Class
ओम स्थापक यच धर्मस्य सर्व धर्मा स्वरूप अवतार बिषय राम कृष्णा यते नमः स्वामी विवेकानंद ज्ञान योग स्वामी विवेकानंद वैसे बात करते हैं फलो फफी की किंतु उसमें इस तरह से इंस्पिरेशनल मैसेज डालते हैं कि यह जितने भी यह फिलोसोफी डिपार्टमेंट है यूनिवर्सिटी के वे लोग बेचारे कंफ्यूज हो जाते हैं कि यह इंस्पिरेशनल मोटिवेशनल लिटरेचर है ना कि यह फिलोसॉफिकल लिटरेचर है तो वैसा ही कल हमने देखा य किस तरह से यह कॉस्मो माइक्रो कोसम या तो फिर यह पुनर्जन्म वाद फिर यह आत्मन का अस्तित्व यह मन जो कि जन्म मृत्यु जरा व्याधि रहित है उसका प्र प्रकृति समझाते समझाते स्वामी जी इतने उनकी जो वाणी है वह इतनी इंस्पिरेशनल हो जाती है कि ही ट्रांसस दिस बाउंड्री ऑफ मियर फिलोसोफी बहुत बार यह जैसे कि हम लोग देखते हैं बाकी सब किसी-किसी की मेरी किसी-किसी के साथ बात होती है तो कोई कहेगा कि अरे यह अरबिंदो है या फिर यह रमण महर्षि है इन लोगों को कैसे हिंदू हिज्म बोलकर के हिंदुइज्म का जो कोर्स होता है कॉलेज वगैरह में यूनिवर्सिटी में तो उन लोगों को कैसे उन लोगों का जो टेक्स्ट है उन लोगों की किताबें हैं या तो फिर इन लोगों का टीचिंग है एसे वो फिलोसोफी में सिलेबस के रूप में लिया जाता है स्वामी जी को क्यों नहीं लेते एक तो है कि पहली बात है स्वामी जी इ टू मच इंस्पिरेशनल फिर दूसरा है कि स्वामी जी इज नेवर सिस्टमिक तो यह सिस्टमिक नहीं है बहुत ज्यादा इंस्पिरेशनल है वो ना कि वो फिलोसोफर है ना कि रिलीजियस टीचर है ना कि मोटिवेशनल स्पीकर है वो हमको पता ही नहीं चलता व ही ट्रांसस ऑल दिस बाउंड्रीज तो ऐसा ही एक पूरा पैसेज कल हमने पढ़ा कि फिलोसोफी समझाते समझाते स्वामी जी ने किस तरह से यह हमको इंस्पिरेशनल मैसेज दिया मैं फिर से एक बार उसको पढ़ लेता हूं पूरा नहीं उसका आखिरी दो-तीन लाइन हाउ मेनी टाइम्स यू वेर ऑन द टॉप मोस्ट क्रेस्ट ऑफ द वेव एंड हाउ मेनी टाइम्स यू वेर डाउन एट द बॉटम ऑफ डिस्पेरटनेस के अंधे कुए में तुम कितनी बार गिरे थे व्हेन मेमरी विल ब्रिंग ऑल दिस टू यू देन अलोन विल यू स्टैंड एज अ हीरो एंड स्माइल वन द वर्ल्ड फ्रस एट यू ये पूर्व पूर्व जन्मों की यह सभी बातें सफलताएं निराशा एं आशा यह हंसना रोना लना कुदन अपने पिताजी माताजी ये बंधु बांधव जितने भी इस जन्म में देखते हैं हम लोग इतने ही पूर्व पूर्व कितने जन्मों में हुए थे इस जन्म में है भविष्य के कितने जन्मों में होने वाले हैं यह पूरा चलचित्र जब एक दिवन लाइक डेलाइट दिवस के प्रकाश की तरह दिन के प्रकाश में जो चीज जितनी स्पष्ट दिखती है इतना ही स्पष्ट जब हमारी आंखों के सामने से चित्र की तरह चलना शुरू हो जाएगा हमको दिखना शुरू हो जाएगा तब क्या होगा वी विल स्टैंड लाइक अ हीरो एक नायक की तरह एक युग नायक की तरह हम इस जमाने के सामने में खड़े रहेंगे जब नसीब हमारे सामने लाल आंख भी दिखाएगा आंखें बड़ी करके हमको डर भी दिखाएगा मृत्यु भी यदि हमें डर दिखाएगा तो हमको उसकी कोई परवाह नहीं रहेगी हंसते चेहरे से हंसते मुख से हम इसका प्रतिवाद करेंगे लाइक अ हीरो स्माइल वन द वर्ल्ड फ्रस अपॉन यू देन अलोन विल यू स्टैंड अप एंड से आई केर नॉट फॉर दी इवन और डेथ तभी हम मृत्यु के सामने खड़े होकर के कहेंगे अरे मृत्यु मुझे तेरी भी परवाह नहीं है व्ट टेरर हेस्ट दाउ फॉर मी मेरे लिए तुम्हारे पास में ऐसे कौन से अस्त्र शस्त्र है जिससे कि मैं डर जाऊंगा चुपचाप अपने घर में बैठ जाऊंगा यह जो इंक्वायरी है जो पाथ ऑफ आयर इंक्वायरी इस परे चलना में डर के मारे छोड़ दूंगा ऐसा तो तुम्हारे पास में भय दिखाने के लिए क्या है एंड आखिर में जो पूरे ये जो पूरा पैसेज है उसका एक महावाक्य में स्वामी जी ने इसका समापन किया है क्या कहते हैं दिस विल कम टू ऑल यह परिस्थिति हम सबके साथ में होगी यह साहस शौर्य और वीर्य की परिस्थिति यह उद्देश्य हम सबके जीवन में प्राप्त होगा ऐसा नहीं है कि सिर्फ स्वामी जी के ही जीवन में यह साहस और शौर्य का प्रदर्शन हुआ या तो फिर यह गुरु भाई जो कि स्वामी जी के साथ में थे वराह नगर मठ में जलती हुई अग्नि शिखा के सामने अपना पूरा जीवन समर्पण कर दिए थे कहा कि बस त्याग और मुक्ति के मार्ग पर चलेंगे तो ऐसा नहीं है कि सिर्फ वही लोग इस धन के लायक है यह जो अपने पिताजी का यह जो वारसा है ठाकुर का अपने ऋषि मुनियों का उनके हकदार सिर्फ यह स्वामी जी और गुरु भाई नहीं है हम लोग भी है हम भी उस धन में जाकर के हिस्सा बिठाए हम ऐसा क्यों कहेंगे भाई तुम अकेले अकेले मजा मार लो इसमें से हमारा भी हिस्सा है हमको भी दो तो यह हिस्सा सबको मिलने वाला है पहले तो इतना डिफिकल्ट फिलोसोफी और आखिर में इतना इंस्पिरेशनल मैसेज अच्छा आगे देखते हैं स्वामी जी क्या कहते हैं आर देर एनी अभी फिर से फिलोसोफी में आ जाते हैं स्वामी जी ऐसे फिलोसोफी चलाते हैं बीच में एक एक मने फिलोसोफर में से वह ऋषि में परिणत हो जाते हैं अी ऋषि में से फिर फिर से व दार्शनिक में परिणत हो जाते हैं तो अभी फिर से फिलोसोफी क्या कहते हैं आर देयर एनी आर्गुमेंट एनी रेशनल प्रूफ फॉर दिस रिइनकारनेशन ऑफ दिस सोल यह आत्मन का पुनर्जन्म होता है इसके बारे में क्या कोई वैज्ञानिक व्याख्या है या कोई वैज्ञानिक प्रूफ है या नहीं है सो फार वी हैव बीन गिविंग द नेगेटिव साइड शोइंग दैट द अपोजिट आर्गुमेंट टू डिस्प्रूव इट आर नॉट वैलिड अभी तक हमने आर्गुमेंट की एक नेगेटिव साइड रखी है दर्श वाच कों के सामने श्रोताओं के सामने कि इसके अगेंस्ट में जो आर्गुमेंट की जाती है वह वैलिड नहीं है जैसे कि एक आर्गुमेंट की गई कि कहां हमको जद अभी आत्मन शब्द स्वामी जी यहां पर यूज करते हैं किंतु क्या है इंग्लिश लैंग्वेज की लिमिटेशन है बोलकर के सोल शब्द यूज किया है हमको इसका ट्रांसलेशन आत्मन नहीं जीवात्मा करना उचित है या तो सूक्ष्म शरीर करना उचित है क्योंकि ऑफकोर्स जो आत्मन है वह तो समय और अवकाश और किसी भी तरह के विकारों से परे हैं विकार इस आत्मन में होते ही नहीं है तो बोलकर के किस तरह से आत्मन जन्म धारण करेगा आत्मन तो जन्म धारण नहीं करता यह जीवात्मा जन्म धारण करता है जैसे कि यह बिजली की लाइट है जनरेटर में से बिजली आती है अभी यह लाइट का जो बल्ब है मैं उसको स्विच ऑन किया तो उसमें प्रकाश आने लगा अभी यह प्रकाश का यह बल्ब है या प्रकाश की जो लाइट है मा मान लीजिए उसका जीवन समाप्त हो गया कोई भी बल्ब है या कुछ भी है तो उसका एक जीवन काल होता है तो उसका जीवन काल मान लीजिए समाप्त हो गया और मुझे नया प्रकाश का बल्ब लाना पड़ा तो मैंने नया बल्ब डाला और फिर से स्विच ऑन किया तो प्रकाश होने लगा किंतु उसके पीछे जनरेटर तो वही है जनरेटर का अभी अपनी उपमा के लिए मान लेते हैं कि जनरेटर का अनंत है उसका कोई लाइफ टाइम नहीं है तो जनरेटर तो वैसे का वैसा ही बैठा है उसमें से तो इलेक्ट्रिसिटी आती ही रहती है लाइट प्रकाश का जो बल्ब है यह प्रकाश का जो स्रोत है प्रकाश का यह जो सोर्स उसका तो जीवन परिवर्तित होता रहता है जनरेटर तो वही का वही रहेगा वही आराम से सब समय के लिए इलेक्ट्रिसिटी देता रहेगा वैसे ही आत्मन का है आत्मन इज अ जनरेटर ऑफ लाइफ उसमें से जीवन का प्रवाह अविरत बहता रहता है और इस जीवन के प्रवाह को धारण करके यह जीवात्मा प्रकाशमान होता है और एक के बाद एक शरीर धरण करता रहता है जैसे कि ठाकुर कहते हैं ना कि आलू पटल माने यह आलू है यह सब्जी वगैरह है उसको आप उबालने के लिए रखिए अभी उबलते है पानी जब उबलता है तो कैसे पात्र में यह सब उछलते हैं सब्जी वगैरह तो ये आलू सब्जी वगैरह सोचेंगे कि हम अपनी ताकत पर उछल रहे हैं किंतु उनको पता नहीं है कि नीचे में अग्नि प्रगट हुआ है अग्नि की गर्मी की वजह से पानी घुलता है पानी बॉईल होता है पानी बोयल होता है तो उसमें रखे हुए सात सब्जियां उछलते हैं उनको एनर्जी प्राप्त होती है उनकी खुद की एनर्जी नहीं है नीचे रखी हुई अग्नि की एनर्जी है वैसे ही आत्मन की एनर्जी है जीवन रूपी एनर्जी उसको लेकर के जीवात्मा एक के बाद एक शरीर धारण करता रहता है शरीर धारण करने का प्रयोजन सिर्फ एक ही है कि साधना करके धीरे-धीरे सिद्धि प्राप्त करें जब तक हम अपने जीवन में यह उद्देश्य ना समझे कि मेरे जीवन धारण करने का तात्पर्य साधना करना ही है तब तक हम बार-बार जन्म लेते रहेंगे बार-बार इस चक्की में संसार की चक्की में संसार के चक्र में पीसते ही रहेंगे आखिर में एक बार जब धीरे से करके अपना यह ज्ञानोदय होता है ज्ञान का उदय होगा तब पता चलेगा कि अरे जीवन का उद्देश्य तो ईश्वर प्राप्ति है या तो फिर आध्यात्मिक एक आध्यात्मिक दर्शन हो आत्म दर्शन हो यह तो जीवन का उद्देश्य है तब से धीरे-धीरे यह मोह रूपी संसार के ऊपर में से हमारा मन पीछे आता जाएगा और धीरे-धीरे करके यह ईश्वर की ओ अध्यात्म की ओर बहता जाएगा फिर वो भी एक लंबा जर्नी है ऐसा नहीं है कि मुझे एक बार अकल आ गया कि चलो ईश्वर के रास्ते पर जाना है तो इमीडिएट मुझे सब कुछ मिल गया ऐसा भी तो नहीं है वह तो लंबी साधना है साधना करते करते हमको सब कर्म काटने है ईश्वर प्राप्ति करनी है किंतु एक बार यह अकल आ गई ट मींस कि हम बहुत आगे आ गए हैं ठाकुर एक बार एक जगह से जा रहे थे तो एक साधु बैठा था वेदांती साधु तो ठाकुर ने उसके साथ में थोड़ी देर बात की और फिर आगर आगे निकल गए और फिर ठाकुर ने ऐसा एक मंतव्य दिया कि शुकनो अर्थात कि बड़ा ही ड्राई साधु है वेदांत की बातें करते हैं हृदय में ईश्वर के प्रति जो भक्ति रस होता है जैसे कि यह वैष्णव लोगों का अपने को गोपी मान कर के भगवान कृष्ण की आराधना करेंगे या तो फिर अपने को मां यशोदा समझ कर के बालकृष्ण की पूजा करेंगे ऐसा एक जो रस माधुर्य होता है वह कभी-कभी वेदांत की चर्चा करने वालों के जीवन में नहीं रहता तो श ठाकुर ने एक छोटा सा मंतव्य किया कि शुकनो अर्थात कि बड़ा ही ड्राई है उसका हृदय तो सामने एक डिवोटा थे रामचंद्र उन्होंने ऐसा कोई रोगेटरी मंतव्य सामने प्रकट किया उसने सोचा कि ठाकुर का ऐसा कहना है तो मैं भी सामने ऐसा कुछ बोल देता हूं साधु के बारे में नेगेटिव तो इमीडिएट ठाकुर ने बात घुमा ली क्या कहा किंतु त्यागी अनेकता आ एय से अर्थात कि भले वो सुखना है भले वो ड्राई है किंतु वह त्यागी है त्यागी है तो बहुत आगे निकल गया है गृहस्थ से अभी ये यहां पे कहने का अर्थ यह नहीं है कि किसने गेरुआ पहना है किसने पेंट शर्ट पहना है वो बात नहीं है मन की बात है ठाकुर के तो इतने सारे गृहस्थ शिष्य भी थे जो कि कितने ही त्यागियो से आगे निकल गए मश महाशय रामचंद्र स्वयं फिर नाग महाशय है बलराम बसु है कितने हीथे तो प्रश्न यह नहीं है कि आपने क्या कपड़े पहने हैं प्रश्न है कि आपके मन ने क्या कपड़े पहने हैं आपके शरीर के कपड़ा के कलर नहीं आपके मन के कपड़ों का कलर उसके ऊपर में है शरीर का गेरवा कलर का कपड़ा पहना है किंतु मन में लाल कलर का कुछ पहन के रखा है तो तो बड़ा ही डेंजरस है मन में जद गेरुआ पहना है कपड़ा तभी वो असल चीज है फिर बाहर आप कैसे भी कपड़े पहरे डजन मैटर तो अभी स्वामी जी यहां पर क्या कहते हैं कि अभी तक तो पुनर्जन्म की एक जो आर्गुमेंट नेगेटिव है उसको हमने काटा किंतु क्या कोई पॉजिटिव प्रूफ दे सकते हैं हम यह कोई कहेगा कि इस तरह से पुनर्जन्म नहीं होगा तो हम लोग उसको काट दिए किंतु हम सामने से कुछ दिखा सकते हैं क्या कि हां पुनर्जन्म का यह पॉजिटिव प्रूफ है ऐसा है क्या तो स्वामी जी क्या कहते हैं देर आर ए मोस्ट वैलिड वंस टू माने पॉजिटिव प्रूफ है और मोस्ट वैलिड माने बहुत ही प्रामाणिक प्रूफ है क्या है नो अदर थिरी एक्सेप्ट दैट ऑफ रिइनकारनेशन अकाउंट्स फॉर द वाइड डायवर्जेंस दैट वी फाइंड बिटवीन मैन एंड मैन इन देर पावर्स टू एक्वायर नॉलेज पुनर्जन्म वाद के अलावा ऐसी कोई थिरी नहीं है जो कि यह समझा सके कि एक मनुष्य में और दूसरे मनुष्य में ज्ञान ग्रहण करने की जो क्षमता है उसमें इतना डिफरेंस क्यों है हम लोग जब स्कूल में पढ़ते थे तो हम सब लोगों ने देखा था एक तो फर्स्ट बेंच प जो लड़का बैठा रहता है व जो भी टीचर समझाते हैं फटाफट करके समझ जाता है और जो लास्ट बेंच प जो बैठे रहते हैं वो टीचर क्या बोलते हैं क्या सुनाते हैं कोई उसके ऊपर ध्यान नहीं रहता आपस में गप लगाते रहते हैं झगड़ा करते हैं कोई ना कोई मुसीबत में फंसते हैं उनके बारे में कोई ना कोई कंप्लेन आती है देख मैं जब छोटा था तो मैं इस तरह से स्कूल में जाया करता था तो मेरे जो स्कूल थी उसके सामने में ही एक मकान था मकान में फर्स्ट फ्लोर पे एक लड़का रहता था हालांकि यह लड़का मेरी स्कूल में नहीं था किंतु व मेरा मित्र था मैं उसको अच्छे से पहचानता था तो मैं जब भी स्कूल में जाऊंगा तो अभी स्कूल का तो मैदान है ना वहां पे दो 3000 लड़के थे हमारी स्कूल में तो सब लड़के जब तक स्कूल की घंटी नहीं बजती है तो क्लासरूम में तो नहीं जाएंगे मैदान में दौड़ेंगे चिल्लाए हल्लागुल्ला करेंगे झगड़ा करेंगे क्या से क्या नहीं करेंगे सोच लीजिए दो-तीन हजार लड़के ऐसे मैदान में खड़े हैं तो क्या सब होगा तो इस तरह का इतना हल्लागुल्ला हो रहा है और फिर मैं जब मैं तो साइकिल प जाता था स्कूल में तो जैसे ही साइकिल में वो ग्राउंड के ऊपर मैं आया तो मैं कभी-कभी वो जो खिड़की में वो जो मेरा मित्र बैठा रहता था और बैठ कर के पढ़ता रहता था तो मैं उसके सामने देखता था मैं आश्चर्य चकित हो जाता था कि नीचे में इस मैदान में इतने सारे लड़के इतना हल्लागुल्ला मचा रहे हैं किंतु फिर भी अपने मकान की जो खिड़की है खिड़की में बैठ कर के जो पढ़ रहा है तो पढ़ ही रहा है एकदम जैसे कि बिना किसी डिस्टरबेंस बिना किसी डिस्ट्रक्शन के 100% उसका माइंड यह किताब के ऊपर में है यह सब मैंने लिटरली देखा है और उस लड़के का यह बोर्ड में य कि थर्ड ना कि फोर्थ नंबर आया था तो मैं आश्चर्यचकित हो जाता था कि इतना डिस्ट्रक्शन नजर के सामने होने से एक लड़का एक किताब में किस तरह से ध्यान दे सकता है मैं खुद यदि वहां पर बैठा होता तो मैं तो यही देखता रहता कि वो लड़का क्या कर रहा है ये लड़का क्या कर रहा है क्योंकि सब तो मेरे सम वयस है मेरी ही उम्र के है बाद में जद बाकी लड़के जब स्कूल में चले जाएंगे तब में हो सकता है कि पढ़ाई के ऊपर में ध्यान दो किंतु जब इतना बड़ा डिस्ट्रक्शन नजर के सामने हो तब भी वो पढ़ रहा है आश्चर्य की बात है तो ऐसा एक एक लड़का देखा दूसरा एक लड़का देखा हमार मेरे क्लास में ही था वो तो क्लास में क्या है कि टीचर क्या करते हैं कि जो लड़का थोड़ा सा मने हट्टा कट्टा होता है थोड़ा सा फिजिकली स्ट्रांग होता है उसको वे लोग मॉनिटर बना दिया करते थे जिससे कि क्या है कि बाकी जो टीचर नहीं रहेगा और क्लास में लड़के को तूफान मस्ती करेंगे तो ये लड़का ये मॉनिटर है सबको थोड़ा कंट्रोल में रख सके तो उसका मैंने वो दो-तीन साल फेल हुआ था उसका हाइट बॉडी भी हम लोगों से ज्यादा था तो उसको मॉनिटर बना कर के रख दिया था अभी क्या है कि उसका मेरे से थोड़ा सा अच्छा एक फ्रेंडशिप जैसा हो गया था मैं थोड़ा इंट्रोवर्ट हूं चुपचाप बैठा रहता हूं वो टीचर नहीं आएंगे तो किसी के साथ बात नहीं करूंगा तो उसका एक थोड़ा सा मेरे साथ में एक अच्छा एक रिलेशन हो गया था तो वो ऐसे तो बाकी सब लड़के उससे डरते थे वो धमका आता भी था बाकी सब लड़कों को कि तू मेरे साथ में आकर के बड़ी अच्छी बातें करता था तो ठीक है चलो स्कूल खत्म हो गई उसके तो बहुत दिन बीत गए अभी मैं एक दिन कहीं से जा रहा था रास्ते से तो देखा वही लड़का वहां प खड़ा चाय की दुकान पर खड़े रह के चाय पी रहा है तो मुझे देख कर के बड़ा खुश हो गया अरे ये कैसे हो क्या है तो मैं उसके साथ बात कर रहा हूं इतने दिनों के बाद में मिले मैंने बोला क्या कर रहा है तो बोला मैं मजदूरी कर रहा हूं तो मैंने कहा अच्छा ठीक है तो कोई बुरी बात तो है नहीं जितना भी कर्म है सभी तो दिव्य कर्म है जो भी जीवन धारण करने के लिए करना पड़े उसके मैं मैं किसी को कुछ बोलना नहीं है किंतु फिर मेरे मन में हुआ कि देखो उसी समय मुझे स्ट्राइक हुआ था कि मैंने दो लड़के को पहचानता था एक वो लड़का जो कि खिड़की में बैठ कर के पढ़ाई लि लिखाई करता था उसको मैंने जब आखिरी देखा था तब उसका वो बोर्ड में नंबर आ गया था और इस लड़के को जब मैंने आखिरी देखा तो वो लेबर का काम कर रहा है अभी कोई भी कर्म बड़ा या छोटा नहीं है यह तो हमको ऐसा सोचना ही नहीं चाहिए किंतु फिर भी एक सांसारिक दृष्टि से देखिए कि सफलता और सफलता का जो मानदंड है तो वो लड़का कैसे सफल हो गया तो स्वामी जी कहते हैं कि देखो किसी लड़के का एक किसी एक सब्जेक्ट के ऊपर में कंसंट्रेट करके उसमें से ज्ञान ग्रहण करने की जो कैपेसिटी है उसमें हमको ये जो इतना विराट डायवर्जेंस दिख रहा है कहां वो सिलिकॉन वैली के इंजीनियर जो कि बैठ कर के आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का वो ये जो मैंने एल्गोरिथम बनाते हैं उसके भीतर में मिलियंस एंड मिलियंस ऑफ लाइंस ऑफ कोड रहते हैं मैं एक बार आईआईटी दिल्ली में किसी वर्कशॉप में गया था तो वहां पे एक प्रोफेसर के व हम लोगों का वर्कशॉप था तो वहां की आईआईटी के ही एक प्रोफेसर वो वर्कशॉप ले रहे थे उनका नाम था प्रोफेसर गोसाई ना कि ऐसा कुछ नाम था तो अभी वो बात कर रहे हैं हमारे साथ में तो वो जो रेफरेंस दे रहे हैं माइंड में से मैं उनका एक घंटे का स्पीच सुना मैं समझ में आ गया कि इस आदमी का ये जो नॉलेज उनका जो डेटाबेस उसके मन में मेमोरी क्या कैपेसिटी है मेमोरी की कहां कहां से वो मैनुअली उने मुख स्थ रेफरेंस दे रहे अच्छा यहां पे ऐसा लिखा है यहां पे ऐसा लिखा है वहां पे ऐसा है उस किताब में ऐसा है उस प्रोफेस सर ने ऐसा कहा है इस साइंटिस्ट ने ऐसा कहा है एक घंटे में उसने कितने रेफरेंस दिए होंगे और कोई किताब को छूने की जरूरत नहीं क्या उसकी गजब मेमरी कैपेसिटी है तो ऐसे लोगों को देखिए कि जिन लोगों की मेमोरी कैपेसिटी जिन लोगों की एक मन को एकाग्र करने की कैपेसिटी जिन लोगों की क्रिएटिव कैपेसिटी आइंस्टाइन है न्यूटन है कि जिन लोगों ने इस तरह की थिरी डेवलप कर दी कि जिसके बारे में और किसी ने सोचा भी नहीं होगा हां हम लोग कह सकते हैं कि भारत में ऐसे कितने ही वैज्ञानिक हो गए किंतु वह भी तो एक एक ही पेडेस्टल प है ना ज आर्य भट्ट कहो ना कि भास्कर कहो ना कि न्यूटन कहो ना कि आइंस्टाइन कहो उन लोगों का कैटेगरी ही तो अलग है जो कि हमसे कितना डिफरेंट है तो स्वामी जी कहते हैं य जो डायवर्जेंस दिख रहा है ग्रहण करने का नॉलेज ग्रहण करने का उसके पीछे एक ही थिरी रिस्पांसिबल हो सकती है वह है इन है य रिइनकारनेशन की पुनर्जन्म वाद की कैसे स्वामी जी पूरा आर्गुमेंट अभी हमारे सामने रखते हैं फर्स्ट लेट अस कंसीडर द प्रोसेस बाय मींस ऑफ व्हिच नॉलेज इज एक्वायर्ड सबसे पहले तो हम उस प्रोसेस को देखते हैं उस यह जो मेथड को देखते हैं जिसके द्वारा नॉलेज इज एक्वायर्ड ज्ञान को ग्रहण किया जाता है कौन सी मेथड ऐसी है जिससे कि हम ज्ञान ग्रहण कर सकते हैं सपोज आई गो इन टू द स्ट्रीट एंड सी अ डॉग जदी मैं गली में जाता हूं शेरी में जाता हूं और एक कुत्ते को देखता हूं हाउ डू आई नो इट इज ए डॉग मुझे कैसे पता चला यह कुत्ता है आई रेफर इट टू माय माइंड एंड इन माय माइंड आर ग्रुप्स ऑफ ऑल माय पास्ट एक्सपीरियंस अरेंज एंड पिजन ओल्ड एज इट वेर मेरे मन में मैंने भूतकाल में बचपन से लेकर के कुत्ते को जितने सारे कुत्तों को देखा है ये सब पीजन होल्ड यह जो शब्द है बड़ा ही इंपॉर्टेंट है पीजियन होल का अर्थ क्या होता है पता है जब अ पोस्ट ऑफिस होती है तो पोस्ट ऑफिस में पता है ना कि पिन कोड के अनुसार यह लोग लेटर्स जो होते हैं उसको क्लासिफाई करते हैं फिर अभी यह जो मान लीजिए कि राजकोट का पिन कोड है फिर यह कोलकात्ता का पिन कोड है यह हावड़ा का पिन कोड है यह मान लीजिए बेंगलोर का पिन कोड है यह दिल्ली का पिन कोड है तो वहां पे यह पीजीएन होल नाम के वह बहुत ने पीजन होल शब्द एक यूज़ किया है कुछ छोटे-छोटे माने जो शेल्फ रहता है ना कबाटरे इसको शेल्फ बोलते हैं उसमें छोटे-छोटे ये ये रहते हैं माने शेल्फ रहते हैं उसके भीतर में पिन कोड के अनुसार पत्रों को रखते हैं अभी तो यह सब डिजिटाइज और वगैरह कितना सब कुछ हो गया है यह तो स्वामी जी के समय की बात है 19th सेंचुरी की आज से 100 200 साल पहले की तो वहां पे वो जो छोटे-छोटे बॉक्स रहते हैं या छोटे-छोटे ये जो खाने रहते हैं शेल्फ उसके भीतर में पिन कोड अनुसार पत्र वे लोग ये करेंगे डिस्ट्रीब्यूटर उसके बाद में ये जो टपाली होता है पोस्टमैन वो अब उसके खुद का पिन कोड जो है वहां के जो शेल्फ होता है वहां का ये जो बॉक्स होता है उसमें से वो पत्र ले लेगा और उस एरिया में जाकर के डिस्ट्रीब्यूटर देगा तो बहुत सारे पत्र जब आते हैं तो सबसे पहला काम होता है पिन कोड अनुसार पत्रों को डिफरेंट डिफरेंट बॉक्स में रखना इस प्रोसेस को कहते हैं पीजियन होलिंग ये पीजियन होल अर्थात कि कबूतर कबूतर खाना इसका लिटरल मीनिंग होता है कबूतर खाना कबूतर खाना देखेंगे तो बहुत छोटे-छोटे छोटे बॉक्स करके एक लंबा एक कबाटरे छोटे-छोटे बॉक्स करके बहुत सारे होते हैं तो वैसे ही अपनी स्वामी जी किसना एक एक विजुअल मेमोरी अपने नजर के सामने खड़ा करते हैं ना एक बहुत अच्छा लिटरेचर होता है ना मने ये लिटरेचर की डेफिनेशन है बहुत अच्छा राइटिंग या तो बहुत अच्छा रेटरी किसको कहते हैं हमारे सामने एक विजुअल एक उसका यह चित्र खड़ा करना स्वामी जी सिर्फ ये नहीं कहते क्लासिफिकेशन शब्द यदि स्वामी जी ने यूज किया होता कि उसका वर्गीकृत करना वर्गीकरण करना तो वो भी चलेगा किंतु ये पीजीएन होलिंग कबूतर खाने की तरह उसको अलग-अलग रखना अपनी नजर के सामने एक विजुअल चित्र खड़ा होता है तो स्वामी जी कहते हैं कि मैं आज तक बचपन से लेकर के आज तक मैंने जितने भी कुत्तों को देखा है कुत्तों के मैंने चित्र मेरी नजर के सामने आए हैं मेरे अपने मन के भीतर में अपने ब्रेन के दिमाग के भीतर में छोटे-छोटे खानों में मैंने उस इंफॉर्मेशन को स्टोर करके रखा है कि ये जो एक बॉक्स है उसमें मैंने कुत्तों के जितने भी मेरे चित्र है वह रखे हुए हैं बिल्ली के जितने भी चित्र है एक दूसरे बॉक्स में रखे हुए हैं फिर ये घोड़ों के जितने चित्र है वो इस बॉक्स में रखे हुए हैं बन बचपन में जब वो पिक्टोरियल बुक देखते हैं ना ए फॉर एप्पल बी फॉर बेट सी फॉर कैट तो उसमें देख देख देख कर के हमको समझ में आता है कि अच्छा कि ये ए है हां यस एगजैक्टली इसको पिजन होलिंग कहते हैं वेरी गुड मनो भा वेरी गुड थैंक यू तो ये जो बचपन में जितने भी हमने ये जो देखे बचपन से लेकर के आज तक तो वो सब ये इंफॉर्मेशन इस तरह से डिफरेंट डिफरेंट बॉक्स के भीतर में वो क्लासिफाई करके रखी हुई है तो अभी जैसे मैं नई ये जो एक कुत्ता देखा तो इमीडिएट मैंने अपने ब्रेन में इसको रेफर किया कि हां ये कुत्तों के जितने भी दृश्य है उसके साथ में तो इसका मैचिंग हो रहा है ना बिल्ली के साथ में तो मैच नहीं हो रहा है घोड़े के साथ में तो मैच नहीं हो रहा है मकान के साथ में मैच नहीं हो रहा है पशु पक्षी के साथ में मैच नहीं हो रहा है इसका तो पार्टिकुलर कुत्तों के बारे में जो इंफॉर्मेशन है इसी के साथ में मैच हो रहा है तो स्वामी जी कहते हैं कि जो नॉलेज जो होता है उसका बेसिक क्या है ब्रेन के लेवल पे यह कैसे काम करता है तो मैंने अपनी आंखों से जो कोई भी एक चीज को देखा जैसे कि इस किताब को देखा तो मैं जब से पढ़ाई लिखा ई करता आ रहा हूं बाल मंदिर से केजी से लेकर के आज तक फर्स्ट स्टैंडर्ड सेकंड स्टैंडर्ड मैंने हजारों किताबें अब तक देख ली है और मेरे ब्रेन के भीतर में किताब क्या है बोलकर के एक इंफॉर्मेशन जमा हुई है अब मैं जब भी मैं एक नई किताब देखूंगा तो यह किताब मेरे लिए नई नहीं है भीतर में ऑलरेडी पता हुआ है कि इसको किताब बोलते हैं तो इसके साथ में को रिलेशन होता है तो जैसे ही कोरिले हुआ तो मुझे पता चला कि ये किताब है इस तरह से मुझे ज्ञान प्राप्त होता है अभी स्वामी जी क्या कहते हैं एज सून एज अ न्यू इंप्रेशन कम्स आई टेक इट अप एंड रेफर इट टू सम ऑफ द ओल्ड पिजन होल्स एंड एज सून एज आई फाइंड ए ग्रुप ऑफ द सेम इंप्रेशंस ऑलरेडी एसिस्टिंग आई प्लेस इट इन दैट ग्रुप एंड आई एम सेटिस्फाइड जब भी आज सुबह को उठक के मैं ऑफिस में आ रहा हूं ऑफिस में आते-आते से मैंने देखा कि अरे आकाश में एक पतंग चल रही है मान लीजिए कि यह मकर संक्रांति के आसपास के दिन है कोई पतंग उड़ा रहा है काइट उड़ा रहा है तो जैसे ही मैंने उस काइट को देखा वैसे ही मेरे ब्रेन के भीतर में काइट के जितने भी चित्र थे उसके साथ में इसका मैचिंग हो गया और मैंने इसको आइडेंटिफिकेशन का फूल खिला है तो जैसे ही मेरी नजर गुलाब के फूल के ऊपर में पड़ी वैसे ही मैंने इस गुलाब के फूल मेरी ब्रेन में मेमरी बैंक में जितने भी गुलाब के फूल के चित्र थे उसके साथ में मैचिंग करवा लिया और समझ गया कि यह गुलाब का फूल है यह कोई रातराणी का फूल नहीं है यह कोई चंपा का फूल नहीं है यह कोई आपका यह मधुमालती या ऐसा कोई फूल नहीं है यह गुलाब का ही फूल है ऐसा करके मेरी ब्रेन में पड़ी हुई मेमोरी के साथ में इंफॉर्मेशन का जो स्टोर है उसके साथ में कनेक्शन करके मैंने आइडेंटिफिकेशन होता है कि यह क्या हो सकता है तो हम लोग सब गल करते हैं कि ये जो मैंने पार्टिकुलर इंफॉर्मेशन मेरे सामने आई तो यह क्या है कोई पार्टिकुलर चित्र मैंने देखा जो कि मैंने पहले कभी नहीं देखा था तो इमीडिएट मैं ग करके आजकल पहले तो लोग एनसाइक्लोपीडिया थे या तो सब लोग रेफर करते थे आजकल लोग google's बोल कर के ये है उसका फोटो पढ़ लीजिए और ब्रेन के भीतर में गुलाब के जितने चित्र पड़े हुए थे उसके साथ में मैच कर लिया तो आई बिकम सेटिस्फाइड किंतु ऐसा मैंने कुछ देख लिया जो कि मैंने पहले कभी नहीं देखा था तो उसको तो उसके रिलेटेड कोई मेमोरी मेरे ब्रेन में तो है नहीं तब मैं किसी चीज के साथ में आईडेंटिफाई नहीं करवा पाऊंगा तो वह डिसेटिस्फेक्शन होगा असंतोष होगा व्हेन नॉट फाइंडिंग द कॉग्नेट्स ऑफ एन इंप्रेशन वी बिकम डिसेटिस्फाइड इट दिस स्टेट ऑफ द माइंड इज कॉल्ड इग्नोर यदि हम ऐसा कोई एक चित्र है जिसका आइडेंटिफिकेशन नहीं कर पाते उससे डिस सेटिस्फेक्शन होता है वो डिस सेटिस्फेक्शन की स्थिति को हम कहते हैं इग्नोर या तो अज्ञान बट व्हेन फाइंडिंग द कॉग्नेट्स ऑफ एन इंप्रेशन ऑलरेडी एक्जिस्टिंग वी बिकम सेटिस्फाइड दिस इज कॉल्ड नॉलेज एक ऐसा फूल मैंने आज देखा कि जो मैंने पहले कभी नहीं देखा था और अभी मैं अपने ब्रेन में सर्च कर रहा हूं सर्च कर रहा हूं आप को कहते हैं इग्नोर या तो फिर अज्ञान और जैसे मैंने ऐसा फूल देखा जिसके साथ में मैं बखूबी परिचित हूं जैसे यहां पे ही पब्लिकेशन में ही मैंने यहां पे एक जो वरांडा है वहां पे सब टेरेस गार्डन किया है तो टेरेस गार्डन में गुलाब का फूल है मधुमालती का फूल है रातराणी का फूल है ऐसे चार-पांच तरह के फूलों के पौधे डाले हैं तो प्रतिदिन में उसको पानी डालता हूं और पौधों की मावजा करता हूं पौधों की केयर करता हूं तो आई एम वेरी फैमिलियर विद ये जो पौधे हैं उसके साथ में बड़ा ही फैमिलियर हूं तो आज सुबह को भी मैं गया पानी डालने के लिए तो जैसे ही गुलाब को देखा मैं समझ गया ये गुलाब है क्योंकि उसके रिलेटेड बहुत सारे मेमोरी में पड़ा हुआ है तो वो जो मैच होने की प्रोसेस है उसको कहते हैं ज्ञान तो ज्ञान और अज्ञान क्या है इसका डेफिनेशन स्वामी जी क्या देते हैं कि जैसे ही ऐसा कोई फूल देखा जिसके रिलेटेड मेमोरी में पड़ा हुआ है उसके साथ में मैचिंग हो जाता है तो वो ज्ञान है और अज्ञान क्या है एक नया फूल देखा जिसके रिलेटेड मेरी मेमोरी में कोई भी इंफॉर्मेशन नहीं है तो किसी चीज के साथ में मैं मैच नहीं कर पा रहा हूं तो वो हो गया अज्ञान व्हेन वन एप्पल फेल मैन बिकम डिसेटिस्फाइड जब एक एप्पल गिरा एक सफर्जन का सफर्जन पेड़ के ऊपर में से गिरा तो मनुष्य डिस सेटिस्फाइड हुआ अभी यह स्वामी जी रेफर करते हैं वो फेमस न्यूटन का वो जो इंसिडेंट है ना लोग कहते हैं न्यूटन ने ये जो थिरी ऑफ ग्रेविटी कैसे खोज ली तो जो एप्पल के पेड़ के नीचे में बैठा था सफर्जन के पेड़ के नीचे बैठा था सफर्जन किरा तो उसको उसके मन में यह प्रश्न हुआ कि यह सफर्जन जमीन पर ही क्यों गिरता है यह हवा में क्यों नहीं उड़ता तो यह उसके भीतर में ये जो ट्रेन ऑफ थॉट माने ये विचार परंपरा जो प्रारंभ हुई उसमें से उसने यह पूरा ये ग्रेविटी के नियम जो है उसने खोज निकाले तो उसको स्वामी जी यहां पर रेफर करते हैं क्या कहते हैं स्वामी जी कि एक एप्पल जब जमीन पर गिरा तब हमको प्रश्न हुआ कि यह जमीन पर ही क्यों गिरता है और हमारे मन में असंतोष प्रकट हुआ क्योंकि इसका उत्तर हमारे पास नहीं था देन ग्रैजुअली दे फाउंड आउट द ग्रुप उसके बाद में धीरे-धीरे करके इतने सभी जितने भी चीजें गिरती है इसके साथ में इसका मैचिंग किया ग्रुप का क्या अर्थ है इन सबका समूह जमीन पर गिरने वाली सभी चीजें जमीन पर गिरती है ऐसा हमने ख खोज निकाला तब हमको संतोष हुआ व्हाट वाज द ग्रुप दे फाउंड ऐसा कौन सा समूह है जो कि उन्होंने खोज निकाला ट ऑल एप्पल फेल सो दे कॉल इट ग्रेविटेशन सभी सफर्जन सभी एप्पल जमीन पे गिरते हैं तो यह हमको संतोष हुआ कि चलो यह एक एप्पल है वह जमीन पर गिरा है हवा में नहीं उड़ा है तो हमने संतोष मान कर के इसको ग्रेविटेशन का नाम दे दिया हालांकि देखिए कि स्वामी जी इस बात को बड़ी ही सिंपलीफाई करके बताते हैं हमको पता है कि न्यूटन की बायोग्राफी जद पढ़ी होगी मैंने मैंने पढ़ा मुझे इस तरह से साइंटिस्ट लोगों की बायोग्राफी पढ़ना बड़ा अच्छा लगता है खास करके वो जो लॉजिकल प्रोसेस होती है ना थ्रू व्हिच दे कम टू सम पार्टिकुलर कंक्लूजन कि हां एक पहला स्टेप है कि सफर्जन को गिरता हुआ देखना उसके बाद में जो विचार परंपरा जो स्टार्ट हुई वहां से लेकर के न्यूटन ने तो कैलकुलस खोज निकाला क्योंकि सिर्फ इसको नाम देने से नहीं चलेगा पिजन होलिंग करने से नहीं चलेगा उसके पीछे में मैथमेटिक्स डेवलप करना पड़ है और जो मैथमेटिक्स डेवलप करने की जो प्रोसेस है भयानक कॉम्प्लिकेटेड है अभी यह आइंस्टाइन का है आइंस्टाइन वो पेटेंट ऑफिस में क्लार्क था और वहां पर बैठ कर के वो उसने एक थॉट एक्सपेरिमेंट किया जर्मनी में इस इसको जर्मन लैंग्वेज में कहते हैं गेडा केन अर्थात कि थोट एक्सपेरिमेंट क्या होगा जदी में प्रकाश के किरण के साथ में ही चलता हूं साथ में ही उड़ता हूं क्या मुझे प्रकाश का किरण स्थिर दिखाई देगा तब उत्तर मिला नहीं प्रकाश के किरण को हम कभी भी स्थिर नहीं देख सकते प्रकाश के किरण की गति तो 3 लाख किलोमीटर प्रति सेकंड है देखिए यहां में लाइट में का जो बल्ब है उसमें से प्रकाश आ रहा है मुझे दिखता है क्या क् वहां से धीरे-धीरे करके मेरी ओर प्रकाश आ रहा है 3 लाख एक सेकंड में 3 लाख किलोमीटर स्पीड करता है इसका तो कैसे हमको उसको दिखाई देगा हमको तो इंस्टंटे नियस दिखाई देगा तो हम यदि प्रकाश के किरण के साथ में ही 3 लाख किलोमीटर की गति के साथ में उड़ेंगे तो हमको प्रकाश का किरण स्थिर दिखाई देगा नहीं तब भी नहीं दिखाई देगा इस थॉट एक्सपेरिमेंट में से यह थिरी ऑफ रिलेटिविटी उसने डेवलप किया तो देखिए कि कहां से स्टार्ट करके वह कहां तक आया है जो भयानक प्रचंड इंटेलेक्चुअल जर्नी है वो इतनी कॉम्प्लिकेटेड है कि उसको इतनी सिंपल फॉर्मूला में हम रिड्यूस नहीं कर सकते किंतु फिर भी स्वामी जी यहां पे करते हैं और हमको स्वामी जी के साथ में चलना है अ इसके साथ इसके बारे में हम बहुत कुछ बोल सकते हैं खास करके मैं जो बता रहा था ये जो मशीन लर्निंग जो आज का है ना देखिए स्वामी जी उस समय जो बता कर के गए हैं कि सबसे यह जो अपने मन में अपने ब्रेन में पहले तो यह सब इंप्रेशन स्टोर होती है फिर जो भी नई इंप्रेशन आती है वो स्टोर हुई इंप्रेशन के साथ में मैच हो करके फिर उसका आइडेंटिफिकेशन मशीन लर्निंग जो है न्यूरल नेटवर्क एगजैक्टली इसी प्रिंसिपल के ऊपर में काम करता है पहले पहले ऐसा होता था मैं आज से 50 60 साल पहले यह जो टूरिंग वगैरह जो उस समय के कंप्यूटर के एक्सपर्ट थे वे लोग ऐसा सोचा करते थे कि इतना कॉम्प्लिकेटेड एल्गोरिथम बनाना पड़ेगा इतना कॉम्प्लिकेटेड लॉजिक मैथमेटिक्स डेवलप करना पड़ेगा कि कंप्यूटर कोई भी चीज को पहचान पाए इसके लिए कितना सब कुछ उसको समझाना पड़ेगा किंतु एक ब्रेक थ्रू हुआ एक बिल्कुल नया आईडिया आया न्यूरल नेटवर्क का अर्थात कि आप कंप्यूटर को सिखाए जैसे बच्चा सीखता है ना बच्चे को कैसे एक के बाद एक चित्र ए4 एप्पल तो ये एप्पल है ये बी फॉर अ बेट तो ये बेट है तो बार-बार उसको ये चित्र दिखाएंगे तो उसको समझ में आ जाएगा कि ए बी सीडी अल्फाबेट इस तरह से कहते हैं ये डिफरेंट डिफरेंट चित्रों का ये मायने हैं तो बच्चे को कैसे बार-बार एक ही इंफॉर्मेशन रिपीट करवा के सिखा दे जैसे कि बच्चे के ब्रेन में वो मेमोरी फिट बैठ जाए हम लोग कोई मुख स्त करते हैं गीता के श्लोक है या बचपन में कोई भी पढ़ाई लिखाई का कुछ भी मुख स्त करते हैं तो कैसे हम बार-बार उसको दोहराते रहते हैं तो दोहराते रहने से ब्रेन के भीतर में एक डीप इंप्रेशन पड़ता है गहन उसका एक छाप गिरता है उसमें से धीरे-धीरे करके बच्चा सीखता है तो यह बार-बार सिखाना रदर देन के एक डिस्क्रिप्शन देना कि चार पैर है फिर एक मुंह है एक पूछ है तो इसको कुत्ता कहेंगे ऐसा डिस्क्रिप्शन देने की बजाय कुत्ते के जितने भी 1 लाख 2 लाख 10 लाख चित्र है कंप्यूटर को दिखाए तो कंप्यूटर के ब्रेन में यह फिट बैठ गया कि इसको कुत्ता कहते हैं उसके बाद में जब नया चित्र दिखाया कुत्ते का तो वह अपने पुराने चित्रों के साथ में कंपेयर करके समझ लेगा कि कुत्ता ही है तो यह न्यूरल नेटवर्किंग डीप लर्निंग मशीन लर्निंग का जो कांसेप्ट है स्वामी जी एगजैक्टली उसी कांसेप्ट के बारे में बात करते हैं तो हमने कुछ दिनों पहले बात की थी ना कि स्वामी जी प्रिडिक्टेड बिग बैंग थिरी तो स्वामी जी आल्सो प्रिडिक्टेड लार्ज लर्निंग मॉड्यूल आज का जो एलएनएम जिसको कहते हैं मशीन लर्निंग कहते हैं स्वामी जी आल्सो प्रिडिक्टेड ट देखिए स्वामी जी की बुद्धि कितनी एडवांस उस समय बैठक के ये सब बैठे-बैठे प्रेडिक्शन किया करते थे इसके बाद में स्वामी जी क्या कहते हैं उसके बारे में हम कल चर्चा करते ओ शा
Questions & Answers
श्री देखिए इसके बहुत सारे काउंटर आर्गुमेंट है खास करके यह जो बर्थ एक्सीडेंट जिसको बोलते हैं ना अभी मान लीजिए कि मैं अपने हाथ में यह एक मुट्ठी भर के रेत पकड़ता हूं अपने हाथ में और ऐसा करके छोड़ता हूं तो वह इतना मुट्ठी भर रेत कहां-कहां पे गिरेगा वह स्टेटिस्टिक्स है हवा का जिस डायरेक्शन है मैंने जिस समय फेंका तो उस समय क्या उसका गति होगा तो यह स्टेटिस्टिक्स प्रोबेबिलिटी मान सकते हैं कि हजार बच्चे जन्म लेते हैं तो स्टेटिस्टिक्स के रूप में गिनवाला अलग वो डिफरेंस हो जाता है तो मैंने प्योर आप क्या कहेंगे मटेरियल दृष्टि से यह सब एक्सप्लेन कर सकते हैं प्रश्न क्या है पता है कि जितना ही आर्गुमेंट हम करते रहे यह सब चीजों का आर्गुमेंट से काट भी सकते हैं इसका अल्टीमेट प्रूफ एक ही है कि हमको वो दिव्य दर्शन हो व एक साधना करते करते एक के बाद एक जो दर्शन होता है स्वामी जी को किसी ने पूछा कि स्वामी जी आप इतना सुंदर चैटिंग कैसे करते हैं तो स्वामी जी ने कहा कि देखो मुझे एक दिव्य दर्शन हुआ था मैंने ऋषि मुनियों को इस तरह का चैटिंग करते हुए सुना था तो उससे मैंने यह सीखा है माने यह चैटिंग का स्वामी जी पार्टिकुलर जिस तरह से चैटिंग करते थे वो किसी गुरु से नहीं सिखा था वो हजारों साल पहले ऋषि मुनियों जो करते थे दिव्य दर्शन से उन्होंने सिखा है तो अल्टीमेट प्रूफ तो वही है कि दिव्य दर्शन किंतु बिकॉज कि हम इस जगत में रहते हैं इंटेलेक्चुअल लोगों के साथ में रहते हैं तो हम इस तरह से आर्गुमेंट करते हैं अदर वाइज स्वामी जी की जितनी भी आर्गुमेंट है हम सभी को काट सकते हैं जैसे स्वामी जी ने यहां पे कहा ना कि नॉलेज एक्वायर करने का क्या तरीका है कि एक सफर्जन को गिरते हुए देखा मुझे डिसेटिस्फेक्शन हुआ अभी मैं हजार सफर्जन को गिरते हुए देखता हूं तो मुझे सेटिस्फेक्शन हो गया कि सफर्जन जमीन प ही गिरता है तो बोल कर के मैंने गुरुत्वाकर्षण का नियम लगा दिया किंतु एक्चुअली हमको पता है कि गुरुत्वाकर्षण का नियम खोजने के पीछे क्या-क्या सब लगा हुआ है किस तरह से कैलकुलस बोलकर के एक मैथमेटिकल सिस्टम खड़ी की गई है तो बहुत ही कॉम्प्लिकेटेड प्रोसेस है सो दिस आर सिंपलिस्टिक आर्गुमेंट यदि बाहर वालों की दृष्टि से कहा जाए तो तो हम लोग तो स्वामी जी के फॉलोअर से बो करके आर्गुमेंट को बड़ा ही सीरियसली लेते हैं किंतु अल्टीमेटली हमको यह समझना है कि हम मान लीजिए कि आई एम नॉट अ पार्ट ऑफ दिस ऑर्डर मैं स्वामी जी के साथ में कनेक्टेड नहीं हूं मैं मैं कोई एक अलग ही जगह पर बैठा हुआ हूं स्वामी जी को पढ़ रहा हूं तो मेरे लिए अल्टीमेट आर्गुमेंट वही होगी कि साधना करके दिव्य दर्शन अने अपनी आंखों से देख लो दैट इज अल्टीमेट आर्गुमेंट देखिए कि यह जो सूक्ष्म शरीर है उसकी यह अवस्थाए है स्थूल शरीर के साथ में इसका रिलेशन नहीं है क्योंकि स्थूल शरीर तो एक हार्डवेयर ही है हार्डवेयर को स्विच ऑन स्विच ऑफ कर सकते हैं वैसे एक्चुअली किंतु उसके भीतर का जो सॉफ्टवेयर है वही तो स्विच ऑन स्विच ऑफ होता है और जहां तक इलेक्ट्रिसिटी का प्रश्न है उसका तो कोई रिलेशन ही नहीं है अर्थात कि आत्मन में तो कोई विकार ही नहीं है आत्मन की स्टेजेस तो हो ही नहीं सकते तो सूक्ष्म शरीर है सूक्ष्म शरीर की अवस्थाएं हैं तो सूक्ष्म शरीर जागृत अवस्था में है सुश पत अवस्था में है ना कि फिर ये तुरीय अवस्था में है स्वप्न जागृत सुश पत और तुरीय चार अवस्थाएं है तो सूक्ष्म शरीर की ये सब अवस्था है तुरीय अवस्था में चला जाएगा अर्थात कि सूक्ष्म शरीर कारण शरीर के भीतर में विलीन हो गया है ये सब देखिए ये लैंग्वेज की लिमिटेशन है ना सब समय परफेक्ट टेक्निकल शब्द नहीं यूज कर स्वामी जी यहां पे सोल शब्द बार-बार यूज करते हैं तो हमको तो समझना है कि कहां पर सोल को आत्मन के रूप में देखना है लेकि कारण के रूप में देखना है कि कहां पर सूक्ष्म शरीर के रूप में देखना है कहां प उसको क्रिश्चन इक्विवेलेंट के रूप में स्वामी जी सोल शब्द यूज करते हैं तो लैंग्वेज की लिमिटेशन है मन शब्द कहीं पर यूज कर दिया हमको कॉन्टेक्स्ट देख कर के फिर वेदांतिका देने हैं