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ओम स्थापक च धर्मस्य सर्व धर्म स्वरूपिणी अवतार वरिष्ठ राम कृष्णाय ते नम हमें आज के शोकाल स्वामी शिष्य आज सुबह को में स्वामी शिष्य संवाद पढ़ रहा था तो स्वामी शिष्य संवाद तो पता है कि स्वामी विवेकानंद जब अमेरिका से भारत लौटे तो उनके साथ में यह शरद चंद्र चक्रवर्ती बोलकर के एक शिष्य उनके पास में आया और फिर उनसे शिक्षा ग्रहण करने लगा तो यह शरदचंद्र चक्रवर्ती ने स्वामी जी के साथ में वार्तालाप करके जो कुछ भी उसने जाना था सीखा था उसने इस किताब में लिपिबद्ध किया है और एक पूरा जनरेशन गया है अपने साधु और भक्तों का कि जिन्होंने इस किताब पढ़ कर के बहुत ही प्रेरणा प्राप्त की है इतनी सुंदर किताब है और स्वामी जी अनफिल्टर्ड स्वामी जी वैसे ऐसा होता है ना स्वामी जी जब प्रवचन देते हैं तो क्या होता है कि प्रवचन में एक स्वरूप दिखता है क्योंकि आपको लॉजिकली स्टेप बाय स्टेप किसी एक सब्जेक्ट के ऊपर में बोलना होता है किंतु वार्तालाप एक ऐसी चीज होती है कि जहां पर प्रश्न उत्तर और एक जनरल कन्वर्सेशन वगैरह होता है तो आप बहुत ही खुल कर के अपने मन की बात लोगों के सामने रखते हैं तो यह वार्तालाप का माध्यम है वह भी स्वामी जी के मन के भीतर में एक खिड़की की तरह ओपन करके हम जान सकते हैं कि स्वामी जी क्या सोचते हैं क्या करते हैं वगैरह तो आज सुबह को मैं एक प्रसंग पढ़ रहा था स्वामी जी अमेरिका से लौटे हैं और उनके साथ में दो-तीन विदेशी शिष्या हैं यह मिस मुलर है यह मिसेस सेवियर है वग दो ब्रिटिश उनकी डिसाइल थी इनको लेकर के स्वामी जी दक्षिणेश्वर आए हैं अभी दक्षिणेश्वर में उस दिन ठाकुर का जन्मोत्सव था तो अभी ठाकुर का जन्मोत्सव तो वैसे हमको पता है कि उनके रहते-रहते ही उनकी बर्थ डे सेलिब्रेशन उनकी जन्मतिथि का उत्सव स्टार्ट हो गया था इसका वर्णन हमको कथामृत में ही मिलता है और किंतु बाद में जब स्वामी जी अमेरिका से लौटे या तो फिर स्वामी जी अमेरिका में थे तभी से उनकी जो ख्याति जिस तरह से बढ़ना शुरू हुई थी इसको देख कर के बहुत सारे लोगों को एक रिन्यूड इंटरेस्ट कि भाई कौन है यह दक्षिणेश्वर के परमहंस जिनके शिष्य ने जाकर के अमेरिका में इतना बड़ा तहलका मचा दिया है तो एक क्यूरियोसिटी जो होती है तो इसकी वजह से बहुत बहुत सारे लोग दक्षिणेश्वर आना शुरू कर दिए थे ठाकुर की जन्मतिथि सेलिब्रेशन में और स्वामी जी स्वयं जब अमेरिका से उपस्थित थे फिर उनके साथ में दो-दो ब्रिटिश महिला थी वही ब्रिटिश लोग जो कि भारत ऊपर राज करते हैं वही उसी ब्रिटिश लोगों की दो महिलाएं भारत में स्वामी जी के साथ में इसलिए आई है कि वह स्वामी जी से हिंदू धर्म की शिक्षा ग्रहण करेगी तो एक क्यूरियोसिटी होता है एक इसका तो बहुत सारे लोग दक्षिणेश्वर आए थे तो स्वामी जी भी इन दोनों महिलाओं को यह मिस मुलर और मिसेस सेवियर दोनों को दक्षिणेश्वर दिखाते दिखाते घूम रहे हैं कि हां यह मां काली का मंदिर है यह राधा कांत का मंदिर है फिर यह ठाकुर का कमरा है ऐसा करते-करते पंचवटी की ओर आए देखा कि पंचवटी में ठाकुर के कुछ-कुछ पुराने शिष्य वहां पर बैठे हुए थे जिनमें से एक थे जीसी गिरीश घोष तो अभी गिरीश घोष और स्वामी जी का जो एक मधुर रिलेशन था स्वामी जी के जो भाई थे ना भाई थे महेंद्रनाथ दत्त उन्होंने स्वामी जी के बारे में एक तीन खंड में एक छोटा सा जीवनी लिखा है हालांकि तीन खंड छोटा सा इसलिए मैं कह रहा हूं क्योंकि तीनों खंड पतले पतले किंतु जो भी है सुंदर एक जीवनी की रचना की है उसमें स्वामी विवेकानंद जीवने घोटना वली उस किताब का नाम है तो उसमें गिरीश घोष और स्वामी जी इन दोनों का इतना मधुर संबंध है उसका इतना सुंदर वर्णन किया है हमको कथामृत पढ़कर के कि बाकी सब किताबें हैं ठाकुर की या स्वामी जी की उसमें पता चलता है कि हां यह दोनों इंटे एक्चुअली महारथी थे और ठाकुर इन दोनों को भिड़ा दिया करते थे कभी-कभी कि करो दोनों लोग आर्गुमेंट पता चले कि कौन कितने पानी में है तो किंतु इन दोनों की फ्रेंडशिप भी ठाकुर की महासमाधि के बाद में दोनों की फ्रेंडशिप भी बहुत गहरी हो गई थी भा ऐसा होता था कि स्वामी जी तो उस समय वरा नगर मठ में रहते थे तो कपड़े भी फटे हाल कपड़े रहेंगे बालों में वो तेल वगैरह नहीं डालेंगे बालों को ब्रश नहीं करेंगे तो बाल भी जटा की तरह पक गए थे स्नान बान करना नहीं करना कोई ठीक नहीं तो शरीर के ऊपर में पूरा वो धूल और मिट्टी लगा रहता था बिल्कुल वैग बंड जिसको कहते हैं ना वो रास्ते में भटकने वाले भिक्षुक उसी के जैसा स्वामी जी का वो कभी-कभी स्वरूप हो जाता था तो ऐसा ही स्वरूप लेकर आकर के वो गिरीश घोष के घर में बैठ जाते थे और गिरीश घोष उनको खिलाता था और कितना ही गप लगाते थे कितना ही गप लगाते थे तो वो सब दिनों की बातें उनके भाई ने महेंद्रनाथ दत्त ने लिखी है तो अभी यह तो उन दिनों की बातें अभी यहां पर दक्षिणेश्वर में स्वामी जी घूम रहे हैं और देखा कि वहां पर गिरीश घोष बैठा हुआ है तो जैसे ही स्वामी जी ने गिरीश को देखा स्वामी जी ने क्या कहा आय रे ए घोष ज अर्थात कि अरे घोष महाशय यहां पर बैठे हैं फिर स्वामी जी ने उनको जाकर के प्रणाम किया फिर क्या कहा सेही एक दिन और ही एक दिन मने वो एक दिन थे और यह एक दिन है देखिए कि एक सेंटेंस में दोनों जो पुराने मित्र हैं इन दोनों में जो भाव का आदान प्रदान हुआ है कितना घन आदान माने यही दक्षिणेश्वर जहां पर बैठ कर के ठाकुर ने लीला की थी यही दक्षिणेश्वर जबकि नरेण एक स्कूल में पढ़ने वाला कॉलेज में पढ़ने वाला लड़का था और ठाकुर के पास में आता था और ठाकुर उसको देख कर के इतने प्रभावित हो गए थे और सब समय लोगों के सामने उसकी प्रशंसा किया करते थे और यही दक्षिणेश्वर जहां पर गिरीश घोष और नरेंद्र एक दूसरे की मुलाकात हुई थी और दोनों वाद विवाद करते थे और आखिर में एकदम बेस्ट फ्रेंड हो गए थे यहीं पर तो ठाकुर ने लीला करके सबको ब्रह्म ज्ञान दिलवाया था सबको साधना करवाई थी यहीं पर ठाकुर ने अपने भविष्य के संघ का फाउंडेशन डाला था तो यही वो दक्षिणेश्वर तो एक समय था ठाकुर को वैसे तो ठाकुर का एक भक्त वृंद था किंतु येय भक्त वृंद के बाहर में देख ज्यादातर लोग ठाकुर को कहेंगे य पागला बामुन यह क्या-क्या कुछ कहते रहेंगे कि दक्षिणेश्वर में एक पगला बैठा है वह लड़कों का दिमाग भ्रमित करके उनको क्या उटपटांग शिक्षा देता है ऐसा सब लोगों के बीच में इस तरह की बातें चलती रहती थी तो देखिए कि मने वही वही दिन का दक्षिणेश्वर है जबकि यह लोग आते थे तो काली मंदिर में पूजा देख कर के इतने अभिभूत हो जाते थे आज वही दक्षिणेश्वर के पूरे विश्व की जनता वहां पर इकट्ठी हो गई है यही स्वा स्वामी जी का दर्शन करने के लिए वहां पर जो स्वामी जी वैसे कॉलेज के पढ़ते हुए लड़के की तरह आते थे जो कि बिल्कुल अनजाना था और यहीं पर बैठ कर के ठाकुर ने एक बार कह दिया था कि ये जो ये केशव सेन के भीतर में इस इतनी जो विद्या देख रहे हो इतना सब कुछ देख रहे हो उसका प्रभाव नरेंद्र की विद्या नरेंद्र की भीतर में यह जो प्रभाव जब वो प्रकट होगा उसका उसका जब आध्यात्मिक आनंद उसका आध्यात्मिक पावर जब मेनिफेस्ट होगा तो यह केशव सेन कहां उसके सामने वो ये हो जाएगा माने छोटा दिखने लगेगा उसका कोई बता नहीं सकते तो यहीं पर ठाकुर ने ऐसा कहा था और सही में ऐसा हुआ केशव सेन ब्रिटेन गया था तो ब्रिटेन की महारानी को मिलकर के आया था किंतु वो तो कैसा है कि गुलाम देशों से आते हैं और लोग उनको फिर कोई गिफ्ट देते हैं ऐसा वो जब राजा रानी करते हैं ऐसा तो किंतु स्वामी जी तो गए थे एक स्वतंत्र नए भारत के प्रतिनिधि के रूप में और उन लोगों से सीखने के लिए नहीं यह कहने केलिए नहीं केशव सैन की तरह कि आपका धर्म बहुत अच्छा है हमको आकर के सिखाइए स्वामी जी गए थे हिंदू धर्म को सनातन हिंदू धर्म की विजय पताका वहां पर गाड़ने के लिए तो वह स्वामी जी तो ज स्वामी जी कहते हैं कि सेही एक दिन और ई एक दिन वो एक दिन थे और यह एक दिन है कितना डिफरेंस है और जब गिरीश घोष सामने उत्तर क्या देते पता है तब वह चौक चाय आरो देखी आरो देखी किंतु फिर भी आंख चाहती है कि और भी देखूं और भी देखूं क्योंकि और देखेंगे तो और भी फिर बाद में बेलूरमठ बनने वाला है बेलूरमठ में तो फिर देखिए कि आज बेलूरमठ और फिर सिर्फ बेलूरमठ ही नहीं बेलूरमठ और बाग बाजार दक्षिणेश्वर ये जो चार पांच अपने केंद्र थे आज 200 300 केंद्र हमारे हो गए हजारों साधु ब्रह्मचारी लाखों भक्त नर नारी यहां पर आकर के ठाकुर के पास में ना प्राप्त करने के लिए आध्यात्मिक यात्रा का मार्गदर्शन प्राप्त करने के लिए यहां पर आते हैं तो यह जो आज का बेलूर मठ आज का रामकृष्ण संघ जो गिरीश घोष ने कहा कि यह जो मैं देख रहा हूं एक समय था कि ठाकुर के पास में हम ही लोग 1015 लोग इकट्ठा होते थे आज देखते हैं कि आधा कोलकात्ता जैसे कि यहां पर इकट्ठा हो गया है इससे भी ज्यादा देखूं तो इससे भी ज्यादा देखिए कि जब यह मैंने सबसे ज्यादा भीड़ देखा है अपने ऑर्डर में कि जब यह कुमारी पूजा होती है और यह पहली जनवरी को कल्पतरु कल्पतरु डे का सेलिब्रेशन होता है काशीपुर मठ में तब पता चलता है कि ठाकुर मा स्वामी जी की भावधारानी पर आकर के अमृत में अमृत मई ये जो गंगा बह रही है उसमें से पान करके तृप्ति लाभ करते हैं तो सुबह को मैं पढ़ रहा था अच्छा फिर इतना तो हुआ इसके बाद में स्वामी जी थोड़ा सा आगे गए कि चलो यह बाद में यह हास पुकुर है फिर यह बेलतला है जहां पर ठाकुर ने तंत्र साधना की थी तो यह मिसेस सेवियर को यह सब दिखाएंगे बोलकर के थोड़े से आगे गए तो अभी यह जो शरद चंद्र चक्रवर्ती है जो कि स्वामी जी के साथ में घूम रहा था तो थोड़ा सा खड़ा रह गया और गिरीश घोष के साथ में बात करने लगा तो पता है गिरीश घोष ने क्या कहा कि लोग जो कुछ-कुछ लोग हैं जो कि स्वामी जी की ऐसी निंदा करते हैं कि विदेशी स्त्रियों के साथ में इस तर से घूम रहा है बातें कर रहा है किंतु पता है मैं जदिया का करते हुए देखेंगे मेरी आंख जद नरेद्र को कोई गलत कार्य करती हुई देखेगी तो मैं इस आंख को उठा कर के फेंक दूंगा क्योंकि मुझे विश्वास है कि मेरी आंखें गलत चीज देख सकती है किंतु नरेण कोई भी गलत कार्य नहीं कर सकता तो इस तरह से फिर इन दोनों की बात हो रही थी तो देखिए कि ये जो अपना संघ संघ बद्ध जीवन कहां से स्टार्ट हुआ था जबकि वही ठाकुर अकेले अकेले बेचारे रोते थे मां को प्रार्थना करते थे विनती करते थे मां आकर के दिखा दो अपना स्वरूप दर्शन दो मुझे दर्शन दो आशीर्वाद दो और वह कहां के दिन और आज के दिन के इतने सारे लोग हम इकट्ठा हुए उनकी बातें सुनने के लिए उनके उपदेश ग्रहण करने के लिए तो अभी ज्ञान योग स्वामी विवेकानंद का कंप्लीट वर्क्स इसमें ज्ञान योग में दो प्रवचन है कॉस्मो मैक्रो कजम कॉस्मो माइक्रो कजम इसमें से कॉस्मस माइक्रो कजम का हम पाठ कर रहे हैं हमने देखा कि स्वामी जी किस तरह से अ पुनर्जन्म वाद के बारे में चर्चा कर रहे हैं पहले तो कहा कि पुनर्जन्म नहीं है ऐसा जो कहते हैं उनकी बातों को काटा फिर कहा कि पुनर्जन्म है तो हम कैसे प्रूव करेंगे तो स्वामी जी पूरा एक मेथड लेकर के एक पूरा आर्गुमेंट ले करके प्रूव कर रहे हैं स्वामी जी कहते हैं कि हम जो कुछ भी देखते हैं इसको हम ज्ञान के ज्ञान के भीतर में रूपांतर कब होगा मैं इस किताब को देखता हूं तो सिर्फ देखने से तो चलेगा नहीं मेरे मन के भीतर में फ्लश होगा कि हां मैं ये किताब देख रहा हूं इसके भीतर में ये जो लेटर्स है वो मैं पढ़ रहा हूं तो ये पढ़कर के ये अल्फाबेट से ये फिलोसोफी है ये मुझे ज्ञान कब होता है ऑलरेडी इसमें बहुत सारा मेरे ब्रेन के भीतर में बैठा हुआ है मैं जो देखता हूं उसको मेरे ब्रेन में रहे हुए स्टोर के साथ में मेमोरी के साथ में मैच करता हूं तब कहीं जाकर के यह ज्ञान होता है तो यह पूरा जो आर्गुमेंट चल रहा था इसको स्वामी जी किस तरह से कंक्लूजन इसी में स्वामी जी ने यह भी कहा कि कोई भी आज जिसको हम इंस्टिंक्ट कहते हैं वह इंस्टिंक्ट पूर्व जन्म में जो हमने क्रियाएं मेहनत करके सीखी थी उसी का यह परिणाम है उसी को यह मशीन लेवल पर आजकल जैसे होता है ना कि कंप्यूटर में दो दो तरह की मेमोरी होती है एक तो रम और रोम रेम अर्थात की वो जो कैश मेमोरी जहां पर एक्चुअल सब प्रोसेसेस होती है और रोम अर्थात की रीड ओनली मेमोरी वह जो कंप्यूटर का हार्ड ड्राइव है उसके ऊपर में जनरली वोह रहता है जिसमें कि सॉफ्टवेयर रहता है इंस्टॉल रहता है तो वैसे ही स्वामी जी कहते हैं कि दो तरह की हमारी एक्शंस है एक एक्शन की जो कि मैं मेहनत करके करता हूं सोच समझ करके करता हूं दूसरा मैं इंस्टिंक्टिवली करता हूं जैसे कि मेरे हृदय की धड़कन वह चलती ही रहती है उसके बारे में मुझे सोचना समझना नहीं है किंतु जब मैं यह क्लास लेता हूं जब मैं आपके सामने यह ठाकुर म स्वामी जी की बात करता हूं तो प्रत्येक शब्द के पीछे में मुझे कुछ ना कुछ सोचना है कि मैं यह शब्द या तो यह आइडिया या तो यह प्रसंग या तो यह किताब मैं क्यों आपके सामने मैं बात कर रहा हूं तो यह सोच समझ करके करने वाली बात होती है दूसरी ऑटोमेटिक होती है तो स्वामी जी कहते हैं कि जो हम सोच समझ कर के लंबे टाइम तक करते हैं एक समय आता है कि वह ऑटोमेटिक हो जाती है कोई कोई अच्छे बहुत स्पीकर होते हैं ना बहुत एक्सपीरियंस वाले उनका वो पहला पूरा स्टोर पड़ा होता है मेम एक्सपीरियंस और नॉलेज का उनको यदि आप जाकर के कह दे कि हां इस टॉपिक प बोलना है तो जैसे वो टेप रिकॉर्ड का स्विच ऑन करेंगे वैसे ही वो बोलना शुरू कर देंगे मको सोचना नहीं पड़ता जबकि कोई नया-नया स्पीकर है तो उसको जो भी बोलेगा व कितना दिनों तक उसको प्रैक्टिस करना है तो वैसे ही यहां पे इंस्टिंक्ट जो कि सोच समझ कर के करना है जो कि ऑटोमेटिक होता है तो स्वामी जी कहते हैं कि जो ऑटोमेटिक भी होता है वह भी सोच समझ करने वाली क्रिया हो जाती है जैसे कि मेरे हृदय की धड़कन अभी तो ऑटोमेटिक चल रही है किंतु मैं चाहूं तो मैं उसको धीरे-धीरे करके स्लो भी कर सकता हूं तो ये इवॉलेंट एक्शन या तो इंस्टिंक्टिव एक्शन सभी हमारे कंट्रोल में है इसके बाद में स्वामी जी कहते हैं पिछले जन्मों में जो सोच समझ के किया था इस जन्म में सब कुछ ऑटोमेटिक हो गया है द फियर ऑफ डेथ द डकलिंग टेकिंग टू द वटर एंड ऑल इ इवोलंटियर एक्शंस इन द ह्यूमन बीइंग व्हिच हैव बिकम इंस्टिंक्टिव आर द रिजल्ट्स ऑफ पास्ट एक्सपीरियंस मृत्यु का भय बतक जैसे ही जन्म लेता है वैसे ही पानी में तैरना शुरू कर देता है और इस के अलावा भी जितनी भी ऑटोमेटिक इवॉलेंट अर्थात कि ऑटोमेटिक एक्शंस है मनुष्य के भीतर में जो कि इंस्टिंक्ट बन चुकी है वह सब हमारे भूतकाल के अनुभवों का परिणाम है सो फार वी हैव प्रोसीडेड वेरी क्लियर एंड सो फार द लेटेस्ट साइ साइंस इज विथ अस अभी तक हमने विज्ञान का सहारा लेकर के एक बड़े ही स्पष्ट मार्ग से इस बात को प्रतिपादित करने का प्रयास प्रयास किया है बट हियर कम्स वन मोर डिफिकल्टी किंतु यहां पर एक और समस्या हमारे सामने आती है द लेटेस्ट साइंटिफिक मेन आर कमिंग बैक टू द एंसिस एंड एस फार एस दे हैव डन सो देयर इज परफेक्ट एग्रीमेंट आज के जो आधुनिक वैज्ञानिक है हमारे पुराने ऋषि मुनियों से शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं या तो फिर वह जो ग्रंथ की रचना करके गए हैं उसमें उसको पढ़ कर के आज के आधुनिक विज्ञान के साथ में मिलती जुलती बहुत सारी बातें खोज रहे हैं और एज ऑफ टुडे मने अब तक तो दोनों परफेक्ट एग्रीमेंट में है दोनों में एग्रीमेंट है दे एडमिट दैट ईच मैन एंड ईच एनिमल इज बोर्न विथ ए फंड ऑफ एक्सपीरियंस एंड दैट ऑल दिस एक्शंस इन द माइंड आर द रिजल्ट ऑफ द पास्ट एक्सपीरियंस दोनों एग्री होते हैं हमारे ऋषि मुनि और आज के वैज्ञानिक के मनुष्य का जो जन्म होता है तो जन्म के साथ में ही बहुत सारा नॉलेज बर्थ के साथ में ही आता है और यह जो भी नॉलेज है वह पिछले पिछले पुराने इतिहास के अनुभवों का परिणाम है बट वट दे आस्क इज द यूज ऑफ सेइंग दैट ट एक्सपीरियंस बिलोंग टू द सोल किंतु ऐसा कहना कि यह जो एक्सपीरियंस जिसके साथ में यह नॉलेज कि जिसके साथ में बच्चे का जन्म होता है ऐसा कहने की क्या जरूरत है कि यह जीवात्मा या तो सूक्ष्म शरीर के साथ में यह जुड़े हुए हैं यहां पर स्वामी जी ने शब्द यूज किया है सोल जिसका वैसे तो लिटरल ट्रांसलेशन आत्मन होगा किंतु हमको पता है आत्मन के साथ में कोई भी चीज जुड़ी हुई नहीं होती तो हम इसका प्रॉपर ट्रांसलेशन सूक्ष्म शरीर करेंगे तो आज के जो वैज्ञानिक लोग कहते हैं कि हां हमने यह स्वीकार तो किया कि बच्चे का जन्म होने से ही बहुत सारी चीजें वह पढ वो जानता जान कर के ही आता है किंतु ऐसा कहने की क्या जरूरत है कि इस शरीर के भीतर में एक सूक्ष्म शरीर है और यह सूक्ष्म शरीर के साथ में पिछले जन्म की मेमोरीज संस्कार वगैरह आ रहे हैं ऐसा कहने की तो कोई जरूरत नहीं है व्हाई नॉट दे व्हाई नॉट से इट इज हेरेडिटरी ट्रांसमिशन व्हाई नॉट से इट बिलोंग टू द बॉडी एंड द बॉडी अलोन व्हाई नॉट से इट इज हेरेडिटरी ट्रा ट्रांसमिशन यह शरीर के साथ में ही यह सब अनुभूति आती है अनुभव आते हैं और यह हेरेडिटरी ट्रा ट्रांसमिशन का यह परिणाम है दिस इज द लास्ट क्वेश्चन वई नॉट से दैट ऑल द एक्सपीरियंस विथ वच आई एम बोर्न इज द रिजल्टेंट इफेक्ट ऑफ ऑल द पास्ट एक्सपीरियंस ऑफ माय आंसेस्टर स्वामी जी कहते हैं यह आखिरी आर्गुमेंट है और यह कहते हैं कि ऐसा क्यों नहीं कि मैं आज जन्म जो मेरा हुआ है मेरे जो मेरे भीतर में जो भी यह इंस्टिंक्टिव एक्शन है मेरे एंसेट ने जो कुछ करके गए हैं उन्होंने यह जो मुझे हेरेडिटरी जो वारसागत जो कुछ दिया है इसका परिणाम है ऐसा क्यों नहीं है द सम टोटल ऑफ द एक्सपीरियंस फ्रॉम द लिटिल प्रोटोप्लास्मिक ह्यूमन बीइंग इज इन मी बट इट हैज कम फ्रॉम बॉडी टू बॉडी इन द कोर्स ऑफ हेरेडिटरी ट्रांस ट्रांसमिशन जो सम टोटल ऑफ आज तक के जितने भी एक्सपीरियंस है व सब मेरे शरीर में आए हैं किंतु मेरे शरीर में कैसे आए यह जो प्रजनन की क्रिया जो होती है मां और पिताजी से बच्चे में जो वारसागत जो मिलता है इस तरह से आए हैं हेरेडिटरी ट्रांसमिशन यह जो वारसागत आए हैं इसमें दिक्कत क्या है इस बात को स्वीकार करने में अच्छा मैंने एक बार तो पढ़ लिया अभी इसके बारे में थोड़ा सा विशेष रूप से डिस्कस करना पड़ेगा स्वामी जी के सामने जो आर्गुमेंट है बड़ी ही सटल बड़ी ही सूक्ष्म तरह की आर्गुमेंट है आज का आधुनिक विज्ञान क्या कहता है कि ऑफकोर्स हमारे भीतर में इंस्टिंक्टिव एक्शन तो जन जन्म के साथ में ही है बच्चा जैसे ही जन्म लेता है वैसे ही मां उसको दूध पिलाने का प्रयास करती है बच्चा इमीडिएट दूध पीने के लिए तैयार हो जाता है जिसको कि इंग्लिश में सकिंग एक्शन कहते हैं तो यह सकिंग एक्शन या तो फिर चूसने की यह जो प्रक्रिया है दूध वह कोई उसको किसी ने सिखाया नहीं है जैसे ही जन्म होता है वैसे ही वह यह प्रक्रिया करना आरंभ कर देता है क्यों क्योंकि यह तो उसके भीतर में है ही है अभी यह जो प्रक्रिया वह जो कर रहा है उसके लिए आपको यह कहने की क्या जरूरत है भाई कि यह पंचमहाभूत का देह बना हुआ है इसके भीतर में एक दूसरा देह है सूक्ष्म शरीर मन बुद्धि चित्त अहंकार का बना हुआ जो कि एक के बाद एक स्थूल शरीर धारण करता है स्थूल शरीर का जीवन कार्य समाप्त हो जाता है तो फिर दूसरा शरीर धारण करता है ऐसा कहने की क्या जरूरत है भाई आज का जो मॉडर्न साइंस है उसने जेनेटिक्स का सिद्धांत तो खोज कर कह रखा है ये जेनेटिक्स के सिद्धांत के अनुसार माताजी और पिताजी के जो उनकी जो ट्रेट्स है सब जो उनके गुणधर्म है वह बच्चे में आते हैं हेरेडिटरी यह सब होता है इसीलिए आप बहुत बार ऐसा देखा जाएगा कि पिता के बाल मान लीजिए वेस्टर्न कंट्रीज में ब्लड हेयर होते हैं सोनेरी कलर के बाल होते हैं तो बच्चे में भी वह सोनेरी कलर के बाल आएंगे भारत में देखें माताजी पिताजी के ज्यादातर बाल काले होते हैं तो बच्चे में भी काले बाल आएंगे हमारा स्किन कलर थोड़ा सा ब्राउनिश टाइप का है तो पिताजी का जो स्किन कलर है हमारे में आता है अमेरिका में देखिएगा स्किन कलर वाइट होता है तो वाइट बच्चे को मिलता है य जो हेरेडिटरी ट्रांसमिशन की यह जो पद्धति है यह तो बड़ी ही स्पष्ट है एक जदी एक शेर अपने बच्चे को जन्म देगा तो वह तो बिल्ली को तो जन्म नहीं देगा शेर शेर के बच्चे को ही शेर को ही जन्म देगा बिल्ली बिल्ली को ही जन्म देगी एक जो हमा एक मनुष्य है मनुष्य को ही जन्म देगा ऐसा तो होगा नहीं कि मनुष्य को जन्म दे या मनुष्य शेर को जन्म दे ऐसा तो होने वाला नहीं है यह सब तो आपके डीएनए में जेनेटिकली यह सब होता है तो उसमें आपको सूक्ष्म शरीर लाने की कहां पर जरूरत पड़ गई और स्वामी जी देखिए अभी तो स्वामी जी जिस समय यह सब स्टडी कर रहे थे जो उस समय तो यह सब चीजें इतनी एडवांस नहीं हुई थी इसके बाद में हमको पता है आज का आधुनिक साइंस जिसको कि जेनेटिक्स कहते हैं यह 1960 के आसपास में ये वाटसन बोलकर वाटसन एंड क्रिक ऐसा दो साइंटिस्ट है जिन लोगों ने ये डीएनए खोज निकाला था आज डीएनए के ऊपर में इतना सारा संशोधन हो रहा है इसके भीतर में बिलियंस ऑफ बेस पेर होती है चार उसमें यह होते हैं एंजाइम और चार एंजाइम मिलकर के बिलियंस ऑफ बेस पेर बनाते हैं और इसका स्ट्रक्चर भी आज तो जो लोग भी न्यूज़पेपर वगैरह पढ़ते हैं डीएनए का स्ट्रक्चर तो सभी ने देखा होगा एक सीढ़ी जैसी होती है सी बीडी को जैसे ट्विस्ट कर दिया इस तरह का डीएनए का स्ट्रक्चर है बड़ा ही पॉपुलर यह डीएनए का चित्र है इसी के भीतर में जितनी भी बेस पेयर होती है इसको इंग्लिश में कहते हैं टेक्निकल वर्ड उसके प्रत्येक जीन का एक टुकड़ा है हमारा जो बिहेवियर है उसको नियमन करता है हमारी आंखों का कलर कैसा होगा हमारे बालों का कलर कैसा होगा हमारा स्किन कलर कैसा होगा फिर अपना जो हार्ट है अपना लिवर है अपना किडनी है वह प्रॉपर्ली फंक्शन करता है कि नहीं बहुत सारे जेनेटिक डिसीज होते हैं जो पेरेंट्स को जद वह डिसीज होगा तो बच्चों में भी यह डिसीज आएगा तो यह तो बड़ा ही प्रूव हो चुका है तो यह देखिए कि यह जो ट्रांसमिशन जो होता है ना दिस इज कॉल्ड स्पेसस ट्रांसमिशन और स्वामी जी जो कह रहे हैं वह है ट्रांसमिशन थ्रू सोल सोल ट्रांसमिशन एंड स्पेसस ट्रांसमिशन देखिए कि दोनों के भीतर में कितना बड़ा डिफरेंस है मैं आज जो हूं जो मैंने पूर्वक जन्म के जो कर्म किए थे उसके संस्कारों का लेखा जोखा हो यह हो गया अपना वेदांत और यह मॉडर्न साइंस क हो ना कि इवोल्यूशनरी साइंस कहो ना कि जेनेटिक्स कहो वह क्या कहता है कि यह पूरी मानव सभ्यता है यह जो पूरा ह्यूमन स्पीशीज है हमारे जितने भी एंसेट हैं वह चाहे अफ्रीका में रहते हो जो चाहे यूरोप में रहते ते हो जो चाहे चाइना में रहे हो यह पूरा आज से मान लीजिए 253 हज साल पहले यह जो होमो सेपियंस को नहीं कि आज से दो ढाई लाख साल पहले यह होमो इरेक्टस जो होमो स्पीस की शुरुआत हुई ह्यूमन स्पीस की शुरुआत हुई तो और सिर्फ इतना ही नहीं जो कि फर्स्ट सिंगल सेल्यूलर ऑर्गेनिस्ट म था अमीबा ना कि जो भी उसको आप नाम दो प्रोटोप्लास्मिक यह यात्रा है मने यह जो फर्स्ट सिंगल सेल्यूलर ऑर्गेनिस्ट सम मल्टी सेल्यूलर ऑर्गेनिस्ट म उसके बाद में यह पानी में तैरने वाली यह मछलियां वगैरह का इवोल्यूशन हुआ मछलियां जमीन के ऊपर में आई और पेर बनाए तो जिनको कि मैमल्स और रेप्टाइल्स कहते हैं मैमल्स अर्थात कि जिनका कि खून थोड़ा सा गर्म रहता है हमारा खून का टेंपरेचर 30 डिग्री न कि समथिंग है जो रूम टेंपरेचर के आसपास होता है जो भी है एक्जैक्ट में फिगर भूल गया और रेप्टाइल्स जिनको कहते हैं रेप्टाइल्स जिनका कि खून ठंडा रहता है अर्थात कि जब क्लाइमेट चेंज होगा रेप्टाइल्स उनके साथ में अपने को बचा नहीं पाएंगे या तो वह हाइबरनेशन में चले जाएंगे अर्थात कि लंबी नींद में चले जाएंगे या तो फिर वो एक्सटिंक्ट हो जाएंगे उनका सफाया हो जाएगा जबकि हम मेमल से गर्म खून वाली यह प्रजातियां स्पीशीज हम लोग क्लाइमेट चेंज के साथ में अपने को मैनेज करके रह सकते हैं क्योंकि हमारे उनका टेंपरेचर इक्वल होता है यह ऐसा हो गया कि बाहर में कितना ही सारा टेंपरेचर बढ़ता रहता है कम होता रहता है हमने ऑफिस में एसी लगाया है तो ऑफिस में जो एसी का जो टेंपरेचर सेट किया है 20 21 25 जो भी है वो एगजैक्टली वैसे का वैसा रहेगा तो ये देखिए कि अपना खून अपने शरीर में टेंपरेचर मेंटेन करता है तो ये तो है कि एक बार जब डेवलप हो गया तो वही डीएनए में लिख लिया गया ये प्रोग्राम डीएनए में लिख लिया गया और फिर वही कि डीएनए अभी मेरे भीतर में आया है यह कैसा है पता है एक दूसरा जद एनालॉजी दूं तो मैं जब पहली पहली बार कंप्यूटर सीख रहा था तब डोस बोल कर के एक ऑपरेटिंग सिस्टम था डीओएस डिस्क ऑपरेटिंग सिस्टम उसका नाम था तो ये डोस के ऊपर में हम काम करते थे इसके बाद में विज आया अभी विज की पुरानी वर्जन शायद चलती होगी अमेरिका में किंतु इंडिया में जो मैंने पहला विज के वर्जन पर काम किया था 3.1 इसके बाद में विज की नई वर्जन आती रही 95 वगैरह अभी क्या होता है कि यह जो पहली वर्जन जो ऑपरेटिंग सिस्टम थी उसमें जो प्रोग्रामिंग किया होगा उसको डेवलप करके थोड़ा सा प्रोग्रामिंग और ज्यादा कॉम्प्लेक्शन बनाई फिर उसी प्रोग्रामिंग को कॉम्प्लेक्शन बनाई तो आज ये विज की जो लेटेस्ट वर्जन है उसमें वहां से लेकर के मैं जो 95 ना की उस समय में पहली पहली बार कंप्यूटर सीखना शुरू किया था और ये प्रोग्रामिंग वगैरह तो 1970 में वगैरह में स्टार्ट हो गया था अमेरिका में तो वो जो सॉफ्टवेयर की जो फर्स्ट वर्जन थी तब से लेकर के आज की लेटेस्ट वर्जन है उसमें जितना भी कोडिंग हुआ और जिसका भी कोडिंग मॉडिफाई हुआ उसका फाइनल अवतार आज की विज की लेटेस्ट वर्जन है तो वैसे ही अपना डीएनए भी एक लेटेस्ट वर्जन है जो फर्स्ट वर्जन डीएनए होगा जिसमें इस तरह से प्रोग्राम हुआ होगा कि ये हार्ट का फंक्शन इस तरह से होना चाहिए ये लंग्स का फंक्शन इस तरह से होना चाहिए फिर देखा कि ठंडा खून होता है तो क्लाइमेट चेंज के साथ में हम लोग ये मैच नहीं कर पाते अपने शरीर को लंबा समय तक सोए रहना पड़ता है क्योंकि शरीर में एनर्जी ही नहीं रहेगी ठंडा खून होने की वजह से तो फिर खून को गर्म करो और खून का टेंपरेचर को मेंटेन करो तभी कहीं जाकर के एक एक्टिव लाइफ लीड कर पाएंगे ऐसा एक्सपेरिमेंट होकर के डिसीजन होकर के एक नया डीएनए में प्रोग्राम लिखा गया कि खून को गर्म रखना है उसके बाद में जो नई-नई स्पीशीज का इवोल्यूशन हुआ तो गर्म खून वाली मैमल्स यह हम लोग मैमल्स बने नई स्पीशीज अभी हमारा खून गर्म है किंतु फिर गर्म खून होने से यह जो अपना ब्लड गर्म होने से यह ऑक्सीजन किस तरह से डिसोल्व होता है ब्लड के भीतर में वह भी तो उसका भी तो प्रोग्राम नए तरीके से लिखना पड़ेगा फिर यह हार्ट किस तरह से काम करता है यह किडनी किस तरह से फंक्शन करती है सभी प्रोग्राम रिलेटेड प्रोग्राम आपको नए-नए लिखने पड़ेंगे तो जितने नए-नए प्रोग्राम लिखते लिखते आज हमारे भीतर में एक डीएनए जो आया है वह आज के पहले जितनी भी स्पेसस थी सबका प्रोग्राम का लेटेस्ट फाइनल वर्जन हमारे डीएनए में है अभी आज मान लीजिए मैं अपने कंप्यूटर में एक सॉफ्टवेयर यूज कर रहा हूं ये ऑपरेटिंग सिस्टम मैं क्या ऐसा कह पाऊंगा कि यह ऑपरेटिंग सिस्टम इससे पहले इस पार्टिकुलर पीसी में थी उससे पहले उस पार्टिकुलर पीसी में थी इसका पूर्व जन्म उस पीसी में हुआ था उस कंप्यूटर में हुआ था और उसका पूर्व जन्म उस कंप्यूटर में हुआ था नहीं मैं ऐसा नहीं कह पाऊंगा क्योंकि एक कलेक्टिव होता है कंप्यूटर प्रोग्राम का जो कि वहां पे वो ये होक के मॉडिफाई होकर के उसकी डिफरेंट डिफरेंट वर्जन डिस्ट्रीब्यूटर है मेरे कंप्यूटर में जो सॉफ्टवेयर है उसका पूर्व जन्म कौन से कंप्यूटर में हुआ था कह ही नहीं सकते वो एक कलेक्टिव के रूप में ही हमको देखना पड़ेगा तो वैसे ही आज का मॉडर्न साइंस कहता है कि यह जो सूक्ष्म शरीर है जो कि पूर्व जन्म में इस देह में था इस शरीर में था उसके पूर्व जन्म में उस शरीर में था इस तरह से जिम्नास्टिक इंटेलेक्चुअल जिम्नास्टिक करने की क्या जरूरत है सीधा सधी यह एक्सेप्ट कर दो कि कलेक्टिव डीएनए रिप्रोग्रामिंग होता रहता है एवरी नाउ एंड देन कुछ-कुछ सालों में सभी का डीएनए रिप्रोग्राम होता रहता है और फिर वही डीएनए डिसेमिनेट होकर के सभी के भीतर में जाता है एक देह से दूसरे देह एक शरीर से दूसरे शरीर जन्म लेकर के इवोल्यूशन होना यह तो अनसाइंटिफिक है किंतु स्पेसस टू स्पेसस जनरेशन टू जनरेशन इवॉल्व होना यह साइंटिफिक है यह आज का मॉडर्न साइंस हमको कहता है और इस मॉडर्न साइंस में देखिए कि स्वामी जी की यह जो ग्रास्पिंग कैपेसिटी भी कितनी है कि उस समय यह जेनेटिक्स का विज्ञान इतना डेवलप भी नहीं हुआ था जेनेटिक्स वाली बात भी नहीं थी बात-बात में स्वामी जी यह जेनेटिक्स और ये हेरेडिटरी ट्रांसमिशन अर्थात कि गत यह जो हमको यह जो सब गुण धर्म मिलते हैं अपने पेरेंट्स से अपने माताजी पिताजी से उसके बारे में स्वामी जी जो कहते हैं उसी से हमको पता चल जाएगा कि उस समय का नॉलेज कितना अधूरा था और आज का नॉलेज कितना कंप्लीट है कंप्लीट एटलीस्ट कोई भी नॉलेज कंप्लीट नहीं होता किंतु हम ऐसा कह सकते हैं कि स्वामी जी के समय से जितना नॉलेज था उससे तो आज बहुत ज्यादा है तो स्वामी जी अभी जो आर्गुमेंट करते हैं उसमें से कुछ-कुछ आर्गुमेंट आज के समय के लिए वैलिड नहीं नहीं है किंतु फिर भी यह जो अंडरलाइन अजमन है अंडरलाइन जो लॉजिक है वह परफेक्टली चलता है तो वो लॉजिक को हम देखेंगे स्वामी जी कहते हैं दिस क्वेश्चन इज वेरी नाइस यह पर प्रश्न बड़ा ही सुंदर है एंड वी एडमिट सम पार्ट ऑफ दिस हेरेडिटरी ट्रांसमिशन हम यह जो हेरेडिटरी ट्रांसमिशन है जनरेशन टू जनरेशन ट्रांसमिशन है स्पेसस टू स्पेसस ट्रांसमिशन है उसका कुछ हिस्सा उसका कुछ अंश हम लोग स्वीकार करते हैं कि यह सत्य है जैसे कि यह ठंडे खून से गरम ख की ओर ट्रांजीशन होना जैसे कि यह जलचर से स्थल चर की ओर ट्रांजीशन होना एक समय था समुंदर में रहते थे उसके बाद में जमीन पर रहना शुरू किया इतना तो हमको स्वीकार करते हैं इसका कुछ कुछ अंश किंतु हाउ फार कहां तक एस फार एस फर्नी द मटेरियल जहां तक आप प्रूफ देते रहेंगे वहां तक हम एक्सेप्ट करेंगे वी बाय अवर पास्ट एक्शन कंफर्म आवर सेल्व टू अ सर्टेन बर्थ इन सर्टेन बॉडी एंड द ओनली सूटेबल मटेरियल फॉर ट बॉडी कम्स फ्रॉम द पेरेंट्स हु हैव मेड देम सेल्फ फिट टू हैव ट सोल एस देर ऑफस्प्रिंग हम हमारे पिछले जन्मों के कर्म की वजह से एक पार्टिकुलर शरीर धारण करने के लिए एलिजिबल होते हैं लायक होते हैं अच्छे कर्म किए हैं तो मनुष्य का शरीर धारण करने की हमको अनुमति मिलती है और सतत जन्म के बाद जन्म एक के बाद एक बहुत सारे जन्म तक दुष्कर्म करते रहे तो पशु योनि में वापस चला जाना होगा और हम उसी तरह के पिता पेरेंट्स यानी यानी कि माता और पिता के देह में देह से जन्म ग्रहण करते हैं जो कि हमारी जो आय सूक्ष्म शरीर है इस सूक्ष्म शरीर को धारण करने के लिए जो स्थूल देह है उसको जन्म दे सके ऐसे ही पेरेंट से हम लोग जन्म ग्रहण करते हैं आर्गुमेंट थोड़ी कॉम्प्लिकेटेड है किंतु वैसे तो बड़ा ही सरल है यदि मैं दुष्कर्म करते करते मैं म पशु जनि में जन्म लूंगा तो मैं किसी पशु के घर ही जन्म लेने वाला हूं क्योंकि एक पशु ही पशु को जन्म दे सकता है और सत्कर्म चाहे इतना ना भी किए किंतु दुष्कर्म भी ना किए और मनुष्य जन्म चलता रहे तो मैं मनुष्य पेरेंट्स के वहां पर ही जन्म लूंगा क्योंकि एक मनुष्य पेरेंट ही एक मनुष्य को जन्म दे सकते हैं द सिंपल हेरेडिटरी थिरी टेक्स फॉर ग्रांटेड द मोस्ट अटोनिंग प्रपोजिशन विदाउट एनी प्रूफ दैट मेंटल एक्सपीरियंस कैन बी रिकॉर्डेड इन मैटर्स दैट मेंटल एक्सपीरियंस कैन बी इवॉल्वड इन मैटर यह जो हेरेडिटरी थिरी है यह जेनेटिक्स की थिरी है यह एक बहुत ही एक अटोनिंग प्रपोजिशन एक बहुत ही चमक कर देने वाली एक बात को स्वीकृत कर लेता है कि जो मानसिक एक्सपीरियंस होते हैं इसका प्रोग्राम आप डीएनए में कर सकते हैं अच्छा आज मैंने एक अच्छा कार्य किया तो यह जो संस्कार है वह क्या मेरे डीएनए में चला जाएगा आज मैंने ने एक बहुत ही बुरा कार्य किया तो उसका जो दुष्कर्म का जो लेखाजोखा है वो क्या मेरे डीएनए में आ जाएगा मान लीजिए मेरे पिताजी ने बहुत सारे अच्छे-अच्छे कार्य किए होंगे किंतु उसी पिताजी के एक पिताजी के तीन-चार बच्चे होंगे किसी में धर्म की वृत्ति अच्छी होगी किसी में अधर्म की वृत्ति होगी यह तो हमने कितनी ही बार देखा है और ऐसा भी देखा है कि ऐसे कोई व्यक्ति जो कि खुद क्रिमिनल हो किंतु उसका बच्चा बहुत ही पढ़ाई लिखाई करके आगे बढ़ा हो तो पिताजी पेरेंट्स के जो सत्कर्म या दुष्कर्म क्या डीएनए में लिख कर के बच्चे में आते हैं ऐसा आपने कैसे स्वीकृत कर लिया यह जो फिजिकल डेवलपमेंट है वह हम स्वीकार करते हैं कि हां हम अभी क्या होता है कि एक समय था कि जब हम लोग जंगल वगैरह में रहते थे तो पेड़ एक पेड़ से ऊपर से दूसरे पेड़ पर जंप लगाते थे तो पेड़ से एक पेड़ से दूसरे पेड़ में जंप लगाने के लिए हमको पूंछ की जरूरत थी तो पूछ थी इसके बाद में हम लोग सवाना में रहने लगे सवाना अर्थात कि खुला सा एक मैदान जिसमें घास उगा है तो यहां पर तो हमको सीधा होकर चलना है तो पोछ चली गई क्योंकि इसकी आवश्यकता नहीं है और सीधे होकर के चलना शुरू किया यह जो फिजिकल ट्रेट है वो जो हेरेडिटरी के थ्रू एक एक जनरेशन से दूसरे जनरेशन जाती है यह स्वीकार करते हैं किंतु सत्कर्म दुष्कर्म सत संस्कार दुश संस्कार ये किस तरह से डीएनए के थ्रू चलते हैं ये यह बता दो थोड़ा सा यह आपने कैसे अनुमान कर लिया कि संस्कार डीएनए के थ्रू चलते हैं फिजिकल कैरेक्टरिस्टिक डीएनए के थ्रू ट्रांसमिट होती है संस्कार कैसे होंगे तो यह प्रश्न और यह प्रश्न का लिए डिस्कशन बड़ा लंबा चलता है इसको कि अभी हम ज्ञान योग का जब नेक्स्ट क्लास होगा तब देखेंगे अभी आज तो फ्राइडे है तो कल और परसों छुट्टी अभी नेक्स्ट क्लास होगा मंडे ओम शांति शांति शांति ही हरि ओ तसत श्री राम कृष्णर्पण
Questions & Answers
मस्तु विश्वास लाने की कोई टेक्निक नहीं है जिसको विश्वास है उसको विश्वास है जिसको नहीं है उनको नहीं है अभी जैसे लाटू महाराज है लाटू महाराज जैसे ही है ठाकुर के ऊपर में पूरा भरोसा कर दिया और स्वामी जी जैसे भी आए ठाकुर को प्रत्येक स्टेप प उन्होंने क्वेश्चन किया था तो जिसका विश्वास रखने का नेचर है वो इंस्टिंक्टिवली विश्वास रख देगा ये जो हमारी इंस्टिंक्ट चल रही है ना इंस्टिंक्ट की बात कि वो कैसे वो इंस्टिंक्टिवली ये चीज करता है तो एक्चुअली हमको लगता है इंस्टिंक्टिव है किंतु पूर्व पूर्व जन्म के कितनी ही बार मेहनत करके करके विश्वास लाया होगा तभी इस जन्म में आया है बाकी बाकी हम लोग जैसे हैं कि हम लोगों को स्वामी जी का ही रास्ता कि क्वेश्चन करके करके वेरीफाई करके करके एक भरोसा दिलवाना पड़ता है ये स्मरण मनन निदिद्यासन और कर्म ये जो कर्म ज्ञान भक्ति ध्यान यह जो सब मेथोड है तो यह वही एक एक ही आध्यात्मिक डायरेक्शन है इस पर चलते चलते मन में विश्वास भी होगा अपने कर्म भी कटते जाएंगे वगैरह वगैरह होगा माने हमको मेथड के थ्रू जाना है और किंतु मेथड फॉलो करते करते एक समय ऐसा आएगा कि ये मेथड इंस्टिंक्ट बन जाएगी तब यह विश्वास ऑटोमेटिक आ जाएगा स्वामी जी जो यह कहते हैं उसके साथ में एटली मैच हो जाता है आपका प्रश्न और उत्तर पहले तो वॉलंटरी मेहनत करके करना है फिर धीरे-धीरे करके इंस्टिंक्टिव हो जाए अभ्यासन कते वैराग्य गते जो मनो दुर निग्रहम चलम व गीता में श्लोक है यह जो मन है इतना बंदर जैसा है तो उसको कैसे वश मिलाए तो अभ्यास और वैराग्य यह दो रास्ते ना एक्चुअली देखिए ना इसमें ऐसा कोई डिफिकल्ट नहीं है समझना मने एक ही चीज का ये इवोल्यूशन है जैसे अभी स्वामी जी की एनालॉजी लेते हैं कि जब अब हार्मोनियम की मैं बात करूं जब पहली पहली बार आप भजन सीख रहे हैं तो प्रत्येक की पे आपको ध्यान रखे सरे गामा आपके लिए ना वो कष्ट करर है वो परिश्रम साध्य है किंतु एक बार आपने हारमोनियम सीख लिया मंदिर में बैठ कर के ठाकुर के सामने हारमोनियम बजाते हैं आंख बंद करके तो पूरा जप ध्यान जैसा प्रवाह भीतर में चलता है तो स्मरण का इवोल्व फॉर्म है मनन स्मरण मनन और निदिद्यासन एक दूसरे की इवोल्व फॉर्म ही है तो ज जैसे-जैसे प्रैक्टिस होती जाएगी वैसे वैसे वैसे वो इजियर होता जाएगा निदिद्यासन क्या है वही स्मरण क्या है सबसे पहले तो मैं किताब पढ़ कर के मैं ठाकुर महा स्वामी जी के प्रसंग जो है इसके बारे में मैं पढ़ता हूं मनन क्या है कि इसके बारे में हम डिस्कशन करते हैं किताब बंद करके मैं सोचता हूं और निदिद्यासन क्या है कि निदिद्यासन अर्थात ही यह जो प्रसंग का जो सार स्वरूप है डिस्टल करके वह मंत्र में आ जाते हैं गुरु महाराज जो मंत्र देते हैं तो जितने भी कंप्लीट वर्क से कथामृत है उसका डिस्टल फॉर्म वो मंत्र है और फिर आंख बंद करके बैठूंगा मंत्र चलता रहेगा तो वो हो गया निदिद्यासन हालांकि निदिद्यासन की टेक्निकल डेफिनेशन डिफरेंट है वहां पर मंत्र जब वगैरह नहीं क्योंकि यह वेदांत की मेथोड़े बता रहा हूं कि एक ही प्रोसेस का ये इवोल्व फॉर्म है इट डिफरेंस इज ओनली इन डिग्री नॉट इन काइंड स्वामी जी ये सेंटेंस बार-बार कहते हैं उनका फेवरेट सेंटेंस है ये जो डिफरेंस है वो थोड़ा सा एक जैसे कि मनुष्य मनुष्य में डिफरेंस कितना है कि एक मनुष्य है जो कि परीक्षा में 50 पर लाता है दूसरा मनुष्य है परीक्षा में 80 पर लाएगा अभी इन दोनों में जितना डिफरेंस है कि तो मनुष्य और एक बिल्ली में जितना डिफरेंस है वो कितना बड़ा डिफरेंस हो गया तो यह मनुष्य और बिल्ली वाला डिफरेंस नहीं है 50 पर और 80 पर वाला डिफरेंस है नहीं क्योंकि स्थूल सूक्ष्म और कारण इसका कांसेप्ट बहुत ही डिफरेंट है इस स्ट्रक्चरल इशू है और यह आपका मैंने इसको क्या फंक्शनल इशू है माने दिस इज अ फंक्शनल एस्पेक्ट दिस इज अ स्ट्रक्चरल एस्पेक्ट तो दिस आर वेरी डिफरेंट लाइक स्ट्रक्चरल एस्पेक्ट ये हो गया कि आप जद एक बिल्डिंग बनाते हैं तो यहां पे ये बिजली का वायर रखेंगे यहां पे प्लंबिंग का पाइपलाइन रखेंगे ये सब स्ट्रक्चरल इशू हो गया किं तो फिर ये बिल्डिंग का फंक्शन क्या है तो ये पब्लिकेशन का बिल्डिंग है वो डिस्पेंसरी है ये मंदिर है स फंक्शनल एंड स्ट्रक्चरल टू डिफरेंट आइडियाज ऑल टूगेदर