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कृत्रिम चेतना --- वास्तविक आत्म ज्ञान || 5 dec 2024 || Artificial Intelligence but real Atma Jnana

Preface

ओम स्थापक यच धर्मस्य सर्व धर्म स्वरूपिणी अवतार वरिष्ठ राम कृष्णाय ते नमः एक बार स्वामी विवेकानंद अमेरिका में थे तो एक लड़का था व स्वामी जी को पूछता है ईश्वर क्या है व्ट इज गॉड हु इ गड सो अभी एक अमेरिकन

Swami Vivekananda

लड़का उसका जो अंडरस्टैंडिंग है ईश्वर का भगवान का स्पिरिचुअलिटी का वह एक हिंदू साधु से कितना डिफरेंट होगा तो प्रश्न होगा कि स्वामी जी एक लड़के को किस तरह से वेदांत समझाएंगे जिसका कि एब्सलूट कोई हिंदुइज्म में ना कि रिलीजन या तो स्पिरिचुअलिटी में कोई बैकग्राउंड है तो देखिए स्वामी जी इतना सुंदर उपमा देते हैं कहते हैं कि तुम्हारी आंख जो है वो तुम्हारे इतनी नजदीक है इन आंखों से तुम पूरे जगत को देखते हो यह आंख एकदम तुम्हारे एकदम कहेंगे कि इतनी पास है और इसी से तुम समग्र जगत को देखते हो किंतु यदि तुम अपनी आंख को देखना चाहोगे तो कैसे करोगे वो हो ही नहीं सकता मने मिरर में देखना वह एक ऑप्शन है किंतु डायरेक्ट यदि अपनी आंखों को देखना है तो हम नहीं देख पाएंगे तो यह जो है ना क्यों क्योंकि आंख है सब्जेक्ट और यह जगत है ऑब्जेक्ट तो सब्जेक्ट के माध्यम से आप ऑब्जेक्ट के साथ में इंटरेक्शन करते हैं उनका दर्शन करते हैं उनको श्रवण करते हैं उनको स्पर्श करते हैं सब कुछ करते हैं किंतु जो सब्जेक्ट इट सेल्फ है उसको आप कैसे देखेंगे उसके साथ में देखना जो क्रिया है वह एक कर्म है वो कर्म सब्जेक्ट के साथ में आप जोड़ ही नहीं सकते देखिए कि फिलोसॉफिकली कितना पावरफुल कांसेप्ट है यह जितना भी कर्म है कर्म हमेशा ऑब्जेक्ट के साथ में जुड़ा हुआ है सब्जेक्ट के साथ में नहीं मैं मेरी आंख के द्वारा इस आपको देखता हूं मैं मेरी आंख के द्वारा इस टेबल को देखता हूं मैं मेरी आंख के द्वारा इस किताब को देखता हूं तो यह किताब है या यह टेबल है या आप लोग है या यह बिल्डिंग है या समुंदर है थोड़ा सा यहां से बाहर निकल जाइए तो यह सब मेरे लिए ऑब्जेक्ट है मैं अपनी आंखों के द्वारा ऑब्जेक्ट को देखता हूं तो ऑब्जेक्ट के साथ में क्रिया या कर्म एसोसिएटेड है जो भी मेरे भीतर में नहीं है जो भी मेरे बाहर में है उसके साथ में ही एक कर्म एसोसिएटेड है किंतु मैं खुद मेरी खुद की आंख आंख आंख को कैसे देखेगी यह तो माने कंट्रा इन टर्म हो जाता है आंख के माध्यम से हम सब कुछ देखते हैं आंख आंख को कैसे देखेंगी उसका प्रतिबिंब देख सकती है वह अपने को नहीं देख सकती यानी कि सब्जेक्ट का सब्जेक्ट के साथ में इंटरेक्शन नहीं हो सकता आप यह कहते हैं कि आप इस सब्जेक्ट के साथ में स्थित है आप ऐसा कह सकते हैं कि ये सब्जेक्ट के माध्यम से आप जीवित है आप यह नहीं कह सकते कि मैं इस सब्जेक्ट के साथ में इंटरेक्ट कर रहा हूं मैं अपने साथ में इंटरेक्ट नहीं कर सकता मैं अपने साथ में जी सकता हूं तो हमेशा देखिए कि जहां पर भी कर्म है वह हम ऑब्जेक्ट के साथ में ही करते हैं यह सब्जेक्ट ऑब्जेक्ट का डेफिनेशन में कभी भी हमको यह कंफ्यूजन खड़ा हो कि सब्जेक्ट क्या है और ऑब्जेक्ट क्या है सब्जेक्ट अर्थात कि मैं मेरी अवेयरनेस मेरा सही स्वरूप और ऑब्जेक्ट वही है जो कि बाहर के जगत में जो कुछ भी है वह सब ऑब्जेक्ट है अभी जैसे मेरे मन में विचार चल रहे हैं तो विचार चल रहे हैं अर्थात कि कर्म हो रहा है कर्म हो रहा है अर्थात कि जिन विषयों के बारे में मैं सोच रहा हूं व मैं नहीं हूं दैट इज समथिंग एल्स समथिंग अदर देन आई एम वह ऑब्जेक्ट है और जो सोच रहा है जो प्योर अवेयरनेस है वह है मेरा सब्जेक्ट तो स्वामी जी यहां पर इतने सुंदर छोटे से उदाहरण से यह लड़के का नाम था मोस्ट प्रोबेबली होलिस्टन तो उसको किस तरह से समझा दिया कि अद्वैत वेदांत का जो कोर कांसेप्ट है एक है सब्जेक्ट एक है ऑब्जेक्ट सब्जेक्ट इज प्योर अवेयरनेस प्योर बीइंग और ऑब्जेक्ट है हमारे अलावा इस जगत में जो कुछ भी है दूसरे मनुष्य पेड़ पौधे आइडियाज थॉट्स क्रिएटिविटी इमोशंस वह सब ऑब्जेक्ट है और इन दोनों के बीच में जो इंटरेक्शन होता है वह है कर्मा और अद्वैत वेदन का फाउंडेशन सिद्धांत क्या है क और ज्ञान एक साथ में नहीं रह सकते अर्थात कि जब तक अपनी जो प्योर अवेयरनेस है वह इस विचारों के साथ में सेंटीमेंट्स के साथ में इमोशंस के साथ में आइडियाज के साथ में लोगों के साथ में इंटरेक्ट करती रहेगी उनके साथ में किसी ना किसी तरह का संबंध बनाए रखेगी तब तक कर्मा होता रहेगा और जब तक यह कर्म होता है तब तक हमको आत्मज्ञान प्राप्त नहीं होगा तो यह हो गया प्योर अद्वैत वेदांत और यही प्योर अद्वैत वेदांत को स्वामी जी इतने सुंदर छोटे से उदाहरण से वह लड़के को समझाते हैं अमेरिकन लड़का है ना ही उसको वेदांत समझ में आता है ना ही धर्म आध्यात्मिकता का कोई बैकग्राउंड है फिर भी वह इस उदाहरण के माध्यम से समझ गया कि हां मैं बोलकर के एक इंडिविजुअल एक एक अस्तित्व है बहुत बार क्या होता है कि हम लोग मैं जो हूं मेरी एक प्योर अवेयरनेस है उसको रिकॉग्नाइज ही नहीं करते हम लोग यह जो कर्म चल रहा है अपने मन में वोह जो कहते हैं ना वो जो एक फिलोसोफर था कोजो एर गोसम आई थिंक देयर फॉर आई एम वो कहता है मैं सोच रहा हूं देयर फॉर यह प्रूव करता है कि मेरा अस्तित्व है नहीं एक्चुअली जो आप सोच रहे हैं वो तो ऑब्जेक्ट के साथ में इंटरेक्ट कर रहे हैं जब यह सोचना बंद होगा तब तो मेरा सही सही अस्तित्व प्रूव होगा यानी कि वेस्टर्न फिलोसोफी और ईस्टर्न यानी कि वेदांत फिलोसोफी में यह फंडामेंटल डिफरेंस है वे लोग ऑब्जेक्ट को ही रियलिटी समझते हैं और ऑब्जेक्ट को का ही स्टडी करके उन्होंने यह साइंस टेक्नोलॉजी बायोकेमिस्ट्री यह चांद पे रॉकेट भेजना यह सब खोज निकाला है अच्छी बात है नहीं है ऐसा नहीं जद यह ग्रीन रेवोल्यूशन भारत में नहीं आता तो यह भारत की 150 करोड़ की पॉपुलेशन है हम लोग बुखे म जाते एक समय था आफ्टर इंडिपेंडेंस कि हमको बार-बार विदेश में से यह अन्न धान वगैरह इंपोर्ट करना पड़ता था फिर यह अमेरिका बड़े-बड़े कंटेनर भेजेगा भारत में फिर उसमें लिखा होगा भारतवासियों को अमेरिका की गिफ्ट यानी कि ऐसा व कि यह गरीब लोग है इनको हम भिक्षा दे रहे हैं पूरा भारत जैसे कि भिक्षा के माध्यम से यह अन्न ग्रहण करता था टुडे वी आर नेट एक्सपोर्ट ऑफ दी फूड ग्रेन आज भारत में इतना धान इतना अन्न उपज होता है प्रोड्यूस होता है कि हम लोग पूरे विश्व में इसको एक्सपोर्ट करते हैं यह जब कोरोना पेंडम स्टार्ट हुआ था उस समय कुछ समय के लिए हमने यह गेहूं वगैरह का एक्सपोर्ट बंद कर दिया उसमें अमेरिका को आकर के कहना पड़ा कि आप लोग यदि एक्सपोर्ट बंद करेंगे तो फिर दूसरे देशों का क्या होगा तो यह ग्रीन टेक्नोलॉजी यह सबके माध्यम से यह संभव हुआ है तो ऐसा नहीं है कि ऑब्जेक्ट का स्टडी करना या तो फिर ऑब्जेक्ट का एक इंडिपेंडेंट अस्तित्व वह उसको डिस्प्रूव नहीं करते हैं वही कहते हैं कि जो अल्टीमेट रियलिटी है इस जगत में दैट इज द सब्जेक्ट यह आत्मन या तो फिर यह ब्रह्मण या तो फिर यह प्योर अवेयरनेस यह प्योर अवेयरनेस के माध्यम से ही हम पूरे जगत को ग्रहण करते हैं पर्सीव करते हैं रिकॉग्नाइज करते हैं इंटरेक्ट करते हैं यदि यह प्योर अवेयरनेस को ही हम भूल यह ऑब्जेक्ट का ही स्टडी करते रहे और यह जो इंटरेक्शन है यानी कि कर्म यानी कि हमारे विचार य साइकोलॉजी यह लोग किसको कहते हैं यह जो इंटरेक्शन हो रहा है अपने माइंड में प्योर अवेयरनेस और यह आइडियाज के बीच में इसको यह लोग साइकोलॉजी कहते हैं इंडियन साइकोलॉजी बिगिंस फ्रॉम द डे कि जब आपके माइंड का इंटरेक्शन समाप्त हो जाएगा फ्रॉम देन पॉइंट ऑनवर्ड इंडियन साइकोलॉजी बिगिंस यानी कि वेस्टर्न साइ लॉजी यह कर्म को ही प्रधान रूप से स्टडी करने का प्रयास करती है हमारा वेदांत कहता है कि जिस दिन कर्म रुक गया उसी दिन तो आपका सही जीवन प्रारंभ होगा हमारे ब्रह्मानंद जी महाराज प्रथम प्रेसिडेंट राजा महाराज क्या कहते हैं

raja mj

इतना एक प्रोफाउंड स्टेटमेंट स्पिरिचुअल लाइफ बिगिंस फ्रॉम द निर्विकल्प समाधि फ्रॉम द डे यू अटन समाधि जिस दिन समाधि प्राप्त की उसी दिन से तो आध्यात्मिक जीवन का प्रारंभ होता है तो देखिए कि हम लोग हम लोग अभी भी यह विचार है आइडियाज है थॉट से इसके इलाके में फंसे हुए हैं कम कब हम यह आइडियाज या कर्म को क्रॉस करके यह प्योर अवेयरनेस के क्षेत्र में पदार्पण करेंगे प्योर अवेयरनेस का यह जो राज्य है उसमें रहना सीखेंगे विद्या के संसार में सही सही वो पता नहीं उस बात को कितना टाइम और लगेगा अच्छा यह जो सब

Advancements in modern science: Photon Image

मैं कहा यह जो एक बैकग्राउंड बनाया उसके पीछे का एक कारण है मैं दो-तीन दिन पहले पढ़ रहा था कि फोटोन का फोटोग्राफ इन्होंने लिया है फोटोग्राफ नहीं किंतु उसको एक तरह से यह किया है रेंडर किया है

photon pic

कंप्यूटर में कि फोटोन इस तरह से दिखना चाहिए साइंटिफिकली प्रूव करके कि इस तरह से मैथमेटिकल कैलकुलेशन करके उसकी जितनी भी प्रॉपर्टीज है उसको टेकन फॉर टेकन इनटू अकाउंट करके के इस तरह से आपको फोटोन दिखना चाहिए तो यह फोटोन का फोटोग्राफ में देख रहा था रेंडर्ड इमेज मुझे एगजैक्टली स्वामी जी की यह बात याद आ गई कि आप आंख को कैसे देखेंगे देखिए फोटोन क्या है फोटोन अर्थात कि प्रकाश की जितनी भी किरणें हैं वह सब फोटोन से बनी हुई है यह फोटोन ही है जो कि प्रकाश देता है यह इलेक्ट्रोमैगनेटिज्म का जो पूरा स्पेक्ट्रम है रेडियो वेव से चालू करके यह इंफ्रारेड है फिर यह जो प्रकाश की किरण जिसको कि विजुअल लाइट कहते हैं यह जो कोई भी लाइट का सोर्स है चाहे सूरज हो ना कि चाहे ट्यूबलाइट हो ना कि चाहे लैंप हो कुछ भी हो यह प्रकाश का किरण जब ये सोर्स में से निकलता है तभी तो हमारी आंखों में प्रकाश का किरण जाता है और उसी के माध्यम से हम कुछ देखते हैं सब कुछ देखते हैं यानी कि जैसे कि चांद का प्रकाश है सूरज का प्रकाश सूरज प्रकाश को प्रकट करता है फिर यह प्रकाश की किरणें चांद गिरती है फिर चांद का जो रिफ्लेक्शन है प्रकाश का वह हम देखते हैं तो हमको चांद दिखता है जगत में जो कुछ भी देखते हैं वो सूरज के प्रकाश से ना कि ये ट्यूबलाइट के लैंप के प्रकाश से प्रकाशित होकर के हमको दिखता है तो यह प्रकाश की किरण है वो है फोटोन इसका पूरा स्पेक्ट्रम है रेडियो रेडियो वेवलेंथ फिर ये इंफ्रारेड फिर ये अल्ट्रा वायोट्स रे यह पूरा इलेक्ट्रोमैग्नेटिक स्पेक्ट्रम है और यही स्पेक्ट्रम यह जगत में जो कुछ भी इंफॉर्मेशन की आपले होती है उसको यह उसको यह इंटरेक्ट करता है यानी कि अपने माइंड में जिसको हम यह कहते हैं ना कि यह मैं सेल्फ मेरी अवेयरनेस है मेरा सब्जेक्ट है सब्जेक्ट के माध्यम से मैं सब कुछ देख रहा हूं यहां पर प्रकाश की किरणों के माध्यम से हम सब कुछ देखते हैं यदि प्रकाश की किरण नहीं होगी तो पूरे विश्व ब्रह्मांड में अंधेरा छा गया होता हम ये आंख बोल करके जो यह अपना अंग है उसकी कोई जरूरत ही नहीं होती बहुत बार आप जद समुंदर के एकदम भीतर में जदी डाइव लगाएंगे डुबकी मारेंगे एक्सप्लोरेशन करेंगे तो पता चलेगा इस तरह की मछलियां रहती है जिनकी आंखें ही नहीं है वोह सोनार वेव्स के द्वारा वह इंटरेक्ट करती है क्यों क्योंकि समुंदर की इतनी गहराई में प्रकाश की किरण जाती ही नहीं है तो प्रकाश की किरण जाती नहीं तो प्रकाश की किरणों को देखने के लिए आंख की जरूरत नहीं तो आंख की जरूरत नहीं तो आंख इवोल्व ही नहीं हुई तो बिना आंखों की मछलियां पशु आपको यह वहां पर समुंदर की गहराई में देखने को मिल जाएंगे तो मान लीजिए यदि यह प्रकाश की किरण विश्व ब्रह्मांड में नहीं होती कॉस्मो में तो हम सभी लोग अंधे होते इवन अंधा शब्द भी नहीं होता क्योंकि आंख नहीं है पहले तो आंख है फिर बाद में आंख नहीं है तो अंधा शब्द अंध शब्द जो है वह प्रयोग में आया जो चीज अपने पास में है ही नहीं उसका हम अभाव ही नहीं बोध करते हैं माने जगत में इंटरेक्शन ही शायद रुक जाता तो जिसके माध्यम से हम सब कुछ देखते हैं उसी का फोटोग्राफ ये साइंटिस्ट लोगों ने ले लिया है फोटो नहीं ये रेंडरिंग इमेज रेंडरिंग तो ये एगजैक्टली ऐसा हो गया कि ये अपनी आत्मन को देखने वाली बात मैं अपनी आंखों को देख रहा हूं जिसके माध्यम से पूरे जगत को देखता हूं उसको ही मैं देख रहा हूं ये इस तरह से एक इक्विवेलेंस हो गया तो देखिए यह टेक्नोलॉजी किस तरह से यह एडवांस कर रही है किसी ने यह सपने में भी नहीं सोचा होगा कि हम लोगों को यह एक्चुअली हम उसका जो रियल रिप्रेजेंटेशन है फोटोन का इसको हम देख सकते हैं ऐसा किसी ने सोचा नहीं होगा कि मशीन सोच रहे हैं अभी कुछ ही दिनों पहले सेम ऑल्टमैन

Advancements in AI: AI to AGI to ASI

करके ओपन एआई का सीईओ है तो उसने एक इंटरव्यू दिया वह कहता है कि हम लोग सोचते थे कि जो पहले तो एक है एआई अर्थात कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तो यह एआई क्या करती है एआई क्या है उसका टेस्ट क्या है पता है जिसको कहते हैं टूरिंग टेस्ट टूरिंग बोलकर के एक साइंटिस्ट था उसने यह टेस्ट की बनाया कि आप आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को डिफाइन कैसे करेंगे मैं जैसे कंप्यूटर में एक प्रोग्राम है इस प्रोग्राम के माध्यम से मैं टाइप करता हूं जैसे कि वर्ड प्रोसेसर है फिर ये एक स्प्रेडशीट एक का एक प्रोग्राम है जिसके माध्यम से मैं कैलकुलेशन करता हूं तो आपको लगेगा कि अरे यह कैलकु करने वाले प्रोग्राम में तो बुद्धि है अकल है मुझे जिस तरह से कैलकुलेशन करना आता है वह प्रोग्राम भी करता है किंतु क्या है कि एक्सेल या इस तरह का कोई भी स्प्रेडशीट होता है उसकी सोचने की कार्य करने की शक्ति बड़ी ही लिमिटेड होती है बड़ी ही स्पेसिफिक होती है मैं जैसे आज कैलकुलेशन करूंगा तो कल पोएट्री लिखूंगा परसों दिन पेंटिंग करूंगा चौथे दिन में स्कूटर चला कर के बाजार में कहीं किसी काम के लिए जाऊंगा मल्टी लिटी है फिर ये जो इंटेलेक्चुअल डेप्थ है क्रिएटिविटी है वह सब तो यह स्प्रेडशीट में नहीं है तो यह एआई क्या है एआई का डेफिनेशन क्या है तो टूरिंग टेस्ट क्या कहता है कि आप एआई के साथ में वार्तालाप कीजिए उसके साथ में इंटरेक्शन कीजिए उसके साथ में डिस्कशन कीजिए ज यदि डिस्कशन करते-करते आपको लगे कि नहीं मैं मनुष्य के साथ में बात कर रहा हूं एक कंप्यूटर के साथ में नहीं तब पता चलेगा कि आप रियल रियल आर्ट फिशियल इंटेलिजेंस के साथ में बात कर रहे हैं तभी यह एआई का यह मानदंड है यह एक मेजरमेंट है कि हमने एआई लेवल को प्राप्त कर लिया है आज यह चैट जीपीटी हो ना कि इस तरह के जितने भी एआई चैट बोट है उनके साथ में आप डिस्कस करेंगे ना तो पता नहीं लगेगा कि यह मनुष्य नहीं है इतना इंफॉर्मेशन वर्सेटाइल इंफॉर्मेशन है मने आप उसको कहेंगे कैलकुलेशन करने को तो कैलकुलेशन कर देगा पोएट्री लिखने को पोएट्री लिख देगा उसको आपको कहेंगे मेरा टिकट बुक कर करवा दो तो वो किसी ऐप पे ऑनलाइन जाकर के मेरी इंफॉर्मेशन लेकर के किसी ऐप में लॉग इन करके मेरे लिए टिकट बुक कर दे इट विल डू एवरीथिंग ग्रोसरी शॉपिंग करना है तो इसको बोल दो कि नेक्स्ट एक वीक के लिए मुझे ये ये खाना बनाना है मुझे यह बना दाल दाल और चावल बनाना है यह दो-तीन तरकारी बनाना है इसके लिए शॉपिंग कर दो तो इतना जो इंफॉर्मेशन दिया एक सप्ताह चार आदमी का इतना खाना चाहिए ये ये खाना चाहिए उसके बेस पे वो शॉपिंग लिस्ट रेडी करके शॉपिंग ऐप है लॉग इन करके वह ऑर्डर दे देगा अपने बैंक अकाउंट में से ट्रांजैक्शन कर देगा उसको पेमेंट कर देगा यानी कि एक रियल पर्सन जैसा वह दिखता है किंतु इसकी भी लिमिटेशन है और जो साइंटिस्ट लोग कहते हैं कि इससे भी हायर है आर्टिफिशियल जनरल इंटेलिजेंस एजी आई और इसका भी एक सुपर एक अवतार है एएसआई आर्टिफिशियल सुपर इंटेलिजेंस तो यह सेम ऑल्टमैन जिसने कि यह चेट जीपीटी वगैरह चालू किया मैंने इसके पहले कोई सोचता भी नहीं था कि अपने लाइफ टाइम में हमको एआई देखने को मिलेगा तो वह तो एआई देखने को मिल गया और करोड़ों लोग प्रतिदिन एआई के साथ में इंटरेक्ट करते हैं किसी ने सपने में भी सोचा नहीं होगा कि ये एआई इतना पॉपुलर हो सकता है पहले तो लोग ऐसा ही सोचते थे कि एआई अर्थात मूवी में जो होता है वही व बड़े-बड़े साइंटिस्ट लोग एआई के साथ में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के साथ में बात करेंगे या उसके साथ में काम करेंगे हम आम आदमी को वो क्या है आजकल तो देखिए कि प्रत्येक कॉलेज का स्टूडेंट है स्कूल का स्टूडेंट है वह एआई के माध्यम से वह स्टडी करता है तो इतना मतलब ओवरनाइट इतना पावरफुल पॉपुलर हो गया है तो ये साइम ऑल्टमैन कहता है कि हम सोच रहे थे कि एजी आई जो है ईईआई तो आ गया आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आ गया अभी इसका नेक्स्ट अपडेट वर्जन है आर्टिफिशियल जनरल इंटेलिजेंस एजी आई व्हिच विल ब फार मोर कंप्रिहेंसिव मतलब एक पूरे मनुष्य की तरह वो फंक्शन कर एक रोबोट के भीतर में उसको बिठा देंगे रोबोट हमारी तरह काम करना शुरू करेगा अमेरिका की बड़ी-बड़ी कंपनियों में आज जो ह्यूमन जो है लेबर उसको हटा कर के रोबोट को रखना शुरू कर दिया है तो यह जीजीआई इस सेम ऑल्टमैन का इंटरव्यू देखा दो-तीन दिन पहले ही हुआ है कहता है कि हम लोग सोच रहे थे कि जीजीआई को आते-आते और शायद 510 साल लग जाए किंतु वीी विल सी जीजीआई एस सून एस 2025 माने नेक्स्ट ईयर ही हम को जीजीआई आर्टिफिशियल जनरल इंटेलिजेंस देखने को मिलेगा और फिर एएसआई आर्टिफिशियल सुपर इंटेलिजेंस वो कोई बहुत ज्यादा दूर नहीं है तो देखिए कि विद इन दिस फोर फाइव इयर्स फोर फाइव भी कहां ये चेट जीपीटी के साथ में मैंने पहली बार काम करना शुरू किया था मैं सब देखता रहता हूं तो मैं बिल्कुल अपडेटेड रहता हूं कि क्या लेटेस्ट डेवलपमेंट हो रहा है तो जिस दिन यह चेट जीपीटी लॉन्च हुआ था उसी दिन मैंने उसका अपना अकाउंट खोल दिया था उस समय फटा करके अकाउंट खुलता भी नहीं था आपको वेट करना पड़ेगा क्यों मैं तो मैंने अपना ईमेल आईडी डाल कर के रजिस्ट्रेशन करके फिर वो क्यों है उसमें मैं देख रहा हूं प्रतिदिन कि कब मेरा नंबर आता है तो शायद एक महीने के बाद में लॉन्च होने के एक महीने के बाद में वो उन्होंने मेरा वो एक्सेप्ट करके वो मेरा अकाउंट ओपन किया तब से मैं यह यूज कर रहा हूं जो इनिशियल वर्जन था चेट जीपीटी का और जितने भी चैट बोट है वो चाहे जेमिनी हो नक जितने भी हो सबको मैंने टेस्ट किया है तो बिल्कुल स्टार्टिंग से लेकर के आज तक देख रहा हूं कि जो क्वालिटी इंप्रूवमेंट हुआ है अद्भुत है और जद ये एआई ऐसा है तो जीजीआई क्या होगा जो कि नेक्स्ट ईयर हो सकता है कि रिलीज हो जाए और एएसआई क्या होगा आर्टिफिशियल सुपर इंटेलिजेंस य एएसआई के बारे में कहते हैं य एआई क्या है कि हम जो प्रश्न करेंगे या हमको जो पता है उसी का वह रिफ्लेक्शन है एएसआई का अर्थ है कि जो चीज हमको नहीं पता है यह सब चीजें यह खोज निकाली जैसे हमने कहा ना कि यह जो स्वामी जी कहते हैं कि हायर आइडियाज कहां से आते हैं हम लोग सुपरकॉन्शियस के टच में जब आते हैं नॉर्मल कॉन्शियस बस और नॉर्मल कॉन्शसनेस सुपरकॉन्शसनेस के बीच में एक जो ब्रिज बनता है तब यह हायर आइडियाज अपनी नॉर्मल कॉन्शसनेस में आना शुरू हो जाते हैं तो पता नहीं यह क्रिएटिविटी यहीं से आती है जो कि मनुष्य सभ्यता में कभी सोचा नहीं गया क्वांटम डायनेमिक्स या तो जनरल थिरी ऑफ रिलेटिविटी स्पेशल थिरी ऑफ रिलेटिविटी ये कंप्यूटर साइंस ये नैनोटेक्नोलॉजी ये ये जो बायोटेक्नोलॉजी जो कि मनुष्य सभ्यता में कभी नहीं खोजी गई थी कभी सोची नहीं गई थी यह सब टेक्नोलॉजी लास्ट 100 ईयर में हमने डेवलप किए अभी मान लीजिए कि अपने पास में आर्टिफिशियल सुपर इंटेलिजेंस आ जाता है व्हिच कैन एक्चुअली क्रिएट आइडियाज तो हम विश्व के जो प्रोफाउंड क्वेश्चन है व्हाट इज द नेचर ऑफ कॉस्मो व्हाट इज द नेचर ऑफ ह्यूमन सोल व्ट इज द मीनिंग ऑफ ह्यूमन लाइफ व्हाट इज डेथ व्हाट इज बियोंड डेथ यह सब प्रश्न जद उसको करेंगे वो उत्तर दे सकता है नाउ ऑफकोर्स

Objections

ये आज यह सब सुन करर के थोड़ा हंसी आती है कि जो चीज हम मनुष्य सभ्यता ने 10000 साल स्ट्रगल करके जो डेवलप की वो एक कंप्यूटर किस तरह से इसका उत्तर दे सकता है किंतु देखिए कि आखिरी 200 साल में जो साइंस ने डेवलपमेंट किया है जितनी भी बार हम लोग हंसे हैं कि अरे ऐसा हो ही नहीं सकता विदन वेरी शॉर्ट पीरियड ऑफ टाइम वह सत्य हो गया है और एक समय था कि हम लोग देखते थे मनुष्य थोड़ी ना पंखी की तरह उड़ सकता है पंखी का काम है उड़ने का मनुष्य का काम है चलने का तो आज 1905 1905 में राइट ब्रदर्स ने प्रथम एरोप्लेन उड़ाया अब यह मॉडर्न साइंस की दृष्टि से मैं अभी वह पुष्पक विमान वगैरह में नहीं जा रहा हूं मॉडर्न साइंस की दृष्टि से 1905 में प्रथम बाय पलेन जिसको कहते हैं एरोप्लेन उसको उड़ाया गया और 1970 तक 1968 यानी कि कितना समय पसार हुआ है 60 साल पसार हुए हैं 60 साल में मनुष्य चांद पर पहुंच गया जस्ट इमेजिन प्रथम बार उड़ने की शुरुआत की 1905 में और मनुष्य ने चांद पे पैर रखा 1968 के आसपास में 67 68 ऐसा ही कुछ समय है 60 साल के भीतर में हम लोग उड़ना सीख कर के चांद पर पहुंच गए ये जो रैपिड एडवांसमेंट है टेक्नोलॉजी का व्हिच इज माइंड बॉगलिंग तो आज हम लोगों को हंसी आती है कि जो चीज हमको ठाकुर कहते हैं जो चीज हमको मां कहती है कि हां यह आत्मन का स्वरूप है हां यह करुणा है दया है यह भालोबासा है फिर ये ये सभी चीजें क्या एएसआई अपने से डेवलप कर लेगी ये सब प्रश्नों का भी वो उत्तर देगी हम यदि प्रश्न करेंगे कि अच्छा बताओ ठाकुर को किस तरह से समाधि होती थी ठाकुर की समाधि का तात्पर्य क्या है मां के जो आध्यात्मिक अनुभव है या तो फिर स्वामी जी की य फिलोसोफी है उसका गहन अर्थ तुम मुझे समझाने का प्रयास करो विल दे बी एबल टू अंडरस्टैंड ये प्रश्न का उत्तर देना मुश्किल है क्योंकि एट द एंड ऑफ द डे आप देखिए कि व्हाट इज कॉन्शियस निस हम लोग अभी तक कॉन्शियस निस को ठीक-ठीक डिफाइन नहीं कर पाए अपने भारतीय शास्त्र में भी इतने हजारों सालों से ये डेवलपमेंट चल रहा है एट द एंड ऑफ द डे आप ये कहेंगे कि हां आप हमको कॉन्शसनेस सिखाइए और व्हाट इज कॉन्शसनेस व्हाट इज ह्यूमन कॉन्शसनेस और इसको किस तरह से डे टू डे लाइफ में अप्लाई करें तो हम वो नहीं कर पाएंगे एप्लीकेशन की तो बात ही भूल जाइए स्वामी जी को अमेरिका में जाकर के वेदांत का प्रचार करना पड़ा अमेरिका में वेदांत सक्सेसफुल हुआ वेदांत और योग तक कहीं जाकर के भारत में उसका रिफ्लेक्शन हुआ तो वो परिस्थिति जो आज से 100 साल पहले थी आज भी वही है ना ही अपनी एजुकेशन सिस्टम में ना ही भारत की ये जो डेवलपमेंट इकोसिस्टम है अपनी एकेडमिका है अपनी थिंक टैंक्स है अपनी यह सोशल सेक्टर है कहीं पे भी या अपनी आर्मी है अपना यह कॉर्पोरेट वर्ल्ड है कहीं पे भी योग और वेदांत का प्रतिबिंब आपको नहीं दिखेगा कोई यह नहीं कहेगा कि हां कि हमने वेदांत में इस तरह से डिफाइन किया गया है ह्यूमन नेचर को तो उसको बेस करके हम यह प्रोडक्ट डेवलप कर रहे हैं या तो फिर अपना कॉर्पोरेट स्ट्रक्चर इस तरह से हम डिफाइन कर रहे हैं कोई नहीं कहेगा सब कुछ अमेरिका या यूरोप का अंध अनुकरण करेंगे तो यह सम हाउ हम भारतीय लोग ही अपनी यह जो आध्यात्मिक धरोहर है योग और वेदांत हम ही इसको भूल करके जैसे कि इसको दूसरों के हवाले कर दिया है व यह सेम ओल्डमैन वगैरह यह लोग देखेंगे कि यही सब आइडियाज को लेकर के वेदांत के सब आइडियाज को लेकर के यह लोग ये सब एआई डेवलप करते हैं फिर हमको कहते हैं कि आप हमसे सीखिए और हम खुशी-खुशी सीखने को भी जाते तो बिकॉज कि यह फोटोन का मैंने पिक्चर

No division between spirituality and natural science

देखा तो यह सब घटना परंपरा विचार माला मेरे मन में शुरू हुई मैंने कहा कि देखिए आज हम लोग एकदम प्योर डिफाइन करते हैं कि जगत सब्जेक्ट और ऑब्जेक्ट में बटा हुआ है यदि साइंस है नेचुरल साइंस सिर्फ ऑब्जेक्ट का ही स्टडी करेगा सब्जेक्ट का स्टडी करना है तो आपको योग और वेदांत चाहिए ही चाहिए किंतु जिस तरह से ब्रेक थ्रू हो रहा है आजकल जो लोग कटिंग एज स्टडी करते हैं उन लोगों के मन में यह संदेह होगा ही होगा और होना ही चाहिए कि कहां पर आप यह बॉर्डर लाइन बनाएंगे कि यह नेचुरल साइंस है यह स्पिरिचुअल साइंस है यह बॉर्डर लाइन कब तक रहेगी निवेदिता ने स्वामी जी का कंप्लीट वर्ष की यह जो पूर्व भूमिका में लिखा है स्वामी विवेकानंदा हैज रिमूव्ड दिस बॉर्डरलाइन बिटवीन सेक्रेड एंड सेकुलर जो कि आध्यात्मिक है और जो जागतिक है या लौकिक है इन दोनों के बीच की जो एक दीवार है व स्वा विवेकानंद ने गिरा दी है तो वह ऐसा कहना चाहती है कि लौकिक जगत में भी उन्होंने आध्यात्मिकता का प्रवेश करवाया है आध्यात्मिकता को सिर्फ मंदिरों में मठ में या आश्रमों में साधुओं तक सीमित नहीं रखा यह गरीब की कुटिया में यह किसान की खेत में यह गृहिणी के किचन में यहां तक स्वामी जी वेदांत को लेकर गए हैं अर्थात कि ये लौकिक और पार मार्थी जगत की यह बॉर्डर लाइन स्वामी जी ने मिटा दी है अभी स्वामी जी जी यहां से वहां गए तो वहां से यहां पे भी तो आ सकते है मने ये रिवर्स भी तो हो सकता है कि ये एआई या तो फिर ये एएसआई आर्टिफिशियल सुपर इंटेलिजेंस इस तरह से डेवलप हो कि आत्मन या तो ब्रह्मण का नेचर समझने में वो समर्थ हो जाए यह भी हो सकता है कि मनुष्य का ब्रेन है जो जो मैकेनिज्म है वह तो एक तरह का हार्डवेयर ही तो है इस ब्रेन के भीतर में कॉन्शसनेस रहती है या तो फिर यह अवेयरनेस या तो आत्मन रहती है ऐसा किसने कह दिया कि इस तरह का आर्टिफिशियल ब्रेन हम नहीं डेवलप कर पाएंगे जिसके भीतर में भी कॉन्शियस निस रह पाए व्हिच विल बी कंप्लीट रेवोल्यूशन मनुष्य का ब्रेन ही तो है एक ऐसी चीज एक पत्थर में जो नहीं है एक पेड़ के भीतर में जो नहीं है एक पशु या मछली के भीतर में जो नहीं है वह मनुष्य के भीतर है वह क्या है अपना ब्रेन ब्रेन के भीतर में यह आत्मन रहती है या कॉन्शसनेस रहती है ऐसा हम कह सकते हैं तो ब्रेन की जो हार्डवेयर कॉम्प्लेक्शन होते हैं ना ब्रेन सेल के बीच के जो कनेक्शन होते हैं उसको साइनैप्सिस कहते हैं हमारे ब्रेन के भीतर में मोर देन ट्रिलियन साइनेप सेस आर देयर यानी कि हजार करोड़ से भी ज्यादा ये कनेक्शन जो है ब्रेन सेल के भीतर में नेटवर्क जिसको कहते हैं नेटवर्क इफेक्ट वो बना हुआ है तो साइंटिस्ट लोग ऑलरेडी मने ये जो ट्रांजिस्टर के बीच के जो कनेक्शन है नंबर ऑफ ट्रांजिस्टर है वो बिलियंस एंड बिलियंस की कैपेसिटी में वे लोग बना रहे हैं अभी यह जो क्वांटम चिप जो बनेगी वोह तो इट विल बी फार मोर कॉम्प्लेक्शन टुडे तो क्वांटम चिप बनेगी

artificial consciousness

इसमें एक्सट्रीमली कॉम्प्लेक्टेड बनाएंगे तो कौन कह सकता है कि इसमें कॉन्शसनेस का जन्म ना हो देयर इज नो लिमिट यहां से वहां जैसे हम जा सकते हैं आध्यात्मिक जगत में से लौकिक जगत में जा सकते हैं तो ऐसा कोई नियम नहीं है जो कि नहीं कहता कि लौकिक जगत में से आध्यात्मिक जगत में प्रवेश ना करें इतना कॉम्प्लेक्शन ब्रेन डेवलप करेंगे यह लोग कि जिसके भीतर में कॉन्शसनेस का जन्म हो सकता है एंड व्हाट विल बी द नेचर ऑफ दैट कॉन्शसनेस व्ट विल वी कंसीडर इट रियल कॉन्शियस और वी विल कॉल इट अ फैकट कॉन्शसनेस या आर्टिफिशियल कॉन्शियस यानी कि ये फ्रॉम आर्टिफिशियल सुपर इंटेलिजेंस टू द जर्नी फ्रॉम आर्टिफिशियल कॉन्शसनेस उस वहां तक जब हम पहुंच जाएंगे र कहना मुश्किल हो जाएगा कि हम रियल है ना कि वो रियल है सही कौन है गलत कौन है तो यह जो जर्नी है एंड इट इज हैपनिंग बिफोर अवर आइज यह जो चीज हमने कभी सोची नहीं थी वो अपने खुद के लाइफ टाइम में यह होने को जा रही है इन एवरी फील्ड ये नैनोटेक्नोलॉजी है क्वांटम डायनेमिक्स है आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस है फिर ये जेनो मिक्स है इन सबके भीतर में प्रोटीन अनफोल्डिंग जिसके ऊपर में इनको नोबेल प्राइज मिल गया यह डीप माइंड का जो फाउंडर है डेमस हसाबी उसको तो ये दिस डिफरेंट डिफरेंट टेक्नोलॉजीज आर इवॉल्विंग बिफोर अवर ओन आइज एक दिन ऐसा आएगा कोई एक ऐसा एंटरप्रेन्योर खड़ा होगा वो सभी टेक्नोलॉजी को इकट्ठा करके एक आर्टिफिशियल ब्रेन बनाएगा और उसमें आर्टिफिशियल कॉन्शसनेस को जन्म देगा ट दैट पॉइंट ऑफ

What is the meaning of human life in the light of ASI

टाइम ये मनुष्य को यह प्रश्न करना पड़ेगा कि मनुष्य जीवन का उद्देश्य क्या है द आर्टिफिशियल कॉन्शियस इज एज गुड एज यदि कहेंगे कि ईश्वर प्राप्ति मनुष्य जीवन का उद्देश्य है जब तक मनुष्य खेत में काम करता है फैक्ट्री में काम करता है और खेत का काम और फैक्ट्री का काम मशीन ने ले लिया हम लोगों को डर नहीं लगता अरे वो तो फिजिकल लेबर है मशीन ने ले लिया तो हमको तो सुकून ही है हम हायर थिंकिंग करेंगे क्रिएटिविटी करेंगे आर्ट है साइंस है ये स्पोर्ट है कल्चर है उसमें डेवलप करेंगे अभी वो भी हमारी नजर के सामने ने ये मशीन ले ले रहे हैं आज बहुत सुंदर उदाहरण एक बार सर्वप्रियनंद जी ने दिया कि वो कहते हैं ऑ दिस एआई को आप कह सकते हैं पूछ सकते हैं कि स्वामी विवेकानंद पे पोयम बनाई है ओके वो एआई उसके ऊपर में पोयम बना देगा स्वामी जी के ऊपर में यह तो कोई भी मनुष्य कर सकता है एआई ने भी कर दिया किंतु एआई और एक चीज कर सकता है साथ-साथ में जो कि मनुष्य कभी नहीं कर सकता आप एआई को कहते जाइए कि दूसरी एक पोयम बनाओ तीसरी एक पोयम बनाओ चौथी पोयम बनाओ एक मिनट में 1000 पोयम 1 लाख पोयम एआई बना देगा यह चीज मनुष्य कभी नहीं कर पाएगा ह्यूमन क्रिएटिविटी का एक लिमिटेशन है एआई से अच्छा पोयम शायद हम बना पाएंगे व्हिच इज डिबेटेबल अभी वो पोयम का ब्यूटी क्या है वोह तो पढ़ने की नजर वा पढ़ने वाले की नजर में है तो वो उसको छोड़ देते सब्जेक्टिव वो तो हो जाता है मनुष्य जिस तरह से पोयम बनाता है एआई भी पोयम बनाता है यहां तक तो हम इक्वल है किंतु एक कवि जितना भी अच्छा हो उसको कहेंगे एक दिन में 1 लाख पोयम बना दो एक करोड़ पोयम बना दो व कभी भी नहीं कर पाएगा व्हिच इज एक एआई कर सकता है सो ऑलरेडी इन सम वेज एआई क्रिएटिविटी में भी कल्चरल एक्टिविटी में भी हमारे से हमको क्रॉस कर गया है तो आखिर एक चीज हमारे पास बचता है मनुष्य जीवन का क्या उद्देश्य है लेबर करना चलो मशीन को दे दिया क्रिएटिविटी है कल्चर है वो भी चलो मशीन को दे दिया साइंटिफिक एडवांसमेंट है वो भी मशीन को दे दिया किंतु एक चीज मेरे पास में है ईश्वर प्राप्ति मेरा उद्देश्य है मनुष्य जन्म प्राप्त किया है क्योंकि मैं ईश्वर प्राप्त कर सकूं या तो मैं आत्म साक्षात्कार कर पाऊं जद आप अद्वैद की दृष्टि से देखते हैं तो कहेंगे कि मैं ब्रह्म साक्षात्कार करना मेरे जीवन का उद्देश्य है ब्रह्मज्ञान में स्थित होना मेरे जीवन का उद्देश्य है और यदि द्वेत में विश्वास करते हैं तो कहेंगे कि ईश्वर प्राप्ति मेरे जीवन का उद्देश्य है व्हाट एवर किंतु यह आध्यात्मिक जीवन में जिसको कि अल्टीमेट कहा गया है प्रस्थान त्रय उपनिषद ब्रह्मसूत्र और गीता में वह मेरे जीवन का उद्देश्य है यह मशीन मेरे से कभी नहीं ले सकता यह जो आखिरी बात हमारे हाथ में बची थी इवन दैट कैन गो अवे जद ये आर्टिफिशियल ब्रेन जिसके न्यूरो उसका जो न्यूरल नेटवर्क है उसकी संख्या अपने साइनैप्सिस की संख्या के इक्वल हो जाती है 100 ट्रिलियन व्हाट एवर जो नंबर है बहुत बड़ा नंबर है जो कि आज हमको कम ल लगता है कि मशीन कभी क्रॉस नहीं कर पाएगा किंतु वोह इजली क्रॉस कर सकता है तो आर्टिफिशियल

Can Artificial Super Intelligence attain atma-jnana?

ब्रेन बना दिया उसके भीतर में आर्टिफिशियल कॉन्शसनेस डेवलप हो गई तो फिर मशीन भी कह सकता है कि आई कैन अटन आर्टिफिशियल गॉड विद दिस आर्टिफिशियल कॉन्शसनेस तब आपको कैसे कहेंगे ईश्वर तो एक ही है एट द एंड ऑफ द डे ब्रह्मण कहो कि ईश्वर कहो कॉन्शियस निस में भी आप डिवीजन कर सकते हैं कि यस दिस इज अ ह्यूमन कॉन्शियस एंड दैट इज आर्टिफिशियल कॉन्शियस यह डिवीजन आप फिर भी कर सकते हैं बट आर्टिफिशियल कॉन्शियस इट क्लेम वो कहेगी कि हां मुझे ईश्वर दर्शन हो गया है या तो फिर मुझे आत्मज्ञान प्राप्त हो गया है तब वोह डिवीजन नहीं रहेगा बिकॉज कि वेदांत खुद कहता है कि देयर कैन बी ओनली वन गॉड देयर कैन बी ओनली वन आत्मन देयर कैन बी ओनली वन ब्रह्मण तो जद आर्टिफिशियल कॉन्शसनेस हो ना कि ह्यूमन कॉन्शसनेस जबी दोनों ईश्वर प्राप्ति करते हैं दोनों आत्म साक्षात्कार करते हैं दोनों ब्रह्म ज्ञान प्राप्त करते हैं तो ब्रह्म ज्ञान तो एक ही होगा इन दैट केस यह आर्टिफिशियल और ह्यूमन इन दोनों की जो यह डिवीजन है सच में समाप्त हो जाएगी फिर मनुष्य को सही सही सोचना

Extinction of human species?

होगा कि जैसे य इवोल्यूशन होता है ना इवोल्यूशन में क्या है कि हमेशा हायर जो स्पीशीज होती है मोर एडवांस स्पीशीज वह जो बैकवर्ड स्पीशीज जो होती है उसका सफाया करके उसको उसका एक्सटिंक्शन करके उसका खात्मा करके वह पृथ्वी पर राज करती है एक समय था कि डायनासोर का राज्य था फिर ऐसा हुआ कि उल्कापात हुआ ना कि कैसे भी करके क्लाइमेट चेंज हुआ यह जो ठंडे खून वाले जितने भी थे वो वो इस बदलती क्लाइमेट में नहीं टिक पाए और गर्म खून वाले यह जो मैमल्स जो है उनका डेवलपमेंट होना प्रारंभ हुआ सिचुएशन जैसे ही चेंज होती है तो वैसे ही जो लेस एडवांस स्पीशीज है उनका एक्सटिंक्शन हो जाता है और मोर एडवांस स्पीशीज जो है उनका डेवलपमेंट होता है तो कौन कहेगा कि यह एक दिन सही में नहीं आएगा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस विल एज ए स्पीशसिंथेसिस है या मूवीज है यह सब देखने को मिलता है किंतु इसके पीछे में क्या है कि कोई बेसिस नहीं होता ये सब फैंटेसी थी अभी तक थी टुडे देर इज अ रियल साइंटिफिक बेसिस रियल मनने एक पॉसिबिलिटी जागृत हो गई है कि जद साइंटिफिक ब्रेक थ्रू ये जितनी स्पीड से चल रहे हैं इतनी स्पीड से और 100 साल यदि चले देन वी डू नॉट नो आर्टिफिशियल कॉन्शसनेस फिर फिर ये

A new meaning for human life?

आर्टिफिशियल गॉड या कि फिर आर्टिफिशियल आत्मज्ञान यहां तक जद ये लोग पहुंच जाए तो उस लेवल पर यह ह्यूमन और आर्टिफिशियल का जो डिवीजन है वो हम नहीं कर पाएंगे एट दैट टाइम हमको कहना होगा कि वी ह्यूमन एज स्पीस आर टुडे डिफीटेड हमारा जो पर्पस है जीवन का हमारे जो प्रस्थान त्रय है उपनिषद है जो अभी तक कहते आए थे कि हां ब्रह्मज्ञान ही जीवन का सर्वोच्च उद्देश्य है उस बात को फिर हमको फिर से रिथिंग करना पड़ेगा इ देर एनीथिंग बियोंड ब्रह्मज्ञान

Beyond Brahma-jnana: Thakur's idea

ऑफकोर्स इट इज देर ठाकुर ने खुद ने जैसे कि पहले ही प्रिडिक्ट कर दिया है कि नरेण कहता है कि मैं समा में बैठ कर के जीवन पसार करना चाहता हूं तो ठाकुर क्या कहते हैं देयर इज अ हायर स्टेज देन समाधि इट सेल्फ तो फिर यह जो ठाकुर की जो इनसाइट थी हु नोज के ठाकुर ने यह सब नहीं देखा होगा माने तो ठाकुर को कितना सब कुछ नहीं दिखा दिया था हो सकता है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आर्टिफिशियल कॉन्शसनेस या आर्टिफिशियल आत्मज्ञान यह सब भी दिखा दिया होगा इसलिए शायद ठाकुर ने कहा होगा कि वी नीड टू गो इवन बियोंड दैट इफ वी आर टू सरवाइव एज अ ह्यूमन स्पेसस य ठाकुर के कथामृत का का ठाकुर की वाणी का प्रत्येक शब्द जो है ना वो इट विल टेक डिफरेंट मीनिंग ऑल टूगेदर आज हम जिस कांटेक्ट में ठाकुर को एनालाइज करते हैं आज हम जिस कांटेक्ट में ठाकुर को समझते हैं ये आफ्टर लर्निंग दिस मॉडर्न डेवलपमेंट वी हैव टू लुक एट ठाकुर्स टीचिंग इन अ कंपलीटली न्यू लाइट नॉट फ्रॉम द लाइट ऑफ अवर ट्रेडिशनल वेदांता फ्रॉम द लाइट ऑफ व्यू पॉइंट ऑफ व्यू ऑफ अवर मॉडर्न डेवलपमेंट इस फिर जब कथामृत का फिर से इंटरप्रिटेशन करेंगे हमको हर बार ये कहना होगा ये दिस इज अ ह्यूमन इंटरप्रिटेशन दिस इ आर्टिफिशियल इंटरप्रिटेशन दिस दिस इंटरप्रिटेशन गोज इवन बियोंड आर्टिफिशियल इंटरप्रिटेशन यह सब करके डिस्टिन हमको शायद करना होगा तो हु नोज इट मे इवन हैपन विदन अवर ओन लाइफ टाइम तो मुझे लगता है कि अभी कथामृत आज फिर से नहीं करते हैं कल देखेंगे उसको आज तक ओम शांति शा शति शांति हरि ओम तसत श्री राम कृष्णर्पण मस्तु वाह फिर मुझे क्लास करने की जरूरत नहीं पड़ेगी चेट जीबीटी क्लास करेगा इतनी अच्छी बात तो मैं भी नहीं कह सकता दिस एक्चुअली हैपनिंग य नोटबुक एलम करके [हंसी] लगाएगा खाना कौन बनाएगा मेंटेनेंस कौन करेगा तो ये टेस्ला का ऑप्टिमस बोल कर के रोबोट है जो कि जनरल रोबोट है उसको आप आप अपने से करके दिखा दीजिए मुझे ऐसा करना है वो देख कर के सीख लेगा कैन यू बिलीव दैट मने स्पेसिफिक रोबोट तो होते हैं कार का दरवाजा निकाल करके यहां से यहां डालना है वो स्पेसिफिक तो कब का हो गया ऑटोमेशन वो 1960 से चल रहा है सेकंड वर्ल्ड वॉर से चल रहा है किंतु यह जनरल पर्पस टेस्ला का जो है ऑप्टिमस आप करके दिखाइए वो उसका अनुकरण करेगा आप खाना बना के दिखा दीजिए वह दूसरे दिन से खाना बनाएगा झाड़ू लगा के दिखा दीजिए दूसरे दिन से झाड़ू लगा देगा ना किंतु जिस तरह से एडवांसमेंट हो रहा है हार्डवेयर में यहां पर प्रॉब्लम हार्डवेयर का आ जाता है फिर अभी यह कोडिंग का प्रॉब्लम नहीं है क्योंकि जो डिवाइस है जिसके भीतर में कॉन्शसनेस रहता है इट शुड बी एक्सट्रीमली कॉम्प्लेक्शन ऑफ स्टार्स इन द यूनिवर्स ये पूरे विश्व ब्रह्मांड में जितने सिता रहे हैं उससे ज्यादा न्यूरल कनेक्शंस अपने ब्रेन में है तो वो तो वहां तक तो ऑलरेडी ये साइंटिस्ट लोग पहुंच गए हैं तो मतलब ये डिवाइस की कॉम्प्लेक्शन वी से इट इज नॉट कॉन्शियस ये जो बॉर्डर लाइन है ना वो धीरे-धीरे करके ब्लर हो जाएगी ये एक चीज दूसरा आपने जो कहा ना कि एआई इज अ थ्रेट वो थ्रेट किसकी दृष्टि से वो तो हमारी दृष्टि से है नॉट फ्रॉम द पॉइंट ऑफ व्यू ऑफ इवोल्यूशन इवोल्यूशन तो ये देखता है कि व्हिच इज द फिटेस्ट इट विल सरवाइव तो जब मैमल्स फिट थे मेमल सरवाइव के लिए तो अभी एआई इज फिटर देन अस देन एआई विल सरवाइव वी विल गो एक्सटिंग फ्रॉम द पॉइंट ऑफ व्यू ऑफ इवोल्यूशन ये थीट नहीं है ये थीट एक स्पीस के लिए है जैसे कि हम लोग थीट थे दूसरी स्पीस के लिए तो वैसे ही एआई इज अ थीट टू अस बट नॉट टू द इवोल्यूशन इट सेल्फ आप 4 साल पहले इमेजिन नहीं कर सकते थे कि यह पोएट्री लिखने वाला कंप्यूटर किंतु देखिए यह जो डिफरेंस जो हम कहते हैं ना आज पंचकोश पंचप्राण या तो फिर यह मन बुद्धि चित्त अहंकार या तो फिर यह सेंस ऑफ सेल्फ सत चित आनंद फिर इसका डेफिनेशन क्या है वो भी तो हमको क्लियर करना पड़ेगा वो क्लेम करता है आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस वन डे कि आई हैव डेवलप आर्टिफिशियल कॉन्शसनेस तो हाउ विल यू से दैट व्हाट इज आर्टिफिशियल कॉन्शियस एंड व्हाट इज नेचुरल कॉन्शियस यदि वो क्लेम करता है कि मुझे ब्रह्मज्ञान प्राप्त हुआ है हाउ कैन यू से दिस इज अ रियल ब्रह्मज्ञान एंड दिस इज अ फैक्ट ब्रह्मज्ञान या तो फिर आर्टिफिशियल ब्रह्मज्ञान ये एक समय ऐसा आएगा यह जो डिवाइडिंग लाइन है ना वह बड़ी ही मतलब यह हो जाएगी फजी हो जाएगी ब्लर हो जाएगी ना धरी से वे टू वेरीफाई देर इज अ वेरी क्लियर वे टू वेरीफाई ब्रह्मज्ञान का अर्थ है कि सर्व भूत में जो अंतरात्मा है उसके साथ में आपका तादात्म्य अर्थात कि जिसको ब्रह्मज्ञान हुआ है और जीवित रहा है जनरली तो निर्विकल्प समाधि में 21 दिन में मृत्यु है किंतु जो वापस आया है उसका प्रत्येक प्राणी के साथ में उसका अंतर का रिश्ता हो जाएगा इनफाइनों में ही जाएंगे ना आप झुक जाएंगे क्योंकि उसके हृदय में अपने प्रति जो प्रेम है वो प्रेम इज सो पावरफुल कि यू विल बाउंड टू रिस्पॉन्ड टू इट मां के पास में जो लोग जाते थे बिल्कुल मां के चरणों में गिर जाते थे ठाकुर के पास जो जाते थे आपको धमकी दे कर के वोह लोग सबमिट नहीं कर रहे आपको वह सबमिशन में नहीं ला रहे धमकी दे करर के आज कोई बड़े पॉलिटिशियन के पास में जाएंगे उसके पास में इतना पावर है कि आपको एकदम नम्रता से उसके साथ में बात करनी होगी नम्रता आप क्यों दिखा रहे हैं क्योंकि आपको दिख रहा है उसके पास पावर है जबकि ठाकुर और मां के पास में जो प्रेम था अपने लिए वो प्रेम हमको उनके सामने झुका देता था राइट दिस इंफाइटिंग और जो आपने कहा ना कि आर्टिफिशियल कैन बिकम थ्रेट टू अस इफ इट अटें ब्रह्म ज्ञाना वह नहीं होगा क्यों जद वह सही सही ब्रह्मज्ञान प्राप्त करेगा इट विल हैव सो मच लव फॉर अस इट कैन नेवर हमम अस सही आंसर तो मनुष्य भी कहां देते हैं म टवे सही सही में हमारी कॉपी कर रहा है फेक न्यूज फैलाने में हमारा ही तो सबसे बड़ा हाथ है आप एआई को क्या दोष देंगे किंतु यहां पर आप सिर्फ अंडरस्टैंडिंग की बात करते हैं यह जो अल्फा फोल्ड बोल करर के एआई है वह क्या करता है कि एक्चुअली पूरा ह्यूमन बॉडी रंस ऑन प्रोटींस तो यह प्रोटीन स्ट्रक्चर को समझना दैट इज द की ऑफ ह्यूमन हेल्थ अभी प्रोटीन स्ट्रक्चर को तो समझ लिया नाउ यू कैन डेवलप न्यू प्रोटीन ल टू दर ऐसा अल्जिमर डिसीज है जिसका कि ट्रीटमेंट नहीं है कैंसर है एड्स है अभी इसको कौन से प्रोटीन से इसको ट्रीट किया जाए वो प्रोटीन डेवलप कर रहा है जैसे प्लास्टिक है प्लास्टिक को डाइजेस्ट करना है प्लास्टिक वेस्ट इज अ बिग प्रॉब्लम तो प्लास्टिक को डाइजेस्ट करने वाला प्रोटीन डेवलप कर दिया आई मीन दैट जो बायोटेक्नोलॉजी है दैट इज एन इंफाइटिंग अभी मैं रिसेंटली पढ़ रहा था डिजाइनर बेबीज आपको इस तरह की कैरेक्टरिस्टिक वाला बच्चा चाहिए इंटेलिजेंट होना चाहिए सुन हरे बाल होना चाहिए फिर उसकी ग्रीन कलर की आंखें होनी चाहिए फिजिकली स्ट्रांग होना चाहिए माने यह जेंडर ठीक करना कि बॉय हो कि गर्ल है वह तो दूर की बात है माने यू कैन स्पेसिफिकली डिजाइन वर्चूज फिजिकली ऑफ अ डिजाइनर बेबी तोस पॉसिबिलिटीज इन बायोटेक्नोलॉजिकल फील्ड इज इनफाइकिल इंटेलिजेंस कॉन्शसनेस तो डेवलप होगा तो होगा इस तरह से जो बेबी को आप डिजाइन करते हैं कैन यू से इ अ ह्यूमन बेबी और एन आर्टिफिशियल बेबी हाउ कैन यू डिफाइन दैट उस उसका पूरा जो डीएनए सीक्वेंस है कंप्यूटर के द्वारा आप लिख सकते हैं यानी कि अभी जो है कि ह बेबी का बर्थ कैसे होगा ये जो शुक्र कोष है और अंड कोष है इन दोनों के ये जो कॉमिनेशन होगा फिर यह जो बर्थ प्रोसेस स्टार्ट होगी आज ये लोग कहते हैं स्टेम सेल के माध्यम से मनुष्य का मेरा यह जो स्किन सेल है उसको उठा कर के इसको यह लोग उसमें से डेवलप बेबी बना सकते हैं यू डोंट नीड मेन एंड वुमन यू डोंट नीड इवन ट्स रिप्रोडक्टिव सेल्स यू कैन टेक योर ब्रेन सेल यू कैन क्रिएट अ बेबी आउट ऑफ इट ये तो हम ऑलरेडी अचीव कर चुके हैं नाउ द क्वेश्चन इज इज दिस अ रियल बेबी और आर्टिफिशियल बेबी ये जो 20th सेंचुरी में जो साइंटिफिक रेवोल्यूशन आना शुरू हुआ है ना आइंस्टाइन से लेकर के उसने हमारी जो कन्वेंशनल थिंकिंग है ना उसको बिल्कुल अप साइड डाउन कर दिया है अनफॉर्चूनेटली ना बहुत कम लोग इसको समझ पाए हैं कि ये जो रेवोल्यूशन है वो किस चीज का है ये जो वेदांत बोलकर के जो रेवोल्यूशन आया था एशियंट टाइम में आज 10000 साल के बाद में भी हम लोग स्ट्रगल कर रहे हैं कि व्हाट इज वेदांत व्हाट इज द आत्मज्ञान व्हाट इज ब्रह्मज्ञान तो यह रिसेंट रेवोल्यूशन वी डोंट नो कि व्हेन वी विल बी एबल टू डाइजेस्ट प्रॉब्लम यह है कि सोसाइटी चेंजेज सो रेपिडली कि जो लोग कदम नहीं बने प पाएंगे ना जद कदम के साथ कदम मिला कर के नहीं चल पाएंगे दे विल गो एक्सटिंक्ट दैट इज अ रियल पॉसिबिलिटी दैट इज व्हाई वेदांत कम्स इन टू प्ले ना कि जैसे-जैसे आप स्पिरिचुअल होते जाएंगे ट वे यू विल डेवलप कंपेज सो कंपेज इज अ स्पेसिफिक क्वालिटी टू स्पिरिचुअलिटी सो लेट अस होप दैट एआई डेवलप स्पिरिचुअलिटी एंड बिकम मोर कंपेज ट रदर देन बिकमिंग अ मनस्टर ये जो फ्रेंक एस्टाइन ये जो फ्रेंक एस्टाइन अ जो स्टोरी है इज इट अ डिपेड फियर ऑफ ह्यूमन माइंड कि हम लोग एक ऐसा एक टेक्नोलॉजी डेवलप करेंगे मनुष्य को ही खा जाएगा जैसे ये न्यूक्लियर बम की आपने बात कही एक समय था सोवियत यूनियन और अमेरिका हजार हजार 10 10000 न्यूक्लियर वेपन साम सामने रख के बैठे थे अभी एक्सीडेंटली अभी ऐसे मैंने किताब पढ़ी है कि न्यूक्लियर एक्सीडेंट माने वो हेयर ट्रिगर पे पहुंच गए हैं कि न्यूक्लियर वॉर स्टार्ट होने वाली है किसी ने एक्सीडेंटली कुछ बटन दबा दिया कहीं पे एक्सीडेंट हो गया एटम बॉम प्लेन में से जाके गिरा अनफॉर्चूनेटली वो स्विच ऑफ था तो बो जमीन पे गिरा तो फटा नहीं माने एक्सीडेंटली न्यूक्लियर वर चालू हो सकती है ऐसे कितने केसेस हुए सो ये सब पढ़ के लगता है कि वी सरवाइव ट पीरियड कि 1010 न्यूक्लियर वेपन एकदम हेयर ट्रिगर पे थे सामने सामने एक एक्सीडेंट भी कहीं पे हुआ फेक न्यूज़ कहां से भी फैला तो कब क्या हो जाएगा तो ट केस दैट कंपैशन कम्स इन टू प्ले एक बड़ा सुंदर किस्सा है कि अ सोवियत यूनियन ने क्या किया कि मान लीजिए कि अमेरिका क्रेमलिन पे एटम बम फेंकता है तो क्रेमलिन के जो इंचार्ज है बॉस वह तो अपने कह नहीं पाएंगे अपने रॉकेट फोर्स से कमांड नहीं दे पाएंगे तुम काउंटर अटैक करो तो इन लोगों ों ने क्या किया कि यह जो है ना सेस्मो ग्राफर सेस्मो ग्राफर सब जगह पर क्रेमलिन के आसपास लगा दी है अभी न्यूक्लियर बम फटेगा तो वो तो अर्थक्वेक जैसा होगा तो ये सिस्मोग्राफ मशीन जो है वो न्यूक्लियर वेपन की सिग्नेचर समझ कर के अंडरग्राउंड बंकर है वहां पे ये मैसेज पहुंचाएगा जिसके पास में ये न्यूक्लियर इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल का कमांड है और वहां पे मैसेज पहुंचाएगा कि क्रेमलिन में न्यूक्लियर एक्सप्लोजन हुआ है अभी आप इन रिटर्न अमेरिका पर अटैक कीजिए कोई ह्यूमन के बीच में जरूरत नहीं है क्योंकि इस तरह से बंकर को कट ऑफ करके रखा है ऊपर में सतह पर सब कुछ खत्म हो गया तो बंकर में यह आईसीबीएम है वहां से अटैक होगा यह फेल सेफ मैकेनिज्म अभी सडन एक दिन क्या हुआ एक इस तरह का अर्थक्वेक हुआ वच जज अ सिमिलर सिग्नेचर टू न्यूक्लियर वेपन अ ये बंकर में जो आदमी बैठा था उसको यह डिसाइड करना है अभी बनाया सिस्टम ऐसे है कि सरफेस के साथ में कोई कांटेक्ट नहीं है सिर्फ एक ही मैसेज आता है कि न्यूक्लियर वेपन का सिग्नेचर अर्थक्वेक वहां पर हुआ है नाउ यू हैव फायर द एटॉमिक मिसाइल इन रिटर्न अभी ये आदमी सोच रहा है तो उसका जो कलीग था जो उसका सबोर्डिनेट वो कह रहा है कि आपको फायर करना चाहिए रेगुलेशन में सीधा लिखा है और सोवियत यूनियन में तो आप यदि ऑर्डर नहीं मानेंगे तो सीधा आपको गुलाब वगैरह में भेज देंगे तो उसके जो सबोर्डिनेट है वो डर गए वो बोलते हैं बॉस को फायर करो फायर करो फायर करो कि बॉस बैठा बैठा किंतु सोच रहा है कि एक बार जो न्यूक्लियर वॉर चालू हो गया ना पता नहीं इसका क्या होगा तो उसने जितने भी प्रोटोकॉल है सब तोड़ कर के वो सत पर मैसेज भेजा कि फाइन लेट मी टेल यू मने सही सही में क्या हुआ है तब पता चला कि इट वा कंप्यूटर [हंसी] ग्लिच अरे पढ़ते पढ़ते मुझे पसीने आ गए इस आदमी ने जदी प्रोटोकॉल फॉलो करके फायर कर दिया होता तो क्या होता एक तो जगत है ऑब्जेक्ट का बना हुआ व्हिच इज समथिंग आउटसाइड ऑफ माय सेल्फ दूसरा जगत है सब्जेक्ट का बना हुआ वहि इज माय प्योर अवेयरनेस अभी जब ये आंख जो है व्हिच इज अ मटेरियल डिवाइस वो जब ऑब्जेक्ट को देखती है व तो वह अपने सेल्फ को नहीं देख पाएगी बिकॉज सेल्फ इज अ कंपलीटली डिफरेंट वर्ल्ड आंख का जन्म आंख का घटन ही हुआ है ऑब्जेक्ट के साथ में इंटरेक्शन करने के लिए इट कैन नेवर इंटरेक्ट विद सब्जेक्ट राइट तो ये जब सब्जेक्ट ऑब्जेक्ट डिवीजन कट हो जाता है देन वी आर एस्टेब्लिश इनटू प्योर सब्जेक्ट प्योर अवेयरनेस बट देर इज अ वर्ल्ड इनसाइड दिस प्योर अवेयरनेस यह जो ईश्वर दर्शन भूतकाल भविष्य की बातें जानना ब्रह्मज्ञान का क्या अर्थ है प्रत्येक मनुष्य के भीतर में अंतरात्मा में जो जीवन है उसके साथ में मेरा डायरेक्ट नेटवर्क कनेक्शन हो जाना यानी कि दिस इज अ नेटवर्क ऑफ सब्जेक्ट्स आईडिया इज वेरी ब्यूटीफुल एंड वेरी रेडिकल एक तो देर इज अ नेट नेटवर्क ऑफ ऑब्जेक्ट्स कि जिसके साथ में मैं इंटरेक्ट कर रहा हूं हियर इज अ नेटवर्क ऑफ सब्जेक्ट इट सेल्फ ये ह्यूमन कॉन्शसनेस जो स्वामी जी ने ज्ञान योग में बड़ा ही सुंदर रूप से इसका किया है हम कहते हैं कि ह्यूमन कॉन्शसनेस जन्म जन्मांतर से सिमिलर रहती है पिछले जन्म में मेरी जो कॉन्शसनेस थी इसी जन्म में कैरी फॉरवर्ड होती है और उसके जो बैलेंस होता है कर्मों का यहां पर लेके आती है स्वामी जी एलीवेट्स दिस आइडिया टू द लेवल ऑफ स्पीस ये ह्यूमन स्पीस जो है या तो इवन यह जो लाइफ इट सेल्फ जब से स्टार्ट हुई तो कॉन्शसनेस तो लाइफ के साथ में स्टार्ट हुई तो स्पेसस आफ्टर स्पीशीज जनरेशन आफ्टर जनरेशन जिस तरह से बायोलॉजिकल इवोल्यूशन होता है कॉन्शियस का इवोल्यूशन होता है टुडे वी हैव इन्हेरिटेंस ऑफ ऑल लिविंग बीइंग्स दैट इज व्हाई वंस आई डाइव डीप विथ इन माय ओन कॉन्शसनेस विद इन माय ओन अवेयरनेस आई कैन एस्टेब्लिश कनेक्शन विथ एवरीथिंग दैट वाज एवर अलाइव आज से एक करोड़ साल पहले प्रथम जीवन पनपा जो प्रथम जीवन का प्रारंभ हुआ तब से लेकर के आज तक जितने भी पशु पंखी प्राणी जीवंत स्वरूप थे उन सबके साथ में सब्जेक्ट नेटवर्क में एस्टेब्लिश कर सकता हूं उनको जो अनुभूति हुई उनको जो एक्सपीरियंस हुए उनको जो नॉलेज हुआ आई कैन एक्चुअली मने एक्सेस इट ऑल ऑन वन हैंड एंड ऑन द अदर हैंड आई कैन एस्टेब्लिश कनेक्शन विद सुपरकॉन्शसनेस सो तो दिस जनरेटिंग माने जनरेशन स्पीस लेवल कॉन्शसनेस के साथ में भी सब्जेक्ट के साथ में भी मेरा नेटवर्क है और सुपर सब्जेक्ट जो है सुपर कॉन्शसनेस है उसके साथ में भी नेटवर्क इफेक्ट है दैट मींस स्वामी जी जब कहते हैं कि नॉर्मल कॉन्शसनेस में जो चीज हम नहीं जान पाते वी कैन लर्न ऑल ये क्रिएटिविटी है हायर थिंकिंग है सबका रूट है इ इन सुपर कॉन्शसनेस सो ट नेटवर्क नेटवर्क ऑफ सब्जेक्ट्स नेटवर्क ऑफ अवेयरनेस या तो फिर नेटवर्क ऑफ आत्मज्ञान ट कम्स इन टू बीइंग अरे आप ठाकुर को देख सकते हैं मीस दिस इ टेक्नोलॉजिकल पॉसिबल आप स्पिरिचुअलिटी की बात छोड़ दीजिए आपको ठाकुर को देखना है ठाकुर क्या बोल रहे हैं क्या कर रहे हैं यू कैन एक्चुअली लुक एंड सी यू नो मने कौन सी टेक्नोलॉजी है ये देखिए यह प्रकाश की स्पीड है ना वो 3 लाख किलोमीटर पर सेकंड है अर्थात कि सूरज यहां से जितना दूर है तो वहां से लाइट यहां पर आते हुए आपको 8 मिनट लगता है तो आप एक्चुअली सूरज के सामने जो देखते 8 मिनट पुराना सूरज देखते हैं राइट अभी जगत में जो कोई भी मान ली आप एक ऐसी स्पेसशिप बनाए जो कि आप यहां से सूरज तक चले जाए और फिर पृथ्वी को देखें तो पृथ्वी आपको 8 मिनट पुरानी दिखेगी यदि आप इंस्टंटे नियस ट्रेवल करें राइट यह जो जिसको वर्म होल बोलते हैं कि स्पेस में एक जगह से अदृश्य होकर के दूसरी जगह प्रकट होना यह वर्म होल का कांसेप्ट वो प्रूव हो चुका है तो यह वर्म होल लेकर के मैं यहां से सूरज तक पहुंच जाता हूं फिर मैं पृथ्वी को देखता हूं पृथ्वी मुझे 8 मिनट पुरानी दिखेगी करंट पृथ्वी नहीं दिखेगी क्यों क्योंकि पृथ्वी से लाइट आते हुए मुझे आ 8 मिनट का टाइम लगता है अभी मान लीजिए कि मैं वही वर्म होल स्पेसशिप को लेकर के 150 साल ज जितना टाइम लगता है लाइट को जाने का वहां तक पहुंच जाता हूं अल्फा सेंटूरी यहां से आई थिंक 100 लाइट यर नहीं कि इतना दूर है तो वहां तक चला जाता हूं 150 लाइट ईयर तक फिर मैं टेलिस्कोप से देखूंगा मुझे एक्चुअली ठाकुर दिखाई देंगे क्योंकि पृथ्वी से लाइट जाते हुए 150 साल लगे हैं वहां पे यू कैन एक्चुअली लिसन टू ठाकुर ये तो आज की करंट टेक्नोलॉजी से पॉसिबल है ये जो वर्म होल है ना इट हैज बीन एक्चुअली टेस्टेड इन लेबोरेटरी ओनली थिंग इज कि माइक्रोस्कोपिक वर्म होल को ह्यूमन साइज का कैसे बनाए जैसे कि हम स्पेस में ट्रेवल कर पाए तो अभी वो जिस तरह से एडवांसमेंट हो रहा है किसको पता हमारी लाइफ टाइम में हो जाए