Class
ओम स्थापक यच धर्मस्य सर्व धर्म स्वरूपने अवतार वरिष्ठ या राम कृष्णा यते स्वामी जी का लेटर हम पाठ कर रहे थे देखा कि किस तरह से स्वामी जी हमको एक कंप्रिहेंसिव वर्ल्ड व्यू देते हैं इस वर्ल्ड व्यू के भीतर में सब कुछ आ जाता है सिर्फ यह नहीं कि अभी कल ही मैं थोड़ा सा यह दो तरह की फिलोसोफी यानी कि एक है कि डीपर एसिस्टेंसिया जाए वह फिलोसोफी इन दोनों फिलोसोफी के बारे में थोड़ा सा में पढ़ रहा था तो मैंने देखा कि स्वामी जी का वर्ल्ड व्यू है वह दोनों को एड्रेस करता है वेदांत अपने भारत के साथ में एक समय ऐसा हुआ कि हमारी सामाजिक और आर्थिक व्यवस्था के अगेंस्ट में जो एक विप्लव हुआ उस विप्लव के बाद में बुद्धिस्ट एज में इसका एक दूसरा नया विकल्प इतना स्ट्रांग या इतना रेजिल या तो इतना लोंग लास्टिंग नहीं हो पाया और उसकी वजह से यह जो आर्थिक उपकरणों का डिस्ट्रीब्यूशन जिस तरह से सोसाइटी में होना चाहिए जिससे कि सोसाइटी में समृद्धि आए व पार्ट हमने छोड़ दिया या तो फिर वह रह गया और एक एक्सक्लूसिव फोकस हो गया मुक्ति प्राप्त करने के लिए अभी नो डाउट मुक्ति प्राप्त करना तो जीवन का सर्वोच्च उद्देश्य है ही है किंतु फिर सिर्फ मुक्ति प्राप्त करने से तो आपको रोटी कपड़ा मकान तो नहीं मिल जाता जैसे कि मां ने कहा था कि ठाकुर के लिए पायस का बाटी अर्थात कि खीर की कटोरी और खाना तो मथुर बाबू इकट्ठा करते थे जुगाड़ करते थे तुम लोग जदी दरदर भटको ग भिक्षा मांगते मांगते तो उसी में इतना समय व्यय हो जाएगा कि फिर साधना कौन करेगा ईश्वर को पुकारने का समय कहां मिलेगा तो इसके लिए एक यदि आपको साधना भी ठीक से करनी है तो आपकी आर्थिक परिस्थिति इतनी अच्छी भी नहीं होनी चाहिए जिससे कि हम फिर वो उसी के मोह में डूब जाए और इतनी कठोर कठिन भी नहीं होनी चाहिए कि एसिस्टेंसिया ही अपना एक बहुत बड़ा क्वेश्चन खड़ा होकर सा नजर के सामने हो जाए तो इसीलिए सोसाइटी के भीतर में यह दोनों विंग्स है जो अपना वर्ल्ड व्यू है इसमें यह दोनों एस्पेक्ट ठीक ठीक से बनाए रखे तभी वह सोसाइटी प्रॉपर्ली डेवलप होगी दिस इज व्ट वी कैन फाइंड इन स्वामी विवेकानंद अभी थोड़ा सा आगे पढ़ते हैं द ओनली वे ऑफ गेटिंग अवर डिवाइन नेचर मेनिफेस्टेड इज बाय हेल्पिंग अदर्स डू द सेम स्वामी जी वैसे तो लेटर बंगोली में लिखते हैं किंतु वह तो लैंग्वेज के परे है ना बीच-बीच में इंग्लिश डाल देते हैं तो अपना दिव्य जीवन उसको मेनिफेस्ट करने के लिए डिवाइन नेचर को मेनिफेस्ट करने के लिए एक ही तरीका है ओनली वे क्या है हेल्पिंग अदर्स टू डू द सेम दूसरों को भी उनकी भीतर में निहित डिन या तो दिव्यता को मेनिफेस्ट करवाने के लिए प्रोजेक्ट करवाने के लिए हेल्प करें दैट इज द ओनली वे यह एक ही मात्र तरीका है कि हम अपनी खुद की दिव्य आत्मा को पहचान सके उसके साथ में एकाकार एकही भूत हो सके ईश्वर दर्शन प्राप्त कर सके अभी यह जो हमने पहले भी डिस्कस किया था कि व्यष्टि साधना और समष्टि साधना यदि मैं सिर्फ मेरे खुद के लिए साधना करता हूं तो एक्चुअली पता है जो लोग सही सही ब्रह्मज्ञान जिनको प्राप्त होता है ना वे लोग समष्टि साधना ही करते हैं मैं इसको कहता हूं कॉस्मिक सब्जेक्टिविज्म अच्छा मुझे मुक्ति प्राप्त करनी है किंतु मैं कौन हूं जरा सोच के तो देखिए कि मैं क्या यह हाथ यह पैर यह सर यह चश्मे यह कपड़े यह मैं हूं ना कि इसके भीतर में रही हुई आत्मन में हूं अच्छा अभी यदि यह आत्मन में हूं तो यही आत्म म तो सर्व भूत में है सभी के भीतर में है अर्थात कि मेरा आइडेंटिफिकेशन सर्वप्रथम तो नेती नेती यह जो ठाकुर कहते हैं मैं यह हाथ नहीं यह पैर नहीं यह पंच महाभूत नहीं यह पंच ज्ञानेंद्रिय नहीं पंच कर्मेंद्रिय नहीं मन बुद्धि चित्त अहंकार नहीं इसके भीतर इसके सब परे आत्मन अच्छा अब ये आत्मन तो सबके भीतर है तो फिर इति इति करके अरे यह किताब भी मैं हूं यह मंदिर इसके पत्थर एक एक पत्थर एक एक ईंट वह भी मैं हूं यह पेड़ यह पौधे यह पुष्प यह पशु पक्षी मनुष्य जितने भी पृथ्वी पृथ्वी ग्रह सूर्य चंद्र तारे फिर यह गैलेक्सी सब कुछ तो मैं हूं मेरे अलावा और कुछ है क्या तो पहले तो हम जब सब्जेक्टिविज्म और ऑब्जेक्टिविज्म इस तरह से वो हम एक एनालिसिस करते हैं नेचुरल साइंस क्या है स्टडी ऑफ ऑब्जेक्ट्स और यह स्पिरिचुअल साइंस या तो कॉन्शियस नेस स्टडीज क्या है स्टडी ऑफ द सब्जेक्ट किंतु अभी आप यह कहे कि स्पिरिचुअलिटी में मुझे ऑब्जेक्ट से दूर जाकर के सब्जेक्ट की ओर आना है ऑब्जेक्ट अर्थात कि मेरे बाहर में जो कुछ भी है व ऑब्जेक्ट है और मैं जो हूं मेरा सही स्वरूप वो सब्जेक्ट है तो यहां पर नो डाउट ऑब्जेक्ट से दूर जाना है किंतु सही सब्जेक्ट को पहचानेंगे तो पता चलेगा कि ऑब्जेक्ट जैसा कुछ है ही नहीं मेरे बाहर कुछ है ही नहीं सब कुछ मेरे भीतर में है तो मैं इसको कहता हूं कॉस्मिक सब्जेक्टिविज्म यह पूरा कॉस्मो ही तो मैं हूं अहम ब्रह्मास्मि यदि अभी ये इसका इंटरप्रिटेशन देखिए किस तरह से करेंगे यह नहीं कि मैं ब्रह्मण हूं किंतु ब्रह्म जो है वो मैं हूं अर्थात कि ये पूरा विश्व ब्रह्मांड विश्व ब्रह्मांड के भीतर में जो कुछ भी है और विश्व ब्रह्मांड से परे भी जो चेतन सत्ता है सब कुछ मैं हूं यह कॉस्मिक सब्जेक्टिविज्म या तो प्रॉपर इंटरप्रिटेशन ऑफ अह ब्रह्मास्मि दैट इज जितने भी अच्छे ट्रू साधक सही सही साधक हुए हैं सही सही जिन्होंने आध्यात्मिक जीवन में कल्याण मुक्ति प्राप्त की है उनका यह कॉस्मिक सब्जेक्टिविज्म आ ही जाता है इसकी साइन क्या है मन एकदम स्वच्छ निर्मल हो जाएगा भीतर के दरवाजे खुल जाएंगे अंकट बंकट जितना भी कचरा है सब चला जाएगा सबके ऊपर में एक इस तरह से श्रद्धा एक प्रेम एक स्नेह एक कंपेज आ जाएगा एक दया आ जाएगी ठाकुर कहते हैं ना कि तुम दूसरों के ऊपर में दया करने वाले कौन हो तुम दया नहीं शिव ज्ञान से उनकी सेवा करोगे अच्छा अभी इसी स्टेटमेंट को कॉस्मिक सब्जेक्टिविज्म की दृष्टि से देखें इसका अर्थ है कि सामने के मनुष्य के भीतर में दरिद्र नारायण चंडाल नारायण मूर्ख नारायण इन सबके भीतर में वही शिव है जो कि मेरे भीतर में है अर्थात कि वो मैं ही हूं किंतु मेरा एक दूसरा स्वरूप में हूं तो यह मैं उनको मेरे सेल्फ आइडेंटिफिकेशन के साथ में जदी मैंने उनको जोड़ दिया तो फिर दया करने का प्रश्न ही नहीं आता हालांकि हम लोग यह बोलचाल की भाषा में यह दया प्रेम शब्द यूज करते हैं जो कि सब्जेक्ट ऑब्जेक्ट का रिलेशनशिप डिनोट करते हैं देखिए अपने यहां पे अपने साथ में प्रॉब्लम क्या होगा जब हम सब्जेक्टिविज्म की ओर जाएंगे ऑब्जेक्टिविज्म की ओर से क्योंकि ये लैंग्वेज जो है ना सब्जेक्ट ऑब्जेक्ट का रिलेशन दिखाती है प्रेम क्या है मैं दूसरों के साथ में मेरा जो रिलेशन है प्रेम है क्रोध क्या है मेरा दूसरों के ऊपर में जो गुस्सा है जो जो नाराजगी है वो क्रोध है तो फिर ये दया क्या है मुझे दूसरों की स्थिति देख कर के भीतर में करुणा का उद्रेक हुआ उत्पन्न हुई करुणा और फिर मैं जिस उसके साथ में जिस तरह से व्यवहार करता हूं वो दया है अभी किंतु सामने वाला जिसके ऊपर में दया होनी चाहिए या तो फिर जिसके ऊपर में क्रोध होना चाहिए या तो फिर जिसके ऊपर में प्रेम होना चाहिए वो यदि सब कुछ मैं ही हूं तो मेरा उनके साथ रिलेशन क्या होगा वही दया या तो फिर क्रोध या तो फिर यह अ करुणा या तो फिर प्रेम वही होगा किंतु क्या है कि बिकॉज के शब्दों की यह लिमिटेशन है इसलिए हम शब्द तो शायद वही यूज करेंगे किंतु उसके पीछे का तात्पर्य अर्थ पूरा बदल जाएगा ठाकुर क्या कहते हैं कि यह काम कांचन या तो फिर क्रोध वगैरह जाएगा नहीं तो उसकी डायरेक्शन चेंज कर दो यह क्रोध करना है तो इसके लिए क्रोध करो कि मैंने जो एक डिसिप्लिन लाइफ लीड करने का एक प्रॉमिस किया है मुझको अपने को एसे ए साधक के रूप में वो मैं प्रॉमिस को फुलफिल नहीं कर पा रहा हूं अभी भी मेरे से डिसिप्लिन में लैप्स हो जाता है बीच-बीच में मैं डिसिप्लिन भूल करके मेरे मेरे खुद के साथ में खास ऐसा होता है कि जब भी कोई एक अच्छी किताब आ गई या ऐसा कुछ हो गया तो फिर एक बहुत लंबे अरसे से मैंने यह हैबिट डेवलप करके रखी है मेरे स्टूडेंट डे से कि जब भी कुछ अच्छा पढ़ने को आ गया सब भूल कर के सब रूटीन बुटीन छोड़ कर के पढ़ते रहो पढ़ते रहो जब तक वह किताब खत्म नहीं हो जाती तो अभी उस दिनों के लिए ठीक था अभी इस दिनों के लिए ठीक नहीं है विद्यार्थी अवस्था में विद्या अर्जन करना मेरा धर्म था किंतु साधक अवस्था में मेरा धर्म है साधना करना और यह विद्या अर्जन यहीं तक किया जाना चाहिए उसके ऊपर में एक लिमिट होनी चाहिए वहीं तक उसको करो कि जब तक वो बाकी सब रूटीन में बाकी सब साधना के जो विभिन्न अंग है जप है ध्यान है स्वाध्याय है फिर यह मंदिर में जाना है ऑफिस में आकर के कर्म करना है वो सब अंग साधना के उसमें बाधा ना डाले वहीं तक उस को करना चाहिए वो बाकी सब अंग साधना के उसमें वो विक्षेप उत्पन्न करके उसी को स्वाध्याय ही करते रहो तो वो ठीक नहीं तो उस समय के लिए ठीक था इस समय के लिए नहीं तो अभी क्या करें आई एम स्ट्रगलिंग विद दैट स्टिल स्ट्रगलिंग विद दैट किंतु यह जो साधना यह साधना करके करके जब हम सब्जेक्टिविज्म है सब्जेक्टिविज्म ट्रू सब्जेक्टिविज्म क्या है यह समझेंगे तब कहीं जाकर के ये जितने भी महापुरुष देखिए कि उनका हृदय कैसे खुल गया था उनके भीतर में दया करुणा का किस तरह से एक एक जवार जैसा हुआ था यह जो भरती आती है ना समुंदर में सुनामी आती है तो सुनामी में सब कुछ वो उसके भीतर में वो पानी के भीतर में वह बह जाता है तो इस महापुरुष के ये जो दया है उनका प्रेम है वो सुनामी की तरह पृथ्वी के ऊपर में फैल जाता है और यह जो वर्ल्ड रिलीजन जो है वो इसी तरह से ते हैं ऐसा नहीं है कि सब कुछ तलवार की धार के ऊपर में या तो फिर बंदूक सर के ऊपर लगा कर के लोगों का धन धर्मांतर करण होता है बहुत सारा कुछ इसलिए भी होता है कि उस धर्म में कोई सार तत्व है जो कि हम कॉन्शियसली सबकॉन्शियसली उसके प्रति अट्रैक्ट होते हैं तो हमेशा यह एक स्प्रेड अभी मेरे यहां पर एक आजकल जो पिछले 50 60 साल में जो सब संत वगैरह हुए जिनका नाम भी किसी ने नहीं सुना अभी जैसे राजकोट में ही एक संत के बार संत यानी क्या एक साधक थे अच्छे साधक थे जेंटलमैन थे मैरिड ही थे अपने घर में रहते थे वो कहीं से उनका नाम सुन कर के ये वॉलंटिली अभी उनका नाम भी मैं भूल गया तो बोला कि उनके पास बैठ कर के आधा एक घंटा बात किया मन को इतना शांति मिला मैंने कहा अच्छा मैंने कहा वो नाम भी बोला मैं आज भूल गया हूं मैंने पूछा कि अरे उसकी कोई किताब है तो बताओ तो ना किताब वगैरह कौन लिखेगा उनके ऊपर किताब कौन लिखेगा ना ही खुद लिखेंगे ना ही उनको पहचानने वाले ऐसा कोई है कि जो कि उनके ऊपर किताब लिखे तो फिर वो क्या करेगा पता है ये वॉलंटस जो है अभी कहां पे जाएगा सुन कहीं से किसी से सुन के अच्छा वहां प छोटा सा आश्रम है तो चलो चले जाते हैं आश्रम में जाकर के वहां पर कोई होगा तो उनके साथ बात करके आते हैं ऐसा करके माने ओवर ए पीरियड ऑफ सम फाइव सिक्स इयर्स उसने इतने सारे छोटे-छोटे इस तरह से आश्रम है या तो कोई गृहस्थ ही है सद गृहस्थ है यह संत है कोई जिनका नाम भी किसी ने नहीं सुना ऐसे उन लोगों की मुलाकात की है उनके साथ में रहा है वो बोलता है कि अरे ऐसे लोगों से हम जब मिलते हैं तो एकदम मन कितना खुश हो जाता है और जब भी आके मुझे ऐसा बोलता है कि अच्छा मैं उनको मिलकर आया मैं वहां पर जाकर आया किसी आश्रम में छोटा सा आश्रम पता नहीं उसका नाम भी नहीं सुना उसका मैं लोकेशन खोजने का प्रयास कर रहा हूं वो भी नहीं मिल रहा तो मैंने उसको बोला उ अच्छा तो वहां की कोई किताब बताओ वहां का कोई ब्रोशर हो तो बताओ त ब्रोशर किताब वगैरह कौन लिखेगा वहां पे तो ऐसे कितने ही लोग हैं जिन्होंने अपना कॉस्मिक सब्जेक्टिविज्म ये पूरे विश्व अभी इस तरह से वो हम जैसे हमारी एक हैबिट हो गई ना स्वामी जी को पढ़ के एक ग्रांड टर्मिनोलॉजी यूज करने की बड़े-बड़े शब्द यूज करेंगे हम वेदांत पढ़ कर के ना कि ये सिविलाइजेशनल स्टडीज पढ़ कर के कॉन्शसनेस स्टडीज पढ़ कर के स्वामी जी को पढ़ के हम लोग बड़े-बड़े शब्द यूज करेंगे और फिर हमारा डॉक्यूमेंटेशन तो पता है किताब आश्रम में जो कुछ भी हो रहा है सब कुछ अच्छे से हम लोग प्रोपेगेटर हैं किंतु ऐसे लोगों इनके साथ में बात करेंगे तो शब्द भी एकदम कॉमन मैन की लैंग्वेज में बात करेंगे उनका प्रोपेगेशन करने के लिए भी कुछ नहीं किंतु फिर भी इनके हृदय में जो शांति है इनके साथ में बैठ कर के यू कैन एक्चुअली फील दैट कि हां ये कॉस्मिक सब्जेक्टिविज्म इस तरह का शब्द तो वे लोग नहीं यूज करेंगे किंतु जो कोई भी उनके पास में आता है ना जैसे कि अभी एक यहां के एक आश्रम के बारे में बता रहा था वो वो बोल रहा है कि वहां पर जो भी जाएगा बिना खिलाए किसी को छोड़ेंगे नहीं और पैसा बैसा देने की बात नहीं है कहेंगे पैसा इनफ है अपना घर का पैसा है आइए बैठिए खाना खाके बाद में जाइए तो बिना खाए किसी को छोड़ेंगे नहीं जो वहां पर जाएगा तो देखिए कि ऐसा नहीं कहते हैं कि ये पूरा विश्व ब्रह्मांड में हूं पूरा सब कुछ मने अ ब्रह्मास्मि ऐसी बातें नहीं कि किंतु यह जो स्निग्ध प्रेम का जो प्रवाह है यू कैन एक्चुअली फील दैट सो दिस इज द साइन ऑफ ए ट्रू संत ट्रू महात्मा सही सही जो महात्मा है उनकी आत्मन पूरे महत को अर्थात की पूरे विश्व को अपने भीतर में आवृत कर देती है तो इसीलिए स्वामी जी कहते हैं द ओनली वे ऑफ गेटिंग अवर डिवाइन नेचर मेनिफेस्टेड इज बाय हेल्पिंग अदर्स डू द सेम मेरी डिविल मेरे भीतर में रही हुई दिव्य सत्ता की अनुभूति वह मैं तभी कर सकता हूं जब मैं दूसरों को सहाय करता हूं उनके भीतर में रही हुई डिविली को अनुभूति करवाने करवाने में जब उनको सहाय करता हूं तभी मुझे भी सहाय होगी यह पू इंग्लिश में एक कहावत है व्ट गोज अराउंड इट कम्स अराउंड यानी कि आप दूसरों के साथ में जो जो व्यवहार करेंगे उसी तरह का व्यवहार आपके साथ में होगा तो यह बिल्कुल ठीक है माने ये कॉमन वे में बात करने का तरीका हो गया अपना य वेदांत की दृष्टि से है यदि दूसरों को सहाय करेंगे तो हमको भी ईश्वर सहाय करेंगे इफ देर इज इन इक्वलिटी इन नेचर यदि प्रकृति में असमानता है स्टिल देर मस्ट बी इक्वल चांस फॉर ऑल इसके बावजूद सबको एक समान तक मिलनी चाहिए और इफ ग्रेटर फॉर सम एंड फॉर सम लेस द वीकर शुड बी गिवन मोर चांस देन द स्ट्रांग और किसी के लिए ऐसा है कि इसके पास में ज्यादा यह धन संपत्ति वैभव है किसी के पास में कम है तो जिसको भी कम है जो कमजोर है आर्थिक सामाजिक दृष्टि से उसको ज्यादा देना चाहिए ज्यादा चांस देना चाहिए और जिसके पास में ज्यादा धन संपद वगैरह है उसको और कम चांस जदी दे तो चलेगा देखिए ये स्वामी जी का जो बेसिक फिलोसोफी है इसके बाद में भी उन्होंने यही कहा है अर्थात चंडाल विद्या शिख ज तोव शक ब्राह्मण ततो नहे अर्थात कि चंडाल को एक अभी यह उस समय के शब्द है चंडाल ब्राह्मण हम आज इस तरह की भाषा में बात नहीं करते आज हम कहते हैं कि हु इज मोर फॉर्चूनेटली फॉर्चूनेटली एक जन शिक्षक आवश्यक चंडाल छले दोष जनेर आवश्यक ब्राह्मण के लड़के को यदि एक शिक्षक की आवश्यकता है तो चंडाल के लड़के को 10 शिक्षक की आवश्यकता है कारण जहा के प्रकृति स्वाभाविक प्रखर कोरे नहीं तहा के अधिक सहा कोरीते होई बे क्यों क्योंकि प्रकृति जिसको सहाय नहीं करती उसी को हमको ज्यादा सहाय करनी पड़ेगी यह जो इंग्लिश में एक दूसरा शब्द प्रयोग है टू पुट द थम ऑन द स्केल अर्थात कि यदि आप एक स्केल अर्थात कि तराज वू जिसको कहते हैं वो जो होता है ना वो तुला बांगला ते बोले तो एक जद एक एक मेजरमेंट का डिवाइस है एक साइड पे आप इतना गेहूं वगैरह रखते हैं दूसरी साइड के ऊपर में वेट करने का जो मशीन होता है गेहूं वगैरह के लिए एक साइड प आप गेहूं रखते हैं दूसरी साइड प आप कोई छोटा सा वेट रखते 1 किलो का तो 1 किलो दोनों समांतर हो गया अर्थात पता चला कि गेहूं 1 किलो का है अभी मान लीजिए कि एक साइड में गेहूं की साइज बढ़ गई और ये एक किलो का जो अपना जो वेट है वो ऊपर उठ जा रहा है तो उसके ऊपर में हम लोग क्या करेंगे ये जो सब चीटिंग करते हैं ना कभी-कभी वो एक ऐसा कुछ करते हैं कि वो है आपका क्या कहेंगे कि गेहूं कम है आपका ये 1 किलो का वजन ज्यादा है तो गेहूं के ऊपर में वे लोग एक उंगली डाल देंगे उंगली डालेंगे इस तरह से आपको दिखाई नहीं देगा और वो 1 किलो वाला ऊपर उठ जाएगा यानी कि मेजरमेंट में आपको आधा किलो गेहूं दिया किंतु वहां पर दिख रहा है कि 1 किलो ये वेजिटेबल वगैरह तो उनका चीटिंग करने का तरीका होता है जो लोग चीटिंग करते हैं सभी लोग नहीं करते बहुत सारे एक ऑनेस्ट एक लोग बड़े ही मने क्या कहेंगे कि ईश्वर से डरने वाले लोग भी होते हैं किंतु कुछ-कुछ लोग होते हैं जिनकी वजह से सभी लोग बदनाम होते हैं तो ऐसे कुछ-कुछ लोग इस तरह से चीटिंग करेंगे आधा किलो वेजिटेबल रखे हैं और फिर उसके ऊपर में ऐसा ट्रिक करेंगे कि सामने वाला एक किलो वाला वेट ऊपर उठ जाए तो इंग्लिश में इसको कहते हैं टू पुट योर थंब ऑन द स्केल ये जो तुला है यह जो राजवा स्केल है उसके ऊपर में अपना अंगूठा रखने का सो स्वामी जी कहते हैं द पुअर द डाउन ट्रोड द इग्नोर लेट दिस बी योर गॉड जो पुअर है जो डाउन ट्रोड है उनको ही अपने ईश्वर के रूप में जानिए देखिए यह जो एक पूरा नया टॉपिक स्वामी जी यहां पर लेक आ गए कि यदि हमको यह कार्य करना है भारत में भारत में भारत की जो परिस्थिति है यहां पर हमको विद्या फिर ये जैसे कहे अपना जो विभिन्न तरह की एक्टिविटी है ना ये मेडिकल अपना एक यूनिट होता है ये रूरल डेवलपमेंट का यूनिट होता है ये एजुकेशनल यूनिट होता है ये पब्लिकेशन यूनिट एक है य फिर ये बहुत सारे इस तरह से अपने यूनिट है विभिन्न विभिन्न सेंटर में तो जद इस तरह से आपको कार्य करना ही है तो इस तरह से कार्य करो कि जिसको कि नसीब ने कम दिया है फॉर्चून जिसका कम है उसको ज्यादा दो अपने शिक्षक यह अपनी हॉस्पिटल ये अपनी जितने भी रूरल डेवलपमेंट की एक्टिविटी वो वहां पर जाकर के करो जहां पर लोग दरिद्र है जिससे कि इनको फायदा हो सके आप कहेंगे कि यदि मुझे विश्व को ही सभी को एक कॉस्मिक सब्जेक्टिविज्म की अर्थात कि यह जो धनपति है उसके भीतर में भी वही आत्मन है जो दरिद्र है उसके भीतर में भी वही आत्मन तो मुझे सेवा करनी है तो सबकी समान करूंगा तो यहां पर स्वामी जी एक केविया अर्थात कि एक कंडीशन लगाते हैं कंडीशन क्या है कि हां सेवा करनी है किंतु जो कि दरिद्र है जो चंडाल है जो कि पिछड़ा है पद दलित है उसको ज्यादा सहाय करो क्योंकि प्रकृति ने उसको कम दिया है या तो फिर ऐतिहासिक ये जो सब परिब होते हैं ना ये हिस्टोरिकल फैक्टर्स कि ये मैन्युफैक्चरिंग और इंडस्ट्रियल का इंडस्ट रिलाइजेशन का ये युग है इसकी वजह से यह स्मॉल स्केल ये आर्टिजंस कहो ना कि ये छोटे-छोटे लोग जो कि अपना छोटा अभी अभी मान लीजिए कि कोई यहां पे व मुझे याद है कि मैं गांव में जब छोटा था तब रहता था तो छोटी-छोटी दुकानें होती थी वो किराने की दुकान इसकी दुकान अभी यह जो मुड़ी है बांगला में जिसको मुड़ी बोलते हैं हिंदी में बोलते हैं मुड़ मुड़ा तो ये मुरमुरा तो ये इसको खरीदना है या तो फिर यह छोटे बच्चे होते हैं ना कभी-कभी चॉकलेट खाते खाने से अच्छा लगता है तो पिताजी लाकर दे देते हैं छोटे-छोटे खिलौने होते हैं तो मुझे एगजैक्टली याद है कि इतनी छोटी सी दुकान वहां पर दो लोग जाकर खड़े भी रहेंगे तो दुकान पूरी भर जाएगी ऐसी छोटी सी दुकान थी वहां पे और जाकर के हम लोग कहते थे कि हां एक मुट्ठी भर दे दो तो पता है वो कागज होता है ना कागज को इस तरह से कोन की तरह ब गोल गोल घुमा करके इसके भीतर में वो चना है फिर थोड़ा सा यह सिंग है ऐसा कुछ डाल कर के वो ₹ ना कि 50 पैसे का कुछ दे देते थे और लेकर के हम चलते चलते खाते खाते बड़ा आनंद करते थे आज वही छोटी-छोटी दुकानों की वजह बड़े-बड़े मोल सब जगह पे हो गए हैं यह मोल की मालिक कितनी है एक व्यक्ति की किंतु उसने ऐसे 50 छोटी-छोटी दुकानों को डिस्प्लेस कर दिया यानी 50 दुकाने नहीं 50 परिवार जो कि इस तरह से अपना रोजगार कर रहे थे अभी बेरोजगार हो गए या तो फिर उनको और कुछ करने की जरूरत पड़ गई है उनके बच्चों को जिस तरह से विद्या शिक्षा की आवश्यकता थी मेडिकल ट्रीटमेंट की जो जरूरत थी वह अभी पिताजी नहीं दे पाएंगे तो यह क्या है कि कंसंट्रेशन ऑफ वेल्थ बढ़ता ही जाता है बढ़ता ही जाता है वह कहते हैं ना कि टॉप 5 पर ना कि टॉप % के पास में इतनी वेल्थ है आज जो कि बॉटम % के पास में जितनी है मैंने ये प्रचंड एक क्या कहेंगे कि ये इंबैलेंस है सोसाइटी में ये रिसोर्सेस डिस्ट्रीब्यूशन का तो ये आज पहले ऐसा नहीं था वर्ण व्यवस्था ही ऐसी थी कि सबको अपनी जरूरत के अनुसार प्राप्त हो जाता था आज की पूरी सोसाइटी बहुत ही डिफरेंट है सोशलिज्म था एक जिसने कि एक प्रॉमिस किया था कि इक्विटी इन डिस्ट्रीब्यूशन ऑफ मींस ऑफ प्रोडक्शन ये होगा ऐसा हम प्रॉमिस करते हैं किंतु सोशलिज्म इस तरह से एक गड्ढे में जाकर के गिरा कि जो गरीब है उसको तो कुछ नहीं दे पाया किंतु जो टैलेंटेड है उसकी टैलेंट को खत्म करके सत्यानाश करके छोड़ दिया है जितने भी फॉर्मर कम्युनिस्ट सोशलिस्ट कंट्रीज है सब गड्ढे में गिरे इकोनॉमिक गड्ढे में और ये चाइना को तो पहले से ही पता चल गया था कि ये बोलने वाली बातें हैं प्रैक्टिकल में कुछ नहीं है ये जो दें शियाओपिंग जो वहां का था कि बिल्ली काली हो ना कि गोरी वो चूहा पकड़ना चाहिए उसको तो उन लोगों की ये प्रैक्टिकल सेंस थी तो मुंह से बोलेंगे कम्युनिज्म किंतु इन प्रैक्टिस वालो कैपिट इस्ट हो गए थे तो यह अभी क्या है कि सोसाइटी में देयर इज अ लैक ऑफ वर्ल्ड व्यू एक ऐसा वर्ल्ड व्यू नहीं है कि जो कि आध्यात्मिकता और यह डिस्ट्रीब्यूशन ऑफ रिसोर्सेस दोनों को एड्रेस करें ऐसा वर्ल्ड व्यू अभी नहीं है सो दैट वर्ल्ड व्यू इज गिवन बाय स्वामी जी स्वामी जी कहते हैं कि ऑन वन हैंड आपकी टैलेंट जो है उसको भी उसके पंख पस ारो उसको भी जितनी हो सके उसको डेवलप करो टैलेंट को खत्म कर देने को स्वामी जी कभी नहीं कहते एट द सेम टाइम आपके पास में जो टैलेंट है उसको दूसरों की सहायता के लिए यूज करो यह जो रॉकफेलर जिसके पास में जिस अभी ये जो अपोक्रोमेटिक भी लोग हैं वो धनपति लोग कहते हैं कि हम अपना धन अपने बच्चे को नहीं देंगे फाउंडेशन एक बनाएंगे ट्रस्ट बनाएंगे और ट्रस्ट के थ्रू सोशल गुड्स ऐसा कुछ करें कॉर्पोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी यह जो सब आइडियाज है इसका जो मैंने पितामह थे वो थे वो रोके फेलर तो अभी यह रोके फेलर खुद स्वामी जी के पास आए थे यह जो न्यू डिस्कवरीज मेरी लुईस ने लिखी हुई है उसमें एक छोटा सा एक प्रसंग है मेरी लस कहती है कि मैं इस प्रसंग को अपेंडिक्स में देती हूं क्यों क्योंकि दिस इज नॉट अ पार्ट ऑफ द एक्चुअल बुक अपेंडिक्स में क्यों है क्योंकि यह जो कहानी है इसका कोई वेरिफिकेशन हमको पेंडेंट नहीं मिला है इसलिए यह अपेंडिक्स में है क्या है कहानी एक दिन स्वामी जी किसी भक्त के घर में अमेरिका में थे सडन ये रॉकफेलर वहां पर आया अभी वो इतना मने उस समय का क्या कहेंगे कि प्रख्यात व्यक्ति था उसकी इतनी प्रेस्टीज सोसाइटी में तो ये जो जिनके घर में रह रहे थे वो लोग सभी आश्चर्य हो गए रोके फेलर हिमसेल्फ हैज कम हियर क्या बात है क्या बात है बोलता है कि आई वांट टू टॉक विद विवेकानंद तो अच्छा ठीक है फिर स्वामी जी के साथ में एक बंध कमरे में जाकर के बैठा स्वामी जी ने दरवाजा बंद करवा दिया या तो फिर रोके फेलर ने कहा होगा दरवाजा बंद कर दो आपके साथ में प्राइवेट बात करनी है अभी ये जितने भी डिवोटा थे स्वामी जी के जो फ्रेंड्स थे वो तो एकदम मतलब अभिभूत हो गए अरे बाप रे इतना बड़ा व्यक्ति स्वामी जी के साथ बात करना क्या है क्या है सब लोग बाहर खड़े-खड़े कुछ सुनने का प्रयास कर रहे हैं क्या सुनने में आता है तो अभी भीतर से एकाएक चिल्लाने की आवाज आने लगी मने स्वामी जी उसको कुछ बोलते होंगे उसका टेंपर ऐसा था रोके फेलर का वो चिल्लाएगा कुछ भी करेगा तो उसने चिल्लाना शुरू कर दिया आर्गुमेंट होती है ना तो वो ठीक ठीक में वो शांत होक के आर्गुमेंट करने वाला व्यक्ति नहीं था उसका टेंपर हाई था तो स्वामी जी शांत रूप से आर्गुमेंट कर रहे हैं वो चिल्ला चिल्ला करके आर्गुमेंट कर र है अच्छा ठीक है आर्गुमेंट खत्म हुई फिर सडन दरवाजा खुला आधा एक घंटा उन दोनों ने बात की फिर सडन दरवाजा खुला और वो गुस्से में आकर के किसी के साथ बात किए हुए बिना बात किए बिना हैंड शेक किए सीधा वो अपनी गाड़ी में बैठा और चला गया तो अभी सभी लोग सोच रहे क्या हुआ क्या हुआ तो स्वामी जी को पूछा तो स्वामी जी ने भी ऐसा कोई खास उत्तर नहीं दिया किंतु उसके कुछ समय के बाद में रोके फेलर ने अपना ट्रस्ट यह रोके फेलर फाउंडेशन इसको किया बनाया और पूरी संपत्ति उसको दे दी अभी यह फाउंडेशन कहो ना कि ट्रस्ट कहो कितना अच्छा काम कर रहा है बुरा काम कर रहा है वो बात नहीं है व करता भी होगा नहीं करता होगा हमको पता भी नहीं है किंतु दिस इज द बिगिनिंग ऑफ फिलांथस ऑन दिस कॉर्पोरेट लेवल ये कॉर्पोरेट लेवल पे ऐसा हमेशा होता था कि कैपिट ज्म का क्या अर्थ है कि प्रॉफिट मैक्सिमाइजेशन इससे इसके आगे कुछ नहीं देखना किंतु ये कॉर्पोरेट लेवल प फिलैंथरोपी जो स्टार्ट हुआ वो वही उसके पहले शायद हुआ होगा आप इंडिविजुअली दान देते होंगे अच्छा मेरे पास में बहुत सारा रुपया है वो जो वो अंकल वो जो इसकी बात है ना टॉम टॉम डिकंस डिकंस की एक स्टोरी है क्रिसमस केरोल तो क्रिसमस केरोल में क्या है एक बड़ा ही धनपति व्यक्ति है और उसके वो गरीब लोग है तो क्रिसमस का दिन है वो सडन उसके मन में एक दया का उदय हो जाता है कि चलो भाई मैं ये गरीब लोग है उसको मैं कुछ दान करूं तो क्या है कि यह धनी लोग वैसे तो बड़े ये थे मतलब कृपण थे बड़े ही क्या कहेंगे कि कंजूस थे किंतु कभी-कभी दया हो जाने से कुछ कुछ वो दान दे देते थे तो वो तो एक चीज हुआ इंडिविजुअल लेवल प डोनेशन किंतु कॉर्पोरेट लेवल प फिलांथस वाज बिगन बाय रोके फेलर और उसके बाद में तो यह कॉरपोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी का ये जो पूरा सेप्ट है अभी काफी कुछ डेवलप हो चुका है तो स्वामी जी हैज बिगन दैट आइडिया तो दिस इज स्वामी जीज कंट्रीब्यूशन ये ये क्या कहेंगे कि सोशल वेलफेयर के रूप में कैपिट इज्म कहो ना कि एक कॉस्मिक सब्जेक्टिविज्म कहो ना कि कुछ भी कहो इसको एक प्रॉपर नाम देना चाहिए इसको प्रॉपर फिलोसोफी के रूप में डेवलप करना चाहिए करेंगे तभी लोग एक एकेडमिक लेवल पर स्वामी जी को एक्सेप्ट करेंगे वरना यही कहेंगे ओके ही वाज ए इंस्पायरिंग स्पीकर ओके ही वाज अ सेंट बट ही वा वा नॉट अ फिलोसोफर ये फिलोसोफर का क्या होता है कि बड़ा ही एक्सक्लूसिव क्लब है उस क्लब में आपको एंटर होने के लिए आपको बड़े ही फॉर्मूला के रूप में सब चीजों को रखना पड़ता है तो दैट इज स्वामी जी सोशल डिस्ट्रीब्यूशन यह रिसोर्सेस डिस्ट्रीब्यूशन का स्वामी जी का स्कीम कि चंडाल को विद्या शिक्षा की जितनी आवश्यकता है ब्राह्मण को इतनी नहीं है अर्थात कि जिसके पास में जो लेस फॉर्चूनेटली दो जिस की वो सोसाइटी बैलेंस हो पाए दिस स्वामी जी आइडिया अच्छा इसके बाद क्या कहते हैं महा दं सामने सावधान एक महा प्रलय सामने है सावधान हो जाओ ही दं के सकले पोड़े मारा जाए उस कय जो दलदल होता है उसके भीतर में पड़कर सभी लोग विनाश हो जाते हैं सभी का विनाश हो जाता है ई दं हो यह दलदल ना कि महाप्रलय जैसा क्या है आज का धर्म वेद खानकार धर्म बदे नाई पुराणे नाई भक्ति ते नाई मुक्ति ते नाई धर्म ढुके छन भाते ी ते आज का धर्म वेद में नहीं है पुराण में नहीं है भक्ति में नहीं है मुक्ति में नहीं है धर्म कहां पर है धर्म है भात की हांडी यानी भात की कटोरी में या तो भात रखे हुए पात्र में क्यों कहते हैं ऐसा आज का धर्म विचार मार्गे ओ नहीं ज्ञान मार्गे ओ नहीं छूत मार्गे अमाई ोयो ना ोयो ना बस आज का धर्म विचार मार्ग में भी नहीं है ज्ञान मार्ग में भी नहीं है आज का धर्म है यह छुआछूत के रास्ते पर छुआछूत के भीतर में मुझे स्पर्श मत करो मुझे स्पर्श मत करो बस ए घोर बामा चार छूत मार्गे पड़े प्राण खयो ना इस भयानक वामाचारी रूपी छुआछूत के भीतर में पड़कर के अपने प्राण गवाना मत आत्म वत सर्व भूतेषु की केबल पुंथी ते थाकी बेना की आत्म वत सर्व भूतेषु यह पूरा विश्व ब्रह्मांड मेरा आत्मन है यह बात सिर्फ क्या किताबों में ही रह जाएंगी ना क्या जारा एक टुकड़ रूटी गरीबे मुखे दते पारे ना तारा आबार मुक्ति की देवे जो एक टुकड़ा रोटी गरीब के मुंह में नहीं दे सकते वह आखिर में उनको मुक्ति क्या प्राप्त होगी या तो फिर वह आपके टीचर के रूप में आपको मुक्ति का रास्ता कहां दिखाएंगे जारा अपरे श्वा से अपवित्र होए जाए जारा आबार अपर के की पवित्र करबे जो दूसरों का निश्वास अपने ऊपर में दूसरों की सांस दूसरों की परछाई भी अपने पर गिरती है वह अपने को अपवित्र समझने लगते हैं वह क्या दूसरों को पवित्रता दे सकते हैं यानी कि वह क्या धर्म के शिक्षक हो सकते हैं क्या छूत मार्ग इज ए फॉर्म ऑफ मेंटल डिसीज यह छुआछूत जो है वह एक मानसिक रोग का एक दूसरा स्वरूप है सावधान ऑल एक्स बस अभी इसके बाद में दूसरा टॉपिक तो देखिए यह जो स्वामी जी कहते हैं इसके भीतर में भी हमको देखना है अभी स्वामी जी हालांकि कहते हैं उस समय के कॉन्टेक्स्ट में जबकि ये ज्ञात और नाथ इतना क्रिस्टलाइज हो गया था कि जो पिछड़ी जातियां थी जनजातियां थी इनको यह भद्र समाज या तो फिर यह अपर कास्ट कहते थे वे लोग कोई अपॉर्चुनिटी नहीं देते थे उनके लिए समाज में कोई स्थान नहीं था ठीक है वो उस समय की बात है आज की बात बिल्कुल डिफरेंट है आज तो रिजर्वेशन जैसे कि स्वा स्वामी जी ने कहा कि जो चंडाल जो ब्राह्मण के लड़के को यदि एक टीचर चाहिए तो चंडाल के लड़के को 10 टीचर चाहिए अभी यह रिजर्वेशन के रूप में अपनी गवर्नमेंट जॉब वगैरह जो है वहां प यह रिजर्वेशन आ गया है कि हां यह जो पिछड़ी जाति का है निम्न जाति का है उसको उसके लिए इतनी सीट रिजर्व कर दो अभी तो यह विमेन रिजर्वेशन का भी एक चल रहा है पता नहीं हुआ है कि भी नहीं कि स्त्रियों को भी इस तरह से इक्वल अपॉर्चुनिटी मिलनी चाहिए तो आज का समाज बिल्कुल डिफरेंट हो गया है आज का समाज उसके उस दिनों के समाज से बहुत ही डिफरेंट है स्वतंत्रता की जो ये अपनी संग्राम है यह फ्रीडम मूवमेंट है उसने पूरे भारत को काफी कुछ क्लींस कर दिया है काफी कुछ ये जो मैंने ये सुपरस्टिशन कहो ना कि ये डेंजरस फ जो सब सिस्टम्स थी यह प्रथाएं थी इससे अपने समाज को धो दिया है तो यह एक बात हो गई किंतु यह छुआछूत जो है इवन आज के कॉन्टेक्स्ट में भी है यह आप बड़े-बड़े देशों में जाएंगे वहां पे क्या होता है स्वामी जी ने कहा ना कि यह हम लोग बोलते हैं कि यह भारत में ही एक ऐसा है कि लोअर कास्ट अपर कास्ट किंतु विदेश में जाएंगे वहां पे लोअर क्लास और अपर क्लास ऐसा हो गया है जो धनपति है वह जिसके पास में धन नहीं है उनके पूरा समय शोषण करते रहते हैं यह जो इनकम इन इक्वलिटी यह जो जिनी इंडेक्स इसको कहते हैं इकोनॉमिस की लैंग्वेज में जीनी को एफिशिएंट क्या है कि यह मेजर करता है कि सोसाइटी में इन इक्वलिटी कितनी है टॉप 1 पर कहो ना कि टॉप 5 पर कहो वो बॉटम 50 पर ना कि बॉटम 30 पर इन दोनों को इक्वल दिखाते हैं उसके ऊपर में ये जीनी को एफिशिएंट बनता है तो ये इक्व इनकम इन इक्वलिटी आज सोसाइटी में बढ़ती ही जाती है बढ़ती ही जाती है जिनके पास में धन है उनके पास में इतना पावर है इतना पावर है कि जो ऐसे लाखों करोड़ों लोग हैं जिनको कि मने डिस एंपावरमेंट जैसा हो गया हमको ऐसा लगता है कि ना मेरे पास में फ्रीडम है किंतु एक्चुअल जो डिस एंपावरमेंट है ना सोसाइटी में अपना से गवर्नमेंट में गवर्नेंस में मेरी आवाज बिल्कुल जीरो है तो यह सब चीजें उस समय ऐसा था कि अपर कास्ट और लोअर कास्ट आज है कि अपर क्लास और लोअर क्लास तो स्वामी जी कहते हैं कि यह छूत मार्ग ये आज की लैंग्वेज में कहेंगे आज के कांटेक्ट में कहेंगे कि यदि हम इतने फॉर्चूनेटली साथ में यह समाज भी डूबेगा तो स्वामी जी की बात यदि लिटरली ली जाए तो आज के भारत में कहीं पर शायद अप्लाई नहीं होगी किंतु इसको मेटाफोरिकली ली जाए आज के कांटेक्ट में पढ़ी जाए तो वह आज भी इतना ही रिलेवेंट है जितनी की वह उस समय थी ऑल एक्सपेंशन इज लाइफ ऑल कंट्रक्शन इज डेथ ये माने ये स्वामी जी का वर्ल्ड फेमस यह सूत्र जो होते हैं ना एक्सपेंशन इज लाइफ कंट्रक्शन इज डेथ मैं जब पहली पहली बार यहां पर आया था तो ऐसे वो बेज वो बेज होते हैं ना तो अपने वो शर्ट पे वगैरह लगाने वाले तो बी स्ट्रांग बी याने अराइज अवेक तो ऐसे सब बेज या तो फिर ऐसे पोस्टर ऐसा मैं लगाया हुआ देखता था मुझे बड़ा एकदम पहली पहली बार ये सब पढ़ते तो एकदम इंस्पायर हो जाते थे तो ये भी एक था कि एक्सपेंशन इज लाइफ कंट्रक्शन इज डेथ मने इ अ वर्ल्ड फेमस स्वामी जी का सूत्र ऑल लव इज एक्सपेंशन ऑल सेल्फिश इज कंट्रक्शन देखिए किंतु इसकी व्याख्या स्वामी जी ने क्या कही है एक्सपेंशन यानी कि पैसों का एक्सपेंशन सत्ता का एक्सपेंशन अथॉरिटी का एक्सपेंशन पावर का एक्सपेंशन वो नहीं प्रेम का एक्सपेंशन स्नेह का करुणा का दया का एक्सपेंशन और जितनी भी ट्रेड है जितनी भी सेल्फिश है व्हिच इज एक्चुअली कंट्रक्शन कंट्रक्शन का अर्थ यह नहीं कि कल मेरे पास में 10 लाख का बैंक बैलेंस था आज 1 लाख का हो गया मेरे भीतर में दूसरों के प्रति ये क्रोध या तो फिर य दूसरों के प्रति ये नाराजगी यह जितना बढ़ेगा उतना ही मेरी आत्मन में सिकुड़ते जाएगी माने मेरा मन जो है वो सिकुड़ता जाएगा और मन के भीतर में जितना प्रेम है उतना ही मन का एक्सपेंशन होता जाएगा तो यह है एक्सपेंशन इज लाइफ कंट्रक्शन इज डेथ की प्रॉपर डेफिनेशन लव इज देयर फोर द ओनली लो ऑफ लाइफ प्रेम ही है जीवन का सही सही नियम लो ऑफ लाइफ जीवन के नियम या तो फिर जीवन यह तो मनुष्य समाज यह प्रकृति किस नियम के आधारित किस साइंस के ऊपर में चल दिए तो प्रेम है वह साइंस वो फ फ्यूजन या तो कहेंगे फ्यूल जो कि सोसाइटी को चलाता है ही हु ली ही हु लव्स लीव्स ही हु इज सेल्फिश इज डाइंग जो प्रेम करता है वो जीता है जो सेल्फिश यानी कि वो जो कृपण है कंजूस है ना कि ये स्वार्थी है वो मृत्यु पाम रहा है वो धीरे-धीरे करके उसका सीना उसका मन उसका हृदय सिकुड़ रहा है देयर फॉर लव फॉर लव से प्रेम की प्रेम के लिए प्रेम करो ऐसा नहीं कि हां मुझे कोई वो जो होता है ना जो बड़े-बड़े जो रिश्तेदार होता है ना जिसके पास में बड़ा बहुत ज्यादा पैसा है तो बाकी सब रिश्तेदार उसके आसपास में घूमते रहते हैं कि जब यदि उसका मृत्यु होगा तो हमको कुछ ना कुछ देक जाएगा अपने विल में वारसे में तो ऐसा इस तरह का वो इस तरह का वो सेल्फिश प्रेम नहीं लव फॉर द सेक ऑफ द लव प्रेम के लिए प्रेम करो बिकॉज इट इज ओनली लॉ ऑफ लाइफ जस्ट यू ब्रीद टू लीव माने प्रेम ही जीवन का एकमात्र सत्य है जैसे कि हम सांस लेते हैं जीने के लिए तो प्रेम भी करना है जीने के लिए दिस इज द सीक्रेट ऑफ निष्काम प्रेम यह निष्काम प्रेम का सही सही सीक्रेट है कर्म एट्स अर्थात कि निष्काम प्रेम और कर्म का यही सीक्रेट है कि सेल्फलेस होना है जितना सेल्फलेस होंगे उतना ही दूसरों के प्रति दया करुणा ममत्व बढ़ता जाएगा जितना सेल्फिश होंगे उतना ही दूसरों के प्रति नाराजगी दूसरों की निंदा करने का भाव दूसरों के प्रति एक वितृष्णा दूसरे लोगों के पीछे-पीछे उनकी निंदा स्वामी जी एक जगह पर कहते हैं यदि एक मित्र आपके साथ में दूसरे मित्र के बारे में निंदा करता है अकेले में ले जा कर के तो उस मित्र को बिल्कुल छोड़ दो माने कि यह मित्र नहीं आपका शत्रु है क्योंकि आपको वो ध् वेष सिखाता है आपको वो नफरत सिखाता है तो नफरत नहीं प्रेम करो ये बड़ा ही वैसे लगता है बड़े ही चिला चालू सेंटेंस है किंतु इसके भीतर में जद वेदांत का डेप्थ यदि लाया जाए तो पता चलेगा कि जो कि ब बहुत ही कॉमन यह जो सब सेंटीमेंट्स है कि नफरत छोड़ो प्रेम करो तो मैंने इसके भीतर में जो पावर है वेदांतिका हम डेप्थ में मीनिंग समझ पाते हैं तो आज यही तक कल फिर से मिलते हैं ओम शांति शांति शांति हरि ओम तसत श्री राम कृष्णर्पण
Question Answer
मस्तु ये आइड अनसल थी ना यह स्वामी जी जो सेकंड टाइम विदेश में गए थे ना तो आडा अनसेल उस समय क्योंकि उस समय तो गुडविन नहीं था तो स्वामी जी के ये जो पचस वगैरह अपने पास में आई इसलिए है कि वो आडा अनसेल शॉर्ट हैंड की प्रैक्टिस करती थी किंतु अनच नेटली होता क्या था वो शुरू में तो लिखे गी फिर स्वामी जी जो बोलते उसनी डूब जाती बाकी का चला जाता तो बहुत ज्यादा अच्छा बोलने से ये प्रॉब्लम है इसके बारे में एक ही कमेंट कि स्वामी जी ने एक बार कहा था कि यह जो सब बोध कथाएं पढ़ते हो तो ये विद्यासागर की सब अच्छी चोरी नहीं करना है झूठ नहीं बोलना है बी ए गुड बॉय यह सब तुम लोग जो पढ़ते हो किंतु यह तो सिखाते हो नहीं कि हाउ टू बिकम ए गुड बॉय तो जब तक यह नहीं सिखाओ ग तब तक इन बातों का कोई असर नहीं होगा यह स्वामी जी का एक स्टेटमेंट है हम लोग जब यह सुनते हैं ना स्वामी जी की बात कि जगत का कल्याण करना चाहिए या तो अपना जो मोटो है आत्मन मोक्षार्थम जगत हिताय अभी क्या है कि राम कृष्ण मिशन का कैरेक्टर एक डिफरेंट कैरेक्टर है हम लोग अवतार का एक मेनिफेस्टेशन है पृथ्वी के ऊपर में मटेरियल मेनिफेस्टेशन है और हमारा एक मिशन है रामकृष्ण मिशन है रामकृष्ण यहां पर जो अपने के लिए पूरे विश्व के उत्थान के लिए जो करना है वह जो मैसेज हमको देखके गए हैं वो मैसेज को प्रैक्टिकल करवाने के लिए अप्लाई करने के लिए हमारे यहां पर सब लोग यहां पर आते हैं अभी रामकृष्ण मिशन को यदि छोड़ दे और जैसे मैंने कहा कि इस वॉलंटिली कहीं कोई सद गृहस्थ है किसी ने किसी का एक छोटा सा आश्रम है वहां पर चला गया और अभी उसको आप जाकर के मिलेंगे भी उसको यह नहीं पता बड़े-बड़े शब्द कुछ नहीं पता किंतु आप उसके पास जाएंगे बिना खिलाए आपको छोड़ेगा नहीं उसके हृदय में है ना सेल्फिश चली गई है सेल्फलेसनेस आ गया है प्रेम और करुणा आ गई है सो दिस इज एक्चुअली समष्टि साधना समष्टि साधना अर्थात सिर्फ यह नहीं रामकृष्ण मिशन की बात छोड़ दे दिस इज एक यूनिक ऑर्डर किंतु समष्टि साधना यदि जनरली देखा जाए तो यह नहीं कि मैं बहुत सारे लोगों के संपर्क में आकर के बहुत सारे लोगों को हेल्प करने का प्रयास करूंगा मैं जहां पर भी रहता हूं मान लीजिए छोटी सी कुटिया भी है नर्मदा के किनारे कोई भी नहीं आता और जो ये जो ये ये जो होती है ना स्क्विरल उसको भी मैं ये चिड़िया उसको भी मैं जद एक जो कुछ खाने को खिलाता हूं वो मेरा भीतर का जो विश्व के प्रति प्रेम है ना यह मेनिफेस्ट करता है तो दया का यह मेनिफेस्टेशन करना है दया का भाव बढ़ाना है वो दैट इज द एक्चुअली समष्टि साधना रामकृष्ण मिशन में जो हम कर रहे हैं दैट इज अ कंपलीटली डिफरेंट लेवल ये एक वर्ल्ड मिशन है स्वामी जी का और हम लोग ये समझ कर के ही आए हैं कि हमको यह सब करना ही है सो दैट इज अ डिफरेंट थिंग ऑल टूगेदर किंतु यदि आप एक जनरल एक ट्रेडिशनल साधक है तो ऐसा नहीं है कि व्यष्टि समष्टि आपको अलग-अलग करना होगा एक अपने एक छोटे से झोपड़ी में रहिए एक कोई आदमी गरीब आदमी सामने आता है तो उसको खाना खिला दीजिए तो वह स्नेह और प्रेम का जो प्रदर्शन होता है ट इट सेल्फ इज समष्टि साधना उसके लिए और कुछ अलग से नहीं करना समझ की साधना यस जद बड़ा हॉस्पिटल चलाते हैं इस मने मान लीजिए मैं पैसा मुझे नहीं चाहिए किंतु 10 लोग सुनेंगे मैं 10 लोगों के सामने जाकर बोलूंगा उस हॉस्पिटल में मैं ट्रस्टी हूं वहां पर मैं डायरेक्टर हूं तो वह भी तो सेल्फिश हो जाएगा यानी कि बात यह नहीं है कि आपकी एक्शन क्या है एक्शन के पीछे का हेतु इंटेंशन क्या है इन सब चीजों का कोई सिंपल सोल्यूशन नहीं है आप जिस परिस्थिति में है उस परिस्थिति में आपको थोड़ा सा सोचना पड़ेगा कि मैं कहां तक अपने को एक्सपोज करता हूं कहां तक मैं नहीं करता हूं ये सर मैंने खुन जमन तखन ते मन जैसा मां कहती है ना कि अभी जैसे मान लीजिए कि अभी कुछ ही दिनों पहले की बात है हम लोग ये ऑडियो बुक बना रहे हैं तो अभी सडन किसी के पास चली गई तो वो आकर के मेन ऑफिस में आकर बोलता है आप लोग ऑडियो बुक बनाए इसलिए मुझे डोनेशन देना है तो वो उन लोगों ने यहां प भेज दिया पब्लिकेशन में आकर के बैठ गया तो मैंने कहा तो ये तो अच्छी बात है भाई ठाकुर ने आपको ये सद्बुद्धि दी हमको हमने तो किसी को बोला नहीं था ऑडियो बुक तो हम अपने ही पैसों से बना रहे हैं किसी को बोला नहीं है डोनेशन देने को आपने सुन कर के आपके के मन में हो गया अच्छी बात है हम लोग ऑडियो बुक में आखिर में एक्नॉलेजमेंट देते हैं आपका नाम दे देंगे बोला नहीं नहीं नहीं नहीं नाम नहीं चाहिए नाम नहीं चाहिए पैसा ले लो नाम नहीं चाहिए तो मैंने कहा ये भी गुड देखिए कि वो सामने से आ गया पैसा भी दे दिया और अभी मेरे अलावा किसी को पता नहीं है कि उसने ऑडियो बुक के लिए पैसा दिया तो ऐ लोग भी होते हैं मैंने क्या है कि चॉइस अपने यही तो एक स्ट्रगल है ना स्वामी जी कहते हैं कि यही तो एक स्ट्रगल है आप जगत में रहेंगे ये प्रलोभन तो आपके सामने आने ही वाले हैं ऐसा कहेंगे कि मैं प्रलोभन से दूर चला जाऊं तो कहीं हिमालय में जाकर के वह गुफा में रहना पड़ेगा ऐसा तो संभव नहीं मैं पब्लिकेशन है यहां पर हूं हजार प्रलोभन आते ही है स अभी तो अपना विवेक है विवेक शब्द ही उसका अर्थ यही है स्वामी जी का नाम ही है विवेकानंद ये पता था कि ये विवेक ही आज की साधना का एक इंटीग्रल पार्ट है वो विवेक तो अपने को रखना है फिर अब सेंटीमेंट में आकर के मैं किसी चीज के साथ में इतना इवोल्व हो जाऊ ऐसा होता है मैंने लिटरली देखा है कि ऐसे कोई आश्रम में कोई प्रवृत्ति चल रही है कोई वॉलंटस के साथ में इतना इवॉल्व हो गया है कि फिर जब वो एडमिनिस्ट्रेशन चेंज होता है ना तो नए जो एडमिनिस्ट्रेटर है उनको अच्छा नहीं लगता कि भाई ये इतना इवॉल्वमेंट क्यों है दूसरों को भी थोड़ा सा चांस दो अभी उनको एक थोड़ा सा हिंट भी देंगे ना कि भाई आपको इतना सब कुछ करने की जरूरत नहीं थोड़ा दूसरों को भी करने दो सबका तो आश्रम है सबको सेवा का चांस दो तो उनको इतना बुरा लग जाता है अरे मैं इतने सालों से सेवा की अभी मेरे साथ में इस तरह से उन्होंने बकुल मुझे ठुकरा दिया मन में इतना आघात लगता है लिटरली मैंने यह सब देखा है ने आकर के रोते हैं महाराज इतने सालों की मेरी सेवा और आखिर में मुझे यह देखना पड़ा तो देखिए कि आप सेवा करते थे तो आप अटैच भी तो हो गए थे यदि आपको बोला जाए आपने 10 साल एक यहां पर उत्सव हो रहा है 10 साल आपने यहां पर कार्य किया एक पार्टिकुलर ड्यूटी आज कहीं बोला जाए कि कल से मत करना तो ऐसा फट करके खड़े होकर चले जाना है वोह आपकी सेवा की 10 साल की सेवा की वो सार्थकता है वरना तो तो आप अटैच हो गए तो फिर तो सेवा का क्या अर्थ रहा तो वो विवेक मैंने जैसे कहा ना कि वो हॉस्पिटल चलाते हैं कि एक छोटी सी कुटिया में बैठ कर के एक चिड़िया को दाना डालते हैं वो फर्क नहीं है माने डिफरेंस कहां भी आपका इंटेंशन क्या है इसके पीछे मैं मैं जब यहां पे मैं जब शुरू शुरू में आया था ना तो एक सीनियर साधु के साथ में बात करने का मुझे बहुत मौका मिला था इट इज माय गुड फॉर्च्यून तो मैं एकदम उनको क्वेश्चन प क्वेश्चन करता रहता था मैं कहता था स्वामी जी ने कहा पूरे विश्व को बदल देना है और अपने इतने ही स्कूल है इतनी ही हॉस्पिटल है क्यों हम नहीं बढ़ाते इसकी संख्या तो उनका कहना था कि हमको लोगों को एक मॉडल देके जाना है ऐसा नहीं है कि मैं एक 10 स्कूल है आज तो मैं 100 स्कूल कर दूं 10 स्कूल को इतना अच्छे से चलाओ कि बाकी हजार स्कूलों को यहां से एक आदर्श मिले लोग विजिट करने के लिए दूसरे स्कूलों से टीचर और स्टूडेंट आए देखे यहां की एडमिनिस्ट्रेशन सिस्टम कैसी है टीचिंग सिस्टम कैसी है विद्यार्थियों को कैसे ट्रेन किया जाता है वो देख कर के सीख के जाए वी आर टू गिव देम ए मॉडल नॉट टू एक्सपें अवर एक्टिविटीज ये तब मुझे एक अच्छा लगा था किंतु उसका उनके पीछे जो एक डीपर मीनिंग जो है ना वो यह है बात यह नहीं है कि हम स्कूल कॉलेज की संख्या बढ़ाए हम इसके पीछे जो अपनी केयर जो है अपना प्राण है इसमें डाले तो ठाकुर के पास में कितने लोग आते थे ये डजन मने बोल दो कि ये त्यागी लड़के और बाकी एक दो डजन बोल दीजिए गृहस्थ तो उसी में सेय रामकृष्ण मिशन खड़ा हो गया ठाकुर के पास जितने नहीं आते थे उतने तो आज राजकोट जैसे एक सेंटर में आते हैं और ऐसे तो 200 सेंटर है बेलूरमठ की तो बात ही अलग है तो आज लगता है अभी आज किंतु अपने राजकोट में से कोई दूसरा विवेकानंद नहीं निकलने वाला [हंसी] है देखिए ऐसा होता है मेरे एक कभी किसी के साथ बात हो रही थी एक साधु के साथ में ही तो उन्होंने कहा कि देखो कि यदि तो उनको अच्छे से खिलाना है अच्छे से खिलाएंगे तो लोग आएंगे यहां पर काम करेंगे मैंने कहा नहीं महाराज यदि अट्रैक्ट करना है तो उनके साथ-साथ में काम करने लगना है तभी से उसी से वॉलेटर लोगों को ज्यादा प्रेरणा होगी माने आपको कुछ दे दिया वो तो बड़ा चीप हो गया मैंने आश्रम में इनफ खाने पीने का है आपने ये वो 10 अभी कुछ काम है 10 लोगों को ट्टा करके अच्छा सा खाना खिला दिया दैट इज वन थिंग किंतु साथ-साथ में काम करने लगी है माने दैट मींस के वी एक्चुअली केयर अबाउट देम वी केयर अबाउट दिस व ये जो ह्यूमन रिलेशन जब क्रिएट होगा तभी लोग यहां पर एक्चुअली अट्रैक्ट होंगे ऐसा बहुत बार होता है कि छोटा सा आश्रम है ज्यादा कुछ नहीं है किंतु फिर भी इतने कुछ कुछ लोगों को वहां परही जाना अच्छा लगता है हो सकता है कि वहां पर आपको खाने का भी ना मिले अपना खुद का खर्चा करके वहां पर रहना पड़े किंतु अच्छा लगता है क्योंकि वहां पर वो केयर है वहां पर एक प्रेम है सो ट इ द मां जैसे कहती है भालोबाशा ही अमाद आसल मने प्रेम ही इस संघ का फाउंडेशन है h