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Ma Sarada Life by Sw Gambhirananda ·

आविर्भाव : श्रीमाँ सारदा देवी : स्वामी गम्भीरानन्द लिखित : 27 Dec 2023

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ओम स्थापक य ज धर्मस्य सर्व धर्म स्वरू पिणे अवतार वरिष्ठा राम कृष्णाय ते नमः श्री मां शारदा देवी जीवन और संदेश गंभीरानंद जी महाराज की इस किताब में से हम पाठ कर रहे हैं कल हमने थोड़ा नरेशन था इसलिए हिंदी में पढ़ा था आज फिर से बंगोली में स्टार्ट करते हैं गंभीरानंद जी महाराज लिखते हैं पिता माता दरिद्र संसार है पिता और माता के दरिद्र संसार में मायर शैशव और बालो अति बाही तो होले व परस्पर प्र प्रीति और श्रद्ध अशेष अवकाश प्रदान पूर्वक से दारिद्र्य ओई परिवार दैनंदिन जीवन के बड़ो मधुमय कोरिया तुलिया छ लो इनका बचपन मां का बचपन एक बड़े ही दरिद्र परिवार में बीता था किंतु धन का दारिद्र्य है या तो फिर पैसे नहीं है तो इसका तो अर्थ यह नहीं है कि उनका मन गरीब है यह जो मन का दारिद्र्य और धन का दारिद्र्य यह दो अलग-अलग चीजें हैं किसी किसी के पास बहुत पैसे होने से भी उनका हृदय शुष्क और कठोर होता है लोगों को अपमानित करके या तो लोगों को फिर एक्सप्लोइट करके उनके पास से किस तरह से धनराशि हड़प ली जाए ऐसा ही उनके मन में रहता है और जब भी कोई कोई होता है खास करके अपनी हिंदू परंपरा में देखेंगे कि बहुत सारे गरीब ब्राह्मण परिवार है गरीब है किंतु उनका हृदय विशाल है तो यहां पर महाराज जी ने लिखे हैं लिखा है कि बहुत गरीब परिवार में बचपन बीतने पर भी मां का परिवार में धन का दारिद्र्य था हृदय का दारिद्र्य नहीं था परस्पर एक दूसरे के प्रति स्नेह और प्रीति का जो बंधन था वह इतना सुंदर था श्रद्ध अशेष अवकाश प्रदान पूर्वक देखिए महाराज जी आधा संस्कृत ला लैंग्वेज बंगोली है किंतु जितना भी उनकी ल राइटिंग की स्टाइल है पूरी संस्कृत जैसी है अशेष अकाश प्रदान पूर्वक स्नेह प्रीति और श्रद्धा यह दोनों के प्राग करण का यह दोनों के एक्सप्रेशन का अशेष अवकाश संपूर्ण रूप से आपको एक मौका मिलता है एक अपॉर्चुनिटी मिलती है आपके हृदय में जो श्रद्धा प्रीति और प्रेम है वह अपने परिवार जनों के प्रति एक्सप्रेस करने के लिए ई शही दारिद्र्य ई परिवार दैनंदिन जीवन के बड़ो ही मधुमय कोरिया तुलिया लो जद देखिए यह कंट्रक्शन लगता है कि उस दारिद्र्य ने उस गरीबी ने उस पॉवर्टी ने उस परिवार के दन दैनंदिन जीवन यानी कि दिन प्रतिदिन के जीवन को बड़ा ही मधुमय बड़ा ही सुंदर करके दिया था कोरिया तुल छीलो बड़ा ही सुंदर बना दिया था कैसे ये कंट्रा क्शन नहीं लगता मां का बचपन गरीब परिवार में बीता था किंतु इस गरीब परिवार में आपके पास में अशेष अवकाश है अशेष अपॉर्चुनिटी है इंफाइटिंग है इसके परिणाम से इसकी वजह से गरीब परिवार में गरीबी के बावजूद एक सुंदर दैनंदिन जीवन को बड़ा ही मधुमय बना दिया था मधुमय कितना सुंदर शब्द है अ एक बार मैंने एक रेमन सेंस पढ़ा है अभी मैं भूल गया कि कहां का एगजैक्टली ये घटना है कि एक रामकृष्ण मिशन के एक आश्रम की शुरुआत हुई ना मेरे ख्याल से वरा नगर की ही बात है ये वरा नगर में जब गुरु भाई लोग वहां पर पहले पहले रहते थे तो वहां पर आपस में हंसी मजाक होता था वो हटो गोल होता था इतना जोर-जोर से कभी-कभी बातें करते थे चिल्लाते थे इतना खुशी और सुंदर वो रह कर के वह रहते थे कि उसके परिवार पड़ोसी लोग जो है प्रतिव उनके नेबर्स वे लोग सोचते थे कि अरे यह लड़के लोगों के पास में कुछ भी नहीं है इतना खंडहर जैसी जगह है इसको तो भूत भूतिया बंगला कहा जाता है जहां पर भूत का निवास है इस तरह की खंडहर जगह है बोलकर के वहां पर कोई रहने के लिए नहीं आता ऐसे वह एक ऐसे ऐसे निवास में ऐसे मकान में रह रहे हैं और खाने को कुछ नहीं है पता है कि भिक्षा करने को जाते हैं या तो फिर जो भक्त लोग हैं वह आकर के उनको कुछ खाना देते हैं फिर भी जब शाम को रात होती है यह लोग इतना जोर-जोर से चिल्ला करके हंसी मजाक किया करते हैं इसके पीछे का रहस्य क्या है तो एक जो वहां पर पास में एक पड़ोसी रहता था वो कहने लगा कि इन लोगों ने निश्चय यह पुराना मकान है तो ये पुराने मकानों में तो पता नहीं क्या-क्या होता होगा कहीं जमीन की खुदाई करते-करते उनको सोना मोहर का एक घड़ा मिला होगा इसलिए ये लोग इतना हंसी मजाक कर रहे हैं तो देखिए कि संसारी लोग क्या सोचते हैं कि जद हंसी मजाक होती है तो सोना जद हाथ में है तब हंसी मजाक करेंगे वरना तो साथ में रहना एक दूसरों के साथ में एक प्रेम का संबंध होना उसमें इतना हंसना इसमें इतना चिल्लाना क्या बात है ऐसा लोग सोचते हैं किंतु यदि अब साहित्य धार्मिक साहित्य आध्यात्मिक साहित्य देखेंगे कि जिन लोगों के घर में यदि कोई आश्रम है ना कि ज यदि कोई एक इस तरह का निर्धन परिवार है किंतु हृदय से भगवान के प्रति श्रद्धा भक्ति निष्ठा है तो इन लोगों के आपस में इतना सुंदर प्रेम का एक संबंध होगा कि उससे स्वतः स्फूर्त अपना मन आनंद से भर जाएगा आजकल बहुत सारे लोग सोचते हैं कि इनके पास इसका बहुत बड़ा बैंक बैलेंस है या तो फिर इसका इतना पैकेज है यहां पर एक डिवटी आते हैं कभी-कभी तो मुझे बोलते हैं कि उनकी डॉटर वहां बेंगलोर में रहती है उसकी डॉटर का और उनके जमाई का इतना मने सन इन लॉ इतना बड़ा पैकेज है माने एक करोड़ ना की 60 लाख ने 70 लाख ने पर एनम ऐसा कुछ तो वो मुझे कहते हैं कि वे लोग सब समय मुझे बुलाते रहते हैं कि आप बेंगलोर आके रहिए किंतु वो कहते हैं कि नहीं मैं रिटायर हूं यहां पर अकेला रहता हूं वही अच्छा है पास में आश्रम है सुबह शाम आश्रम में जाता हूं यहां पर थोड़ा बहुत वॉलंटस रहते हैं वहां पे इतना फास्ट लाइफ स्टाइल है दिन रात काम करते रहेंगे वीकेंड में छुट्टी मिलेगा तो छुट्टी में फिर वोह घूमना फिरना वो मने देखिए कि यहां में कुछ नहीं है इनके पास में एक सामान्य घर है किंतु आश्रम में आकर के उनके मन को जो संतोष मिलता है तो वहां पे बेंगलोर में इतना फास्ट लाइफस्टाइल इतना बड़ा उनका एनुअल पैकेज फिर भी वह सुकून मन को उनको वहां पे नहीं मिलता ऑफकोर्स आप कहेंगे कि सबका अलग-अलग एक माइंड सेट होता है किसी-किसी को फास्ट लाइफ स्टाइल चाहिए होता है किसी-किसी को ऐसा स्लो लाइफ चाली होता है कि वहां पर एक ह्यूमन रिलेशनशिप मैटर करता है नहीं कि आपका कितना पैकेज है तो सभी तरह के लोग इस जगत में रहते हैं किंतु हमको एक बात याद रखनी है जब हम यह न्यूजपेपर में यह फिर यह टीवी में यह सब बड़े-बड़े लोगों को देखते हैं धनी लोगों को देखते हैं प्रतिष्ठित लोगों को देखते हैं तो उनको देख कर के अपनी आंखें चमक नहीं जानी चाहिए वो मने हम लोग इतने भ्रमित नहीं हो जाएंगे उनको देख कर के भ्रमित नहीं हो जाना चाहिए कि जिससे कि अपने जीवन का जो सार तत्व है वही भूल जाए ईश्वर के प्रति एक सरल विश्वास और अपने परिवार जनों और मित्रों के साथ में हंसी खुशी से रहना यह जीवन का आधार है और देखेंगे कि मैं कभी-कभी बायोग्राफी वगैरह पढ़ता हूं मुझे बायोग्राफी पढ़ना अच्छा लगता है तो एक बहुत बड़े एक सीईओ के बारे में किसी ने लिखा था कि कि उसके पास में पैसा से पैसे से खरीदने वाला जो कुछ भी है सब कुछ है उसके पास में किंतु उसके पास में एक चीज नहीं है कि कोई अच्छा मित्र नहीं है मैंने ऐसे बड़े लोगों के पास में लोग तो बहुत घूमते रहते हैं इधर-उधर किंतु क्या होता है पता है कि ये सब मतलबी लोग रहते हैं कि उनको ऐसा लगता है कि अरे इसके पास में बहुत पैसा है तो हमको थोड़ा सा वो दे देंगे बीच-बीच में तो ऐसे मतलब वाले लोग वहां पे और भाई अभी जो धनी व्यक्ति है ना उसको भी समझ में आता है कि हां ये लोग भरे मैं मेरे साथ में में घूमते फिरते रहे भले मैं मैं मैं जो कुछ भी कहूं वो मेरी बात सुन कर के बड़े जोर-जोर से हंसे किंतु इसके पीछे उनका जो मोटिव जो है वो पैसा है नहीं कि मेरे प्रति कोई प्रेम तो ये देखिए ठाकुर दक्षिणेश्वर में कितने मजे से कितनी शांति से रहते थे यदि आप सैलरी की ही बात की जाए तो वहां का जो खजान जी होगा या तो इवन मथुर बाबू होगा इन इन लोगों के पास में ठाकुर से ज्यादा कितना पैसा होता कितना सब कुछ प्रतिष्ठा होती किंतु ठाकुर आज 100 साल 200 साल गए हम लोगों को ठाकुर के बारे में सब कुछ पता है जबकि कालीवाड़ा च कौन था वहां का कोठारी कौन था वहां का प्रबंधक कौन था वह कुछ नहीं पता मथुर बाबू का नाम हमको सिर्फ इसीलिए पता है कि ठाकुर की जीवनी में उनका उल्लेख है यह इतना बड़ा केशव सेन विदेश जाकर के आया तो विदेश जाकर के आकर के फिर वो पूरे कोलकाता में हां केशव सेन है वहां जाकर के लंदन जाकर के क्वीन विक्टोरिया से मिला है ठीक है फिर कुछ दिन दिनों के बाद पता चला कि केशव के ही कुछ फॉलोवर्स उसी के कुछ मित्र उससे नाराज होकर के एक अलग समाज बना दिया है तो केशव बेचारा ठाकुर के पास आकर के बोलता है कि देखिए महाशय वे लोग तो मुझे अलग से एक तो समाज भी बनाया मुझे गाली दे कर के भी गए और फिर मेरे जितने फॉलोवर है उनको भी साथ-साथ में ले लिया तो ठाकुर कहते हैं कि तुम बिना देख कर के शिष्य बनाते हो चेले बनाते हो इसलिए ऐसा होता है किंतु देखिए ये चेले बनाना और एक सही सही एक श्रद्धा प्रेम और स्नेह का बंधन बनाना यह दोनों में बहुत बड़ा डिफरेंस है वो लाटू महाराज की वो फेमस बात है ना ठाकुर कहते हैं कि लाटू खता तो माने लाटू काउंट करता है कि उनके वहां पर ब्राह्मण समाज में उत्सव होते हैं तो इतनी घोड़ा गाड़ी इतने वो लोग प आते हैं और यहां दक्षिणेश्वर उत्सव होता है तो इतनी घोड़ा गाड़ी इतनी कम आती है क्योंकि क्या है लोग घोड़ा गाड़ी में बैठ कर के आते हैं तो पता चलता है कि एक मैटर ऑफ एक क्या स्टेटस सिंबल जैसा किसी भी संस्था के लिए कि हां इतने लोग यहां पर आए हैं तो वहां प इतने सारे लोग जाते हैं ब्रह्म समाज में यहां प इतने कम लोग आते हैं ऐसा क्यों किंतु जो जितने लोग आते थे उन लोगों के भीतर में जो एक प्रेम का जो संबंध था वो इतना स्ट्रांग था कि आज इतने साल हो गए 100 साल सवा साल 150 साल फिर भी हमारा संघ उत्तर उत्तर बढ़ रहा है जबकि ये ब्राह्मण समाज कहां पे है किसी को पता नहीं है हम लोगों को वो कोलकाता टूर में ले जाते हैं ट्रेनिंग सेंटर में हम जाते हैं तब तो वो एक जगह प जाकर देखा एक अंधियारा कमरा है वहां पर सब बेंच वो वो तो चर्च जैसा सिस्टम था ना ब्राह्मण साधारण ब्राह्मण समाज में तो सब बेंच लगाई हुई थी अपने यहां मंदिर में तो जमीन पर बैठे हैं वहां बेंच लगाई थी जैसे चर्च में होता है तो सब बेंच लकड़े की बेंच सब एक कोने में वो बड़ा सा एक ढक करके रख दी गई है एक बड़ा सा पाइल बना कर के और वहां पर धूल है मिट्टी है और ये स्पाइडर नेट से और बोलते हैं यहां पर देखो साधारण ब्राह्मण समाज स्वामी जी आया करते थे अभी वो वो सही सही आज वही परिस्थिति है कि नहीं मुझे पता नहीं किंतु देखिए कि क्या उनकी परिस्थिति हो गई है क्या हमारी परिस्थिति है तो यह हमारी ये जो भारतीय परंपरा अभी मैं रामकृष्ण ज्योत जो हमारा मैगजिन है उसके लिए मैं अभी फेब्रुअरी का इशू है स्वामी जी की तिथि पूजा है तो फेब्रुअरी के इशू में मैंने सोचा कि एक स्पेशल इशू बनाते हैं स्वामी जी की तिथि पूजा के दिन स्वामी जी ने जितनी भी स्टोरीज कही है वो बाद बाद में ठाकुर जैसे कहानी कहते हैं ना कि वह कटियारी की कहानी वो जो लकड़ी काटता है कि वोह उसको साधु बोलते अरे तुम और भी आगे जाओ फिर वह साप की कहानी जो सबको दस्ता है फिर वह ब्रह्मचारी आकर के उनको मंत्र देता है तो ठाकुर की इतनी सारी कहानियां है तो स्वामी जी ने भी बहुत सारी कहानियां कही है कोई भी पॉइंट इलस्ट्रेट करने के लिए किसी भी पॉइंट को अच्छे से समझाने के लिए तो मैंने क्या ठीक किया कि कंप्लीट वर्क जो है वॉल्यूम का उसमें जितनी इतनी सुंदर सुंदर कहानियों का कलेक्शन करते हैं और इस कहानियों पर स्पेशल इशू बनाते हैं तो अभी मैं सब कहानी कलेक्ट कर रहा था कंप्लीट वर्क्स में से तो देखा कि कुछ कुछ ट्रेडिशनल कहानी हमको लगता है कि अरे ये तो इतनी ट्रेडिशनल कहानी स्वामी जी तो कुछ मॉडर्न कुछ ज्यादा हाईफाई पसंद करेंगे कहानी कहना तो सब वो ट्रेडिशनल कहानी ही कहते हैं जो कि अपने पुराण में सब उपनिषद में पाई जाती है तो एक कहानी वो जो सुंदर कहानी के जो एक नेवला आया और युधिष्ठिर की यज्ञ में और वह जो वो होम की जो राख थी उसमें वह आ लटने लगा उसमें वह उसमें वह प्रवेश किया किंतु राख उसके शरीर पर लगी कुछ नहीं हुआ तो फिर वह जाकर के राजा को कहता है कि अरे यह जो होम किया है इसका कोई आध्यात्मिक सिग्निफिकेंट ऐसा कोई बहुत बड़ा नहीं है तो वो राजा युधिष्ठिर बोलते है क्यों रे ऐसा क्यों बोल रहे हो तो बोला कि यह नेवला कहता है कि देखिए आप देख रहे हैं ना कि मेरा आधा शरीर शरीर सोने का है गोल्डन कलर का गोल्डन है क् पता है ये कैसे हुआ एक गरीब परिवार ब्राह्मण परिवार में मैं गया था तो वहां पर पिता पुत्र और उनकी मां पिता पुत्र और मां तीन लोग थे वहां पर तो उनके पास में एकएक रोटी थी तो मैं जाकर के देखा उन्होंने देखा कि ये तो भूख से उसको बड़ी खराब आरत है उसकी इसको बहुत जोरों से भूख लगी है नेवले को तो पिता ने कहा कि अच्छा एक काम करो य मेरी जो एक रोटी है तुम खा लो जिससे तुम्हारा पेट भर जाएगा तो वो पिता की जो रोटी है वो नेवले ने खा ली फिर मां ने कहा इससे भी क्या तो पेट नहीं भरने वाला तो मेरी भी एक रोटी खा लो तो मां की भी एक रोटी खा ली तो बच्चा बोलता है कि अरे इससे भी तो इसका होने वाला नहीं है पिता और माता ने इतना सैक्रिफाइस किया घर बहुत ही दरिद्र परिवार है एक ही रोटी है तीनों के पास और कुछ नहीं है तो लड़के आखिर में लड़के ने कहा कि पिता और माता की रोटी खाने पर भी इसकी भूख नहीं संतुष्ट हुई है तो मेरी भी रोटी खा लो तीनों की रोटी खाई और अभी तब नेवले को जान में थोड़ी सी जान आई किंतु अपने तीनों की रोटी देने के बाद में इस परिवार के पास में खाने को कुछ नहीं बचा था तो इन दूसरे दिन सुबह को देखा कि भूख के मारे तीनों न तीनों लोगों की मृत्यु हो गई है अब ये नेवला जो रोटी के जो वो ये थे आटे आटा जो जमीन पर गिरा था रोटी का उसमें वो वो उसमें स्पर्श करके वो नेवले का आधा शरीर सोने का हो गया है तो वो कहता है कि देखिए जो सही सही दाता है उसकी उसकी आध्यात्मिक शक्ति इतनी पावरफुल होती है कि नेवला उस दाता के आटे को स्पर्श करता है तो आधा अंग सोने का हो जाता है और यहां पर यह विश्व विजय राजा युधिष्ठिर उन्होंने इतना बड़ा यज्ञ किया हजारों ब्राह्मण लोगों को इतनी दान दक्षिणा दी फिर भी उस होम की यह जो राख है वह शरीर को स्पर्श करने के बाद में भी बाकी का आधा शरीर सोने का नहीं हुआ तो देखिए कि वो नेवला कहता है कि यह जो जो दान करते हैं हम कितना दान करते हैं उसके ऊपर में वह मैटर नहीं करता किस शुद्ध विचार को लेकर के कितना सैक्रिफाइस करके हम दान करते हैं उसके ऊपर डिपेंड करता है तो यह जो यहां पर बात है छोटी सी कि दरिद्र परिवार था किंतु फिर भी इस दरिद्र परिवार में एक दूसरे के प्रति प्रेम और श्रद्धा एक अशेष रूप से अटूट प्रेम और श्रद्धा थी और इसकी वजह से दैनंदिन जीवन दिन प्रतिदिन का जो जीवन है मधुमय हो उठा था मुख देर कोक बिघा निष्क जमते जे धन जन्म तो परिवार प्रति पालन पखे उहा जथ नो होवा ना होवा रामचंद्र जाजन आदि क्रिया करते मुख ज लोगों का वह छोटी सी जो जमीन थी उसमें से उसमें से जो धान जो पाक होता था उसमें से परिवार का गुजरान नहीं चलता था तो इसके लिए मुखज्जिया किया करते थे एवं तुला चाश कोराते तुला अर्थात की कपास कॉटन कॉटन वहां पर अपनी खेती में अपनी जमीन पर वो उगाते थे श्यामा सुंदरी कोलेर में शारदा के खेत्रो मध सवाया तुला तुली तेन श्यामा सुंदरी देवी छोटी सी बच्ची शारदा को अपनी गोद में ले जाकर के खेत में जाती थी और खेत में एक सुंदर किसी पेड़ के नीचे में छाव होगी वहां पर अपनी बच्ची को सुला करके यह जो कपास है जो कॉटन है उसको वह तलती थी व हम इमेजिन करके सोच सकते हैं कि वो छोटी मां शारदा छोटी बच्ची है और वहां पर वो कपास का खेत है एक कोने में सोई है या तो फिर जदी जग जाएगी तो वो इधर उधर वो घूमती फिरेगी या व फिर वो खेलती खेलेगी तो उन्हें कितना एक सुंदर दृश्य अपनी नजर के सामने वो उत्पन्न होता है मैं कभी-कभी सोचता हूं कि ठाकुर महा स्वामी जी के जीवन के ऊपर में यदि कोई यह मूवीज बनाई जाए तो यह जो बाल्य जीवन जो उनका होगा वो इतना सुमधुर होगा देखिए जो भगवान कृष्ण के बाल्य जीवन के ऊपर में पूरा संपूर्ण भागवत लिखना पड़ा है वोह रामायण जो महाभारत लिखने से काम नहीं हुआ उनके लिए पूरा एक अलग से श्रीमद् भागवत लिखना पड़ा तो मुझे भी ऐसा लगता है कि ये जो लीला प्रसंग है फिर ये गंभीरानंद जी की ये जो किताब है अपना कंप्लीट वर्क है जितना भी सब कुछ है वो लिखने के बावजूद भी इन तीनों के बाल्य जीवन की जो माधुर्य मंता जो है जो उनका बाल्य जीवन का एक सुमधुर वो पल है उसको उजागर करने के लिए उसको हम लोगों को अच्छे से वो बताने के लिए और दूसरे बड़े-बड़े ग्रंथ लिखने पड़ेंगे तभी कहीं जाकर के यह मधुर बाल्य लीला का आस्वादन हम और भी सुंदर रूप से कर पाएंगे वह एक इमेजिनेशन होती है ना ऑथर की जो पोएट होता है तो कितना सुंदर इमेजिनेशन करके इमेजिनेशन सिर्फ नहीं कहेंगे क्योंकि महापुरुष के बाल्य जीवन के बारे में लिखते हैं तो वह प्रज्ञा चक्षु से जो संजय को जिस तरह से दिव्य दृष्टि प्राप्त हुई थी इस तरह के जो पोएट या तो कोई इस तरह से ग्रंथ का ऐसा कुछ लिखना चाहेगा तो उसकी एक तीसरी आंख खुल जाएगी साधन भजन करते-करते और वह उस उन दिनों की इतनी सुंदर सुंदर बातें उस दिव्य चक्षु से वह देख पाएगा और फिर जब उसका आकलन करेगा तो वह सही सही में पढ़ने लायक होगा अभी हम लोग राह देखते हैं सभी धर्मों में महापुरुषों के जन्म के बाद में एक के बाद एक लेखक कवि ग्रंथ का फिलोसोफर दर्शन शास्त्र के माहिर ऐसे लोगों का आना होता ही है वह जो वर्ल्ड रिलीजन कीय डेफिनेशन है अदर वाइज यदि उनके जो फाउंडर है उनके जाने के बाद में उनके प्रस्थान के बाद में यह जो टैलेंट सुपर टैलेंट जिसको कहेंगे ऐसी वैसी टैलेंट नहीं किंतु सुपर टैलेंट ऐसे सुपर टैलेंट का आगमन यदि उनके संघ में बंद हो जाए तो फिर वो वर्ल्ड अवतार किस काम के ऐसे तो कितने ही संत महापुरुष आते रहते हैं उ उने अपने जीवन काल के दरमियान 50 100 लोगों को इंस्पायर किया और फिर जब उनकी महासमाधि हो गई तो उनके जो फॉलोवर्स एडमाइन कोई स्मृति मंदिर बनाया और फिर बस वहीं पर बात समाप्त हो गई किंतु जो वर्ल्ड अवतार जो होते हैं पूरे विश्व को वह नया ज्ञान का प्रकाश देने के लिए आते हैं उनका एक संघष आरंभ होता है और इस संघ में एक के बाद एक सुपर टैलेंटेड लोगों का आगमन होता है तो हमारे हमारे संघ में भी आप देखिए कि गंभीरानंद जी महाराज यह मास्टर महाशय यह शारदानंद जी महाराज बाद में यह रंगनाथ आनंद जी महाराज अभी यह जो सर्वप्रिया नंद जी महाराज है देखि कैसे के बाद एक टैलेंटेड लोगों का आगमन होता है और यह इनका साहित्य इनकी वाणी इनका भाव इनके प्रसंग लोगों के सामने इतना सुमधुर रूप से लगेंगे रखेंगे प्रस्तुत करेंगे कि लोगों का मन भी स्व त ही ठाकुर महा स्वामी जी के प्रति आकृष्ट हो क्योंकि ठाकुर महा स्वामी जी की वाणी सुनाने के लिए जगत को ऐसे लोगों का आगमन नहीं होगा कहानीकार है कथाकार है ग्रंथ का है तो इनकी वाणी लोगों तक कैसे पहुंचेगी एक बार चलो की लीला प्रसंग लिख लिया गया एक बार चलो की कंप्लीट वर्क्स लिख लिया गया स्वामी जी ने अमेरिका जाकर के लंडन जाकर के भारत में प्रवचन दे दिए और बहुत ही अच्छे से गुडविन है उसने लिपिबद्ध किया मायावती से इसका अच्छे से एडिटिंग होक के पब्लिश भी हो गया किंतु कंप्लीट वर्क्स में क्या है इतना बड़ा कंप्लीट वर्क बहुत ही डिटेल में पढ़ कर के ठाकुर मां उनके प्रसंग और उपदेशों को बहुत ही अच्छे से पढ़ कर के एक सहज सरल भाषा में लोगों के सामने जद रखने वाले लोग नहीं रहेंगे कथाकार जिनको कहेंगे या तो ग्रंथ का या तो कवि पोएट जो भी कहो एक के बाद एक डिफरेंट डिफरेंट तरह की टैलेंट होती है पेंटर्स उने आप सिस्टाइन चैपल देखेंगे वहां पे स्वामी जी रोम में गए थे और एक के बाद एक जो बड़े-बड़े हिस्टोरिकल चर्च है वहां जाकर के वहां का आर्किटेक्चर वहां के जो पेंटिंग है रेनेसा के समय में यह जो बड़े-बड़े जो पेंटर्स हो गए आर्टिस्ट हो गए उनका जो वर्क ऑफ आर्ट है स्वामी जी इतना अच्छा सेंस ऑफ हिस्ट्री है कि इनके साथ में ये मिस्टर एंड मिसेस सेवियर है तो वो तो वेस्टर्न एजुकेटेड अच्छे कल्चरड फैमिली से आते थे किंतु स्वामी जी उनको समझा रहे हैं कि यह जो यह पार्टिकुलर पेंटिंग है यह पार्टिकुलर वर्क ऑफ आर्ट है यह पार्टिकुलर स् कल्चर है यह पार्टिकुलर चर्च है इसका क्या हिस्टोरिकल सिग्निफिकेंट है तो सभी क्षेत्रों में इनकी वाणी इस तरह से ट्रांसफॉर्म होती है इन द फील्ड ऑफ आर्किटेक्चर इन द फील्ड ऑफ म्यूजिक इन द फील्ड ऑफ पेंटिंग इन द फील्ड ऑफ आर्ट डांस इवन यह जो एक के बाद एक नृत्य की शैलियां है जो डेवलप होती है वह भी एक युगा वतार की वाणी का ही एक भौतिक परिणति है एक बहुत सुंदर घटना है पहले भी एक बार मैंने शायद कही है इसको अ एक अभिनेत्री तारा सुंदरी देवी ना कि मैं एग्जैक्ट नाम भूल गया मां के पास आई है वो मां का आखिरी समय था तो क्या है कि वैसे तो सभी को ऊपर में नहीं जाने देते थे मां के पास में किंतु यह आती थी ये अभिनेत्री और पता है सभी साधुओं को कि बड़ी श्रद्धा भक्ति है मां के के प्रति तो उनको ऊपर में जाने दिया गया तो अभी यह तो मां के कमरे में नहीं जाएगी उसको तो पता है कि मेरा मन जिस तरह से अशुद्ध है मां के सामने जाकर के मां की प्रेजेंस में जाना मेरे लिए उचित नहीं है तो उसने क्या किया वहीं पे चौखट पे बैठी मां को प्रणाम किया और मां के साथ में बात करने लगी तो मां ने कहा कि अच्छा बेटा तुम कोई भजन सुनाओ तुम तो वहां पर अच्छा गाती हो थिएटर में तो कुछ अच्छा सा भजन ऐसा कुछ सुनाओ तो ये अभिनेत्री ने गाना शुरू किया अभी यह जो गाना शुरू किया उसका जो प्रभाव है पूरे उद्बोधन में ऐसे फैला कि जितने साधु जितने भक्त जितने वॉलंटिज्म हो गई शरत महाराज इतने गंभीर इतने वो अधर वली वो समाधि प्राप्त ठाकुर के शिष्य स्वयं वह अपना काम बंद करके वह जो शरद महाराज का फोटो देख उद्बोधन में वो डेस्क के ऊपर में बैठते थे और वहां पर बैठे-बैठे लीला प्रसंग या कुछ ना कुछ पूरा मठ मिशन का काम किया करते थे वह अपने डेस्क के ऊपर में अपनी कलम थी वह छोड़ कर के एकदम शांत स्थिर होकर के बैठ गए जब तक कि भजन समाप्त नहीं हुआ भजन समाप्त हुआ तो अब जैसे कि एक जादू का एक माहौल बना है वह टूटा और लोगों ने गहरी सांस ली और फिर से अपना काम करने की शुरुआत की अभी देखिए कि जिन्होंने यह स्मृति कथा लिखा लिखी है तो वह महाराज कहते हैं कि यह जो प्रभाव था गान का यह अभिनेत्री तो थिएटर में प्रतिदिन इस तरह का भजन गान करती है इसका इतना चमत्कारिक प्रभाव दिव्य प्रभाव तो वहां पर कभी नहीं देखने को मिलता हां शी इज वेरी टैलेंटेड कोई प्रश्न ही नहीं है किंतु एक दिव्य प्रभाव प्रकट होना आपके किसी कार्य में वह तो ईश्वर के आशीर्वाद के बिना संभव नहीं है मां वहां पर बैठी थी मां सुन रही थी मां अप्रिशिएट कर रही थी मां का आशीर्वाद था बोलकर के जो आर्ट है इट टर्न इनटू अ डिवाइन एक्सप्रेशन आर्ट टर्न इनटू वरशिप ये आपकी कला है वह पूजा में परिणत हुई तो यह कोई भी अवतार आते हैं तो साथ-साथ में ही ऐसे आर्टिस्ट ऐसे ग्रंथ का ऐसे कोई भी क्षेत्र हो वह फिर आर्किटेक्चर हो जैसे कि देखिए कि विज्ञान महाराज ने बेलूर मठ का मंदिर बनाया तो यह मंदिर क्या है जैसे कंक्रीट एक्सप्रेशन ऑफ श्री राम कृष्ण डिविली ठाकुर की जो दिव्य प्रतिभा है उसका एक कंक्रीट एक्सप्रेशन है ऐसी किसी भी क्षेत्र में आप देखेंगे कि ठाकुर कीय दिव्य आशीर्वाद वहां पर जाएंगे और उनके फॉलोअर्स के माध्यम से वह प्रकाश पाएंगे और इसके थ्रू सभी लोग आकर्षित होंगे आज एक सामान्य मनुष्य को जो घर में रहता है चारों ओर से पारिवारिक ये रिस्पांसिबिलिटी से घिरा है उसके सर पर आज कितना टेंशन है कितना उसके सामने सब क्राइसिस है कहीं सांसारिक क्राइसिस नहीं कोई अपना परिवार जन है तो उसके साथ में कोई बीमारी कोई दुर्घटना हुई है बच्चों का टेंशन आजकल तो बच्चों की परीक्षा और बच्चों की स्कूल की जितनी फिक्र बच्चों को है उससे ज्यादा फिक्र तो उनके माता-पिता को रहती है कि अरे ये परीक्षा में जाएगा तो फिर इसको किस तरह से वह शंख वटी ना कि शंख पुष्प ना कि क्या सब वो बच्चों के लिए वो लेके आते हैं वो सब वो ले आना है कौन सा ट्यूशन करेगा कौन सा क्लास करेगा क्या करेगा सब यह सब चिंता बच्चों को जितनी होती है उससे ज्यादा उसके माता-पिता को होती है तो इतना सब सर पे लेकर के बाद में भी फिर वह ठाकुर के पास आए मां का संदेश ग्रहण करें इसके लिए इस दिव्यता को इतना यह एक गहन संदेश है सहज सरल माध्यम से लोगों के सामने प्रस्तुत कर रहा यह माध्यम बहुत सारे हो सकते हैं कीर्तन भजन कथा वाणी ग्रंथ आर्किटेक्चर पेंटिंग आर्ट कुछ भी कहो इसके माध्यम से डिविट्टो महा स्वामी जी के पास आ सके तो यह मा खेत में सोई थी तो इसके ऊपर से हमने इतनी सारी बातें हमारी हुई कि यदि वो ठाकुर मा स्वामी जी का तीनों का बाल्य जीवन कितना सुंदर रूप से अभिव्यक्त हो सकता है यदि उस कक्षा का कोई ग्रंथ का या तो कोई कवि प्रकट हो या तो फिर कोई मूवी मेकर हो ना कि कोई कोई कीर्तन भजन वो करने वाला हो ये जो पुंथी जिस तरह से लिखी गई वो कितना सुंदर एक एक्सप्रेशन है पोएट्री में यह डिविली को ढाला गया है स्वामी जी के ये जो स्तोत्र है अभेदानंद जी के स्तोत्र है अपने यहां पर एक स्वामी जी है उन्होंने रामकृष्ण क चरित मानस लिखा है जैसे रामचरित मानस है उन्होंने रामकृष्ण चरित मानस लिखा है मैं एक सेंटर में था वहां पर वो आए थे और वहां के बड़े महाराज ने कहा कि अरे इसका पारायण करो इसका पाठ करो भक्तों के सामने तो मेरा ऐसा है कि थोड़ा सा ठाकुर मा स्वामी जी को पढ़ा है और रामचरित्र मानस में इतना मेरी रुचि कभी रही नहीं क्योंकि इसके साथ में मेरा इतना परिचय नहीं था किंतु जब ये महाराज ने ये रामकृष्ण चरित मानस गाना शुरू किया कीर्तन करना शुरू किया भक्तों के सामने मैं इतना आकृष्ट हो गया था मैंने कहा अरे वाह देखिए कि भारतीय ट्रेडिशनल पद्धतियां है यह किसी भी डिवाइन संदेश को इस तरह से गद में पद में डालने की पोएटिक फॉर्म में एक्सप्रेस करने की वो कितनी पावरफुल है वह रामकृष्ण चरित मानस का पाठ सुन कर के मैं सही में मुझे बहुत आनंद आता था तो देखिए कि इस तरह से एक के बाद एक विभिन्न क्षेत्रों में यह अभिव्यक्ति होती रहेगी तो मां अपनी कोलेर में ये बांगला शब्द है गोद की बच्ची जिनको आप गोद में उठाते हैं उसको गोद की बच्ची कहते हैं वो कोलेर में शारदा को एक कोने में सुला करके वो वो कपास यानी कॉटन वो तुला करती थी परे वय प्राप्तांक माता के ई काजे सहा जो करी तेन बाद में जब मां की उम्र थोड़ी बड़ी हुई मां जब थोड़ी बड़ी हुई तो वह भी अपनी मां श्यामा सुंदरी देवी को यह कॉटन तुलने में कपास तुलने में मदद किया करती थी माता पुत्री ओई तुला द्वारा पैता काटिया पैता काटिया दले विक्रय लब्ध थे परिवार बोसन भूषण आदि संग्रहित होतो मां और बेटी दोनों मां और कन्या दोनों इस कपास में से पैता यानी कि उपन नयन उपनयन बनाते थे और इसको बेच कर के जो अर्थ प्राप्त होता था इससे बसन बसन और भूषण खाना मने कपड़ा बर्तन यह सब घर में जो आप ला सकते हैं खरीद कर सकते हैं इससे जो पैता यानी कि उपनयन बेच कर के जो अर्थ प्राप्त होता है जो पैसा प्राप्त होता है उससे उने वो कितना सुंदर वो वो दृश्य रहेगा कि श्यामा सुंदरी देवी और छोटी सी बच्ची शारदा मां शारदा ने यहां पर लिखा नहीं है छ सात साल की उम्र होगी मां की वो भी वो मां अपनी मां के साथ में बैठ कर के वो कपास लती है वो पैता बनाती है और अपनी मां के साथ में बातें करती है वो कितना वो सुंदर एक दृश्य होगा फिर वह पैता बेच कर के जो भी अर्थ मिलेगा उसमें से वह जो घर चलाने चलाने के लिए जो आवश्यक द्रव्य चाहिए वोह आप खरीद कर सकते हैं छोटो भाई दे खुणा बेखो मायर आर एक प्रधान कर्तव्य छलो छोटे बच्चों अपने छोटे भाइयों का पालन लालन पालन करना रखना बखन माने उनका केयर करना उनकी रक्षा करना वो छोटे बच्चे इधर-उधर दौड़ते हैं तो कहीं वो अपने को वो इंजर ना कर बैठे कहीं वह गिर ना जाए कहीं लग ना जाए वो रोएंगे बीच-बीच में तो उनको खाना खिलाना है व अपनी गोद में लेकर के थोड़ा इधर-उधर घूमना है अच्छी-अच्छी मीठी मठी बातें करना है वो सो सोएंगे नहीं वो रोएंगे तो उनको अपनी गोद में लेकर के सुलाना है जो अपने छोटे भाइयों की केयर करना फिर मां शारदा वो किया करती थी वो मैंने हमको लगेगा कि वो मुक्ति फक्ति कुछ नहीं चाहिए मां के छोटे भाई के रूप में हम जन्म लेंगे फिर से नेक्स्ट टाइम मां जब आएगी और मां की गोद में बैठ कर के हम भी चीखें चिल्लाए जैसे मां भी वो हमको वो अच्छी सी कहानियां बताएगी वो कुछ गाना गाएगी कुछ खाना खिलाएगी अपनी गोद में ले करके वो घूमेगी इधर उधर वो खेत में जाएगी तो हमको भी ऐसा ही होना है हमको कोई मुक्ति फक्ति कुछ नहीं चाहिए मां के साथ में आएंगे छोटे भाई हो करके किंतु ये प्रॉमिस करना है कि ये जो बाकी भाई मां को जिस तरह से परेशान किए हमको वो नहीं करना है वी आर गोइंग टू बेटर ब्रदर अच्छे भाई होना है मा अच्छा अभ एक पूरा पैराग्राफ है मां कहती है कि अपने भाइयों के बारे में अपने छोटे बचपन के जीवन के बारे में ये पैराग्राफ हम कल पढ़ेंगे आज यही तक ओम शांति शांति शांति हरि ओम तत्सत श्री राम कृष्णर्पण मस्तु