मङ्गलाचरण
ओम स्थापकाय च धर्मस्य सर्व धर्म स्वरूपण अवतार वरिष्ठाय राम कृष्णाायते नमः स्वामी विवेकानंद का भारत में दिए हुए भाषण हम देख रहे थे एक स्लाइड शो जो मैंने बनाया है उसको हम देख रहे थे। सो अभी कल का जो एक टॉपिक के एक मेरा जो आईडिया मैं शेयर कर रहा था कि मैं रामकृष्ण भावधारा
भवसागर पार करने का मार्ग: श्री रामकृष्ण रूपी नौका
को किस तरह से देखता हूं और रामकृष्ण भावधारा को यदि देखना है तो जितनी भी अवतार को रिलेटेड मूवमेंट स्टार्ट हुई है अवतार द्वारा प्रारंभ जो कोई भी मूवमेंट स्टार्ट हुई है उस सबके साथ में देखिए कि एक बहुत बड़ी क्राइसिस आने से पहले अवतार का आगमन होता और जैसे ही अवतार का आगमन हुआ एक विशेष रूप से जो प्रिपयर्ड डिवोटी होते हैं उनके आसपास में आन मिलते हैं। वह एक इंस्टिट्यूशन या एक ग्रुप या एक ऑर्गेनाइजेशन क्रिएट करते हैं। यह ग्रुप या इंस्टीट्यूशन या ऑर्गेनाइजेशन यह जो मनु की जहाज की तरह है। वह जो कहानी तो पता ही है कि बहुत बड़ा फ्लड आने वाला था। तो मनु को सूचना मिली कि इस तरह से बहुत बड़ा फ्लड आने वाला है। पानी आने वाला है। तो फिर एक बहुत बड़ा जहाज तैयार करो। इस जहाज के भीतर में जितने भी पेड़ पौधे हैं, वह सब एक रेडी करके इस जहाज के भीतर में रख दो। और जैसे ही फ्लड आएगा, बाकी सब तो डूब जाएंगे। बाकी सब तो मर जाएंगे। पृथ्वी का विनाश हो जाएगा। पानी ही पानी फैल जाएगा। किंतु यह जो तुम्हारा जहाज जो है जहाज पानी के ऊपर में तैरता रहेगा। तो ऐसा करके मनु को कहा गया कि चलो कि इस तरह से जहाज तैयार करो। तो इस तरह से जहाज तैयार किया और सही-सही में जब इस तरह से फ्लड आया तो देखा कि बाकी सबका तो विनाश हो गया। यह जो मनु का जो जहाज है वह एक तैर गया। तो इस तरह से जो नोआ आर्क जो वेस्ट में इस तरह की कहानी है वो है नो नोआ एन ओ ए एच और आर्क उसकी एक कहानी है। इस तरह की कहानियां पूरे विश्व में देखेंगे कि माइथोलॉजी या तो फिर एक तरह का क्या कहेंगे कि लेजेंड्स के रूप में प्रचलित है। तो यहां पे भी जब अवतार आते हैं तो उनका इंस्टीट्यूशन एक जहाज की तरह कार्य करता है। और यह जो जहाज है यह जहाज में आप जितने भी जो फ्यूचर में बच जाने वाले लोग हैं वे लोग इस जहाज में बैठेंगे और जो महा भयानक क्राइसिस है उस क्राइसिस को पार हो जाएंगे। तो इस तरह से अवतार का आना जितनी भी बार आप देखेंगे जितने अवतारों के आगमन की कहानी हमको पता है जैसे कि जीसस के आने के समय उसके बाद में देखेंगे कि भगवान बुद्ध के आने के समय और फिर देखेंगे कि जिस तरह से मोहम्मद के आने के समय ये तीन कहानियां तो हमको पता है हिस्टोरिकल एविडेंस है अपने पास में भगवान राम और भगवान कृष्ण के समय में भी देखिए कि युद्ध महा भयानक युद्ध हुए थे और उस युद्ध में वही लोग बचे थे जो लोग भगवान राम या भगवान कृष्ण के फॉलोअर्स थे। सो दिस इज अ यूनिवर्सल स्टोरी एवरीवेयर। पूरे जगत में यही एक कहानी प्रचलित है। हिस्ट्री को भी स्टडी करेंगे तो हमको यही जानने को मिलता है और यदि एक लार्जर इवोल्यूशनरी सेटअप को देखेंगे तो उसमें भी हमको वही जानने को मिलता है कि किस तरह से एक बार डायवर्सिटी होती है और फिर एक्सटिंशन होता है। डायवर्सिटी और एक्सटिंशन। तो यह जो साइकिल जो है डेवलपमेंट का वह इसी तरह से चलता है। श्री रामकृष्ण के आगमन के साथ में हम क्या कहना चाहते हैं कि क्या वही साइकिल फिर से रिपीट होगा। यह जो और यहां पर मैं रामकृष्ण संघ इसका डेफिनेशन सिर्फ रामकृष्ण मिशन जो एक ऑर्गेनाइजेशन है उसके साथ में नहीं करके एक विराट रूप से करना चाहूंगा। जो लोग भी ठाकुर के फॉलोअर्स हैं, जिन लोगों ने भी ठाकुर का जो मैसेज है, उसके अनुसार अपना जो लाइफ है, उसको रिइजीनियर करने का प्रयास किया है, उन सभी के साथ में देखिए कि यह अपॉर्चुनिटी तो आएगी ही आएगी कि यह क्राइसिस से यह लोग पार हो जाए। अभी हम लोग नहीं चाहेंगे कि यह क्राइसिस आए। किंतु फिर भी जो हिस्ट्री अभी तक हमको जो बता रही है वह हिस्ट्री तो यही बता रही है। तो यह एक हुआ हमारा दूसरा कि व्हाट इज द फ्यूचर? फ्यूचर को आप किस तरह से देखेंगे। फ्यूचर में आप देखेंगे कि एक रामकृष्ण भावधारा रूपी फाउंडेशन के ऊपर में आप देखेंगे कि जितने भी देश है, जितने भी एथनिक ग्रुप्स है, जितने भी लिंग्विस्टिक ग्रुप्स है, जितने भी रिलीजियस ग्रुप्स है, जितने भी रेशियल ग्रुप है, सब एक साथ में आन मिलते हैं। आज आप देखिए कि इस तरह का इंटरनेशनल ऑर्गेनाइजेशन एक कैथोलिक चर्च है। किस तरह से सभी देशों में उनके ब्रांचेस हैं। सभी देशों में उनके फॉलोअर्स हैं और सभी देश में से उनका यह जो ऑर्गेनाइजेशन है, उस ऑर्गेनाइजेशन के लिए सभी देशों में से वे लोग ऑफिसर्स को सिलेलेक्ट करते हैं। बिशप है ना कि पादरी है ना कि कार्डिनल है व्हाटएवर तो एक मल्टीीनेशनल ऑर्गेनाइजेशन इज एन एसेंशियल पार्ट ऑफ अवतार का आगमन होगा उसके साथ में यह एसेंशियली जुड़ा हुआ है। यहां पर भी आप देखिए कि श्री रामकृष्ण देव के आगमन के साथ में ही स्वामी जी ने कहा यह एक ऐसी महासत्ता है जिसने 10 साल में ही पूरी पृथ्वी का भ्रमण कर लिया है। इस अर्थ में कि स्वामी जी ने ठाकुर की महासमाधि हुई 1886 और वहां से लेकर के 1896 97 में स्वामी जी अमेरिका से भारत आए। तो इस 10 साल में देखिए कि स्वामी जी ने सही में ठाकुर का नाम लेकर के पूरी पृथ्वी का भ्रमण कर ही लिया था। यहां पे बॉम्बे से विदाई ली। उन्होंने अमेरिका जाने के लिए वहां से श्रीलंका गए। श्रीलंका से यह स्पाइस आइलैंड होते-होते यह मकाऊ फिर वहां से हांगकांग फिर वहां से जापान और फिर वहां से कनाडा कनाडा से अमेरिका अमेरिका से यूरोप और फिर वहां से वह वापस आए थे भारत में। तो देखिए कि ऑलरेडी स्वामी जी ने ठाकुर का नाम लेकर के 10 साल के भीतर में पृथ्वी का परिभ्रमण कर ही लिया था। सो यह महासत्ता इसी तरह और एक बात है कि देखिए कि अन्य जो संत महापुरुष है और जो अवतार है इन दोनों के बीच में डिफरेंस क्या है? अन्य जो संत महापुरुष होते हैं उन लोगों का नाम फैलेगा तो सही किंतु वे लोग तारणहार नहीं है। इस अर्थ में कल भी हमारा एक डिस्कशन हुआ था। वेदांत हमको कहता है कि हम सबके भीतर में आत्मन है और आत्म साक्षात्कार या तो आत्मन का मैनिफेस्टेशन यही हमारा सर्वोच्च उद्देश्य है। किंतु ठाकुर ने अपने मुंह से नरेंद्र के सामने स्वीकार किया है कि जो राम जो कृष्ण वही राम कृष्ण किंतु तुम्हारे वेदांत की ओर से नहीं। तो यहां पर ऐसा है क्या कि यह जो वेदांतिक सिस्टम है और यह अवतार का आगमन है, भक्ति सिस्टम है, इन दोनों के बीच में क्या कोई कंफ्लिक्ट है क्या? तो यह क्फ्लिक्ट मैं इस तरह से इसको डिफाइन करूंगा कि देखिए कि वेदांत जो है वह तो हमेशा के लिए बना हुआ है। आत्मन का मैनिफेस्टेशन या तो फिर कहेंगे कि आत्मन को साक्षात्कार करना वही तो मनुष्य के जीवन का उद्देश्य है ही है। किंतु अवतार क्या है जो कि हमको तारते हैं। वही सिर्फ आत्मन या तो वेदांत उन्हीं के लिए बेनिफिशियल है जो कि उसको प्रैक्टिस करते हैं। किंतु अवतार उन सबको तैर के ले जाते ले जाते हैं जो लोग वेदांत की प्रैक्टिस करने में समर्थ नहीं है। उनका भी तो कुछ करना होगा। अदरवाइज तो क्या होगा? पृथ्वी के ऊपर में जनसंख्या जो है ऑलमोस्ट जीरो हो जाएगी। क्योंकि वेदांत को फॉलो करना, वेदांत को प्रैक्टिस करना खास करके काम कांचन त्याग है। अपना मन वासना कामनाओं से संपूर्ण रूप से ऊपर उठा लेना। यह कितने लोगों के बस की बात है। मुश्किल से 10% पपुलेशन होगी इस जगत की जो कि इस तरह से कर पाएगा। तो फिर जब यह क्राइसिस आएगी और तो क्या ऐसा होगा कि यह सिर्फ 10% लोग ही बचेंगे। बाकी के 90% जो है उनका विनाश हो जाएगा। यदि ऐसा होगा तो ह्यूमन सिविलाइजेशन वहीं पर समाप्त हो जाएगी। इसलिए जो 90% लोग हैं जो वेदांत के कहे अनुसार अपने माइंड को रिइजीनियर नहीं कर पाते। वे लोग वेदांत के कहे अनुसार एक अनुशासन में रहकर के साधना नहीं कर पाते और योग का जो प्रथम ही सूत्र है अतः योग अनुशासनम अर्थात कि अनुशासन के बिना डिसिप्लिन के बिना आप योग फॉलो नहीं कर सकते तो फिर क्या इस जो बाकी के 90% लोग हैं उनका क्या वही हाल होगा जो कि यह एक्सटिंक्ट स्पीशीज का हुआ है तो नहीं यह जिस तरह से 10% जो कि अनुशासन में सेल्फ डिसिप्लिन में रह के आत्मश्रद्धा पूर्वक अपने को एक आध्यात्मिक मार्ग में आगे बढ़ा पाते हैं। वैसे ही 90% जो है पृथ्वी पे इन लोगों के लिए जो तैरने का जो चांस है भवसागर पार होने का जो चांस है वह है श्री रामकृष्ण। यहां पर देखिए कि दोनों लेवल पर यह बात सही है। यदि मैं एक इंडिविजुअल
Rise and fall of civilizations and how Sri Ramakrishna saves us
लेवल पर कहूं कि यह मेरी आध्यात्मिक साधना है। इंडिविजुअल लेवल पर मैं दो कैटेगरी में हो सकता हूं। एक तो मैं हूं उस कैटेगरी में कि जहां पर मैं अपने से मेहनत करके भवसागर पार कर सकता हूं। या तो मैं उस कैटेगरी में हूं कि मैं अपने से मेहनत नहीं कर सकता। किंतु अवतार को फॉलो करके भवसागर पार कर सकता हूं। ओके। वह मेरा और ईश्वर के साथ में जो संबंध है और ईश्वर को प्राप्त करने की साधना जो है वह एक सूचित करता है। किंतु सिविलाइजेशनल लेवल पर आप देखिए भवसागर पार करने का क्या अर्थ है? एव्री सिविलाइजेशन प्रत्येक देश है, प्रत्येक समाज है। उसके साथ में यह अप एंड डाउन अप एंड डाउन चलता ही रहता है। जैसे ही क्राइसिस आई हम जितना भी आप हिस्ट्री पढ़ेंगे बड़ा ही स्पष्ट रूप से समझ पाएंगे कि ऐसा कोई इस विश्व में देश नहीं है, कोई समाज नहीं है, कोई सोसाइटी नहीं है कि जहां पर बीच-बीच में क्राइसिस ना आती हो। और जब क्राइसिस आती है देखिए आर्नोल्ड टोयनबी ने स्टडी ऑफ हिस्ट्री बोल के ऑलमोस्ट आठ या 10 वॉल्यूम में एक बहुत ही एक सेमिनल स्टडी पब्लिश किया है। वन ऑफ द ग्रेटेस्ट हिस्टोरियन ऑफ आवर टाइम आवर टाइम यानी वो तो 194 के आसपास में लिख रहा था। तो एनीवे आर्नोल्ड टोयनबी का यह जो थीसिस है कि सिविलाइजेशन को किस तरह से समझा जाए। टोयनबी के आने से पहले हिस्ट्री का स्टडी विभिन्न रूप से होता तो था किंतु टोयनबी गिव्स अ प्रॉपर फ्रेमवर्क टू अंडरस्टैंड व्हाट इज हिस्ट्री। तो उसके अनुसार उसका कहना है कि देखिए कि मनुष्य का आप हिस्ट्री का स्टडी करना चाहते हैं तो सोसाइटी को आप सिविलाइजेशन में बांट दीजिए। यह एक केनिक सिविलाइजेशन है। यह ब्रिटिश वेस्टर्न यूरोपियन सिविलाइजेशन है। यह इंडियन सिविलाइजेशन है। यह चाइनीस सिविलाइजेशन है। ऐसा करके सिविलाइजेशंस में आप बांट दीजिए। और फिर सिविलाइजेशन का राइज एंड फॉल आप स्टडी कीजिए। तो यह राइज एंड फॉल स्टडी करतेकरते आपको यह एक इंपॉर्टेंट फैक्टर समझ में आएगा कि देखिए प्रत्येक सिविलाइजेशन जो कि ग्रेट सिविलाइजेशन है उसका जो राइज होता है वो चैलेंज को फेस करके सक्सेसफुली चैलेंज को फेस करके उसका राइज होता है। इसके बाद में वह एक सस्टेन लेवल पे डेवलप होता है और फिर जो है उसका रास होता है। उसका डिटेररेशन या तो डिक्लाइन एंड फॉल होता है। यह डिक्लाइन एंड फॉल को यदि अटकाना है यदि इस सिविलाइजेशन को अपना लाइफ स्पान को एक्सपैंड करना है तो फिर एक यूनिवर्सल चर्च चाहिए। व्हाट इज यूनिवर्सल चर्च? यानी कि एक अवतार का ऑर्गेनाइजेशन। अवतार का ऑर्गेनाइजेशन इस तरह से जो कि पूरे उस सिविलाइजेशन को एक स्टील फ्रेम प्रदान करें। हेलेनिक सिविलाइजेशन का स्टडी उसने काफी अच्छे से किया है। यह ग्रीस और रोम यह दोनों का स्टडी और आज का जो वेस्टर्न यूरोप है उसका स्टडी उसने काफी अच्छे से किया है। उस कॉन्टेक्स्ट में देखें तो देखिए ग्रीस का राइज़ हुआ चैलेंज को फेस करके यह ईरानियन पर्शियन एंपायर था उस समय का उसके साथ में फाइट करके या तो फिर उनके साथ में स्ट्रगल करके ग्रीस का राइज हुआ और उसके बाद में वह रोम में परिणत हुआ। उसका जो स्ट्रेंथ है रोम में शिफ्ट हो गया। तो ग्रीस कहो ना कि रोम कहो एक ही हेलेनिक सिविलाइजेशन थी। किंतु जब वह अपनी सर्वोच्च शिखर पर पहुंच गई और उसका राज उसका डिक्लाइन प्रारंभ हुआ उस समय उसको एक्सटेंड करने के लिए लाइफ स्पान को एक्सटेंड करने के लिए जीसस का यह जो कैथोलिक चर्च है यूनिवर्सल चर्च वो प्रारंभ हुआ और इस यूनिवर्सल चर्च ने यह जो सिविलाइजेशन को एक स्टील फ्रेम दिया। इस स्टील फ्रेम की मदद से यह सिविलाइजेशन टिक पाई। तो देखिए कि यह है राइज एंड फॉल एंड यू कैन से दैट लाइफ एक्सपेंशन ऑफ सिविलाइजेशन। तो वैसे ही श्री रामकृष्ण देव का यह जो एक यूनिवर्सल चर्च यदि इफ आई कैन यूज़ आर्नोल्ड टयनबी की इस परिभाषा को मैं यूज़ करूं तो देखिए कि ठाकुर भी एक इस तरह का एक विराट जहाज बना के गए हैं। दो लेवल पे हम इसको समझ सकते हैं। इस जहाज में बैठकर के इंडिविजुअल लेवल पे मुझे जो भवसागर पार करना है वह मैं कर जाऊंगा। और सिविलाइजेशनल लेवल पर जब क्राइसिस आती है सिविलाइजेशन के सामने तो यह रामकृष्ण रूपी जो जहाज है उसमें बैठकर के वो सिविलाइजेशन या तो वह जो ग्रुप ऑफ पीपल वो जो ऑर्गेनाइजेशन है वो जो संघ है वो संघ तैर जाएगा। यानी कि श्री रामकृष्ण रूपी नौका दो लेवल पर हमको तारती है। इंडिविजुअल लेवल पर भवसागर पार करवाती है। सिविलाइजेशनल लेवल पर क्राइसिस को पार करवाती है। और यह क्राइसिस पार हो गए तो
Future of Sri Ramakrishna Civilization
फिर किस तरह का भविष्य रामकृष्ण संघ के रामकृष्ण विचारधारा के फाउंडेशन पे बनेगा। इस तरह भारत ऑलरेडी है। माने इंडिया ऑलरेडी इज अ गुड एग्जांपल कि देखिए कि हमारे यहां पे भाषाओं का वैविध्य हमारे यहां पे कल्चर का वैविध्य हमारे यहां पे खान-पान का वैविध्य अपने यहां पे यह जियोलॉजिकल वैविध्य है। कहां वो पहाड़ वगैरह है उत्तराखंड में। तो फिर कहां पे यह उत्तर प्रदेश में यह गंजेटिक वैली है और कहां पे यह डेजर्ट है राजस्थान ये वेस्टर्न गुजरात में तो कहां यह डेक्कन अर्थात कि यह दक्षिण जो है एक प्लेटू के ऊपर में बना हुआ है। तो यह जियोलॉजी क्लाइमेट का वैविध्य सभी तरह से जो डायवर्सिटी जो है इन माइक्रोस्कोप पूरी पृथ्वी की जो डायवर्सिटी है इन अ माइक्रो आप कह सकते हैं कि वो उसका एक जो एक क्या कहेंगे ट्रेलर एक ट्रेलर पूरी पृथ्वी की डायवर्सिटी का एक ट्रेलर आपको भारत में देखने को मिलता है। तो, यह जो दिस इज़ व्हाट रामकृष्ण संघ जो है या तो फिर रामकृष्ण भावधारा जो है इसका यह भविष्य है। किस तरह से भविष्य दिख रहा है। एक क्राइसिस आएगा। आज का जो इंस्टीट्यूशनल सेटअप आज की यह जो पूरी समाज व्यवस्था है, उसको उलटपुलट होना ही होगा। इसके अलावा और कोई उपाय नहीं है। पूरे हिस्ट्री में हमको यही दिखता है। यानी कि आज के यह इंटरनेशनल रिलेशन, आज के ये इंटरनेशनल ट्रेड, आज की ये इंटरनेशनल सिस्टम, इवन आज की हमारी यह जो नेशनल सिस्टम वगैरह है वो सब एक तरह से देखें तो उलट-पुलट हो जाएगी। किस तरह से क्या होगा यह भविष्य में देखना मुश्किल है कि एग्जैक्टली कौन सा क्राइसिस आएगा। जब पेंडेमिक आया था हमको पता नहीं था। हम लोग ने इमेजिन भी नहीं किया था कि आधुनिक युग में ऐसा कुछ हो सकता है। भारत में उस समय पेंडेमिक के समय जो आर्टिकल पढ़ते थे वो कहता उसमें लिखा था कि वो भारत में एक स्पेनिश फ्लू आया था 1906 ना कि 1910 के आसपास में उस समय ना 20-30% पॉपुलेशन साफ हो गई थी। तो वो जो एक आया था पेंडेमिक इसके बाद में ये कोरोना आया। सो यह सब पेंडेमिक है, नेचुरल डिजास्टर है, पॉलिटिकल अपहवल है, इंटरनेशनल वॉर है। यह सब चीजें कब आएगी, कब जाएगी, किस फॉर्म में आएगी, कोई भी प्रेडिक्ट नहीं कर सकता है। किंतु अपहिवल होगा यह बात तो पक्का है। और आफ्टर दैट जो नया जो एक विश्व की रचना होगी, वह विश्व की रचना किस तरह की होगी? तो दैट विल बी अ मल्टी कल्चरल मल्टी एथनिक मल्टीलिंगुअल मल्टी रेशियल इवन मल्टी रिलीजियस सोसाइटी बट एवरीथिंग बेस्ड ऑन रामकृष्ण भावधारा कोई ऐसा नहीं कहेगा कि हां मेरा ज्यादा हक है मेरा ज्यादा ऑथॉरिटी है सबको समान डिग्निटी मिलना चाहिए सब लैंग्वेज को समान डिग्निटी सब एथनिक ग्रुप को इक्वल डिग्निटी सभी जो रिलीजन है उनको इक्वल डिग्निटी या तो इक्वल रिस्पेक्ट एंड इक्वल एक्सेप्टेंस बस वही है कि कोई दूसरों के ऊपर में अत्याचार ना करें। कोई दूसरों के हक का शोषण करना ना प्रारंभ करें। जो कि रूल्स एंड रेगुलेशन है, कंस्टिट्यूशन है, उसको तोड़ करके कोई अपना प्रभाव विस्तारित करने का प्रयास ना करें। वह एक देखना है। यह नहीं देखा गया अमेरिका में। आज देखिए आंख बंद करके जो इमीग्रेशन उन्होंने किया है इमीग्रेंट्स को उन्होंने अलऊ किया है अमेरिका में बोल के ही आज इमीग्रेशन के अगेंस्ट में इतना बैकलेश है। आप सिस्टमैटिक रूप से लीगल इमीग्रेशन करवाते यदि अमेरिका तो उन लोगों को कितना बेनिफिट होता। अभी रिसेंटली मैंने मेरे स्टेटस पे भी शेयर किया था कि अमेरिका में जो फॉरेन फाउंडर्स है यूनिकॉर्न के यूनिकॉर्न अर्थात पता है ना कि यह जो $1 बिलियन डॉलर का कंपनी तो $ बिलियन की कंपनी का जो स्थापक होते हैं उसमें से 40% जो है वह इमीग्रेंट से यानी कि विदेश से आए हुए हैं। और यह जो 40% है उसमें भी ऑलमोस्ट 90 इंडियन है। 90% नहीं 90 संख्या है। 90 इंडियन है और उसके बाद में 52 आई थिंक ब्रिटिश ना कि ऐसे कोई थे। मैं भूल गया किंतु इंडिया का फिगर मुझे पता है कि ऑलमोस्ट 90 के आसपास है। तो देखिए कि बाहर से आकर के अब जैसे स्टीव जॉब्स का ही उदाहरण देख लीजिए। स्टीव जॉब्स को आप देखिए कि उसका फादर है सीरियन था। सीरियन रे रेफ्यूजी तो नहीं था। आई थिंक स्टडी करने के लिए आया था और उसकी मां थी अमेरिकन थी। तो एक सीरियन फादर अमेरिकन मदर का वो लड़का वो वन ऑफ द लार्जेस्ट कॉरपोरेशन इन अमेरिकन हिस्ट्री वो उसने स्थापित किया। यानी कि यह जो इमीग्रेंट्स आते हैं दे एनरच द सोसाइटी। भारत का यह पारसियों का अनुभव जो है बहुत ही पॉजिटिव है। एज लॉन्ग एज जब तक आप उस सोसाइटी में डिसोल्व हो जाते हैं, सोसाइटी में घुलमिल जाते हैं, तब तक आप सोसाइटी को एनरच ही करेंगे। इमीग्रेशन की पूरी स्टोरी यह पारसियों का आगमन हुआ। उसके साथ में एक ही स्टोरी से आप पता चल जा सकता है कि सक्सेसफुल इमीग्रेशन किसको कहते हैं। वह जो पारसियों का ग्रुप पहली बार आया वह कहां सूरत ने कहां पे उनका जहाज जो लैंड हुआ तो वहां के राजा ने उनको और फिर उन्होंने अपना एक एंबेसडर वहां के राजा की कोर्ट में भेजा कि हम लोग यहां पे सेटल होना चाहते हैं। आप हमें परमिशन दीजिए। तो राजा ने दूध का एक गिलास भेजा। वो पूरा भरा हुआ था। तो यह लेकर के आया राजा का दूध। तो जो पारसी लोग थे वो लोग थोड़े से पजल हो गए कि हमने तो सेटल होने के लिए परमिशन मांगा था। इसने यह पूरा दूध का गिलास क्यों भेजा? तो उसका जो लीडर था किंतु पारसियों का वह समझ गया कि राजा क्या कहना चाहता है कि यहां पर कैपेसिटी फुल हो गई है। यहां पर जमीन या तो यह जो कॉमर्स वगैरह है आप लोगों के लिए जगह नहीं है। हमारे ही लोगों को हम लोग खाना खिलाने में तकलीफ होती है। अब नए सेटलर्स इमीग्रेंट्स को कहां पे सेट करवाएंगे? तो फिर यह पारसी लीडर था। उसने क्या किया? यह दूध के गिलास में चीनी डाल दिया। और फिर कहा कि एक ले जाओ दूध का गिलास। अभी राजा ने जैसे ही देखा कि वैसे का वैसे भरा हुआ दूध का गिलास वापस आया है। उसने दूध टेस्ट किया तो देखा कि यह मीठा हो गया है। तो इमीडिएटली वह समझ गया कि पारसी लोगों का क्या कहना है कि हम आपकी सोसाइटी है उसमें डिस्टरबेंस नहीं खड़ा करेंगे। हम अपना यह जो खुद का जो मत है आपके भीतर में झूठमठ का फैलाने का प्रयास नहीं करेंगे। जो लोग अपने से कन्वर्ट होते हैं दे आर वेलकम किंतु हम लोग जो है इस तरह का लोगों को कन्वर्ट करने का प्रयास नहीं करेंगे। माने इस तरह से रहेंगे सोसाइटी के भीतर में जो कि पीसफुल हो और एक पॉजिटिव कंट्रीब्यूशन हो तो इमीडिएटली राजा ने उनको रहने को कह दिया। आज आप देखिए कि पारसी की कम्युनिटी में से कितने सारे इंडस्ट्रियलिस्ट है। कितने सारे सिटीजंस जो ग्रेट सिटीजंस भारत के आए हैं। यह जे आरडी टाटा वन ऑफ द ग्रेट नेम्स इन इंडियन इंडस्ट्री। तो देखिए कि इमीग्रेशन है, पॉजिटिव इमीग्रेशन ऑलवेज हेल्प्स एवरीवन। जब तक वो नेगेटिव ना हो जाए, वह दूसरे देश में जाकर के वह धमाल मचाना ना शुरू करें, तोड़फोड़ करना ना शुरू करें। एज लॉन्ग एज ऐसा नहीं होता है तब तक दिस मल्टीकल्चरल मल्टी एथनिक मल्टीलिंगुअल मल्टी रिलीजियस सोसाइटी इज इन बेनिफिट टू एवरीवन और रामकृष्ण भावधारा ही है जिसके भीतर में यह स्ट्रेंथ है कि डवर्स ग्रुप्स को वो एक साथ में मिला करके रख सकता है। देयर इज नो अदर आइडियोलॉजी टुडे। ऐसा कुछ नहीं है जो कि इस वैविध्य को वह मैनेज कर पाए। डायवर्सिटी को वह मैनेज कर पाए। सो अकॉर्डिंग टू मी मुझे ऐसा लग रहा है कि रामकृष्ण भावधारा दो लेवल पर वह नौका का कार्य करती है। एक तो इंडिविजुअल जो अपनी स्पिरिचुअलिटी है भवसागर पार करवाती है। सिविलाइजेशनल लेवल पे देखिए जब क्राइसिस होगी तो क्राइसिस को पार करके एक मल्टी डवर्स सोसाइटी वो एक प्लूरलिस्टिक डायवर्स सोसाइटी का वो एस्टैब्लिश करने में फाउंडेशन होगी और कम्युनिटी लेवल पर देखिए कि स्त्रियों को सम्मान देना यह सबसे इंपॉर्टेंट है। अदरवाइज़ आप देखिए कि अपने वेद में ही तो कहा गया है कि यत्र नारियस्तु पूज्यंते तत्र रमंतु देवता जहां पे स्त्रियों की स्त्रियों का सम्मान होता है वहां पे देव देवताओं का निवास होता है। तो यह जो स्त्रियों का जो समाज में स्थान है कुछ समय से हम देखते हैं कि वैसे तो राइज हो रहा है किंतु इतना भी नहीं कि जितना होना चाहिए। सो यह जो रामकृष्ण भावधारा का जो भविष्य है मैं इस तरह से देख रहा हूं। सो एनीवे अभी एक नया स्लाइड देखते हैं। क्या कहते हैं? यह तो हमारा हो गया। ये एआई ने यह स्लाइड
slide10: आध्यात्मिक जागरण से भारत का पुन:निर्माण
बनाया है नोटबुक एलएम ने और स्वामी जी के जितने भी भारत में दिए हुए भाषण है सब मैंने उसमें फीड कर दिए थे। उसके बेस के ऊपर में यह स्लाइड शो उसने बनाया है। तो, यह हमने ऑलरेडी देख लिया कि इफ देयर इज एनी क्राइंग सीन इन इंडिया एट दिस टाइम इट इज दिस लेवरी। तो, यह तो देख लिया। इसके बाद में यह एआई क्या कहता है स्वामी जी का? माय प्लान ऑफ कैंपेन। मेरा प्लान क्या है? किस तरह से मैं भारत में यह नई भावधारा, नई विचार सरणी का प्रवेश करवाना चाहता हूं। फर्स्ट डल्यूस द लैंड विद स्पिरिचुअल आइडियाज। सबसे पहले तो भारत में, देश में और मेरे मत के अनुसार तो पूरे विश्व में यह भारतीय आध्यात्मिकता का प्रचार हो जाना चाहिए। और किस मेथड से होगा? तो नॉट डिस्ट्रक्टिव बट कंस्ट्रक्टिव। आई डू नॉट बिलीव इन रिफॉर्म। आई बिलीव इन ग्रोथ। ये जो है हमने ये लेक्चर फ्रॉम कोलंबो टू अल्मोड़ा में से ही माय प्लान ऑफ कैंपेन में से ही लिया गया है और इसके ऊपर में हमने काफी डिस्कस भी किया था कि लोगों की निंदा करके कि तुम लोग अभी तक जो कुछ कर रहे हो वह सब गलत है उसको छोड़ दो। अभी मैं आपको एक नया रास्ता दिखाता हूं। उसको अपनाओ। ऐसा करने से क्या होगा कि अपने खुद के पुरखों के ऊपर में, अपने इतिहास के ऊपर में, अपने देश के ऊपर में हमको एक तरह का अश्रद्धा हो जाएगा। देखिए आज जस्ट एक छोटा सा उदाहरण आज यह जो एआई समिट चल रहा है दिल्ली में तो वहां पे इस समिट के न्यूज़ को किस तरह से हमको बताया जाता है। दो तरह के कमेंटेटर देखे हैं। एक तरह के कमेंटेटर है। उनका बस एक ही काम है कि एक तरह के जो कमेंटेटर है वह सब पॉजिटिव दिखाने का ट्राई करते हैं कि अपना यह जो सर्वम एलएलएम जो है अपना सोवेन एआई वो किस तरह से डेवलप हो रहा है। किस तरह से यह जो सुंदर पिचाई ने बात की वगैरह-वगैरह जो कि एक पॉजिटिव वे में कवर करने का प्रयास कर रहा है। गुड वेरी गुड। दूसरा एक ग्रुप है कमेंटेटर्स का। उनका बस एक ही है कि कहां पर क्या गड़बड़ हुआ है। वहां पर वह उस यूनिवर्सिटी ने यह गड़बड़ कर दिया। वहां पर ट्रैफिक जाम हो गया। वहां पे ये एआई वेन्यू जो था वहां पे यह प्रॉब्लम हो गया। भारत में सब प्रॉब्लम ही प्रॉब्लम है। भारत का कभी कुछ होने वाला नहीं। दो तरह के कमेंटेटर दिखेंगे। अभी देखिए दोनों तो बात तो सच ही कर रहे हैं। जो यूनिवर्सिटी ने जो गड़बड़ किया वह तो किया वो जो ट्रैफिक जाम वगैरह वो जो वहां पे इनकन्वीनियंस जो लोगों को हुआ वो तो हुआ दैट इज अ फैक्ट। उस फैक्ट को कोई डिनाई नहीं करता। वेन्यू पे जो प्रॉपर मैनेजमेंट होना था नहीं हुआ शायद। अगेन फैक्ट्स को डिस्प्यूट करने से कोई लाभ नहीं। किंतु आप देखिए कि भारत एक ऐसा देश है जो कि पिछले 1000 साल की गुलामी में से बाहर आ रहा है। अभी तो मुश्किल से 70 इयर्स हमको हुए हैं। तो इस 70 इयर्स में डेमोक्रेसी के बेसिस पे हमने इतना बिल्ड अप किया तो वो क्या उसके लिए कोई आप दो अच्छे शब्द नहीं कहेंगे क्या? चाइना ने इतना किया, चाइना ने इतना किया। चाइना में डिक्टेटरशिप है। अपना अपनी जो लोकल गवर्नमेंट है उसमें से तो सब वोट के ऊपर में चुन के आते हैं। डेमोक्रेटिकली इ हो के आते हैं। फिर भी यह ऑटोक्रेसी ऑटोक्रेसी का नारा लगाते हैं। तो फिर जहां पे सही-सही ऑटोक्रेसी है वहां पे रहने को जाएंगे तो क्या होगा इन लोगों का? तो क्या है कि इन लोगों का पूरा माइंडसेट जो है भारत को नेगेटिवली देखने का है। तो स्वामी जी यहां पे कहते हैं डोंट रिफॉर्म बट ग्रो। आप ऐसा मत कहिए कि भारत में जो है भारत में कभी एआई में डेवलप नहीं हो सकता। क्योंकि अपने यहां पर गवर्नमेंट निकमी है। अपने यहां पर यूनिवर्सिटीज सब करप्ट हो गई है। अपने यहां पर यह पब्लिक जो मैनेजमेंट है वो प्रॉपर नहीं है। और हमको अभी बेटर गवर्नमेंट चाहिए। बेटर सिस्टम चाहिए। डोंट से दैट। ऐसा कहिए कि हां वी एक्सेप्ट करते हैं कि हमारे साथ में प्रॉब्लम है और प्रॉब्लम का एक इतिहास भी है। यह चर्चिल ने सेकंड वर्ल्ड वॉर में भारत को जिस तरह से लूटा है। भारत में से सैनिक उठाकर उठाकर के गए हैं। भारत का जो अन्न धान था। जितना भी फसल होता था सब का सब वह यूरोप में ले जाकर के भारत में अकाल पड़ते थे। बार-बार और जो भारत की जो सिस्टम है पूरा भीतर में से खोखला कर दिया था। सो उसको तो अभी तो हमको फुलफिल करना है। जो जिस गड्ढे में गिराया गया था हमको उस गड्ढे में से बाहर आना है। डेमोक्रेटिकली बाहर आना है। यदि हमने ऑटोक्रेसी का रास्ता लिया होता सोवियत यूनियन या चाइना की तरह खास करके सोवियत यूनियन को उस समय के आप देखिए रैपिड बिल्ड अप तो कर दिया। किंतु कुछ ही समय में यह सिस्टम क्रैश भी हो गई। चाइना के साथ में देखिए चाइना का सिस्टम क्रैश नहीं हुआ। चाइना का सिस्टम अभी भी बढ़ रहा है। किंतु जो सबसे बड़ा खतरा आज चाइना के सामने है वो है पपुलेशन कोलैप्स। और वह भी ऑटोक्रेटिक सिस्टम का पार्ट है कि वन चाइल्ड पॉलिसी फोर्सफुली इनके ऊपर में लगा दी। ये पपुलेशन जो है डेमोग्राफी जो है ये एक नेचुरल फिनोमिना है। आप ऑटोक्रेटिकली कुछ ऊपर में से बिाने को जाएंगे तो फिर प्रॉब्लम क्या होगा ना कि उसका परिणाम इस तरह से आएगा। किसको पता इस तरह का विचित्र परिणाम आ जाए कि पूरे देश को कहीं खत्म ना कर दे। तो आज जो पपुलेशन कोलैप्स जो है चाइना में इट इज वेरी रियल। बहुत कम लोग इसके बारे में बात करते हैं। किंतु चाइनीस लोग अपने से बड़े भयभीत हो गए हैं। माने चाइना का जो कम्युनिस्ट लीडरशिप है। सो देखिए कि कोई भी चीज को आप जोर जबरदस्ती करके करने का प्रयास करेंगे। मोमेंटरीली आप सक्सेसफुल हो जाएंगे। उसकी लॉन्ग टर्म इंपैक्ट जो है उसके बारे में कुछ भी कहना मुश्किल है। सो यहां पे भी यह ऐसा मत कहिए कि ईआई समिट जो है फेल हो गया। हमको गवर्नमेंट को चेंज करके बेटर गवर्नमेंट लाइए तो फिर एक सक्सेसफुल एआई समिट होगा। डोंट से दैट। ऐसा कहिए कि हां अभी तक हमने जो डेमोक्रेटिकली अचीव किया है उसके ऊपर में हमको और फर्दर बिल्ड अप करना है। तो यहां पे स्वामी जी कहते हैं नॉट डिस्ट्रक्शन बट कंस्ट्रक्शन, नॉट क्रिटिसिज्म बट एनकरेजमेंट। ऐसा कभी किसी को मत कहो। भाई तुम गलत कर रहे थे। अभी तुम सही करो। हमेशा ऐसा कहो कि ठीक है अभी तक जो तुम कर रहे थे अच्छा ही था उस समय की परिस्थिति के अनुसार बट नाउ द टाइम हैज़ कम टू डू समथिंग बेटर और अच्छा करने का समय अभी हमारे सामने आ गया है। तो इस तरह से नॉट डिस्ट्रक्शन बट कंस्ट्रक्शन और यह फोटो में इमेज भी देखिए किस तरह का दिया है। सो, स्पिरिचुअल फाउंडेशन फर्स्ट बिफोर फ्लडिंग इंडिया वि सोशलिस्टिक और पॉलिटिकल आइडियाज़ फर्स्ट डल्यूस द लैंड विद स्पिरिचुअल आइडियाज़। उसमें पिरामिड बनाया है। नीचे में स्पिरिचुअलिटी लिखा है। तो भारत में सोशलिस्टिक या तो पॉलिटिकल आइडिया को स्प्रेड करने से पहले स्पिरिचुअल आइडियाज को स्प्रेड कीजिए। देखिए अपनी फ्रीडम मूवमेंट है। आई एम वेरी प्राउड टू से कि अपनी फ्रीडम मूवमेंट में स्पिरिचुअलिटी का एक बहुत बड़ा प्राधान्य रहा है। महात्मा गांधी की पर्सनल लाइफ में भी और सिर्फ गांधी जी नहीं कि जितने भी अपने जो प्रथम हरोड़ के नेता थे फर्स्ट लाइन ऑफ वैनगार्ड जिसको कहते हैं जो वैनगार्ड था फ्रीडम मूवमेंट का वो अररोबिंदो हो ना कि स्वामी आनंद हो ना कि इवन आप सुभाष चंद्र बोस हो या स्वामी जी के प्रति कितना वो श्रद्धा था। एवरीवनस लाइफ आप देखिए कि आध्यात्मिकता एक स्ट्रांग फाउंडेशन की तरह बना हुआ था और यह तो हो गया कि उस लेवल पर हम बात करते हैं। देखिए यहां पे जो स्वामी जी कहते हैं ना उसका एक दूसरा एक अर्थ मैं क्या करता हूं पता है? आज हम देखिए कि हमारे पास में एजुकेशन सिस्टम है। तो एजुकेशन सिस्टम में देखिए एग्जजेक्टली यहां पे जो स्वामी जी ने कहा है जो नहीं करना है वो हम कर रहे हैं कि ये सोशलिस्टिक और पॉलिटिकल आइडियाज को हमने एजुकेशन सिस्टम में डाल दिया है। इस अर्थ में कि हम सोशियोलॉजी सिखाते हैं। पॉलिटिक्स म पॉलिटिकल साइंस सिखाते हैं। साइंस टेक्नोलॉजी सिखाते हैं। बाकी सेुलर जो भी चीजें हैं सब सिखाते हैं। किंतु स्कूल में हम स्पिरिचुअलिटी नहीं सिखाते। स्पिरिचुअलिटी सीखने के लिए बाकी सब जगह तो है। वैसे बाल संस्कार वर्ग बहुत सारी जगह पर चलते हैं। मेरे अमेरिका में कुछ लोगों के साथ मेरा बात हो रहा था। उन्होंने कहा कि वहां पर भी कम्युनिटी लेवल पर यह मंदिर या देरासर होते हैं। वहां पर इस तरह से बच्चों के लिए क्लासेस चलते हैं वीकेंड में। तो अमेरिका की स्कूल में तो इंडियन वैल्यू सीखना असंभव है। तो देरासर में जाइए वीकेंड में वहां पे यह णमोकार मंत्र है वगैरह-वगैरह आपको सीखने को मिलेगा। सो जिसको कि बाल संस्कार वर्ग कहते हैं। वैसे बहुत सारी जगह पर चलते हैं। रामकृष्ण मिशन के भी बहुत सारे आश्रम में चलते हैं। किंतु फिर भी दैट स्पिरिचुअलिटी हैज़ टू बी पार्ट ऑफ बेसिक करिकुलम। जब तक वह नहीं होगा तब तक क्या होगा कि स्पिरिचुअलिटी और अपना यह जो सेकुलर लाइफ है बिजनेस लाइफ या तो फिर यह जो अपना पब्लिक लाइफ है उसके बीच में एक दरार सी हमेशा से बनी रहेगी। सो बेटर है कि पहला स्टैंडर्ड से ही बाल मंदिर से ही बच्चों को योगा मेडिटेशन करना सिखाइए। हमारे यह जो आध्यात्मिक महापुरुष है उनकी लाइफ जो है बायोग्राफी जो है बच्चे को पढ़ने को दीजिए। वह हमारे आइडियल होने चाहिए। नहीं कि यह क्रिकेटर है, ना कि फिल्म स्टार है, ना कि पॉलिटिशियन है, ना कि यह सीईओ है। उनको एडमायर कीजिए। कोई मना नहीं करता एडमायर नहीं करने से। बट यदि सही-सही में भारत में हमको किसी को एडमायर करने की आवश्यकता है तो वह है चैतन्य महाप्रभु, वो है हितरवंश महाप्रभु, वह है मीराबाई, वो है नरसिंह मेहता। देखिए एक के बाद एक भारत में आध्यात्मिक जॉइंट्स का आगमन हुआ है। इन जॉइंट्स के बारे में हमारा जो बच्चे जो है या तो जनसाधारण है बहुत ही अज्ञ है जो परंपरा को वो फॉलो करते हैं। उस परंपरा के वह जो ग्रेट होंगे संत आचार्य उनको तो पहचानते होंगे शायद किंतु वह परंपरा के बाहर में भारत में इतना आध्यात्मिक धार्मिक स्पिरिचुअल वैविध्य है। इतने सारे ग्रेट स्पिरिचुअल जॉइंट्स उनका भारत की भूमि पे अवतरण हुआ है। इस बात से बहुत सारे बच्चे अज्ञान ही है। सो यहां पर जो स्वामी जी कहते हैं उसको हमको इस अर्थ में भी देखना चाहिए कि स्कूल में बच्चों को बाकी सब ट्रेनिंग देने से पहले सबसे पहले स्पिरिचुअल ट्रेनिंग दीजिए। उसके बाद में ही फिर बाकी का जो सेुलर एजुकेशन है वह उनको सिखाइए।
विश्वभर में गूंजे उपनिषदों का संदेश
डेमोक्रेटाइज नॉलेज द ट्रुथ्स ऑफ द उपनिषद मस्ट बी ब्रॉट आउट फ्रॉम द बुक्स ब्रॉट आउट फ्रॉम द मोनेस्टरीज एंड स्कैटर्ड ब्रॉडकास्ट ऑल ओवर द लैंड यह जो उपनिषद के यह जितने भी यह सत्य है तथ्य है उनको किताबों में से बाहर निकाल करके मोनेस्टरीज अर्थात कि मठ या आश्रम में से बाहर निकाल करके पूरी पृथ्वी पे पूरे भारत में उनको स्प्रेड कर देना चाहिए, स्कैटर्ड कर देना चाहिए। और भारत ही नहीं पूरे विश्व में यही बात है। भारत में खास करके बिकॉज़ ऑफ दिस अपना यह जो तथाकथित सेकुलर कंस्टिट्यूशन उसकी वजह से जो कुछ-कुछ लिमिट्स है हमारे ऊपर में वो दूर करके उपनिषद को खास करके भारत में प्रचार करना है। एक जगह पर स्वामी जी कहते हैं कि हम किस तरह के हिंदू धर्म को विदेश में प्रचार करना चाहिए। वो जो घर-घर गांव-गांव आप लोगों की एक तरह की सुपरस्टिशियन जो है उस सुपरस्टिशन को आप विदेश में मत ले जाइए। उसका तो भारत में से ही निकाल देने की आवश्यकता है। किंतु क्या ले जाना है विदेश में? तो वह है आप देखिए कि यह जो उपनिषद के जो सत्य है उपनिषद के यह जो अमर अमरत्व देने वाले उपनिषद के यह आत्मश्रद्धा प्रदान करने वाले उपनिषद के यह मनुष्य को अमर कर देने वाले यह जो ट्रुथ है अहम ब्रह्मास्मि प्रज्ञानम ब्रह्म तत्वमसी यह जो महावाक्य है वो महावाक्य को पूरे पूरे विश्व में फैलाना चाहिए। वह बात हमको फैलानी है आध्यात्मिकता के रूप में। नहीं कि आप कहेंगे कि सब तरह की सुपरस्टिशन है। ना ही आप कहेंगे कि सब तरह का यह जो विधि विधान रिचुअल है। जितना आप रिचुअल फैलाएंगे उतना ही फिर क्लेश बढ़ता जाएगा। मेरा यह रिचुअल है। आपका यह [गला साफ़ करने की आवाज़] रिचुअल है। इसके पहले वाले हमने वो देखा ना उसमें यहां पे स्वामी जी कहते हैं कि ये कौन से हाथ से हमको पानी पीना है? लेफ्ट हैंड से पानी पीना है ना कि राइट हैंड से पानी पीना है। कौन से शेप का तिलक हमको अपने सर पर लगाना है? यू शेप का लगाना है ना कि राउंड शेप का लगाना है। तो इसी को लेकर के यह जो अपना जो धर्म किचन में प्रवेश कर गया है। अर्थात कि यह जो छोटी-छोटी बातों को लेकर के हम लोग ऐसे उलझ गए हैं। अभी इसी चीज को आप स्प्रेड करेंगे तो और ज्यादा लोगों में झगड़ा होगा। इसीलिए यह सब चीजों को स्प्रेड नहीं करना है। उपनिषद के जो महावाक्य है उसको स्प्रेड करना है। जीव ब्रह्म ऐक्य यह है भारत की सबसे बड़ी देन पूरे विश्व को। यह जो हमारा जिस तरह से आइंस्टाइन का है ई इक्वल एमसी स्क्वायर वेस्टर्न सिविलाइजेशन की सबसे बड़ी गिफ्ट यदि एक आप छोटे से शब्द में आप व्यक्त करना चाहे तो वह क्या है? तो वह है e = mc² तो भारत की जो विश्व को देन है एक ही सेंटेंस में यदि आप व्यक्त करना चाहे तो क्या है जीव ब्रह्म ऐक्य तो देखिए कि यह दो ग्रेटेस्ट गिफ्ट है पूरे मनुष्य समाज के लिए तो जिस तरह से वे लोग सिस्टमेटिकली साइंस सिखाते हैं। हमारी सिस्टम में भी सिस्टमेटिकली यह जो फंडामेंटल स्पिरिचुअलिटी है उसको सिखाना है। देखिए यहां पे आइंस्टाइन के आने से पहले अ या तो फिर मॉडर्न साइंस का प्रारंभ होने से पहले ये अलकेमी विद्या लोग सीखते थे। अल्केमी क्या है? तो एक तरह का आप क्या कहेंगे? रिग्मा रोल कि आप इस तरह से एक केमिकल फार्मूला बनाइए जो कि मेटल जो है सामान्य मेटल उसको वो गोल्ड में कन्वर्ट कर दे, सोने में कन्वर्ट कर दे। और यह तो एक चीज हो गया। यह जो ट्रांसफॉर्मेशन ऑफ एलिमेंट्स कहते हैं। तो अभी एक्चुअली यू कैन कन्वर्ट आयरन इनू गोल्ड मॉडर्न फिजिक्स के अनुसार। किंतु वो अलकेमी के माध्यम से नहीं मॉडर्न फिजिक्स के माध्यम से। तो जिस तरह से अलकेमी में से मॉडर्न फिजिक्स में ट्रांजिशन किया यूरोप ने हमको भी इसी तरह से आध्यात्मिकता को एक साइंस के रूप में लेकर के एक बिलीफ सिस्टम है या तो अंधश्रद्धा है या तो रिचुअल्स है या तो फिर एक ब्लाइंड फॉलोविंग है, ट्रेडिशन है, ऑर्थोडॉक्सी है। उन सब से निकाल के साइंस के रूप में स्पिरिचुअलिटी को डेवलप करना है। जब यह साइंस के रूप में स्पिरिचुअलिटी डेवलप होगी तब उसको घर-घर या तो पूरी सभी स्कूलों में फैलाना है। आज जिस फॉर्म में स्पिरिचुअलिटी है उसको इसी फॉर्म में फैलाने को जाएंगे तो मुझे ऐसा लग रहा है कि स्ट्राइफ बढ़ जाएगी, झगड़ा बढ़ जाएगा। किंतु यह जितना भी यह मिडिवलिज्म है, ऑर्थोडॉक्सी जितना भी है, सुपरस्टिशन जितनी भी है, बिलीफ सिस्टम जितनी भी है, उसको हटा के प्योर साइंस जो है उसको एक्सट्रैक्ट करके स्पिरिचुअलिटी में से उसको फिर स्कूल लेवल पर प्राइमरी लेवल पर फैलाया जाए। तो देखिए कि जो नई जनरेशन आएगी दैट विल बी फिजिकली मेंटली एंड स्पिरिचुअली सोशली फार सुपीरियर टू प्रीवियस जनरेशंस। द गोल द मोस्ट वंडरफुल ट्रुथ मे रन लाइक फायर ऑल ओवर द कंट्री फ्रॉम नॉर्थ टू साउथ एंड ईस्ट टू वेस्ट। इस तरह से यदि हम स्पिरिचुअलिटी को एक्सट्रैक्ट करें। प्योर साइंस के रूप में वेदांत रामकृष्ण विवेकानंद लिटरेचर यह जितना भी है आध्यात्मिक लिटरेचर उसमें से साइंस के रूप में इसको एक्सट्रैक्ट करके साइंटिफिक प्रिंसिपल साइंटिफिक फाउंडेशन पे बिठा करके तब कहीं जाकर के स्कूल प्रत्येक स्कूल में अपने करिकुलम में स्पिरिचुअलिटी आ जानी चाहिए। स्पिरिचुअल साइंस करिकुलम में आ जाना चाहिए। दैट विल बी द ट्रांसफॉर्मेटिव इफेक्ट ऑन इंडिया एंड ऑन द वर्ल्ड। इसके बाद वाला स्लाइड जो है वह अभी हम नेक्स्ट क्लास में देखेंगे। ओम शांति शांति शांति हरि ओम तत्सत श्री राम कृष्णपणमस्तु।
प्रश्न: भारत का नवनिर्माण कैसे हो?
देखिए होता ऐसा है कि कोई भी देश होता है ना वहां का पॉलिटिक्स जो होता है ना उसमें तो अप एंड डाउन होता ही रहेगा। वो आज राजा राम आए तो कल वो रावण आएगा। कुछ नहीं कर सकते उसके बारे में। हो क्या सकता है कि यह जो चतुष्पाठी वगैरह जो पहले के युग में चलते थे ना बच्चा यह सब चीजें सीखता था। यह संस्कृत सीखते थे। वेद उपनिषद के श्लोक वगैरह सीखते थे तो वह सिस्टम फिर से लाना होगा क्योंकि राजा तो आज है कल नहीं है। है ना वो कुछ परमानेंट कुछ नहीं है पॉलिटिक्स में हमेशा चेंज होता रहेगा। किंतु ये जो समाज व्यवस्था जो है वो समाज व्यवस्था यदि एक स्टेडी बेस पे आ जाए ना तो वह देश तैर जाएगा। आज देखिए ट्रंप इतना पागलपन कर रहा है किंतु अमेरिका का जो सिस्टम है ना बड़ा स्ट्रांग है। वहां की पुलिस है। फिर वहां की कोर्ट है। वहां का वो जो अभी सब कुछ गड़बड़ हो रहा है। दैट इज अनदर मैटर। किंतु बहुत बहुत ही लंबे समय तक उन्होंने सिस्टम को मैनेज करके रखा। ग्राउंड लेवल पे जो होता है इंस्टीट्यूशन है ना? तो अपने यहां पे भी ये गुरुकुल वगैरह एजुकेशन सिस्टम यदि ठीक चले ना तो बाकी सब कुछ ठीक चलेगा। पॉलिटिशियन आज बेकार है तो कल अच्छा आ जाएगा। उसकी हमको चिंता नहीं। किंतु आध्यात्मिक लेवल जो एजुकेशन सिस्टम है उसमें स्पिरिचुअलिटी को आप प्रवेश करवाइए। बच्चों को योग और वेदांत सिखाइए। ऐसा यदि होगा ना तो हमेशा के लिए एक लंबे समय तक एक स्टेडीली अपना जो ग्रेजुएट जो भी बाहर निकलते हैं एजुकेशन सिस्टम से वो एक उनका है ना एक बैलेंस व्यू लेकर के निकलेंगे। यह है साइंस एंड टेक्नोलॉजी है। यह पॉलिटिक्स है और यह आध्यात्मिकता है। सभी के साथ में आध्यात्मिकता जुड़ी रहेगी। सो एजुकेशन सिस्टम में आध्यात्मिकता का प्रवेश यह जो ऋषि शासन जो स्वामी जी कह रहे हैं पॉलिटिकल लेवल पर हो ना हो एजुकेशन लेवल पर हमेशा होना है। पक्का होना चाहिए।