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Swami Vivekananda's Macrocosm & Microcosm ·

ज्ञान योग स्वामी विवेकानन्द Cosmos Microcosm 5 Feb 2024

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ओम स्थापक यज धर्मस्य सर्व धर्म स्वरूपिणी अवतार षय राम कृष्णा यते नमः अपने ही एक श्रोता है वो बड़े लंबे समय से अपने क्लासेस अटेंड करते हैं तो उनके साथ में बात हो रहा था उनके घर में किसी ने इनको पूछा कि आप इतने दिनों से यह क्लास सुन रहे हैं इतने दिनों से डेली सुबह उठ कर के अब इनकी बात सुन रहे हैं तो अभी तो यह तो अल्टीमेटली देखिए ठाकुर महा स्वामी जी की बातें तो गोल घुमा करके तो एक ही तो है नया तो कुछ अभी ठाकुर या तो स्वामी जी या तो मां खेती नहीं है तो अभी इतने दिनों से सुना है तो अभी क्या नया नया हर बार सुनने की जरूरत है वही ना वही क्या रिपीट नहीं हो रहा होगा ऐसा इनके फैमिली में से किसी ने इनको पूछा तो अभी इस बात का क्या उत्तर दे अभी कि रोज सुबह उठ कर के इस तरह से क्लास करना एक ही बात सुनना वही ठाकुर महा स्वामी जी गोल घुमा करके प्रसंग भी कितने अभी तो ऐसा तो नहीं है कि इनफा प्रसंग है हम प्रतिदिन नए नए प्रसंग निकालते रहेंगे वो तो एक समय आएगा कि व सब प्रसंग भी रिपीट होना शुरू हो जाएंगे तो इन्होंने रिप्लाई दिया जिनको प्रश्न जिन्होंने प्रश्न किया था उनको रिप्लाई दिया कि आप रोज शाम को यह टीवी क्यों सुनते हैं अभी ऐसा तो नहीं है कि टीवी में जितने भी राजनेता आते हैं वो रोज लोग नईनई बातें करते हैं गोल घुमा करके तो वही बात है यदि आपको टीवी में जद इतना इंटरेस्ट है सुनने में वही एक ही एक बात रिपीट होने में तो फिर जद ठाकुर महा स्वामी जी की बातें हम लोग जद रिपीटेडली सुने तो उसमें दिक्कत क्या है भाई एटलीस्ट ये तो ठाकुर महा स्वामी जी है वो तो राजनेता है जिनकी की वही रिपीट रिपीट आप देखेंगे कुछ कुछ सालों पहले के वो पोलिटिकल प्रोग्राम खोल कर के वही है राजनेता जद इनके चेहरे बदल जाएंगे किंतु वही झगड़े है वही इशू है वही बातों को लेकर की यह लोग अपना सर फोड़ते रहते हैं एक दूसरे के साथ में फिर भी हम इतने इंटरेस्ट से टीवी देखते हैं तो टीवी में जद इतना रिपीट देखने की इच्छा यदि आपको अच्छा लगता है तो य तो ठाकुर महा स्वामी जी है तो मुझे भी बड़ा अच्छा लगा कि मैंने भी इस तरह से सोचा नहीं था इसको फिर उन्होंने एक प्रश्न किया कि आप जो हम लोग जो बातें होती है यहां पर जो ठाकुर मा स्वामी जी हमको जो कुछ भी कहते हैं तो अपने जीवन के साथ में इसका हम लोग रिलेशन नहीं बिठा पाते क्योंकि तो संसार में रहना है जॉब भी करनी है परिवार का भी रिस्पांसिबिलिटी है और जब बाहर जाएंगे तो ऐसे विचित्र लोगों के साथ में मुलाकात होती है तो ये आइडियल मेंटेन करना अभी यह मां को ही देखिए मां कितनी इनकी लोगों के प्रति दया करुणा थी जो कोई जयराम बाटी आता था सबको बिना खिलाए वापस नहीं जाने देगी यदि कोई जाता तो मां उनके पीछे-पीछे जाती रोती जब तक व नजरों से ओझल ना हो जाए तब तक वोह देखती रहती कि अरे यह मेरा बच्चा आया था मेरी बेटि आई थी आज चले गए अभी हो सकता है कि जीवन में एक ही बार उन बेटिया को देखा होगा माने और वही एक बार में ही जैसे जन्म जन्मांतर का यह संपर्क हो गया तो यसा हम इनके जीवन में जो देखते हैं पढ़ते हैं सुनते हैं और फिर उनका जो जीवन होता है ऐसे ऐसे लोग घर में आकर बैठ जाते हैं कि वो हम कुछ दिनों के बाद सोचेंगे कि अरे भाई अभ ये यहां से जाए तो अच्छा है तो यह जो कंट्रा क्शन है वो इतना बड़ा है हम लोग जो ठाकुर मा स्वामी जी की बातों का अपने जीवन में पालन क्यों नहीं कर पाते इंप्लीमेंटेशन क्यों नहीं होता इसको और जब नहीं होता है ना तब भीतर में से गिल्ट फीलिंग होता है भीतर में से कंट्रक्शन खड़ा होता है एक एक तरह का एक क्या कहेंगे कि एक नेगेटिव भाव खड़ा होता है तो देखिए कि इसका कोई इजी सोल्यूशन नहीं है जो इन लोगों का जो जीवन और उपदेश है ऐसा हम अपने जीवन में आप तो आपकी बात तो छोड़ ही दीजिए हम साधु लोग भी सब कुछ अपने जीवन में नहीं इसका इंप्लीमेंट कर पाते हैं क्योंकि इनका जीवन उस हायर लेवल का इस हायर स्टैंडर्ड का है हमको तो हमारे लिए जन्म जन्मांतर की यात्रा है कि धीरे धीरे धीरे करके इनके आदर्श हमारे डे आफ्टर डे दिन प्रतिदिन के जीवन में वो आएंगे किंतु यहां पर एक दूसरी भी बात है देखिए कि हम जब ठाकुर महा स्वामी जी की किताब पढ़ते हैं या तो फिर उनके बारे में सुनते हैं तो उनको इस तरह से मत देखिए कि हां अभी जो उन्होंने कहा है वो इमीडिएट मुझे अपने लाइफ में इसका इंप्लीमेंटेशन करना है वो नहीं होने वाला है कामिनी कांचन त्याग तो ऐसा तो संसार में रह के कैसे करेंगे तो अब जब जो सुना है और जिस तरह से हम रह रहे हैं इन दोनों के जो कंफ्लेक्स वो कंफ्लेक्स सुनते हैं तो सुनना इसको ही एक साधना के रूप में गिन लीजिए अब जैसे कि मैं कथामृत पढ़ता हूं तो कथामृत पढ़ना मेरे लिए साधना है अभी ठाकुर जो कथामृत में कहते हैं उसका मुश्किल से 1 पर 2 पर मेरे लाइफ में मैं इंप्लीमेंटेशन कर पाऊंगा डंट मीन के इसका अर्थ है कि मैं कथामृत पढ़ना छोड़ दो कथामृत कोई इंस्ट्रक्शन मैनुअल नहीं है कथामृत साधु संग का एक माध्यम है ठाकुर के संग का एक माध्यम है ठाकुर की छत्रछाया में जाकर के हम बैठते हैं उनकी बातें सुनते हैं और वह बातें हमारे हृदय के ऊपर में नए-नए संस्कार डालती है तो वह सुना ठाकुर को ट इट सेल्फ इज अ साधना फिर अब अभी जैसे यह मनोम हन है यह रामचंद्र दत्त है यह मास्टर महाशय मास्टर महाशय तो ठाकुर के पास आते थे और बाद में उनको एक लड़का भी हुआ था तो फिर प्रश्न होगा कि ठाकुर की बातों का कैसे वो इंप्लीमेंटेशन इतना बड़ा कथामृत भी लिख दिया तो क्या कथामृत लिखा सब कुछ इतना सब कुछ किया फिर भी लड़का कैसे हो गया राजा महाराज को लड़का हुआ था ठाकुर के पास आते थे बाद में ठाकुर ने कहा थोड़ा सा भूक बाकी है जाओ अपने घर चले जाओ फिर वो घर गए थे उनकी बीवी का नाम था विश्वेश्वरी एक लड़का भी हुआ था बाद में राजा महाराज वापस आए ठाकुर के पास में तब ठाकुर ने कहा देखो तुम्हारा भोग कट गया है और ये लड़के का नाम था सिद्धार्थ वो वरा नगर मठ में आया करता था और निरंजन राज वगैरह उसको बड़ा स्नेह करते थे एक बार क्या हुआ कि वो खेलते खेलते गिर गया तो गिरा तो उसकी छाती में एक पत्थर लगा तो पत्थर लगने से वो चेस्ट हार्ट में कॉम्प्लिकेशन स्टार्ट हुआ और उसी में उसका बेचारे का डेथ हो गया तो मने जैसे करुण स्टोरी है राजा महाराज गए थे घर गए थे उसके लिए रोए थे उसकी अंतिम क्रिया की थी सब किया था किंतु बाय दैट टाइम बेलर मठ की वराह नगर मठ की स्थापना हो गई थी ना आलम बाजार मठ में था ये घटना शायद आलम बजार मठ की स्थापना हो गई थी तो अभी राजा महाराज का मन भी तपस्या साधना करके इतने उच्च लेवल पर चला गया था कि अपने बच्चे के लिए जो करना है वह किया किंतु हृदय से तो कोई संपर्क नहीं रहेगा तो अभी देखिए कि इवन डायरेक्ट डिसाइल के जीवन में ठाकुर के पास में आने के बाद में भी यह सब घटनाएं हुई है राजा महाराष्ट्र ठाकुर के मानस पुत्र स्वयं उनके साथ में ऐसा कैसे हो सकता है तो क्या है कि देखिए हम यदि कहेंगे कि सिमिलरली हम जद कहेंगे कि मैं तो अपने जीवन को 100% ट्रांसफॉर्म नहीं कर पाता हूं कथामृत पढ़ कर के या तो ठाकुर म स्वामी जी की बातें पढ़ कर के सुन कर के तो ये सब चीजों को ना हमको कोई इंस्ट्रक्शन मैनुअल के रूप में नहीं देखना है कि कोई नया गैजेट लिया तो गैजेट को किस तरह से ऑपरेट करना है वो मैनुअल में लिखा है फिर मैनुअल पढ़ कर के वो गैजेट ऑपरेट करना सीखा ऐसा नहीं है ये दिस इज अ साधु संघ का एक माध्यम है कथामृत कहो ठाकुर महा स्वामी जी की बातें कहो हम जितना सुनेंगे ये सुन कर के पढ़ कर के चिंतन करके अपने हृदय के ऊपर में अपने मन में सुसंस्कार पढ़ेंगे अब यह सुसंस्कार है वो धीरे-धीरे करके अपने जीवन को ट्रांसफॉर्म करेंगे जैसे कि दूध पीना अब बच्चे हैं तो मां कहा करेगी दूध पियो तो मसल्स बिल्ड अप होंगे तुम स्ट्रांग हो ग तो अभी आप एक कप दूध पी कर के ऐसा बोलेंगे कहां है मेरे मसल्स कहां मसल्स है किंतु देखिए तो लाइफ टाइम दूध पीने का अभ्यास यदि करेंगे तो बॉडी तो स्ट्रांग होने ही वाला है क्योंकि मिल्क में प्रोटीन है अभी आप बोलेंगे कि एक दिन मैंने दो कप दूध पी लिया तो कहा मेरे मसल डबल कहां हुए हैं और कहा कि मैंने एक दो सप्ताह दूध पीना बंद कर दिया है तो मेरे मसल क्या खत्म हो गए हैं ऐसा नहीं है दिस आर लाइफ टाइम ऑफ प्रैक्टिस अभी जितने भी मेडिकल स्टडीज है सब कहते हैं कि प्रोटीन चाहिए शरीर के स्वास्थ्य के लिए और जो वेजिटेरियन है उन लोगों के लिए प्रोटीन का मेजर सोर्स है मिल्क उसके बाद बाद में सोयाबीन वगैरह तो यदि आप उसको लाइफ टाइम खाएंगे तो नेचुरली आपका बॉडी हेल्दी रहेगा किंतु आप खाना डबल करेंगे या बंद करेंगे उसका इमीडिएट आपके शरीर प असर नहीं करता ये लॉन्ग टर्म प्रोसेसेस है तो वैसे ही यह साधु संग लॉन्ग टर्म प्रोसेस है आज आपको लगेगा कि अच्छा मैंने आधे घंटे कथामृत पढ़ा तो कौन सा बड़ा ऐसा कुछ हो गया किंतु आधा घंटा कथामृत आप पढ़ते जाइए पढ़ते जाइए ओवर ए लॉन्ग पीरियड ऑफ टाइम देखेंगे कि भीतर से जो ट्रांसफॉर्मेशन होना शुरू हुआ है अब जैसे कि इन्हीं के साथ में कल बात हो रही थी अब ऑलमोस्ट मोर देन वन ईयर अपने क्लासेस वो अटेंड कर रहे हैं तो फिर उन्होंने खुद ने कहा कि पहले की जो मेरी मानसिक अवस्था थी और आज की मानसिक अवस्था हम लोग जो किताबों के बारे में बात करते हैं वो किताबें खोल कर के पढ़ना क्लासेस में आना तो सच्चे ग्रेट ट्रांसफॉर्मेशन डे आफ्टर डे ट्रांसफॉर्मेशन नहीं दिखेगा किंतु वन ईयर अब अगो आज से एक साल पहले क्या था उसकी आज के साथ में कंपेयर करके सही में पता चलता है कि देयर इज अ ट्रांसफॉर्मेशन ये ट्रांसफॉर्मेशन की प्रोसेस बड़ी स्लो एंड सटल है इमीडिएट वो दिखाई नहीं देगी इमीडिएट अफेक्ट इफेक्ट नहीं करेगी किंतु लॉन्ग पीरियड ऑफ टाइम धीरे-धीरे करके जैसे हम प्रतिदिन एक गिलास दूध पिएंगे तो अपना शरीर जैसे स्ट्रांग होगा वैसे ही जद आधा घंटा 15 मिनट कथामृत पढ़ लिया ठाकुर महा स्वामी जी की बातें सुन ली इट विल हैव एन इंपरसेप्टिबल इफेक्ट ओवर लाइफ टाइम ऑफ पीरियड तो मैंने सोचा थोड़ा शेयर करूं सबके साथ में अभी इस सप्ताह से ज्ञान योग स्वामी जी का कंप्लीट वर्क्स का पेज नंबर 20060 कॉस्मस माइक्रो कोसम यह दो लेक्चर हम लोग एक के बाद एक पढ़ रहे थे कॉस्मो मैक्रो कोसम हमने समाप्त कर दिया कॉस्मस माइक्रो कोसम चल रहा है जो लास्ट पॉइंट था स्वामी जी ने डिस्कस किया था कि अभी कॉस्मो मैक्रो कजम अर्थात की जो पूरा यूनिवर्स पूरा ब्रह्मांड किस तरह से उसका एनाटोमी है उसका फंक्शनालिस जिस तरह से एक वृक्ष में से बीज बनता है और बीच में से फिर से वृक्ष होता है आप ऐसा कह सकते हैं कि पूरा वृक्ष का नक्शा उसका डीएन उसका ब्लूप्रिंट उसके बीज में है और बीज जब धीरे-धीरे करके इ होता है इस डीएनए को रन करता है जैसे कंप्यूटर की लैंग्वेज में कहेंगे कि जो कोड जद रन करेंगे तो सॉफ्टवेयर उसको अनुसार काम करना शुरू होगा तो यह डीएनए को धीरे-धीरे करके मेनिफेस्ट करता है तो दूसरा वक्ष खड़ा होता है तो यह जो प्रोसेस है इवोल्यूशन और इवोल्यूशन यह हमेशा के लिए चलती रहती है स्वामी जी कहते हैं कि हम आपका इवोल्यूशन का सिद्धांत स्वीकार करने के लिए तैयार है यदि आप आप सामने में यह इवोल्यूशन का सिद्धांत स्वीकार करें ईश्वर या तो कॉस्मिक डिविली बीज स्वरूप में उसने अपने को इवॉल्व किया और फिर इस डिवाइन सीड में से कॉस्मो इवॉल्व हुआ यही रीजन है आज आप बोलेंगे कि यदि एक छोर पे इवोल्यूशन के एक छोर पे हमको श्री राम श्री कृष्णा श्री राम कृष्ण जैसे देवी महापुरुष दिखते हैं तो यह क्या कोई बंदर में से आए ना कि वो प्रोटोप्लास्ट में से आए ना कि वो जो बिग बैंग एक्सप्लोजन हुआ था उसमें से आए कैसे यह हो सकता है कि डिविज हाईएस्ट लेवल की डिविली हमको दिखती है एक छोर पे और दूसरे छोर पे हमको यह पशु में से इवोल्यूशन होता हुआ दिखता है या तो फिर यदि उससे भी पहले कहे जड़ पदार्थ में से चेतन का इवोल्यूशन दिखता है तो जड़ में से चेतन का इवोल्यूशन चेतन में भी यह सिंगल सेल्यूलर ऑर्गेनिस्ट म में से यह बाकी सब पशु पक्षी और उसमें से मनुष्य और उसमें से श्री राम श्री कृष्ण श्री राम कृष्ण तो ये जो इवोल्यूशन है कैसे हो सकता है कि एक जड़ पदार्थ में से भगवान राम कृष्ण आज हमारे सामने आए हैं तो ऐसा नहीं हमने इवोल्यूशन स्वीकार किया आप इवोल्यूशन स्वीकार कीजिए कि वही कॉस्मिक डिविली इस बीज फॉर्म में इवॉल्व हुआ था और वही कॉस्मिक डिवाइन सीड में से आज धीरे-धीरे इवोल्व हो करर के श्री राम कृष्ण हमारे सामने उपस्थित है या तो फिर हम जब धना करेंगे तो हमारे भीतर की डिवी निटी हमको दिखती है तो यह कॉस्मो स मैक्रो कजम हो गया पूरे विश्व ब्रह्मांड को समझाया अभी कॉस्मो स माइक्रो कजम कि हमारे भीतर में अपनी कॉन्शियस अपनी चेतना अपना इनर यूनिवर्स किस तरह से काम करता है तो स्वामी जी ने एक के बाद एक स्टेप से समझाया कि आंख जो देखती है वो तो जड़ इंस्ट्रूमेंट है आजकल तो यह सब आर्टिफिशियल आई आर्टिफिशियल लिम्स एंड लेग्स ये जो सब प्रयोग हो र है आपकी आंख भी जली जाए तो यह मने वो आई ट्रांसप्लांट तो तो बड़ा ही कॉमन हो गया है आंख की ट्रांसप्लांट तो पूरी पूरी आंख दूसरे की एक दूसरे व्यक्ति में डाल दी तो क्या उसका आत्मन थोड़ी ना इसमें आ जाएगा आंख तो एक हार्डवेयर मात्र है इंस्ट्रूमेंट मात्र है जो कि प्रकाश के किरण ग्रहण करती है और ब्रेन को भेजती है ब्रेन फिर इसको एनालाइज करके फिर उसका एक मीनिंग देता है तो स्वामी जी ये प्रोसेस समझाते हैं कि आंख मन को देती है यह प्रकाश की किरण यदि मन नहीं उपस्थित होगा तो आंख नहीं देख पाएगी जैसे यदि मेरा एक अनुभव था कि किसी एक साधु के साथ में मेरा अच्छा बड़ा परिचय हो गया था मैं जब बर मट गया था नया-नया अभी दूसरे दिन देखा कि वोह महाराज जी सन्यासी महाराज रास्ते में खड़े रह कर के मेरी और ऐसा करके कर र है कि तो मैंने उनके सामने बिना देखे वो सीधा आगे चला गया फिर तीसरे दिन उनसे मुलाकात हुई तो बड़े ही नाराज हो गए बोले अरे तुम तो आए हो कल और आज से ही इतना घमंड दिखाना शुरू कर दिया मैं रास्ते में खड़ा था मेरे सामने देखा नहीं अभी क्या मैंने मेरा नजर था मंदिर की ओर मतलब ऐसा सोचता था कि अभी इस मंदिर से उस मंदिर में जाए नया नया आया हूं ओवर वेलम हो जाते हैं 12 घंटा का तो दिन होता है सुबह से लेकर के रात तक 16 घंटा का सब कुछ इतना सब कुछ है सो आई वाज इतना मैं अपने विचारों में पड़ गया था कि महाराज जी खड़े हैं रास्ते के किनारे देख नहीं पाया तो मैंने ऐसा झूठ मूठ बोल कर के कि मैंने चश्मे नहीं पहने थे इसलिए नहीं देख पाए ऐसा बोल के मैंने बात उड़ा दी तो एक्चुअली नजर देखती है किंतु मन नहीं था तो मैं नहीं देख पाया तो एब्सेंट ऑफ माइंड है क् दिस इज द इंपोर्टेंस ऑफ माइंड यदि माइंड नहीं रहेगा तो यह हार्डवेयर काम भी करेगा तो काम करने का कोई फायदा नहीं है फिर यही माइंड माइंड इज अ फर्स्ट रिस्पांडर जैसे कि वह कहीं पर आग लगती है तो जैसे आप इमीडिएट पुलिस वाले को या फायर डिपार्टमेंट को बुलाते हैं वे लोग है फर्स्ट रिस्पांडर किंतु बाद में यह मुसिपालिटी के पास में बात जाती है और वहां पर लोग सोचना शुरू करते हैं कि अरे भाई यह मकानों का स्ट्रक्चर किस तरह का है इतने पुरा पुराने पुराने मकान है कि वहां पर फटाफट करके आग लग जाती है फिर वो वहां के इंजीनियर एक बार सर्वे करने को आएंगे और फिर बोलेंगे कि अरे ये जो यहां का बहुत ही कंजे हो गया है थोड़ा सा इन मकानों को डिमोलिश कर दो तो वो डिमोलिशन का काम आज से महीने के बाद शायद एक साल के बाद होगा वो प्रॉपर प्लानिंग करके वो हु होता है तो बुद्धि इज अवर रिपोजिटरी इंटेलेक्चुअल रिपोजिटरी वो एक्चुअल सब कुछ डिसाइड डिसीजन मेकिंग का काम लॉन्ग टर्म थिंकिंग का काम बुद्धि करती है माइंड इज लाइक के फर्स्ट रिस्पांडर और इसके बाद में है आत्मन एक्चुअली स्वामी जी दो और फैक्टर्स से अंतःकरण के उसके बारे में बात नहीं करते एक है चित्त और एक है अहंकार चित्त यानी कि अपना मेमोरी मेमोरी स्टोरेज जितने भी जन्म जन्मांतर के संस्कार है चित्त के भीतर में पड़े हुए हैं और अहंकार है अहंकार इज माय सेल्फ आइडेंटिफिकेशन अहंकार का अर्थ घमंड नहीं कि मैं दूसरों को अपना महत्व दिखाना चाहता हूं वो मंड हो गया अहंकार का सिंपल टेक्निकल मीनिंग है कि मैं मैं हूं सुबह को उठकर के मैं अपना काम करूंगा यही बड़े महाराज का काम नहीं करना शुरू कर दूंगा जाकर के बड़े महाराज की कुर्सी पर नहीं बैठ जाऊंगा वोह तो बहुत बड़ा डिजास्टर हो जाएगा मुझे पता है कि मैं कौन हूं मुझे पता है कि यह मेरा रोल है यह मेरा फंक्शन है यह मेरा ड्यूटीज है और जीवन में मेरा यह स्थान है उसके अनुसार में कार्य करूंगा और किसी का रोल मैं अपने सर पर नहीं उठा लूंगा तो वो अपना सेल्फ आइड टि फिकेशन ये अहंकार से आता है तो यह मन बुद्धि चित्त और अहंकार इसके भी परे है आत्मन और यह आत्मन है जो कि सही सही में इन सबको अंतःकरण को प्रकाशित करता है अपनी कॉन्शसनेस को अपनी चेतना को प्रकाशित करता है तो यहां तक बात हुई थी और फिर आखिर में स्वामी जी ने एक पॉइंट उठाया था कि यदि आप ऐसा कहते हैं कि यह जो मन बुद्धि चित्त अहंकार है यह जो हार्डवेयर है इंस्ट इमेंट ऑफ कर्मेंद्रिय और ज्ञानेंद्रिय इंस्ट्रूमेंट ऑफ नॉलेज एंड इंस्ट्रूमेंट ऑफ एक्शन यह जो आप कहते हैं कि यह सब आत्मन के द्वारा प्रकाशित है तो आप ऐसा क्यों नहीं कहेंगे कि आत्मन भी कोई उसके हायर कोई अथॉरिटी है जैसे कि ईश्वर उसके द्वारा प्रकाशित ना हो उसके बाद में आप कह सकते हैं कि अरे यदि कृष्णा आपकी आत्मन को प्रकाशित करता है तो माहा काली है कि भगवान कृष्ण को प्रकाशित करती है जो शाक्त वैष्णव वगैरह का जो झगड़ा हमेशा चलता रहता है एक धर्म वाले कहेंगे कि मेरा धर्म बेटर है या तो हायर है तो हमेशा यह तो एड इंफिनिटम इंफाइटिंग कहते हैं कि देखिए इस तरह से हम आर्गुमेंट करने को जाएंगे तो इसका कोई अंत नहीं आएगा कॉमन सेंस ये कहती है कि आत्मन को जाकर के हमको रुक जाना है अदर वाइज तो फिर यह पूरी बात कि यह इसके ऊपर में कौन उसके ऊपर में कौन इसका कोई अंत नहीं है तो यहां तक हम पहुंचे थे अभी मैं थोड़ा सा आगे पढ़ता हूं वी सी देन ट दिस ह्यूमन बीइंग इज कंपोज फर्स्ट ऑफ दिस एक्सटर्नल कवरिंग द बॉडी हम देखते हैं मनुष्य सबसे पहले एक बाह्य आवरण का बना हुआ है जैसे कि शरीर सेकंड द फाइनर बॉडी कंसिस्टिंग ऑफ माइंड इंटेलेक्ट एंड इगो इजम पहले तो यह बाह्य शरीर है उसके बाद में एक अंतः शरीर है या तो कहेंगे कि अंतःकरण है बही करण है जो कि यह पंच महाभूत पंच ज्ञानेंद्रिय पंच कर्मेंद्रिय पंच प्राण का बना है उसके बाद में ये अंतःकरण है जो कि मन बुद्धि और अहंकार स्वामी जी ने हालांकि तीन यूज किए हैं चौथा है अपने वेदांत की दृष्टि से चित्त तो मन बुद्धि चित्त और अहंकार का अंतःकरण बना है बिहाइंड देम इज द रियल सेल्फ ऑफ मैन ये अंतःकरण इसके पीछे में मनुष्य का असली स्वरूप है आत्मन देखिए यहां पे सेल्फ को कैपिट इज करके दिखाया है एस सेल्फ अर्थात कि मेरा सही स्वरूप आत्मन वी हैव सीन दैट ऑल द क्वालिटीज एंड पावर्स ऑफ द ग्रोस बॉडी आर बोरो फ्रॉम द माइंड एंड द माइंड द फाइनर बॉडी बोरोज इट पावर्स एंड लुमिनस फ्रॉम द सोल स्टैंडिंग बिहाइंड हमने देखा कि यह स्थूल शरीर उसकी शक्ति उसकी उसकी चेतना यह सूक्ष्म शरीर से प्राप्त करती है जैसे कि मन और मन के पास में प्राण मन के भीतर में प्राण का संचार करता है वह जो कि मन के पीछे खड़ा है अर्थात की आत्मा अभी यह सोल शब्द है उसकी जगह पर सेल्फ शब्द यूज करना बेटर है हालांकि स्वामी जी इंटरचेंज करते हैं सोल का एक पार्टिकुलर मीनिंग है क्रिश्चियन थियोलॉजी में तो बेटर है कि सेल्फ शब्द यूज करें किंतु बिकॉज कि हम लोग पॉपुलर लिटरेचर बना रहे हैं तो स्वामी जी बहुत बार ये इंटरचेंजेबल वर्ड्स यूज करते हैं पहले तो सेल्फ शब्द यूज किया है विथ कैपिटल एस और इसके बाद में ही फिर से उन्होंने सोल शब्द भी यूज किया है तो यह आत्मन आत्मन कहो ना कि ब्राह्मण अ ग्रेट मेनी क्वेश्चंस नाउ अराइज अबाउट द नेचर ऑफ दिस सो अभी जद यहां तक हम जद पहुंच गए हैं कि हां यह आत्मन है जो अंतःकरण को प्रकाशित करता है और अंतःकरण बही करण को जड़ शरीर को प्रकाशित करता है इस कंक्लूजन तक हम पहुंचते हैं उसके बाद में हमारे सामने बहुत सारे प्रश्न खड़े होते हैं अबाउट द नेचर ऑफ द सोल आत्मन की सही सही प्रकृति क्या है उसका स्वभाव क्या है उसके बारे में प्रश्न खड़े होते हैं इफ द एक्जिस्टेंस ऑफ द सोल इज ड्रॉन फ्रॉम द आर्गुमेंट दैट इट इज सेल्फ अस ट नॉलेज एक्जिस्टेंस ब्लेसेडनेस आर इट्स एसेंस इट नेचुरली फॉलोज ट दिस सोल कैन नॉट हैव बीन क्रिएटेड्रॉअर्नेविगेटर नंद उसका स्वभाव है तो फिर यह उसके बाद में यह नेचरली यह कंक्लूजन आता है कि आत्मन को तो कहीं क्रिएट नहीं किया गया होगा आत्मन का कहीं निर्माण नहीं हुआ होगा कोई फैक्ट्री नहीं होगी कोई इस तरह से मनुष्य नहीं होगा जिसने आत्मन को जन्म दिया है जो प्रकाश स्वरूप है सत चीत और आनंद जिसका स्वभाव है उस उसका निर्माण आप कैसे करेंगे निर्माण किसका होता है जिस तरह से कि चंद्र का प्रकाश है तो चंद्र के प्रकाश सूरज से ग्रहण करता है तो चंद्र का आप निर्माण कर सकते हैं एक ऐसा शरीर को जो दूसरे से प्रकाश ग्रहण करके अपना प्रकाश दूसरों को देगा किंतु सूर्य को कौन बनाएगा हालांकि ऑफकोर्स कॉस्मोलॉजी कहता है कि सूरज बनते हैं और बड़ा ही एस्टेब्लिश साइंस है किंतु हम जस्ट एक एनालॉजी के रूप में एक उपमा के रूप में उपमा हमेशा होती है एक देशी वो ठाकुर कहते हैं कि आप जद कहेंगे कि शेर की तरह इसका नेचर है तो शेर की तरह नेचर है अर्थात कि उसका करेज लेना है उसका साहस लेना है शेर में से ऐसा नहीं है कि वो शेर के जैसा नेचर है तो शेर की तरह चार पैर पर चलता है शेर की तरह उसकी पूंछ है ऐसा नहीं है शेर के जैसा साहस है उसमें तो उपमा हमेशा जिसके साथ में कंपैरिजन होती है उसका एक ही एस्पेक्ट लिया जाता है उसके सभी एस्पेक्ट इसके साथ कंपेयर नहीं होते तो वैसे ही जो स्वयं प्रकाश स्वरूप है उसका यदि आप निर्माण करेंगे तो ऐसा तो होगा कि निर्माण के समय कुछ नहीं है प्रकाश का एसेंस है और फिर वहां पर अंधेरा है और अंधेरे में से आपने प्रकाश बनाया जैसे कि यह क्रिश्चियनिटी में कहते हैं ना कि आफ्टर सिक्स डेज ऑफ क्रिएशन ना कि गड ईश्वर नेने कहा लेट देर बी लाइट व चलो इस अंधेरे में प्रकाश हो जैसे ही ईश्वर ने कहा लेट र भी लाइट तो पूरे विश्व में प्रकाश फैल गया और फिर इस प्रकाश की सृष्टि हुई तो अंधेरे में से उजाला हुआ यह कैसे हो सकता है फिर तो उजाला कहां से आया उजाला कहीं तो होना चाहिए ये कुछ नहीं है और फिर चेतना या तो उजाला जन्म लिया यह हो ही नहीं सकता जैसे जो दूसरों के पास में से उजाला ग्रहण करते हैं उसका जन्म मृत्यु जरा व्याधि साइकल संभव है जो कि किंतु प्रकाश स्वयं है उसका जन्म मृत्यु जरा व्याधि कैसे होगा उसका विकास होना उसका क्षय होना उसका जन्म होना उसका मृत्यु होना यदि वह मृत हो जाए तो फिर यह प्रकाश जाएगा कहां पे और प्रकाश नहीं है अंधेरा है तो अंधेरे में से प्रकाश कहां से आया आप बोलेंगे ईश्वर भगवान ने दिया तो भगवान के भीतर में तो प्रकाश है मने ऐसा हो ही नहीं सकता कोई भी तरह का लॉजिक काम नहीं करता अंधेरे में से प्रकाश हुआ इसका यदि भगवान ने किया तो इली भगवान प्रकाश स्वरूप है आप यह स्वीकार कीजिए कि सर्वप्रथम भगवान थे जिनको हम आत्मन कह रहे हैं तो यह अंधेरे में से प्रकाश होना संभव ही नहीं है इट नेचुरली फॉलोज दैट दिस सोल कैन नॉट हैव बीन क्रिएटेड्रॉअर्नेविगेटर आत्मन का क्षय नहीं हो सकता है अ सेल्फ लुमिनस एक्जिस्टेंस इंडिपेंडेंट ऑफ एनी अदर एक्जिस्टेंस कुड नेवर हैव बीन द आउटकम ऑफ एनीथिंग कुछ नहीं है और उसमें से एक ऐसा पदार्थ का जन्म लेना जो कि प्रकाश स्वरूप है यह संभव ही नहीं है लॉजिकली इसका कोई अर्थ नहीं बनता है इट ऑलवेज एस्टेड देयर वाज नेवर अ टाइम वेन इट डिड नॉट एक्सिस्ट उसका हमेशा से अस्तित्व था ऐसा कोई समय नहीं था जबकि यह अस्तित्व में नहीं था बिकॉज इफ द सोल डिड नॉट एक्सिस्ट वेयर वास टाइम यदि आत्मन नहीं था तो समय कहां पर था टाइम इज इन द सोल समय आत्मन के भीतर में है इट इज वन द सोल रिफ्लेक्ट्स इट्स पावर ऑन द माइंड एंड द माइंड थिंक्स दैट टाइम कम्स जब आत्मन का प्रकाश मन के ऊपर में गिरता है और मन जब सोचने की शुरुआत करता है वहां से तो समय का उद्भव होता है वन देयर वाज नो सोल सर्टेनली देयर वाज नो थॉट एंड विदाउट थॉट देर वाज नो टाइम यदि आत्म नहीं था तो मन नहीं था मन नहीं है तो सोच भी नहीं होगी विचार भी नहीं होंगे और विचार नहीं होते तो समय की गन्ना समय की गिनती कौन करता हाउ कैन द सोल रफर बी सेड टू बी एक्जिस्टिंग इन टाइम वेन टाइम इट सेल्फ एसिस्ट इन द सोल आत्मन समय के भीतर में किस तरह से सकता है जबकि समय इट सेल्फ आत्मन के भीतर में विराजमान है यह एक बड़ा ही कॉम्प्लिकेटेड बड़ा ही इंपॉर्टेंट इशू है स्वामी जी ने इस इशू को इस पॉइंट को 19वी सदी के साइंस के माध्यम से समझाने का प्रयास किया है कि समय समय का अस्तित्व समय के बारे में उस समय के विज्ञान क्या कहता है और इसके साथ में वेदांत का कहां पर मिल हो रहा है कल हम इसी इशू को आज का 21 सेंचुरी साइंस क्या कहता है उस दृष्टि से सोचेंगे थोड़ा सा कॉम्प्लिकेटेड होगा थोड़ा सा डिफिकल्ट होगा किंतु मुझे लगता है कि इट विल बी वर्थ वाइल कि एक इंटेलेक्चुअल जिम्नास्टिक होगा इंटेलेक्चुअल एक्सरसाइज किंतु उसको हमको मुझे भी चर्चा करने में बड़ा आनंद आएगा ऐसा नहीं है कि हमारा यह जो डिस्कशन है वो कि फाइनल है बहुत सारे आइडियाज स्वामी जी के साथ में जुड़े हुए हैं साइंस को आप किस दृष्टि से समझते हैं वेदांत को आप किस दृष्टि से समझते हैं स्वामी जी को आप किस तरह से इंटरप्रेट करते हैं एक विराट सब्जेक्ट है कोई भी सिंगल पर्सन इसको सब कुछ समझ करके सब कुछ एक्सप्लेन नहीं कर सकता हम सभी लोग अपना-अपना जो बैकग्राउंड है अपना जो बैकग्राउंड रीडिंग है उसके अनुसार एक्सप्लेन करने का प्रयास करते हैं अब जैसे कि मेरा है मैं ज्ञान योग को हमेशा ठाकुर महा स्वामी जी ने जो कहा है और फिर इसके साथ में जो जो उपमा दी गई है फिजिक्स या तो कॉस्मोलॉजी की उसके परिप्रेक्ष्य में समझने का प्रयास करता हूं एक वेदांत की ट्रेडिशनल वेदांत की दृष्टि से स्वामी जी को समझने का एक प्रयास है जो कि सर्वप्रिया अंद जी महाराज वगैरह लोग किया करते हैं तो वो भी एक है और यह भी एक प्रयास है अब जितने ही डिफरेंट डिफरेंट व्यू पॉइंट पढ़ेंगे सुनेंगे इतना ही आपका अंडरस्टैंडिंग ऑफ स्वामी विवेकानंद विल बिकम मोर एंड मोर एनरिच और ज्यादा से ज्यादा समृद्ध होता जाएगा तो आज यही तक कल फिर से मिलते हैं ओम शांति शांति शांति हरि ओम तसत श्री राम कृष्णर्पण मस्तु