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ओम आपका यह धर्म स्वरूप ने अवतार वरिष्ठय रामकृष्णायते नमः शारदा देवी लेखक है स्वामी गंभीरानंद जी महाराज पता होगा की जी तरह से ठाकुर की प्रमाणिक जीवनी बायोग्राफी शारदानंद जी महाराज ने लिखी है लीला प्रसंग श्री राम कृष्णा लीला प्रश्न वैसे ही स्वामी जी महाराज ने लिखी और उसका नाम है युग नायक तो वैसे ही मां की लाइफ मां का जीवन जिसको की मोस्ट ऑथेंटिक माना जाएगा मां के बड़े में बहुत कुछ लिखा गया है और बहुत कुछ सोचा भी गया है किंतु जो मोस्ट ऑथेंटिक सोर्स मटेरियल अपने ऑर्डर में जो कोई है मां के बड़े में जी महाराज के बड़े में आपको पता ही होगा रामकृष्ण मिशन के जनरल सेक्रेटरी थे बाद में प्रेसिडेंट भी हुए थे मोस्ट रिव्यू प्रेसिडेंट महाराज ही वज वन ऑफ डी मोस्ट रिव्यू प्रेसिडेंट महाराज जी ऑफ अवर ओल्डर तो महाराज के द्वारा लिखी हुई मां की और ये बायोग्राफी का एक बहुत बड़ा एक क्या कहेंगे वशिष्ठ या ये है की मां के जीवन की सिर्फ घटनावलियों का एक तालिका नहीं है एक लिस्ट नहीं बना दिया की मां के जीवन में यह घटना हुई थी जैसे हम मां के स्मृति कथा पढ़ने हैं तो क्या पढ़ने हैं की भक्ति या तो साधु सन्यासी जिन्होंने स्मृति कथा लिखी है वो हमको बताते हैं की मां के पास में जान से उनको क्या-क्या अनुभव हुए कौन-कौन से प्रसंग उसमें वह उन्होंने नजरों से देखें या तो जिम उन्होंने पार्टिसिपेट किया था और उसे प्रसंग के बड़े में उनका खुद का क्या मतलब है वह स्मृति कथाओ में इस तरह से होता है के तो यह जो जीवन है उसमें मां की शक्ति क्या है अवतार एक है दूसरी है शक्ति तो शक्ति के अवतरण का एक दार्शनिक फिलोसॉफिकल तात्पर्य क्या है वो हमको बताता है तो जी तरह से लीला प्रश्न में शारदानंद जी महाराज अवतार के अवतरण का पृथ्वी पर अवतरण का क्या दार्शनिक तात्पर्य है हमारे वेदांत उपनिषद पुराण वगैरा अवतार के बड़े में क्या कहते हैं अवतार का पृथ्वी पर क्या प्रयोजन है वो किस तरह से विषाद रूप से हमको डिटेल में शारदानंद जी महाराज लीला प्रसंग में बताते हैं वैसे ही शक्ति का युगल धर्म प्रवर्तन में क्या प्रयोजन है क्या महात्मा है वो शारदानंद जी महाराज हमको इस किताब के द्वारा बताते हैं की तब बहुत सुंदर है मैंने कई बार इसको पढ़ा है और इसमें से हम थोड़ा थोड़ा मैं बंगाली में इसलिए पढ़ रहा हूं हालांकि क्लास अपना हिंदी में है किंतु में किताब बंगाली में इसलिए पढ़ रहा हूं क्योंकि महाराज जी ने ओरिजनली इसको बंगाली में लिखा है और बंगाली शब्दों क्योंकि मां खुद बंगाली में बात करती थी तो मां के शब्द तो मंत्र समाज है जब भी हम संस्कृत का कोई भी पार्ट करते हैं कोई भी संस्कृत के शास्त्रों का अध्ययन करते हैं संस्कृति कोई भी किताब का हम पठान स्वाध्याय करते हैं तब हम क्या करते हैं सबसे पहले संस्कृत के मेट्रो का पाठ करते हैं उच्चारण करते हैं चैटिंग करते हैं बाद में उसका अर्थ उसका तात्पर्य देखते हैं तो चैटिंग क्यों किया जाता है मेट्रो का क्योंकि मंत्र में अपने आप में एक शक्ति है जो शक्ति मेट्रो के उच्चारण से इस वातावरण में फैलती है हमारे हृदय के भीतर में हमारे मां के भीतर में जाति है और वो साधना का कम करती है जी तरह से की हम जाप करते हैं तो एक जाप करते-करते हमारे को संस्कार कैसे कैट जाते हैं हमारे कर्मों का यह जो भर है हमारे कर्मों का जो बोसा है कैसे लाखों होता जाता है एक के बाद एक जाप करने से वैसे ही वो मंत्र का जाप करो ओम मंत्र का जाप करने से होता है तो वैसे ही मां के जो शब्द है ओरिजिनल शब्द मां के बड़े में ओरिजनली जो बंगाली में लिखा गया है उसका मुंह से पाठ करने से वाणी से उसको पाठ करने से हमारे मां में भी हमारे चरित्र में भी जो कोई भी संकट बनकट ये है वहीं गली शब्द है संकट मार्केट की जो कुछ भी गड़बड़ वगैरा जो होगा वो धीरे-धीरे करके वो सीधा होता जाएगा हमारे कर्म जो है वो शय होते जाएंगे इसीलिए पहले मैं बंगाली में थोड़ा सा पाठ करूंगा फिर इसकी हम चर्चा करते हैं जी तरह से हम कथामृत में करते हैं वैसे ही है तो महाराज जी लिखने हैं सर्वप्रथम चैप्टर है अवतरणी का अर्थात की मां की जीवनी का प्रारंभ पहले सर्वप्रथम थोड़ा सा फिलोसॉफिकल दृष्टि से महाराज जी ने समझाया है की शक्ति का क्या तात्पर्य है क्यों अवतार के साथ में शक्ति हमेशा पृथ्वी पे अवतरण करती है और शक्ति के मध्य से अवतार हमारे ये जो पृथ्वी पे जो अंधकार छाया हुआ है अज्ञानतिमिर ये आज्ञा रूपी अंधकार जो है उसको दूर करने के लिए जो अवतार प्रयत्नवन होता है वो शक्ति के मध्य से ही होते हैं ये बहुत सुंदर रूप से महाराज ने समझाया है तो मैं पाठ करता हूं गंभीरानंद जी महाराज लिखने हैं सक्षम हो भगवान शक्ति के समर्थ से ही युग धर्म प्रवर्तन करने के लिए सक्षम होते हैं अभी भगवान जी तरह से भगवान राम है भगवान कृष्णा है भगवान चैतन्य महाप्रभु है ओ लोगों ने जब पृथ्वी पे अवतार धरण किया किंतु जब कोई युगात धर्म प्रवर्तन करने के लिए उन्होंने जो उनका जो वर्ल्ड मिशन था उसका अनुष्ठान करने का जब पर्यटन किया अनुष्ठान किया तब उन्होंने शक्ति की सहायता से ही किया इसलिए महाराज ने सर्वप्रथम लिखा है सशक्तिक भगवान सिर्फ भगवान नहीं सो शक्तिक अर्थात की शक्ति के सहारे से ही शक्ति की मदद से ही शक्ति को साथ में रखकर ही भगवान युगल धर्म प्रवर्तन ने सक्षम हो अब यह सक्षम शब्द जो उसे किया है वह बहुत ही हमको सोने वाली बात है भगवान तो सर्व नियंत्रण है सर्व करतू है वह कर सकते हैं किंतु फिर भी जब उनको उनको उनकी समर्थ वो तो सब कुछ उनके समर्थ से वो साबित कर सकते हैं तो उनको क्या शक्ति से क्या क्षमता ग्रहण करनी पड़ेगी तो हां युगल धर्म प्रवर्तन करने के लिए जो क्षमता उनको चाहिए वो शक्ति ही भगवान को प्रधान करती है यह सबसे बड़ा स्टेटमेंट महाराज जी ने सर्वप्रथम दे दिया इस युद्ध धर्म प्रवर्तन के लिए भगवान स्वयं शक्ति के द्वारा ही सक्षम होते हैं नटवा निर्गुण भ्रमर पक्के जगत व्यापारी निजुक तो हुआ कल्पना थी अदर वाइस निर्गुण है उसके लिए इस जगत के विषय में कुछ भी करने के लिए उनका समर्थ कल्पना के बाहर का है यह जो ब्रह्मा है हमारा हिंदू धर्म शास्त्र कहते हैं वेदांत कहते हैं की ब्रह्मा या तो पुरुष प्रिया है वह कोई कर्म नहीं करता उनको यदि कर्म करना होगा तो शक्ति के मध्य से ही करना पड़ेगा इस जगत संसार में कोई भी परिवर्तन लाना होगा तो शक्ति के मध्य से ही ब्रह्मा इस जगत में परिवर्तन ला सकते हैं न अवतारी शक्तिर आराधना पूर्वाकिनी था के उद्बोधित करें न अवतार धरण करके भगवान शक्ति की आराधना करते हैं और आराधना करके शक्ति को युटबोधित करते हैं शक्ति को आमंत्रित करते हैं शक्ति को जागृत करते हैं देखिए यह ठाकुर के जीवन में हमने देखा की मां जब पहले बार दक्षिणेश्वर आई थी उसे समय ठाकुर ने थोड़े दोनों तक उनके साथ में रहे कुछ उनको शिक्षा दी फिर उनके बाद में एक दिन उन्होंने शोधशी पूजा का अनुष्ठान किया और मां के भीतर में देवी शोध शिक दर्शन करते हुए अपना पूरा जब तक साधना का जितना भी फल है मां के श्री चरणों में अर्पित कर दिया था तो यह शक्ति का उद्बोधन शक्ति को जागृत करना तभी तो शक्ति जगत के कल्याण में व्याप्रित होगी इसलिए महाराज कहते हैं न अवतार में जब नारा अवतार नरेश धरण करके भगवान पृथ्वी पर आते हैं तब वह शक्ति की आराधना करते हैं और शक्ति को जागृत करते हैं अनंत लोक कल्याण साधने नियुक्त करें और शक्ति को जागृत करके लोक कल्याण के साधन में शक्ति को नियुक्त करते हैं वह ठाकुर के मां जब पहले पहले बार दक्षिणी ईश्वर आना शुरू हुई थी तो एक बार ठाकुर ने अभी उसे समय तो हमको पता है की जो समाज के जो हिस्ट्री हैं वो कितने फॉलो करने पढ़ते थे स्त्रियों को और ठाकुर और मां ये तो कुछ नया पुनर्गठन करने के लिए पुनर्जीवित करने के लिए आए थे पुराना किसी चीज को तोड़ने के लिए नहीं इसलिए जो पर्दा प्रथम है स्त्रियों को पुरुष के नजर के सामने नहीं जाना है ये जो सब ये जो खूब प्रथाएं ये जो आक्रमणों की वजह से हमारे हिंदू समाज में प्रवेश कारी थी उसको सीधा उसके ऊपर में आघात करके वो ठाकुर और मैन इस रामकृष्ण संघ की रामकृष्ण भावधारा की अग्निशिखा नहीं प्रकट की यह भाव धारा है हमारा पुराना जो कुछ भी है वो सब सही है किंतु इससे भी बटर एक नए भारत का निर्माण करें इस तरह से भाव लेकर के राम कृष्णा हमारा संघ चल रहा है तो ठाकुर ने एक दिन मां को कहा की देखो कलकत्ता में मेरा भक्ति मेरा बहुत ही निष्ठावान भक्ति बलराम उनकी उसकी बीबी बीमा है तुम जाकर के उसको देख के आओ तो मां तो बेचारी बड़ी परेशान हो गई की वो किस तरह से वो कोलकाता जाकर के वो अकेली वह भी वह उसकी बीबी को जाकर के मिलने को हो जाए यह तो मैंने बड़े ही डुएट हमें ठाकुर ने उनको दाल दिया किंतु फिर ठाकुर ने जब कहा तो मां को तो जाना ही पड़ेगा तो देखिए की किस तरह से बिल्कुल पहले से ही ठाकुर ने मां को एक के बाद एक स्टेप बाय स्टेप तैयार किया था की भक्तों लोगों की जवाबदारी मां अपने सर पर ग्रहण करें काली प्रदोष बोलकर ठाकुर का एक भक्ति था बहुत ही शराबी था बहुत ही उसके दुष्ट अचार थे उसका स्वभाव बहुत ही क्रोधी था बहुत ही बहुत तो निज कहे से थोड़ा सा करूर प्रकार का था वह दशहरा पीकर के आकर के घर में जाके अपनी पत्नी की टी करता था अभी उसे समय यह सब चीज चलती थी तो अभी उसकी पत्नी भी बेचारी क्या करेगी वो ठाकुर के पास आई और बड़ी विनती पूर्वक खाने लगी की मेरा पति मेरे साथ में इस तरह से दुर्व्यवहार करता है आप उसका कुछ उसका कुछ समाधान निकालिए तो ठाकुर ने उसको मां के पास में भेज दिया कहा जो मोहब्बत ने मां है मां को जाके मिलो अभी मां यू बेचारी आई मां के पास में वो अपना दुख बताने लगी अच्छी मैं इस तरह से होता है तो मां भी बेचारी क्या रहेगी मां बोली मैं क्या कर शक्ति हूं उसमें जो तुम ठाकुर के पास जो ठाकुर ही तो कुछ समाधान निकलेंगे तो वह बेचारी प्रति रोटी ठाकुर के पास आई ठाकुर ने फिर से कहा नहीं जो नबत ने मां है मां समाधान देगी तो फिर से नौबत में मैन ठाकुर के पास पीछा ऐसा तीन दो तीन बार हुआ फिर उसका मां भी बेचारी परेशान हो गई क्या करेंगे की ठाकुर तो बार-बार उसको मेरे पास में भेज रहे हैं तो फिर मैन उसको एक बिल्व पत्र दिया था और कहा था अभी मैं एक्जेक्टली खुला के हम मैन क्या कहा था किंतु जो भी है मैन आशीर्वाद जो दिया उसकी वजह से किंतु उसका जो पति जो की इतना उसका दुर्व्यवहार था अपनी पत्नी के साथ में वो दूर व्यवहार धीरे-धीरे करके ठीक होता गया उसकी शराब पीने की हैबिट पूरे-पूरी तो नहीं चली गई थी किंतु उसमें भी धीरे-धीरे मॉडरेशन आया था संयम आया था फिर कितने सालों के बाद में वह ठाकुर का प्रथम उसने दर्शन किया काली प्रदोष ने तब ठाकुर ने कहा की देखो वो इतने साल तक अपनी बीबी के साथ में भुरचार करता रहा आज कहानी जाकर के उसकी बीबी की तपस्या की वजह से उसका चरित्र परिवर्तन हुआ है स्वभाव परिवर्तन हुआ है और आज वो मेरे पास आया है ये बात सुनकर के काली पत्तों कोश इतना शर चकित हो गया उसको पता ही नहीं था की मां के आशीर्वाद से उसकी पत्नी ने ये साधना की थी जब तक किया थे और उसके परिणाम से उसके स्वभाव में ये परिवर्तन आया है तो ठाकुर मां के मध्य से यह उनके जितने भी भक्ति हैं एक के बाद एक मां के पास में उनको सभी को तो नहीं किंतु कुछ कुछ चुनिंदा भक्तों को मां के पास में भेजते थे और मां के पास से उनका आध्यात्मिक जीवन गठन करने के बड़े में वह उपदेश दिलवाते थे और का कोर्स हमको तो पता है की ठाकुर की महासमाधि के बाद में मां के आशीर्वाद से ही स्वामी जी अमेरिका गए थे मां के आशीर्वाद से ही रामकृष्ण सॉन्ग की स्थापना हुई थी हमारा जो एजुकेशन इंस्टीट्यूशन है आज हमारा सिस्टर निवेदिता ने पहले बार जब ठाकुर के नाम से कन्या शाला की स्थापना की तो उसकी पूजा भी मांगी थी यानी की आज के मॉडर्न जितने भी हमारे सर्विस एक्टिवेट से रामकृष्ण संग स्वयं रामकृष्ण संघ के सन्यासी हम सबके लिए जननी मां शारदा देवी के आशीर्वाद ही हमारी कार्य प्रवृत्ति और हमारी साधना के पीछे में एक मजबूत दल बन के एक मजबूत सपोर्ट बन करके हमारी साधना के फाउंडेशन में मां के आशीर्वाद अभी तक बने हुए हैं बोलकर के रामकृष्ण सॉन्ग इस तरह से विस्तारित हो रहा है एक प्रकार है ईश्वर आराध्यता शक्ति यूज यूज कृपा सुमुखी होए इस तरह से ईश्वर की आराधना से शक्ति युग युग में प्रत्येक युग में क्रुपांवित होकर के वाइब्रेट और विपर्यय मानव समाज पुनरुत आने सूत्रपात करें यह मानव समाज जो है वो विभ्रांत हो गया है रास्ता भूल गया है उसका फिर से जो अभ्युदय होना है उसका जो पुनः जागरण होना है उसका सूत्रपात करती है अर्थात यह शक्ति भगवान की आराधना से ईश्वर की पुरुष जब ईश्वर जब भगवान विष्णु न रूप से अवतार धरण करके पृथ्वी पर आते हैं तो वह शक्ति की आराधना करते हैं उनकी आराधना से प्रश्न होकर शक्ति जागृत होती है और जागृत होकर के यह मानव समाज जो विभ्रांत विभ्रम अनाचार दुराचार इस तरह से गलत रास्ते पर तू जा रहा था रास्ता भटक गया था उसका पुनः उसको आध्यात्मिक रास्ते पर ले जान के लिए वो व्याप्रित होती है शुद्धता ही नहीं श्री भगवान सिर्फ इतना ही नहीं रुपए इतना नहीं भगवान जब न रूप से अवनी होते हैं तब शक्ति भी नई देहात धरण करके उनके साथ में अवतरित होती है श्री रामचंद्र शाहिद सीता देवी श्री रामचंद्र के साथ में शक्ति के रूप में आई थी मां सीता श्री कृष्णा और शाहिद श्री राधिका भगवान कृष्णा के साथ में अवनी हुई थी मां राधा बुद्धदेव के साथ में यशोधरा श्री चैतन्य शाहिद विष्णु प्रिया आगमन की हाय प्रमाणित हुए चैतन्य देव के साथ में विष्णु प्रिया के आगमन से मैन भगवान कृष्णा के साथ में मां राधे और चैतन्य देव के साथ में विष्णु प्रिया इनका आगमन यही बात का प्रमाण है की ईश्वर जब नारद धरण करके पृथ्वी पर अवतरित होते हैं तब शक्ति भी नई विदारण करके उनके साथ में उनकी लीला में सहायक होने के लिए साथ-साथ ही अवनी होती है फलक आध्यात्मिक आदि भौतिक एवं आदि देवी शक्ति रूपी हो उसके परिणाम से आध्यात्मिक आदि भौतिक और आदि देवी शक्ति के रूप में ही हो अभी देखिए की किस तरह की ये तीन बातें हमको बताई गई है आध्यात्मिक आदि भौतिक और आदि देवी अर्थात की देव के रिलेटेड जो भी घटना परंपरा या तो फिर जो कुछ भी प्रसंग है वो आदि देवी है आदि भौतिक अर्थात की ये जो हमको दिखने वाला जिसको हम उसे पर इंद्रिय जगत जो है वो आदि भौतिक है और आध्यात्मिक अर्थात की ये जो स्पिरिचुअल वर्ल्ड है उसको आध्यात्मिक जगत कहते हैं यह आध्यात्मिक जगत हो गया अधिक भौतिक जगत अर्थात की इंद्रियों से जिसको हम ग्रहण कर सकते हैं वो आध्यात्मिक और आदि देवी जगत जो है अभी देखिए की यह किस तरह से आदि आध्यात्मिक और आदि देवी को सेपरेट किया है हम लोग सोचेंगे की ये मटेरियल वर्ल्ड है और इसके साथ में स्पिरिचुअल शब्द है दो ही तो वर्ल्ड होंगे किंतु नहीं एक आदि दैविक बोल के एक तीसरी संसार की तीसरी जगत की यहां पे बात की गई है ये आदि देवी अर्थात की ये जितने भी हम सुपर नेचुरल पावर्स है ये जितनी भी हम जिसको हम आ कोई भी मेडिकल या तो मिर्जेक्युलस जो घटना परंपरा कहते हैं ये देवता जो है दानव जो है ये सब ये आदि देवी को जगत के साथ में संलग्न है और ये सब शक्तियां होती है जैसे की स्वामी जी खुद हमको एक बात बताते हैं एक प्रसंग है एक बार स्वामी जी जब वो भारत में प्रोग्रेस किया कर रहे थे परीव्रजन के रूप में भ्रमण कर रहे थे उसे समय उन्होंने एक जगह पर गए और एक व्यक्ति के बड़े में करने में उन्होंने सुना की उसके पास में कुछ चमत्कारिक शक्तियां है तो स्वामीजी उसको मिलने के लिए गए और फिर कहा की देखो भैया मैं भी तो इस तरह से साधना वगैरा करता हूं मैं जानना चाहता हूं की तुम्हारे पास में किस तरह की चमत्कारिक शक्ति है दिखाओ तो थोड़ा सा मैं भी देखूं भी एक नेचुरल क्यूरोसिटी भी होता है की आप यदि किसी इस तरह की चमत्कारिक शक्ति के बड़े में सुन तो जाकर के देखने को हमको इच्छा होती है और साथ-साथ में ही ठाकुर ने कहा है की यह सब शक्तियों से दूर रहना है क्योंकि शक्तियां है किंतु वह हमको धर्म के पद से विमुख कर देती है यानी की देखिए की यह फिजिक्स के नियम के अनुसार यह ग्रेविटी है यह लॉस ऑफ डायनामिक है जिसकी मदद से हम विमान स्पेस शटल वगैरा बना सकते हैं दिस इस स्ट्रेट साइंस और टेक्नोलॉजी इन मैथमेटिक्स जिसको की हम एक गणित के विज्ञान से लॉजिक से रेसनलिटी से समझ सकते हैं और एक आध्यात्मिक जगत है जहां पर जब ध्यान तपस्या प्रार्थना योग ये सब करके हम ईश्वर प्रताप करते हैं किंतु यह मिरेकल वगैरा क्या है वो कौन सी जगह में आएंगे उसके बड़े में तो ठाकुर ने बड़ा ही सावधान करके कहा है की यह सब चीजों से दूर रहना है तो स्वामी जी भी इस तरह से कुछ आश्चर्य नमक कुछ क्यूरोसिटी से वो उसके पास में गए तो इस वह मराठी आदमी था उसने कहा की देखिए मुझे अभी बुखार हो रहा है और मैंने सुना है की कोई साधु बुखार अपने सर पे हाथ रख देने से बीमारी दूर हो जाति है तो आप मेरे सर पे हाथ रखिए मेरा बुखार ठीक हो जाएगा तो मैं आपको मेरी शक्तियां दिखाऊंगा चमत्कारिक शक्तियां तो स्वामी जी मां लीजिए स्वामी जी ने उसके सर पे हाथ रख दिया अभी उसे दिन तो वह वापस ए गए कुछ दिन के बाद में यह जो व्यक्ति था उसका बुखार वो ठीक हो गया तो वह स्वामी जी के पास आया एक दिन बोला बहुत ही अच्छा आपने मेरे पे कृपा करके मेरा बुखार था मेरी जो बीमारी थी वह ठीक कर दी है अभी मैं आपको चमत्कार दिखाने के लिए रेडी हो तो अभी देखिए की स्वामी जी तो स्वयं और इतना मॉडर्न थिंकिंग वेस्टर्न फिलासफी रेसनलिटी ये सब तो उन्हें एकदम भर-भर के पड़ा है वो किसी से मूर्ख और ठाकुर भी स्वामी जी को आप मूर्ख नहीं बना सकते वाले थे कभी तो स्वामी जी यह एक एक सामान्य आदमी तो स्वामी जी को क्या वो एक मूर्ख बनाएगी या तो स्वामी जी को क्या वो कोई उनके उनके मां में कोई ब्रह्म प्रकट करेगा इसलिए स्वामी जी स्वयं विटनेस हो करके खड़े हैं स्वामी जी के साथ में ये सब मॉडर्न थिंकिंग वाले चार-पांच लोग भी थे वह सब वहां पर ऑब्जरवेशन के लिए खड़े थे सर्वप्रथम तो यह व्यक्ति था उसने अपने समय सब कपड़े निकाल दिए सिर्फ एक कॉपी पहन के रहा फिर इन लोगों ने पूरा ऑब्जर्व किया की शरीर पर कहानी पर कुछ छुपाने का कुछ नहीं अपने कपड़े नहीं पहने हैं सिर्फ कोपेन पहने है सिर्फ अंडरवेयर पहने है तो कुछ छुपाने का कोई प्रश्न ही नहीं है अभी स्वामी जी ने उसको अपना कंबल दिया अभी स्वामी जी ने खुद कंबल दिया है तो कंबल में भी कुछ छुपाने का प्रश्न नहीं है तो ये व्यक्ति ये कंबल इस तरह से ओड करके बैठ गया एक कोनी में चारों और सब लोग खड़े हैं देख रहे हैं की क्या है अभी की अभी वो व्यक्ति बोलना है स्वामी जी को और बाकी सब को बताइए आपको क्या चाहिए तो किसी ने बोला की मुझे वो जो इस तरह के अंगूर दे दो जो की उसे एरिया में कभी उगते ही नहीं है और कहानी फ्रांस वगैरा में वो होते होंगे तो उसने वो कंबल में से अंगूर का पूरा गुच्छा निकाल कर के उसको दे दिया और एकदम फ्रेश तो ये देख करके सब लोग आश्चर्य स्वामी जी खुद ये घटना का वर्णन करें स्वामी जी स्वयं एक प्रवचन में कहते हैं पावर ऑफ मन उसके रूप में प्रवचन अधिक करके स्वामीजी खुद आश्चर्यचक अभी एक बार यह स्टार्ट हुआ तो सभी लोगों ने अपनी-अपनी डिमांड स्टार्ट कर दी मुझे ये चाहिए मुझे वो चाहिए और जो जो कुछ भी कहते गए वो वो चीज वो व्यक्ति अपने कंबल में से निकाल कर के देता गया वो तो 100 लोग इतना आश्चर्य चकित किस तरह से ये संभव है हमने तो उसको उसके कपड़े निकाल करके पूरा ऑब्जरवेशन किया है कपिंग छोड़ करके उसने कुछ नहीं पहने था कंबल तो स्वामी जी ने स्वयं दिया है स्वामी जी जहां पर रहते थे उसे घर में यानी की उसे घर में आसपास में भी कुछ छिपा हुआ नहीं है और उसको उसकी नजर के सामने सभी लोग खड़े हैं सब लोग उसको ऊपर में एक नजर दाल करके खड़े की कुछ हाथ चला की ना करें कुछ गड़बड़ ना करें किंतु इसके बावजूद यह चीज कहां से वो प्रकट करता है आखिर में यह पूरा समाप्त होने के बाद में उसने वो गुलाब का फूलों का एक पूरा गुच्छा निकाला जिसको वो कहते हैं तो देखा की गुलाब के फूल एकदम साध्य प्रस्तुति एकदम फ्रेश है यह ना ही गुलाब की सीजन थी ना ही ये गुलाब का वो प्रदेश था फिर भी एकदम फ्रेश गुलाब और इसके ऊपर में जैसे की अभी भी सुबह की आस गिरती है तो किस तरह से पानी उसके ऊपर में वो पानी की बंदे जाम जाति है तो इस तरह से पानी की बूंद वाला एकदम फ्रेश गुलाब का एक पूरा झाड़ वो पूरा बू के उसने निकाल करके वो दिया ये देख कर के सभी लोग इतने आश्चर्य स्वामी जी ने उसको पूछा की अरे भाई तुमने ये सब चीज कैसे की बताओ तो तो वो हंसकर के बोलने लगा ये तो कुछ नहीं हाथ चला की है तो स्वामी जी बाद में कहते हैं की देखो हाथ चालाकी से इस तरह के चमत्कार नहीं होते होना संभोग नहीं है यह जो किया है उसके पीछे पावर्स ऑफ मन मां की एक अजीब भौतिक शक्ति का एक अधीन देवी शक्ति का एक कमल है तो देखिए की अभिभूति अर्थात यह फिजिकल वर्ल्ड जिसको की हम विज्ञान साइंस और टेक्नोलॉजी से समझ सकते हैं आध्यात्मिक अर्थात यह आध्यात्मिक जगत है जो ध्यान धरना तपस्या साधना से हम उसको हम उसमें समझ सकते हैं किंतु अधिक दैविक है वो भी एक जगत है उसका भी यह ज्योतिष शास्त्र है वगैरा उसका भी एक सत्य है उसकी भी एक सत्ता है हालांकि ठाकुर मां और स्वामी जी तीनों ने हमको कहा है की अभी देवक में बहुत ज्यादा जाना वो हमारे लिए श्रेया कर नहीं है आध्यात्मिक जगत ही हमारे लिए सर्वोच्च गति है सर्वोच्च रास्ता है सर्वोच्च पद है अभी जैसे महाराज कहते हैं की भगवान राम के साथ में मां सीता का अवतरण हुआ था इस तरह से जब भी उदाहरण देकर के जब जब भी ईश्वर नारद धरण करके अवतरण अवतरित होते हैं शक्ति भी नारे डे धरण करके अवतरित होती है और आध्यात्मिक अधिक भौतिक आदि भौतिक एवं आदि देवी शक्ति रूपी हो कुंबा नई रुपए हो अवतारें शाहिद लीला प्रकाशीय अश्विन अवतार के साथ में आध्यात्मिक आदि भौतिक और आदि देवी तीनों शक्तियां संलग्न रहती है अवतार इसीलिए चमत्कार कर सकते हैं अवतार के हाथ में सब कुछ होता है अवतार की इच्छा मंत्र से उनके भक्ति उनका आसपास का संसार चलित होता है और अवतार के हाथ में ही हमको आध्यात्मिक हमारी उन्नति हो यह आशीर्वाद देने की शक्ति होती है तो अवतार के साथ में ये तीन शक्ति के रूप में हो या तो फिर नई डे धरण करके अवतरित होने के साथ में जो शक्ति होती है उसके रूप में हो अवतार के साथ में रहकर के शक्ति उनके लीला प्रकाश में बहुत रूप से सहायता करती है सफाई कर सहायक रूप होती है अवतार की शक्ति यानी की अवतार के साथ में जो नई के डे के रूप में जिन्होंने जन्मदरण किया है वो तो अवतार की शक्ति ही है किंतु साथ में ही अवतार के पास में अधिक भौतिक आदि देवी और आध्यात्मिक यह तीन तरह की शक्तियां भी होती है जिसकी मदद से जीसस के जीवन में या तो फिर भगवान कृष्णा के जीवन में या तो फिर भगवान राम के जीवन में हमने देखा की किस तरह से आदि देवी चमत्कार वह कर सकते थे इस तरह से उनके प्रहार से हजारों रक्षा और मृत्यु वो शंकर होता था रक्सन का जीसस के जीवन में जैसे हमने देखा की एक छोटा सा बास्केट उसमें से वो ब्रेड निकाल कर के देते ही गए देते ही गए कितने लोगों की सुधा उससे शांत हुई सुधा संतोष हुई तो इस तरह से चमत्कार तो इनके साथ में होते ही है ठाकुर के जीवन में भी चमत्कार नहीं थे ऐसा नहीं हमने तो कितनी बार पढ़ा है देखा है सुना है हृदय गांव जा रहा था दुर्गा पूजा करनी थी और ठाकुर को साथ में ले जान के लिए उसकी बड़ी इच्छा थी किंतु मथुरा बाबू ने कहा नहीं दुर्गा पूजा तो मेरे घर में भी होगी तो ठाकुर वहीं पर उपस्थित रहे यह मेरी इच्छा है तो ठाकुर नहीं जा पे हृदय के साथ में तो ठाकुर ने कहा ठीक है तुम जब पूजा करोगे तब मैं सूक्ष्म रूप से वहां पर उपस्थित होगा है तो सही सही वही हुआ की संदीप पूजा है या तो मां की आरती है जो कुछ भी हृदय करता था देखा था की ठाकुर वहां पर सूक्ष्म रूप से उपस्थित है और बाद में ठाकुर ने कहा था की ये यहां से कोलकाता से हृदय के गांव सिहोद तक एक प्रकाश का रास्ता बन जाता है जिसके मध्य से जाकर के मैं वहां पे मां का दर्शन मां दुर्गा का दर्शन कर सकता हूं हृदय को आशीर्वाद दे सकता हूं तो ऐसी चमत्कारिक शक्तियां तो ठाकुर के पास में कितनी थी ठाकुर ने एक बार नरेंद्र को कहा था की देखो साधना करके मेरे पास में बहुत तरक्की एनिमा गरिमा स्टार की सिद्धियां ए गई है मैं तुमको देना चाहता हूं क्या तुम ग्रहण करोगे तो नरेंद्र कहां महाशय क्या यह सिद्धि ग्रहण करके मेरे आध्यात्मिक जीवन में कोई उसका लाभ होगा मेरे आध्यात्मिक जीवन में उसका कोई अच्छे से बेनिफिट होगा तो ठाकुर ने कहा नहीं देखो यह सब चीज तो आड धार्मिक जगत के लिए नहीं आध्यात्मिक उन्नति के लिए नहीं है किंतु तुम जो लोक कल्याण का जो कार्य करने वाले हो उसके लिए सहायक रूप होगी तो नरेंद्र सीधा-सीधे का दिया की तो महाशय रहने दीजिए मुझे लोक कल्याण के कार्य करने के अभी नरेंद्र ऐसा नहीं कहा था किंतु मैं का रहा हूं की लोग कल्याण के कार्य करने के लिए मेरी खुद की शक्ति बहुत है एन है ये थेफ्ट है आध्यात्मिक उन्नति के लिए जो हो वही आप मुझे दीजिए तो ये अतीत अविका शक्ति भी ठाकुर के पास थी आध्यात्मिक शक्ति भी थी अधिक भौतिक शक्ति सब तरह की शक्तियां ठाकुर के पास यानी की शक्ति था अवतार के पास में कर रूप से होती है आध्यात्मिक आदि भौतिक आदि देवी और साथ में ही नई रूप से अवतरित शक्ति स्वयं मां स्वयं इस तरह से इन चारों शक्तियों से शक्तिमान हो करके अवतार पृथ्वी पर धर्म चक्र प्रवर्तन के लिए वह उसका आर्मबीएच करते हैं धर्म चक्र प्रवर्तन का आरंभ करते हैं युग धर्म प्रवर्तन करते हैं शक्ति के बाद पीले अवतार दिव्या कार्याेंकलाप असंभव शक्ति नहीं होने से अवतार के जो दिव्या सब घटनाएं हैं कार्यलक हैं वो असंभव है वो आमदे निकट अभद्रहैया पड़े और हम हमारे सामने वो हमारी समझ के बाहर के हो जाते हैं शक्ति है तो अवतार इस जगत में वो धर्म चक्र प्रवर्तन कर सकते हैं शक्ति है तो अवतार हमको हमको हमारा मां परिवर्तन कर सकते हैं शक्ति के बिना अवतार को समझना हम शुद्ध मनुष्यों के लिए असंभव है तो आज यही तो कल फिर से मिलते हैं ओम शांति शांति हरि ओम तत्सत श्री राम कृष्णा