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Swami Vivekananda's Macrocosm & Microcosm ·

ज्ञान योग स्वामी विवेकानन्द Cosmos Microcosm 23 Jan 2024

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ओ स्थापक यज धर्मस्य सर्व धर्मा स्वरूपने अवतार वरिष्ठ या राम कृष्णा यते नम तो ज्ञान योग पर बात कर रहे थे कॉस्मस माइक्रो कजम थोड़ा सा मैं पढ़ता हूं ट च इ सेल्फ लुमिनस कैन नॉट डिके लुमिनोसो लाइट कम्स एंड गोज जो सेल्फ लुमिनस है जो प्रकाश का स्रोत स्वयं है उसमें कभी भी प्रकाश में कमी नहीं होती अर्थात कि यह देखिए कि ऐसा हो सकता है कि पृथ्वी के ऊपर में दिन और रात होंगे किंतु सूरज के ऊपर में दिन और रात नहीं है सूरज पृथ्वी का प्रकाश का सोर्स है पृथ्वी का का खुद का प्रकाश नहीं सूरज हमको प्रकाश देता है तो जब हम किसी से उधार लेते हैं रुपया तो वह सामने वाला कभी हमको पैसा देगा भी सही और नहीं भी देगा व कथामृत में है ना कि मास्टर महाशय ठाकुर को लेकर के विद्यासागर के घर भवन जाते हैं तो वहां पर मास्टर महाशय विद्यासागर के बारे में जो डिस्क्रिप्शन लिखते हैं उसमें एक है कि विद्यासागर के टेबल पर क्या-क्या पड़ा है तो वहां कुछ पत्र पड़े पत्र में किसी स्टूडेंट ने लिखा है वह स्कॉलरशिप लेकर के विद्यासागर से स्कॉलरशिप लेकर के ब्रिटन गया है स्टडी करने के लिए अभी कुछ कारण किसी कारण वश तः कोई कारण से पैसा उसका खत्म हो गया तो विद्यासागर को वह लेटर लिखता है कि आप मुझे पैसा भेजिए वरना मेरा यहां पर रुकना कष्टकलम दिया है विद्यासागर को कि आपने मुझे मुझे जो सैलरी दे रहे हैं वह सैलरी अभी कम हो रही है क्योंकि मेरी बहन विधवा हो गई है और वह अपने पति का घर छोड़ कर के मेरे साथ में रहने के लिए आ रही है तो इसलिए आपको पैसा मेरा सैलरी बढ़ाना होगा तो जो लोग विद्यासागर से इस तरह से स्कॉलरशिप लेते हैं या तो विद्यासागर से सैलरी लेते हैं उनको सैलरी या स्कॉलरशिप कम पड़ जाएगी किंतु विद्यासागर खुद जो पैसा देते हैं सबको उसके पास में पैसों की कमी नहीं होने वाली है पैसों की कमी होगी ऑफकोर्स जद उतना खर्चा करेगा किंतु उसके पास एक लार्ज सोर्स ऑफ इनकम है तो ऐसा हम एक सामान्य रूप से उदाहरण दे सकते हैं तो वैसे जैसे कि सूरज के पास से पृथ्वी प्रकाश उधार लेती है या तो पृथ्वी सूरज के पास से प्रकाश लेती है तो सूरज के ऊपर में खुद में प्रकाश का कमी या बढ़ोतरी कभी नहीं होगा वह जैसे हजारों लाखों करोड़ों साल से उसको प्रकाशित हो रहा है वह प्रका शित होता ही रहेगा वही है पृथ्वी के ऊपर में जैसे पृथ्वी घूमती है तो जो साइड सूरज की ओर रहती है वहां पर दिन रहता है जो साइड उसके उल्टी ओर है वहां पर रात हो जाती है तो रात या तो दिन या तो फिर यह बादल का आ जाना या तो फिर यह चंद्र ग्रहण सूर्य ग्रहण हो जाना यह सब पृथ्वी क्योंकि सूरज के पास से प्रकाश उधार लेती है सूरज के पास से प्रकाश लेती है तो प्रकाश की कमी बढ़ोतरी पृथ्वी पर होगी सूरज के ऊपर में कहीं नहीं होने वाली तो स्वामी जी अब तक हमको यह बताते हैं कि किस आत्मा की अभी देखिए आजकल आप देखेंगे कि बहुत सारे लोग ऐसा एक अटेंप्ट कर रहे हैं कि यह स्पिरिचुअलिटी को साइंस के बेसिस पर कैसे समझाए खास करके यह प्रयत्न इसलिए शुरू हुआ है क्योंकि यह 14 15th सेंचुरी में जब यूरोप में में धीरे-धीरे करके सर्वप्रथम यह सब नई नई थिरी डेवलप होना शुरू हुआ कि हां यह इवोल्यूशन एक है एक आर्कियोलॉजी है पता चलता है कि अरे पृथ्वी का इतिहास तो करोड़ों करोड़ों साल पुराना है अभी यह बाइबल की तरह जो चार पा हज साल पुरानी पृथ्वी नहीं है तो क्रिश्चियनिटी और साइंस के बीच में एक बहुत बड़ी दरार आ गई अभी जब भारत में यह धर्म का पुनरुत्थान स्टार्ट हुआ तो बहुत सारे लोगों ने यह किया कि क्रिश्चियनिटी का जिस तरह से विज्ञान के साथ में झगड़ा है विज्ञान के साथ में मतभेद है हमारा हिंदू धर्म का नहीं है हिंदू धर्म विज्ञान के जो कांसेप्ट है उसको अपना लेता है और इसके ऊपर में इसको क्या कहते है ना कि फुलफिल करता है जो लास्ट स्टेप जो है वह साइंस नहीं ले पाएगा साइंस आपको पूरा यूनिवर्स बता देगा वह जो जेम्स वेब टेलिस्कोप है उसकी मदद मदद से स्पेस टेलिस्कोप उसकी मदद से आप 15 बिलियन लाइट इयर्स आप ब्रह्मांड में देख सकते हैं यूनिवर्स में देख सकते हैं क्वांटम डायनेमिक्स की मदद से आप छोटे से छोटे स्केल पर क्या हो रहा है वोह आप समझ सकते हैं किंतु बड़े से बड़ा स्केल और छोटे से छोटे स्केल के परे क्या है वहां पर साइंस फेल हो जाता है व्हाट इज द ट्रू नेचर ऑफ कॉन्शसनेस मनुष्य के भीतर में जो चेतना है उसका सही स्वरूप क्या है यह समझाने में साइंस फेल हो जाता है तो साइंस हमको बहुत दूर तक ले जाता है पूरा देखिए आज का मेडिकल साइंस आप देखिए कि यह कोरोना हुआ था तो वैक्सीन डेवलप कर दिया वह एमआरएनए सीक्वेंस करके तो ये एमआरएनए वैक्सीन जो है इट्स अ वेरी इफेक्टिव वैक्सीन यह जो डीएनए सीक्वेंसिंग है यह सब बड़ा ही पावरफुल मेडिकल टेक्नोलॉजी से जेनेटिक सीक्वेंसिंग जिसको आज कहते हैं डीएनए का एना िस करके यह लोग हमारे एकदम माइनोट माइक्रो लेवल पर जाकर के यह लोग हमारे बॉडी को मॉडिफाई कर सकते हैं वेरी पावरफुल टेक्नोलॉजी किंतु जब यह छोटे मोटे कहो ना कि ज्यादातर क्वेश्चंस कहो साइंस आपको उत्तर देने के लिए तैयार है और धर्म को साइंस का विरोध नहीं करना चाहिए वरना तो एक बड़ा ही डेंजरस परिस्थिति खड़ा हो जाएगा वह जो एक हज साल की गुलामी उसमें हम रहे कि विज्ञान को नकार दो साइंस जो कहता है वो सबको छोड़ दो और उसको उसकी बजाय धर्म जो कहता है उसको स्वीकार करो दिस इ अ वेरी डेंजरस थिंग अपना हिंदू धर्म है या तो फिर यह वेदांत है इट्स केप स्टोन ऑन साइंस केप स्टोन होता है पता है वो जब आप एक आर्च बनाते हैं ना आर्च अर्थात की एक आर्च यानी कि आर्च जैसे गेटवे होता है उसके ऊपर में हाफ सर्कुलर एक यह रहता है डोम जैसा तो उसके ऊपर में एक कैपस्टोन बिठाते हैं कैपस्टोन अर्थात कि यह जो हाफ सर्कल जो होता है वह कंप्लीट करता है व कैपस्टोन की वजह से वह सर्कल हमारे सर पे आकर के डोम अपने सर पे आ कर के नहीं गिरेगा तो ऐसा केप स्टोन की तरह अपना वेदांत है साइंस के भीतर में साइंस के जो लार्जेस्ट क्वेश्चन है जहां पर साइंस जाकर के रुक जाता है व कमी जो लास्ट स्टेप है वोह वेदांत लेता है वट इज बियोंड द स्मॉलेट एटम व्ट इज बियोंड द स्मॉलेट क्वार्क वट इज बियोंड द लार्जेस्ट गैलेक्सी एंड यूनिवर्स व्हाट इज बियोंड अवर ह्यूमन माइंड व्हाट इज द ट्रू नेचर ऑफ कॉन्शसनेस यह उत्तर अपने हमको वेदांत से मिलेगा किंतु यह जो अटेंप्ट है कि सर्वप्रथम वेदांत को विज्ञान के प्रकाश में रजू करना वेदांत के ऊपर में विज्ञान का प्रकाश डालना और वेदांत की थिरी को साइंस की लैंग्वेज में समझाना यह कार्य सर्वप्रथम स्वामी जी ने ने किया है इसके बाद में देखेंगे आप कि बहुत सारे इंडियन फिलोसोफर एक के बाद एक आते गए उसमें यह ओशो रजनीश कहो ना कि अरविंदो कहो ना कि यह जय कृष्णमूर्ति कहो ना कि आजकल भी बहुत सारे ऐसे इंडियन वेदांतिका हैं और अभी आप देखेंगे कि इवन विदेश में भी जो लोग की ईस्टर्न स्पिरिचुअलिटी से बहुत ज्यादा प्रभावित है जैसे कि फ्रिड्स ऑफ कपरा का एक किताब है द टेओ ऑफ फिजिक्स टेओ अर्थात की वो टेओ इजम या तो फिर ताओ इजम ये चाइनीज एक फिलोसोफी है तो टेओ ऑफ फिजिक्स अर्थात की फिजिक्स के भीतर में यह स्टन स्पिरिचुअलिटी किस तरह से दोनों का मेल बैठता है या तो फिर एक और किताब है डांसिंग वुली मास्टर्स वुली वो भी एक चाइनीज फिलोसोफी है और मैंने ये ये बहुत सारी किताबें है जो कि आज कल लिखी जाती है और अभी सब हम इंडियंस ही नहीं यह जो बड़े-बड़े प्रोफेसर्स होते हैं वेस्ट में वे लोग भी कहते हैं कि हां यह नेचर ऑफ कॉन्शसनेस या तो फिर जो डिपेड क्वेश्चंस ऑफ नेचर इसके उसको समझने के लिए हमको स्टन स्पिरिचुअलिटी की मदद मिले तो बड़ा अच्छा है तो यह क्या है कि एक कन्वर्जेंस अभी हो रहा है 14th सेंचुरी में जो डायवर्जेंस हुआ था बिटवीन रिलीजन एंड क्रिश्चियनिटी वो आज धीरे-धीरे करके बिटवीन सॉरी नॉट रिलीजन एंड क्रिश्चियनिटी बिटवीन साइंस एंड रिलीजन मेनली कैथोलिक रिलीजन टुडे वो जो डायवर्जेंस से फिर से कन्वर्जेंस में परिणत हो रहा है टुडे आज के जो बड़े-बड़े फिजिसिस्ट है वे लोग भी अपनी स्टन स्पिरिचुअलिटी को एक्सेप्ट करते हैं अभी कुछ दिनों पहले मैं सर्वप्रिया अंद जी का एक वीडियो देख रहा था वो वहां पर ब्रायन ग्रीन से मिले ब्रायन ग्रीन एक अमेरिकन ऑथर है वह कॉस्मोलॉजी और एस्ट्रोनॉमी के ऊपर में किताबें लिखता है साइंस को पॉपुलर इज करता है खुद एक पीएचडी है फिजिक्स में उसने शायद पीएचडी किया है तो अ सर्वप्रिया ंद जी उसका उसने एक नई किताब लॉन्च की है तो उसका वह जो एक उसके ऊपर में लेक्चर ले रहा था तो सर्वप्रिया अंद जी गए थे वह लेक्चर सुनने के लिए और बाद में ब्रायन ग्रीन के साथ में मुलाकात भी हुआ आपको विश्वास नहीं होगा जब मैंने य सुना कि सर्वप्रिया अंद जी कहते हैं कि वो उसके साथ में बात कर रहे थे तो वो क्या कहता है पता है कि उनका बड़ा भाई बड़ा कि छोटा उनका भाई वो इकोन में साधु है तो वो फिर जैसे ही सर्व प्रियानंदनसेक्स इवन वे लोग भी एक्सेप्ट करते हैं कि देर इज अ रोल ऑफ स्पिरिचुअलिटी देखिए जिनको हम एक धर्म कहते हैं धर्म एक वस्तु अलग हो गई कि सेरेमनीज है रिचुअल्स है फेथ है बिलीफ है एक लाइफस्टाइल है ट्रेडिशनल है वह सब धर्म के भीतर में आता है दैट इज अ सेपरेट मैटर किंतु यह जो वेदांतिका स्पेक्ट ऑफ रिलीजन है जिनको कि हम जनरली स्पिरिचुअलिटी कहते हैं या तो फिर दर्शन शास्त्र कहते हैं तो दर्शन शास्त्र में भारतीय या तो फिर इष्ट भारतीय और बुद्धिस्ट ये दोनों दर्शन शास्त्र में जद आप हाईएस्ट आइडियाज को लेंगे तो उनका साइंस के साथ में बड़ा ही अच्छे से मेल बैठ जाता है खास करके यह जो क्लासिकल साइंस था क्लासिकल साइंस वाज अ वेरी डिटरमिनिस्टिक साइंस कि ये जो विश्व है वो बड़ा ही डिटरमिनिस्टिक है क्लॉकवर्क यूनिवर्स उसको कहा करते थे न्यूटन की लैंग्वेज में या तो फिर न्यूटोनिन डायनेमिक्स को फॉलो करके किंतु आज की जो रेवोल्यूशन थिरी है क्वांटम डायनेमिक्स और थिरी ऑफ रिलेटिविटी यह दो 19th 20th सेंचुरी की जो मेजर ब्रेकथ्रू है इन्होंने इतना बड़ा रेवोल्यूशन ला दिया है हमारे थिंकिंग में कि जद आप क्वांटम डायनेमिक्स क्या कहता है या तो फिर रिलेटिविटी क्या क है नेचर ऑन द स्मॉलेट स्केल एंड नेचर एट हाई वेलोसिटी यह दोनों को जद आपको रियली समझना है तो आपको यह ईस्टन फिलोसोफी वेदांतिका साथ में ऐड करते हैं तो आपकी अंडरस्टैंडिंग बहुत हद तक आगे बढ़ेगी ऐसा आजकल सभी लोग एक्सेप्ट करते हैं किंतु देखिए कि यह जो आज का पूरा ट्रेंड है ये ट्रेंड का प्रारंभ स्वामी जी ने किया है और खास करके यह जो कॉस्मो लेक्चर जो है माइक्रो कजम एंड मैक्रो कजम यहां पर स्वामी जी ने बड़ा ही सुंदर रूप से साइंटिफिक आइडियाज को उस समय जो रेवोल्यूशन साइंटिफिक आइडियाज थे कि नेचर ऑफ कॉस्मो एंड नेचर ऑफ इवोल्यूशन यह दोनों वेधांत को समझाने के लिए किस तरह से उपयोगी है यह कन्वर्जन सर्वप्रथम स्वामी जी ने किया है आज के जो दो रेवोल्यूशन आइडियाज है रिलेटिविटी और क्वांटम डायनेमिक्स यह तो और भी वेदांत के बहुत ज्यादा नजदीक आ जाते हैं उस समय तो स्वामी जी को फिर भी थोड़ा बहुत इंटेलेक्चुअल जिम्नास्टिक करना पड़ा था कि हम इवोल्यूशन को एक्सेप्ट करेंगे यदि आप इवोल्यूशन को एक्सेप्ट करते हैं वगैरह वगैरह स्वामी जी को कहना पड़ा था और मैक्रो कजम और माइक्रो कजम ऐसे दो डिवीजन किए हैं कि व्हाट इज द नेचर ऑफ नेचर प्रकृति का सही रहस्य क्या है एंड व्हाट इज द नेचर ऑफ कॉन्शसनेस ह्यूमन माइंड का सही रहस्य क्या है आज किंतु यह जो रोल ऑफ द ह्यूमन ऑब्जर्वर या तो फिर रोल ऑफ द कॉन्शियस एंड द नेचर प्रकृति और मनुष्य की चेतना दोनों एक जगह पर आकर के मिलती है साइंस ही कहता है साइंस ही कहेगा कि जदी मैं अपने रूम में जैसे कि वो वो श्रोडर्स केट वो जो एक्सपेरिमेंट है एक बॉक्स में आप एक बिल्ली को रखिए उसके बाद में आप बॉक्स को ऑब्जर्व ना करें तो आप बता नहीं पाएंगे कि बॉक्स के भीतर में बिल्ली जिंदा है या मृत है या जिंदा और मृत के बीच में कोई अवस्था में है ऑफकोर्स ये क्वांटम डायनेमिक्स लार्ज स्केल पे काम नहीं करता बिल्ली के स्केल पे काम नहीं करेगा वो सिर्फ एटम और सब एटॉमिक स्केल के ऊपर में ही काम करता है किंतु क्वांटम डायनेमिक्स का जो वियर्डनेस है उसकी जो विचित्र होता है वह यह शजर कैट एक्सपेरिमेंट से हमको एक थोड़ा सा उसका आभास मिलता है कि जैसे ही आप बॉक्स खोलेंगे तभी आप पता चलेगा कि ऑब्जर्व करेंगे तभी पता चलेगा कि बिल्ली जिंदा है या मर गई है जब तक आप बॉक्स को देखते नहीं है आप पता नहीं है कि बिल्ली सही में जिंदा है या मृत है माने दो चीज एक तो कि अपना अज्ञान है हमको नहीं पता है कि बिल्ली अभी जिंदा है कि नहीं किंतु इन रियलिटी द कैट इज सुपरपोजिशन ऑफ डिफरेंट स्टेट्स ऐसा कहते हैं कि बिल्ली विभिन्न विभिन्न स्टेट के बीच में जीवन और मृत अवस्था के बीच में झोला खा रही है इन रियलिटी यह मैंने क्वांटम डायनेमिक्स की एक महा भयानक विचित्र ता है ये आइंस्टाइन जैसा आइंस्टाइन भी यह सब देख कर के बड़ा डर गया था कि कौन सा पेंडोरा बॉक्स उसने ओपन कर दिया क्योंकि क्वांटम डायनेमिक्स के इनिशियल डेवलपमेंट में आइंस्टाइन का बड़ा हाथ था तो आज जो हम यह कन्वर्जेंस देख रहे हैं बुद्धिस्ट एंड वेदांतिका स्मोल जीी ऑन द अदर हैंड उसका प्रारंभ उसका सर्वप्रथम स्टेप स्वामी जी ने लिया था तो वो यह जो कॉस्मो लेक्चर है उसकी यह विशिष्टता है उसकी एक यूनिकनेक्ट वगैरह किया है किंतु यहां पर बड़े ही उन्होंने विस्तृत रूप से बड़े ही डिटेल में यह क्वेश्चन ये इश्यूज को उन्होंने डिस्कस किया है तो अभी ये जो माइक्रो कजम का हम पाठ कर रहे हैं यहां पर आप देखिए कि स्वामी जी क्या कर रहे हैं व्हाट इज द नेचर ऑफ कॉन्शियस ह्यूमन मनुष्य के भीतर में जो चेतना है मनुष्य के भीतर में जो जीवन है इसका क्या रहस्य है तो स्वामी जी हमको साइंस की मदद से एक के बाद एक समझाते हैं मॉडर्न मेडिकल साइंस क्या कहता है कि ये जो आंख का लेंस है है या तो कान का यह जो साउंड ग्रहण करने वाला जो इंस्ट्रूमेंट है यह सब तो बाह्य इंस्ट्रूमेंट है जब तक वह ब्रेन के भीतर में नहीं जाएगा और ब्रेन इसको पर्सीव नहीं करेगा इसको पहचाने का नहीं इसको ग्रहण नहीं करेगा तब तक हम आंखों से देख नहीं पाएंगे जिसको ब्रेन इंजरी हुई है उनकी आंखें भले ही चाहे एकदम परफेक्ट काम करती हो फिर भी उसका विजन इंपेयर हो जाएगा उसकी दृष्टि में कुछ ना कुछ गड़बड़ आ जाएगी तो ब्रेन इंजरी की वजह से आपके हाथ पैर बड़ा अच्छा कार्य कर रहा है किंतु फिर भी पैरालिसिस हो जाएगा ये पैरालिसिस होता है वो इसके लिए नहीं कि आपका हाथ या पैर में कुछ गड़बड़ है पैरालिसिस होता है कि ब्रेन स्ट्रोक आता है तब पैरालिसिस होता है आप बोलेंगे हाथ और पैर तो बढ़िया है वो काम क्यों नहीं कर रहे है किंतु हाथ और पैर चल को चलाने वाला चालक है ब्रेन उसमें गड़बड़ी हो गई है तो यहां पर स्वामी जी गोज इवन बियोंड द ब्रेन एंड सेज ट हमारे भीतर में आत्मन है और यह आत्मन ही इवेंचर को कमांड करता है और ब्रेन अपने न्यूरल नेटवर्क से अपनी कर्मेंद्रिय और ज्ञानेंद्रिय को चलाता है चालित करता है तो यहां पर स्वामी जी अभी आत्मन का रहस्य या तो फिर आत्मन का क्या नेचर है क्या प्रकृति है वह समझा रहे हैं अभी स्वामी जी कहते हैं कि ब्रेन में बढ़ती और ओट आ सकती है कभी ब्रेन का फंक्शन पावरफुल हो जाएगा कभी ब्रेन का फंक्शन कम हो जाएगा कभी ऐसा यदि आप नींद से जगे हैं तो आपको कुछ अभी समझ में नहीं आ र क्या करूं क्या नहीं बड़े सुस्त अवस्था में आपका मन आपका ब्रेन है किंतु एक बार काम करने का शुरू कर दिया एक बार ऑफिस में आकर के तो आप बड़े ही अलर्ट हो जाएंगे तो ब्रेन की अवस्था या तो मन की अवस्था देखिए उसमें चढ़ भरती और ओट आती रहती है कभी एंथू सियास्मॉलटूल कोई आप निराश हो जाएंगे कभी हताश हो जाएंगे कभी दुखी हो जाएंगे कभी खुश हो जाएंगे तो यह जो सतत विभिन्न विभिन्न परिस्थितियां अपने ब्रेन के साथ में अपने माइंड के साथ में होती है तो इसका अर्थ यह है कि उसके भीतर की जो चेतना है वह चेतना का सोर्स नहीं है वह तो उन्होंने चेतना को उधार लिया है जैसे कि पृथ्वी पर दिन और रात होगा सूरज के ऊपर में दिन और रात नहीं होने वाला है पृथ्वी सूरज से प्रका उधार लेती है किंतु सूरज तो प्रकाश का स्रोत है सूरज तो प्रकाश का सोर्स है सूरज में कहां दिन और रात होने वाला है तो स्वामी जी देखि कि स्टेप बाय लॉजिकल स्टेप हमको आत्मन यही एक अल्टीमेट लुमिनस रियलिटी है वह समझाते हैं तो स्वामी जी क्या कहते हैं फिर से मैं एक बार पढ़ लेता हूं ट च इ सेल्फ लुमिनस कैन नॉट डिके जो अपने से प्रकाशमान है स्वयं प्रकाशमान है उसमें कभी भी कमी नहीं आती डीके अर्थात कि उसमें कभी भी जो स्वयं प्रकाशमान है उसके प्रकाश में कभी भी कमी नहीं होती क्षय नहीं होता द लुमिनोसो अ बरोड लाइट कम्स एंड गोज जो प्रकाश को उधार लेता है उसकी उसके प्रकाश में बढ़ती और क्षय होता रहता है जैसे कि चंद्र की कलाए चंद्र का खुद का तो प्रकाश है नहीं सूरज से प्रकाश उधार लेता है सूरज का प्रकाश वो सिर्फ रिफ्लेक्ट करता है तो चंद्र की कलाए होती है सूरज की कभी कलाएं नहीं होती तो द लुमिनस ऑफ ट व्च शाइन थ्रू अ बोरो लाइट कम्स एंड गोज जो प्रकाश उधार लेता है उसका प्रकाश आता है और जाता है बट ट व्हिच इज लाइट इट सेल्फ व्हाट कैन मेक दैट कम एंड गो किंतु जो प्रकाश स्वयं है उसके प्रकाश में कमी और बढ़ती और क्षय कैसे होने वाला है फ्लोरी एंड डिके बढ़ेगा और कम होगा बढ़ोतरी होगी क्षय होगा जो स्वयं प्रकाशमान है उसके प्रकाश में ना ही कमी आएगी ना ही व बढ़ेगा वी सी ट द मून वेक्सस एंड वन स्वामी जी कहते हैं हम देखते हैं कि चंद्र की कलाए होती है क्षय होता है बिकॉज इट शांस थ्रू द बोरो लाइट ऑफ द सन सूरज का प्रकाश उधार लेकर के वह प्रकाशित हो रहा है इफ अ लंप ऑफ आयरन इस पुट इनटू द फायर एंड मेड रेड हट इट ग्लोज एंड शाइन बट इट्स लाइट विल वेनिश बिकॉज इट इज बोरो लोहे का एक एक छोटा सा लो लो का टुकड़ा आप भट्ठी में डालिए और भट्ठी में से थोड़ी देर के बाद में निकालिए देखेंगे कि लोहा जो है बड़ा ही तेजी से वह एकदम उसके ऊपर में लाल प्रकाश है गर्मी का व हीट का लाल प्रकाश है किंतु जैसे ही थोड़ा समय होगा देखेंगे कि लोहे का प्रकाश लोहे की गर्मी धीरे-धीरे क्षय होकर के पहले की तरह काले कलर का हो जाएगा बिकॉज इट इज बोरो क्योंकि वह जो गर्मी थी वो तो भट्ठी की गर्मी थी उसने उधार ली है व वो लोहे के टुकड़े की अपनी खुद की गर्मी नहीं थी वो हीट या तो फिर वो ऊर्जा उसकी खुद की नहीं थी वो भट्ठी में से उसने उधार ली है सो डिकेडेंस इज पॉसिबल ओनली ऑफ ट लाइट च्च इज बरोड एंड इज नॉट ऑफ इट्स ओन एसेंस तो क्षय उसी प्रकाश के साथ में होता है जो उधार लिया जाता है जो कि स्वयं प्रकाशमान है जो प्रकाश स्वयं है उसके भीतर में क् क्षय या तो क्षति कभी नहीं होती नाउ वी सी दैट द बॉडी द एक्सटर्नल शेप हैज नो लाइट एज इट्स ओन एसेंस अभी स्वामी जी स्टेप बाय स्टेप समझाते हैं स्वामी जी कहते हैं कि शरीर में देखिए कि शरीर में अपने से तो कोई जीवन नहीं है क्योंकि वह सेल्फ लुमिनस नहीं है शरीर का खुद का जो प्रकाश नहीं है क्योंकि वह प्रकाश का सोर्स नहीं है तो इट इज नॉट सेल्फ लुमिनस एंड कैन नॉट नो इट सेल्फ वो अपने को जान नहीं पाएगा अब ये कैन नॉट नो इट सेल्फ का क्या अर्थ है थोड़ा सा पढ़ने के बाद में डिस्कस करते हैं आगे स्वामी जी क्या लिखते हैं नादर कैन द माइंड मन है मन का भी खुद का प्रकाश नहीं है मन भी अपने से प्रकाशमान नहीं है क्यों व्हाई नॉट बिकॉज द माइंड वेक्सस एंड वेंस बिकॉज इट इज विगर अस एट वन टाइम एंड वीक एट अनदर देखिए स्वामी जी ने कितना पोएटिक एक्सप्रेशन यूज किया है माइंड वेक्सस एंड वेंस अर्थात कि मन के भीतर में भरती और ओट आती रहती है क्या कहते हैं स्वामी जी जैसे कि शरीर का खुद का प्रकाश नहीं हो सकता शरीर खुद एक प्रकाश का प्रकाश का सोर्स नहीं हो सकता वैसे ही मन भी कोई प्रकाश का सोर्स नहीं हो सकता क्यों की मन के भीतर में भर्ती और ओट आती रहती है कौन सी भर्ती और ओट तो कभी अपना मन खुश रहता है कभी दुखी रहता है कभी एंथू सिजमेक भीभी दुखी हो जाते हैं कभी डर जाते हैं कभी एकाएक साहसिक हो जाते हैं तो ये मन की अवस्थाएं प्रतिक्षण बदलती रहती है इस तो यह रीजन है कि मन वो खुद का प्रकाश स्वयं प्रकाशमान नहीं नहीं हो सकता बिकॉज इट इज विगर अस एट वन टाइम एंड वीक एट अनदर क्यों मन एक समय कभी बड़ा ही साहसिक है तो दूसरी ओर बड़ा ही डरपोक है एक और बड़ा ही स्ट्रांग है तो कभी बड़ा ही वीक हो जाता है बिकॉज इट कैन नॉट इट कैन बी एक्टेड अपॉन बाय एनीथिंग एंड एवरीथिंग कोई भी चीज है जो कि मन को प्रभावित कर दे सकती है बाहर से आपने कुछ देखा कभी किसी मित्र के साथ में आपका बड़ा अच्छा चर्चा हुआ आप बड़े खुश हो गए कभी बिजनेस डीलिंग में कोई प्रॉब्लम हुआ आप बड़े ही दुखी हो गए कभी किसी रिलेटिव के साथ में झगड़ा हुआ तो आप बड़े ही नाराज हो गए कि अरे उसका साहस कैसे हो गया मैं उससे सीनियर हूं मुझे ऐसा कहने का वगैरह वगैरह ऐसी कितनी अभी तो आजकल लोग न्यूज़ पढ़ते हैं और न्यूज़ देख कर के डिप्रेसिव शेयर मार्केट में क्राइसिस है तो वो देख कर के बेचारे इतने डिप्रेसो जाते हैं डिप्रेशन की दवाई लेनी पड़ती है तो एनीथिंग एंड एवरीथिंग स्वामी जी कहते हैं कुछ भी और सब कुछ मन को प्रभावित कर सकता है इसलिए मन स्वयं प्रकाशमान नहीं हो सकता देयर फोर द लाइट च शांस थ्रू द माइंड इज नॉट इट्स ओन इस वजह से मन के भीतर में या तो मन जिस प्रकाश से प्रकाशमान है जिस लाइट से वह लाइट दे रहा है वह लाइट वह प्रकाश मन का खुद का नहीं हो सकता हुज इज इट देन तो यह प्रकाश किसका है इट मस्ट बिलोंग टू दैट व्हिच हैज इट एज इट्स ओन एसेंस प्रकाश किसका है प्रकाश उसी का है जो प्रकाश स्वरूप है इट्स ओन एसेंस जो प्रकाश मय है उसी का सही सही प्रकाश है वही प्रकाश उधार नहीं लेता बाकी सब प्रकाश उधार लेते हैं जो प्रकाश मय है चच हैज इट्स ओन एसेंस एंड ए सच कैन नेवर डिके और डाई नेवर बिकम स्ट्रांग और और वकर इट इज सेल्फ लुमिनस इट इज लुमिनोसो प्रकाशमान है वह कभी उसमें क्षय नहीं होगा ना ही उसका मृत्यु होगा ना ही वह और ज्यादा स्ट्रांग होगा ना ही वह वीक होगा वह स्वयं प्रकाशमान है वह प्रकाश स्वयं है आत्मन की डेफिनेशन स्वामी जी ने दे दी जैसे मन उसमें भरती और ओट आती है किंतु आत्मन के भीतर में भर्ती और ओट नहीं आएगी इट कैन नॉट बी ट द सोल नोज इट इज नॉलेज ऐसा नहीं है कि आत्मन जानता है या तो फिर आत्मन के आत्मन ज्ञान ग्रहण करता है आत्मन ज्ञान स्वरूप है आत्मन ज्ञान है इट इज नॉलेज आत्मन ज्ञान स्वरूप है इट कैन नॉट बी दैट द सोल हैज एक्जिस्टेंस बट इट इज एक्जिस्टेंस ऐसा नहीं है कि आत्मन का अस्तित्व है आत्मन अस्तित्व स्वरूप है सत चित और आनंद यह तीन अवस्थाओं के बारे में स्वामी जी कहते हैं चित अर्थात की नॉलेज सत अर्थात की एक्जिस्टेंस तो स्वामी जी कहते हैं कि आत्मन के भीतर में आत्मन नॉलेज को ग्रहण करता है ऐसा नहीं है वह चित स्वरूप है आत्मन अस्तित्व धरा आता है ऐसा नहीं है वह सत स्वरूप है अस्तित्व स्वरूप है इट कैन नॉट बी दैट द सोल इज हैप्पी इट इज हैप्पीनेस इट सेल्फ ऐसा नहीं है कि आत्मन कभी आनंद में होता है कभी निरा में होता है आत्मन आनंद स्वरूप है आत्मन सत स्वरूप है आत्मन चित स्वरूप है आत्मन आनंद स्वरूप है सत चित आनंद नॉलेज एक्जिस्टेंस एंड ब्लिस आत्मन इन सबको ग्रहण नहीं करता आत्मन स्टेट में नहीं होता आत्मन यह मय है आनंद मय है चित मय है स्वरूप सत मय है कितना सुंदर सत चित आनंद का स्वामी जी का डेफिनेशन तो आज यही तक कल फिर से मिलते हैं ओम शांति शांति शांति हरि ओम तसत श्री राम कृष्णा