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ओम स्थापा का यॉट धर्मस्य सर्व धर्म स्वरूप ने अवतार बरसतहैर रामकृष्ण यत नमः मां शारदा देवी तो कल हमने देखा एक ही सेंटेंस की किस तरह से मां का शक्ति का अवैध भाव पृथ्वी पर होता है और उनका क्या प्रयोजन है ब्रह्मा रूपिणी अदृश्य अध्याशक्ति युग अवतार के साथ में उनकी शपथ धर्मिणी होकर के पृथ्वी पर आवतानी हो करके एक और जैसे की परम पुरुष अर्थात की अवतार की लीला की पुष्टि के लिए कार्यरत होती है वैसे ही विभिन्न क्षेत्र में अपनी लीला का विस्तार करती है और साथ में ही मानव समाज भारतवर्ष और सामग्र विषयों को प्रगति के नव अभिदान के रास्ते पर चलित करती है साबित करती है यह हमने एक सेंटेंस देखा था और एक ही सेंटेंस इतना लंबा हमारा एक्सप्लेन चला था क्योंकि इन सब में इतना डेप्थ होता है खास करके गंभीर नानजी महाराज आपको पता होगा इस किताब के लेखक उन्होंने साथ में ही हमारे जो उपनिषद है उसके उसका जो है उसका अंग्रेजी ट्रांसलेशन किया था और यह ट्रांसलेशन आज इतना ऑथेंटिक माना जाता है की बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी में जो की भारत में हमारी भारतीय विद्या सीखने का एक बहुत ही जिसको कहेंगे इंपॉर्टेंट स्थान माना जाता है बहुत ही एक परी एमिनेंट जगह है जहां पे हम भारतीय विद्या भारतीय संस्कृति भारतीय धर्म सिख सकते हैं तो वह बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी में गंभीरानंद जी महाराज का इंग्लिश ट्रांसलेशन ऑफ डी शंकर भया ऑन उपनिषद वहां पर सिखाया जाता है तो महाराज जी एक और जी तरह से शास्त्र चर्चा में माहिर थे दूसरी ही और वो सड़क भी इतने थे तो साधना करके और हमारे हिंदू शास्त्रों को पढ़कर के उन्होंने जो समझा वह सब का सर उसे सब का निचोड़ उन्होंने इस किताब में अध्याय शक्ति का पृथ्वी पर अवतरण क्यों होता है कैसे होता है किस प्रयोजन के लिए होता है वह समझने के लिए उन्होंने लगाया है अभी महाराज जी आगे लिखने हैं शक्ति श्री रामकृष्ण करुणा पांडे कृतार्थ हो स्वामी विवेकानंद शविनय प्रणाम करिया छैयां इसीलिए सशक्ति श्री राम कृष्णा के कृपा पत्र स्वामी विवेकानंद कृतार्थ हो या कुर्तात होकर के 100 विनय विनय के साथ में प्रणाम करते हुए कहते हैं दास टोम दोहा कर सशक्ति नमिताभ पढ़ें मैं तुम तुम्हें तुम्हारा मैं आपका दास हूं और सशक्तिक आपकी जो लीला है सशक्ति आपका जो अवतरण है उसको मैं कोटी कोटी प्रणाम करता हूं सशक्ति अवतरण ऐसा स्वामी जी कहते हैं अवतार अकेले नहीं आए साथ में ही युग युगांतरकारी अध्याय शक्ति को भी युगांतर प्रवर्तन कार्य इस अध्याय शक्ति को भी साथ में लेकर के आए हैं मैं आपका दास हूं और सशक्ति आपके अवतरण को आपके श्री चरणों में मैं प्रणाम करता हूं महाराज जी लिखने हैं जी तरह से भगवान विष्णु अवतरण करते हैं पृथ्वी पे उसके बड़े में बहुत कुछ सोचा गया है समझा गया है उसकी एक रीति है उसकी एक ट्रेडीशन है उसकी एक धारा है वैसे ही शक्ति आमिर बबेरो टेमनी एकता रहती है साथ में ही शक्ति का जो आविर्भाव होता है उसकी भी एक रीति है आज हम भगवान विष्णु के अवतारों के बड़े में अच्छे से समझते हैं जानते हैं भगवान राम भगवान कृष्णा भगवान श्री कृष्णा चैतन्य अब जिनका भी नाम ले भगवान श्री राम कृष्णा हम उनके बड़े में हमारे शास्त्रों में हमारे पुराने में श्रीमद् भागवत में वाल्मीकि रामायण में बहुत ही अच्छे से बहुत ही विस्तृत रूप से लिखा गया है की भगवान का अवतरण होने से क्या होता है भगवान करण शरीर न देहात धरण क्यों करते हैं किंतु यह जो अध्याय शक्ति का अवतरण है अवतार के साथ में इसके बड़े में शायद इस नॉर्थ इंडिया और वेस्ट इंडिया में इतना समझा नहीं गया जितना की बंगाल में समझा गया है बंगाल हमेशा से शक्तिशाड़ना की भूमि रहा है बंगाल में हमेशा से यह मां का प्रादुर्भाव मां का आविर्भाव बहुत ही स्ट्रांग रहा है तो वहां पर जी तरह से वहां के सड़क बंगाली सड़क मां शक्ति को मां काली को आध्या शक्ति को जी तरह से समझे हैं शायद यह गुजरात में अध्याशक्ति मां जगदंबा वगैरा का प्रभाव अवश्य है और जैसे आपको पता होगा जैसे बंगाल में दुर्गा दुर्गा उत्सव होता है दुर्गा पूजा होती है गुजरात में नवरात्रि होती है नवरात्रि बहुत ही पॉपुलर त्योहार है बड़ा ही धूमधाम से मनाया जाता है किंतु एक चीज जो की बंगाल में विशिष्ट रूप से अच्छी जाति है वो की शक्ति का अवतार के साथ में संबंध यहां पे अवतार के साथ में संबंध वो एक्सपेक्ट जो है उसको शायद इतना डिटेल में एक्सप्लोर नहीं किया गया है एटलिस्ट मैंने नहीं पढ़ा है मैंने जो गुजराती लिटरेचर जो थोड़ा बहुत बड़ा मैंने तो क्या था की यह और बाकी सब सेकुलर साइंस जिसको बोलते हैं वह सब पढ़ने में पूरा पूर्व श्रम लगाया था और आने के बाद में रामकृष्ण विवेकानंद लिटरेचर ज्यादा पढ़ा है बाकी वर्ल्ड रिलिजन भी बहुत सारे पढ़े हैं तो अनफॉर्चूनेटली में गुजराती होने के बावजूद गुजराती साहित्य गुजराती यहां का जो लोकल रिलिजियस सेंट्स और लॉकर रिलिजियस लिटरेचर है उतना में इतना डिटेल में नहीं पढ़ा जितना की मुझे पढ़ना चाहिए शायद भविष्य में कभी ये कभी दूर होगी किंतु जितना थोड़ा बहुत मैंने पढ़ा है मैंने देखा है की यहां पे अध्याय शक्ति की आराधना तो पूरे गांव गांव में प्रचलित है किंतु अध्याशक्ति का अवतार के साथ में संबंध अवतार के साथ में ही अवतरण अवतार की शक्ति के रूप में अवतार का जो विश्व युद्ध विश्व धर्म परिवर्तन का प्रवर्तन का यह उदय का जो मिशन है उसमें सहायता यह एस्पेक्ट यहां पर इतना एक्सप्लोर नहीं हुआ जितना की बंगाल में हुआ है तो इसीलिए यह महाराज जी कहते हैं की मां सीता या तो फिर मां राधिका या तो फिर कहेंगे की यशोधरा इन लोगों का आविर्भाव या तो फिर हम लोग सिर्फ यह ना मां लेने की अच्छा चलो उनका तो आना तो था और नर्मदे हर धरण किया है तो नई डे के रूप में उनके साथ में कोई ना कोई तो रहेगा उनकी रानी रहेगी ना की जो कोई भी रहेगा उसमें कौन सी बड़ी बात है अब जैसे हम लोग क्रिश्चियनिटी का स्टडी करते हैं वहां पे तो जीसस के साथ में माता मेरी का जैसे बहुत ही इंपॉर्टेंट है मां मेरी के बहुत सारे चर्च हैं उनको बहुत सारे लोग उनकी पूजा भी करते हैं किंतु उनको शक्ति के रूप में जी तरह से हम लोग वर्णन करते हैं मां सीता या मां राधिका का इस तरह से वहां पर उनका वर्णन नहीं किया जाता है हां वो जीसस की जननी थी वो वर्जन थी तो इसके लिए उसे पंथ्यों में क्रिश्चियन पंथ्यों में उनका एक बहुत ही एक इंपॉर्टेंट स्थान है उसमें कोई शक नहीं किंतु जीसस की जो मिनिस्ट्री जीसस का जो वर्ल्ड मिशन था उसमें उनकी सहायता वैसे ऐसी कोई सहायता करने की जरूर है ऐसा कोई माना नहीं गया है जबकि हमारे यहां माना गया है की शक्ति भाव अवतार क्या जो वर्ल्ड मिशन जो है अवतार की जो मिनिस्ट्री है उसमें सहायता करने के लिए विशेष रूप से हुआ है यह संबंध हम सिर्फ बंगाल में ही सबसे ज्यादा एक्सप्लोर होता हुआ देखें हैं और इसीलिए शायद हो सकता है की इस आधुनिक युग में सशक्ति अवतार का आविर्भाव बंगाल की भूमि पे हुआ यह हम अनुमान करके का सकते हैं तो इसलिए महाराज जी यहां पर कहते हैं की हमको पता है की याद याद ही धर्मस्य ग्लानि भवतु भारत अभयानम धर्मशास्त्र की भारत की भूमि पे जब-जब धर्म की हनी होगी जब-जब भी यह दुराचार का उद्धव होगा रक्षा गण दैत्य गानों का अत्याचार इन ऋषि मनी गानों के ऊपर में बाढ़ जाएगा तब तक मैं शरीर धरण करके पृथ्वी पे अवतार धरण करूंगा और नारा इन दोनों का असुरों का संसार करूंगा ये भगवान का वचन गीता में है हमको बहुत अच्छे से पता है की भारत में बार-बार अवतार धरण करते हैं शरीर धरण करते हैं नर्मदे हर धरण करते हैं किंतु साथ-साथ में ही शक्ति भी अमीर भूत होती है शक्ति की सहाय से अवतार यह जगत में नए धर्म का प्रादुर्भाव नया धर्म अर्थात की हिंदू धर्म में से कोई नया धर्म नहीं निकालना किंतु धर्म का ही नव अभ्यारण करने का वह जो उनका संकल्प है वह शक्ति की मदद से यह ठीक होता है शादी होता है यह हमको गीता में या तो महाभारत में या तो रामायण में इतना देखने को नहीं मिलता इसके लिए हमको यह शक्ति साधना के जितने ग्रंथ है वो पढ़ने पढ़ते हैं और ठाकुर के जीवन में ठाकुर हमारी रामकृष्ण संघ की जो भाव धारा है रामकृष्ण संघ की यह जो आईडियोलॉजी है उसमें देखिए की ये दोनों स्ट्रिंग एक और ये अवतार का पृथ्वी पे आना उसकी जो समझ है वो और साथ में ही ये आध्या शक्ति मां जगदंबा का पृथ्वी पर अवतरण ये दोनों भाव धाराएं हैं इनका स मधुर संगम इन दोनों का मिलन यहां पे हमको रामकृष्ण संग्रह की भावधारा में देखने को मिलता है इसलिए महाराज कहते हैं अथवा अग्नि उतार दही का शक्ति न्याय अभिन्न ईश्वर और ईश्वर शक्ति शरीर ग्रहण 21 उद्देश्य अग्नि और उसकी दही का शक्ति दोनों ही अभिन्न है यदि आप अग्नि प्रकट करेंगे तो उसमें से गर्मी प्रकट होगी हिट प्रगति होगी तो यह जो ऊर्जा जो उसमें से निष्पन होती है यह जो शक्ति अग्नि की जो है वो दही का शक्ति वैसे ही ये अवतार और ये मां महामाया दोनों एक दूसरे के अभिन्न है इन दोनों के साथ ईश्वर और ईश्वर शरीर शक्ति ईश्वर और ईश्वर शक्ति दोनों का शरीर ग्रहण एक ही उद्देश्य के लिए होता है हर कार्य सिद्धि पुरुष डे वल्लम बने एक प्रकार है एवं नई डे अव्वल बने अन्य प्रकार के अग्नि और दही का शक्ति जैसे अभिन्न है वैसे ही अवतार और महामाया ये दोनों अभिन्न है एक ही कार्य सिद्धि के लिए पृथ्वी पे एक साथ एक कल अर्थात की एक ही समय अवतरण करते हैं किंतु फिर भी अवतार का पुरुष डे है शक्ति का नई डे है इसके लिए उनके डे का गठन के अनुसार उनका जो कार्य सिद्धि है वो अलग-अलग प्रकार से होता है नियम में हौले हो उपहार कार्य सिद्धि उसकी कार्य सिद्धि पुरुष डे अवलंबन होने की वजह से अवतार की एक तरह से होती है एवं नई डे अव्वलंबन की वजह से महामाया की अन्य प्रकार से अन्य तरह से होती है इन दोनों के पीछे जो एक अद्वितीय सत्ता है वो एक ही है उसमें कोई पाठक के नहीं होने से भी करुणामई शक्ति अवतार तत्व इन दोनों महामाया कहो ना की अवतार कहो ठाकुर कहो ना की मां कहो भगवान राम कहो ना की मां सीता कहो भगवान कृष्णा कहो महाराधी का कहो इन दोनों के पीछे एक ही आवे सत्ता विराजमान है एक ही अभिनय सत्ता के वो दोनों पहलू है किंतु फिर भी नई डे धरण करके करुणामई जननी के रूप से अवतार धरण करने की वजह से जननी का महामाया का देवी का उनका अवतरण का किस तरह से रचना है किस तरह से वो कार्य करती है ये जन और समझना के लिए अलग तरह से एक ग्रंथ की रचना करने का प्रयोजन अवश्य है महाराज ने ऐसा क्यों लिखा की हमको मां शारदा देवी के लिए एक अलग तरह की जीवनी लिखने की आवश्यकता है क्योंकि वो कोई लोग उसे समय का सकते थे की ठाकुर के तो साक्षात सन्यासी शिष्य स्वामी शारदानंद जी महाराज ने तो ठाकुर की जीवनी लिख दी है उसमें तो उन्होंने मां के बड़े में बहुत कुछ डिस्कस भी किया है मां और ठाकुर का सर्वप्रथम मिलन कैसे हुआ था उनका विवाह के मुंबई क्या-क्या प्रसंग हुए थे उसके बाद में जब मां कोलकाता आई तो ठाकुर ने किस तरह से आधार यातनापूर्वक उनको आवकर दिया था किस तरह से ठाकुर ने शोराशि पूजा करके अपनी सब तरह की आध्यात्मिक सिद्धि उनके श्री चरणों में अभिषेक कर दी थी अर्पित कर दी थी तो ये सब तो लीला प्रसंग में बहुत ही विस्तृत रूप से वर्णन है तो मां की जीवनी अलग से लिखने का क्या प्रयोजन और यदि लिखने हैं तो आप प्रसंग का घटनावली के अनुसार प्रसंग एक के बाद एक सजा दीजिए उसका फिलोसॉफिकल डिस्कशन अलग रूप से करने की क्यों जरूर है तो उसके यदि ऐसा कोई हाइपोथेटिकल प्रश्न उत्पन्न होता है तो उसका उत्तर महाराज जी इस तरह से देते हैं की दोनों के पीछे में एक ही सत्ता है दोनों एक ही हेतु उनका है पृथ्वी पर अवतरण करने का पृथ्वी पर दहाड़ धरण करने का किंतु धरण करने की वजह से अवतार जी तरह से कार्य करते हैं वह नई डे धरण करने की वजह से शक्ति से भिन्न है और इसीलिए शक्ति के लिए मां शारदा के लिए अलग तरीके से जीवनी ग्रंथ लिखने का प्रयोजन यहां पर महसूस हुआ था आवश्यक हुआ था श्री श्री चंदिता देवी आश्वासन श्री श्री चांदी में देवी ने आश्वासन दिया है स्तंभयादा याद दाना वो था भविष्यति भविष्य में जब-जब दानव लोग बड़ा उत्पन्न करेंगे सदा सदा अवतार या हम करिश्मायाम तप तप में अवतार धरण करके अर्थात की असुर असुर लोगों का सहर करूंगी जी तरह से भगवान कहते हैं याद याद ही धर्मस्य ग्लानिर्भ भारत भगवान ने गीता में जी तरह से हमको आश्वासन दिया है मैन भी चांदी में हमको आश्वासन दिया है और इस संघशयम असुरों का सहर करने के लिए मैं तब तक जन्मक अवतार धरण करूंगी पूरा कल देव मनुष्य साधने एकता अवश्य स्वीकार प्रयोजनशील अभी महाराज जी कहते हैं की इस समय हमने यह पहले भी डिस्कस किया था की आ महाराज जी पहले तो लिखने हैं की पुरातन कल में ये दानवों का प्रकोप जब बहुत बाढ़ जाता था और देवता और मनुष्य गण दोनों ही उससे बड़े ही परेशान हो जाते थे बड़े ही विमर्श में ए जाते थे उसे समय देवी के प्रादुर्भाव का आयोजन था तो अब इस समय क्या प्रयोजन है किंतु असुर दी केयर तांडव लीला सुधु बहिर जगत सीमा बद्दू था के नाम महाराज उसका बाद में उसका एक्सप्लेन देते हैं जब असुर लोगों का प्रारूप भाव होता है मनुष्यों को और देवताओं को वो पीड़ित करना शुरू करते हैं तब देवी के आगमन का प्रयोजन था किंतु आधुनिक युग में तो मां शारदा ने आमिर भूत हो करके यह ब्रिटिश लोगों का संघार नहीं किया उन्होंने ऐसा क्यों किया हमने ये क्वेश्चन पहले भी डिस्कस किया था की इन लोगों को क्षमा क्यों दे दी ब्रिटिश शासन की वजह से हमको पता है की बंगाल फेम और ये एक के बाद एक फेम आते गए करोड़ करोड़ भारतवासी उसमें मारे गए तो ब्रिटिश गवर्नमेंट की पॉलिसी की वजह से यह जब सो ये सब जो हुआ था तो उनका संघार करके भारत में से भाग देने की वजह मैन उनको आशीर्वाद ही क्यों दिया यह जो पुरातन कल में पुराण कल में देवी का पडू और यह आधुनिक कल में मां का प्रादुर्भाव इन दोनों में इतना बड़ा डिफरेंस क्यों है तो महाराज यहां पे हमने भी डिस्कस किया था महाराज भी यहां पे कहते हैं की अली अर्थात की दोनों असुरगढ़ हमारे हृदय के भीतर में भी विराजमान होते हैं ये अभिव्याहा अस्मिता राज द्वेष अभिनेश या तो फिर राज ये जो पांच क्लेश कहते हैं या तो फिर जिसको शेड रिपु कहते हैं या तो फिर यह जो हमारे दुर्गुण है इसको हमारे हृदय में से निकालना की इनको दोनों के रूप में उनका सहर करने के लिए सदगुण राशि का जन्म लेना ये आज के जमाने में ज्यादा इंपॉर्टेंट है यह एक चीज की हमारे हृदय में देव असुर संग्राम जो हमेशा चला ए रहा है तो हमको वह देव को हमारी जो देवी शक्ति है या तो फिर हमारी देवी सम है उसको बढ़ावा देने के लिए मां का प्रादुर्भाव एक चीज और दूसरा की देखिए की ब्रिटिश लोगों ने दूसरे देश के ऊपर में जो अत्याचार किया उसके जो दुष्कर्म या तो दुष्ट परिणाम फल उन्होंने जो अर्जित किया वही दुष्कर्म ही ऐवेंंचुअली उनको ले डूबेगा देखिए ऑलरेडी भारत आ तीसरी आर्थिक महासत्ता होने को जा रहा है नेक्स्ट फाइव इयर्स तो ऑलरेडी ब्रिटेन हमसे है वो इकोनॉमिकली हमसे पीछे छठ गया है ओवरऑल नोट पर कैपिटा बट फिर भी वो एक तो विक्ट्री हम क्लेम कर सकते हैं तो हमारे हृदय में देवासुर संग्राम जो है उसमें असुर को मान देने के लिए उसमें असुर को हारने के लिए मां का प्रादुर्भाव किंतु असुर दी केयर तांडव लीला असुरों की तांडव लीला शुरू बहिर जगत ए सीमा बुद्धू अकेला असुरों की तांडव लीला सिर्फ बाकी है जगत में सीमा बदन नहीं है अंतर जगत है हमारे अंदर जगत में सुख सुवृत्ति एसएडवृति जो है और खूबसूरत थी जो खराब भावनाएं है उसके भीतर में जो अविराम संघर्ष चल रहा है उपनिषद अतः के वो देवासुर संग्राम ना में निर्देश कर कोई अच्छे उपनिषद में इसको भी देव असुर संग्राम के नाम से अभिजीत किया है दही वी अश्व और असुर संग्राम यह सिर्फ बाहर के जगत में नहीं है की जैसे पहले के जमाने में होता था वह 10 सर वाला रावण है और वो बड़ा ही पर्वत के जैसा बड़ा वह और कुंभकरण है और भगवान राम का वो ब्रह्मास्त्र है वो ब्रह्मास्त्र जाकर के एक के बाद एक रावण के सर कैट रहा है और दूसरा एक सर उसकी जगह पे निकाल रहा है आज के जमाने में ऐसा होता तो ये तो आज सोशल मीडिया का जो युग है उसमें क्या-क्या नहीं सब शेर होना शुरू हो जाता तो इस तरह से तो किंतु आज हमको नहीं दिखाई देता है हालांकि अमेरिका जब इराक के ऊपर अटैक करता है तो वो जो ड्रोन और वो सब मिसाइल छुट्टी है अभी आजकल जो यूक्रेन वार में जो हो रहा है वह वीडियो हमको देखने को मिलते हैं किंतु वह रावण के 10 सर और इसके सामने यह तो कुछ भी नहीं है मैंने वह तो हम लोग आजकल यदि टीवी में भी वो रामायण जो सीरियल आई थी उसमें भी देखते थे तो हम बड़े इंप्रेस हो जाते थे तो सही सही में ऐसा होता 10 सर वाला दानव एकाएक हमारे वो शहर में चड्ढा आया और एक अवतार पुरुष महापुरुष आकर के एक के बाद एक तीर मार के उसका सर कैट रहे हैं वो देख कर के हमको कितना मजा आता हालांकि बहुत सारे लोग मा भी जाते हैं किंतु एकतली एक एक तो एक जबरदस्त एक विजुअल खड़ा होता वो आएगी यूक्रेन वार में या तो इस तरह की वार में इस तरह का विजुअल कभी देखने को नहीं मिलेगा तो अभी वो जो बहिया दे वो असुर संग्राम तो हमने कभी नहीं देखा हमारी आधुनिक जो हिस्ट्री है उसमें यह सब रिकॉर्ड भी नहीं हुआ यह सब तो पुराण में रिकॉर्ड किया गया है तो हम लोग यह सोचेंगे की यदि बाहर में देव असुर संग्राम नहीं होता यह रक्षा जो अभी तो नहीं दिखाई देते कहां पर भी हम लोग तो चंद में भी चले गए अमेरिका चंद पर गया था तो बहुत सारे लोग डाउट करते थे की वहीं पर जैसी स्टूडियो में मूवी स्टूडियो में यह सब मूवी बनाकर के लोगों को मूर्ख बना रहे हैं किंतु आज तो हम लोग खुद चंद पर जा रहे हैं तो अभी चंद पर जाना वो कोई बड़ी बात नहीं है ब्रह्मांड के यह सब दूरबीन लगा करके हम लोग सब देखते हैं पुरी पृथ्वी पर मानव वसाहत है सब जगह पे लोग मोबाइल लेकर के वीडियो बनाते रहते हैं कहां पृथ्वी पर ब्रह्मांड में हमको इससे कोई असुरिया तो रक्षा मिले नहीं है तो इस आधुनिक जगत में अवतार या तो आध्या शक्ति को जनमत धरण करने से देवधारण करने का क्या प्रयोजन है तो उसका उत्तर है की उपनिषद में हमारे हृदय के भीतर सुवृति और खुदवृत्ति का जो संग्राम सतत चला आता रहा है उसमें सुब्रूति को बढ़ावा देने के लिए सुरती को बैकअप देने के लिए सुब्रोती को सुपर चार्ज करने के लिए यह अवतार और आध्या शक्ति का आगमन हुआ है जैसे हम लोग सोचते हैं जैसे मैं ही मैंने कुछ समय से ठीक किया है की अभी जैसे चारों और देखते हैं की यह छोटी उम्र में ही सबको शुगर और हाइपरटेंशन हो जाता है हमारे भी एक किसी किसी साधुओं को मैंने देखा है मेरे से भी छोटी उम्र है और फिर भी ये सब लाइव स्टाइल दिस इस जिसको कहते हैं वो हो गए हैं बाहर में तो कुछ नहीं तो मैंने ठीक किया की चलो अभी ये तेल है ये शो मिठाई है वगैरा में नहीं खाऊंगा अभी आप सोच के देखिए की मंदिर में रहते हैं राम कृष्णा आश्रम में और मिठाई तो यहां पे ठाकुर को देने के लिए कितनी सुंदर सुंदर मतलब कितनी स्वादिष्ट मिठाई या आई रहती है और उत्सव होने से तो प्रश्न नहीं है पूरा ठाकुर को जो भोग डराया जाता है उसमें कितना सुंदर सुंदर खाना होता है मिठाई और ताली हुई चीज कितनी होती है उसमें अभी ये ठीक करके बैठना की मैं मिठाई नहीं खाऊंगा ताला हुआ कुछ भी नहीं खाऊंगा तो जब नजर के सामने वो ए जाता है वो भंडारी महाराज लेकर आते हैं की यह लीजिए महाराज यह आज नया आया है थोड़ा सा ट्राई करके टेस्ट करके देखिए तो उसे समय यह जो अपने मां के ऊपर में संयम की बंद रखना की अरे नहीं नहीं अभी आज तो चलो हमने लाभ के वाश हो करके मिठाई काली कल कहानी जाकर के हमारा तो बैठे रहने का कम है पूरा दिन भर वो कोई एक्टिव लाइफ तो है नहीं मेरा पब्लिकेशन में की यहां पे जो वहां पे जो दिन भर तो मैं पब्लिकेशन में बैठा राहत हूं तो यह अभी ओबेसिटी वैसे ही तो एक बड़ा प्रॉब्लम है उसमें यदि शुगर हो गया तो कहां हो भाई पूरा लाइफ खत्म हो जाएगा तो उसे समय यह ठीक रखना अपने मां को अपने संकल्प शक्ति को अपनी यह बिल पावर को के नहीं अभी ऑलरेडी 40 प्लस हो गया है अभी वह इसके आगे जो खाना था का लिया अभी संयम करना है वह संकल्प ठीक रख करके उसको लेना नहीं लेना डिसीजन करना उसे समय हमको लगता है की कितना कठिन है और अभी देखिए की हमारा जीवन तो इतना रेगुलेटेड है किंतु भक्ति लोग हैं या तो अन्य लोग जो सब संसार में रहते हैं जब करते हैं बिजनेस करते हैं यह कितना दुनिया भर का उनको यह सब जमीला सी पड़ता है उसे समय कोई खूब कार्य एन हो जाए ऐसा कोई मां लीजिए की मैं ऐसा कोई ऐसा कुछ करूंगा जो की ठीक नहीं है किंतु उससे मुझे लाभ होने वाला है उससे मुझे बेनिफिट होने वाला है तो वो मैं ना करूं उसके लिए जो बिल पावर चाहिए वो बिल पावर कहां से आएगा तो यह ठाकुर मां स्वामी जी का जो सत्संग करते हैं उनकी वाणी जो सुनते हैं उनके कार्यकाल के बड़े में जब सोचते हैं उनकी ये जो प्रसंग स्मृति काठ है वो हमारे मां में हमारी स्मृति में वह जब घर करते हैं हमारे हृदय में जब उनकी जेड प्रसारती है तब हमको यह बिल पावर हमारा ट्रेडों होता है लोग बोलते हैं की बिल पावर बढ़ाने के लिए हमको क्या-क्या नहीं करना पड़ता मैं कहता हूं कोई बहुत बड़ी बात नहीं है फिर बिल पावर बढ़ाना सिर्फ यह ठाकुरमार स्वामी जी का सत्संग कीजिए सत्संग सुनिए इस से यह प्रसंग की जेड आपके हृदय में धीरे-धीरे करके फैलेगी आपके मां में वो धीरे-धीरे करके अपना घर करेगी और जब ठाकुर मां स्वामी जी हृदय में असिन होंगे मां में आकर के रहना शुरू करेंगे मां मंदिर में वो स्थापित होंगे तब देखेंगे की यह कठिन डिसीजन लेना वो प्री और श्री दोनों हमारे सामने आता है प्रिय ऐसी चीज है जो की मुझे अच्छी लगती है श्रेया वो है जो की मेरे लिए श्रेया कर है इन डी लॉन्ग टर्म तो श्रेया को कस करना धीरे-धीरे करके हमारे लिए आसन होता जाएगा तो पहले के जमाने में जगत के राक्षसों का सहर करने के लिए यह सुदर्शन चक्र या तो फिर तीर और यह धनुष लेकर के भगवान कृष्णा या तो भगवान राम आते थे तो उसकी वजह आज है की बालक का स्वभाव ठाकुर नृत्य करते हैं कीर्तन करते हैं उपदेश देते हैं मां आशीर्वाद देती है मां खिलाती है तो इस तरह से सौम्या स्वरूप धरण करके हमको आशीर्वाद देने के लिए आधुनिक युग में उनका आविर्भाव हुआ है तो अभी कल छुट्टी परसों दिन फिर से मिलेंगे ओम शांति शांति