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Ma Sarada Life by Sw Gambhirananda ·

प्राणों की पुकार || श्रीमाँ सारदा देवी : स्वामी गम्भीरानन्द लिखित || 10 Jan 2025

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ओम स्थापक यच धर्मस्य सर्व धर्म स्वरूपने अवतार वरिष्ठा राम कृष्णाय ते नमः आज जिस घटना के बारे में हम पढ़ेंगे उसके बारे में जब मैंने पहली बार पढ़ा था मुझे ऐसा लगा कि अभी तक में जो रामकृष्ण विवेकानंद साहित्य में पढ़ता आया हूं समझता आया हूं उससे थोड़ा सा डिफरेंट टाइप का है राम कृष्ण विवेकानंद साहित्य का अ होल मार्क क्या है हमारे साहित्य का एक स्टैंडर्ड क्या है कि एक तो है कि फिलोसोफी कि वेदांत योग फिर ये भक्ति शास्त्र फिर ये इवन शक्ति साधना यह जो सब विभिन्न तरह की साधनाएं हैं और दर्शन शास्त्र है उनके बारे में चर्चा होगी जो कि ठाकुर भी करते हैं स्वामी जी भी करते हैं और मां भी आवश्यक होने पर कुछ ही वाक्यों में सिद्धांत हमको समझा देती है वह एक स्टैंडर्ड है अपने लिटरेचर का दूसरा स्टैंडर्ड है कि ठाकुर मां और डायरेक्ट डिसाइल 16 डायरेक्ट डिसाइल ठाकुर और मां इन 18 लोगों के जीवन में जो तपस्या और साधना का प्रवाह हमको देखने को मिला उस उसका वर्णन है तीसरा है कि बड़े आनंद के प्रसंग है बहुत सारे प्रसंग जैसे कि हमने डिस्कस किए भी है कि जैसे एक प्रसंग के बारे में बताओ कि वराह नगर मठ की ही घटना है कि सभी गुरु भाई वहां पर रात को शयन कर रहे थे और उस समय फिर यह शरद महाराज को ऐसा लगा कि चलो थोड़ा बहुत कुछ ऐसा कुछ प्रैक्टिकल जोक जैसा किया जाए तो शरद महाराज और एक गुरु भाई को लेकर के वहां पर छत के ऊपर गए फिर वहां पर ये लोग एक्सरसाइज करने के लिए डंबेल्स रखे थे तो डंबेल्स को वहां पर छत के ऊपर में रगड़ने लगे अभी जैसा ऐसे करेंगे एक तो पुराना घर है उसका वहां पर वही है इसके बारे में प्रसिद्ध है कि भूत का घर है भूत उड़े बाड़ी सो फिर अभी ये पुराना घर फिर उसके ऊपर में उसकी ये इमेज है कि भूत का घर है फिर यह ऊपर में से डंबेल ये कोई अभी घड़ घड़ के आवाज होती है तो यह बाबूराम महाराज थे वह सोए हुए थे तो एकदम जग गए और जग कर के ऐसे डर गए कि जैसे सही में लगा भूत आ गया जोर-जोर से चिल्लाने लगे शशि महाराज का नाम लेकर के कि देखो देखो भूत आ गया है भूत आ गया है शशि महाराज ने वहां पर शशि महाराज तो एकदम पहलवान थे वरियर नेचर था उनका तो वहां पर एक मोटा सा लाठी पड़ा था और लाठी लेकर के ऊपर में सीढ़ी चढ़ कर के गए छत के ऊपर में मैं देखता हूं कौन सा भूत है भूत को मार के भगा ंगा ऐसा बोल कर के लाठी पटक पटक वो चिल्लाते चिल्लाते गए ऊपर में जाकर के देखा तो वही शरत महाराज और यही अपने एक दो गुरु भाई प्रैक्टिकल जो कर रहे थे उसके बाद में सब लोगों ने हंसना शुरू किया कि किस तरह से बाबूराम महाराज डर गए थे तो इस तरह से आनंद प्रिय घटनाएं सबसे पहले देखेंगे कि दर्शन शास्त्र को लेकर के चिंतन है फिर इनके साधना और उनकी तपस्या का विवरण है रमो जीी प्रसंग है आनंद प्रिय प्रसंग है और फिर कहेंगे कि साधना किस तरह से की जाए हम आम आदमियों के लिए इसके बारे में बहुत सारा विवरण है जैसे कि आपको राम कृष्ण कथामृत है फिर यह मां की जीवन है मां की यह बातें हैं कि जप ध्यान कैसे किया जाए इसका बड़ा ही सुंदर विवरण है तो इस तरह से कुछ हमको मेजर एस्पेक्ट दिखते हैं रामकृष्ण विवेकानंद साहित्य के इस विवेकानंद रामकृष्ण साहित्य में हमको क्या नहीं दिखता वो नहीं दिखते हैं जो कि बाकी सब धार्मिक साहित्य में भर भर करके पड़ा हुआ है और वह है चमत्कार अभी यह वहां पे एक बहुत बड़ा असेंबली हुआ लोगों का लोगों को देने के लिए ब्रेड खत्म हो गया तो यह जीसस ने एक बास्केट में कुछ बोल कर के कहा कि ले बास्केट को लीजिए अभी इसमें से आप जितना ब्रेड निकालना चाहिए निकालते रहिए वह कभी खत्म नहीं होगा इस तरह की घटनाओं का वर्णन अपने पुराणों में भी बड़ा ही विस्तृत रूप से मिलता है यह भगवान कृष्ण अपनी एक अंगुली पर गोवर्धन पर्वत को उठा लेते हैं या तो फिर महावीर हनुमान महावीर एक छलांग में पूरा समुंदर लांग करके लंका में चले जाते हैं इस तरह की जो कि सुपर पावर रूपी या तो सुपर नेचुरल सुपर नेचुरल और सुपर पावर वैसे दोनों डिफरेंट है किंतु फिलहाल यदि हम दोनों को एक ही कैटेगरी में रख दे तो इस तरह की घटनाओं का वर्णन अपने पुराणों में कम नहीं है भगवान राम और भगवान कृष्ण जिनके अंश से श्री राम कृष्ण देव का भी जन्म हुआ है इन दोनों के जीवन में सुपर नेचुरल सुपर पावरफुल घटनाएं भरी पड़ी हुई है किंतु यह जो अन्य धार्मिक साहित्य में हमको चमत्कार या तो फिर सुपर नेचुरल इंसिडेंट सुपर पावर का प्रदर्शन जो दिखता है उसका प्रदर्शन अपने साहित्य में ऑलमोस्ट नवत है कहीं-कहीं पर कुछ-कुछ घटनाएं हैं जो कि सुपर नेचुरल की बॉर्डर लाइन पर है जैसे कि ठाकुर के दर्शन ठाकुर को भविष्य की बातें पता चल जाती थी ठाकुर को दूसरों के मन में क्या चल रहा है वह पता चल जाता था जैसे कि एक जगह पर एक ऐसा विवरण है कि ठाकुर नरेद को हाजरा के चरित्र के बारे में उनको वार्निंग दे रहे हैं कहते हैं कि ये हाजरा भी ऐसा है कि वहां पे वो किसी के घर गया था अभी ये जो ऑर्थोडॉक्स ब्राह्मण होते हैं ऑर्थोडॉक्स ब्राह्मण के घर में जाकर के वो खुद शौच के लिए जा रहा है और फिर कहता है कि आप मेरे लिए शौच का वो जो पानी भर कर के लौटा होता है फिर साफ करने के लिए वो लेकर आइए तो ये ऑर्थोडॉक्स ब्राह्मण बड़े ही नाराज हो गए तो फिर ठाकुर नरेंद्र को कहते हैं अभी यह गोसीप ये गोसीप सिर्फ हम लोग नहीं करते ये ठाकुर और नरेण भी करते थे तो ये ठाकुर नरेद को कहते हैं कि वहां पर गया था फिर वो ब्राह्मण लोगों को बोला कि आप लोग मेरे शौच के लिए पानी का लोटा लेकर आइए तो ब्राह्मण लोग बड़े ही नाराज हो गए तो अभी नरेंद्र देखिए नरेंद्र भी तो छोड़ने वाला नहीं है और नरेंद्र का हाजरा के साथ में एक अच्छा मित्रता भी था तो नरेण कहता है कि नहीं नहीं मैंने पूछा है हाजरा कोरा के बारे में ऐसी जो बातें चल रही है तो मेरे सुनने में आने से मैं उसके पास में जाकर क्लेरिफाई करता हूं यह तो एक्चुअली आइडियल है किसी के बारे में कोई पीछे पीछे से बात करें और आप सुन ले विश्वास कर ले तो ठीक नहीं है तो नरेंद डिस्कशन करके लगता है डिस्कशन पढ़ के ऐसा लगता है कि नरेण इज मोर प्रैक्टिकल और स्वामी जी ने अपनी ये जो रूल बुक है रामकृष्ण संघ की उसमें यह मेंशन भी किया है कि जब भी एक भाई दूसरे भाई के विरुद्ध में छुपके छुपके आपके साथ में आ कर के बात करें तो समझना कि वह अपने संघ को तोड़ने वाली बात हुई कभी भी एक के दूसरे के अगेंस्ट में कंप्लेन या गॉसिप नहीं सुनना है यदि आपको किसी के साथ में समस्या है तो उसके बारे में जो बातें चल रही है सुनने के बाद में उस व्यक्ति के साथ में जाके क्लेरिफाई करना है कि भाई तुम्हारे बारे में ऐसा सुना है तो तुम्हारा क्या मत है दोनों पक्ष की बात सुन कर के फिर आपको जजमेंट लेना है पीछे-पीछे से सब गॉसिप सुन कर के आपने मान लिया ये तो ठीक नहीं है तो अभी ये जो डिस्कशन है ठाकुर और नरेंद्र का ये डिस्कशन सुन कर के ऐसा लग रहा है कि ठाकुर ने जैसे गोसीप पे आधार रख कर के सब सुन लिया है और नरेण इज वेरी प्रैक्टिकल कि दोनों पक्ष की बात सुनता है तो पहले तो ठाकुर ने कहा कि देखो हाजरा वहां प गया था और ऑर्थोडॉक्स ब्राह्मण लोगों को अपने वो शौच का लोटा लेने को कहा शौच जाने के लिए कहा कि लोटा लेकर चलो तो वो ब्राह्मण लोग बड़े नाराज हो गए तो नर ने कहा नहीं मैंने हाजरा को पूछा है हाजरा कहता है कि उन लोगों ने सामने से ऑफर किया था कि हम आपके लिए शौच का लोटा लेकर चले कि नहीं तो ठाकुर कहते हैं कि अच्छा वो फिर वहां पर गया था फिर वो कहां पे वो गाड़ी लेकर के तो फिर वो दरवा जो गाड़ी वाला जो है उसको पैसा नहीं दिया ऐसा कैसे चलेगा तो नरेंद्र कहता है नहीं नहीं वो तो बोलता है कि मैंने दिया है ऐसा करके दोनों इस तरह से डिस्कशन कर रहे हैं किंतु हमको ये डिस्कशन सुन कर के लगता है कि नरेण बड़ा प्रैक्टिकल है दोनों साइड की बात सुनता है गॉसिप भी सुनता है हजरत के बारे में और हाजरा के पास में जाक यह स्पष्टीकरण भी करता है और ठाकुर जो है सिर्फ गोस प आधार रख के उसका चरित्र का आकलन करते हैं ये ऐसा कथामृत में पढ़कर शायद लगेगा किंतु बहुत सालों के बाद में अमेरिका में जाकर के स्वामी जी ने जो प्रवचन दिए जो बातें की उसमें स्वामी जी कहते हैं यह मोस्ट प्रोबेबली घटना है यह ग्रेट समर अमेरिका में सेकंड विजिट के दौरान रिजली मैनर में जब स्वामी जी रह रहे थे उस समय की यह बात है स्वामी जी कहते हैं कि देखो अभी यह स्वामी जी का अंतिम समय स्टार्ट हो गया है यह जो सब ठाकुर के साथ में वार्तालाप हुए होंगे वह 18828 5 के आसपास के है सब और यह समय है अभी स्वामी जी का अंतिम दिनों का यह 18999 हजरा को डि कर रहा था किंतु रिजली मैनर में बैठ कर के अपने जीवन के अंतिम पर्व के समय स्वामी जी कहते हैं कि जो मैंने जिन लोगों का आकलन लगाया है चरित्र का वो बहुत बार ऐसा हुआ है कि वह सही नहीं हुआ है और जबकि ठाकुर जिसके चरित्र का जो आकलन करते हैं जो उनका डायग्नोसिस करते हैं एनालिसिस करते हैं वह 100% परफेक्ट हुआ है ठाकुर कभी भी गलत नहीं हुए हैं जबकि मैं बहुत बार गलत हुआ हूं यह ठाकुर इस बात को नरेद को कहते भी है कि देखो तुम कहते हो ना कि तुम लोगों का चरित्र समझ पाते हो इसलिए मैं तुमको कहता हूं बोल कर के हाजरा के सामने नरेद को उनको अलर्ट करते हैं कि देखो उसका चरित्र इस तरह का है तो उस समय नरेण ठाकुर की बात नहीं मानता था किंतु इतने 151 सालों के बाद में वही स्वामी जी वही नरेंद रिजली मैनर में बैठ कर के जीवन के अंतिम पर्व के समय कहते हैं कि मैंने लोगों के चरित्र के बारे में जो आकलन किया है एनालिसिस किया है मैं बहुत बार गलत प्रूव हुआ हूं किंतु ठाकुर कभी भी गलत प्रूव नहीं हुए हैं तो ये ठाकुर की ये जो सुपर नेचरल बॉर्डर लाइन के ऊपर में यह सब सिद्धियां थी फिर एक वो प्रसंग है कि वहां पर श्याम पुकुर की ही बात है दुर्गा पूजा सुरेश मित्र ने ठीक किया कि मैं अपने घर में दुर्गा पूजा करूंगा किंतु इस शारदीय दुर्गा पूजा में भक्तों के मन में विषाद छाया हुआ है क्योंकि ठाकुर को कैंसर हो गया है और जो नृत्य कीर्तन दिव्य बातों का कथामृत का जो प्रवाह हर बार बहता था वह सब अभी बंद हो गया है तो उस समय ठाकुर संधि पूजा के समय वहां पर अपने कमरे में बैठे हुए थे श्याम पुकुर में उस समय एकाएक को समाधि में चले गए और फिर जब समाधि में से बाहर आते हैं तब वो ठाकुर कहते हैं कि देखो मैंने देखा कि यहां से लेकर के सुरेश के के घर तक एक आलो रास्ता होए गलो अर्थात कि एक प्रकाश का रास्ता बन गया उस प्रकाश के रास्ते के माध्यम से मैंने जाकर के सुरेश के घर में जाकर के देखा कि वहां पे मां दुर्गा की प्रतिमा है चारों ओर प्रदीप चले हुए हैं किंतु सुरेश के मन में शांति नहीं वो वहां पे बैठ कर के मां मां करके पुकार करके रो रहा है क्योंकि मैं वहां पे नहीं जा पाया हूं ये बात ठाकुर ने नहीं कही ये मैं ऐड कर देता हूं कि सुरेश शायद इसलिए रोता होगा कि ठाकुर की वहां पर उपस्थिति नहीं है तो फिर ठाकुर ने सभी भक्तों को कहा जाओ जाओ तुम सभी लोग जाओ मैं तो नहीं जा पाऊंगा तुम लोग जाओ तो सभी जितने भी भक्त थे सब सुरेश के घर पहुंचे देख कर के आश्चर्य चकित हो गए कि ठाकुर ने जो वर्णन किया था वैसा ही सीन वहां पे है मां दुर्गा की प्रतिमा है बहुत सारे प्रदीप जलाए गए हैं और सामने बैठ करर के सुरेश मित्र रो रहा है तो यह जो बॉर्डरलाइन सुपर नेचुरल घटनाएं कुछ कुछ है ठाकुर के जीवन में किंतु जिसको कि हम फुल स्केल मिरेकल कहते हैं ऐसा बड़ा ही रेयरली आपको देखने को मिलेगा जो भी हमको देखने को मिलता है उन सभी के पीछे हम किसी ना किसी तरह का दर्शन शास्त्र का आधार लेकर के उसको समझा सकते हैं अभी जैसे कि दूसरों के पाप है या दूसरों के कष्ट है वो अपने के ऊपर में ले लेना जैसे कि वही मथुर बाबू की पत्नी बीमार हो गई मथुर बाबू ने आकर के ठाकुर को कहा कि मेरी पत्नी को ठीक कर दीजिए यदि क्योंकि उनकी पत्नी यानी की राणी रासमुस मृत्यु हो जाता है तो यह काली मंदिर का जो व्यवस्था है जो मैनेजमेंट है मथुर बाबू के हाथ से चला जाएगा तो मथुर बाबू कहते हैं काली मंदिर का जो मैनेजमेंट मेरे हाथ से चला जाएगा उस बात का गम नहीं है गम इस बात का है कि मैं आपकी सेवा नहीं कर पाऊंगा तो ठाकुर ने इमीडिएट उसकी पत्नी का रोग अपने ऊपर में ले लिया और छ महीने बहुत सारा उनको भुगतना पड़ा फिर ठाकुर का जो कैंसर है उसके पीछे में भी यही थिरी है पूरे जगत का पाप जैसे कि उन्होंने हर लिया हमारे पिछले कर्मों से जैसे कि पूरी मानव सभ्यता को मुक्ति दे दी और हमारा ये जो 20th 21 सेंचुरी में ये जो डेवलपमेंट है आज ये आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस है नैनोटेक्नोलॉजी है क्वांटम डायनेमिक्स है स्पेस एक्सप्लोरेशन है आज हमको लगता है कि हम अपने बलबूते पे रहे हैं किंतु ऐसा नहीं है हमारे सर के ऊपर में जो बोझा था वो बोझा जो है वह जैसे कि ठाकुर ने हर लिया था यह जो मॉडर्न टेक्नोलॉजी है यह मॉडर्न जो सब हमारे सामने यह सब आज की उपलब्धियां है हमको लगता है कि यह हमारी मानव जात की उपलब्धि है हमने मेहनत करके यह सब डेवलप किया है किंतु बात ऐसी नहीं है यह अवतार पुरुष बीच-बीच में इस पृथ्वी पर जन्म ग्रहण करते हैं और जन्म ग्रहण करके हमारे पाप हमारे पिछले कर्म है उसको हर लेते हैं हमारे सर के ऊपर में से यह जो भार है बोजा है उसको लाघव कर देते हैं हल्का कर देते हैं और फिर हम बड़ी ही द्रुत गति से बड़ी ही शीघ्र गति से प्रगति करना शुरू करते हैं अदर वाइज देखिए कि ये 20th सेंचुरी में अमेरिका और सोवियत यूनियन के बीच में ये न्यूक्लियर कंफ्रे चला था दोनों के पास में 10-1 हज न्यूक्लियर मिसाइल थी और कभी भी जाकर के हेयर ट्रिगर हमेशा यह मिसाइल हाई अलर्ट पर रहती थी कब किसी पागल ने एक मिसाइल को छोड़ दिया तो सामने वाले ने 100 छोड़ दी मिसाइल और उसके सामने वाले ने हज पूरे पृथ्वी का खात्मा हो जाता तो यह नहीं हुआ इन सबके पीछे ठाकुर की ही तपस्या उसके पीछे कारण भूत है तो यह जो सब ठाकुर हमारे पाप कर लेते हैं या तो उनको सुरेश मित्र के घर पर जाकर के उनको देखने को मिलता है यह सब चीजों के पीछे हम लोग एक तरह का दर्शन शास्त्र अपनी भारतीय सभ्यता के जितने भी दर्शन है योगशास्त्र है उसका हवाला देकर के इसको हम समझा देते हैं प्योर मिरेकल जिसको कहा जाएगा इस तरह से बहुत ही मुझे नहीं लगता कि अपने लिटरेचर में ऐसा कुछ ज्यादा है तो यह मेरी एक धारणा थी बैकग्राउंड में इसको बना रहा हूं कि आज का जो प्रसंग है उसके पीछे का तो तो ये मेरी धारणा थी इस तरह से मैंने सोच के रखा था और फिर ये जो प्रसंग मैंने पढ़ा तब मुझे बड़ा ही आश्चर्य हुआ मैंने सोचा कि इस प्रसंग को किस तरह से आप आकलन करेंगे प्रसंग कौन सा था प्रसंग हम सबको पता ही है वैसे बड़ा ही फेमस है वही काशीपुर में ठाकुर थे मां भी थी सब डायरेक्ट डिसाइल त्यागी संतान भी थे एक दिन मां अपने कमरे में बैठी हुई थी अभी यदि आप काशीपुर के दर्शन किए होंगे तो आपको पता होगा कि यह जो सीढी है उस सीढ़ी के नीचे में ही मां का कमरा है और मां के दरवा मां के कमरे में शायद यदि आप बैठेंगे तो आपको वह सीढ़ी पूरा दिखता है कि कौन सीढ़ी चढ़ रहा है कौन सीढ़ी से नीचे उतर रहा है और पहले फ्लोर पे फर्स्ट फ्लोर प ठाकुर का कमरा है अभी मां अपने कमरे में बैठी हुई थी देखा अभी यह ठाकुर की कैसी परिस्थिति है जब यह घटना हुई ठाकुर अपने से यह अपनी पोजीशन को भी चेंज नहीं कर सकते थे उनको थोड़ा सा घूमना है तो वह भी किसी को वो पास फेरना है तो वह भी किसी को उनको पकड़ करके सहाई करनी पड़ती थी खाना खाना जो खड़े होना बैठना वह सभी चीजों के लिए उनको सहाय की आवश्यकता पड़ती थी इतने ठाकुर दुर्बल हो गए थे ऐसी परिस्थिति में एका एक मां ने देखा कि ठाकुर इस सीढ़ी से और अच्छा फिर कल हमने यह भी देखा कि यह कौन सी सीढ़ी थी जिसके स्टेप्स जो थे इतने ऊंचे थे कि एक सामान्य आदमी को भी चढ़ने में तकलीफ होती चढ़ने उतरने में तो एक बीमार आदमी को तो पता नहीं कितनी तकलीफ होगी तो जो आदमी जो ठाकुर अपने बिस्तर से खड़े होने के लिए भी जिनको सहाय की आवश्यकता होती है वही ठाकुर जैसे कि तीर वेग से यह शब्द यहां पर जैसे कि कहा गया है बड़ी ही शीघ्र गति से आकर के सीढ़ी से नीचे उतरे और वही कहीं पे बाहर में चले गए तो मां बैठी बैठी सोच रही है कि क्या यह मेरी दृष्टि का भ्रम है ना कि यह घटना सही सही हुई है ठाकुर तो इतने दुर्बल है कैसे वो इतने शीघ्र गति से सीढ़ी से उतरे बाहर चले गए मां सोच रही है थोड़ी देर के बाद में देखा कि ठाकुर फिर से उसी शीघ्र गति से आकर के सीढ़ी के ऊपर में चले गए अपने कमरे में तो मां तो बड़ी ही आश्चर्य चकित यह कौन सी घटना हुई क्या हुई कैसे ऐसा हो गया फिर जब ठाकुर के पास में जब मां गई ही बाद में खाना लेकर के गई होगी कि जो किसी प्रसंग से मां ने ठाकुर को पूछा कि अरे आपका तो स्वास्थ्य इतना ये है और फिर जैसे उस समय तो पता है ना कि यह भक्तों में दो तरह की डिबेट चल रही थी कि नरेण और त्यागी संतानों का कहना था कि ठाकुर की बीमारी जो है इस बार जैसे कि लगता है कि ठाकुर ने अपना शरीर त्याग करने के बारे में निश्चय करके ही बैठे हैं तो आओ चलो इस अंतिम समय का हम इस तरह से उपयोग कर लेते हैं कि हम अपने साधन भजन तपस्या में डूब जाते हैं ठाकुर ने हमको जो ब्रह्म प्राप्ति का मार्ग दिखाया है उसको उस मार्ग पर चलके जीवन सार्थक कर लेते हैं जबकि ये गिरीश घोष जैसे कुछ लोगों का मानना था कि नहीं ठाकुर अपने भक्तों को इकट्ठा करने के लिए एक तरह की लीला कर रहे हैं बीमारी रूपी और जैसे ही उनके संघ का गठन हो जाएगा या तो फिर जिस उद्देश्य से उन्होंने यह लीला की है उद्देश्य जब सिद्ध हो जाएगा तब यह बीमारी का यह मुखो फेंक करके फिर से दक्षिणेश्वर चले जाएंगे तो इस तरह की दो थिरी उस समय थी और आज हमको लगता है हम लोग सभी लोग सोचते हैं कि नहीं नहीं यह नरन की ही थिरी जैसे कि ठीक थी जैसे कि ठाकुर ने सही सही में शरीर त्याग कर के बारे में सोच लिया है और देह के जो धर्म है पंच महाभूत का यह जो देह है व वो तो उसके अनुसार चलता ही रहेगा तो मैंने यह जन्म मृत्यु जरा व्याधि यदि अपने शरीर में है तो यह अवतार के भी शरीर में है उसमें इससे ज्यादा कुछ सोचना नहीं है यह बात आज हम ऐसा सोचते हैं किंतु देखिए कि इस घटना से ठाकुर के उत्तर से हमको क्या पता चलता है ठाकुर ने उत्तर दिया मां ने जब पूछा कि आपको मैंने देखा कि इस तरह से आप इतने तीव्र गति से गए और तीव्र गति से आकर के सीढ़ी चढ़ के आपके रूम में भी आ गए तो माजरा क्या है सीक्रेट क्या है इसके पीछे का तो ठाकुर ने कहा कि देखो यह सब लड़के लोगों ने सोचा था वहां पर खजूर का एक पेड़ है वहां पर जाकर के कुछ पिकनिक जैसा करेंगे किंतु मैंने दिव्य दर्शन से देखा कि उस खेजूर के पेड़ के नीचे में एक बड़ा ही जहरीला सांप रहता है अभी ये लड़के बेचारे आनंद करने के लिए वहां प जाएंगे और ये जहरीला सांप किसी को काट लेगा तो फिर तो बड़ी ही मुश्किल हो जाएगी तो मैंने जाकर के पहले ही जाकर के उस साप को चेतावनी दे कर के आ गया कि किसी को काटना मत वहां से भगा दिया और फिर मैं वापस आ गया तो अभी ये ठाकुर का उत्तर आप किस कैटेगरी में रखेंगे यह तो आपको गिरीश घोष की बात मने सच्ची हो गई कि ठाकुर जैसे की बीमारी का एक मुखौटा पहने हैं और फिर जब चाहे बीमारी को छोड़ कर के तीव्र गति से जाकर के साप को भगा कर के तीव्र गति से वापस भी आ सकते हैं दिव्य दर्शन भी उनको होते हैं कि वहां पे यह साफ है बोल कर के तो अभी देखिए अल्टीमेटली कौन सही है नरेंद सही है ना कि गिरीश घोष सही है ना कि दोनों सही है अल्टीमेटली देखिए कि ठाकुर कहते हैं ना कि ईश्वर के भाव की इति नहीं कर सकते ईश्वर द्वैत भी है अद्वैत भी है साकार भी है निराकार भी है और भी कितना कुछ है ईश्वर के भावों को आप अपनी सामान्य बुद्धि से अपनी एक गठरी के भीतर में नहीं बांध सकते विदिन फोर कॉर्नर्स ऑफ योर वॉल यू कैन नॉट पुट द ईश्वर पुट द गॉड तो य हां पर भी वही बात जैसे कि साबित हुई नरेण और गिरीश घोष का काफी डिस्कशन होता था काफी आर्गुमेंट भी होता था नरेंद्र जब कहता था वेदांत के सूत्र को लेकर के कि हम सभी के भीतर में वही परमात्मा है वही ब्राह्मण है साधन भजन करेंगे तो ठाकुर जिस ब्रह्मण का साक्षात्कार किए हैं हम भी वही ब्रह्मण का साक्षात्कार करेंगे और यहां पर गिरीश घोष कहता है कि नहीं जो कृष्ण ही कृष्ण हो सकते हैं और कोई कृष्ण नहीं हो सकते कृष्ण स्तु भगवान स्वयं कृष्ण हम जितनी भी साधना करें हम भगवान कृष्ण के पास तक पहुंच जाएंगे किंतु कृष्ण नहीं हो पाएंगे तो यह एक पक्का भक्त का माइंड सेट है गिरीश घोष का और नरेण का है पक्का अद्वैत माइंडसेट तो ठाकुर इन दोनों को झगड़ा करवा कर के फिर बड़ा आनंद करते थे बहुत बार ऐसा हुआ है ठाकुर कहते हैं कि चलो तुम लोग आर्गुमेंट करो ये हीरानंद है हीरानंद सिंध देश का एक भक्त वहां पे ठाकुर के पास में आया यह भी ठाकुर की वो आत्मप्रकाश पर्व की ही बात है ठाकुर की अंतिम समय की ही बात है ठाकुर कहते हैं कि चलो तुम लोग आर्गुमेंट करो प्रश्न करो इसको कुछ मैंने मास्टर महाशय बैठे थे हीरानंद बैठा था तो फिर मास्टर महाशय कुछ नहीं बोल रहा है हीरानंद भी कोई कुछ नहीं बोल रहा है तो फिर ठाकुर थोड़े नाराज हो गए दो-तीन बार बोलते हैं करो आर्गुमेंट करो प्रश्न करो कोई कुछ नहीं बोल रहा है तो फिर जैसे वो कमांडो को बुलाया जाता है ना जब बहुत बड़ी तकलीफ आ जाती है बहुत बड़ा अटैक हो जाता है तो ठाकुर यहां पर बोलते हैं नरेद को बुलाओ नरेद करेगा आर्गुमेंट नरेद्र को बुलाया गया फिर नरेद्र बैठा कर के फिर अभी बोलते हैं ठाकुर फिर से पूछते हैं करो आर्गुमेंट करो प्रश्न करो एक दूसरे को तो फिर आखिर में अभी अभी हीरानंद भी बेचारा क्या करेगा ठाकुर जब इतना ये कर ही रहे हैं तो फिर हीरानंद नरेद को पूछता है कि भक्त को इतनी तकलीफ क्यों है इस जगत में तो अभी ये तो नरेण है नरेण तो अभी एकदम अद्वैत एकदम अपने वो भैरव जैसा उसका नेचर तो उसने इमीडिएट कह दिया कि भगवान की ये सृष्टि है इसमें सब कुछ गड़बड़ गड़बड़ है यदि मुझे सृष्टि की रचना करने को बोला जाता मैं इससे भी अच्छी सृष्टि की रचना करता तो ये था नरेंद्र का भाव कि आप में और ईश्वर में बस साधना का ही अंतर है ऐसा मत सोचिए कि ईश्वर ईश्वर ही रहेंगे हम हम ही रहेंगे हम कभी ईश्वर नहीं हो पाएंगे साधना करेंगे तो हम भी ईश्वर हो पाएंगे जबकि यहां पर गिरीश घोष था भगवान कृष्ण के पास में जाकर के आप खड़े रह सकते हैं भगवान कृष्ण आप नहीं बन सकते तो अभी देखिए कि किंतु जितना जितना ठाकुर का जीवन हम अभ्यास उसका करते जाते हैं हमको लगता है कि जो आपात विरोधी भाव हमको दिखते हैं विरोधी आइडियाज जो दिखते हैं उन सबके पीछे में कहीं ना कहीं एक यूनिटी है यह डिफरेंस जो है सिर्फ ऊपर ऊपर से है डीप लेवल में जाएंगे तो सभी आइडियाज एक जगह प मर्ज हो जाते हैं किंतु उस जगह के बारे में हम अपनी बुद्धि से या अपने मन से उसके बारे में नहीं सोच पाएंगे ना ही डिस्कस कर पाएंगे उसके लिए हमको भी साधन लब्ध सिद्धि चाहिए जैसे ही अपना मन ये अपनी ये जो कॉन्शसनेस है ये अपने मन और वाणी के यह जो स्तर को इस कॉन्शियस इस लेवल को पार करके सुपरकॉन्शसनेस में चली जाएगी तब यह सब जैसे कि कराम मलक वत हो जाएंगे जैसे कि अपने सामने सब सीक्रेट ओपन हो जाएंगे किंतु जब तक मन और वाणी के लेवल पर है तब तक यह सब सीक्रेट ही रहेगा तो यहां पर वही एक घटना जिसका हम पाठ करते हैं गंभीरानंद जी महाराज क्या कहते हैं काशी पुरे श्री श्री ठाकुर जखन संपूर्ण सज्जा शही तखन शेवा निर तो अंतरंग भक्तगण एक दिन स्थिर को लेन जे उद्यान दक्षिण पार्श्व एक खेजूर गाच हो संधार समय रेने रोज खाई में काशीपुर में श्री श्री ठाकुर जब संपूर्ण रूप से सैया शही थे उस समय ठाकुर की सेवा में निरत कुछ अंतरंग भक्त यानी कि यही सब त्यागी संतान उन्होंने एक दिन ठीक किया कि उद्यान के दक्षिण कोने में एक खजूर का पेड़ है वहां पर संध्या के समय में जाकर के यह रेने रोस अर्थात मुझे लगता है खजूर का ही रस होगा वह खाएंगे श्री श्री ठाकुर ही विषय किछु जानी तेना अभी ठाकुर को किंतु इस प्लान के बारे में कुछ भी पता नहीं था जथा काले श्री जुक्तो निरंजन प्रवृति श कोले दोल बंधिया ईद के चलीले जब समय हुआ ठीक समय पर यह निरंजन वगैरा दल बना कर के एक साथ में ग्रुप बना कर के उस ओर दक्षिण की ओर चले एमन समय श्रीमा अकस्मात देखी ले ठाकुर जीन तीर बेगे नीचे नाम गले समय माने एक अकस्मात देखा एका एक देखा कि ठाकुर जैसे की तीर वेग से शीघ्र गति से वो सीढ़ी उतर करके वो नीचे में आ गए हैं तिनी चमक होया भाबले यो की संभव माने चमक हो कर के सोचा यह भी क्या संभव है जाके पास फिरि दते होई तीनी की कोरे ध्रु तो नीचे नाम पारे जिनको भी ये पड़का या पास को भी फिराना पड़ता है इस ओर सोए है तो इस ओर सोना है तो भी उनको किसी की मदद की ज जरत है वो इतनी द्रुत गति से कैसे सीढ़ी उतर सकते हैं अथ खुश प्रथक प्रत्य के अस्वीकार कोरा चलेना यह प्रश्न भी हुआ किंतु यह फिर अपनी नजरों से जिस चीज को उन्होंने देखा है उसको वह अस्वीकार भी नहीं कर सकती अगत श्री रामकृष्ण घोरे जाया परी कोरीते होई लो अच्छा अभी ये नजरों से देखा है तो परीक्षा भी कर लेते हैं माने ठाकुर के घर में जाकर करके परीक्षा करने के लिए गई देखिले तिनी शेखाने नाई घर सुन्नो देखा कि ठाकुर नहीं है कमरे में घर तो खाली पड़ा है तिनी भय बहुल होया इतस्ततः मग्न हो गई एकट परे देखीते पाले किंतु कुछ समय के बाद में ही देखा ठाकुर पूर्व तो तीर बेग घोरे फिरले ठाकुर पहले की तरह ही तीर वेग से शीघ्र गति से अपने कमरे में फिरे उत्सुक निवृ तीर जनन तीनी पर श्री राम कृष्ण के ई कोथा जिज्ञासा कोरी ले तिनी बोली ले उत्सुकता तो है अभी क्यूरियोसिटी तो है कि यह क्या हुआ कैसे हुआ इसके निवारण के लिए मां ने बाद में ठाकुर को पूछा कि ये कैसे आपने इस तरह से शीघ्र गति से जाकर के फिर वापस भी आ गई ये सीढ़ी चढ़ना आम आदमी के लिए भी मुश्किल है आप तो बीमार है तो क्या हुआ यह सब तो इसके उत्तर में ठाकुर ने कहा तुम्ही देख छो ना की तुम्ही देखे छो ना की मने तुमने क्या देख लिया ताहर पर बोली लेन माने उनका सीक्रेट तो बाहर आ गया फिर उसके बाद में उन्होंने कहा छले रा सबब एखाने ऐसे छे शो कोले छले मानुष ये बच्चे लोग जो सब यहां पे आए हैं सभी के भीतर में ब पना है तारा आनंद को ई बागान एक पासे खेजूर गा आ तार रोस खेते जालो यह लोग आनंद करने के लिए इस बागान के एक कोने में खजूर का पेड़ है उसमें खजूर का रस खाने के लिए जा रहे थे आमी देखल ई गाज तलाई एकटा कालो साप रहे छ मैंने देखा उस पेड़ के नीचे में एक काला साप हैतो रागी शकल के कामड़ तो वो इतना क्रो भर उसके भीतर में इतना क्रोध है वह इतना क्रोधित है कि वह सबको काट लेता छले राता जान तो ना अभी बच्चों को तो पता नहीं है कि साप है साप काटेगा ताई उन्नो पथे शेखाने गए पटा के बागान थे के ताड़ दिए लो इसीलिए मैं अन्य रास्ते से पहले ही पहुंच गया और साप को वहां से भगा करके आ गया वापस बोलेल आर कखन ढकी इसने और बोल कर के आया कि फिर कभी भी यहां पर मत आना ती वही कोथा अपर कहा क्यों बोली ते श्री मां के निषेध करिया दिले और साथ अभी यह बात कहने के बाद में ठाकुर ने मां को कह दिया कि इसके बारे में और किसी को बताना नहीं समस्त देखिया व शनिया श्री मायर आर वांग निष्पत्ति होलो ना यह सब देख कर के और सुन कर के मां के मुंह में से जैसे कि किसी भी तरह का शब्द ही नहीं निकल पाया तो मने मां इतनी आश्चर्य चकित हो गई देखिए कि जैसे मैंने पहले भी कहा कि अपना यह जो राम कृष्ण विवेकानंद कैनन है राम कृष्ण विवेकानंद साहित्य है उसमें इस तरह का अभी इसके पीछे में आप कौन सी थिरी लगाएंगे योग और वेदांत की लगाना चाहे तो बहुत लगा सकते हैं किंतु इस तरह की घटनाएं हमारे संघ में साहित्य में बड़ी रेयरली देखने को मिलती है अभी यह रेर घटना है इसके पीछे का क्या कारण हो सकता है दो हो सकते हैं कि इस तरह की घटनाएं हुई ही नहीं है ज्यादा इसलिए इसका वर्णन इतना नहीं है या तो फिर कहेंगे कि देखिए कि अवतार के जीवन में जिसको सुपर नेचुरल घटनाएं कहते हैं सामान्य दृष्टि से चमत्कार जिसको कहा जाता है वह होते ही रहते हैं किंतु फिर चमत्कार के बारे में हम कुछ भी लिपिबद्ध नहीं करते हैं यह एक हो गया फिर इसके साथ-साथ में ही हमको स्वामी जी की प्राण की थिरी को याद करना होगा स्वामी जी का राजयो हमने पढ़ा राज्यों का जो थर्ड चैप्टर था प्राण इसको भी हमने स्टडी किया स्वामी जी क्या कहते हैं आकाश और प्राण बोलकर के दो तत्व है इस विश्व ब्रह्मांड में इस कॉस्मो में जितने भी पदार्थ है व सब आकाश का ही परिणाम है आकाश के ही विभिन्न घटक है उनकी एक के बाद एक कंपाउंड होकर के बने हैं और जो कुछ भी एनर्जी है वो सब प्राण की बनी है या तो ग्रेविटी इलेक्ट्रोम मैग्नेटिज्म स्ट्रांग वीक न्यूक्लियर फोर्स या तो फिर ये एंटाई ग्रेविटी जो जो आजकल बड़ी चल रही है या तो फिर मनुष्य के भीतर में यह जो दिव्य दर्शन की साधना की जो उपलब्धियां है ये सबके पीछे प्राण की ही थिरी है और यदि प्राणायाम पे आप कंट्रोल पा ले तो आप क्या से क्या नहीं कर सकते हैं चांद सितारों को अपने रास्ते में से हटा सकते हैं दूरदर्शन कहां पे क्या हो रहा है वो सब आप देख सकते हैं रिमोट हीलिंग कहां पे कोई आदमी बीमार है तो यहां पर बैठ कर के आप उसको ट्रीट कर सकते हैं वगैरह कितनी ही तथाकथित जादुई शक्तियां आपके भीतर में आ जाएंगी किंतु याद रखिए कि ये जादू चमत्कार नहीं है इसके पीछे में प्राण का ही विज्ञान है तो यहां पे भी अल्टीमेटली तो हमको कहना ही पड़ेगा कि यह तो कोई जादू चमत्कार नहीं है ठाकुर की प्राणायाम में सिद्धि होगी ही होगी कोई प्रश्न ही नहीं है उन्होंने तो सभी तरह की योग साधनाएं की थी इसके लिए इसकी वजह से ठाकुर यह जो शक्ति है इसका अपने भीतर में मेनिफेस्टेशन भी कर पाते होंगे तो अभी आखिर में एक दूसरा भी प्रश्न होता है कि तो फिर ठाकुर ने इस प्राण की शक्ति से प्राणायाम की शक्ति से अपनी बीमारी का हल क्यों नहीं किया टेंपररी जद अपने में इतनी शक्ति आ सकती है कि वो दौड़ कर के जाए वहां पे गार्डन के किनारे में वह साप को जाकर के भगा दे और फिर वापस आ जाए तो फिर यह कैंसर क्यों भाई य किस परिस्थिति से आपने यह सब कौन सा लॉजिक है तो इसके भी कहानी है हमको पता है कि सशधर पंडित आ कर के ठाकुर को कहता है कि महापुरुष के पास में योग साधना के बाद में ऐसी शक्ति आती है कि वह बीमारी ठीक कर पाए तो ठाकुर ने उस समय तो ज्यादा उसको कुछ माइंड नहीं किया किंतु फिर बाद में नरेद और नर ने पकड़ के र के पीछे में लग गया नरन की महाशय आपको अपनी बीमारी ठीक करनी ही होगी आप अपने खुद के लिए जो ना करें यदि ना करना चाहे किंतु हमारे लिए तो करना होगा तब ठाकुर ने क्या कहा था कि यह मन प्राण शरीर आत्मा अंतरात्मा सब जद मैंने मां को अर्पित कर दिया है तो फिर मैं मां के पास में किस तरह से मांगूं कि मां इस शरीर को ठीक कर दे या तो मैं किस तरह से किसी योग विद्या का सहारा लेकर के मैं किसी चमत्कार चमत्कार को नहीं किंतु यह प्राण का विज्ञान के सहारे मैं अपने को ठीक कर दूं यह जो स्वार्थ परता है अपने देह की ओर थोड़ा सा भी जो है एक आकर्षण संपूर्ण रूप से ठाकुर का विलीन हो गया था संपूर्ण रूप से यह जो देह भान विहीन हो गए थे संपूर्ण रूप से निस्वार्थ हो गए थे स्वार्थ गंध संपूर्ण रूप से मिट गया था ठाकुर का तो ठाकुर बोलते हैं कि किस तरह से मैं यह सब करलू और देखिए कि एक बार ठाकुर ऐसा करने को भी गए थे फिर ठाकुर के साथ में क्या हुआ था वो हृदय हृदय ठाकुर को कहता है कि आपके पास में मामा आपके पास में ये सब सिद्धि है कुछ उपयोग कीजिए तो या तो फिर मां के पास में मांगिए कुछ सिद्धियां तो ठाकुर जब मां के पास में ऐसी को सिद्धि मांगने को गए ऐसा कुछ करने को गए तो मां जगदंबा ने ठाकुर को क्या दिखा दिया एक बूढ़ी वैश्या उनकी ओर पीट करके बैठी है और सोच कर रही है और वो ठाकुर देखते हैं और मां कहती है कि ये जो बूढ़ी विष कि ये जो विष्ठा है उसके य उसके समान यह सब सिद्धियां है तो ठाकुर बड़े ही नाराज होकर के हृदय के साथ में झगड़ा करने को गए साला तुम्हारी वजह से मुझे यह सब देखना पड़ा देखिए कि जब हम राजयोग या तो फिर स्वामी जी की यह सब थिरी प्राण के बारे में प्राण के विज्ञान के बारे में पढ़ते हैं उस समय भी हमने ये डिस्कस किया था कि अपने साहित्य में इन सब सिद्धियों का कोई प्रकाश क्यों नहीं दिख रहा है तो ऐसा नहीं है कि प्रकाश नहीं है या नहीं दिख रहा है बात ऐसी है कि यह सब सिद्धियों के परे जाएंगे तभी कहीं जाकर के हमको आध्यात्मिक उपलब्धि प्राप्त होगी जीवन का यह जो अंतिम जीवन का यह जो सर्वोच्च य जो प्राप्ति है ईश्वर दर्शन वो संपूर्ण तरह की निस्वार्थ प्राप्त होने के बाद में ही होगा यह देखिए कि भैरवी ब्राह्मणी के और भी दो शिष्य थे चंद्र और गिरिजा उनमें से एक अभी मैं भूल गया दोनों में से कौन सा एक जब ठाकुर के पास में आया दक्षिणेश्वर में और वह यदु मल्ली के जो बागान है वहां पर पास में गार्डन वहां पर गए और रात को वापिस आ रहे हैं देखा कि रास्ते में अंधेरा है तो यह जो ठाकुर का गुरु भाई गुरु भाई ही तो कहा जाएगा भैरवी ब्राह्मणी के दोनों शिष्य थे तो गुरु भाई ने पीठ उसकी ओर करके दक्षिण दक्षिणेश्वर की कर की ओर करके दे देख कि ऐसा एक विद्या का इस्तेमाल किया कि उसकी पीठ में से प्रकाश आने लगा और ठाकुर को कहा कि आप इस प्रकाश के सहारे दक्षिणेश्वर चले जाइए तो ठाकुर ने फिर उसको बताया था कि देखो सिद्धियों का इस तरह का इस्तेमाल करना ठीक नहीं है और ठाकुर के साथ में रहते रहते उसकी सिद्धि चली भी गई थी उसके पास में से ठाकुर के पास में आ गई थी ठाकुर ने कहा कि माने उसकी सब सिद्धियां अपने भीतर में ले ली है जिससे कि उसको उसकी ईश्वर प्राप्ति का रास्ता खुल जाए जब तक यह सिद्धि रूपी प्रलोभन नजर के सामने है अपने हाथ में है तब तक वह फिर ईश्वर प्राप्ति नहीं कर पाएगा जीवन का सर्वोच्च उद्देश्य वह प्राप्त नहीं कर पाएगा बोलक के इसके भीतर में जो है उसने उस सिद्धियों को खा लिया तो देखिए कि यह सिद्धि चमत्कार इसको लेकर के जो कुछ भी डिस्कशन है इस डिस्कशन के आधार पे दो आश्चर्यजनक चीजें अल्टीमेटली हमको दिखती है कि एक तो है कि यह सिद्धि या चमत्कार रूपी कुछ कोई प्रसंग हमको जब दिखते हैं अपने साहित्य में तो थोड़ा सा आश्चर्य तो होता है कि दो चीज जैसे मैंने कहा कि या तो इस तरह के प्रसंग हुए ही नहीं है या तो फिर प्रसंग थे और उसको लिपिबद्ध नहीं किया गया यह भय के मारे की भविष्य में लोग फिर इस तरह के चमत्कार को ही लेकर के बैठेंगे तो बेटर है कि इस तरह के प्रसंगों को लिपिबद्ध ही ना किया जाए किंतु यहां पे देखिए कि गंभीरानंद जी महाराज अपने संघ के सबसे ज्यादा कंजरवेटिव लेखक है और कुछ कुछ लेखक होंगे कि जिनको ऐसा लगता होगा कि नहीं थोड़ा बहुत चमत्कार डाल दे तो अपनी किताब अच्छे से बिकेगी किंतु अपने संघ के जो सबसे ज्यादा कंजरवेटिव दो लेखक है वो है शरद महाराज और यह गंभीरानंद जी महाराज तो ये गंभीरानंद जी महाराज की किताब में इस तरह का प्रसंग देखना यानी कि कहना पड़ेगा कि महाराज ने कुछ फिलोसॉफिकल सोच कर के ही इस प्रसंग को रखा होगा इसलिए कि अल्टीमेटली हमको ऐसा ना लगना शुरू हो जाए कि जब स्वामी जी ने प्राण के बारे में में अदर वाइज क्यों बताया यदि सिद्धियों का प्रयोग नहीं करना है सिद्धियां जद इतनी ही गलत है वो वही बूढ़ी वैश्या की विष्ठा की तरह तो फिर यह सिद्धियों के बारे में स्वामी जी ने डिस्कशन किया ही क्यों राजयोग में तो उसके शायद अभी क्यों गंभीरानंद जी ने इसको लिपिबद्ध किया हमको पता नहीं यह तो अपनी सामान्य बुद्धि लगा कर के हम लोग यह सब तर्क करते हैं तो मुझे ऐसा लगता है कि स्वामी जी की बातें बिल्कुल झूठ ना लगे हमको कि अरे स्वामी जी इतनी सब बातें करते हैं अपने सघ में तो अपनी किसी भी प्रसंग में ऐसा तो दिखता नहीं है ये कहां कहां से स्वामी जी लेके आते हैं तो फिर स्वामी जी संपूर्ण जूठे ना पड़ जाए इसलिए शायद उन्होंने इस बात को यहां पे मेंशन किया होगा वी डू नॉट नो यह तो सब अपनी ओर से अनुमान है किंतु देखिए कि एक और अपना पूरा साहित्य रखा जाए रामकृष्ण विवेकानंद साहित्य जिसमें कि हमको सबसे ज्यादा क्या दिखता है दर्शन शास्त्र और योगशास्त्र के बारे में डिस्कशन फिर दिखते हैं कि की तपस्या हों का वर्णन ठाकुर मां और डायरेक्ट डिसाइल की फिर एक दिखता है बहुत सारी रमज घटनाएं आनंद पूर्ण घटनाओं का हमको एक पूरा एक भंडार दिखता है और फिर हम जैसे सामान्य साधकों को क्या करना चाहिए जीवन में इसके सब निर्देश मिलते हैं यदि इसको आप रामकृष्ण विवेकानंद साहित्य समग्र कहे तो दूसरी ओर है स्वामी जी के यह राजयोग के भीतर में प्राण रूपी जो कुछ लेक्चर है प्राण आध्यात्मिक प्राण और आध्यात्मिक प्राण का उस तीसरे चैप्टर का मैं नाम भूल गया इस तरह से प्राण के ऊपर में जो तीन चैप्टर है स्वामी जी के विचार यूनिक जिसके भीतर में स्वामी जी इस तरह की सुपर नेचुरल शक्तियां सिद्धियां इसके बारे में यह जो विज्ञान है प्राण का इसके बारे में स्वामी जी डिस्कस करते हैं तो दूसरी और यह स्वामी जी का प्राण के विज्ञान के बारे में डिस्कशन और ये कुछ चंद घटनाए जिससे कि हमको लगता है कि सब कुछ जैसे नॉर्मल दिखता है राम कृष्ण विवेकानंद जगत में वो सब कुछ संपूर्ण रूप से नॉर्मल नहीं है बीच-बीच में सुपर नॉर्मल चीजें भी हमको दिखने को मिल जाएगी वही है कि इस सब बातों को ज्यादा बढ़ावा नहीं दिया जाता अपने संघ में या तो फिर अपने साहित्य में तो फिर आज यही तक अभी नेक्स्ट मिलेंगे मंडे को ओम शांति शांति शांति हरि ओम तस श्री राम कृष्णा बाकी सब धर्मशास्त्र आप देखेंगे तो इसी से भरे हुए होते हैं मैं जब स्टूडेंट था तो वह पढ़ कर के मुझे इतना अच्छा लगा मैंने कहा देखो ऐसा होना चाहिए जब यहां पर आया तो थोड़ा डिस पॉइंट हो गया वहां पर वो जो सब सिद्धि फिर य योगी ऐसा तो कुछ नहीं अपने यहां पर मैं उस समय ट्रेनिंग सेंटर में था तो ये मायर पद प्रांत ये जो चार वॉल्यूम एक के बाद एक आ रहे थे तो मुझे तो इतना अच्छा लगा पढ़ना मैंने सब फटाफट ले लिया पढ़ रहा हूं फिर एक दो सीनियर साधु थे बेलून मठ में मैंने उनको कहा महाराज मैं वो किताब पढ वो पूछते हैं बेलूर मठ में सीनियर साधु पूछेंगे कि क्या पढ़ रहे हो तो फिर मैंने बड़े उत्साह पूर्वक कहा मां महाराज मैं मां की कहानियां पढ़ रहा हूं तो बोला अच्छा अच्छा बड़ी सुंदर बात है कौन सी किताब मैंने कहा मायर पद प्रांत है तो एकदम नाराज होकर के अरे मत पढ़ो उसको मत पढ़ो व सब जादू चमत्कार का वर्णन है मां ने दर्शन दिया मां ने ये कर दिया माने वो कर दिया ये सब मत नहीं पढ़ना है तो अभी मैं तो किसी की बात सुनने वाला नहीं पढ़ेंगे ही पढ़ेंगे क्यों नहीं पढ़ेंगे देखिए कि यह सब निकाल देना ऐसा नहीं है कि यह सब रामकृष्ण विवेकानंद ठाकुर म स्वामी जी के जीवन में नहीं था बात है कि हम इसको इनकरेज नहीं करते हैं अदर वाइज यदि आप ऐसा कहेंगे अवतार है और योग शक्ति का प्रयोग नहीं करेंगे तो अवतार किस चीज के वो तो करेंगे ही करेंगे प्रयोग योग शक्ति का प्रयोग तो होना ही है वही बात है कि हम उसको एनरेज नहीं करते हैं उसको बहुत ज्यादा डिस्कस नहीं करते उतना अपना विवेक जागृत होना चाहिए फिर पढ़ करके सब चीज के पीछे में दौड़ना ऐसा नहीं होना चाहिए ठकर शीराम मान के स्प च सब ब लोगों के संस्कार परिवर्तन कर देना लोगों के पाप ले लेना इससे बड़ा चमत्कार क्या हो सकता है ये जो कल मान भाई कह रहे थे ना कि वो स्तंभ फाड़ करके जब नरसिंह अवतार आते हैं तो हमको लगता है चमत्कार हुआ वरना चुपचाप अपने पाप को हर लिया तो फिर किस चीज का चमत्कार मनुष्य को ऐसा नजारा चाहिए भव्य नजारा चाहिए तब लोग हम इंप्रेस होते हैं बाधा इसलिए नहीं है कि हम बोलना नहीं चाहते हैं थोड़ा बहुत कोजन रखना है थोड़ी बहुत सावती इसलिए रखनी है कि बाद बाद में अब जैसे यह काकड़ गाछी में ही होना शुरू हो गया था रामचंद्र दत्त सबको कहते हैं कि अभी साधन भजन तपस्या करने की जरूरत नहीं है त्याग ब्रह्मचर्य यह सब पालन करने की जरूरत नहीं है ठाकुर के शरण में आ जाइए सब कुछ हो जाएगा तब नरेंद्र कहता है कि नहीं ठाकुर ने खुद कहा है आपको तपस्या करनी पड़ेगी तो यह तपस्या का रास्ता छोड़ कर के हम ये मिरेकल पर विश्वास करके फिर बैठे रहे ठाकुर को प्रार्थना करके कि कुछ मिरेकल कर दो बदले में यह दे देंगे वो दे देंगे वहां पर जाकर के दक्षिणा दे देंगे साधु भंडारा करवा देंगे तो यह जो ट्रांजैक्शनल रिलेशनशिप ईश्वर के साथ में ना हो जाए ईश्वर के शरणागत होना है ईश्वर के प्राप्ति के लिए हमको अपने जीवन को परिवर्तित करना है तो जीवन को परिवर्तित नहीं कर करके जैसे कि ईश्वर को कुछ ब्राइब दे दी लाच दे दी और ईश्वर के पास में काम करवा लिया इस तरह का ट्रांजैक्शनल रिलेशन ना हो जाए इसके लिए यह सबको डिस्कस किया जाता है यह जो आपने कहा ना यह वो जो मठरे की कहानी ठाकुर एक दूसरी भी एक इस तरह से एग्जांपल देते हैं व जो गोदाम होता है ना धान का वहां पर वो जो धान बड़ा रखा होता है तो वहां पर दरवाजे के पास में ही वह खाई वगैरह रख देते हैं तो चूहा भीतर में जाने से पहले ही दरवाजे पर ही वह खाता रहेगा भीतर में जाकर के इतना बड़ा धन का गोदाम उसको पूरा भूल जाएगा देखिए ये शरत महाराज ने जो लीला प्रसंग लिखा उसमें उन्होंने बड़ा एक सुंदर बात कही है कि अन्य सब अवतार के बारे में देखेंगे कि उनकी साधना हों का वर्णन नहीं वत जानने को मिलेगा यह साधना का समय ही जैसे कि उनकी जीवनी से अदृश्य हो गया है जब कि ठाकुर के जीवन में हमने साधन पर्व पर बड़ा ही एमफसा इज किया है तभी यह प्रश्न होता है कोई कोई भक्त कहेंगे कि अरे अवतार तो परिपूर्ण ही जन्म लेते हैं उन्हीं को तो अवतार कहते हैं उनको यदि साधन भजन आप करवाएंगे तो उनको तो भक्तों की नजर में कम पड़ जाएंगे भक्तों की ये उनके ऊपर में श्रद्धा कम हो जाएगी तो शरद महाराज कहते हैं नहीं वो बात नहीं है कि उनको भक्तों की नजर में नीचा दिखाने के लिए उनको अपूर्ण से पूर्णता का रास्ता दिखाना है इसलिए साधन भजन करना है किंतु यह साधन भजन आध्यात्मिक जीवन का जिस्ट है ये एसेंस ही यही है बाकी सब तो होता रहेगा चमत्कार वगैरह तो दैट इज द यूनिकनेक्ट लिखते हैं अभी जहां तक ये जो बात है कि देखिए कि ठाकुर के रहते रहते ही तो हमको पता है कि गिरीश घोष वगैरह का कहना था कि ये तो ठाकुर की एक लीला है वो तो अभी छोड़ देंगे और गिरीश घोष का जो खुद का जो एक था पूरा एटीट्यूड ठाकुर के प्रति ठाकुर ने खुद को उसको कहा कि बकल मा दे दो वगैरह वगैरा कल्पतरु दीन जिसको कि शरद महाराज आत्मा प्रकाश है अभयदान कहते हैं तो मुझे ऐसा लगता है ना कि देखिए जितने भी मेजर रिलीजन है ना उन सब में धीरे-धीरे करके भविष्य में डिवीजन होना शुरू हुए हैं बेस्ड ऑन बेसिक आइडियो जीी बुद्धिज्म में ही देखिए कि भगवान बुद्ध ने कहा था कि आत्म दीपो भव अपने खुद का जो रास्ता है अपने खुद के हृदय में यह जो साधन भजन रूपी दिया जला करके अपना रास्ता खोजना है तो वो नहीं करके अभी यह जो बुद्धिज्म था ओरिजिनल बुद्धिज्म वो इतना मतलब कुछ ही लोगों को पल्ले पड़ेगा वो सभी लोग तो साधन भजन करने नहीं वाले हैं तो फिर जन साधारण का क्या तो उनके लिए महायान बुद्धिज्म महायान बुद्धिज्म में जितने भी देवी देवता तंत्र मंत्र जितना भी कचरा है सब उस बुद्धिज्म में घुस है और फिर यह जो हमारा प्लान ऑफ कैंप जो चल रहा है स्वामी जी का लेक्चर उसमें स्वामी जी डायग्नोज करते हैं कि भारत की यह जो बीमारी है कहां से प्रारंभ हुई हमको लगेगा कि स्वामी जी ये मुस्लिम आक्रमण को गाली देंगे या तो फिर ये ईस्ट इंडिया कंपनी के बारे में कुछ कहेंगे स्वामी जी कहते हैं नहीं ये बुद्धिज्म में जो करप्शन आया वो हमारा ओरिजिनल पतन का कारण था तो यह जो है कि जनसाधारण के पास में आप कैसे ले जाए आज रामकृष्ण संघ की वही अवस्था है रामकृष्ण संघ के फॉलोअर कितने हैं जिनको कि हम जेनन फॉलोवर कहेंगे जो कि साधन भजन तपस पे विश्वास रखते हैं नाना करते हो अनदर मैटर कैपेसिटी नहीं है करने की या तो इच्छा नहीं है व्हाट एवर किंतु विश्वास रखते हैं कितने होंगे 5 10 लाख होंगे एट द मोस्ट जो कि हमारे दीक्षित भक्त है फिर जो हमारे वेलविशर है दूसरे 5 10 15 20 लाख होंगे नॉट मोर देन दैट किंतु यदि ये 150 करोड़ का तो भारत देश 700 करोड़ का यह पृथ्वी यदि आपको वाइड आपको ये जो आजकल के वर्ल्ड रिलीजन है क्रिश्चियनिटी या इस्लाम या बुद्धिज्म या अपना ट्रेडिशनल हिंदुइज्म उस लेवल तक अपने फॉलोअर्स या तो वेल विशर्स की संख्या ले जानी है यू विल हैव टू डू समथिंग टू माइल्ड दिस मने मने टू डाइल्यूट दिस हार्डकोर जो अपना मैसेज है कि तपस्या और साधन भजन उसके अलावा भी कुछ कृपा या तो फिर यह शॉर्टकट आपको दिखाना होगा अदर वाइज पीपल विल नॉट कम सो हाउ इट विल हैपन सभी रिलीजन में देखिए कि इस तरह से डिवीजन हुए ही है क्रिश्चियनिटी में ओरिजनली ज उस लोगों के पास में था यहूदियों के पास में फिर उन्होंने सोचा जब जेंटा इल है जो कि नॉन यहूदी है उनको भी ऐड कर दो तो वहां से ये जो कैथोलिक जम स्टार्ट हुआ बुद्धिज्म में यह महायान स्टार्ट हुआ यह क्रिश्चियनिटी में देखिए कि पर्शिया में जब गए तो पर्शिया का कल्चर अपना करके उसको ब्रॉड बेस बनाया गया सो वैसे ही राम अपना हिंदुइज्म में भी एक तो अद्वैत निराकार वाद है फिर ये द्वैत भक्ति वाद है सो ऑलवेज एन अटेम्प्ट हैज बीन मेड टू मेक दिस रिलीजन मोर पॉपुलर रामकृष्ण संघ में यह बात किस तरह से आकार धारण करेगी वी डू नॉट नो देखिए यह तो एक है ही है उसमें कोई प्रश्न ही नहीं है किंतु स्वामी जी ने खुद ने इसको ब्रॉड बेस बनाना चाहा था जब स्वामी जी ने यह जो लोगों का दर्द देखा तो उन्होंने सोचा कि किस तरह से मैं ये हाईएस्ट आइडियल को प्रैक्टिकल बना पाऊं तो ये प्रैक्टिकल वेदांत जो सीरीज है उनकी कि ये जो सेवा कार्य प्रारंभ करो ईश्वर का दर्शन आप मनुष्य के भीतर में करो और मनुष्य का सेवा मंदिर में में जो पूजा करते हैं मनुष्य की सेवा करो स्वामी जी हिमसेल्फ ट्राई टू मेक इट ब्रॉड बेस पॉपुलर अ विदाउट डाइल्यूटिंग अवर आइडियल तो यह प्रयास तो स्वामी जी ने खुद ने प्रारंभ कर दिया है आज रामकृष्ण मिशन को राजकोट की ही बात करूं राजकोट को लोग किस तरह दृष्टि से देखते हैं स्वामीनारायण का जो धार्मिक प्रेस्टीज है वो अपना नहीं है किंतु हम लोगों ने बहुत रिलीफ किया है सभी लोग स्वीकार करते हैं जो हमसे एग्री नहीं होते वे लोग भी स्वीकार करते हैं सो दैट द सर्विंग ऑफ मैन सीइंग गॉड इन देम ये अपना होल मार्क है टू मेक इट मोर पॉपुलर इज तो ये प्रयास स्वामी जी ने स्टार्ट कर दिया है अभी बात क्या है कि स्वामी जी किस बात से मोटिवेट हुए थे लोगों का दुख देख कर के कि लोगों में दर्द है दुख है सो हाउ आई कैन मेक दिस हाईएस्ट आइडियल ऑफ वेदांता एज वेल एज श्री रामकृष्ण प्रैक्टिकल फॉर देम अभी ठाकुर की जो कोई भी बातें हैं कामिनी कांचन त्याग या तो फिर ये जब ध्यान साधन भजन इनको तो किसी काम की नहीं है ये गरीब गुरबो को जो कि बेचारे संसार की चक्की में पीस रहे हैं तो हाउ टू मेक दिस हाईएस्ट आइडियल कम डाउन टू दिस लेवल अभी ये अभी जो मेरा एक जो डर है या तो फिर एक मेरा एक अनुमान है हिस्ट्री को पढ़ करर के कि स्वामी जी जैसे एक विशाल हृदय वाले किसी एक महापुरुष ने यह प्रयास किया करना ही पड़ा लोगों के दुख देख कर के कि हाउ टू मेक दिस हाईएस्ट आइडियल मोर प्रैक्टिकल तो वैसे ही ये जो महायान बुद्धिज्म है या तो जो रिलीजन के जो एकदम हार्डकोर आइडियल से उसको ज्यादा डाइल्यूट करके मोर प्रैक्टिकल करने का कार्य वही लोग करते हैं जो कि महापुरुष होते हैं जिनका हृदय रोता है इन लोगों के लिए गरीब गुरबो के लिए दुखी कष्ट वालों के लिए आज देखिए कि संसार में अभी देखिए पॉवर्टी जिसको कहते हैं डेस्प्रिंग यह बिजनेस इकोनॉमिकल स्ट्रेस इतने बढ़ गए हैं कि कोई भी महापुरुष जिसका हृदय लोगों के लिए रोता होगा ही विल ऑलवेज ट्राई कि हाउ टू मेक दिस हाईएस्ट आइडियल मोर एक्सेसिबल टू देम अकॉर्डिंग टू देर एबिलिटी अकॉर्डिंग टू देर मेंटल लेवल सो प्रयास चलते ही रहेंगे आउट ऑफ दिस प्रयास यह सब होना शुरू होगा डाइल्यूट होना स्प्रेड होना उस प्रयासों में से होगा कोई नेगेटिव मतलब कंस्पिरेशन करके या कोई एक गलत विचार लेकर के यह सब नहीं होता है हाईएस्ट महापुरुष ही यह सब करते हैं और फिर महापुरुषों के सामने आप कुछ बोल भी नहीं सकेंगे ट इ थिंग में है कि स्वामी जी की तरह ही किसी के हृदय में करोना का संचार हो और वह सोचेगा कि यदि आइडियल को डाइल्यूट किए बिना मैं आइडियल को नहीं पहुंचा सकता तो आइडियल को थोड़ा डाइल्यूट कर दे ये लोग 100% प्राप्त नहीं करेंगे 10 पर तो करेंगे प्राप्त च्च इज बेटर देन जीरो मने ये जो एम है इसके पीछे का आइडियल को डाइल्यूट करने का वो खराब नहीं है मैं वो कह रहा हूं एम तो पॉजिटिव ही है ये लोग 100 पर जीरो से 100 नहीं जा पाएंगे तो आइडियल को डाइल्यूट करके उनको इस तरह से दो कि जीरो से 10 तक तो जाए हा लेकिन फिर उसम व फिर वो लॉ ऑफ कंपाउंडिंग लग जाता है ना पहले थोड़ा उधार लेते हो फिर इंटरेस्ट लेते हो फिर ज्यादा और उधार लेते हो फिर लोन प लोन किंतु नजर के सामने जो समस्या है उसका तो ये लोग कुछ ना कुछ तो हल लाएंगे ना जो कि कोई नहीं ला रहा है दैट इज द थिंग जो ऐसा करते हैं उनका लॉजिक जो है उसके सामने आप कुछ बोल नहीं सकते ओके यू डू बेटर वो आप बोलेंगे आपको ओके 100% आइडियल इनके पास में पहुंचाओ रामकृष्ण मिशन का क्या है कि हमारी कार्य गति हमारा जो आउटरीच बड़ा ही लिमिटेड है अभी जैसे रांची के गांव में ट्राइबल एरिया में मैं जाता था देखा कि ये तो हम कुछ मतलब टीप ऑफ द आइसबर्ग टच कर रहे हैं देयर इज एन एंटायस की जहां पे हमको पहुंचना है किंतु हम मेन पावर कंस्ट्रेंट आइडियाज कंस्ट्रेंट ऑर्गेनाइजेशनल कंस्ट्रेंट नहीं पहुंच पाएंगे अभी उस समय ऐसा कोई ट्राई करेगा अब जैसे मान लीजिए अपना ये विनायक लोहानी ही है उनका जो आउटरीच है वो कितना बड़ा है अभी मध्य प्रदेश के कुछ जगहों पे वो ऐसा कुछ ट्राई करेंगे तो क्या हम ऐसा कहेंगे कि नहीं नहीं तुम मत करना हम लोग करेंगे वीी आर नॉट गोइंग टू डू दैट राइट तो जहां पे हम बिल्कुल नहीं पहुंच रहे हैं वहां पे 10 पर भी पहुंचे वो भी तो सराहना के पात्र है दैट इज अ बिग प्रॉब्लम कि मैक्सिमम लोगों तक हाईएस्ट आइडियल को लेके जाना हमारा आइडियल होना चाहिए ठाकुर ने कहा क्या कहा कि मैं वो खुले बाजार में हांडी भांग करके जाऊंगा मैंने सबके सामने में अपना स्वरूप प्रकाशित करके जाऊ गा यदि आज मैं ये पहले भी दो-तीन बार मैंने सोचा भी है बोला भी है कि स्वामी जी यह वन के वेदांत को या स्टूडेंट के वो क्लासरूम में खेत में ये गृहिणी के यह किचन में लाना चाहते थे आज हम रिवर्स कर रहे हैं वो किचन में से क्लासरूम में से खेत में से वेदांत को उठा कर के फिर वही गिरी कंदरा में लेकर जाना चाहते हैं इस तरह से हमारा एक क्लोज माइंडसेट हो गया है दैट इज व्ट आई फील मने ये अवर आइडियल शुड बी टू ब्रिंग द हाईएस्ट आइडियल टू एवरीवन ऑन दिस प्लेनेट इफ वी एबडीकेट ऑन अवर रिस्पांसिबिलिटी देन अदर्स विल स्टेप इन हां भावनगर वाले सुरमय भाई वो एक बात कहते थे वो एक किसी रिलीफ के समय कहीं पर जा रहे थे 2030 साल पहले की बात है कुछ वॉलंटिली के समय कहीं गाड़ी में बैठ के जा रहे थे संध्या हो गई थी गाड़ी बिगड़ गई इन द मिडल ऑफ नोवेयर एक ऐसी जगह पे जिसके बारे में मतलब किसी को कुछ पता नहीं गाड़ी बिगड़ी है तो थोड़ा हेल्प भी चाहिए तो वो सुरम्य भाई उतर करके गाड़ी से कहीं आसपास के गांव में थोड़ा हेल्प लेने को गए अंधेरा हो गया है यहां तो बिजली वगैरह कोई प्रश्न ही नहीं है खेत में गए देखा कि एक खाट के ऊपर में तीन चार लोग एक वो लाल टेल जला करके बैठे हुए हैं पढ़ रहे हैं कुछ तो उनको बड़ा आश्चर्य हुआ कि ऐसा दृश्य देखने को मिलेगा कि एक खाट के ऊपर में बैठ के लाल टेन के उजाले में तीन-चार किसान लोग पढ रहे हैं बहुत अच्छी बात है तो पहले तो बैठ गए देखा कि थोड़ा आनंद लेते हैं इस बात का बैठ गए सुन रहे क्या पढ़ रहा है तो पर कथामृत पढ़ रहे थे सुरम भाई फिर पाठ खत्म हो गया बोला कि आपको ये किताब कहां से आई आपके पास में रामकृष्ण मिशन के साथ कुछ पहचान है आपकी तो बोला रामकृष्ण मिशन क्या है पता नहीं है ये किताब कैसे आई उनके पास में को कहते है कि कुछ सालों पहले एक साधु थे वो गांव गांव जाकर के कथामृत का प्रचार किए हैं तो यह बोलकर के यहां पर कुछ आसपास की जगहों में प्रतिदिन रात को ऐसा कथामृत का पाठ हो होता है तो सुरम्य भाई बोलते कौन है वह साधु अपने संघ के कोई साधु छोड़ कर के गए हैं कि बाहर के कौन है पल साधु का नाम भी नहीं पता कुछ नहीं पता तो अभी यह बात सुरम्य भाई ने मुझे कही मैंने कहा देखिए ठाकुर कैसा अपनी लीला प्रचार कर र क बंगाल में पॉपुलर है बंगाल में पॉपुलर है अभी ये रामकृष्ण पुंथी का ट्रांसलेशन गुजराती में करके रामकृष्ण पुराण किया अपने मलाई महाराज ने और रामकृष्ण पुराण का पाठ बहुत उन्होंने करने का प्रयास किया था उस समय जीत भाई को आप शायद प जानते होंगे राजकोट के वो सिंगर डिवोटा है जीतू भाई बोलके तो एक पूरा टीम बनाया था जीतू भाई नलिन भाई वगैरह कि वो जाजा करके वैसा वो रामकृष्ण पुराण का पाठ करेंगे किंतु वो पूरा प्रोजेक्ट मल महाराज के जाने से ठप हो गया तो दैट इज दैट अभी ये जो अपने राम महाराज एक है उन्होंने राम कृष्ण चरित मानस की रचना की थी वो लिमडी आए थे और बापा ने बड़ा उनको इनकरेज भी किया था और राम चर चित्र राम कृष्ण चरित मानस का वो पाठ का मुझे बड़ा अच्छा भी लगा वही दोहा चौपाई जो कि यह अपने तुलसीदास की है उसी स्टाइल में ठाकुर का चरित्र बड़ा सुंदर और उस किताब बाद में पब्लिश भी हुई किंतु अगेन जद कोई मने देखिए यह जो अपने व कथाकार होते हैं ना ग्रेट ट्रेडिशनल विश्वास का हो ना कि अपने मोरारी बापू क हो हा उस लेवल के कथाकार जद उसको उठाएंगे नहीं तब तक प्रचार नहीं होगा री नाइस एक लास्ट पॉ महाराज की आप बता रहे ठाकुर ने इन सब चीजों का क्यों प्रचार नहीं गया तो उनका वही था की म मेरे खल से डिफरेंट थॉट एक तो य अल्टीमेटली उनको आइडियल उनको अवेक आइडियल स्थापित करना था मम स्टल ऑ कैम की ठाकुर का अल्टीमेटली व अद था इसलिए आपने जो एपल भी दिया था की जब शर पंडित ने बोला कि आप तो बीमारी ठीक कर सकते हैं तो फिर उसको उड़ा दिया फिर बाद में स्वामी जी ने पीछे पड़े कि आप बीमारी के बाद मां से बोलो पहले नानक किया लेकिन फिर खूब फोर्स किया तो फिर मां ने बोला कि मेरे को कुछ खाने का हो जाए ऐसा कर ठाकुर ने तो माने बोला क्या तू इन सबके मुह से नहीं खाता तो फिर ये बोल के फ ठाकुर बोले मेरे को बहुत शर्म आई और फिर मैं कुछ बोल नहीं पाया दिस आई थ दिस इ वट वा इन द प्लान राइट अब जसे ठाकुर की बीमारी तो ठीक नहीं हुई ठाकुर चले भी गए लेकिन ये जो बात है क्या सबके मुंह से नहीं खाता ये जो वायरस है ना ये निकल चुका है मतलब दिस वायरस इ प्रेजेंट इन द एनवायरमेंट इट विल कीप इफेक्टिंग पीपल तो जो हाईएस्ट अद्वैत जो आइडियल है वो उसको एस्टेब्लिश करना था और उसके लिए इन सब चमत्कारों की को जगह ही नहीं है जब आपको स्क्रीन को एस्टेब्लिश करना है तो मूवी के लेवल पर तो आप एक हद से ज्यादा टाइम स्पेंड कर ही नहीं सकते मतलब यू कैन नॉट हैव वेरी इंटरेस्टिंग एंडलेस मूवी वो चलती जाए चलती जाए वो मूवी तो कभी ना कभी खत्म होता है कि यू कैन अप्रिशिएट द स्क्रीन बिहाइंड इट तो एक एक दिस इज व्ट आई थिंक दैट प्रोबेबली अद्वैद आइडियल वाज ये एंड हाउ टू रीच दैट आइडियल उसके लिए भी ठाकुर का एक दूसरा है वो बोलते साचा मैंने तैयार कर लिया है तुम अपना जीवन अपने हाथ से कर लो अगे ही डजन से तुम मेरे पास आ जाओ बस फिर तुमको कोई प्रॉब्लम नहीं है बस मंदिर में आओ बस उसके बाद सब मैं देख लूंगा ही इज नॉट सेइंग दैट कभी नहीं बोलते वो बोलते कि तुम साचा तैयार है तुम आके अपना जीवन गड़ लो तो साधना तपस्या ए सेंस ऑफ एजेंसी जिसको बोलते हैं कि एज अ साधक आप आप यू आर रिस्पांसिबल फॉर योरसेल्फ राइट मतलब आपको अपना सेल्फ पेपर तो डालना ही है वो आप में एनर्जी देने वाला इंस्पिरेशन देने वाला भी भगवान है दैट इज आल्सो ट्रू एट एन अल्टीमेट लेवल बट यू हैव टू हैव ए सेंस ऑफ एजेंसी यू हैव टू हैव जो स्वामी जी बोलते गेट अप अराइज अवेक वो सब वो वो सब पूरा एक आई थिंक एट द एंड ऑफ इट इट इज ल वेदांत इन मतलब स्वामी जी का एक तरीका है परोसने का मां का शायद दूसरा है ठाकुर का तीसरा है ब द अंडरलाइन वेदांत हैज नेवर बीन डाइल्यूटेड और वेदांत और इन सब का आपस में कोई संबंध ही नहीं है वेदांत और ये सब आपस में रह ही नहीं सकते दे कैन नॉट रि सो नहीं एक्चुअली इवन गोइंग बियोंड अद्वैता ठाकुर ने जैसे कहा गोइंग बियोंड अद्वैता फिर तो इति इती करके जगत में वापस आना है इनफाइकिल पर्व में जो ठाकुर ने दो बात को एमफसा इज किया है गिरीश को कहा संपूर्ण शरणागति और स्वामी जी को कहा कि यह संपूर्ण निस्वार्थ का तो अभी यह जो आप एजेंसी की जो बात कर रहे हैं कि मैं तपस्या कर रहा हूं इसका भी घमंड आ सकता है सो मने गहना कर्मणो गति ही यह जो साधन भजन की ये जो बातें हैं इतनी सूक्ष्म है कि मैं तपस्या कर रहा हूं मेरीय एजेंसी है उसका भी घमंड नहीं आना चाहिए वी हैव टू गो इवन बियोंड दैट सो साधन भजन के क्षेत्र में गोइंग बियोंड माय पर्सनल तपस्या गोइंग बियोंड द हाईएस्ट अचीवमेंट ऑफ निर्विकल्प समाधि ट इज ठाकुर होल मार्क वो रंगनाथन जी अमेरिका से वो विदेश से वापस आए और फिर वो बता रहे हैं सब वो भक्तों की व म साधुओं की सभा में कि मैं वहां पर गया मैंने यह बात कही मैंने यह किया वो किया तो फिर एक साधु के मन में थोड़ा संदेह जागृत हो गया कि महाराज जी सब समय ऐसा क्यों कहते मैंने ऐसा किया मैंने ऐसा किया ये तो क्या अपने घमंड को बढ़ावा देने वाली बात नहीं है तो यह साधु में थोड़ा साहस ता पूछ लिया महाराज को कि महाराज ये क्या ईगो बढ़ाने वाली बात नहीं है तो महाराज ने क्या उत्तर दिया मेक योर ईगो स्काई हाई एंड देन सैक्रिफाइस इट टू द लोटस फीट ऑफ श्री राम कृष्णा वो जैसे ये स्वामी जी की बात हो गई ना वो लड़का आया स्वामी जी के पास में बोलता है त्याग करना है तो स्वामी जी बोलते है त्याग करने के लिए है क्या भाई तेरे पास में भगवान बुद्ध के पास में राज्य था त्याग करने के लिए तुम्हारे पास क्या है बोले अपने ईगो को शरणागत मने सरेंडर कर दो ईगो तो होना चाहिए सरेंडर करने के लिए माने ट इज अ तमस तमस और यहां पे प्रॉब्लम तमस का है कि कुछ नहीं है यानी कि ऐसा नहीं है तुम सात्विक हो मैं कुछ नहीं है दैट मींस हो सकता है 90 पर प्रोबेबिलिटी हम लोग तामसिक है तो पहले तो रजस में आओ कुछ प्राप्त करो ये स्वामी जी अमेरिका क्यों गए स्वामी जी कहते हैं सक्सेस के वो चरम शिखर पर बैठे हैं ये लोग अभी नाउ दे आर रेडी फॉर अद्वित वेदांता जबकि भारत में ऐसी परिस्थिति है बेचारे खाने को नहीं मिल रहा है अद्वित वेदांत क्या समझेंगे वो जो ठाकुर कहते है ना वो जो तीन चार लोग वो ताती वो तात बुं है अर्थात किय ताती यानी वो जो वो क्या बोलेंगे उसको वो जो चरखा काटता है वो वो ऐसा चरखा कात रहा सता सता कात रहे और फिर बात कर रहे तुम कौन से विष्णु में मानते हो बोला पाति विष्णु ते मानी अच्छा पाति विष्णु मैं तो उसमें विश्वास नहीं करता मैं तो उस विष्णु में विश्वास करता हूं ला भाई यहां पर वो ता बुन रहा है और यहां पर बात कर रहे है बड़ी बड़ी जिसके साथ में कोई रिलेशन ही [हंसी] नहीं ये शंकराचार्य और ठाकुर में ये एक स्टेप अप है कि अद्वैत हाईएस्ट है उसमें कोई प्रश्न ही नहीं है बट देर इ समथिंग बियोंड अद्वैत माने दर्शन शास्त्र की की दृष्टि से भी और साधन भजन की दृष्टि से भी दर्शन शास्त्र की दृष्टि से कि नेती नेती करके हाईएस्ट प्राप्त करो इती इती करके समग्र जगत को अपना लो व्हिच इज नॉट अपोजिट टू अद्वैत अद्वैत कहता है यदि सब में ब्रह्म भाव है तो फिर सब में ब्रह्म देखते हैं व्हिच इज एक्सटेंशन टू अद्वैत ओनली और साधन भजन के क्षेत्र में भी अपनी खुद की तपस्या करनी है बट यह अहंकार भी नहीं आ जाना चाहिए तपस्या करते करते किसी के मन में आ जाता है कि आई एम बेटर देन अदर्स तो वो उसको भी आपको इन बोथ योग एंड वेदांता वी हैव टू गो बियोंड अवत शक्ति के इलाके में रहने से शक्ति को तो मानना ही पड़ेगा शरणागति लेनी ही पड़ेगी व ठाकुर कहते हैं ना कि वह राम लक्ष्मण और सीता जा रहे वन में तो सीता मैया बीच में जा रही है लक्ष्मण को राम के दर्शन नहीं हो रहे तो प्रार्थना करनी पड़ेगी कि आप कृपा करके रास्ता छोड़िए तो भगवान राम का दर्शन होगा जब तक शक्ति के इलाके में है शक्ति को मानना ही पड़ेगा बिना शरणागति के कार्य काम नहीं है किंतु सिर्फ शरणागति से भी नहीं चलेगा आत्मा वो भी चाहिए प्रचे टा भी चाहिए वो आत्म क्या आत्म श्रद्धा और आत्म प्रयास वो भी चाहिए सिर्फ दोनों चाहिए दैट इज ठाकुर अल्टीमेट टीचिंग कि पुरुषार्थ और परमार्थ दोनों करो एक के ऊपर भरोसा मत रखो व जैसे वो डॉक्टर वो जो है ना वो फिर वो कोई दवाई देते हैं बड़ी ये होती है स्ट्रांग होती है तो कहते हैं इसके बाद में दू द पी लेना तो क्यों कि पेट में जाकर एसिडिटी ना करें व और कोई साइड इफेक्ट ना करे यानी जो दवाई की साइड इफेक्ट होती है उसका एंटीडोट साथ में दे देते हैं तो यहां प भी जो शरणागति का शरणागति का वो जो प्रॉब्लम है बहुत ज्यादा एक हीन भावना जानी तो उसका एंटीडोट है आत्म श्रद्धा और आत्म श्रद्धा का एक साइड इफेक्ट है कि बहुत ज्यादा घमंड बढ़ जाना तो उसका एंटीडोट है शरणागति ये दोनों साथ में ये जो आपने कहा ना कि ये तोतापुरी को भी पूर्णता प्राप्त हुई हम इसको एक तरह से गुरु दक्षिणा मान सकते हैं क्योंकि अपने शास्त्र में तो है कि शिष्य को गुरु दक्षिणा देनी पड़ेगी तो ठाकुर क्या गुरु दक्षिणा देंगे हालांकि दो तरह से पहले ठाकुर फकीर है देने को कुछ नहीं है दूसरी ओर वो मथुर बाबू है देने को सब कुछ है क्तु मथुर बाबू देंगे तो वो ठाकुर की अपनी खुद की गुरु दक्षिणा देनी जैसे कि नहीं हुई तो उनके गुरु की साधना में सिद्धि प्राप्त करवा कर के जैसे कि ठाकुर ने अपना र चुकते कर दिया हो ऐसा भी एक हम बोल सकते हैं देखिए कि ठाकुर के गुरु होने का सद्भाव जन्मांतर के तपस्या के बाद में मिलेगा व भी एक बात है ना य भैरवी ब्राह्मणी जटाधारी यह अपना तोतापुरी य मुने लगता है व कलमी दल ठाकुर कहते कि जन्म जन्मांतर से मेरे साथ में आते हैं लक्ष्मी दीदी कहती है कि अभी नेक्स्ट टाइम नहीं आओगी ठाकुर कहते जाओगी कहां जो जो कमल होते हैं उसके जो रूट होते हैं सब तो मिले हुए एक कमल को खींचो के सब आ जाएंगे तो यह तोतापुरी भी यह सांदीपनी रुषी की तरह ही भगवान कृष्ण के साथ में जो थे वो अभी फिर से तोतापुरी होके आ गए