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Swami Vivekananda's Macrocosm & Microcosm ·

ज्ञान योग स्वामी विवेकानन्द Cosmos Microcosm 30 Apr 2024

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ओ स्काय धर्मस्य सर्व धर्मा स्वरूप अवता आज सुबह को कथामृत पढ़ रहा था तो ठाकुर का एक सुंदर प्रसंग है व कहीं से व बलराम से ना कि कहीं से वो बाहर में आ रहे हैं तो वो पूछ रहे हैं ओरा जुआ अर्थात की वो राखल जूतो आज ना कि हरिए गछ अर्थात कि व राखल राखल को पूछ रहे हैं जूते हैं ना कि कोई उठा कर के ले गया है किंतु पूछते हैं कैसे कोड लैंग्वेज में फिर एक जगह पर कभी ठाकुर को तो पता है कि बीच-बीच में समाधि में चले जाते थे और वैसे भी उनका माइंड उनका शरीर इतना सात्विक था कि हर कोई उनको सब समय स्पर्श नहीं कर पाता था तो ठाकुर जब भाव में है तो ठाकुर को तो संभाल करके उनका हाथ पकड़ करके धीरे-धीरे गाइड करके कहीं पर ले जाना पड़ेगा यदि जाने की बात आई तो एक बार इस तरह से प्रसंग आया कि किसी को उनको हाथ पकड़ करके या किसी को उनको गाइड करना है तो ठाकुर ने क्या कहा वो हा छू ना रा छू अर्थात फिर वही कोड लैंग्वेज कि हा रा छूते पारे ना राखल छूते पारे अर्थात कि हाजरा जो कि वहां दक्षिणेश्वर में रहता था ठाकुर के कमरे के सामने में बैठता था पीतांबरी पहन कर के व माना माला गिनता रहता था तो वह हाजरा छू नहीं सकेगा किंतु राखल छू पाएगा क्यों क्योंकि राखल वैसे हाजरा सबके बारे में कंप्लेन करता घूमता है कि ये राखल वगैरा हो हो करे बेड़ा है अर्थात कि हल्लागुल्ला करके घूमते हैं किंतु वो बैठ कर के जप तो करते नहीं है किंतु ठाकुर ने जैसे कहा कि कोली कता लोकेरा लखो लख जॉब करनी खानकी पं तो जॉब करनी तब किछु होवे ना अर्थात की कलकाता में लोग लाखों लाखों जप कर लेते हैं जिसका चरित्र अच्छा नहीं है ऐसे लोग भी जप करते हैं किंतु जप करने से तो होगा नहीं जब तक मन की पवित्रता नहीं रहेगी तो इसलिए ठाकुर कहते हैं कि आजरा छू नहीं पाएगा राखल छू पाएगा तो किंतु ठाकुर यह जो बातें दोनों करते हैं कैसे करते हैं कि कोड लैंग्वेज में जिससे कि जिसको यह मैसेज देना है उसी को पता चले और किसी को नहीं तो यह आजकल यह जो क्रिप्टोग्राफी का साइंस जो है वह बड़ा ही डेवलप हो रहा है लोगों को अपने मैसेज कम्युनिकेशन बड़ा सिक्योर और सेफ हो इस तरह की लोगों की बड़ी चिंता रहती है अभी यहां तक कि जिस तरह के वह जो कम्युनिकेशन एप्स होती है मोबाइल में हम यूज करते हैं उसमें भी इंक्रिप्शन जिसको कहते हैं इंक्रिप्शन का बड़ा यह महिमा है जो ए अपने मैसेज को एंक्रिप्ट करके मैसेज भेजने देगी उसके ऊपर में हमको बड़ा भरोसा है कि कोई थर्ड पार्टी हमारे मैसेज को उसके ऊपर में जासूसी करके हमारे मैसेज को चुरा ना पाए तो यह क्रिप्टोग्राफी ये फिर ये इंक्रिप्शन आज के जमाने में यह कम्युनिकेशन को सिक्योर रखने वाली इतनी सारी बातें जो कि इतनी महत्त्वपूर्ण हो रही है तो देखिए कि ठाकुर भी अपने कम्युनिकेशन को एंक्रिप्ट करते थे ठाकुर को भी ये क्रिप्टो क्रिप्टोग्राफी पता ी किस तरह से कोडे कोड लैंग्वेज में मैसेज देना चाहिए जिससे कि जिसको वो मैसेज पाना है जिसको वो मैसेज जिसके लिए वो लिया गया है सिर्फ उसी को पता चले और कोई ना समझ पाए तो देखिए कि हम लोग इस तरह से कनेक्शन बिठाते हैं तो कैसा आनंद आता है कभी-कभी हालांकि ठाकुर ने कभी ऐसा सोचा भी नहीं होगा कि आज की क्रिप्टोग्राफी के साथ में उनका कोई कनेक्शन होगा तो अच्छा तो हम लोग पाठ कर रहे थे कॉस्मो माइक्रो कजम का अभी देखिए कि कल तक हमने जो पूरा डिस्कशन किया टेक्निकल उसी टेक्निकल डिस्कशन को स्वामी जी आज आगे बढ़ाते हैं किंतु यह एक पैसेज जब कंप्लीट होगा उसके बाद में जैसे मैंने कहा ना कि स्वामी जी अल्टरनेट करते हैं कभी टेक्निकल कभी इंस्पिरेशनल कभी टेक्निकल तो कभी इंस्पिरेशनल तो अभी यह टेक्निकल का लास्ट पैसेज है इस कॉस्मो माइक्रो कजम प्रवचन का इसके के बाद में पूरा इंस्पिरेशनल और जैसे मैंने पहले भी कहा था कि मैं क्या करता हूं कि ये जब अच्छा-अच्छा स्वामी जी के पैसेज होते हैं तो अंडरलाइन कर लेता हूं हाईलाइट कर लेता हूं किंतु इसके बाद में दो पेजेस ऐसे हैं दो पेजेस पूरे कि क्या हाईलाइट करना क्या छोड़ देना समझ में नहीं आता है इतना मतलब पावरफुल स्वामी जी का इंस्पिरेशनल मैसेज है किंतु वो वहां तक आने से पहले ये लास्ट टेक्निकल पैसेज जो है उसको हमको पार कर देना होगा टेक्निकल डिस्कशन करने में कभी-कभी बड़ा ड्राई हो जाता है डिस्कशन बड़ा ही कॉम्प्लिकेटेड हो जाता है ठीक है किंतु जैसे मेरा खुद का मानना है हमेशा के लिए स्वामी जी को हमेशा जैसे ठाकुर कहते हैं ना कि यह जगत और यह ब्रह्मण और ब्रह्मांड यह दोनों को एक साथ में लेना है शक्ति अर्थात क्या है कि यह जो वो बेल फल की उप देते हैं ठाकुर कि बाहर का जो आवरण है भीतर का जो खाने लायक खाद्य पदार्थ है और बाहर का उसका शेल है उसका आवरण है तो दोनों को लेकर के इस विश्व ब्रह्मांड य ईश्वर को देखना है ईश्वर को अपनी शक्ति से कभी भी अलग नहीं कर सकते यथा जनेर दाही का शक्ति जिस तरह से हम मां को पुकारते हैं जिस तरह से हम मां की कल्पना करते हैं तो वैसे ही ब्रह्मा और शक्ति अभिन्न है अभेद है वैसे ही यहां पर टेक्निकल स्वामी जी और इंस्पिरेशनल स्वामी जी दोनों अभिन्न है दोनों को साथ में लेने से हमको एक प्रॉपर आईडिया मिलता है कि स्वामी जी खुद उस समय में किस तरह से सोचते थे तो यह लास्ट टेक्निकल पैसेज कोसमस माइक्रो कजम लेक्चर का स्वामी जी अपनी थिरी को आगे बढ़ाते हैं क्या कहते हैं द थिरी देन कम्स टू दिस दैट देयर इज हेरेडिटरी ट्रांसमिशन सो फार एज फर्निशिंग द मटेरियल टू द साउल इज कंस ंड तो यह थिरी यहां तक आकर के हो गई खड़ी यहां तक आकर के यह कंक्लूजन हुआ कि जहां तक यह यहां पर अगेन सोल शब्द स्वामी जी यूज करते हैं किंतु इस सोल को हमको आत्मन के रूप में नहीं सूक्ष्म शरीर के रूप में लेना है सूक्ष्म शरीर हमारे भीतर में है वह सूक्ष्म शरीर का गठन कैसे हुआ उसके भीतर में संस्कार कहां से आए तो यह स्कार आए पुनर्जन्म के थिरी के माध्यम से पिछले जन्म में उसके अगले जन्म में मैंने जो कोई भी कार्य कलाब किए होंगे उसका लेखा जोखा उसका बैंक बैलेंस सब फाइनल होकर के यह इस नए नए शरीर के भीतर में कैरी फॉरवर्ड हुआ है बट द सोल माइग्रेट्स एंड मैन्युफैक्चर्स बॉडी आफ्टर बॉडी एंड इच थॉट वी थिंक एंड इच डिड वी डू स्टोर इन इट इन फाइन फॉर्म्स रेडी टू स्प्रिंग अप अगेन एंड टेक अ न्यू शेप परंतु यह सूक्ष्म शरीर यह माइग्रेट होता है एक शरीर से दूसरे शरीर तक एक स्थूल देह से दूसरे स्थूल देह तक यात्रा करता है एंड मैन्युफैक्चर्स बॉडी आफ्टर बॉडी कितना सुंदर इंग्लिश में जो लोग इंग्लिश लिटरेचर समझते हैं वह कभी-कभी समझ पाएंगे कि स्वामी जी का यह जो बोलने का तरीका है इट सोर्स हेवन लाइक जैसे कि एक बाज पक्षी जैसे आकाश में उड़ रहा है वैसे ही इस तरह का स्वामी जी का प्रोस पढ़ के ना अपना मन एकदम एलिवेटर पोएट्री समझते हैं मुझे तो पोएट्री का इतना अच्छा समझ नहीं है किंतु जो लोग पोएट्री समझते हैं उनको एक अच्छी सी पोयम दे दो उन लोगों का दिन बन जाएगा कि अरे वाह आज इतना सुंदर पोयम पढ़ा आज मुझे बहुत आनंद आया तो मुझे प्रोज समझ में आता है तो स्वामी जी का जो इस तरह का प्रोज ये पढ़ कर के मन बड़ा ही आनंदित हो जाता है क्या कहता है मैन्युफैक्चर्स बॉडी आफ्टर बॉडी सोल माइग्रेट्स एंड मैन्युफैक्चर्स बॉडी आफ्टर बॉडी यह सूक्ष्म शरीर यात्रा करता है और एक के बाद एक स्थूल देह का गठन करता है हिंदी करने से इसका पावर चला जाता है किंतु क्या कर है इंग्लिश यदि समझ में आएगा तो जैसे कि हम कहते हैं ना कि शास्त्र को ठीक-ठीक समझना है तो संस्कृत समझना है मेरा एक साधु के साथ में एक आर्गुमेंट हो रहा था मैंने कहा अभी क्योंकि मुझे संस्कृत नहीं आता इसलिए मैं तो कहूंगा कि ट्रांसलेशन पढ़ने से ही तो सब समझ में आ जाता है उसके बाद में तो ठाकुर महा स्वामी जी की व्याख्या है ही है क्या है ऐसा तो शास्त्र में जो कि बिना संस्क समझे नहीं समझ में आएगा तो उसने क्या कहा पता है कि य कि संस्कृत एक पोएट्री है भले ही चाहे तुम ऐसा सोचते हो कि सिर्फ उसमें फिलोसोफी डाले गए उपनिषद में या तो इवन शंकराचार्य के भाष्य में किंतु ऐसा मत सोचो कि इसमें सिर्फ फिलोसोफी है और फिलोसोफी लेकर के तुम चले जाओगे ये शास्त्र का अपना एक पोएट्री है वर्स फॉर्म में जो लिखे हुए हैं छंदों बद्ध किए गए जो अपने शास्त्र है उसका पोएट्री पढ़कर के मन खुश होता है यह जो लिटरेचर यह पोएट्री यह प्रोज अच्छा लिखना यह सब भी तो एक आनंद है जैसे कि जो जिसका मन स्थूल देह की ओर रहता है उसको अच्छा खाना मिले अच्छी भोग्य वस्तु मिले उसको देख कर के कैसा आनंद आ जाता है अभी जैसे य आजकल यह हम सिलिकॉन वैली आजकल इतनी सारी इनोवेशंस होती है तो हम इन लोगों से बड़े प्रभावित हो जाते हैं तो ये एन विडिया बोलकर के कंपनी है वे लोग जीपीयू बनाते हैं म ग्राफिकल प्रोसेसिंग यूनिट तो अभी क्या है कि इन लोगों ने बड़ा ही अच्छा बड़ा ही पावरफुल लेटेस्ट मॉडल का वो जीपीयू बनाया और फिर वह जो ओपन एआई कंपनी है उसमें जो उसका का जो एडिया का सीईओ है वो सीईओ लेटेस्ट मॉडल का वो जीपीयू लेकर के वो ओपन एआई कंपनी में जाकर के उसको भेट देता है और दोनों वो बॉक्स से वो मेटल का बॉक्स ही दिखेगा हमको तो और कुछ नहीं दिखेगा और दोनों सीईओ खड़े रह कर के उसके सामने देख कर के इतना खुशी-खुशी होते हैं देखिए लेटेस्ट मॉडल का जीपीयू मिल गया तो देखिए उनका आनंद उसमें है टेक्निकल कुछ इनोवेशन किया टेक्निकल कुछ ऐसा मैन्युफैक्चर किया व्हिच इज अनप्रेसिडेंटेड इन द हिस्ट्री ऑफ मैनकाइंड इस तरह का कॉम्प्लिकेटेड मशीन कभी देखा नहीं है एक नेदर ैंसली है याद देखिए कि पूरा जगत वैसे तो चलता है माइक्रोप्रोसेसर के ऊपर में और यह मशीन ऐसा है कि जो कि माइक्रोप्रोसेसर को ही बनाता है म जिस तरह से हम प्रिंटर में कैसे वो पेजेस को प्रिंट करते हैं वैसे ही इस प्रोसेसर में आप डाल देंगे वो सीढ़ जैसा कुछ साइज का तो दूसरी ओर से वोह पूरा उसके ऊपर में माइक्रो प्रोसेसर का प्रिंट होकर के निकला तो जो लोग इस तरह की मशीन बनाते हैं उनको उस मशीन को देख कर के आनंद आता है और जो लोग लिटरेचर के लोग होते हैं उनको इस तरह से अच्छा प्रोज अच्छी पोयम देख कर के आनंद आता है तो जिस तरह से मैं कह रहा था शास्त्र पढ़ना सिर्फ ऐसा नहीं कि उसमें से फिलोसोफी निकाल दो और शास्त्र को छोड़ दो शास्त्र की अपनी एक पोएट्री है वो पोएट्री पढ़ कर के हमको एक आनंद आना चाहिए तो सिमिलरली स्वामी जी को पढ़ने का भी ऐसा है कि स्वामी जी की में फिलोसोफी तो है जीवन कैसे जीना किस तरह से इस संसार में रहना किस तरह से संसार के परे जाना किस तरह से जन्म मृत्यु जरा व्याधि का यह संसार चक्र है उसको तोड़ कर के इसके हमारे भीतर में जो अजर अमर अनंत समय और अवकाश के परे जो आत्मन है जिसको डिस्क्राइब करने के लिए हमारे वर्ड्स कम पड़ जाते हैं जैसे ठाकुर ने कहा कि सब कुछ झूठा हो गया है ब्रह्मण झूठा नहीं हुआ क्यों क्योंकि ब्रह्म का स्वरूप क्या है मूह से कभी वर्णन नहीं किया गया तो इस ब्रह्मण में इस ब्रह्मानंद में स्थित कैसे होना उसको अपने शरीर में अपने हृदय में सिंहासन पर कैसे विराजित करना यह सब तो हमको स्वामी जी से सीखने को मिलता ही है किंतु गोइंग बियोंड दैट स्वामी जी के शब्द है उसके भीतर में एक पोएट्री है उसका एक आनंद है पढ़कर के हमको एक आनंद आता है और मैं ट्रेनिंग सेंटर में था हमारे एक आचार्य महाराज कहा करते थे कि देखो जो साधक होता है उसका मन बड़ा ही सूक्ष्म होता है क्या होता है कि अभी तो वो साधना कर रहा है धीरे-धीरे करके एक बाय वन आफ्टर अनदर वो स्टेप्स चढ़ता रहेगा किंतु थोड़ा सा भी साधक के मन में विक्षेप होता है ना तो विक्षेप उसको ऐसी आघात ऐसी उसके भीतर में एक एक डिप्रेशन खड़ा करेगा कि सीधा जो जिस ऊंचाई पर पहुंचा है फड़ा कर के जमीन के ऊपर में गिरेगा जैसे मान लीजिए कि आप साधना करते हैं और आपका कोई मित्र है जिसको आध्यात्मिकता में वैसे कोई ज्यादा इंटरेस्ट नहीं है आप दोनों एक रास्ते से जा रहे हैं एक छोटा सा एक्सीडेंट हुआ या किसी के साथ में रास्ते में झगड़ा हो गया अभी जब आप दोनों घर पे आएंगे तो आपका मित्र तो इस बात को भूल ही जाएगा अरे ये सब तो होता रहता है चलता रहता है जाने दो क्या है किंतु हमारे मन में जो कि साधक है इस बात को लेकर के एक ऐसा एक कशमकश एक ऐसा तूफान अपने मन में खड़ा होगा कि जैसे कि दिन रात हमको भीतर से एक आ जाएगा और जब तक इसका कोई पावरफुल सलूशन नहीं मिलेगा या तो फिर दूसरी दुर्घटना नहीं होगी तब तक ये घटना हमारे मन में जैसे कि वह राक्षस की तरह वो वैंपायर की तरह हमारा खून चूसते रहेगी ऐसा साधक के साथ में होता है क्योंकि हमारा मन बड़ा ही सूक्ष्म हो जाता है तो हमारे आचार्य महाराज कहा करते थे कि देखो कि किताबों के साथ में रहो किताबों का आनंद जो है किताब पढ़ने का आनंद उसको कल्टटर इससे क्या होगा कि साधना करते-करते जब ध्यान करते-करते प्रार्थना करते-करते मन जद गिरे वहां से तो एक किताब का आनंद इसको अपने हाथ में थाम ले उसको बहुत ज्यादा जमीन पर गिरने ना दे तो यह किताबों के पढ़ने का आनंद वो हमको कल्ट वेट करना है जो शास्त्र या तो ठाकुर महा स्वामी जी इसको पढ़ने का सिर्फ यह मात्र अर्थ नहीं है कि इसमें से फिलोसोफी निकाल दो इसमें से इनके टीचिंग्स निकाल दो इनमें से इनकी घटनाएं निकाल दो किंतु इस को अपना जीवन साथी बनाना है अपनी किताबों को और किताबों के साथ में रह कर के मन को एक ऐसे उच्च सूर के साथ में बांध देना है कि वहां से ज्यादा ना गिरे वहां पर उसके बाद में ऊपर ही जाए वहां से और ज्यादा नीचे नाए तो वैसे ही स्वामी जी कहते हैं कि यह सूक्ष्म शरीर एक के बाद एक स्थूल देह का गठन करता है माइग्रेट होता है यात्रा करता है और देह का गठन करता है एंड ईच थॉट वी थिंक एंड ईच डिड वी डू स्टोर इन इट इन फाइन फॉर्म्स प्रत्येक कार्य जो हम करते हैं प्रत्येक विचार जो हम करते हैं सभी इस सूक्ष्म शरीर के भीतर में स्टोर होकर के जमा होकर के रहते हैं रेडी टू स्प्रिंग अप अगेन एंड अगेन टू टेक अ न्यू शेप बारबार वो ज स्प्रिंग अप अर्थात की स्प्रिंग अप एक विजुअल देखिए ये लिटरेचर का भी एक ये है जब आप किताब लिखते हैं तो आप जैसे राइटिंग कोच के पास जाएंगे ना आपको एडवाइस देगा कि शो डोंट टेल अर्थात क्या है पता है कि कोई अच्छा साहित्य है तो साहित्य अच्छा है उसका मानदंड क्या है उसका मेजरमेंट क्या है पढ़ कर के हमको आनंद आता है पढ़ कर के हमको इंस्पिरेशन मिलती है पढ़ कर के हमारा मन उस समय तक एक डाइवर्ट हो जाता है दैट इज वन एस्पेक्ट किंतु यह जो लिटरेरी पर्सन होते हैं जो लोग क्रिटिक होते हैं वे लोग और सब कुछ देखेंगे अच्छे राइटिंग के भीतर में वे लोग क्या कहेंगे कि अच्छा मान लीजिए कि कोई एक आदमी है वो रास्ते से जा रहा था जैसे कि अपना शंकराचार्य का ही एक है ना कि वो रास्ते से जा रहे हैं अंधेरी रात है रास्ते में रस्सी पड़ी हुई देखी तो एकदम घबरा गए और हम लोग एकदम डर गए और बोला कि अरे ये तो साप आ गया फिर अ अपने पास में टॉर्च होगी आजकल तो मोबाइल टॉर्च सभी के पास में मोबाइल है मोबाइल में टॉर्च है तो मोबाइल ओपन करके टॉर्च ओपन करके उसमें से देखा तो अरे ये तो रस्सी नहीं है यह साफ है अच्छा ठीक है बड़े होश ठिकाने आए और आनंद से मैं आगे जाने लगा यदि कोई राइटिंग कोच होगा वो इस तरह का पैसेज पढ़ेगा तो वह क्या देखेगा पता है कि आपने इस घटना का वर्णन कैसे किया है इस तरह से वर्णन किया है ना कि आपने कहा कि ये आदमी बहुत ही डर गया ऐसा लिखा है ना कि आपने ऐसा लिखा है कि इस आदमी के हृदय की धड़कन बढ़ गई उसकी आंखें फैल गई पसीना पसीना हो गया हाथ पैर कंपने लगे और ऐसा लगा कि हृदय फट कर के उसके सीने के पिंजरे से बाहर आ जाएगा इस तरह से लिखा है यानी कि एक तो हमने लिखा है कि आदमी घबरा गया हमने बताया कि वह डर गया है सिर्फ बताया है दूसरा कि हमने उसकी स्थिति का वर्णन किया है हृदय इतना जोरों से क वो बीट हो रहा है कि वो लगेगा कि वो छाती फाड़ कर के बाहर आ जाएगा यानी कि हमने उसको दिखाया है कि उसकी स्थिति का वर्णन किया है इसको कहते हैं शोइंग नॉट टेलिंग कि एक्चुअली वर्णन करना कि उसके साथ में क्या हो रहा है सिर्फ ये कह के छोड़ नहीं देना कि हां वो घबरा गया है तो वैसे ही यहां पे स्वामी जी जिस तरह के फ्रेजस यूज करते हैं उसको देखिए स्प्रिंग अप ये एक विजुअल एक है कि ऐसा नहीं लिखा कि सूक्ष्म शरीर बार-बार जन्म ग्रहण करता है या तो सूक्ष्म शरीर के जो संस्कार है बार-बार प्रकट हो जाते हैं उन्होंने स्प्रिंग अप जैसे कि यह जमीन फाड़ कर के वो एक ये सब वो प्रकट होता है ना ऐसा कुछ इस तरह से कि यह संस्कार जो है वो स्प्रिंग अप होते हैं और इसकी वजह से उसको नया शरीर धारण करना पड़ता है टू टेक अ न्यू शेप एक नए देह को उसको धारण करना है वेन आई लुक एट यू अ वेव राइ इन माय माइंड मैं आपके सामने जब देखता हूं तो मेरे मन में एक तरंग खड़ी होती है इट डाइव डाउन एज इट वेर एंड बिकम फाइनर एंड फाइनर बट इट डज नॉट डाई जब यह तरंग धीरे-धीरे समाहित हो जाती है तो किंतु वह ज्यादा से ज्यादा सूक्ष्म होती जाती है यह संपूर्ण रूप से विलुप्त नहीं हो जाती इट इज रेडी टू स्टार्ट अप अगेन एज अ वेव इन द शेप ऑफ मेमोरी वह चली तो जाएगी किंतु मेमरी के रूप में वह वापस आ जाएगी अभी जैसे कि हमने एक बार तो यह अनुभव हो गया कि हमने सांप देख लिया रास्ते में अभी चलो मान लीजिए सांप नहीं था रस्सी भी थी किंतु ये डर का जो अनुभव जो हो गया ना इसके बाद में जभी भी मैं कभी अपने रूम में आराम से बैठा हूं पंखा चल रहा है सुंदर कुर्सी पर बैठा हूं और चाय पी रहा हूं सडन मुझे याद आया कि अरे मैंने रास्ते में साप देखा था तो जो इमोशन मेरी हुई थी मेरा हृदय धड़कने लगा पसीने होने लगे हाथ पैर कंपने लगे इमीडिएट वो रिएक्शन मेरे माइंड मेरे श में होगा अभी तो इस बार तो मैंने साप को देखा नहीं किंतु ये जो मेमोरी है जो याददाश्त है उस घटना की ये जो ट्रामा आज की लैंग्वेज में इसको ट्रॉमा कहेंगे ये ट्रॉमा जो है सा के साथ का साक्षात साप का साक्षात्कार होना वो ट्रॉमा जैसे ही मन में आएगा इमीडीएटली मेरा शरीर फिर से कंपने लगेगा फिर से ध्रु जारी होने लगेगी शरीर ठंडा हो जाएगा क्यों मैंने साप को तो देखा नहीं है फिर भी साप को देखने वाला रिएक्शन मेरे शरीर पर क्यों होता है क्योंकि वो ट्रॉमा के रूप में वो मेरे माइंड के भीतर में हमेशा रहती है यह जो पीटीएसडी कहते हैं ना पोस्ट ट्रामेट्स तो आते हैं किंतु युद्ध में उन्होंने जो गोली गोला बारूद चलते हुए देखा अपने मित्रों का मृत्यु देखा अपने फेलो सोल्जर्स का अपनी नजर के सामने यह जो भयावह यादें वो उसके मन में ट्रॉमा के रूप में घर करके रह जाती है और जब भी हमेशा इस ट्रॉमा से वो पीड़ा आता रहता है आजकल इसलिए यह योगा और मेडिटेशन अमेरिका में य वेटरन एसोसिएशन जो होते हैं ना वीए वेटरन एडमिनिस्ट्रेशन इसको कहते हैं यानी कि यह जो घर वापस आए जो सैनिक है इनका साल संभाल उनकी संभाल रखने के लिए वीए बोल करर के वेटरन एडमिनिस्ट्रेशन बोलकर के एक बहुत बड़ी एक संस्था वहां पर चलती है जो कि अभी ये सोल्जर्स को ट्रीटमेंट चाहिए उसका पीटीएसडी यह उसको युद्ध के मैदान की याद को बार-बार सताती है तो अमेरिकन गवर्नमेंट बहुत सारा पैसा खर्च करती थी कि किस तरह से उनको ठीक-ठाक रखा जाए फिर किसी ने कहा कि अरे इन लोगों को योगा और मेडिटेशन सिखाओ वो तो बेस्ट सॉल्यूशन है पीटीएसडी का तो अभी देखिए कि जितने भी वेटरन ये एसोसिएशन है ना कि जो भी है सब जगह पर योगा और मेडिटेशन सिखाते हैं क्यों क्योंकि इससे आप अपने मन की ये भयावह यादें इसको कंट्रोल में रख सकते हैं किंतु इसके पीछे का साइंस क्या है यह साइंस स्वामी जी यहां पर बताते हैं सूक्ष्म शरीर के भीतर में यह सब जो भी हमारे कार्यकलाप जो भी हमारे विचार है एक मेमरी के रूप में यह सब रह जाते हैं और ये यही मेमरी यही संस्कार बार-बार शरीर धारण करेंगे आप लोग आत्महत्या करते हैं पीटीएसडी जिस सोल्जर को होता है बहुत सारे सुसाइड के केस होते हैं अमेरिका में जो सैनिक घर वापस ये इराक अफगानिस्तान वहां इतना सब उसने भयावह सब दृश्य देखे वो गाड़ी लेकर के जा रहा है और आईईडी कहते हैं ना इंप्रोवाइज एक्सप्लोसिव डिवाइस और किसी ने व इस तरह का एक बम फोड़ा और गाड़ी उसकी चकनाचूर हो गई उसकी नजर के सामने उसके बंधुओं की मित्रों की मृत्यु हो गई यह भयावह दृश्य देख कर के वो घर वापस तो आता है किंतु जब रात को सोता है फड़क उसको ये नाइट मेर आता है नाइटमेयर अर्थात कि दु स्वपना दु स्वप्ना आता है कि वो फिर से वही रास्ते प जा रहा है वही गाड़ी में जा रहा है अपने मित्रों के साथ में हंसी मजा करता है फड़क करके बम पड़ता है और सभी उसके मित्र है उसकी नजर के सामने वह मर गए और वोह बच गया वो बार-बार इसको इस तरह के नाइटमेयर्स आएंगे नींद उसकी उड़ जाएगी उसके बाद में कुछ समय के बाद में वो क्या करेगा यह सहन नहीं हो पा रहा है इस तरह के नाइटमेयर्स बार-बार वो सुसाइड कर लेगा किंतु सुसाइड करना यह कोई सोल्यूशन नहीं है क्योंकि इसके जो नाइटमेयर्स है इसकी ये जो भयावह यादें हैं उसके सूक्ष्म शरीर में तो रह ही जाएगी और जब भी वह फिर से जन्म ग्रहण करेगा और यही याददास्त यही सूक्ष्म शरीर की यह सब मेमोरीज नए शरीर के वितर में आएगी ही विल बी प्रोन टू ट्रॉमा अर्थात कि जिस तरह से कोई भी छोटी सी घटना हुई दो तरह के लोग हैं छोटी-मोटी घटनाएं कोई बड़ी असर नहीं करती साधक की बात यहां पर छोड़ देते हैं साधक का मन बड़ा सूक्ष्म हो जाता है छोटी-छोटी घटनाएं बड़ी असर करती है उसको किंतु जो लोग साधक नहीं है उसमें भी फिर से दो तरह की कैटेगरी होती है एक तो है कि ट्रॉमा होता है तो इजली वे लोग मैनेज कर पाते हैं अच्छा ठीक है चलो हुआ तो हुआ दूसरे तरह के लोग हैं कि ट्रॉमा होने से ही कुछ ऐसी घटना होने से ही वे लोग इतने मायूस हो जाते हैं इतने डिप्रेसो जाते हैं इनके बारे में कहा जाए प्रोन टू ट्रॉमा अर्थात कि इन लोगों के मन में ट्रॉमा बहुत ज्यादा असर करता है क्यों असर करता है मेडिकल साइंस के पास में इसका उत्तर नहीं है स्वामी जी हमको उत्तर देते हैं कि सूक्ष्म शरीर में पहले से ही ये सब ट्रॉमा है वो घर करके बैठे हुए हैं अभी नए जन्म में छोटी-छोटी घटनाएं भी उस पुरानी याददाश्त को वापस करेगी अर्थात कि मान लीजिए कि इस उस सोल्जर रूपी उसका जो जन्म था सैनिक के रूपी जन्म उसमें तो उसको नाइटमेयर आते ही थे किंतु जब नया देह भी धारण करेगा ना तो वही नाइटमेयर्स वापस चले आएंगे उसको पता भी नहीं चलेगा कि इस नाइटमेयर्स का ये छोटी-छोटी घटनाओं से मेरे मन पर इतनी बड़ी असर हो रही है इसका क्या अर्थ है किस क्यों ऐसा हो रहा है इसको पता भी नहीं चलेगा और म मेडिकल साइंस वहां पर कुछ नहीं कर पाएगा क्योंकि वह तो पुनर्जन्म को स्वीकार नहीं करता है वह तो ऐसा कहेंगे नहीं कि हां आपके पिछले जन्म में आपके साथ में कोई बड़ा ट्रामा हुआ होगा इसका यह परिणाम है ऐसा तो वे लोग कहेंगे नहीं जब तक आप इसको प्रॉपर्ली डायग्नोज नहीं कर पाएंगे तब तक आप इसका ट्रीटमेंट कैसे करेंगे बिना मतलब की एंटीडिप्रेसेंट उसको दे देंगे उसके मन को पूरा खत्म करके रख देंगे अभी कुछ दिन पहले मेरी किसी के साथ में बात हो रही थी एक डिप्रेशन के पेशेंट के बारे में तो इस आदमी ने मुझे कहा कि देखिए महाराज मेरी तो इच्छा नहीं है उसको एंटीडिप्रेसेंट देने की क्योंकि मैंने देखा है डॉक्टरों के साथ बात की है जिसको कि एंटी डिप्रेसेंट देते हैं ना वो आदमी पूरा झोंबी जैसा बन जाता है पूरा मर जाता है भीतर से शरीर उसका चलता रहेगा भीतर में से सब खत्म हो गया है इसलिए उसका ये जो रिलेटिव है उसको मैं एंटीडिप्रेसेंट नहीं देना चाहता तो ये आजकल के डॉक्टर के पास में यही एक सॉल्यूशन है पिछले जन्म के ट्रॉमा इस जन्म में कैरी फॉरवर्ड हो रहा है तो उसको प्रॉपर डायग्नोज तो नहीं कर पाएंगे बिना मतलब के एंटीडिप्रेसेंट डेंगे उसको भीतर से खत्म कर देंगे और ये जन्म में जद उसकी मृत्यु होगी एंटीडिप्रेसेंट लेते लेते नेक्स्ट जन्म में और ज्यादा डेंजरस उसके सामने है यानी कि ये तो कंपाउंड इंटरेस्ट की तरह गुजराती में जिसको कहते हैं चक्रवृद्धि व्याज की तरह ये ट्रामा बढ़ता ही जाएगा बढ़ता ही जाएगा इसका कोई सॉल्यूशन ही बेचारे को नहीं मिलेगा हो सकता है फिर वह मनुष्य योनि में से पशु योनि में चला जाए इतना जदी वो बर्डन जदी उसके ऊपर में बढ़ जाता है ये सूक्ष्म शरीर का ये आपको काटेंगे जब तक नहीं तब तक यह संसार चक्र हमको पिसता ही रहेगा पिसता ही रहेगा और हमको समझ में ही नहीं आता कि भैया ऐसा क्यों हो रहा है तो इसका सोल्यूशन खोजने से पहले इसका साइंस क्या है वो समझना मेन चीज है तो यहां पे स्वामी जी हमको साइंस बताते हैं इट इज रेडी टू स्टार्ट अप अगेन एज अ वेव इन द शेप ऑफ मेमोरी जो भी ट्रामा है हमारे मन में मेमरी के रूप में बैठा हुआ है वो फिर से बार-बार अपना मुख अपना मुह खड़ा करेगा वह बार-बार फिर से खड़ा होगा नाइटमेयर्स के रूप में सो ऑल दिस इंप्रेशंस आर इन माय माइंड एंड व्हेन आई डाई द रिजल्टेंट फोर्स ऑफ देम विल बी अपॉन मी तो यह सब इंप्रेशन यह सब याददास्त मेरे भीतर में है और जब मैं जाऊंगा मेरा मृत्यु होगा तब भी यह मेरे साथ में ही जाएगी अ बॉल इज हियर एंड इच अभी यहां पर स्मी जी बताते हैं ये जो हमने एक बार डिस्कस किया था ना कि यदि एक देह से दूसरा देह सूक्ष्म शरीर धारण करता है तो पिछले जन्म की याददाश्त ये ट्रॉमा यह मेमोरीज नए जन्म में कैसे जाएगी अभी सोल्जर जब नया जन्म धारण करेगा उसको यह बात तो याद नहीं रहेगी कि हां वह गाड़ी में जा रहा था और आईईडी एक्सप्लोजन हुआ और गाड़ी उसकी टूट गई वोह बात तो उसको याद नहीं रहेगी किंतु ये जो रिजल्टेंट ट्रॉमा जो है वो इसके साथ में आएगा यह स्वामी जी अभी यहां पर डिस्कस कर रहे हैं अ बॉल इज हियर एंड ईच वन ऑफ अस टेक्स ए मेलेट इन दिस हैंड्स एंड स्ट्राइक्स द बॉल फ्रॉम ऑल साइड्स एक बॉल यहां पे है और हम सभी लोग एक हथोड़ा अपने हाथ में लेते हैं और इस बॉल को चारों ओर से मारते हैं द बॉल गोज फ्रॉम पॉइंट टू पॉइंट इन द रूम एंड व्हेन इट रिचेस द डोर इट फ्लाइज आउट जैसे कि 10 लोग खड़े हैं हाथ में हथोड़ा लेकर के अभी हथोड़े की जगह हम मेट शब्द यूज करते हैं क्योंकि यह क्रिकेट हमको बेटर समझ में आता है तो हम सभी लोग मान लेते हैं कि 10 लोग एक कमरे में खड़े हैं बेट लेकर के और एक बॉल यहां पर पड़ा हुआ है हम सभी लोग बैट से इस बॉल को मारते हैं तो मेरी ये बॉल को मैंने मारा तो दूसरे व्यक्ति के सामने गया उसने बेट से मारा तो तीसरे के पास गया तीसरे ने मारा तो चौथे के पास गया चौथे के मारा तो पांचवे के पास धीरे-धीरे करके 10 लोगों ने बॉल को मारा आखिर में वो कमरे के बाहर में चला गया तो कमरे के बाहर में जब जाएगा तो उसके साथ में क्या जाएगा ये 10 लोगों ने उसको किसकिस डायरेक्शन में मारा वो जाएगा इस बोल के साथ में ना कि द लोगों ने मिलकर के बोल को जो मारा उसकी जो सम टोटल है उसकी जो फाइनल उसकी जो स्पीड है वो जाएगी फाइनल स्पीड एंड फाइनल डायरेक्शन नहीं कि कमरे के भीतर में इस डायरेक्शन से इस डायरेक्शन में गया किसी ने जोर से बोल को मारा तो जोर से वो गति कर रहा है किसी ने धीरे से बॉल को मारा तो धीरे से गति कर रहा है ऐसा नहीं जब कमरे के बार में जाएगा तो सम टोटल जो फाइनल उसका जो यह है एडिशन वही कमरे के बार में जाएगा फाइनल डायरेक्शन एंड फाइनल स्पीड यही कमरे के बाहर में जाएगा व्हाट डज इट कैरी विथ इट अपने बाहर अपने साथ में कमरे के बाहर में क्या ले जाता है द रिजल्टेंट ऑफ ऑल दिस ब्लोज दैट विल गिव इट डायरेक्शन ये जितने भी बार बॉल को मारा गया इन सबका सम टोटल जो है वही इस बॉल के साथ में जाएगा और वही ही इसको ये गति देगा जैसे कि हमने वो बैंक का उदाहरण देके कहा था कि एक बैंक का अकाउंट है जिसमें आपने बहुत सारे ट्रांजैक्शन किए हैं मान लीजिए 100 हजार ट्रांजैक्शन किए किंतु जब बैंक अकाउंट क्लोज हो जाएगा नए बैंक में अकाउंट ओपन होगा तो आपका जो फाइनल है 10000 का बैलेंस वही 10000 का बैलेंस ही जाएगा आपका 10000 का बैलेंस कैसे आया मैंने 10000 पहले 1 लाख ड किए थे फिर 50000 उठा लिए फिर 50000 ड के वो ट्रांजैक्शंस नहीं जाएंगे फाइनल बैंक बैलेंस ही जाएगा वैसे ही स्वामी जी यहां पे बोल का उदाहरण देके देते हैं सो व्हाट डायरेक्ट द सोल व्हेन द बॉडी डाइस तो ये जो अपना सूक्ष्म शरीर है उसका क्या है उसकी गति क्या है जब शरीर का मृत्यु होता है स्थूल देह का तो यह सूक्ष्म देह को क्या गति देता है उसको क्या डायरेक्ट करता है द रिजल्टेंट द सम टोटल ऑफ ऑल द वर्क्स इट हैज डन ऑफ द थॉट्स इट हैज थॉट ये जितने भी विचार है जितने भी कार्यकलाप है इन सबका सम टोटल इन सबका फाइनल ंस जो फाइनल टेली वही नए देह के साथ में जाएगा इफ द रिजल्टेंट इज सच दैट इट हैज टू मैन्युफैक्चर अ न्यू बॉडी फॉर फर्द एक्सपीरियंस इट विल गो टू दोस पेरेंट्स हु आर रेडी टू सप्लाई इट विथ सूटेबल मटेरियल फॉर दैट बॉडी अच्छा मान लीजिए कि बैंक बैलेंस पॉजिटिव है तो उस तरह के पेरेंट्स के पास जाएगा इस तरह के माता-पिता के पास में जाएगा कि उस तरह के संस्कार को धारण करने के लिए उस तरह का देह उसको दे सके मान लीजिए कि वह अच्छा उसने कर्म किया है तो मनुष्य योनि में जाएगा तो मनुष्य माता-पिता के वहां वह जन्म ग्रहण करेगा बहुत उसके सर के ऊपर में भार बढ़ गया है यह ट्रॉमा का यह मिस बीट का खराब कर्म का तो किसी पशु योनि में जन्म होगा तो पशु पिता और माता के वहां पे वह जन्म ग्रहण करेगा अर्थात कि उस सूक्ष्म शरीर का जो बैलेंस है पॉजिटिव बैलेंस है कि नेगेटिव बैलेंस उसके अनुसार यह सूक्ष्म शरीर उस देह को धारण करने वाले उस तरह का देह को जन्म देने की क्षमता देने वाले माता-पिता के पास में जाएगा दस फ्रॉम बॉडी टू बॉडी इट विल गो सम टाइम्स टू अ हेवन एंड बैक अगेन टू अर्थ बिकमिंग मैन और सम लोअर एनिमल इस तरह से सूक्ष्म शरीर एक के बाद एक स्थूल देह से पसार होगा कभी-कभी स्वर्ग में चला जाएगा स्वर्ग और नर्क की कल्पना अपने हिंदू धर्म में है नहीं है ऐसा नहीं किंतु अपना स्वर्ग या नर्क यह वेस्टर्न क्रिश्चन स्वर्ग और नर्क से इस तरह से डिफरेंट है कि बहुत अच्छे पॉजिटिव संस्कार हो गए तो स्वर्ग में जाकर के थोड़ा सा भोग करके वापस आ जाओ और बहुत बुरे संस्कार हो गए तो जाओ नर्क में जाकर के उसको वर्कआउट करके वापस आ जाओ मुक्ति तो मनुष्य देह में ही मिलने वाली है यह अपना एक डिफरेंस है स्वर्ग और नर्क का और यहां पे जैसे यह ट्रॉमा के बारे में जब ट्रॉमा एक जन्म में रिजॉल्व नहीं होता है इस जन्म में मेरे साथ में जो भी प्रॉब्लम्स खड़े हुए मेरे जितने भी मिस डीड है बुरे कर्म है वो सबको मैं यदि इस जन्म में वर्कआउट नहीं कर पाऊंगा और अगले जन्म में ले जाऊंगा तो पता है इसका भयानक असर क्या होगा इस जन्म में तो मुझे पता है कि मैंने क्या पाप किया है और मुझे यह भी थोड़ा बहुत अंदाज है किसी अच्छे साधु संत को मिलूंगा तो मुझे बता देंगे कि भाई तने इस तरह का पाप किया है तो इस तरह का चित कर दो इस बात को यहां पर समाप्त कर दो इसका कोई इजी सोल्यूशन है किंतु मान लीजिए कि इस देह में मैंने इसको वर्कआउट नहीं किया नया देह धारण किया तो मेरी मेमोरी ही चली जाएगी पता ही नहीं चलेगा कि किस वजह से मैंने यह मेरे सर के ऊपर में यह पूरा बर्डन बैठा हुआ है ये नेगेटिव बैलेंस बैठा हुआ है मैं चारों ओर मारा मारा घूमू 10 साधुओं को मिलूंगा वो भी बेचारे नहीं पता पाएंगे कि भाई तुम्हारे साथ में ऐसा क्यों हो रहा है भाई ठाकुर जैसे कोई मिल जाएंगे सब अवतार वो हो सकता है कि आपके पूर्व पूर्व जन्मों की बातों को पकड़ करके बता पाए कि भाई तुमने तो इस इस जन्म में ये ये अपराध किए थे इसका प्रायश्चित करो बाद में तो इस जन्म में तुमको शांति मिलेगी यानी पूरे अवतार को खोजना पड़ेगा वो कोई आपका वो जो अपने सर्दी जुकाम होता है तो कैसे किसी के पास में जाकर के दवाई ले देते हैं किंतु उसका वो दवाई लेने से पैरासिटामोल लेने से तो होता नहीं है फिर वो बोलेगा आप जाइए किसी बड़े सिटी में दिल्ली अहमदाबाद में वहां जाकर के सुपर स्पेशलिस्ट को दिखाइए दिल्ली में जाकर के एम्स में दिखाइए फिर वहां जाएंगे सुपर स्पेशलिस्ट आपका प्रत्येक विजिट का 101 हजार लेगा और पता तब कहीं जाकर के आपका कुछ सॉल्यूशन आएगा तो वैसे ही यदि इस जन्म के संस्कार को वर्कआउट नहीं करके अगले जन्म में कैरी फॉरवर्ड किया तो फिर सुपर स्पेशलिस्ट को दिखाना पड़ेगा सुपर स्पेशलिस्ट मिलेगा कि भी नहीं मिलेगा और वर्कआउट भी होगा कि भी नहीं होगा इसलिए मृत्यु से पहले इस जन्म में जो भी नेगेटिव बैलेंस है उसको फिट म उसको करके जाइए अगले जन्म में कैरी फॉरवर्ड मत कीजिए वरना करने से वो उसका सोल्यूशन खोजते खोजते पूरे पसीने निकल जाएंगे तो स्वामी जी का यहां पर टेक्निकल पैसेज पूरा खत्म होता है फ्रॉम हियर अभी से पूरा अंडरलाइन ये बॉक्स करना सब स्टार्ट हो जाता है मेरी किताब में देखिए स्वामी जी क्या कहते हैं दिस वे इट विल गो ऑन अंट्स एक्सपीरियंस इस तरह से सूक्ष्म शरीर एक देह से दूसरे देह की ओर यात्रा करता रहेगा कब तक जब तक के इसके सारे एक्सपीरियंस समाप्त नहीं हो जाते इसके अपराध और अच्छे कर्म दोनों वर्क आउट नहीं हो जाते अच्छे कर्म को भी वर्क आउट करना पड़ेगा अदर वाइज तो मुक्ति नहीं होगी तो एक्सपीरियंस समाप्त नहीं हो जाते एंड कंप्लीटेड द सर्कल यह जो सर्कल है जो वर्तुल है उसको वह समा समाप्त नहीं कर देगा यह सर्कल कंप्लीट करने की बात स्वामी जी क्यों कह रहे हैं थोड़ा सा अनुमान करके सोचना पड़ेगा मुझे ऐसा लग रहा है कि यह जन्म मृत्यु जरा व्याधि की साइकल है वह तो चलती ही रहेगी तो इस तरह से यह सर्कल कंप्लीट जब तक नहीं होगा तब तक आप हम इस स्थूल देह का धारण करने की बात से मुक्त नहीं होंगे ट धन नोज इट्स ओन नेचर जैसे ही सब एक्सपीरियंस सब अपराध सब बुरे कर्म समाप्त हो गए वी विल नो अवर ट्रू नेचर हमारा जो असली स्वभाव है वह हमारे सामने पिस्नो व्हाट इट इज एंड इ इग्नोर वेनिश मैं क्या हूं मैं समझ जाऊंगा और अज्ञान दूरी भूत हो जाएगा इट्स पावर्स बिकम मेनिफेस्ट आत्मन की जो सही शक्ति है आत्मन का जो सही ऐश्वर्य है वो प्रकाशित होगा इट बिकम परफेक्ट सूक्ष्म शरीर परफेक्ट हो जाता है नो मोर इज देयर एनी नेसेसिटी फॉर द सोल टू वर्क थ्रू फिजिकल बॉडीज नोर इज देयर एनी नेसेसिटी फॉर इट टू वर्क थ्रू फाइनर और मेंटल बॉडीज इस सूक्ष्म देह को इससे बाद में स्थूल देह धारण करने की जरूरत नहीं रहेगी कि ना ही इसको किसी सूक्ष्म शरीर के साथ में एसोसिएट होने की इट शांस इन इट्स ओन लाइट एंड इज फ्री नो मोर टू बी बोर्न नो मोर टू डाई वह अपने सही स्वभाव में आरूढ़ हो जाती है मुक्त हो जाती है जन्म नहीं है मृत्यु नहीं है इसका अभी देखिए इस पैसेज में स्वामी जी किस चीज के बारे में बता रहे हैं पैसेज शुरू तो होता है स्थूल सूक्ष्म शरीर से किंतु अंत होता है आत्मन से यह स्वामी जी को पढ़ते पढ़ते यह सब चीजें जब तक स्वामी जी टेक्निकल डिस्कशन करते हैं तब तक वो एक प्रयास करते हैं कि अपनी टर्मिनोलॉजी को ठीक रखने का किंतु जब वो इंस्पिरेशनल मोड में चले जाते हैं तो फिर उनकी टर्मिनोलॉजी सब मिक्स अप हो जाती है फिर हमको अनुमान करके ठीक-ठीक करना पड़ता है कि स्वामी जी किस चीज के बारे में बता रहे हैं स्वामी जी यदि ऐसा कहेंगे कि सूक्ष्म देह अपनी जो सही ग्लोरी है अपना जो सही ऐश्वर्य है उसमें स्थित हो जाता है तो ये तो सूक्ष्म शरीर नहीं है हमको जिसने वेदांत पढ़ा है उसको पता है जिसकी सही ऐश्वर्य जो है आध्यात्मिक संपद किसम है सूक्ष्म शरीर में नहीं वह तो आत्मन में है अर्थात कि आत्मन अपनी सही ऐश्वर्य में स्थित हो जाता है अर्थात कि यह जैसे-जैसे यह पैसेज आगे बढ़ता है स्वामी जी भी प्रत्येक सेंटेंस में सूक्ष्म देहस की वजह से यह आत्मन की ओर जाते जाते हैं यह थोड़ा सा हमको देखना है देखिए मैं फिर से एक बार पढ़ता हूं इट बिकम परफेक्ट अभी परफेक्ट क्या होता है सूक्ष्म देह तो नहीं होता इट्स इग्नोर हैंस वेनिश अच्छा इग्नोर वैनिशेज एंड बिकम परफेक्ट अभी इग्नोर किसका जाता है इग्नोर तो सूक्ष्म शरीर का जाएगा सूक्ष्म शरीर इग्नोर स्वरूप है इट बिकम परफेक्ट अर्थात कि देखिए कि आत्मन के ऊपर में इग्नोर का जो आवरण है वह चला जाएगा और वह अपनी सही परफेक्शन में स्थित हो जाएगा नो मोर इज देर एनी नेसेसिटी फॉर द सोल टू वर्क थ्रू फिजिकल बॉडीज नोर इज देर एनी नेसेसिटी फॉर इट टू वर्क थ्रू फाइनर और मेंटल बॉडी देखिए बहुत ही इसको यहां पर सोल स्वामी जी ने आत्मन के अर्थ में किया है नहीं कि सूक्ष्म देह के रूप में देखिए जब सूक्ष्म देह के भीतर में से जितने भी संस्कार है वह वर्क आउट हो जाएंगे तब क्या होगा आत्मन को किसी देह के साथ में पंच महाभूत के स्थूल शरीर के साथ में संयुक्त होने की जरूरत तो नहीं ही पड़ेगी किंतु किसी तरह के सूक्ष्म शरीर के साथ में संयुक्त होने की भी जरूरत नहीं पड़ेगी कल मैंने जो एग्जांपल दिया था लकड़ी के दो टुकड़े हैं उसको हमने फेविकोल से जोड़ा अभी यह लकड़ी का एक टुकड़ा है आत्मन दूसरा टुकड़ा है देह पंचमहाभूत का बना हुआ और यह फेविकोल है वह है सूक्ष्म शरीर जो कि अज्ञान की वजह से आत्मन और देह को पकड़े हुए रखता है दोनों को जोड़ कर के रखता है किंतु जैसे ही इस सूक्ष्म शरीर में से अज्ञान का आवरण सूक्ष्म शरीर के लिए जो सब अपराध है वो वर्क आउट हो जाएंगे उसके जिसके भी संस्कार है वो वर्कआउट हो जाएंगे तो सूक्ष्म शरीर विलीन हो जाएगा यह फेविकोल पिघल जाएगा और लकड़ी के दोनों टुकड़े सेपरेट हो जाएंगे तो वैसे ही यहां पर स्वामी जी कहते हैं जब सूक्ष्म शरीर का जितना भी संस्कार वर्कआउट हो जाएगा यह आत्मन जो है आत्मन को बार-बार किसी भी देह के साथ में संयुक्त होने की जरूरत नहीं पड़ेगी और देह के साथ में तो छोड़ ही दीजिए उसको सूक्ष्म शरीर के साथ में भी संयुक्त होने की जरूरत नहीं पड़ेगी इट शाइन इन इट्स ओन लाइट अभी लास्ट सेंटेंस है वह आत्मन के बारे में है इट शाइन इन इट्स ओन लाइट आत्मन अपके खुद के प्रकाश से प्रकाशमान होगा एंड इ फ्री नो मोर टू बी बोन नो मोर टू डाई मुक्त हो जाएगा फिर से नहीं रहेगा जन्म नहीं रहेगा मृत्यु इसको लेकर के बहुत सारे प्रश्न खड़े हो सकते हैं हमारे मन में कि ऐसा क्यों कहते हैं आत्मन के बारे में जोक जन्म और मृत्यु है ही नहीं जिसका उस आत्मन को एक सूक्ष्म देह के साथ में क्यों संयुक्त होना पड़ेगा क्यों एक सूक्ष्म देह एक आत्मन को अपने लेवल पर खींच के ले आएगा तो इस प्रश्न का उत्तर वैसे अपने हिंदू धर्म में स्वामी जी भी एक दो बार कहते हैं कि हम लोग इस तरह का दावा नहीं करते कि क्यों आत्मन और माया का संयोजन हुआ क्यों इन दोनों को संयुक्त होना पड़ा हिंदू धर्म जो है हमारी साधन पद्धति है हमको रिवर्स डायरेक्शन में ले जाती है कि हां आत्मन के ऊपर में अज्ञान अविद्या माया का आवरण है और इस आवरण को हटाने के लिए क्या करना है यह हम आपको बताते हैं किंतु आवरण सर्वप्रथम आया ही क्यों यह तो ब्रह्मण का जो सही स्वरूप है वह जानेंगे तब हमको समझ में आएगा किंतु जो जानता है वह वापस आकर के हमको बता नहीं पाएगा क्यों नहीं बता पाएगा फिर से वही ठाकुर की बात कि ब्रह्म का स्वरूप वो से शब्दों से व्यक्त नहीं कर सकते उसको अनुभूति ही कर सकते हैं अर्थात कि एक बार हमने साधना करके ब्रह्मण का सही स्वरूप जान लिया हमको सब कुछ समझ में आ जाएगा कि क्यों ब्रह्मण या तो फिर आत्मन सूक्ष्म देह के साथ में संयुक्त होता है क्यों इस आ ये सूक्ष्म देह बार-बार जन्म मृत्यु जरा व्याधि के चक्र में फंसता रहता है और साथ में इस ब्रह्मण के एक प्रकार की किरण को अपने साथ में खींच के ले जाता है वह सब चीजें हमको ब्रह्मज्ञान होने से समझ में आ जाएगी किंतु जब तक ब्रह्मज्ञान नहीं होगा तब तक वी आर इन द वर्ल्ड ऑफ स्पेक्युलेटिव अनुमान के ही जगत में रहेंगे तो इस तरह का अनुमान करके बहुत ज्यादा समय डालना कि क्यों इन दोनों का संयोजन हुआ हम इस बात के ऊपर में ज्यादा भार देंगे कि इस संयोजन को तोड़ने के लिए हमको क्या करना है तो इस उसके बाद में जो दो पैसेज आखिरी बच गए स प्योर इंस्पिरेशन ऐसा स्वामी जी सुंदर सुंदर बातें करते हैं पढ़ कर के हमको बड़ा ही आनंद आएगा और जब स्वामी जी इस तरह की बातें करते हैं तो पूरे कथामृत के साथ में कंपटीशन चला आता है कथामृत पढ़ के कैसा हम प्रत्येक सेंटेंस पढ़ते अरे वाह अरे वाह ऐसा लगता है कि वाह वाह तो ये पूरा स्वामी जी के इंस्पिरेशनल पैसेज है ना पूरे कथामृत के साथ में कंपटीशन करते हैं इन टर्म्स ऑफ इट्स इफेक्ट ऑन अस तो ये दो पैसेज हम मुझे लगता है कि य पूरा सप्ताह बाकी के दो पेज में जाएगा तो आज यहीं तक कल फिर से मिलते हैं ओम शांति शांति शांति हरि ओम सत श्री

Questions & Answers

राम देखिए अपने शास्त्र में जो कहा है ना कि ध्रुव ने एक पैर पर खड़े रहकर कितने हजारों सालों तक तप किया तो हमको लगता है इतना तप करने की क्या जरूरत तो जरूरत है इसलिए जरूरत है किंतु देखिए साथ-साथ में ही ये राम कृष्ण नाम है तारक ब्रह्म कलयुग में जैसे कहते हैं ना नाम ब्रह्म से ही सब हो जाएगा हमको एक पैर पर खड़े रह के हजारों सालों तक तपस्या करने की यह राम कृष्ण नाम मंत्र से ही ये हो जाएगा सो दैट इज अवर कंसोलेशन ये जो अपना जो पंच महाभूत का जो सब बना हुआ है उसका भीतर में एक्सप्लेनेशन जैसे हम उस लेवल पर चले जाएंगे तो सब कुछ मने एकदम क्लियर हो जाएगा जैसे ही ब्रह्म ज्ञान हुआ वैसे ही सब कुछ क्लियर हो जाएगा कि क्यों भाई ब्रह्मण और माया का इस तरह से यह होता है युति ड़ी लखेर भीतर एकटा दूट केटे सेसे दाव मा हाथ चापड़ी मने जो लाखों लाखों पतंग उड़ रही उसको उसमें से एक दो पतंग काटे गी उनको मुक्ति मिलेगी और मासे दाव मा हाथ चापड़ी हसते हंसते तालिया बजा जाएगी किंतु देखिए मां रास्ता भी तो दिखाती है ना इस संसार चक्र से बचने का रास्ता अी आज के समय में किसी को ना पता हो ऐसा नहीं है फिर वेदर आई एक्ट अपॉन इट और नॉट दैट इज माय चॉइस तो रास्ता तो माने दिखाया है अभी ये पता है ना कि जान तो पापी बांगला तो बोले मैंने जान सोच समझ कर के मैं पाप कर रहा हूं वो जो दुर्योधन का है ना कि जानामि में धर्मम नचम प्रवृत्ति जानामि में धर्मम नचम निवृत्ति धर्म क्या है पता है किंतु उसके ऊपर अमल प्रैक्ट नहीं कर सकता और अधर्म क्या है पता है किंतु उसको छोड़ नहीं सकता बड़े एग्जांपल है मास्टर महाशय और नरेण मास्टर महाशय सुसाइड करने को जा रहे थे और ठाकुर मिल गए रास्ते में और नरेण का पिताजी का मृत्यु हो गया घर में खाने को नहीं है वो बाहर घर में आकर क्या बोलता है मां को कि मां मैं अपने मित्र के वहां खाके आया हूं जो थोड़ा बहुत खाना बचाए तुम लोग खा लो किस तरह की परिस्थिति में नरेंद्र था किंतु जब ठाकुर ने कहा तू जाकर के मां के पास में जा जाकर के मांग ले कि मेरे परिवार में सब सब सुख शांति बनी रहे तो स्वामी जी बार-बार जाते हैं क्या मांगते हैं ज्ञान द भक्ति दाव वैराग्य दाव फ ठाकुर के पास आकर के कहते हैं कि आप ही ने कुछ गड़बड़ किया है ठाकुर ने बोला तेरे कपाल में यह सब नहीं है और थोड़ा सा मैंने और रेगुलर लेवल का जद एग्जांपल दे तो देखिए की हम इसको आध्यात्मिकता या रिलीजन क्यों कहते हैं हम इसको साइंस क्यों नहीं कहते इस साइंस एक्चुअली यह सत्व रजस और तमस ये जो तीन गुण है या तो फिर तीन मेंटल स्टेट है वो तो वेल नोन है आप खुद के में अनुभव कर सकते हैं क्या मेरा मन बड़ा आनंद में है अर्थात कि मन में यह सत्व है फिर मैं बड़ा ही एक्टिव हूं बड़ा ही रेस्टस हूं यह रजस है और बिल्कुल डिप्रेशन में चला गया हूं या तो फिर य मैं काम क्रोध से अंध हो गया हूं तो वो तमस है तो ये तमस में से रजस और रजस में से सत्व में जो जाना यह जो मेंटल स्टेट है इट्स प्योर साइंस सांख्य इज अ प्योर साइंस इसके ऊपर में वेदांत एक फिलोसोफी बनी हुई है और इसके ऊपर में ये योग शास्त्र हमको दिया गया है तो ये योग और वेदांत को फिलहाल छोड़ दीजिए सा इ प्योर साइंस प्योर साइकोलॉजी तो सांख्य के बेस पर यदि आप और वेदांत को मान लीजिए छोड़ दीजिए अब योग को पकड़ लीजिए चलिए तो सांख्य और योग सांख्य है साइंस ऑफ माइंड एंड योग है उसका सॉल्यूशन अपने मन की स्थितियों को ठीक करने का तो योग को तो पूरा जगत आज ले रहा है जो कि सबसे कटिंग एज पे कौन है अमेरिकन मिलिट्री है अमेरिकन मिलिट्री यह जो इंटरनेट आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सब कुछ वो फंड करती है लेटेस्ट वेपन सिस्टम वे लोग योग और मेडिटेशन को स्वीकार कर रहे हैं तो फिर हमको कौन सा भा दुख है योग और मेडिटेशन को स्वीकार करने का वे लोग कितना रिसर्च कर रहे हैं एक के बाद एक रिसर्च देखेंगे अभी इस बार का जून का इशू 21 जून इंटरनेशनल योगा डे है तो मैं कुछ आर्टिकल खोज रहा था कि साइंटिफिक रिसर्च के बेस पर योग क्या कहता है तो ज्योत में डालने के लिए वो हावर्ड की ओर से स्टडी हुआ है फिर ना कि अमेरिकन एसोसिएशन ऑफ मेडिकल साइंस में उसका स्टडी है वो सब स्टडी कर रहे हैं योगा के ऊपर में उसके कंक्लूजन इस बार आर्टिकल के रूप में आएंगे जून इशू मैप तो देखिए कि कहां हावर्ड इज द नंबर वन एजुकेशन इंस्टिट्यूट राइट तो वे लोग स्टडी करके पॉजिटिव इफेक्ट खोज रहे है कि मेंटल हेल्थ पे योगा का क्या असर है और उसका पूरा रिसर्च पेपर उसका कंक्लूजन कुछ-कुछ मैं इस आर्टिकल में दूंगा वो ज्योत के भीतर में तो देखिए कि टॉप मेडिकल ऑर्गेनाइजेशंस जो है वे लोग ये सब स्टडी कर रहा है इवन दे आर एक्सेप्टिंग इट्स बेनिफिट अब इंडिया का प्रॉब्लम क्या है ना वे लोग करेंगे तब हम इसको स्वीकार करेंगे हमको ये शर्म आती है ना कि अपना खुद का है तो अरे ये तो देसी है उसको छोड़ो घर की मुर्गी दाल बराबर अभी हावर्ड वाले रिसर्च कर रहे हैं तो मान लेंगे कि हां भाई उसमें कुछ है ये आपके जो एंजाइम ये लोग सोचते हैं कि मेंटल स्टेट है ना वो एंजाइम डायरेक्ट करते हैं या तो फिर अपने ये जो हॉर्मोन से वो माइंड को चलाते एक्चुअली रिवर्स आपका माइंड आपके हॉर्मोंस को चलाता है नहीं कि वाइस वर्सा अभी यह लोग जहां तक हॉर्मोन थेरेपी है वह तो आपकी कर देंगे व हर्मन थेरेपी से माइंड हो सकता है मोमेंट आपको कुछ असर हो किंतु लॉन्ग टर्म बेनिफिट नहीं होने वाला है