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Sri Ramakrishna's Stories ·

स्वामी ब्रह्मानन्द कथित : श्रीरामकृष्णदेव : जैसा हमने उन्हें देखा 10 Nov 2022

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ओम sthapa कच धर्म स्वरूप ने अवतार varishthay रामकृष्ण यत नमः श्री रामकृष्ण देव जैसा हमने इन्हें देखा इस किताब में से हम लोग स्वामी ब्रह्मानंद ठाकुर के जो मानस पुत्र द उन्होंने ठाकुर के बारे में क्या कहा इसका पाठ हम लोग कर रहे हैं तो ठाकुर आगे कहते हैं राजा महाराज आगे कहते हैं कल हम लोगों ने जो बात किया था उसको मैं फिर से एक बार दोहरा देता हूं आई एम रिपीटिंग डी पैसेज श्री रामकृष्ण देव प्रत्येक व्यक्ति को ध्यान का अभ्यास करने हेतु प्रोत्साहित करते द श्री राम कृष्ण नियमित रूप से ध्यान का अभ्यास एन करने से मनुष्य का आध्यात्मिक जीवन आध पतित हो जाता है इफ यू वांट प्रैक्टिस मेडिटेशन रेगुलरली योर स्पिरिचुअल लाइफ विल डी रेल ठाकुर ने अपने गुरु तोता पुरी से पूछा था आप तो सिद्धि प्राप्त कर चुके हैं तो फिर आप ध्यान क्यों किया करते पुरी डेट यू हैव ऑलरेडी अटेंड सक्सेस यू हैव ऑलरेडी अन ग्रैजुएट्स इन डी प्रैक्टिस ऑफ मेडिटेशन नौ वही डू यू प्रैक्टिस इट रेगुलरली तो तोतापुरी ने क्या कहा अपने चमकते हुए पीतल के लोटे की तरफ इशारा करते हुए तोतापुरी ने उत्तर दिया था यदि इस लोटे को प्रतिदिन एन मंचा जाए तो इसमें धब्बे पद जाएंगे ठाकुर अच्छा तो यहां तक हमको ठाकुर ने कहा की देखिए ध्यान करने से ध्यान करने की आवश्यकता क्या है हमको अपने आध्यात्मिक जीवन में नियमित ध्यान क्यों करना पड़ता है स्वामी जी ने जब बेलूर मठ की स्थापना की तब उन्होंने नियम बनाया की बेलूर मठ में जितने भी साधु रहते हैं उन सबको सुबह को मंगल आरती में आना होगा और मंगल आरती के बाद सबको वहां पर मंदिर में साथ में बैठ करके ध्यान करना होगा जो लोग बेलूर मठ गए हैं उनको पता होगा की जहां पर वो ओल्ड श्री है वहां पर एक छोटा सा एक कमरा है वहां पर और उसके बगल में ही स्वामी जी का कमरा है और वहीं पर राजा महाराजा वगैरा भी रहा करते द तो सुबह को घंटी बजेगा और सब लोग मंगल आरती के लिए इकट्ठा होंगे साथ में जब ध्यान करेंगे ऐसा जो है स्वामी जी ने उसे समय सबके लिए बनाया था अभी हुआ ऐसा की स्वामी जी ठाकुर के जो डायरेक्ट भी सही पाल है जैसे की स्वामी अद्भुत आनंद जी राजा महाराज उन लोगों को तो नियमित उठ करके ध्यान करने की वैसे कोई जरूरत नहीं है क्योंकि आध्यात्मिक जीवन में जो सर्वोच्च सिद्धि है वो समाधि तो पराए सभी ने प्राप्त कर ली थी उसके बाद में साधक का जीवन जो है वो संपूर्ण रूप से ईश्वर मे हो जाता है उसकी प्रति सांस जो है वो ईश्वर का नाम लेती है जिसको अजपा जप कहा जाता है उसका जो प्रत्येक उसका जो जागृत क्षण है जितनी क्षण वह जागृत रहता है उसको आत्मा अनुभूति होती रहती है वह शायद कम करने के समय भूल जाएगा की उसने समाधि प्राप्त की है या उसने ईश्वर दर्शन किया है या तो आत्म दर्शन प्राप्त किया है किंतु जैसे ही वह आंख बंद करके दो मिनट के लिए बैठेगा उसकी जितनी उपलब्धि है फिर से उसकी नजरों के सामने झलक उठेगी तो जिसने समाधि प्राप्त की है श्री रामकृष्ण देव के आशीर्वाद प्राप्त किए हैं ऐसे ठाकुर के सन्यासी शिष्यों को सुबह को उठकर के ध्यान करने की क्या जरूरत है तो एक दिन वो अद्भुत anandjeet है लातों महाराज वो नाराज होकर के स्वामी जी को बोले की देखो यह तुम सब पश्चिम में से मैंने अमेरिका जो गए द स्वामी जी वहां से लौट करके ए करके ये सब नए-नए एक्सपेरिमेंट कर रहे द ऑर्गेनाइजेशन में तो लेटर महाराज ने कहा यह जो तुम पश्चिम में से जो सबसे विलायत में से जो सिक करके आए हो उसे तरह से वह घंटी बजाने से ध्यान करूंगा फिर घंटी बजाने से मैं खाना खाऊंगा ऐसा मेरे से नहीं होगा मैं जा रहा हूं मत छोड़ करके ऐसा करके वह निकलना शुरू हो गया तो स्वामी जी ने फिर कहा की अच्छा ठीक है ठीक है तुम वापस आओ यह सब नियम कानून तुम्हारे लिए नहीं विवेकानंद माउंट एवरेस्ट थी मॉनेस्टिक डिसीप्लस ऑफ श्री रामकृष्ण demselves विल हैव तू वाले अप अर्ली इन डी मॉर्निंग देयर विल बी अन बेल फॉर डी मंगल आरती एंड एवरीवन विल हैव तू अटेंड मंगला आरती एंड दें मेडिट्रेड बाय सिटिंग तेरे सो व्हेन ही मेड दिस रूल अन लातूर महाराज स्वामी adbhutanand हु वास्ता ही वाज अनएजुकेटेड एंड वेरी सिंपल इन इस नेचर बट ऑफ फोर्स हाईली डेडीकेटेड तू ठाकुर ही सेड तू स्वामी जी था इट विल नॉट बी पॉसिबल फॉर मी तू मेडीटते व्हेन यू रिंग डी बेल आई कनॉट मेडीटते और व्हेन डी बेल रिंग्स आई विल मेडिट्रेड व्हेन माय मूड स्ट्रक्स सो आई विल नॉट बी एबल तू लीव इन मॉनेस्ट्री बेलूर मठ स्वामीजी बरोट हिम बैक ना ओके यू कैन लाइव हर एंड यू डोंट हैव तू फॉलो डी रोज किंतु यह जो एक्सेप्शन के लिए था महापुरुष महाराज राजा महाराज एवं एक बार वह लोग बहुत बुखार हो गया था शायद राजा महाराज को और मंगल आरती में नहीं ए पाया तो स्वामी जी ने तो नियम किया है की मंगल आरती में आना ही है तो उन्होंने क्या किया की उन लोगों को भिक्षा करने के लिए भेजा की जाओ जो नियम सबके नए आए हुए साधुओं के लिए है और तुम लोगों के लिए भी है देखिए स्वामी जी ने किस तरह से ये niyambaddh प्रणाली से संघ का गठन किया है की जो सर्वश्रेष्ठ जो की ठाकुर के मानस पुत्र स्वयं है जिसको की राजा स्वामी जी स्वयं राजा करके बुलाते द जिसको की ठाकुर अपने मानस पुत्र कहते द उनकी जो आध्यात्मिकता के सबसे बड़े वारिस दर द उनको भी स्वामी विवेकानंद ने जब वह मंगल आरती में नहीं ए पाए तो भिक्षा करने के लिए भेजा था वैन वैन दे राजा महाराज स्वामी ब्रह्मानंद वेक अप इन डी मॉर्निंग बिकॉज ही हेड फीवर ड्यू तू हिज बॉडी पर ही कंडत वेक अप एंड अटेंड मंगला आरती बट डी वे स्वामीजी हेड क्रीटेड अवर ऑर्गेनाइजेशन स्वामी जी हज क्रीटेड अवर ऑर्गेनाइजेशन एवरीवन हज तू फॉलो डी रूल इक्वली सो ही एस्क्ड राजा महाराष्ट्र गो तू डी सिटी एंड ब्रिंग सैम ब्रिंग सैम भिक्षा विल नॉट हैव हिज फूड इन डी किचन इस तरह से niyambaddh प्रणाली से स्थापना की थी ठाकुर और कहा करते द सही ध्यान का लक्षण यह है की मनुष्य परिवेश और अपने देहकों भी भूल जाता है डी ट्रू साइन ऑफ परफेक्ट मेडिटेशन ही विल फॉरगेट डी सेंसेशन ऑफ है बॉडी सर पर कौवा बैठ जाने पर भी उसका बोध नहीं होता इस को कॉम एंड सीड्स इन योर ओपिनियन हेड इफ अन बर्ड साइट्स अपॉन योर हेड यू विल नॉट रिलाइज सो यू विल नॉट फुल इट श्री राम कृष्ण देव ने वह अवस्था प्राप्त की थी श्री रामकृष्ण देव हेड रिलाइज्ड डिस्ट्रिक्ट नात मंदिर में ध्यान करते समय उनके सर पर एक कौवा बैठ गया था एक दिन वनडे ठाकुर वास मेडिटेटिंग इन टेंपल एंड crochem एंड सेठ अपॉन है हेड इसके बारे में एक दूसरे भी बहुत अच्छी घटना है की एक बार स्वामी जी और गिरीश घोष जो है पंचवटी में ध्यान कर रहे द तो अभी गिरीश खोज तो ठाकुर के वीर भैरव जैसे उनके शिष्य द और उनको यह भी था एक भीतर में एक ऐसा अहंकार था की यह मैं जो हूं ठाकुर के शिष्यों में सर्वश्रेष्ठ हूं और मैं जब ध्यान में भी सबसे आगे हूं तो एक दिन और स्वामी जी के साथ में रात को ध्यान कर रहे द तो ध्यान जमा नहीं उनका क्योंकि क्या है मच्छर बहुत करते द रखो तो हमको भी पता है की हम आंख बंद करके बैठते हैं और मच्छर काटते हैं तो हमारा हाथ भी वहां पर चला जाता है हमारा ध्यान भी हमारे मैन का वो जो है अटेंशन वहां पर चला जाता है हम ध्यान नहीं कर पाते तो उसे दिन क्या हुआ की वो पंचवटी में बहुत सारे मच्छर द गिरीश गोश्त तैयार नहीं कर पाए तो उन्होंने आंख खोल के देखा की नरेन क्या कर रहा है देखते हैं नरेंद्र स्वामी जी के मैं ठाकुर ने वो कहा है की शिव के अवतार है ठाकुर ने खुद उनके लिए आने के लिए प्रार्थना की थी saptarushiyon को तब उनमें से उन्होंने अवतार ग्रहण किया है तो नरेंद्र क्या करता है देखते हैं उन्होंने आंख खोल के देखा कैसा आश्चर्य नरेंद्र के पूरे शरीर पे मच्छर इस तरह से छाए हुए द जैसे मच्छर का पूरा ब्लांकेट पहना हो तो यह देख करके और वो बिल्कुल स्थिर पत्थर की तरह बैठा है नरेन बैठे हैं वो पता ही नहीं चले उनको सेंस नहीं है की ब्लांकेट की तरह उनका पूरा शरीर जो है वो मच्छरों से गिर गया है अवरुद्ध हो गया है तो गिरीश घोष दर गए और उन्होंने नरेंद्र को जोर से धक्का मारा अरे नरेंद्र उठो देखो इतने मच्छर किंतु नरेंद्र द की जिस अवस्था में वो बैठे द वह पद्मासन में वैसे ही वो गिर गए जैसे की वो बुरे पत्थर के बने हो इस तरह से इस हद तक जो है नरेंद्र ध्यान में मग्न हो गए द तो ध्यान सफल होने की यह जो निशानी है की आपके शरीर के साथ में क्या हो रहा है अभी मैं बैठा हूं तो 2 मिनट के बाद में कमर में दर्द होने लगा फिर 2 मिनट के बाद में पैर में दर्द होने लगा फिर 2 मिनट के बाद में लगता है की फैन का स्पीड थोड़ा सा ज्यादा किया जाए फिर 2 मिनट के बाद लगता है की नहीं उसका स्पीड थोड़ा कम किया जाए फिर 2 मिनट के बाद में लगता है जब थोड़ा सा भजन सन लेते हैं तो ऐसे हर दो-तीन मिनट होती है कुछ कुछ विघ्न ए जाते हैं हमारे सामने किंतु जब हम अपने मैन को वश में कर करके इतना जोर से चिल्ला के बोलेंगे अरे यह माया मेरी का मेरा क्या बिगड़ लेगी मेरे मैन को किस तरह से वह विकसित कर पाएगी मैं तो ठाकुर के संतान हूं मैन की स्वामी जी की संतान हो इस तरह से जोर से हुंकार करने से भैरव की तरह माया जो है फैट करके भाग जाएगी और ये जितने भी विघ्न होते हैं दो-दो मिनट पे हमको डिस्टर्ब करते हैं सब चले जाएंगे बेटिंग हिम सो ही ओपन हिज आइस एंड ट्राई तू लुक इट नरेन लेट्स सी व्हाट नरेन इस डूइंग ठाकुर हिमसेल्फ हिट तू डी सप्तऋषि डेट प्लेस कम एंड हेल्प मी इन प्रोपेगेटिंग माय मैसेज इन डी वर्ल्ड सो स्वामी जी हेड डिसेंडेड फ्रॉम डी सप्त ऋषिस अलसो ही वाज दी अवतार ऑफ शिवा सो लेट मी सी व्हाट नरेन इस डूइंग अगेंस्ट दिस मॉस्किटो बाइट्स सो व्हेन गिरीश hoslupt आते नरेंद्र वह सीटेट इन मेडिटेशन पोज ऑफ विदाउट अन्य मोशन लाइक अन स्टोन एंड हिज बॉडी वाज कवर्ड विथ मॉस्किटोस ऐसी ही वैसे वेयरिंग अन ब्लैक ब्लांकेट डार्क ब्लांकेट सो गिरीश खोसला फ्राइड एंड देयर सो में मॉस्किटो सर बेटिंग नरेन एंड ही वैसे नॉट फीलिंग एनीथिंग अत ऑल हिज स्टील अलाइव ओर नॉट सो ही पुष्टि नरेन एंड नरेन फेल डाउन ऑन हिज बैंक बट स्टील सीटेट इन हिज मेडिटेशन पीओएस स्टील फिक्स लाइक अन स्टोन सो दिस इसे हाउस फ्रॉम नरेस डेडीकेशन तू मेडिटेशन वास हो डिप्ली ही कूद अन राइज इन दी हायर त्रेता ऑफ अवर कॉन्शसनेस डेट ही वुड कंपलीटली फॉरगेट ऑल डी सेंसेशंस इन हिज बॉडी नौ व्हाट हैपेंस विथ अस व्हेन सी मेडिट्रेड आफ्टर 2 मिनिट्स सी हैव पेन इनॉर्बिट आफ्टर अनदर 2 मिनट सी हैव अन पेन इन अवर लग आफ्टर अंदर 2 मिनट सी वांट तू इंक्रीस डी स्पीड ऑफ ओवर फैन आफ्टर मोर अंदर तू मिनिट्स यू वांट तू डिक्रीस डी स्पीड ऑफ ओवर फैन सो धीस वेयर अवर माइंड कंटीन्यूअसली फाइंड्स एक्सक्यूज इस तू डू लेकिन आधार दें मेडिटेशन एंड व्हेनेवर धीस हैपेंस सी शुड बी एक्सट्रीमली फॉर्म विद अवर माइंड सी शुड थिंक डेट आई एम भैरव आई एम कॉल भैरव आई एम डी सैन ऑफ thakurm एंड स्वामीजी सन और डॉटर ऑफ thakurmind स्वामी जी हु इस दिस माया व्हाट इस दिस डिस्ट्रक्शन डेट इस ब्रिंगिंग डिस्टरबेंस इन माय मेडिटेशन आई विल फाइट डिस्मय आई विल फाइट डिस्ट शूटेड स्क्रीम इट इस डिस्ट्रक्शन एंड टेल इट गो आवे एंड तू नो डिस्ट्रक्ट मी अन्य मोर एंड इफ यू तू दिस दें यू विल फाइंड डेट यू आर माइंड bikams मच स्त्रोंगर योर विल पावर स्ट्रेंजर्स एंड यू कैन सीट इन मेडिटेशन फॉर ए लंगर पीरियड ऑफ टाइम राजा महाराज आगे कहते हैं स्वामी रसमणि द्वारा बनवा गए दक्षिणी छोड़ के उद्यान मंदिर में श्री रामकृष्ण को साधना के लिए जरूरी सभी चीज प्रदान की जाती थी इंदर दक्षिणेश्वर काली टेंपल था वास बिल्ट बाय रानी रश्मानी एवरीथिंग द ठाकुर नीडेड फॉर है साधना प्रोवाइडेड टूटी यदि तुम्हारे भीतर सच्चा विश्वास यानी राजा महाराज जी अभी अपने शिष्यों को का रहे हैं दक्षिण का बेलूर मठ में बैठ करके यदि तुम्हारे भीतर सच्चा विश्वास प्रेम और भक्ति है तो ईश्वर तुम्हारे लिए जरूरी सभी वस्तुओं की व्यवस्था करेंगे राजा महाराज इस सिचुएटेड इन बेलूर मठ ठाकुर वह सब करने की इच्छा नहीं तो मैं इस तरह के दुविधा में फंसा हूं यदि मैं और ज्यादा आगे जाऊंगा तो मैं मुझे वो नौकरी में शायद मैं ध्यान ना दे पाऊं तो वे लोग मुझे जाने को का देंगे ये जो मेरा जो बिजनेस है उसमें शायद मुझे वो लॉस होना शुरू काटा होना शुरू हो जाए तो मैं आध्यात्मिक जगत को पकड़ के रखूं एन किए में जो मेरा संसार है मेरे घर चलाने की ये जो आवश्यकता है उसको मैं करके रखूं हम साधुओं को कोई दिक्कत नहीं है क्योंकि आश्रम में हमको सब मिलता है और हमको तो जरूरी है की हम आध्यात्मिक जीवन में आगे बढ़े किंतु यह जो grihst है उनको यह सब आध्यात्मिकता के साधना यह सब करना शुरू करते हैं तब यह दिक्कत आती ही है एक समय कभी उनके मैन में विचार आता है उसे समय एक ठाकुर राजा महाराज कहते हैं की यदि हम साधना में सिंसर है तो ठाकुरमार स्वामी जी हमारे शरीर निर्वाह की योगक्षेम की व्यवस्था कैसे भी कर देंगे तो वह स्टार्ट डूइंग साधना तपस्या अप्वॉइंट कम्स व्हेन और माइंड इस सो ग्रेटली अट्रैक्टेड टुवर्ड्स दिस आदर वर्ल्डलाइनस टुवर्ड्स डी हायर रिचर ऑफ कॉन्शसनेस डेट सी कैन नॉट फोकस प्रॉपर्ली इन अवर बिजनेस ऑन इन अवर जॉब एंड dangercom स्टेट बी में बी फायर फ्रॉम ओवर जॉब और विमेश स्टार्ट मेकिंग लॉस इन अवर बिजनेस सो व्हाट शुड बी डू इन डेट गैस शैल सी कंटिन्यू डूइंग ओवर साधना और डू अन रिड्यूस माय साधना एंड फोकस मोर ऑन माय बिजनेस और जॉब सो डेट आई कैन ऑन इनफ मणि फॉर डी कीपिंग ऑफ मैसेल्फ एंड माय फैमिली इन दिस केस राजा महाराज गिव्स उस दिस फ्रॉम इसे डेट ब्रिटिश वर्ल्ड एंड डी नीड ऑफ डी आदर वर्ल्ड बोथ ऑफ दिस विल बी फुल फील्ड बाई ठाकुर एक साधु ने बैंक में 10000 बचा करके रखे द ऐसा सुनकर ठाकुर ने कहा जो अनुकूलता और प्रतिकूलता की चिंता करते हुए भविष्य की योजनाएं बनाता है वह अपना आध्यात्मिक जीवन नष्ट कर डालेगा देखिए ये कितनी बड़ी बात है साधु लोगों को भी कभी-कभी लगता है की अरे मेरे पास तो कुछ नहीं है मैं जब बीमार होऊंगा या तो मैं वृद्ध होगा तो मेरा क्या होगा तो कुछ जो भी प्रणामी जो भी दक्षिण वगैरा मिलता है बैंक में जमा करके रख दो ऐसा कोई कोई साधु सोचते हैं तो यदि साधु भी ऐसा सोचता है तो आश्चर्य की बात नहीं है की बृहण को तो अपने यह जो बैंक बैलेंस की अपने कैरियर की फिगर होंगी होंगी अभी रामकृष्ण मिशन में ऐसा होता है की आपको वैसे पता है की इंस्टीट्यूशन के पास बहुत सारा पैसा है किंतु यह जो हम व्यक्तिगत साधु है उन लोगों के पास ज्यादा कुछ नहीं का प्रणामी का मेला सबसे ज्यादा हमारे पास वैसे कुछ होता नहीं और जब भी हमको बोला जाए की तुम इस सेंटर छोड़कर दूसरे सेंटर चले जाओ या तो फिर मैन लीजिए कहीं किसी के साथ झगड़ा हो गया मुझे यहां पे नहीं रहना है मैं छोड़ के जा रहा हूं तो मेरे पास में कुछ नहीं रहेगा यानी आश्रम के पास बहुत कुछ है मेरे पास व्यक्तिगत कुछ नहीं है और ये जो सब समय ये कॉन्शियस ये हमारे मैन में रहना की मेरे पास में सचमुच में कुछ नहीं है मैं बिल्कुल निर्धन हूं मैं बिल्कुल ईश्वर के ऊपर में समर्पित हूं मैं अपने भविष्य की चिंता बिल्कुल नहीं कर रहा हूं जो भी होना है मेरे साथ में चाहे मुझे यहां से निकल भी दिया जाए चाहे मुझे ऐसी कोई जगह पर भेजती है जाए जहां पर मैं बीमार भी हूं तो मेरी देखभाल करने वाला कोई नहीं है तो भी मैं धन का संचय नहीं करूंगा या तुम्हें ऐसा कोई भी कम नहीं करूंगा जिसके लिए मैं अपने भविष्य के लिए कुछ बना करके जाओ ऐसा बिल्कुल सोचो बिल्कुल अपने मैन को एक बारी रजक साधु की तरफ माना करके रखूं वही मेरी साधना में सबसे बड़ी सिद्धि होगी हेयर राजा महाराजा बिग अमाउंट सो वैन मोर हेस से ₹10000 एंड 17 इन डी बैंक सो राजा हमारा सर इफ यू थिंक ऑफ योर लाइफ योर से मेंटेनर्स योर वेल बीइंग दें इफ यू कीप ऑन थिंकिंग ऑफ योर वेल बीइंग कीप ऑन थिंकिंग व्हाट विल हैपन तू मी व्हेन आई एम ओल्ड व्हाट विल हैपन तू मी व्हेन आई एम इफ यू कलेक्ट मणि दें इट इस वेरी बाद बिकॉज यू आर अन मॉम शुड हैव नथिंग इन हिज नाम नौ अबाउट रामकृष्ण मिशन यू नो डेट अवर आश्रम इंडिविजुअल मॉम जो नोट प्रक्रिया एनीथिंग इन डेट इसे वही इट विल बी आई एम ऑलवेज इन डाउट डट व्हाट विल हैपन तू मी इन फ्यूचर सपोज आई एम सेंट इन अन सेंटर विच इस पैरहैप्स वेरी पुर और पैरहैप्स डेम नोट केयर फॉर मी प्रॉपर्ली वन आई मोड और वन आईएम और सब पैरहैप्स आए हैं कवैरल विद डी ओवर सीनियर साधु एंड आई हैव तू लीव दिस ऑर्डर व्हाट विल हैपन तू मी इफ आई कैन लीव माय एंटीरे लाइफ बाय थिंकिंग था आई एम अन मॉम हु लाइव्स अन ट्री एंड हु ड्रिंक्स डी वाटर ऑफ रिवर इस अन मेडिसिन गंगा नदी का पानी में बीमार हो जाऊं तो वो है नारायण हरि स्वयं इस तरह से यदि मारे मैन में वैराग्य का भाव होगा तो यह जो मैं इस इस तरह से रह रहा हूं की धन संपत के बीच में भी रह करके मेरा मैन जो है वो संपूर्ण रूप से निर्मित रहेगा और इस तरह की निर्णय तथा इसको डिवेलप करना वही हमारे सन्यासियों के जीवन में सबसे बड़ी एक आवश्यकता है सबसे बड़ी एक सिद्धि है समानता या ठाकुर अपने साथ किसी को भी दो या तीन दिनों से अधिक रहने की अनुमति नहीं देते द किंतु एक बार एक युवक उनके पास कई दिनों तक रहा इससे नाराज होकर कुछ भक्तों ने ठाकुरों से शिकायत की वे उसे युवक को त्याग मार के शिक्षा दे रहे द ठाकुर ने उत्तर दिया उसे सांसारिक जीवन अंगीकार करने दो क्या मैं उसे विचलित कर रहा हूं उसे पहले ज्ञान प्राप्त करके फिर संसार में प्रवेश करने दो क्या मैं हर किसी को कम कंचन का त्याग करने की शिक्षा देता हूं मैं केवल उन्हें लोगों से त्याग के बारे में वार्तालाप करता हूं जिन्हें इस हेतु थोड़े प्रोत्साहन की जरूरत है शेष लोगों से वे कहा करते जाकर आमदे के अचार का आनंद उठाओ और अम्ल शूल होने पर यहां दावा के लिए आना यह बड़ा ही इंपॉर्टेंट इंसीडेंट है ठाकुर को ठाकुर के वहां जो भक्त वगैरा आते द तो ठाकुर को रहने के लिए कुछ जगह कुछ चाहिए फिर उनको प्रसाद खाना वगैरा कुछ चाहिए तो कुछ धनी भक्त द वह कुछ रुपया दे दिया करते द ठाकुर के पास में की इसमें से जो आने भक्तों को प्रसाद वगैरा है खाना पीना जो है मैन उनके लिए खाना पकाती है सब समय तो काली मंदिर में प्रसाद नहीं मिलेगा तो भक्तों के लिए खाने की व्यवस्था यहां से हो जाए छोटी-मोटी आवश्यकता है पुरी हो जाए उसके लिए थोड़ा सा रुपया यहां पर दिया है किंतु ऐसा होता था की इन लोगों को ऐसा भी लगता था जो पैसा देते द की अरे ठाकुर के पास में यह जो लड़का है वह इतने दिनों से रह रहा है और वो भी ठाकुर उसको त्याग के शिक्षा दे रहे ऐसा क्यों है भाई हमारे रुपए पर दे रहा है ऊपर से त्याग की बात कर रहा है त्यागी कर रहा है तो अपने रूपों से करो हमारी हमारी दर भी लगता है की अरे ये त्याग कर रहा है और मैं त्यागी नहीं हूं तो क्या वो मेरे से आगे चला जाएगा वो क्या मेरे से सुपीरियर है मैं उससे हैं हूं वो मेरे से उच्च श्रेणी का है ऐसा एक इंफिनिटी परिसर बोलो या एंगर बोलो एक ए जाता है तो इसलिए उन्होंने ठाकुर से कंप्लेन की क्यों आप इस लड़के को अपने पास में इतने दिन से रखे हैं और क्यों उसको त्यागी शिक्षा दे रहे हैं ठाकुर ने कहा की देखो मैं तो उसको कहता हूं की मैं उसको जो कहता हूं वो उसको ग्रहण करना ना करना हो तो उसके ऊपर में है मैं हूं तो उसका हाथ पकड़ कर के उससे त्याग नहीं कर रहा करवा रहा हूं मैं कहता हूं की हान कम कंचन का त्याग करना आवश्यक करीना अपने gunvast शिष्यों को भी कहते द ऐसा लिया की यथासंभव त्याग करो आगे में ब्रैकेट में यथासंभव लगा दिया की जितना हो सके उतना करो और जो त्यागी भक्त द युवा भक्त द उन्होंने ठाकुर के मैसेज को बिना किसी फिल्टर एक्शन के एस इट इस लिया ब्रैकेट में कुछ रखा नहीं कम कंचन तय तो सही सही त्याग तो इस तरह से ये जो गृहस्ती शिष्य द और यह जो युवा शिष्य जो की बाद में त्यागी हुए संन्यास ग्रहण किया उन लोगों के बीच में थोड़ा सा ये जो है डिफरेंस ऑफ ओपिनियन तो था और बाद में थोड़ा सा बड़ा भी और इसके बारे में जब समय होगा मैं आगे थोड़ा सा और बताऊंगा खासकर के जो रामचंद्र दत्त है ठाकुर के बहुत ही अच्छे grihsthiy उन्होंने किस तरह से एक अपना अलग आश्रम करके त्यागी शिष्यों के बारे में कटाक्ष किया करते द वह एक बहुत ही अच्छी कहानी है मैं बाद में बताऊंगा इफ अन्य आदर देवोतीस कम दे कैन इट फूड एंड डी बिकॉज मदर यूज्ड तू कुक फूड फॉर डेम फॉर दिस देवोतीस हु वुड कम एलईडी आते इवनिंग ईटीसी सो सैम मणि टीचिंग हिम हो तू रिमूव ठाकुर एंड कंप्लेंट से आउट ऑफ थार माउथ बट इंप्लीकेशन शब्द डेट इफ ही उसे तू renouse एवरीथिंग एंड सी आर गिविंग मणि एंड ही इसे ईटिंग डी फूड गिवन बाई अवर मणि सो इफ यू वांट्स तू renouse गो एंड रिनाउंसिंग फॉरेस्ट वही इसे अन वेस्टिंग अवर मणि डेडान से दिस इन शब्द बट डेट वाज डी इंप्लीकेशन डेट वही ठाकुर इस कीपिंग दिस बॉय विथ हिम फॉर सच ए लॉन्ग पीरियड ऑफ टाइम एंड वही इस हिट टीचिंग हिम दिस renounciation सो ठाकुर से डेट आई एम टीचिंग renounceation डी renounciation ऑफ मणि एंड वुमेन तू एवरीवन नोट ओनली तू हिम बट यू आर टेकिंग इट इस मच आगे इट अप्लाइड तू यू इन ब्रैकेट दे विल राइट आज मच पॉसिबल रिनाउंस एवरीथिंग सो renouse एवरीथिंग इस सईद की ठाकुर एंड डिसीप्लस स्वीट पुट इन व्हाट फुट वर्स * renounciation विदाउट अन्य क्वेश्चन मार्क विदाउट अन्य एक्स्ट्रा कंडीशंस इन ब्रैकेट सो डेट इस राइट हापुड़ से आई एम टीचिंग इक्वलिटी तू एवरीवन एवरीवन इस टेकिंग आज मच इसे पॉसिबल फॉर देयर हो शोल्डर विल डिसीप्ल दिस टेक दिस मच एंड डिनाउंस डिसीप्लस विल टेक दिस मच सो दिस इसे हो देर वाज अन लिटिल डिफरेंस ऑफ ओपिनियन स्टार्टेड बिटवीन डी हाउसहोल्डर डिसीप्लस एंड यंगर मॉनेस्टिक डिस्पैच विच वास तू ग्रो लेटर ऑन डिस्कस लेटर ऑन स्पेशली अबाउट रामचंद्र दत्त सो दिस मच फॉर टुडे सी विल मीत टुमारो अगेन ओम शांति शांति हरि ओम तत्सत श्री राम कृष्ण जय राम कृष्ण