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Swami Vivekananda My Plan Of Campaign ·

मेरी क्रान्तिकारी योजना : स्वामी विवेकानन्द : भारतीय व्याख्यान || 14 Feb 2025

Invocation

ओम स्थापक यच धर्मस्य सर्व धर्म स्वरूपने अवतार वरिष्ठा राम कृष्णाय ते नमः स्वामी विवेकानंद का माय प्लान ऑफ कैंपेन हम देख रहे थे कि जो हाउ टू बेटर इंडिया भारत की प्रगति कैसे हो भारत की उन्नति कैसे हो उसके जो कुछ पॉइंट स्वामी जी हमको बता रहे हैं उसमें सेकंड पॉइंट है गुड एंड इवल आर टू साइड्स ऑफ सेम कॉइन अच्छा और बुरा इष्ट और अनिष्ट एक ही सिक्के की दो बाजुए हैं एक ही सिक्के के दो पहलू हैं जो पैराग्राफ हम कल पढ़ रहे थे लास्ट टाइम उसको मैं एक बार पढ़ लेता हूं स्वामी जी कहते हैं द हिस्ट्री ऑफ द वर्ल्ड टीचस अस दैट वेर एवर देर हैव बीन फेनेटिकल रिफॉर्म्स द ओनली रिजल्ट हैव बीन दैट दे हैव डिफीटेड देयर ओन एंड्स मनुष्य सभ्यता का इतिहास पढ़ेंगे पता चलेगा कि जितनी भी बार जोर जबरदस्ती करके किसी भी समाज को सुधार करने का प्रयास किया गया है तो वह सुधार आखिर में तो बहुत बड़े डिजास्टर में ही एक बहुत बड़ी मुसीबत में ही परिणत हुआ है एक इसका उदाहरण है अमेरिका में जो ओरिजिनल निवासी थे अमेरिकन कांटिनेंट के नॉर्थ अमेरिका और साउथ अमेरिका इसके ऊपर में जब यहां से यूरोप से ये नए जो ट्रैवलर्स वॉयज वहां पर गए तो वे लोग अपने साथ में क्रिश्चियन प्रीचर्स को भी लेकर आए और उन्होंने सोचा कि ये जितने भी यहां के ओरिजिनल लोग हैं वे लोग तो मने एकदम जंगली दशा में जी रहे हैं उनके पास में नाही ही इंडस्ट्री है ना ही मॉडर्न साइंस है ना ही मॉडर्न फिलोसोफी है ना ही यह शिप मने जहाज है समुंदर में तैरने वाले यानी कि इनकी एक जंगली सभ्यता है और इनको हम क्रिश्चियनिटी में कन्वर्ट करें तो वह जो एक माने इसके पीछे एक प्रलोभन भी था कि इनके पास में से जैसे कुछ-कुछ राजा थे माया या इंका एंपायर वहां के राजा बड़े धनी थे तो राजा को मार करके उनका धन लूट लिया वह तो एक किया दूसरा कि उनको सेटल होने के लिए जमीन चाहिए तो उन लोगों को मार करके उनकी जमीन भी छीन ली और जो लोग बचे वहां के ओरिजिनल उनको यह लोग रेड इंडियन कहते हैं उनको फिर क्रिश्चन में कन्वर्ट करना प्रारंभ कर दिया आज देखिए कि नॉर्थ अमेरिका यानी कि अमेरिका यूनाइटेड स्टेट्स और कैनेडा इसकी जो धन संपत्ति है उसका सबसे बड़ा फैक्टर क्या है तो है नेचुरल रिसोर्सेस और यह नेचुरल रिसोर्सेस कहां से आए यह जंगल यह पहाड़ यह नदियां यह समुंदर यह सरोवर समुंदर तो नहीं किंतु एटलीस्ट यह सरोवर यह सब तो इस रेड इंडियन लोग रहते थे वहां ओरिजिनल निवासी ओरिजिनल अमेरिकन रेजिडेंट्स जो वहां के थे उन लोगों की संपत्ति थे ऑस्ट्रेलिया में भी देखिए क्या हुआ कि ब्रिटन से वगैरह से यूरोप से यह घोरे सेटलर्स वहां पर गए और वहां के जो ओरिजिनल निवासी थे उनको मार करके उनकी जमीन हथिया दी तो इतने बड़े-बड़े कॉन्टिनेंट जैसे नेचुरल रिसोर्सेस जैसे ही इनके हाथ में आए यह लोगों ने इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट करना शुरू कर दिया तो यह अभी जैसे कि यह अमेरिका की प्रोस्पेरिटी के पीछे में एक बहुत बड़ा हाथ है कॉटन प्लांटेशन तो यह साउथ अमेरिका में साउथ यूनाइटेड स्टेट्स में कॉटन प्लांटेशन होता था तो यह कॉटन कॉटन प्लांटेशन में आपको क्या करना है तो व वैसे तो जमीन तो वैसे ही वहां के ओरिजिनल अमेरिकन से छीन ली है फिर यह अफ्रीका से स्लेव बुलाएंगे और फिर यह इन स्लेव्स को पकड़ करके वहां पे रखेंगे कॉटन प्लांटेशन में काम करने के लिए यानी कि यह अफ्रीका में में भी ये लोग चाहते थे कि ये मैं लाइट ऑफ सिविलाइजेशन वहां पर जाए तो लाइट ऑफ सिविलाइजेशन तो कितना गया पता नहीं किंतु अफ्रीका से बहुत सारे लोगों को पकड़ करके अमेरिका में लाया गया गुलाम की तरह रखा गया और उनके पास में से बैक ब्रेकिंग काम करवाया गया तो यह जब भी यह खास करके यह जो पिछले 300 400 सालों का इतिहास है कि यह यूरोपियन लोगों ने जब भी सोचा कि हम यह लाइट ऑफ सिविलाइजेशन लाइट ऑफ क्रिश्चियनिटी पूरे जगत में फैलाए यहां पे अमेरिका नॉर्थ अमेरिका साउथ अमेरिका में यहां पर अफ्रीका में यहां पर एशिया में तो जहां-जहां पर भी यह लोग लाइट ऑफ सिविलाइजेशन मने सो कॉल्ड लाइट ऑफ सिविलाइजेशन लेकर गए हैं वहां वहां पर उन्होंने महा भयानक खूना मर की की है तो इसीलिए स्वामी जी कहते हैं कि आप यदि लोगों को जोर जबरदस्ती सुधार करने का प्रयास करेंगे हां मान लिया कि अफ्रीकन कंट्रीज जब यह यूरोपियन गए थे वहां पे वहां भयानक अंधकार में डूबे हुए थे उनकी सोशल सिस्टम होगी पॉलिटिकल सिस्टम होगी वह हो सकता है कि अप टू डेट ना हो किंतु फिर जोर जबरदस्ती करके उनको मॉडर्न बनाना उसका जो परिणाम आया उससे तो बेटर थे कि वह जो जंगली आदिम दशा में थे वह बेटर थे तो इसलिए स्वामी जी कहते हैं कि कभी भी हम जनून से जोर जबरदस्ती किसी को मैंने फोर्स करके किसी को इंप्रूव करने का प्रयास करेंगे तो प्रयास सफल नहीं होगा उसके ऊपर में म तो इतना हानि इतना होगा कि बेटर है कि वह पहले की पोजीशन में थे वही बेटर है नो ग्रेटर अप हीवल फॉर द एस्टेब्लिशमेंट ऑफ द राइट्स एंड लिबर्टी कैन बी इमेजिन देन द वॉर फॉर द एबलेशन ऑफ स्लेवरी इन अमेरिका ये अ लोगों को अपने ह्यूमन राइट्स जिसको आजकल आजकल कहते हैं लोगों को राइट्स और उनको लिबर्टी यानी कि मुक्ति फ्रीडम आजादी यह देने कि आज के आधुनिक समय में अमेरिकन निग्रो को गुलामी प्रथा से मुक्त करवाने की इतनी बड़ी मूवमेंट शायद ही वर्तमान समय में इतनी बड़ी और कोई मूवमेंट होगी यू ऑल नो अबाउट इट आप सबको इसके बारे में पता है एंड व्हाट हैज बीन इट्स रिजल्ट और उसका परिणाम क्या है द स्लेव्स आर 100 टाइम्स वर्स ऑफ टुडे देन दे वेर बिफोर द एबलेशन ये जब गुलाम थे वह उस समय वह बेटर थे आज अभी उनको गुलाम हटा दिया गया है मने उनको मुक्त कर दिया गया है तो काले लोग ों की हालत और भी बुरी है बिफोर द एबलेशन दिस पुअर नीग्रोस वेर द प्रॉपर्टी ऑफ समबे दे हैड टू बी लुक्ड आफ्टर सो दे मा बी सो दैट दे माइट नॉट डिटेरिऑरेटिंग या मालिक प्रॉपर्टी की रखवाली करता है वह मावजात करता है किंतु जैसे ही वह प्रॉपर्टी के रूप में से निकल गए मुक्त हो गए अब उनको ना ही जॉब देने वाला कोई है ना ही उनकी देखभाल करने वाला कोई है टुडे दे आर द प्रॉपर्टी ऑफ नोबडी आज वह किसी की भी प्रॉपर्टी नहीं है दे लाइव्स आर ऑफ नो वैल्यू उनके जीवन की कोई कीमत नहीं दे आर बर्न अलाइव ऑन मियर प्रिटेंस मने छोटे से शक में कि इसने चोरी की है या उसने कोई गुनाह किया है ऐसे छोटे-छोटे डाउट में भी इनको जिंदा जला देते हैं दे आर शॉट डाउन विदाउट एनी लॉ फॉर देयर मर्डर फॉर दे आर निगर्स दे आर नॉट ह्यूमन बीइंग्स छोटे छोटी छोटी बातों में लोग उनको गोली मार देते हैं हत्या कर देते हैं और जो हत्या करने वाला है उसको कानून की कोई सजा भी नहीं होती क्योंकि जिसकी हत्या की गई है वह तो काला आदमी है काला आदमी तो पशु से भी बदतर है उसको मर्डर करने से क्या कोई फर्क थोड़ी ना पड़ेगा सो दे आर नॉट इवन एनिमल्स वो मने निगर्स यानी काले लोगों को तो यह जानवर भी नहीं मानते पशु से भी बदतर है एंड दैट इज द इफेक्ट ऑफ सच वायलेंट टेकिंग अवे ऑफ इविल बाय लॉ और बाय फेनेटिसिजम और यह परिणाम है कि आप जोर जबरदस्ती करके जनून पूर्वक किसी को आप ह्यूमन राइट्स ऐसा कुछ देने की बात करेंगे तो ऐसा भयानक ऐसा एक असर होगा सच इज द टेस्टिमोनी ऑफ हिस्ट्री अगेंस्ट एवरी फेनेटिकल मूवमेंट इवन फॉर डूइंग गुड माने यह हिस्ट्री का इतिहास का यह एक लेसन है कि जब भी समाज में अच्छा करने का समाज का कल्याण करने के लिए यह एक फेनेटिकल मूवमेंट स्टार्ट हुई है उतनी ही बार समाज खून मरके खूना मर्की में डूब गया है आई हैव सीन दैट मैंने उसको देखा है माय ओन एक्सपीरियंस हैज टोट मी दैट मेरे खुद के अनुभव ने मुझे यह सिखाया है देयर फॉर आई कैन नॉट जॉइन एनी वन ऑफ दिस कंडेमनिंग सोसाइटीज और इसीलिए यह जो कुछ सोसाइटी है व चिल्ला चिल्ला करके कहती है कि भारत में बहुत सारे दूषण है भारतीय समाज अनिष्ट से अंधश्रद्धा से भरा हुआ है चलो कानून लाकर के या तो फिर समाज के जो प्रतिष्ठित लोग हैं उनकी निंदा करके समाज के नीति नियमों की अवगणना करके समाज में कुछ सुधारणा लागू की जाए इस सब सोसाइट के साथ में मैं नहीं खड़ा हूं यहां पे स्वामी जी ने ये निग्रो मूवमेंट की बात की अमेरिकन सिविल वॉर दूसरी ही एक ऐसी मूवमेंट थी यह फ्रेंच रिवोल्यूशन फ्रेंच रिवोल्यूशन का जो प्रारंभ जो हुआ उसकी जो एक सेंचुरी पहले वहां के एक सेंचुरी तो आई एम नॉट श्यर किंतु यह जो किंग लुई था वहां का तो किंग लुई और उसकी क्वीन थी यह दोनों इतने भोग विलास में डूबे हुए थे उनकी जो कोर्ट थी उनके यह जो सब दरबारी चमचे थे वे लोग इतनी भयानक विलास में डूबे हुए थे और यह पूरा पेरिस शहर में पूरे गरीब लोग हैं जिनके पास में ना ही खाने हैं ना ही कुछ है उनकी अवस्था इतनी बुरी है और यह वर्सलीस पैलेस में यह लोग आनंद मना रहे थे तो आखिर में क्या हुआ कि फ्रेंच रिवोल्यूशन आया जितने भी पेजेंट यानी कि यह खेत मजदूर खेत किसान इन सब लोगों ने राजा और रानी की हत्या कर दी और रेवोल्यूशन गवर्नमेंट स्थापित की अभी सब लोग सोच रहे हैं कि यह जो रेवोल्यूशन गवर्नमेंट है जो कि बड़े अच्छे यह इक्वलिटी फ्रेटरनिटी लिबर्टी ऐसे बड़े उच्च आदर्श के ऊपर में स्थापित हुई है तो अभी हमको बहुत सारा मने समाज का कल्याण होगा इकोनॉमिक पॉलिसी अच्छी लाई जाएगी पॉलि टिकल मिलिट्री वॉर जो बाहर में हो रही है रुक जाएगी वगैरह वगैरह लोगों ने बहुत आशा रखी थी किंतु हुआ ऐसा कि यह जो रेवोल्यूशन जो गवर्नमेंट थी उसका लीडर था रोब स् पियर तो रोब स् पियर ने इतना भयानक आतंक मचाना शुरू किया फ्रांस में कि वह राजा और रानी जो कि महा करप्ट थे महाभोग विलास में डूबे हुए थे उनके अंडर में लोगों को जो तकलीफ पड़ रही थी उससे 10 गुना ज्यादा कष्ट उनको यह रेवोल्यूशन गवर्नमेंट और यह रेवोल्यूशन लीडर रोब स् पियर उसके अंडर में हुआ आखिर में ऐसा हुआ कि जिस गिलोटिन फ्रांस में जिसकी जिसकी हत्या होनी थी या तो फिर जिसको जिसका मर्डर होना था गवर्नमेंट के द्वारा उनको ये लोग गिलोटिन पे उनका सर वध कर देते थे यह गिलोटिन का इन्वेंशन भी उस समय किसी ने किया था एक डॉक्टर ने तो यह बड़ी वो लोग बोलते हैं बड़ी ह्यूमन और पेनलेस मेथड है फांसी पे चढ़ा देना या तो फिर गोली मार के शूट कर देना उससे यह बेटर है कि गिलोटिन से एक सेकंड में उसका सर काट दो फट करके मर भी जाएगा ज्यादा कष्ट भी नहीं होगा तो जो भी है अभी यह रोप स्पीयर जिसने हजारों लोगों को गिलोटिन पे भेज दिया आखिर में उसी रोप स्पीयर को पकड़ करके लोगों ने गिलोटिन से उसका भी सर काट दिया तो यह फ्रेंच रेवोल्यूशन की यह परिस्थिति थी उसके बाद में आप सोचेंगे कि अच्छा ठीक है चलो इसके बाद में यदि फ्रांस में शांति आएगी नहीं व नेपोलियन ने सत्ता हथिया दी और पूरे फ्रांस को एक के बाद एक इस तरह की विदेशी युद्ध में उसने फ्रांस को फेंक दिया कि आखिर में पूरा फ्रांस भीतर से बैकर हो गया और यह नेपोलियन की हार हुई उसको पकड़ करके यह लोग सेंट हेलेना बोलकर के एक आइलैंड है वहां पर ले गए और उसका आखिरी जीवन बिल्कुल इग्नो मिटी में यानी कि बिल्कुल इसको कहेंगे कि लोगों की नजर से दूर डिपे निराश होक के अकेला-अकेला यह नेपोलियन मर गया तो यह था अल्टीमेटली फ्रेंच रेवोल्यूशन का परिणाम कि जब नेपोलियन मरा तो फिर से वह जो किंग लुई था उसी के एक वारसदार को पकड़ कर के राजा बनाया गया तब कहीं जाकर के फ्रांस में शांति हुई यानी कि यह फ्रेंच रेवोल्यूशन उसका जो खूना मर्की उसके बाद में नेपोलियन के युद्ध नेपोलियन के युद्ध में इतने सारे फ्रेंच लोगों का मृत्यु हुआ था नेचुरली आप जब जोर जबरदस्ती करके 16 18 साल की उम्र के ज्यादा जितने भी लोग हैं लड़के यंग मैन इवन बूढ़े सब को जोर जबरदस्ती आर्मी में डालेंगे विदेश में जाकर के युद्ध करेंगे रशिया गए थे आर्मी लेकर के नेपोलियन रशिया ने तो मैंने रशिया की आर्मी के साथ में कितना वो हुआ वो तो पता नहीं किंतु रशिया का जो विंटर है उसने आधि सेना को खत्म कर दिया तो मने जिस राजा के जुल्म से बचने के लिए रेवोल्यूशन लाया उस उस रेवोल्यूशन ने और भी ज्यादा लोगों का मर्डर किया रेवोल्यूशन को सब खत्म करके नेपोलियन को अपना यह डिक्टेटर बनाया नेपोलियन ने रेवोल्यूशन से भी ज्यादा जितने लोगों की हत्या हुई थी मर्डर हुआ था फ्रांस में उससे कहीं ज्यादा लोग नेपोलियन के युद्ध में मर गए और आखिर में नेपोलियन जब गया वही राजा के वारसदार को बुला कर के राजा बनाया गया तब कहीं जाकर के थोड़ी बहुत शांति आई अभी परिस्थिति वैसी ही है जो कि पुराने राजा के समय थी किंतु एटलीस्ट यह रेवोल्यूशन नेपोलियन का युद्ध उससे तो भाई बेटर है तो समाज को इंप्रूव करने का जब भी प्रयास जोर जबरदस्ती जुनून पूर्वक किया गया है उतनी ही बार वह प्रयास सिर्फ विफल ही नहीं हुआ है उस प्रयास ने उस समाज को भयानक अग्नि कांड में उसको डाल दिया है अच्छा इसके साथ में भारत का कंपेयर कीजिए देखिए कि यह सबसे पहले तो स्वामी जी के विचार है जिसने कि हम फ्रीडम मूवमेंट को एक रियली एक आधार स्तंभ दिया हो जितने भी प्रथम हरोड़ के फ्रीडम फाइटर्स थे वह सभी लोग स्वामी जी से प्रभावित थे और इसीलिए भारत में धीरे-धीरे करके यह सब ग्राउंड लेवल से यह सब बना है महात्मा गांधी को यदि छोड़ दे तो ऐसे कितने सारे सोशल वर्कर्स थे इतने सारे यह डेडिकेटेड कांग्रेसी थे आज तो कांग्रेस का नाम एकदम बुरा हो गया है किंतु उस समय की बात है इतने सारे कांग्रेसी लीडर्स थे कि जिन्होंने ग्रास रूट पर काम करके अभी यह जैसे देखिए गुजरात में यह जिसको कहते हैं वाइट रेवोल्यूशन वाइट रेवोल्यूशन डेरी डेरी रेवोल्यूशन जो आया है डेरी रेवोल्यूशन का अर्थ क्या है यह अमूल कोऑपरेटिव की स्थापना हुई और अमूल कोऑपरेटिव के जो डॉक्टर कुरियन है उसने इस तरह से इस कोऑपरेटिव को चलाया यह कोऑपरेटिव मूवमेंट खास करके जिसकी मैं बात कर रहा हूं हूं यह कोऑपरेटिव मूवमेंट ने इतना सारा ग्रास रूट लेवल पर प्रोस्पेरिटी लाया है उसका सबसे बड़ा उदाहरण है यह अमूल कोऑपरेटिव मूवमेंट और उसके जो लीडर थे डॉक्टर कुरियन तो ये डॉक्टर कुरियन ने अपनी बायोग्राफी लिखी है मैं यदि भूल नहीं रहा हूं तो उसका टाइटल था आई टू हैड ए ड्रीम तो इस बायोग्राफी मैंने पढ़ी थी उस समय में टीसी में था तो उसमें वो इतना मतलब कब से यह अमूल कोऑपरेटिव की स्टार्ट हुआ फाउंडेशन हुआ किस तरह से यह जो खास करके जो वेजिटेरियन जो फैमिली होते हैं वहां पर प्रोटीन अ इंटेक एक बहुत बड़ी समस्या होती है जो नॉन वेजिटेरियन फैमिली है वहां पे नॉनवेज खा कर के आपको प्रोटीन मिलेगा और प्रोटीन एक ऐसा पोषक तत्व है जो कि शरीर में जाएगा तो शरीर को बल मिलेगा शरीर स्वस्थ्य निरोगी रहेगा तो खास करके वेजिटेरियन फैमिली को प्रोटीन इंटेक थोड़ा कम होता है जो हम जनरली खाना खाते हैं उसमें जो दाल होती है या तो फिर यह सोयाबीन होता है उसी में सबसे ज्यादा प्रोटीन होता है तो प्रोटीन का सबसे बड़ा एक दूसरा सोर्स है वह है मिल्क और मिल्क प्रोडक्ट्स किंतु मिल्क प्रोडक्ट्स को आपको घर-घर तक पहुंचाना है तो और वह भी एक अच्छी क्वालिटी का दूध चाहिए व भेल सेल किया हुआ ना कि उसमें पानी डाल दिया है केमिकल डाल दिया है इस तरह का नहीं एक स्टैंडर्ड क्वालिटी का दूध घर-घर जाए उसके लिए यह अमूल का जो प्रयास है वह पूरा कोऑपरेटिव कोऑपरेटिव में से जितने भी यह फ फमर है भरवाड़ है उनके घर में से यह दूध कलेक्ट होना दूध एक मदर डेरी में जाएगा मदर डेरी में प्रोसेस होगा पैकेजिंग होगा वहां से पूरा डिस्ट्रीब्यूशन का सिस्टम बनेगा यह इतना सुंदर यह कार्य यह डेरी रेवोल्यूशन गुजरात में आया है तो यह जो डॉक्टर कुरियन अपनी बायोग्राफी लिख रहे हैं उसमें वह बार-बार कांग्रेस के कुछ नेताओं का नाम लेते हैं कहते हैं अभी मैं नाम भूल गया किंतु और ऐसे नेता का जिसका नाम जनरली किसी ने नहीं सुना हो चीफ मिनिस्टर वगैरह नहीं वह ग्रास रूट लेवल के ही लीडर है तो ऐसे लीडर का नाम लेते हैं कि जिन्होंने इतना कोऑपरेट किया एंकरेज किया हौसला दिया तब कहीं जाकर के यह डेरी मूवमेंट सक्सेसफुल हुआ है तो ये इस तरह के ग्रास रूट लेवल लीडर्स अपने भारत में कितने सारे हुए हैं अभी तो मैं हिस्ट्री वगैरह इतना नहीं पढ़ता एक समय था कि मैं हिस्ट्री बहुत पढ़ा करता था उस समय मुझे ऐसी बहुत सारी स्टोरीज पता थी आज मुझे बस दो-तीन स्टोरीज ही इस तरह की याद है ज्यादातर तो मैं भूल गया हूं और खास करके यह जो अपने विनोबा भावे का भूदान यजना उसके बारे में सही में बहुत अच्छे से रिसर्च करके लिखा जाना चाहिए कि इस तरह के फ्रीडम मूवमेंट वे लोग अभी यह फ्रीडम फाइटर्स थे कोई चाहे कांग्रेस के साथ में एसोसिएट हो ना हो इंडिपेंडेंटली कार्य करते हो किंतु ग्रास रूट लेवल पे उन्होंने इतना सुंदर कार्य किया है कि जिसकी वजह से आज आप भारत में दे देखिए कि हम लोग जो दो सबसे इंपोर्टेंट फैक्टर है वेजिटेरियन हाउसहोल्ड के लिए एक तो है कि दूध दूसरा है कि फूड ग्रेन मिल्क एंड फूड ग्रेन इसमें अभी हम सेल्फ सफिशिएंट है वरना तो एक समय ऐसा था कि बार-बार अमेरिका से वो फूड ग्रेन मंगवाना पड़ता था और ये आजकल जो यूएस एड जो इतना चर्चे में है वो उस समय वो बड़े-बड़े झोले भर कर के भेजता था फिर उस परे लिखा रहता है गिफ्ट ऑफ अमेरिकन पीपल टू इंडिया अब ये कितना शर्म आएगा यह सब लेने में लगेगा हम घर में भिक्षा मांगते थकते नहीं अभी इंटरनेशनल भिक्षा मांगने को चले गए तो खैर अभी वह परिस्थिति चली गई है उसका रीजन यह है कि चाइना चाइना है या तो सोवियत यूनियन है वहां पे जो डिजास्टर्स एक्सपेरिमेंट किए गए कि कलेक्टिवाइजेशन यह कलेक्टिव फार्म कम्युनिटी फार्म उस सब की वजह से 10 20 30 साल तक तो पूरा एक के बाद एक अकाल आता रहा करोड़ों करोड़ों लोग मर गए चाइना और रशिया का हिस्ट ी जो पड़ेगा खास करके यह 20th सेंचुरी का रोंगटे खड़े हो जाएंगे इतनी भयानक क्रुएलिटी इतना भयानक अत्याचार वहां के लोगों के ऊपर में हुआ है तो वह चाहे फ्रांस हो चाहे यह हिटलर का जर्मनी हो चाहे यह अमेरिका का सिविल वॉर हो चाहे यह रशिया का कम्युनिस्ट रिवोल्यूशन हो चाइना का कम्युनिस्ट रिवोल्यूशन हो पिछले 100 200 साल की हिस्ट्री आप पूरे विश्व की पढ़ कर के देख लीजिए जब-जब भी वह समाज सुधारणा का प्रयास हुआ है और समाज सुधारक अपने को बड़ा ही निष्ठुर रूप से पेश आते थे बोलते थे कि जोर करके इस तरह के कानून को बदल दो जोर करके इस तरह के रिफॉर्म्स लेकर आओ उस रिफॉर्म और उस कानून ने देश को पूरे खून में रंग दिया है यह बात सिर्फ भारत में नहीं हुई है यह सबसे बड़ा हमारे लिए एक इट्स अ मैटर ऑफ प्राइड कि हमने ग्रास रूट लेवल से जो स्वामी जी इसका पहले का जो पॉइंट था ना ग्रोथ नॉट रिफॉम यानी कि विकास होना चाहिए नहीं की सुधारणा होनी चाहिए और इसके बारे में हमने एक उपमा भी देखी थी कि बच्चा जब बिगड़ जाए पहले तो उसको नेगलेक्ट करो फिर वह बिगड़ जाए तो फिर मारपीट करके उसको सुधारने का प्रयास करो और फिर दूसरा है बच्चे को बचपन से ही इसको इस तरह से ट्रेन करो कि बड़ा होकर वह एक आदर्श सिटीजन आदर्श नागरिक बने यहां पे ऑफकोर्स बचपन से लेकर के यानी कि 200 300 साल पहले से पीछे तो हम नहीं जा सकते टाइम टाइम मशीन लेकर के किंतु भारत में जो होने की जरूरत थी यदि नेशनल लेवल पर यही उदाहरण को उपमा को यदि ट्रांसप्लांट किया जाए तो वो इस तरह से होगा कि ग्रास रूट लेवल से रिफॉर्म चालू करो सुधारणा चालू करो रदर देन की ऊपर से वो दिल्ली में 10 लोग बैठे हुए हैं एक कानून बना दिया अब इस कानून को चारों ओर अप्लाई करो फिर वोह देखोगे कि वो कहां पे यह प्रॉब्लम हो रहा है कहां पे वो प्रॉब्लम हो रहा है फिर ठीक किया कि जो लोग रास्ते में आते हैं उसको मार डालो तो मने व्हिच इज वेरी डेंजरस भारत में हुआ नहीं ऐसा किंतु बाकी सब देशों में ऐसा हुआ बेटर कि ग्रास रूट लेवल से आना चाहिए किंतु यह जब ऊपर से आपको कहा जाता है कि आप इस तरह से कीजिए और ग्राउंड लेवल सिचुएशन देख कर के हम जब वो ठीक करते हैं कि यहां की सिचुएशन ऐसी है लिमडी की ऐसी है अभी यह वड़ोदरा की अलग होगी अहमदाबाद की अलग होगी राजकोट की अलग होगी यहां पे साउथ इंडिया का तो कल्चर ही पूरा अलग है यहां की सिचुएशन बंगाल की सिचुएशन कितना डिफरेंस है ग्राउंड लेवल से यह सब धीरे-धीरे करके पनपना चाहिए तब कहीं जाकर के यह सोसाइटी डेवलप करती है और यह ग्राउंड लेवल से जब होगा ना तब पता है एक चीज मैंने यह जब मैं हिस्ट्री पढ़ रहा था उसमें ये सब रेवोल्यूशन को बारे में पढ़ कर के हमारे रोंगटे खड़े हो जाते हैं हमारा खून गर्म हो जाता है लगता है चलो अभी जाकर के गांव में शहर में जाएंगे रेवोल्यूशन करेंगे वह अच्छा लगता है किंतु उस तरह के रेवोल्यूशन से जो मने साइड इफेक्ट होगा वह बड़ा ही डेंजरस होगा और जो रियल कार्य हो रहा है जैसे कि हमें भारत के हिस्ट्री पढ़ कर के पता चलेगा जैसे गांव-गांव शहर शहर जाइए कितने ही लोगों ने हार्ड वर्क किया है मैं सुरेंद्र नगर का एक उदाहरण देता हूं उस लिंबड़ी के पास में ही एक सुरेंद्र नगर है तो वहां पे बापा मुझे एक बार ले गए थे वहां पे एक सज्जन रहते हैं तो सज्जन बड़े ही मने सरल हृदय के बड़े अच्छे आदमी है तो वो एक अनाथ आश्रम चला रहे थे तो अनाथ आश्रम में हम जाकर गए ध्रुव अनाथ आश्रम ना कि ऐसा ही कुछ उसका नाम था तो वहां पर हम गए अभी जनरली मैं अनाथ आश्रम जाना बिल्कुल पसंद नहीं करता वो बिना मां-बाप के बच्चे बेचारे इतने मतलब चेहरे पर भले हंसी हो किंतु हृदय में जो दुख है वो देख कर के ही वो सेंस मैं कर लेता हूं समझ कर के मैं एकदम डिप्रेसो जाता हूं किंतु वो एक पहला अनाथाश्रम ऐसा ऐसा देखा कि बच्चे जननली खुश थे बड़े हंसी खुशी से वे लोग खेल रहे थे सब कर रहे थे तो ये जो सज्जन थे उन्होंने अपना पूरा जीवन इस अनाथ आश्रम को दे दिया उसका फैमिली उसकी वाइफ उसके लड़के उन लोगों को शायद इतना अच्छा नहीं लगता होगा उनको लगता होगा कि कहीं बेटर लाइफ एक लीड करें किंतु नहीं इस सज्जन ने जो अनाथाश्रम के लिए जीवन दिया देखिए कि इतने सारे बच्चे इतना हंसी खुशी से वहां पर रह रहे थे यह अनाथा आश्रम नहीं होता तो बेचार की क्या हालत होती कहीं फोस्टर होम में कहीं पुलिस चौकी में कहां पे ऐसा करके वे लोग कहीं स्लम में अपने जीवन बिताते हैं तो इस तरह से ग्राउंड लेवल पर कितने लोगों ने आप जद यह भारत की यह जो इस तरह के जो सेवाभावी लोग हैं कितने कितने लोग हैं कि जो लोग अपना अपना बिजनेस अपना जॉब अपना करियर सब छोड़ कर के इस तरह से सेवा का कार्य करते हैं भारत की भूमि को पुष्ट करते हैं तो यह जो कार्य है ग्राउंड लेवल से होना है उसमें सबसे बड़ा एक क्वालिटी चाहिए पेशेंस जब तक यह पेशेंस नहीं है जब तक यह जीवन दे देने की एक क्षमता नहीं है जीवन को इस सेवा यज्ञ में होम होम कर देने की यह क्षमता नहीं है तब तक हम लोग इस तरह का ग्राउंड लेवल पर कार्य नहीं कर पाएंगे और वह करने के लिए जीवन देने के लिए किसी भी तरह की अपेक्षा नहीं करके उसके लिए हमको आध्यात्मिकता चाहिए स्पिरिचुअलिटी चाहिए यदि हम में स्पिरिचुअलिटी नहीं है तो हम ग्राउंड लेवल पे दिन प्रतिदिन एक ही तरह का जो कार्य है जिसमें ना ही कोई अपे ना ही कोई रिवॉर्ड है ना ही कोई रिकॉग्निशन है ना ही कोई एप्रिसिएशन है ना ही कोई बहुत बड़ा हमको संपत्ति मिल जा रहा है इस तरह से दिन प्रतिदिन अपने जीवन को होमी होम देने की जो क्षमता वह आध्यात्मिकता से ही आएगी मैं रांची में गांव-गांव जाता था ऐसे कितने ही क्रिश्चन प्रीचर है जो कि यूरोप से आकर के भारत में रह रहे हैं अभी हमको लगेगा कि झूठ मुठ का कन्वर्जन कर कर रहे हैं किंतु उनके जीवन को तो हमको अप्रिशिएट करना होगा कि वह यूरोप में रहते थे तो लग्जरी में रह सकते थे उसकी बजाय कहां यह भारत के ट्राइबल एरिया में रहते हैं पूरा जीवन में गाली के अलावा और कुछ मिलता नहीं होगा यह बाकी लोगों की हम हिंदुओं की किंतु फिर भी चुपचाप शांति से अपना कार्य किए जा रहे हैं हम लोग कहेंगे कि बेकार कार्य करते हैं किंतु फिर एटलीस्ट उतना तो जो उन्होंने समाज के भले के लिए किया जो कुछ भी वह प्रोजेक्ट चला रहे हैं जो कुछ भी एजुकेट दे रहे हैं उतना तो वे लोग कर रहे हैं हमको भारतवासियों को यह ज्यादा से ज्यादा करने की जरूरत है हम लोगों को दूसरों को गाली देकर के अरे ये क्रिश्चन लोग यहां पर कार्य कर रहे हैं अरे यह लोग कर रहे हैं तो फिर हम लोग क्या कर रहे हैं यह भी तो बोलिए समाज को सुधारने का कार्य आप गवर्नमेंट की ओर से दिल्ली में जो बाबू लोग बैठे हैं वे लोग सब कर देंगे यह प्रोजेक्ट चलाएंगे य ये प्रोजेक्ट चला दिया यह दे दिया घर दे दिया यह सब कर दिया उससे पूरा काम नहीं होगा का ग्राउंड लेवल से यह कार्य होना चाहिए और तभी कहीं जाकर के समाज का उत्थान होता है यह क्रिश्चियन चर्च में आप हिस्ट्री पढ़ेंगे यूरोप की बात कर रहा हूं तो आपको इतने सारे स्कैंडल के बाद स्कैंडल दिखेंगे एक के बाद एक पोप ऐसे भयानक करप्ट निकले हैं कि जिन्होंने पूरी क्रिश्चियन सिस्टम को पूरा उसके नाम पर बट्टा लगा दिया है किंतु फिर भी यही क्रिश्चियनिटी के जो ग्राउंड लेवल प्रीचर्स जो होते हैं गांव-गांव शहर शहर छोटा-छोटा छोटा चर्च है वहां पर वह पूरा जीवन अपना दे देते हैं कम्युनिटी सर्विस के लिए वह देखेंगे तब पता चलेगा कि यह सोसाइटी इतनी स्ट्रांग क्यों है अदर वाइज ये अफ्रीका है वहां पे देखिए इस तरह की कोई ग्राउंड लेवल रिलीजियस मूवमेंट नहीं है उसकी वजह से अफ्रीका का एक भी देश उसका कोई भी वैल्यू मने उनके पास में नेचुरल रिसोर्सेस इतने सारे हैं किंतु वो नेचुरल रिसोर्सेस को लिवरेज करके एक नेशनल वेल्थ बनाना नेशनल स्ट्रेंथ डेवलप करना यह लोग भी तक नहीं कर पाए हैं हम लोग सोचते हैं कि एक कैपिटल जो है देश का उसमें जो गवर्नमेंट बैठी है गवर्नमेंट सब चलाएगी देश को वो बात नहीं है कोई भी देश कोई भी समाज कोई भी सोसाइटी कोई भी सिविलाइजेशन यदि उसको ठीक-ठीक चलना है तो उसके दो एस्पेक्ट होने चाहिए एक तो है कि वो हायर लेवल जो गवर्नमेंट है राजा है एंपरर है हु एवर इट इज या पोप बोलो वे लोग जो पॉलिसी ठीक करते हैं किंतु जो इंप्लीमेंटेशन होता है वो ग्राउंड लेवल पे जो लोग नेमलेस फेसलेस जो चुपचाप कार्य करने वाले कर्मी है वे लोग उस पॉलिसी को इंप्लीमेंट करते हैं वही लोग ग्राउंड लेवल पर ठीक-ठीक कार्य जब करते हैं तब सोसाइटी डेवलप होती है यह अमेरिका है यूरोप है उसके गांव-गांव शहर शहर जाकर के देख लीजिए कितने सारे क्रिश्चियन प्रीचर्स हैं जिन्होंने इस तरह का कार्य किया है तो बोलकर के वह सोसाइटी आज स्ट्रांग होकर के खड़ी है भारत में भी वही बात है जो भी देश स्ट्रांग है उस दे देश में देखेंगे दो तरह की गवर्नमेंट दो तरह के उसके यह जो एस्पेक्ट है एक तो स्ट्रांग नेशनल गवर्नमेंट होगी दूसरा कि एकदम सॉलिड ग्राउंड गेम होगा उन लोगों का ग्राउंड लेवल प काम करने वाले लोगों की इतनी एक पावरफुल एक यह होगी ऑर्गेनाइजेशन या तो फिर वो अपने आप चुपचाप काम करने वाले इसकी वजह से यह देश बड़ा होता है और जो देश करप्ट हो गए हैं वहां पर देखेंगे दोनों करप्ट हो जाता है ना ही वो ग्राउंड लेवल प काम करने वाला कोई मिलेगा और नहीं ग्राउंड लेवल प काम करने वाला नहीं होगा तो नेशनल गवर्नमेंट भी स्ट्रांग नहीं होगी क्यों क्योंकि कोई भी नेशनल गवर्नमेंट चलती है कंसेंसस के ऊपर में यानी कि लोगों की एक मत लोगों का जनरल पॉलिसी के बारे में एक मत है हम लोग चाहते हैं कि भारत का विकास इसी तरह से हो ज्यादातर लोग ये चाहते हैं इसी की वजह से किसी पार्टी को मेजॉरिटी मिलती है और वो पार्टी गवर्नमेंट फॉर्म करती है यदि लोगों में आपस में बट आव हो टकराव हो डिफरेंस ऑफ ओपिनियन हो तो वहां की सेंट्रल गवर्नमेंट कभी भी ठीक-ठीक कार्य नहीं कर पाएंगी परमानेंट सिविल वॉर जैसी परिस्थिति होगी जो कि आज अफ्रीका के आधे देशों की है तो यहां पर जो स्वामी जी कहते हैं उसके बहुत सारे लेयर्स है कि जब भी ग्राउंड लेवल से हम ठीक-ठाक अपने एक के बाद एक हजारों कर्मियों को भेज कर के धीरे-धीरे शांति से कार्य करना शुरू करेंगे तब कहीं जाकर के ओवरऑल नेशनल इफेक्ट इसका होगा इसके आगे स्वामी जी कहते हैं व्हाई कंडेम क्यों किसी को दोष देना देयर आर एवल्स इन एवरी सोसाइटी प्रत्येक समाज में अनिष्ट है बुराई है एवरीवन नोज इट सबको पता है एवरी चाइल्ड ऑफ टुडे नोज इट आज के सभी बच्चों को पता है ही कैन स्टैंड अपऑन ए प्लेटफॉर्म एंड गिव अस अ हैरंग ऑन द ऑफुल एवल्स एन हिंदू सोसाइटी प्रत्येक बच्चा एक प्लेटफॉर्म के खड़े होकर के हमको गाली दे सकता है कह सकता है कि हिंदू समाज में यह यह बुराइयां है अनएजुकेटेड फॉरेनर हु कम्स हियर ग्लोब टोटिंग टेक्स अ वैनिशिंग रेलवे व्यू ऑफ इंडिया एंड लेक्चर मोस्ट लर्नेट ऑन द ऑफुल एबल्स इन इंडिया यह जितने भी यह यूरोपियन ट्रैवलर्स है पूरे जगत में घूमते रहते हैं वो कोई भी भारत में आकर के वो इस तरह से भारत दूर से देखेगा भारत को नजदीक से भारत के समाज को स्टडी किए बिना ऊपर ऊपर से देख लेगा और फिर भारत को गाली देता जाएगा यह जो त्रिगुणा तीता नंद जी के बारे में वो त्रिगुणा तीता नंदजी ही थे मोस्ट प्रोबेबली यूरो तिबेट में जाकर के वहां पर वापस आकर के स्वामी जी के साथ में बात करते हैं और वहां के व लामा है मोनेस्ट्री है उसके बारे में कुछ निंदा वाक्य बोलते हैं कुछ कटु वाक्य कहते हैं तो स्वामी जी ने इमीडिएट कह दिया अरे ये तुम क्या बात कर रहे हो तुम बंगाल या कोलकात्ता के ये जो बड़ा बाजार बड़ो बाजार है वहां पे वहां जाकर के तुम लोगों का बंगालियों का चरित्र देख कर के कहोगे कि पूरे बंगाल की यह हालत है यह तुमने कैसे कह दिया अभी स्वामी जी जो कह कहना चाहते थे बाजार है वगैरह ऐसे लोग जनरली इकट्ठा होते हैं जो कि लोभी और कामुक होते हैं पैसों के ऊपर में इसकी दृष्टि होती है किंतु अ ट्री हैज टू बी नोन ओनली बाय द फेरेट फ्लावर स्वामी जी जो कहते हैं एक पेड़ है उसके जो सबसे स्वादिष्ट फल है वो उस पेड़ की पहचान है फ 100 बुरे फल 100 खट्टे फल यदि वो पेड़ देता है तो वो उसकी पहचान नहीं है जो बंगाल के जो बेस्ट फिलोसोफर साइंटिस्ट या तो फिर साधु संत महा पुरुष वे लोग तो कहां दक्षिणेश्वर में छुपे बैठे होंगे वह आपको थोड़ी ना बाजार में देखने को मिलेंगे तो वह जो बात त्रिगुणा तिता नंद जी को स्वामी जी ने कही थी यही बात वो यहां पर यूरोपियन ट्रैवलर्स को कहते हैं वह यहां से वहां वहां से वहां घूमते रहते हैं ग्लोब टोटर्स और फिर भारत में आएंगे ऊपर ऊपर से देख कर के हमको गाली देकर जाएंगे तो यह तो कोई भी कर सकता है एवरी बडी कैन शो व्ट इविल इज बट ही इज द फ्रेंड ऑफ मैनकाइंड हु फाइंड्स वे आउट ऑफ द डिफिकल्टी सभी लोग बता सकते हैं कि बुराई क्या है अनिष्ट क्या है किंतु मानव समाज का मनुष्य जाति का सही मित्र वही है जो कि हमको इस बुराई से इस मुश्किल से रास्ता बाहर करके दिखाए लाइक द ड्राउनिंग बॉय एंड द फिलोसोफर जैसे कि एक पानी में डूब रहा हुआ बच्चा और एक दार्शनिक फिलोसोफर व्हेन द फिलोसोफर वाज लेक्चरिंग हिम द बॉय क्राइड टेक मी आउट ऑफ द वाटर फर्स्ट उने वो बच्चा ब डूब रहा है पानी में और दार्शनिक उसको लेक्चर दे रहा है तब यह बच्चा चिल्लाकर कहता है पहले तो मुझे पानी से तो बाहर निकालो सो अवर पीपल क्राई तो वैसे ही हमारे लोग बेचारे चिल्ला चिल्ला करके भारतवासी कह रहे हैं वी हैव हैड लेक्चर इनफ हमने बहुत सारे लेक्चर सुन लिए सोसाइटीज इनफ बहुत सारी रिफॉर्म सोसाइटी देख ली पेपर्स इनफ बहुत सारे न्यूज़पेपर आर्टिकल पेपर प्रेजेंटेशन देख लिए वेयर इज द मैन हु विल लीड अस हैंड टू ड्रैग अस आउट किंतु अभी वह लीडर कहां है वह पुरुषोत्तम कहां है वह मनुष्य कहां है जो हमारा हाथ पकड़ करके इस दलदल में से हमको बाहर निकाले वेयर इज द मैन हु रियली लव्स अस कहां है वह आदमी जो कि सही सही हमको अपने हृदय से प्रेम करता है वेयर इज द मैन हु हैज सिंपैथी फॉर अस आई दैट मैन इज वांटेड कहां है वह मनुष्य जिसके हृदय में हमारे प्रति सहानुभूति है हां तरह का आदमी हमको चाहिए और वह मनुष्य कौन था तो वह दक्षिणेश्वर के परमहंस और उनके शिष्य स्वामी विवेकानंद अ तो आज यही तक अभी कल कल तो नहीं मंडे को फिर से मिलते हैं ओम शांति शांति शांति हरि ओम तत्सत श्री राम कृष्णर्पण मस्तु जद एक कंट्रास्टिंग एग्जांपल देना

प्रश्न: बलपूर्वक सुधार बनाम जमीनी स्तर पर विकास - इन दोनों की तुलना करते उदाहरण दीजिए।

है तो ज जैसे कि अभी यह मान लीजिए कि य रोपस पियर है रोपस पियर है ना कि यह नेपोलियन था ना किय हिटलर था इन लोगों ने जोर जबरदस्ती करके समाज को सुधारने का कार्य किया कंपेयर टू दैट अपने कनखल के वह निश्चल महाराज निश्चलानंद जी और यह अपने कल्याण महाराज देखिए कि उनके बारे में हमारे अलावा किसी को नहीं पता है वह सर्वागानंद जी ने वह लिखा बोलकर के इवन हमको भी उसी लिए पता है तो अभी देखिए ऐसा होता है कि जब कोई फेमस साधु होता है तो उनका नाम और दूसरे साधु को हम नहीं देते हैं जनरली ऐसा होता है क्योंकि अभी जैसे कि वह आत्मानंद के बारे में हुआ था आत्मानंद जी स्वामी जी के डिसाइल थे तो अभी यह नाम तो रिजर्व हो गया फिर से और किसी को नहीं दिया जाएगा तो अभी किंतु वह जो अपने नारायणपुर वाले नारायणपुर वाले महाराज उन्होंने अपने बाहर जाकर सन्यास लिया अपना नाम आत्मानंद रखा फिर जब उनको ऑर्डर में लेने का हुआ तब यह बात हुई कि देखिए आत्मानंद नाम तो रिजर्व है हम यह नाम और किसी को फिर से नहीं देंगे तो उन्होंने कहा देखिए मैं इतने साल से यहां पर कार्य कर रहा हूं सबको मेरा नाम आत्मानंद के रूप में पता है अभी यदि आप मेरा नाम चेंज करेंगे तो यहां के लोग मेरे बारे में डाउट करना शुरू कर देंगे क्यों नाम बदला तो फिर ठीक है कि उनको कहा गया कि यह आत्मानंद नाम रखिए अभी जैसे ही इसी तरह का एक नाम है प्रभानंद तो अभी प्रभानंद अपने वाइस प्रेसिडेंट थे तो अभी यह यह नाम जब दिया गया है तो नेचुरली हम मान लेंगे कि इसके पहले यह नाम किसी प्रोमिन साधु को नहीं दिया गया किंतु बाद बाद में या तो बाद में या पहले से ही पता होगा व्हाट एवर प्रभानंद जी बोलकर के पहले भी एक थे जिन्होंने यह शिलोंग वगैरह वो जो नॉर्थ ईस्ट में वो ट्राइबल लोगों के साथ में इतना कार्य किया था ट्राइबल लोगों के बीच में ही वाज अ लेजेंड इवन हमको भी नहीं पता है कि इतने प्रोमिन है बोल कर के यह दूसरे प्रभानंद जी को नाम दिया था हमने बाद में इनके बारे में बहुत कुछ डिटेल मुझे पता चली थी तो ऐसे कितने ही सा है यहां की ही मैं बात कर रहा हूं लोकल मैं मैं कुछ समय पहले यहां पर गांव में गया था वहां पर यह डिवटी कॉन्फ्रेंस कन्वेंशन था छोटा सा गांव है मैंने इतना बड़ा पडो लगाया है जाकर के मैंने वो पूछा उसके ऑर्गेनाइजर को अरे 100 200 लोग आएंगे एट द मोस्ट ये इतना बड़ा पेंडल तोमका दोती हज लोग आ जाएंगे इतना बड़ा पेंडल क्यों बनाया तो बोला महाराज दोती हज आएंगे मैंने तो मुझे विश्वास नहीं हुआ फिर जब जब कन्वेंशन स्टार्ट हुआ दो से 3000 डिवटी वहां पर बैठे हैं फिर मैंने किसी को पूछा कि अच्छा बताओ इतने रिमोट गांव में इतने सारे लोग कैसे इकट्ठा हो सकते हैं तब बोला कि वह राजमंडी में एक महाराज थे फिर वह महाराज इस तरह से बहुत सारा गांव-गांव में कार्य किए हैं उसकी वजह से पास के सभी गांव में हमारा बहुत अच्छा नाम है तो मुझे अभी वो महाराज का नाम उस समय भी नहीं पता था बोला अभी मैं भूल गया हूं तो ऐसे तो कितने ग्राउंड लेवल पर काम करने वाले हैं जिन्होंने रामकृष्ण मिशन का फाउंडेशन डाला है तो साथ साथ में देश का भी तो फाउंडेशन डाला है सो लाइक दिस कि आप ऊपर से जोर जबरदस्ती करके रिफॉर्म करेंगे यहां पर नेमलेस फेस फेसलेस डेडिकेटेड वॉलंटस की सेना अभी अपना यह विनायक लोहानी व उनका भी तो एक स्टोरी है कि वह अपना करियर छोड़ कर के वह मध्य प्रदेश के इतने सारे लड़कों को इतना अच्छा कार्य कर रहे हैं स ऐसे लोग देश को बनाते

प्रश्न: समाज सेवा कार्य में सफलता का मापदंड चरित्र निर्माण और आध्यात्मिक प्रगति है

हैं स्पिरिचुअलिटी बिना आप सोशल सर्विस करना बड़ा मुश्किल है मेरा खुद का अनुभव है माइंड पूरा पॉलिटिक्स में चला जाता है अदर वाइज आप अपने को संभाल ही नहीं पाएंगे वह जो एक बिना किसी एक्सपेक्टेशन के कार्य करना बिना रिजल्ट के कार्य करना रांची में मैं प्रतिदिन मुझे इस तरह का फ्रस्ट्रेशन होता था कि मैं जितना इनपुट दे रहा हूं उसके सामने आउटपुट कुछ नहीं है वह फ्रस्ट्रेशन मेरा हमेशा से रांची में लगा था आज कहीं जाकर के मैंने जैसा कैसे कल बात हुआ परसों दिन अभी मैं रांची जाऊंगा मैं वही करूंगा जो उस समय कर रहा था किंतु फ्रस्ट्रेशन नहीं होगा बिकॉज आई हैव लर्न बेटर अभी यह स्वामी जी की मां का ही आप देखिए उदाहरण मने सभी मां मां जितनी भी है अपने बच्चे को बड़ा करती है वह बिना किसी एक्सपेक्टेशन के ही तो करेगी बच्चा का जीवन भविष्य क्या होगा किसको पता नाही ही वो साधु संत बनेगा पॉलिटिशियन बनेगा क्रिमिनल बनेगा हु नोज व्हाट विल बी द रिजल्ट स्वामी जी नी मा माने इतना मेहनत करके बच्चे को बड़ा किया आखिर में तो कुछ नहीं मिला वो बेलूर मट से 000 उधार लेकर के के जो उनके लिए छोटा सा एक घर बनाया फिर उधर दे देते स्वामी जी का जान निकल गया बेलूर मठ में बोला मां के चार पास में जाके बैठो मां शारदा देवी आई है तो उनके पास जाकर [हंसी] बैठो रांची में जो एक बहुत बड़ा

प्रश्न: कभी-कभी मुझे लगता था कि रामकृष्ण मिशन के साधु समाज सेवा के लिए पर्याप्त मेहनत नहीं कर रहे हैं।

फ्रस्ट्रेशन मेरा क्या था कि हम लोगों ने गांव लेवल पर वह समिति बनाई है विवेकानंद सेवा समिति अभी उनका काम है कि वह हम जो भी प्रोजेक्ट लाएंगे गांव में उसको प्रॉपर इंप्लीमेंटेशन देखें कि लाभार्थी कौन है ठीक सिलेक्ट करना फिर प्रॉपर इंप्लीमेंटेशन हो रहा है सुपरवाइज करना हम लोग तो चले जाएंगे फिर रांची तो गांव लेवल पर सुपरवाइज कौन करेगा फीडबैक कौन देगा मॉनिटरिंग कौन करेगा वह बीच-बीच में हमको आकर के बताएगा कि अभी स्किल अपडेशन करना है सब कुछ तो वह समिति जब काम नहीं करती है या समिति में जब हमको करप्शन दिखेगा तब मुझे बड़ा फ्रस्ट्रेशन होता था मैंने कहा आप लोगों के लिए हम सब इतना सब कुछ कर रहा है अभी आपकी ही इच्छा नहीं है डेवलप होने की तो फिर हम क्या कर सकते हैं हमारे हाथ तो बंधे हुए हैं हम तो आते हैं रांची से एक घंटा बिताएंगे गांव में एक सप्ताह में एक बार मुश्किल से हो तो आ सकते हैं कभी-कभी महीने में एक बार आना हुआ बाकी का तो आपको देखना पड़ेगा रिस्पांसिबिलिटी लेना पड़ेगा तो रिस्पांसिबिलिटी लेंगे ही नहीं व जो ऑफिस बेयरर है अपना अपना देख कर के सेल्फिश वो रहेंगे तो वो जो ऑफिस बिरस में जो सेल्फिश में देखता था व्हिच वास मोस्ट फ्रस्ट्रेटिंग कि हम लोग इतने सेल्फिश होके सेल्फलेस होक काम करते हैं तुम लोग सेल्फिश क्यों हो किंतु अभी ये उनका जो जन्म जन्मांतर का जो है वोह थोड़ी ना आप एक महीने में एक साल में एक जन्म में भगा देंगे बहुत एस्पेक्ट है एक तो सेंट्रल

प्रश्न: यदि सरकार ईमानदार है तो वह साधुओं से भी बेहतर तरीके से लोगों की सेवा कर सकती है।

गवर्नमेंट या तो फिर सेंट्रल अथॉरिटी फिर वो किसी भी फॉर्म में हो मोनार्की डिक्टेटरशिप डेमोक्रेसी व्हाट एवर एक स्ट्रांग सेंट्रल अथॉरिटी होनी चाहिए दूसरा कि एक सॉलिड ग्राउंड गेम होना चाहिए भारत में आजकल देखिए कि यह प्राइम मिनिस्टर इतना कर पा रहे हैं तो उसका रीजन यह है कि बहुत ही स्ट्रांग सोशल स्ट्रक्चर गवर्निंग स्ट्रक्चर हमने खड़ा किया है यह आईएएस ऑफिसर है ये फिर ये स्टेट लेवल पंचायत लेवल पे जो इतने सारे ऑफिसर हैं इंडिया की ब्यूरोक्रेसी कितने ढ़ दो करोड़ तो होंगे इसमें तो यह पूरा स्टिल फ्रेम है जो कि काम कर रहा है अभी इतने सारे लोग एक साथ में कंसेंसस में आके कार्य करें उसके लिए भी तो एक स्पिरिचुअल फाउंडेशन होना चाहिए जो कि पिछले 200 साल से हम डालते आए हैं बोलकर के अपने पास में ये अ एडमिनिस्ट्रेटिव स्टील फ्रेम खड़ा है आज पाकिस्तान है या अफगानिस्तान है या बांग्लादेश है या अफ्रीका है जाकर के देख लीजिए उन्होंने कोई स्पिरिचुअल ग्राउंड रूल्स खड़े नहीं किए थे फाउंडेशन नहीं डाला था तो वोह गवर्निंग स्टील फ्रेम भी नहीं है वो कुछ बिजनेस हाउसेस है कुछ बड़े है जो कि अपना हेतु सिद्ध करते हैं गवर्नेंस के नाम पे ग्राउंड लेवल पर कुछ उसका बेनिफिट नहीं है सो यदि स्पिरिचुअलिटी होती हो तो ओवर पीरियड ऑफ सेंचुरी आपको एक अभी अमेरिका यूरोप वहां की गवर्नमेंट चाहे सेंट्रल गवर्नमेंट चाहे कितनी ही करप्ट हो यह ट्रंप इतना सब पागलपन कर रहा है तो भी अमेरिका जाने के लिए पूरी लंबी लाइन खड़ी है क्यों क्योंकि हमको यह भरा पता है कि एटलीस्ट जो ब्यूरोक्रेसी है वो इट इज वर्किंग प्रॉपर्ली आर्मी वर्किंग प्रॉपर्ली ये जुडिशियस सिस्टम इज वर्किंग एज इट शुड बी जो कि उनको ज्यादा जिसपे मतलब वो जो ब्यूरोक्रेसी होती है वो कैसी है उसके ऊपर में बहुत कुछ निर्भर करता है रदर देन क्या कि सेंट्रल गवर्नमेंट ब्यूरोक्रेसी ठीक-ठीक कार्य करती है तो सेंट्रल गवर्नमेंट करप्ट भी निकल जाए एक दो ट्रंप जैसा एक दो पागल भी आ जाए अमेरिका उसको सहन कर लेगा जबकि रशिया है वगैरह जहां पे ब्यूरोक्रेसी ही नहीं है एवरीथिंग डिपेंड्स ऑन सेंट्रल गवर्नमेंट सो और यह ब्यूरोक्रेसी या तो फिर यह जो स्टील फ्रेम जो होती है गवर्नेंस की अभी जैसे वोह मनसुख मास्टर की हमने बात की तो वह एक एजुकेशन इंस्पेक्टर था वो यदि करप्ट होता तो वह इतना अच्छा काम देख कर के भी कहता कि मैं इसको डिमोट कर देता हूं क्यों क्योंकि गांव वालों ने रिक्वेस्ट की है गांव वालों ने कुछ ब्राइब दिया है किंतु वो ऑनेस्ट था बोलकर के मनसुख मास्टर को प्रमोट करके आया सो ऐसे लोग मतलब जो ग्राउंड लेवल प कार्य करते हैं उनका चरित्र निर्माण सिर्फ आध्यात्मिकता की वजह से ही होता है सो इट्स अ लॉन्ग गेम कि आपको सेंचुरी आफ्टर सेंचुरी मनुष्य निर्माण कैरेक्टर बिल्डिंग करते जाना है फिर दिस पीपल विथ ग्रेट कैरेक्टर दे विल मेक ए ग्रेट नेशन नहीं

प्रश्न: उस समय तक हम जीवित भी नहीं रहेंगे

रहेंगे वो जो गुजराती में एक कहानी हम हम लोग पढ़ते थे आपके समय थ नहीं पता नहीं पाठ्य पुस्तक में एक बूढ़ा आदमी वह आम का पेड़ लगा रहा है तो एक बच्चा जाकर पूछता है कि आप आम का पेड़ लगा रहे है यह बड़ा होगा आपको तो आम खाने को नहीं मिलेगा तब तक तो मर जाएंगे वो बोलते है मेरे बच्चे तो खाएंगे

प्रश्न: आखिर में तो सेवा कार्य ऑब्जेक्टिव से सब्जेक्टिव ज्यादा है

फॉर सब्जेक्टिव से वो ऑब्जेक्टिव होगा माने यह तो फीडबैक लूप है यदि सब्जेक्टिव प्रॉपर हो रहा है तो टुमारो वी विल टेक इट्स फ्रूट टुवर्ड्स ऑब्जेक्टिव लेवल आल्सो उसका रीजन क्या है कि इंडियन

प्रश्न: हम मानते हैं कि लोकतंत्र होने के कारण भारत चीन से अधिक डिसेंट्रलाइज़ होना चाहिए। लेकिन चीन में स्थानीय सरकार का खर्च केन्द्र सरकार से अधिक है। भारत में अधिकतम खर्च केन्द्र सरकार द्वारा किया जाता है। चीन हमसे ज्यादा ग्रासरूट लेवल पर काम करता है.

एडमिनिस्ट्रेटिव सर्विस बनी थी अंग्रेजों के द्वारा भारत को एक्सप्लोइट करके भारत के रिसोर्सेस एक्सट्रैक्ट करके ब्रिटेन में ले जाने के लिए जबकि चाइना की एडमिनिस्ट्रेटिव सिस्टम बनी है ग्रास रूट लेवल पर डेवलपमेंट करने के लिए तो अभी हम वह एडमिनिस्ट्रेटिव रिफॉर्म अभी तक भारत में इतना नहीं आया है इंटीग्रिटी है एडमिनिस्ट्रेशन में उसना कोई प्रश्न नहीं है करप्शन भी है इंटीग्रिटी भी है दोनों है 50-50 किंतु उसका जो पूरा एक ये है ना अभी जैसे देखिए चीफ मिनिस्टर के ऊपर में गवर्नर रहता है गवर्नर का क्या काम है आपका यदि चीफ मिनिस्टर है तो झूठ मूट का एक कांस्टीट्यूशनल पोजीशन बना के रखा है प्रेसिडेंट का क्या काम है वो ब्रिटेन में वह जिस तरह से एक प्राइम मिनिस्टर है एक किंग है तो किंग की भूमिका बनाने के लिए हमने एक प्रेसिडेंट को बिठा दिया है जूट मुट का इतना पैसा खर्च होता है और कांस्टीट्यूशनल रोल भी ऐसा एडमिनिस्ट्रेटिव रोल कुछ नहीं है वैसे पमप एंड लग्जरी एंड शो तो चाइना में क्या है कि मने लीन एंड मीन वो जैसे इंग्लिश में कहते हैं बनाया है सिस्टम जिससे कि वो कार्य करे झूट मूट का वो आपका वो एक पैरेलल स्ट्रक्चर वो नहीं है जो कि उसका एक दूसरा कार्य हो कि वहां पे लोकल रिसोर्सेस एक्सट्रैक्ट करर है सो वो हमको अभी भी करना है कि यह पूरी सिस्टम को रिवर्स कर दो अब ग्राउंड लेवल से लेकर के रिसोर्सेस एक्टैक करके अभी जमींदारी सिस्टम ब्रिटेन ब्रिटिश लोगों ने स्टार्ट की जमींदार का क्या काम है उसके अंडर में जितने भी गांव है वहां से इतना आपको वो टैक्स निकाल करके देना होगा ब्रिटिश गवर्नमेंट को अभी आप किस तरह से भी टक्स ले कोई फर्क नहीं पड़ता लोगों को मारे पीटे छीन ले यह कर दे लोगों की बात सुनने वाला कोई नहीं और जो जमींदार लीनियंट है ज ज्यादा दया दिखाता है उसको हटा के दूसरा जमींदार को बिठा दिया तो वने परपे चुली एक्सप्लोइटेशन करने के लिए मशीन बना थाय सब पते तो पता चलता हैना डिकेम कोरा तोड़ के उसको करना हमने नाम चेंज की दिया इंडियन सिविल सर्विस का इंडियन एडमिनिस्ट्रेटिव सर्विस किया किंतु उसका जो बेसिक कैरेक्टर है वह अभी भी वोह एक्स्टेक्स्ट है उसका

प्रश्न: जैसे की डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर

कैरेक्टर कलेक्ट करने वाला बिल्कुल ठीक का डिस्ट्रिक्ट मैजिस्ट्रेट डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर