Transcript
ओम स्थापक य ज धर्मस्य सर्व धर्मा स्वरूप अवतार षय राम कृष्णाय कल हम लोग जो डिस्कशन कर रहे थे उसमें एक दो पॉइंट्स काफी रिलेवेंट है एक तो है कि आजकल जो हम पढ़ते हैं चाहे न्यूजपेपर में हो ना कि और कहीं पर भी तो जो लिखने वाले होते हैं या तो फिर जो बोलने वाले होते हैं हमेशा ऐसा लगता है कि उनका एक एजेंडा है कोई एक पार्टिकुलर डायरेक्शन में वे लोग लिखते हैं या बोलते हैं तो जिसको कहा जाए कि न्यूट्रल इंफॉर्मेशन या तो फिर फैक्ट बेस इंफॉर्मेशन हमको कहां से मिले यह तो एक अच्छा पॉइंट है सुंदर पॉइंट है और फिर एक था कि पढ़ना है तो जैसे कि फिलोसोफी कोई पार्टिकुलर फिलोसोफी पढ़े कि नहीं तो यह दो तो पॉइंट है उसके ऊपर कुछ मैं जो जिस तरह से सोचता हूं मैं जब पढ़ाई कर रहा था मैं जब स्टूडेंट था उस समय मुझे एक हिस्ट्री पढ़ने का मुझे काफी एक इंटरेस्ट सडन एक मेरे मन में आ गया था मैं बहुत सारा पढ़ा था हिस्ट्री और बायोग्राफी यह दो चीज मैंने बहुत पढ़ी और हिस्ट्री माने सिर्फ जनरल हिस्ट्री नहीं देखिए कि पार्टिकुलर मूवमेंट होती है जैसे कि एक मूवमेंट है एस्ट्रोनॉमी एस्ट्रोनॉमी या तो कॉस्मोलॉजी अर्थात कि किस तरह से साल मने प्रत्येक सेंचुरी में प्रत्येक समय में एक एक करके साइंटिस्ट आते गए उन्होंने अपना कोई एक मेजर कंट्रीब्यूशन यह साइंस इस के डेवलपमेंट में उन्होंने लगाया किस तरह से एरिस्टोटल के कुछ आइडियाज है जो कि डेवलप हुए उसको लेकर के बाद में कोपरनिकस गैलीलियो न्यूटन और फिर आखिर में यह आइंस्टाइन या तो फिर एनेल्स बोहर वगैरह इन लोगों ने मने देयर इज अ लोंग सीक्वेंस ऑफ साइंटिस्ट जिन्होंने पार्टिकुलर आइडियाज को एक पार्टिकुलर स्ट्रीम को डेवलप किया तो जब हम एक स्ट्रीम के बारे में पढ़ते हैं जैसे कि एक दूसरी स्ट्रीम हो गई कि रिलीजन अभी किस तरह से एक के बाद एक संत महापुरुष आते गए भारत में आप देखेंगे यदि रिसेंट हिस्ट्री ही देखा जाए तो शंकराचार्य है गौरांग महाप्रभु है अपने कितने सारे रीजनल सेंट्स है तो एक के बाद एक उनका अवदान इस पार्टिकुलर स्ट्रीम में उनके जो पार्टिकुलर नॉलेज बेस है उसके भीतर में यदि हम सभी का अवदान एक के बाद एक देखें तो हमारे सामने एक बड़ा ही क्लियर पिक्चर एक इमर्ज होता है प्रगट होता है कि ह्यूमन माइंड किस तरह से वर्क करता है व्हाट आर द होप एंड एस्पिरेशंस आशाएं और आकांक्षाएं क्या है मनुष्य की क्या उसको चालित करता है क्या उसको प्रेरित करता है क्या उसको मेहनत करने के लिए प्रेरणा देता है तो यह ह्यूमन साइकोलॉजी हमको एक समझ में आती है इससे क्या होता है कि अपना एक बहुत स्ट्रांग फाउंडेशन हो जाता है दो फील्ड में एक तो फैक्ट्स के फील्ड में दूसरा है कि साइकोलॉजी के फील्ड में यदि आपको जगत को समझना है तो आपको बहुत सारे फैक्ट्स चाहिए मैं अपने जब मैं स्टूडेंट था तो मैंने अपनी दीवार पर एक बहुत बड़ा वर्ल्ड में टांग करके रख दिया था और बीच-बीच में मैं देखा करता था कि अच्छा यह ईस्टर्न यूरोप कहां पे है यह नॉर्दर्न अफ्रीका कहां पे है फिर यह मैंने ये साउथ ईस्ट एशिया अभी बड़े-बड़े कंट्रीज है अमेरिका कनाडा या तो चाइना जापान इन सबका नाम या तो जनरल लोकेशन हमको पता होता है किंतु वर्ल्ड में मोर देन 150 कंट्रीज और इतनी ही जियोग्राफी से इतने ही कल्चर से इतनी ही ट्रेडिशनल के ऊपर में देखता कि ई पार्टिकुलर कंट्री कहां पे है यह तो सोमालिया बोलकर के कंट्री है कहां एक कोने में बैठा है अफ्रीका का तो देखूं तो थोड़ा सा क्या है इसके बारे में तो ये वर्ल्ड में देखता देख कर के मैंने बहुत कुछ सीखा कि जो कि हम जनरली कभी भी नहीं हमको एक जनरल रीडिंग में कभी नहीं आएगा ऐसा करके जब हम अपना एक फैक्ट बेस बनाते हैं मैंने बहुत सारे लोगों की बायोग्राफीज पढ़ी थी यह तो चाहे वो मैंने कोई साइंटिस्ट हो ना कि सेंट्स हो ना कि वो कि लीडर्स हो मास लीडर्स हो जैसे कि नेपोलियन है या तो फिर ये आइंस्टाइन है या तो फिर ये नरसिंह मेहता है या तो फिर ये महात्मा गांधी है या तो जवाहरलाल नेहरू है या तो फिर हमारे इतने सारे फ्रीडम फाइटर्स है अभी अपनी फ्रीडम फाइटर्स इट सेल्फ ये जो अपना भारत का फ्रीडम मूवमेंट ये एक स्ट्रीम है एक लर्निंग का एक् स्ट्रीम है कि किस तरह से अपनी फ्रीडम मूवमेंट डेवलप हुई शुरू में हमको किस तरह से बिल्कुल सप्रे कर दिया गया था उसके बाद में एक के बाद एक स्पिरिटेड महापुरुष जन्म लेते गए और उन्होंने किस तरह से इस सोते हुए देश को फिर से पुनः जागृत करवाया तो एक एक और है कि एक लर्निंग या तो फिर एक स्ट्रीम ऑफ थिंकिंग स्ट्रीम ऑफ इवेंट्स जैसे कि इंडिया का फ्रीडम मूवमेंट और किन किन लोगों ने उसमें पार्टिसिपेट किया अभी जब हम यह कुछ भी पढ़ते हैं तो हमेशा यह तो एक है कि जो ऑथर होता है या तो जो स्पीकर होता है उसका एक प्री कंसीव बायस होता है वो किसी एक पार्टिकुलर व्यक्ति के प्रति या किसी पार्टिकुलर आइडियो जीी या फिलोसोफी फिलोसोफी के प्रति वह आकृष्ट होता है और जब भी वह जो कुछ भी लिखता है उसमें वह उसके बयास वो हमेशा प्रकट होते हैं किंतु एक बात है कि आप यदि आपका सफिशिएंट रीडिंग है सभी पहलुओं से आप पढ़ते हैं तो सभी के व्यू पॉइंट आपकी नजर में आ जाएंगे जैसे मैंने मान लिया कि अब कोई एक पर्टिकुलर हिस्टोरिकल पर्सन है जैसे कि आइंस्टाइन मान लीजिए तो आइंस्टाइन का कंट्रीब्यूशन कितना है कहां पर है क्या रिलेवेंट है कितना इंपॉर्टेंस है उसको लेकर के अलग-अलग साइंटिस्ट ऑथर्स का विभिन्न विभिन्न ओपिनियन हो सकता है अभी मैंने तीन चार तरह के ओपिनियन पढ़े तो मैं अपना खुद का ओपिनियन क्या है मैं दे सकता हूं यानी कि मैं और किसी के ऊपर में डिपेंड नहीं करता कि कोई पार्टिकुलर पर्सन इस इसके बारे में इस इवेंट के बारे में कि इस घटना के बारे में क्या कहता है मैं अपने खुद के बलबूते पे कोई भी एक बात के ऊपर में अपना खुद का एक ओपिनियन फॉर्म कर सकता हूं अभी जब हिस्ट्री में क्या हुआ है और ये महापुरुष लोग जो है जो कि हमारी हिस्ट्री में आ गए अच्छे हो कि बुरे हो उनका तो एक मेजर कंट्रीब्यूशन था तो उनका साइकोलॉजी और उनका बायोग्राफी यह दो यदि हम पढ़ते हैं तो उसके बाद में आज के करंट अफेयर्स जब हम देखेंगे तो हमको एक बड़ा ही स्ट्रांग आईडिया आएगा कि किस तरह से कोई घटना हो रही है हम किसी पर डिपेंड नहीं रहेंगे कि हां यह आज की यह घटना हुई तो इसका इंटरप्रिटेशन क्या है क्योंकि आज जितनी भी घटनाएं होती है वह सब हिस्ट्री के ऊपर में ही बिल्ड अप होती है यदि आप ऐसा कहे कि मैं हिस्ट्री से निकाल करके कुछ कहूं तो ऐसा संभव ही नहीं है ये हिस्ट्री का ही कंटिन्यूएशन है अब जैसे साइंटिफिक डिस्कवरी है आज की जो भी जितनी भी डिस्कवरीज है तो आजकल की जो डिस्कवरीज होती आई है उसी के ऊपर में यह नए-नए आयाम वो प्रस्तुत करती है वो नया नया व जो है बिल्ड अप करता है नया तो कुछ हवा में से नहीं आता तो इसलिए जो भी आज की नई डिस्कवरी है उसका हिस्टोरिकल कांटेक्ट क्या है उसका इंपॉर्टेंस क्या है यदि हमको हिस्ट्री पता है तो बड़ा ही इजली हम उसको समझ सकते हैं वैसे ही जब बायोग्राफी है सेंट्स की बायोग्राफी जैसे हमने स्वामी जी की बायोग्राफी पढ़ी या फिर रमण महर्षि की पढ़ी या तो सेंट टेरेसा ऑफ एवला की पड़ी या तो फिर जैसे कि भगवान बुद्ध की पड़ी बायोग्राफीज तो ये सब बा ग्राफी पढ़ कर के हमको एक आईडिया आता है कि धार्मिक मनुष्य एक एक संत महापुरुष एक महात्मा एक परमहंस किस तरह से रहता है किस तरह से सोचता है किस तरह से कार्यकलाप होते हैं उसके बाद में कोई एक साधु होने हमारे सामने कोई एक आकर के कहेगा कि हां मैं धार्मिक पुरुष हूं किंतु फिर जब हम उसका आचरण देखेंगे तो हम उसके आचरण का सही सही आकलन कर पाएंगे उसका सही सही एनालिसिस कर पाएंगे क्योंकि हमको पता है कि बाकी सब संत महापुरुष किस तरह से रहे हैं ऐसा नहीं है कि यह कोई आज का संत है वो बिल्कुल नए तरह से रहता है बीच में एक मैंने न्यूज में पढ़ रहा था कोई म्यानमार के कहां का एक बौद्ध भिक्खू है तो उसने क्या व उसके उसके ऊपर में एक आर्टिकल आया था तो वो उस समय बड़ा ही पॉपुलर हो गया था तो वो क्या कहता है पता है कि मैं नए जमाने का साधु हूं और नए जमाने के अनुसार मैं इस तरह से मेरे पास में एक बहुत सुंदर मकान है उसके भीतर में बहुत सुंदर कार है फिर उसके साथ में उसने शादी भी की थी और उसकी बीवी भी साथ में रह रही थी और पहना हुआ है गेर हुआ तो वो कहता है कि मैं आई एम ए न्यू एज मंक नए जमाने का साधु और ये जो आर्टिकल लिखने वाला वो भी बड़ा खुशी खुशी लिख रहा है देखिए कि मोनेट जम में ये जो सन्यास प्रथा में किस तरह से नए-नए विचार आ रहा है मने ये पढ़ कर के और इसको सुनने वाले पढ़ने वाले भी बहुत सारे लोग हैं तो अभी देखिए कि जद आपने हिस्ट्री और बायोग्राफी पढ़ी है आजकल के जितने मेजर मेजर इंपोर्टेंट संत और महापुरुषों की साधुओं की भिक्खू की तो आप कभी भी इस तरह के बहकावे में नहीं आएंगे इस तरह से बेतुकी बातें आप कभी भी एक्सेप्ट नहीं करेंगे संन्यास का अर्थ ही है कि विषयों का त्याग आप ऐसा कहेंगे कि मैं नए तरह का सन्यासी हूं जो कि मैं विषयों के साथ में रह रहा हूं तो ये तो पूरा कंट्रक्शन हो गया मैंने इसलिए जब भी आज का समाज आज की घटनाएं हैं आज जो कुछ हो रहा है उसके बारे में यदि आपको एक प्रॉपर अंडरस्टैंडिंग चाहिए उसके बारे में एक प्रॉपर आकलन चाहिए तो हिस्ट्री और बायोग्राफी ये दोनों अवश्य पढ़ना चाहिए इससे क्या होगा कि अपना एक बहुत ही पावरफुल बैकग्राउंड खड़ा होता है हम सभी घटनाओं को सभी बातों को सभी चीजों को उसके एक प्रॉपर पर्सपेक्टिव में प्रॉपर कांटेक्ट में रख पाते हैं मैं खुद जब स्वामी जी को पढ़ने की शुरुआत की तो एकदम इमीडिएट मेरा स्वामी जी की के प्रति आकर्षण बढ़ गया था क्यों क्योंकि ऑलरेडी मैंने हिस्ट्री में इतना सब कुछ पढ़ा हुआ है एक तो एक एक मेजर सब्जेक्ट है राइज एंड फॉल ऑफ सिविलाइजेशंस आर्नोल्ड टोयन भी बोलकर के एक हिस्टोरियन है उसने एक सीरीज ऑफ बुक्स लिखे हैं उसका नाम है स्टडी ऑफ हिस्ट्री वो आर्नोल्ड टोयन भी क्या कहता है कि इतनी सारी सिविलाइजेशंस मानव सभ्यता की सभ्यता के इतिहास में आज तक आई है तो कोई भी एक सिविलाइजेशन को लीजिए किस तरह से उसका डेवलपमेंट होता है किस तरह से वह अपनी चरम सीमा पर पहुंचती है और किस तरह से उसका डिटेरिंग उसकी पड़ती आरंभ होती है उसका गिरना प्रारंभ होता है तो बड़ा ही सुंदर उसने बहुत सारा मने 6 7000 पेजेस की उसकी सीरीज ऑफ बुक्स होगी तो मैंने थोड़ा सा उसमें से पढ़ के रखा था अब मैंने जब स्वामी जी को पढ़ने की शुरुआत की तो इमीडिएट मैंने देखा कि ये जो अपने हिस्टोरिकल कांटेक्ट में जो आइडियाज रखे हुए हैं कि मनुष्य समाज क्या है है मनुष्य सभ्यता क्या है यह कल्चर क्या है यह ट्रेडिशनल जिन क्या है रिलीजन अर्थात कि धर्म का समाज में क्या रोल है क्या उसका तात्पर्य है समाज में धर्म का क्या व उसका रीजन क्यों हम धर्म को फॉलो करेंगे तो उसका हम मनुष्य के ऊपर में और समाज के ऊपर में उसकी क्या असर होगी यह साइकोलॉजिकल एस्पेक्ट ऑफ रिलीजन एंड सोशल एस्पेक्ट ऑफ रिलीजन जिसके बारे में स्वामी जी हमको बताते हैं तो जैसे इस बैकग्राउंड को लेकर के मैंने स्वामी जी को पढ़ने की शुरुआत की इमीडिएट मुझे एकदम ठीक ठीक मेरे मन में बैठने लगा कि हां मैंने और भी दूसरे आजकल के जो सो कॉल्ड थिंकर्स होते हैं ना तो उनको भी मैंने पढ़ा था नाम देने की जरूरत नहीं है बड़े कुछ कुछ लोग धर्म के नाम पर आजकल बहुत सारी बातें करते हैं और जिसको कि आजकल के इंटेलेक्चुअल लोग उनको बड़ा रिस्पेक्ट भी देते हैं तो मैंने उन ऐसे लोगों को भी थोड़ा सा पढ़ के रखा था किंतु कभी अभी भी मुझे उनके प्रति उनकी विचारधारा के प्रति थोड़ा सा भी आकर्षण महसूस नहीं हुआ किंतु जैसे मैंने स्वामी जी को पढ़ने की शुरुआत की फट फट करके सब कुछ मेरे मन में बैठने लगा कि हां मैं आज तक जो पढ़ता आया हूं आज तक जिस तरह से मैंने अपना इतिहास अपने ग्रेट जो महापुरुष है उनकी साइकोलॉजी उनकी बायोग्राफी जिस तरह से मैंने पढ़ी है जिस तरह से मैंने उनको समझा है उसी के ऊपर में स्वामी जी बिल्ड अप करते हैं स्वामी जी कोई बेत की बातें या में से लिया करके बिल्कुल मैंने जिसका कि अपना कोई ह्यूमन हिस्ट्री के साथ में कोई रिलेवेंट ही नहीं है इस तरह की हवाहवा में बात नहीं करते मनुष्य सभ्यता का आज तक जिस तरह से विकास होता आ रहा है उसी डायरेक्शन में उसी लाइन में उसी परिप्रेक्ष्य में स्वामी जी अपनी बात आगे बढ़ाते हैं तो यह देख कर के इमीडिएट स्वामी जी के प्रति मेरे श्रद्धा और भक्ति जागृत हो गई क्योंकि यदि मैंने जो थोड़ा बहुत स्टडी किया है और इसके बेस पे उसके आधार पर मैं जो यह कुछ कंक्लूजन निकाला है स्वामी जी का स्टडी कितना होगा कि वह उसी कंक्लूजन को कंप्लीट करते हैं जैसे कि आर्नोल्ड टोयन भी अब स्टडी ऑफ हिस्ट्री में इतना सारा 5000 पेज लगभग सात आठ बड़े-बड़े वॉल्यूम वो कंप्लीट करके आखिर में क्या लिखता है कि जब भी कोई भी सिविलाइजेशन को एक बार मान लीजिए कि उसका विकास हो गया डेवलपमेंट हो गया उसके बाद में उसको ली जजन चाहिए उसके बाद में उसको धर्म चाहिए यदि धर्म नहीं मिलेगा इस सिविलाइजेशन को तो सिविलाइजेशन का डिटेरेड आरंभ होगा किस तरह से यह सिविलाइजेशन मिलिटरी एडवेंचर में डूब जाएगी माने उसकी भोग वासना तृष्णा इतनी बढ़ जाएगी कि उसके खुद के पास के जितने रिसोर्सेस है वो उसको कम पड़ेंगे फिर यह लोग क्या कहेंगे कि अपने पड़ोसी राज्य है उसके ऊपर में अटैक करो उनके रिसोर्सेस छीन लो उनकी संपत्ति छीन लो उनके उनको उनके ऊपर में अत्याचार करो यह बातें सब आ जाएगी और यह दूसरों के ऊपर में अनाचार करने से हमको रोकता क्या है वो है धर्म मनुष्य की जिस डायरेक्शन में जीवन जा रहा है यदि उसमें धर्म नहीं आएगा तो अभी तो शुरुआत में तो ठीक है जैसे कि ठाकुर ने कहा था ना कि श्री हरि के साथ में बहुत मने हंसी मजाक करते थे खेलते थे किंतु जैसे ही वह बड़ा हुआ उसके चेहरे पर काले बादल जैसा आवरण आ गया तो जब हम कोई भी सिविलाइजेशन जन्म लेती है धीरे-धीरे करके विकास करती है तब तो वह ठीक है किंतु एक मैच्योरिटी का लेवल आ जाएगा कि जब यह सिविलाइजेशन को धर्म नहीं मिलेगा तो वह प्रचंड भोगवा माने राक्षसी भोगवा के भीतर में डूब जाएगी यह रोमन सिविलाइजेशन की पड़ती का इतिहास इसका डिटेन का इतिहास ये डिक्लाइन एंड फॉल ऑफ रोमन एंपायर बोल कर के वो गिबन करके एक हिस्टोरियन है उसने लिखा है तो उसमें देखेंगे कि जितने भी ये रोमन सेनेटर्स थे रोमन धनपति थे यह रोमन सेनापति थे वो दिन रात भोगवा में डूबे रहते थे एफफेम एक शब्द है त्रैण उसका अर्थ होगा उसका ट्रांसलेशन होगा माने के पुरुष के भीतर में स्त्री जैसे गुण आ जाएंगे उसकी मर्दानगी चली जाएगी और वह कायरता में डूब जाएगा तो माने ये फेमिनेले बात नहीं किंतु पुरुष के जो गुणधर्म है उसको तो वह होने चाहिए वह मर्दानगी वाले तो वो नहीं हो करके धीरे-धीरे करके उसकी यह जो करेज है उसका आत्म सन्मान है आत्म श्रद्धा है धीरे-धीरे करके टूट जाता है और वह अपने को हीन महसूस करता है जब कोई सभ्यता के मनुष्य इस तरह से अपने को हीन महसूस करना शुरू करते हैं तो धीरे-धीरे करके सभ्यता टूटने लगती है तो इस तरह से कितने सारे हिस्टोरियंस ने बार-बार हमको बताया है कोई भी ग्रेटर सिविलाइजेशन है जैसे कि रोमन एंपायर था जैसे कि ग्रीक सिविलाइजेशन थी या तो अपनी हिंदू संस्कृति थी क्लासिकल हिंदू संस्कृति जिसमें वो धीरे-धीरे करके डिटेरेड आया और बौद्ध भगवान बुद्ध ने देखा कि अरे ये लोग पशुबली में और ये सब इस तरह से डूब गए हैं वाद विधि विधान वगैरह में कि सही सही आध्यात्मिकता का विलोपन बुद्ध ने एक फिर से प्योर स्पिरिचुअल पाथ हमको दिखाया ये प्योर स्पिरिचुअल पाथ इज बेस्ड ऑन द रिनाउंस एशन ऑफ द सेंशुअल प्लेजरस तो ये जब भी इस तरह से डिटेरेड आता है जीसस का जन्म हुआ देखा कि रोमन एंपायर धीरे-धीरे करके टूट रहा है यह जो अराजकता यह राक्षसी पन समाज में मनुष्य के भीतर में प्रवेश कर रहा है इस समय यदि मनुष्य को धर्म की नई दिशा नहीं दी जाएगी तो मनुष्य सभ्यता का आगमन हुआ एक नया धर्म मिला रोमन एंपायर तो चला गया किंतु आज का मॉडर्न यूरोप जो है उसका जन्म हुआ जब भी इस तरह से यह सिविलाइजेशन का डिटन स्टार्ट होता है और मनुष्य समाज बहुत बड़े खतरे में आ जाता है तब तब की महापुरुष अवतार का जन्म होता है यदा यदा ही धर्मस्य ग्लानि भवतु भारत जब भी यह धर्म की ग्लानि प्रारंभ होती है अवतार ग्रहण करता है शक्ति में भी यह जो माकी अवतरण का में हमने पढ़ा कि जबक मनुष्य के भीतर में यह दुर्गुणों की वृद्धि होती है तो देवी का आगमन होता है तो यह पूरा जो साइकल जो है यह आर्नोल्ड टोयन भी ने अभी हम लोग तो साधु है चलो हम लोग तो धर्मों को फॉलो करते हैं तो हम लोग धार्मिक किताबें पढ़ के यह कहते हैं कि हां अवतार का आगमन होता है या तो फिर अवतार का नहीं तो संत महापुरुष हमारी मनुष्य सभ्यता को बचा के रखते हैं यह तो हम लोग तो धर्म में आस्था रखते हैं बोलकर के विश्वास करते हैं किंतु आर्नोल्ड टोयन भी हिस्टोरियन है उसको धर्म के साथ में और खास करके विदेश के हिस्टोरियंस का कहना है कि किसी भी तरह से धर्म या तो अपनी फिलोसोफी की कोई असर अपने थिंकिंग में नहीं आनी चाहिए वरना क्रिटिकल थिंकिंग बंद करके हम आस्था और विश्वास के ऊपर में चलना शुरू कर देंगे जो भी अपना हिस्टोरिकल राइटिंग है या तो फिर सा साइंटिफिक अंडरस्टैंडिंग है उसमें अपनी आस्था नहीं आस्था और इंफॉर्मेशन दोनों को सेपरेट रखो तो यह इंफॉर्मेशन जो अवेलेबल है जो फैक्ट्स अवेलेबल है ग्राउंड लेवल पे उसको स्टडी करके इसने यह कंक्लूजन निकाला है आर्नोल्ड टोयन भी इज वन ऑफ द ग्रेटेस्ट हिस्टोरियन ऑफ मॉडर्न टाइम्स तो उसने कहा है कि एक समय आ जाता है जब मनुष्य सभ्यता अपना भोगवा में ऐसी डूब जाती है कि उसके सामने फिर दो ही रास्ते दिखते हैं या तो फिर वो धीरे-धीरे करके दूसरे राजा है जो दूसरे इस तरह से राक्षस जैसी सभ्यताएं हैं उनके शिकार हो जाए या तो खुद राक्षसी सभ्यता में परिणत हो जाए जैसे कि ब्रिटेन का देखिए कि ब्रिटेन धीरे-धीरे करके डेवलप तो हो रहा था एक के बाद एक बहुत अच्छे साइंटिस्ट उन लोगों में जन्म तो ले रहे थे ब्रिटेन ब्रिटिश कंट्री में देश में किंतु एक दिन ऐसा आया कि उनकी भूख जो है वो मटेरियल चीजों की वो इतनी बढ़ गई कि उन्होंने भारत पर आक्रमण किया और भारत को आक्रमण करके भारत का शोषण प्रारंभ किया और सिर्फ भारत नहीं वो इतने सारे कंट्रीज पर उन्होंने आक्रमण किए युद्ध किए सबका शोषण स्टार्ट किया और आखिर में क्या हुआ कि यह भोगवा उनके भीतर में इतना बढ़ गया कि धीरे-धीरे करके उनकी मिलिट्री शक्ति थी उनकी पॉलिटिकल पावर था उनका इंडस्ट्रियल पावर था वह धीरे-धीरे करके डिटेट हो गया आज ब्रिटेन इज अ थर्ड क्लास मने कंट्री की तरह है उसका नाम बहुत बड़ा है और बहुत सारे लोगों को लूटा है तो बहुत सारी संपत्ति उनके धनी लोगों के पास में है किंतु ब्रिटेन की सामाजिक परिस्थिति देखिए कि वहां पे जो होमलेस यह जो ड्रग्स यह सब इतने मेजर इश्यूज है वहां पे ये रेडिकलाइजेशन वगैरह वगैरह कि यह थर्ड वर्ल्ड कंट्री जैसा ब्रिटेन हो गया है और रिसेंटली तो देखिए कि भारत की जीडीपी अभी ब्रिटेन को क्रॉस करके फोर्थ फिफ्थ नंबर पे आ गई है तो ब्रिटेन का डिटेरिंग इसी से स्टार्ट हुआ और इसीलिए जब स्वामीजी ब्रिटेन गए थे तब उन्होंने कहा था कि ये जो ब्रिटिश जो ब्रिटिशर्स जो है ब्रिटिश सिटीजन है वैसे इन लोगों में करेज बहुत है और जद यह लोग वेदांत को एक्सेप्ट करेंगे तो उनकी सिविलाइजेशन मने ब्रिटिश व्यक्ति ब्रिटिशर ब्रिटिश सिटीजन जिस तरह से वेदांत को एक्सेप्ट करेगा वो बहुत ही डेवलप करेगा और उस उसका उदाहरण हमने सिस्टर निवेदिता में देखा यह मिस्टर एंड मिसेस सेवियर में देखा और गुडविन में देखा तो चार उदाहरण है कि जब कि ये लोग धर्म को स्वीकृत स्वीकार करते हैं तो उनका जीवन परिवर्तन हो जाता है और ऐसे कितने मने बाकी लोग जो कि धर्म को नहीं स्वीकार करेंगे माने दो तरह के धर्म होते हैं एक तो फिर जिसका कि टाइम चला गया है और एक ऐसा धर्म जो कि नए युग के अनुसार नए युग की आवश्यकता के अनुसार उसका गठन हुआ है तो नए युग के नए धर्म को स्वीकारना है यही एक उपाय है कि उस सिविलाइजेशन को बचा के रखने का तो देखिए कि ये आज के मॉडर्न हिस्टोरियन से आज की मॉडर्न थिंकिंग है उसके साथ में स्वामी जी का थिंकिंग इतना परफेक्टली मैच हो जा रहा है कि हमको पता चलता है कि स्वामी जी ने कितना स्टडी किया होगा स्वामी जी ने कितना थिंकिंग किया होगा तब कहीं जाकर के वो हमको इस तरह से एक ओवरऑल वर्ल्ड व्यू दे सकते हैं तो इसीलिए अ मैंने जब स्वामी जी को पहली बार पढ़ने की शुरुआत की फट फट करके सब कुछ मेरे माइंड में क्लिक होने लगा कि हां स्वामी जी जो कहते हैं बिल्कुल परफेक्ट कहते हैं कि राइज एंड फॉल ऑफ सिविलाइजेशन स्टडी ऑफ कल्चर एज ए होल स्टडी ऑफ रिलीजन एज अ सेवियर ऑफ सिविलाइजेशन सब कुछ जो कि आज के हिस्टोरियंस एक्सेप्ट करते हैं सब कुछ स्वामी जी उसी के ऊपर में बिल्ड अप करते हैं उसके बाद में ऑफकोर्स यहां तक आपने पढ़ लिया अ मैंने पढ़ लिया कि यस के रिलीजन इज अ सेवियर ऑफ सिविलाइजेशन यदि सिविलाइजेशन एक लेवल पे चली जाएगी उसके बाद में जद इसको धर्म नहीं मिलेगा नया रिलीजन नहीं मिलेगा तो उसका डिसइंटीग्रेशन आरंभ होगा तो उसके बाद में नया एक स्टेज आता है नया एक प्रश्न आता है कि व्हाट इज रिलीजन माने धर्म तो फिर सही सही क्या है हम लोग जो धर्म के नाम पर जो समझ रहे हैं कि हां मंदिर में जाना ये आस्था बेसिकली एक कॉमन मैन को पूछेंगे कि धर्म का अर्थ क्या है तो वह कहेगा आस्था या तो फिर विश्वास या तो फिर श्रद्धा भगवान है उसमें आस्था रखो और उसके अनुसार जो कुछ भी अपने से वो हो सके वो नियमों का पालन करने की शुरुआत करो किंतु इस तरह की बातों प आजकल के सभी को विश्वास नहीं आता एटलीस्ट मुझे भी नहीं आता था मैं क्यों किसी चीज पर आस्था रखूं मैं क्यों कोई भी चीज बिना सोचे समझे स्वीकार कर लूं तो धर्म भी क्या है वह भी तो हमको समझना है वह भी एक बहुत ही लंबा इंटेलेक्चुअल जर्नी है यहां पर आकर के आखिर में मुझे समझ में आया कि धर्म का जो संपूर्ण विकसित रूप है द मोस्ट पावरफुल अंडरस्टैंडिंग ऑफ रिलीजन दैट इज अत वेदांत और अद्वैत वेदांत के एक बार कांसेप्ट को हम समझना शुरू करते हैं हमको हमारा जैसे कि एक ऐसा होता है ना ठाकुर कहते हैं ना कि हजार साल से बंद एक कमरा था उसमें जैसे ही आपने एक दिया जलाया कमरा बिल्कुल प्रकाश से जलमल हो उठा तो वैसे ही जैसे ही मैंने अद्वित विधान समझने की शुरुआत की धीरे-धीरे करके इतना सब कुछ मेरे माइंड में मैं तो इतना फॉर्चूनेटली जली और सब अंधेरा भाग गया किंतु दैट वाज अ रिवर लेशन इन माय लाइफ एक टर्निंग पॉइंट था दो मेरे इंटेलेक्चुअल जर्नी जो है उसमें टर्निंग पॉइंट है यह तो एक कि ये समझना कि जो राइज एंड फॉल ऑफ सिविलाइजेशन है उसमें रिलीजन का क्या रोल है यदि एक लेवल प जाकर के मैच्योरिटी के एक लेवल प जाकर के हमको रिलीजन नहीं मिलता है जिस सिविलाइजेशन को प्रॉपर रिलीजन नहीं मिलता उस सिविलाइजेशन का डिटेरेड और अल्टीमेटली डिसइंटीग्रेशन प्रारंभ हो जाता है ये तो एक मेरा टर्निंग पॉइंट था दूसरा टर्निंग पॉइंट था कि व्हाट इज प्रॉपर अंडरस्टैंडिंग ऑफ रिलीजन दैट इज अद्वैत वेदन माने ये दो इंटेलेक्चुअल टर्निंग पॉइंट है और इसीलिए मुझे स्वामी जी इतने पसंद है कि स्वामी जी जो कुछ भी कहते हैं उसके पीछे एक विराट परिप्रेक्ष्य होता है हमलोग को पता नहीं चलता पढ़ लेते हैं तो प्रत्येक सेंटेंस ऐसा ही लगता है कि जैसे स्वामी जी अभी इसके बारे में सिर्फ इसी के बारे में बोल रहे हैं किंतु हम जद ये हिस्टोरिकल अंडरस्टैंडिंग ये साइकोलॉजिकल अंडरस्टैंडिंग दिस अंडरस्टैंडिंग ऑफ राइज एंड फल ऑफ सिविलाइजेशन और ये डेवलप डेवलपमेंट ऑफ एनी आर्ट जैसे कि साइंस हो गया या तो फिर रिलीजन हो गया एक के बाद एक किस तरह से हिस्टोरिकल इसका एक कांटेक्ट है परिप्रेक्ष्य है उस कॉन्टेक्स्ट में यदि स्वामी जी को पढ़ने की शुरुआत करें तो हमको एक पूरा एक इंटेलेक्चुअल एक वर्ल्ड अपने सामने ओपन हो जाता है और दैट इज वन रीजन कि स्वामी जी को आप सही सही पढ़ने की शुरुआत करेंगे तो आपको इस उनको समझने के लिए कितनी सारा ग्राउंड चाहिए हम लोगों को ट्रेनिंग सेंटर में इस तरह से कहते थे कि यदि स्वामी जी को समझना है तो आपको सिर्फ वेदांत का ही बैकग्राउंड इनफ नहीं है आपको फिर साइंस का बैकग्राउंड हिस्ट्री का बैकग्राउंड ह्यूमैनिटीज का बैकग्राउंड साइकोलॉजी ह्यूमन माइंड फिलोसोफी इन जनरल वेस्टर्न एंड ईस्टर्न फिलोसोफी यह सब बैकग्राउंड होगा तो स्वामी जी को आप प्रॉपर्ली समझ पाएंगे प्रॉपर्ली कंटेक्सुलाइज कर पाएंगे क्योंकि स्वामी जी ने खुद ही हिमसेल्फ वाज अ वोरेसियस रीडर इतना सब कुछ पढ़ते रहते थे और पढ़ कर के उसका जो जिस्ट है उसका एसेंस है अमृत हमको देते थे उनके थिंकिंग के रूप में तो अभी ऑफकोर्स यदि उनके कंक्लूजन ही हम एक्सेप्ट कर ले और अपना जीवन परिवर्तन क्योंकि थर्ड स्टेप जो है इंटेलेक्चुअल जर्नी में वो है ये अंडरस्टैंडिंग कि वी हैव टू ट्रांसफॉर्म अवर लाइफ अपने जीवन को परिवर्तन करना होगा सिर्फ पढ़ कर के नहीं चलेगा पढ़ कर के इंटेलेक्चुअल मा माइलस्टोन है वो एक के बाद एक अपने जीवन में आते हैं जैसे कि ये एक माइलस्टोन आ दूसरा माइलस्टोन आया किंतु अल्टीमेटली सब कुछ पढ़ लिया और लाइफ ट्रांसफॉर्मेशन का प्रारंभ नहीं हुआ तो पढ़ना लिखना किसी काम का नहीं रहेगा तो इसीलिए यह जो आप यदि कंक्लूजन को पढ़ कर के लाइफ ट्रांसफॉर्म करना शुरू कर दे तो ऑफकोर्स आपको किसी भी तरह के बैकग्राउंड की जरूरत नहीं है किंतु जद बैकग्राउंड होता है यदि बैकग्राउंड होता है देन दिस इंटेलेक्चुअल जर्नी बिकम वेरी प्लेजट फॉर यू माने और कोई चीज के प्रति आपका मन इधर-उधर जाएगा ही नहीं सब समय वह आप अपने जीवन को इतना सुंदर सुचारू रूप से खास करके यह जो मैंने इंटेलेक्चुअल क्लास है या तो फिर जो लोग अपने को फिलोसोफर कहलाते हैं या फिलोसॉफिकल स्ट्रीम में है इन लोगों की यह बात है कि यह फिलोसॉफिकल जर्नी इन अंडरस्टैंडिंग स्वामी विवेकानंद विल बी द मोस्ट पावरफुल मोस्ट फ्रूटफुल इंटेलेक्चुअल एडवेंचर ऑफ योर लाइफ तो कल हम जो मां का प्रसंग पढ़ रहे थे उसी में भी ऐसा है कि देखिए कि पहली बार तो मां जगदंबा का अवतार है जगदंबा आध्या शक्ति स्वयं है इस तरह से गंभीरानंद जी ने पूरी पूर्व भूमिका बांधी और उसके बाद में क्या लिखते हैं कि मां अपने पिताजी के घर से अपने शसुर गृह ठाकुर के घर में आई अपने पति के घर में फिर भी उनकी पढ़ाई लिखाई करने की उत्कंठा इच्छा आकांक्षा अकब थी वैसी की वैसी थी तो महाराज जी लिखते हैं कि इससे हमको बड़ा आश्चर्य चकित होना होगा ये कंट्रक्शन है अवतार को समझने के लिए कि एक और वोह अवतार ईश्वर माने मातो शारदा सरस्वती स्वयं विद्या की देवी वो खुद है और ऑन द अदर हैंड एक गांव में रहती है मने अल्फाबेट्स वर्ण परिचय भी इतना प्रॉपर्ली उनको नहीं है तो किस तरह से ये थिंकिंग में और आइडियाज में ये कंट्रक्शन तो महाराज जी लिखते हैं कि किस तरह से मां कमार पुकुर आई और लक्ष्मी के साथ में बैठ कर के लक्ष्मी दीदी वो ठाकुर की भतीजी उनके साथ में बैठ कर के व वर्ण परिचय सीखते थी और हृदय ने किताब छीन छीन ली उनसे यह कह कर के कि ये क्या पढ़ाई लिखाई करके क्या नाटक नोवल पढ़ेंगे और ऐसा करके किताब छीन ली अभी मां ने कहा कि लक्ष्मी है थोड़ी बोल्ड थी और पिताजी के घर में रहती थी तो उसका थोड़ा सा अधिकार भी ज्यादा था तो उसने अपनी किताब नहीं दी और मां ने कहा मैंने एक ना दे करर के छुपके छुपके और एक किताब परचेस कर ली अभी आगे गंभीरानंद जी महाराज क्या लिखते हैं लक्ष्मी गए पाठशाला पढ़े आतो लक्ष्मी जाकर के पाठशाला में पढ़ कर के आती से ऐसे आबार आमाई पढ़ा तो वह आकर के फिर से मुझे पढ़ाती थी प्रसंग क्र में श्री मायर भाषा ते देखा देखानो जाते पारे विद्यो साहो तहर परे ओ छलो मने महाराज जी लिखते हैं कि जब हम पढ़ाई लिखाई का प्रसंग कर ही रहे हैं इस प्रसंग के ऊपर में है ही तो माने खुद ने अपनी विद्यास पहा पढ़ाई लिखाई करने की इच्छा के बारे में बाद में क्या कहा था तो यह बाद का प्रसंग है किंतु फिर भी विद्या के बारे में चर्चा हो रही है व दक्षिणेश्वर का प्रसंग यहां पर लेकर आते हैं मां क्या कहती है अपने खुद खुद ने अपने क्या कहा है कि भालो करे शेखा होई दक्षिणेश्वर मने ठीक ठीक मेरी पढ़ने की पढ़ना हुआ था दक्षिणेश्वर में ठीक ठीक करके वर्ण परिचय सीखा था दक्षिणेश्वर में ठाकुर तखन चिकित्स जन्नो श्याम पुकुरे ठाकुर उस समय चिकित्सा के लिए श्यामपुकुर में थे ए काटी ए काटी आछी मने अकेली अकेली हूं भव मुख ज देर एकटी में आतो नते भव मुख बोलकर के एक व्यक्ति वहां पर रहता होगा उनकी एक लड़की वहां पर गंगा के किनारे घाट है बहुत सुंदर घाट है दक्षिणेश्वर में तो स्नान करने के लिए आती थी शे मध्य मध्य अनेक खण अर काछ थकतो वो बीच-बीच में बहुत समय मेरे साथ में रहती शे रोज नई बार समय पाठ दी तो नी तो वो जितनी बार नहाने को जाती मुझे कुछ सिखाती पाठ दथ रनी तो माने थोड़ा सा होमवर्क भी देती होगी मां की परीक्षा भी करती होगी और ऐसा करके मां को लिखना पढ़ना एटलीस्ट सिखाया था अमिता के शाक पाता बागान होते जा अर एखाने दी तो ताई खूब करे दी तो दक्षिणेश्वर में तो बहुत सुंदर गार्डन था गार्डन में शाक सब्जी वगैरह जो कुछ भी मां को दिया जाता था उसमें से मां बहुत सारा कुछ इस लड़की को दे दिया करते थे ही विद्याभ्यासम आदि पड़ी ते पारी किंतु लिखि विशेष पारि ते ना इसी विद्याभ्यासम से मां रामायण वगैरह आराम से पढ़ लिया करती थी किंतु लिखना उन्होंने ठीक से नहीं सीखा था एमन की शेष बोयो से नाम सही पर्जन तो करते पारित ना यहां तक कि जब मां की उम्र ज्यादा बढ़ने लगी शेष वयस यानी कि आखिरी उम्र में वह अपना नाम भी ठीक तरह से नहीं लिख पा रही थी तो यह हुआ मां के विद्याभ्यासम छोटा सा एक प्रसंग तो देखिए कि अ यहां पे भी अ रामायण वगैरह मां आराम से पढ़ लिया करती थी यह जो बैकग्राउंड रीडिंग है इवन रामायण में भी देखिए महाभारत में भी देखिए इतने सारे प्रसंग लेकर के वहां पर डिस्कशन हुआ है कभी आयुर्वेद के बारे में बोलेंगे कभी ज्योतिष विद्या के बारे में बोलेंगे कभी राजाओं की क्या-क्या हिस्ट्री है क्या-क्या इतिहास है सब एक के बाद एक वंशज कौन किसके वंशज है वह सब बताएंगे और कभी-कभी विभिन्न विभिन्न दर्शन शास्त्र में किस तरह से क्या लिखा है इस तरह से बताएंगे कभी-कभी कोई कोई साधुओं का या तो फिर ऋषि मुनियों का आपस में डिबेट हो रहा है वह बताएंगे तो यह सब व अपने पुराण भी इस तरह से है कि बहुत सारी विद्याओं का संग्रह अपने पुराणों में है इसीलिए माने सिर्फ धर्म के रास्ते पर चलने के लिए इतना ही नहीं आज के समाज में जो जो भी घटनाएं हो रही है जो कुछ भी हो रहा है इसका एक प्रॉपर पर्सपेक्टिव अपने पास में हो एक प्रॉपर एक परिप्रेक्ष्य हो अपने पास में तो जो कुछ हो रहा है उसको हम आसानी से समझ पाएंगे और इसका अपने जीवन पर क्या अच्छा बुरा असर होगा वह भी हम इमीडिएट समझ लेंगे तो आज यही तक कल फिर से मिलते हैं कल तो सैटरडे है अभी आई थिंक मंडे को मिलेंगे ओम शांति शांति शांति हरि ओम तसत श्री राम कृष्णर्पण मस्तु