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ओम स्काय च धर्मस्य सर्व धर्म स्वरूपने अवतार षय राम कृष्णाय नम तो वह जो हमारा स्लाइड शो बाकी था इसको हम फिर से स्टार्ट करते हैं मैं स्क्रीन शेयर करता हूं कॉस्मो माइक्रो कजम प्रवचन उसमें से यह स्लाइड शो बनाया है मैक्रो कजम अर्थात की कॉस्मिक लेवल पे जो स्वामी जी का जो था कि हाउ टू हाउ द डिवी निटी इज एक्सप्रेस्ड ऑन द कॉस्मिक लेवल वैश्विक लेवल पे ब्रह्मांड के लेवल पे यह दिव्यता किस तरह से फलीभूत होती है तो वह स्वामी जी ने मैक्रो कजम लेक्चर में बताया और मनुष्य के शरीर में हमारे हृदय में दिव्यता किस तरह से परिस्प्रिं में देख ली थी किंतु यह माइक्रो कजम है इसमें जो आर्गुमेंट स्वामी जी ने किया है बहुत ही डेंस आर्गुमेंट है बहुत ही क्लोजल वोवन आर्गुमेंट है इसलिए यह स्लाइड शो को हमको दो पार्ट में विभाजित करना पड़ा एक्चुअली स्लाइड शो इ इट सेल्फ इज डिवाइडेड इन फाइव पार्ट्स स्लाइड शो पांच पार्ट में विभाजित है उसके पहले दो पार्ट हमने ऑलरेडी देख लिए हैं आज तीसरा और चौथा और यदि हो सके तो फिफ्थ पार्ट आज हम कवर करेंगे यह जो जितनी भी टेक्स्ट आपको स्क्रीन के ऊपर दिखाई दे रही है वह पूरे पूरे स्वामी जी के ही शब्द है मैंने अपने से तो सिर्फ यह टाइटल ही ऐड किया है यह जो पार्ट थ्री रि इनकार्नेसियों और यह टर्निंग टू टर्निंग टाइटल दिख रहा है इतना ही मैंने ऐड किया है बाकी सब स्वामी जी के ही शब्द है और यहां पर ब्रैकेट में जो आप देख रहे हैं 2.21 स1 अर्थात कि सेकंड वॉल्यूम ऑफ स्वामी विवेकानंद कंप्लीट वर्क्स इन इंग्लिश उसका पेज नंबर है 217 इसके ऊपर में से यह कोटेशन लिया गया है तो हम पढ़ते हैं पार्ट थ्री में स्वामी जी क्या कहते हैं हियर कम्स ए वेरी इंट क्वेश्चन यहां पर एक बड़ा ही इंटरेस्टिंग प्रश्न हमारे सामने उपस्थित होता है नोन एस द रिइनकारनेशन ऑफ द सोल जिसको कि हम कहेंगे आत्मन का पुनर्जन्म यह लिटरल शब्द है यहां पर आत्मन का सोल का किंतु आत्मन नहीं करना सूक्ष्म शरीर करना है सूक्ष्म शरीर का फिर से देह धारण करना फिर से जन्म धारण करना इसको पुनर्जन्म कहते हैं आत्म के साथ में तो कुछ होता नहीं है यह जो आत्मन और सूक्ष्म शरीर इसको उपमा देकर और स्थूल शरीर यह जो तीन एंटिटीज है इसको उपमा दे कर के कैसे समझाया है वेदांत में जैसे कि आकाश में सूरज है सूरज तो हमेशा के लिए प्रकाशमान होगा सूरज के प्रकाश में कभी भी भरती ओट नहीं दिखाई देगी कभी भी बढ़ोतरी या कमती नहीं दिखाई देगी किंतु मान लीजिए पृथ्वी पर बहुत सारे मिट्टी के घट रखे हुए हैं उसमें पानी भरा हुआ है और इस पानी में उस सूरज का प्रतिबिंब छलक रहा है तो यह प्रतिबिंब है वह है सूक्ष्म शरीर और जो घट पानी का घट है यह है स्थूल शरीर तो यह प्रतिबिंब मान लीजिए कि एक घट को तोड़ दे तो यह प्रतिबिंब कहां चला जाएगा आप कह नहीं सकते कि सूरज में वापस चला जाएगा या कि घट के साथ वो विसर्जित हो जाएगा ऐसा नहीं है वो प्रतिबिंब का वैसे तो अपना कोई अस्तित्व था नहीं सूरज और यह घट आत्मन और यह स्थूल शरीर इन दोनों के बीच के यह मिसिंग लिंक है यह कड़ी है इन दोनों के बीच का यह रिलेशनशिप है तो वैसे ही यह सूक्ष्म शरीर एक के बाद एक जन्म धारण करता जाएगा और उसकी मुक्ति कब होगी जब उसके सभी कर्म वर्कआउट हो जाएंगे जब वह ईश्वर को शरणागत हो जाएगा तो यहां पर सोल शब्द का हमको सूक्ष्म शरीर अर्थ करना है सम टाइम्स पीपल गेट फ्राइटें एट द आइडिया एंड बिलीव दैट दे आर द आउटकम ऑफ नथिंग एंड देन विथ द ग्रांडेस्ट लॉजिक ट्राई टू डिड्यूस द थियर दैट लद दे हैव कम आउट ऑफ जीरो दे विल बी इटरनल एवर आफ्टर कभी-कभी लोग इस एक के बाद एक विभिन्न देह धारण करने की थिरी है इससे घबरा जाते हैं और क्या सोचते हैं बड़ी बुद्धि चला कर के सोचते हैं कि वह जीरो में से उत्पन्न हुए हैं किंतु हमेशा के लिए रहेंगे इस स्टेटमेंट से स्वामी जी क्या समझाना चाहते हैं जो क्रिश्चियन थियोलॉजी जो है कि देह का जब जन्म होता है उसके बाद में जब इस देह की मृत्यु होती है तो देह के भीतर का जो यह सोल है उनका जो शब्द है यह सोल उनका शब्द है वह हमेशा के लिए वेट करता है कि कब ईश्वर ऑन द डे ऑफ द जज पृथ्वी पर जब प्रलय होगा उस प्रलय के समय में ईश्वर आकर के उनको यह जजमेंट देंगे आपने अच्छा किया है तो स्वर्ग में जाओ और बुरा किया है तो नर्क में जाओ तो हमेशा के लिए स्वर्ग या नरक का भोग करेंगे तो स्वामी जी कहते हैं यह कैसे विडंबना है भाई आप आत्मन के बारे में यह क्या सोचते हैं देह के साथ में जन्म तो हुआ किंतु हमेशा के लिए जिएगा ऐसी तो कोई बात नहीं है हमारे यहां पर क्वेश्चन है कि आत्मन जो है वो अजर अमर और इवन समय और अवकाश के परे है जो कि हमने आत्मन की एक क्वालिटीज देखी इसमें हमने देखा कि इवन समय और अवकाश और इवन माइंड एंड थॉट्स आर आत्मन इज बियोंड एवरीथिंग एल्स तो वो तो आत्मन है और ये जो सूक्ष्म शरीर है सूक्ष्म शरीर का जन्म भी है तो उसका मृत्यु भी है जब आखिरी जन्म आएगा इसके बाद में ही स्वामी जी समझाते हैं आखिरी जन्म जब आएगा सूक्ष्म शरीर अपने कारण में विलीन हो जाएगा और हमको अंतिम मुक्ति प्राप्त हो जाएगी वी हैव बीन एक्जिस्टिंग इटरनल एंड विल एजिस्ट एंड देयर इज नो पावर अंडर द सन और अबोव द सन व्हिच कैन अनडू योर और माय एक्जिस्टेंस और सेंड अस बैक टू जीरो हम हमेशा से थे और हमेशा रहेंगे ऐसा कोई भी ऐसी कोई भी शक्ति नहीं इस विश्व ब्रह्मांड में जो कि हमको शून्य की ओर भेज दे अभी देखिए कि आत्मन को समझाने के लिए जो वर्बल जिम्नास्टिक करना पड़ता है इसके लिए ऐसा कहा जाता है कि हमेशा थे और हमेशा रहेंगे एक्चुअली जो समय का यह जो हमेशा से रहने का हमेशा जो यह जो सब आइडियाज है समय के साथ में जुड़े हुए वह भी तो हमारे इस मन और बुद्धि के साथ में ही जुड़े हुए हैं तो इसकी यह जो लिमिटेशन है शब्दों की ही एक लिमिटेशन है आत्मन के कांसेप्ट को समझाने की इसलिए हम ऐसा कहते हैं कि हमेशा थे और हमेशा रहेंगे एक्चुअली आत्मन इज बियोंड यह हमेशा रहना भूतकाल वर्तमान भविष्य वगैरे से परे हैं अच्छा स्वामी जी कहते हैं व्हाई डू वी नॉट रिमेंबर अवर पास्ट डू वी रिमेंबर ऑल अवर पास्ट इन दिस लाइफ क्या अभी कोई कहेगा कि यह जो पुनर्जन्म की थिरी जो है हिंदू धर्म में जिस तरह से उसको कहा गया है उसके अगेंस्ट में बहुत सारे आप ऑब्जेक्शंस खड़े कर सकते हैं उसमें से एक ऑब्जेक्शन क्या है कि मुझे यदि मेरा पुनर्जन्म हुआ है पिछले जन्म में मान लीजिए मेरे कुछ संस्कार थे इस जन्म में कुछ संस्कार है तो मुझे वह सब याद क्यों नहीं आ रहा वो ठाकुर की एक कहानी है एक धोबी का लड़का अगले जन्म में राजकुमार हुआ तो राजकुमार हुआ है किंतु राजकुमार उसका जो संस्कार जो है ना वो धोबी का है तो वह क्या कहता है अपने मित्रों को चलो एक काम करते हैं व राजा का लड़का तो राजा की लड़ वो खेल खेलेगा तो वो कहेगा दुश्मन आ रहे हैं चलो हम लोग उसको मारने के लिए जाते हैं जनरली राजकुमार यदि कोई रमत कोई खेल खेलेगा तो इस तरह का खेलेगा या तो फिर कहेगा कि मैं राजा हुआ हूं मैं सिंहासन पर बैठा हूं आप लोग आकर के मेरे सामने न्याय मांगने के लिए आइए जैसे कि स्वामी जी इस तरह के खेल खेलते थे राजा होकर के सिंहासन पर बैठते थे और कहते थे कि किसको किस तरह का न्याय चाहिए तो वो पूर्व जन्म के संस्कार को सूचित करता है कभी-कभी इस तरह की वो जो आपकी क्या इंक्लिनेशन है किंतु पिछले जन्म में धोबी काल लड़का था इस जन्म में राजकुमार है तो किस तरह के खेल खेलेगा वो कहेगा मैं सो जाता हूं आप मेरे पीठ के ऊपर में कपड़े धोइंदा है वो धोबी के लड़के के जैसा तो अभी क्या है कि यह तो ठाकुर ने जो कहा है वो राजकुमार को एगजैक्टली तो याद नहीं है कि वह इस तरह के खेल क्यों खेलता है या तो इस तरह के खेल के प्रति उसकी उसका आकर्षण क्यों है उसके भीतर में संस्कार है वो संस्कार ऐसे सबकॉन्शियसली वो मेनिफेस्ट होते हैं किंतु उसको याद नहीं रहता कि मैं ऐसा था पिछले जन्म में इसके लिए यह प्रश्न हो सकता है कि आपने कैसा ऐसा क्यों कहा कि राजकुमार जो है वह धोबी का खेल खेलना चाहता है धोबी के लड़के की तरह वह रहना चाहता है यह तो आपका इंटरप्रिटेशन है ना कि वह पिछले जन्म में धोबी था ऐसा भी तो हो सकता है कि राजकुमार ने धोबी के लड़कों को इस तरह का खेल खेलते हुए देखा होगा और उसकी ये इच्छा होग होगी कि मैं भी इस तरह का खेल खेलू उसमें आपको पुनर्जन्म लाने की क्या जरूरत पड़ गई यदि आप कहते हैं कि पुनर जन्म की वजह से ही वह ऐसा खेल खेल रहा है तो राजकुमार के लड़के को क्यों यह याद नहीं है कि पिछले जन्म में वह धोबी था मुझे क्यों याद नहीं है कि मैं पिछले जन्म में यह था या वह था तो फिर स्वामी जी कहते हाउ ज अभी अभी इस प्रश्न का स्वामी जी उत्तर देते हैं क्या देते हैं हाउ मेनी ऑफ यू रिमें व्ट यू डिड व्हेन यू वेर बेबीज पिछले जन्म की तो बात छोड़ी दीजिए आप परसों दिन क्या खाया था परसों दिन हमने क्या किया था वही हम भूल जाते हैं बच्चे थे तब क्या किया था बचपन में फर्स्ट स्टैंडर्ड में क्या किया था सेकंड स्टैंडर्ड में क्या किया था किसको याद है दिन प्रतिदिन की घटना वली मैं जब अपनी खुद की मेमोरीज खोजता हूं कभी-कभी यह सब पढ़ कर के मेरी अर्लीस्ट मेमोरीज क्या है पता है बाल मंदिर की है एक छोटे से गांव में रहता था और मेरी मां मेरा हाथ पकड़ कर के वो तो गांव था छोटा सा तो वहां पर बाल मंदिर तो आजकल जो व्हीकल ये वो वगैरह उतना नहीं था रास्ते भी खुले खुले थे मकान भी एक मंजिला थे आजकल तो मकान भी हम शहरों में देखते हैं ना तीन मंजिलें चार मंजिलें से कम में मकान ही नहीं दिखते अभी मैं कुछ दिनों पहले छुट्टी लेकर आदिपुर गया था तो आदिपुर जाकर के मुझे बिल्कुल मेरा बचपन याद आ गया कि वहां पे एक-एक मंजिले मकान आज कल शहर में एक मंजिल का मकान देखने को भी मिलता है क्या तो मैं जब छोटा था बचपन में जिस गांव में रहते थे सब एक-एक मंजिल के मकान बड़े-बड़े रास्ते मेरी मां मेरा हाथ पकड़ के ले जा रही है बाल मंदिर यह मेरी अर्लीस्ट मेमोरी है किंतु इससे पहले का कुछ याद नहीं और इस मेमोरी के बाद में कुछ याद नहीं तो क्या है कि हम छोटे थे उस समय की ही याद हमको नहीं है तो पिछले जन्म की याद हमको कहां से होगी फिर स्वामी जी कहते हैं व्हाई शुड वी रिमेंबर द पास्ट हम उनको पिछला जन्म याद करने की आवश्यकता ही क्या है दैट ब्रेन इज गोन ब्रोकन इन टू पिसेस जो जिस शरीर में यह सब अनुभव हुए थे पिछले जन्म में वह शरीर तो जल गया चीता के राख में और जिस ब्रेन में यह सब मेमोरी स्टोर थी वह ब्रेन भी विघटित हो गया एंड अ न्यू ब्रेन हैज बीन मैन्युफैक्चर्ड एक नया ब्रेन मैन्युफैक्चर हुआ है व्हाट हैज कम टू दिस ब्रेन इज द रिजल्टेंट द सम टोटल ऑफ द इंप्रेशंस एक्वायर्ड इन अवर पास्ट विथ व्हिच द माइंड हैज कम टू इनहैबिट न्यू बॉडी पिछले जन्म के याददास्त तो नहीं रहेगी किंतु याद दस्तों का जो फाइनल टेली है फाइनल बैलेंस शीट है वह अभी इस जन्म में कैरी फॉरवर्ड होगा जैसे कि यह राजकुमार का लड़का धोबी का खेल खेलता है उसको यह तो याद नहीं कि मैं पिछले जन्म में धोबी का लड़का था किंतु धोबी के लड़के के जो संस्कार का समूह है वह इस देह में आया है अर्थात कि आप दिन प्रतिदिन क्या किया वह याद नहीं रहेगा किंतु उसका बैलेंस आपको याद रहेगा अभी स्वामी जी क्या कहते हैं कि आप भले चाहे कहे कि पिछले जन्म की याद मुझे इस बार क्यों नहीं नहीं आ रही तो जनरली नहीं आएगी किंतु एक समय ऐसा आएगा कि मैंने अपने जितने भी पूर्व जन्म के जितनी भी यादें हैं सब वापस आ जाएगी कब ऐसा होगा ईच वन ऑफ अस विल गेट बैक दिस मेमोरी इन दैट लाइफ इन व्हिच ही विल बिकम फ्री हम सभी लोग यह सभी मेमोरीज उस जन्म में प्राप्त कर लेंगे जो कि हमारा आखिरी जन्म है जिस जन्म में हमको मुक्ति मिलने वाली है देन अलोन यू विल फाइंड दैट दिस वर्ल्ड इज बट ए ड्रीम तभी आपको पता चलेगा कि यह जन्म जन्मांतर की यात्रा यह स्वप्न वत थी देन अलोन यू विल रियलाइफ योर सोल दैट यू आर बट एक्टर्स एंड वर्ल्ड इज अ स्टेज तभी आपको यह समझ में आएगा तभी आपको यह अनुभूति होगी आपके हदय के अंतर तम कोने में कि यह जगत एक रंग मंच है और हम सभी पात्र है पात्र एक के बाद एक विभिन्न पात्र भजने के लिए विभिन्न पात्र का नाटक अभिनय करने के लिए इस रंग मंच पर अवती ण हुए हैं देन अलोन विल द आइडिया ऑफ नॉन अटैचमेंट कम टू यू विद द पावर ऑफ थंडर तभी यह त्याग की भावना बिजली के धमाके की तरह हमारे मन में परिस फुट होगी देन ऑल दिस थर्स्ट फॉर एंजॉयमेंट दिस क्लिंग ऑन टू लाइफ एंड दिस वर्ल्ड विल वेनिश फॉर एवर तभी यह परिहा है यह पिपासा है यह भोग की लालसा है यह सब कुछ यह जीवन को किसी भी तरह से पकड़ के रहने की यह वासना सभी कुछ हमेशा के लिए अदृश्य हो जाएगी देन द माइंड विल सी डियर एज क्लीयरली एज डेलाइट हाउ मेनी टाइम्स ऑल दिस एसिस्टेड फॉर यू तभी आपका मन या तो फिर आप एकदम प्रकाश दिन के प्रकाश में जैसे सब कुछ क्लियर हो जाता है वैसे क्लियर देखेगा कि कितनी बार यह सब कुछ आपके साथ में आया है और गया है हाउ मेनी मिलियंस ऑफ टाइम्स यू हैड फादर्स एंड मदर्स सन एंड डॉटर्स हस्बैंड एंड वाइव्स रिलेटिव्स एंड फ्रेंड्स वेल्थ एंड पावर कितने लाखों लाखों जन्म में आपके पिताजी थे माताजी थे पुत्र थे पुत्रियां थे पति थे पत्नी थे बंधु बांधव थे मित्र थे धन था वैभव था लोक सम्मान था सब कुछ था यह सब किंतु आया और गया यह आपके साथ में इसका कोई संबंध नहीं है ये एक शरीर के साथ में आएगा और शरीर के मृत्यु के साथ में चला जाएगा वो जो नारद की कहानी है कि नारद ने भगवान विष्णु को पूछा कि ये संसार की माया किस तरह की है बताइए तो तो भगवान विष्णु ने कहा कि एक काम करो अस्ते ने सोचा कि नारद नारद मुनि को सबक सिखाने का ये अच्छा मौका है बोला जाओ गांव में जाओ मेरे लिए एक गिलास भर पानी लेकर आओ तो नारद मुनि गए एक गांव में एक घर का दरवाजा खटखटाया एक बड़ी ही सुंदर युवती ने दरवाजा खोल कर के नारद मुनि को पानी दिया अभी नारद मुनि ने सोचा कि अरे इतनी सुंदर अ विवाहिता युवती है तो चलो उसी के साथ में शादी की जाए उसके मोह में पड़कर के उसके पिताजी को कहा कि आप अनुमति दे तो इसके साथ में विवाह करूंगा पिताजी ने खुशी-खुशी अनुमति दे दी यह ब्राह्मण लड़का है मुंह के ऊपर में यह ओजस का तेज दिख रहा है क्यों नहीं अपनी बच्ची का विवाह करवाएगा विवाह भी हो गया बच्चे भी हो गए घर भी बनाया सब कुछ बड़े हंसी खुशी रह रहे हैं एकाएक सैलाब आया फ्लड आया घर भी ले गया बच्चे भी ले गया पत्नी को भी ले गया और नारद मुनि रोते-रोते भगवान को पुकार रहे हैं कि अरे भगवान आपने मेरा सब कुछ चिन क्यों लिया उस समय भगवान आकर के खड़े होकर कहते हैं अरे नारद मुनि आप मेरे लिए एक गिलास पानी लेने के लिए गए थे वो पानी कहां है तब कहीं जाकर के एकाएक उनको होश आया कि अरे यह किस तरह का स्वप्ना उन्होंने देखा था तो यह संसार की जो माया है कितने जन्म जन्मांतर में उन्होंने हमने शादी की होगी पति पत्नी पुत्र पुत्री पिताजी माताजी यह घर बनाया है गाय पाली है कोई कोई कंपनी बनाई है आजकल के जद एनालॉजिस दी जाए तो कहीं वह वेंचर कैपिटल लेकर के कहीं वह एक अपना एंटरप्रेन्योरल कुछ स्टार्ट किया है व कितना जन्म जन्मांतर तक यह किया होगा यह सब आता है जाता है जब यह सही सही समझ में आ जाएगा कि आई एम बियोंड एवरीथिंग आत्मन तो यह सब कुछ स्वप्न सा प्रतीत होने लगेगा हाउ मेनी टाइम्स यू वेर ऑन द टॉप मोस्ट क्रेस्ट ऑफ द वेव एंड हाउ मेनी टाइम्स यू वेर डाउन एट द बॉटम ऑफ डिस्पेरटनेस अस फलता रूपी गहरे गड्ढे में डूबे हुए थे व्हेन मेमोरी विल ब्रिंग ऑल दिस टू यू देन अलोन विल यू स्टैंड एज अ हीरो एंड स्माइल व्हेन द वर्ल्ड फ्रस अपॉन यू ये जब आपकी पिछले जन्मों की याददास्त जागृत होगी आखिरी जन्म में जिस जन्म में आपको मुक्ति मिलने वाली है उस समय आपके सामने उस जन्म के जदी सफलता भी आएगी निराशा हताशा असफलता भी आएगी आप हंसके हंसके उसके सामने खड़े रहेंगे और कहेंगे कि अरे इस तरह की सफलता तो लाखों जन्मों में मुझे मिली है और इस तरह की गहन असफलता भी मुझे लाखों जन्मों से मिली हुई है यह आती है और जाती है मेरे साथ में इसका कोई वास्ता नहीं पानी पे दौरी हुई लकीर पानी पे आप दौड़ेंगे तो क्या होगा यह लकीर आएगी जाएगी पानी तो वैसे का वैसा ही रहेगा दूसरे ही क्षण में यह लकीर मिट जाएगी तो वैसे ही आत्मन के ऊपर में इसका कोई प्रभाव नहीं है देन अलोन विल यू स्टैंड अप एंड से आई केयर नॉट फॉर दी इवन ओ डेथ तभी आप डट कर के खड़े होंगे और पुकार के कहेंगे ओ मृत्यु मुझे तुम्हारी भी परवाह नहीं है व्ट टेरर्स हेस्ट दाउ फॉर मी मेरे लिए कौन सा भय है जो कि तुम्हारे पास में है दिस विल कम टू ओ और यह साहस यह त्याग यह वैराग्य यह बोल्डनेस यह हम सबके पास में आएगी और हम सब इसके अधिकारी है अभी एक दूसरा प्रश्न खड़ा होता है हमारे सामने पार्ट फोर इस लेक्चर के यह जो समरी है इसका पार्ट फोर एक नया प्रश्न खड़ा होता है स्वामी जी हमको कहते हैं कि अच्छा अभी तक तो हमने पुनर्जन्म के बारे में पुनर्जन्म का जो सिद्धांत है जो थिरी है उसके सामने एक के बाद एक जो ऑब्जेक्शन खड़े किए गए उसका हमने उत्तर दिया किंतु क्या मैंने नेगेटिव हमने सब काट दिया कि मुझे याद क्यों नहीं आ रहा है कि मैं पिछले जन्म में क्या था तो स्वामी जी ने बढ़िया सा उत्तर दे दिया किंतु क्या कोई पॉजिटिव प्रूफ है क्या कि जिसके द्वारा हम लोगों को कह सके कि भाई देखिए यह प्रूफ है जो कि पुनर्जन्म को प्रूव करता है तो स्वामी जी क्या कहते हैं आर दे एनी पॉजिटिव प्रूफ क्या कोई पॉजिटिव प्रूफ है देयर आर नो अदर थियर एक्सेप्ट दैट ऑफ रि इंकार्नेट अकाउंट्स फॉर द वाइट डायवर्जेंस दैट वी फाइंड बिटवीन मैन एंड मैन इन देर पावर्स टू एक्वायर नॉलेज हां पॉजिटिव प्रूफ है और यह पुनर्जन्म के अलावा ऐसी कोई थिरी नहीं है जो कि मनुष्य मनुष्य के बीच में यह ज्ञान प्राप्ति की यह जो कैपेसिटी है उसका बड़ा सा डायवर्जेंस जो दिखता है उसका उत्तर दे पाए हमारे सं में देखिए कि एक है लाटू महाराज एक है स्वामी विवेकानंद लाटू महाराज ने ठाकुर की सेवा तो बहुत की किंतु बौद्धिक फिलोसोफी उसका अभ्यास उसका चिंतन और उसके ऊपर में प्रवचन नहीं दिया तो देखिए कि लाटू महाराज का जो संस्कार कैसे आया वो उनका एक यात्रा है जन्म जन्मांतर की यात्रा है वो उनका एक है और स्वामी जी की एक जन्म जन्मांतर की यात्रा है उससे आज के जो स्वामी जी है वो हमको दिखाई देते हैं जितने भी डायरेक्ट डिसाइल है 16 डायरेक्ट डिसाइल यह त्यागी संतान ठाकुर के सभी में देखिए कि कितना एक वाइड डाइवर्जंस दिखता है कहां अखंडानंद जी तो कहां यह बूढ़ो गोपाल महाराज अद्वैतानंद जी तो कहां यह शशि महाराज तो कहां यह सामने निरंजन महाराज कितना एक डायवर्जेंस हमको दिखता है कहां खोका महाराज तो कहां यह अभेदानंद जी महाराज तो यह जो डायवर्जेंस जो दिखता है हमको यह डायवर्जेंस इसका परिणाम क्या रीजन क्या है कि हम सभी लोग लाखों जन्मों की करोड़ों जन्मों की ये यात्रा करते-करते संस्कार बटोर बटोर आ रहे हैं इसके लिए हमको ऐसा दिखता है प्रतिमान होता है अच्छा हालांकि डायरेक्ट डिसाइल के बारे में कहा जाएगा कि विन लोगों की यात्रा हमारी यात्रा की तरह नहीं है वो तो अवतार के कंपेनिया है अवतार के संगी है साथीदार है अवतार के साथ में जन्म जन्मांतर वो जन्म ग्रहण करेंगे जैसे कि ठाकुर ने कहा ना कि कोलोमर दौल एक टाके टान लेबाई टेने आश पे लक्ष्मी दीदी ने कहा कि मैं अभी फिर से आना नहीं चाहती पृथ्वी पे ठाकुर ने कहा कि तुम्हारे हाथ में थोड़ी ना है ये जो बंगोल में देखेंगे कि इतने सारे तालाब है तालाब के भीतर में कमल खिलते हैं तो एक कमल को खींचो ग तो सभी कमल खींच के चले आएंगे क्यों क्योंकि इनकी जड़े सब एक दूसरों के साथ में गुनी हुई है एक दूसरों के साथ में मिश्रित हो गई है तो एक गुलाब को खींचो ग तो उसकी जितनी भी जड़ के साथ में जितने भी अन्य गुलाबे खींच के चले आएंगे तो वैसे उनकी बात अलग है यह तो जस्ट एक उपमा देने के लिए मैंने कहा अच्छा तो इस बात को स्वामी जी थोड़ा डिटेल में बताते हैं कि हाउ डू वी लर्न फर्स्ट ले लेट अस कंसीडर द प्रोसेस बाय मींस ऑफ व्च नॉलेज इज एक्वायर्ड हम ज्ञान किस तरह से प्राप्त करते हैं इस प्रक्रिया को आओ हम देखते हैं सपोज आई गो इन टू द स्ट्रीट एंड सी अ डॉग मैं रास्ते में जाता हूं शेरी में एक कुत्ते को देख हाउ डू आई नो इट इज अ डॉग कैसे मैं समझ में आएगा कि यह कुत्ता है आई रेफर इट टू माय माइंड एंड इन माय माइंड आर ग्रुप्स ऑफ ऑल माय पास्ट एक्सपीरियंस अरेंज एंड पिजन होल्ड एज इट वेर जब मुझे कुत्ता दिखता है तो इस कुत्ते के पिक्चर को मैं अपने ब्रेन में जाकर के रेफर करता हूं मेरे ब्रेन में मेरे जितने भी एक्सपीरियंस है जितने भी चित्र मेरी आंखों ने देखे हैं वह सब पिजन होल होकर के रखे हुए हैं पीजन होल का चित्र यहां पर है उसका अर्थ क्या है कि एक जैसे शेल्फ है एक कपबोर्ड है जिसमें कि सभी एक-एक खाना है एक खाने में एक-एक कबूतर रहता है तो वैसे ही यह एक एक जिसको कहेंगे क्लासिफिकेशन मशीन अपने ब्रेन के भीतर में है सभी नॉलेज को क्लासिफाई करके रखता है एज सून एज अ न्यू इंप्रेशन कम्स आई टेक इट अप एंड रेफर इट टू सम सम ऑफ द ओल्ड पिजन होल्स जैसे ही एक नया चित्र मुझे दिखा वैसे ही मैं अपने ब्रेन में जाकर के रेफर करूंगा कि पुराने चित्र कौन-कौन से हैं एंड एज सून एज आई फाइंड अ ग्रुप ऑफ द सेम इंप्रेशंस ऑलरेडी एसिस्टिंग आई प्लेस इट इन दैट ग्रुप एंड आई एम सेटिस्फाइड दिस इज कॉल्ड नॉलेज और जैसे ही मुझे सिमिलरिटी देखी तो मैं नए चित्र को पुराने चित्र के साथ में बिटा दूंगा और शांति से खुश होकर के कहूंगा कि मैंने आज कुछ सीखा है आज मैं रास्ते में आ रहा हूं सुबह को अपने कमरे में से ऑफिस में एकाएक मैंने देखा काले कलर का गुलाब है तो मैं तो एकदम आश्चर्य चकित हो गया अरे काले कलर का गुलाब भी क्या हो सकता है अभी मैंने अपने ब्रेन में देखा कि ये गुलाब है उसका क्या परिचय है तो मेरे ब्रेन में मैंने बहुत सारे गुलाब देखे हुए हैं मैं मेरी दीक्षा बेंगलर में हुई है और बेंगलोर में वहां पे बहुत ही सुंदर एक गार्डन है वो रोज गार्डन व एगजैक्टली मुझे इसका डिटेल याद नहीं है बहुत सालों पहले की बात है किंतु मुझे ऐसा याद है कि मैं उस गार्डन में गया था और बहुत बहुत सारे गुलाब के फूल देखे थे तो मुझे पता है कि गुलाब का फूल कैसा दिखना चाहिए हालांकि यह काले कलर का गुलाब मैंने पहले कभी नहीं देखा किंतु मैंने जब पास में जाकर के देखा तो जो उसकी पंखुड़ी का जो शेप है उसकी जो डाली है उसके ऊपर में जो कांटे है और उसकी जो खुशबू है वो कांटों की वजह से पंखुड़ी के शेप की वजह से और यह खुशबू की वजह से मुझे पता चला अरे यह तो पूरा गुलाब जैसा ही है बस वही बात है कि काला कलर मैंने पहली बार देखा तो जैसे ही मैंने यह दोनों नॉलेज मैच कर दी है तो वैसे ही मुझे पता चला कि यह गुलाब का फूल है मुझे नॉलेज प्राप्त हुआ ज्ञान प्राप्त हुआ और मैं खुशी-खुशी अपने ऑफिस में आ गया विदाउट अ फंड ऑफ ऑलरेडी एसिस्टिंग एक्सपीरियंस एनी न्यू एक्सपीरियंस वुड बी इंपॉसिबल फॉर देयर वुड बी नथिंग टू व्हिच टू रेफर द न्यू इंप्रेशन यदि मेरे मन में ऑलरेडी भूतकाल के यह चित्र से जमा हो कर के नहीं रहते तो कोई नया चित्र जो है उसको मैं उसके साथ में कंपेयर करके जान नहीं पाता कि यह क्या है मान लीजिए कि मैंने कभी गुलाब देखा ही नहीं है तो जब काले कलर का या इवन लाल कलर का गुलाब दिखेगा मैं समझ ही नहीं पाऊंगा कि अरे यह कौन सा गुलाब है कभी-कभी यह जो अपने जो दूसरे ग्रह की कल्पना करते हैं कहते हैं कि दूसरे ग्रह पर जीवन है तो यदि दूसरे ग्रह पर जीवन होगा तो वहां पर किस तरह के लोग रहते होंगे किस तरह के पशु पक्षी होंगे किस तरह के पेड़ पौधे होंगे तो दूसरे ग्रह पर जो प्रकट हुए पेड़-पौधे हम देख कर के हमको कुछ भी समझ में नहीं आएगा क्यों क्योंकि ये एलियन लाइफ है उसके बारे में हमारा कोई एक्सपीरियंस है ही नहीं तो जिस चीज को हमने पहले कभी नहीं देखा उस चीज को देख उस चीज को ज नई चीज दिखेगी तो हम उसको पुरानी चीज के साथ कंपेयर करके ज्ञान अर्जन नहीं कर पाएंगे वीी सी दैट द पावर ऑफ एक्वायरिंग नॉलेज वेरीज इन ईच इंडिविजुअल एंड दिस शो ट ईच वन ऑफ अस ज कम विथ हिज ओन फंड ऑफ नॉलेज कभी-कभी ऐसा होता है किसी का ज्ञान बहुत ज्यादा होता है ज्ञान ग्रहण करने की कैपेसिटी और किसी की बहुत कम होती है इसका क्या अर्थ है किसी के पास में बहुत बड़ा नॉलेज बैंक है और किसी के पास में छोटा सा नॉलेज बैंक है इसलिए दोनों की ज्ञान ग्रहण करने की ज्ञान प्राप्ति की कैपेसिटी विभिन्न विभिन्न है नॉलेज कैन ओनली बी गोट इन वन वे द वे ऑफ एक्सपीरियंस नॉलेज या तो ज्ञान मात्र अनुभूति से ही प्राप्त हो सकता है देर इज नो अदर वे टू नो इसके अलावा जानने का कोई उपाय नहीं है इफ वी हैव नॉट एक्सपीरियंस इट इन दिस लाइफ वी मस्ट हैव एक्सपीरियंस इट इन अदर लाइफ यदि इस जन्म में हमने अनुभूति नहीं की तो हो सकता है अगले जन्म में की अच्छा अभी अगले जन्म की जो अनुभूति है ऐसा कहने की क्या जरूरत है आप इसको इंस्टिंक्ट भी कह सकते हैं स्वामी जी क्या कहते हैं पीपल कॉल इट इंस्टिंक्ट आप इसको इंस्टिंक्ट भी कह सकते हैं अ चाइल्ड टू प्ले ऑन द पियानो छोटी उम्र में ही बच्चा पियानो पे खेलना पियानो बजाना शुरू कर देता है एट फर्स्ट शी मस्ट पे अटेंशन टू एवरी की शी इज फिंगरिंग पहले पहले तो हो सकता है कि जो पियानो बजा रहा है वह बच्चा प्रत्येक की के ऊपर में देखते देखते सीखेगा एंड एज शी गोज ऑन एंड ऑन फॉर मंथ्स एंड इयर्स द प्लेइंग बिकम ऑलमोस्ट इवोलंटियर इंस्टिंक्टिव किंतु जैसे सालों सालों भर तक यह बच्चा पियानो की ये जो कीज है स्वी स्विच है उसके ऊपर में खेलते खेलते उसको बजाते बजाते एक ऐसा समय आएगा कि उसको उसके सामने देखने की जरूरत नहीं पड़ेगी जैसे अपने मंदिर में भी शाम को संध्या आरती के समय आपने बहुत सारों ने देखा ही होगा जब महाराज जी कोई भी महाराज है तो वह जब खंडन वो बजाते हैं हारमोनियम के ऊपर में तो वो हारमोनियम पर देख कर के अभी कौन सा बटन दबाए अभी कौन सा दबाए ऐसा देखने की जरूरत नहीं वो सामने पुजारी महाराज जो आरती कर रहे हैं आरती के ऊपर में ही उनका पूरा लक्ष्य है और उलिया अपने से वह हार्मोनियम बजाती है मुंह अपने से ही ठाकुर की स्तुति का गान करता है तो यह भजन गाना और उंगली चला उंगली से हारमोनियम चलाना यह इंस्टिंक्टिव हो गया है बहुत लंबा अभ्यास के बाद में यह ऑटोमेटिक हो गया है दिस इज नॉट यट अ कंप्लीट प्रूफ माने अभी आप ऐसा नहीं कह सकते कि अभ्यास के बाद में जो रेगुलर हो जाता है वह इंस्टिंक्ट है वन हाफ रिमेंस एंड दैट इज दैट ऑलमोस्ट ऑल द एक्शंस दैट वी आर नाउ इंस्टिंक्टिव वि आर नाउ इंस्टिंक्टिव कैन बी ब्रॉट अंडर द कंट्रोल ऑफ द विल जो कि मेहनत से की हुई प्राप्त की हुई इंस्टिंक्ट इसको भी आप अपने कंट्रोल के अंडर में ला सकते हैं जैसे कि मनुष्य के हार्ट बीट ऐसा जन्म जन्मांतर की प्रक्रिया से ऐसा हुआ है पहला ऐसा होगा कि हमने कॉन्शियसली मेहनत की होगी अपने हार्ट बीट को कंट्रोल करने की आज से मान लीजिए कुछ करोड़ साल पहले जब पहली पहली बार हार्ट डेवलप हुआ होगा किंतु इतनी सारी जनरेशन के बाद में हार्ट बीट ऑटोमेटिक हो गए इंस्टिंक्टिव हो गए तो जैसे अभ्यास करके आप इंस्टिंक्ट की ओर जाते हैं इंस्टिंक्ट को आप अभ्यास की ओर ले जाते हैं ले जा सकते हैं अपने हार्ड बीट्स को रेगुलेट कर सकते हैं सो द प्रूफ इज कंप्लीट बाय दिस डबल मेथड य दोनों मेथड की इकट्ठा करके कि एक्सपीरियंस इंस्टिंक्ट में आता है इंस्टिंक्ट फिर से कॉन्शियस कंट्रोल में आती है यह प्रूफ कंप्लीट होता है व्ट वी नाउ कॉल इंस्टिंक्ट इज डिजनरेशन ऑफ वॉलंटरी एक्शन मेहनत से प्राप्त की हुई एक्शन को ही बाद में इंस्टिंक्ट में कन्वर्ट होती है अभी स्वामी जी पूछते हैं कि व्हाई नॉट से इट हेरेडिटरी ट्रांसमिशन ऐसा आप क्यों कहते हैं कि मैंने मेहनत से जो एक्शन प्राप्त की है वही मैं मेरे शरीर को चला रही है आप ऐसा क्यों नहीं कहते कि मैंने डीएनए या तो जींस के द्वारा मैंने इस शरीर में प्राप्त की है हेरेडिटरी थिरी टेक्स फॉर ग्रांटेड दैट मेंटल एक्सपीरियंस कैन बी रिकॉर्डेड इन मैटर्स दैट मेंटल एक्सपीरियंस कैन ब इवॉल्वड इन मैटर अभी आप जद यह कहेंगे कि डीएनए के द्वारा मेरे भीतर में यह सब इंस्टिंक्ट आई है जैसे कि पंखी का बच्चा अंडा टूटने के बाद में इमीडिएट उड़ना सीख सकता है जैसे कि बतक का बच्चा जन्म लेने के बाद में इमीडिएट पानी में तैरना सीख सकता है मनुष्य का बच्चा जन्म लेने के बाद में तुरंत ही दूध पीने के लिए उसका जो होठ है वो सकिंग एक्शन जिसको कहते हैं वो कर कर सकते हैं तो यह सब चीजें आपको यह कहने की क्या जरूरत है कि उसने पहले जन्म से प्राप्त की है आप डीएनए के थ्रू भी तो प्राप्त कर सकते हैं व्हिच इज मच मोर साइंटिफिक थिरी किंतु इसके अगेंस्ट में स्वामी जी क्या कहते हैं कि ऐसा कौन सा प्रूफ है कि आप कह सकते हैं कि मैंने जो मेंटल एक्सपीरियंस जो प्राप्त किए वो शरीर के किसी डीएनए में मैं लिख सकता हूं डीएनए शब्द तो उस समय था नहीं स्वामी जी ने बायोप्लाजमा सेल शब्द यूज किया है तो मेरे शरीर के भीतर में ये मेंटल एक्सपीरियंस स्थूल शरीर के भीतर में लिखे जाए ऐसा कैसे पॉसिबल है यह स्वामी जी पूछते हैं बट वट प्रूफ इज देयर फॉर एजूमिस द मेंटल इंप्रेशन कैन रिमे इन द बॉडी सिंस द बॉडी गोज टू पिसेस व्हाट कैरीज इट द बायोप्लाजमा सेल यदि आज मैंने एक चीज सीखी जैसे कि मैंने सांस लेना सीखा तो अभी सांस लेने की प्रक्रिया मेरे शरीर के भीतर में लिखी जाएगी किसी सेल के भीतर में यही सेल पिता जी से अपने बच्चे को प्राप्त होगा बच्चा जन्म से ही सांस लेना सीखेगा ऐसा कैसे आप कह सकते हैं कौन से सेल में यह सब एक्सपीरियंस लिखे हुए हैं इफ इन द बायोप्लाजमा सेल द इंफाइटिंग की यह उत्क्रांति की यात्रा है कभी तो हमने यह गर्म खून ठंडे खून में से गर्म खून करना सीखा उसके बाद में सांस लेना सीखा उसके बाद में हार्ट बीट्स को रेगुलेट करना सीखा उसके बाद में हमने यह सब इंस्टिंक्टिव एक्शन सब सीखी तो आप कैसे कह सकते हैं कि करोड़ों करोड़ों जन्मों की यात्रा में करोड़ों एक्शंस जो है वह किसी एक सेल के भीतर में लिखी गई है और वही जन्म जनरेशन टू जनरेशन पिता और माता से बच्चे को मिलता है यह आप कैसे कह सकते हैं तो अभी इस प्रश्न का तो यही उत्तर सर है कि स्वामी जी जो 18th सेंचुरी के अंत में जब बात करते थे तब यह डीएनए या जेनेटिक्स का साइंस इतना एडवांस नहीं हुआ था आज यह साइंस इतना एडवांस हो चुका है कि हमको पता है कि हमारे शरीर के भीतर में डीएनए है इस डीएनए के भीतर में सही सही जो कि इंपॉसिबल चीज लगती है कि करोड़ों सालों की करोड़ों जन्मों की यह एक्सपीरियंस एक छोटे से सेल में लिखे हो सकते हैं स्वामी जी को इस बात का बड़ा र्य मने स्वामी जी इस बात को स्वीकारने को ही तैयार नहीं थे कि ऐसा हो सकता है किंतु आज हमको पता है कि डीएनए के भीतर में करोड़ों करोड़ों इंफॉर्मेशन सही सही में लिखी हुई है और ऐसा पॉसिबल है किंतु जो चीज स्वामी जी को उस समय नहीं पता थी उस बात के बारे में भले स्वामी जी जो कहे उसको शायद आज हम थोड़ा सा नजर अंदाज कर दे फिर भी स्वामी जी का जो बेसिक आर्गुमेंट है वह इतना ही वैलिड है हमारे पास में दो तरह के इन्हेरिटेंस आते हैं एक तो शारीरिक इन्हेरिटेंस जो कि ये जनरेशन आफ्टर जनरेशन आते हैं और ये मेंटल इन्हेरिटेंस जो कि सूक्ष्म शरीर सूक्ष्म शरीर की यात्रा से आते हैं तो एक इन्हेरिटेंस आता है डीएनए के थ्रू दूसरा इन्हेरिटेंस आता है सूक्ष्म शरीर के थ्रू सूक्ष्म शरीर के माध्यम से सूक्ष्म शरीर के माध्यम से क्या आता है वो है मेरे संस्कार और डीएनए के थ्रू क्या आता है शरीर को चला ने के लिए जो कुछ भी मसाला चाहिए वह स्थूल शरीर से आता है जैसे कि एक गाड़ी है तो गाड़ी फैक्ट्री में बनेगी अभी फैक्ट्री का एक ब्लूप्रिंट है उसके अनुसार गाड़ी बनेगी हजारों गाड़ियां बनेगी एक ही ब्लूप्रिंट से किंतु गाड़ी को चलाने वाला जो ड्राइवर है वह ड्राइवर एक दूसरा ही एक चीज लेक आता है वह का क्यों गाड़ी खरीदता है गाड़ी को कहां पर चलाएगा गाड़ी को क्यों चलाएगा व ड्राइवर का पूरा एक अलग ही इतिहास है अभी गाड़ी और ड्राइवर दोनों मिलकर के आखिर में जब चलेंगे तब आपको पता होना चाहिए कि गाड़ी का इतिहास उस फैक्ट्री के साथ में जुड़ा हुआ है और ड्राइवर का इतिहास अपना ही एक अलग से है तो वैसे ही यह स्थूल देह में है यह स्थूल देह को चलाने वाली जितनी भी प्रक्रिया है मेरा हृदय धबकर मेरे शरीर के भीतर में ये खून जो बहता है मैं जो सांस लेता हूं मैं जो देखता हूं जो सब कुछ देह के साथ में होता है वो सब डीएनए के थ्रू आता है किंतु मेरे जो संस्कार है संस्कार सूक्ष्म शरीर वहन करता है जन्म जन्मांतर से सूक्ष्म शरीर अपने संस्कारों को नए-नए देह में वहन करता जाएगा अर्थात कि इस देह के भीतर में डीएनए के थ्रू आने वाले सब लर्निंग है और सूक्ष्म शरीर के आने वाले थ्रू दोनों एक साथ में देह में विराजमान है देर इज हेरेडिटरी ट्रांसमिशन सो फार एस फर्निशिंग द मटेरियल टू द सोल इज कंसर्न्ड अर्थात कि यह सूक्ष्म शरीर अगेन सोल अर्थात सूक्ष्म शरीर ही लेना है देखिए यहां पे लिखा भी है सोल अर्थात सूक्ष्म शरीर तो यह सूक्ष्म शरीर को बैठने के लिए रहने के लिए जो देह चाहिए वो डीएनए के माध्यम से आता है जैसे कि गाड़ी और यह ड्राइवर उसका उदाहरण दिया तो ड्राइवर को बैठने के लिए जो गाड़ी चाहिए चलाने के लिए जो गाड़ी चाहिए गाड़ी फैक्ट्री में से आएगी ड्राइवर का किंतु बैकग्राउंड पूरा अलग है तो हम यह डीएनए के थ्रू जो यह पास ऑन होता है इन्हेरिटेंस वह स्वीकार करेंगे जहां तक स्थूल देह को चलाने के लिए जो कुछ चाहिए वह उससे थ्रू आता है बट द सोल अर्थात कि सटल बॉडी माइग्रेट्स एंड मैन्युफैक्चर्स बॉडी आफ्टर बॉडी एंड ईच थॉट वी थिंक एंड इच डिड वी डू स्टोर्ड इन इट इन फाइन फॉर्म्स रेडी टू स्प्रिंग अप अगेन एंड टेक अ न्यू शेप किंतु यह जो सूक्ष्म शरीर है वह एक के बाद एक देह धारण करता जाता है अपने संस्कार के अनुसार नए-नए अनुभूति वह प्राप्त करता रहता है साधना करेगा तो उसकी परिपट्स तरह से उसका बैंक बैलेंस है उसके अनुसार नया देह धारण करेगा यदि उसकी परिपट्स करके तो मनुष्य का देह सतत धारण करता रहेगा और यदि वह दुष्कर्म करता है और उसके सूक्ष्म देह का क्षय होता जाता है तो फिर हो सकता है कि मनुष्य योनि में से पशु योनि में आकर के गिरे तो यह सूक्ष्म शरीर अपने संस्कार अपनी अनुभूतियां अपने कर्म के अनुसार सतत नए-नए देह धारण करता रहता है और यह यात्रा कब तक चलेगी नए-नए देह धारण करने की जब तक कि आखिरी जन्म में उसके सभी कर्मों का सभी कर्म विघटित हो जाए सभी कर्म वर्कआउट हो जाए और उसको मुक्ति प्राप्त ना हो जाए दिस वे इट विल गो ऑन अल्ट अंट्स एक्सपीरियंस एंड कंप्लीटेड द सर्कल इस तरह से नए-नए देह धारण करता जाएगा सूक्ष्म शरीर कब तक जब तक कि उसकी सभी अनुभूतियां वर्कआउट नहीं हो जाती उसने यह संपूर्ण चक्र जन्म मृत्यु जरा व्याधि सृष्टि स्थिति प्रलय का चक्र समाप्त नहीं कर दिया इट देन नोज इट्स ओन नेचर आखिरी जन्म में अपने सही स्वभाव उसको पता चलेगा नोज व्हाट इट इज एंड इग्नोर वेनिश पता चलेगा कि मैं आत्मन हूं और मैं देह हूं यह अज्ञान चला जाएगा इट्स पावर्स बिकम मेनिफेस्ट आत्मन की जो सत त आनंद रूपी गुणावती है वहनी फेस्ट होना शुरू होगी इट बिकम परफेक्ट आत्मन परफेक्ट होता है आत्मन परफेक्ट होता नहीं है आत्मन परफेक्ट ही है किंतु यह परफेक्शन मेनिफेस्ट होता है नो मोर इज देर एनी नेसेसिटी फॉर द सोल टू वर्क थ्रू फिजिकल बॉडीज अभी इस सूक्ष्म देह को नए-नए स्थूल देह धारण करने की जरूरत नहीं इनफैक्ट आखिरी जन्म के बाद में सूक्ष्म शरीर ही ही उसका विनाश हो जाएगा नोर इज देर एनी नेसेसिटी फॉर इट टू वर्क थ्रू फाइनर और मेंटल बॉडीज उसके बाद में यह आत्मन जो है आत्मन को भी किसी सूक्ष्म शरीर के साथ में जुड़ने की एसोसिएट होने की आवश्यकता नहीं रहेगी इट शांस इन इट्स ओन लाइट एंड इज फ्री नो मोर टू बी बोन नो मोर टू डाई आत्मन अपने खुद के गुण धर्म में स्थापित होगा अपनी खुद की अपने खुद के प्रकाश से प्रकाशमान होगा और मुक्त हो जाएगा ना ही फिर से जन्म लेने की आवश्यकता रहेगी ना ही फिर से मृत्यु पाने की आवश्यकता होगी अब यह जन्म मृत्यु जरा व्याधि तुष्टि स्थिति प्रलय का यह चक्र उसके लिए पूरा टूट जाएगा अपने सही स्वरूप में वह विराजमान हो जाएगा अच्छा अभी ये फिफ्थ पार्ट कंक्लूजन इसके बारे में थोड़ा सा और डिटेल में डिस्कशन करना होगा जो कि हम नेक्स्ट क्लास में करेंगे आज यही तक ओ शांति शांति शांति हरि ओम तसत श्री राम कृष्ण
Questions & Answers
नमस्ते एक हेवी होए जा तब किया जानन तो स्वामी जी ने कहा था इसी एक लेक्चर में कि जब यह फिलोसॉफिकल शब्द करके यदि आपको डर लगने लगता है तो फिर आप ठाकुर महा स्वामी जी के जो संतान है वेदांत के जो विद्यार्थी है यह जो साधक है वो साधक किस काम के तो जब ऐसे वो जो जो कड़वी दवाई जो होती है ना वो कैसे हम डॉक्टर ने कही है वो खा लेते हैं हमको पता है कि इससे वो शरीर ठीक रहेगा वैसे ही ये खा देख लेना है सुन लेना है बिना किसी टेंशन मन पर लिए हुए कि नहीं समझ में आता है तो भी क्या एक बार सुन लिया हमने य ये रंगनाथ आनंद जी के बारे में एक छोटा सा कि अब एक समय था ना कि किताबों की बड़ी वैल्यू थी और किताबें थोड़ी हम साधुओं के पास में इतना प्रणामी बहुत बहुत कम प्रणामी मिलता था कि कोई पर्सनल किताब खरीदना है तो कहां से खरीदेंगे लाइब्रेरी में जो है वह पढ़ते थे तो स्वामी जी का कंप्लीट वर्क पर्सनल कॉपी रहना एक बहुत बड़ी बात वो कि वैसे ही किताबों का इंपोर्टेंस था और पैसा इतना नहीं था खरीदने के लिए तो रंग नाथा आनंद जी क्या करते थे जो सा ब्रह्मचारी उनके प्रेसिडेंट महाराज के क्वार्टर में जाकर पूरी गीता मुख स्त बोलेगा गीता के सभी श्लोक मुख स्त बोलेगा उनको स्वामी जी का एक कंप्लीट वर्क्स भेट में देते थे दोनों तरीके से देखिए कि महाराज का कैसा था कि एक इनकरेज करते हैं गीता को मुख करने के लिए और यहां पर साधुओं को एक मौका मिल जाता है चलो कि पैसा वगैरह तो है नहीं प्रणामी है नहीं किताब कहां से परचेस करेंगे तो इस बाने मुफत में किताब भी मिल जाती है जैसे स्वामी जी ने भी कहा था ने भी कहा कि ईश्वर तो कोई सब्जी वगैरह तो नहीं है कि हमने दुकान में जाकर के इसका इतना रेट है तो इतना रेट दे दो इतना जब ध्यान कर दो तो ईश्वर मिल जाएंगे इस तरह का वह ट्रांजैक्शनल रिलेशन तो यहां पर होता नहीं साधना और ईश्वर प्राप्ति का हमारे जो मान्यता है हम साधकों की ठाकुर महा स्वामी जी से जिस तरह से हमने सीखा है कि साधना करते जाना है बिना किसी अपेक्षा के क्योंकि साधना करना हमारा भाव है अभी ईश्वर कब अपना दर्शन देंगे कब अपने संस्कार को काट देंगे यह उनकी इच्छा के ऊपर में निर्भर है तो हो सकता है कि किसी किसी को वह जो अजामिल की जो बात कही कि पूरा जीवन भर नारायण को गाली देते रहे आखिर में एक बार नारायण बोले तो मुक्ति मिल गया अभी कोई कोई होता है जन्म जन्मांतर साधना करते ही जाता है करते ही जाता है फिर भी कुछ भी नहीं मिलता तो यह एक्जैक्ट को रिलेशन बिठाना कि इतनी साधना से इतना बेनिफिट हुआ यह साध ना के क्षेत्र में मुझे नहीं लगता कि दिस इज रिलेवेंट वो कृपा के ऊपर में सब कुछ डिपेंडेंट है आई थिंक साधना की संस्कार पर क्या असर जैसे मान लीजिए कि मैं कहता हूं कि मैं भक्ति योग की साधना कर रहा हूं तो मेरे मन के भीतर में शरणागति ज्यादा आएगी और यदि मैं ज्ञान योग की साधना कर रहा हूं तो मेरे मन में वीरत्ता का भाव थोड़ा सा ज्यादा आएगा तो ठाकुर का वो जो है ना वो एक कभी-कभी वो माया को पुकार के कहते हैं तुम मेरा क्या बिगाड़ लेने वाली हो कौन हो तुम जो कि मेरा हित करने को आई हो तो वह वीर का भाव है एक त्यागी का एक ज्ञानी का भाव है और जब माया सामने आई और ठाकुर एकदम मां को पुकारना शुरू कर दिए वो पंचवटी के तले पंचवटी में उन्होंने देखा कि गोरा खलासी माने गोरा सैनिक और यह दो-तीन स्त्रियां आकर के ठाकुर को प्रलोभन दे रहे हैं बड़ा सा थाल है थाल के भीतर में वस्त्र है संदेश है हीरा जवाहरात है तो ठाकुर मां को पुका करना शुरू कर दिए मां मां करके तो मां ने आकर के खड़क से उनको काट दिया तो आपका क्या एटीट्यूड है जीवन के प्रति वो आपकी साधना डिटरमाइंड करती है कि यदि भक्त का ए ये है आपकी साधना तो आपका एक शरणागति वाला भाव होगा और ज्ञानी की साधना है तो एक रत्व का भाव होगा जैसे कि ठाकुर ने कहा कि कोई अहित करने को आए तो फोस करना है किंतु दसना नहीं है जिससे कि सेल्फ डिफेंस भी हो जाए और आप पाप कर्म भी ना करें एक सामान्य साधक के लिए जो बताया एक नियम कानून के अनुसार चलता है मैंने इतने पाप कर्म किए इतने पुण्य कर्म किए दोनों का बैलेंस मेरा चल रहा है ये तो बड़ा क्लियर है मैथमेटिकली हम प्रूव कर सकते हैं और एक है कि प्योर कृपा अब कुछ भी करो कुछ भी ना करो तो चलो ओके दो बात क्लियर हो गए अभी जैसे देखिए कि अपने यहां पर किस तरह से कहा गया है कर्म कितने प्रकार के है तो एक तो है कि एक तरह का कर्मा जो कि हम भूतकाल में किया है और इसका फल आज भुगत रहे हैं फिर एक तरह का कर्मा है कि जो आज करूंगा उसका मैं फल भविष्य में भुग दूंगा तो आज मान लीजिए मैंने साधना करने की शुरुआत की तो जैसे कि उदाहरण दिया गया है कि धनुष में से जो तीर निकल गया वह तीर को आप वापस नहीं खींच सकते अर्थात कि पिछले जन्म का किया हुआ जो दुष्कर्म है उसका भोग तो मुझे इस जन्म में भुगतना ही होगा किंतु आज से मैं साधना शुरू कर देता हूं अर्थात कि अपने माइंड को रेगुलेट करना शुरू कर देता हूं तो भविष्य में आने वाला जो है उसमें मैं अच्छे कर्मों का अच्छा परिणाम भुग दूंगा अभी यहां पर दो बात होती है कि या तो है कि मैं अपने कर्मों को रेगुलेट करूं मैं दुष्कर्म ना करूं सुकर्म करूं यह एक है दूसरा है कि मैं साधना करूं भले चाहे अपने कर्म को रेगुलेट ना करूं थियोरेटिकली स्पीकिंग ऐसा हो सकता है कि मैं दुष्कर्म पर दुष्कर्म करता ही जाऊं किंतु साथ-साथ में मैं साधना भी करो तो इस कंडीशन में क्या होगा पहली कंडीशन तो समझ में बड़ी क्लियर आती है कि मैंने अपने कर्मों को रेगुलेट करना सीख लिया तो इससे कि नए-नए दुष्कर्म का प्रभाव अभी ज्यादा नहीं बढ़ेगा किंतु दूसरा जो केस है कि मेरा अपने मन पर इतना स्ट्रांग कंट्रोल नहीं है मेरा विल पावर इतना स्ट्रांग नहीं है कि मैं अपने को दुष्कर्म करने से रोक पाऊं मेरा मन जब भी यह भोग की चीजें है नजर के सामने आता है फट करके वह भोग ग्रहण कर लेता है और खास करके यह कामिनी और कांचन के रिलेटेड जो है अपने मन को जितना चाहूं जितना समझाऊं फिर भी वह इससे छूट नहीं पाता तो ठीक है चलिए जैसे मास्टर महाशय का ही ठाकुर के पास आने के बाद में भी बच्चा हुआ था तो ठाकुर बड़े नाराज हो गए थे अरे यहां पे आने के बाद में भी बच्चा हुआ है तो अभी क्या है कि मन के ऊपर में संयम नहीं है तो यह कर लिया किंतु दूसरी बात है कि ठाकुर के पास में आने के बाद में मास्टर महाशय ने साधना तो प्रारंभ कर दी अभी ये इंटरेक्शन कैसे होगा कि कर्म के ऊपर में तो आपका कंट्रोल नहीं है किंतु ऑन द अदर हैंड आप पैरेलल साधना भी करते जाते हैं तो इन दोनों का लेखा जोखा कैसे होगा कि एक समय ऐसा आएगा कि साधना करते-करते आपका विल पावर इतना स्ट्रांग हो जाएगा कि आप अपने कर्मों को कंट्रोल करना सीख लेंगे तो यहां पर यह बात है कि यदि हम ऐसा सोचेंगे कि साधना करके मैं कर्मों के फल को काट दूंगा तो वो नहीं होने वाला जैसे जै से मैं जितने जितने दुष्कर्म करता जाऊंगा मेरे मन के ऊपर में कंट्रोल ना होने की वजह से और इसको दुष्कर्म नहीं कहेंगे दुष्कर्म कहना ठीक नहीं है बस वही है कि अपनी इंद्रियां स्वाभाविक रूप से लोभ लालच की ओर भोग्य वस्तु की ओर जाती है तो एक नेचुरल फिनोमिना है तो व जाती रहेगी और उसका परिणाम भी हमको भुगतना ही पड़ेगा जैसे ठाकुर कहते हैं ना कि मिर्ची खाई है तो तीखा तो लगने ही वाला है आप ऐसा मान लीजिए कितना ही कुछ कर लीजिए मिर्ची का तीखा तो लगने ही वाला है तो यदि वो कर्म है लोभ के वसत किए हुए उसका परिणाम तो आपको भुगतना ही भुगतना है साधना का परिणाम क्या है पता है साधना का परिणाम यह नहीं है कि जो वो आपके कर्मों को काटेगा साधना आपके मन को विल पावर को स्ट्रांग करती है इस विल पावर को स्ट्रांग करके आप अपने कर्मों को डायरेक्ट करेंगे यही साधना का प्रभाव है साधना एक्चुअली कर्म को नहीं काटता ये देखना है कर्म या कर्म की ये जो यात्रा है उसको नहीं काटेगा साधना आपके मन को इतना स्ट्रांग करेगा कि भविष्य में आने वाले जो कर्म है वह अभी आपके हाथ में रहेंगे पूर्व कर्म का भी जो हिसाब है वह भी हमको चकत है आज मैं भले चाहे साधना कर रहा हूं आज भले ही चाहे मैं साधु के कपड़े पहन के बैठा हूं मेरे मन में काम विकार यदि प्रकट हुआ तो उसका परिणाम तो मुझे फिर भी उतना ही भुगतना है जदी मैं अपने घर में बैठा होता पेंट शर्ट पहन के तो उसमें कोई फर्क नहीं पड़ा मेरे जो कर्म है इरेस्पेक्टिव कि मैं कहां पर हूं क्या हूं आपको उसका फल इक्वली भुगतना है मैं संसार में होता तभी मुझे उस कर्म का फल वैसे ही भुगतना था आज मैं ठाकुर के शरण में हूं ठाकुर के दरबार में हूं ठाकुर के शरणागत हूं फिर भी उसी टाइप का जो दुष्कर्म किया तो उसका वही परिणाम मुझे भुगतना है कम कुछ नहीं होने वाला है यहां पर आने से फायदा यह होता है साधना करने से मैं ऐसा नहीं कि राम कृष्ण मिशन में साधना करने से फायदा यह होता है की एक विवेक दृष्टि जागृत होती है कि भाई यह कर्म करना अच्छा है यह कर्म करना बुरा है तो उस विवेक दृष्टि से फिर मैं अपने जीवन को रेगुलेट करता हूं वही एक फर्क है अदर वाइज में इक्वल पाप कर्म साधु होकर के साधक होकर के संसारी होकर के करूं वो सब फल एक ही मिलने वाला है साधना उसके ऊपर में कोई फरक असर नहीं डालने वाली वो कौन से ऋषि का एक है उदाहरण इतनी सारी तपस्या कर दी फिर राजा ने पकड़ कर के वो जो थंबे प बिठा दिया उनके वो फिर थंबे व पूरा उनके शरीर में प्रवेश करता जाता है उनको मारता जाता है बड़ी ही पेनफुल टॉर्चर है यह तो किसी ने पूछा कि अरे इतनी साधना करने के बाद में इस ऋषि को इतना भयावह टॉर्चर क्यों सहन करना पड़ता है तो किसी ने बताया कि जब वह पिछले जन्म में किसी एक कीट को पकड़ करके उसके शरीर में इस तरह से कांटा भोक दिया था तो इसका परिणाम इनको भुगतना पड़ रहा है तो वो जो किया था वोह तो भुगतना ही है वह कटने वाला नहीं है ईश्वर की कृपा से शायद कटेगा साधना से नहीं कटेगा डीएनए के द्वारा क्या होता है डीएनए के द्वारा वहन होता है अपने यह शरीर को चलाने के लिए जो कुछ गुणधर्म चाहिए वह संस्कार वहन होता है सूक्ष्म शरीर के द्वारा राइट अर्थात की मेरे भीतर में दो तरह के डीएनए है एक तो फिजिकल डीएनए है और दूसरा है यह सूक्ष्म शरीर रूपी डीएनए है यह सूक्ष्म शरीर रूपी डीएनए उसमें से मेरे संस्कार आए हैं और यह फिजिकल डीएनए जो है उसमें से यह देह को चलाने के लिए मेरे बाल का कलर क्या होगा मेरी आंखों का कलर क्या होगा वह सब यह स्थूल डीएनए से आया है इन्हेरीट शब्द गलत है इन्हेरीट शब्द गलत है स्वामी जी ने जैसे कहा कि सूक्ष्म शरीर एक के बाद एक देह स्थूल देह धारण करता रहता है ऐसा है माने ऐसा नहीं कि यह देह बनने के बाद में इसमें सूक्ष्म शरीर आता है सूक्ष्म शरीर एक्चुअली खोजता है कि मुझे किस तरह का देह धारण कर पाएगा उस पशु योनि में जाएगा ना कि व मनुष्य योनि में जाएगा ना कि देव योनि में जाएगा उसकी शक्ति के अनुसार वह देह धारण करता है