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Ma Sarada Life by Sw Gambhirananda ·

अवतरणिका : श्रीमाँ सारदा देवी : स्वामी गम्भीरानन्द लिखित : 11 Aug 2023

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ओम स्थापतयेचा धर्मस्य सरवत अरमान स्वरूप अवतार वरिष्ठ आओ रामकृष्ण यत नमः श्री मां शारदा देवी लेखक स्वामी गंभीर आनंद जी महाराज इसमें से हम पिछले दो-तीन दिन से पाठ कर रहे हैं हमने ऑलरेडी देखा की किस तरह से गंभीर आनंद जी महाराज हमको कहते हैं की अवतार के साथ में शक्ति का भी प्रादुर्भाव होता है और इसी शक्ति की सहाय से अवतार युग प्रवर्तन का अपना जो महत्वपूर्ण देश है उसका प्रारंभ करते हैं उसका अनुष्ठान करते हैं यह जो स्पेसिफिक आइडिया है शक्ति का वह आपको सिर्फ हिंदू धर्म में ही दिखाई देगा आप बाकी सब जगह पर देखिए की अवतार का कॉन्सेप्ट है जैसे जीसस को अवतार शायद यह लोग कहते हैं या तो फिर बुद्ध को वे लोग तो नहीं कहते किंतु हम लोग तो अवतार कहते हैं किंतु हम लोग यह नहीं कहते की उन्होंने किसी शक्ति के मध्य से जगत के धर्म चक्र प्रवर्तन की आर्मबीएच किया हो इस तरह से वे लोग कोई क्लेम नहीं करते वे लोग कहते पता है की अवतार की खुद की जो आध्यात्मिक उपलब्धि है इस से जगत का कल्याण होता है उनको और किसी शक्ति का आसरा नहीं लेना पड़ता तो यह उन लोगों की फिलासफी है हम हिंदू धर्म में है की जितनी भी बार अवतार अवतार हुए हैं पृथ्वी पर तो साथ-साथ में ही शक्ति का भी प्रादुर्भाव हुआ है और इसी शक्ति के मध्य से अवतार ने जगत कल्याण का महत्व कार्य प्रारंभ किया है और साथ में महाराज ने यह भी बताया की ये शक्ति अवतार को किस तरह से सहाई करती है तो अवतार के पास में तीन तरह की शक्ति आदि बहुत ही आदि देवी और आध्यात्मिक यह तीन अवतार को प्राप्त होती है मां शक्ति के पास से और साथ में अवतार के साथ में वह पृथ्वी पर आई है तो यह कर शक्तियां प्रथम तो नई धरण करके अवतार के साथ में आई है दूसरा की अवतार को आदि देवी आदि भौतिक और आध्यात्मिक शक्ति वही प्रधान करती है यह पूरा हमने देखा साथ में ही देखा की स्वामी जी कहते हैं की यह जी शक्ति के उन्मेष मंत्र से जी शक्ति के प्रादुर्भाव मंत्र से पूरे जगत में एक रिस्पांस दिखाई दे रहा है पूरा जगत उसको प्रणाम कर रहा है जिसके सामने प्रणम्य हो रहा है उसका प्रादुर्भाव ही यदि इतना मतलब इतना क्या कहेंगे की सर्वोच्च श्रेष्ठ है इतना भाव है तो उसे शक्ति का मध्याह्न वो शक्ति जब पूर्ण कल से किल जाएगी तब उसका पृथ्वी पर आगमन या तो फिर पृथ्वी पर उसकी सत्ता कितनी प्रेस रहेगी वह आप सिर्फ अनुमान करके देख सकते हैं और स्वामी जी कहते हैं की दास जाति एस यह हमारी ईर्ष्या द्वेष वगैरा को त्याग करके इस शक्ति के प्रचार प्रसार में अपना जीवन नियोजित करें इस शक्ति को अपना करके अपने आध्यात्मिक जीवन का गठन करें इतना तक हमने देखा आगे गंभीर नदी महाराज क्या लिखने हैं थोड़ा सा पढ़ना हूं महाराज जी लिखने हैं सर्वानू सीता ब्रह्मरूपिणी श्री अदृश्य अध्याशक्ति अर्थात की जो ब्राह्मण उपनि अदृश्य अध्याशक्ति जो है आई कल आभार जुगावतरे शहर में रुपए ना होय एक विकेट जामुन परम पुरुष शेर लिया पूर्ति विधान कोरिया छन अपरिचित्रे 100 महिमा विस्तार एवं मानव समाज के और कल्याण विधुर्रान पूर्वक भाभी भारत एक तथा सामग्र विश्व के एक राजमार्गीय चले इतने लंबे लंबे सेंटेंस है वो जनरली हम लोग स्मृति कथा पढ़ने हैं तो एकदम छोटे सेंटेंस एकदम स्पष्ट रहते हैं छोटे रहते हैं और समझना में भी बड़े सरल रहते हैं किंतु यह तो एकदम शास्त्र के आधार पर इस ग्रंथ की रचना की गई है और यह तो फिर भी कुछ नहीं है लीला प्रसंग पढ़ेंगे तो शरद महाराज एक सेंटेंस एक पैराग्राफ होता है उसके प्रत्येक शब्दों में एक निमंत्रण में जितनी शक्ति होती है उतनी शक्ति इस तरह के सेंटेंस के प्रत्येक शब्दों में होती है प्रत्येक शब्द इतना सोच समझकर के चिंतन मनन करके लिखा गया है की उसके ऊपर में सोने से उसका अनुज्ञा करने से हमको भी इसके भीतर में प्रत्येक एक्सप्रेशन प्रत्येक सेंटेंस प्रत्येक शब्द प्रत्येक भाव इसके पीछे में कितनी गहनता छुपी हुई है वो हमको समझ में आई है तो देखिए महाराज जी क्या लिखने हैं ब्रह्मा रूपिणी अदृश्य अध्याशक्ति अभी अदृश्य क्यों लिखा है अभी यह थोड़ा सा समझना की बात है की हमको पता है की आ शक्ति तो पूरे जगत में सच्चा कर व्याप्त है जो कुछ भी देख रहे हैं शक्ति का ही खेल है तो फिर शक्ति अदृश्य कैसे हो शक्ति है किंतु यह पता है ना की जैसे हम ऑक्सीजन बिना ऑक्सीजन के हम एक सेकंड भी जी नहीं पाएंगे ऑक्सीजन इतना इंपॉर्टेंट है हमारे लिए किंतु हम कभी यह हवा या ऑक्सीजन के बड़े में सोचते ही नहीं वो इतना सहज लव्य है तो अभी हवा जल्दी मुझे मिलनी बैंड हो जाएगी मुझे पता चलेगा अरे हवा या ऑक्सीजन का कितना मूल्य है किंतु मैं तो जब से जन्म लिया है तब से यह हवा में अपने सांस में ग्रहण करता ही रहा हूं उसमें से ऑक्सीजन ग्रहण करता ही रहा हूं तो उसका मूल्य कहां है मेरे लिए वैसे उसकी मां का प्यार मां का प्रेम हम सब जो की मिडिल क्लास फैमिली में जो लोग जन्म लिए हैं हमारी सबकी मां देखेंगे की वो घर में ही रही है और हमारे ललन पालनपुर में ही उसने पूरा जीवन व्यतीत किया है तो हमने ये अमेरिका में हम देखेंगे की छोटी बच्चे का जन्म होने के 5-6 महीने हुए उसको किसी दे के सेंटर में रख दो और मां चली जाति है जब करने के लिए या तो फिर जो गरीब घर के होंगे वो बच्चा राहत है घर में या तो की पड़ोस के वहां पे और मां जाति है खेत में मजदूरी करने के लिए तो जिन लोगों को मां का प्रेम नहीं मिला बचपन में उनको समझ में नहीं वो लोग वो सही सही समझ में आता है की मां का प्रेम क्या है हम लोगों के लिए वह इतना सहज है की हां वो तो मां है छुट्टी प्रकार स्कूल से छठ करके घर गए दौड़ते दौड़ते और चिल्लाना शुरू कर दिया मां यह बना वह बना मुझे यह चाहिए वह चाहिए और मां बेचारी दौड़-दौड़ करके हमारे यह सब कुछ करती है कभी मार भी बैठी है किंतु ज्यादातर टाइम हम जो चाहते हैं वह सब कुछ करती है तो जो सर्वव्यापी है उसकी महत्व हमको कभी समझ में नहीं आई उसकी महत्व नहीं हमारे लिए वो जब नहीं होता है तब हमको पता चला है अरे इसके बिना तो मैं कैसे जिऊंगा पाल भर के लिए भी हवा के बिना जीना मुश्किल है वैसे ही बच्चे के लिए अपनी मां के बिना जीना मुश्किल है तो जो सहज प्रताप है जो बहुत इंपॉर्टेंट है उसका महत्व जब तक तब तक समझ नहीं आता जब तक वह हमारे जीवन से अदृश्य ना हो जाए तो वैसे ही यह अभी यह मेरा इंटरप्रिटेशन है मुझे पता नहीं की महाराज ने क्या सोच करके लिखा है किंतु मैंने पहले भी कहा था की मेरा यह नेचर है सब जगह से थोड़ा सा कुछ ना कुछ कांट्रडिक्शन निकालो कोई भी चीज लिखी गई है तो उसके भीतर में जाकर के दीप उसका अध्ययन करो प्रत्येक शब्द को प्रत्येक वाक्य रचना को देखो की क्या मैं इसका क्या अर्थ गठन कर सकता हूं अभिशास्त्र की दृष्टि से या तो फिर जो लेखक स्वयं जो होता है उनकी दृष्टि से क्या है वो तो अभी उनको पूछने से ही पता चलेगा किंतु मेरी खुद की दृष्टि से मैं इस तरह से अर्थ घटन करता राहत हूं और मैं देखा हूं की पढ़ाई इस तरह की किताबें की पढ़ाई से जितना आनंद मिलता है प्रसंग पढ़कर के जितना आनंद मिलता है वो तो है ही है किंतु इस तरह के अर्थ गठन करने से भी उतना ही आनंद मिलता है तो इसीलिए यह मेरा इंटरप्रिटेशन है की अदृश्य शब्द अध्याशक्ति अदृश्य क्यों है क्योंकि अध्याशक्ति इस जगत के कण-कण में व्याप्त है यह जगत ही अध्याशक्तिमय है तो सब कुछ यदि आध्या शक्ति माया है तो हम इसको कैसे देखेंगे स्वामी जी ने एक बहुत ही सुंदर उदाहरण दिया है एक होलेस्टर लेकर के एक लड़का था अमेरिका में स्वामीजी उसके साथ में बात कर रहे थे बच्चे ने पूछ लिया की हमको ईश्वर क्यों नहीं दिखता ईश्वर कहां है क्यों नहीं देख पाते तो स्वामी जी ने कहा देखो इशू अभी वो स्वामी जी तो कहते हैं ना की हम ब्रह्मा सत्य जगत में था हम ब्राह्मणी जीवन ब्रह्मा पर तत्वमसि अर्थात की मही ब्राह्मण हूं मैं ही ईश्वर हूं मेरे भीतर में ही वो सृष्टि स्थिति प्रलय के पैर जो असीम अनंत सकता है चैतन्य सत्ता चित आनंदमय वो मेरे ही हृदय में विराजमान है यह सब स्वामी जी बोलते रहते थे तो यह बच्चा बेचारा कुछ बेटा की यदि मेरे ही भीतर में भगवान है मेरे ही भीतर में आत्मन या ब्राह्मण है तो मुझे दिखाई क्यों नहीं देता वो मेरे से दूर दूर क्यों राहत है तो स्वामी जी ने कहा देखो तुमको क्या तुम्हारी आंख दिखाई देती है वह बोला नहीं स्वामी जी कहते हैं की देखो तुम अपनी आंख को नहीं देख पाते हालांकि तुम्हारी आंख तुम तुम्हारे सबसे करीब है किंतु फिर भी तुम अपनी आंख को नहीं देख पाते और फिर भी इसी आंख से तुम पूरे जगत का निरीक्षण करते हो तो जो तुम्हारे सबसे पास है जिससे तुम पूरे जगत को निरीक्षण करते हो पूरे जगत को देखते हो इस को तुम नहीं देख पाते वैसे ही ईश्वर का है की ईश्वर तुम्हारे अत्यंत नजदीक है तुम ही ईश्वर हो ईश्वर रूपी चैतन्य है बोलकर के तुम इस जगत को ग्राहकीय कर रहे हो तुम्हारी इंद्रियां जो है वो इस चैतन्य की शक्ति से ही चलित है यदि वो चैतन्य चला गया तो हम तो एक डेड बॉडी हो करके पद जाएंगे कबूतर शरीर हो जाएंगे हमारी आंख चाहे जितनी भी पावरफुल हो एक पहलवान का शरीर उसका बॉडी जितना भी पावरफुल क्यों ना हो उसकी आंखें कितनी ही शार्प क्यों ना हो उसकी श्रवण शक्ति इतनी ही तीव्र क्यों एन हो जी क्षण उसका शरीर तय उसकी वो मृत्यु हो जाता है वह लिस्ट अति सुंदर वहीं पर वेश्या का वैसा ही मृत होकर के पड़ा राहत है तो वैसे ही स्वामी जी कहते हैं की तुम्हारा जो ये शरीर है मां बुद्धि चित अहंकार और इंद्रिय जो है उसको चलित करने वाला चैतन्य महेश्वरूप ईश्वर तुम्हारे भीतर में ही है इस के मध्य से तुम सब कुछ देखते हो अनुभव करते हो और इस को तुम नहीं देख पाते साधना करने से इंद्रियां जो बाहर जो बहिर्मुखी है वह अंतर्मुख होगी वो अंतर्मुख इंद्रियों से सुसंस्कृत इंद्रियों से तुम अपने मां को अपने अपने भीतर में जो ईश्वर है उसका दर्शन कर पाओगे अपने भीतर में जो आत्ममन है उसकी अनुभूति कर पाओगे तो वैसे ही महाराज जी लिखने हैं की युवा अवतार की सहधर्मी ने रूप से सर्वानुष्युता ब्रह्म रूपनी अदृश्य अध्याशक्ति इस समय फिर से युगावकर के साथ में सकड़हार्मिणी रुक गए सहधर्मिणी रूप से आविर्भुता होकर के एक और जैसे परम पुरुष शेर अर्थात की अवतार की लीला का पूर्ति विधान करती है वो अध्याशक्ति सर्वस्व मैं जो की ब्रह्मा रूपिणी है जिसको हम देख नहीं पाते राग राग में कण-कण में जो व्याप्त है वह अवतार के साथ में फिर से अवनी हुई है और जो परम पुरुष अवतार है उसकी लीला का उनकी लीला का पूर्ति विधान करती है पूर्ति विधान बहुत सुंदर शब्द है उसको कंफर्म करती है उसको ऑगमेंट करती है उसको उसको रादिष्ट वरिष्ठ करती है जो अवतार करते हैं जैसे अवतार और ठाकुर बोलते हैं ना की सत्य की क्या शक्ति है आसमान गिर जाए पहाड़ हिल जाएंगे आसमान गिर जाएगा इतनी शक्ति सत्य की होती है तो अवतार यदि बोलना है की टोमेडर चैतन्य हो तो अवतार ने तो बोल दिया अवतार की वाणी तो मुख से निर्गत हो गई किंतु इस वाणी के भीतर में जैसे इंग्लिश में एक शब्द है तू पैक डी पांच अर्थात की उसके भीतर में भयानक प्रचंड शक्ति उसके पीछे में प्रधान करना तो अवतार ने जैसे ही बोल दिया तुम लोगों को चैतन्य प्राप्त हो तो उसे वाणी के पीछे में सही सही देती है अब यह भी एक इंटरेस्टिंग बात है की जी दिन एक जनवरी को ठाकुर सबको तोमादिर चैतन्य हो तुम सबको चैतन्य हो बोलकर के जो आशीर्वाद दे रहे थे उसे समय हमको पता है की यह डायरेक्ट डिसीप्ल त्यागी संतान कहां पर थे तो वह जहां पर ठाकुर के बेडरूम में जो ठाकुर ने बहुत दोनों के बाद वहां से निकली थी तो उन्होंने सोचा की ये आशीर्वाद वगैरा तो ठाकुर का मिलता रहेगा हम लोग सर्वप्रथम उनकी ये जो बिस्तर है चद्दर है वगेरा उसको धूप में डालते हैं और धूप में सूखता है तो फिर ठाकुर जब आकर के उसपे फिर से विश्राम करते हैं तो उनको फ्रेश हो उसको उनको मिलेगा बिस्तर वगैरा तो अवतार का कम करेंगे नहीं की अवतार के आशीर्वाद के लिए लालायित है तो यह बात हमको डायरेक्ट डिसीप्ल के बड़े में पता है किंतु मुझे यह याद नहीं ए रहा की उसे समय मां कहां पे थी मैं अनुमान करके हम लोगों को तो अनुमान करने का एक अच्छा एक हैबिट है मुझे तो हम अनुमान करके सोच सकते हैं की ठाकुर जब सबको स्पर्श करके आशीर्वाद देते होंगे उसे समय मां शायद ध्यान मगन होगी और ठाकुर के पीछे अपनी शक्ति अजब मेकअप लगे होगी की ठाकुर की वाणी के पीछे में 100 वाणी का पावर वो उनके पीछे मां की शक्ति से शायद आता होगा कहानी पर लिखा होगा शायद की उसे समय मां क्या कर रही थी मैंने पढ़ा भी होगा शायद मुझे याद नहीं ए रहा है की सही सही में मां के बड़े में उसे समय क्या लिखा गया है तो जो भी है अनुमान करना हमारे हाथ में शक्ति ने पृथ्वी पर अवेभूत होकर के अवतार की लीला संगिनी के रूप में अवतार के कार्यकलापों को बढ़ावा दिया है उनको पुष्टि दी है वैसे ही साथ-साथ ही एक और तो उन्होंने ये किया है दूसरी और किया किया है विभिन्न क्षेत्र 100 महिमा विस्तार एवं मानव समाज होते और कल्याण विदुर एन पूर्वक भावी भारत के तथा सामग्र विश्व के एक नव अभ्युद्र राजमार्गीय दिया चयन विभिन्न क्षेत्र में अपनी महिमा का प्रसारण किया है एक और तो अवतार के साथ में अमीर होता हुई है अवतार के जितने कार्यकलाप अवतार का जो मिशन है उनमें उन्होंने सहायता की है उनमें उन्होंने अपना मेकअप दिया है साथ-साथ में ही दूसरा क्या किया है इस विश्व के जो विभिन्न क्षेत्र है उनमें उन्होंने अपनी महिमा का प्रसार किया है और भारत का जो भाभी उत्थान है उसमें उन्होंने वो बैकअप दिया है अपना एग्जैक्ट शब्द क्या है भारत और विश्व को जागरण के रास्ते पर उन्होंने उठा दिया है अभी देखिए की यहां पर दो-तीन चीज महाराज ने कहीं है सर्वप्रथम तो अवतार के साथ में लेकर के अवतार के कार्यकलापों में सहायता दी है दूसरा की विभिन्न क्षेत्र में उन्होंने अपनी महिमा का प्रसार किया है तीसरा की भारत और विश्व के कल्याण के लिए उनको जगत कन्याओं उत्थान का नव अभ्युदय का राजमार्ग उसे पे उनको धृत कर दिया है उन पे उनको चलित कर दिया है अभी एक तो हमने देखा की ठाकुर के साथ में अवतरित होकर के उन्होंने किस तरह से उनको सहायता की इसके बहुत सारे उदाहरण बाद में देखेंगे और किंतु यह जो है की विभिन्न क्षेत्र में अपनी महिमा का प्रसारण तो हमको तो यह प्रश्न होगा की विभिन्न क्षेत्र कौन से मां तो अनपढ़ थी मां बेचारी नहीं कुछ लिख शक्ति थी की स्वामी जी की तरह कोई फिलोसॉफिकल लेक्चर दे पे ना की मां इस तरह से बाहर जाकर कोई प्रचार प्रसार करती थी जैसे की काली महाराज है या तो शरद महाराज है या तो हरि महाराज है विदेश में जाकर के प्रचार प्रसार करके आए ऐसा तो कुछ नहीं करती थी तो विभिन्न क्षेत्र में महिमा प्रसार का क्या अर्थ है यह अर्थ यह है की विभिन्न क्षेत्र के उसे क्षेत्र के लोग सड़क भक्ति मां के पास आते थे उनका आशीर्वाद ग्रहण करने के लिए उनसे मंगल कामना करने के लिए एक छोटा सा उदा हरण है अरविंद का महर्षि अरबिंदो के बड़े में हम सबको पता है की वो कितने बड़े ऋषि थे और उन्होंने उनका जो कंट्रीब्यूशन है भारत की आजादी के संग्राम के लिए और बाद में भी वो एक इस वेल नॉन फैक्ट ही इसे एन ग्रेट इंडियन भारत के एक बहुत ही बड़े सुपुत्र थे अभी अरविंद के इनके बड़े में एक छोटा सा आर्टिकल मैंने पढ़ा है अपने रामकृष्ण मिशन के ही एक किताब में मेयर पद प्रत में उसमें आप इसमें जो लिखा है मेरा नॉलेज उसे आर्टिकल में से आता है मुझे पता नहीं अरविंद ने स्वयं क्या कहा तो उसे आर्टिकल में लिखा है की श्री है अरबिंदो कहते हैं की मैं कभी भी मां को मिलने के लिए या तो स्वामी जी को मिलने के लिए कभी गया नहीं अभी स्वामी जी के समय तो वो ठेके नहीं पता नहीं की तुम मां के समय थे और मां को कभी मिले नहीं किंतु यह आर्टिकल में इस तरह से लिखा है की अरबिंदो की जो पत्नी जो है उनको वो मां के दर्शन के लिए आई थी मां का आशीर्वाद मां से दीक्षा ग्रहण की थी श्री अरबिंदो भी उनके साथ में आए थे किंतु मां को मिलने के और उद्बोधन में वो ग्राउंड फ्लोर पे बैठे रहे जहां बाकी सब साधु ब्रह्मचारी थे उनकी पत्नी ही सिर्फ फर्स्ट फ्लोर पे गई मां को मां का दर्शन करने के लिए मां से दीक्षा प्राप्त करने के लिए और फिर वह वापस आई अरबिंदो और उनकी वाइफ चले गए अभी मुझे पता नहीं की इस कहानी में क्या सत्य है क्या नहीं है अरबिंदो क्या ऊपर में फर्स्ट फ्लोर पर मां को मिलने के लिए गए थे की भी नहीं वह पता नहीं किंतु अरबिंदो हमेशा जो यह क्लेम करते रहते थे है की उनका रामकृष्ण मिशन के साथ में कोई सीधा संपर्क नहीं है स्वामी जी के साथ में या तो स्वामी जी की भाऊ धारा के साथ में तो यह बात इस आर्टिकल के अनुसार गलत है उनकी खुद की बीबी मां से दीक्षित थी और वो खुद उद्बोधन में ग्राउंड फ्लोर पर बैठे थे फर्स्ट फ्लोर पे एक कुछ एक दो मिनट के लिए जाकर के मां को प्रणाम भी किया होंगे की नहीं किसको पता तो देखिए की विभिन्न क्षेत्र से लोग मां के पास आए हैं मां से आशीर्वाद ग्रहण किया हैं और अपने अपने स्वार्थ स्वर क्षेत्र जो है उनके जो फील्ड है उसमें उन्होंने ग्रेट कंट्रीब्यूशन किया है वो अरबिंदो तो कभी स्वीकार नहीं करेंगे की मां की महिमा से उनके भीतर में शक्ति का प्रादुर्भाव हुआ किंतु मां के भक्ति मां के संतान होने की वजह से हम लोग अवश्य यह कहेंगे की मां की शक्ति से ही मां के आशीर्वाद से ही उन्होंने बाद में भारत देश के लिए धर्म आध्यात्मिक आध्यात्मिकता और के क्षेत्र में उन्होंने जो कुछ भी किया मां की शक्ति से मां के आशीर्वाद से किया ऐसा हम लोग तो अवश्य का सकते हैं तो यह एक उदाहरण जी महाराज कहते हैं की शक्ति विभिन्न क्षेत्र में अपनी महिमा का प्रसार करती है तो ये इस तरह से हम इसको इंटरप्रेट कर सकते हैं की विभिन्न क्षेत्र से लोग आते थे मां का आशीर्वाद ग्रहण करते थे अपने अपने वहां पे जाकर के वो डबल पावर ज्यादा शक्ति से वो अपने कार्य कर सकते थे ये तो एक और फिर महाराज जी क्या लिखने हैं सामग्र विश्व के और भारत के और सामग्र विश्व को अभूटान के राजमार्ग पर उन्होंने धारण कर दिया है भारत को और विश्व युद्ध शब्द भी कितना सुंदर है कुछ-कुछ पुराने पुराने संस्कृति शब्द है सुंदर शब्द है की 9:00 जागरण यह नव उत्साह नव नव उमंग ये उमंग जी तरह से पुराने भारत देश में 1000 साल की गुलामी हमेशा यह सुनते रहे विदेशियों के एक के बाद एक आक्रमण होते रहे और उन लोगों से सुनते ही रहे की तुम लोगों की संस्कृति बिल्कुल किसी कम की नहीं है तुम लोगों के महापुरुष निकम्मी थे तुम लोगों के देवी-देवताओं में कोई शक्ति नहीं है इसीलिए तो तुम गुलाम बन करके बैठे हो हजार साल से ये जो सुन रहे थे तो इस हजार ठाकुर कहते हैं ना इसे ठाकुर कितना सुंदर उदाहरण देते हैं पता नहीं इस दोनों के साथ में कुछ कनेक्शन है की नहीं किंतु मुझे लगता है जैसे मेरा हैबिट है कनेक्शन खोजना ठाकुर क्या कहते हैं की हजार साल अंधेरा कैमरा उसमें यदि आप लाइट जलाएंगे दिया जलाएंगे बत्ती जलाएंगे तो क्या वो धीरे-धीरे करके वो उजाला होने की शुरुआत होगी ना एक ही सेकंड में उजाला हो जाएगा तो है जैसे ही यह कितना सुंदर उदाहरण इसके साथ में बैठता है की हजार साल की गुलामी भारत में थी और ठाकुर मां और स्वामी जी के आने के बाद क्या धीरे-धीरे करके वो प्रकाश होगा ना की जैसे ही बत्ती जलाए फैट करके प्रकाश फेल गया तो ठाकुर मां स्वामी जी का अभ्युदय हुआ नहीं हुआ भारत में यह नव अभ्युदय की लहर जैसे की फेल गई लोगों के मां में एक नया उत्साह ए गया और आज देखिए ठाकुरमार स्वामी जी का प्रादुर्भाव को अभी 1836 1836 को हम आरंभ के तो उसको हमको क्या 200 साल मुश्किल से हुए हैं भारत विश्व की तीसरी आर्थिक महासत्ता होने को जा रहा है यह सिर्फ 200 साल के प्रादुर्भाव के बाद की बात है इतना पावरफुल है कहां आज से 100 साल पहले दुष्कल पड़ता था काल पड़ता था मां अपने बच्चे को मार्कर के का जाति थी इतनी भयावोन पर स्थिति उसे समय और कहां आज हम तीसरी सबसे बड़ी आर्थिक महाशक्ति होने को जा रहा है तो ये तो 200 साल में ही ये संभव है तो स्वामीजी तो कहते हैं की ठाकुर मास खुद का तो नहीं उल्लेख किया ना खुद का ही किया है की ये मिशन जो है रामकृष्ण मिशन 1500 साल तक कार्य करेगा तो प्रथम 200 साल में ही हमने इतना जल्दी हमारी अटेनमेंट है इतनी आज हमारा चंद्रयान वहां चंद के और उन चारों ऑर्बिट में है एक दिन आएगा की वहां पे लैंड भी करेगा तो 200 साल में ही यह शक्ति हमने प्राप्त कर ली तो आज 1500 साल में क्या से क्या नहीं होगा तो ये नोवा अभ्युदय और सिर्फ भारत को नहीं पूरे विश्व को पूरे विश्व को और भारत को राजमार्ग है उसके ऊपर में मैन 40 कर दिया विश्व को कैसे देखिए ये एटम बम न्यूक्लियर वेपंस इतने भयानक है की गलती से भी एक ने दूसरे पे फेक दिया तो अभी तो हमको पता है की आजकल तो फिर भी ये न्यूक्लियर पोस्चर जिसको कहते हैं वो थोड़ा सा रिलैक्स है जब कोल्ड वार चल रहा था अमेरिका और रसिया के बीच में उसे समय वो हजारों हजार न्यूक्लियर वेपन एक और ट्रिगर पे रहते थे वैसे ही पता चला सामने वाला कुछ गड़बड़ कर रहा है तो वहां का प्रेसिडेंट अमेरिका का प्रेसिडेंट ना की यह सोवियत यूनियन का प्रेसिडेंट एक बटन प्रेस करेंगे 1000 न्यूक्लियर बम वहां पे गिरेंगे और उसे वाला प्रेसिडेंट एक बटन प्रेस करेगा 1000 न्यूक्लियर बम यहां पे गिरेंगे पुरी पृथ्वी का खत्म हो जाएगा लाखो लाखो सालों तक रेडियो एक्टिविटी ऐसी रहेगी की फिर से यह पृथ्वी जीवन धरण करने को अक्षम हो जाएगी तो इस तरह की भयानक स्थिति 50 60 साल पृथ्वी पर रही किंतु फिर भी कोई एक्सीडेंट नहीं हुआ मैंने किताब पड़ी थी न्यूक्लियर एक्सीडेंट के शहर में पुरी 400 500 पेज की किताब थी और वह किताब पढ़ के मेरे रोंगटे खड़े हो गए थे इतनी भयावह किताब मैन एक कहानी पे एक वहां पर तो ऐसा होता है जैसे डेड मेंस भी जैसे की ऐसा होता है की न्यूक्लियर बनकर होता है मां लो की मास्को एटम बम गिरता है तो मोस को तो पूरा खत्म हो गया सोवियत यूनियन की राजधानी किंतु यह जहां पे न्यूक्लियर बम ये न्यूक्लियर मिसाइल रहते हैं वो कितने किलोमीटर पृथ्वी के भीतर में भूगर्भ में वो बनकर राहत है न्यूक्लियर ब्लास्ट प्रूफ बुनकर उसमें वो ऑफिसर लोग बैठे रहते हैं और वहां पर पृथ्वी पर जो सरफेस के ऊपर में सीस्मिक सेंसर लगे होते हैं अर्थात की न्यूक्लियर बम गिरेगी तो वहां पर धरती कम होगा तो धरती कम का यह सिग्नल यह बनकर में पता चल जाएगा बनकर तो कितना गहराई में है वो जमीन के पता भी नहीं चला की बाहर में क्या हो रहा है मां लीजिए की सदन अटैक हुआ और रसिया के प्रेसिडेंट के पास में समय नहीं यह खाने का की सामने न्यूक्लियर बम फेंका ये आईबीएम इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल अमेरिका पर फेंका यह मैसेज देने का भी यदि समय नहीं रहा तो ये सेशमिक सेंसर रहते हैं जो की वो अर्थक्वेक को मेजर करते हैं अर्थक्वेक जैसे ही लगा की सरफेस के ऊपर में अर्थ पे हो रहा है तो उसका एक स्पेसिफिक सिग्नेचर राहत है की न्यूक्लियर बम गिरने से इस तरह का कुछ अर्थक्वेक होगा इस तरह के सिग्नल मिलेंगे तो वह सिग्नल वह बनकर में जाते हैं और वहां जो ऑफिसर बचता है उसके पास में ये अथॉरिटी है की यह सिग्नल मिलने से यदि वो उसका रसिया का प्रेसिडेंट सोवियत यूनियन का प्रेसिडेंट नहीं भी कहता है की अभी वो बम फेंका अमेरिका के ऊपर में मिसाइल छोड़ दो वो ऑर्डर नहीं मिलने से भी वो अपने से वो मिसाइल छोड़ सकता है क्योंकि उसको पता है की यदि रसिया के ऊपर में मास्को के ऊपर में मिसाइल गिरा है तो मास्को में जो रसिया का प्रेसिडेंट राहत है वो मा गया है अपना ऑर्डर देने वाला कोई नहीं है तो काउंटर अटैक इस के ऊपर में है तो एक दिन ऐसा हुआ की इस तरह से बनकर में एक वो ऑफिसर बैठा था सुद्दनली वो सेंसर सब वो ब्लैंक होना शुरू हो गया तो अभी वो ब्लिंकिंग होने के बाद में सेंसर में सिग्नल मिलने के बाद में ऑफीशियली 5 मिनट के भीतर में ऐसा कुछ आपको रिस्पांस देना है यदि नहीं देंगे तो आपको कोर्ट मार्शल होगा आपको शूट कर देंगे तो वो अभी सोच रहा है की मेरे पास में रसिया के प्रेसिडेंट का तो कोई सिग्नल नहीं आया कम्युनिकेशन नहीं आया की अमेरिका पर बम को यहां पे ये मशीन तो बोल रहा है की मास्को बम गिर रहा है तो मेरा तो यह पेट्रियोटिक ड्यूटी है की मैं अमेरिका पे सामने मिसाइल छोड़ दो किंतु अभी मैं क्या करूं क्या सिग्नल सही है की गलत है वो भी किसको पता तो 5 मिनट तक उसने र देखा फिर पता चला की उसका मशीन गड़बड़ हो गया था वो गलत सिग्नल दे रहा था सोच लीजिए की 5 मिनट वो ऑफिसर ने उसमें पता नहीं यह मैन उसको बुद्धि दी एन की कहां से उसके भीतर में आया की है वह सामने मिसाइल नहीं फेंकता है तो चलो मैं थोड़ा देखा हूं की क्या होता है उसने यदि साथ साथ में जैसे उसको ऑर्डर था मिसाइल छोड़ दिया होता तो यहां से और सोवियत यूनियन से हजार मिसाइल जाति और सामने अमेरिका को पता चला की मिसाइल ए रही है उन्होंने हजार मिसाइल फेक दिया बस पृथ्वी खत्म एक मशीन बिगड़ गया उसमें ये पूरा पृथ्वी का सर्वनाश हो जाता ऐसी कैसी घटनाएं सब बनी है वो बढ़कर के हमको डर लगता है की अरे ये 50 साल में पृथ्वी का विनाश नहीं हो गया ये कितनी बड़ी बात है तो ये जो लिखा है की सिर्फ भारत ही नहीं पूरे विश्व को नव अभ्युदय के रास्ते पे मैन 40 किया है तो यह ऑन वन हैंड साइंस टेक्नोलॉजी मेडिकल टेक्नोलॉजी इसमें जो डेवलपमेंट हुआ है मंत्र आशीर्वाद से ही हुआ है तो आज यही तक एक ही सेंटेंस इतना पावर है इस तरह के शास्त्र के बेस पर जो किताब लिखी जाति है की एक-एक सेंटेंस पर हमको इतना गहराई में सोचना पड़ता है किंतु यही इसी का असली आनंद है इस तरह की किताब पढ़ने का ओम शांति शांति हरि ओम तत्सत श्री राम कृष्णा