प्रार्थना
ओम स्थापकाय यज धर्मस्य सर्व धर्म स्वरूपण अवतार वरिष्ठाय राम कृष्णाायते नमः स्वामी विवेकानंद भारत में दिए हुए व्याख्यानों में से एक प्रवचन माय प्लान ऑफ कैंपेन तो इसका हम पाठ कर रहे थे कुछ सप्ताह पहले आज अभी हम इसमें आगे बढ़ते हैं। थीम है इस प्रवचन का कि स्वामी जी अमेरिका से लौटे हैं और नए भारत का फिर से पुनः निर्माण किस तरह से किया जाए उसके बारे में वह अपना पूरा एक नक्शा बताते हैं। ब्लूप्रिंट बताते हैं। किंतु जब भी आपको नवनिर्माण
भारत की अवनति का कारण: ब्राह्मण की मेधाशक्ति और क्षत्रिय के उदार ह्रदय के बिच दरार
करना होता है तो आपको एक बात को ख्याल में रखना होता है कि पिछला वाला जो था अपना महल कहो ना कि मकान कहो जो कुछ भी है शिप जैसे कि स्वामी जी उदाहरण देते हैं एक बहुत विराट जहाज तो इस जहाज जो हमारा सनातन वैदिक संस्कृति वैदिक संस्कृति में जो इतना सुंदर रूप से तैर रहा था वो डूब कैसे गया उसका उसका सबसे पहले एक आलेखन करना जरूरी है। जिसकी वजह से वी कैन लर्न द लेसंस फ्रॉम आवर पास्ट मिस्टेक्स। तो स्वामी जी का कहना है कि यह जो अपनी भारत का भारत की नौका डूबी भारत का जहाज डूबा सनातन वैदिक संस्कृति के बाद में जो इतिहास जो है उस उस समय उसके पीछे का कारण है कि यह क्षत्रिय और ब्राह्मण इन दोनों के बीच में एक बहुत बड़ी दरार हमारे यहां पर प्रकट हुई। क्षत्रिय लोगों का था कि विशाल हृदय था और वे चाहते थे कि सनातन धर्म के जो सत्य है सबको पूरे गांव-गांव शहर शहर घरघर बांटे और ऋषि मुनियों का था ब्राह्मण लोगों का था खास करके ऋषि नहीं कह के कहेंगे ब्राह्मण कि ब्राह्मण लोगों के पास में यह सनातन तत्व थे तो सही किंतु उन्होंने इसको बांटने का काम नहीं किया। उन्होंने इसको अपने पास में छुपा करके रखा। तो यह हालांकि उन्होंने विद्या का जो विद्या प्राप्त करने के लिए जो मेहनत की अपने खुद के जीवन में शुद्धता और पवित्रता बनाए रखी और यह जो सदियों के बाद सदियों जो विदेशी आक्रमण होते रहे उसमें उन्होंने वेद को जो बचा करके रखा यह उनका सर्वश्रेष्ठ योगदान है। उसमें कोई प्रश्न ही नहीं है। किंतु फिर यह जो रत्न यह जो हीरा माणिक जवाहरात जो अपनी भारतीय सनातन संस्कृति ने अपने संतानों की रक्षा के लिए अपने संतानों की प्रगति के लिए जो बना के रख के गए थे उसको तो संतानों में बांटना चाहिए। बांट नहीं करके वही बक्से में बंद रख के वह बक्से को ले जाकर के किसी एक गुफा में रख दिया तो ऐसे तो कैसे चलेगा? तो यह पूरा डिस्कशन एनालिसिस स्वामी जी करते हैं। साथ में यह भी कहते हैं कि बुद्धिज्म में जो डिग्रेडेशन आया बादबाद में वो एक बहुत बड़ा रीजन था कि भारतीय समाज में अवनति फैली। मोरल डिग्रेडेशन या तो फिर मोरल डिप्रवेशन जिसको कहते हैं, वह भारत में फैला। यहां तक हमने देखा और फिर इसके बाद में स्वामी जी शंकराचार्य वाले पॉइंट तक आते हैं। स्वामी जी एक दो चीजें जो स्पेसिफिकली पॉइंट आउट करते हैं शंकराचार्य के बारे में सर्वप्रथम तो यह है कि यह जो स्वामी जी जिस समय जीवित थे 19th सेंचुरी में उस समय की जो कुछ रिफॉर्म सोसाइटीज थी उन्होंने भी भारत का डिग्रेडेशन तो देखा किंतु वह जो सॉल्यूशन लाके वह लेके आए थे वह सभी सॉल्यूशन बड़े ही डेंजरस थे। कहते थे कि विदेशी संस्कृति को एज इट इज हमको अपना लेना चाहिए और फिर इसी विदेशी संस्कृति को भारत में लाकर के अपने ये ऋषि मुनियों की संस्कृति को हटा दे तो और फिर यह ऋषि मुनियों की संस्कृति है अपनी वो पूरी अंधश्रद्धा से भरी हुई है। सुपरस्टिशन से भरी हुई है। 10 साल की बच्ची की शादी करवाते हैं। विधवा विवाह नहीं करने देते। वरना वगैरह-वगैरह पूरी गालागाल देते थे। भारतीय संस्कृति को क्रिटिसाइज करते थे। स्वामी जी इन द कंट्रास्ट पॉइंट आउट करते हैं कि देखिए शंकराचार्य ने जो रिफॉर्मेशन लाया वह बुद्धिज्म को भारत में से हटा के वैद वैदिक सनातन धर्म की संस्कृति को पुनः जागृत करने का उनका जो महा जो एक महारथी कार्य उन्होंने प्रारंभ किया वो उन्होंने किसी को श्राप देकर के किसी की निंदा करके नहीं किया। अपने मुंह पे हमेशा उन्होंने लोगों के प्रति आशीर्वाद ही रखा है। तो यह एक क्रिटिकल डिस्टिंशन शंकराचार्य के बारे में है। किंतु साथ-साथ में ही स्वामी जी यह भी पॉइंट आउट करते हैं कि वह जो स्प्लिट ओरिजिनल जो भारत में प्रॉब्लम खड़ा हुआ था, यह क्षत्रिय और ब्राह्मण के बीच में स्प्लिट यानी कि दोनों के बीच में दरार। एक तीव्र बुद्धिमत्ता और एक विशाल हृदय इन दोनों के बीच में जो दरार हुई वह शंकराचार्य भी उसको पूरी नहीं कर पाए थे। इंटरेस्टिंगली यहां पे स्वामी जी का जो एक ऑब्जरवेशन है निश्चय बाद में तो स्वामी जी ने यह कहा कि श्री रामकृष्ण रूपी अवतार में यह दोनों तीव्र बुद्धिमता और विशाल हृदय यह दोनों फिर से इकट्ठा हुए हैं। यह स्वामी जी कहते तो हैं किंतु साथ में ही स्वामी जी का एक बड़ा ही इंटरेस्टिंग ऑब्जरर्वेशन है। अखंडानंद जी का स्वप्न
इस्लामी शरीर और वेदांती मस्तिष्क Islamic body and Vedantic brain
था। देखा कि स्वामी जी को उन्होंने एक बड़े ही बलिष्ठ मुस्लिम फकीर के वेश में जाते हुए देखा। तो फिर उन्होंने स्वामी जी को प्रश्न किया कि यह मुस्लिम फकीर और वह भी बड़ा ही दृढ़ माने मस्कुलर और फिजिकली फिट और बड़ा ही पहलवान तरह के तो मुस्लिम फकीर का वेश स्वामी जी ने धारण किया था। अखंडानंद जी ने पूछा स्वामी जी को कि इस तरह का वेश क्यों धारण किया है? तब स्वामी जी ने कहा इस बार यही वेदांतिक ब्रेन इन इस्लामिक बॉडी इस्लामिक बॉडी के साथ में वेदांतिक ब्रेन। अभी देखिए कि यह कहने के पीछे स्वामी जी का लॉजिक क्या था कि हमेशा से ब्राह्मण लोगों के पास में ब्रेन तो रहा है। यह जो यह जगत का जो मायाजाल है इसको काट के ज्ञान रूपी खड़ग से इसको चीर करके इसके पीछे की जो अंतिम दिव्य सत्ता है अपना आत्मन या तो फिर ब्राह्मण या तो फिर ईश्वर का सही स्वरूप यह ब्राह्मण लोगों ने खोज तो निकाला किंतु सोसाइटी के भीतर में यह सनातन सत्यों का प्रोपेगेशन हो उसके लिए सोसाइटी को बलिष्ठ करना आवश्यक है। सोसाइटी को बलिष्ठ कैसे करेंगे? व्हाट इज द डेफिनेशन ऑफ स्ट्रेंथ? सोसाइटल स्ट्रेंथ इसकी डेफिनेशन क्या है? एक सशक्त मजबूत समाज। उसकी डेफिनेशन है कोऑपरेशन। कोऑपरेशन एंड ब्रदरहुड। यह ब्रदरहुड रहेगा तो यह समाज सक्षम होगा। वही समाज को आप नात, जात, कास्ट, यह इस सब में बांट देंगे। धर्म में बांट देंगे। यदि यह लैंग्वेज ग्रुप में बांट देंगे। स्किन कलर के ऊपर में आप बांट देंगे। रेसिज्म है या तो फिर यह जो सुपीरियरिटी कॉम्प्लेक्स है कुछ-कुछ कास्ट का यह लिंग्विस्टिक डिफरेंसेस है उसमें समाज को आप बांट देंगे तो यह समाज कभी भी कोई महत आदर्श को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं होगा। सक्षम नहीं होगा। एक चीज दूसरा कि जब भी विदेशी आक्रमण होंगे तो विदेशी लोगों को कोई बहुत बड़ी सेना लाने की जरूरत नहीं है। उनको भारतीय समाज में यह फुटफाट है। उसी का लाभ उठा के हमारे ही किसी भाइयों को दूसरे भाइयों के विरुद्ध में उकेरना है। उनको एक्स ये करना है कि हां तुम लोग उसको हरा दो तो फिर हम तुमको राज्य दे देंगे। ऐसा करके करके ही बहुत सारे गद्दारों ने अपने राजाओं के सामने उन्होंने कुछ ना कुछ यह की गद्दारी की और आखिर में ऐसा हुआ यह मुगल हो ना कि ब्रिटिश दोनों को पता था कि यह गद्दार की कीमत क्या है। आज वो अपने खुद के राजा के साथ में यह देशद्रोह कर रहा है तो कल कहीं जाकर के हम उसको यदि वो पावर दे देंगे तो कल कहीं जाकर के वह हमारे साथ में भी हमारी पीठ में भी खंजर मारेगा हमारी पीठ में भी चाकू मारेगा। तो ऐसे गद्दारों को यह लोग मार ही देते थे। मुगल लोग तो मार ही देते थे। वो ब्रिटिश लोग अच्छी-अच्छी बातें करके उनको वो जो टाइटल देते थे ना अमुक राजा तमुक राजा यह रानी यह रानी रासमणि ये रानी रानी का खिताब क्यों मिला है ऐसा नहीं है कि उसने कोई बहुत बड़ा कोई अच्छा कार्य कर दिया हो था किंतु बाद में किया था उसके जो हस्बैंड है या तो फिर उसको है यह सब लोगों को खिताब क्यों मिलता है अंग्रेज सरकार की गुलामी करो अंग्रेज सरकार के जो साथ में रहकर के भारत को लूटने में उनको सहारा दो उनको सहाय करो। वे लोग आपको खिताब दे देंगे। वह खिताब लेकर के हम लोग बड़े मजे से नाचेंगे। यह जो दिल्ली दरबार वो इतना भयानक दृश्य वो जितने भी राजा रजवाड़ा भारत के थे वो जब भी यह प्रिंस ऑफ वेल्स ना कि कोई भी वहां से आते था ब्रिटेन से तो हम सभी लोग हमारे जितने भी राजा है एकदम सुंदर कपड़ों में सज्ज होकर के हाथी घोड़े पर सवार होकर के वहां पर वह मैदान में इकट्ठा होते थे। अपनी शक्ति दिखाने के लिए, शक्ति प्रदर्शन करने के लिए और यह ब्रिटिश लोगों भी आपस में हंसते थे कि यह मूर्ख कैसे हैं? यह अपने ही देश बंधुओं का हित करने के लिए यह लोग हमारी गुलामी कर रहे हैं। तो वह भारत की जो परिस्थिति थी तो स्वामी जी ने एक बात एकदम ठीक-ठीक समझ लिया कि जो भारत का जो भारत को जो बार-बार गुलाम बनाया गया है विदेशी सत्ताओं के द्वारा उसके पीछे रीजन यही है कि हम लोगों में यूनिटी नहीं है। तबकि ऑन दी अदर हैंड आप यह देखिए कि जैसे कि यह अफगानिस्तान है। अभी अफगानिस्तान को कहा जाता है ग्रेवयार्ड ऑफ द एंपायर्स अर्थात कि जितने भी साम्राज्य थे इतिहास के बड़े से बड़े उन सब लोगों ने जाकर के वहां पर पत्थर की दीवार पर अपना सर पटक करके अपना सर तोड़कर के वापस आए हैं। उन लोगों पर कोई राज नहीं कर पाया। वो इतिहास इसका गवाह है। वो ब्रिटिश एंपायर हो कि जिसने आर्मी भेजी वहां पे वह पूरी आर्मी में से एक ही आदमी वापस आया। सोच लीजिए जितनी आर्मी को पूरे 30 करोड़ के भारत देश को कंट्रोल करने के लिए लगाया था उससे डबल आर्मी एक छोटे से अफगानिस्तान में भेजा और उस आर्मी का सिर्फ एक आदमी लौट के आया। बाकी सब वहीं पर खत्म हो गए। यह अमेरिका को देखिए यह 21 सेंचुरी की यह सुपर पावर है। वे लोग अमेरिका वाले जब वहां से काबुल में से जा रहे थे तो वह प्लेन के ऊपर में लोग चढ़ गए। यह डर के मारे कि अभी यह तालीबान हमला करेंगे और प्लेन के ऊपर में पे प्लेन के पहियों को लोग पकड़ करके रहते हैं और आकाश में से गिरते हैं। इस तरह से अमेरिका वालों को इन लोगों ने काबुल से भगा दिया गया था। और सोवियत यूनियन का भी हमको पता है कि सोवियत यूनियन ने जितनी भी बार वहां पे वो सोवियत यूनियन ने वहां पर राज तो किया प्रोक्सी प्रोक्सी के माध्यम से किंतु आखिर में उनको भी वहां से भागना पड़ा। तो यह छोटे से अफगानिस्तान को आपको कंट्रोल करने के लिए इतना मेहनत लगाना पड़ता है। आखिर में कुछ भी हाथ में नहीं आया। और इतना विराट भारत देश हम लोग जो भी आते हैं उसके सामने लेट जाते हैं। तो यह स्वामी जी कहते हैं कि इस्लामिक बॉडी इसका अर्थ क्या है? तो पावर ऑफ ब्रदरहुड। स्वामी जी कहते हैं कि यह कांसेप्ट ऑफ ब्रदरहुड इस्लाम में इतना पावरफुल है। जैसे कि कोई भी आदमी वहां पर यदि मुस्लिम होता है कन्वर्ट तो फिर वह किसी भी नात का हो, कास्ट का हो, जात का हो उसको एक ही लेवल पर बिठाया जाता है। यह लोग ऐसा नहीं कहते कि यह आदमी बड़ा है कि यह आदमी छोटा है। अभी देखिए यह जो स्वामी जी जो कुछ भी कहते हैं, उसको हमको थोड़ा सा आज के कॉन्टेक्स्ट में समझना होगा। आज के कॉन्टेक्स्ट में हम देखेंगे तो इस्लाम में उतना सब तरह का प्रॉब्लम है जिस तरह का प्रॉब्लम हम 19th सेंचुरी भारत में देखते थे और सबसे ज्यादा आज उन लोगों के साथ में खड़ा हुआ है प्रॉब्लम कि वहां पर फेनेटिसिज्म चल रहा है। वह इस भयानक तरह का फनेटिसिज्म कि उसकी वजह से वे लोग सतत युद्ध करते हैं या तो सतत उनके वहां पे कुछ ना कुछ खूनामर की चलती ही रहती है। तो यह कहते हैं ना कि उपमा एक देसी होती है। अर्थात कि जब किसी की उपमा दे यानी कि सिंह की तरह गरजता है। ऐसा यदि किसी को कहे तो फिर यह नहीं सोच लेना। आपको यह प्रश्न नहीं खड़ा करना है। सिंह की तरह उसके चार पैर क्यों नहीं है? सिंह की तरह उसकी पूंछ क्यों नहीं है? यदि एक आदमी के बारे में यह उपमा दी गई है। आपको सिर्फ उसका एक ही पहलू लेना है। वह गरजने का वो और कोई चार पैर पूंछ वगैरह पहलू उसके नहीं लेने हैं। यहां पे भी इस्लामिक सोसाइटी के भीतर में प्रॉब्लम है। भयानक प्रॉब्लम है। जो लोग न्यूज़ पेपर पढ़ते हैं सबको पता है। किंतु स्वामी जी जो एक पर्टिकुलर चीज एडमायर करते थे वो था उनका सेंस ऑफ ब्रदरहुड। तो स्वामी जी कहते हैं कि टेक दैट आईडिया ऑफ़ ब्रदरहुड फ्रॉम देम इक्वलिटी फॉर ईच एंड एवरीवन एंड देन अप्लाई वेदा ये जो वो एक आई डोंट नो कि यह उपमा कितनी ठीक होगी किंतु फिर भी अभी यह मेरे माइंड में आ ही गया है तो बोल देता हूं। यह जो फ्रेंकस्टाइन की जो कहानी है वो फ्रेंकस्टाइन की कहानी में क्या होता है? वह एक साइंटिस्ट है। वह कहां किसी का पैर इकट्ठा करता है। डेड बॉडी को किसी का पैर लिया, किसी का हाथ लिया, किसी का सर लिया। फिर ये सबको इकट्ठा करके उसके भीतर में वह जान डालता है। तो खैर यह उपमा यहां पे काम नहीं करेगी। समथिंग फनी अलोंग द वे। स्वामी जी डिडंट वांटेड टू क्रिएट अ फ्रेंक फ्रेंकस्टाइन मॉन्सर। स्वामी जी वांटेड टू क्रिएट अ न्यू इंडिया। किंतु वही बात है कि जब हम इस उपमा को ठीक-ठीक से नहीं समझेंगे, उल्टा पुल्टा कुछ अप्लाई कर देंगे तो यह फ्रेंकस्टाइन मॉन्सर की तरह कुछ खड़ा हो जाएगा। तो वह ना हो इसके लिए इस उपमाओं को ठीक-ठीक से समझना है। तो यह बात है। अभी देखिए कि अभी स्वामी जी ने यह जो कांसेप्ट ऑफ ब्रदरहुड वहां से लेना चाहा था। वह ब्रदरहुड हमको रामकृष्ण मिशन में रामकृष्ण संघ में देखने को मिलता है। क्योंकि देखिए कि ठाकुर के जीवन का जो अंतिम पर्व है आत्म प्रकाश पर्व पहला पर्व तो उनका बाल्य पर्व उनके जीवन का जबकि कामार पुकुर में रहकर के बाल्य लीलाएं की है। उसके बाद में साधन पर्व कोलकाता आकर के दक्षिणेश्वर काली मंदिर में साधना की है। उसके बाद में आनंद पर्व साधना समाप्त होने के बाद में मां शारदा की शोडशी पूजा करके शक्ति के सहारा लेकर के उन्होंने धर्म चक्र प्रवर्तन प्रारंभ किया कोलकाता में और फिर आखिर में है आत्म प्रकाश पर्व अर्थात कि जब से उनका कैंसर प्रारंभ हुआ तब से ठाकुर ने अपने जितने भी अंतरंग थे पहले तो सभी तरह के डिवोटी आते थे किंतु आत्म प्रकाश पर्व में यह बहिरंग अंतरंग डिवीजन एकदम क्लियर हो गए और विदिन अंतरंग भी दो तरह के डिवीजन हो गए। एक तो त्यागी संतान थे। दूसरे गृहस्थ संतान थे। तो यह त्यागी और गृहस्थ दोनों संतानों दोनों ग्रुप को प इकट्ठा करके ठाकुर ने प्रेम के बंधन से उनको बांधा था। तो यह भालो भाषा यानी कि स्नेह प्रेम का जो बंधन है उस तरह से संघ को गठित करके उसके सेंटर स्टेज में उसके शीर्ष मोड़ पर उसके शीर्ष के ऊपर में ठाकुर ने मां शारदा देवी को स्थापित किया था। तो यह पूरा संगठन यह पूरा ऑर्गेनाइजेशन ठाकुर ने बनाया। वो स्वामी जी ने देखिए कि यह बात कि यह भविष्य में नहीं करना है। जब यह सब स्वामी जी बोल रहे हैं कि इस्लामिक कांसेप्ट ऑफ ब्रदरहुड वो ऑलरेडी ठाकुर ने उसको अप्लाई कर ही दिया था। स्वामी जी उसको उसको एक बुद्धिमत्ता की उसको अपना एक स्कॉलेस्टिक या तो फिर एक एकेडेमिक एनालिसिस जब करते हैं तो यह सब स्वामी जी को समझ में आता है। अदरवाइज हमको लगेगा कि अरे यह तो एक सामान्य वस्तु है। ठाकुर के जितने भी भक्त आते थे वह ठाकुर की महासमाधि के बाद में एक साथ में मिलकर के संघ बनाया तो उसमें कौन सी बड़ी बात है? किंतु इसमें देखिए कि स्वामी जी की बुद्धिमत्ता थी। स्वामी जी का हिस्टोरिकल अंडरस्टैंडिंग था। एक इंटेलेक्चुअल शार्पनेस थी कि ठाकुर की प्रत्येक एक्शन के भीतर में उन्होंने कितना डेप्थ है यह समझा था। तो वो डेप्थ अभी देखिए कि आप इस्लाम का इतिहास देखिए कि मोहम्मद उन्होंने जब अपना जो मिशन प्रारंभ किया था उस समय उनके आसपास में जो कंपैनियन कहते हैं वो कंपैनियन आकर के मिले थे। उन लोगों में इतना स्ट्रांग ब्रदरहुड था। तो वही जो स्ट्रांग ब्रदरहुड है आपस में एकदम प्रेम और स्नेह का जो संबंध है उसी की वजह से उन्होंने जिसजिस एंपायर पे हमला किया वो एंपायर उनके सामने वो देश वो राष्ट्र उनके सामने हार गए। क्यों? क्योंकि जितने भी कंट्रीज में जाते थे, जितने भी एंपायर में जाते थे, जितने भी किंगडम में जाते थे, वहां पर इतना फुटफाट है, वहां पर आपस में भाई भाइयों के भीतर में इतना झगड़ा है कि आपको ज्यादा कुछ नहीं करना। एकद लोगों को बोल देना है कि किले का दरवाजा पीछे का दरवाजा खोल देना तो हम वहां से भीतर में चले आएंगे। अभी यह लोग राजा समझता है मेरा किला बड़ा पावरफुल है। उसमें शत्रु आ ही नहीं पाएगा। यह लोग थोड़ा बहुत थोड़े दिन किले की पत्थर की दीवारों पर सर पटक करके चले जाएंगे। किंतु जैसे ही युद्ध चालू हुआ पता चला किले का पिछला दरवाजा किसी ने खोल दिया है तो यह शत्रु सैन्य पूरा भीतर में आ गया है। किला किसी काम का रहा नहीं। तो जब आप मनुष्य को ठीक नहीं रखेंगे तो किला किसी काम का नहीं रहेगा। हम लोग जो जो बाकी जो सिविलाइजेशन होती है नॉन मिशनरी सिविलाइजेशन उन लोगों के साथ में यही होता है कि साइंस और टेक्नोलॉजी इंडस्ट्रियलाइजेशन यह सब चीजों में तो वो लोग डेवलप कर लेते हैं म कभी ना कभी किसी ना किसी लेवल पर किंतु जब ह्यूमन रिलेशन ठीक नहीं रखेंगे तो सोसाइटी के भीतर में ही इतने गद्दार खड़े होंगे कि आप ही टेक्नोलॉजी को पकड़ करके आप ही को मारने को आएंगे। तो दिस इज़ अ ग्रेट डेंजर वी हैव टू अंडरस्टैंड। नॉलेज इटसेल्फ इज़ नॉट इनफ। स्कोलेस्टिसिज्म इटसेल्फ इज़ नॉट इनफ। यू नीड ए ग्रेट हार्ट इन ऑर्डर टू सर्वाइव इन दिस रेस ऑफ इवोल्यूशन। तो यह बात स्वामी जी ने देखी कि इस्लाम के भीतर में है और यही बात स्वामी जी ने देखी कि ठाकुर ने जब अपने संघ का गठन किया तो वह सब एलिमेंट वहां पर उपस्थित है। जब स्वामी जी ने एक पत्र में लिखा है कि यदि तुम लोग इकट्ठा होकर के मेरे पीछे में खड़े रहोगे अपने गुरु भाइयों को कहते हैं तब मैं पूरे जगत का मुकाबला कर सकता हूं। अभी देखिए कि आप प्रश्न करेंगे कि यह कैसे हो सकता है? यह 15 16 तो डिसाइपल है। डायरेक्ट डिसाइपल वह सब इकट्ठा होकर के जगत का मुकाबला कैसे करेंगे? तो देखिए कि यह बात लिटरली सच है। मेटाफोरिकली तो सच है ही है। लिटरली भी सच है। वही वो गिनेच चुने वही हैंडफुल अटैकर्स भारत में आए थे। इतने विराट भारत देश को उन्होंने हरा दिया था। क्यों? क्योंकि जो अटैकर्स थे चाहे वह अफगानिस्तान से आए हो ना कि चाहे फ्रांस से आए हो ना कि चाहे ब्रिटेन से आए हो ना कि स्पेन या पोर्तगल से आए हो या तो फिर ये जो सेंट्रल एशिया के हुण ना कि ये तारतार ना कि ये फिर ये मोंगोल मंगोलिया वाले चंगेज खान वगैरह जितने भी आक्रमणकारी सफल हुए थे इन सबके पीछे में सफलता के पीछे में सिविलाइजेशनल स्ट्रेंथ थी सोसाइट ाइट ल यूनिटी थी जिसको कि हम ठीक से काउंटर नहीं कर पाए। स्कोलेस्टिसिज्म भयानक था। हमारे भारतीय विद्वानों के बारे में आज भी देखिए कि अमेरिका की जो टॉप मल्टीीनेशनल कंपनियां है वहां पे सीईओ बन करके हम लोग बैठ जाते हैं। यह कोई बड़ी बात नहीं है इंटेलेक्चुअल सुपीरियरिटी हमको भारत को एस्टैब्लिश करने की। किंतु वही है कि उस इंटेलेक्चुअल सुपीरियरिटी को जब हम ग्राउंड लेवल पर अप्लाई करने को जाएंगे फॉर द बेटरमेंट ऑफ दी ऑल म बहुजन सुखाय बहुजन हिताय तब कहीं जाकर के हम लोगों के साथ में गड़बड़ हो जाता है। तो दिस इज समथिंग दैट वी नीड टू लर्न भारत के इतिहास से यह हमको सीखने की जरूरत है। तो
शंकराचार्य का भारत की उन्नति में अवदान: भारतीय जनसमाज को आशीर्वाद देकर और वेदांत का पुनः उद्धार कर के
स्वामी जी यह सब एनालिसिस करते हैं और एनालिसिस करने के बाद में शंकराचार्य वाला पॉइंट प्रारंभ होता है। हमने ऑलरेडी इसके बारे में प्रीलिमिनरी डिस्कशन कर लिया है। मैं सिर्फ आज इसको पढ़कर के स्वामी जी के शब्द है। स्वामी जी के शब्दों को लाइन बाय लाइन पढ़कर के उसका मैं ट्रांसलेशन कर दे रहा हूं। तो स्वामी जी क्या कहते हैं? देन अरोज़ द ग्रेट रिफॉर्मर शंकराचार्य एंड ह फॉलोअर्स एंड ड्यूरिंग दिस 100्स ऑफ इयर्स सिंस ह टाइम टू द प्रेजेंट डे देयर हैज़ बीन द स्लो ब्रिंगिंग बैक ऑफ द इंडियन मासेस टू द प्रिस्टाइन प्योरिटी ऑफ द वेदांतिक रिलीजन बुद्धिज्म का जो डिग्रेडेशन हुआ बुद्धिज्म के बुद्ध बौद्ध धर्म में जो अवनति हुई उसके परिणाम से अपने भारतीय समाज का जो पतन हुआ उसके बाद में इस ग्रेट शंकर शंकराचार्य महान शंकराचार्य ग्रेट रिफॉर्मर शंकराचार्य इनका जन्म हुआ उनका उदय हुआ और शंकराचार्य और उनके फॉलोअर्स उनके शिष्य उन्होंने इस 100 जो जितने भी 100 साल गए हैं उसमें उन्होंने अप टू प्रेजेंट डे शंकराचार्य के उद्भव के आज तक उन्होंने धीरे-धीरे कर धीरे-धीरे करके यह जो भारतीय जनज है उनको वेदांतिक रिलीजन की जो पृष् ाइन प्योरिटी है जो अतिव पवित्रता है उसके भीतर में लाने का प्रयास किया है। दी रिफॉर्मर्स न्यू फुल वेल द इविल्स वि एकिस्टेड येट दे डिड नॉट कंडेम इन रिफॉर्मर्स को पता था। शंकराचार्य और उनके फॉलोअर्स को पता था। और यहां पे सिर्फ शंकराचार्य ही नहीं मैं बाकी सब आचार्य गणों को भी इस सेंटेंस में जोड़ लूंगा। इसमें मधवाचार्य हो ना कि रामानुजाचार्य हो ना कि फिर यह चैतन्य महाप्रभु का भक्ति मूवमेंट हो। इन सब ने मिलकर के और देखिए कि भारत के प्रत्येक प्रांत में प्रत्येक शहर में प्रत्येक नगर में किसी ना किसी संत महापुरुष का उदय हुआ है। अपने नॉर्थ इंडिया के जितने भी संत महापुरुष हैं यह साउथ इंडिया के हैं उन सब ने शंकराचार्य के पदानुसरण करते हुए इस भारतीय सनातन धर्म को पुनर्जीवित करने का प्रारंभ किया है। और फिर किंतु देखिए कि इन रिफॉर्मर्स को ठीक अच्छे से पता था कि भारतीय समाज में प्रॉब्लम कहां पे है। इवल कहां पे है? अनिष्ट कहां पे है। किंतु येट दे डिड नॉट कंडेम। किंतु उन्होंने भारतीय समाज को गाली नहीं दी। ऐसा नहीं कहा कि लोगों के नसीब में वही है। वह उनके कर्मों का परिणाम है। भुगतते रहो। यदि आपको आपके कर्मों के परिणाम से छूटना है तो हमारे धर्म में कन्वर्ट हो जाओ। ऐसा जो बात बाद बात बाद बात बाद बात बाद बात बादबाद में जो चला वे जो क्रिश्चियनिटी और इस्लाम के आने के बाद में कि आपके पुरखों का जो धर्म है वह पूरा गलत है उसको छोड़ दो और उसको छोड़कर के आप हमारे धर्म को अपना लो। ऐसा किसी ने नहीं कहा। उन्होंने कहा कि आपका जो धर्म है वह सर्वश्रेष्ठ ही है। उसमें कोई प्रश्न ही नहीं है। बस इसमें जो नेसेसरी कुछ ऑल्टरेशंस करने हैं। कुछ नेसेसरी मॉडिफिकेशंस करने हैं अकॉर्डिंग टू द नीड ऑफ आवर नीड ऑफ द आवर अथवा तो समय की मांग के अनुसार इसमें जो कुछ थोड़े बहुत परिवर्तन करने हैं, वह परिवर्तन हम आपको दिखा देते हैं। और देखिए सनातन धर्म में कुछ परिवर्तन नहीं करना है। सनातन धर्म अपने आप में श्रेष्ठ ही है। बात है कि यह जो सदियों का कचरा उसके ऊपर में बैठ गया है। उस कचरे को धीरे-धीरे करके हटाना है। और यह जो स्वामी जी कितना सुंदर शब्द यूज़ करते हैं। प्रिस्टाइन प्योरिटी ऑफ द वेदांतिक रिलीजन। यह जो क्रिस्टल क्लियर पवित्रता है वेदांतिक धर्म की उसके तरह फिर से ले जाना है। यह स्मृति और श्रुति एनालिसिस जो स्वामी जी करते हैं। श्रुति क्या है? वही ईश्वर के पास में श्रवण की हुई ईश्वर के प्राप्त पास में से सीधी प्राप्त की हुई ईश्वर की वाणी। इसको कहेंगे श्रुति। जबकि समय की मांग के अनुसार नियमों को जो बनाया जाता है उसको कहेंगे स्मृति। स्वामी जी कहते हैं कि स्मृति प्रत्येक युग के लिए नईनई लिखी जानी चाहिए। पुरानी स्मृतियों को पकड़ करके बैठे रहने से कोई लाभ नहीं है। किंतु पुराना पकड़ के क्या रखना है? वो जैसे कहते हैं ना कि थ्रोइंग द बेबी अलोंग विद द बाथ वाटर। वो जो बच्चे को एक बाथ टब में वह पानी भर के आप नहला रहे हैं। फिर बच्चे बच्चे का स्नान हो गया तो बाथ टब में से पानी है। वह बाहर फेंक दिया। पता नहीं रहा कि उसके बच्चा अभी भी भीतर में है तो पानी के साथ में बच्चे को भी फेंक दिया तो ऐसा ना हो जाए कि स्मृति को हटाते हटाते आपने श्रुति को भी गाली देना शुरू कर दिया। यह आजकल का एक जो खास प्रकार का आंदोलन चल रहा है कि मनुस्मृति को यह लोग गाली दे रहे हैं। कह रहे हैं कि हिंदू धर्म का अर्थ ही है मनुस्मृति। मनुस्मृति के भीतर में यह जो जो निचली जाति के हैं स्त्रियां है उनका कोई अधिकार नहीं है। उनके ऊपर में अत्याचार करना है। अर्थात कि यदि मनुस्मृति में लिखा है तो हिंदू धर्म में लिखा है। अभी ये स्वामी जी ने आगे ही कहा जितना आप हिंदू धर्म को गाली देंगे उतना ही फिर हिंदू धर्म का एक जो कंजर्वेटिव एलिमेंट है वह खड़ा होगा। और फिर यह एलिमेंट क्या करेगा? प्रत्येक देश के छोटे से छोटी भी अंधश्रद्धा है उसको सनातन हिंदू धर्म समझ करके उसको डिफेंड करने में लग जाएंगे। तो अभी आजकल वही चल रहा है। एक तब एक जो दल है मनुस्मृति को गाली दे रहा है तो दूसरा दल खड़ा हो गया है मनुस्मृति का बचाव करने के लिए। स्वामी जी कहते हैं कि हैव वेरी क्रिस्टल क्लियर प्योरिटी अंडरस्टैंडिंग इन आवर माइंड दैट स्मृति को तो प्रत्येक युग में नए सिरे से लिखा जाना चाहिए। वह समय होगा जबकि वह स्त्रियों की जो उनके बारे में जो विधान दिए गए हैं उस समय के लिए ठीक होगा। किंतु इस नए भारत में स्त्रियों को तो इसरो के साइंटिस्ट भी होना है। फाइटर प्लेन के फाइटर जेट के पायलट भी होना है। उनको तो फिर यह सीईओ भी होना है। उस समय यदि आप कहेंगे कि वो जो भी मनुस्मृति के जो दो-तीन सेंटेंस है स्त्रियों के बारे में वो जग जाहिर है। तो आज यदि ऐसा कुछ कहेंगे तो वो काम नहीं चलेगा। तो यहां पर स्वामी जी कहते हैं कि देखिए कि आज के जो कुछ एक दल जो कि सुबह को उठकर के ही चाय पीकर के ही हिंदू धर्म को गाली गलौज देना शुरू करता है उस तरह की मूर्खामी इस तरह की गलती शंकराचार्य और फिर जितने भी आचार्य गण है संत थे जितने भी कवि थे जितने भी महापुरुष थे यह मिडीवल इंडिया के मिडिवल एजेस के उन लोगों ने यह गल गलती नहीं की। उन्होंने कहा कि हिंदू धर्म में एकदम स्पष्ट है कि आत्मन की जो सच्चाई है, आत्म तत्व है, वही सनातन हिंदू धर्म है। उसके बाद में इस आत्म तत्व को किस तरह की सोसाइटी में आप अप्लाई करते हैं। द टाइप एंड नेचर ऑफ द सोसाइटी विल वेरीरी अकॉर्डिंग टू द टाइम एंड नीड। यह जिस तरह का समाज में आत्म तत्व को आपको प्रचार करना है, प्रसार करना है, उस समाज का क्या बंधारण होगा, उस समाज का क्या बिहेवियर होगा, वह समय और आवश्यकता के अनुसार निर्धारित किया जाएगा। वह भगवान राम के समय जो समाज था, वह आज नहीं रह सकता है। आज बिल्कुल अलग परिस्थिति है। वह राजाशाही थी, आज लोकशाही है। सो अकॉर्डिंगली वी विल हैव टू मेक चेंजेस। इसलिए स्वामी जी यहां पर कहते हैं दिस रिफॉर्मर्स न्यू फुल वेल द इविल्स वि एकिस्टेड येट दे डिड नॉट कंडेम दे डिड नॉट से ऑल दैट यू हैव इज रॉन्ग एंड यू मस्ट थ्रो इट अवे इट कैन नेवर बी सो उन्होंने ऐसा कभी नहीं कहा कि आपके पास में जो कुछ भी है सब गलत है सब फेंक दो ऐसा कभी हो ही नहीं सकता है। यह देखिए हो सकता है। ऐसा नहीं कि नहीं हो सकता। हमको पता है कि जो चार ओरिजिनल रिवर वैली सिविलाइजेशन थी ग्रेट रिवर वैली सिविलाइजेशन यह सिंधु रिवर वैली सिविलाइजेशन ओ मेसोपोटेमिया नाइल उसमें से आज भारतीय संस्कृति ही ये सिंधु रिवर वैली सिविलाइजेशन गंजेटिक रिवर वैली सिविलाइजेशन कावेरी रिवर वैली सिविलाइजेशन यह सरस्वती रिवर वैली सिविलाइजेशन यह जो इंडियन सबक्टिनेंट की जो ग्रेट नदियां थी ग्रेट रिवर्स थी। उसके जो किनारे पे जो सिविलाइजेशंस बसी हुई थी यहां पे जो संस्कृति पनपी वो एज इट इज अपने वो जो ओरिजिनल फॉर्म में जीवित है अपने सनातन हिंदू धर्म को बचाए रखी है। वरना यह हुवांगो रिवर वैली सिविलाइजेशन चाइना आज का चाइना देखिए पहले तो बुद्धिज्म आया और उसके बाद में कम्युनिज्म आया। जिसने कि वहां की ओरिजिनल संस्कृति को पूरा दूसरे रास्ते पर ले गया है। मेसोपोटेमिया और नाइल का उदाहरण देख लीजिए। जी मेसोपोटेमिया यानी कि आज का इराक, नाइल यानी कि आज का नॉर्थ अफ्रीका, इजिप्ट वहां पे पूरा इस्लाम आ गया है। और इसके बाद में जो कि एबोरिजिनल सिविलाइजेशंस थी नॉर्थ अमेरिका, साउथ अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया या तो फिर ये अफ्रीकन साउथ अफ्रीकन सेंट्रल अफ्रीकन सिविलाइजेशंस वहां पे देखिए कि क्रिश्चियनिटी और इस्लाम इन दोनों ने मिलकर के वहां का जो लोकल कैरेक्टरिस्टिक था, कैरेक्टर था संपूर्ण रूप से परिवर्तित कर दिया है। जो चार माने जो ग्रेटेस्ट लॉन्गेस्ट लिविंग सिविलाइजेशन है आज तो अपनी हिंदू सिविलाइजेशन ही है। तो ये दो चीज है। आप किसी को बिल्कुल फंडामेंटली चेंज करना चाहे तो कब तभी कर सकते हैं जबकि वो वो फंडामेंटली वीक हो। तो वो भारत की सिविलाइजेशन फंडामेंटली वीक नहीं थी। फंडामेंटली स्ट्रांग थी। इसलिए यहां पे बहुत ज्यादा गड़बड़ यह आक्रमणकारी नहीं कर
ईसाई धर्म रोम और ग्रीस की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत पर आधारित है - christianity builds upon the religious and cultural heritage of rome and greece
पाए। टुडे आई रीड दैट माय फ्रेंड डॉक्टर बेरोस सेस दैट इन 300 इयर्स क्रिश्चियनिटी ओवर थ्रू द रोमन एंड ग्रीक रिलीजियस इनफ्लुएंसेस। आज मैं पढ़ता हूं कि मेरे मित्र बेरोस कहते हैं यह डॉक्टर बेरोस यानी कि वर्ल्ड पार्लियामेंट ऑफ रिलीजन के वो एक बड़े उद्योगकर्ता। वो कहते हैं कि 300 सालों में क्रिश्चियनिटी ने रोमन और ग्रीक धार्मिक जो इन्फ्लुएंस है उसको खत्म कर दिया। उसको फेंक दिया और अपना झंडा गाड़ दिया। देखिए कि अभी क्रिश्चियनिटी का इतिहास भी यदि आपको पता होगा जेरूसम में आज से 2000 साल पहले जेरूसलेम बोल के वो जो यहूदी लोग जहां पर रहते हैं जुडाइज्म का जहां पे जन्म हुआ है और जुडाइज्म का जो ओरिजिनल होम है घर है वहां पे उस समय जब जीसस का बर्थ हुआ था यह रोमन साम्राज्य का एक गवर्नर वहां पर राज्य करता था और वहां पे एक एक और है यह रोमन गवर्नर और दूसरी ओर है कि जुडाइज्म के बड़े ही कंजर्वेटिव एलिमेंट्स। अभी यहां पे जब जीसस का जन्म हुआ जीसस ने अपना मिनिस्ट्री अपना मिशन प्रारंभ किया। उन्होंने क्या कहना शुरू किया कि आई एम द हेयर ऑफ किंग डेविड। तो फिर अर्थात कि यह जो जो प्रॉफेट्स थे जुडाइज्म के उन्होंने एक मसीहा के बारे में कल्पना की थी कि एक ऐसा मसीहा आएगा जो कि बार-बार यह जो जीव है यहूदी है उनको इतिहास के राज्य इतिहास में सब समय उनको एक तरह से अत्याचार सहन करना पड़ा है तो मसीहा आकर के उनको बचाएगा। तब यह जु यहूदियों को पकड़ कर के इजिप्ट ले गया ले जाया गया था पहले इतिहास में जीसस के आने से पहले तो वहां से यह फेरोज़ उनके ऊपर अत्याचार करते थे तो वहां से कैसे भी करके मोजेस ने उनको बचा करके अपना प्रॉमिस लैंड है इजराइल वापस ले आए। अभी इजराइल आए तो फिर यह रोमन साम्राज्य का कंट्रोल आ गया। यानी कि किसी ना किसी के हाथों से वे लोग अत्याचारित होते ही रहे हैं। द मोस्ट टेराइज्ड रिलीजन या तो रेस आप कह सकते हैं जिसके एक ऐसी प्रजा जिनके ऊपर में सबसे ज्यादा अत्याचार हुए हैं तो यह यहूदी लोग हैं। तो ये लोग हमेशा कहते हैं कि भले ही अपने पास में पॉलिटिकल अत्याचार होते हो किंतु हमारे भीतर में एक मसीहा का जन्म होगा। तो जीसस ने जब यह कहना प्रारंभ कर दिया कि आई एम दैट प्रॉमिस्ड प्रॉफेट तो सब लोग यह जो कंजर्वेटिव भी नाराज हो गए जो कि जुडाइज्म के थे और यह रोमन गवर्नर भी नाराज हो गया। वो कहता है कि वह ज लोगों में यदि रिवोल्ट लाएगा तो रोमन साम्राज्य में गड़बड़ करेगा। और यह जो ज लोग थे उसके जो कंजर्वेटिव कुछ पंडित थे वे लोग सोच रहे हैं कि हमारी सत्ता तो अभी लोगों पर चल रही है। अभी जीसस सही-सही में प्रूव हो जाए कि वह वो मसीहा है प्रॉमिस्ड प्रॉफेट। तो फिर हमारा दुकान बंद हो जाएगा। तो फिर दोनों ने मिलकर के उसको क्रुसिफाई कर दिया। तो वह माने क्रिश्चियनिटी का प्रारंभ देखिए कि कितना बुरी तरह से हुआ है। उसके प्रॉफेट को क्रुसिफाई कर दिया गया। और जितने भी अपोस्टल है इंक्लूडिंग पीटर एंड पॉल सबको मृत्यु के घाट उतार दिया गया। तो आपको लगेगा कि यह धर्म वहीं पर समाप्त हो जाएगा। किंतु ऐसा नहीं हुआ। 300 साल के बाद में कॉनस्टेंटाइन जो एपरर था उसने क्रिश्चियनिटी का सहारा लेकर के उसने यह अपने जितने भी दुश्मन है उसके ऊपर में विजय प्राप्त किया और क्रिश्चियनिटी को अपना स्टेट रिलीजन के रूप में घोषित किया। तो आप यदि ऊपर ऊपर से इसको पढ़ेंगे तो आपको लगेगा कि अरे वाह ये 300 साल में ऐसा एक दल छोटा सा जिसका फाउंडर और जिसके जो फर्स्ट एपोस्टल है सबको यदि एक गुनहगार बना करके यदि मृत्यु के घाट उतार दिया गया हो 300 साल में पूरे-पूरे रोमन साम्राज्य पे किस तरह से उनका कंट्रोल आ जा सकता है। किंतु इन लोगों ने हिस्ट्री पढ़ी नहीं है। देखिए स्वामी जी यहां पे क्या कहते हैं। दैट इज नॉट द वर्ड ऑफ अ मैन हु हैज़ सी हु हैज़ सीन यूरोप एंड ग्रीस एंड रोम। यह उस व्यक्ति के शब्द नहीं है जिसने यूरोप, ग्रीस और रोम को देखा है। बेरोस यदि यह कहता है कि 300 सालों में क्रिश्चियनिटी ने रोमन एंपायर को हरा दिया तो यह शब्द उसके नहीं है कि जिसने यूरोप, ग्रीस और रोम देखा हो। अभी देखिए यह तो फैक्ट है कि क्रिश्चियनिटी ने रोमन साम्राज्य पे अपना कंट्रोल एस्टैब्लिश कर दिया। उसके बाद में यह होली रोमन एंपायर प्रारंभ हुआ और इतना ही नहीं रोमन एंपायर के बाहर के जितने भी राजा थे उन सबका वह सब वह पॉप के कंट्रोल में थे तो इस बात में तो कोई डाउट ही नहीं किंतु स्वामी जी वांट्स टू मेक ए डीपर पॉइंट हियर। यहां पे स्वामी जी और एक बड़ा ही गहरा पॉइंट दिखाना चाहते हैं। क्या कहते हैं? द इन्फ्लुएंस ऑफ रोमन एंड ग्रीक रिलीजन इज ऑल देयर इवन इन प्रोटेस्टेंट कंट्रीज ओनली वि चेंज नेम्स। यह जो रोमन और ग्रीक धर्म थे पागनिज्म जिसको आजकल कहते हैं पेगनिज्म उसका इन्फ्लुएंस उसकी असर आज भी है। कैथोलिक कंट्रीज में भी है और यह प्रोटेस्टेंट कंट्रीज में ही है। ओनली विद चेंज नेम बस नाम बदल दिए गए हैं। जो फेस्टिवल थे रोमन फेस्टिवल, ग्रीक फेस्टिवल उसी को उठा के क्रिश्चियन लोगों ने अपने फेस्टिवल में परिणत कर दिया। यह जीसस का जन्म कब हुआ है पता नहीं। किंतु यह जो क्रिसमस जो कि ये दिसंबर महीने के आखिरी सप्ताह में वो जो सेलिब्रेट की जाती है ऑलरेडी वो एक पेगन फेस्टिवल था तो उन्होंने क्या किया कि उस समय तो उन लोगों के पास में इतना शक्ति नहीं था कि अपना एक सेपरेट हॉलिडे घोषित करें तो लोग उस हॉलिडे में आएंगे भी तो ऑलरेडी जो लोकल एग्जिस्टिंग जितने भी फेस्टिवल है उन सबको क्रिश्चियनिटी ने अपने रंग में रंग दिए ये यूकेरिस्ट हो ना कि ईस्टर हो ना कि ये क्रिसमस हो ना कि जितने भी फेस्टिव वल है किसी ना किसी स्वरूप में वह ऑलरेडी थे ही थे पेगनिज्म के भीतर में और उस उसी को पकड़ करके वह क्रिश्चियन रंग इसके ऊपर में उठा दिया गया है। इसलिए स्वामी जी कहते हैं कि वह रोम और ग्रीक का जो रिलीजियस इन्फ्लुएंस है अभी भी है। प्रोटेस्टेंट कंट्री में भी है। ओनली विद चेंज नेम। बस नाम बदल दिए गए हैं। ऑल गॉड्स रिकक्रिस्टंड इन अ न्यू फैशन। यह पुराने देवता जितने भी थे उनको नया नाम दे दिया गया है। दे चेंज नेम्स। उन्होंने बस नाम बदल दिए हैं। द गॉडेसेस बिकम मेरीज एंड गॉड्स बिकम सेंट्स। ये जो जितनी भी देवियां थी उनको मेरी में परिणत कर दिया गया है। और जितने भी भग देवता थे उनको सबको सेंट बना दिया गया है। एंड द सेरेमोनियल्स बिकम न्यू। और जितनी भी सेरेमोनीज़ थी, फेस्टिवल्स थे, उनको क्रिश्चियन रंग पहना दिया गया है। इवन द ओल्ड टाइटल ऑफ़ पोंटिफेक्स मैक्सिममस इज़ स्टिल देयर। यह जो पोंटिफेक्स मैक्सिममस यानी कि जो जुपिटर का धर्म था, यह जो पेगनिज्म उसका जो हेड प्रिस्ट होता था, उसको यह लोग पोंटिफेक्स मैक्सिममस कहते थे। आज यह टाइटल जो क्रिश्चियनिटी का जो सर्वोच्च यह है पॉप उसको दिया जाता है। तो जिस आदमी ने यूरोप यूरोप और ग्रीस और रोम का अभ्यास किया है वो ऐसा कभी नहीं कहेगा कि क्रिश्चियनिटी ने रोमन साम्राज्य को हरा दिया। वो क्या कहेगा? क्रिश्चियनिटी ने रोमन रोमन जितने भी रिलीजियस फेस्टिविटीज रिलीजियस आइडियाज है उसको क्रिश्चियन कलर में रंग कर दिया। यह आप कह सकते हैं। यह ऐसा नहीं कह सकते कि उसके ऊपर में विजय प्राप्त कर दी। तो कंपेयर टू अपने यहां पे देखिए कि ठाकुर ने और स्वामी जी ने यह प्रयास कभी नहीं किया कि हिंदू धर्म को हटा दो। यहां पर दीपावली का उत्सव है उसकी जगह ठाकुर मां स्वामी जी की तिथि पूजा लेकर के आओ। यह जो उत्तरायण है जितने भी हिंदू त्यौहार है उसको हटा के अपने त्यौहार लेकर के आओ। हम या तो फिर या तो फिर जैसे क्रिश्चियनिटी ने किया कि पुराने त्यौहारों को पकड़ के नया नामकरण कर दो। यह दोनों गलती हमने नहीं की है। हमने कहा है विद इन दिस ग्रेट सनातन धर्म इसके भीतर में ही हमारे रामकृष्ण की जो भावधारा है उसको रहना है। सो सडन चेंजेस कैन नॉट बी एंड शंकराचार्य न्यू इट। तो एकाएक सडन चेंजेस आप समाज में नहीं ला सकते हैं। आप ऐसा नहीं कह सकते किसी को भी कि आपके जितने भी पुराने त्यौहार हैं उसको हटा दो। यह पुराने देवी देवता है उन सबको हटा दो। हमारे देवी देवताओं को ठाकुर और मां को बिठा दो। ऐसा कभी नहीं होगा। यह मां के जीवन में सुंदर घटना है। किसी ने आकर के मां को कहा कि मां अभी आप आई है तो अभी आपके बाद में ना शीतला, मनसा वगैरह की कोई पूजा नहीं करेगा। अर्थात कि यह गांव में तो वही होता है जय राम भाटी के आसपास में कि शीतला देवी मनसा देवी वगैरह की पूजा होती है। उन्हीं के सामने मिन्नत मानी जाती है। तो मां ने इमीडिएटली कहा अरे ये तुम बात क्या कर रहे हो? वो तो सनातन देवी देवता है हमारे। वह तो वैसे ही रहेंगे। तो देखिए कि हम लोग हम लोगों के भीतर में यह आईडिया बड़ा क्लियर है कि यह शीतला मनसा की पूजा को मां शारदा की पूजा बोल के हमने नया रंग बिठा के फिर से चालू नहीं किया है। वह जैसे है वह वैसा ही रहेगा। बस रामकृष्ण विवेकानंद भावधारा का और एक अंश इसमें ऐड होगा। तो शंकराचार्य को पता है कि जो समाज है उसमें आप इस तरह से फटाक करके चेंज नहीं कर सकते हैं। सो डिड रामानुज और रामानुज को भी यह पता था। द ओनली वे लेफ्ट टू देम वास स्लोली टू ब्रिंग अप टू द हाईएस्ट आइडियल द एकिस्टिंग रिलीजन जो एकिस्टिंग रिलीजन है उसकी उसी को पकड़ करके धीरे-धीरे करके हाईएस्ट आइडियल तक लेके आना है। इफ दे हैड सॉट टू अप्लाई द अदर मेथड दे वुड हैव बीन हाइपोक्राइट्स फॉर द वेरी फंडामेंटल डॉक्ट्रिन ऑफ द रिलीजन इज़ इवोल्यूशन द सोल गोइंग टुवर्ड्स द हाईएस्ट गोल थ्रू ऑल दिस वेरियस स्टेजेस एंड फेजेस व्हिच आर देयर फॉर नेसेसरी एंड हेल्पफुल क्यों ऐसा उन्होंने क्यों नहीं किया क्योंकि उनके धर्म का जो फंडामेंटल डॉक्ट्रिन है वह है इवोल्यूशन आत्मन धीरे-धीरे करके करके अच्छा आत्मन में तो इवोल्यूशन नहीं होता किंतु आत्मन का जो मैनिफेस्टेशन है, उसका जो बाह्य प्रकाश है, उसका जो शक्ति है, वह धीरे-धीरे करके इवॉल्व होता है और धीरे-धीरे करके उसका जो अंतिम लक्ष्य है, मुक्ति, वहां तक पहुंचता है। अच्छा, अभी यह सेंटेंस जो है वह इतना इंपॉर्टेंट है कि अभी इसके बारे में डिस्कशन फदर अभी हम कल करेंगे। आज यहीं तक। ओम शांति शांति शांति हरि ओम तत्सत श्री राम
प्रश्न: कुछ धर्मों में राजनीति बहुत मजबूत हिस्सा है। हिंदू धर्म कभी राजनीतिक नहीं रहा। क्या यही हमारी ऐतिहासिक कमजोरी का कारण है? In some religions politics is very strong part. hinduism was never political. is this a reason for our historical weakness?
कृष्णपणमस्तु एक्चुअली देखिए कि हिंदूइज़्म ने ठीक ही किया है कि पॉलिटिक्स और रिलीजन को सेपरेट रखा है। आज देखिए कि ऐसा कौन सा रिलीजन है जिसमें पॉलिटिक्स और रिलीजन 100% एक साथ में जुड़े हुए हैं तो वह है इस्लाम। अभी इस्लाम की जो परिस्थिति है विभिन्न देशों में गल्फ कंट्री को छोड़ दीजिए क्योंकि उनकी प्रोस्पेरिटी का आधार है वो ऑयल। तो वह ऑइल निकाल लेंगे। तो आज ऐसा कौन सा इस्लामिक कंट्री है जो कि कुछ पॉजिटिव कंट्रीब्यूट कर रहा है। आज जितना भी डेवलपमेंट हुआ है सब यूरोप अमेरिका में हो रहा है। और यहां पे यह जो सेकुलर ईस्ट एशियन कंट्रीज है चाइना है, जापान है, साउथ कोरिया है वहां पे हो रहा है। तो सिविलाइजेशन में जो कंट्रीब्यूशन करना था उनका वो एक समय हो गया और उसके बाद में सतत उनका अवनति ही चलता रहा है। कि अमेरिका और यूरोप उसकी सक्सेस के पीछे का सबसे बड़ा सीक्रेट है कि सेपरेशन ऑफ चर्च एंड स्टेट। क्योंकि वहां पर भी यह मिडीवल एजेस में चर्च का पॉलिटिकल इन्फ्लुएंस इतना बढ़ गया था कि सभी चीजों में इंटरफेयर करते थे। और फिर यह गैलीलियो को धमकाना यह कहना कि देखो कि तुम्हारा साइंस जो है हमारे बाइबल के साथ में मैच नहीं हो रहा। तुम या तो इसको वापस ले लो या तो तुमको जला देंगे। तो जो कि इस्लाम में हुआ बार-बार जो भी एक एडवांस थिंकर आता है इस्लाम उसको कभी भी आगे नहीं बढ़ने देगा क्योंकि किंतु क्रिश्चियन यूरोप में यह हुआ क्योंकि अल्टीमेटली उन्होंने चर्च और स्टेट को सेपरेट कर दिया। यह जो प्रोटेस्टेंट मूवमेंट जो पूरा प्रारंभ हुआ वहां से यह सब स्टार्ट हुआ। हिंदूइज़्म ने ठीक ही किया है कि हमने यह ओवर माने इंटरफेयर करना नहीं किया स्टार्ट। हिंदूइज़्म का प्रॉब्लम है कि यह क्षत्रिय लोगों का यह माने डिटरेशन होना नहीं कि धर्म में डिटरेशन होना। धर्म में हुआ था और क्षत्रियों में भी हुआ था। तो हमारे जो डिग्रेडेशन है उसके रीजंस बड़े कॉम्प्लेक्स है। उसमें यह रीजन तो कभी हम नहीं डालेंगे कि धर्म को राजनीति में ले आइए। क्योंकि आजकल भी देखिए कि हम जब इंडिया के न्यूज़ पेपर पढ़ते हैं और जब चाइना के न्यूज़पेपर पढ़ते हैं तो हमको तो कितना दुख होता है। चाइना में देखेंगे कि ये डीप सीक है वगैरह जितने भी है कंटीन्यूअसली नए एआई मॉडल डेवलप करते रहते हैं। व्हिच आर वन ऑफ द बेस्ट इन ये जितने भी एआई बेंचमार्क है उसमें टॉप पे आते हैं। इंडिया में अब मुझे पता नहीं कि कौन एआई में काम कर रहा है। मुझे नहीं लगता कि कोई कर रहा होगा। इंडिया और चाइना दोनों का जीडीपी था वह 1980 तक सिमिलर था। उसके बाद में उन्होंने 20 साल में उनका जीडीपी फाइव टाइम्स बढ़ गया हमारे से। और हम ये साउथ एशियन जो प्रॉब्लम है कि जैसे ही धर्म को राजकारण में डाला तो पाकिस्तान भी डूब गया, बांग्लादेश भी डूब गया और अभी भारत का पता नहीं क्या होगा। सो दैट वी हैव टू अंडरस्टैंड। धर्म का फील्ड है वो है इंडिविजुअल लेवल पे। और फैमिली लेवल पर एट द मोस्ट। इसके आगे जो पॉलिटिकल फील्ड है इट हैज़ टू बी डन बाय दोज़ पीपल हु आर हु आर रिलीजियस इन देयर हार्ट बट दे डोंट ब्रिंग रिलीजियस इनू गवर्नेंस। गवर्नेंस तो आपको एकदम सेुलर बेसिस पे ही करना होगा। जो अभी अमेरिका की सक्सेस का क्या राज है? आप अब जैसे कल ही मैं वो Microsoft का की नोट एड्रेस देख रहा था। वो सत्य नाडेला ने स्टार्ट किया और उसके बाद में मुस्तफा सुलेमान बोल के उनका जो एआई एग्जीक्यूटिव है उसने उसको कंप्लीट किया और ऑडियंस में दो फाउंडर बैठे थे ये बिल गेट्स और स्टीव बोलमर अभी एक है क्रिश्चियन एक है हिंदू एक है मुस्लिम तीनों लोग मिलकर के माइक्रोसॉफ्ट बनाया है आज हम ये इस तरह से करने को जाएंगे कि यह हिंदू है यह मुस्लिम है यह क्रिश्चियन है तो फिर कैसे हम लोग माइक्रोसॉफ्ट जैसा इक्विवेलेंट बना पाएंगे सो दैट वी हैव टू अंडरस्टैंड पॉलिटिक्स इकोनॉमिक्स इंडस्ट्रियलाइजेशन साइंस टेक्नोलॉजी यह डेमिस हैसेबिस जो कि ब्रिटिश साइंटिस्ट है उसको अभी यह नोबेल प्राइज मिला। अभी यह वो ब्रिटेन में था बोलकर के उसको नोबेल प्राइज मिला। यह इंडिया ऑफ़ इंडिया में होता तो पता नहीं क्या होता उसका। सो दैट वी हैव टू अंडरस्टैंड दैट एक्चुअल डेवलपमेंट डज़ंट केयर फॉर द डिवीज़ंस दैट वी क्रिएट इन आवर माइंड्स। लेट दिस थिंग रिमेन अप टू दिस रिलीजन लेट रिलीजन रिमेन अप टू आवर पर्सनल क्वेस्ट टुवर्ड्स गॉड अभी आप रुष्टपुष्ट होकर के फिर आप धर्म राजनीति में जाइए ना जैसे स्कूल है स्कूल में बच्चे लोग सीखते हैं किंतु एक बार ग्रेजुएट हो गए जॉब खोजना शुरू किया तो फिर ये स्कूल के नियम थोड़ी ना वहां पे काम करने वाले हैं। स्कूल के नियम थे हमको बौद्धिक हमको स्ट्रेंथन करने के लिए उसका काम पूरा हो गया। हम स्कूल में से बाहर निकल गए। दैट इज़ व्हाई स्वामी जी सेज़ इज़ इट इज़ गुड टू बी बोर्न इनटू चर्च बट इट इज़ नॉट इट इज़ वेरी बैड टू डाई इनटू चर्च। आप चर्च में जन्म लीजिए। धर्म में जन्म लीजिए। धर्म को पालन करके हृष्टपुष्ट होइए। किंतु दैट लेट इट रिमेन जस्ट टुवर्ड्स योरसेल्फ एंड योर फैमिली। कॉर्पोरेट वर्ल्ड में जैसे भी आप एंटर होते हैं, यू हैव टू फॉलो स्ट्रिक्ट रूल्स ऑफ साइंस एंड रैशनलिटी। यहां पर मैं सिर्फ एक ही बात ऐड कर दूंगा कि उसका ऑोजिट क्या है कि आपके लाइफ में स्पिरिचुअलिटी नहीं है और आप पॉलिटिक्स में गए हैं तो क्या होगा महा भयानक करप्शन। सो यह हमको समझना है कि पॉलिटिक्स और रिलीजन कहां पे इकट्ठा होता है। रिलीजन गिव्स यू इंटीग्रिटी एंड ऑनेस्टी। बट दैट ओनली दैट फिर यह धार्मिक किताब को खोल के इसमें ऐसा लिखा है बोल के मुझे देश को इस तरह से चलाना है। इस तरह का मूर्खामी ना करें। सो दैट इज माय कंक्लूजन। प्लीज गो अहेड। शंकराचार्य से यह सब थिंकिंग मॉडर्न
प्रश्न: श्रुति और स्मृति में विभाजन बहुत प्रभावी है, जिसने भी इसे किया है।
थिंकिंग स्टार्ट हुआ है। देखिए कि सोसाइटल आपको मैनेज भी करना है और आपको इंडिविजुअल आपका जो स्पिरिचुअलिटी है वह भी मैनेज करना है। शास्त्र विल टेल यू बोथ बट व्हाट शास्त्र टेल्स यू दैट योर रिलेशन विद गॉड इज कास्टेंट बट द सोसाइटी कीप्स चेंजिंग। सो अकॉर्डिंगली यू विल हैव टू चेंज दिस सोसाइटल रूल्स एंड रेगुलेशंस। सो दिस इट इज नो ब्रेनर जैसे इंग्लिश में कहते हैं। देखिए आपके आइडियाज में ना कुछ-कुछ
प्रश्न: स्वामीजी से पहले, वेदांत स्वार्थी था, केवल अपने मोक्ष के बारे में उपदेश देता था। स्वामीजी ने "शिव ज्ञान जीव सेवा" की शिक्षा दी। उन्होंने व्यक्तिगत वेदांत को सार्वजनिक वेदांत में बदल दिया। शंकराचार्य भी समाज की आवश्यकता को नहीं समझ सके। यही कारण है कि हम इतने लंबे समय तक गुलाम रहे।
मिक्स अप है। सबसे पहली बात तो है कि वेदांत का हम अर्थ क्या करते हैं? वेदांत इज़ नॉट जस्ट शंकराचार्य वेदांत। इज़ अ रामानुजाचार्य वेदांत आल्सो। भक्ति मूवमेंट जिसको कहते हैं और यह आप गौरांग महाप्रभु है या तो फिर यह रामानुजाचार्य का जीवन पढ़ेंगे तो लोगों के प्रति जो करुणा थी वह एकदम स्पष्ट दिखाई देती है। अभी कुछ ही दिन पहले मैं गौरांग महाप्रभु की एक मूवी देख रहा था। बहुत पुरानी मूवी है। बेंगली मूवी है। ब्राउज़ करते-करते एकाएक वो आ गया नजर के सामने। मैंने कहा देखते हैं मैं जनरली कभी भी संत लोगों की मूवी नहीं देखता क्योंकि वो जिस तरह से उनको पोट्रे किया जाता है उसके साथ में मैंने अभी एक भी मूवी नहीं देखी ठाकुर मां स्वामी जी की मैं देख ही नहीं पाऊंगा क्योंकि अपने माइंड में जो एक कांसेप्ट है इन लोगों का और यह अभी एनिमेटेड हो ना कि लाइव एक्टिंग हो वो कभी भी मैच नहीं होगा अननेसेसरी हम दुखी हो जाएंगे तो मैं कभी देखता ही नहीं अभी किंतु यह गौरांग महाप्रभु की यह तो देख ली इट वास वेरी ब्यूटीफुल मूवी एक्चुअली बहुत पुरानी है वो कौन है उसका एक्टर फैक्टर नाम नहीं पता बट इट वाज़ वेरी गुड मूवी। तो देखिए कि बड़ा गौरांग महाप्रभु का बड़ा स्पष्ट है कि जितने भी पापी तापी दलित थे यह जितनी भी महिलाएं जिनका कि चर ये देवदासी ये जो जगन्नाथ महाप्रभु के मंदिर में जो हुआ करती थी सबको उन्होंने अपने डिसाइपल के रूप में स्वीकार किया। सो वो जो लार्ज हार्टेडनेस वाज़ देयर। अभी लार्ज हार्टेडनेस है बोलकर के ही यह सनातन हिंदू धर्म पुनर्जीवित हुआ। वरना तो बुद्धिज्म भारत में से जाता ही नहीं। क्योंकि हिंदूइज़्म ने तो यह तलवार के जोर पे ना बंदूक के जोर पे तो रिकॉन्क्वेस्ट नहीं किया हिंदुस्तान का। उन्होंने तो प्रेम के माध्यम से ही हम हिंदुओं के हृदय पर विजय प्राप्त की है। भारतीयों के हृदय पर विजय प्राप्त की है। प्रेम के माध्यम से ही बुद्धिज्म को हटाया है। और यही एक अभी भी रीजन है कि आजकल जो बाकी देशों में जब यह मिशनरी रिलीजन गए तो 100% कन्वर्ट हो गए हैं। इजिप्ट थे, इराक, ईरान वगैरह तो भारत में मुश्किल से 20% कन्वर्ट हुए हैं। सो दैट इज़ वन थिंग वी हैव टू अंडरस्टैंड। दूसरा है कि जो पॉलिटिकल जो डिग्रेडेशन हुआ दैट इज अ होल सेपरेट थ्रीड ऑल टुगेदर कि वो जो क्ष यह जो बात है ना मुझे अभी भी समझ में नहीं है। इफ आई मे कनंफेस के जो अपने हिंदुस्तान भारत के इतिहास में जो एक पजल हमेशा से मुझे नहीं समझ में आ रही है कि क्षत्रिय लोगों का ये खात्मा भारत में से कैसे हो गया। अभी थ्यरी बहुत सारी है। आप पुराण में देखेंगे तो परशुराम की बात आती है। कितनी बार उन्होंने पृथ्वी को नक्षत्रिय कर दिया था। उसके बाद में यह बुद्धिज्म है कि जिन्होंने क्षत्रियों को पकड़-पकड़ कर के साधु बनाना शुरू किया था। सो दोज़ एक्सप्लेनेशंस आर देयर। स्टिल मतलब आई कैन नॉट रेप माय हेड अराउंड कि क्यों कोई महान राजा प्रकट नहीं हुआ। क्योंकि यह सब चीजें ऐसी नहीं है कि आपको परमानेंटली मतलब ये ये करके रख दे। सो दैट इज वन पजल इन माय माइंड। अभी देखिए स्वामी जी के बात का जो है मतलब स्वामी जी का जो आप कह रहे हैं तो यह थे ना कि यह जो लार्ज स्केल पॉवर्टी जो आज के भारत में थी स्वामी जी ने देखा उस इस तरह से पहले नहीं था। अदरवाइज ये ब्रिटिश लोग यहां पे क्यों आते हैं? यह मुगल लोग यहां पे क्यों आते? भारत को तो सोने की चिड़िया कहा जाता था। यानी कि भारत में इतनी वेल्थ थी तो वेल्थ को लूटने के लिए यहां पे आएंगे ना। भारत पूरा आज का भारत पे कोई आक्रमण नहीं करेगा। कुछ नहीं मिलने वाला। किंतु उस समय के भारत में तो बहुत वेल्थ थी। सो उसको लूटने के लिए यह लोग आए थे। तो एक्चुअली यह पीछे के जो आप 200 300 साल देखें भारत की जो इकोनॉमिक दुरावस्था भयानक दुरावस्था जो चालू हुई है। इट इज अ फिनोमिना ऑफ लास्ट टू 300 इयर्स। इसके पहले क्या है? यह कास्ट वगैरह क्या करते थे? दे फॉर्म ए गिल्ड। यानी कि मैं इस कास्ट का मेंबर हूं। यानी मुझ मुझे एक ऑक्यूपेशन मिलता है। आई एम एन एसेंशियल पार्ट ऑफ दिस सोसाइटी। मैं चाहे भी हूं तो मेरे पास में एक काम है जो कि सोसाइटी को चाहिए और उसके रिटर्न में मुझे खानेपीने रोटी कपड़ा मकान मिलता है। सो दैट वाज़ द कंस्ट्रक्ट कि यह कास्ट वगैरह गिल्ड में परिणत हो गया। या तो फिर कहेंगे गिल्ड कास्ट में परिणत हो गया। व्हाटएवर ये सबका कुछ ना कुछ था। ये जो ब्रिटिश आक्रमण के बाद में ये मैनचेस्टर की ये जो मिल में बना हुआ कपड़ा जब यहां पे आया तब कहीं जाकर के भारत की इकॉनमी जो टूटी वो भयानक रूप से टूटी क्योंकि कोई भी गिल्ड है कोई भी यह कारीगर है या तो आर्टिजान जिसको बोलते हैं यह लोग कभी भी फैक्ट्री में बनी हुई वस्तुओं के सामने वो टिक नहीं पाएंगे। सो इंडस्ट्रियलाइजेशन इज द वन रीजन कि जिसने सिर्फ भारत में ही नहीं पूरे विश्व में एक प्रोलेटरिएट क्लास को खड़ा किया। वहां पे ये कम्युनिस्ट रेवोल्यूशन आया। अपने यहां पे ये स्वामी जी आए हैं। सो स्वामी जी जिस समय आए थे दैट वाज़ अ इंडस्ट्रियल प्रॉब्लम। इंडस्ट्रियल एज प्रॉब्लम एंड इंडस्ट्रियल एज प्रॉब्लम स्टार्टेड विद द इंडस्ट्रियलाइजेशन। उसके पहले यह प्रॉब्लम लार्ज स्केल पॉवर्टी ऐसा नहीं था। सो दीज़ आर द सेपरेट थ्रेड्स दैट वी हैव टू अंडरस्टैंड। फर्स्ट ऑफ ऑल कि यह उदार हृदय कि धर्म को सब में बांटना है। वह भक्ति स्कूल में था। हमारा प्रॉब्लम था कि ये क्षत्रिय लोग क्यों कमजोर हो गए। और दूसरा कि स्वामी जी ने जो शिवज्ञान जीवन सेवा इट इज मोस्ट रिलेवेंट इन पोस्ट इंडस्ट्रियल एज कि जबकि ये वास्ट ये प्रोलेटरिएट मास खड़े हुए हैं। सो वी कैन नॉट अप्लाई टुडेेस थिंकिंग टू शंकराचार्य और टू वेदांतिक एज।
प्रश्न: जिस तरह हमारे कारीगर मैनचेस्टर मिलों के सामने टिक नहीं सके, उसी तरह हमारे सॉफ्टवेयर इंजीनियर AI के खिलाफ प्रतिस्पर्धा नहीं कर सकते।
देखिए मैं इसलिए मुझे सब सबसे ज्यादा जो डर लगता है ना कि आज देखिए कि चाइना एक अकेला है जो कि यह अमेरिका के सामने खड़ा है। इवन यूरोप भी आजकल चला गया है। एक भी यूरोपियन कंपनी नहीं है जो कि जो कि फ्रंटियर मॉडल जिसको कहते हैं एआई के उसमें खड़ी है। सो चाइना एंड अमेरिका दे आर द ओनली कंट्रीज दे आर मेकिंग फ्रंटियर मॉडल्स राइट नाउ। और फिर जैसा होता है ना जब पावर गैप इतना बढ़ जाता है एक चुनंदा जो ब्रिटिशर पूरे भारत पे राज कर लिए तो दैट वास सच अ ह्यूज पावर गैप क्योंकि उनके पास में इंडस्ट्रियलाइजेशन था हम लोग एग्री एग्रेरियन एज में जी रहे थे सो टुडे दिस टू दीज़ आर द ओनली टू कंट्रीज व्हिच आर लिविंग इन एआई एज एंड वी आर लिविंग इन प्री एआई एज तो हमारा क्या होगा अब पता
प्रश्न: 19वीं सदी में औद्योगिक क्रांति आई। इसलिए केवल कुछ लोग ही मशीनों की मदद से अधिक माल का उत्पादन कर सकते थे। इसी लिए हमारे कारीगर मिलों और कारखानों के खिलाफ हार गए।
नहीं उसके बाद में रोबोट आ गया अभी वो कहते हैं ना अभी भविष्य की इंडस्ट्री में क्या होगा? पूरी जो इतनी मेगा फैक्ट्री है वहां पे एक आदमी होगा। उसका एक पेट डॉग होगा। तो अभी आदमी का क्या काम क्या है? तो जो उसका जो कुत्ता है उसकी केयर करना माने ऐसा नहीं है कि उसको फैक्ट्री की केयर करनी है। उसको केयर करनी है अपने कुत्ते की। नहीं दिस इज द चाइना में डार्क फैक्ट्री का अभी ये चल रहा है। डार्क फैक्ट्री मींस व्हाट? कि वहां पे आदमी काम ही नहीं करते। यानी कि लाइट बाइट बंद रख के इंफ्रारेड पे ये सब रोबोट चला लेते हैं काम। दीज़ आर कॉल्ड डार्क फैक्ट्रीज। और अभी आज भारत का न्यूज़ेपर का हेडलाइन पढ़िए। क्या हम मैं तो एकदम फ्रस्टेट हो जाता हूं। क्या करेंगे? यह जो हमारे साथ में जो बार-बार होता रहा है कि एक अवतार आएंगे तो वो अवतार हमारे लिए काम कर देंगे। और जैसे ही अवतार जाएंगे वैसे ही हम लंबी नींद में सो जाएंगे। जब तक फिर से नए अवतार नहीं आएंगे तब तक हम खड़े नहीं होंगे। सो सीम्स लाइक हिस्ट्री इज़ रिपीटिंग इटसेल्फ। चाइना में
प्रश्न: इसी लिए अवतार को बार-बार भारत में जन्म लेना पड़ रहा है!
नहीं आना पड़ रहा है ना। देखिए मार्केट तो अपडाउन होता रहेगा। आई एम नॉट वरिड अबाउट दैट। आई एम वरिड अबाउट द फंडामेंटल्स। अभी जस्ट मैं एक न्यूज़ पढ़ रहा था एक कि वो भारत में आज से 70 साल 50 साल पहले ना कि 150 कि.मी. पे चढ़ने वाली फास्ट ट्रेन थी जो कि पूरे एशिया में सिर्फ जापान के पास थी। इंडिया में थी जापान के पास थी। अभी आज उसके उस घटना के 50 साल के बाद में अपने पास यह वंदे भारत ट्रेन है। उससे 10 गुना वाली स्पीड की ट्रेन अपने यहां पर है। चाइना में है और वहां पे उन्होंने 48,000 कि.मी. तक फास्ट ट्रेन का उन्होंने नेटवर्क बिठाया हुआ है। तो जस्ट इमेजिन कि चाइना जिस तरह से प्रोग्रेस कर रहा है। ओ मतलब नेक्स्ट वॉर जब होगी वैसे ही 65 में मार खा गया। हम लोग आ गए हैं। अभी गलवान में भी मार खा लिया है। किंतु फुल स्केल वॉर होगी तो अभी जैसे ये शिपिंगटनेज अमेरिका में ये डिबेट चल रही है। अमेरिका में पिछले पूरे अमेरिका ने पिछले 5 साल में जितना यह बनाया है शिप उतना शिप चाइना का सिर्फ एक डॉकयार्ड बना देता है। अभी यह शिपिंग इज अ एसेंशियल फॉर इंटरनेशनल कॉमर्स और यह फॉर योर वॉर फाइटिंग कैपेबिलिटीज। तो यह डिफरेंस अभी अमेरिका और चाइना के बीच में है। इंडिया तो छोड़ ही दीजिए। इंडिया तो वह छोटा बच्चा है। वह कि अभी कंपटीशन में ही नहीं है। देखिए हमारे लिए सबसे बड़ी खुशी की
प्रश्न: सफल देशों में हर नागरिक मिशन मोड में काम करता है।
बात है चाइना क्रिकेट नहीं खेल रहा है। देखिए मैं एक बात बताऊं आप मेरा जो रीडिंग है कि व्हाट मेक्स अ सिविलाइजेशन ग्रेट। वो क्या है? पता है एक इंस्टीट्यूशनल स्ट्रेंथ होना चाहिए। जो कि अमेरिका में देखिए हावर्ड है, प्रिंस्टन है, यह एमआईटी है, कालटेक है। उन्होंने एक के बाद एक जनरेशंस ऑफ ग्रेट थिंकर्स, ग्रेट पोएट्स, ग्रेट लोरिएट्स, ग्रेट साइंटिस्ट उनको प्रकट किया। राइट? चाइना में देखिए सिंघुआ यूनिवर्सिटी है। तो वो इज़ कंसीडर्ड टू बी वन ऑफ़ द बेस्ट इन द वर्ल्ड। जबकि भारत की यूनिवर्सिटी का देखिए कि टॉप 100 में कहां पर रैंकिंग आता है पता ही नहीं चलता है। यह अपना आईआईटी है, आईआईएम है, आईआईएससी है। हमारे यहां पे प्रॉब्लम्स जो है ना कि वो फंडामेंटल इंस्टीट्यूशनल लेवल पे प्रॉब्लम है। तो जब तक इट्स इट्स नॉट अ इंडिविजुअल थिंग। इट्स एन क्योंकि सिविलाइजेशन ऑलवेज वर्क्स थ्रू इंस्टीट्यूशन। वी हैव टू हैव वेरी स्ट्रांग इंस्टीटशंस इन ऑर्डर टू मेक सिविलाइजेशन ग्रेड। आजकल अमेरिका के साथ में जो सबसे बड़ा प्रॉब्लम आ गया है जो फंडामेंटल इंस्टीट्यूशन है वहां पर करप्शन घुस रहा है। यह हावर्ड वगैरह इतने अच्छे-अच्छे इंस्टीट्यूशन थे किंतु ये पता नहीं ये लेफ्ट एक घुस गया वहां पे और वहां पे इस तरह की पागल की एक आईडियोलॉजी लेके आया है कि वो वहां के जो हावर्ड, प्रिंस्टन, कोलंबिया सब जगह पे एक ना एक गड़बड़ चल रही है। तो लेफ्टिस्ट माइंडसेट वहां पे पता नहीं कैसे घुस गया है। सो वी हैव टू मेक आवर इंस्टीट्यूशंस ग्रेट एंड नॉट जस्ट स्कूल्स यूनिवर्सिटीज़ एटसेट्रा बट आवर गवर्निंग सिस्टम, आवर जुडिशियल सिस्टम, आवर पुलिसिंग सिस्टम, एव्री सिस्टम द म्युनिसिपालिटी सिस्टम, पंचायत सिस्टम दिस इज़ व्हाट वी हैव टू स्ट्रेंथन बिकॉज़ द लाइफ ब्लड ऑफ़ अ सिविलाइजेशंस आर इंस्टीटश इंस्टीटश। स्वामी जी ने कहा ना कि आई हैव फॉलन इन लव। और यह जो स्वामी जी का यह जो अखंडानंद जी का विज़न कि वेदांतिक ब्रेन विथ इस्लामिक बॉडी। सो व्हाट इज द मीनिंग ऑफ़ दैट? ब्रदरहुड मींस इंस्टीट्यूशन बेसिकली देन दैट बेसिकली मींस इंस्टीट्यूशन बिकॉज़ इट हैज़ अ रो रूल ऑफ लॉ बिकॉज़ सी एवरीवन कैन नॉट बी इक्वल। व्हाट कैन बी पॉसिबल टू गिव एवरीवन अपॉर्चुनिटी अकॉर्डिंग टू दैट टैलेंट। नॉट बेस्ड ऑन देयर नेपोटिज्म कि यह मेरा यह है भांजा भतीजा है। उसको बिठा दो। नॉट लाइक दैट। बेस्ड ऑन टैलेंट। सो हाउ द टैलेंट कैन बी प्रमोटेड? इट कैन बी प्रमोटेड ओनली विद इन इंस्टीट्यूशन। सी दिस इज़ द ब्यूटी
प्रश्न: स्वामीजी के व्याख्यानों की यही खूबसूरती है। वे हमें हर दिशा में ले जाते हैं।
ऑफ़ रामकृष्ण विवेकानंद लिटरेचर। यह जो पोस्ट इंडस्ट्रियल एज है अपना यहां पे यह सब चीजों का रिलेवेंस है। प्री इंडस्ट्रियल एज में इतना नहीं होता। बट विद इन दिस पोस्ट इंडस्ट्रियल एंड अभी देखिए कि एक्चुअली इन दिस एज ऑफ़ एआई इट इज़ फार मोर रिलेवेंट। क्योंकि एआई इज टेकिंग अवे ऑल दिस बेसिक जॉब्स एटसेट्रा जो कि रिपिटेटिव वर्क है जो कि माइंडलेस लेबर है एआई और रोबोटिक्स ये सबको ले लेगा बट देन व्हाट विल रिमेन विथ अस स्पिरिचुअल इट इज़ वन थिंग दैट एआई कैन नेवर टेक फ्रॉम अस बिकॉज़ एआई डज़ नॉट हैव अ सोल व्हिच इज़ ऑलवेज वी विल हैव अदरवाइज़ इवन यह जो एडिटिंग का काम है मैं जब बेलूर मठ में था तो मैं आयन के पास में जाकर के मेरे मैं जो कुछ लिखता था तो उसके पास में प्रूफ रीड करवाता था फिर वह घंटे भर तक हमारा मीटिंग चलता था वो जो ग्रामर के एकदम जो टिपिकल पॉइंट है जो कि अमेरिका मतलब अंटिल एंड अनलेस यू आर बोर्न एंड ब्रॉट अप विद इन अमेरिकन इंग्लिश सिस्टम आप कभी नहीं समझेंगे तो ऐसे टिपिकल पॉइंट मुझे समझाता था आज मुझे वही पैसेज को एआई में फिट कर देना है बोलना है क्रिटिक माय पैसेज एंड फाइंड ऑल द प्रॉब्लम्स एंड फाइंड मी सॉल्यूशन इट विल डू बेटर देन आयन मैंने कंपेयर करके देखा है सो जो कि मच आर कंसीडर्ड टू बी एक्सट्रीमली इंटेलेक्चुअल वर्क्स इन द पीएचडी इन इंग्लिश लिटरेचर वो आज एआई कर दे रहा है। सो व्हाट रिमेंस विथ अस? दैट्स आवर डिविनिटी। सो इन दिस एज ऑफ़ एआई वेदांता रामकृष्ण विवेकानंद मैसेज इज फार मोर रिलेवेंट।