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स्स सर्व भम स्वरूप अवतार वेदांत में चार अवस्थाओं के बारे में बताया गया है स्वप्न जागर सुश पति और तुरीय तो हमको पता है कि स्वप्न जागृत और सुश पति यह जो तीन अवस्थाएं है मैं जागृत अवस्था में इस जगत को जो देख रहा हूं स्वप्न अवस्था में मैं जो जगत को देखता हूं और सुश पति अवस्था में शायद मैं बेहोश हो जाऊं ना कि कोमा में चला जाऊं तो एक उसमें जगत का अभाव दिखता है जागृत अवस्था में अपनी आंखों से अपनी कान से मैं इस जगत को देख सकता हूं सुन सकता हूं स्पर्श कर सकता हूं और स्वप्ना अवस्था में मन के द्वारा मैं यह सब कुछ ग्रहण करता हूं जैसे हमने मैक्रो कजम में देखा ही है कि स्वामी जी ने कहा है कि हम लोग तो सिर्फ इस आंख से नहीं देखते आंख सिग्नल पहुंचाती है ब्रेन को फिर ब्रेन उस सिग्नल को इंटरप्रेट करता है तब हमको कुछ दिखता है तो सपना अवस्था में ऐसा होता है कि डायरेक्ट सिग्नल जनरेट होते हैं व उसमें वो आंख का वो जो बीच में वो जो मिडल मैन का जो काम है मीडियम का काम वो नहीं रहता तो उसमें एक जगत दिखता है किंतु इन तीनों जगत से परे एक तुरीय जगत है जिसको कि एक सुपरकॉन्शियस स्टेट कहते हैं जहां पे वहां पे भी हमको कुछ विजंस होते हैं ठाकुर के विजंस की भरमार है एक के बाद एक दर्शन ठाकुर को हुए हैं तो वो दर्शन देख कर के ही पता चलता है कि सुपरकॉन्शियस लेवल में भी एक दूसरा जगत हमको दिखाई देता है किंतु वह जो जगत दिखता है वह समय और अवकाश की सीमाओं के बंधन में यह जो बंधा हुआ जो आज का जगत है उससे कहीं ऊपर में कहीं उर्ध्व वह जगत है और उस जगत में जाकर के सुपरकॉन्शियस जगत में जाकर के आज अभी हमारी नजर के सामने जो जगत दिख रहा है जागतिक विश्व उसके जितने भी राज है जितने भी पहलू है जितने भी सीक्रेट है जितनी भी मिस्ट्रीज है वो सब वहां पे ओपन हो जाते हैं वहां पे यह जगत उस जगत में यह जगत खुली किताब की तरह दिखता है आज हम इस यहां पर रहते हैं मुझे बहुत सारी बातें समझ में नहीं आती कि अच्छा यह जीवन क्या है मृत्यु क्या है किसी का बिहेवियर इस तरह का क्या है मेरे खुद के भीतर में ऐसा तो क्या है जिसको कि मैं चाहता हूं कि मैं ऐसा व्यक्ति होना किंतु ऐसा नहीं हो पाता और ही किसी तरह से बिहेव करता हूं व्हाट इज द मिस्ट्री ऑफ ह्यूमन माइंड व्हाट इज द मिस्ट्री ऑफ ह्यूमन साइकोलॉजी ह्यूमन सनेस यह जितने भी राज है वो हायर कॉन्शियस लेवल पर जाकर के वह सब खुल जाते हैं तो बड़ी एक सुंदर कहानी इसके बारे में है खोखा महाराज की सुबोधा नंद जी महाराज सुबोधा नंद जी महाराज अर्थात ही श्री राम कृष्ण देव के एक सन्यासी शिष्य बड़ी ही छोटी उम्र में ठाकुर के पास आए थे और बाद में फिर ठाकुर से ही उन्होंने दीक्षा लेकर के स्वामी जी के साथ में वराह नगर मठ में फिर राजा महाराज के साथ में कुसुम सरोवर जाकर के यहां वगैरह सब तपस्या की थी और फिर आखिर में जब स्वामी जी ने बेलूरमठ की रचना की तो बेलूर मठ में भी वह रहे थे और आखिरी तक वह रामकृष्ण संघ के एक जिनको हम ट्रस्टी कहते हैं कि वोह ट्रस्टी भी थे रामकृष्ण संघ के तो उनका एक महत्व जीवन था जितने भी लड़कों को श्री राम कृष्ण देव ने स्पर्श किया था आध्यात्मिक तना जिनके भीतर में ठाकुर ने जागृत करवा दी थी उन सभी का एक महत जीवन तैयार हो गया था हो सकता है कि सभी ने शायद स्वामी जी की तरह पूरे विश्व में घूम कर के व्याख्यान ना दिए हो राम कृष्णानंद जी शशि महाराज की तरह दक्षिण भारत में जाकर के पूरे दक्षिण भारत में श्री रामकृष्ण देव का भाव प्रचार ना किया हो शायद शरत महाराज यानी कि स्वामी शारदानंद जी की तरह रामकृष्ण संघ के जनरल सेक्रेटरी होकर के उन्होंने शायद पूरे संघ का जिम्मा अपने सर पर ना उठाया हो किंतु फिर भी जो सहज सरल लाइफ उन्होंने जो लीड किया है वो बड़ा ही एमपी है तो यही है हमारे खोका महाराज या तो सुबोधा नंद जी तो सुबोधा नंद जी एक बार कहते हैं कि मुझे एक स्वपना आया अभी देखिए कि किस तरह से यह जो स्वप्न जागृत सुश पति और तुरीय यह सब एक दूसरे के साथ में कभी-कभी कैसे वो मिक्स हो जाते हैं तो सुबोधा अंद जी महाराज कहते हैं कि मुझे एक बार स्वप्न आया कि मेरा देहांत हो गया है मेरा मृत्यु हो गया है और मैं एक ऐसे जगत में यात्रा कर रहा हूं जो कि इस लोक के परे है तो उस जगत में वह यात्रा कर रहे हैं कर रहे हैं अचानक एक जगह पर आकर के वो अटक गए उनको समझ में आया अभी मैं थोड़े से चंद कदम भी और आज जाऊंगा तो ठाकुर और मां का दर्शन होगा और जैसे ही ठाकुर और मां का दर्शन होगा मैं उनके भीतर में विलन विलीन हो जाऊंगा मेरा देह उनके भीतर में विलय हो जाएगा अर्थात कि एक जो सेपरेट आइडेंटिटी है जिस तरह से हमने डिस्कस किया था कि हम सबके भीतर में एक सूक्ष्म शरीर रहता है यह सूक्ष्म शरीर जन्म जन्मांतर की यात्रा करता है संस्कारों को बटोर होता है मेमोरीज या तो फिर याददास्त बटता है कुछ शुभ कर्म करता है कुछ अशुभ कर्म करता है उसका बैलेंस शीट फिर नए जन्म में जाता है किंतु जिस जन्म में मुक्ति होती है उस जन्म में यह सूक्ष्म शरीर वह लय हो जाता है सूक्ष्म शरीर विलीन हो जाता है पंच महाभूत में से आया था उसमें चला गया और फिर यह हमारी चेतना है व्यष्टि चेतना इंडि ल कॉन्शसनेस वो सुपर कॉन्शसनेस में मर्ज हो जाती है तो अभी सुबोधा नंद जी ने देखा स्वपने में कि उनका देहांत हो गया है और पर जगत में यात्रा कर रहे हैं यात्रा करते करते एक ऐसे मुकाम पर आ गए कि वहां से बस चंद स्टेप चंद वो कुछ आगे जाएंगे तो ठाकुर और मां का दर्शन होगा और उनके भीतर में विलीन हो जाए यहां पर सुबोधा नंद जी महाराज गए उन्होंने सोचा कि यदि मैं यहां तक आ ही गया हूं और अभी मेरे पास में मेरे ऊपर में अपेक्षा रख कर के जो लोग बैठे हैं हमने देखा ऑलरेडी कि सुबोधा नंद जी महाराज हालाकि दीक्षा नहीं देते थे किंतु बहुत सारे लोगों को बहुत सारे भक्त उनके पास आते थे और उनसे आध्यात्मिक उपदेश ग्रहण करते थे तो यह उपदेश ग्रहण करने वाले भक्तों की संख्या तो कम नहीं थी सुबोधा जी महाराज के पास आने वाले की तो महाराज ने सोचा अभी मैं जद यह जो कुछ आखिरी स्टेप्स है मेरी अंतिम यात्रा के वो जद मैं स्टेप्स ले लूंगा ठाकुर मां ठाकुर और मां में विलीन हो जाऊंगा तो फिर मैं बाहर वापस आकर के मेरी अपेक्षा मेरे और देख कर के जो लोग यह देखता वो सीखना चाहते हैं कि आध्यात्मिकता क्या है आध्यात्मिक उपदेश क्या है उन लोगों को मैं ठाकुर तक गाइड नहीं कर पाऊ इसलिए उन्होंने सोचा कि मैं यहीं पर रुक जाता हूं और फिर देखा पीछे में कि उनके जितने भी डिवोटा है वह सब आ रहे हैं एक के बाद एक और मुख महाराज सबको कह रहे हैं कि अच्छा ठीक है चलो इस डायरेक्शन में यहां से आगे जाओ वहां पर ठाकुर और मां का दर्शन होगा ऐसा करके सबको गाइड करने लगे वहां पर वो खड़े रह करके तो एक के बाद एक उनके जितने भी डिवोटा है सबको वह ठाकुर और मां की ओर गाइड करते हैं आखिर में एक डिवटी उनकी आई स्त्री भक्त जो कि वो बड़ी ही उनके प्रति निष्ठावान श्रद्धावन थी तो जैसे ही खोखा महाराज ने कहा कि तुम इस रास्ते से आगे जाओ ठकुर और मां का दर्शन होगा उस उनके शरणं में जाओ तो इस डिवटी ने कहा कि नहीं जब तक आप मेरे साथ में नहीं आएंगे मैं यहां से आगे नहीं जाऊंगी तो महाराज ने कहा कि जद मैं वापस तुम्हारे साथ में जद आऊंगा ठाकुर और मां के पास में तो मैं उनके भीतर में विलीन हो जाऊंगा मेरा वापस आना नहीं होगा और जो डिवटी आ रहे हैं यहां पे उनको मैं गाइड नहीं कर पाऊंगा ठाकुर और मां के पास में तो यह डिवोटा बड़ी ही जीत करने लगी कि नहीं मैं अकेली नहीं जाऊंगी आप भी मेरे साथ में चलिए तो आखिर में खोका महाराज ने उसकी बात स्वीकार कर ली और वो दोनों गए ठाकुर और मां वहां पे विराजमान थे उनके चरणों में उन्होंने प्रणाम किया और जैसे ही प्रणाम किया वैसे ही ये खोखा महाराज सुबोधा अंद जी महाराज ठाकुर के भीतर में विलीन हो गए किंतु विलीन हो गए उनको किंतु दिख रहा है फिर भी हालांकि अपना इंडिविजुअल अस्तित्व नहीं रहा बाहर वापस नहीं आ सकते किंतु फिर भी देख रहे है ठाकुर के भीतर में से कि अभी क्या चल रहा है बाहर में अभी वो डिवटी सडन पूछती है ठाकुर को कि अरे सुबोधनंद जी महाराज तो यहीं पे थे आपको प्रणाम करके अदृश्य क्यों हो गए तो ठाकुर ने कहा कि अरे खोखा एक उनकी फिरत आश में है ना कि वो खोखा महाराज के अभी वापस आएंगे वो तो अभी मेरे भीतर में चले गए अभी उनका वापस आने का कोई प्रयोजन नहीं है कोई संभावना नहीं है और जैसे यह दृश्य आया खोखा महाराज की जो सपना बंद हो गया तो देखिए कि ये किस तरह से ये जो परलोक है लोक और परलोक य स्वपना इन दोनों के बीच में किस तरह से एक ब्रिज बनाता है किस तरह से एक सेतु बनाता है ठाकुर को जोने जागृत अवस्था में यह सब दर्शन होते थे मां सीता का दर्शन हुआ था वहां पंचवटी के नीचे में बैठे थे एकाएक देखा कि एक बड़ी ही रूप वती मां वहां से वह आ रही है और जैसे ही वह वहां पर पंचवटी के वो वृक्ष के नीचे में आई वृक्ष के ऊपर में हनुमान जी बैठे हुए थे जंप लगा कर के मां के चरणों में आ गए और उनके उनकी स्तुति करने लगे यह देख कर के ही ठाकुर ने कह दिया कि हां यह वही है जन्म दुखिनी सीता जिसका जन्म वैसे तो जगत के कल्याण के लिए हुआ था किंतु जीवन भर दुख कष्ट सहन करने के अलावा उनको और कुछ नहीं मिला तो ये देखिए कि ठाकुर को वैसे जागृत अवस्था में दर्शन होते थे यह भी एक दर्शन का प्रकार है और यहां पे यदि सुबोधा अंद जी महाराज को वैसे तो बोलते हैं यह सपना है किंतु हम इसको सिर्फ एक कॉमन ड्रीम कैसे मान ले हमको भी तो बहुत सारे सपना आते हैं किंतु जैसे ही हम सुबह को निद्रा में से खड़े होते हैं उठते हैं वैसे ही यह सब स्पन कहां विलीन हो जाते हैं रेयरली हमको कुछ याद रहता है तो वो जो सपना है जो कि कॉमन ड्रीम्स है जो कि हमको नींद में से उठने के बाद में रेयरली कुछ याद रहता है और यह जो कुछ कुछ स्वपना है नींद में से उठने के बाद में भी वो हमारे साथ में रहते हैं मेरे साथ में भी ऐसा हुआ है मुझे भी ऐसे कुछ कुछ स्वपना आए हैं जो कि मुझे बड़े ही लंबे समय तक याद है अभी भी मुझे याद है एक स्वपना में बहुत छोटा था तब आया था अभी भी मुझे वो स्वप्न याद है तो पता है क्या है ये जो कुछ कुछ स्पन होते हैं ना बहुत लंब े समय तक हमको याद रहते हैं मुझे लगता है कि यह स्वपना वो सुपर कॉन्शियस वर्ल्ड जो है पर जगत पर जगत के साथ में एक सेतु बनाते हैं एक ब्रिज बनाते हैं और वहां की खबर इस जगत में आकर के हमको देते हैं तो ये जो वेदांत के जो सिद्धांत है वो प्रैक्टिकल लाइफ में हमको कैसे देखने को मिलते हैं तो अभी मां के जीवन की गंभीरानंद जी महाराज द्वारा लिखित श्री मां शारदा देवी के इस जीवन के बारे में थोड़ा सा पाठ करते हैं अभी तक हमने देखा कि किस तरह से मां शारदा ने मां सिंह वाहिनी के सामने धरना दिया मां ने प्रकट होकर के दवाई दी और इस तरह से मां की जो बीमारी थी वह ठीक हो गई और इसी की वजह से मां के जो धरना देने की वजह से बहुत सारे लोग कहते हैं कि देवी जाग्रता हो गई है और उस विस्तार में जितने लोगों को जब भी कोई इस तरह की कठिन व्याधि या कठिन उपाधि ऐसा कुछ आ जाता है तो मां के सामने धरना देकर के उनको शांति प्राप्त होती है आगे पढ़ते हैं सिंह वाहिनी प्रति श्री मां चिर जीवन अगाध श्रद्धा भक्ति पोषण करी तेन सिंह वाहिनी के प्रति श्री मां चीर जीवन हमेशा के लिए अगाध भक्ति रखती थी तीनी विश्वास भोरे शेखा का माटी कटाई पुरिया राखी तेन निजे नित्य उ हार किछु ग्रहण करी तेन राधु के एकट एकट आते दते एवं अपर केयो मायर महिमा सुनाते वो बड़े ही विश्वास के साथ में एक छोटी डिब्बी में मां की माटी सी वाहिनी के मंदिर में जाएंगे वहां पर माटी है मंदिर के सामने व एक छोटे डिब्बे में भर कर के रखेंगी नित्य उसमें से कुछ थोड़ा सा ग्रहण करेगी राधु को भी थोड़ा सा खिलाएगी और जो भी डिवोटा इस मां के पास में आते हैं उनके पास में भी सिंहवाहिनी की महिमा का गुणगान करेगी हमको लगता है कि इस मिट्टी में पता नहीं कितने जर्म होंगे कितने वायरस बैक्टीरिया होंगे इस तरह की मिट्टी खाने से कितना डेंजरस है किंतु जो अभी विश्वास और भक्ति एक ऐसी चीज है कि वहां पर साइंस भी काम नहीं करता यह हमको साइंस सास की जगह पर है विश्वास और श्रद्धा अपनी जगह पर है और यह भी एक बात है कि हालांकि राधू को इतनी मिट्टी खिलाई फिर भी राधु को तो जो होना था सो हो कर के ही रहा पागलपन का दौरा जो उसको पड़ता था वह तो उसको होना ही था तो कलकाता में वो उस प्रेग्नेंट है कलकाता में वो रह रही है तो तो बोल रही है कि मुझे थोड़ा सा भी हलने आवाज आने से उसको कहती है कि अरे बहुत जोर से आवाज हो रही है बहुत जोर से आवाज हो रही है मेरे से सहन नहीं होता मां कहती है कि अभी उद्बोधन में रहते हैं इतने सारे साधु भक्त ब्रह्मचारी उनका आना जाना यहां पर सब कुछ काम बंद करके सब लोग चुपचाप बैठे रहे ऐसे कैसे तो होगा तो एक काम करते हैं चलो निवेदिता का जो स्कूल है उस समय शायद वहां पर छुट्टी होगी तो वहां पर चले जाते हैं तो अच्छा निवेदिता की स्कूल में चले गए वहां पर वैसे तो और ज्यादा कोई एक्टिविटी नहीं उद्बोधन की तरह हल्लागुल्ला नहीं फिर भी छोटा सा भी आवाज होने से राधू कहती है अरे बाप रे बहुत जोर से आवाज हो रहा है मुझे ऐसा लग रहा है जैसे कि कोई मेरे सर पर हथोड़ा मार रहा है मेरे छाती में दर्द हो रहा है पता नहीं क्याक उसको तो अच्छा ठीक है तो मां ने ठीक किया कि चलो अभी एक काम करते हैं क्वाल पाड़ा चलते हैं क्वाल पाड़ा गांव है गांव में वो ज्यादा हल्लागुल्ला नहीं होगा तो व राधु को लेकर के क्वाल पाड़ा है बहुत सारे लोगों ने कहा कि मां इस तो प्रेग्नेंट है तो पता नहीं कब क्या उसको जरूरत पड़ जाए आप गांव में जा रहे गांव में डॉक्टर कहां मिलेगा कोलकाता में रहिए तो कलकाता में कोई कुछ भी जरूरत पड़ने से डॉक्टर ट्रीटमेंट वगैरह मिल जाएगा तो मां कहती है कि नहीं नहीं अभी जब राधू कहती ही है कि उसको यहां पे पसंद नहीं है बहुत आवाज होती है तो चलो मैं चलती हूं तो ठीक है राधू को लेके कुवाल पाड़ा है कुवाल पाड़ा आश्रम में भी वो नहीं रह पाएगी आश्रम में भी तो एक्टिविटी होगी तो उसको लेकर के जगदंबा आश्रम में आए जगदंबा आश्रम यानी कि वो थोड़ा सा जंगल में है वो गांव से दूर है बिल्कुल शांति है थोड़ी सी भी आवाज नहीं है तो वहां पे रह रहे हैं और वहां पे भी अभी राधू ने वो असीम खाने का वो जो ओपियम खाने का अभ्यास बना दिया है ओपियम उसको नहीं मिलेगा तो जोर-जोर से चिल्लाएगी मां को गाली देगी क्या सब नाटक करेगी ऊपर से प्रेग्नेंट है तो अभी रात होती है तो मां ने वरदा महाराज को बोला कि वरदा देखो मैं तो इस जंगल में रह रही हूं इस पागल को लेकर के पता नहीं जंगल में कब क्या हो जाए तुम एक काम करना सुबह-सुबह को दिन दिन भर में तुम जयराम बाटी में रहना वहां का जो काम है वो करना रात रात को वापस आ जाना कुवाल पाड़ा तो ये वरदा महाराज बेचारे उनकी वो फटी टटी साइकिल वो लेकर के सुबह को जाते थे जयराम बाटी शाम को आते थे वापस कोवाल पाड़ा मां के साथ में रहते थे और दोनों मां और वरदा महाराज और वो नवा सनर बहु अर्थात की वो नवा सन में रहने वाली एक स्त्री भक्त ऐसे दो तीन लोग बैठ कर के राधू तो अपने कमरे में है तो बाहर में जहां पर एक प्रांगण है खुला सा वहां पर वोह बैठ कर के ये तीनों लोग एकदम हल्के आवाज में बातें करते रहते थे तो उन बातों का अभी हम मां को तो इतना कष्ट हो रहा है और राधु के पागलपन की वजह से कहां-कहां राधु उनको घुमा है किंतु एक तरह से हमको यह बेनिफिट हो रहा है कि उन दिनों की बातें उन कुछ संध्या की बातें जबकि भक्त और भगवान ये अकेले हैं और कोई डिस्टरबेंस नहीं जगत पूरा शांत हो गया है उस समय के दिलों की जो बातें उस मां की जो बातें का वर्णन वरदा महाराज ने किया है वो पढ़ेंगे तो हमको कितना अच्छा लगेगा ये भक्त और भगवान जहां पर सिर्फ दो ही रहते हैं अल्ल्ला गुल्ला नहीं होता हजार लोग आकर के बैठ नहीं जाते वहां पर एक कैसी आध्यात्मिक शांति विराज करती है कथामृत देखेंगे पूरा पढ़ेंगे कथामृत मेरा फेवरेट पार्ट कौन सा है पता है कि मास्टर महाशय को ठाकुर ने कहा कि बीच-बीच में किसी ऐसी एकांत जगह पर जाकर के जब ध्यान तपस्या करनी चाहिए तो मास्टर महाशय ने ठीक किया कि अच्छा चलो वह दक्षिणेश्वर में ही आते हैं दक्षिणेश्वर में ही ठाकुर के पास में रह कर के वह साधना करेंगे तो वह दक्षिणेश्वर आए फिर ठाकुर ने कह दिया था कि देखो यहां पर तो कालीवाड़ा जो अन्न है वह तो गरीब लोगों के लिए पकाया जाता है तो तुम्हारा यहां से अन्न ग्रहण करना उचित नहीं है तो मास्टर महाशय अपने साथ में एक स्पेशल कुक को लेकर के आए थे तो यह रसोया उनके लिए रसोई बना देगा तो ठाकुर ने कालीवाड़ा की फिर ठाकुर ने कहा कि देखो तुम एक काम करना वहां पर व जहां पर बेलतला बेलतला यानी कि बिल्व वृक्ष है उसके नीचे में रहना वहां पर रह कर के अच्छे से तुमको ये होगा जब ध्यान साधन भजन करने की सुविधा रहेगी तो मास्टर महाशय कहते हैं कि नहीं नहीं मैं वहां पर पंचवटी जो है वहां पर नबत जो है नौबत के ऊपर के कमरे में रहूंगा वहां पर शायद उस समय मां नहीं होंगी तो मैं नबत के ऊपर के कमरे में रहूंगा क्यों क्योंकि मास्टर महाशय कवित्वम वो कवि हृदय है उनका और वहां पर पहले मंजिल से पूरा सुंदर गंगा है ये सुंदर चांदनी है आकाश है यह सब वृक्ष है बागान है बड़ा ही सुंदर उनको दृश्य देखने को मिलता तो आखिर में किंतु उन्होंने ठाकुर की बात मान ली और वहां पर चले गए किंतु उन कुछ दिनों का वर्णन मास्टर महाशय ने किया है कि ठाकुर के साथ में रह रहे हैं और ठाकुर दिन भर किस तरह से अपना समय बिताते हैं मास्टर महाशय के साथ में बात करते हैं एक बार मास्टर महाशय ने ठाकुर ने मास्टर महाशय को भेजा कि जाओ थोड़ा सा जप करके आओ ध्यान करके आओ उसके बाद में किंतु मास्टर महाशय समय पर ठाकुर के पास वापस नहीं आए तो ठाकुर वहां पर आकर के देखने को आए कि माश महाशय के साथ में क्या हो रहा है देखा कि माश महाशय सामने में ही आ रहे हैं रास्ते में मिले तो ठाकुर ने क्या कहा पता है थोड़ी देर के लिए तो मुझे यह संशय हो गया ये दीवाल मने वो दीवाल जमप करके भाग तो नहीं गया वो सशधर पंडित की तरह ना कि किसकी तरह कौन एक पंडित इस तरह से वहां प रह रहा था ठाकुर के साथ में वो वो दीवाल को जम करके भाग गया था तो ठाकुर ने कहा कि मुझे एक क्षण के लिए संदेह हो गया कि ये भी तो भाग नहीं गया किंतु फिर लगा कि नहीं नहीं यह जो कुछ करता है बड़ा सोच समझ करके करता है वो कुछ दिनों की बातें फिर यह जो इंस्पायर्ड टोक लिखी गई है जहां पर स्वामी जी थाउज आइलैंड पार्क में इनके अपने डिवटी 12 13 उनके जो क्लोज डिसाइल थे अमेरिकन डिसाइल उनके साथ में रहे हैं फिर व जो रिजली मेनर के कुछ दिन ग्रेट समर जोसेफाइन मैक्लाउड उसको कहती थी कि स्वामी जी अमेरिका से अमेरिका आए हैं भारत से सेकंड विदेश यात्रा के दौरान और उस समय उनका स्वास्थ्य अच्छा नहीं था तो ये जो फ्रांसिस लगेट है उन्होंने स्वामी जी को कहा कि मेरा सुंदर वो गार्डन वहां पे है गांव में सुंदर मेरा एक बागान है मकान है आप आइए तो स्वामी जी गए रिजली मैनर में और वहां बेटी लगेट अर्थात की फ्रांसिस लगेट की वाइफ उसने उन्हीं लोगों को चंद लोगों को इकट्ठा किया था जो कि स्वामी जी के बड़े ही परिचित थे और जिनके साथ में रह कर के स्वामी जी को रिलैक्सेशन मिल सकता है कुछ कुछ लोग ऐसे होते हैं ना कि जिनके साथ में रहने से ही टेंशन बढ़ जाता है बड़ी सुंदर कहानी है एक बार ये सेकंड यात्रा की ही बात है हमको पता है कि यह जो कृपानंद बोलकर के स्वामी जी का एक अमेरिकन डिसाइल था जिसका नाम था लियोन लैंडसबर्ग स्वामी जी जब पहली बार अमेरिका आए थे न्यूयॉर्क तो उसके साथ में रहते थे यह दोनों एक ही मकान में रहते थे बाड़े में और यह क्या था लैंडसबर्ग एक जर्नलिस्ट था और जू था और वैसे बड़ा ही स्पिरिचुअली इंक्लाइंड था तो स्वामी जी का उसने अनुगती स्वीकार किया और स्वामी जी के न्यूयॉर्क के प्रथम विजिट के न्यूयॉर्क के जो लेक्चर ऑर्गेनाइज करवाने में लेक्चर का डिक्टेशन लेने में और जो आने वाले हैं जो श्रोता वृंद उनको की बैठक व्यवस्था करने में यह सब करने में और स्वामी जी की बड़ी सहाय करता था किंतु जैसे जैसे दिन जाते गए जैसे-जैसे दिन बीतते गए वैसे-वैसे स्वामी जी के उस लेवल के डिसाइल आना शुरू हुए जिनकी आध्यात्मिक अनुभूति भी थी और स्वामी जी के बड़े ही अनुग थे तो अब जैसे कि यह जो जिसने कि ये इंस्पायर्ड टोक लिखी है तो ऐसे बहुत सारे क्लोज डिसाइल आना शुरू हुए और जैसे उन डिप का आना शुरू हुआ ये लियोन लैंडसबर्ग को ऐसा लगा कि स्वामी जी अभी मेरे पर ज्यादा ध्यान नहीं देता अभी जैसे कि यह ओली बुल है मिसेस ओली बुल है फिर ये जोसेफाइन मैक्लाउड है फ्रांसिस एंड बेटी लगेट है ये सब उस लेवल के डिसाइल थे जिनका कि शायद स्वामी जी के साथ में जन्म जन्मांतर का नाता था जिनके बारे में आज रामकृष्ण संघ के सभी साधु ब्रह्मचारी भक्त डिवोटा इनके बारे में जानते हैं इतने बड़े-बड़े नाम तो एक बार वे लोग आना शुरू हुए तो ये लियोन लैंडसबर्ग को ऐसा लगने लगा कि अभी स्वामी जी मुझे इग्नोर कर रहा है तो उसके भीतर में ये रेजेंटमेंट बिल्ड अप होने लगा और फिर जब किंतु फिर भी भीतर में से तो स्वामी जी के प्रति श्रद्धा थी तो ये जो थाउजेंड आइलैंड पार्क स्वामी जी गए तो वहां पर वो भी गया था और स्वामी जी की सभी बातें उसने बड़े अच्छे से सुनी और फिर वहां पर स्वामी जी ने जो सर्वप्रथम संन्यास दीक्षा दी विदेश में उसमें से ये एक था एक थी एक लेडी जिसको कि स्वामी जी ने नाम दिया स्वामी अभयानंद और यह दूसरी दूसरा ये लियोन लेंस बर्ग जिसको कि स्वामी जी ने नामकरण किया स्वामी कृपानंद तो अभी ये स्वामी कृपानंद वापस आए न्यूयॉर्क और स्वामी जी के साथ में रह रहे हैं किंतु ये रेजेंटमेंट बिल्ड अप होती जाती है फिर स्वामी जी से दूर रहने के लिए चले गए किंतु स्वामी जी के बारे में सब समय भीतर में भीतर में एक नेगेटिव एटीट्यूड नेगेटिव चिंतन स्टार्ट हुआ स्वामी जी जब भारत में वापस आ गए उस समय उसने फिर वो जो पागलपन का जब दौरा पड़ता है ना तो मनुष्य का जो पतन जब होता है तो किस हद तक पतन होता है वो समझ में नहीं आता जो लोग वैसे तो बड़ी आध्यात्मिक ऊंचाई की बात करते ग तो ठाकुर ने कहा ना कि इस तरह के पंडित जैसे गीध की तरह उड़ते तो बड़े हवा में है किंतु नजर हमेशा रहती है वो कचरे के कूड़ेदान के ऊपर में तो वैसे ही लैंडसबर्ग का हुआ वो वैसे तो अपने को साधु कहलाता था मंक कहलाता था कृपानंद नाम लेकर के घुमता था किंतु स्वामी जी जी को गाली देना शुरू कर दिया मन में मन में स्वामी जी के भक्तों को गाली देना शुरू कर दिया और अमेरिका के न्यूज़पेपर में सब उल्टा पुल्टा प्रिंट करना शुरू किया कि ये जो स्वामी जी के जो डिसाइल है वे लोग किस तरह का एक कल्ट बना कर के किस तरह की तांत्रिक क्रियाएं करते हैं वहां पे कामिनी और काम यह सब विधियां होती रहती है सब उल्टा पुल्टा लिखना शुरू किया ठीक है अभी स्वामी जी को तो यह सब पता चला अमेरिका में स्वामी जी के जो डिसाइल थे उन्होंने मैसेज भेजा स्वामी जी बोलते हैं चलो अभी जिसकी जो मति है जिसकी जो गति है ठाकुर जिसको जो सिखाते हैं ऐसा होगा ठीक है स्वामी जी ये घटना तो हो गई स्वामी जी अर्था स्वामी जी अर्थात की स्वामी विवेकानंद सेकंड टाइम अमेरिका आए सेकंड टाइम अमेरिका आए तो अभी बड़ा ही एक इंटरेस्टिंग इंसिडेंट एक डॉक्टर के वहां पर बैठे थे डॉक्टर के वहां पर बैठे थे अपना ब्लड प्रेशर मेजर करवा रहे थे बीपी तो डॉक्टर वो जो स्टेथोस्कोप होता है ना वो तो डॉक्टर ने वो अपने कान में डाला हुआ था और वो स्वामी जी का बी बीपी मेजर कर रहा था उस समय कि ब्लड प्रेशर कितना है पल्स हार्ट और पल्स वगैरह कितना है अभी ये जो डॉक्टर था वो भी स्वामी जी का बड़ा ही अच्छा डिवोटा था और ये जो डिवोटा का जो सर्कल होता है ना भक्त मंडल जिसको हम कहते हैं और भक्त मंडल में ये लैंडसबर्ग के बारे में सभी को पता था कि ये किस तरह से उसने स्वामी जी के साथ में धोखा दारी की है तो ठीक है अभी क्या करेंगे अभी ये तो डॉक्टर है डॉक्टर के पास में कोई भी आएगा तो उसकी ट्रीटमेंट करने की तो डॉक्टर की वो रिस्पांसिबिलिटी होती है और फिर वो थोड़ा सा उदार हृदय था तो लैंडसबर्ग यह उस समय कुछ आर्थिक कठिनाई में था आर्थिक विपद में था तो वह डॉक्टर के पास आता था बीच-बीच में ट्रीटमेंट के लिए भी शायद होगा और आर्थिक सहाय के लिए भी शायद होगा तो अभी देखिए कि किस तरह से यह सीन ये मने घटना होती है प्रसंग होता है स्वामी जी बैठे हुए हैं डॉक्टर के साथ में सामने में डॉक्टर स्वामी जी का पल्स मेजर कर रहा है उस समय एगजैक्टली उस समय वो लेंस बर्ग का उस कमरे में एंट्री हुई उसके भीतर में उसका आगमन हुआ जैसे ही स्वामी जी ने उसको देखा उनका पल्स फट कर के उछल उठा और ये डॉक्टर तो मेजर कर रहा था वो जोर से अट्टहास कर उठा जोर से हंस उठा कि देखा स्वामी जी मैं समझ गया कि आपका पल्स जम कर गया इसको देख कर के ये देखिए कि इवन स्वामी विवेकानंद भी हो सकता है कि उन्होंने उसको मन से क्षमा कर दी हो और हो सकता है कि इवन जब वो लैंडसबर्ग उनके सामने में आया होगा बाद में स्वामी जी ने उसके साथ बात किया उसी घटना में कि वो जैसे ही वो कमरे में एंटर हुआ स्वामी जी ने बड़े हीने उसके साथ सभ्यता से बात किया ऐसा कुछ नहीं है किंतु वो जो पल्स जंप हुआ वो डॉक्टर ने एटली मेजर किया और उसने इमीडिएट कह दिया स्वामी जी आपका पल्स कितना जंप हो गया है ये जो रिट्रीट जो होती है ना देखिए जगत में रहने से ऐसा सब समय होता है कि जिन लोगों को देखने से ही हमको गुस्सा आ जाता है ऐसे लोगों के सामने ना फिर वो साधना भजन हम करते हैं ना तो जैसे कि इनके सामने जाकर के सब मिट्टी में मिल जाता है तो बेटर है कि ऐसा कोई रिट्रीट में जाकर के जब ध्यान साधन भजन करें तो वैसे ही ये मास्टर महाशय का यह जो ठाकुर ने उनको बुलाया था इससे अपने ऑर्डर में कितने सुंदर-सुंदर प्रसंग है थाउज आइलैंड का देखा हमने फिर ये रिजली मेनर का देखा फिर यह जो कैंप टेलर बोलक के वह वहां पे एक जगह है अ कैलिफोर्निया में वहां पे स्वामी जी गए थे उन दिनों का बड़ा ही सुंदर वर्णन है फिर शांति आश्रम का बड़ा सुंदर वर्णन है तुर्या अंद जी वहां पर गए थे उस समय का तो यह जो रिट्रीट अच्छा अभी यहां पे दूसरी भी एक बात है कि यह रिट्रीट के बारे में मैं जो कह रहा हूं वो इसलिए क्योंकि इस समय का जो दीपोत्सव अंक है रामकृष्ण ज्योत का आपको पता होगा कि रामकृष्ण ज्योत एक गुजराती मैगजीन है जो कि राजकोट से पब्लिश होता है तो जैसे कि उद्बोधन है या प्रबुद्ध भारत है या वेदांत केसरी है क्या एनुअल एक स्पेशल इशू आता है प्रबुद्ध भारत और वेदांत केसरी का जनवरी में होता है उद्बोधन का शारदीय इशू अर्थात की दुर्गा पूजा के समय एक स्पेशल इशू होता है गुजरात में दीपावली यानी कि दिवाली एक बड़ा ही मेजर उत्सव है तो दिवाली के समय में एक दीपोत्सव इशू हमारा एक स्पेशल होता है और उसकी एक थीम होती है तो इस समय की दीपोत्सव यशू की थीम में इस तरह से स्पिरिचुअल रिट्रीट रखने वाला हूं अपने ऑर्डर में जहां जहां प भी स्पिरिचुअल रिट्रीट हुई है वो सबके प्रसंगों का कलेक्शन मैं इसमें रखूंगा मुझे ऐसा लग रहा है कि एक यूनिक थीम होगा और भक्तों को भी इसको पढ़ने में अच्छा लगेगा तो मैं सुबह से ही सोच रहा था सुबह को एकदम मैं यहां पर बैठा था आ करके मैं सोच रहा था कि पता है ना वो क्लास शुरू होने से पहले मैं एकदम बात नहीं करता किसी के साथ वो सीधा अपने कमरे में से यहां पर आ जाता हूं और चुपचाप बैठा रहता हूं कुछ समय के उस सडन मेरे माइंड में आया कल रात को बात हो रही थी कि कौन सा थीम रखे इस बात का इस बार का तो सडली मेरे मन में आया कि स्पिरिचुअल रिट्रीट वाला थीम रखते है तो एक के बाद एक सब रिट्रीट के बारे में सोच रहा था कौन कौन सी रिट्रीट हुई है तो सभी रिट्रीट के बारे में कलेक्शन करेंगे प्रसंगों का और उसी से वो स्पेशल इशू बनाएंगे ये स्पिरिचुअल रिट्रीट और यह यहां पर हमारी शारदा की बातें अच्छा हम किंतु क्वाल पाड़ा के बारे में सोच रहे थे कोवापाड़ा के बारे में बात कर रहे थे वो भी मां की एक स्पिरिचुअल रिट्रीट राधू है पागल किंतु वो पागल राधु की वजह से उनको देखिए कभी-कभी प्रसंग ऐसे होते हैं ना कि उसका जो उस प्रसंग में होते हैं उनको बड़ा कष्ट मिलता है बड़ा दुख होता है उसका एक बेनिफिट हमको मिल जाता है कि उस प्रसंग का क्योंकि ऐसे ऐसे जो प्रसंग होते हैं जो कि जीवन में बड़ी ही गहरी छाप छोड़ जाते हैं इसकी मेमोरीज हमारे मन में सब समय रहती है वैसे आज कोई मुझे पूछेगा कि कल आपने किसके किसके साथ में बात की क्या-क्या बात की तो एक दिन बीत जाएगा तो दूसरे ही दिन हम ज्यादातर बातें भूल जाएंगे किंतु जो कि बड़ी ही अपने जीवन की मेजर घटनाएं हैं वो सालों सालों के बाद हमको याद रहती है तो वैसे ही ऐसे प्रसंगों जिनके बारे में लिखा गया है वह प्रसंग तभी लिखे गए हैं जबकि वो मेजर बड़े ही कष्ट वाली ना कि बड़ी शौक वाली घटनाएं हैं पार्टिसिपेंट्स के जीवन में और इसीलिए फिर इन्होंने इसको याद रख के रखा है ये जो अ रिजली मैनर के दिनों की बातें है तो हमको पता है कि यह सारा ओली बुल जोसेफाइन मैक्लाउड और निवेदिता इन तीनों की बड़ी ही गहन फ्रेंडशिप हो गई थी तीनों ही स्वामी जी के साथ में स्वामी जी जब इंडिया आए थे तीनों स्वामी जी के साथ में इंडिया आई थी स्वामी जी के साथ में कश्मीर है नॉर्थ इंडिया है यह सब भ्रमण किया था और स्वामी जी का जो कोस था रामकृष्ण मिशन और राम कृष्ण मिशन के द्वारा भारत का कल्याण इसमें उन्होंने अपना पूरा जी जान लगा दिया था भले ही चाहे आर्थिक सहाय सबने ना की हो सभी लोगों ने निवेदिता की तरह सन्यास ग्रहण करके भारत में आके काम ना किया हो किंतु मन प्राण वचन स्वामी जी को दे दिए थे जोसेफाइन मैकला ने पूछा था ना कि स्वामी जी हाउ कैन आई हेल्प यू स्वामी जी ने क्या कहा लव इंडिया भारत को प्रेम करो तो अभी ये तीनों में बड़ी ही गहरी मित्रता है अभी तीनों की इच्छा है कि स्वामी जी रिजली मैनर आते हैं हम तीनों स्वामी जी के साथ में रहेंगे अनफॉर्चूनेटली जो ओली बुल की जो लड़की थी ओलिया वो उस समय बीमार हो गई और मिसेस लीबु को उसके साथ में उसकी ट्रीटमेंट के लिए रहना पड़ा तो प्रतिदिन स्वामी जी रिजली मैनर में है जोसेफाइन मैक्लाउड और निवेदिता रिजली मेन उनके साथ में है प्रतिदिन एक लंबा लेटर लिखती थी ये दोनों अपने अपने से मिसेस ओली बुल को उस दिनों की जितनी भी घटनाएं है उसका वर्णन करके तो जोसेफाइन मैक्लाउड ने भी अपने अपनी दृष्टि से उस घटनाओं का वर्णन किया है निवेदिता ने भी किया है प्रतिदिन इ लेटर भेजती थी इसकी वजह से उन दिनों की बड़ी ही सुमधुर यादें आज हमारे पास में है अभी इन टन क्या हुआ जब यह ओलिया ओली बुल की लड़की ठीक हो गई और मिसेस ओली बुल का यहां पर आगमन हुआ रिजली मैनर में उस समय एक दूसरी दुर्घटना हो गई पता चला मैसेज आया कि जोसेफाइन मैक्लाउड का भाई वो सडन बीमार हो गया है कैलिफोर्निया में है और उसको सहाय की जरूरत है इमीडिएट अभी बेचारी जोसेफाइन मैक्लाउड क्या करेगी तो उसने स्वामी जी की परमिशन ली और वो कैलिफोर्निया उसको जाना पड़ा किंतु इसका फायदा हमको इस तरह से हो गया कि जिस समय मिसेस ओली बुल रिजली मेनर में उसी समय जोसेफाइन मैक्लाउड को वहां से जाना पड़ा और फिर से वो पत्रों का सिलसिला चालू हो गया कि निवेदिता और मिसेस ओलीगल प्रतिदिन लंबे-लंबे लेटर जि दिन की जितनी भी घटनाए वो ली जोसेफाइन मैक्लाउड को लिखती थी अभी यह देखिए कि जोसेफाइन मैक्लाउड के लिए हो ना कि मिसेस ओली बुल के लिए हो अपने भाई या अपनी बच्ची की बीमारी तो कितनी दुखद घटना है फायदा हमको इस तरह से हुआ कि तीनों एक साथ में नहीं थी तो ये घटनाओं का वर्णन करने के लिए उनको लेटर लिखने पड़े जिसका कि बेनिफिट आज हम उठा रहे हैं य जगत किस तरह से चलता है अ तो आज यही तक कल फिर सता है ओ श श शा ह श्री राम
Questions & Answers
कृष्णा दो किताब में मिलेगा सेपरेट लेटर्स तो मैंने नहीं मेरे ख्याल से अभी तक नहीं आए हैं और आ गए हैं तो अभी मुझे शायद पता नहीं किंतु दो किताब में बड़ा ही सुंदर वर्णन मिलेगा एक तो जोसेफाइन मैक्लाउड की लाइफ है जोसेफाइन बोलकर के वो एक है इंग्लिश में है और ये जो न्यू डिस्कवरी है ये ये दो किताबों में आपको बड़ा ही सुंदर वर्णन मिलेगा एक्चुअली देखिए कि अपने ऑर्डर में इतना सब कुछ है पब्लिश करने के लिए इतनी सारी कहानियां है कहने के लिए कि पता नहीं अभी निवेदिता के लेटर सभी कुछ चंद साल पहले अद्वित आश्रम से पब्लिश हुए कैसी एक निवेदिता के लेटर्स का इंपोर्टेंस कैसे समझाए स्वामी जी के बारे में जो उसकी इनसाइट है अद्भुत है अद्भुत और कहीं पर यह नहीं मिलेगी अभी शंकरी प्रसाद बसु निवेदिता के ऊपर में रिसर्च कर रहे हैं कहीं से पता चला कि सबको पूछ रहा है कि निवेदिता के बारे में जो भी मटेरियल होगा कृपया मुझे दीजिए निवेदिता के बारे में जो भी मटेरियल होगा मुझे दीजिए तो ठीक है इधर उधर कोज कबर कर रहा है किसी ने एक दिन कहा कि अच्छा वहां पर भाई रहते हैं एक डिवटी जैसे तो नहीं है वैसे ही एक है जाके उनसे मिलके आइए ना उनके पास में शायद कुछ होगा तो ठीक है शंकरी प्रसाद गए जाके पूछा कि भाई आप कौन है पहले आपका परिचय दीजिए किसी ने मुझे आपके पास मैं भेजा है आपका परिचय मुझे नहीं पता तो पता चला कि शायद निवेदिता जिनके साथ में रहती थी आखिरी आखिरी समय में उसका कोई रिलेटिव होगा अभी मैं एग्जैक्ट रिलेशन भूल गया जो भी है व मैंने जिनके बारे में किसी को नहीं पता था ना ही बेलूरमठ को कुछ पता था किसी को कुछ नहीं पता जो भी है ऐसे किसी के घर में वो गए अच्छा फिर शंकरी प्रसाद ने पूछा शंकरी प्रसाद बसु उनका भी एक परिचय है कि कोलकाता यूनिवर्सिटी में आई थिंक बंगोली लैंग्वेज के वो प्रप प्राध्यापक थे हेड ऑफ द डिपार्टमेंट थे शायद और उन्होंने स्वामी जी के बारे में बहुत सुंदर रिसर्च किया है जिसके कि वोह आठ वॉल्यूम में वो स्वामी विवेकानंद समकालीन भारतवर्ष बड़ाई जैसे वह मेरी लुईस ने अमेरिका में किया है कि स्वामी विवेकानंद अमेरिकन इन द वेस्ट न्यू डिस्कवरीज वैसे ही उतना ही इंपोर्टेंट वर्क इन्होंने इंडिया के लिए किया है तो यही शंकरी प्रसाद बसू उनके वो निवेदिता के बारे में रिसर्च कर रहे हैं अभी उस भाई को पूछा भाई ने कहा कि अच्छा ठीक है मेरे पास में निवेदिता को कुछ सामान है देखिए कार्डबोर्ड का बड़ा सा बॉक्स पड़ा हुआ था तो उसको खोल के शंकरी प्रसाद ने देखा पूरा निवेदिता के लेटर से भरा हुआ तो बापरे इतने सारे लेटर हजार से ज्यादा लेटर शायद उसके भीतर में होंगे कहां से आपके पास में है तो बोला कि मुझे तो पता नहीं मेरे वह जो रिलेटिव थे उनके पास में से ये मेरे पास में आए अरे बाप रे वय लेटर ले गए फिर लेटर का संपादन करके एडिट करके उन्होंने निवेदिता के लेटर्स बोल करके दो बड़े-बड़े वॉल्यूम पब्लिश किए उतना इसके भीतर में इंफॉर्मेशन मैं जब यह सब पढ़ना पहली बार शुरू किया ना तो मुझे पता चला कि निवेदिता के लेटर्स है वो आनंद पब्लिशर ना के कहीं से वो पब्लिश हुआ है बाहर से कहीं से मैं उसको खोज रहा हूं खोज रहा हूं कहीं से नहीं मिल रहे कहीं से क्योंकि यह तो पता नहीं 30 40 साल पहले पब्लिश होंगे और यह सब तो रामकृष्ण संघ के जो डीप रिसर्च करते हैं उनको छोड़ कर के ये सब कौन पढ़ने वाला है वो फ्रीडम मूवमेंट तो कब का चला गया गांधी जी को सुभाष चंद्र को आजकल कोई नहीं पढ़ता तो निवेदिता को तो कौन पड़ेगा तो मैं खोज रहा हूं खोज रहा हूं नहीं मिल रहा एक दिन में पहली बार राजकोट आया था तो राजकोट के बुक स्टोल में जाकर के बैठा अभी राजकोट तो कहां बुक स्टोल मैं जो चीज मुझे कोलकात्ता में नहीं मिली वहां राजकोट के बुक स्टोल में मुझे क्या मिलने वाला है किंतु फिर भी वहां पे जो मेरा बैचमेट ही था बुक स्टोल इंचार्ज मैंने उसको बोला कि अच्छा मैं निवेद के लेटर्स खोज रहा हूं यदि मिलेगा तो देना मुझे तो उसने पता है मुझे क्या कहा कि एक बड़ा पुराना कॉपी है पड़ा था मैंने देखा था मैं जब यहां पर पहली बार आया था रो मैं खोज के देखता हूं यदि मिल जाए तो मैंने कहा खोजो खोजो भाई तो उसने वो भीतर में गया वो धूल मिट्टी पड़ी हुई थी उसके भीतर में से पता नहीं कुछ पुरानी पुरानी किताबें जैसे शंकरी प्रसाद बसू को निवेदिता के लेटर मिले थे कार्डबोर्ड बॉक्स में वैसे ही वो दो किताबों का सेट वो धूल मिट्टी में पड़ा हुआ था उसको मैंने लिया व जैसे कि वो ठाकुर प्राप्त हो गए हो वो धूल बूल निकाला दौड़ा दौड़ा में अपने कमरे में गया सबके साथ में बात बंद करके सब पढ़ रहा हूं अभी कहीं जाकर के आई थिंक तीन चार साल पहले ही अद्वैत आश्रम ने दो लेटर्स का सेट अभी हमारी ओर से पब्लिश किया है ऐसा तो कितना सब कुछ है पब्लिश करने के लिए रिसर्च करने के लिए स्टडी करने के लिए