Class
ओम स्काय धर्मस्य सर्व धर्म स्वरूप अवते नम आज सुबह को मैं देख रहा था हमारा फर्स्ट क्लास जो कि रिकॉर्डेड क्लास कौन सा है तो 30 मई 2022 का है अर्थात इसके कुछ समय पहले आई थिंक मैंने इस तरह से ऑनलाइन क्लास लेने की शुरुआत की थी अ अभी जो जो फर्स्ट स्टूडेंट है अपने वो अभी नहीं आ रहे हैं साउथ इंडिया से है बीच-बीच में आते हैं तो उस समय पेंडम वगैरह चल रहा था तो उन्होंने रिक्वेस्ट किया मैं उस समय यह जो सुबह स्वामी जी के कोटेशंस भेजता था तो बीच-बीच में फोन करके बोलते थे कि आप यह जो कोटेशन भेजा इसका क्या अर्थ है फिर यह जो कोटेशन भेजा उसका क्या अर्थ है तो फिर एक दिन मैंने कहा कि इस तरह से रैंडम कुछ भी समझाने से बेटर है कि ऑनलाइन क्लास किए जाए उस समय यहां पर पब्लिकेशन भी बंद था और कोई एक्टिविटी भी नहीं थी मैं अकेला यहां पर बैठा था पूरा लॉकडाउन भी था तो मैंने कहा कि चलो कुछ इसकी बजाय कुछ किया जाए तो वह क्लास स्टार्ट हुए फिर स्टार्ट हुए हुए कुछ समय तक तो वह अकेले आते थे उसके बाद में यह मुन मुंदी है वगैरह एक के बाद एक जुड़ते गए और आज देखिए कि दो साल हो गए हैं अपना क्लास कितना सुंदर रूप से चल रहा है मैंने कभी ऐसा इमेजिन नहीं किया था कि यह क्लास इतना रेगुलर चलेगा या तो फिर इतने सारे प्रतिदिन हमारे अटेंड करने वाले सभी आप इसके साथ में जुड़े सो दिस इज समथिंग कंपलीटली अन एक्सपेक्टेड और ठाकुर की ही इच्छा है कि चलो सुबह को उठ कर के ही हम सबको ठाकुर मा स्वामी जी का स्मरण मनन करने का यह मौका मिलता है यह मैं आज सुबह को सोच रहा था अच्छा स्वामी विवेकानंद का ज्ञान योग कॉस्मस के दो जो लेक्चर है उसके आखिरी चरण में हम लोग पहुंच गए हैं और यह लास्ट पैसेज है कॉस्मो माइक्रो कजम का एंड दिस इज टिपिकल स्वामी जी टिपिकल स्वामी विवेकानंद द फ्लाइट ऑफ इंस्पिरेशन इसमें जितना भी फिलोसोफी है जितना भी इंस्पिरेशन है सब मिलाकर के यह फाइनल लास्ट पैराग्राफ स्वामी जी का है तो इसको हम पढ़ते हैं कल हमने देखा कि स्वामी जी कहते हैं कि दूसर को दोष देने का कोई अर्थ नहीं है हमारे साथ में जो कुछ भी होता है वह हमारे पूर्व जन्म के ही कर्मों का परिणाम है या तो फिर हम जो चॉइस हम अपने जीवन में करते हैं यह उसका परिणाम है जैसे मैंने कुछ समय पहले बताया था कि दो लड़कों को मैं जब स्कूल में था मैं पहचानता था एक लड़का था बड़ा ही तूफानी था कभी भी पढ़ाई लिखाई नहीं करेगा तो और थोड़ा सा क्या है कि तीन चार साल फेल हुआ है तो हम लोग तो जब उस सिक्स्थ के सेवंथ कक्षा की बात कर रहा हूं वो हमसे हाइट और बॉडी में भी ज्यादा था क्योंकि वो एक्चुअली होना चाहिए था एट या नाइन में य है पढ़ रहा है सिक्सथ या सेवंथ में तो टीचर ने उसको मॉनिटर बना दिया था अभी वो मॉनिटर होने से बाकी सबको तो धमका था किंतु मैं थोड़ा सा डरपोक था ना चश्मे बश मेंे पहनता था ज्यादा किसी के साथ बात नहीं करता था तो मेरे प्रति उसका थोड़ा सा एक प्रोटेक्टिव उसका एक था एटीट्यूड तो और कोई भी आकर जद मुझे धमक देगा तो वो जाकर के मेरा पक्ष लेकर सामने वाले को डाट तो अच्छा हम दोनों का एक फ्रेंडशिप था और दूसरा लड़का मैं एक देखता था कि हमारी स्कूल के सामने ही हालांकि हमारी स्कूल में नहीं पढ़ता था स्कूल के सामने रहता था तो मैं मेरा मित्र था इसलिए मैं हमेशा उसके साथ थोड़ा बहुत बातें करता रहता था तो उसको फर्स्ट फ्लोर पे खिड़की है खिड़की के पास में बैठक वह पढ़ाई लिखाई करेगा सामने स्कूल है स्कूल का बड़ा सा मैदान है हजार ़ हजार लड़के स्कूल शुरू होने से पहले खत्म होने के बाद रिसेस में खेल खेलते हैं हल्लागुल्ला मचाते हैं व किसी भी चीज के ऊपर में उसकी नजर नहीं वह खिड़की के पास बैठ कर के एक मन से वह पढ़ाई लिखाई करता था तो वह उस समय परीक्षा में बोर्ड की परीक्षा में टॉपर हुआ था मैंने सिक्स्थ या सेवंथ रैंक उसको मिला था 12थ की बोर्ड की एग्जाम में और वह जो मॉनिटर था जो हमारा लड़का उसको मैं कुछ सालों के बाद में वह कहीं से जा रहा था तो देखा रास्ते में वह पान के गल्ले पर बैठ कर के खड़े-खड़े वो बीड़ी फूक रहा है वो लेबर लोग जो होते हैं ना वो वेट करते हैं कि कौन आ कर के उनको ले जाए व कोई भी काम करवाने के लिए तो इस तरह से खड़ा था बीड़ी फूंक रहा था मुझे देख कर के मेरा नाम दे कर के पुकारता है अरे तुम क्या कर रहे हो तो मैं तो उसको देखकर के हालांकि आश्चर्य चकित हो गया किंतु समझ भी गया कि उसका करियर इसी डायरेक्शन में जाएगा पढ़ाई लिखाई तो कभी किया नहीं है सो हमारी चॉइस हमको बनाती है किंतु साथ-साथ में ही स्वामी जी को हमने जिस तरह से स्टडी किया है हमारे सामने जो भी कोई विपरीत परिस्थिति आती है तो हम क्या उसके सामने घुटने टेक देंगे क्या यह कहेंगे कि हमारी भूतकाल की जो चॉइस है उसकी वजह से आज हम यहां पे हैं बिल्कुल नहीं यदि यह साइंस पूर्व जन्म का हमको यह सिखाता है कि हमारे कर्म के ही परिणाम से आज हम जो है तो भविष्य भी तो हमारे हाथ में है व जो लड़का जो कि मॉनिटर हमारे स्कूल का अभी वह लेबर के रूप में वहां वहां पे खड़े रह कर के वह लेबर का काम करता है उसके पास में चॉइस है कि एडल्ट एजुकेशन प्रोग्राम में वह शामिल हो जाए गवर्नमेंट के बहुत सारे प्रोग्राम इस तरह से चलते रहते हैं थोड़ा सा स्टडी करें थोड़ा सा अप्लाई करें अपने को यह वोकेशनल ट्रेनिंग कितना सब कुछ चलता है वो कहीं पे इलेक्ट्रॉनिक्स का सीख जाए आजकल देखिए ये अपने घर में कुछ बिजली का कुछ मरम्मत करनी है प्लंबर चाहिए कड़िया काम करना है तो ये इलेक्ट्रिशियन प्लंबर कड़िया काम वो लोग वैसे वीआईपी हो गए हैं उनको बुलाने से भी नहीं आते वो बुलाने से भी सीधा 400 500 विजिट का ले लेंगे वो प्लंबर को देखिए यह तो हमको अनुभव है मैं तो यह पब्लिकेशन चलाता हूं बहुत बड़ा बिल्डिंग है पब्लिकेशन का कोई भी प्रॉब्लम होने से मैं तो सर पे ही हाथ रख देता हूं अभी उसको बुलाना है वह कब आएगा कब क्या करेगा है ना तो यह लोग तो बहुत रुपया कमाते हैं और थोड़ा सा अप्लाई करो अपने माइंड को कोई विद्या सीख जाओ कोई स्किल सीख जाओ भविष्य आपका अपने हाथ में है तो यह साइंस आपको यदि यह बताता है कि आज का आपका वर्तमान मायूस क्यों है तो यही साइंस आपको यह शक्ति भी देता है कि आपका भविष्य वो उज्जवल हो सकता है यदि आप उसके लिए प्रयास करें तो तो यह है स्वामी जी का इंटरप्रिटेशन ऑफ पूर्व जन्म और कर्म योग और कर्म कर्म का सिद्धांत कर्म योग नहीं कर्म का सिद्धांत तो अभी आगे पढ़ते हैं स्वामी जी क्या कहते हैं दिस इज द ओनली सॉल्यूशन ऑफ द प्रॉब्लम यह जो हमने देखा कि पूर्व जन्म का सिद्धांत उसको किस तरह से अप्लाई करें कर्मों को किस तरह से अप्लाई करें यह एक ही सोल्यूशन है प्रॉब्लम का दोज ट ब्लेम अदर्स एंड लास्ट द नंबर ऑफ देम इज इंक्रीजिंग एवरी डे आर जनरली मिजबिल स ब्रेन जो दूसरों को दोष देते हैं अपनी दुरावस्था के लिए और दूसर को दोष देने वालों की संख्या बढ़ती ही जाती है व दे आर मिजबिल टू ट पास थ्रू देर ओन मिस्टेक्स उन्होंने अपनी ही गलतियों से अपने को इस मोड़ पर लाकर के खड़ा कर दिया है एंड एंड ब्लेम अदर्स दूसरों को दोष देते रहते हैं बट दिस डज नॉट ल्टर देयर पोजीशन किंतु दूसरों को दोष देने से तो उनकी जो परिस्थिति है वह बदलने वाली नहीं है इट डज नॉट सर्व देम इन एनी वे दोष देने का कोई लाभ नहीं है मैं यदि दूसरों को दोष दूंगा मुझे कोई भी लाभ नहीं होने वाला है दिस अटेंप्ट टू थ्रो द ब्लेम अपॉन अदर्स ओनली विकन देम द मोर दूसरों को दोष देते रहने से उनकी खुद की कमजोरी दिन प्रतिदिन बढ़ती ही जाएगी यदि आज मेरे साथ में जो कुछ भी हो रहा है उसके बारे में अभी जैसे देखिए सुबह को हम साधना की दृष्टि से थोड़ा सा इस बात की चर्चा करें कि सुबह को उठकर के हमको आधा घंटा एटलीस्ट यदि प्रतिदिन हम साधक है बोलकर के आधा घंटा एटलीस्ट थोड़ा सा मरण मनन निदिद्यासन में जप में स्वाध्याय में सद ग्रंथ के पाठ में पूजा में ईश्वर के चिंतन में लगाना चाहिए यह आइडियल है सुबह को यह जो त्रि संध्या कहते हैं ना कि सुबह शाम फिर ये मध्यरात्रि तो इस तरह से त्रि संध्या को यदि त्रि संध्या छोड़ दीजिए सुबह और शाम यदि हो पाए तो भी बहुत है हमारे साधक जीवन के लिए किंतु बड़ा ही रेयरली ऐसा होता है कोई गृहस्थ साधक और आज इवन सन्यासी साधक भी ऐसे मिलेंगे कि जो कि नियमित रूप से अपना साधन भजन का प्रवाह जिनका कि बहता रहता हू अभी कुछ ही दिनों पहले मेरी किसी एक साधक के साथ में बात हो रही थी तो मैंने उसको कहा कि देखो राम कृष्ण संघ में राम कृष्ण श्री राम कृष्ण के ये जो हम फॉलोअर्स है हम लोगों के लिए जब ध्यान करना तो बड़ा ही सहज है एक कथामृत खोल कर के बैठ जाओ किताब और एक हाथ में कथामृत रखो एक हाथ में जपमाला रखो बस कथामृत पढ़ते जाओ साथ-साथ में जपमाला चलाते जाओ देखो कि तुम्हारा दिन तुम्हारे साधना कितना सुंदर रूप से सहज रूप से बढ़ता जाता है जिस समय तुम्हारा मन यह जब पे नहीं लगेगा माला पे नहीं लगेगा उस समय मन को कथामृत में ठाकुर की वाणी में डाल दो और ठाकुर की वाणी में से मन यदि भटकने लगता है तो जप में लगा दो माला के ऊपर में कंसंट्रेट कर दो ये कथामृत और अपनी जप माला यह दोनों साथ-साथ चलाओ देखो कि आपका जीवन कितना सुरूप हो जाता है और आजकल तो क्या है कि ऑडियो बुक्स बनने लगे हैं जो कि हम साधकों के लिए बहुत बड़ा वरदान है हम लोग तो कोई इतने उच्च कक्षा के साधक नहीं है कि पद्मासन लगा कर के शरीर ऐसा सीधा करके आंख बंद करके वह कहीं ध्यान में डूब जाए जप में डूब जाए ना कि हृदय में जो पद्म है उसके ऊपर में मन को कंसंट्रेट कर दे इतनी कैपेसिटी आजकल कितने लोगों के पास में है तो हमारे लिए सहज सा उपाय है यह ऑडियो बुक है वो उसको सुनते जाओ और साथ-साथ में ही जप करते जाओ आराम से देखेंगे कि आपका एक घंटा कहां पर बीत गया है कुछ पता नहीं चलेगा ठाकुर की वाणी का श्रवण ठाकुर की वाणी का पाठ एक जप करने के ही समान है कथामृत है मां की बातें हैं फिर यह स्वामी जी का कंप्लीट वर्क से और आजकल तो टेक्स्ट टू स्पीच यह स्वामी जी का पूरा कंप्लीट वर्स डिजिटल फॉर्मेट में अवेलेबल है उसको टेक्स्ट में से स्पीच में कन्वर्ट कर दो इस तरह की ऐप आती है और स्वामी जी का कंप्लीट वर्क सुनते जाइए सुनते जाइए और साथ-साथ में जब भी करते जाइए देखिए कि कितना सुंदर रूप से हमारा दिन बीतता है कोई बहुत बड़ी बात नहीं है रामकृष्ण संघ के साधकों को आज जब ध्यान करने में या आध्यात्मिक यह सब समय बिताने में किंतु यह नहीं करके यदि हमने दुनिया भर को दोष देना शुरू किया कि अरे भाई मेरा तो काम ही इतना टेंशन वाला है कि जैसे ही मैं आंखें बंद करता हूं कि दुनिया भर की मुसीबतों का टोपला मेरे सर के ऊपर में आकर के व भगवान डाल देते हैं फिर यहां पे भगवान को दोष देंगे ना कि किसको दोष देंगे मैं जहां पर काम करता हूं वहां पर लोग इस तरह के हैं मेरे परिवार में इस तरह की समस्या है तो ऐसा जद कहना कि पहले यह सब समस्याएं समाप्त हो जाए बाद में मैं जब ध्यान साधन भ करूंगा वो उस तरह से कहने की तरह है कि पहले मैं स्विमिंग सीख लूं बाद में मैं पानी में गिरंगा ऐसा तो कभी होने वाला नहीं है पहले कैसे भी करके पानी में जंप लगा दो ठाकुर आपको ऑटोमेटिक स्विमिंग सिखा देंगे हाथ पैर मारना ठाकुर ऑटोमेटिक सिखा देंगे तो यह दूसरों के ऊपर में दोष का टोपला डालना कि हां मैं साधन भजन नहीं कर पा रहा हूं जब ध्यान नहीं हो रहा है तो दूसरे लोग जिम्मेदार है इससे तो हमको ही फिर प्रॉब्लम है हम ही लोग हम ही लोग फिर इस समस्या में पड़ेंगे कि इस जन्म में कुछ हुआ नहीं तो यह जिस इस जन्म की जिस चक्की में हम पिसे हैं नेक्स्ट जन्म में फिर हम उसी चक्की में पिसते जाएंगे तो इस तरह से क्यों करना है थोड़ा सा जिम्मेदारी अपने सर पर ले लो थोड़ा सा अपने मन को डिसिप्लिन करो थोड़ा सा अपना विल पावर बढ़ाओ मेरा खुद का जो एक सबसे बड़ा टेंप्टेशन है कि जब मैं किताब खोल कर के बैठने का सोचता हूं तो मुझे पढ़ना पढ़ ने के लिए मेरे पास में बहुत सारे विषय हैं मेरे पास में बहुत सारी किताबों का कलेक्शन है तो ये अपने धार्मिक किताबों की वजह फिर यह जो बाकी सब किताबें है ना उसके प्रति यह तो अपना मन राजसिक होने से ऑटोमेटिक उस किताब की ओर ज्यादा जाएगा कि हां चलो अभी मैं कुछ समय पहले एक ऑयल के ऊपर में यह जो पेट्रोलियम है ना पेट्रोलियम का जो डिस्कवरी यह 19वीं सदी के शुरुआत में जो हुआ और फिर इसके बाद में किस तरह से पेट्रोलियम बिकम आज जिओ पॉलिटिक्स का सबसे एक इंपॉर्टेंट हिस्सा ये पेट्रोलियम ट्रेड बन गया है तो उसके ऊपर मैं आखिरी 100 साल की एक हिस्ट्री है वो मैं कुछ समय पहले पढ़ रहा था तो अभी रात को 1112 बजे मेरी नींद खुल गई जनरली ऐसा होता है तो मैं वो किताब खोल कर के पढ़ना शुरू कर दे रहा हूं कर दे रहा हूं फिर सडन सुबह कु 3:30 वो यहां पे घंटी बजती है मंगल आरती के लिए तो एकदम सडन मैंने सोचा कि अरे इतनी सुंदर रात है यहां पर इतनी शांति है मंदिर के पास में ही मेरा कमरा है तो वह इतनी शांति इतना एक मैं अभी फिजिकली भी अभी इस तरह से हूं अभी जैसे-जैसे उम्र भी बढ़ती जाएगी ना फिर वह स्थिर होकर के पढ़ने की कैपेसिटी भी नहीं रहेगी फिजिकल प्रॉब्लम इतने शुरू हो जाएंगे अभी पैर में दर्द हो रहा है कभी कमर में दर्द हो रहा है कभी सिर में दर्द हो रहा है तो अभी तो मैं एटलीस्ट फिजिकल फिट परिस्थिति में हूं तो यह जो ठ ने मुझे आज जो कुछ भी दिया है इतना सुंदर परिवेश दिया है फिजिकल फिटनेस एज ऑफ टुडे जो है मेरे पास में एक मेंटल कैपेसिटी है स्थिर होकर के बैठ कर के पढ़ने की जप करने की उसका कहीं में रात को 12:00 बजे उठक के वो कथामृत पढ़ते पढ़ते ना कंप्लीट वर्क्स पढ़ते पढ़ते जप करो ना कि ये क्या मैं पेट्रोलियम और जिओ पॉलिटिक्स और ये ये वो और यह वो और इसके साथ में झगड़ा यह सब क्या मैं पढ़ रहा हूं किंतु देखिए कि उस दिन तो मुझे 4:30 को बड़ा ही गुस्सा आ गया कि कैसे मैंने पूरी रात बिठाई किंतु उसके बाद में भी ऐसा हो ऐसा नहीं होता कि दूसरे दिन फिर से मेरी नींद खुल गई और फिर मैं वो अपने ठाकुर महा स्वामी जी की किताब पढ़ रहा हूं वो जो एक आकर्षण है ये सब चीजों के प्रति राजसिक चीजों के प्रति वो हमारा सहज है और फट करके हमारा मन जब दौड़ जाता है वहां पर अभी मैं 60 साल का 17 साल का 70 साल का 80 साल का हो जाऊंगा हमारा रिटायरमेंट होम है बेलूरमठ में आरोग्य भवन वहां पर जद मैं बैठा होऊंगा और फिर वहां पर बैठ कर के मैं रिग्रेट करूंगा कि हां मैं राजकोट में था भूतेशानंद जी महाराज वहां पे थे आत्मस्थानंद जी महाराज थे उनकी साधना के कितने वाइब्रेशंस है और तन मात्राए हैं और उस समय का जो प्रॉपर यूटिलाइज करना चाहिए नहीं करके मैं क्या सब पागलपन की तरह पढ रहा था तो मैं आरोग्य भवन में बैठ कर के 80 साल की उम्र में जदी उतना जिएंगे तो 70 17 साल की उम्र 70 साल की उम्र में या 80 साल की उम्र में बैठ कर के रिग्रेट करूं तो इसका दोष मैं किसको दूंगा क्या मैं यहां पर बड़े महाराज है उनको दूंगा कि ये उन्होंने इतना फ्रीडम मुझे दे दिया है कि मैं सब तरह की किताब पढ़ सकता हूं क्या फि मैं बाकी के जो साधु ब्रह्मचारी है उनको दूंगा कि वो लोग एक्सपेक्ट करते हैं कि यहां पे मैं पब्लिकेशन में काम करता हूं तो मेरे पास में सब तरह का नॉलेज होना चाहिए ना कि फिर किसको दोष दूंगा मैं ठाकुर को दोष दूंगा किसको दूंगा दोष दोष तो मेरे ही सर पे है राइट तो अभी ये भविष्य में बैठ कर के रिग्रेट करना उसके बजाय बेटर है कि आज थोड़ा सा विल पावर इतना डेवलप कर दे कि हमारा साधक जीवन जहां तक हो सके थोड़ा बहुत अपने हाथ में हो यदि थोड़ा सा अपने हाथ में रहता है तो हमारा भविष्य सुधर जाएगा भविष्य सवर जाएगा जद मैं यहां पर जॉइन करने के लिए आया था उसके कुछ ही समय की बात है एक दो महीने के आसपास की ही बात है कि एक एक सीनियर साधु मुझे बता रहे थे कि देखो तुमने यहां पर रामकृष्ण संघ में जवाइन करने का तो तुमने डिसीजन लिया है ना याद रखना तुम्हारा भविष्य सुधर जाएगा एज ए कैरियर पाथ ये लोग हम लोग तो यंग होते हैं ना तो ये सीनियर साधु लोग सोचता है कि यंग लोगों की लैंग्वेज में इसके साथ बात कर रहा हूं तो मैं तो नया-नया आया था एक ही महीना मुश्किल से हुआ था तो मुझे बोलते तुम लोग जो कैरियर कैरियर करते हो ना यंग लड़के सब तो याद रखना रामकृष्ण मिशन में आए हो तुम्हारा कैरियर बन जाएगा किंतु कैरियर का क्या अर्थ यह नहीं कि कोई पोजीशन मिल जाएगी उस अर्थ में कैरियर नहीं यह भगवान श्री राम कृष्ण की ओर हमारी यह जो यात्रा है वो कैरियर हमारी बन जाएगी एज ए साधक हमारी कैरियर बन जाएगी कि हां यह जन्म हमने बड़ा ही सुख रूप से बिताया बाकी सब शरीर के साथ में जो कुछ भी हो जाए हमारी यह जो कम्युनिटी लाइफ है उसमें मेरे साथ में कुछ भी हो किंतु मेरे मन में तनिक भी रिग्रेट नहीं रहे कि मैंने श्री रामकृष्ण को अपने गुरु के रूप में वर्ण किया वो रिग्रेट तुम्हारा कभी भी नहीं रहेगा वो साधु ने मुझे उस समय कहा था जबकि मैं बस जॉइन करने को आया था और आज मुझे ऑलमोस्ट 20 साल हुए हैं अपने संग में और मैं इस बात को मैं हमेशा याद रखता हूं कि महाराज जी ने ऐसा कहा था और सही सही में मेरे मन में तनिक भी रिग्रेट नहीं है कि मैंने अपना फैमिली लाइफ है या तो फिर यह जो समाज में जो एक एंबिशन होती है एक कैरियर होता है उनकी दृष्टि से कैरियर वो सब छोड़ कर के मैं यहां पर आया हूं श्री रामकृष्ण देव की शरण में मुझे थोड़ा सा भी रिग्रेट नहीं है क्योंकि बाकी सब मेरे साथ में जो कुछ भी हो कम्युनिटी लाइफ में जो कोई भी सेटबैक मुझे सहन करना पड़ा हो कम्युनिटी लाइफ में चाहे मेरे विरुद्ध में कितने ही लोगों ने जो कुछ भी कह दिया हो कुछ भी कर दिया हो मेरे साथ में किंतु जहां तक मेरा और श्री राम कृष्ण देव का संबंध है यह जो ईश्वर और उनके भक्त का पूज्य और पूजक का हमारा जो नाता है वो ठम मा की किताब में से गंभीरानंद जी का वह जो सेंटेंस एडेप्ट करते हुए पूज्य और पूजक का हमारा जो रिश्ता है उसमें मैंने कभी भी कोई भी रिग्रेट महसूस नहीं की क्योंकि जब भी मैं अपना यह जो मन तो यह सब समय केस में रहता है ना मन तो सब समय चारों ओर बिखरा हुआ रहता है तो कोई अपनी थोड़ी ना कोई कैपेसिटी है कि मन को अपने से कंट्रोल करके ले आना और किसी एक महत उद्देश्य के ऊपर में उसको केंद्रित करना कंसंट्रेट करना अपनी कहां पर इतनी बड़ी कोई कैपेसिटी है किंतु फिर भी जब भी मैं ठाकुर मा स्वामी जी की किताब पढ़ता हूं यह साहित्य एक ऐसा है कि जिसने मुझे बचा करके रखा है जैसे ही मैं कोई भी किताब कंप्लीट वर्ग से मां की बातें हैं मां की जीवनी है यह राजा महाराज की किताब अपने महापुरुष महाराज की देवलोक के यह जो कितनी सारी किताब है यहां पे मेरा यह जो कप बोर्ड है पूरा हमारी किताबों से भरा हुआ है तो य कोई भी किताब एक हाथ में लेने से ही मैं जगत भूल जाता हूं और पूरा अपने ठाकुर महा स्वामी जी डायरेक्ट डिसाइल के जीवन के प्रसंग और उनके उपदेश में मैं डूब जाता हूं और फिर इतना ही नहीं हमारे एक के बाद एक प्रेसिडेंट महाराज रिवर्ड प्रेसिडेंट महाराज एक के बाद एक आते गए और उनका भी बड़ा ही सुंदर कंपाइलेशन है उनके जीवन के बारे में उनके उनके लखण उनके राइटिंग्स के बारे में तो वो भी मेरे पास में अच्छा सा कलेक्शन है तो मैं पढ़ता हूं तो पूरा जगत भूल जाता हूं मुझे किसी भी तरह की रिग्रेट नहीं रहती तो स्वामी जी कहते हैं कि देखिए कि हमारे जो हम आज जिस परिस्थिति में है दोनों तरह से देख लीजिए सांसारिक और आध्यात्मिक हम जहां पे हैं उसके लिए दूसरों को दाई मत ठहराए दूसरों के सर पर आज मान लीजिए कि मैं बहुत बार होता है कि आधी रात को उठ जाता हूं और ठाकुर महा स्वामी जी की किताब नहीं पढ़कर बाकी सब पढ़ता रहता हूं तो उसके लिए फिर मैं किसको दोष दूंगा यदि मैं दूसरों को दोष दूंगा तो तो फिर तो मेरा मन यह जहर से भर जाएगा मेरा मन विष से भर जाएगा तो यह सब करने की क्या जरूरत है अपने ही सर पर रख दो जो कुछ भी है और हमेशा ट्राई करो कि टुमारो इज इन अवर हैंड कल हमारे हाथ में है पिछले आ गया हुआ कल बीता हुआ कल भी हमारे हाथ में था आज भी हमारे हाथ में है आने वाला कल भी हमारे हाथ में है यदि इस तरह का एक पॉजिटिव एटिट्यूड लेकर के नहीं रहेंगे तो जीवन विषम हो जाएगा और जैसे कल हमने डिस्कस किया मोर देन 90 पर इंसिडेंट हमारे साथ में ऐसे होते हैं जो कि हमारी कंट्रोल के बाहर में है तो ऐसा तो होगा क्या करेंगे इसी को तो माया का जगत कहते हैं इसी को तो लर्निंग प्रोसेस कहते हैं यह न बुद्धिज्म में जैसे कि हमने डिस्कस किया था पहले जन बुद्धिज्म में एक क्वान होता है क्वान क्या है एक पजल है एक ऐसा पजल है एक ऐसा कोएडा है और कोडो जो गुजराती शब्द है मुझे पता नहीं पजल का हिंदी क्या होगा तो जो भी है एक पजल अर्थात की पहेली हिंदी में कहेंगे पहेली तो एक ऐसी पहेली कि जिसका कोई उत्तर ही नहीं तो एक इंपॉसिबल एक पहेली एक पजल हमको जैन मास्टर दे देंगे और आप इसके ऊपर में सोचते जाइए सोचते जाइए सोचते जाइए जिस दिन पता चलेगा कि इसका कोई उत्तर ही नहीं है उस दिन आपको इनलाइटनमेंट मिल जाएगा क्योंकि आप सरेंडर हो गए हैं अपना यह कर्तृत्व जो जितने दिन तक है कि हां मैं इसका सॉल्यूशन लाऊंगा इसका यह रेशनल सॉल्यूशन हो सकता है इसका यह हो सकता है इस संसार रूपी पहली का कोई रेशनल सोल्यूशन ही नहीं है इस तरह का एक पहेली है कि एक हाथ से बजने वाली ताली का आवाज कैसा है यह बताओ मास्टर अपने शिष्य को कहते हैं जैन मास्टर कि एक हाथ से जो ताली बचती है उसका आवाज मुझे बताओ कि कैसा होता है तो अभी शिष्य तो बेचारा वो परेशान ही हो जाएगा ताली तो हमेशा इस तरह से दो हाथ से बजती है एक हाथ से ताली कैसे बजेगी तो यह सोचता जाएगा सोचता जाएगा सोचता जाएगा आखिर में उसको पता चलेगा इस पहली का कोई उत्तर ही नहीं है तो वैसे ही यह संसार रूपी पहली है इसमें इतना सब कुछ होता है जिसका कोई उत्तर हमारे साथ में ऐसा क्यों हुआ रे भाई मैंने ऐसा तो कौन सा दोष कर दिया है ठाकुर को खुद को कैंसर हो गया स्वामी जी के पिताजी का देहांत हो गया मां और छोटे भाइयों को छोटी बहनों के लिए खाने को कुछ नहीं है और अपनी मां शारदा की तो परिस्थिति देखिए बार-बार बीमार हो रही है एक दिन ऐसी परिस्थिति आ गई कि किसी ने कहा कि पास में एक गांव में लोग यह जो गर्म लोहा होता है ना गर्म लोहे से डाम देते हैं वह जलाते हैं अपने अंग को जिससे कि यह जो बार-बार बुखार होता है वह चला जाए तो श्यामा सुंदरी देवी मां की मां उनको लेकर के उस गांव में गई अभी शरीर को गर्म लोहे का वह जो जला हुआ लोहा अपने शरीर के साथ में स्पर्श करवाएंगे तो कितनी भयानक जलन होगी मां मां शारदा वहां पर जाकर के खड़ी रहती है देखा कि जहां पे डाम दे रहे थे वहां से लोगों की जोर-जोर से चिल्लाने की आवाज आ रही है तो मां ने सोचा कि अरे बाप रे मुझे इस तरह से गर्म लोहे से जदी जलाएंगे जदी तो क्या होगा तो अभी मन में मन में सोच रही है किंतु जब उनकी बारी आई तो दो-तीन लोग उनके हाथ पकड़ने को गए जैसे कि वो मैंने हाथ पैर ना हिलाए और तो ठीक से उनको डाम दे सके तो मां ने कहा मेरे हाथ पकड़ने की कोई जरूरत नहीं है मैं चुपचाप यहां पर पड़ी रहूंगी तुम लोग डाम दे दो तो देखिए कि मां को इस तरह की परिस्थिति में से गुजरना पड़ा है मां एक बार वहां पर वो आमोद नदी के किनारे ना कि कहां पे पुण्य पुकुर के किनारे पड़ी हुई है रात हो गई है शरीर में इतना दर्द है इतना बुखार है बार-बार लूज मोशन हो रहा है घर में जाने की उनकी इच्छा नहीं है तो बार में ही पड़ी रहती है और जब एक ऐसी परिस्थिति आ गई शरीर पूरा अस्थि चर्म सार जैसा हो गया है माने वो पानी के भीतर में अपना प्रतिबिंब देखा देखा कि किस तरह का चेहरा हो गया है तो मां ने कहा अरे इस देह को रख कर के क्या लाभ होने वाला है अच्छा है कि यह देह चला जाए तो मां को खुद को यहां तक उनको कष्ट सहना पड़ा था तो यदि इनकी यह परिस्थिति यदि हो सकती है तो हमारे साथ में जो थोड़ा बहुत होता है वो कौन सी बहुत बड़ी बात है राइट तो यह है संसार य है संसार रूपी पहली हमको यह पंच महाभूत के देह के भीतर में डाला है हमको संसार की चक्की में पीसना ही पीसना है सबकी यह बारी आती है कोई बचेगा नहीं इस संसार रूपी चक्की में से किंतु इस चक्की कब टूटेगी यह जो जो जो विष चक्र है वो कब टूटेगा तब हम जब कि हमको पता चलेगा कि यह ईश्वर ही सत्य है बाकी सब मिथ्या और भीतर से शरणागति का भाव आएगा जब तक मैं यह सोचता रहूंगा कि मेरा कर्तृत्व है मैं कैसे भी करके संसार के रूपी विष चक्र में जीत जाऊंगा युद्ध करूंगा जीत जाऊंगा यह करूंगा वो करूंगा सब कुछ करना अच्छा है किंतु आखिर में तो भीतर से शरणागति आनी चाहिए आखिर में तो भीतर में से सिर्फ ठाकुर के ऊपर ही नहीं हम लोग तो ठाकुर के फॉलोअर्स है बोलक के हम कहते हैं कि ठाकुर के प्रति शरणागति है वरना आप जिस पंथ में आपकी आस्था हो जिस अवतार के ऊपर में आपकी श्रद्धा हो उनके ऊपर में शरणागति आ गई तो देखेंगे कि बाहर से भले ही यह देह संसार रूपी चक्की में पीस रहा है भीतर में से मन शांत हो जाएगा मन इस तरह से जैसे कि रंग नाथा आनंद जी का एक फेवरेट सेंटेंस था काम इन द आई ऑफ द स्टोम ये जो स्टोम होता है ना चक्रवात तो चक्रवात को जद देखेंगे तो ऐसा गोल गोल गोल घूमता रहता है उसके संपर्क में जो कुछ भी आता है मकान आएगा गाड़ी आएगा मनुष्य पंखी पेड़ पौधे जो कुछ भी आएगा उसको उखाड़ करके फेंक देगा किंतु ये चक्रवात के केंद्र में जिसको कि कहते हैं आई ऑफ द स्टोम उसमें एकदम शांति रहेगी यदि आप वहां पर जाकर खड़े रहेंगे तो किसी भी तरह से आपको नुकसान नहीं होगा तो वैसे रंगनाथ आनंद जी ऐसा बार-बार कहते थे उनका फेवरेट एक सेंटेंस था कि अपना हृदय भी इट शुड बी लाइक दिस आई इन द स्टोम बाहर में चाहे कितना ही चक्रवात फैलता रहे हमारे देह को हमारे इस मन को उठा कर के इधर से उधर चाहे कितना भी फेंकता रहे किंतु हृदय में निर्मल शांति बहनी चाहिए तो यह है स्वामी जी का इंटरप्रिटेशन देयर फॉर ब्लेम नन फॉर योर ओन फोल्ड्स इसलिए अपने खुद के किए की दोष और किसी को मत दो स्टैंड अपॉन योर ओन फीट अपने खुद के पैरों पर खड़े रहो एंड टेक द होल रि ि बिलिटी अपन योरसेल्फ क्लासिकल विवेकानंद जितनी भी जिम्मेदारी है जितना भी जिम्मा है अपने कंधों पर ले लो से कहो दिस मिजी ट आई एम सफरिंग इज ऑफ माय ओन डूइंग यह यातना जिसमें से मैं पसार हो रहा हूं यह मेरे ही किए की यह सजा है मेरे ही किए परिणाम है एंड ट वेरी थिंग प्रूव ट इट विल हैव टू बी अनन बाय मी अलोन तो आज जिस यातना में से मैं पसार हो रहा हूं यदि वह मेरे ही किए कर्मों का परिणाम है तो इससे यह प्रूव होता है कि आने वाला भविष्य भी मेरे ही हाथों में है जो मैंने किया है उसको मैं विफल भी बना सकता हूं उसको मैं विपरीत भी कर सकता हूं दैट व्हिच आई क्रिएटेडॉक्युमेंट्सफ्रैगमेंट जिसका गठन किया है उसको मैं संहार भी कर सकता हूं इसको मैं तोड़ भी सकता हूं दैट व्हिच इज क्रिएटेड्रॉअर्नेविगेटर वान हो शौर्य वान हो टेक द होल रिस्पांसिबिलिटी ऑन योर ओन शोल्डर्स एंड नो दैट यू आर द क्रिएटर ऑफ योर ओन डेस्टिनी पूरा जिम्मा अपने कंधों पर ले लो और जानो कि आप ही अपने खुद के भाग्य विधाता है ऑल द स्ट्रेंथ एंड सकर यू वांट इज विदन योरसेल्फ जितना साहस चाहिए जितना धैर्य चाहिए जितना ही सदरा चाहिए जानो कि सब तुम्हारे भीतर में है देयर फोर मेक योर ओन फ्यूचर और इसीलिए अपना भविष्य अपने हाथों से गढ़ो लेट द डेड पास्ट बरी इट्स डेड इसको कोटेशन में रखा है बाइबल का कोट है भूतकाल में जो भूत है जितने भी भूतकाल के उसको भूतकाल में ही दफन कर दो मैं कल मेरे साथ में ऐसा हुआ परसों ऐसा हुआ था वो सब भूल जाओ आने वाले कल पर नजर रखो और आने वाला कल आज मेरे हाथ में है इस बात को जानो देखिए कि यह स्वामी जी की यह जो कोटेशन है ना इसको आजकल क्या होता है पता है ना कि हमारी हैबिट है कि यह शॉर्ट यह जद वीडियो भी देखेंगे तो 15 सेकंड का वीडियो देखेंगे यदि वह पढ़ेंगे भी तो दो-तीन लाइन का कोट पढ़ेंगे इसको कहते हैं आज की लैंग्वेज में अटेंशन डेफिशियेंसी डिसऑर्डर एडी डी आपका मन किसी भी चीज के ऊपर में कंसंट्रेट नहीं होता 1015 सेकंड कंसंट्रेशन हो गया बहुत हो गया तो आजकल के जमाने के लिए हम लोगों ने भी वह सब छोटी-छोटी किताबें हैं शक्ति दई विचार है सफलता ना सोपान है थॉट्स ऑफ पावर और यह फिर स्टेप्स टू सक्सेस बहुत सारी छोटी-छोटी किताबें स्वामी जी की हमने पब्लिश की है तो उसमें इस तरह के वो जो अराइज अवेक एंड स्टॉप नोट टिल द गोल इज रीच टेक ऑल द रिस्पांसिबिलिटी अपऑन योर शोल्डर इस तरह के स्वामी जी के कोटेशन उसमें हम डालते हैं फिर यह कच्चे बच्चे जितने भी होते हैं वोह सब छोटी-छोटी किताब पढ़ कर के उसमें से सोचते हैं कि हां सब ज जिम्मा मेरा सर पे है पूरा मुझे खड़े होना है बोल्ड होना है किंतु ये खड़े होकर के बोल्ड होना है जिम्मा अपने सर पर लेना है इसका क्या अर्थ है इसका अर्थ यह नहीं है कि तुम लोग कुछ भी हो जाए तो जगत के साथ में झगड़ा करने को चले जाओ यह तो स्वामी जी के टीचिंग का पूरा ही मिस इंटरप्रिटेशन हो गया बी बोल्ड तो जद यह साहसिक होना है शौर्य वान होना है धैर्यवान होना है तो इसका अर्थ यह नहीं है जो कि मुझे कोई हानि पहुंचाने के लिए आता है या तो फिर मैं जिस परिस्थिति में हूं सबके साथ में जाकर के मैं झगड़ा मोल लूं कि हां मैं सासिक हूं किसका साहस है मुझे कुछ कह देने का कोई मुझे कुछ कहेगा तो अभी जाकर के मैं उसको दो बात सुना दूंगा इसका यह अर्थ कतई नहीं है ये पूरा स्वामी जी के टीचिंग्स का ये मिस इंटरप्रिटेशन इनडाइजेशन है यदि कोई मुझे कुछ कह जाता है तो सबसे पहले तो मुझे अपने मन को शांत करना है यह जो सब छोटी-छोटी किताबें पढ़ कर के और फिर वो जो छोटे-छोटे इंसिडेंट पढ़ कर के कि वो टिकट चेकर आया स्वामी जी ने उसको ऐसी डांट लगाई कि वो ऐसा लताड़ करके भगा दिया कि वो दुम दबा कर के भाग गया फिर वो बंदर आया तो बंदर के सामने व कि फेस द ब्रूट उने इससे पशु का सामना करो ऐसा करके खड़े रह गए तो बंदर भी भाग गया तो देखिए कि ये गलत नहीं है किंतु स्वामी जी जो एक्चुअली कहना चाहते हैं वो इस छोटी किताबों में से या छोटे-छोटे इंसिडेंट पढ़कर के समझ में नहीं आता है जैसे कल हमने डिस्कस किया था यह भविष्य बाहर की जो चैलेंज आती है इसका आप सामना कैसे करेंगे सामना इस तरह से यदि करें कि मेरा मन जहर से भर जाए दूसरों के प्रति मैं प्रतिकार करने को जाता हूं किंतु मन जहर से भर जाता है तो वो तो स्वामी जी का टीचिंग हुआ ही नहीं मन शांत होना चाहिए मन आशीर्वाद से भरा होना चाहिए दूसरों के प्रति यह जो योग शास्त्र में जो चित्त प्रसाद है मैत्री करुणा मुदिता और उपेक्षा अपने जो समान है उनके साथ में मैत्री का भाव अपने से जो छोटे हैं अपने से कमजोर है अपने से लेस फॉर्चूनेटली जो हमारे से ज्यादा ताकतवर है हमारे से ज्यादा फॉर्चूनेटली आता अर्थात कि एक तरह की श्रद्धा का भाव उनके प्रति एक एप्रिसिएशन का भाव और उपेक्षा जो हमारे शत्रु है उनकी उपेक्षा करना ये मैत्री करुणा मुदिता और उपेक्षा यह चार चित्त प्रसाद कहे गए हैं योग शस्त्र में तो ये चित्त प्रसाद अपने मन में आने चाहिए जद जितनी ही बार मेरे सामने चैलेंज आती है और उसके बाद में यदि मैं चैलेंज का प्रतिकार करूं तो ठीक है किंतु मेरा मन पूरा ये जो जहर से भर गया है और बाहर में जाकर के मैं सबके साथ में झगड़ा कर रहा हूं वो तो स्वामी जी का कोई मने स्वामी जी का रास्ता हुआ ही नहीं विवेकानंद वे व्हाट इज द विवेकानंद वे बाहर में जो चैलेंज है उसका तो प्रतिकार करो ही करो उससे छोड़ो मत किंतु भीतर में चित्त प्रसाद की परिस्थिति हमेशा होने दो और यदि मान लो कि मैं भीतर को ठीक करते-करते बाहर में मिस कर जाता हूं तो डजन मैटर जैसे मैंने कहा था कि मेरे खुद के साथ में ऐसा होता है कि जब भी इस तरह का कोई विपरीत परिस्थिति में मैं पड़ जाता हूं तो मैं सब समय यह सोचता हूं कि अरे भाई मैं अपने मन को कैसे संभाल के रखूं मैं अपने मन को कैसे ठीक रखूं दूसरों के प्रति कोई जहर मेरे मन में ना भर जाए तो ऐसा करते-करते मैं प्रतिकार नहीं कर पाता हूं क्योंकि मेरी एनर्जी मेरे मन को ही ठीक करने में बैलेंस करने में संतुलन रखने में बीत जाती है तो यह भी चलेगा यह भी चलेगा किंतु क्या नहीं चलेगा प्रतिकार करते-करते मेरे अ मैंने अपने मन में हार मान ली मैंने अपने मन को गवा दिया तो यह बात नहीं चलेगी सो दिस इज व्हाट वी हैव टू अंडरस्टैंड कि स्वामी जी हमको बी बोल्ड बी स्ट्रांग राइज अवेक एंड स्टॉप नोट इ सब चीजों से क्या समझाते हैं दिस इज व्हाट वी हैव टू अंडरस्टैंड इन डेप्थ वरना फिर स्वामी जी के टीचिंग्स का पूरा हम उल्टा अर्थ करेंगे द इनफाइनों च वर्ड थॉट एंड डीड लेज अप अ स्टोर फॉर यू एंड ट इज द बैड थॉट्स एंड बैड वर्क्स आर रेडी टू स्प्रिंग अपॉन यू लाइक टाइगर्स सो आल्सो देयर इज द इंस्पायरिंग होप दैट द गुड थॉट्स एंड गुड डीड्स आर रेडी विद द पावर ऑफ हउ एंजल्स टू डिफेंड यू ऑलवेज एंड फॉवर यहां पर हुई समाप्ति और कितना सुंदर पैसेज कि अनंत भविष्य आपके सामने है और हमेशा याद रखिए प्रत्येक शब्द जो कि आपने उच्चारित किया है प्रत्येक विचार जो आपने सोचा है प्रत्येक कर्म जो आपने किया है वह आपके लिए स्टोर में पड़ा हुआ है और जिस तरह से बुरे विचार बुरे कर्म बीच-बीच में वो अंधेरे में से भूत जैसे एकाएक हम अंधेरे रास्ते पर जा रहे हैं भूत एकाएक आकर के हमारे सामने खड़ा हो जाता है हमको डर दिखाने के लिए वैसे ही ये बुरे कर्म बुरे विचार रास्ते में हमको डराने के लिए धमकाने के लिए जिस तरह से बीच-बीच में अचानक आकर के प्रकट हो जाते हैं तो साथ-साथ में हमको यह भी एक आशा रखनी है कि हमारे अच्छे कर्म अच्छे दूसरों को कहे गए शब्द और अच्छे विचार 100 थाउ एंजल्स की तरह लाखों लाखों देव दूतों की देवताओं की शक्ति को साथ में लेकर के हमारी रक्षा करने के लिए हमेशा इस आध्यात्मिक यात्रा में हमारे साथ कदम पर कदम बढ़ाते रहते हैं यदि हमारे बुरे कर्म राक्षस की तरह आ जाएंगे हमारे सामने लड़ने के लिए तो लाखों देवताओं की शक्ति शक्ति लेकर के यह अच्छे विचार भी हमको डिफेंड करने के लिए हमारे साथ-साथ में चलेंगे तो यह हो गया हमारा कॉस्मो मैक्रो कजम और कॉस्मस माइक्रो कजम दो प्रवचनों की समाप्ति इसमें से कितना सब कुछ देखा हमने देखिए कि इसको मैंने शुरू किया था तब यह सोच भी रहा था कि कुछ-कुछ मेजर पॉइंट लेकर के इसके बारे में सोचा जाए किंतु बाद में मैंने देखा फिर से मैंने देखा कि नहीं प्रत्येक टेक्निकल चीजों की डिस्कशन किया जाए तो आप इतना सब बोरिंग टेक्निकल जितने भी टॉपिक्स थे उसमें भी आप रहे और जितने इंस्पिरेशनल पैसेज भी आप उसमें भी आप साथ में रहे तो आपकी भी धीरज की कसौटी हो गई और कुछ हो ना हो ये स्वामी जी टेक्निकल डिस्कशन सुनते सुनते आपके बहुत सारे कर्मक कट गए होंगे ऐसी मैं आशा रखता हूं और अभी मैंने जैसे कहा कि इन दोनों के बारे में मैंने एक स्लाइड शो बनाया है तो कल हम कल और परसों यदि समय मिलता है तो हम लोग इसको ये पूरे स्लाइड शो को देख कर के एक दिन मैक्रो कजम और एक दिन माइक्रो कजम पूरे लेक्चर की आउटलाइन है उसको पढ़ कर के उसको डिस्कस करेंगे जिससे कि ओवरऑल आईडिया हमको क्लियर हो जाए तो आज यही तक कल फिर संयुक्त है शांति शा ह श्री राम
Questions & Answers
एक होता है कि पैसिव शरणागति कि जहां पर हम ईश्वर के ऊपर में भरोसा करके सब कुछ छोड़ देते हैं कि अभी जो होना है सो होना है दूसरा है एक्टिव शरणागति जो कि स्वामी जी का टीचिंग है कि भीतर में से तो शरणागति हो किंतु हाथ में शस्त्र मौजूद रहे व जैसे है ना वो इंग्लिश में एक कहावत है हैव फेथ इन गॉड बट कीप योर पाउडर ड्राई इसका अर्थ क्या है कि यह जो सब वो जो सैनिक जो ये जो गन बोट होती थी ना ब्रिटेन की जो गन बोट डिप्लोमेसी तो उनकी गन बोट्स पूरे विश्व पर राज करती थी अभी वो गन बोट में तो गुला बारूद के लिए वो जो गन पाउडर होता है बड़े-बड़े पीप जो होते हैं ना बेरल उनके भीतर में गोला बारूद भरा रहता है अभी थोड़ा सा भी बारिश होगा कि समुंदर का पानी उसमें जाएगा ना तो गोला जो गन पाउडर बिगड़ जाएगा वो फिर उसमें वो कैनन तोप में ना डालने से वो फूटे नहीं तो कहते हैं कि अभी इतना बड़ा समुंदर की यात्रा करनी है तो भगवान पर तो विश्वास करना होगा वरना तो चलेगा नहीं कहां कब जा कर के क्या हो जाए छोटी सी नौका है इतना विराट समुद्र है टेक्नोलॉजी वगैरह तो कुछ है नहीं तो हैव फेथ इन गॉड बट कीप योर पाउडर ड्राई जब भी दुश्मन आ जाए तो ये गन पाउडर ड्राई होना चाहिए जिससे कि आप उनके ऊपर में वो उनको आप हरा सके शिकस्त दे सके सो ये जो मुझे लगता है ना कि सब परफेक्ट अभी ये जो सेंटेंस है ना एक्चुअली इट अ टॉप सिनिसिजम कि मैंने आप मुह से तो ईश्वर की बात करते हैं किंतु भीतर में ऐसे सब रेडी करके बैठे हैं ज मने इस सिनिसिजम जिसको कहते हैं ना कि सिनिसिजम का हिंदी क्या होगा कि चालाकी मने एक महा चालाकी भरा ये सेंटेंस है ब्रिटेन को दुनिया पर राज करना है भगवान का नाम मुंह से लेते रहते हैं किंतु सब टेक्नोलॉजी गुला बारूद लेकर बैठे हैं किंतु थोड़ा सा इसको अलग से करें तो स्वामी जी जो कहते हैं इसके साथ में एगजैक्टली बैठ जाता है कि ईश्वर पर तो भरोसा रखो किंतु यह कर्म क्षमता जो है अपनी उसको मत गवा हो कीप योर पाउडर ड्राई ये गन पाउडर हमेशा रेडी रखो कि दुश्मन आए तो इसको भगा देंगे यह स्वामी जी के जो जीवन में है बार-बार किंतु कब हमको यह राइट कब मिलता है जबकि भीतर में से हमारे मन में आशीर्वाद हो देखिए अपने इंडिया के सोल्जर्स ये एक परफेक्ट उदाहरण है जब वह दुश्मनों के साथ में युद्ध करते हैं तो क्या दुश्मनों के प्रति वैषम्य भाव होगा ऐसा मुझे नहीं लगता कि होगा अपने सोल्जर्स अपने सैनिक अपने धर्म का पालन करते हैं और उनको पता है कि दुश्मन के जो सैनिक है वो उनके धर्म का पालन करते हैं वही बात है कि दोनों का धर्म एक दूसरे के अपोजिट में है तो दोनों को युद्ध करना पड़ेगा किंतु व्यक्ति व्यक्ति के प्रति वैषम्य क्यों हो ऐसे बहुत सारी कहानी सुनी होगी कि ये जो इंग्लिश में एक कहानी है ऑल साइलेंट ऑन द वेस्टर्न फ्रंट यह जो फर्स्ट वर्ल्ड वॉर में जर्मनी और फ्रांस का जो युद्ध हो रहा था महा भयानक खूना मर की चल रही थी किंतु एका एक क्रिसमस का दिन आ गया और किसी कमांडर ने नहीं बोला किस क्रिसमस का दिन है बारूद बंद कर दो सभी सैनिकों ने अपने से ही गोला बारूद और फायरिंग बंद कर दिया एक दूसरे के साथ में मिलकर के वो क्रिसमस की मिठाई बांटते हैं तो इ ह्यूमन नेचर टू बी फ्रेंडली विद एवरीवन अभी मेरा धर्म कहता है कि मुझे उसका संघार करना है तो मैं अपने धर्म का पालन करूंगा किंतु यह नहीं कि उसके प्रति मेरे मन में दुश्मनी खड़ी हो सो दिस इज व्हाट स्वामी जीस वे इज देयर कि एक्टिव शरणागति भीतर में से शरणागति हो भीतर में से चित्त प्रसाद हो किंतु साथ में ही हाथ में खुली तलवार हो जो कि सामने आए उसका हाथ काट दो ये स्वामी जी जो बार-बार कहते हैं ना खास करके लेक्चर फ्रॉम कोलंबो टू अल्मोड़ा में य क्राइस्ट के जो डिसाइल है दे आर फॉलोइंग कृष्णा और कृष्णा के जो डिसाइल है दे आर फॉलोइंग क्राइस्ट और इसी में प्रॉब्लम है क्राइस्ट ने क्या कहा कोई एक गाल प चाटा मारे तो दूसरे गाल दिखा दो और कृष्ण ने क्या कहा एक गाल प चाटा मारने को आए तो उसका हाथ तोड़ दो साले का तो अभी ये हमारे कृष्णा को य यूरोपियन फॉलो कर रहा है और क्राइस्ट को हम इंडियन फॉलो कर रहे हैं इसी में ये सब गड़बड़ हो गया है एक्टिव शरणागति अभी यह तो अपनी वही इंडिविजुअल स्ट्रगल आ जाएगी आप देखिए कि मैं रांची में था रांची में अपना दिव्यानंद तो वहां पर कॉन्फ्रेंस था आईआईटी दिल्ली में तो अभी मैं तो कॉलेज किया ही नहीं है मैं तो हाई स्कूल ड्रॉप आउट हूं तो अभी आईआईटी दिल्ली का एक विजिट करने को मिल रहा है तो एक क्यूरियोसिटी होती है ना भाई इस लेवल के लोग कैसे रहते कैसे खाते हैं कैसे पहनते हैं कपड़े ऐसा एक रहता है ना क्यूरियोसिटी तो ये आईआईटी वालों के क्या लक्षण है तो गया था मैं सप्ताह रुका था बहुत सारे लोगों से बात हुई थी और मैं साइको एनालिसिस करने का मेरा एक अच्छा एक हैबिट है तो मैं प्रोफेसर के साथ बात करता था फिर ये स्टूडेंट्स के साथ बात करता था और वे लोग भी मैं तो ऐसा ब्रह्मचारी था उस समय तो वे लोग भी सोचते हैं कि अरे यह साधु यहां प क्या कर रहे है बाबाजी यहां प क्या कर रहे है आईआईटी में तो उन लोगों का भी एक क्यूरियोसिटी था मेरे बारे में कि यंग हूं मैं तो एक एकदम उस समय मेरी उम्र आई थिंक 25 26 इयर्स होगी तो इस उम्र में ये क्या साधु के कपड़े पहन के घूमता हूं तो अच्छा एक इंटरेक्शन हुआ था देखिए कि उन लोगों का ये जो एंबिशन है ना ऐसा प्रचंड एंबिशन है ऐसा वे लोग कैजुअली बोल देंगे कि हां मैंने एक महीना इसके लिए स्टडी की और यह परीक्षा पास कर दी ये प्रोफेशनल परीक्षा लोग कितने अटेंप्ट के बाद में पास करते हैं और यह कैजुअली बोल रहा है एक महीना स्टडी करके पास कर दी मैंने बोला दिन में कितना घंटा स्टडी करते होंगे तो बोला कि सात आठ घंटा तो वैसे हो जाता था इन लोगों के लिए कैजुअल है सात आठ घंटा एक महीना खींच लिया आंख बंद करके आगे पीछे कुछ भी नहीं देख कर के इस लेवल की ये लोग है उनका कैसा प्रचंड विल पावर होगा आप सोच कर के देख लीजिए कि ऐसे प्रोफेशनल एग्जाम इतना वो है ना तो वो है उस लेवल के लोग रहते हैं कि जिनका प्रचंड विल पावर होता है और वो इस तरह से खींच ले सकते हैं यह सोल्जर्स अपने ये जो सब ये कारगिल का वर हुआ उसमें जो जिन लोगों को परमवीर चक्र वगैरह जो मिले हैं तो उनकी कहानियां पढ़ कर के अपने रोंगटे खड़े हो जाएंगे कि भाई वो सामने ऊपर में पहाड़ के ऊपर में दुश्मन बैठे हैं कंटीन्यूअस फायरिंग कर रहे हैं और आप चढ़ते जा रहे हैं चढ़ते जा रहे हैं आपका मित्र गया फायरिंग में ये ये जो सोल्जर था साइड वाला वो गया आपके पीछे वाले थे वो गए किंतु आप चढ़ते ही गए चढ़ते ही गए आखिर में टोच के ऊपर में जाकर के दुश्मन को मार दिया यह किसका साहस है भाई ऐसा कोई फायरिंग तो छोड़ दीजिए दीपावली में फटाके फूटते हैं तो उसी से मैं डर जाता हू सामने से फायरिंग और हम पहाड़ प चढ़ते रहे किस लेवल का वो सोच के तो है ऐसे लोग कि उनका प्रचंड विल पावर होता है तभी तो यह ह्यूमन सिविलाइजेशन टिका है ना कि वे लोग हमारी और हमारी हमारा पक्ष लेकर के यह लोग सब कर देता है ये सोल्जर्स है ये जो प्रोफेसर्स है साइंटिस्ट है ये बड़े-बड़े ब्यूरोक्रेट्स है अच्छा अच्छा काम करते हैं ये नंदन नीलका का वो जो आप देखेंगे ये आधार कार्ड का यह जो पूरा उसने यह जो किया इट्स अ वेरी इंस्पिरेशनल स्टोरी ये आज डायरेक्ट टू डायरेक्ट टू बेनिफिट वो ट्रांसफर जो कहते हैं ना डीबीटी ना कुछ डायरेक्ट बेनिफिशियरी ट्रांसफर ये सब वो कितना बड़े-बड़े ये डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन इंडिया में आया है यह मेट्रो ट्रेन वगैरह ये बुलेट ट्रेन ये एयरपोर्ट बन रहे हैं पोर्ट बन रहे हैं राइट तो ऐसे लोग है उस लेवल पे विल पावर लेकर बैठे हुए हैं जो कि पूरे देश को बेनिफिट देते हैं और हम उसका बेनिफिट ते शांति से