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ओम स्थापक यज धर्मस्य सर्व धर्म स्वरूपने अवतार वरिष्ठ या राम कृष्णाय ते नम कल हमने देखा कि किस तरह से स्वामी जी देखिए एक ट्रू पेट्रियट जो होता है जब वह अपने देश की अवद अवलोकन करता है तो उसके हृदय में किस तरह से एक दर्द और एक देश प्रेम का इस तरह से एक आवेश होता है कि वह अपने वाणी के प्रहार से देशवासी जो कि तमस में डूबे हुए हैं उनको ये तमस में से निकाल कर के सत्व की ओर ले जाने के लिए प्रयास करते हैं तो इसके लिए यदि कोई भी देश कोई भी सिविलाइजेशन कि कोई भी इंडिविजुअल उसको प्रोग्रेस करना है और यदि वह किसी इस तरह की सिचुएशन में फंसा है व्हिच इज वेरी डिसएडवांटेजियस टू हिम और टू दैट नेशन तो सबसे पहले तो यह ठीक करना होगा उसको कि वह इस परिस्थिति में आया ही क्यों यदि हम दूसरे लोगों की निंदा करना शुरू करेंगे देखिए स्वामी जी ने खुद ने कई बार कई बार तो नहीं किंतु कुछ-कुछ जगहों पर उन्होंने कया है कहा है कि भारत में यह जो कास्ट यह जो नात यह जो जात यह सब जो एक क्रिस्टलाइज हो गया पहले क्या था कि जिसका जो संतान है उस वो वही कार्य करेगा ऐसा नहीं था पहले क्या था कि सबको अपनी टैलेंट के अनुसार कार्य करने का एक अपॉर्चुनिटी मिलता था एक अवसर मिलता था किंतु बाद बाद में ऐसा हो गया कि वंश परंपरागत हो गई सब विद्या सब रोजगार सब नॉलेज सब लर्निंग सब विजडम वो वंश परंपरागत हो गया तो यह वंश परंपरागत हो गया मतलब ये क्रिस्टलाइज हो गया अभी जिसमें टैलेंट नहीं है वह भी बिकॉज के अपने पिताजी से वारसे में मिला है वह उसको कर रहा है और जिसके पास में सही टैलेंट है उसको वह कार्य करने की अपॉर्चुनिटी नहीं मिलती यह क्रिस्टलाइजेशन हो गया अपने यहां पे वो तो स्वामी जी ने कहीं-कहीं पर कहा है कि हां वह बिकॉज ऑफ दी एक्सटर्नल अटैक्स किंतु यहां पे माने एक देयर इज वन प्लेस कि जहां पर स्वामी जी अपने हृदय की बात हमारे सामने कह देते हैं हां बाहर से जो आक्रमण हुए वह भी तो इसके लिए दाई ही है किंतु गोइंग बियोंड दैट देयर आर अदर फैक्टर्स व्हिच आर आल्सो रिस्पांसिबल और इसके बारे में स्वामी जी क्या कहते हैं कल हम पढ़ रहे थे थोड़ा सा मैं आगे से पढ़ता हूं कल जिस तरह से स्वामी जी ने कहा कि विमला बोलक के उनका एक मित्र था एक पहचान वाला था उसने शशि बाबू के द्वारा लिखित शशि एक एक शशि सानियाल एक ब्राह्मण थे उन्होंने एक किताब लिखी है किताब में इस तरह से उन्होंने लिखा है कि सिर्फ हम लोगों का ही धर्म हो सकता है लेचों का धर्म नहीं हो सकता और फिर यह किताब लिख करके उसको वो भी बंगोली में लिखी है और फिर यह कह रहे हैं कि ये अमेरिका से इसके लिए कोई धन प्राप्ति हो जाए स्वामी जी कहते हैं अरे मूर्खों पहले तो यह डिक्लेयर कर दिया कि लेचों का कोई धर्म नहीं होगा लेचों को यह आध्यात्मिक जो भारतीय परम परा है उसके अनुसार साधना करने का अधिकार नहीं पहले तो यह डिक्लेयर कर दिया और फिर कहते हैं यही लक्ष से रुपया कलेक्ट करो जैसे कि मेरा दारिद्र्य मिटे तो यह किस तरह की हाइपोक्रेटिन यह पूरी बात निकाली कि किस तरह से कि एक छुआछूत एक इस तरह हमारे भीतर में प्रवेश कर गया है कि हम लोग एक ग्रुप बना कर के बैठ गए हैं हमारे मन में ग्रंथि बना कर के बैठ गए हैं कि यह काला पानी क्रॉस नहीं करना है विदेश में जो लर्निंग है उससे अपना भारतीय लर्निंग इज फार सुपीरियर हां सुपीरियर है किंतु हमारा एक एरिया है हमारा जो हमारी जो स्ट्रीम है हमारा जो सब्जेक्ट है वो है योग एंड वेदांत और हां भूतकाल में था कि आयुर्वेद था फिर ये एस्ट्रोनॉमी था वगैरह सब्जेक्ट मैथमेटिक्स था सब सब्जेक्ट्स में हम लोग पारंगत थे किंतु आज के जगत में तो हम प्राय सभी विद्या खो बैठे हैं यहां तक कि योग और वेदांत भी जाने को बैठा था वो बिना मतलब के यह विधि व्यवस्था यह वगैरह सब चल रहा था बिना तो अभी क्या है कि स्वामी जी ने कहा कि वी नीड टू कम आउट ऑफ अवर जो एक अपने को एक अंधेरे कुए में हमने फेंक दिया है वहां से ऊपर आके सी हाउ द नेशंस आर ऑन द मार्च स्वामी जी ने योकोहामा से लिखे हु पत्र में लिखा है कि दूसरे देश किस तरह से प्रगति कर रहे हैं वह देखो और इतना उन्होंने पूर्व भूमिका बांधने के बाद में जो आगे कहते हैं मैं पढ़ता हूं ए रोगर औषध की इस यह जो व्याधि हमारे शरीर में प्रवेश कर गई है हमारी सिविलाइजेशन में उसका उसका रेजोल्यूशन क्या है सोल्यूशन क्या है बोली शशि बाबू के मालाबार जते बोलो मैं कहता हूं शशि बाबू वहां मलाब में जाइए शे खान का राजा समस्त पजार जमी छीन निए ब्राह्मण गड़ चरणा अर्पण करे छन वहां के राजा ने सभी लोगों की जमीन को छीन करके ब्राह्मण लोगों को दे दी है ग्रामे ग्रामे बड़ो बड़ो मोठ चोरबो चो खाना अबार नग गांव गांव में बड़े-बड़े मठ है मने खाने पीने का वैविध्य 5 भोग और ऊपर से नगद दक्षिणा भी देते हैं भोगेर समय ब्राह्मण तर जाते स्पर्श दोष नाही भोग करने के समय ब्राह्मण के अलावा और किसी को स्पर्श करने में कोई दोष नहीं भोग सांग होले स्नान भोग समाप्त होने के बाद में ही स्नान केनो ना ब्राह्मण तर जाति अपवित्र क्यों क्योंकि ब्राह्मण के अलावा जो जातियां है वह अपवित्र है अन्नो समता दे स्पर्श कराओ नाई भोग समाप्त होने के बाद में उनको स्पर्श करने की कोई आवश्यकता नहीं एक श्रेणी साधु सन्नासी आर ब्राह्मण बदमा देष उन्न दिए छ एक खास प्रकार के साधु सन्यासी और ब्राह्मण जैसे लोगों ने जैसे बदमाश लोगों ने देश को पूरा विनाश की ओर धकेल दिया है देही देही चूरी बदमाशी एरा बार धर्मर प्रचारक देही देही अर्थात सब समय धनी लोगों से अपना धन भिक्षा मांगते रहेंगे अपने भोग की पूर्ति के लिए धन मागते रहेंगे और साथ-साथ में चोरी बदमाशी भी करेंगे और स्वामी जी कहते यह फिर ऐसे लोग धर्म के उपदेशक होंगे क्या पैसा ने बे सर्वनाश करबे आभार बोलबे यो ना यो ना पैसा भी लेंगे सर्वनाश भी करेंगे और फिर बोलेंगे मुझे स्पर्श करना नहीं है मुझको छूना नहीं है आर काश तो भारी मने और काम क्या है बड़ा अच्छा काम है आलू ते बेग नेते जद ठेका ठेकी होई ता होले को तो खने ब्रह्मांड रसा तोले जावे आलू और बेगन मने ये और यह ब्रिंजल यह दोनों जद आसपास में यदि टकरा जाएंगे तो कितना समय होगा उसके बाद में ब्रह्मांड रसातल में जाएगा माने ऐसा होता है ना कि इसको इसके साथ मैंने स्पर्श करवाना है इसको इसके साथ मैंने स्पर्श करवाना है तो जद स्पर्श हो गया तो फिर पूरा ब्रह्मांड का विनाश हो जाएगा प्रलय हो जाएगा उत्पात हो जाएगा इसलिए जो लोग अपने में कोई भी संस्कार नहीं है बुद्धि नहीं है भोगों की पूर्ति में लगे हुए हैं फिर ऐसे लोग अच्छे धर्म के स्वांग सच के धर्म का भग धारण करके क्या क्या करते क्या है कुछ तो काम तो करना होगा तो इस तरह से सब वो प्रेडिक्शन कर देंगे विधान देंगे इस तरह की बातें करेंगे कि आलू और ये बेगुन ये दोनों जद आपस में टच हो गए तो अभी इतनी देर के बाद में उपत उत्पात आ जाएगा ब्रह्मांड पूरा जो है उसका विनाश हो जाएगा इस तरह का काम ये लोग करते हैं 14 बार हाथे माटी ना कोरी ले 14 पुरुष नरके जाए कि 24 पुरुष अभी कोई भी आप सोच जाने के बाद में या तो फिर खाने के बाद में उस समय तो साबुन वगैरह नहीं था तो मिट्टी में हाथ डाल कर के मिट्टी धोते हाथ साफ करते थे वो सांदीपनी ऋषि के आश्रम में व भगवान कृष्ण की इस तरह से एक बात में पड़ी थी याद है कि वह कुछ आहार करने के बाद में आहार करने के समय ही पता नहीं ऐसा कुछ हो गया तो उनको इमीडिएट जाना पड़ा तो वो वहां पर ही मिट्टी में ऐसा करके हाथ साफ कर लिए और खड़े होकर चले गए तो उने पहले तो ऐसा ही था क्या क कि माटी में इस तरह से हाथ साफ करना है एक्चुअली ये मने हमको आज यह सुनकर थोड़ा सा घृणा होती है या तो फिर हमको लगता है कि कितना प्रिमिटिव कस्टम है किंतु एक्चुअली ये जो ऑइली सब्सटेंस होते हैं ना जो हमारे हाथ में लगे होते हैं उसको साफ करने के लिए मिट्टी एक बड़ा ही एक स्क्रबिंग वो एजेंट है मिट्टी डालने से ही ऑयल चला जाता है उसके बाद में साबुन से हाथ धोएंगे तो एकदम क्लीन हो जाएगा वैसे ही साबुन से हम साबुन से हम यदि ऑइल को निकालने का प्रयास करेंगे हाथ में यदि ऑइल लगा है तो निकलेगा नहीं इतना इजली तो माने ये पहले का सब साइंस था किंतु अभी साइंस को किस तरह से ट्विस्ट कर दिया है देखिए स्वामी जी क्या कहते हैं कि कोई भी अशौच काम करके या तो हाथ साफ करने के समय 14 बार हम मिट्टी में हाथ रगड़ ना कि 24 बार रगड़ और यदि 24 बार नहीं करेंगे तो क्या हो जाएगा क्या सब एक उत्पत्ति हो जाएगी मने उत्पाद हो जाएगा ना कि 14 बार नहीं करेंगे तो क्या पाप हो जाएगा माने इतना तो इतनी बार करना ही है माने एक साइंस है उसको पूरा ट्विस्ट कर दिया है मैंने हमारे सर पर उसका बर्डन बना दिया है कि जो चीज करनी है तो कोई पार्टिकुलर पर्पस के साथ में करनी है कोई पार्टिकुलर पर्पस के लिए करनी है ऐसा नहीं करके उसकी एक विधि बना दी कि इसको इतनी ही बार 14 बार ही मिट्टी से हाथ साफ करना है या तो 24 बार ही करना है ऐसा करने से क्या है हम सबको एक वितृष्णा हो जाती है साइंस ने ही समझा करके आप सुपरस्टिशन समझाएंगे बहुत बार ऐसा होता है कि जब किसी चीज को पॉपुलर इज करना है आजकल जैसे होता है कि कोई जैसे वैक्सीन था यह कोरोना के समय में तो बहुत सारे लोग सोचते थे बात भी करते थे कि वैक्सीन लेने से बहुत सारा उसका साइड इफेक्ट होता है वगैरह वगैरह ऐसे बहुत सारी बातें चली थी तो ये गवर्नमेंट वाले क्या करते हैं कि किसी इन्फ्लुएंस को पकड़ेंगे सोशल मीडिया इन्फ्लुएंस या तो कोई सेलिब्रिटी इसको पकड़ करके इस तरह से प्रचार करवाएंगे कि देखो मैंने भी वैक्सीन लिया है तुम लोग भी लो तो क्या है कि अभी जिसको वैक्सीन का साइंस समझ में नहीं आता एटलीस्ट वे लोग ये तो सोचते हैं कि चलो किसी सेलिब्रिटी ने इसको रिकमेंड किया है या तो किसी सुपरस्टार ने या किसी क्रिकेटर ने इसको रिकमेंड किया है तो फिर उसमें कोई बुराई नहीं होगी हम भी वैक्सीन ले लेते हैं इस तरह से जो लोग अज्ञानी है इन लोगों में कोई पार्टिकुलर गुड हैबिट्स उसका प्रचार करना है तो इस तरह से ट्रिक्स आजमाई जाती है उसमें कोई गलत कुछ नहीं भारत में ऐसा हुआ था कि यहां पर तो सेलिब्रिटी कल्चर नहीं है उल्टा ही है अभी जैसे शंकराचार्य ने एक ग्रंथ की रचना की अभी शंकराचार्य के नाम से बहुत सारे ग्रंथ रचे गए हैं हमको कोई प्रश्न होगा क्या एक ही शंकराचार्य इतने ग्रंथों की रचना करके गए एक्चुअली ऐसा नहीं है शंकराचार्य तो वह पीठ का नाम है उस पीठ के ऊपर में उस गद्दी के ऊपर में जो बैठेगा उसका उस मठ का जो मठाधीश चार्य की पदवी दी जाती है इस दिस इ पोजीशन एक आदि शंकराचार्य थे कि जिन्होंने निश्चय बहुत सारे भाष्य टीका ग्रंथ वगैरह की रचना की थी किंतु इसके बाद में आज हम देखते हैं कि कोई भी जैसे चार मठ है शंकराचार्य के तो उस चार मठ के जो पीठाधी होते हैं गादीपति होते उनको शंकराचार्य कहते हैं तो अर्थात क्या कि हम लोग अपनी पर्सनालिटी को सब्स्यूम कर लेते हैं हम अपना इंडिविजुअल प्रचार करने के लिए कभी नहीं जाते हम हमेशा चाहते हैं कि मेरा नाम छुप कर के रहे मेरी बजाय मेरा काम बोले तो ये व्यास जैसे कि वेदव्यास है कि जैसे कि वशिष्ठ है या तो शंकराचार्य है इनके नाम से बहुत सारे ग्रंथ बहुत सारी बातें चलती है नोट नेसेसरी की एक ही वेदव्यास या तो एक ही वशिष्ठ ऋषि या तो फिर एक ही शंकराचार्य ने यह सब किया है उनके बाद में जितने भी एक आचार्य आते गए उन्होंने उसी नाम से आगे ग्रंथ की रचना की है स्वामी जी एक जगह पर स्वामी जी कहते यह बात मेरी नहीं स्वामी जी की है स्वामी जी ने कहा है कि देखिए कि यह हमारी भारतीय परंपरा थी आज क्या है पता है कि आज हम ग्रंथ लिखते हैं फिर ग्रंथ में क्या करते हैं उसके एग नोलेज मेंट में लिखते हैं कि देखिए कि मैंने इतना संघर्ष करके इस ग्रंथ की रचना की है फिर अपने मित्रों को भी वह भेजते हैं रिव्यू करने के लिए कि देखो मैंने कैसा लिखा है मैंने आज उल्टा है आज कुछ भी काम नहीं कर करेंगे मैंने अपनी इसको ना वैनिटी पब्लिकेशन कहते हैं आज की लैंग्वेज में अभी बैठे-बैठे मुझे ऐसा लगा कि मुझे अपने बचपन का इतिहास रचना करना है जैसे भगवान कृष्ण के बचपन की लीलाएं थी तो मेरी भी लीलाएं बड़ी मधुर थी तो मैं भी इसकी रचना करूंगा बोल कर के लिख लिया मैंने बचपन में यह किया बड़े होकर यह किया क्या संघर्ष हुआ अभी अपने अलावा तो कोई पढ़ने वाला नहीं है तो कोई पब्लिशर जो कि स्टैंडर्ड पब्लिशर्स होते हैं जैसे कि मैकमिलन है या तो फिर ये पेंग्विन है ना कि रैंडम हाउस है ये लोग तो उसको पब्लिश करेंगे नहीं तो ये लोग क्या करेंगे अपने ही नाम से उसको पब्लिश करवाएंगे वो प्रेस में जाकर के 400 500 कॉपी और जो भी गेस्ट आएगा जहां पर भी जाएंगे वो लेकर के साथ में घूमेंगे ये मेरी किताब है ये देखो पढ़ो मुझे ओपिनियन दो आपका कि मैंने कैसा लिखा है अभी सामने वाले को टाइम भी नहीं है उसको खोल के देखने का बिना मतलब वो अभी वो रिक्वेस्ट करता है तो मैंने अभी क्या करें आंखों की शर्म के मारे थोड़ा सा खोल के बोल देता है कुछ भी ऐसा उल्टा अभी कुछ ही दिनों पहले किसी ने एक लेटर लिखा था बहुत लंबा उसमें योगों का समन्वय मेरा के आइडियाज है वगैरह वगैरह लिख कर के दिया था फिर बोलता है मुझे आपका ओपिनियन दीजिए मैंने कहा भाई इस तरह से इसको पढ़ के ओपिनियन देना संभव नहीं कोई योग के बारे में योग के समन्वय के बारे में क्या उसकी अंडरस्टैंडिंग है उसको मैं पढ़ूंगा फिर उसके ऊपर मेरा ओपिनियन दूंगा ये इतना समय किसके पास है य प्रश्न है तो करो वरना ये कोई पढ़ के ओपिनियन देने का कोई तो प्रश्न ही नहीं आता तो अभी आजकल उल्टा है कि हम लोग अपना नाम करेंगे और पहले ऐसा था कि साइंस था तो किंतु अभी देखिए कि ये लोग सेलिब्रिटी या उसमें तो ये लोग नहीं जाते थे किंतु कोई गुड हैबिट है तो उसको यदि प्रचार करना है जैसे कि खाने के बाद में हाथ धोने चाहिए वरना यह जो वायरस बैक्टीरिया अपने हाथ में रह जाते हैं तो फिर उसी हाथ से फिर से खाना खाने से हमको रोग हो जाएगा और रोग से हमारा आयु कम हो जाएगा या तो फिर अपना स्वास्थ्य सफर करेगा तो गुड हैबिट्स डालने के लिए ये लोग क्या करते थे कोई कहानी पुराण की बना देते थे या तो फिर कोई ट्रेडिशनल थे फिर सबको बोलते थे कि देखो इसके पीछे ये ट्रेडिशनल ट्रेडिशनल करो तो रदर देन अ सेलिब्रिटी कल्चर जैसे कि आज का है वे लोग पौराणिक ट्रेडिशनल भी गुड हैबिट्स के साथ में जोड़ देते थे अभी जिसको अज्ञान है जिसको पता नहीं है कि पार्टिकुलर गुड हैबिट जैसे कि खाने के बाद में हाथ को धोना इसका क्या जरूरत है तो उन लोगों के लिए ट्रेडिशनल से कि भाई 14 बार आप इस तरह से मिट्टी में अपने हाथ रगड़ या ऐसा कुछ कीजिए व्हिच इज गुड फॉर यू तो अभी चलो वे लोग इसको करेंगे अनजाने में ही करेंगे किंतु करेंगे तो अभी क्या है कि एक जो साइंस था साइंस को पहले तो ट्रेडिशनल करने के लिए उ लोग सामान्य लोग जनता में फैलाने के लिए फिर ट्रेडिशनल सिशन में कन्वर्ट कर दिया गया पूरा मतलब कहां साइंस था वो कहां ये आ गया कि 14 बार आप यदि मिट्टी में हाथ नहीं रगड़ तो आपको ये पाप होगा ब्रह्म हत्या का पाप होगा क्या हो जाएगा पता नहीं आपको ऐसा डरा देंगे और इसके बाद में क्या होता है पता है सुपरस्टिशन अभी दो जैसे ही आपने सुपरस्टिशन के उस लेवल पे चले गए उसके बाद में दो हो जाएगा दो एक क्या होगा कि आपकी बात सुनने वालों के दो डिवीजन हो जाएंगे एक तो बड़े डर जाएंगे कि अच्छा ऐसा 14 बार मिट्टी में हाथ नहीं रगड़ तो पाप लगेगा क्या दूसरे लोग होंगे कि वोह बोलेंगे अरे यह क्या सुपरस्टिशन यह क्या अंधश्रद्धा क्या मूर्ख बनाता है चलो मैं मिट्टी में हाथ तो नहीं ही रगड़ा उल्टा करूंगा खाने के बाद में वैसे का वैसे ही हाथ रखूंगा तो एक्चुअली रिबेलियस जो है वो फिर असंतोष को जन्म देता है और फिर यह असंतोष है उसी के रास्ते से फिर यह विदेशी आक्रमणकारी भारत में प्रवेश करते हैं ऐसा बार-बार हुआ है कि भारत के ऊपर में आक्रमण हुआ राजा जीत है किल्ले के दरवाजे बंद थे किल्ले में से युद्ध कर रहा है फिर भीतर में से ही किल्ले में से ही किसी ने पीछे का दरवाजा खोल दिया और यह शत्रु भीतर में घुस आए ये ये पीछे से शत्रुओं के लिए दरवाजा खोल देने वाले लोगों की कमी नहीं थी इसीलिए बार-बार ऐसा हुआ है मैंने विलियम डा डार्लिंग पल बोलकर के एक हिस्टोरियन है तो वो काफी कुछ लिखता रहता है ब्रिटिश हिस्टोरियन है भारत के ऊपर में काफी कुछ लिखता है तो उसका एक पॉडकास्ट है उसका नाम है एंपायर तो मैं कभी-कभी उसको सुनता हूं मेरा हिस्ट्री से थोड़ा सा ऐसा लगाव है तो अभी रिसेंटली एक पोड कास्ट उसका सुन रहा था उसका टॉपिक था कि फाइनेंशियर्स ऑफ द ब्रिटिश राज उने ब्रिटिश राज जो भारत में स्थापित हुआ तो ऐसा नहीं है कि वे लोग बहुत ही धनवान थे बहुत ही बुद्धिशाली थे मिलकर के बैठ कर के इतना सारा प्लान किया और फिर प्लान करके उन्होंने स्कीम बनाई ए टू जेड स्कीम बना दी कि एक के बाद एक स्टेप से हम भारत प विजय प्राप्त करेंगे ऐसा नहीं था एक्चुअली ये जो ईस्ट इंडिया कंपनी की स्थापना हुई और वहां पर जो लोग बैठे हुए थे उन्होंने स्पष्ट कहा था यह जो ये यहां पे जो इंडिया में जो उनके वाइस रॉय या तो फिर यह लोग थे जो कि कंपनी के कर्मचारी थे वाइस रोय तो बाद में आया वो तो ब्रिटिश गवर्नमेंट ने ओवरटेक करने के बाद में आया किंतु उससे पहले ये जो उनके ऑफिसर्स थे ग्राउंड लेवल पे ऐसा स्पष्ट कहा था कि देखो कि कहीं पे भी कोंक्स नहीं करना है जमीन हमने एक बार हथिया ली तो एडमिनिस्ट्रेशन करना मुश्किल हो जाएगा हम लोगों तो यहां पर उनको लूटने के लिए गए हैं या तो फिर बिजनेस करने के लिए गए तो बिजनेस तक ही सीमित हो किंतु क्या है कि ये जो ग्राउंड लेवल प जो सब थे उनको लगा कि भारत में इतनी अराजकता है कि यहां पे बिजनेस करना संभव ही नहीं है जब तक हम कोंक्स नहीं करेंगे जब तक हम इनको जीत कर के कोई एक ऑर्डर या तो एक मैनेजमेंट स्थापित नहीं तब तक तो बिजनेस ही नहीं होगा क्योंकि ये जो मुगल एंपायर है वो डिसइंटीग्रेट हो रहा था सभी प्रांत सभी जो ये एरियाज सभी रीजंस थे इंडिपेंडेंट हो रहे थे और सिर्फ इंडिपेंडेंट ही नहीं वो एटलीस्ट मुगल एंपायर मुगल राजा जब तक स्ट्रांग था तो इन लोगों में संधि सुलह करके रखा था अभी जैसे इंडिपेंडेंट हुए साथ में ही अपने पड़ोसी का जमीन छीनने के लिए आक्रमण कर दिया माने वो पुराने पुराने झगड़े कहां-कहां से 10 जनरेशन पहले हमारा आपके साथ में यह वेर था तो यह मतलब यह रिवेंज द साइकल ऑफ रिवेंज भारत की जो अभी जो अफगानिस्तान में जो हमको दिख रहा है साइकिल ऑफ रिवेंज तो यह वही साइकल ऑफ रिवेंज भारत में भी एक समय चल रहा था तो अभी आप किसी एक पार्टिकुलर टाइप का एक मैनेजमेंट खड़ा नहीं करेंगे तब तक तो किस तरह से आपका यह बिजनेस वगैरह होगा तो इन्होंने जब ये स्टार्ट किया फर्स्ट कोंक्स वगैरह तो उनके फाइनेंशियर कौन थे फाइनेंशियर कोई ये ब्रिटिश लोग नहीं थे अपने ही इंडियन एक सेट उसको भी मुगल एंपरर बड़ा ही सता रहा था बोला कि मैं तुमको उठा कर के जेल में डाल दूंगा यह करूंगा वो करूंगा तुम्हारे फैमिली को यह करूंगा तो अभी वो बोला कि अभी इससे बचने के लिए क्या किया जाए तो ये थे ये ब्रिटिश आर्मी ये ब्रिटिश सोल्जर एकदम मने तैयार इतने डिसिप्लिन इतने ये मतलब जांबाज बहादुर युद्ध करने के लिए तो उनको फाइनेंस करना शुरू कर दिया जाओ उनके साथ में लड़ो और हमको बचाओ मैं आप जद जीत जाएंगे तो हम भी बच जाएंगे और हम आपको फाइनेंस करेंगे माने ये हमारे ही फाइनेंशियर्स इंडियन फाइनेंशियर्स ही ब्रिटिश आर्मी को फाइनेंस करते थे ये हमारे यहां के लोकल लोगों के साथ में फाइट करने के लिए तो क्या है कि यह एक सुपरस्टिशन खड़ी होती है तो सुपरस्टिशन के सामने एक रिबेलियस क्यों कहते हैं अभी चलो एक समय था जबकि यह मास मीडिया नहीं था यह सोशल मीडिया या तो फिर यह जो वाइड स्प्रेड डिसेमिनेशन ऑफ इंफॉर्मेशन उसका कोई साधन नहीं था तो आपको ट्रेडिशनल यह मॉडर्न एज की शुरुआत हो गई है तब तो आपको यह मॉडर्न मेथड्स की ओर जाना होगा अपने यहां पर वो ट्रेडीशंस जो कि गुड हैबिट्स डालने के लिए बनाई गई थी रदर देन की आध्यात्मिक ईश्वर प्राप्ति के लिए बनाई गई है उस ट्रेडिशनल के ऊपर में ले आए जिसके बेसिस पर वो ओरिजनली बनी थी यह जो आयुर्वेद के जितने भी प्रैक्टिशनर्स थे उनको पता था कि यह हेल्थ हाइजीन सैनिटेशन यह सब मेंटेन करने के लिए क्या करना चाहिए यह जो इसको नहीं स्पर्श करना है उसको नहीं स्पर्श करना है ये आज का जो ये पडेम आया यह सोशल डिस्टेंस आज ये मॉडर्न वर्ड है हमारे जो पुराने थे कि मैंने इसका एक मेंटेन करके रखना है डिस्टेंस क्योंकि यह उसका नीची जात का है ये है वो सबका एक साइंटिफिक बेसिस कभी रहा होगा कि ये पडेम वगैरह हुआ होगा फिर यह सोशल डिस्टेंस करने की जरूरत पड़ गई होगी तो अभी वो चीज जो कि साइंस के बेस पर कभी थी वो आज 2003 हज साल के बाद में ऐसी ट्विस्ट होकर के ऐसी अंधश्रद्धा में परिणत हो गई है कि यदि उसको रिकॉग्नाइज नहीं करेंगे उसके ऊपर में आघात नहीं करेंगे उसके ऊपर में प्रहार नहीं करेंगे तो क्या होगा कि हम इस ट्र फिर पूरा वितृष्णा आ जाएगा जैसे स्वामी जी का खुद का था ना स्वामी जी दक्षिणेश्वर जाकर के गीता की प्र गीता के बारे में कुछ अच्छा बोल दिए तो ठाकुर खुद कहते हैं कि मुझे लगता है कि किसी यूरोपियन पंडित ने गीता की प्रशंसा की है इसलिए नर गीता की प्रशंसा कर रहा है क्यों ऐसा क्यों क्योंकि हमने इतनी सुपरस्टिशन चारों ओर देखी है कि फिर जो अच्छी चीज है ना इंग्लिश में कहावत है टू थ्रो द बेबी अलोंग विद द बाथ वाटर अर्थात कि बच्चे को एक टब में स्नान करने के लिए सुला वो रखा है अभी वो स्नान का पानी तो फेंक देना होगा वो स्नान कराने के बाद में अभी उसको पता नहीं है कि वो बच्चा अभी भी वो टब में है तो स्नान करने का पानी फेंका तो बच्चा भी साथ-साथ में फेंक दिया अभी बच्चे को तो बचाना पानी को फेंकना है तो अज्ञान वसत बच्चे को भी पानी के साथ फेंक दिया तो हमारे यहां पर भी एक ऐसा हो गया कि कहां एक एक कोर ट्रेडिशनल एंड भारतीय दर्शन यह थी हमारी तो उसके आसपास में बहुत सारे विज्ञान पनपे थे अभी वह विज्ञान जिस तरह से धीरे-धीरे करके ट्रेडिशनल धीरे-धीरे करके यह अंधश्रद्धा में परिणत हुई तब कहीं जाकर के इसके सामने ने एक ऐसा रिबेलियस करके ऐसे लोग जैसे स्वामी जी जैसे कि वह कॉलेज में पढ़ते थे उन लोगों ने मॉडर्न आजकल जो यूरोपियन लर्निंग है यूरोपियन फिलोसोफी है यूरोपियन साइंस है उसको समझने का प्रयास किया तो इनके मन में धीरे-धीरे एक डाउट खड़ा हुआ कि यदि यह 14 बार हाथ मिट्टी में नहीं रगड़ तो इतना बड़ा पाप होगा ऐसा यूरोप का तो कोई साइंस कहता नहीं है आप इस तरह से यह नहीं करें तो यह होगा ऐसा तो कोई यूरोपियन पंडित क साइंटिस्ट कहता नहीं है यह फिजिक्स केमिस्ट्री बायोलॉजी यह मैथमेटिक्स ये इंजीनियरिंग ये इंडस्ट्रियल इजेशन ये आजकल की जो डेवलपमेंट है तो वो कहते हैं ना कि सही क्या गलत क्या यह भी तो एक प्रश्न हो सकता है कि अ इंडियन सुपरस्टिशन सही है ना कि यूरोपियन साइंस सही है यह भी तो एक प्रश्न हो सकता है तो वो इंग्लिश में एक दूसरी कहावत है कि प्रूफ ऑफ पुडिंग इज इन इटिंग अर्थात कि कि वो आप पुडिंग अर्थात कि एक खास तरह की एक स्वीट तो वो स्वीट का प्रूफ क्या है कि स्वीट सही में अच्छी है तो उसको देख कर के उसके बारे में बात सुन कर के वो रसोई आ कर के बोलेगा अपनी मां ने कुछ खीर वगैरह बनाई है व शिरा वगैरह कुछ बनाया है तो मां बोलेगी अरे खाओ खाओ बहुत अच्छा है बहुत टेस्टी है तो हम ज हमको पता कैसे चलेगा कि एक्चुअली ये टेस्टी है कि नहीं जब उसको उठा कर के खाएंगे तब पता चलेगा कि हां सही में बहुत अच्छा हुआ है तो अभी यह ये अपनी इंडियन ट्रेडिशनल मॉडर्न साइंस सही तो प्रूफ ऑफ पुडिंग इज इन इटिंग यूरोप के मुट्ठी भर लोगों ने आकर के इतने हजारों सालों पुरानी परंपरा वाले यह करोड़ों करोड़ों जनसंख्या वाले भारत पर इतना सहज आक्रमण करके विजय प्राप्त करके हम पर राज कर रहा है अभी इससे बड़ा प्रूफ तो क्या चाहिए कि उनका लर्निंग उनका गन पाउडर उनकी ये गन बोट्स उनका ये इंजीनियरिंग उनकी कि ये वॉर टेक्नोलॉजी ये हमारे से सुपीरियर है इसका और ज्यादा प्रूफ क्या चाहिए उनकी क्रिश्चियनिटी ये क्रिश्चियन कॉलेज ना कि कोई भी मॉडर्न कॉलेज में उस समय जाएंगे वो क्रिश्चियन टीचर लोग बार-बार कहेंगे कि तुम लोग हिंदुओं की परंपरा तुम्हारे पूर्वज तुम्हारे ऋषि मुनि सब किसी काम के नहीं थे देखो उसी ष उन्हीं ऋषि मुनि को फॉलो करके तुम लोग आज गुलाम हो और हम जीसस को फॉलो करके दुनिया पे वो कहते हैं ना कि सन नेवर सेट्स ऑन द ब्रिटिश एंपायर क्यों ब्रिटिश एंपायर के ऊपर में सूर्य सूर्यास्त कभी नहीं होता क्यों कि हांगकांग और भारत से लेकर के ब्रिटेन और अमेरिका तक पूरी पृथ्वी की चारों ओर एन सर्कल करके ब्रिटिश एंपायर वो है तो अभी यदि ब्रिटेन में सूर्यास्त हो रहा है तो यहां हांगकांग है ना कि भारत में सूर्योदय हो रहा है भारत में सूर्यास्त होगा तो कहीं अमेरिका में सूर्योदय हो रहा है माने ब्रिटिश एंपायर की कहीं ना कहीं तो सूर्य सूरज वो जल ही रहा है तो सूरज प्रकाशित हो ही रहा है तो अभी देखिए कि हम लोग जीसस को फॉलो करके वर्ल्ड वाइड एंपायर बना दिए और तुम अपने ऋषि मुनियों को फॉलो करके हमारे जूते चाटने वाले गुलाम बन कर के रह गए हो तो अभी यह सुनकर के पूरी एक जनरेशन थी ये माइकल मधुसूदन ठाकुर को मिलने के लिए आया था तो ठाकुर ने पूछा कि अरे तुमने अपना धर्म छोड़ कर के दूसरे धर्म को क्यों स्वीकार कर लिया हम लोग धर्मांतरण में कभी नहीं मानते हम लोग ऐसा कभी नहीं स्वामी जी ने कहा है अ क्रिश्चन इज नेवर टू बिकम ए हिंदू और हिंदू इ टू बिकम अ मोहम्मडन अ क्रिश्चियन जज टू बिकम अ बेटर क्रिश्चियन अ हिंदू हैज टू बिकम अ बेटर हिंदू इट इज धर्मांतरण करने का कोई बात ही नहीं है तो ठाकुर ऐसा किसी को नहीं कहते थे कि भाई तुम क्रिश्चियन हो तो हिंदू हो जाओ किंतु एटलीस्ट जो हिंदू क्रिश्चियन हुआ है तो उसको तो ठाकुर ने कहा कि भाई तुम धर्मांतरण क्यों किया अपना सनातन धर्म क्यों छोड़ दिया तो माइकल मधुसूदन इतना बड़ा वो पोएट इवन स्वामी जी को ये इंद्रजीत वध बोलकर के उसकी जो कविता है वो इतनी प्रिय थी बार-बार उस वो पूरी आधि मुख थी पूरी मुख थी उसमें से बीच-बीच में से वो स्टंस वो सब मुख स्त बोला करते थे उसको कोट किया करते थे उसको रेफर किया करते थे तो वही जब माइकल मधुसूदन ने कहा कि क्या करें पेट उसने क्या कहा क्या पता है पेट के ऊपर में हाथ रख के कहा महाशय पेट के लिए यह सब करना पड़ता है तो जैसे ही यह बात कहा ठाकुर बड़े ही नेम ये हो गए नाराज हो गए तो बोले कि ये किस तरह की छिछली मानसिकता है तुम्हारी कि पेट के लिए तुम अपना सनातन धर्म छोड़ दोगे तो यह था कि हम क्योंकि ये क्योंकि ये पूरी जनरेशन ही थी माइकल मधुसूदन जैसे कि पूरी जनरेशन की भारतीय ऋषि मुनियों के ऊपर में भारतीय सनातन परंपरा के ऊपर में इनको डाउट होने लगा कि इस तरह की अंधश्रद्धा है कि प अभी जैसे मां की मां के ही बारे में मां का जीवन देखिए कि विधवा का विधवा का जीवन कितना कठिन कितना मुश्किल जीवन ये मां ठाकुर की देहा महासमाधि के बाद में यह मां की तो क्या अवस्था होई थी कमार पुकुर के शु शुरू शुरू के दिन थे ये गहने पहने थे माने वो जो हाथ में चूड़ियां पहनी थी बाल रखे थे वो लाल कोर्नर वाली वो साड़ी पहना करती थी इस तरह से जब वो कमार पुकुर में गई तो वहां का गांव की जो अंधश्रद्धा विधवा को किस तरह से उनको कठोर उनको कष्ट में रहना चाहिए इस तरह की एक जो मानसिकता मां के ऊपर में सतत निंदा निंदा चलती रहती है चलती रहती है मां बेचारी क्या करेगी फिर वो लाहा बाबू वहां के जमींदार थे उनकी वो जो लड़की थी वो प्रसन्न मई वो ठाकुर का ठाकुर जब छोटे थे तो ठाकुर के साथ खेला करती थी तो वह अभी थोड़ी बड़ी हुई थी तो उसको उसका बड़ा सम्मान था एक तो जमींदार की घर की वह लड़की है और फिर वो धर्म और आध्यात्मिक उनका जीवन था तो लोग उनके ऊपर में श्रद्धा भक्ति रखते थे उसने जब कहा कि अरे नहीं यह शारदा तो माने गदाई और गदाई और बहु ये तो देव के अंश से जन्मे हुए हैं इस तरह से जब कहा तब कहीं जाकर के मां का उन लोगों ने वो मां की निंदा करना कम किया और मां भी बार-बार अपने वो हाथों में से चूड़िया निकालने का प्रयास करती है जितनी भी बार ऐसा होता है या तो ठाकुर दर्शन देते हैं या तो फिर गौर दसी को ठाकुर ने भेजा था वो जाकर के यह तंत्र उसके उसमें ये ऐसी बात है कि नित्य कृष्ण जो कृष्ण होते हैं नित्य होते हैं जन्म मृत्यु जरा व्याधि नहीं होता तो उनकी यह सहधर्मिणी होने के नाते मां सदा सध वा है मां कभी विधवा नहीं हो सकती ऐसा करके समझाया तो फिर कहीं मां का हृदय ठंडा हुआ किंतु यह रामलाल वगैरह ये कालीवाड़ा करु को जो पेंशन ठाकुर को जो पेंशन मिलता था रप तो मां को देने की बात हुई तो रामलाल जाक के क्या बोलता है कालीवाड़ा जी को कि अभी वह मां तो विधवा है उसका तो लड़का भी नहीं है और यह भक्त लोग तो बहुत सारे मां की सेवा करते हैं तो मां को रुपया देने की जरूरत नहीं पाच रप बंद कर दीजिए ऐसा बोल कर के मां का पा बंद करवा दिया बाद में मां को जो कष्ट हुआ है मां उस समय वृंदावन में थी तो मां ने कहा कि अरे इस तरह का सोने का आदमी ही चला गया और अभी पैसा लेकर मैं क्या करूंगी रखो अपने रुपए अपने पास किंतु यहां पे देखिए कि मानसिकता है कि विधवा को कष्ट करके रहना है उसको थोड़ा मैंने अपने देखा है मैंने मेरे फैमिली में ही देखा है कि किसी का मैरिज हो रहा है और मैरिज होने के बाद में वो हस्बैंड एंड वाइफ कहीं पर ट्रेवल कर र है और एक साथ में एक विधवा कोई हमारी रिलेटिव थी तो अभी साथ में अभी एक ही जगह जा रहे है एक ही डेस्टिनेशन प जाएंगे तो साथ में जाएंगे तो तो विधवा जो हमारे रिलेटिव थी वो बोलती है कि अरे नहीं वे लोग तो मैरेज करके जा रहे हैं तो मैं उनके साथ नहीं जाऊंगी फ उनको बुरा लगेगा अभी वे लोग मुंह से तो बोलेंगे नहीं कि मैरेज के बाद में विधवा के साथ सफर कर रहे हैं ये तो ठीक नहीं तो मुंह से तो बोलेंगे नहीं कि तुम मन में मन में रखेंगे तो उनको तो समझ में आता है कोई मन में भी बोलता है तो हमको सुनाई देता है इतना तो साइकोलॉजी सबका है तो ये सुनक के तो कष्ट होगा तो तो देखिए कि यह अब एक पूरी समाज व्यवस्था इतनी अंधश्रद्धा में डूब गई थी कि तो प्रश्न तो होना ही है कि यह समाज जो कि हमको इस गड्ढे में लाकर डाला है आज जो भी आएगा विदेश से हमको लात मारेगा और चुपचाप सहन कर लेंगे तो यह हमारा धर्म यह हमारी सनातन परंपरा यह हमारे ऋषि मुनियों की यह शिक्षा यह सही है कि सब कुछ मिथ्या है सब कुछ मिट्टी में मिल गया ऐसा प्रश्न तो हो ही सकता है तो एक्चुअली सॉल्यूशन क्या है कि श्रुति और स्मृति ये डिवीजन करना श्रुति इज द कोर टीचिंग ऑफ अवर शास्त्रास एंड स्मृति इज अ सोर्ट श्रुति है अपने शास्त्र का मुख्य आधार स्तंभ जैसे उपनिषद है जैसे कि ब्रह्मसूत्र है जैसे कि गीता है कि आध्यात्मिक जीवन को किस तरह से लीड किया जाए ईश्वर प्राप्ति आत्म दर्शन किस तरह से किया जाए उसके लिए शिक्षा जो है वो श्रुति में है और स्मृति में क्या है स्मृति में देश काल पात्र अनुसार यह आज मैं यहां पर हूं तो मुझे अपनी हेल्थ मेंटेन करने के लिए क्या करना होगा कल ही मेरी किसी के साथ बात हो रही थी तो उन्होंने कहा कि मुझे बार-बार एसिडिटी हो जाती है एसिडिटी का बड़ा ही सीवियर प्रॉब्लम है तो व बार-बार तो व टेबलेट मेडिसिन खाना फिर उसका भी तो एक रिएक्शन आता है ना तो किसी ने बताया कि यह वनीला आइसक्रीम है वो खाओ तो एसिडिटी से बेनिफिट मने वो इमीडिएट वो राहत मिल जाएगी रिलीफ मिल जाएगी तो वह कहते हैं कि मैं अपने पास में य आइसक्रीम वगैरह रखता हूं अभी क्या करें खर्चा किंतु वनीला ज्यादा महंगा नहीं होता ₹ में मिल जाता है छोटा सा उसका ये डब्बी तो वो मैं उसको अपने साथ में रखता हूं तो रख कर के अभी क्या है देखिए कि आप जद इस बात को ऐसा कोई ट्रेडीशन बना देंगे कि मुझे साथ में य आइसक्रीम रखना ही है मुझे यहां पर यह करना ही है तो यह तो एक देश काल पात्र के लिए एक व्यवस्था की गई है कि तुमको ऐसा करो तो तुमको यह बेनिफिट होगा अभी इस बात को कहीं ट्रेडिशनल बना दिया सबको तो ये समझा नहीं सकते कि एसिडिटी होने से आइसक्रीम खाओ एक विधान बना दिया कि आइसक्रीम खाना चाहिए इतने इतने समय पे वो मिर्चा खाने के बाद में क्यों खाना चाहिए वो कोई बताने की जरूरत नहीं किंतु ऐसा करना चाहिए ऐसा करके एक ट्रेडीशन खड़ा कर दिया बाद में सुपरस्टिशन इसके ऊपर खड़ी हो गई कि यदि मिर्च खा कर के आइसक्रीम नहीं खाओगे तो रसातल में जाओगे सत्यानाश होगा 14 पुरुष तुम्हारा आ तुम्हारी 14 पढ़िया जनरेशन सत्यानाश हो जाएगा तो हम लोग डर के मारे चिली व मिर्च खाने के बाद में आइसक्रीम खाएंगे फिर एक ऐसा आदमी खड़ा होगा कि अरे भाई ये क्या सब बदमाशी इन्होंने लगा करके रखी है क्या उल्टा पुल्टा सीखा रहे नहीं खाऊंगा क्या कर लोगे और सही में कुछ नहीं होगा मैं क्रिश्चियन हो जाऊंगा मुस्लिम हो जाऊंगा बौद्ध हो जाऊंगा क्या कर लोगे तो यह जब रेबेल खड़ा होता है तब अपनी पूरी ट्रेडीशन के ऊपर में क्वेश्चन हो जाता है सो स्वामी जी कहते हैं कि श्रुति और स्मृति श्रुति है कि हमारे धर्म हमारी आध्यात्मिकता अपनी भारतीय धार्मिक आध्यात्मिक साधन परंपरा इसका जो आधार है वह श्रुति में है बाकी सबको स्मृति में डाल दो देश काल पात्र अनुसार जो विधान हुए हैं उस देश काल और पात्र के साथ में समाप्त हो गए व समय भी समाप्त हो गया वह पात्र भी चले गए वो सब चेंज हो गया अभी आज के समय के अनुसार नए विधान नया विज्ञान तो ये है स्वामी जी की शिक्षा स्वामी जी ये जो देखिए कि किस तरह से अपनी भारतीय परंपरा को उन्होंने बचाया है तो ये स्वामी जी को जैसे पढ़ते हैं तो कभी-कभी वो जब क्रोध आ जाता है ना तब यह सब बातें उनके मुंह से निकल जाती है वो सिखाते हैं हमको सब कुछ सीखना है किंतु क्रोध से कभी-कभी दर्द से यह सब माने चाबुक मारते हैं इस तरह की बातें करते हैं आगे पढ़ते हैं थोड़ा ए सकल दुरु हो प्रश्ने वैज्ञानिक व्याख्या करेन आज 2000 बछर दरे है यह जो सब कठिन प्रश्न है दर हो अर्थात कि जिसका उत्तर मिलना मुश्किल है इस तरह के प्रश्नों की वैज्ञानिक व्याख्या 2000 साल से यह लोग बैठ के कर रहे हैं वैज्ञानिक अर्थात कि वह साइंटिफिक नहीं उल्टी साइंटिफिक कि 14 बार मिट्टी में हाथ नहीं रगड़ तो कितने तुम्हारे जनरेशन का सत्यानाश होगा इस तरह का उल्टा विज्ञान तो ए द के न फोथ ऑफ द पीपल आर स्टार इंग्लिश में लिखते हैं यहां पर एक 144 यानी कि 25 पर जो पॉपुलेशन है उसको तो खाना भी नहीं नसीब मिलता आठ बछर मेर संगे 30 बछर पुरुष बे दिए मेर मां बाप अलादे आठ खाना 8 साल की बच्ची का 30 साल के पुरुष के साथ में विवाह करवा करके मां और पिताजी अलाद से आनंद से बड़े खुश हो जाते हैं प्र फलित हो जाते हैं कि हां मैंने अपने धर्म का पालन किया आठ बचर मेर संगे 30 बर पुरुष बद मा मेर मां बाप अलाद आना अबार ओ का माना करले बोलेन आदर धर्म जाए और जद यह कहेंगे कि अरे इस तरह से मत करो तो क्या कहेंगे कि हमारा धर्म जाएगा आठ बशर मेर गर्भाधान जारा वैज्ञानिक व्याख्या कर तार कौन देशी धर्म जो आ साल की बच्ची का गर्भाधान होने से क्या साइंटिफिक बेनिफिट है इस तरह की जो लोग व्याख्या करते हैं उन लोगों का किस तरह का किस दिशा का धर्म है रे भाई आबार अनेके ई प्रथा जन्नो मुसलमान देर घड़े दोस्ते फिर कोई कोई लोग होते हैं वह कहते हैं कि बाल्य विवाह कुप्रथा के लिए मुसलमान लोगों का आक्रमण जवाबदार था मुसलमान देर दोष बटे स्वामी जी कहते हैं हां उनका दोष है क्या सही में बताओ सब गृह सूत्र पड़े देखो देखी जितने गृही सूत्र है खोल कर के पढ़ के देखो हस्ता योनि न गृह जतोग ततो दिन कन्या एर पर्वता बे दते होवे जब एक पार्टिकुलर टेस्ट है वह टेस्ट जब तक नहीं होता अर्थात कि आठन साल की नहीं होती टेस्ट में पास तब तक ही वह कन्या है आठन साल की हो गई टेस्ट में पास हो गई तो उसका विवाह देना ही देना है समस्त गृह सूत्रे ई आदेश जितने भी गृह सूत्र है उसका यही आदेश है अभी मुझे पता नहीं ग्रहीय सूत्र क्या है मुझे पता नहीं टेस्ट क्या है स्वामी जी बोलते हैं तो हम मान लेते हैं वैदिक अश्वमेघ यज्ञ व्यापार स्मरण करो वैदिक अश्वमेघ यज्ञ के बात को याद करो तद अनंतरम मही शिम अश्व सन्निधि ने कहा है आर होता पोता ब्रह्मा उगाता प्रवृति रा बेडो माता होए कलकारी करतो होता पोता ब्रह्मा उदगता यह सब क्या है जब आप हवन करते हैं होम करते हैं तो यह सब एक आपके रहते हैं जो विधि करने वालों का पोजीशन रहता है एक रोल रहता है यह होता यह करेगा पता यह करेगा उदगता यह मने उस समय चैटिंग करेगा वह सब रोल रहते हैं तो स्वामी जी क्या कहते हैं वो सब उस समय करने के समय में यह लोग बेडो माता होए कलकारी करतो शराब वगैरह पी कर के क्या सब करते थे बाबा जानकी बोने गय लेन राम एका अश्वम कोरलेन सुने हा छेड़े बाच लाम बाबा मैंने राम भगवान ने जब अश्वमेघ यज्ञ किया था तब माता जानकी वन में थी यह सुनक के मैं एकदम चैन की सांस ली कि हां मां जानकी वहां पर नहीं थी वरना पता नहीं कि उनके साथ में क्या यह लोग करते एक कथा समस्त ब्राह्मणी या छ समस्त टीका का स्वीकार को ना कर बार जोटी की यह बातें सब ब्राह्मण में है ब्राह्मण ग्रंथ में सभी जितने भी टीका का है यह बात स्वीकार करते हैं ना अस्वीकार करने का बात ही कहां पर आता है एक शकल कोथा बोलबार माने ई यह सब बात करने का अर्थ यही है प्राचीन काले ढेर भलो जिनीस छलो खराब जिनीस छीलो भूतकाल में प्राचीन काल में बहुत अच्छी बातें थी हमारे सनातन धर्म में किंतु कुछ कुछ बुरी बातें भी तो थी भालो गुली रखते होबे किंतु आचे ज भारत फ्यूचर इंडिया एंसेट इंडिया अपेक्षा अनेक बड़ो होवे यह अच्छी-अच्छी बातें रखनी है किंतु याद रखो कि यह जो फ्यूचर इंडिया जो आ रहा है वह हमारे पुरातन इंडिया से बहुत बड़ा होगा कहीं उससे उससे भी कहीं उन्नत उससे भी कहीं यह प्रकाशमान होगा जय दि राम कृष्ण जन्मे छन से दिन थके मॉडर्न इंडिया सत जुगर आविर्भाव जिस दिन से श्री राम कृष्ण देव का जन्म हुआ है उसी दिन मॉडर्न इंडिया सत्य युग का आविर्भाव हो चुका है आर तुमरा ए सत जुगर उद्बोधन करो और तुम इस सत्य युग का आवाहन करो उसका उद्बोधन करो ही विश्वासे कार्य क्षेत्रे अवती हो और इस विश्वास ले करके कार्यक्षेत्र में अवती हो अर्थात कि कार्यक्षेत्र में पदार्पण करो कार्यक्षेत्र में शुभारंभ करो तो आज यही तक कल फिर से मिलते हैं ओम शांति शांति शांति हरि ओम तत्सत श्री राम कृष्णा अर्पण
Questions & Answers
मस्तु देखिए जद ट्रेडिशनल करर के पडेम हुआ या तो फिर वो पार्टिकुलर नॉलेज हमारे पास नहीं था बोलकर के हम इस पार्टिकुलर क्राइसिस में फंस गए तो एक्चुअली देखिए मेरा पर्सनल क्या मानना है पता है कि बेटर टू फेस द चैलेंज एंड बेटर टू ओवरकम इट रदर देन लिविंग इन सुपर स्टेशन मैंने चैलेंज देखिए आज तो जब पडेम हुआ था हम लोगों को सफर करना पड़ा बट उस सफरिंग से बाहर आकर के टुडे इंडिया इज इवन स्ट्रांग इंडिया इज इवन ग्रेटर आज ही मैं वो ब्लूमबर्ग में पढ़ रहा था कि सरप्राइजिंगली इंडिया का यह जो जीडीपी डाटा है जीडीपी ग्रोथ डाटा है मैंने सरप्राइजिंग कि इवन जो आरबीआई ने जो प्रेडिक्शन किया था 7 पर उससे भी कहीं आगे निकल कर के 8 पर ना कि ऐसा कुछ हो रहा है तो क्या है कि वी हैव कम आउट स्ट्रांग ऑलवेज बेटर टू फेस द चैलेंज एंड वर्क आउट द सोल्यूशन रदर देन ब्लाइंड बिलीविंग समथिंग यह एक मेरा मानना है और दूसरा कि जैसे आपने कहा कि कई बार साइंटिफिक बेसिस नहीं होता हमारी ट्रेडिशनल करके जैसे मैं एक उदाहरण देता हूं बेलूर मठ में क्या है कि बेलूर मठ में आप जब साइड टेंपल पर प्रणाम करेंगे जो लोग बेलूर मठ में गए होंगे उनको पता है कि गंगा के किनारे सभी समाधि मंदिर है तो तो पहले राजा महाराज का समाधि मंदिर उसके बाद में मां शारदा देवी का उसके बाद में स्वामी जी का तो हम लोगों की एक ट्रेडिशनल साइड टेंपल पर प्रणाम करते हैं तो राजा महाराज के मंदिर की परिक्रमा करते हैं तो वहां पर पीछे खड़े रहकर दक्षिणेश्वर को उद्देश करके प्रणाम करते हैं और फिर यहां पर काशीपुर को उद्देश करके जहां काशीपुर म स्मशान जहां पर ठाकुर की अग्नि दह उनके पार्थिव शरीर का अग्नि दह हुआ था वो जगह तो अभी वही राजा महाराज के मंदिर के परिक्रमा करके वहां पर पीछे में खड़े रहकर ही उनको प्रणाम करते हैं नहीं कि रास्ते में और कहीं पर खड़े रह के या तो फिर मां के मंदिर में या तो स्वामी जी के मंदिर में वही एक ट्रेडिशनल है य भी इसका कोई साइंटिफिक बेसिस नहीं है मैंने किसी को पूछा था तो किसी ने मुझे कहा था कि महापुरुष महाराज यहां पर खड़े रह कर के प्रणाम करते थे इसलिए हमने य ट्रेडीशन मेंटेन की है अभी यह बात भी सही है कि नहीं किसको पता अभी इसका कोई साइंस नहीं है किंतु मैं खुद आई पर्सनली मैं इ सब ट्रेडिशनल हूं कि फिर मैं उसी जगह पर खड़े रहकर वही मैं प्रणाम करूंगा जो पहले दिन में बेलर मट गया था इस टेंपल में पहले प्रणाम करना है इस टेंपल में बाद में प्रणाम करना है वह मुझे सिखाया गया था मैं अभी तक मैं ज मेरा बलर मठ में पोस्टिंग था तो पूरा फ्रीडम है मुझे व ट्रेनिंग सेंटर में तो नहीं हूं कि मैं क्या कहां पर प्रणाम करता हूं नहीं करता कोई देखने को आएगा किंतु मैं एकदम पक्का उस रूटीन को फॉलो करता था क्योंकि क्या है यह सब े डिशन अपनी साइकोलॉजी के साथ में जुड़ी हुई है ट्रेडीशन को फॉलो करके ना हमको एक भीतर से करेज मिलता है एक स्ट्रेंथ मिलती है एक साइकोलॉजिकल एक मिलता है बूस्ट अप मिलता है इसके लिए हम यह सब करते हैं सो आपने जैसे कहा ठीक ही है कि सम ऑफ द ट्रेडिशनल टू गिव अ साइकोलॉजिकल बूस्ट रदर देन हैविंग एनी बेसस इन साइंस ये तो बात सही है सेंस ऑफ आटी एक फ्रेंच एक बहुत ही अच्छा वर्ड है एस्प्र कोर अर्थात की कोर टले वो जो यह होता है ना आर्मी तो एपिड अर्थात कीय जो आर्मी का स्पिरिट अ आप युद्ध कर रहे हैं तो सामने से इतना भयानक अटैक हो रहा है तो उस समय आपका जो मित्र है कली सोल्जर वो जद डर के भाग जाएगा तो आप तो मर जाएंगे ना तो फिर ये एक स्पिरिट खड़ा करना होता है कि साहिद में साथ में फाइट करने का साथ में रहने का तभी तो आप शत्रु का मुकाबला कर पाएंगे सो दिस इ एपिकर रिचुअल सक्सेस कब होंगे पता है जैसे आपने राजा महाराज का उदाहरण दिया अभी राजा महाराज को जब का साइंटिफिक बेसिस पता है उन्होंने अनुभव करके सिद्ध किया है तब कहीं जाकर के हमको कह रहे हैं कि जब की शक्ति में विश्वास हो ना हो जप करते जाओ अभी जो गुरु खुद अज्ञानी है उसने खुद ने कहीं पर ऐसा सुन लिया है खुद ने प्रैक्टिस नहीं किया खुद को साइंस नहीं पता वो जब इस ट्रेडिशनल करेगा ना तो खुद भी अभी क्या है कि वो शिष्य तो देख रहा है कि गुरु का खुद का कुछ अंडरस्टैंडिंग या तो ऐसा कुछ उपलब्धि नहीं है और वह जो कह रहा है तो फिर तो तब क्या होगा कि शिष्य को अविश्वास तब होगा यानी रिचुअल्स फॉलो जदी तभी होना चाहिए माने सक्सेसफुली फॉलो तभी हो सकते हैं कि जो टीचर है ना टीचर इज इनलाइटें यदि टीचर इनलाइटें नहीं है टीचर अपने से ब्लाइंड बिलीव करके चल रहा है उपलब्धि नहीं करता तो वोह जो ट्रेडीशन को प्रोपेगेटर ना वो सुपरस्टिशन में परिणत होने का पूरा संभावना है फिर वो गुरु क्या करेगा अपना प्राधान्य बनाने के लिए लिए शिष्य को बोलेगा कि तुमको 100 1000 आ जप करना ही है तुम नहीं करोगे तो तुम्हारा यह सत्यानाश होगा फिर अभी शिष्य से तो 1008 तो होने वाला नहीं दूसरे दिन गुरु के पास आएगा गुरु यह हो गया गलती हो गई क्या करें तो बोलेंगे अच्छा मुझे ये हज रप दे दो 1 आ रप दे दो मैं ये विधि करके तुमको मुक्त कर देता हूं यानी फिर ये ये विशय साइकल फिर से शुरू होगा तो जब इनलाइटें गुरु जद ट्रेडीशन को प्रोपेगेटर तक करते हैं तब तक ठीक है यह व्यास मुनि वशिष्ठ देव यह शंकराचार्य खुद उपलब्धि वान महापुरुष थे उन्होंने जो बात बताई वह हम ब्लाइंड फॉलो करें तो ठीक है अभी जब ब्लाइंड अंधे नहीं व नियमना यथा अंधा जैसे अपने शास्त्र में कहा अंधा जद अंधे को लीड करता है तो दोनों गड्ढे में गिरेंगे सो दैट इज वन डेंजर विद ट फनी इंसिडेंट माने इसी बात के ऊपर में यह जो सेल्फ हेल्प की किताब का प्रचलन स्टार्ट हुआ था और और जो सेल्फ हेल्प की किताबों का डेडी जो है वो है हाउ टू विन फ्रेंड्स एंड इन्फ्लुएंस पीपल डेल कार्नेगी ने लिखा था माने जितनी भी सेल्फ हेल्प किताबें इसी किताब की सक्सेस के बाद में इसकी ब्लूप्रिंट लेकर के बनाई गई है मैंने फनी स्टोरी क्या है यह जो डेल कार्नेगी इसका ऑथर उसने सुसाइड किया [हंसी] था ओ अच्छा अच्छा अच्छा अच्छा फेक फेक प्रशंसा करो फेक कंप्लीमेंट दो ही कमिटेड सुसाइड माने ये जो महाराज ने कहा ठीक ही कहा कि ये सेल्फ हेल्प वाले क्या है देखिए वो अभी मक हु सोल्ड फेरारी यह सब किताबें पढ़ कर के एक किताब थी ना कि आर्ट ऑफ मोटर जन एंड द आर्ट ऑफ मोटरसाइकिल मेंटेनेंस मैंने बड़ी फेमस किताब है तो मैंने पढ़ी थी ए मैं काफी इंप्रेस भी हुआ था किंतु यह सब का क्या है पता है कि इन लोगों की अल्टीमेटली दृष्टि तो सक्सेस अभी जैसे ये इट प्रे एंड लव ये सब किताबों में अब चलेंगे आध्यात्मिक बातें तो सिखा रहे है किंतु व्हाट इज द मेजरमेंट ऑफ सक्सेस कि आखिर में मुझे बहुत अच्छा एक स्पाउस मिल गया अ ये जो इट प्रे लव की जो ऑथर है उसने कहा कि ये पूरे इंडिया इंडोनेशिया इटली वगैरह भ्रमण करके आध्यात्मिक उपलब्धि भी उसको मिली और वहां से उसको बड़ा अच्छा हस्बैंड भी मिल गया सो दिस इज देर क्राइटेरिया ऑफ सक्सेस अल्टीमेटली तो उसको की मटेरियल प्राप्ति होनी है यदि वो नहीं हुई तो जो स्पिरिचुअल जर्नी वो र सो दिस अल्टीमेटली मैंने जितनी भी ऐसी किताबें पढ़ी है मैंने सेल्फ डिस्कवरी ये लोग अपने को बोलते हैं सेल्फ डिस्कवरी की किताब तो मुझे एक समय था य जनरे जिसको कहते हैं य ब्रांच ऑफ बुक्स बड़ा अच्छा लगता था सेल्फ डिस्कवरी पढ़ते हैं कि वहां पर गए अभी जैसे कुछ दिनों पहले ही मैं किताब पढ़ रहा था हैट है तो छुट्टी नहीं है कि वो एक हॉलीवुड की एक एक्ट्रेस थी उ पीएचडी भी किया था उसने माने काफी इंटेलिजेंट तो कहीं वो वहां पर परमार्थ निकेतन गई और वहां से व जा रही है सडन उसको कहीं से आवाज सुनाई दी कि अभी यहीं पर रह जाओ यहीं पर रुक जाओ तो वो सोचती है पीएचडी किया है फिर वो हॉलीवुड से आई है थोड़ी ना ये सब चीजों में विश्वास होगा तो जितनी भी और वहां से जाती है उसको आवाज सुनाई देती है कि यहां पर रुक जाओ तो फिर वो रुक गई फिर वहां पर साधवी भी हो गई मने व्हाट एवर हर लाइफ माइट बी गुड मैं ऐसा कुछ नहीं कहना है किंतु ये सभी चीजों के पीछे अल्टीमेटली देखिए कि मटेरियल सक्सेस तो होना ही है अदर वाइज आपका ये बीटल्स वगैरह यहां पर आए थे तो वहां पर आकर के वो महारे के पास में जाकर के वो सॉन्ग लिख दिया तो दैट इज देर सक्सेस कि महारे के आश्रम में गए तो क्या किया वहां पर हिट सॉन्ग लिखा ट इज अभी देखिए यहां पर मिसकनसेप्शन भी नहीं होना चाहिए जैसे अपने हिंदू धर्म में ही चार पुरुषार्थ है धर्म अर्थ काम मोक्ष तो मोक्ष मार्ग है और धर्म अर्थ काम का एक मार्ग है काम और अर्थ की प्राप्ति हो किंतु धर्म के आधार पर हो तो उस बात से हमको मना नहीं करना है किंतु अल्टीमेट जो लोग धर्म अर्थ काम के मार्ग पर भी च चलते हैं उनका कांसेप्ट क्लियर है कि मोक्ष मार्ग सर्वोच्च मार्ग है मैं एक सेकंड लेवल का मार्ग अपना करके मैं चल रहा हूं उनका है कि मटेरियल प्राप्ति सर्वोच्च है फर उसके लिए स्पिरिचुअलिटी सहाय भूत है हियर इज द प्रॉब्लम अदर वाइज अर्थ और काम को हमने भी तो नकारा नहीं है इस तरह से नकारने के तो फिर क्या है कि ह्यूमन साइकोलॉजी को डिनायर जैसा हो गया फिर ऐसी इंप्रैक्टिकल बातों को कोई फॉलो नहीं करेगा यह वेदांत या योग ट्रेडिशनल कौन फॉलो करते थे जो कि मुट्ठी भर लोग करेंगे जो कि मोक्ष मार्ग के अधिकारी है वे लोग करेंगे फिर वे लोग आपको उपदेश देंगे कि हां आपके अर्थ और काम के बेस पर जो जीवन है उसमें यह धर्म का अनुष्ठान करो ये ट्रेडीशन फॉलो करो और ये ट्रेडिशनल संस्कार ये मृत्यु संस्कार ये जितने भी संस्कार थे वो संस्कार एक ऐसी ट्रेडिशनल ही चाहे अर्थ और काम को भी आप फॉलो कर रहे हो बट यू डू इट इन सच ए वे कि इस जन्म में नहीं तो अगले जन्म में आपको इस रास्ते पे मोक्ष मार्ग पे आप आगे बढ़ेंगे ये जो मुट्ठी भर कुछ लोग होते हैं मोक्ष मार्ग के अधिकारी उसमें आपका नाम इस जन्म में नहीं तो अगले जन्म में अगले जन्म में नहीं तो उसके बाद में कभी ना कभी तो आना है इसके लिए ये धर्म की रचना की गई अभी हम धर्म को ऐसा मान लेंगे कि धर्म ही सर्वोच्च है धर्म के ऊपर में मोक्ष मार्ग नहीं है देन अवर प्रॉब्लम विल स्टार्ट