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ओम स्थापक यच धर्मस्य सर्व धर्म स्वरूपने अवतार वरिष्ठ राम कृष्णाय ते
Ahmedabad Math
नमः एक बार केशव सेन ठाकुर का दर्शन करने के लिए दक्षिणेश्वर में आया और पूछता है ठाकुर को कि आप कितने दिनों तक यहां पर छुप के रहेंगे एक दिन आएगा कि जगत में सबको आपके पास में आना पड़ेगा तो ठाकुर कहते हैं कि यह क्या बात कर रहे हो तुम मैं यहां पर तो आपके रेणु के रेणु हो मैं ईश्वर का दास हूं मां की संतान हूं मुझे यह सब जगत प्रसिद्धि फिर यह पॉपुलर यह सब क्या है मेरे लिए मैं यहां पर रहता हूं खाता हूं आनंद से रहता हूं तो व केशव सेन की जो बात थी कि ठाकुर कितने दिनों तक छुपके रहेंगे वो एक ना एक दिन तो सबको ठाकुर के पास में आना पड़ या तो फिर एटलीस्ट ठाकुर का जो नाम महात्म प्रचार है पूरे विश्व में फैल जाएगा तो आज देखिए कि आज बड़ा सुंदर दिन है आज गुजरात में अहमदाबाद में नए मठ की प्रतिष्ठा हो रही है अभी तक जो राजकोट में आश्रम था वह कह सकते हैं कि एक किनारे पर था क्योंकि गुजरात को जद आप लेंगे तो गुजरात का जो हार्ट है वह एक वड़ोदरा है अहमदाबाद है गांधीनगर है तो राजकोट आश्रम थोड़ा सा आउटस्कर्ट पर पड़ जाता है अभी यह वड़ोदरा आश्रम स्टार्ट हुआ है किंतु आश्रम है बड़ा छोटा सा और वहां पर यह जगह का थोड़ा सा अभाव है इसलिए आप बड़ी इवेंटस जो रेगुलर बेसिस पर करना चाहे वह नहीं कर पाएंगे तो अहमदाबाद मठ है कि गुजरात के हार्ट में इतने दिनों के बाद में आखिर में ठाकुर आन बसे हैं और जगह भी बहुत विशाल जगह है शहर से थोड़ा सा बाहर है किंतु देखिए आजकल सभी को ऐसा ही चाहिए कि वीकेंड में रिट्रीट पर जाएंगे और वहां पर दो दिन इतना कुछ रहेंगे और वहां पर एक के बाद एक प्रवचन है भजन है कोई ना कोई आध्यात्मिक कार्यक्रम है वह लगा रहे तो लोग भी इसके लिए आज शहर से बाहर जाकर के मुक्त हवा और पानी में रहना चाहते हैं और यह मठ का लोकेशन है मैं गया था वहां पर यहां आने से पहले तो एकदम खुले खेत है जहां पर भी नजर जाएगी आपको खेत ही खेत दिखाई देंगे भविष्य में डेवलपमेंट होगा किंतु एज ऑफ टुडे अपना आश्रम जैसे कि वह खेतों के बीच में बसा हुआ है बड़ा ही सुंदर रमणीय जगह है और अभी प्रेसिडेंट अपने परम पूजनीय प्रेसिडेंट महाराज भी वहां पर गए हैं मठ का आज प्रारंभ होगा और स वेरी गुड ओकेज फॉर गुजरात एंड द डिवोटा ऑफ गुजरात तो ठाकुर कहते कि मैं यहां पर जैसे केशव ने कहा कितने दिन तक छुप के रहेंगे तो अभी तक ऐसा था गुजरात में कि ठाकुर एक बार छुप कर के रह रहे थे वो लिमडी है फिर यह पोरबंदर है फिर यह भूज है आदिपुर है राजकोट है यह सब सेंटर क्या है कि थोड़े आउटसाइड हो जाते हैं और वहां पर ज्यादा लोक संख्या भी नहीं है लीमड़ी में लिमडी बहुत छोटा शहर है आदिपुर बड़ा छोटा शहर है फिर यह भुज वैसे थोड़ा बड़ा है किंतु इतना बड़ा नहीं है पोरबंदर भी छोटा सा है राजकोट थोड़ा सा एक है विस्तृत रूप में और वड़ोदरा है किंतु यह अहमदाबाद में मठ होने से भविष्य जो है वहां पर डेवलपमेंट की बहुत बहुत सारी संभावनाएं है तो ठाकुर महा स्वामी जी से हम लोग सही यह प्रार्थना करेंगे कि गुजरात और गुजरात के भक्तों के लिए आज का यह जो मठ का जो शुभारंभ हो रहा है परम पूजनीय प्रेसिडेंट महाराज की उपस्थिति में वह सबके लिए मंगल प्रद हो अच्छा अभी इस
Raja Yoga
सप्ताह हम प्रारंभ करेंगे फिर से स्वामी जी का राजयोग हमने देखा था कि एक के बाद एक टॉपिक समझा करके स्वामी जी हमारे पास हमको प्राण और आकाश यह जो स्पेशल टॉपिक है राजयोग के भीतर के उन्होंने हमको समझाया है मैंने आपके साथ में एक डॉक्यूमेंट भी शेयर किया था इस डॉक्यूमेंट में आप देखेंगे कि हम लोग अभी बिल्कुल इसके आखिरी तक पहुंच गए हैं ऑलमोस्ट कंप्लीट हो चुका है अपना यह राजयोग और बस बिल्कुल अभी आखिरी तक पहुंचे हुए हैं यह जो टॉपिक आज हम लेने वाले हैं उसका नाम है ओल्ट इज एन अटेंप्ट टू कंट्रोल द प्राण टॉपिक नंबर 10 अभी देखिए कि यह जो टेक्स्ट मैंने आपके साथ में शेयर की है वह स्वामी विवेकानंद की राजयोग पुस्तक में से जो थर्ड चैप्टर है प्राण उसकी कंप्लीट टेक्स्ट मैंने शेयर की है आपके साथ में और उसमें मैंने सिर्फ टॉपिक दिए हुए हैं रेड कलर के ब्लैक कलर के लेटर्स में जो दिख रहा है सब स्वामी जी का है मैंने जो ऊपर से टॉपिक ऐड किए हैं टेक्स्ट को समझने के लिए व रेड कलर के हेडिंग में दिया हुआ है तो अभी हम देख पिछली बार हमने देखा था जो हाईलाइट पैसेज है नाइंथ टॉपिक का वह मैं एक बार पढ़ लेता हूं स्वामी जी क्या कहते हैं द आइडियल ऑफ द योगी द होल साइंस ऑफ योगा इज डायरेक्टेड टू द एंड ऑफ टीचिंग मैन हाउ बाय इंटेंसिफाइंग द पावर ऑफ असिमिलेशन टू शर्टन द टाइम फॉर रिचिंग परफेक्शन इंस्टेड ऑफ स्लोली एडवांसिंग फ्रॉम पॉइंट टू पॉइंट एंड वेटिंग अंट्स हैज बिकम परफेक्ट देखिए यह जो उत्क्रांति की जो पूरी सफर है इवोल्यूशन की जो पूरी जर्नी है हम लोगों ने देखा कि एक कोशी जीव में से बहु कोषी जीव फिर पानी में रहने वाले पशुओं से जमीन पर रहने वाले पशु फिर उसमें से फिर यह रेप्टाइल्स रेप्टाइल्स में से मैमल्स मैमल्स में से ए और एप में से ह्यूमंस का इवोल्यूशन होता है यह आजकल का जो मॉडर्न साइंस है उसकी दृष्टि के अनुसार इसके अलावा जो भारतीय साइंस संस्कृति जो है अपनी हिंदू संस्कृति हमारी यह इवोल्यूशन की डेफिनेशन क्या है हम लोग कहते हैं कि जन्म जन्मांतर की मनुष्य की यात्रा है एक जन्म में यदि हमने अच्छे कर्म किए होंगे तो अगला जन्म है व उन्नत मतलब हमको जन्म प्राप्त होगा हमारी प्रगति होगी और यदि इस जन्म में हम दुष्कर्म करते हैं तो अगले जन्म में हमारी अधोगति होगी तो यह अपनी जो है जन्म जन्मांतर की यात्रा है उन लोगों की जो वेस्टर्न साइंस की जो स्पीस बाइ स्पीस बाय स्पीस उन लोगों का इवोल्यूशन का कांसेप्ट है अपना है यह बर्थ बाय बर्थ इवोल्यूशनरी कांसेप्ट अभी स्वामी विवेकानंद ज्ञान योग में जिस तरह से डिस्कस करते हैं इवोल्यूशन को स्वामी जी कहते हैं दोनों कांसेप्ट अपनी जगह पर सही है दोनों कांसेप्ट को हम उसमें जो बेस्ट एलिमेंट है वह हमको ले लेने हैं तो यहां पर स्वामी जी कहते हैं कि देखिए कि जो स्पेसस का तो इवोल्यूशन होता ही है जैसे कि अभी यह भारत देश में ठाकुर का आगमन हुआ और ठाकुर को फॉलो करके ठाकुर के जितने भी भक्त है उनका भी इवोल्यूशन होने लगेगा तो यहां पर देखिए कि ठाकुर के आगमन से या कोई भी संत महापुरुष हो उनके आगमन से सिर्फ वही संत महापुरुष की उन्नति होती है ऐसा नहीं है उनको जो फॉलो करते हैं उनके एडमाइन डिसाइल से उनके जो फॉलोअर्स से सबकी उन्नति होती है तो यहां पे देखिए कि यह जो स्पिरिचुअल जर्नी है साधक की उसका रिपल इफेक्ट जो है उसकी जो बाय प्रोडक्ट है उसके आसपास में रहने वाले उसके संपर्क में आने वाले सभी के ऊपर में यह रिपल इफेक्ट होता है तो यहां पे जो होंगे तो उसका देखादी उसको अनुकरण करने वाले उसका अनुसरण करने वालों ने भी उससे कुछ सीखा होगा उससे प्राप्त किया होगा और यह जो पूरी ट्राइब होगी उस बंदर की उसका इवोल्यूशन हुआ होगा किंतु स्वामी जी कहते हैं कि इस तरह से यदि हम इवोल्यूशन की आशा रख कर के बैठेंगे तो हमको जन्म जन्मांतर लग जाएंगे कोटि कोटि साल लग जाएंगे इवॉल्व होने में ठाकुर आज इतने इवॉल्व थे स्वामी जी इतने इवोल्व है थे फिर यह जैसे कल नामदेव की कहानी हमने सुनी थी तो वह इतने जदी इवोल्व थे तो मुझे क्यों भाई एक करोड़ साल ना कि इतना अपेक्षा करने पड़ेगा कि मैं उ उनके जितना इवोल्व हो जाऊं उनके जितनी मेरी उत्क्रांति हो आध्यात्मिक प्रोग्रेशन हो मैं इतने कोटि-कोटि साल तक राह क्यों देखूं बेटर है कि मैं भी उनकी तरह ही साधना करके इसी जीवन में मनुष्य जीवन का जो महत्तम उद्देश्य है ईश्वर प्राप्ति या तो आत्मज्ञान में स्थित होना आत्मन में स्थित होना ये यह जो अंतिम उद्देश्य में इसी जन्म में क्यों ना प्राप्त कर लू राजयोग की साधना करके हम अपनी यह उत्क्रांति की जो सफर है उसमें बहुत ही जल्दी से आगे बढ़ सकते हैं जैसे हमने पिछली बार देखा था उदाहरण आपको यहां हां से मान लीजिए बेलूरमठ जाना है विशाखापटनम से बेलूरमठ जाना है तो आप पैदल चलकर भी जा सकते हैं आप साइकिल पर बैठ के भी जा सकते हैं आ बाइक चला करके भी जा सकते हैं ट्रेन में जा सकते हैं प्लेन में भी जा सकते हैं प्लेन में यदि जाएंगे तो मुश्किल से दो-तीन घंटे की जर्नी में आप यहां से बेलूरमठ पहुंच जाएंगे बेलूरमठ तो नहीं एटलीस्ट कलकाता एयरपोर्ट तक पहुंच जाएंगे फिर कलकाता एयरपोर्ट से बेलूरमठ की बात और दो-तीन घंटा लग जाएगा मैं जब बेलूरमठ में था तो हेड क्वार्टर्स में हम लोगों की बाय रोटेशन ड्यूटी आती थी कि बात ऐसी है कि बेलूरमठ में तो पूरे वर्ल्ड में से सभी सीनियर साधु बीच-बीच में विजिट करने के लिए प्रेसिडेंट रिवर्ड प्रेसिडेंट महाराज के दर्शन करने के लिए आएंगे तो फिर वे लोग मैसेज करेंगे कि हम इस दिन को इस फ्लाइट से आ रहे हैं तो फिर हम लोगों की ड्यूटी आती थी कि इस दिन को इस स्वामी जी को रिसीव करने के लिए एयरपोर्ट पर कौन जाएगा रिसीव करना है या तो फिर बेलून मट से वो जद जर्नी बैक करेंगे अपने-अपने सेंटर में तो उनको ड्रॉप ऑफ करने के लिए सी ऑफ करने के लिए जाना है तो मुझे प्राय महीने में तीन-चार बार एयरपोर्ट जाना पड़ता था या तो सीनियर साधु को रिसीव करने के लिए या तो उनको सी ऑफ करने के लिए मोस्ट वियर्ड गौतमानंद जी महाराज को सी ऑफ करने के लिए एयरपोर्ट जाने का मौका मुझे मिला था उन्हीं के साथ में में मैं कार में बैठ कर के गया था उस समय वह निश्चित हमारे ट्रस्टी महाराज थे वाइस प्रेसिडेंट महाराज थे आई थिंक तो देखिए कि इस तरह से यदि आप यहां से दो घंटे किंतु यह जो इतना रेगुलरली मैं बेलूरमठ से एयरपोर्ट जाता था मैंने देखा ट्रैफिक इतना मुश्किल है कि मैं कभी-कभी पूछता था अच्छा महाराज आपको वहां से यहां आने में कितना घंटा लगा बोलेंगे दो घंटा लगा उनके सिटी में से कोलकाता एयरपोर्ट में किंतु फिर दो घंटा लगेगा एयरपोर्ट से बेलर मट की जर्नी करने में तो जो भी है यहां पर अपना पॉइंट है कि यदि हम एक नॉर्मल रूप से अपना जीवन जिएंगे तो यहां से पैदल चलकर बेलल मट जाना हुआ यदि थोड़ी बहुत साधना में प्रगति करना शुरू किया साधना में हमारी उन्नति होनी शुरू हुई तो हम जैसे कि मान लीजिए बस में बैठ कर के ना कि कार में बैठ कर के इस तरह से बेलर मट जाएंगे अच्छे से साधना किया तो ट्रेन में बैठ कर के जाना मुश्किल से मुझे लगता है 24 घंटे ना कि इतना टाइम लगेगा किंतु यदि हमने अपनी साधना की इंटेंसिटी और भी बढ़ा दी तो जैसे कि मान लीजिए यहां से प्लेन में बैठ कर के बेलूरमठ जाना हुआ दो-तीन घंटे में पूरा जर्नी समाप्त हो जाएगा तो यह स्वामी जी यहां पे हमको कहते हैं अच्छा अभी एक नया पॉइंट स्टार्ट करते हैं पॉइंट पॉइंट नंबर 10 ओल्ट इज एन अटेंप्ट टू कंट्रोल द प्राणा ये पॉइंट का नाम मैंने दिया है इसके भीतर का जो मैटर है वो पूरा स्वामी जी का है मैं पढ़ता हूं कि स्वामी जी क्या कहते हैं व्हाट हैज प्राणायामा टू डू विद स्पिरिचुअलिज्म स्पिरिचुअलिज्म के साथ में प्राणायाम का क्या लेना देना है अभी यहां पर जो स्पिरिचुअलिज्म शब्द स्वामी जी ने व्यवहार किया है इसका एक हिस्टोरिकल बैकग्राउंड है स्पिरिचुअलिज्म का अर्थ स्पिरिचुअल क्वालिटी यानी कि आध्यात्मिकता नहीं उस समय में 19th सेंचुरी यूरोप में और अमेरिका में एक पूरा एक चला था एक घटना चक्र चला था जिसको यह लोग स्पिरिचुअलिज्म मूवमेंट कहते थे अभी यह स्पिरिचुअलिज्म क्या था कि अभी क्या है कि देखिए मटेरियल प्रोस्पेरिटी तो आपके पास में आ गई है किंतु मन है बड़ा ही अशांत तो अशांत मन को शांत करने के लिए जो धनी लोग है खास करके स्त्रियां जिनके पास में पैसा भी है और घर में बैठी हुई है काम इतना कुछ है नहीं तो अपने मन को एक तरह की शांति यह लोग कैसे देंगे अभी अभी आज के मॉडर्न एज में है कि स्त्रियां भी कार्य करती है वे लोग भी जॉब करती है उनकी भी कैरियर होती है तो क्या है कि उनका लाइफ एक बैलेंस रहता है कभी जॉब करेंगे कभी फैमिली की संभाल रखेंगे एक मोर और लेस बैलेंस लाइफ होता है जॉब नहीं भी करेंगे तो बाहर का बहुत सारा काम बैंक में जाना शॉपिंग करना वगैरह वगैरह स्त्रियां आजकल अच्छे से करती है किंतु एक समय था कि स्त्रियों को क्या है कि एक तरह से सोसाइटी में प्रोटेक्ट करके रखा जाता था बहुत ज्यादा बाहर का काम नहीं करना है कैरियर और जॉब वगैरह का तो प्रश्न ही नहीं है बिजनेस वगैरह में तो क्या है कि एक एनर्जी होती है ना भीतर में एक जो जमा होकर रह है उसको कोई एक आउटलेट चाहिए तो यह स्पिरिचुअलिज्म एक बड़ा चला था उसमें क्या है कि अभी तीन चार लोग इकट्ठा होकर के वहां पर बैठेंगे किसी एक मीडियम को बुलाएंगे और मीडियम क्या करेगा ये अपने जो मृत आपके सब परिवार जन है उनके साथ में वह कांटेक्ट बनाएगा और फिर जैसे कि वह मृत लोगों का आत्मा या तो उनका घोट इस मीडियम पर आकर के सवार हुआ है और यह जो मीडियम है मृत व्यक्ति की भाषा में मृत व्यक्ति जैसे कि वह खुद है इस तरह से वोह उसके साथ में बात करेगा अभी जैसे मेरा एक रिलेटिव है मेरे हस्बैंड का डेथ हो गया अभी मुझे हस्बैंड के साथ में बात करनी है तो मैं अपने हस्बैंड है या वाइफ है ना कि ब्रदर है ना कि सिस्टर है फादर है मदर है अभी जैसे किसी का डेथ हो गया उनके साथ में मुझे बात करनी है तो मैं एक मीडियम को बुलाऊंगा कहूंगा मेरे फादर का डेथ हो गया है या तो फिर मेरा ब्रदर नहीं रहा उसके साथ में मुझे बात करनी है उनको बुला दो तो मीडियम जैसा कुछ नाटक कुछ करेगा फिर यह मृत देह प्रेतात्मा आकर के उसके सर पर सवार होगा फिर मैं उसके साथ में बात करूंगा और फिर ऐसा जैसे कि मेरे फादर या मेरा जो परिवार जन है वही उसके भीतर में मीडियम में बैठा हुआ है अभी नेचरली यह पूरा एक नाटक जैसा लगता है जब पैसा बहुत हो जाता है बुद्धि का अभाव होता है और कोई रिस्पांसिबिलिटी होती नहीं है तब यह सब चालू होता है किंतु स्वामी जी देखिए पहली बात तो यह है कि ठाकुर किसी भी चीज को यह नहीं करते थे डिस्क नहीं करते थे कलकत्ता में एक एक पंथ था उसका नाम था कर्ता भजामि व्यक्ति है वह और भजामि उसको ईश्वर के रूप में उसकी पूजा करना माने जो उनका जो गुरु है गुरु को ही जैसे कि उनके इष्ट है इस तरह से उनकी सेवा करना नेचुरली है कि एक जीवंत मनुष्य को आप अपना इष्ट बनाएंगे तो उसमें फिर धीरे-धीरे करके करप्शन तो प्रवेश करने ही वाला है खास करके यह जो गुरु जो होता था वह रहता था पुरुष और जो यह सब उनकी उपासना करने वाली रहती थी स्त्रियां तो नेचुरली हम इमेजिन कर सकते हैं कि क्या होता होगा वहां पे तो यह सब चीजों के प्रति ठाकुर अपने संतानों को अपने त्यागी शिष्यों को बड़ा सावधान कर देते थे कि इस तरह की बातें जहां पर चलती है इस तरह की जो यह मेथड्स ऑफ स्पिरिचुअलिटी जहां पे इस्तेमाल होती है वहां पर नहीं जाना है उससे दूर रहना है तो बातों बातों में गिरीश घोष ने ठाकुर को कह दिया कि मैं कर्ता भज वालों के ऊपर में एक कटाक्ष पूर्ण नाटक लिखूंगा अभी गिरीश खोज तो बड़ा ही नाट्य का था सुप्रसिद्ध बड़ा ही टैलेंटेड वो यदि इस तरह का नाटक बनाएगा तो समाज में क्या है कि बड़ा ही पॉपुलर हो जाएगा लोगों को दो चीज सबसे ज्यादा चाहिए एक तो है कि स्कैंडल दूसरा है कि स्कैंडल यदि कोई धनी मानी या कोई रिस्पेक्टेड व्यक्ति है उसके प्रति हो तो और भी आनंद आएगा दिस इज अ ह्यूमन नेचर कि बड़ा आदमी है या कोई रिस्पेक्टेड लोग है उन लोगों हम तो सोच रहे हैं कि इतना अच्छा है आखिर में पता चला अरे यह भी यह सब गड़बड़ कर रहा है तो मन को एक संतोष मिलता है एक तरह से कि हां हम लोग भले उसके जितने धनी ना हो प्रेस्टीजियस ना हो किंतु एटलीस्ट में यह सब गड़बड़ तो नहीं करता यह सब क्या है एक इनसिक्योरिटी की फीलिंग जब होती है अपने मन में तब यह सब चीजों का आनंद हमको मिलता है तो यदि गिरीश घोष इस तरह का नाटक लिखता करता भज वालों के ऊपर में तो वह बड़ा ही प्रसिद्ध हो जाता और उस समय कलकाता में बड़े-बड़े लोग थे जो कि संप्रदाय में जाते थे और जाने का अर्थ ही यही है कि अपनी वासनाओं को चोरी छुपके वह संतोष देना चाहते थे उसको एक धर्म का एक मुखो पहना कर के अपनी वासनाओं को वह किसी भी तरह से संतोष देना चाहते थे तो जैसे ही गिरीश घोष ने ऐसा कहा कि मैं इनके ऊपर में एक नाटक लिखूंगा इमीडिएट ठाकुर गंभीर हो गए और कहा कि नहीं वह भी एक पथ है देखिए कि यदि आप सिंसियर कोई भी पथ के ऊपर में आप आगे बढ़ पढ़ेंगे साधना करेंगे किसी भी पथ के अनुसार तो उसमें आपको ईश्वर प्राप्ति होने ही वाली है जैसे कि यह तांत्रिक लोगों के बारे में ठाकुर कहा करते थे कि वह निश्चलानंद बोलकर के एक आता था अभी क्या है कि उन लोग अभी जैसे तंत्र साधना तो उसका एक स्टेटस है शक्ति साधना भारत में एक बड़ी ही स्टैंडर्ड बड़ी ही रिस्पेक्टफुल साधना है किंतु उस साधना के कुछ-कुछ अंशों को लेकर के कुछ-कुछ लोगों ने उसको काफी डिस्टोर्टेड बना दिया था काफी विकृत बना दिया था तो कलकाता का वह जो समाज था 19th सेंचुरी का उसमें दोनों तरह से ब्रह्म समाज या तो फिर श्री राम कृष्ण जैसी एक महत उदार भावधारानी थी और यह धर्म के नाम पर यह सब आडंबर है अपनी वासनाओं को संतोष देना है यह सब भी चलता था तो उसमें कर्ता बजा था दूसरा था एक भैरवी चक्र भैरवी चक्र अर्थात कि वो लोग पुरुष लोग वहां पर जाएंगे स्त्रियों को साथ में लेकर के फिर वह दुनिया भर का सब सबको कार्य करेंगे बुरा काम करेंगे तो अभी देखिए कि यह निश्चलानंद बोलकर के तांत्रिक था वह मध्य पान करता था उनकी साधना में ऐसा है तांत्रिक की कि पहले तो शराब पीना है फिर शराब पी कर के कुछ ना कुछ नृत्य करेगा कोई यह सब चालू होगा किंतु ठाकुर ने देखा और ठाकुर ने कहा कि इन लोगों का जो दल आया था दक्षिणेश्वर में तो निश्चलानंद को एक को देखा कि वह शराब पीने के बाद में स्थिर बैठ कर के जप कर रहा है बाकी जितने भी लोग थे उसके दल में वह लोग शराब पी कर के दुनिया भर का दुराचार करना प्रारंभ कर दिया था तो ठाकुर कहते हैं कि सभी पंथ में सभी मार्ग में कुछ ना कुछ तो सार होता ही है यदि आप सिंसियर उसको फॉलो करें तो यहां पर भी यह स्पिरिचुअलिज्म बोलकर के बड़ा एक चला था अपने ख के संग में यदि आपने आपको पता हो तो अपने निरंजन महाराज स्वामी
Swami Niranjanananda
निरंजनानंद ठाकुर के सन्यासी शिष्य उनका भी वह भी शुरू में ठाकुर के पास में आने से पहले मीडियम होते थे और इस तरह का जो सब मीटिंग होता था उनमें उनको मीडियम के रूप में बुलाया जाता था और वह जब ठाकुर के पास में आए थे तब ठाकुर ने उनको कहा था कि इस बार तुम्हारे सर पर ऐसा भूत सवार हुआ है कि वह तुमको कभी छोड़ने वाला नहीं है मजा करके ठाकुर कहते थे अर्थात कि ठाकुर या तो ठाकुर के माध्यम से जगदंबा स्वयं अभी निरंजन महाराज के सर पर सवार हो गए हैं या तो फिर कहेंगे उनके हृदय में आकर के उन्होंने आसन ग्रहण किया है तो यह पूरा स्पिरिचुअलिज्म का बैकग्राउंड है यूरोप में यह सब चीजें काफी चलती थी और उनको अभी जैसे यह थियोसोफिकल सोसाइटी है यह थियोसोफिकल सोसाइटी का भी एक पोर्च टिक माइंडसेट था यह कर्नल ओल कोट है या फिर यह वो एक मैडम थी ना क्या उसका नाम भूल गया एनी बेसेंट तो यह एनी बेसेंट और यह कर्नल ओल कोट यह दोनों लोग भी इस तरह की अपॉर्चुनिटी का लाभ उठा कर के यह जो अपनी ईस्टर्न मिस्टिकल ट्रेडिशनल में यह सब महात्मा रहते हैं और जद आप अमेरिका में जाएंगे मीडियम के माध्यम से महात्मा को आमंत्रण दे सकते हैं और यह तिबेट के महात्मा आकर के आपके प्रश्नों का उत्तर देंगे यह सब नाटक यह लोग भी कर रहे थे तो अभी देखिए कि एक पूरा अभी यूरोप में अमेरिका के जो धनी वर्ग है उन लोगों के भीतर में या तो धर्म कहो ना कि एक सुपर माने एक एक्स्ट्रा सेंसरी परसेप्शन इसको कहा जाता है अर्थात कि अपनी इंद्रियों के गम्य ना हो इंद्रियों के जो अगम्य हो इंद्रियों से परे हो इस सब चीजों के इस सब चीजों को जानना उनके बारे में में एक तरह की क्यूरियोसिटी रखना तो यह सब यूरोप में चल रहा था और यहां पर स्वामी जी क्या करते हैं स्वामी जी कहते हैं कि यह सब चीजें इस सब चीजों के जो प्रैक्टिशनर होते हैं ज्यादातर धुता ही होते हैं वे लोग लोगों को ठगने का ही कार्य करते हैं किंतु यह जो साइंस इट सेल्फ जो है वो गलत नहीं है और यहां से स्वामी जी यह बात का प्रारंभ करते हैं क्या कहते हैं व्हाट हैज प्राणायामा टू डू विद
What has Pranayama to do with spiritualism? Spiritualism is also a manifestation of Pranayama. If it be true that the departed spirits exist, only we cannot see them, it is quite probable that there may be hundreds and millions of them about us we can neither see, feel, nor touch.
स्पिरिचुअलिज्म स्पिरिचुअलिज्म बोलक के यह जो पूरा नाटक चल रहा है उसके साथ में प्राणायाम का क्या संबंध है स्पिरिचुअलिज्म इज आल्सो ए मेनिफेस्टेशन ऑफ प्राणायामा स्पिरिचुअलिज्म भी प्राणायाम का ही एक बहिर प्रकाश है इफ इट बी ट्रू दैट द डिपार्टेड स्पिरिट्स एक्सिस्ट ओनली वी कैन नॉट सी देम इट इज क्वाइट प्रोबेबल दैट देयर मे बी हंड्रेड्स एंड मिलियंस ऑफ देम अबाउट अस वी कैन नाइ दर सी फील नॉर टच यदि ऐसा होता कि जो मृत देह के प्रेतात्मा इस अपने आसपास में रह रहे हैं यह आकाश में कहीं पर रह रहे हैं और मीडियम के माध्यम से हम उनको इनवाइट कर पाएंगे अपने साथ में वार्तालाप करने के लिए या तो फिर अपने प्रश्नों का उत्तर देने के लिए तो यदि यह सत्य होता तो लाखों लाखों इस तरह के मृत लोगों के प्रेतात्मा अपने अपने आसपास में होते हैं क्योंकि पृथ्वी पर तो करोड़ों लोगों का जन्म अभी तक हो चुका है और आजकल तो प्रतिदिन करोड़ों लोगों का मृत्यु भी होता है तो उसका अर्थ है कि आज तक जितने लोग है थे मर गए उन सबके प्रेतात्मा करोड़ों करोड़ों की संख्या में चारों ओर हमारे आसपास में रहने होने चाहिए जिनको कि हम ना ही देख सकते हैं ना ही उनको स्पर्श कर सकते हैं ना ही हम उनका अनुभव कर सकते हैं वी मे बी कंटिन्यूअल पासिंग एंड
We may be continually passing and repassing through their bodies, and they do not see or feel us.
रिपासिंग थ्रू देयर बॉडीज एंड दे डू नॉट सी और फील अस ऐसा भी हो सकता है कि हमारे चारे बाजू हो मैं जब चल रहा हूं तो उनके बीच में से होकर के चला जाऊंगा उनके भीतर में से होकर के चला जाऊंगा क्योंकि उनका तो कोई मटेरियल फॉर्म नहीं है तो ना ही मैं उनको देख सकता हूं ना ही अनुभव कर सकता हूं किंतु फिर भी जैसे कि मैं उनके साथ में रह रहा हूं इट इज अ सर्कल विथ इन
It is a circle within a circle, universe within universe.
अ सर्कल यूनिवर्स विथ इन यूनिवर्स जैसे कि यह जो लोक है पृथ्वी लोक पृथ्वी लोक के बीच में हमार एक दूसरा एक लोक है एक दूसरा जगत है जो कि प्रेतात्मा का जगत है सर्कल विधि न सर्कल पृथ्वी के ऊपर में एक दूसरा पृथ्वी जो कि प्रेता आत्माओं के द्वारा बसी गई है यूनिवर्स विदन यूनिवर्स मनुष्य का जो जगत है उसके भीतर में जैसे कि एक प्रेतात्मा का का भी जगत है वी हैव फाइव
We have five senses, and we represent Prana in a certain state of vibration.
सेंसेस एंड वी रिप्रेजेंट प्राणा इन ए सर्टेन स्टेट ऑफ वाइब्रेशन हमारी पांच इंद्रियां है जैसे कि आंख है जैसे कि कान है जैसे कि यह जिह्वा है यह सब इंद्रियों के माध्यम से हम जगत को या तो उसके जगत का श्रवण करते हैं दर्शन करते हैं या तो फिर स्पर्श करते हैं स्पर्श कर सकते हैं उसके क्या हो रहा है सुन सकते हैं क्या हो रहा है देख सकते हैं इस जैसे कि यह जगत एक वाइब्रेशन जगत का एक स्पेशल वाइब्रेशन है एक तरंग है वो हम ग्रहण कर सकते हैं जैसे कि पता है ना कि यह जो प्रकाश है प्रकाश के किरणों डिफरेंट डिफरेंट तरह के व फ्रीक्वेंसी में आते हैं यहां पर स्वामी जी ने वाइब्रेशन वर्ड यूज किया है मॉडर्न वर्ड है फ्रीक्वेंसी फ्रीक्वेंसी का अर्थ क्या है जैसे कि ये लेट्रो मैग्नेटिक वेव है उसकी फ्रीक्वेंसी कम होगी तो वह जिसको हम रेडियो वेव कहते हैं यह जो रेडियो कम्युनिकेशन जो भी होता है ना अपने मोबाइल जिस एक मोबाइल मोबाइल टावर के साथ में कम्युनिकेट करता है मोबाइल टावर फिर दूसरे मोबाइल को मैसेज पहुंचाता है तो यह पूरा रेडियो कम्युनिकेशन टेक्नोलॉजी है फिर यदि फ्रीक्वेंसी की जो फ्रीक्वेंसी बढ़ेगी तो फिर हम उसको कहेंगे कि इंफ्रारेड किरण फिर यदि फ्रीक्वेंसी बढ़ेगी तो यह प्रकाश जिसको कि हम देख पा रहे हैं हमारी आंखें इसको देख रही है फिर यदि फ्रीक्वेंसी बढ़ेगी तो हो गया अल्ट्रावायलेट या तो फिर एक्स रे य पहले एक्सरे आता है कि पहले अल्ट्रावायलेट आता है वो मैं भूल गया अभी किंतु ये जो फ्रीक्वेंसी जैसे-जैसे कम होगी आप रेडियो वेव्स की ओर जाएंगे मिडल में कहीं पे ये विजिबल लाइट है जो कि हमको दिखती है जिसको कि हम आंखों के द्वारा देख सकते हैं और फ्रीक्वेंसी बढ़ेगी तो एक्सरे या तो फिर अल्ट्रावायलेट है जो कि हम आंखों से नहीं देख पाएंगे किंतु यह जो स्पेशल इंस्ट्रूमेंट होते हैं उसके माध्यम से देख पाएंगे अभी जैसे यह एक्सरे मशीन होता है यदि हड्डी फ्रैक्चर हुई यानी कि ऐसा कुछ हुआ तो डॉक्टर कहेंगे इसका एक्सरे करवा के आओ जैसे हाथ में कुछ हुआ है तो मैंने हाथ का एक्सरे किया तो देखा कि अपनी यह जो अपने मसल है उसमें से पार होकर के एक्सरे अपनी हड्डियों का एक पिक्चर लेते हैं तो उसका एक स्पेशल इंस्ट्रूमेंट के माध्यम से उसको देख सकते हैं तो देखिए कि ये जो इलेक्ट्रोमैग्नेटिक वेव्स है उसकी बहुत सारी फ्रीक्वेंसी है उसमें से जो सिर्फ विजिबल लाइट है जो कि यह सूरज का प्रकाश है ना कि ये लैंप का प्रकाश है ट्यूबलाइट का प्रकाश है मोबाइल का प्रकाश है या किय लैपटॉप कंप्यूटर का जो स्क्रीन में से जो प्रकाश आता है उसी को हम देख पाएंगे इससे यदि फ्रीक्वेंसी कम होगी जैसे रेडियो वेव वो हम नहीं देख पाएंगे वो मोबाइल उसको अपने स्पेशल इंस्ट्रूमेंट से कम्युनिकेट कर कर पाएगा यदि फ्रीक्वेंसी बढ़ गई एक्सरे तो वह भी हम अपनी आंखों से नहीं देख पाएंगे किंतु एक्सरे मशीन उसको देख पाएगा तो स्वामी जी यहां पर क्या कहते हैं यह जो प्रेतात्मा का जो जगत है उसको हम क्यों नहीं देख पाते क्यों हम अपने एक दूसरे को देख पाते हैं क्योंकि हम लोग सभी एक ही फ्रीक्वेंसी पर हैं प्रेता आत्माओं का फ्रीक्वेंसी हो सकता है कि ज्यादा हो ना कि कम हो इसलिए शायद हम उनको ना देख पाए अभी स्वामी जी क्या कहते हैं अभी जैसे कि यह कहा ना कि जैसे यह प्रकाश के किरणों की जो बात की उसी को स्वामी जी बाद में और थोड़ा सा एक्संड करेंगे यहां पर साथ में हम यह जो ऑडियो वेव जो होते हैं ना सुनने वाली किरणें उसका भी ऐसा ही होता है यह जो ऑडियो वेव्स यह जो होते हैं उसका भी फ्रीक्वेंसी ज्यादा कम होता है कम फ्रीक्वेंसी या ज्यादा फ्रीक्वेंसी होने पर हम नहीं सुन पाएंगे अपने कानों से किंतु उसकी फ्रीक्वेंसी यदि सही सही कौन स होगी जो अपने कानों में जाती है तो हम उसको सुन पाएंगे तो ऐसा आंखों के बारे में भी ऐसा है कान के बारे में भी ऐसा है कि एक अपनी आंख और कान एक स्पेशियल फ्रीक्वेंसी को ग्रहण करने के लिए वह बने हैं इससे कम फ्रीक्वेंसी या हायर फ्रीक्वेंसी को आंख या कान ग्रहण नहीं कर पाएंगे यहां पे स्वामी जी कहते हैं कि अपना जगत हमको दिख रहा है क्योंकि आंख और कान के माध्यम से हम इसको ग्रहण कर पाते हैं प्रेतात्मा का जगत शायद हो सकता है कि डिफरेंट फ्रीक्वेंसी पर कार्य करता हो इसीलिए शायद हम उनको नहीं देख पाते हैं ऑल बीइंग्स इन द सेम स्टेट ऑफ
All beings in the same state of vibration will see one another, but if there are beings who represent Prana in a higher state of vibration, they will not be seen.
वाइब्रेशन विल सी वन अनदर बट इफ देयर आर बीइंग्स हु रिप्रेजेंट प्राणा इन अ हायर स्टेट ऑफ वाइब्रेशन दे विल नॉट बी सीन हम एक दूसरे मनुष्य को देख पाते हैं इस टेबल को देख पाता हूं पेड़ को देख पाता हूं यह समुंदर है यहां पे समुंदर को मैं देख पाता हूं आकाश को देख पाता हूं क्योंकि यह सब उसी फ्रीक्वेंसी पे काम करते हैं वाइब्रेशन स्वामी जी वाइब्रेशन शब्द यूज करते हैं हम लोग मॉडर्न वर्ड यूज करेंगे फ्रीक्वेंसी उस फ्रीक्वेंसी पे काम करते हैं जो कि हमारी आंख कान वगैरह पंच ज्ञानेंद्रिय पंच कर्मेंद्रिय है उसके माध्यम से हम ग्रहण कर पाए किंतु यदि इस तरह के प्रेतात्मा या इस तरह का और कोई होगा जो कि दूसरी फ्रीक्वेंसी पर रहता है तो हम उसको ना ही देख पाएंगे उनको हम ना ही सुन पाएंगे ना ही उनके बीच में से हम जा पाएंगे तो स्वामी जी यहां पर कहते हैं वो लोग होंगे वह प्राण की डिफरेंट फ्रीक्वेंसी पर काम करेंगे अपनी इंद्रियां जो है वह या तो यह प्रकाश के किरणों को ग्रहण करती है उसकी फ्रीक्वेंसी को ग्रहण करती है कान जो है वह आवाज के जो साउंड वेव्स है उसको ग्रहण कर करती है तो यह प्रेतात्मा जो है या मनुष्य जो है हम जो प्राण के वेव्स हमारे भीतर में से जद प्रवाहित होते हैं या तो फिर प्राण के वेव्स के माध्यम से हम बने हुए हैं और क्योंकि प्रेतात्मा दूसरी फ्रीक्वेंसी पर रहता है हम उसको ना ही देख पाते हैं ना ही सुन पाते हैं वी मे इंक्रीज द इंटेंसिटी ऑफ लाइट
We may increase the intensity of light until we cannot see it at all, but there may be beings with eyes so powerful that they can see such light.
अंट्स विथ आई सो पावरफुल दैट दे कैन सी सच लाइट यदि हम प्रकाश के किरण या तो फिर टेक्निकल नेम है इलेक्ट्रोमैग्नेटिक वेव्स इसकी फ्रीक्वेंसी बढ़ा दे या कम कर दे तो हम अपनी आंखों से नहीं देख पाएंगे क्योंकि आंख जो है स्पेसिफिक स्पेक्ट्रम को रिसीव करने के लिए बना है फ्रीक्वेंसी स्पेक्ट्रम को इससे ज्यादा स्पेक्ट्रम पे फ्रीक्वेंसी होगी लोअर स्पेक्ट्रम पे होगी अपनी आंख उसको नहीं देख पाएगी यहां पे स्वामी जी कहते इस तरह के पशु होंगे जो कि इस तरह की लाइट ग्रहण कर पाते होंगे अभी जैसे कि य इंफ्रारेड वेव्स जो है वो शायद ये जो चमगादड़ होता है ना बेट वो उसको शायद देख पाता है कंफर्म करना होगा मुझे एगजैक्टली इतना ख्याल नहीं कि तो पशुओं को छोड़ दे इंस्ट्रूमेंट की यदि बात करें तो वह निश्चय इंस्ट्रूमेंट तो उसको ग्रहण कर ही पाते हैं हम एक्सरे देख पाते हैं इंस्ट्रूमेंट के माध्यम से अपने जो मोबाइल है वो रेडियो टेलीक कम्युनिकेशन कर पाते हैं इंफ्रारेड वेव्स जो होते हैं उसकी फ्रीक्वेंसी के फोटो हम ले पाते हैं यानी इंस्ट्रूमेंट के माध्यम से तो हम हायर फ्रीक्वेंसी या लोअर फ्रीक्वेंसी को देख पाएंगे अगेन इफ इट्स वाइब्रेशंस आर वेरी
Again, if its vibrations are very low, we do not see a light, but there are animals that may see it, as cats and owls.
लो वी डू नॉट सी अ लाइट बट देयर आर एनिमल्स दे मे सी इट एस केट्स एंड ओल्स अभी स्वामी जी यहां पे कहते हैं कि जद यह प्रकाश के किरणों की फ्रीक्वेंसी कम होगी तो हो सकता है कि बिल्ली है ना कि यह ओल ओल का क्या अर्थ होगा अभी वो मुझे गुजराती नाम पता है हिंदी नाम नहीं पता जो भी है तो यह जो है वह प्रकाश की कम फ्रीक्वेंसी को देख पाएंगे मुझे नहीं लगता ऐसा होगा कि यह लोग इंफ्रारेड किरण देख पाते होंगे किंतु जो भी है उदाहरण स्पष्ट है कि आंखों का ग्रहण करने का स्पेसिफिक फ्रीक्वेंसी है उससे ऊपर या नीचे का नहीं ग्रहण कर पाएंगे जैसे ही प्राणों की एक फ्रीक्वेंसी है हम अपनी फ्रीक्वेंसी के लेवल पर प्राण वाले जितने भी है उनको देख पाएंगे फ्रीक्वेंसी हायर या लोअर होने से इस तरह के प्रेतात्मा हों को हम नहीं देख पाएंगे अवर रेंज ऑफ विजन
Our range of vision is only one plane of the vibrations of this Prana.
इज ओनली वन प्लेन ऑफ द वाइब्रेशंस इन दिस प्राण यह जो प्राण का जगत है इस प्राण के जगत में हम जिस फ्रीक्वेंसी को देख पा रहे हैं ग्रहण कर पा रहे हैं व तो एक ही लेवल है टेक दिस एटमॉस स्फीयर फॉर इंस्टेंस इट
Take this atmosphere, for instance; it is piled up layer on layer, but the layers nearer to the earth are denser than those above, and as you go higher the atmosphere becomes finer and finer.
इज पाइल्स नियरर टू द अर्थ आर डेंसर देन दोज अबाउ एंड एज यू गो हायर द एटमॉस्फियर बिकम फाइनर एंड फाइनर यह जो यह बड़ा ही एडवांस साइंस स्वामी जी समझा रहे हैं यह जो हवा का यह जो पूरा एटमॉस्फियर है पृथ्वी के ऊपर में इसको आप देखिए जैसे आप जमीन की सतह पर रहते हैं मैं यहां पर जो रह रहा हूं तो यहां पर जो एयर प्रेशर है यहां पर जो ऑक्सीजन का प्रमाण है वह ऐसा है कि जिसमें मैं आराम से जी पाऊं किंतु जैसे मैं पहाड़ चढ़ने की शुरुआत करूंगा ये एवरेस्ट है वगैरह पर चला जाऊंगा तो यह एयर प्रेशर जो होगा वह धीरे-धीरे कम होता जाएगा ऑक्सीजन भी कम होता जाएगा इसलिए मुझे जब पहाड़ पर चढ़ना होता है तो मुझे ऑक्सीजन मास्क चाहिए यदि प्लेन में आप जाते हैं तो प्लेन का केबिन तो वैसे प्र राइज होता है उसमें ऑक्सीजन हवा वगैरह भरा होता है किंतु जद इस तरह के प्लेन में जाएंगे जैसे कि रॉकेट वगैरह है उसमें आपको यह ऑक्सीजन का मास्क पहन कर के जाना होगा और जैसे पृथ्वी छोड़ दी तो यह पूरा एटमॉस्फियर है हवा है ऑक्सीजन है वह तो पृथ्वी पर ही रह जाएगा अवकाश में कुछ भी नहीं जाएगा तो वैसे ही स्वामी जी कहते हैं कि जैसे जैसे हम ऊपर में जाते जाएंगे एटमॉस्फियर लाइट होता जाएगा अभी जैसे समुंदर में जाएंगे तो यह प्रेशर जो है पानी का बढ़ता जाएगा क्या कहते हैं स्वामी जी टेक द केस ऑफ दी ओशन एज यू गो डीपर एंड
Or take the case of the ocean; as you go deeper and deeper the pressure of the water increases, and animals which live at the bottom of the sea can never come up, or they will be broken into pieces.
डीपर द प्रेशर ऑफ द वाटर इंक्रीजस एंड एनिमल्स व्हिच लीव एट द बॉटम ऑफ द सी कैन नेवर कम अप और दे विल बी ब्रोकन इनटू पिसेस जैसे-जैसे समुंद्र के भीतर में हम गहराई में जाते जाएंगे ये जो पानी का जो प्रेशर है बढ़ता ही जाएगा बढ़ता ही जाएगा यह मनुष्य जो है वो ज्यादा से ज्यादा एक दो मीटर 5छ मीटर इतना गहराई में जा पाएगा इससे ज्यादा यदि जाएगा अभी एग्जैक्ट फिगर में भूल गया किंतु उससे गहराई में जद जाएगा तो क्या होगा कि पानी के प्रेशर से वह पूरा ये क्रश हो जाएगा इससे यदि गहराई में जाना है तो हमको यह सबमरीन है उसमें बैठ कर के जाना पड़ेगा अभी यह देखिए कि गहराई में जो प्राणी रहते हैं जो मछलियां रहती हैं उनका शरीर है इस तरह से बना हुआ है कि पानी का जो हाई प्रेशर है उसको सहन कर पाए ये पानी के हाई प्रेशर में से यानी कि समुंदर की जो गहराई है उसमें से इस मछली को आप सरफेस पर ले आए तो वह फट जाएगी क्यों क्योंकि वह पानी के हाई प्रेशर में रहने को उसका हैबिट है उसका शरीर इस तरह का बना है यदि ऊपर में सतह पर आएगी तो पानी का प्रेशर कम हो जाएगा या तो जीरो हो जाएगा बाहर भीतर में जो प्रेशर है वह ब बढ़ जाएगा और वह उसका मृत्यु हो जाएगा
Think of the universe as an ocean of ether, consisting of layer after layer of varying degrees of vibration under the action of Prana
थिंक ऑफ द यूनिवर्स एज एन ओशन ऑफ थर कंसिस्टिंग ऑफ लेयर आफ्टर लेयर ऑफ वेयरिंग डिग्रीज ऑफ वाइब्रेशन अंडर द एक्शन ऑफ प्राण इस पूरे विश्व ब्रह्मांड को इस यूनिवर्स को आप जैसे कि एक इथर का समुंदर के रूप में गिनिश यहां पर यूज कर रहे हैं वो 19th सेंचुरी साइंस का एक बड़ा ही इंपॉर्टेंट अंग था आज के जगत में आज के मॉडर्न साइंस में इथर शब्द बोलक के जो था उसको हमने डिस्कार्ड कर दिया है इथर का जो कांसेप्ट है वह कांसेप्ट अनसाइंटिफिक प्रूव हुआ है तो भले ही चाहे यहां पर स्वामी जी इथर के बारे में कहे हम लोग शब्द यूज करेंगे इथर की जगह प्राण तो ज इस पूरा जो विश्व ब्रह्मांड है पूरा कॉस्मो है इसको प्राण के लेयर आफ्टर लेयर के रूप में देखिए लेयर्स ऑफ वरिंग डिग्रीज ऑफ
layer of varying degrees of vibration under the action of Prana; away from the centre the vibrations are less, nearer to it they become quicker and quicker; one order of vibration makes one plane.
वाइब्रेशन अंडर द एक्शन ऑफ प्राणा अवे फ्रॉम द सेंटर ऑफ द वाइब्रेशंस आर लेस नियर टू इट दे बिकम क्विकर एंड क्विकर वन ऑर्डर ऑफ वाइब्रेशन मेक्स वन प्लेन यह प्राण की जो फ्रीक्वेंसी स्पेक्ट्रम है जैसे ही आप सेंटर में जाते जाएंगे कॉस्मो के उसकी फ्रीक्वेंसी बढ़ती जाएगी सेंटर से दूर होते जाएंगे फ्रीक्वेंसी कम होती
Then suppose these ranges of vibrations are cut into planes, so many millions of miles one set of vibration, and then so many millions of miles another still higher set of vibration, and so on.
जाएगी देन सपोज दिस रेंजेस ऑफ वाइब्रेशंस आर कट इन टू प्लेन सो मेनी मिलियंस ऑफ माइल्स वन सेट ऑफ वाइब्रेशन एंड देन सो मेनी मिलियंस ऑफ माइल्स अनदर स्टील हायर सेट ऑफ वाइब्रेशन एंड सो ऑन जद ये वाइब्रेशन को आप कट करना शुरू करें जैसे कि विजिबल लाइट का जो फ्रीक्वेंसी स्पेक्ट्रम है वो एक हो गया अल्ट्रावायलेट का एक हो गया एक्सरे का एक हो गया यह रेडियो वेव्स का अलग हो गया तो रेडियो वेव्स का जो जगत है वो एक जगत है एक लोक है पृथ्वी जैसे हम लोक कहते हैं ना सात लोक मृत्य लोक है स्वर्ग लोक है फिर मृत्यु लोक है पृथ्वी लोक है यह जो सब लोक है ना तो ये लोक का साइंटिफिक एक्सप्लेनेशन स्वामी जी यहां पर दे रहे हैं कि ये लोक अर्थात कि क्या कि प्राण का वाइब्रेशन इट इज देर फोर प्रोबेबल दैट दोज
It is, therefore, probable, that those who live on the plane of a certain state of vibration will have the power of recognising one another, but will not recognise those above them.
हु लिव ऑन द प्लेन ऑफ ए सर्टेन स्टेट ऑफ वाइब्रेशन विल हैव द पावर ऑफ रिकॉग्नाइजिंग वन अनदर बट विलन नॉ रिकॉग्नाइज दोज अबाउ देम इसीलिए यह संभव है कि यदि आप एक वाइब्रेशन या तो फिर एक फ्रीक्वेंसी लेवल पर रहते हैं तो दूसरी फ्रीक्वेंसी लेवल पर रहने वालों को आप ना ही पहचान पाएंगे ना ही उनके साथ में किसी तरह का कम्युनिकेशन कर
Yet, just as by the telescope and the microscope we can increase the scope of our vision, similarly we can by Yoga bring ourselves to the state of vibration of another plane, and thus enable ourselves to see what is going on there.
पाएंगे यट जस्ट एज बाय द टेलिस्कोप एंड द माइक्रोस्कोप वी कैन इंक्रीज द स्कोप ऑफ अवर विजन सिमिलरली वी कैन बाय योगा ब्रिंग अवर सेल्स टू द स्टेट ऑफ वाइब्रेशन ऑफ अनदर प्लेन एंड द एनेबल अवर सेल्व टू सी व्हाट इज गोइंग ऑन देयर किंतु यह किसी इंस्ट्रूमेंट के माध्यम से हम दूसरी फ्रीक्वेंसी को हम पकड़ पाते हैं जैसे कि यहां पर स्वामी जी टेलिस्कोप और माइक्रोस्कोप का उदाहरण देते हैं किंतु आज की लैंग्वेज में बेटर उदाहरण रहेगा जैसे कि एक्सरे है ना कि अपना सिंपल कैमेरा है यह मोबाइल का कैमेरा है उसमें से हम विजिबल लाइट जो है उसका फोटो ले पाएंगे एक्सरे में जो एक्सरे फ्रीक्वेंसी जो है उसका फोटो ले पाए तो स्वामी जी कहते हैं कि योग करके योग साधना करके हम अपने प्राणों की फ्रीक्वेंसी है उसको बढ़ा सकते हैं या कम कर सकते हैं जिससे कि दूसरे लोग के जो जीव है दूसरे लोग में जो रहते हैं वह चाहे प्रेतात्मा हो ना कि चाहे देवता ना कि चाहे यह एंजल्स जो भी उसको कहो उनके साथ में भी हम कम्युनिकेशन कर पाएंगे यट हा अ टू सी व्हाट इज गोइंग ऑन देयर योग के माध्यम से फ्रीक्वेंसी को बढ़ा करके कम करके प्राण की फ्रीक्वेंसी को कम करके बढ़ा करके उस प्राण की फ्रीक्वेंसी पर जो लोग है जो जिस तरह के लोग वहां पर निवास करते हैं उस लोक के जो निवासी है उनको देख पाएंगे और वहां पर क्या हो रहा है वह देख पाएंगे समझ पाएंगे सपोज दिस रूम इज फुल ऑफ
Suppose this room is full of beings whom we do not see.
बीइंग्स म वी डू नॉट सी स्वामी जी कहते हैं मान लीजिए कि यह जो रूम है वो इस तरह के प्रेतात्मा न की देवताओं से भरा पड़ा है जिनको कि हम देख नहीं पाते दे
They represent Prana in a certain state of vibration while we represent another.
रिप्रेजेंट प्राण इन ए सर्टेन स्टेट ऑफ वाइब्रेशन वाइल वी रिप्रेजेंट अनदर ये दूसरे जो है निवासी इस मने जो दूसरे लोग है उनका जो प्राण का फ्रीक्वेंसी या वाइब्रेशन हमारे से डिफरेंट है सपोज दे रिप्रेजेंट अ क्विक
Suppose they represent a quick one, and we the opposite. Prana is the material of which they are composed, as well as we.
वन एंड वी द अपोजिट मान लीजिए कि यह दूसरे जो निवासी है इसी रूम के वे लोगों की प्राण की फ्रीक्वेंसी हमारे से ज्यादा है प्राण इज द मटेरियल ऑफ व्च दे आर कंपोज एज वेल एज वी प्राण के ही तो सब कुछ बने हुए हैं सभी कोई तो प्राण के ही बने हुए हैं यह प्रेतात्मा हो ना कि देवता हो ना कि हम
All are parts of the same ocean of Prana, they differ only in their rate of vibration.
ऑल आर पार्ट्स ऑफ द सेम ओशन ऑफ प्राण दे डिफर ओनली इन द रेट ऑफ वाइब्रेशन हम सभी लोग प्राण के ही बने हुए हैं हम सभी लोग प्राण के ही इस समुंदर में रहते हैं बस उनकी फ्रीक्वेंसी ज्यादा या कम होगी हमारे से इफ आई कैन ब्रिंग माय सेल्फ टू द क्विक
If I can bring myself to the quick vibration, this plane will immediately change for me: I shall not see you any more; you vanish and they appear. Some of you, perhaps, know this to be true.
वाइब्रेशन दिस प्लेन विल इमीडिएट चेंज फॉर मी आई शैल नॉट सी यू एनी मोर यू वेनिश एंड दे अपीयर सेम सम ऑफ यू परहे पस नो दिस टू बी ट्रू यदि मैं अपने प्राणों की फ्रीक्वेंसी बढ़ा दूं तो आप मुझे नहीं देख पाएंगे क्यों क्योंकि आपके प्राणों की मेरे प्राण की फ्रीक्वेंसी जो भी मैच हो रही है वह बाद में नहीं होगी किंतु जिन लोगों के प्राणों की फ्रीक्वेंसी ज्यादा है चाहे यह प्रेतात्मा हो ना कि चाहे देवता हो वह अभी मुझे देख पाएंगे यह कैसा हो गया पता है कि देखिए कि हम सभी लोग अभी हिंदी में बात कर रहे हैं किंतु किसी की लैंग्वेज है जैसे कि बंगाली है किसी की है गुजराती है किसी की इंग्लिश है किसी की तेलुगु है अभी मैं यदि गुजराती में बात करना शुरू कर दूं तो जो बंगाली है या तो जो तेलुगु है वह मुझे नहीं समझ पाएंगे किंतु जिसको गुजराती आती है वह मुझे समझ पाएगा जद मैं बंगाली में बात करना शुरू कर दूं तो जो बंगाली है वह मुझे समझ पाएंगे किंतु जो गुजराती है या इंग्लिश है या तेलुगु वो मुझे नहीं समझ पाएंगे तो मैं अपनी लैंग्वेज चेंज करके उस लैंग्वेज के ग्रुप वाले जितने भी है आसानी से बात कर सकता हूं यहां पर भी स्वामी जी कहते हैं कि ये देवता मनुष्य प्रेतात्मा हम सभी लोग प्राणों की एक फ्रीक्वेंसी पर कार्य करते हैं प्राणों की एक फ्रीक्वेंसी से बने हुए हैं बने हैं तो सभी प्राण के किंतु फ्रीक्वेंसी अलग-अलग है जब तक मैं मनुष्य की फ्रीक्वेंसी पे हूं मनुष्य दूसरे मनुष्य मुझे देख पाएंगे मैं उनको देख पाऊंगा जैसे ही मैं देवता के प्राणों की फ्रीक्वेंसी पर चला गया तो देवता मुझे देख पाएंगे मैं देवता को देख पाऊंगा किंतु ना ही मैं फिर मनुष्य को देख पाऊंगा ना ही मनुष्य मुझे देख पाएंगे हां जबी जिसको कहेंगे लिंगवा फ्रांका एक ऐसी लैंग्वेज जो कि सबको समझ में आती है जैसे हिंदी है हिंदी में मैं जो बोल रहा हूं तो यह चाहे गुजराती हो ना कि इंग्लिश हो ना कि बंगाली ना कि तेलुगु सब मुझे समझ पाते हैं तो ऐसा कोई वाइब्रेशन है जो कि सभी समझ पाएंगे इसके बारे में अभी देखेंगे कि स्वामी जी कुछ कहते हैं कि नहीं किंतु एस फार एस उनकी जो हमको समझाने की जो स्थिति है अभी तक का जो समरी है कि सब कुछ प्राण का बना हुआ है वही है कि किसी के प्राणों की फ्रीक्वेंसी ज्यादा है कम है हम और जो हम जिस फ्रीक्वेंसी प हैं उसी लोगों को हम देख पाएंगे एट ऑल दिस ब्रिंगिंग ऑफ द माइंड
All this bringing of the mind into a higher state of vibration is included in one word in Yoga — Samadhi.
इनटू अ हायर स्टेट ऑफ वाइब्रेशन इज इंक्लूडेड इन वर्न वर्ड इन योगा समाधि यह जो अपने प्राण की जो फ्रीक्वेंसी है उसको बढ़ाना इसको योग में क्या कहते हैं योग में इस प्रक्रिया को क्या कहते हैं कि मैं अपने प्राणों की फ्रीक्वेंसी को बढ़ा दे रहा हूं जिससे कि मैं एक ऐसे लोक में प्रवेश कर पाऊं कि उस लोक के निवासी चाहे देवता ना कि जो भी हो उनके साथ में मैं कम्युनिकेशन कर पाऊं उस लोक की जो अद्भुत घटनाएं हैं उस लोग का जो अद्भुत साम्राज्य है उसका मैं दर्शन कर पाऊं यह प्रक्रिया को योग में क्या कहते हैं इसको कहते हैं समाधि ऑल द स्टेट्स ऑफ हायर वाइब्रेशन
All these states of higher vibration, superconscious vibrations of the mind, are grouped in that one word, Samadhi, and the lower states of Samadhi give us visions of these beings.
सुपरकॉन्शियस वाइब्रेशन ऑफ द माइंड आर ग्रुप इनटू दैट वन वर्ड समाधि एंड द लोअर स्टेट्स ऑफ समाधि गिव्स अस विजनस ऑफ दिस बीइंग्स यह जितने भी हायर वाइब्रेशन है हायर फ्रीक्वेंसी है प्राण की यह जो सुपरकॉन्शियस जो वाइब्रेशंस या तो फ्रीक्वेंसी है मन की वह सब समाधि शब्द में इकट्ठा हुई है समाधि का अर्थ यही है कि प्राण की हायर फ्रीक्वेंसी पर जाना यदि प्राण की हायर फ्रीक्वेंसी प जाएंगे तो शायद निर्विकल्प समाधि हो जाएगी सर्वोच्च फ्रीक्वेंसी पर चले जाएंगे किंतु उससे थोड़ी कम हायर फ्रीक्वेंसी पर जाएंगे तो दूसरे लों का भी दर्शन कर पाएंगे स्वर्ग लोक में शायद जा पाए मृत मृत मृत्यु लोक है पाताल लोक है उसमें भी हो सकता है कि शायद जा पाए ब्रह्म लोक है ब्रह्म लोक एकदम हाईएस्ट होगा किंतु उसके नीचे वाले जो लोग है वैकुंठ में यदि वैकुंठ लोक है यदि वैकुंठ ठ लोक में चले गए तो भगवान कृष्णा अपनी यह जो वहां पर अभी भी रासलीला चल रही है मान लीजिए यह दर्शन हम कर पाएं ये ठाकुर के दर्शनों की जो बात करते थे ना ठाकुर को दर्शन क्यों होते हैं कैसे होते हैं यह चैतन्य का जो नगर कीर्तन का ठाकुर को दर्शन हुआ कि चैतन्य महाप्रभु नित्यानंद और फिर दूसरे अपने जो भक्त गण है उनके साथ में नगर कीर्तन करते जा रहे हैं अभी ठाकुर ने बलराम और मास्टर महाशय को इस चैतन्य के दल में देखा था तो ठाकुर ने मास्टर महाशय को कहा भी सही कि मैंने तुमको चैतन्य के नगर कीर्तन वाले दल में देखा था तो अभी प्रश्न होगा कि यह ठाकुर किस तरह से उनको देख पा रहे हैं तो उसका एक उत्तर है कि यह प्राण की डिफरेंट फ्रीक्वेंसी पे यह जितने भी लोग है जो आज तक थे रहे भूतकाल में थे भविष्य में होने वाले हैं वर्तमान में है सभी लोक सभी मनुष्य सभी घटनाएं अभी भी एक साथ में एक हायर प्लेन पे अस्तित्व में है यह जो हम पृथ्वी पर जिस तरह से समय पसार होता है ना कि भगवान कृष्ण आए फिर पहले तो भगवान राम आए फिर उनका देहांत उनकी महासमाधि हुई भगवान कृष्ण आए फिर उनकी समाधि हुई फिर यह वेदव्यास आए फिर उनके जाने के बाद में यह शंकराचार्य आए उनके बाद में यह चैतन्य महाप्रभु आए उनके बाद में ठाकुर आए तो हमको लगता है कि ये जो समय का चक्र है वह चलता जाता है यह समय की ये जो यात्रा है चलती जाती है भूतकाल में कभी भगवान कृष्ण थे अभी रिसेंटली भगवान राम कृष्ण है और हाल आजकल में कोई नहीं है इस तरह से हम सोचते हैं किंतु स्वामी जी हमको एक ब पूरा नया आईडिया देते हैं स्वामी जी क्या कहते हैं कि प्राणों की हायर फ्रीक्वेंसी पर भगवान कृष्णा भगवान राम चैतन्य महाप्रभु इन सबका भी अस्तित्व अभी भी है यदि हम समा साधि में जाकर के या तो फिर यह साधना के उच्च से उच्चतर सोपान पार करके अपने प्राणों की फ्रीक्वेंसी को यदि बदल दे हायर फ्रीक्वेंसी पर ले जाए तो इन सबका दर्शन हमको आज भी होगा द हाईएस्ट ग्रेड ऑफ
The highest grade of Samadhi is when we see the real thing, when we see the material out of which the whole of these grades of beings are composed, and that one lump of clay being known, we know all the clay in the universe.
समाधि इज व्हेन वी सी द रियल थिंग व्हेन वी सी द मटेरियल आउट ऑफ व्च द होल ऑफ दिस ग्रेड्स ऑफ बीइंग्स आर कंपोज एंड दैट वन लंप ऑफ क्ले बीइंग नोन वी नो ऑल द क्ले इन द यूनिवर्स ये जो हाईएस्ट स्टेट ऑफ समाधि किंतु क्या होगी उस समाधि में हम जितने भी लोग है या तो फिर यह जितने भी यह जीव है वह सब जीव किस चीज के बने हुए हैं व आत्मन के बने हुए किस चीज के बने हुए उसको हम दर्शन कर पाएंगे यह जैसे कि यह जो आप कुंभार है कुंभार के उसके दुकान पर जाएंगे तो आपको मीटिंग आपको घड़ा दिखने को मिलेगा आपको एक पात्र दिखने को मिल मिलेगा आपको छोटा सा गिलास कप देखने को मिलेगा खिलौने देखने को मिलेंगे किंतु जैसे ही आपने हाईएस्ट स्टेट ऑफ समाधि में चले गए आपको दिखेगा कि वही मिट्टी का यह घड़ा भी बना हुआ है वही मिट्टी का यह बर्तन भी बना हुआ है वही मिट्टी का ग्लास भी बना हुआ है वही मिट्टी का यह खिलौना भी बना हुआ है उस समय आपको यह खिलौना या बर्तन या यह गिलास या यह पात्र नहीं दिखेंगे उस समय आपको सिर्फ मिट्टी ही दिखेगी यह हाईएस्ट स्टेट ऑफ समाधि जैसे हमने पहले कहा ना मैं यदि गुजराती में बात करूंगा तो सिर्फ गुजराती ही समझ पाएगा बंगाली में बात करूंगा तो बंगाली ही समझ पाएगा किंतु मैं यदि हिंदी में बात करता हूं तो गुजराती बंगाली इंग्लिश तेलुगु सभी समझ पाएंगे सो ये हाईएस्ट स्टेट ऑफ समाधि पर जाकर के जो कॉमन डिनॉमिनेटर है सभी लोगों का सभी लोगों का सभी का उस कॉमन डिनोट यानी कि ईश्वर या तो ब्रह्मण उसके साक्षात हम हो पाएंगे अच्छा आखिरी पैराग्राफ है इसको हम समाप्त कर ही देते हैं दस वी सी दैट
Thus we see that Pranayama includes all that is true of spiritualism even.
प्राणायाम इंक्लूड्स ऑल दैट इज ट्रू ऑफ स्पिरिचुअलिज्म इवन अर्थात की स्पिरिचुअलिज्म जैसा एक बोगस साइंस भी यदि है तो उसको आप प्राणायाम के माध्यम से समझ पाएंगे स्वामी जी ऐसा नहीं कहते कि स्पिरिचुअलिज्म सही है स्वामी जी कहते हैं कि प्राणायाम की एक यूनिवर्सल थिरी है जिसके माध्यम से आप सब कुछ समझ पाएंगे और फिर जैसे कहते हैं ना कि यदि धुआं है तो आग कहीं ना कहीं होगी ही होगी यदि यह सब थिरी है स्पिरिचुअलिज्म जैसी यह यदि अस्तित्व में आई है तो उसके भीत भीतर में कुछ ना कुछ सही भी होगा ठाकुर ने तो प्रेतात्मा हों का दर्शन किया था वो तो सर्वजन विधित है तो प्रेतात्मा नहीं है ऐसा नहीं है है किंतु उसका देखने वाले बहुत कम लोग हैं ज्यादातर तो हमको ठग हैं तो यहां पे स्वामी जी कहते कते हैं कि प्राणायाम की थिरी के माध्यम से आप इवन प्रेतात्मा हों को भी समझ पाएंगे सिमिलरली
Similarly, you will find that wherever any sect or body of people is trying to search out anything occult and mystical, or hidden, what they are doing is really this Yoga, this attempt to control the Prana.
यू विल फाइंड दैट वेर एवर एनी सेक्ट और बॉडी ऑफ पीपल इज ट्राइम टू सर्च आउट एनीथिंग ओल्ट एंड मिस्टिकल और हिडन व्हाट दे आर डूइंग इज रियली दिस योगा और साथ-साथ में ही देखेंगे यदि कोई भी पंथ कोई भी व्यक्ति कोई भी साधक ऐसा कुछ सुख खोज रहा है जो कि रहस्यमय है जो कि इंद्रियों के अगम्य है जो कि मिस्टिकल है तो तो जानिए कि इस सबके पीछे में एक ही है वह है योग यह साधक या तो फिर यह व्यक्ति योग का ही आसरा ले रहा है दिस अटेंप्ट टू कंट्रोल द प्राण वो इस प्राण को ही कंट्रोल करने का प्रयास कर रहा है यू विल फाइंड दैट वरवर
You will find that wherever there is any extraordinary display of power, it is the manifestation of this Prana.
देयर इज एनी एक्स्ट्राऑर्डिनरी डिस्प्ले ऑफ पावर इट इज द मेनिफेस्टेशन ऑफ दिस प्राण आप जानेंगे कि जहां-जहां पर भी अद्भुत शक्ति का प्रकाश है है उसके पीछे में यही प्राण ही कारण भूत है इसके बारे में और भी काफी डिस्कशन थ हमको करना होगा वह हम अभी कल करेंगे यह पॉइंट यहां पे पढ़ना इसका समाप्त हुआ है ओम शांति शांति शांति हरि ओम तत्सत श्री राम कृष्णा अर्पण मस्तु