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Swami Vivekananda's Teachings ·

Swami Vivekananda Hindi 6 June 2023

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स्वामी विवेकानंद और शेयरिंग मी स्क्रीन स्वामी डी गॉड ऑफ ट्रुथ रिव्यूज हिमसेल्फ हर यहां पर स्वामी जी दो कॉन्सेप्ट के बड़े में बात करते हैं एक तो है सत्य दूसरा है ज्ञान अभी सत्य और ज्ञान बेसिकली एक ही उसमें सिमिलरिटीज है मैंने सेटल डिफरेंस इस भी है सिमिलरिटीज भी है की यदि हम कहेंगे की ज्ञान क्या है वेदांत की दृष्टि से तो ब्रह्म सत्य जगत नीतियां या तो फिर यह कहेंगे की जीवो ब्रह्म वाक्य के बड़े में हमको पता चलना और यह यह क्या है सत्य है की प्रतिदिन हम लोग जो दूसरों के साथ में जो व्यवहार करते हैं उसमें हमको सत्य का पालनपुर करना है अर्थात नॉलेज इस अवर रिलेशनशिप विद गोल्ड और सत्य ट्रुथ इसे अवर रिलेशनशिप विद अवर फेलो ह्यूमन बीइंग्स सत्य जो है हम इंसान के साथ में और सभी मनुष्यों के साथ में हमारी रिलेशन शिव कैसी होगी तो सत्य के आधार पर होगी और ईश्वर के साथ में हमारा क्या रिलेशन होगा वो नॉलेज या तो फिर ज्ञान के आधार पर होगा ज्ञान कहता है की यह जो मैं पैसों के पीछे दौड़ता हूं या तो फिर भूख के पीछे दौड़ता हूं या तो चलो यह सब तो बड़ी धूल चीज़ है इस फूल से भी पैर बहुत ही सूक्ष्म वासनाएं हमारी होती है यदि हम किसी ऑर्गेनाइजेशन में है किसी बड़ी कंपनी में है या तो एवं हमारे फैमिली में हम लोग देखेंगे की बहुत साड़ी बार इस तरह से होता है एक इस तरह का कोई मौका आता है की हम दूसरों को देखते हैं की वे लोग सब पूरा वो जो है की सब तरह का वो क्रेडिट कहे की लाइन लाइट कहे वो चाहते हैं ऐसे लोग की हम लोग पूरा सब कुछ जो है की लोगों का अटेंशन का ले मुझे सबसे ज्यादा अटेंशन चाहिए और जब भी अटेंशन नहीं मिलता है तो फिर वह जो टंट्रम टेक्नोलॉजी ना शुरू करता है टंट्रम अंग्रेजी शब्द है उसका यदि हिंदी में कहेंगे की छोटा बच्चा यदि कोई चीज उसको नहीं चाहे मिलती तो कैसा वो चिकन चिल्लाना शुरू करता है हम बड़े लोग जो है चीखते चिल्लाते नहीं है किंतु उसका इक्विवेलेंट होता है हमारे पास तो हम लोग भी यदि टेंशन नहीं मिलने से टंट्रम फेंकना शुरू करता है तो ऐसे मैंने यह अटेंशन की एक इच्छा होना की दूसरे लोग मेरी बड़े में मेरे साथ बात करें मेरे बड़े में बात करें प्रशंसा सिर्फ नहीं प्रशंसा फिर भी एक फूल चीज हो जाति है कोई आकर के मेरी प्रशंसा करें यह मुझे अच्छा तो लगता है किंतु दूसरे लोग बोलेंगे अरे देखो यह इसको प्रशंसा चाहिए मैंने एक नजर में ए जाता है किंतु यह जो अटेंशन सीकिंग बिहेवियर जो है हमको बहुत बार पता नहीं चला की यह हमारे में है बच्चों में खासकर के होता है की खासकर के एन एक क्लास में टीचर पढ़ा रहे हैं तो ऐसे जो अटेंशन सीकिंग जो स्टूडेंट होते हैं सब समय वो क्लास को डिस्टर्ब करते रहेंगे या तो क्वेश्चन करते रहेंगे या तो फिर पीछे-पीछे में कुछ ना कुछ डिस्टरबेंस करते रहेंगे उनको लगता है की लोग हमारे सामने देखें हमारे कार्यकलापों को वो जो है उसके बड़े में वे लोग चर्चा करें तो ये सब जो है हमारा ये जो भौतिक चीजों के प्रति यह मैटेरियलिज्म के प्रति मटेरियल थिंग्स के प्रति जो एक आकर्षण है ये इस का एक मानसिक सूक्ष्म स्वरूप है तो यह पूरा जो मैंने बकिया लोगों से बाकी ये चीजों के प्रति हमारा आकर्षण या वाक्य लोगों से कुछ अपेक्षा हमारा ये जो एक्सटर्नल बिहेवियर है इस बिहेवियर में यदि हमको यह पता चल जाए की ये सब कुछ जो हमारा अटेंशन सीकिंग बिहेवियर है ना की हमको नाम और फ्रेम चाहिए ना की हमको ये जो मटेरियल थिंग्स ये सब मटेरियल चीज चाहिए ये सब कुछ जो है वो आज है और कल नहीं है क्षण भंगुर है वो जो नारद की जो कहानी है ना नारद तो वैसे ब्रह्मचारी थे त्यागी थे तो उनको तो पता नहीं की संसार की जो माया होती है कितनी स्ट्रांग होती है तो वैसे ही इससे भगवान विष्णु के साथ में ऐसा ही कुछ बात कर रहे थे की यह माया में जो लोग पढ़ने हैं जो लोग कैसे मूर्ख होते हैं तो भगवान ने सोचा की नारद को एक पाठ पटाया जाए की माया का जो आकर्षण है वो कितना डेंजरस है कितना वो मतलब तो मैं कहेंगे की लैथल है तो विष्णु ने क्या किया नारद को बोला कहानी पे बोला चलो हम घूम के आते हैं एक गांव के बाहर गए और फिर विष्णु ने कहा की नारद जो मेरे लिए इस गांव में किसी घर से पानी लेकर आओ मुझे प्यास लगी है तो नारद बोलना है अच्छा ठीक है भगवान आप यहां पर विश्राम कीजिए मैं पानी लेकर आता हूं वो पानी लेने के लिए गए अभी लेने को गए तो एक घर में गए बोला की पानी चाहिए पानी दीजिए तो अभी तो पहले के ग्रह हस्त तो बड़े मैन वो सत्य उनके भीतर में वह संस्कार रहते थे तो इस तरह से अतिथि का स्वागत करने के लिए तो ये लोग बड़े तट पर रहते थे तो किस एक लड़की ने आकर के एक युवती लड़की ना करके उनको पानी दिया तो अभी नारद है उन्होंने देखा की अरे यह तो यह होती है जो है बड़ी खूबसूरत है बड़ी सुंदर है तो नारद जो है वह पानी भूल गए और उसके जो है मो में फैंस गए तो अभी जाकर के उन्होंने उनके पिताजी से बात की की क्या मैं आपकी लड़की के साथ शादी उसे कर सकता हूं तो पिताजी बड़े खुश हो गए की चलो यह ब्राह्मण लड़का है उसके चेहरे पर यह जो दिव्या अभद जो तेज ये जो तपस्या का जो प्रभाव है चेहरे पे तो दिखता ही है तो चेहरे पर तप का इस तरह का सुंदर प्रभाव दिखे रहा है तो पिताजी ने भी कहा की हां ठीक है आप मेरी लड़की के साथ शादी कर लीजिए तो भी शादी भी हो गई बच्चे भी हुए अभी बड़े सुख और चैन से र रहे थे और सुद्दनली देखा की गांव की नदी में बाढ़ ए गई है और बाढ़ आई तो ऐसी आई की जो है सब कुछ जो है वहां का गांव के जितने भी घर है वो लेकर के धक करके लेक गई अब ये नारद का घर भी चल वो पूरा पानी में डब गया उसके बीबी उसके हाथ में से निकाल गई बच्चों को दो हाथ से पकड़ के रखा है किंतु मैं बाढ़ का जो ये पावर जो है फोर्स जो है अंदर करंट जो है वो इतना स्ट्रांग था की बच्चे भी हाथ से निकाल गए अभी जैसे पानी खत्म हुआ तो नारद ने वो किनारे पे आके देखा है की घर टूट गया भाड़ में चली गई है बच्चे भी चले गए हैं वह मैन मृत्यु को अवश्य प्राप्त हुए होंगे इस तरह की बाढ़ में 10 जान के बाद में किसी का शरीर बचत नहीं है तो ये देखने के बाद में नारद बैठ करके किनारे पे रोना शुरू कर दिया तो रो रहे हैं रो रहे हैं तो सडनली देखा की पीछे में भगवान विष्णु आकर खड़े हो गए तो भगवान विष्णु ने कहा अरे नारद तुम मेरे लिए पानी लेने को गए थे क्या हुआ पानी का तो नर्स सोचता है की क्या भगवान विष्णु क्या का रहे हैं कहां मेरी बीबी मेरे हाथ से चली गई बच्चे चले गए मेरा घर टूट गया मेरा जीवन मेरा जो संसार है वो संसार नष्ट हो गया तो इसके बड़े में कुछ नहीं बोल करके विष्णु अपने पानी के लिए पड़े हैं तो नारद बड़े नाराज होकर बोले भगवान आपने क्या यह तबाही मचा दी इस जगत के ऊपर में मेरे बीबी बच्चों को अपने मार डाला और वह भी मेरे इतने गुरुर होता है की मेरे से पानी मांग रहे हैं तो भगवान विष्णु ने कहा की अरे तुमने जो देखा था वो तुम्हारी एक ब्रह्म था तुम्हारे मां में यह सब पूरा खेल जो है जगत का इस संसार का वो तुम्हारे मां में खेल रहा था तुम तो गए हो अभी दो-तीन मिनट ही हुई है और दो-तीन मिनट ही हुई है मैं वहां पे वेट कर रहा था देखा की तुम लोट नहीं रहे तो मैंने आकर के देखा की तुम यहां पे बैठ के रो रहे हो तो देखिए की नारद को सुद्दनली एकदम वो अकाल ए गई थी हां सही में ये जो कुछ भी हुआ था की एक सुख कितने ही साल बीते थे अपने फैमिली के साथ में परिवार के साथ में बीबी के साथ में बच्चों के साथ में इतना सुंदर मकान बनाया था खेती चल रही थी खेती का वो जो अनाज है वो सब स्टोर करके रखा था कितना सुंदर उसने सब संसार सजय बुझाए था मैंने एकदम सुखमय संसार था वो क्षण भंगुर शुरू भी हुआ और समाप्त भी हो गया इसलिए संसार की माया है वह ठाकुर की और एक कहानी है एक किसान था तो एक किसान रात को सोया हुआ था तो रात को सोते हुए उसने सपना देखा की वो सपना में राजा हुआ है और उसके वो तीन कर राजकुमार है एकदम सुंदर और एकदम स्ट्रांग नव युवान राजकुमार है उसके और वो खुद कितना ही धन संपत्ति का वो मलिक है अभी वो नींद को सपना टूटा नींद से उठा तो देखा उसकी बीबी जोर जोर से रो रही है का रही है की अरे सुनते हो हमारे जो दो लड़के थे जवान लड़के दोनों का मृत्यु हो गया है तो अभी वो किसान जो है वो बैठकर के सोच रहा है की अच्छा वो माना मेरे बच्चों का मृत्यु अभी तो थोड़ी क्षण पहले मैं इतना धनवान था इतना सुखी था पूरा राज्य मेरे हाथ में था इतने सुंदर मेरे राजकुमार थे और अभी मेरे दो अभी देखा हूं क्षण भर के बाद में की मेरे दो बच्चों की मृत्यु हो गई इस तरह का मुझे सोमवार सुनने को मिलता है यह क्या है क्या मामला तो उसकी बीबी देख रही है की वह किसान नहीं रो रहा है ना ही वो कुछ बोल रहा है तो वो एकदम बोलने लगी अरे आपको क्या हो गया है आपको शर्म नहीं ए रही है की आपके दो जवान बच्चे मा गए और आप चुपचाप बैठे हैं थोड़ा तो हुई है थोड़ा तो मुझे साजियारा दीजिए तो वो किसान कहता है की अरे पगली मैं वो जो मेरे वो राजकुमार जो बड़े सुंदर लड़के थे उनके लिए मैं हूं ना की ये जो मेरे दो गरीब किसान के बाद लड़के थे उसके लिए मैं हूं ये जो संसार सही है ना की मैं किसान हूं वो बात सही है की मैं राजा था वो बात सही है कौन सा सही है तो देखिए एक्चुअली दोनों गलत है और दोनों भी सही है ये मतलब ये माया का जो खेल है माया विभिन्न रूप से ये जैसे वो सेक्स किया कहता है ना की होल वर्ल्ड इस डी स्टेज तो यह पूरा जो जगत है वो रंग मंच है यहां पर हम एक के बाद एक खेल करने को आते हैं एक के बाद एक पत्र का अभिनय करने के लिए आते हैं इस नाटक में और जैसे ही हमारा अभिनय समाप्त हो गया हमारा पत्र जो है वह भी स्टेज से चला जाएगा तो यह नॉलेज ए जाना की मैं इतना जी जान से मेरी पुरी प्राणशक्ति लगाकर के ये सब चीजों को बटोरना का बटोरने का प्रयास कर रहा हूं अल्टीमेटली उसमें से कुछ भी तो मेरे साथ में नहीं आने वाला है अगले जन्म में क्या आएगा मैंने जितना जब किया उससे जो मुझे पूनिया मिला या तो मेरे सत्कर्म जो संचित हुए वही मेरे साथ में आने वाला है वही मेरी असली संपत्ति है बहुत सारे धनवान लोगों को देखेंगे की ऐसे-ऐसे रोग हो जाते हैं या तो फिर जब वृद्ध हो जाते हैं तो इतना वो उनको कष्ट होता है की वो जितना उन्होंने जो बैंक बैलेंस था फिक्स डिपॉजिट था वो जो मंथली इनकम है एनुअल उनका जो सैलरी पैकेज है कुछ भी कम नहीं आता है वो बैठे-बैठे रोटी रहते हैं अलग गॉड की यह जगत मिथ्या है ईश्वर सही है यह हुआ नॉलेज यह हुआ ज्ञान और यह हुआ हमारा ईश्वर के साथ में संबंध और दूसरा है सत्य है सत्य क्या है अवर रिलेशनशिप विद पीपल लोगों के साथ में हमारा रिलेशन शिव अभी जैसे ठाकुर ने कहा था ना मां को की ये लो तुम्हारा ज्ञान तुम्हारा आज्ञा ये लो तुम्हारी भक्ति यह लो तुम्हारी अब भक्ति जो भी कुछ है अपूर्व अपने जीवन में जो कुछ भी अर्जन किया था ज्ञान भक्ति वैराग्य ये जितने भी सदगुण है की यह जो मैत्री करुणा मुदिता अपेक्षा जितने भी यह जो ईश्वर शरणाघाटी जितने भी यह सदगुण है सब उन्होंने श्री मां के चरणों में अर्पित कर दिए क्या है की यह माया भी तीन तरह की होती है तामसिक माया राजसुख माया और सात अधिक माया तामसिक माया अर्थात की यह जो भौतिक चीजों के प्रति हमारा आकर्षण राज्यसिक माया अर्थात की कर्म के प्रति हमारा आकर्षक कर्म अर्थात की रिस्टलेसनेस या तो फिर हम लोगों में आजकल इतना डू हम लोग में हमारे हृदय में सी घर कर गया है की हम लोग कर्म किया बिना र नहीं पाते ठाकुर ने कहा था एक बार की केशव सेन के घर गया देखा की एक उनका एक बुध रिलेटिव जो है बैठ करके ताश खेल रहा है पेट खेल रहा है तो ठाकुर ने पूछा की अरे ये इतनी उम्र में कहां वो भगवान का नाम ले ना की पेट खेल रहे हो ताश खेल रहे हो तो उसने क्या कहा की मैं क्या करूं मैं बिना कम के बैठ नहीं सकता इसलिए ताश खेल रहा हूं तो बिना कम के बैठना नहीं है किंतु वह क्या है की यह एक्टिविटी का एक ऐसा हैबिट हो जाता है की बहुत बार हमको लगता है की डर तब तक लोग आजकल जो यह नया हैबिट है ना डेरी रात तक मोबाइल देखते रहना वह किसी के साथ में चैटिंग करते रहना या तो फिर ये जो है ये वीडियो गेम खेलने रहना और वीडियो गेम में भी आजकल इतना सर सब एडिक्टिव गेम सब है यह सोशल मीडिया भी इतना एडिक्टिव है तो क्या रिस्टलेसनेस हमारे भीतर में घर कर गया है हम बिना अपने मां को हमारा मां जो है उसको सब समय कुछ ना कुछ एक्टिविटी चाहिए अभी फिजिकल हम बैठे हैं मां जो एक्टिव है इससे क्या होता है की ओबेसिटी है फिर ये जो लाइफस्टाइल डिजीज है ये सब हमारे मां में घर कर जाते हैं एक्चुअली होना क्या चाहिए 7 घंटा 8 घंटा 9 घंटा जितना भी है आपने कर्म किया उसके बाद में जो है आपने ऑफिस का कम ऑफिस में ही छोड़ करके घर पे आए फिर वो कर्म से अपना नता तोड़ देना है या तो फैमिली मेंबर्स के साथ में बैठ करके हंसी मजाक करना है या तो फिर किसी रिलेटिव्स के घर में जाकर के रिलेटिव्स के घर जाकर के उनके साथ में बात करना है या तो फिर कहानी मंदिर में जाना है या तो कोई अच्छी सोशल एक्टिविटी में पार्टिसिपेट करना है अभी क्या हो रहा है की हमारा ये जो सोशल लाइफ जो है स्पिरिचुअल लाइफ तो छोड़ी दीजिए ये सोशल लाइफ भी जो है जैसे की जान को बैठा है पहले मैं अपने घर में देखा था की वो जो घर के सामने वो जो एक जगह रहती है ना वो हम गुजराती में उसमें ओटला बोलते हैं होटल यानी की वरांडा का एक जैसा एक होता है वहां पे ये जो है लोग ये बूढ़े बच्चे महिलाएं मेरी मां सब बैठ करके वो पड़ोसियों के साथ में गैप लगाते हैं तो अभी तो क्या है ये घर के सामने सब मिलकर के बैठने का पड़ोसियों के साथ में बात करने का या तो फिर अपने रिलेटिव्स के घर जान का ये पूरा कलर ही जैसे जान को बैठा है हमारा लाइव जो है हमारा क जो है और क के बाद में यह जो मिसलेनियस जो सब चीज हैं वो हमारी प्राणशक्ति को इस तरह से का जा रही है की ह्यूमन रिलेशनशिप जो है उससे हमारा पूरा जो है नता टूट गया है इसीलिए कहते हैं की लोनी ने जो है इस समय का सबसे डेंजर्स डिजीज है लोनी ने इसकी वजह से ही ये आपके जितने भी डिप्रेशन है फ्रस्ट्रेशन है ये सुसाइडल थॉट से ये सब इस की वजह से आते हैं उसे स्पिरिचुअल इतिहास तो छोड़ ही दीजिए मैंने सोशल कनेक्शन भी है नहीं रख सकते हैं स्पिरिचुअलिटी तो कैसे रखेंगे तो अपने कर्मों के ऊपर में भी एक मो राहत है कर्मों को भी एक क्षण के बाद में छोड़ना है और फिर अल्टीमेटली ए जाता है सात्विक जो है माया सात्विक माया अर्थात की यदि हम ईश्वर की आराधना करते हैं सब ग्रंथ का पाठ करते हैं या तो मंदिर में जाते हैं या तो फिर साधु संत करते हैं या तो फिर तीर्थ यात्रा करते हैं जो की ईश्वर प्रताप के रास्ते के लिए की जान वाली जो भी साधनाएं हैं साधना का भी एक मो एक समय ग जाता है अभी ऐसा नहीं है की साधना का मोर लगेगा तो फिर मुझे साधना छोड़ देनी है साधना तो करती ही करते ही रहना है वो साधना कब खत्म होगी और कब हम सरकार से इलाका में जाएंगे वो तो हमको ईश्वर ही बता देंगे किंतु यह जानकर के रखना है की यह भी एक मोर है तो ये सात्विक मो तामसिक मो और ये है राजस्व मोहन तीनों से हमारा जो है एक हम छूट इसके लिए हमारा तो नॉलेज तो है किंतु यह जो सत्य जो है सत्य भी इस एक तरह का एक सात्विक मो है किंतु देखिए की ठाकुर ने सब कुछ ईश्वर के चरणों में दे दिया यह शरणाघाटी है फिर यह जो भक्ति है ये जितने भी सात्विक गन हैं तपस्या करके साधना करके प्रगति होते हैं हमारे हृदय में ठाकुर ने सब छोड़ दिए सात्विक माया को भी छोड़ना है चलो ठाकुर ने ठीक कर लिया निराकार यानी की संपूर्ण रूप से वो जो है निर्भर होके रहना है शनागत एक ऐसी चीज है की हम एक भी चीज को पकड़ के रखेंगे हां मुझे लगता है की मैं जाप करता हूं तो वो भी एक अहंकार ए जाता है वो ठाकुर ने कहा था ना की शंकराचार्य ने विद्या का अहंकार रखा था जैसे की लोगों को वो शिक्षा दे सकें सुखदेव ने भक्ति का अहंकार रखा था तो क्या है की इस तरह के अहंकार रखना से शरीर धरण होता है और लोगों को शिक्षक दी जाति है किंतु ठाकुर ने ठीक किया की सब तरह के सात्विक गन त्याग कर देंगे किंतु जब वो ये खाने को गए सब कुछ दे दिया ये लो तुम्हारी भक्ति ये लो तुम्हारी अब भक्ति येलो तुम्हारा ज्ञान येलो तुम्हारा ज्ञान मां के सामने बैठ करके एक के बाद एक पुष्पक के रूप में मां के चरणों में अर्पण कर रहे हैं किंतु जैसे ही वो खाने को गए की ये लो तुम्हारा सत्य और ये लो तुम्हारा सत्य वो जैसे बोलने को जा रहे हैं भीतर से अचानक अट गया ठाकुर बाद में कहते हैं की देखो मां के व की छठ यह दिल किंतु शत्रुत्य पारलम ना मां को मैंने मेरा सब कुछ दे दिया किंतु ने सत्य नहीं दे पाया तो ये सत्य जो है ठाकुर कहते हैं काली की तपस्या है सत्य का पालनपुर जो है वो यदि हम नहीं करेंगे इस जगत में तो हम जो कुछ भी हम करते हैं बाकी सब कुछ वो जो है आईटी बिल लॉस इट्स मीनिंग वो अपना वो एक उसका जो एक अर्थ है वह एक अर्थ जो है वो घुमा बैठेगा इसलिए सत्य पालनपुर जो है वो हमारी एक बहुत ही इंपॉर्टेंट साधना है राजा महाराष्ट्र यहां तक कहते हैं की कलयुग में दो सबसे इंपॉर्टेंट साधनाएं हैं ब्रह्मचर्य दूसरा है सत्य और ब्रह्मचर्य का हंड्रेड परसेंट अनुष्ठान शत-प्रतिशत वह तो हमारे से भी नहीं होता किसी से नहीं होगा उसके लिए तो बहुत लंबी साधना करनी पड़ती है किंतु क्या है की हमको आज शुरुआत कर देना है जहां तक जाए ठाकुर की कृपा से ईश्वर की कृपा से जहां तक जाए फिर इस जन्म में जहां रुक हैं अगले जनों में फिर से वहां से आरंभ करेंगे फिर अगले जन्मो में जहां पे रुकेंगे उसके तीसरी चरणों में फिर से आरंभ होगा तो ये जो करी फॉरवर्ड होता रहेगा किंतु यह आराधना जो है सत्य और ब्रह्मचर्य की इसको हमको शुरुआत तो करना ही होगा तो जो भी है यहां पे स्वामी जी ने कहा की नॉलेज और ट्रुथ नॉलेज इसे अवर रिलेशनशिप विद गॉड और ट्रुथ इस अवर रिलेशनशिप विद पीपल यह दो जो है ईश्वर के साथ में हमारा संबंध ज्ञान और लोगों के में हमारा संबंध सत्य यह दोनों की रक्षा करके हमको इस जगह संसार में रहना है क्या कहते हैं स्वामी जी फिर से पढ़ लेट हूं नॉलेज अलोन कैन मेक उस परफेक्ट ईश्वर सत्य जगत मिथ्या यह ज्ञान होना यही हमको परफेक्ट बना सकता है यही हमको संपूर्ण बना सकता है ही हूं फॉलोज डी गॉड ऑफ ट्रुथ विथ डिवोशन तू हम डी गॉड ऑफ ट्रुथ रिवील्स हिमसेल्फ जो सत्य स्वरूप ईश्वर की आराधना करते हैं प्रार्थना करते हैं भक्ति करते हैं उनके सामने यह सत्य स्वरूप ईश्वर अपने स्वरूप को प्रकट करते हैं तो यह हो गया स्वामी जी का आज का एक कोटेशन आज के लिए