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Ma Sarada Life by Sw Gambhirananda ·

अवतरणिका : श्रीमाँ सारदा देवी : स्वामी गम्भीरानन्द लिखित : 22 Aug 2023

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ओम स्थापा का यॉट धर्म सर्व धर्म स्वरूप रामकृष्ण मां शारदा देवी जीवन चरित्र स्वामी गंभीरानंद जी लिखित कल हमने देखा की किस तरह से महाराज जी हमको समझते हैं की बाहर के जगत में जो युद्ध हो रहा था पुराण युग में उससे भी आज के युग में जो युद्ध है या तो फिर यह देवासुर संग्राम है वो हमारे हृदय के भीतर में चल रहा है किस तरह से सदगुण राशि है या तो फिर देवी संपत है उसके सामने आसुरी संपद या तो फिर आसुरी ये गन राशि है दुर्गुण राशि है उन्होंने किस तरह से देवी गुना के ऊपर में युद्ध की घोषणा की है और यह भीतर में चलने वाला जो युद्ध है वह और भी डेंजरस इसलिए है की बाहर शत्रु होता है उसको तो हम इजीली समझ पाते हैं की हां चलो यह रक्षा है 10 सर है इसके या तो फिर यह जो बहुत बड़ा उसका साइज है उसके हाथ में वो बहुत सारे विभिन्न तरह के अस्त्र शास्त्र है वो तो हम लोग देख करके समझ पाते हैं किंतु यह एक रक्षा जो की हमारे मां में बैठा हुआ है हमारे भाई हमारे मित्र या तो फिर हमारे साथ में कम करने वाले लोगों के प्रति हमारे मां में जहर उत्पन्न कर रहा है उनके प्रति एक द्वेष भाव की रचना कर रहा है या तो फिर मेरा जीवन किसी कम का नहीं है मैं निकम्मा हूं इस तरह से एक भयानक डिप्रेशन खड़ा कर रहा है देखिए ये जो भीतर के जो दुर्गुण होते हैं या तो फिर हमारे आसुरी संपत होती है दो तरह की होती है या तो फिर वो दूसरों के प्रति एक कटु भाव एक व्यावभाव प्रकट करेंगे वह खड़ा करेंगे या तो फिर हमारे ही प्रति मां लीजिए की हमने ठीक कर लिया की मुझे दूसरों को इस तरह से हनी नहीं पहुंच नहीं मैं दूसरों को किसी भी तरह से उनकी निंदा नहीं करूंगा उनके प्रति में इरशान्वित नहीं होगा यह सब हम लोग पढ़ने हैं एन सब जगह पर तो जो लोग थोड़े से भी धार्मिक होते हैं उनको पता है की किस तरह से मुझे सदगुण जिसको मैत्री करुणा मोदित अपेक्षा अहिंसा एस्ट अपरिग्रह ब्रह्मचर्य ईश्वर पनिधान ये सब सदगुण मुझे विकसित करना है ऐसा बहुत सारे लोगों को पता है तो वे लोग सोचेंगे की ठीक है चलो मुझे दूसरों के पति प्रति किसी भी तरह का व्यावभाव नहीं रखना किंतु जब वो ऐसा सोने का पर्यटन करते हैं तब इससे भी एक और भी ज्यादा डेंजरस जो की महाराज जी जी समय लिख रहे थे उसे समय यह जो पर्टिकुलर दुर्गुण का हो ना की ये पर्टिकुलर आसुरी वृत्ति इतनी तेज नहीं थी जो आज हो गई है की हमारे ही प्रतिबेश हमारे ही प्रति हिंसा हम लोग यह जो वैसे तो स्वामी जी ने कहा है की आत्मा श्रद्धा नहीं है हम लोगों में बोलकर के ही तो हजार साल की गुलामी से हमको दूर जाना पड़ा तो यह आत्मा श्रद्धा का नहीं तो फिर आत्मा द्वेष होना यह आत्मा द्वेष ये दूसरों के प्रति द्वेष से भी बहुत ही ज्यादा डेंजरस है क्योंकि जब तक में दूसरों के प्रति द्वेष है तब तक फिर भी मेरे में यदि थोड़ा बहुत आत्मसंमन आत्मा सेल्फ कॉन्फिडेंस वगैरा कुछ होगा तो थोड़ा सा भी कहानी से भी मुझे इस गद्दे में जो मैं पद गया हूं उसमें से बाहर निकालने के लिए मेरे पास में कुछ रास्ता है किंतु यदि मेरा आत्मा सम्मान ही चला गया मेरी आत्मा श्रद्धा ही चली गई मेरा सिर्फ कॉन्फिडेंस ही खत्म हो गया तो फिर जी धीरे-धीरे करके मेरा जो आधार पाटन हो रहा है उसमें से मुझे अपने को बचाने के लिए कोई भी रास्ता नहीं रहेगा क्योंकि सेल्फ कॉन्फिडेंस वही तो ईश्वर के प्रति श्रद्धा भक्ति की न्यू है आत्मा श्रद्धा आई है उसके बाद में ईश्वर के प्रति श्रद्धा आई है और उसके बाद में ये आत्मा साक्षात्कार या तो फिर संयम का जो रास्ता है योग का साधना का रास्ता वो बाद में शुरू होता है सबके मूल में होती है आत्मविश्रद्धा तो ये आसुरी वृत्ति जो सबसे डेंजरस मां की तरह की तो डेंजर तो है ही है दूसरों के प्रति जैसे की ये कल महाराज ने हमको कहा था एक के बाद एक आसुरी कृतियां उन्होंने गिनवायी थी जड़वाड़ प्रियता भोग प्राण प्रायिकता आश्रद्धा आश्रद्धा अर्थात की ईश्वर है ही नहीं अच्छा हम लोग शब्दों से तो स्वीकार करते हैं किंतु भीतर में कनविक्शन नहीं आता तो वह देखिए कन्वैक्शन का एक उदाहरण स्वामी जी का वह उदाहरण तो हमको पता है की वाराणसी में जा रहे थे तो बंदर ए गए उनका पीछा करने के लिए स्वामी जी दौड़ रहे हैं अपने को बचाने के लिए तो एकाएक अभी वह बंदर की तो धीरे-धीरे लेकर के और पास और पास ए रहे हैं तो स्वामीजी सोच रहे हैं की आज प्राण रक्षा होगी की नहीं तब एक साधु महाराज ने क्या कहा की फेस धुव्रोत जोर से उन्होंने कहा की उसका वो ये जो पशु है उसका सामना करो उससे डर करके चले जाओगे तो वो और तुम्हारे पीछे में लगेंगे तो इमीडीएटली समूही जी उनको फेस करके खड़े हो गए और बंदर भी जो है उनको लगा क्या रे इसको चेस्ट करने में उसको पकाने में भी मजा नहीं ए रही है चलो उसको छोड़ देते हैं बोल करके चले गए ये उदाहरण तो हम सबको पता है किंतु सिमिलर एक एक घटना इंग्लैंड में हुई थी जब वो मिस मूलर आईटी स्टडी और स्वामी विवेकानंद तीन लोग बाहर में निकले थे कहानी रास्ते से जा रहे थे तो एक बेल एक इतना विराट का एक बेल उनके पीछे में दौड़ा तो अभी वो बेल के तो बड़े-बड़े सिंह होते हैं वह जल्दी वह सिंह मारेगा तो खत्म हो जाएगा आदमी तो वो बचाने की बफेलो इसको इंग्लिश में कहते हैं तो बफेलो उनके पीछे में दौड़ा तो अभी ये तीनों दौड़ने लगे ये आईटी स्टडी फिर वे मिस मूलर और स्वामी जी कैसे भी करके तो अपने को बचाना है अभी स्टडी तो क्या था यंग था तो फटाफट दौड़ करके बड़ा दूर निकाल गया किंतु यह जो मिस मूलत थी हेनरी आइटम्लर अभी वो तो औरतें को तो क्या है उसे समय के जो कपड़े आपने यदि फोटोग्राफ में देखें होंगे तो इस तरह के कपड़े पहनती थी औरत की वो पहन करके दौड़ना तो बड़ा ही मुश्किल है और चलना भी मुश्किल होता था तो दौड़ना तो दूर की बात तो वो दौड़ रही है तो गिर गई अभी गिर गई तो अभी क्या करेंगे अभी मेल तो ए रहा है सामने वो तो जल्दी उसे सिंह मारेगा तो वह तो खत्म हो जाएगी तो स्वामी जी ने सोचा की मैं तो स्टडी की तरह दौड़ करके अपने को बच्चा लूंगा इससे तो होगा नहीं यह तो एक औरत उसकी तो प्राण रक्षा करनी मेरा तो सर्वप्रथम कर्तव्य है सन्यासी होने के नाइट मैं तो मुझे तो जगत को अब ही देना है मेरी नजर के सामने ने मेरे ही मित्र मेरे ही शिष्य का यह यह अवस्था हो कैसे चलेगा तो स्वामी जी ने ठीक कर लिया की भले बेल के सामने जाकर के वो खुद बफेलो के सामने जाकर के खुद खड़े र जाते हैं फिर जो होगा सो होगा तो वह मिस मूलर गिरी हुई है वहां जमीन के ऊपर में और सामने सामने जी जाकर के खड़े हो गए वो जो उनका फेमस परसों है ऐसा वो दोनों हाथ इस तरह से करके और उन्होंने सोचा धी इस डी और सो दिस इस हो आईटी बिल एंड उन्होंने तो सोचा था की कहानी हिमालय में जाकर के वो मायावती में आश्रम लेने का उसे समय तो खैर मायावती के आश्रम का प्लेन नहीं था किंतु एक ऐसा एक था की हिमालय में जाएंगे वहां पे समाधि में धीरे जाकर के फिर धीरे-धीरे करके वो समाधि इतनी गंद हो जाएगी निर्विकल्प समाधि की उनके प्राण फिर इस में चले जाएंगे वो जो कहते हैं ना निर्विकल्प समाधि में किस दोनों के बाद मृत्यु होती है और स्वामी जी का मृत्यु सही में महासमाधि ऐसे ही हुआ था रात को खाना खाने के बाद में एन की ऐसा कुछ समय था 9:30 का था अपने बिस्तर में वह लेते फिर थोड़ी वह थोड़ा तो ध्यान किया मां का एक भजन किया फिर वो बिस्तर में लेते हैं एक गहरी सांस ली और देखा की बस सब हो गया था फिर उनके सेवक ने आकर देखा तो प्राण व्यू चला गया था ठाकुर के पास में तो इस तरह से उन्होंने सोचा था की कहां वह मां के भजन गेट अब हम अपने वो जो शिष्य है सन्यासी शिष्यों को सीखने सीखने वो फिर ये बेलूर मठ में ठाकुर का यह जो भाव मिशन जो है उसकी शुरुआत करके ध्यान करके वह शरीर त्याग करेंगे ना की कहां इस पागल बेल के सामने खड़े र करके उसके सिंह से आघात हो करके प्राप्त करके उनका शरीर जाएगा त्याग होगा की जैसी अभी ठाकुर की इच्छा का क्या सोचा था क्या हो जाएगा तो ऐसा आपने वह दोनों हाथ इस तरह से वह जी तरह से फोटोग्राफ हम देखते हैं इस तरह से जाकर के खड़े हो गए सो दिस इस हो आईटी बिल एंड तो इस तरह से जीवन का या तो फिर इस मिशन का अंत आएगा तो देखिए की स्वामी जी इस तरह से खड़े हैं और बेल दौड़ा दौड़ा ए रहा है अभी किसको मारेगा क्या करेगा कुछ ठीक नहीं किंतु सुद्दनली जैसा स्वामी जी के सामने आया देखा की स्वामी जी इस तरह से खड़े हैं पता नहीं उसके मां में क्या हुआ स्वामी जी का देवी प्रभाव या तो फिर उनकी आत्मा श्रद्धा ना की फिर ठाकुर का उनके पीछे ठाकुर की शक्ति मां की मां का आशीर्वाद जो भी हो इमीडियाटली थोड़ा सा पीछे है गया थोड़ी डर इधर-उधर देखा और फिर शांति से चला गया तो देखिए ये आत्मा श्रद्धा होने से मनुष्य क्या से क्या नहीं कर पता मृत्यु को भी पढ़ कर दे सकता है मृत्यु भी उसके सामने आकर के सर झुका देती है तो यह शक्ति है आत्मा श्रद्धा की तो जैसे ये आशुराता है जैसे ये मैटेरियलिज्म है जड़ वध प्रियता जैसे की दूसरा जो हमको भोग पर यह सब तो फिर भी आप किसी भी तरह से उसको कैट सकते हैं किंतु ये जो असद जो है वह श्रद्धा भी ईश्वर में चलो ए श्रद्धा हो गए तो भी ठीक है किंतु यदि मुझे अपने आप में अश्वत खड़ी हो जाएगी मेरा आत्मा सलमान चला जाएगा आत्मा कॉन्फिडेंस सिर्फ कॉन्फिडेंस चला जाएगा आत्म श्रद्धा चली जाएगी तो फिर जीने के लिए कुछ बाकी नहीं बचेगा और फिर महाराज जी ने बताया की जी तरह से हमारे भीतर में राज द्वेष यह उत्पन्न होंगे जितने बढ़ते जाएंगे इतना ही दूसरों के प्रति हमारा विदेश भी बढ़ता जाएगा दूसरों का शोषण करके उनकी धन संपत्ति हड़प करने कर लेने की वो वासना भी बढ़नी जाएगी और फिर बाहर के जगत में युद्ध वगैरा वो भी बढ़ते जाएंगे तो भीतर में यदि देवासुर संग्राम में आशूराक शक्ति का विजय होता है तो बाहर के जगत में भी यदि आंतरिक जगत में आश्चरीक्ष शक्ति का विजय होता है बहिर जगत में भी असुरिक शक्ति का विजय होगा अभी आगे महाराज जी कहते हैं आधुनिक ए मानो राज्य संग्राम पौराणिक देव दानवीर जूते अपेक्षाओ घोर्टार आधुनिक यह मानो राज्य मानसिक राज्य का जो संग्राम है हमारे अंतर राज्य का जो संग्राम है वो पौराणिक देव दोनों के युद्ध से भी ज्यादा घुरकर है देखिए कितना बड़ा स्टेटमेंट दे दिया हमको लगता है की ये रावण का वध करना रक्तबीज का वध करना कुंभकरण का वध करना इंद्रजीत कंस ये जितने भी रक्षा थे दुशासन कौरव यह गौरव है यह जितने भी रक्षा थे या तो फिर आसुरी वृत्ति वाले लोग थे इन लोगों और मधु मिल जाता था जब वह मां स्वयं यदि वह युद्ध के क्षेत्र में यदि ए जाति थी तब तो वो संग्राम हमको लगता है की अरे आप रे वह कितना भयानक था आज तो हम लोग बड़ा ही सेफ्टी सिक्योरिटी में रहते हैं आज तो हमारा सबसे बड़ा खतरा का दिया तो अर्थक्वेक है या तो ये फ्ल्यूडिंग है या तो एक क्लाउड बर्स्ट है बस इसी से हमको खतरा है कहां वो आसमान में वो शुभ और निशुंभ और मां जगदंबा फाइट करते हैं वहां से वो बिजली गिरती है तो कहानी किसके सर पे गिरेगी कौन कहां से कहां चला जाएगा ये सब चिंता करने की हमको आज के युग में जरूर नहीं ऐसा हम सोचेंगे की वह युद्ध कितना भयानक डेंजरस होता आज के हमारे अंतर जगत में अंतर जगत में यदि युद्ध होता है अभी मां लीजिए मेरे ही मां में अभी ऐसा कुछ होता है कल रात की ही बात बताऊं हूं मैं 3:00 बजे तक जग था तो मैंने सोचा की चलो बैठ करके जाप करते हैं और रात को एकदम शांत वातावरण है सोनी ही का रहा था तो क्या करेंगे अभी ये मेरी सोनी का प्रॉब्लम हमेशा सही रात को तो बैठा था सोच रहा था की चलो थोड़ा सा स्वामी जी की एक किताब पढ़ने हैं न्यू डिस्कवरी और फिर साथ-साथ में थोड़ा जाप करते हैं तो आंख बैंड करके जब करने को बैठता हूं तो कितने तरह के विचार कहां-कहां से ए जाते हैं बचपन की जो सब घटनाएं जो की पूरे पुरी में मुझे याद भी नहीं है की ऐसा अब कब हम लोग बचपन की घटनाओं को कब याद करेंगे कभी हम लोग तो यह सब तो भूल ही जाएंगे रोज-रोज की यह जो सब हमारी जो घटना हुई जो सब इश्यूज है जो हमारा अटेंशन का जाते हैं उनसे हमको समय मिले तो हम बचपन के बड़े में सोचेंगे या तो फिर कब मैं विद्यार्थी था स्टूडेंट था मेरे मित्रों के साथ में क्या हुआ था मैं क्या बात कर रहा था ओ मैं वहां पे घूमने के लिए गया था छोटा था तब अच्छा फिर मैं जॉइन करने के लिए आया था बेलूर मठ में अब कितने 10 साल पुरानी घटना 20 साल पुरानी घटना 30 साल पुरानी घटना कहां कहां से ये सब आकर के मां में एक साथ में इस तरह से इकट्ठा हो जाते हैं की फिर जब करने का या तो फिर मां को भगवान के ऊपर में ठाकुर के श्री चरणों में लगाने का वो कहां से वो हमको मौका मिलेगा और मां लीजिए की आपने फिर भी जैसे की मैं कभी-कभी करता हूं जोर करके मां को कहना है की नहीं ठाकुर का ही चिंतन करना है इमेजिन करो मेरी दक्षिणेश्वर की सर्वप्रथम मुलाकात या तो फिर मेरी कुछ कुछ सबसे बेस्ट मेमोरीज जो है वह बेलूर मठ में सर्वप्रथम दुर्गा पूजा या तो फिर हम सब की एक बहुत ही अच्छी मेमोरीज होती है तो जब यह बुरी मेमोरीज हमारे मां के ऊपर में वह आक्रमण करने के लिए आते हैं तो वे काउंटर आईटी विथ गुड मेमोरीज अच्छी मेमोरीज के साथ साथ में उसको काउंटर करें अच्छा यह मुझे ऐसी घटना हुई जो की मुझे बिल्कुल पसंद नहीं तो फिर ऐसी घटना भी हुई है जिसको की मुझे जो मुझे बहुत अच्छी लगी है जिसके बड़े में मैं बार-बार कभी-कभी सोचता हूं तो ऐसी घटनाओं को याद करके उसे तरह की घटनाओं को काउंटर करना किंतु देखिए की मनुष्य का मां इतना कंपलेक्सिटी हमारी इतनी है हमारा मां इतना एडवांस से कॉन्शसनेस इतनी सोफिस्टिकेटेड है की दोनों मेमोरीज को एक साथ में चलाएगी जैसे की आप टीवी में एक जैसे सिनेमा में जाकर के एक मूवी देखते हैं तो अभी मां लीजिए की दो स्क्रीन है दो मूवी एक साथ में चल रही है और आपका मन दोनों मूवीज को एक साथ में देख करके एक ट्रेजेडी है एक कॉमेडी है तो एक एक और जैसे की हंस रहा है तो दूसरी और जैसे रो रहा है तो यह दोनों चीज मां एक साथ में कर सकता है मैंने हमारी यह सोफिस्टिकेशन ऑफ अवर कॉन्शसनेस जितना है की दोनों मेमोरी इसको एक साथ में रन करेगा एक में से हमको आनंद आएगा दूसरे में से हमको बड़ा गुस्सा भी आएगा अरे ऐसा हो गया मेरे साथ में उसने ऐसा कहा मैं उसका बदला लूंगा मैं उसको ये कर दूंगा मैं वो कर दूंगा मैन देखिए की दोनों पहले तो क्या है की बहुत ज्यादा नेगेटिव मेमोरीज नेगेटिव इमोशंस हमारे पे हेवी हो जान से हम बहुत जोर भी करते हैं अच्छी इमोशंस अच्छी मेमोरीज कंसंट्रेशन ऑफ मन अपूर्व की बटन का चिंतन ये करने का तो दोनों पैरेलल चलना शुरू हो जाएंगे अभी वो नेगेटिव मेमोरीज नेगेटिव इमोशन एक ही भर में संपूर्ण रूप से चली जाए ऐसा करना मैन यदि ऐसा क्षण भर के लिए भी होता है तो मनुष्य सीधा समाधि में चला जाएगा सही सही एसएडवृत्तियों में इतनी ताकत है की दूरवृत्तियों को थोड़ा सा भी हम दूर करें एसएडवृत्तियों को पूरा मां के ऊपर में हेवी हो जान दे तो सीधे हम समाधि में चले जाएंगे किंतु यह करना कितना कठिन है यह मुझे दिन प्रतिदिन यह महसूस हो रहा है अनुभव हो रहा है तो अभी हमको लगेगा की अरे किंतु जो कुछ भी हुआ कल रात को मां लीजिए मेरे मां के भीतर में यह गुड मेमोरीज और बेड मेमोरीज इन दोनों का जो संग्राम चला अभी आज मुझे देख कर के आपको ऐसा नहीं लगेगा की इतना कोई बड़ा महायुद्ध हो गया है वरना आज जैसे की हम लोग टीवी पर देखते हैं यह यूक्रेन में वह चल रहा है तो उसके वह वीडियो वगैरा वो कहां से पूरे मकान के मकान थे गए हैं आदमी लोग मर्द अभी तो डेड बॉडी नहीं दिखाई वैसे जनरली किंतु हम लोग अनुमान करके सोच सकते हैं की यदि इतने बड़े-बड़े मकान गिर गए होते तो कितने लोग मा गए होंगे तो यह पूरा वह जो एक विध्वंस एक सुनहार का दृश्य जो हमको करके युद्ध में दिखता है तो भीतर के युद्ध में तो कुछ भी नहीं दिखता वह भीतर में ही भीतर में वो दो मेमोरी इसका फाइट हुआ दोनों रिमेंशंस का फाइट हुआ एक जीता एक हर या तो फिर दोनों पैरेलल चले जो भी है दूसरे दिन में वैसे ही आकर के कम में ग गया बस बात हो गया खत्म तो हमको लगता है की किस तरह से और ये तो फिर यूक्रेन में वोट तो सिर्फ आप क्या मशीन घर और टैंक से लाड रहा है वो जो देवासुर संग्राम तो पता नहीं किस-किस तरह के वो देवी शास्त्रों से लाडा जाता होगा वहां पर जब सहर होता होगा तो आदि पृथ्वी खत्म हो गई ये हो गया वो हो गया कहानी पे दवा ना ग या कहानी पे वो ज्वालामुखी फैट गया कहानी पे क्लाउड बर्स्ट मैन ये कुदरत दुर्घटनाओं से भी कितना वो भयानक वो विनाश होता होगा कल्पना करके देख सकते हैं किंतु हमारी क्या कहेंगे की जनरल एक इंप्रेशन है तो फिर महाराज जी यहां पर ऐसा क्यों कहते हैं की भीतर के आंतरिक राज्य का जो संग्राम है वो बाहर के देवासुर संग्राम से कहानी ज्यादा डेंजरस है ऐसा महाराज जी यहां पर क्यों कहते हैं संशय होना वगैरा तो अपने संघ में हमने देखते हैं की ठाकुर मां स्वामी जी के ऊपर में कितने लोगों का संशय था स्वामी जी खुद ठाकुर पे बार-बार उसे संदेह करते थे आखिर में ठाकुर की महासमाधि से कुछ दोनों पहले ही स्वामी जी ने सोचा की अभी जड़ी आप कहे की आप अवतार है तो मैं विश्वास करूं कहां गले में से खून वो निकाल रहा है खाना का नहीं सकते हैं पूरे अस्थि पिंजर जैसा शरीर हो गया कैंसर की वजह से उसे अवस्था में गले में से आवाज भी निकालना मुश्किल है उसे समय ठाकुर धीरे से बोले जय राम जय कृष्णा श्री राम कृष्णा किंतु तोर बिना तेरे दिखे दिए नहीं अर्थात जो राम थे जो कृष्णा थे वही इस युग में राम कृष्णा है किंतु तुम्हारी वेदांत की दृष्टि से नहीं वेदांत कहता है की हम सबके भीतर में वही एक अथवा ब्राह्मण है तो ठाकुर के भीतर में भी वही ब्राह्मण है वो इस किताब के भीतर में वही ब्राह्मण है इस कंप्यूटर के भीतर में भी वही ब्राह्मण है चींटी के भीतर में भी वही ब्राह्मण है तो मेरे में भी वही है तो उसे दृष्टि से नहीं जो आदि पुरुष जो पुरनपुरुष भगवान राम बनकर के आए थे जो भगवान कृष्णा बनकर के आए थे वही आज इस युग में भगवान राम कृष्णा बनकर के आए हैं इस समय जब ठाकुर ने ऐसा कहा तब कहानी जाकर के अभी स्वामी जी का संदेह 100% कब दूर हो आए ऐसा तो ऐसी तो कितनी ही घटना हुई है ठाकुर की महासमाधि के बाद में काशीपुर गार्डन में ये लोग नरेंद्र वगैरा दो-तीन लोग खड़े खड़े वो बाहर का ये जो ये है ग्राउंड है ओपन ग्राउंड वहां पर खड़े खड़े बात कर रहे थे तो अभी ऑलरेडी यह समाचार ए चुका था ठाकुर रो रही थी अपने वो खाने वगैरा निकाल रही थी इस समय ठाकुर ने आकर के मां का हाथ पकड़ के कहा था की अमी गीची को था इसे रूम अर्थात की में कहां गया हूं इस कमरे में से उसे कमरे में तो ऑलरेडी ठाकुर आकर के मां को दर्शन दे चुके हैं यह बात भक्तों में फेल गई थी तो लोगों को संध्या राठी था की ठाकुर पूरे पूरे चले नहीं गए किंतु फिर भी जब तक अपनी नजरों से ये दर्शन नहीं होते तब कैसे विश्वास होगा तो यह नरेंद्र वगैरा वो बात कर रहे थे तो एकाएक देखा की गेट की और से ना की कहानी से कोई एक व्यक्ति ए रहा है उनकी और तू नरेंद्र को संदेह हुआ अरे ये तो पूरा ठाकुर के जैसी ही जान लेने कौन है उनके जैसा ही आकृति है उनके जैसी ही चल सब ढंग वगैरा उन्हें के जैसे हैं तो नरेंद्र जा करके पूछा अरे कौन है ऐसा बोलने को गया तब तक आकृति वो अदृश्य हो गई थी तब कहानी जाकर के उनको लगा की नहीं ठाकुर स्वयं महासम्मती के बाद में उनको दर्शन देने के लिए आए थे तो ऐसी घटनाएं बार-बार होने से तो संदेह हो जाएगा तो यह देवास और संग्राम भीतर में होने से संदेह आना संदेह का जाना यह तो चलो तो सामान्य चीज हमको लगता है यदि कोई असुर ए जाता और आधे कलकत्ता को ढूंढ कर देता तो वो कितना भयानक होता उसकी वजह ये संदेह यह संदेश के प्रति अपनी प्रोफाइल ज्यादा भयानक है डेंजरस है ऐसा महाराज जी हमको यहां पर कहते हैं तो क्यों कहते हैं अतीत संघर्ष साधारण ओला जगतराम कारी तो ना अतीत का जो संग्राम है वह साधारण रूप से यह फूल जगत है उसकी सीमाओं को पर नहीं करता था फूल जगत की सीमाओं में ही राहत था किंतु आधुनिक ढूंढो अंतर देखिए कितना सुंदर वो पॉलिटिक्स स्टेटमेंट है की आधुनिक ढांढ अंतर जगत में अद्भुत होता है वो प्रगति होता है और दैनन् दिन जीवन में प्रसारित होकर के मनुष्य के मानव के मनुष्य के ऊपर में उतारा घाट मैन संघ आघात करके करने के लिए उद्यान हुआ है रेडी हुआ है जो भीतर में भीतर में जो संग्राम है वह हमारा जो मनुष्यता है उसके मूल पर आघात करता है यह जो मां मुझे मनुष्य बना यह जो पोयम है ठाकुर की स्वामी जी की वह मनुष्यता की अभी मनुष्यता का अर्थ देखिए आज के जगत में जी तरह से हम लोग यह मूवीज वगैरा देखते हैं पॉपुलर कलर है उसमें मर्दानगी की एक दूसरी ही डेफिनेशन एक हो जाति है मर्द हम किसको कहते हैं या तो फिर एक स्ट्रांग व्यक्ति है जिसके भीतर में बहुत ही वो क्या कहेंगे उसको की वो बहुत ही उसमें शक्ति है वो किस तरह का आदमी है की वो उसमें घमंड बहुत है बहुत उसमें घमंड है और भोग की त्रुटि करने के लिए उसमें बहुत बड़ी शक्ति है बहुत ज्यादा शक्ति है बहुत ज्यादा भोग करने की की वो दूसरों के दूसरों के जल्दी उसके साथ में आप कम करेंगे तो सतत ऐसा लगेगा की वो आपके ऊपर में आपका जो सेल्फ कॉन्फिडेंस है उसके ऊपर में आघात कर रहा है बार-बार आपको निशा दिखाने का पर्यटन कर रहा है बार-बार आपकी यह जो सक्सेस होगी उसको वह उससे इरशान्वित होकर के आपका आपका अहित करने का पर्यटन कर रहा है यह सब आज के जगत में मर्दा की एक डेफिनेशन हो गई है की जो मर्द व्यक्ति है वो उसके पास में दूसरों से दूसरों का हिट उसको कर नहीं पाएगा या तो फिर दूसरों का अच्छा हो रहा है देख कर के उसमें बड़ा उसको बड़ा ही गुस्सा ए जाएगा और खुद के भोग के लिए वो चीज वस्तुएं इकट्ठा करता रहेगा ये आजकल के इस तरह के डेफिनेशन है किंतु यहां पे मनुष्यता का अर्थ है सेल्फ कॉन्फिडेंस वो जो मनुष्यता जो की मेरा सही नेचर तो यह शरीर नहीं है मेरा सही नेचर है ब्राह्मण या तो अमन ये जितने भी मनुष्य है जितने भी पशु पक्षी है आप ब्रह्मस्तंभ पर्यंत ऐसा जो कहा गया है ब्रह्मा से लेकर के एक कीटाणु भी है एक घास का तिनका भी है वहां तक जो भी कुछ ब्रह्मांड में है सबके भीतर में मेरा सही स्वरूप है और यदि मुझे अपने उसे प्रों करना है मुझे मनुष्यता सही-सही मनुष्य अपने मुझे सही-सही मर्दन की चाहिए तो मैं सिर्फ मेरा यह शरीर की पुष्टि करने के लिए पर्यटन नहीं करूंगा किंतु सामग्र ब्रह्मांड के कल्याण के लिए पर्यटन करूंगा अर्थात की मेरा आईडेंटिफिकेशन सिर्फ शरीर के साथ में नहीं पूरे ब्रह्मांड के साथ में है यह मर्दानगी का सही डेफिनेशन होना चाहिए वरना तो फिर मैं मर्द हूं अर्थात की मैं मेरे बीबी बच्चों की संभल रखना हूं मेरा बच्चा जब स्कूल में जाकर के किसी दूसरों के लड़के के साथ में झगड़ा करके आता है तुम्हें दूसरों के घर जाकर के उसके साथ में झगड़ पड़ता हूं मेरी बीबी ए करके मुझे कंप्लेंट करती है की अरे उसने मुझे ऐसा कुछ कहा तुम्हें जा करके उससे झगड़ पड़ता हूं मैं मेरा शरीर मेरा फैमिली और मेरा जो बिजनेस वगैरा होगा उसकी संभल करना उसको किसी भी तरह से आगे लेकर के जाना यह रिड्रेस कहते हैं ना कंपटीशन कंपटीशन में सब समय जिटेट रहना कंपटीशन में दूसरों का सब समय दूसरों को पाठक करके दूसरों को हनी करके कैसे भी तरह से मैं जीत जाऊं वो एक एक भीतर में से एक लालच होना लाल सा होना वो मर्दन की एक हो गई और यदि यही मर्दानकी हम यही मनुष्यता या तो फिर यही कहेंगे की कॉन्फिडेंस या स्ट्रैंथ हम पूरे समाज के कल्याण के लिए लगाएंगे तो मा सोच लीजिए की पूरे जगत का कितना भला होगा की हम मैं जब छोटा था तो मूवी वगैरा देखा था तो देखा था की अमिताभ बच्चन किस तरह से वो फाइट करता है कितना उसमें गुस्सा है तो मैं सोचता था की अरे ऐसा कोई मित्र मिल जाए तो बड़ा अच्छा है स्कूल में जाकर के हमारे जितने भी वो मित्र वगैरा है या जितने भी लड़के हैं उसमें से कभी झगड़ा हो जाएगा तो अमिताभ बच्चन को बुला लेंगे वो उनके साइज फाइट करेगा और फिर बस हम लोग बड़े मजे से रहेंगे कोई मेरी मजाक नहीं उदा पे कोई मुझे कुछ का नहीं पाएगा ऐसा यदि स्ट्रांग मित्र रहने से ऐसा ही कल्पना होती है ना हम सब की एक फेंटेसी होती है किंतु मां लीजिए की अमित बच्चन जो अपने मित्रों के लिए सिर्फ फाइट करता है या तो फिर अपने फैमिली के लिए फाइट करता है या तो फिर उसके जो आ परिवारजन है उनके लिए फाइट करता है उसकी बजे सामग्र जगत संसार के लिए फाइट करता हम सबके हिट के लिए कम करता तो वो हम सबको कितना बेनिफिट होता उसका भी आध्यात्मिक डेवलपमेंट कितना हो जाता वो अपने को सिर्फ अपना शरीर अपने मित्र या तो अपना फैमिली या तो फिर वो इस के और अपनी आईडेंटिफिकेशन को लिमिट करके रखना है यदि पूरे जगत संसार मूवी में असली बच्चे अमिताभ बच्चन की बात नहीं कर रहा मूवी में जो दिखता है हमको तो वो जल्दी ऐसा ऐसा होगा होता की वो पूरे जगत संसार के साथ में अपने को आईडेंटिफाई करें तो संसार का इतना भला होता जैसे हमारे ऋषि मनी थे तपस्या करते थे तो तपस्या का जो फल है वह पूरे समाज को दे जी धरती पे उन्होंने तपस्या की उसे धरती में उनके तपस्या का फल सिंचित होता था और उसे धरती में जो लोग जन्म लेते थे उनका मां शरीर पवित्र हो जाता था स्वामी जी ने अमेरिका से आकर के भारत की मिट्टी में वो अपने को क्यों भारत की मिट्टी से अपने को पूरा नहला दिया क्योंकि वो कहते हैं की मुझे पता था की आज तक की मेरी मातृभूमि है किंतु अब मुझे पता चला सिर्फ ये मंत्र भूमि नहीं ये पूनिया भूमि है पूरे जगत में यदि कहानी पे भी थोड़ा बहुत धर्म तपस्या फिर यह श्रद्धा भक्ति यदि पूरे जगत में कहानी पर है तो वह भारत में ही है तो भारत में इस तरह से धर्म या तो फिर पूनिया या तो फिर आशीर्वाद या तो फिर साधन यह साधन साधना सिद्धि की यह सब कहां से प्रकट हुए हमारे ऋषि मुनियों ने अपनी तपस्या का फल इस भूमि में संचित किया था बोल करके ही तो इस भूमि के जो वायरसदर है इस धरती के जो वायरस डर है हम उनको वो प्राप्त हुआ है उन्होंने सिर्फ अपने सेल्फिश इंटरेस्ट के लिए यदि ये किया होता की यह जो पुत्रेष्टि यज्ञ है वो फिर ये अश्वमेडिगना है राजस्वीय यज्ञ है की मैं मुझे राज्य प्राप्त करना है तो मैं राजस्व यज्ञ करूंगा मुझे विजय प्राप्त करनी है सम्राट होना है तो शो में दिए आन प्राप्त अश्वमेडी यज्ञ करूंगा मुझे यह चाहिए तुम्हें ये अपना करूंगा मुझे वो चाहिए तो मैं वो करूंगा तुम मुझे चाहिए उसके लिए नहीं कुछ नहीं चाहिए फिर भी मेहनत कर रहे हैं और मेहनत का जो फिर भी तपस्या कर रहे हैं तपस्या का परिणाम धरती में सिंचित कर रहे हैं इस हवामान में सिंचित कर रहे तन मंत्र में फेक रहे छोड़ दे रहे हैं वह उनकी जो तपस्या थी बोल की हम भारत देश आज धीरे-धीरे करके उन्नति कर रहा है हम लोगों के भीतर में धर्म और एसड़ना के बीच सहज ही अंकुरित हो का रहे हैं तो वो आईडेंटिफिकेशन नोट विद मी बॉडी बट विथ कंपाउंड दिस इस कोल्ड मनुष्यत्व और इस मनुष्यता पर उतारा घाट हो रहा है इस मनुष्यता की जड़ के ऊपर में आघात हो रहा है ये देवासुर संग्राम से एक्सट्रीमली डेंजरस थिंक अच्छा इसकी आगे की व्याख्या थोड़ी कर देते हैं ओम शांति शांति हरि ओम तत्सत श्री राम कृष्णा