
Ma Sarada Life by Sw Gambhirananda
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01 Avataranika (अवतरणिका)
36 classes


अवतरणिका : श्रीमाँ सारदा देवी : स्वामी गम्भीरानन्द लिखित : 10 Aug 2023

अवतरणिका : श्रीमाँ सारदा देवी : स्वामी गम्भीरानन्द लिखित : 11 Aug 2023

अवतरणिका : श्रीमाँ सारदा देवी : स्वामी गम्भीरानन्द लिखित : 12 Aug 2023

अवतरणिका : श्रीमाँ सारदा देवी : स्वामी गम्भीरानन्द लिखित : 21 Aug 2023

अवतरणिका : श्रीमाँ सारदा देवी : स्वामी गम्भीरानन्द लिखित : 22 Aug 2023

अवतरणिका : श्रीमाँ सारदा देवी : स्वामी गम्भीरानन्द लिखित : 23 Aug 2023

अवतरणिका : श्रीमाँ सारदा देवी : स्वामी गम्भीरानन्द लिखित : 24 Aug 2023

अवतरणिका : श्रीमाँ सारदा देवी : स्वामी गम्भीरानन्द लिखित : 4 Sept 2023

अवतरणिका : श्रीमाँ सारदा देवी : स्वामी गम्भीरानन्द लिखित : 5 Sept 2023

अवतरणिका : श्रीमाँ सारदा देवी : स्वामी गम्भीरानन्द लिखित : 6 Sept 2023

अवतरणिका : श्रीमाँ सारदा देवी : स्वामी गम्भीरानन्द लिखित : 7 Sept 2023

अवतरणिका : श्रीमाँ सारदा देवी : स्वामी गम्भीरानन्द लिखित : 11 Sept 2023

अवतरणिका : श्रीमाँ सारदा देवी : स्वामी गम्भीरानन्द लिखित : 12 Sept 2023

अवतरणिका : श्रीमाँ सारदा देवी : स्वामी गम्भीरानन्द लिखित : 13 Sept 2023

अवतरणिका : श्रीमाँ सारदा देवी : स्वामी गम्भीरानन्द लिखित : 14 Sept 2023

अवतरणिका : श्रीमाँ सारदा देवी : स्वामी गम्भीरानन्द लिखित : 15 Sept 2023

अवतरणिका : श्रीमाँ सारदा देवी : स्वामी गम्भीरानन्द लिखित : 25 Sept 2023

अवतरणिका : श्रीमाँ सारदा देवी : स्वामी गम्भीरानन्द लिखित : 26 Sept 2023

अवतरणिका : श्रीमाँ सारदा देवी : स्वामी गम्भीरानन्द लिखित : 27 Sept 2023

अवतरणिका : श्रीमाँ सारदा देवी : स्वामी गम्भीरानन्द लिखित : 28 Sept 2023

अवतरणिका : श्रीमाँ सारदा देवी : स्वामी गम्भीरानन्द लिखित : 29 Sept 2023

अवतरणिका : श्रीमाँ सारदा देवी : स्वामी गम्भीरानन्द लिखित : 9 Oct 2023

अवतरणिका : श्रीमाँ सारदा देवी : स्वामी गम्भीरानन्द लिखित : 10 Oct 2023

अवतरणिका : श्रीमाँ सारदा देवी : स्वामी गम्भीरानन्द लिखित : 11 Oct 2023

अवतरणिका : श्रीमाँ सारदा देवी : स्वामी गम्भीरानन्द लिखित : 12 Oct 2023

अवतरणिका : श्रीमाँ सारदा देवी : स्वामी गम्भीरानन्द लिखित : 13 Oct 2023

अवतरणिका : श्रीमाँ सारदा देवी : स्वामी गम्भीरानन्द लिखित : 23 Oct 2023

अवतरणिका : श्रीमाँ सारदा देवी : स्वामी गम्भीरानन्द लिखित : 25 Oct 2023

अवतरणिका : श्रीमाँ सारदा देवी : स्वामी गम्भीरानन्द लिखित : 26 Oct 2023

अवतरणिका : श्रीमाँ सारदा देवी : स्वामी गम्भीरानन्द लिखित : 27 Oct 2023

अवतरणिका : श्रीमाँ सारदा देवी : स्वामी गम्भीरानन्द लिखित : 6 Nov 2023

अवतरणिका : श्रीमाँ सारदा देवी : स्वामी गम्भीरानन्द लिखित : 7 Nov 2023

अवतरणिका : श्रीमाँ सारदा देवी : स्वामी गम्भीरानन्द लिखित : 8 Nov 2023

अवतरणिका : श्रीमाँ सारदा देवी : स्वामी गम्भीरानन्द लिखित : 9 Nov 2023

अवतरणिका : श्रीमाँ सारदा देवी : स्वामी गम्भीरानन्द लिखित : 27 Nov 2023
02 Shakti-pith (शक्तिपीठ)
2 classes

शक्तिपीठ : श्रीमाँ सारदा देवी : स्वामी गम्भीरानन्द लिखित : 28 Nov 2023

शक्तिपीठ : श्रीमाँ सारदा देवी : स्वामी गम्भीरानन्द लिखित : 30 Nov 2023
03 Avirbhav (आविर्भाव)
12 classes

आविर्भाव : श्रीमाँ सारदा देवी : स्वामी गम्भीरानन्द लिखित : 1 Dec 2023

आविर्भाव : श्रीमाँ सारदा देवी : स्वामी गम्भीरानन्द लिखित : 11 Dec 2023

आविर्भाव : श्रीमाँ सारदा देवी : स्वामी गम्भीरानन्द लिखित : 12 Dec 2023

आविर्भाव : श्रीमाँ सारदा देवी : स्वामी गम्भीरानन्द लिखित : 14 Dec 2023

आविर्भाव : श्रीमाँ सारदा देवी : स्वामी गम्भीरानन्द लिखित : 15 Dec 2023

आविर्भाव : श्रीमाँ सारदा देवी : स्वामी गम्भीरानन्द लिखित : 26 Dec 2023

आविर्भाव : श्रीमाँ सारदा देवी : स्वामी गम्भीरानन्द लिखित : 27 Dec 2023

आविर्भाव : श्रीमाँ सारदा देवी : स्वामी गम्भीरानन्द लिखित : 28 Dec 2023

आविर्भाव : श्रीमाँ सारदा देवी : स्वामी गम्भीरानन्द लिखित : 29 Dec 2023

आविर्भाव : श्रीमाँ सारदा देवी : स्वामी गम्भीरानन्द लिखित : 15 Jan 2024

आविर्भाव : श्रीमाँ सारदा देवी : स्वामी गम्भीरानन्द लिखित : 16 Jan 2024

आविर्भाव : श्रीमाँ सारदा देवी : स्वामी गम्भीरानन्द लिखित : 17 Jan 2024
04 Vadhu वधू
17 classes

वधू : श्रीमाँ सारदा देवी : स्वामी गम्भीरानन्द लिखित : 18 Jan 2024

वधू : श्रीमाँ सारदा देवी : स्वामी गम्भीरानन्द लिखित : 19 Jan 2024

वधू : श्रीमाँ सारदा देवी : स्वामी गम्भीरानन्द लिखित : 29 Jan 2024

वधू : श्रीमाँ सारदा देवी : स्वामी गम्भीरानन्द लिखित : 30 Jan 2024

वधू : श्रीमाँ सारदा देवी : स्वामी गम्भीरानन्द लिखित : 31 Jan 2024

वधू : श्रीमाँ सारदा देवी : स्वामी गम्भीरानन्द लिखित : 1 Feb 2024

वधू : श्रीमाँ सारदा देवी : स्वामी गम्भीरानन्द लिखित : 2 Feb 2024

वधू : श्रीमाँ सारदा देवी : स्वामी गम्भीरानन्द लिखित : 11 Mar 2024

वधू : श्रीमाँ सारदा देवी : स्वामी गम्भीरानन्द लिखित : 12 Mar 2024

वधू : श्रीमाँ सारदा देवी : स्वामी गम्भीरानन्द लिखित : 14 Mar 2024

वधू : श्रीमाँ सारदा देवी : स्वामी गम्भीरानन्द लिखित : 15 Mar 2024

वधू : श्रीमाँ सारदा देवी : स्वामी गम्भीरानन्द लिखित : 18 Mar 2024

वधू : श्रीमाँ सारदा देवी : स्वामी गम्भीरानन्द लिखित : 19 Mar 2024

वधू : श्रीमाँ सारदा देवी : स्वामी गम्भीरानन्द लिखित : 20 Mar 2024

वधू : श्रीमाँ सारदा देवी : स्वामी गम्भीरानन्द लिखित : 21 Mar 2024

वधू : श्रीमाँ सारदा देवी : स्वामी गम्भीरानन्द लिखित : 22 Mar 2024

वधू : श्रीमाँ सारदा देवी : स्वामी गम्भीरानन्द लिखित : 1 Apr 2024
05 Devitva ka Jagaran (देवीत्व का जागरण)
12 classes

देवीत्व का जागरण : श्रीमाँ सारदा देवी : स्वामी गम्भीरानन्द लिखित : 2 Apr 2024

देवीत्व का जागरण : श्रीमाँ सारदा देवी : स्वामी गम्भीरानन्द लिखित : 3 Apr 2024

देवीत्व का जागरण : श्रीमाँ सारदा देवी : स्वामी गम्भीरानन्द लिखित : 4 Apr 2024

देवीत्व का जागरण : श्रीमाँ सारदा देवी : स्वामी गम्भीरानन्द लिखित : 5 Apr 2024

देवीत्व का जागरण : श्रीमाँ सारदा देवी : स्वामी गम्भीरानन्द लिखित : 15 Apr 2024

देवीत्व का जागरण : श्रीमाँ सारदा देवी : स्वामी गम्भीरानन्द लिखित : 16 Apr 2024

देवीत्व का जागरण : श्रीमाँ सारदा देवी : स्वामी गम्भीरानन्द लिखित : 17 Apr 2024

देवीत्व का जागरण : श्रीमाँ सारदा देवी : स्वामी गम्भीरानन्द लिखित : 18 Apr 2024

देवीत्व का जागरण : श्रीमाँ सारदा देवी : स्वामी गम्भीरानन्द लिखित : 6 May 2024

देवीत्व का जागरण : श्रीमाँ सारदा देवी : स्वामी गम्भीरानन्द लिखित : 7 May 2024

देवीत्व का जागरण : श्रीमाँ सारदा देवी : स्वामी गम्भीरानन्द लिखित : 8 May 2024

देवीत्व का जागरण : श्रीमाँ सारदा देवी : स्वामी गम्भीरानन्द लिखित : 9 May 2024
06 Daivadhina (दैवाधीन)
16 classes

दैवाधीन : श्रीमाँ सारदा देवी : स्वामी गम्भीरानन्द लिखित : 10 May 2024

दैवाधीन : श्रीमाँ सारदा देवी : स्वामी गम्भीरानन्द लिखित : 20 May 2024

दैवाधीन : श्रीमाँ सारदा देवी : स्वामी गम्भीरानन्द लिखित : 21 May 2024

दैवाधीन : श्रीमाँ सारदा देवी : स्वामी गम्भीरानन्द लिखित : 22 May 2024

दैवाधीन : श्रीमाँ सारदा देवी : स्वामी गम्भीरानन्द लिखित : 23 May 2024

दैवाधीन : श्रीमाँ सारदा देवी : स्वामी गम्भीरानन्द लिखित : 3 June 2024

दैवाधीन : श्रीमाँ सारदा देवी : स्वामी गम्भीरानन्द लिखित : 4 June 2024 96k

दैवाधीन : श्रीमाँ सारदा देवी : स्वामी गम्भीरानन्द लिखित : 5 June 2024 96k

दैवाधीन : श्रीमाँ सारदा देवी : स्वामी गम्भीरानन्द लिखित : 6 June 2024 96k

दैवाधीन : श्रीमाँ सारदा देवी : स्वामी गम्भीरानन्द लिखित : 7 June 2024

दैवाधीन : श्रीमाँ सारदा देवी : स्वामी गम्भीरानन्द लिखित : 17 June 2024

दैवाधीन : श्रीमाँ सारदा देवी : स्वामी गम्भीरानन्द लिखित : 18 June 2024

दैवाधीन : श्रीमाँ सारदा देवी : स्वामी गम्भीरानन्द लिखित : 19 June 2024

दैवाधीन : श्रीमाँ सारदा देवी : स्वामी गम्भीरानन्द लिखित : 20 June 2024

दैवाधीन : श्रीमाँ सारदा देवी : स्वामी गम्भीरानन्द लिखित : 21 June 2024

दैवाधीन : श्रीमाँ सारदा देवी : स्वामी गम्भीरानन्द लिखित : 17 Sep 2024
07 Prakash aur Chaya ke Bich (प्रकाश और छाया के बीच)
6 classes

प्रकाश और छाया के बीच : श्रीमाँ सारदा देवी : स्वामी गम्भीरानन्द लिखित : 18 Sep 2024

प्रकाश और छाया के बीच : श्रीमाँ सारदा देवी : स्वामी गम्भीरानन्द लिखित :19 sep 2024

प्रकाश और छाया के बीच : श्रीमाँ सारदा देवी : स्वामी गम्भीरानन्द लिखित : 20 sep 2024

प्रकाश और छाया के बीच : श्रीमाँ सारदा देवी : स्वामी गम्भीरानन्द लिखित : 2 oct 2024

प्रकाश और छाया के बीच : श्रीमाँ सारदा देवी : स्वामी गम्भीरानन्द लिखित : 3 oct 2024

प्रकाश और छाया के बीच : श्रीमाँ सारदा देवी : स्वामी गम्भीरानन्द लिखित : 4 oct 2024
08 Bindu-vasini (बिन्दुवासिनी)
9 classes

बिन्दुवासिनी: श्रीमाँ सारदा देवी : स्वामी गम्भीरानन्द लिखित : 7 oct 2024

बिन्दुवासिनी: श्रीमाँ सारदा देवी : स्वामी गम्भीरानन्द लिखित : 8 oct 2024

बिन्दुवासिनी: श्रीमाँ सारदा देवी : स्वामी गम्भीरानन्द लिखित : 11 nov 2024

बिन्दुवासिनी: श्रीमाँ सारदा देवी : स्वामी गम्भीरानन्द लिखित : 12 Nov 2024

बिन्दुवासिनी: श्रीमाँ सारदा देवी : स्वामी गम्भीरानन्द लिखित : 13 nov 2024

बिन्दुवासिनी: श्रीमाँ सारदा देवी : स्वामी गम्भीरानन्द लिखित : 14 Nov 2024

बिन्दुवासिनी: श्रीमाँ सारदा देवी : स्वामी गम्भीरानन्द लिखित : 25 Nov 2024

बिन्दुवासिनी: श्रीमाँ सारदा देवी : स्वामी गम्भीरानन्द लिखित : 26 Nov 2024

बिन्दुवासिनी: श्रीमाँ सारदा देवी : स्वामी गम्भीरानन्द लिखित : 27 Nov 2024
09 Prano ki Pukar (प्राणों की पुकार)
13 classes

प्राणों की पुकार || श्रीमाँ सारदा देवी : स्वामी गम्भीरानन्द लिखित || 28 Nov 2024

प्राणों की पुकार || श्रीमाँ सारदा देवी : स्वामी गम्भीरानन्द लिखित || 29 Nov 2024

प्राणों की पुकार || श्रीमाँ सारदा देवी : स्वामी गम्भीरानन्द लिखित || 16 Dec 2024

प्राणों की पुकार || श्रीमाँ सारदा देवी : स्वामी गम्भीरानन्द लिखित || 17 Dec 2024

प्राणों की पुकार || श्रीमाँ सारदा देवी : स्वामी गम्भीरानन्द लिखित || 18 Dec 2024

प्राणों की पुकार || श्रीमाँ सारदा देवी : स्वामी गम्भीरानन्द लिखित || 19 Dec 2024

प्राणों की पुकार || श्रीमाँ सारदा देवी : स्वामी गम्भीरानन्द लिखित || 20 Dec 2024

प्राणों की पुकार || श्रीमाँ सारदा देवी : स्वामी गम्भीरानन्द लिखित || 6 Jan 2025

प्राणों की पुकार || श्रीमाँ सारदा देवी : स्वामी गम्भीरानन्द लिखित || 7 Jan 2025

प्राणों की पुकार || श्रीमाँ सारदा देवी : स्वामी गम्भीरानन्द लिखित || 8 Jan 2025

प्राणों की पुकार || श्रीमाँ सारदा देवी : स्वामी गम्भीरानन्द लिखित || 9 Jan 2025

प्राणों की पुकार || श्रीमाँ सारदा देवी : स्वामी गम्भीरानन्द लिखित || 10 Jan 2025

प्राणों की पुकार || श्रीमाँ सारदा देवी : स्वामी गम्भीरानन्द लिखित || 27 Jan 2025
10 Nirav Sadhana (नीरव साधना)
9 classes

नीरव साधना || श्रीमाँ सारदा देवी : स्वामी गम्भीरानन्द लिखित || 28 Jan 2025

नीरव साधना || श्रीमाँ सारदा देवी : स्वामी गम्भीरानन्द लिखित || 29 Jan 2025

नीरव साधना || श्रीमाँ सारदा देवी : स्वामी गम्भीरानन्द लिखित || 30 Jan 2025

नीरव साधना || श्रीमाँ सारदा देवी : स्वामी गम्भीरानन्द लिखित || 31 Jan 2025

नीरव साधना || श्रीमाँ सारदा देवी : स्वामी गम्भीरानन्द लिखित || 24 Feb 2025

नीरव साधना || श्रीमाँ सारदा देवी : स्वामी गम्भीरानन्द लिखित || 25 Feb 2025

नीरव साधना || श्रीमाँ सारदा देवी : स्वामी गम्भीरानन्द लिखित || 26 Feb 2025

नीरव साधना || श्रीमाँ सारदा देवी : स्वामी गम्भीरानन्द लिखित || 27 Feb 2025

नीरव साधना || श्रीमाँ सारदा देवी : स्वामी गम्भीरानन्द लिखित || 24 Mar 2025
11 Bhar Samarpan (भार समर्पण)
28 classes

भार समर्पण || श्रीमाँ सारदा देवी : स्वामी गम्भीरानन्द लिखित || 25 Mar 2025

भार समर्पण || श्रीमाँ सारदा देवी : स्वामी गम्भीरानन्द लिखित || 26 Mar 2025

भार समर्पण || श्रीमाँ सारदा देवी : स्वामी गम्भीरानन्द लिखित || 27 Mar 2025

भार समर्पण || श्रीमाँ सारदा देवी : स्वामी गम्भीरानन्द लिखित || 28 Mar 2025

भार समर्पण || श्रीमाँ सारदा देवी : स्वामी गम्भीरानन्द लिखित || 23 Apr 2025
Video chapters
- माँ की जीवनी के विभिन्न अध्यायों की रचना
- श्रीरामकृष्ण माँ शारदा के बारे में क्या कहते हैं
- स्वामी प्रेमानन्द माँ सारदा के बारे में क्या कहते हैं
- कहानी: योगीन माँ को माँ सारदा के वैराग्य पर संदेह होता है
- कहानी: माँ शारदा ने एक बहुत ही अशुद्ध भक्त को दीक्षा दी
- स्वामी विवेकानंद माँ शारदा के बारे में क्या कहते हैं
- कहानी: प्रव्रज्या प्रारम्भ करने से पहले स्वामी विवेकानन्द माँ सारदा का आशीर्वाद प्राप्त करते है
- स्वामी गम्भीरानन्द की माँ सारदा के प्रति भक्ति
- प्रश्न: यह आश्चर्य की बात है कि स्वामी विवेकानंद ने बिना किसी प्रश्न के मा शारदा को स्वीकार कर लिया था। उन्होंने जीवन के अंत तक ठाकुर की परीक्षा ली थी।
- प्रश्न: ठाकुर के पांच ईश्वरकोटि शिष्य थे। उन्होंने सबसे पहले मां शारदा को स्वीकार किया था।
- प्रश्न: माँ सारदा असाधारण रूप से साधारण हैं। वह हमें बौद्धिक रूप से समझाने की बजाय हमारे ह्रदय को वशीभूत कर लेती है।
- प्रश्न: जब हम स्वामी और माँ की अलग-अलग जीवनी पढ़ते हैं, तो हम यह नहीं समझ पाते कि उनका एक-दूसरे पर क्या प्रभाव पड़ता है।

भार समर्पण || श्रीमाँ सारदा देवी : स्वामी गम्भीरानन्द लिखित || 25 Apr 2025
Video chapters
- श्रीरामकृष्ण कामारपुकुर में माँ शारदा की दिव्यता का उल्लेख करते है
- कहानी: संसार की जिम्मेदारी
- कहानी: कामारपुकुर में श्रीरामकृष्ण माँ सारदा की महिमा की घोषणा करते है
- कहानी: कुछ महिलाओं ने मां शारदा को ठाकुर को दवा देने के लिए उकसाया ताकि उन्हें बच्चे हो सकें
- माँ सारदा का पृथ्वी पे अवतरण का युगप्रयोजन
- माँ सारदा के अवतारत्व का एक अनोखा पहलू: उनका जननी स्वरूप और उनका मातृभाव
- प्रश्न: ठाकुर का संतान भाव है और माँ का मातृ भाव है!
- प्रश्न: माँ का बालिका भाव भी था
- प्रश्न: शरत महाराज मां की पूजा देवी के रूप में करते थे और उन्हें उन्हें सांत्वना भी देनी पड़ती थी, मानो वह कोई बच्ची हों। उनके लिए यह कितना कठिन रहा होगा!
- प्रश्न: ठाकुर जी, माँ, स्वामीजी ने कभी भी कर्म-काण्ड को हाथ से बाहर नहीं जाने दिया। कुछ लोगों के लिए कर्म-काण्ड ही सब कुछ है।
- प्रश्न: गोपाल माँ बार-बार स्वामीजी से पूछती हैं कि क्या उनके दर्शन भ्रमपूर्ण हैं या वास्तविक हैं?
- प्रश्न: ह्रदय और दिमाग के बीच की लड़ाई में ह्रदय हमेशा जीतता है. स्वामीजी को रोते हुए देखकर हमें अच्छा महसूस होता है, क्योंकि भक्ति हमेशा ज्ञान पर विजय प्राप्त करती है.
- प्रश्न: गोपाल माँ भी त्याग से भरी थीं
- प्रश्न: गोपाल माँ ने भी ठाकुर की सेवा की थी. उनके लिए खाना पकाती थी

भार समर्पण || श्रीमाँ सारदा देवी : स्वामी गम्भीरानन्द लिखित || 9 jun 2025
Video chapters
- देवी का जननी के रूप में अवतरण का प्रयोजन
- ठाकुर और स्वामीजी ने रामकृष्ण मिशन की स्थापना की ताकि माँ सारदा उसका संचालन करें
- माँ सारदा के गुरुभाव का सारतत्त्व: मातृभाव
- भक्त की पूजा ग्रहण करने के लिए जगदम्बा माँ का रूप धारण कर पृथ्वी पर अवतरण करती है
- कहानी: लाटू महाराज छुप कर जप करते है
- कहानी: माँ भले ही नौकरानी है, पर लड़का उस के पास सुरक्षा चाहता है
- प्रश्न: नौकरानी के बेटे को जल्द ही एहसास हो जाएगा कि उसकी माँ उसकी रक्षा नहीं कर सकती। इसलिए वह जल्द ही निराश हो जाएगा।
- प्रश्न: ईश्वर के आध्यात्मिक ऐश्वर्य को समझे बिना हम स्वयं को उसकी आराधना करने के लिए कैसे प्रेरित कर सकते हैं?
- प्रश्न: स्वामी विवेकानंद के आध्यात्मिक पहलू पर कोई बात क्यों नहीं करना चाहता?
- प्रश्न: आमतौर पर हम शक्ति को अवतार के अधीन मानते हैं।

भार समर्पण || श्रीमाँ सारदा देवी : स्वामी गम्भीरानन्द लिखित || 10 jun 2025
Video chapters
- कवि रामप्रसाद का अद्भुत जीवन
- कहानी: जगदम्बा रामप्रसाद की बाड़ को ठीक करने में मदद करने के लिए बेटी के रूप में प्रकट होती हैं
- श्रीरामकृष्ण की माँ काली के दर्शन पाने की अपूर्व व्याकुलता
- श्रीरामकृष्ण का माँ काली के साथ मधुर बालक भाव
- श्रीरामकृष्ण और माँ काली
- संतान का जननी पे आक्षेप: गीत: में इस दुःख से दुःख कर रहा हु
- संतान का जननी पे आक्षेप: गीत: तुम आँख लाल करोगी तो भी में डरने वाला नहीं हु
- संतान का जननी पे आक्षेप: गीत: नाथ की छाती पे मारती है लात
- जिस देश में रजनी नहीं वहाँ का एक व्यक्ति मैंने पाया
- प्रश्न: रागात्मिका भक्ति क्या है?
- स्वामी विवेकानंद का आम का पेड़
- भयंकरा काली मातृ काली में कैसे परिणत हुई
- प्रश्न: कभी-कभी हमें लगता है कि भक्ति मार्ग सर्वोत्तम है, कभी-कभी हमें लगता है कि वेदांत मार्ग सर्वोत्तम है। हम इस बात को लेकर भ्रमित हो जाते हैं कि कौन सा मार्ग चुनें।
- प्रश्न: कभी-कभी हमें ठाकुर पर श्रद्धा नहीं होती, क्योंकि हमें विश्वास नहीं होता कि वह हमें आध्यात्मिक आशीर्वाद दे सकते हैं।
- प्रश्न: क्या रागात्मिका भक्ति केवल ठाकुर तक सीमित थी या अन्य सभी साधकों में भी यह अवस्था थी?
- प्रश्न: स्वामीजी अपने लिए एक बेहतरीन करियर बना सकते थे और अपने परिवार की देखभाल भी अच्छे से कर सकते थे। लेकिन उन्होंने अध्यात्म का मार्ग चुना। 9 सितम्बर को सफल होने से पहले उन्हें कितने मानसिक तनाव से गुजरना पड़ा होगा, क्योंकि उन्होंने अपने परिवार की देखभाल नहीं की।
- प्रश्न: वेदांत कहता है कि समय एक भ्रम है। अन्यथा वाल्मीकि ऋषि रामायण को उसके घटित होने से पहले कैसे लिख सकते थे? इसलिए किसी तरह ठाकुर की लीला अभी भी चल रही है!
- प्रश्न: ठाकुर के दर्शन भी टाइम मशीन थे। उन्होंने देखा कि यीशु की नाक मुड़ी हुई है।
- प्रश्न: हम कैसे कह सकते हैं कि जो हम अपनी भौतिक आँखों से कहते हैं वह सत्य है और जो हम दर्शन की दृष्टि से देखते हैं वह गलत है.
- शिवानन्द महाराज की एक कहानी

भार समर्पण || श्रीमाँ सारदा देवी : स्वामी गम्भीरानन्द लिखित || 11 jun 2025
Video chapters
- साधक जगद्धात्री को जननी के रूप में दर्शन करना चाहता है
- दो साधनाएं: कष्ट करके तपस्या करना और जगदम्बा से माँ-सन्तान का रिश्ता जोड़ना
- रामप्रसाद के कुछ गानों में अद्भुत काली-माहात्म्य
- कहानी: शाक्त और वैष्णवों के बिच मीठा झगड़ा
- आजु गोसाईं और रामप्रसाद का कवित्वमय टकराव
- प्रश्न: यह आश्चर्य की बात है कि ठाकुर ने आजु गोसाईं का नाम नहीं लिया
- प्रश्न: क्या आजु गोसाईं की और भी कहानियाँ उपलब्ध हैं?
- प्रश्न: यह सचमुच आश्चर्यजनक है कि स्वामीजी पान खाते थे और जगह-जगह थूकते थे?
- प्रश्न: शारीरिक तपस्या करते-करते ही हमारी सारी ऊर्जा खत्म हो जाती है, और हमारे पास ध्यान के लिए ज्यादा ऊर्जा नहीं बचती।
- रामप्रसाद को अन्नपूर्णा का दर्शन
- प्रश्न: विभिन्न देवता कहाँ एकत्रित होकर एक हो जाते हैं?
- प्रश्न: ठाकुर हमारा मार्गदर्शन कैसे करते हैं?
- कहानी: स्वामीजी का दिव्य ज्ञान
- हमारे क्लास को ३ साल समाप्त हुए
- किताबों के बारे में
- प्रश्न: सभी इष्टों के मिलन बिंदु के बारे में - अद्वैत अनुभव में सभी इष्ट विलीन हो जाते हैं, है ना?
- प्रश्न: सिद्ध महापुरुषों को देखने से ही लगता है की उनका चेहरा चमक रहा है. ऐसी कौनसी शक्ति उन्हें प्राप्त हुई है?
- हमारे क्लास के बारे में

भार समर्पण || श्रीमाँ सारदा देवी : स्वामी गम्भीरानन्द लिखित || 12 Jun 2025
Video chapters
- अहंकार का विनाश
- विचार, संस्कार, और भाव
- माँ के भाईयों की कहानी
- प्रश्न: कल्पना और भाव में क्या अंतर है?
- प्रश्न: कल्पना को बनाए रखना बहुत थकावट दायक होगा?
- प्रश्न: एक ओर स्वामीजी कहते हैं कि हमें सभी जिम्मेदारियां अपने कंधों पर लेनी होंगी और वेदांत केसरी की तरह इच्छा शक्ति विकसित करनी होगी, वहीं दूसरी ओर ठाकुर जी संतान भाव में पूर्ण समर्पण की शिक्षा देते हैं। ये दोनों बातें विरोधाभासी लगती हैं।
- प्रश्न: जैसे-जैसे हमारी उम्र बढ़ती है, हमारी इच्छा शक्ति कम होती जाती है। इसे कैसे बनाए रखें?
- प्रश्न: माँ के भाई - प्रसन्न मामा - ने माँ की मदद नहीं की, हालाँकि उनके लिए मदद करना संभव था। यदि हम उस शक्ति का उपयोग नहीं करते जो भगवान ने हमें दी है, तो भगवान हमें और अधिक शक्ति कैसे देंगे?
- प्रश्न: गिरीश ने काफी सोच-विचार के बाद ठाकुर को पावर ऑफ अटॉर्नी दी। प्रसन्न मामा के मामले में ऐसा नहीं है।
- प्रश्न: पिता स्कूल में बच्चों के प्रदर्शन को देखते हैं लेकिन माँ बिना किसी शर्त के प्यार करती हैं। यह बात ठाकुर और माँ के मामले में बिल्कुल सच है।
- प्रश्न: स्वामीजी के बहुत कम औपचारिक शिष्य थे।
- प्रश्न: माँ के पास राजा महाराज से अधिक शिष्य होंगे।

भार समर्पण || श्रीमाँ सारदा देवी : स्वामी गम्भीरानन्द लिखित || 13 Jun 2025
Video chapters
- माँ सबको समान रूप से प्यार करती है
- मा शारदा के पास आने वाले शिष्यों के प्रकार
- माँ शारदा, शरत महाराज और राममय महाराज की कहानी
- कहानी: पहला कर्तव्य क्या: माँ का आदेश पालन या माँ की सेवा
- जगतजननी के साथ साधक का मान और अभिमान
- कहानी: गिरीश घोष ठाकुर से झगड़ते हैं लेकिन मां के प्रति उनकी अगाध श्रद्धा है
- संयम की प्रतिमूर्ति माँ सारदा
- प्रश्न: शारीरिक सामर्थ्य शक्तिशाली है लेकिन प्रेम कैसे शक्तिशाली हो सकता है?
- प्रश्न: हमें मुमुक्षुत्व - महान आदर्शों के प्रति आकर्षण - कौन देता है?
- प्रश्न: क्लास के दौरान हमारा मन उच्च स्तर पर उठ जाता है, लेकिन क्लास समाप्त होने के बाद हम सामान्य स्तर पर वापस आ जाते हैं। जिस प्रकार वाटरशेड (watershade) पहाड़ी पर पानी को बचाये रखता है, उसी प्रकार हम क्लास समाप्त होने के बाद इस दिव्य भावना को कैसे बनाये रख सकते हैं?
- ठाकुर की घड़ी
- ध्यान के लिए कल्पना का प्रयोग कैसे करें
- कंस्ट्रक्ट और सामान्य कल्पना के बीच अंतर
- ॐ विश्वं दर्पणदृश्यमाननगरीतुल्यं निजांतर्गतं मायया बहिरिवोद्भूतं यदा निद्रया।
- प्रश्न: हम अपनी आँखों से जो देखते हैं, दर्शन उससे अधिक स्पष्ट कैसे हो सकता है

भार समर्पण || श्रीमाँ सारदा देवी : स्वामी गम्भीरानन्द लिखित || 14 Jul 2025
Video chapters
- क्या जीवन का संघर्ष हमें "दीन-हीन-अधम" बना देगा, या हमें चरित्र की शक्ति प्रदान करेगा?
- क्या भक्ति या शरणागति हमें "दीन-हीन-अधम" बना देगी, या हमें चरित्र की शक्ति प्रदान करेगी? वैष्णव और रामप्रसाद की शाक्त भक्ति में अंतर।
- बुद्ध का शांत परमानंद प्रसन्न-वदन ध्यान और श्री रामकृष्ण का उद्दाम नृत्य-क्रंदन और प्रचंड भाव प्रवाह
- गंभीरानंदजी किस तरह माँ के जीवन का आलेखन करते है
- माँ सारदा का प्रयोजन: जगत में ईश्वर के प्रति मातृ भाव का प्रचार
- ईश्वर की अवधारणा का विकास
- माँ सारदा की हमारे प्रति अपार करुणा
- एक अमेरिकी भक्त की कहानी: स्वामी विवेकानंद की करुणा
- स्वामी विवेकानन्द और निर्विकल्प समाधि

भार समर्पण || श्रीमाँ सारदा देवी : स्वामी गम्भीरानन्द लिखित || 15 Jul 2025
Video chapters
- कहानी: श्रीरामकृष्ण ने माँ सारदा से विश्व के आध्यात्मिक कल्याण की जिम्मेदारी लेने का अनुरोध किया
- कहानी: उद्बोधन के कर्मचारी चंद्रमोहन की माँ के प्रति भक्ति और श्रद्धा
- ठाकुर की प्रचंड तपस्या और माँ की अपार करुणा
- चंद्र की कहानी के बारे में मेरे विचार
- चंद्र माँ के पास मुक्ति मांगने के लिए जाता है
- प्रश्न: चंद्र माँ के पास मुक्ति मांगने के लिए जाता है तो प्रसाद ले के आ जाता है. स्वामीजी ठाकुर के पास रोटी-कपड़ा-मकान मांगने गए थे, ज्ञान-भक्ति-वैराग्य लेकर आ गए
- माँ ने चन्द्र को दिखाया अपना दिव्य रूप
- प्रश्न: माँ शरत महाराज से चंद्र को नौकरी देने का अनुरोध करती हैं, लेकिन स्वामीजी को एक नौकर को पुनः नौकरी पर रखने का आदेश देती हैं, जिसे चोर होने के कारण बेलूर मठ से निकाल दिया गया था।
- प्रश्न: माँ बेरोजगार चंद्र को नौकरी देती है लेकिन जब कोई ठाकुर से भौतिक लाभ के बारे में पूछता है तो वह मना कर देते है। उत्तर: एक संसारी आदमी के प्रति माँ की करुणा की कहानी
- प्रश्न: ठाकुर, माँ और स्वामीजी में इतना विरोधाभास!

भार समर्पण || श्रीमाँ सारदा देवी : स्वामी गम्भीरानन्द लिखित || 16 Jul 2025
Video chapters
- कहानी: श्रीरामकृष्ण ने माँ सारदा से विश्व के आध्यात्मिक कल्याण की जिम्मेदारी लेने का अनुरोध किया
- माँ की महिमा का वर्णन
- कहानी: माँ गरीब महिला को मंत्र दीक्षा देते हैं
- कहानी: माँ एक गरीब युवक को दीक्षा देती है और उसकी आध्यात्मिक उन्नति की ज़िम्मेदारी लेती है
- कहानी: माँ एक शुभ-लक्षण लड़के को दीक्षा देती है
- कहानी: जयरामबाटी के कुछ ब्राह्मण माँ से नाराज हो जाते है
- कहानी: माँ के भैरव भक्त ललित बाबू की कहानी
- ठाकुर हैं IIT और माँ हैं "सर्व शिक्षा अभियान" !
- प्रश्न: एक बार दीक्षा प्राप्त हो जाने पर हमें अपनी मुक्ति के बारे में आश्वस्त होना चाहिए, लेकिन हम ऐसा महसूस नहीं करते। क्यों?
- प्रश्न: यद्यपि मैं जानता हूँ कि आध्यात्मिक साधना महत्वपूर्ण है, किन्तु सांसारिक सुखों की मेरी इच्छा इतनी प्रबल है कि मैं साधना को अधिक महत्व नहीं देता।
- प्रश्न: जयरामबाटी के ब्राह्मणों की कहानी के बारे में - मैं ललित बाबू से सहमत हूं। माँ को धूर्त ब्राह्मणों के प्रति इतनी दयालु नहीं होना चाहिए था।

भार समर्पण || श्रीमाँ सारदा देवी : स्वामी गम्भीरानन्द लिखित || 17 Jul 2025
Video chapters
- ठाकुर माँ को जगत कल्याण का उत्तरदायित्व स्वीकार करने को अनुरोध कर रहे है
- कहानी: वीर भक्त ब्रह्मचारी जदुनाथ आंधी-तूफान में माँ सारदा के लिए 108 पद्म-फूल संग्रह करता है
- श्रीरामकृष्ण माँ सारदा के शक्ति-विकास की भूमि रचना करते है
- कहानी: स्वामी योगानंद स्वामी विवेकानंद को चेतावनी देते है की कही माँ सारदा को अपना स्वरूप स्मरण न हो जाए
- कहानी: माँ सारदा अपने हाथों से अपनी प्रतिमा स्थापित करती है
- कहानी: माँ सारदा की दृष्टि से ब्रिटिश राज और स्वामी विवेकानंद
- प्रश्न: राष्ट्र निर्माण की व्यापक योजना में आध्यात्मिकता की क्या भूमिका है?
- प्रश्न: आपके अनुसार, स्वामीजी के सपनो का भारत (vision of india) और आज के भारत के बीच क्या अंतर (gap) है?
- प्रश्न: आजकल हमारे आदर्श पश्चिमी हैं। हम उनकी संस्कृति की अंधी नकल करते हैं। चीनी या जापानी अपने स्वयं के सांस्कृतिक मूल्यों का विकास कर रहे हैं।
- प्रश्न: माँ या स्वामीजी को अपना सही स्वरूप पता चल जाता तो वे शरीर त्याग कर देते. किन्तु ठाकुर को तो अपना सही स्वरूप पता था. क्यों उन्होंने देहत्याग नहीं किया?
- प्रश्न: वैसे तो माया हमारे लिए हानिकारक है, किन्तु यही माया ने माँ को अपना स्वरूप भुला कर हमारे कल्याण के लिए पृथ्वी पर रखा था!
- प्रश्न: स्वामी ब्रह्मानंद (राजा महाराज) यदि अपना सही स्वरूप जान ले तो देह त्याग कर देंगे. क्या उनको सही में अपना स्वरूप पता नहीं था?

भार समर्पण || श्रीमाँ सारदा देवी : स्वामी गम्भीरानन्द लिखित || 18 Jul 2025
Video chapters
- ठाकुर ने माँ से भक्तों के आध्यात्मिक कल्याण का उत्तरदायित्व लेने का अनुरोध किया
- ठाकुर ने शारदा-प्रसन्न महाराज को दीक्षा लेने के लिए माँ के पास भेजा
- लाटू महाराज दक्षिणेश्वर में माँ की सेवा प्रारम्भ करते है
- माँ दक्षिणेश्वर में भक्तो के लिए भोजन बनाती है
- सार्वजनिक विश्वास को बनाए रखना: श्रीरामकृष्ण और विवेकानन्द के अनुसार सामाजिक/धार्मिक संस्थाओं में पैसों का हिसाब
- कहानी: स्वामी अखण्डानन्द की दैहिक कठोरता और श्रीरामकृष्ण का मध्यम पथ
- कहानी: मांसाहार न करने का स्वामी प्रेमानन्द का गर्व-खण्डन
- कहानी: माँ काली का प्रसाद और श्रीरामकृष्ण के त्याग पे स्वामी योगानन्द का संदेह
- सार्वजनिक विश्वास को बनाए रखना: श्रीरामकृष्ण और विवेकानन्द के अनुसार सामाजिक/धार्मिक संस्थाओं में पैसों का हिसाब - 2
- लाटू महाराज दक्षिणेश्वर में माँ की सेवा प्रारम्भ करते है - 2
- कहानी: भक्त माँ सारदा का ध्यान कर रही है किन्तु माँ स्वयं वहां पे खाना बना रही है
- सेवा है श्रेष्ठ साधना: गुरु सेवा और दरिद्र-नारायण सेवा
- कहानी: शशी महाराज और लाटू महाराज के बीच झगड़ा
- कहानी: लाटू महाराज की माँ सारदा के प्रति भक्ति
- प्रश्न: क्या आप शरणागति का अर्थ समझाएंगे?
- प्रश्न: शिवानंदजी ने संघ में इतना कंट्रीब्यूशन किया फिर भी ठाकुर उन्हें ईश्वरकोटि क्यों नहीं कहते?
- प्रश्न: एक और ठाकुर माँ को कहते है की त्यागी सन्तानो को रात को ज्यादा रोटी मत खिलाओ क्योंकि उन्हें ध्यान करना है, दुरारी और लाटू महाराज ध्यान कर रहे है तो कहते है जा के रोटी बनाने में मदद करो. यानि रोटी खाने से अच्छा है रोटी बनाना!
- प्रश्न: ठाकुर ने लाटू महाराज को ध्यान छोड़कर माँ की सेवा करने को कहा। क्या यह उनके कथन "शिव ज्ञान जीव सेवा" के समान ही है? स्वामी विवेकानन्द ने इसी कथन से तो प्रेरित हो कर कर्मयोग का प्रचलन किया और शकराचार्य के उपदेश की 'ज्ञान ही सर्वोपरि है' इसका विरोध किया.
- प्रश्न: एक ओर ठाकुर लाटू महाराज को ध्यान बंद करने और माँ की मदद करने के लिए कहते हैं, दूसरी ओर वे कहते हैं कि रात को सोएँ नहीं और ध्यान करें। क्या यह कर्म और ध्यान योग का सामंजस्य है? मानवाधिकार के लोग शिकायत करेंगे कि ठाकुर लाटू महाराज को भ्रमित कर रहे हैं!
- प्रश्न: स्वामीजी ने बाद में योगों के समन्वय के रूप में जो सिखाया, वह ठाकुर की शिक्षाओं में बहुत पहले से ही बिखरा हुआ था।
- प्रश्न: शरणागति की आपकी परिभाषा बहुत उपयुक्त है। हम गृहस्थों को दिनभर आध्यात्मिकता के साथ बहुत कम संपर्क में रहना पड़ता है। हमें ऐसे काम करने पड़ते हैं जो हमें पसंद नहीं। इसलिए जीवन जीने का सबसे अच्छा तरीका यही है कि हम जो कुछ भी करते हैं, उसे ईश्वर को अर्पित कर दें।
- प्रश्न: क्या शरणागति का अर्थ है कोई महत्वाकांक्षा या अपेक्षा expectations न रखना?

भार समर्पण || श्रीमाँ सारदा देवी : स्वामी गम्भीरानन्द लिखित || 18 Aug 2025
Video chapters
- माँ सारदा के जीवन की रूपरेखा
- ठाकुर माँ को रामकृष्ण संघ की जिम्मेदारी संभालने के लिए तैयार कर रहे हैं
- कहानी: ठाकुर का त्याग और माँ की व्यावहारिकता
- कहानी: श्री रामकृष्ण का हास्य-रस
- ठाकुर ने लाटू महाराज को माँ की सेवा में नियुक्त किया
- प्रारंभिक रामकृष्ण संघ के 3 चरण
- बूड़ो गोपाल और योगेन महाराज माँ की सेवा करते है
- माँ सारदा बालक-भक्त पूर्ण की बाल-गोपाल भाव से सेवा करती है
- ठाकुर आदर्श सिखाते हैं, माँ उसे व्यवहार में लाना सिखाती हैं

भार समर्पण || श्रीमाँ सारदा देवी : स्वामी गम्भीरानन्द लिखित || 19 Aug 2025
Video chapters
- ठाकुर की आध्यात्मिक शक्ति उनके भाव, समाधि और दर्शन में प्रत्यक्ष रूप से दिखाई देती थी; लेकिन माँ की शक्ति पूरी तरह अदृश्य रहकर कार्य करती थी
- लज्जापटावृत्ता माँ सारदा: मौन में छिपी दिव्य शक्ति की कहानियाँ
- कहानी: कैसे एक त्यागी युवक का माँ सारदा पर अटूट विश्वास बना
- ठाकुर ने माँ को आदेश दिया कि वे पैदल जाकर बीमार भक्त की कुशलक्षेम पूछें
- कहानी: माँ सारदा ने अपार कष्ट सहकर भी अपने संतानों के लिए प्रेमपूर्वक भोजन बनाया
- कहानी: स्वामी सारदानन्द की माँ सारदा के प्रति अपार भक्ति
- मोटरगाड़ी में माँ सारदा
- कहानी: हास्यरसिक श्रीरामकृष्ण
- कहानी: धर्म-संकट और उसका रंगरसमय समाधान

भार समर्पण || श्रीमाँ सारदा देवी : स्वामी गम्भीरानन्द लिखित || 20 Aug 2025
Video chapters
- कहानी: जब कालीपद की पत्नी ठाकुर से अपने पति के आचरण में सुधार लाने की बिनती करती है तो ठाकुर कहते हैं कि इस मामले में माँ की शक्ति उनसे भी अधिक है।
- ठाकुर की सत्यनिष्ठा: क्या माँ भक्तों के सांसारिक कल्याण करने में उनसे अधिक समर्थ हैं?
- माँ का हास्य-रस और संदेह-पूर्ण सत्यनिष्ठा: एक भक्त को कहती है की गोलाप माँ ही असली माँ सारदा है
- सत्यनिष्ठा के विविध आयाम—ठाकुर और माँ की दृष्टि से

भार समर्पण || श्रीमाँ सारदा देवी : स्वामी गम्भीरानन्द लिखित || 21 Aug 2025
Video chapters
- मातृत्व हर स्त्री की आकांक्षा होती है
- विधवाओं और निःसंतान महिलाओं को अपने खान-पान और जीवनशैली में कठोरता क्यों करनी पड़ती है? वैराग्य उत्पन्न करने के लिए।
- माँ सारदा की मातृत्व की आकांक्षा
- श्री रामकृष्ण रंग-रस के माध्यम से माँ की महिमा प्रकाशित करते है
- श्री रामकृष्ण के युगधर्म संस्थापन में सहाय माँ सारदा की मातृत्वशक्ति
- मातृत्व के प्राथमिक सोपान
- मातृत्व का उच्च सोपान: कहानियों के माध्यम से माँ की दिव्य महिमा

भार समर्पण || श्रीमाँ सारदा देवी : स्वामी गम्भीरानन्द लिखित || 22 Aug 2025
Video chapters
- मातृत्व के प्रथम तीन सोपान
- पेटलाद वाले जे-भगवान माताजी की कहानी
- मातृत्व का चतुर्थ सोपान
- मातृत्व का सर्वोच्च सोपान
- माँ के मातृत्व के क्रमशः विकसित सोपान

भार समर्पण || श्रीमाँ सारदा देवी : स्वामी गम्भीरानन्द लिखित || 27 Oct 2025
Video chapters
- ठाकुर के दो आध्यात्मिक उत्तराधिकारी : माँ सारदा और स्वामी विवेकानन्द
- माँ सारदा अपना जगत-कल्याण-रूपी दायित्व स्वीकार करती है
- माँ सारदा की संतान प्राप्ति की इच्छा
- प्रश्न: यह देखने के बाद भी कि माँ को तकलीफ़ हो रही है, कुछ लोग सिर्फ़ अपने स्वार्थ के लिए उनसे दीक्षा मांग रहे थे!
- प्रश्न : भले ही स्वामीजी को एक महान ज्ञानी माना जाता है, लेकिन जब वे माँ शारदा को प्रणाम करने जा रहे थे, तो वे बार-बार अपने ऊपर गंगाजल छिड़कते थे। इससे पता चलता है कि वे एक महान भक्त भी थे।

भार समर्पण || श्रीमाँ सारदा देवी : स्वामी गम्भीरानन्द लिखित || 28 Oct 2025
Video chapters
- माँ सारदा की संतान प्राप्ति की इच्छा
- उत्पात मचाने भक्तों के प्रति माँ सारदा की करुणा की कहानियाँ
- माँ सारदा के प्रथम शिष्य-संतान -- प्रेम और करुणा की शुरुआत
- श्रीरामकृष्ण की महासमाधि के बाद कामारपुकुर में माँ सारदा : तपस्यामय दिन और मातृत्व की आकांक्षा
- धर्मदास लाहा की पुत्री प्रसन्नमयी
- प्रश्न : हम सभी साधको के जीवन में साधना और क्रमश: आध्यात्मिक विकास देखते है. किन्तु माँ के जीवन में संतानप्राप्ति की आकांक्षा ही ज्यादा दिखती है. ऐसा क्यों?
- प्रश्न : ठाकुर या स्वामीजी की तरह माँ की साधना का विस्तृत विवरण नहीं मिलता है. अर्थात हम उनके ऊपर ध्यान कर सकते है किन्तु उनकी साधना से कुछ सिख नहीं सकते।
- प्रश्न : माँ सारदा का मातृत्व बनाम आज का feminism
- माँ की महिमा - भक्ति का प्राधान्य

भार समर्पण || श्रीमाँ सारदा देवी : स्वामी गम्भीरानन्द लिखित || 29 Oct 2025
Video chapters
- हिन्दू आध्यात्मिक साहित्य में संस्कृत की महत्ता — और बंगाली रामकृष्ण-विवेकानन्द परम्परा का अमूल्य योगदान
- मधुर भाव में डूबी एक स्त्री और श्रीरामकृष्ण की अनोखी लीला
- क्यों माँ सारदा का मातृत्व ही उनका सबसे बड़ा ‘चमत्कार’ है? दो हृदयस्पर्शी कहानियाँ
- रोटी खिलाने की कहानी—जब माँ सारदा ने अपने त्यागी संतानों की आध्यात्मिक प्रगति का भार स्वयं उठाया
- योगिन माँ की भक्ति: माँ सारदा के प्रति प्रेम और समर्पण का उज्ज्वल उदाहरण
- पान बनाने की वह कहानी—जब माँ सारदा ने कहा: “भक्तों को जोड़ना है, ठाकुर तो अपने ही हैं”
- प्रश्न: जब ठाकुर को कैंसर हुआ था, तब माँ काली ने उनसे कहा—“तुम इतने लोगों के मुँह से खा रहे हो," उसी प्रकार माँ अपने संतानों के मुँह से खाती हैं। यही तो सर्वोच्च अद्वैत वेदांत है!
- प्रश्न: स्वामीजी का संदेश है कि वेदांत को वनवास से निकालकर दुनिया के कर्मक्षेत्र में ले जाना चाहिए। माँ का पूरा जीवन इसी सिद्धांत की जीवित प्रतिमा है। इसलिए स्वामीजी और माँ को साथ पढ़ना अत्यंत आवश्यक है।

भार समर्पण || श्रीमाँ सारदा देवी : स्वामी गम्भीरानन्द लिखित || 30 Oct 2025

भार समर्पण || श्रीमाँ सारदा देवी : स्वामी गम्भीरानन्द लिखित || 31 Oct 2025
Video chapters
- माँ सारदा का अद्भुत मनःसंयोग — ठाकुर की इच्छा बिना कहे जान लेने की शक्ति
- भारत की प्रगति का असली रास्ता: योग और वेदांत का पुनर्जागरण
- लज्जाशीला माँ सारदा—जो बिना माँगे ही ठाकुर के बालभक्तों को घर लौटने का पैसा दे देती थीं
- माँ सारदा: बिना प्रार्थना के भी हमारा कल्याण
- ठाकुर कुछ कहें उससे पहले ही—माँ नरेन्द्र की थाली सजा देती हैं
- स्त्रीभक्तों के लिए माँ सारदा का स्नेहपूर्ण आश्रय : जहाँ जगह कम थी, वहाँ माँ ने हृदय खोल दिया
- जहाँ ठाकुर के युगधर्म-प्रवर्तन और माँ के मातृत्व का संगम होता है
- प्रश्न: यह विस्मयकारी है कि माँ सारदा ठाकुर की इच्छा उनके कहने से पहले ही जान लेती थीं—और जब ठाकुर अपने कक्ष में रहते, तब भी वे मानो उनकी मन:वाणी को ग्रहण कर लेती थीं। नहबत था भी कितना छोटा-सा
- प्रश्न: माँ ने स्वयं को श्रीरामकृष्ण के श्रीचरणों में विलीन कर दिया था; इसी कारण वे इतनी निःस्वार्थ भाव से सेवा कर पाती थीं।
- प्रश्न: प्राण और आकाश के विषय में थोड़ा और विस्तार से बताइए।

भार समर्पण || श्रीमाँ सारदा देवी : स्वामी गम्भीरानन्द लिखित || 1 Dec 2025
Video chapters
- दुर्योधन ने पाया माखन, अर्जुन ने पाया माखन-चोर
- माँ का मातृत्व
- कहानी: स्वामी विशुद्धानंद की जयरामबाटी यात्रा और माँ सारदा के आशीर्वाद की प्राप्ति
- दक्षिणेश्वर गुरुकुल में श्री रामकृष्ण और माँ सारदा गुरु
- माँ सारदा की सेविका गोलाप माँ की कहानी
- प्रश्न: माँ और स्वामीजी ठाकुर के ही जीवनी और वाणी के विभिन्न आयाम है.
- प्रश्न: माँ है रामकृष्णगतप्राणा -- ठाकुर के कमरे में जो हो रहा है, सब सुन पा रही है, ठाकुर की पूर्ण शरणागत है.
- प्रश्न: अभेदानन्दजी का स्तोत्र "प्रकृतिम् परमाम्" माँ के जीवन की घटनाओ को कितना खूबसूरती से संक्षिप्त वर्णन करता है. इस स्तोत्र पे क्लास कर सकते है.

भार समर्पण || श्रीमाँ सारदा देवी : स्वामी गम्भीरानन्द लिखित || 2 Dec 2025
Video chapters
- बालकवत् परमहंस अवस्था कैसे प्राप्त हो: प्रचंड तपस्या से — या माँ के सहज, सरल शिशु बनकर
- कहानी: केवल तपस्या करने से ही ईश्वर-प्राप्ति नहीं होती; इसके लिए ईश्वर की कृपा आवश्यक है।
- साधना-पथ में पतन के कारण
- माँ सारदा अपने बच्चों का उत्तरदायित्व संभालती हैं
- कहानी: गोलाप माँ की विचित्रताएँ और माँ सारदा में उनका अटूट विश्वास
- कहानी: माँ के मातृत्व के क्षेत्र में प्रवेश करने के लिए ठाकुर को भी शिशु-संतान बनना होगा
- तीर्थयात्राओं की कहानियाँ
- ठाकुर, माँ और स्वामीजी—तीन अलग व्यक्तित्व नहीं, एक ही धारा हैं; उनका अध्ययन संयुक्त रूप से होना चाहिए
12 Chir Sadhava (चिर सधवा)
24 classes

चिर सधवा || श्रीमाँ सारदा देवी : स्वामी गम्भीरानन्द लिखित || 3 Dec 2025
Video chapters
- श्री रामकृष्ण की महासमाधि और चिर-सधवा माँ सारदा
- श्रीरामकृष्ण गुरु-भाव का उत्तरदायित्व स्वामीजी और माँ सारदा को देते हैं
- माँ सारदा का अनुभव : असाध्य रोग में ईश्वर कैसे रक्षा करते हैं
- अनाथनाथ ईश्वर की अपार करुणा: परमार्थ या पुरुषार्थ?
- तपस्या का पथ कठिन है — तपस्या का घमंड भी साधक को गिरा देता है
- ईश्वर के संकल्प और आर्त के क्रंदन से विधि-परिचालित नियति चक्र की गति परिवर्तित होगी की नहीं?
- प्रश्न: ठाकुर अपनी तस्वीर में वृद्ध दिखते हैं — हम लोग तो उन्हें वृद्ध ही मानते है. तो “बूढ़े न कहलाने” का उनका संकल्प असफल हो गया!
- प्रश्न: भगवान कृष्ण के बारे में भी इसी तरह प्रोजेक्शन का प्रॉब्लम है
- प्रश्न: आपने जो प्रलोभन वाले एक्सपेरिमेंट के बारे में बताया — मैंने पढ़ा है कि जिन बच्चों ने मिठाई की ओर देखना छोड़ दिया, वे सफल रहे; और जो मिठाई को देखते ही रहे, वे स्वयं को सँभाल नहीं पाए।
- प्रश्न: आपने जो कहा इन्द्रिय संयम जब तक नहीं होता तब तक पुरुषार्थ, और वो हो जाने के बाद शरणागति -- इसे और थोड़ा समझाइये
- प्रश्न: अर्थात, क्या हम कह सकते है की तमस से रजस की यात्रा में इन्द्रिय संयम आने लगता है?
- प्रश्न: अत्यंत राजसिक स्वभाव वाले लोग — जैसे बड़े CEO या ओलंपिक एथलीट — इतने व्यस्त रहते हैं कि इंद्रिय-सुखों के लिए उनके पास अधिक समय ही नहीं होता।
- प्रश्न: इसी लिए स्वामीजी manliness मर्दानगी की सराहना करते है
- प्रश्न: ठाकुर जो कर्मनाशा नदी में डूब लगाने की बात करते है वो किनके लिए है?
- प्रश्न: दुर्योधन कहता मुझे पता है की अधर्म क्या है, पर में उससे मुक्त नहीं हो पा रहा हु
- प्रश्न: लोकप्रिय कल्पना में रावण और दुर्योधन विलन माने जाते हैं। पर वे राजसिक थे। स्वामीजी कहते हैं— वास्तविक विलन राजसिक नहीं, तामसिक होते हैं। तमस, रजस से कहीं अधिक भयावह है।
- प्रश्न: ठाकुर का स्टैण्डर्ड बड़ा हाई था

चिर सधवा || श्रीमाँ सारदा देवी : स्वामी गम्भीरानन्द लिखित || 4 Dec 2025
Video chapters
- नित्य श्रीरामकृष्ण, नित्य उनकी लीला
- ठाकुर ने आत्मा को जगाया, माँ ने समाज को जोड़ा, और स्वामीजी ने सभ्यता को दिशा दी - 1
- जब आध्यात्मिकता समाज में नहीं उतरती, तब राष्ट्र दुर्बल हो जाता है — भारत में बौद्ध धर्म की ऐतिहासिक चूक
- ठाकुर ने आत्मा को जगाया, माँ ने समाज को जोड़ा, और स्वामीजी ने सभ्यता को दिशा दी - 2
- भारत क्यों गिरा? जब क्षत्रिय की अपार करुणा और ब्राह्मण की मेधाशक्ति में विभाजन हो गया
- ठाकुर ने आत्मा को जगाया, माँ ने समाज को जोड़ा, और स्वामीजी ने सभ्यता को दिशा दी - 3
- तारकेश्वर महादेव के सामने हत्या देने की कहानी: श्रीरामकृष्ण की रोगमुक्ति के लिए माँ सारदा का जीवन-दाँव
- प्रश्न: स्टीरियोटाइपिंग के बारे में — शरत महाराज का स्वामीजी से पहली भेंट का प्रसंग कितना रोचक है। पहली नज़र में उन्हें लगा कि स्वामीजी अत्यंत अहंकारी हैं!
- प्रश्न: बौद्ध युग में हुई एक ऐतिहासिक भूल का दुष्परिणाम हम आज भी भुगत रहे हैं
- प्रश्न: शंकराचार्य ने भी बौद्ध युग में हुई ऐतिहासिक भूल को दोहराया - आध्यात्मिक मेधाशक्ति के साथ जन-साधारण के कल्याण को नहीं जोड़ा।
- प्रश्न: गीता में भी इसी तरह विभिन्न मत का समन्वय है
- धार्मिक कट्टरता आज के भारत के लिए एक बड़ा ख़तरा है
- प्रश्न: रामकृष्ण संघ में आध्यात्मिकता और प्रैक्टिकल का कितना मधुर संगम है!

चिर सधवा || श्रीमाँ सारदा देवी : स्वामी गम्भीरानन्द लिखित || 5 Dec 2025
Video chapters
- पल भर का जीवन: आश्रम के रसोइये की अचानक मृत्यु और एक गहरी सीख: जब तक साँस है, नाम-स्मरण कर ले
- तारकेश्वर महादेव के सामने हत्या देने की कहानी: श्रीरामकृष्ण की रोगमुक्ति के लिए माँ सारदा का जीवन-दाँव
- कहानी: माँ सारदा के एक त्यागी संतान माँ की बीमारी अपने पे ले लेना चाहते है
- माया के इस जगत में कौन किसका है? -- माँ सारदा में मन में प्रगट हुई महा-प्रलय-रूपी वैराग्य की प्रज्वलित दीप्ती
- वैराग्य क्या है? — जब सीमित मन विराट चेतना में विलीन हो जाता है
- प्रश्न: मृत्यु अवश्यंभावी है—फिर भी हम उसे इतनी आसानी से क्यों भूल जाते हैं?
- प्रश्न: दक्ष युधिष्ठिर को कहता है की कितनी आश्चर्य की बात है - मृत्यु अवश्यम्भावी होने से भी हम उसकी तयारी नहीं करते। उसके उत्तर में कोई कहता है की हम तो अमर है. हमारी मृत्यु है ही नहीं
- प्रश्न: आज स्वामी गम्भीरानन्दजी की भाषा और भाव—दोनों ने मन को तृप्त कर दिया
- प्रश्न: तारकेश्वर के अनुभव के उपरांत माँ के भीतर यह बोध स्पष्ट हो गया होगा कि अब उन्हें अकेले चलना है और संघ की आध्यात्मिक धुरी स्वयं बननी है।
- हमारी कथाओं में निहित आध्यात्मिक वैभव
- प्रश्न: ठाकुर ने केशव के लिए नारियल और चीनी की मिन्नत मानी थी, माँ ने ठाकुर के लिए तारकेश्वर में हत्या दी. किन्तु दोनों प्रार्थनाए तो विफल हो गयी. क्या हमें प्रार्थना करनी चाहिए?
- प्रश्न: आख़िर ईश्वर से नहीं माँगेंगे, तो किससे माँगेंगे!
- प्रार्थना तो करनी ही है. जब तक वो अवस्था नहीं आती की देह के प्रॉब्लम प्रॉब्लम लगे ही नहीं। पर वह अवस्था अभी थोड़ी सी डिस्टेंट (दूर) है.

चिर सधवा || श्रीमाँ सारदा देवी : स्वामी गम्भीरानन्द लिखित || 22 Dec 2025
Video chapters
- षोडशी पूजा से तारकेश्वर हत्या तक: ठाकुर और माँ का विद्या का संसार
- वैराग्य संकुचित कठोरता नहीं—करुणा की व्यापकता है, हृदय की उदारता है
- व्यष्टि का समष्टि में पूर्ण विलय — यही है वैराग्य
- तारकेश्वर से भग्न मनोरथ हो माँ सारदा ठाकुर के पास लौट आती है
- महासमाधि की आहट: ठाकुर ने पहले ही बताए थे ये चार संकेत
- प्रश्न: रामकृष्ण संघ में वैराग्य की आपकी व्याख्या को और स्पष्ट कीजिए। आखिर में तो god in everything पे ही आकर आध्यात्मिक यात्रा समाप्त होती है
- प्रश्न: उपनिषद् दोनों बातें कहते हैं — “सर्वं खल्विदं ब्रह्म” भी और “अहं ब्रह्मास्मि” भी। किन्तु अधिकांश आचार्यों ने मुख्यतः “अहं ब्रह्मास्मि” पर बल दिया और संसार से निवृत्ति का मार्ग सिखाया। केवल स्वामीजी ने “सर्वं खल्विदं ब्रह्म” को केंद्र में रखकर “शिव-ज्ञाने जीव-सेवा” का आदर्श प्रस्तुत किया।
- रानी रासमणि और ठाकुर के बड़े भाई रामकुमार की निष्ठा और उदारता

चिर सधवा || श्रीमाँ सारदा देवी : स्वामी गम्भीरानन्द लिखित || 23 Dec 2025
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- महासमाधि की आहट: ठाकुर ने पहले ही बताए थे ये तीन संकेत
- श्रीरामकृष्ण की महासमाधि सूचक चतुर्थ लक्षण

चिर सधवा || श्रीमाँ सारदा देवी : स्वामी गम्भीरानन्द लिखित || 24 Dec 2025
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- श्रीरामकृष्ण कहते हैं, "घर घर मेरी पूजा होगी"
- श्रीरामकृष्ण गुरु परम्परा : ठाकुर, माँ, स्वामीजी—एक तीन, तीन एक
- माँ का कहना है: जहाँ स्वामी विवेकानंद की पूजा नहीं होती वहाँ श्री रामकृष्ण पूजा ग्रहण नहीं करेंगे
- माँ का कहना है: श्री रामकृष्ण स्वामी विवेकानन्द को अपनी गोद में बैठाते
- कहानियाँ
- श्रीरामकृष्ण की अन्त्यलीला

चिर सधवा || श्रीमाँ सारदा देवी : स्वामी गम्भीरानन्द लिखित || 25 Dec 2025
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- श्रीरामकृष्ण कहते हैं, "घर घर मेरी पूजा होगी"
- महाप्रयाण की ओर बढ़ते कदम: श्रीरामकृष्ण के अंतिम दिन
- भक्त और भगवान की एकता: ठाकुर के कैंसर का घाव माँ काली के गले में
- श्री रामकृष्ण के कैंसर का आध्यात्मिक रहस्य: जगत के पापों का बोझ अपने ऊपर लेना

चिर सधवा || श्रीमाँ सारदा देवी : स्वामी गम्भीरानन्द लिखित || 26 Dec 2025
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- श्रीरामकृष्ण ने जगत के पापों को अपने ऊपर लिया और हमें परमाणु युद्ध से बचाया
- श्रीरामकृष्ण के आखिरी दिनो की कहानी : भक्तवृंद समझते हुए भी समझना नहीं चाहते थे
- श्रीरामकृष्ण के आखिरी दिनो की कहानी : क्यों पता नहीं, मेरे मन में सदा ही ब्रह्मभाव का उद्दीपन हो रहा है
- आख़िरी दिनों में माँ सारदा ने अपनी लाड़ली कन्या राधू के प्रति भी माया का बंधन काट दिया था

चिर सधवा || श्रीमाँ सारदा देवी : स्वामी गम्भीरानन्द लिखित || 3 Feb 2026
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- श्री रामकृष्ण के अंतिम दिन: माँ सारदा की दृष्टि से
- श्री रामकृष्ण का अंतिम दिन: “मैं जैसे कहीं दूर जा रहा हूँ… जल के भीतर से”
- श्री रामकृष्ण का अंतिम दिन: अशुभ लक्षण
- श्री रामकृष्ण की महासमाधि
- महाप्रयाण की तैयारी: कैसे ठाकुर ने माँ और स्वामीजी को सौंपा उत्तराधिकार
- काशीपुर महाश्मशान में श्री रामकृष्ण का दाह संस्कार
- श्री रामकृष्ण की महासमाधि का वर्णन: रामलाल दादा की दृष्टि से
- श्री रामकृष्ण के अंतिम दिनों का वर्णन: स्वामी विवेकानन्द की दृष्टि से
- श्री रामकृष्ण की महासमाधि का वर्णन: स्वामी अद्भुतानन्द की दृष्टि से
- प्रश्न: यह आश्चर्यजनक है कि किसी ने यह जाँचने के लिए कि ठाकुर सच में समाधि में हैं, उनकी आँख में उंगली डाल दी!
- प्रश्न: विद्या का संसार -- यह कितनी सुन्दर बात है. पूर्ण संन्यास सभी के बस की बात नहीं।
- प्रश्न: हम सबको एक आध्यात्मिक संगति चाहिए, जो हमें अति-भौतिकवाद से सुरक्षित रखे। यह अपना सुबह का क्लास इसका अच्छा उदाहरण है।
- प्रश्न: एक ओर कहा जाता है कि भवसागर पार करना मुश्किल है; दूसरी ओर कहा जाता है कि ठाकुर के शरणागत होने से वही भवसागर गोष्पद-वारि (गाय के पैर के निशान में भरे पानी) के समान हो जाता है—यह कैसे संभव है?
- प्रश्न: जैसे यीशु पुनर्जीवित हुए थे, वैसे ही ठाकुर ने भी महासमाधि के बाद दर्शन दिए।
- प्रश्न: मैंने कई उत्कृष्ट साधकों को देखा है, जो अपनी आध्यात्मिक उपलब्धियाँ और ज्ञान दूसरों से साझा नहीं करते—क्या यह हमारी, हिन्दुओं की, एक कमी नहीं है?

चिर सधवा || श्रीमाँ सारदा देवी : स्वामी गम्भीरानन्द लिखित || 4 Feb 2026
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- श्रीरामकृष्ण की महासमाधि का विवरण
- श्रीरामकृष्ण का अस्थि कलश
- नित्य श्रीरामकृष्ण - चिर सधवा माँ सारदा: महासमाधि के बाद ठाकुर ने प्रकट हो कर माँ को चूड़ियाँ उतारने से रोका
- श्रीरामकृष्ण की महासमाधि के बाद के दिनों का वर्णन : स्वामी अद्भुतानन्द कथित
- श्रीरामकृष्ण की महासमाधि का वर्णन: स्वामी रामकृष्णानन्द कथित
- प्रश्न: ठाकुर कहते हैं—इस शरीर में दो हैं: एक माँ, और दूसरा उसका बालक। बालक ही बीमार है, माँ नहीं -- यह बात मुण्डक उपनिषद की उस कथा से बिल्कुल मेल खाती है—एक ही वृक्ष पर दो पक्षी बैठे हैं: एक रोगी और जर्जर, दूसरा युवा और सुंदर। और यह बात कहते है जब की वो मृत्यु के द्वार खड़े है!
- प्रश्न: आश्चर्य की बात है—शशी महाराज कहते हैं कि ठाकुर का अंतिम क्षण ही उनका सबसे महान आनंद का क्षण था।
- प्रश्न: हमारी अपनी कोई योग्यता नहीं। इसी लिए गिरीश को देखकर भरोसा होता है. अगर गिरीश कर सकते हैं, तो हम क्यों नहीं !
- प्रश्न: अपने कहा की रामकृष्ण भावधारा में एंट्री बेरियर entry barrier नहीं है. किन्तु आपने ऐसा नहीं कहा की यहाँ ईश्वर प्राप्ति सहज है.
- प्रश्न: गिरीश ने भी कहा था की पावर ऑफ़ अटोर्नी देने के बाद में उसे सही में तपस्या करनी पड़ी थी.
- प्रश्न: कंकुरगाछी का मंदिर जैसे ठाकुर की अस्थियो पे बना, वैसे ही क्या अपने अन्य मंदिरो में ठाकुर के अस्थि रहते है?

चिर सधवा || श्रीमाँ सारदा देवी : स्वामी गम्भीरानन्द लिखित || 5 Feb 2026
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- मृत्यु के दिन भी लोक-कल्याणरत श्री रामकृष्ण 1
- ठाकुर और स्वामीजी के द्वारपाल: स्वामी निरंजनानन्द
- दो तरह के भक्त: सर्वस्व न्योछावर कर सेवा व्रत धारण करने वाले और स्वार्थपरायण निज-मुक्ति के साधक
- श्री रामकृष्ण की महासमाधि का वर्णन: स्वामी रामकृष्णानन्द कथित
- संन्यास जीवन के बारे में स्वामी रामकृष्णानन्द
- प्रश्न: श्री रामकृष्ण के अंतिम दिनों में स्वामी विवेकानंद भी तपस्या करना चाहते थे, पर शशि महाराज का ध्यान केवल ठाकुर की सेवा पर था। इस दृष्टि से शशि महाराज को और भी महान कहा जा सकता है।
- प्रश्न: यहाँ तक कि स्वामी ब्रह्मानंद में भी ऐसा सेवा-भाव नहीं था।

चिर सधवा || श्रीमाँ सारदा देवी : स्वामी गम्भीरानन्द लिखित || 6 Feb 2026
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- श्रीरामकृष्ण की महासमाधि का वर्णन: स्वामी अभेदानंद द्वारा
- श्री रामकृष्ण के शरीर के भीतर विराजमान माँ काली
- श्री रामकृष्ण और लज्जापटावृता माँ शारदा का दिव्य संबंध

चिर सधवा || श्रीमाँ सारदा देवी : स्वामी गम्भीरानन्द लिखित || 23 Feb 2026
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- हमें आध्यात्मिक होने के साथ-साथ सशक्त भी होना है
- माँ शारदा के जीवन में ज्ञान, भक्ति, ध्यान और कर्म का समन्वय
- श्री रामकृष्ण की महासमाधि का वर्णन — स्वामी अभेदानंद कथित
- प्रश्न: आपने श्री रामकृष्ण की तिथिपूजा के दिन क्या किया?
- प्रश्न: ज्ञानमार्ग में त्याग स्वाभाविक है। उसमें संसार का पूर्ण परित्याग आवश्यक माना गया है। कर्म तभी संभव है जब हम संसार को किसी स्तर पर वास्तविक मानें।
- प्रश्न: शंकराचार्य शायद यह नहीं देख पाए थे कि कर्मत्याग करने वालों में तमस भी आ सकता है। बहुत से लोग अत्यंत सज्जन और सभ्य होते तो हैं, पर साथ ही अत्यंत आलसी भी होते हैं।
- प्रश्न: ठाकुर अपने अंतिम दिन अत्यंत आनंद में थे। यही तो वास्तव में सफल जीवन का लक्षण है, है न? फिल्मों में नायक को अनेक संघर्षों से गुजरना पड़ता है, पर अंत में वही विजयी होता है। उसी प्रकार जीवन की सच्ची विजय यह है कि मृत्यु के क्षण में भी मन भय, दुःख और पछतावे से मुक्त होकर आनंद में स्थित रहे।
- प्रश्न: एक फिल्म में देखा हीरो मर जाता है आखिर में. इसे देख में बहोत हताश हो गया था.

चिर सधवा || श्रीमाँ सारदा देवी : स्वामी गम्भीरानन्द लिखित || 24 Feb 2026
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- स्वामी अभेदानन्दकृत श्रीरामकृष्ण की महासमाधि का वर्णन
- श्रीरामकृष्ण की महासमाधि का वर्णन — रामचंद्र दत्त के शब्दों में
- श्रीरामकृष्ण का दैनिक जीवन: हर क्षण आध्यात्मिक प्रेरणा
- प्रश्न: आध्यात्मिक प्रगति का एक बड़ा लक्षण है — गहरी शान्ति और स्थिरता। लेकिन जब हम कर्मयोग करते हैं, तब मन में बहुत हलचल, संघर्ष और उत्तेजना दिखाई देती है। जैसा आपने कहा, उससे प्राणशक्ति का भी ह्रास होता है। उदाहरण के लिए, Swami Brahmananda कर्मयोगी स्वभाव के नहीं थे, इसलिए उनके जीवन में अद्भुत शान्ति और गंभीरता दिखाई देती है। दूसरी ओर Swami Vivekananda कर्मयोग के महान आदर्श थे, इसलिए उनके जीवन में तीव्र उद्वेग, संघर्ष, यहाँ तक कि गुरुभाइयों के साथ वाद-विवाद भी दिखाई देता है। तो क्या कर्मयोग गलत है?
- प्रश्न: एक व्यक्ति से कहा गया कि यदि वह 100 गायों को बैठा दे, तो उसे बड़ा पुरस्कार मिलेगा। उसने बड़ी मेहनत करके 99 गायों को तो बैठा दिया, परन्तु सौवीं गाय बहुत ज़िद्दी निकली। वह किसी भी तरह बैठने को तैयार नहीं हुई। अंत में क्रोध में आकर वह व्यक्ति उस पर जोर से चिल्ला पड़ा। लेकिन उसके चिल्लाते ही जो 99 गायें पहले से शान्त बैठी थीं, वे भी घबराकर एक साथ उठ खड़ी हुईं। हमारा संसार भी कुछ ऐसा ही है।
- प्रश्न: आश्चर्य की बात है लोग सेवाकार्य करते हुए भी कामना-वासना से, name-fame से जुड़ जाते है.
- प्रश्न: perfection is its own trap. what was virtue yesterday, today it has become a liability, right?
- प्रश्न: जैसा कि आप ठाकुर के दैनिक जीवन की चर्चा कर रहे थे, वैसे ही लीलाप्रसंग में कहा गया है कि भक्त की आध्यात्मिक यात्रा भी बदलती जाती है। प्रारम्भ में वह भगवान को ऐश्वर्य, महिमा और चमत्कारों से युक्त रूप में देखना चाहता है। उसे ईश्वर की सर्वशक्ति और दिव्यता आकर्षित करती है।
- प्रश्न: कभी-कभी हम सोचते हैं कि भगवान का दर्शन होना ही आध्यात्मिक जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि है। परन्तु जब आपने रामलाल दादा का प्रसंग सुनाया, तब यह समझ में आया कि केवल दर्शन प्राप्त हो जाना ही सब कुछ नहीं है। यदि जीवन में चरित्र, शुद्धता और अन्तःकरण का परिवर्तन नहीं आया, तो दर्शन भी स्थायी फल नहीं देता।

चिर सधवा || श्रीमाँ सारदा देवी : स्वामी गम्भीरानन्द लिखित || 25 Feb 2026
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- राम दत्त के शब्दों में श्रीरामकृष्ण की महासमाधि का वर्णन
- Apostle to the Apostles माँ सारदा: रामकृष्ण के शिष्यों की भी आश्रयदाता
- त्याग का अर्थ पलायन नहीं—वासनाओं का त्याग और सेवा है!
- ठाकुर किस प्रकार ज्ञान और भक्ति का समन्वय करते हैं—वे किस तरह संन्यास मार्ग और संसार में दायित्व-निर्वाह के मार्ग के बीच सामंजस्य स्थापित करते हैं।
- प्रश्न: हमारे संघ में दर्शन परंपरा कभी रुकी नहीं - हमेशा से चली आ रही है.
- प्रश्न: किन्तु हमने कभी दर्शन या चमत्कार को प्राधान्य नहीं दिया
- प्रश्न: हमें ठाकुर के कुछ शिष्यों के बारे में कोई भी पुस्तक नहीं मिलती। ऐसा क्यों?

चिर सधवा || श्रीमाँ सारदा देवी : स्वामी गम्भीरानन्द लिखित || 16 Mar 2026
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- महासमाधि के ही दिन ठाकुर प्रकट हो माँ को दर्शन देते है
- ठाकुर की महासमाधि बाद माँ सारदा पतला लाल बॉर्डर वाला वस्त्र धारण करती है
- ठाकुर की अस्थि को लेकर गुरुभाई और रामचंद्र दत्त में विरोध
- ठाकुर की महासमाधि के बाद काशीपुर उद्यानगृह त्याग करने का निर्णय
- त्यागी शिष्यगण ठाकुर की अस्थि का एक बड़ा हिस्सा अपने पास रख लेते है
- माँ कहती है, सोने का मनुष्य ही चला गया, अभी राख लेकर झगड़ रहे है.
- प्रश्न: युवा अवस्था में भी स्वामीजी की दृष्टि अत्यंत व्यापक और उनका चरित्र अत्यंत गहन था।
- प्रश्न: स्वामीजी की व्याकुलता से ही निर्विकल्प समाधी संभव थी, तो फिर ठाकुर को उससे भी बहोत ज्यादा व्याकुलता की क्या जरुरत थी?
- प्रश्न: ठाकुर का भांजा ह्रदय या अन्य संबधी माँ का अपमान या अवगणना क्यों करते थे? माँ तो किसी का अहित नहीं करती थी.
- प्रश्न: स्वामीजी का भी कितना शोषण और अपमान हुआ था उनके सम्बन्धिओ के द्वारा, ब्रह्मोसमाज द्वारा, किन्तु स्वामीजी कभी भी बदला लेने के बारे में नहीं सोचते
- प्रश्न: रंगनाथानन्दजी का भी इतना विस्तृत vision था
- प्रश्न: संसार माया है सुन कर हमारा मन भी भ्रमित हो जाता है और हम करुणा या मित्रता से व्यवहार करना भूल जाते है
- प्रश्न: ठाकुर ने गहन आध्यात्मिकता, स्वस्थ परिवार, और राष्ट्र निर्माण को एक साथ मिलाया यह हमारे इतिहास में पहली बार हुआ है
- प्रश्न: लम्बे समय तक आश्रम में जाकर या सत्संग सुनकर भी भीतर कोई परिवर्तन नहीं होता। इसका कारण यही हो सकता है की हम community और civilization को ignore करते है

चिर सधवा || श्रीमाँ सारदा देवी : स्वामी गम्भीरानन्द लिखित || 17 Mar 2026
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- ठाकुर की महासमाधि के बाद माँ स्वयं को असहाय अनुभव कर रही थीं
- पहले भक्त भगवान का हाथ पकड़ता है; फिर ऐसी घड़ी आती है जब भगवान स्वयं भक्त का हाथ थाम लेते हैं, और तब उसके गिरने का भय नहीं रहता
- माँ शुरू से जानती थी कि वह वास्तव में कौन है
- ठाकुर की महासमाधि के बाद माँ का विरह-शोक
- ठाकुर-वियोग के गहन शोक से माँ को उबारने के लिए उन्हें तीर्थयात्रा पर ले जाने का निर्णय लिया गया
- प्रश्न: विश्वास (conviction) से साधना होती है, पर साधना से ही तो विश्वास भी गहरा होता है। यदि प्रारम्भ में विश्वास न हो, तो साधना शुरू कैसे की जाए?
- प्रश्न: मन में हर समय संदेह बना रहता है, ईश्वर पर भरोसा नहीं होता—ऐसी स्थिति में साधना कैसे की जाए?
- प्रश्न: जिन्हें ठाकुर के अस्तित्व पर तनिक भी संदेह नहीं था, उन्हीं माँ और स्वामी विवेकानन्द को महासमाधि के बाद प्रथम दर्शन क्यों मिले? क्या उन दर्शनों का उद्देश्य केवल उनकी व्यक्तिगत सांत्वना था, या उसके पीछे कोई व्यापक आध्यात्मिक प्रयोजन था?

चिर सधवा || श्रीमाँ सारदा देवी : स्वामी गम्भीरानन्द लिखित || 18 Mar 2026
Video chapters
- ठाकुर की महासमाधि के बाद: विरह-अग्नि शांत करने तीर्थयात्रा पर निकलीं माँ शारदा
- माँ की तीर्थ यात्रा: देवघर
- माँ की तीर्थ यात्रा: काशी
- काशी धाम में माँ शारदा को मिला ठाकुर का साक्षात् दर्शन
- काशी में माँ शारदा ने भास्करानन्दजी से भेंट की
- माँ की तीर्थ यात्रा: अयोध्या
- वृन्दावन जाते समय रेलगाड़ी में माँ को हुआ ठाकुर का दर्शन
- माँ की तीर्थ यात्रा: वृन्दावन
- नीलांबर गार्डन, बेलूर मठ, जहां माँ ने निवास किया था
- प्रश्न: ठाकुर 'अविद्या स्त्री' के बारे में कहते तो है, किन्तु 'अविद्या स्त्री' से अधिक 'अविद्या पुरुष' ही दिखाई देते हैं!
- प्रश्न: हमारा ध्येय सदैव सोशल सर्विस रहा है, सोशल रिफार्म नहीं
- प्रश्न: वृन्दावन के विरह-रस को गम्भीरानन्दजी ने शब्दों में जैसे सजीव कर दिया है!

चिर सधवा || श्रीमाँ सारदा देवी : स्वामी गम्भीरानन्द लिखित || 19 Mar 2026
Video chapters
- ठाकुर की महासमाधि के बाद: वृन्दावन में विरह-विह्वला श्री माँ
- वृंदावन में विरह में डूबी माँ शारदा से ठाकुर बोले: "तुम इतना रो क्यों रही हो? मैं एक कमरे से दूसरे कमरे में ही तो गया हूँ"
- लीला विलास से आरम्भ होकर इष्ट में तन्मय हो जाने तक—रासभूमि में गोपियों की अद्वैत अनुभूति
- वृंदावन में माँ पर छाया ठाकुर का दिव्य आवेश
- समाधि में माँ सारदा और उन पर ठाकुर का आवेश
- प्रश्न: मैं ऐसे वैष्णवों को जानता हूँ जो दृढ़ द्वैतवादी हैं और अद्वैत को किसी भी रूप में स्वीकार नहीं कर सकते। इससे समझ में आता है कि विभिन्न धार्मिक मतों के बीच कितनी गहरी दूरी है। ठाकुर का समन्वय वास्तव में कितना क्रांतिकारी है, इसका हमें सहज अनुमान नहीं होता।
- प्रश्न: द्वैत हो या अद्वैत—कोई एक मार्ग दृढ़ता से पकड़ लीजिए, जीवन धन्य हो जाएगा। सही है न?
- प्रश्न: ठाकुर की शिक्षा के अनुसार साकार-निराकार, कर्म-ज्ञान-भक्ति आदि को एक ही साधना-पद्धति में समन्वित किया जाना चाहिए। मुझे लगता है कि यह कार्य अभी तक पूरी तरह नहीं हुआ है। -- उत्तर: महापुरुष महाराज ने यह समन्वय किया है
- स्वामीजी के जीवन के टर्निंग पॉइंट : "साधक स्वामीजी" कैसे "civilization स्वामीजी" में परिवर्तित होते है.
- प्रश्न: जब स्वामीजी वराहनगर मठ में थे तब से उनके मन में था की यह परिचित जगह छोड़कर विश्वभ्रमण करना है. सही है न?

चिर सधवा || श्रीमाँ सारदा देवी : स्वामी गम्भीरानन्द लिखित || 20 Mar 2026
Video chapters
- वृन्दावन में विरह-विह्वला श्री माँ
- विरहविदग्धा सरला बालिका श्री माँ
- शवदेह को देखकर विरहविदग्धा श्री माँ के मन में प्रगटि वैराग्य की ज्वाला
- लाटू महाराज की श्री रामकृष्ण पे भक्ति
- वृन्दावन में वियोग-वेदना से मुक्त हो श्री माँ का मन हुआ आनंद से भरपूर
- श्री रामकृष्ण की भक्त निस्तारिणी देवी की शुद्ध पवित्रता

चिर सधवा || श्रीमाँ सारदा देवी : स्वामी गम्भीरानन्द लिखित || 6 Apr 2026
Video chapters
- पुनरावृत्ति
- माँ वृन्दावन परिक्रमा करती है
- तीर्थ माहात्म्य
- एक भक्त: जब हम राम या कृष्ण के मंदिर जाते हैं, तो क्या हमें उनमें ठाकुर को देखना चाहिए?
- एक भक्त: मेरा प्रश्न आध्यात्मिक दृष्टि से था, नहीं की दार्शनिक दृष्टि से
- एक भक्त: माँ जैसे अंबिकानंदजी के बारे में कहती है, जो तीनो लोको के स्वामी है उसे एक बालक कैसे धारण कर सकता है, तो हम भी तो इस से साधियारा ले सकते है की ईश्वर की सेवा आसान नहीं.
- एक भक्त: ठाकुर ने माँ काली को दो भागों में काटकर निर्विकल्प समाधि में प्रवेश किया। तो उनकी वास्तविक निष्ठा द्वैत में थी या अद्वैत में?
- एक भक्त: माँ अभी दीक्षा देना प्रारम्भ करेगी

चिर सधवा || श्रीमाँ सारदा देवी : स्वामी गम्भीरानन्द लिखित || 7 Apr 2026
Video chapters
- वराहनगर मठ में स्वामी विवेकानन्द का सिंह-विक्रम से उद्दाम नृत्य-संकीर्तन
- माँ सारदा की दिव्य लीला: श्रीरामकृष्ण के प्रति मातृभाव और शिष्यों के साथ बालिका-भाव
- श्री रामकृष्ण के सन्यासी शिष्यों का विनोदमय प्रसंग: अफ़ीम की गोली की कहानी
- गुरुभाव का प्रारम्भ: माँ सारदा योगानन्दजी को प्रथम दीक्षा देती है
- एक भक्त: उस समय लगता है की दीक्षा की पद्धति इतनी फॉर्मल नहीं हुआ करती थी
- एक भक्त: ऐसा प्रतीत होता है कि स्वामी विवेकानंद ने बहुत कम लोगों को दीक्षा दी थी।
- आलासिंगा पेरुमल के बारे में
- एक भक्त: आलासिंगा पेरुमल ने बहोत स्वामीजी का काम किया। बहोत कम लोग उनकी महानता को समझ पाए है

चिर सधवा || श्रीमाँ सारदा देवी : स्वामी गम्भीरानन्द लिखित || 8 Apr 2026
Video chapters
- माँ सारदा का सरला बालिका भाव : रोटी बेलते बेलते नाराज हो जाती है
- विश्वास और विज्ञान : क्या अपनाएं : कुछ कहानियां
- एक भक्त: हमने भी नर्मदा परिक्रमा की थी. हमें बहोत ही अच्छा अनुभव हुआ
- एक भक्त: हमारे व्यक्तिगत जीवन में हमें कई बार ईश्वर की कृपा का प्रत्यक्ष अनुभव होता है। जैसे कोई गंभीर बीमारी ठीक हो जाए तो हमें लगता है कि यह ईश्वर की कृपा से हुआ। लेकिन यदि पूरे देश की औसत आयु, शिशु मृत्यु दर या जनस्वास्थ्य जैसे आँकड़ों को बेहतर बनाना हो, तो उसके लिए प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र, टीकाकरण, मिड-डे मील जैसी वैज्ञानिक और प्रभावी सार्वजनिक नीतियाँ आवश्यक होती हैं। तो क्या एक भक्त की व्यक्तिगत आस्था और राष्ट्र-स्तर पर वैज्ञानिक नीतियों के बीच कोई विरोधाभास है?
- एक भक्त: एक ओर स्वामी विवेकानन्द ने स्वामी कल्याणानन्द जी को कनखल में अस्पताल चलाने का आदेश दिया, और दूसरी ओर यहाँ वे स्वयं एक बीमार साधु को चरणामृत पिला रहे हैं। यह कितना अद्भुत दिव्य विरोधाभास है!
- स्वामी अखंडानंदजी के भ्रमण के बारे में
- एक भक्त: ठाकुर का जीवन कितना audio visual वाला है. उन्हें सब दिखता है. जैसे पाप पुरुष का वध. बाकि साधको के बारे में तो ऐसा नहीं है. philosophical सब चलता है उनके जीवन में पर साधना के प्रत्येक सोपान पे ऐसा साक्षात् दर्शन नहीं होता।
- एक भक्त: वेदांत में साधना के रूप में श्रवण मनन निदिध्यासन कहा गया है परन्तु ठाकुर तो सब act out करते थे, कार्य में परिणत करते थे. तो हमें क्या करना चाहिए? क्या ठाकुर की तरह अहंकार नाश करने के लिए अपने बालो से किसी का टॉयलेट क्लीन करे या सिर्फ मन में ही मन में ठाकुर का लीला चिंतन करके अहंकार का नाश करे?
- एक भक्त: ठाकुर की प्रैक्टिकल सेंस बड़ी तगड़ी थी
- एक भक्त: इतिहास में कभी और किसी अवतार या संत के जीवन में ठाकुर के जितना प्रचंड मुमुक्षुत्व, साधन प्रवाह, या सिद्धि के बारे में नहीं सुना जाता।
- एक भक्त: जैसे शंकराचार्य के जीवन में आता है वो पानी में गिरकर मगरमच्छ की कहानी। वो जैसे की बचपन से ही दिव्यता से भरपूर थे.
- रामकृष्ण संध के बारे में
- एक भक्त: जैसे की एलोन मस्क ने इतनी सारी कम्पनिया अलग अलग स्टार्ट की किन्तु अभी सभी को इकट्ठी कर रहा है. वैसे ही लगता है ठाकुर माँ स्वामीजी अलग अलग दिशाओ में जा रहे है परन्तु आखिर में हमें समझ में आएगा की एक ही मास्टर प्लान था इन लोगो का.

चिर सधवा || श्रीमाँ सारदा देवी : स्वामी गम्भीरानन्द लिखित || 9 Apr 2026
Video chapters
- अद्भुत कहानी: आध्यात्मिक सुर-तरंगों का चमत्कार: चरित्र कैसे होता है पवित्र
- माँ सारदा की हरिद्वार तीर्थयात्रा
- माँ सारदा की जयपुर तीर्थयात्रा
- माँ सारदा की पुष्कर तीर्थ यात्रा
- माँ सारदा की प्रयागराज तीर्थयात्रा
- ठाकुर की महासमाधि के बाद तीर्थयात्रा कर माँ कोलकाता वापस लौटती है
- कामारपुकुर में माँ सारदा के तपस्या के दिनों का प्रारम्भ
13 Swami Ka Paitrik Nivas (स्वामी का पैतृक निवास)
5 classes

स्वामी का पैतृक निवास || श्रीमाँ सारदा देवी : स्वामी गम्भीरानन्द लिखित || 10 Apr 2026
Video chapters
- भक्तवत्सल श्रीरामकृष्ण और निर्धन स्त्री की प्रेरक कथा
- community life (गृहस्थाश्रम) में तपस्या का आदर्श : माँ सारदा
- दो प्रकार के साधक—दूसरों को दोष देने वाले और स्वयं को सुधारने वाले
- जहाँ शत्रुता है, वहाँ शांति नहीं। पहले करें मित्रता, फिर करें ध्यान।
- कामारपुकुर की यात्रा से पहले—माँ सारदा का दक्षिणेश्वर दर्शन
- कामारपुकुर में माँ सारदा का वनवास प्रारंभ
- 1 krosh being about 3.2 kilometers, 8 krosh is approximately 25.6 kilometers (or about 16 miles)
- एक भक्त : आपने कहा कि ध्यान करने से पहले अपने शत्रुओं को अपना पुण्य अर्पित कर दें। किंतु फिर अपने पास क्या रह जाएगा?
- एक भक्त : हम वेदांत में पढ़ते तो हैं कि जगत माया है। किंतु आपने एक नई अंतर्दृष्टि insight दी कि परिवार में रहने से हमें पता चलता है कि हमारी अपनी कमियाँ कहाँ हैं और हमें स्वयं में कहाँ सुधार करना है।
- एक भक्त : हम वेदांत में पढ़ते तो हैं कि जगत माया है। इसलिए संसार त्याग करना आवश्यक है
- एक भक्त : लगता है की माँ अपने परिवार में ये पगली मामी, काली मामा, या राधू वगैरह को सुधारने का प्रयास नहीं करती। बस अपने से तपस्या किये जा रही थी.
- एक भक्त : माँ ने ठाकुर के साथ दक्षिणेश्वर में रह कर साधना, तपस्या, और आदर्श का सर्वोच्च अनुभव प्राप्त किया था. बाद में फिर मूढ़ तामसिक परिवारजनों के साथ रहना कितना कष्टकर रहा होगा।
- एक भक्त : स्वामीजी किस हिसाब से माँ सीता को भारतीय स्त्रियों का आदर्श बता रहे है?

स्वामी का पैतृक निवास || श्रीमाँ सारदा देवी : स्वामी गम्भीरानन्द लिखित || 27 Apr 2026
Video chapters
- श्रीरामकृष्ण की महासमाधि के बाद संन्यासीगण और माँ सारदा के जीवन का एक विहंगावलोकन
- कामारपुकुर में माँ सारदा के तपस्यामय जीवन का प्रारम्भ
- कर्म ही बनाते हैं हमारा स्वरूप—सत्कर्म से दिव्यत्व, दुष्कर्म से पशुत्व
- हमारा मन दुष्टता और भोग के लिए हमेशा कोई-न-कोई बहाना खोजता रहता है
- कहानियाँ: अच्छे भक्त भी अनजाने में माँ सारदा को कष्ट दे बैठते थे
- एक भक्त: माँ इतना सहन करती थी. हम तो संसार में रहते है. हम लोगो को कितना सुधारे, कितना सहन करे? लोगो को डांटेंगे नहीं तो लोग सीखेंगे कैसे?
- एक भक्त: दूसरों को सुधारें या स्वयं सहते रहें—यह समझना कठिन हो जाता है कि कब क्या करना उचित है। ऐसा कौन-सा विवेक है, जो हमें सही निर्णय लेने में सहायता कर सकता है?
- एक भक्त: तो क्या कोई Golden Rule नहीं है कि कब सहें और कब लोगों को डाँटें?
- एक भक्त: चुपचाप सहते रहने और अपने अधिकार के लिए खड़े होने के बीच ideal balance क्या है?
- एक भक्त: ठाकुर कहते हैं—जिसने अपना सारा भार जगन्माता को सौंप दिया है, उसके पाँव गलती से भी गलत जगह नहीं पड़ते। हमें इससे क्या सीखना चाहिए?

स्वामी का पैतृक निवास || श्रीमाँ सारदा देवी : स्वामी गम्भीरानन्द लिखित || 28 Apr 2026
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- श्री रामकृष्ण की महासमाधि के बाद रिश्तेदारों की उपेक्षा के बीच माँ सारदा की कामारपुकुर में तपस्या
- माँ सारदा का कामारपुकुर - जयरामबाटी वास: ग्राम्य भारत में धर्म, त्याग और सेवा का पुनर्जागरण
- कामारपुकुर में माँ सारदा ने अपने हाथों मिट्टी खोदी और सब्ज़ियाँ उगाकर जीवन चलाया
- “पराए घर में मत रहना” — श्रीरामकृष्ण की इस आज्ञा को माँ सारदा ने जीवनभर निभाया
- एक भक्त: यदि लक्ष्मीदीदी कामारपुकुर में माँ सारदा के साथ रहतीं, तो वे कितनी ऊँची आध्यात्मिक अवस्था प्राप्त कर सकती थीं! उनकी इस missed opportunity से हम क्या सीखें?
- एक भक्त: नित्यगोपाल, रामलाल दादा और हृदय की कहानियाँ सुनकर हमें अब दर्शन का कोई charm नहीं रहा!
- एक भक्त: सच्चा भक्त त्याग ही मागेगा। दर्शन होते रहेंगे अपने से
- एक भक्त: रामलाल दादा का स्वामी ब्रह्मानन्द के साथ बहोत अच्छा सम्बन्ध थे. तो ऐसा क्यों?

स्वामी का पैतृक निवास || श्रीमाँ सारदा देवी : स्वामी गम्भीरानन्द लिखित || 29 Apr 2026
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- कामारपुकुर: श्रीरामकृष्ण के जन्मस्थान का विवरण 1
- कामारपुकुर: गांव का विवरण 1
- कामारपुकुर: गांव का विवरण 2
- कामारपुकुर: श्रीरामकृष्ण के जन्मस्थान का विवरण 2

स्वामी का पैतृक निवास || श्रीमाँ सारदा देवी : स्वामी गम्भीरानन्द लिखित || 1 May 2026
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- श्रीरामकृष्ण की महासमाधि के बाद: कामारपुकुर में स्वार्थी और हृदयहीन लोगों के बीच माँ सारदा का निवास
- माँ सारदा का दिव्य दर्शन: श्रीरामकृष्ण के चरणों से बहती गंगा
- रसोई में आनंद से भोजन बनाते स्वामी विवेकानन्द
- chivalry (शि-वल-री) - शौर्यपूर्ण शिष्टता, वीर-शिष्टाचार, नारी के प्रति सम्मानपूर्ण व्यवहार, या सज्जनतापूर्ण वीरता