Skip to transcript
ClassesSaradakosh

Sri Ramakrishna Teachings ·

Sri Ramakrishna : Life and Teachings : English & Hindi : 18 Jan 2023

Sri Ramakrishna as We Saw Him : Swami Adbhutananda 18 Jan 2023

adbhutanand जी महाराज से thethol भी लर्न था हो ठाकुर पास आवे आफ्टर मिडनाइट एंड हो मदर कम तू ठाकुर रूम एंड श्री राइड आउट ओनली वंस बट नॉट अगेन सो डेट एंटर्स सो डेट हो ठाकुर वास क्रीटेड इन काशीपुर क्रीमेशन ग्राउंड एंड व्हेन ला तोमर एबल तू अटेंड डेट क्रीमेशन इत्सेल्फ बट व्हेन ही वेट देयर लेटर डेट इवनिंग ही फाउंड डेट शशि महाराज वो सीटेट नेअर्बी थिएटर वास स्टिल बर्निंग डेट फ्लेम ऑफ ठाकुर्स पार्ट ही वो शरीर इट वाज तिल पर हब्स बर्निंग एंड देयर ही सो डेट शशि मार सीटेट विद अन फैन इन हिज हैंड एंड दें शरद महाराज एंड स्वामी विवेकानंद जो कंसोल है एक्चुअली एवरीवन वेयर फीलिंग पेन बट पेन एंड सफरिंग ऑफ शशि महाराज वो सो इंटेंस डेट ही नीडेड तू बी एंड दें रिटर्न दे कलेक्टेड डिशेज ऑफ ठाकुर फ्रॉम डेट बर्निंग फायर एंड दें पुट इट इन अन कलर्स एंड द प्लेस हिट कलर्स ऑन ठाकुर स्पोर्ट्स लेटर ऑन एवरीवन विल डिप्रैस दे ठाकुर कम एंड डीड ऑल दिस लीला एंड गिरधर ऑल दिस देवोतीस बट नौ व्हाट ठाकुर हस पास्ड आवे व्हाट विल हैपन तू डी संग ऑफ ठाकुर सो देयर थिंकिंग लाइक दिस एंड सुद्दनली उपमा कम एंड सी इस से इट मदर मैन शारदा हेडर विज़न डेट ठाकुर कम एंड गिव हर दर्शन इसे डी ट्रेडीशन अमोंग हिंदू विडो मदर गोइंग तू रिमूव हर ब्रेसलेट इन बैंगल्स बट ठाकुर केन एंड हेल्ड हर हैंड एंड सेल को द तो दिस इस व्हाट ही सेड इन बंगाली डट वेयर हैव आई गान आई एम राइट हर आई हर वैन तू अंदर लोकल अत्तरा imliving अमित यू अमोंग यू ऑन अर्थ इत्सेल्फ इट इस जस्ट डेट यू कैन नॉट सी मी बिकॉज आई हैव गान फ्रॉम वैन रूम तू अंदर रूम सीन आपको इस विज़न मदर लेट डेट बंगले रेमन ब्रेसलेट रेमैन ऑन हर हैंड एंड व्हेन गोलाप गिव डीज गुड न्यूज़ ऑफ ठाकुर्स दर्शन तू आधार देवोतीस दे बिकम सो हैप्पी यस ठाकुर लेकिन ओनली यस्टरडे यू नो डेट इन गुजरात ऑस्ट्रेलिया सीड एंड दें यू स्विंग आ इट इस कॉल्ड अन झूला अन बांग्ला ता बोले झोला गुजराती मैन के हिचको तो दिस स्विंग हिज बिन इंस्टॉल्ड इन monkswater एंड मैसेल्फ एंड सैम आदर मोंक सी सीट देयर ऑन दिस रिंग आफ्टर नॉन आफ्टर लंच एंड विद डिस्कस समथिंग जनरल थिंग्स सो ओनली यस्टरडे व्हेन सी वेयर सीटेट विद डी स्विंग एंड आई टोल्ड समवन टोल्ड डेट इन वैश्णविज्म देयर इस अन वेरी नाइस ट्रेडीशन ऑफ टेकिंग ठाकुर एंड सहित हिम ऑन डी स्विंग एंड गिव हिम डेट्स सोलह के ऊपर में ठाकुर को बिठाकर के उनको वो जो झूला खिलाना ऐसा वैष्णव मंदिरों में ऐसा होता है हमने देखा है तो हमारे यहां पर सी डोंट गेट ठाकुर तू स्वीट बट अत लिस्ट देयर इस अन सर्विंग ठाकुर इसे इट ठाकुर हिमसेल्फ इस प्रेजेंट ऐसे सी आर सर्विस लिविंग ठाकुर डेट इस अन वेरी इंपॉर्टेंट पार्ट ऑफ अवर साधना सी डोंट जस्ट बिलीव डेट ठाकुर इस हेयर इन डी टेंपल सी डोंट जस्ट सेड इट ठाकुर इस प्रेजेंट इन डेट स्टैचू डेट इमेज फॉर डेट फोटोग्राफ सी बिलीव इट ठाकुर इस प्रेजेंट इन हिज बॉडी इत्सेल्फ एंड सी सर्व हिम आगे इट हापुड़ इस प्रेजेंट सो डेट इस हो सी यू नो शो हिम दीपक इन डी मॉर्निंग बिकॉज व्हेन समवन वेड्स अप इन अन एल्डर असिएंट टाइम्स व्हेन देयर वैसे नो इलेक्ट्रिसिटी सी गावे थे डेट लेंथ सो दिस मंगल आरती इस डेट सिंबॉलिज्म ऑल दिस पूजा एंड आरती सर सिंबॉलिज्म ऑफ सर्विंग अन ह्यूमन गो सो देव वाले अप इन डी मॉर्निंग सी शो डेम लैंप दिस दीपक एंड दें सी यू नो लाइट दिस अगरबत्ती दिस दो एंड दें सी ऑफर डेम फ्लावर्स एंड ऑफ फूड एंड बाल भोग शरबत एवरीथिंग इस गुड इसे लिविंग अमोंग उस इन अन ह्यूमन फॉर्म सो दिस इसे अन थ्योरी दिस इस डी फिलासफी ऑफ वरशिपिंग ऑफ गोद इन अवर टेंपल स्पेशली दिस इस अन vaishyavar ट्रेडीशन मच ऑफ डेट हज बिन अडॉप्टेड इन अवर ऑर्डर इन बेलूर मठ अलसो शो हुक्का तो ठाकुर्स बेडरूम एंड डी ऑफर इट तू ठाकुर निरंजन शशि गोपाल दादा एंड tarakested काशीपुर दे ऑन डी डेट आपको नेट डी नेक्स्ट डेट ठाकुर वास क्रीटेड थिस मॉनेस्टिक डिसीप्ल दिस यंग बॉयज निरंजन वो निरंजनानंद जी लेटर ऑन शशि और कृष्णानंद जी गोपाल दादा जी tarakvas महापुरुष महाराज शिवानंद जी द stredit काशीपुर गार्डन हाउस इत्सेल्फ मदर मैन शारदा योगिन एंड मी तू गो तू कोलकाता तू कलेक्ट फूड एंड मटेरियल फॉर डी वरशिप ऑफ ठाकुर मदर अलसो डिसाइडेड सी विल वरशिप ठाकुर एंड सहित ऑफ दिस बॉयज दे यूज्ड तू ऑफर फ्लावर्स एंड थिंग्स लाइक डेट बट सी जनरली थिअरीज वेरी नाइस इंसीडेंट सी डोंट जनरली वरशिप पर्सन हु इस लिविंग एंड व्हाट हैपन वैन दे ठाकुर वाज इन काशीपुर एंड ही वाज सफरिंग फ्रॉम कैंसर एंड इट हिट टाइम्स सैम देवोतीस वेट तू दक्षिणेश्वर तू हैव दर्शन ऑफ ठाकुर बट व्हेन दे फाउंड दे ठाकुर इस नॉट प्रेजेंट इन दक्षिणेश्वर ठाकुर तू डी ठाकुर्स फोटोग्राफ व्हेन मदर कम तू नो अबाउट दिस इन काशीपुर सी वाज वेरी फाइटर बिकॉज इट इस सेड डेट व्हेन यू वरशिप एंड लिविंग पर्सन इन हिज इमेज दिस पर्सन विल नॉट पर हेल्प्स लाइव लॉन्ग सो देयर इस देयर इस सेइंग समथिंग लाइक दिस सो उधर बिकम वेरीफाइड एंड सो वीर जनरली व्हेन पर्सन इस अलाइव सी डोंट वरशिप इस फोटोग्राफ्स डेट इस कंसीडर्ड नॉट समथिंग गुड बट सी वरशिप डी लिविंग पर्सन हिमसेल्फ इन दिस इसे डी फर्स्ट टाइम डी फर्स्ट दे आफ्टर डेट ठाकुर वास क्रीटेड डी नेक्स्ट दे वरशिप ठाकुर इन घाट इन बट इट इसे अन फोटोग्राफ डी कुक एंड आफ्टरवार्ड्स राम नाम वो सब दें एवरीवन एक्सेप्ट गोपाल दादा तारक एंड मी डेट इस लेटर लेफ्ट फॉर देयर फॉर्म्स दिस गोपाल दादा हेड नो होम तू गो बैक तू तारक मिंस महापुरुष महाराज इन लाटू दे हेड नो होम्स तू गो बैक सो एवरीवन एल्स गो बैक तू देयर फॉर्म्स लेटर काशीपुर गार्डन हाउस इस नौ फिनिश एंड यू शुड वेकेट डी हाउस एंड इट एंड एवरीवन थॉट डेट ठाकुर गदर evriven क्रीटेड दिस फॉर्म दिस संघ एंड नौ बिकॉज हाउस होल्डर वेस्ट नॉट विलिंग तू पे डी रेंट ऑफ दिस काशीपुर गार्डन हाउस व्हाट विल हैपन तू डी संघ इस फॉर्म्ड की ठाकुर देयर इस वेरी नाइस स्टोरी बिहाइंड दिस सी विल कंटिन्यू डिस्कशन टुमारो टुडे अच्छा फॉर हिंदी आई वांटेड तू स्टार्ट बिकॉज आई मुझे लगा की thamrutham को स्टार्ट करना चाहिए मैं खुद चाहता हूं की कथामृत का क्लास लेना काफी समय से मैंने हिंदी में प्रथम मंगाया भी है 1 मिनट में लेकर

श्रीरामकृष्ण कथामृत : प्रथम दर्शन 18 Jan 2023

आई हैव मेरे पास में है रामकृष्ण kathamurth हम लोग कुछ दिन के लिए तथा अमरूद का पाठ करेंगे क्योंकि क्या है की इस तरह से ठाकुरमार स्वामी जी मतलब ये जो विभिन्न तरह पकवान है ठाकुर को ठाकुर एक बढ़िया से उदाहरण देते हैं की यदि आपके पास में शहनाई आती है तो आप किस तरह की किस तरह का राग या रागिनी बजाएंगे क्या आप सिर्फ एक ही तरह का राज बजाएंगे तो अब बोर हो जाएंगे ठाकुर खुद कहते हैं की मैं शहनाई के विभिन्न राज रागिनी बजाऊंगा जैसे की मुझे भी आनंद मिले सुनने वालों को भी आनंद ले रहे तो ऐसे ही मैं बीच में इस तरह से टॉपिक चेंज करता हूं जिससे हम सबको थोड़ा सा एक कुछ नया सीखने को मिले मुझे भी कुछ नया पढ़ने को मिले अभी कथामृत में हम प्रथम पढ़ा है उसकी शुरुआत में बहुत ही अच्छा वर्णन है कालीबाड़ी दक्षिणी ईश्वर मंदिर का की किस तरह से हंस कुकुर कहां पे है वो पंचवटी कहां पे है गंगा किस तरह से बा रही है मंदिर है तीन तरह के मंदिर है तो गंगा के किनारे को लाकर के शिव मंदिर है और फिर महाकाली का मंदिर तो ही है सबसे बड़ा किंतु पास में ही राधाकांत अर्थात भगवान विष्णु का मंदिर है तो इस तरह से कालीबाड़ी का एक बहुत ही सुंदर वर्णन जो है वो कथामृत की शुरुआत में किया गया है मैं यहां पर क्या करूंगा की कथामृत का वह जो कालीबाड़ी का वर्णन छोड़ करके सीधा में प्रथम दर्शन से शुरू करता और बीच-बीच में जब भी थोड़ा सा समय मिलेगा वो एक एक स्थल जिसके के बारे में मास्टर महाशय वर्णन करते हैं वह लेकर के थोड़ा सा हम देखेंगे की किस तरह से हंस कुकुर में वह हम देख रहे हैं की मास्टर महाशय नरेंद्र को मिलते हैं और फिर नरेंद्र उनको ठाकुर कहते हैं की आप दोनों लोग इंग्लिश में वार्तालाप करो मैं ठाकुर का ऐसा था की वो उनको भी ये माने क्या है की ही हेड ह्यूमर्स नेचर एक तो एक विनोद प्रिया उनका स्वभाव था तो उनको ये जो नए नए एक्सपीरियंस है की हान उनके जो शिष्य हैं ये जो लड़के लोग उनको मिलने के लिए आते हैं किसकी क्षमता कितनी है किसकी शक्ति कितनी है वो ये सब परख करते द और उनकी शक्ति के अनुसार बाद में उनको तो पता है की रामकृष्ण संघ का गठन होगा तो संघ में किसको क्या स्थान मिलेगा इसका क्या महत्व होगा वो ठाकुर खुद निश्चित करके गए द ठाकुर ने खुद ठीक किया था की नरेंद्र जो है वो संघ का नेता होगा तो यह सब शक्ति की परख दूसरे की साधना कहां तक पाहून है यह सब चीज के लिए टेस्ट करने के लिए ठाकुर बीच-बीच में इनसे डिबेट वगैरा करवा देते द हान तुम इसको यह प्रश्न करो तुम उसका यह उत्तर दो तो मास्टर महाशय को बोले द की नरेंद्र कैसा लड़का है थोड़ा सा टेस्ट करके बोलना तो हान स्पून के किनारे ये जो बढ़िया से छोटा सा तालाब है दक्षिणेश्वर काली मंदिर के संपूर्ण मास्टर महाशय नरेन को मिलते हैं दोनों के साथ बात होती है तो ऐसे ही कथामृत के भीतर में कौन से प्रसन्न कहां पे है वो जगह को लेकर डिस्कशन हम थोड़ा बाद में करेंगे आज मैं प्रथम दर्शन से शुरू कर रहा हूं की मास्टर महाशय आपको शायद पता होगा बहुत लोग जो कथामृत पढ़ते हैं की मास्टर महाशय एक स्कूल के टीचर द और वैसे तो मा किया था तो मा उसे समय मैं करना मतलब थोड़ा उसका वैल्यू भी था तो मा किए द टीचर द और काफी इंटेलेक्चुअल भी द अपने फोन राइट एंड वह द की फिलासफी और जो बी है वगैरा स्टडी भी किया था तो यह रिलिजियस लिटरेचर कैसे लिखते हैं उसका स्ट्रक्चर कैसा होना चाहिए वो सब उनको अच्छे से आइडिया था अभी मास्टर श्री रामकृष्ण को मिलने से पहले मास्टर महाशय जिनका नाम था महेंद्र नाथ गुप्त तो उनका ऐसा हुआ की वो उनके घर में कुछ समस्या है चल रही थी और उनकी बीवी के साथ में शायद कुछ अनबन हो गया था ऐसा कुछ डोमेस्टिक प्रॉब्लम था उनके घर में उनके पिताजी के साथ थोड़ा झगड़ा भी हुआ था और घर छोड़ के निकल गए द और एक अपना एक दूसरा घर लेकर रह रहे द तो ये डोमेस्टिक प्रॉब्लम की वजह से वो इंट्रोवर्ट द अपने को इजीली एक्सप्रेस नहीं कर पाते द तो जैसे इंट्रोवर्ट लोगों का रहता है क्या होता है की कुछ भी छोटी-छोटी समस्या आती है सिर्फ बहुत ही वो मतलब कष्ट में पद जाते हैं बड़ा ही उनको दुख होता है तो फिर उनको एकदम एक्सट्रीम सॉल्यूशन खोजने में चले जाते हैं तो उन्होंने सोचा मैं सुसाइड कर लूंगा जैसे सु थॉट्स उनके माइंड में द उसी समय उनके एक मित्र उन्होंने कहा चलो वहां पे गंगा के किनारे एक परमहंस रहते हैं देख के आते हैं उसको और सुना है बहुत सुंदर बदन भी है तो रसमणि का तो मासूम ने सोचा अरे चलो बगान देख के आते थोड़ा बहुत लोग डिप्रेशन में हूं और डिप्रेशन थोड़ा सा लाखों हो जाए थोड़ा सा फल का हो जाए तो ऐसा सोचकर वह फिर एक क्यूरियोसिटी में रहता है परमहंस है तो क्या है पता नहीं किस तरह से रहता होगा कहानियां तो बहुत बहुत सारी सुनी है तो देख के आते हैं चलो किस तरह का परमहंस है तो ऐसा एक आउट ऑफ क्यूरोसिटी एंड आउट ऑफ लिटिल चेंज ऑफ उनके जो मित्र द दोनों दक्षिणेश्वर आए दक्षिणेश्वर में आकर के जैसे ही उन्होंने ठाकुर का दर्शन किया वो प्रथम दर्शन में ही वो संपूर्ण रूप से जन्म जन्मांतर के उनके लिए जो समस्याओं का जो प्रवाह चल रहा था उन्होंने समझ गए की ठाकुर ही उनके समस्याओं का निराकरण कर सकता है और इस एक्चुअली उनको पहले पहला पहली बार मिलने को आए दूसरी बार मिलने को आए तीसरी बार जब आए तो ठाकुर ने एक बहुत अच्छी बात भी कही थी की आप मोर जो है पिको उसको एक समय यदि आप अफीम की गोली खिला देते हैं तो वो सब समय उसी समय वो अफीम की गोली खाने के लिए ए जाएगा क्योंकि उसको हैबिट हो गया है तो वैसे ही मास्टर महाशय जब ये बात सुनते बाकी लोग हंसना शुरू कर देते हैं तो मास्टर को लगता है की ना ठाकुर ठीक ही तो बोले है इस तरह से एक ईश्वर नाम संकीर्तन की एक इस तरह की हैबिट बना दी है की किंतु अफीम की गोली खाने से सर्वनाश होता है यहां पे आप जो है समग्र बहुत सागर टर जाते हैं अपना जो जीवन है वो आशीर्वाद मैं हो जाता है तो इस तरह से ठाकुर के साथ में मास्टर महाशय का प्रथम दर्शन कैसे हुआ वह हम यहां पर पढ़ते हैं मास्टर महाशय लिखते हैं प्रथम दर्शन और इसमें भागवत का एक श्लोक भी badhiyatam kalmsaap हम श्रवण मंगलम shrimadam भुवी गृहमंत्री अर्थात आपका कथामृत का श्रवण करने से ये जितने भी ज्ञान पिपासु लोग हैं उनके मैन में जो है संतोष और तृप्ति से उनकी बिपाशा वह शांत हो जाएगी अभी मास्टर महाशय लिखते हैं श्री गंगा जी के पूर्व तट पर कलकत्ते से कोई छह मिल दूर दक्षिणी स्वर में मैन काली का मंदिर है यही भगवान श्री राम कृष्ण देव रहते हैं वसंत रितु है 1882 ई का फरवरी माह श्री राम कृष्ण के जन्मोत्सव के कुछ दिन बीट चुके हैं श्री केशव चंद्र सेन और जोसेफ यूके के साथ 23 फरवरी के दिन श्री राम कृष्ण जहाज में बैठकर घूमने गए द इसी के कुछ दिन के बाद की घटना है संध्या का समय था अच्छा यहां पर एक ही एक बात है की ठाकुर को पता है की हमको की जब वह साधना कर रहे द कोलकाता में दक्षिणी शोर में रहकर के तो जितने साधक लोग द जो एक निष्ठ आचार्य साधक द जो की हमारे हिंदू परंपरा को फॉलो करते हैं ऐसे साधक और तपस्वी फकीर सन्यासी वे लोग तो उनको मिलने के लिए बहुत आते द किंतु यह जो एजुकेटेड मिडिल क्लास जो है कोलकाता का उसमें लोगों में जैसे हम लोग हैं आजकल के तो इन लोगों में ठाकुर के बारे में ज्यादा कुछ पता नहीं था वो लोग रामकृष्ण भी होंगे भी नहीं पता नहीं कुछ पता नहीं था उसे समय यह पहली बार जो है ठाकुर ने सोचा की अभी ठाकुर को तो आदेश मिला था निर्विकल्प समाधि में कितनी भाव मुख्यतः माने कहा था अर्थात बॉर्डर है जो होता है और यह जागृति की जगत उसकी बॉर्डर सीमा है सीमा रहना अर्थात ठाकुर जब चाहे समाधि में भी चले जाते जब चाहे वो भक्तों के साथ में ईश्वर के नाम गुणगान संकीर्तन भी कर पाते तो वह जब इस तरह से यह रह रहे द दक्षिणेश्वर में तब उन्होंने सोचा की कोलकाता के जितने भी ख्यात नाम लोग हैं उनको जाकर के मिलकर के मैं भगवान का नाम सुनाऊंगा मैन का नाम सुना होगा ऐसा करके उन्होंने सोचा और उसे एक दिन उन्होंने ठीक किया की ये केशव सेन तो जो है वो तो बड़ा ही प्रख्यात है बड़ा ही फेमस है चलो वो तो इस तरह से ब्रह्म समाज का है प्रवचन वगैरा देता है चलो मैं जाके उनको मिलता हूं तो ठाकुर और हृदय जाकर के केशव सेन को मिलने के लिए गए उसे समय केशव सेन अपने वो जो अनुयायी है ब्रह्मो समाज के उनके साथ में मिलकर के एक आई थिंक बेलगारिया ना की ऐसी कोई जगह है जहां पर इन लोगों का अधिवेशन होता है वहां पर वे लोग वो एक अधिवेशन कर रहे द ब्राह्मण समाज का और वह का समय था तो वह सब वहां पर कुकुर मतलब यह जो तालाब होता है तालाब में स्नान कर रहे द यह जो सब ब्रह्मो समाज के अनुयायी और ये केशव से उसे समय ठाकुर वहां पर पहुंच गए वो ठाकुर और उनका भतीजा हृदय ठाकुर की सेवा करता था उनके साथ में रह गए तो वहां पर गए और केशव भरदे ने जाकर के कहा की मेरे मामा आपको मिलने के लिए आए हैं वो कालीबाड़ी में रहते हैं भगवान के साधक है और आपसे ईश्वरीय बात करना चाहते हैं ऐसा कर करके वो हृदय भीतर में जाकर के केशव को मैसेज दिया केशव ने कहा ठीक है लेकर उनको मैं बात करता हूं अभी वह लोग को लगे काली का पुजारी है अनपढ़ होगा वह सोचा होगा की केशु कोई बड़ा आदमी है तो उसके साथ बात करके कुछ डैन दक्षिणी हम ए गए हैं तो कुछ अपना उद्धार हो जाएगा या तो फिर उससे कोई आध्यात्मिक सिख लेंगे ऐसा करके कुछ आए होंगे ऐसा केशव ने शायद सोचा होगा और उनके साथ में जो है उन्होंने भी शायद ऐसा सोचा होगा तो ठाकुर है तो जैसे ही केशव ने ठाकुर को देखा उनके मैन में sadanasionally एक ऐसा एक पवित्र भाव आया देखिए ठाकुर के चेहरे पे जो ईश्वरीय आनंद ईश्वरीय दर्शन की यह जो एक तृप्ति और ये जो एक कहते हैं की समाधि की शांति प्रशांति जो चेहरे पे झलक के आती है वो देखकर के ही वो समझ गई एक ही कोई सामान्य आदमी नहीं है कोई सामान्य व्यक्ति नहीं है उसके बाद में केशव वगैरा सब साथ में बैठे और ठाकुर ने बोलना शुरू किया और हमको पता है की यह फ्रॉम डी देवबंद आखिरी दिन तक ठाकुर और केशव जब मिलते द तो ठाकुर बोलते द केशव सुनते द सामने एक शब्द भी नहीं बोलते द चुपचाप सन लेते द क्योंकि उनको पता है की ठाकुर का जो ज्ञान है अनपढ़ पुजारी का वो भले चाहे ब्रिटेन में जाकर के ब्रिटेन में जाकर के तीन विक्टोरिया क्वीन विक्टोरिया खुद के शो सेंड का सम्मान की थी वह सब उनके सामने ठाकुर के सामने केशव बहुत कटी हम कुछ नहीं वह केशव को पता था तो चुपचाप एकदम शांति से ठाकुर एकदम anandpurna ठाकुर के उपदेश सुनते हैं तो यह फ्रॉम डी दे वैन ऐसा हुआ था और बाकी के लोग जो द वो केशव के अनुयायी वो बड़े परेशान हो रहे हैं अरे ठाकुर ये अनपढ़ पुजारी बोल रहा है बोल रहा है उपदेश दे रहा है केशव आनंद से उपदेश सन रहे हैं ये तो ब्रह्म समाज का नाम डूब जाएगा इस तरह से जल्दी लोगों को पता चलेगा तो वे लोग इस तरह से कंप्लेंट करते द किंतु केशव इस पर ध्यान नहीं देते द उसी समय ठाकुर ने कहा की देखो केशव को कहा सबके सामने ये तुम्हारी पूछ जो है वो निकल गई है तो यह सुनकर के बाकी लोग एकदम जोर से हंसना शुरू कर दिए बोला की देखो ये कितनी भी अच्छी बात करता हो अच्छी तो ये गरीब ब्राह्मणी है क्या कुछ utpatan बोल देगा तो सही में ऐसा उटपटांग बोल दिया तो कहा नहीं नहीं अरे सुनो सुनो ये क्या उसका एक्सप्लेनेशन कुछ होगा बोला ठाकुर को की महाशय बताइए आपने ऐसा क्यों कहा की मेरी पूछ गिर गई है जो ठाकुर ने कहा जो जो मेडक जो होता है वो उसकी जब तक पूछ होती है तब तक अर्थात वो जो टैडपोल होता है तब तक वो सिर्फ पानी में रहता है किंतु पूछ गिर जाती है ठीक से वो मेंढक हो जाता है फ्रॉग हो जाता है तो पानी में भी रह सकता है वो जमीन पे भी रह सकता है तुम्हारी भी पूछ निकल गई है अर्थात तुम जो है साधना में तुम्हारी इतनी सिद्धि प्राप्त है की तुमको अभी जंगल में जाकर के या ऐसे एकांत में साधना करने की जरूरत नहीं है तुम्हारी साधना की सिद्धि की वजह से तुम संसार में रहकर के भी ईश्वर का नाम लोग इससे तुमको हनी नहीं होगी तो ये सन करके केशु इतना मतलब प्रसन्न हो गया की हान ये एक सही सही एक ऐसे महापुरुष है जो की अपने जो कर्म का यह जो पूरा प्रवाह है पहले से ही समझ लेते हैं की पिछले जन्म में उसके पिछले जन्म में क्या किया इस जन्म में हमने क्या साधना किया नहीं की यह सिर्फ मुंह पे हम दिखावा कर रहे हैं और हमारे अगले जन्मो में क्या होगा हमको मुक्ति कब मिलेगी यह सब ठाकुर के अपने जैसे वह जो चलचित्र देख रहे हैं उसे तरह से स्पष्ट हो जाता था तो यह केशव से ठाकुर के पास बार-बार आना शुरू कर दिए पहली बार ठाकुर मिलने को गए उसके बाद से केशव सेन खुद अपने ब्रह्म समाज के अनुयायियों को लेकर के दक्षिणेश्वर आते ठाकुर से मिलते उनकी बातें सुनते और ठाकुर के साथ भजन कीर्तन करते हैं तो केशव सैन ने अपने जो समाचार पत्र है वो ब्राह्मण समाज की ये जो पत्रिका है न्यूज़ पेपर वगैरा उसमें उन्होंने लिखना शुरू कर दिया की हान हमने दक्षिणी ईश्वर के परमहंस मसाई के दर्शन किए हैं मुलाकात की है और उनके भीतर में जो सरलता है ज्ञान का जो प्रकाश है ईश्वर के प्रति जो भक्ति है उनकी ये जो एक nishthaata है तपस्या और साधना के प्रति और जिस तरह से सहज रूप से उपमा देकर के वो हमको उपदेश देते हैं यह सुनकर के हम मंत्रमुग्ध हो गए हैं ऐसा करके केशव अपने समाचार पत्रों में लिख रहे हैं तो यह बढ़कर के फिर ये जो पहली बार ये जो मिडिल क्लास मिडिल एजुकेटेड मिडिल क्लास जो था कोलकाता का जो हम जैसे लोग हैं आज वो लोग जो है पहली बार ठाकुर के बारे में जाने और आउट ऑफ क्यूरियोसिटी ठाकुर को मिलने के लिए आना शुरू किया तो मास्टर mahashaydi केशव सेन के साथ परिचित द और केशव उनके कोई रिलेशन में भी द मास्टर महाशय की जो वाइफ थी उनकी और एक रिलेटिव वो जो एक ये थी लेडी उसके साथ में शायद केशव का मैरिज हुआ है ऐसा कुछ डिस्टेंट रिलेशन है मास्टर महाशय का केशव सिंह के साथ तो मास्टर महाशय को भी पता था की केशव इस तरह से ठाकुर के पास गए हैं और ठाकुर की बहुत प्रशंसा दी की है तो जब यह जो मास्टर महाशय का यह जो मित्र है वह जब ऐसा कहता है की चलो हम दक्षिणेश्वर जाते हैं परमहंस एक उसको मिलके आते हैं वहां गार्डन भी बहुत अच्छा है रसमणि का तो मास्टर महाशय को ऑलरेडी पता था है की हान इस तरह से परमहंस कौन है और किस तरह से उपदेश देते द तो वह सब सन करके जो है वे लोग दोनों दक्षिणेश्वर आए अभी प्रथम दर्शन में क्या होता है संध्या का समय था मास्टर ने अर्थात मास्टर अर्थात यहां पे हो गए मास्टर महाशय कथामृत के लेखक महेंद्र नाथ गुप्त मास्टर ने ठाकुर के कमरे में प्रवेश किया इसी समय उन्होंने श्री रामकृष्ण देव के प्रथम बार दर्शन की है उन्होंने देखा कमरा लोगों से भरा हुआ है सब लोग चुपचाप बैठे उनके बचाना मृत का पैन कर रहे हैं श्री राम कृष्ण तखत पर पूर्व की ओर मुंह किए बैठे प्रसन्न बदन हो ऐश्वर्या चर्चा कर रहे हैं भक्तगण फर्श पर बैठे हुए हैं मास्टर खड़े खड़े आश्चर्य मुक्त होकर देखने लगे अभी वह लिख रहे हैं किंतु कहीं पर मैं खड़े खड़े देख रहा हूं या मैंने यह प्रश्न किया की मैंने यह किया यह मैं शब्दों उन्होंने कभी उसे नहीं किया है ठाकुर खुद ऐसा ही उसे नहीं करते द ठाकुर कहते द इसने किया है या इसको खाना है अर्थात जो अनुभव है वो हम भाव को उन्होंने संपूर्ण रूप से तिलन चली दे दी है तो ठाकुर से मास्टर महाशय यह सीखे द की और जब कथामृत का पहला जो ड्राफ्ट था वो मास्टर महाशय ने नरेंद्र को स्वामी जी को स्वामी विवेकानंद को अमेरिका भेजा था उसे समय अमेरिका द तो ड्राफ्ट पढ़कर के स्वामी जी बहुत खुश हो गए और कहा की यह जो सोक्रेट्स के जो डायलॉग है वह ऐसा लग रहा है की प्लाटों ने लिखे हैं प्लेटो सोक्रेट्स का शिष्य था और सोक्रेट्स का ही में विजडम था तो प्ले स्टोर लिखते हैं किंतु उसकी पढ़कर के लगता है की प्लाटों ने अपने ही विचार अपनी ही व्यक्तित्व अपनी ही पर्सनैलिटी को ज्यादा प्रोजेक्ट किया है वजह सोक्रेट्स की किंतु आपने ठाकुर के बारे में लिखा है उससे ऐसा नहीं लगता की आप कहीं पे भी पिक्चर में है ऐसा लगता है की मास्टर मतलब ठाकुर स्वयं जो है वही उन्हें की पर्सनैलिटी उन्हें के उद्देश्य जो है प्रोजेक्ट हो रहा है तो ये जो अपने हिंदू परंपरा में जिस तरह से बायोग्राफी लिखते हैं और वेस्टर्न परंपरा में जिस तरह से लिखते हैं इन दोनों में ये मुख्य पार्थ किया है की यहां पे अपने यहां पे जो लेखक जो होता है बायोग्राफी का वो कहीं पे भी अपना जो व्यक्तित्व या अपने जो मंत्र दिया या तो अपनी जो पर्सनली वो उसको कहीं पे भी व्यक्त नहीं करता उसको छुपा के रखता है और यदि ठाकुर के साथ में जहां-जहां भी मास्टर महाशय का इंटरेक्शन हुआ है वो मास्टर करके अपने को कहते हैं की मास्टर ने ऐसा कहा कभी-कभी कहते हैं मोहिनी मोहन कभी-कभी कहते हैं मणि इस तरह से विभिन्न नाम लेकर के वो अपने को आईडेंटिफाई करते हैं तो कहीं पर यह नहीं कहते की मेरे साथ यह बात हुई या मैंने ये कहा तो मास्टर खड़े खड़े देखने लगे उन्हें ऐसा प्रतीत हुआ मानो साक्षात सुखदेव भागवत प्रसन्न कर रहे हैं तथा उसे स्थान पर सभी तीर्थ का समागम हुआ है अथवा मानो श्री चैतन्य देव पुरी धाम में रामानंद स्वरूप आदि भक्तों के साथ बैठकर भगवान का नाम गुंडन कर रहे हैं श्री राम कृष्ण का रहे द जब एक बार हरि नाम या राम नाम लेने से ही रोमांच होता है आंसुओं की धारा बहाने लगती है तब निश्चित समझो की संध्या दी कर्मों की आवश्यकता नहीं रह जाती तब करवट त्याग का अधिकार पैदा हो जाता है कर्म आप ही छूट जाते हैं उसे अवस्था में केवल राम नाम हरि नाम या केवल ओमकार का जप करना ही पर्याप्त है अर्थात देखिए बहुत सारे लोग सोचते हैं की मुझे साधना करनी है ईश्वर प्राप्ति करनी है या आत्म दर्शन करना है तो यह जो प्रकार के जितने भी कर्म है या तो हिंदू धर्म मेरे पर जितनी भी यह ड्यूटी जो है यह जो धर्म अर्थ कम यह जो सब मेरे मैन पे जो मेरे दल रहा है की मात्रा ऋण होता है पीटर ऋण होता है देवरान होता है गुरु ऋण होता है अर्थात इन लोगों के प्रति इनकी सेवा करने की जो मेरी फर्ज होती है धन अर्जन करना पड़ता है परिवार की रक्षा करनी पड़ती है परिवर्तन पालन पोषण करना पड़ता है यह जो सब कर्म के जो बंधन में जो हम रहते हैं तो मुझे ईश्वर का नाम करना है मुझे आत्म दर्शन करना है मैं यह सब छोड़ कर चला जाऊंगा और फिर एकांत में रहूंगा और ये सब नाम गुंजन करूंगा ठाकुर कहते हैं की यह तो है एक रास्ता है चलो की आपके भीतर में यह जो मुख्य जो है बहुत ही स्ट्रांग हो गया और अपने संसार छोड़ दिया वो शायद एक रास्ता हो सकता है किंतु ठाकुर यहां पर क्या कहते हैं की जो आपके जो विभिन्न कर्म जो है संसार का दायित्व निभाना के वो तभी छूट हुए जबकि ईश्वर का नाम लेने से आपकी आंखों में अश्रु निकल आए अर्थात ईश्वर के प्रति इतना प्रेम अपने हृदय के अंतर्मन से हो जाए की ईश्वर के साथ में एक अटूट नाता बन जाए एक अटूट रिश्ता बन जाए तभी जो है की आपकी जो सांसारिक दायित्व है वो अपने आप छूट जाते हैं आपको वो जोर करके छोड़ने की जरूरत नहीं पड़ती तो देखिए की मास्टर महाशय भी वो अपने सांसारिक समस्याओं से परेशान होकर के यहां पे आए द और सोचा था मैं सुसाइड कर लूंगा मैं ये सब jhameleon में से निकल जाऊंगा तो जैसे ही ठाकुर को सर्वप्रथम बार मिले तो आश्चर्य मिरेकल का सकते हैं की उनकी झूठ डोमेस्टिक समस्या थी जिससे बचने के लिए वो भाग जाना चाहते द उसी के बारे में ठाकुर का रहे हैं की यह जो सब कर्तव्य है तभी शेष होंगे जब ईश्वर के साथ में आपका एक अटूट गहन बंधन हो जाए आदर वाइस अब जोर करके छोड़ना चाहेंगे तो आप ही को कष्ट होगा आपके परिवारजनों को सारी चीतों को कष्ट होगा ऐसा नहीं करना उचित है तो जैसे ही पहली बार मिले मास्टर महाशय पहले ही बार में पहले ही उद्देश्य में ठाकुर ने उनकी समस्या का समाधान करती है आपने फिर कहा मैं ठाकुर ने फिर कहा संध्या वंदन का ले गायत्री में होता है गायत्री का ओमकार में ये जो हमारे हिंदू परंपरा है ब्राह्मण लोग जो है वो संध्या वंदना करते हैं संध्या और क्षत्रिय संध्या होती है सुबह को फिर शाम को दोपहर को भी होता है तो इस तरह से शाम को संध्या यह संध्या वंदना जो है वो ब्राह्मण लोग करते हैं मुझे पता नहीं कैसे करते हैं मैंने कभी देखा नहीं है मैंने तो सिर्फ पढ़ा है तो जो भी हो तो ठाकुर कहते हैं की संध्या वंदना में गायत्री मंत्र का जो पाठ करना एक बहुत ही अभिनय अंग है तो ठाकुर कहते हैं की अच्छा तरीका अच्छा तो त्रिकाल संध्या करते हैं तो गायत्री जो गायत्री पाठ है गायत्री मंत्र पाठ उसे संध्या का एक अभिन्न अंग है तो ठाकुर कहते हैं की जैसे जैसे ईश्वरीय साधना में हम आगे बढ़ते जाएंगे ये जो vidhivadi जो भक्ति है वो धीरे-धीरे करके जो संध्या वंदना है वो गायत्री मंत्र का पाठ करने से ही आपका कम हो जाएगा आपको यह जो घटकर करके या तो फिर ये जो उपकरण जो बाकी है उपकरण का व्यवहार करके पूजा नहीं करनी पड़ेगी और फिर यदि ईश्वर साधना में ईश्वर प्रेम में मैन और ज्यादा डूबेगा तो सिर्फ ओमकार का जप करने से ही आपकी संध्या जो है वो हो जाएगी अर्थात संध्या वंदना करने का फल जो है आपको प्राप्त हो अर्थात यह जो vidhivadi यह भक्ति से raganu का भक्ति की ओर जो है आपकी एक झरनी होगी अच्छा हम जैसे-जैसे पढ़ेंगे ये सब शब्दों का भी जो अर्थ है raganu का भक्ति क्या है vidhivadi अब भक्ति क्या है इसके बारे में भी वैसे आपको पता ही होगा बहुत कुछ किंतु हम भी और ज्यादा डिस्कशन इस सब के बारे में धीरे-धीरे करेंगे अच्छा तो आज के लिए इतना ही कल फिर से मिलता है ओम शांति शांति