिए वह बोलते हैं आगे की शो कल उठे टिनी आम के एक गाड़ो जल लिए पंचवटी के तार संगे संगे जीते बुल सुबह को उठा उठे तो फिर उन्होंने कहा की वह पंचवटी तो क्या है उनका ओपन टॉयलेट एक साथ तो ना वो पंचवटी नहीं एटलिस्ट हो तो झा उतार ए तो एन्यूएबल तो वो उनके पास में वो जो एक ये था वो कलश कलश में पानी लेकर के उनको बोला की चलो मेरे साथ में पंचवटी की और जाते हैं सूरज की सूरज उगता है पूर्व दिशा में इसलिए पुरवइया पूर्व दिशा में मुंह करके बैठ करके ध्यान करने को बोला बोले कोल गले बोल करके चले गए खानी पूरे दिन ही हमारे कच्चे अमर कच्चे ईश अमर उनको बिताया पंचवटी में पूर्वज से होकर के साथ ध्यान करो और फिर हो सकता है वगैरा गए होंगे कलश लेक गए थे उसका तो वही ये कर होता है की हाथ मुंह धोने के लिए शुभ चक्र वगैरा करने के लिए गए होंगे फिर वापस आकर के देखा ये अनुमान करके बोल रहे हैं फिर वापस ए करके देखा तो वो थोड़ा अखंडानंद जी ध्यान कर रहे थे थोड़ा सा झुक गए थे तो ठाकुर ने उनको सीधा करके बिठा दिया और बोला की देखो तुम थोड़ा सा झुक जाते हो सीधा हो करके बैठो देखो सब का लक्षण है की वह सिर्फ साधना की जितना भी वो सूक्ष्म सूक्ष्म बेट हैं सब ऑब्जर्व करके आपको बताएंगे हम लोग किस तरह से जब ध्यान करते हैं वो देखकर के वो कलेक्शन करने वाला कोई नहीं है क्या करेंगे गुरु के पास एक बार मंत्र ले लिया उसके बाद में ये सब किताबें ही हमारा सहारा है कहानी बड़े भाग्य से गुरु के साथ में एक-दो मिनट बात करने को भी मिला तो उसमें हमारे हजार प्रश्न उसमें से कौन सा कुछ और कौन सा ना कुछ है तो अपने क्या है की इसी तरह से किताबें के ऊपर में है या अपने मित्र वगैरा है उनको कुछ इनके साथ में चर्चा करके अपने आध्यात्मिक प्रश्नों का समाधान करना पड़ता है किंतु यह अखंडानंद जी इतने मतलब भाग्यशाली इतना मतलब इतने मतलब कितने जनों का पूर्णिया अर्जन किया होगा की ठाकुर खुद सर पे खड़े र करके प्रतिक्षण उनको बता दे रहे हैं की तुमको क्या करना है क्या नहीं करना है थोड़ा सा झुक करके भी बैठ गए तो सीधा करके बैठा दिया और बता दिया की तुम ध्यान करते करते चुप जाते हो तो इस बात पे ख्याल रखना ध्यान रखना उसके बाद में ठाकुर के साथ में मैं फिर से उनके कमरे में चला आया फिर ऐसे बोलने अमर संगे चांदनी घाटे चोर और साथ में उनके कमरे में जब वापस आए तब ठाकुर ने कहा चलो मेरे साथ में चांदनी के खाटू पर अभी जो दक्षिणेश्वर गए होंगे पता है की गंगा का बहुत ही विस्तृत किनारा है जिसके ऊपर में काली मंदिर बना है और वहां पे द्वादश 12 शिवा मंदिर है गंगा के किनारे पे ही और छे करके बीच में थोड़ा सा गैप है प्रवेश करने के लिए वो प्रवेश द्वारा जैसा है वहां पे घाट है गंगा से चढ़कर के उसे घाट पर जाते हैं घाट में से वो प्रवेश करके काली मंदिर में प्रवेश करते हैं तो वो जो खाट है वो बांध हुआ है ऊपर से इसको ये चांदनी कहते हैं चांदनी घाट उसको कहा जाता था अभी भी कहा जाता है है तो ठाकुर ने कहा चांदनी के घाट पर चलो मेरे साथ में गंगा किनारे जान के समय उन्होंने मुझे कहा चलो एक कमांडर अपने साथ ले ले घटेगा अमिताभ के स्नान कोरिया नहीं है घाट पे गए गंगा के किनारे उन्होंने उनको स्नान कराया और फिर साथ में लेकर आए इस तरह से खानदान जी लिख रहे हैं स्नान कोरिया लिए ऐलान तो अभी क्या है की उनको वो घाट जो ये घमंडल था कमंडल में गंगाजल भरना है फिर ठाकुर के सर पे वो उनको वो जो है की अभिषेक करना है तो उनके सर पे वो पानी डालना है तो ये सब उनको करना पड़ता था अभी सेवा तो इस को कहेंगे तो देखिए की मतलब इस तरह से जागृत गुरु की जागृत इस्ट देवता की सेवा करना कितना बड़ा मतलब वो भाग्य की बात है तो उन्होंने स्नान करने में मदद की और फिर वापस चांदनी के घाट से उनके कमरे में आए बीजेपी मैन जो जो वस्त्र पहने था धोती वो तो गंगा में जब प्रवेश करते हैं तो धोती को निकलते नहीं है इस को तो पहने ही रखें थे अब जब वापस आए तो वो भीगी होती ही पहनी हुई है घर इसे तार एक खाना कपड़े एक तू गंगा जेल चित बीते बोले फिर वापस आकर के गलित होती है तो वापस आकर के उनको कहा की उनका एक दूसरी एक वस्त्र है एक दूसरी धोती है उसके ऊपर में गंगा जल थोड़ा सा वो चिक दिया गंगाधर महाराज ने वो दिगंबर होने वो फिर वो नया वस्त्र धरण करना है वो जिला है तो जिला वस्त्र निकाल दिया अभी सामने ही गंगाधर महाराज खड़े हैं कोई वो लज्जा की बात नहीं है लज्जा घृणा भाई तीन खाता नहीं ईश्वर के सामने जब आते हैं तब लक्षण और घृणा और भाई तीन रहने से ईश्वर साक्षरता नहीं होता और वो गंगाधर महाराज का भी मां इतना पवित्र है की सब समय जो है उसका एक जो मतलब कहेंगे की सब कॉन्शियस लेवल ईश्वर समुद्र में ईश्वर सागर में वो निमग्न राहत है जैसे वो आइसबर्ग होता है ना की तू थर्ड समुद्र के भीतर में राहत है वन थर्ड ऊपर में दिखता है तो ये ऐश्वर्या समुद्र में इन लोगों का मां वैसे ही तू थर्ड सब मर्ज राहत था डूबा हुआ राहत था कॉन्शियस लेवल पे वो जगह का सर कार्य करते थे तो यहां पर लिखने हैं की वस्त्र निकाल दिया जिला वस्त्र भेजो हुआ वस्त्र और दिगंबर हो गया कालीघाट मां काली मंदिर वह जो कालीघाट जो है फेमस कालीघाट कोलकाता का उसका एक छवि जो है उनके कमरे में राहत था उसके पास में ठाकुर उसके सामने गए मां काली का जो छवि है कालीघाट का उसके सामने वो ठाकुरवादी मैन वो दक्षिणेश्वर का वो जो मंदिर का जो प्रसाद है महाप्रसाद यदि यहां पे कहते हैं तो महाप्रसाद जैसे उनको कहते हैं ये जो पुरी जगन्नाथ का महाप्रसाद चंद्राली कहा जाता है या तो फिर वो कालीघाट का भी महाप्रसाद हो सकता है वो थोड़ा सा वहां पर था अभी के सामने रखा था उसमें से थोड़ा उन्होंने ग्रहण किया थोड़ा अखंडानंद जी को दिया किंतु जनरली वो पुरी का महाप्रसाद हो सकता है वह चावल वगैरा जो है ना वो भाजपा करके वो उससे करके वो मैन उसे तरह से वो रखें रहते हैं जिससे की लंबा समय चले तो वो कटक वगैरा से ये लोग जो थे बलराम बाबू वगैरा वो जब वहां से उड़ीसा से कोलकाता वापस आते थे तो वो जगन्नाथ पुरी का महाप्रसाद थोड़ा सा 8 के महाप्रसाद बोले बांग्लादेश को लेकर के आते थे और ठाकुर को थोड़ा डर से जो हो सकता है की उसमें से यह थोड़ा महाप्रसाद रखा हो जो की लंबा समय तक राहत है प्रिजर्व राहत है तो उसमें से ठाकुर ने थोड़ा सा ग्रहण किया अखंडानंद जी को थोड़ा सा दिया तार कर मां काली ओम काली ओम काली बोले तालुके अश्ते-हंसते मुखेड़ कच्चे हाथ ताली दिए और धनी मिलित नेत्र अनेक और रेलवे महाप्रसाद ग्रहण करने के बाद में दोनों हाथों से इस तरह से ताली बजाते बजाते अपने हृदय के सामने बहुत समय तक ओमकाली ओमकाली ऐसे बोलते बोलते वो खड़े रहे अच्छा तो आज यही तक कल तो छुट्टी है कल संडे है मंडे को मिलेंगे और यह प्रश्न को समाप्त करें