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Ma Sarada Life by Sw Gambhirananda ·

आविर्भाव : श्रीमाँ सारदा देवी : स्वामी गम्भीरानन्द लिखित : 29 Dec 2023

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ओम स्थापक य च धर्मस्य सव धर्म स्वरूपने अवतार वरिष्ठ राम कृष्णाय ते नमः मां शारदा देवी जीवन चरित्र गंभीरानंद जी महाराज कल हमने देखा कि मां के बाल्यकाल के जीवन के बारे में मां की जो संगिनी थी उन्होंने अघोर मणि देवी उन्होंने हमको क्या बताया बहुत ही सुंदर कुछ बातें बताई कि मां कभी किसी के साथ झगड़ा नहीं करती थी या तो फिर मां की दो सहेलियों में जद झगड़ा हो जाए तो मां जाकर के दोनों में सुलह करवा देती थी और फिर जैसे वह एक बहुत ही सुंदर इंसिडेंट कि जगत धात्री के सामने ने बैठ कर के मां ध्यान कर रही है अभी जो देख रहे हैं उनको समझ में नहीं आ रहा है कि जगत धात्री कौन है और मां कौन है तो यह मां के जीवन में यह मानवी और देवी यह दोनों भाव परि स्फुट हुए थे दोनों भाव हमको दिखाई दे रहे हैं तो उसी के बारे में आज गंभीरानंद जी महाराज हमको क्या कहते हैं मैं पढ़ता हूं श्री मां के घोशाल जगत धात्री रूपे दर्शन ही अपूर्व जीवन एकटा बिन्न घटना मात्र नहीं मां ने घोशाल महाशय को जगत धात्री के रूप में जो दर्शन दिया यह घटना मां के जीवन में एक विछिया जगत धात्री के रूप में और बस वहीं पर समाप्त हो गया मां के जीवन में इस तरह की घटनाएं बार-बार बनती जा रही है ठाकुर के जीवन में भी देखेंगे कि मथुर बाबू अपने घर की छत के ऊपर से देख रहे हैं ठाकुर टहल रहे हैं एक ओर जाते हैं तो ठाकुर शिव के रूप में दिखते हैं दूसरी ओर जाते हैं तो ठाकुर मां काली के रूप में दिखते हैं तो इस तरह से यह जो अवतार पृथ्वी पर जन्म ग्रहण करते हैं तो उनकी दिव्य लीला वह भले कितना ही अपने को छुपाने का प्रयास करे कितना ही चाहे वह अपना देवत्व है वह सीमित रखना चाहे यह सोच करके जद लोगों को पता चल गया कि ये जो च पोया शरीर एटा बांगला ते बोले माने बे हाथन शरीर बेत्र हाथन शरीर जैसा वह कहते हैं इसको गुजराती में कि एक छोटा सा यह शरीर है पाच साढ़े छ फुट का यह शरीर इसके भीतर में समग्र यह कॉस्मिक डिविल के भीतर में विराज जीत किस तरह से हो सकती है यह यदि हमको आश्चर्य होता है सोच कर के किंतु ि पता चल गया कि नहीं इनके भीतर में है तो ठाकुर क्या कहते हैं कि यहां पे लोगों की लाइन लग जाएगी और यहां पे अस्पताल ना कि डि डिस्पेंसरी ना कि ऐसा हॉस्पिटल जैसा कुछ खुल जाएगा सभी लोग आएंगे ठाकुर के पास में अरे मेरा यह रोग ठीक कर दो मेरा यह रोग ठीक कर दो ऐसा ठाकुर कहते हैं कि जद लोगों को पता चल जाएगा कि यहां पर असली सत्ता इस शरीर भीतर में कौन सी है तो इसके लिए यह लोग हमेशा अपने को छुपाने का प्रयास करेंगे किंतु हमको पता है कि यह प्रयास 100% सक्सेसफुल नहीं होता कभी ना कभी इनके भीतर से दिव्यता का प्रकाश बाहर में आ ही जाता है इन लोगों का हमेशा से यह प्रयास रहे कि हमको तपस्या करने के लिए प्रेरित करें अवतार का आगमन पृथ्वी पर क्यों होता है यह एग्जांपल स्थापित करने के लिए एक उदाहरण हमारे सामने रखने के लिए आदर्श रखने के लिए कि हां त्याग और तपस्या मय जीवन से हम अपने मन में इतना ही आनंद वर्धन कर सकते हैं जितना कि आपको एक नई कार से मिलता है यह कभी-कभी हम लोग मैं यह सब एड हम देखते हैं ना वो कैसा है कि वोह एक लड़का है वह ग्रेजुएशन करता है तो इसके पिताजी उसको लाकर के बहुत बड़ी कार दे देते हैं कार की कंपनियां इस तरह की ड करती है वो लड़के के चेहरे पर खुशी दिखाती है देखिए कि लड़के को हमारी कार मिली ग्रेजुएशन के बाद में तो उसका कितना आनंद आ गया ऐसा करके ये लोग बताते हैं तो हमको भी लगेगा कि चलो हम भी अच्छे से पढ़ाई लिखाई करके अच्छे से पैसा कमाए तो हमको भी ऐसी कार मिलेगी यह जितना भी यह मटेरियल इंडस्ट्री है हमको उस दिशा में आनंद प्राप्त करने के लिए प्रेरित करती है हमारे कुछ-कुछ रिलेटिव्स भी आप देखेंगे कि उनके घर जाएंगे तो बड़ा ही अच्छे से साफ सुथरा घर है वहां पर वह बैठने के लिए बहुत अच्छी व्यवस्था है बहुत बड़ा टेलीविजन है बहुत बड़ा फ्रिज है उनके गैराज में बहुत दो-तीन गाड़ियां है दो-तीन मोटर बाइक है और व वो और वो सब ऐसे कैजुअली बोला करते हैं कि उस दिन हम जाकर के उस होटल में खाके आए और उस दिन जाकर के हम वहां पर टूर करके आए ना कि कुलू मनाली ने ऐसा सभी लोग बोलते हैं ना यहां पर कुछ कुछ डिवोटा आ कर के बोलते रहते हैं महाराज जी हम वहां पर टूर करके आए हम वहां पर टूर करके आए तो अच्छा है वेरी गुड यदि आपको इस बात में आनंद मिलता है यह जगत हमारे सामने यह मटेरियल आनंद का आदर्श स्थापित करना चाहता है कि हां इनके पास में बहुत बड़ी गाड़ी है तो देखो उनका कितना सुंदर आनंद है इनके पास में इतना बड़ा फ्रिज है तो देखो उनको कितनी उनको कितना मजा आ रहा है तो ये अवतार का आगमन होता है हमारे सामने इस तरह का आदर्श रखने के लिए कि त्याग और तपस्या ईश्वर के ऊपर में श्रद्धा सरलता भक्ति ज्ञान और कर्म और योग यह भी एक रास्ता है और इससे भी आपको आनंद प्राप्त होगा और यह रास्ते से आपको जो आनंद प्राप्त होगा वह मटेरियल चीजों से जो प्राप्त होने वाला आनंद है उससे कम तो नहीं है किंतु यदि हमारी तपस्या हमारी साधना ठीक-ठीक चले तो उससे तो कहीं लाखों गुना ज्यादा आनंद हमको प्राप्त होगा तो यह आदर्श रखने के लिए अवतार का आगमन होता है अभी अवतार बेचारे गलती से भी अपने भीतर की दिव्यता का प्रकाश हमको दिखा दे कि उनके भीतर में हमको मां काली ना मां जगदंबा ना कि मां जगद धात्री ना कि भगवान शिव का दर्शन हो जाए तो हम इस आदर्श को कभी स्वीकार ही नहीं करेंगे कि हां अरे वो तो भगवान शिव है शिव का काम ही है स्मशान में रहना वो भूत गण से घिरे रहना वो सर्प अपने गले पर लगाना और हिमालय में जाकर के तपस्या करना वो शिव करते रहे उससे मेरा क्या लेना देना ऐसा हमारे मन में हो जाएगा तो इसीलिए यह लोग अपनी दिव्यता हमेशा छुपा कर के रखेंगे किंतु ऐसा ऑफकोर्स बीच-बीच में हो ही जाएगा कि जिस घड़े में आप अमृत भरते हैं उस घड़े में से जो सुवास आती है वह आप ज्यादा दिन तक छुपा करके नहीं रख सकते जैसे कि ठाकुर ने कहा है कि फूल जब खिलता है मधुमक्खी अपने से आकर के फूल के ऊपर में ब बती है फिर मधुमक्खी को आमंत्रण देने के लिए नहीं जाना पड़ता तो इसी बात को हम थोड़ा सा अन्य तरीके से भी देख सकते हैं कि यह जो सुवास जब प्रकट होती है फूल खिलने से वह दिव्यता की यह सुवास आप छुपा करके नहीं रख सकते हमको कहीं ना कहीं किसी ना किसी तरह से कोई ना कोई डिवाइन एक्सपीरियंस अवतार के संबंध में होगा ही होगा जो भक्त है जो वॉलंटरी है जो साधु है जो रामकृष्ण संघ के साथ में निष्ठा पूर्वक सालों साल जुड़े रहे हैं उन सबके जीवन में ऐसी कोई ना कोई एक पल एक घटना अवश्य आई होगी कि उनको कोई दिव्य अनुभूति हुई ही होगी क्योंकि यह तो जीवंत ठाकुर है यह कोई ठाकुर मार्बल में बैठे हुए ना कि फोटोग्राफ में बैठे हुए ठाकुर नहीं है जीवंत ठाकुर के समीप जाएंगे निष्ठा पूर्वक उनको आत्मसमर्पण करेंगे तो कोई ना कोई दिव्य अनुभूति होने ही वाली है इसलिए महाराज कहते हैं कि उनके जीवन में यह एक विछिया ठाकुर और मां के जीवन में है देवत्व और मानत्व अत्यार मिश्रण मायर बालो लीला बड़ो चमक प्रद देवत्व और मानवत्वम से मां की बाल्य लीला बड़ी ही चमक प्रद हुई है चमक प्रद शब्द महाराज ने यूज किया है अर्थात कि हमको चौका देने वाली ऐसी घटनाएं है जिनको कि देख कर के की हम चौक जाए कि अरे मां यह जो शारदा है छोटी बालिका वो सही में बालिका है ना कि इनके भीतर में कोई देवी निवास करती है हमको कोई ना कोई ऐसा अनुभूति होगा ही होगा इनको देख कर के मने होय जनो शेखाने देवो भावो फूटो तोर मन में होता है कि जैसे वहां पर देव भाव स् फूटत हो रहा है देव भाव का प्रगट हो रहा है उत्तर काले ओपरे मां के जहाई भाबुक ना केनो बाद के जीवन में लोग मां को भले ही चाहे जिस किसी दृष्टि से देखते हो तीनी आपना के साधारण तो मानवी रूप प्रकाश कोरीते मां अपने को मानवी के रूप में ही प्रकाश करती थी लोग ऐसी कितनी ही घटनाएं है लोगों मां को देवी बोल कर के उनको पूजते हैं देवी बोल कर के उनका सम्मान करते हैं किंतु मां अपने को तो सिर्फ एक मानवी के रूप में ही प्रकाश करती थी ऐसी कितनी सारी घटनाएं ये भूदेव का यहां पर उल्लेख है एक बार मां भूदेव के साथ में कहीं से आ रही थी और रास्ता अभी अभी अंधेरा हुआ जा रहा है और मैदान वो तो वहां पर तो बड़े-बड़े खेत होते हैं ना तो खेत को पार करके घर जाना है अंधेरा हो रहा है बेटर कि वो थोड़ा जल्दी से चल कर के अ रात होने से पहले घर पहुंच जाए तो ये भूदेव ने वो एकदम जिद कर ली कि अच्छा मां बोलो तुम काली हो कि नहीं तुम बोलोगे तुम काली हो तभी मैं यहां से से जाऊंगा वरना मैं यहीं पर खड़ा रह जाऊंगा तो मां तो बेचारी परेशान हो गई कि अरे भाई ये तो यहां खेत में खड़े हैं अंधेरा होने से कितनी तकलीफ होगी चलो जब तक उजाला है घर चले जाए तो भूदेव नहीं कि नहीं जाऊंगा जब तक आप नहीं कहेंगी कि हां मैं काली हूं आपके खुद के शब्दों में स्वीकार कीजिए जब मां ने अपने खुद के शब्दों में स्वीकार किया तब कहीं जाकर के वो उनके साथ में घर जाने के लिए तैयार हुए ऐसी उद्बोधन में है कि मां सबका प्रणाम स्वीकार करने के लिए बैठी है और हमको तो पता है कि मां तो घुमता लगाती थी और एक वोह बड़ी चादर अपने शरीर पर डाल देती थी बाद में वो दरवाजा खुलेगा मां वो खाट के ऊपर में बैठी है और दरवाजा खुलेगा सब एक के बाद एक भक्त आएंगे पुरुष भक्त मां को प्रणाम करेंगे और चले जाएंगे और पास में गोलाब मां खड़ी रहेगी तो कोई भी थोड़ा इधर-उधर नाटक करने का प्रयास करें गोलाप मा जोर से उनको झाड़ देगी ऐसे कितनी घटनाएं हैं अभी एक बार ऐसा हुआ कि गुलाप मां को कहीं पर किसी काम की वजह से जाना पड़ा मां बैठी है वो गर्म चादर भी ओड़ी है चेहरा भी आवृत है गर्मी के दिन है और मां को पसीना हो रहा है जल्दी-जल्दी प्रणाम खत्म हो जाए तो थोड़ा सा मां रिलैक्स होकर के बैठ सकती है ऐसा मां सोच रही है तो अभी एक भक्त आया उसने वो मां के सामने बैठ कर के दीर्घ न्यास और प्राणायाम करके मां की पूजा करने का प्रारंभ कर दिया और यहां पे तो मां बेचारी परेशान हो रही है किंतु क्या है कि अपना संतान उनकी पूजा कर रहा है तो मां कुछ बोलती भी नहीं है वह तो मां का आगमन ही तो इनके लिए हुआ है अपने लिए थोड़ी ना हुआ है अपने को खुद को जो कष्ट जो प्रॉब्लम हो रहा है उसका तो कहीं पर नाम उल्लेख नहीं करना है तो मां बेचारी वहां पर चुपचाप बैठी है पसीना हो रहा है और स्थिर होकर के बैठना कितना कठिन है हम सबको पता है तो एकाएक गोलाप मा आ गई देखा कि मां बेचारी परेशान है और किंतु तो एकदम बैठी स्थिर होकर के फिर भी बैठी हो रही है भक्त सामने बैठ कर के पूजा कर रहा है तो गुलाब माने एकदम जोर से चिल्ला करके भक्त का हाथ पकड़ कर के खड़ा कर दिया और बोली कि यह क्या लकड़ी के ठाकुर तुमको दिख रहे हैं लकड़ी की मूर्ति तुमको दिख रही है कि इसके सामने न्यास और प्राणायाम और पूजा करना स्टार्ट कर दिया देख नहीं रहे हो कि मां को कितनी तकलीफ हो रही है गर्मी के दिनों में जाओ अभी यहां से ऐसा करके तो देखिए कि ये भक्त लोग मां के भीतर में कैसा तो किस तरह का दर्शन करते होंगे कि जीवंत मां की पूजा करने के लिए वे लोग बैठ जाते हैं एक नफर चंद्र कोले एक जयराम बाटी के एक धनी व्यक्ति थे तो धनी होने से एक घमंड भी होता है तो घमंड है तो अभी जयराम बाटी में इतने सारे भक्त जब आते हैं मां के पास में तो सबको पता है कि हां भले ही चाहिए तो हमारी लोग बोलते हैं ना अरे तो हमामा देर शारू मैंने मां को तो मां शारदा को सारू करके उनकी सहेलिया पुकारती थी तो तो हमारी सारू है उसके भीतर में यह लोग देवी का दर्शन करते हैं गुरु के रूप में पूछते हैं यह कैसी बात हो गई जो सहेलियां होती है बचपन से जो हमको देखते हैं उनके मन में तो ऐसा ही आता है कि अच्छा इस बच्ची को तो हमने यहां पर खेलते हुए देखा था अभी ये कहां से गुरु देवी हो गई इतने सारे लोगों की उन तो क्या है कि सम वयस्क या तो जिस गांव में हम बड़े हुए हैं वहां पर इतना रिस्पेक्ट हमको देवी या गुरु के रूप में नहीं मिलेगा तो किंतु फिर भी बहुत सारे लोग थे धरे धीरे मां से आकृष्ट होकर के मां से प्रभावित होकर के उनको एक एक एक सीनियर किसी पर्सन को दिया जाए उससे कहीं ज्यादा रिस्पेक्ट यह लोग मां को देते थे किंतु यह नफर चंद्र कोले एक थे उनका धन था वैभव था ऐश्वर्य था तो घमंड भी इतना था तो कौन है मां शारदा लोग आते रहते हैं उनको प्रणाम करने के लिए तो ऐसा तो कितना ही लोगों को मूर्ख बनाने वाले कोलकात्ता में बैठे हुए हैं तो यह भी उनमें से से एक होगी ऐसा वो एक मन में घमंड था तो उस समय मां उद्बोधन में थी तो उद्बोधन में एक दिन रात को एकाएक किसी सन्यासी ने आकर के मां को मैसेज दिया कि वहां से जयराम बाटी से वो कोले महाशय आए हैं आपके साथ में बात करना चाहते हैं तो मां ने कहा अरे जयराम बाटी में तो कभी मुझे मिलने के लिए नहीं आए अपना एक घमंड है वैभव का वो दिखाते हैं आज एकाएक वहां प कलकाता में उद्बोधन भवन में क्यों आ गए तो मां ने कहा अच्छा ठीक है चलो बुलाओ तो उनको बुलाया तो जैसे ही यह वृद्ध कोले महाशय मां के सामने आए एकदम उन्होंने रोना शुरू कर दिया मां के पैर पकड़ लिए और इतने ही मतलब ये ये हो गए हैं कि मां ने उनको एकदम शांत किया कि अरे अरे शांत हो जाइए तो आप तो इतने वृद्ध है और मैं तो आपसे उम्र में छोटी हूं क्या हुआ क्या है ये तो बताइए तब वो कोले महाशय ने कहा उनके घर में कोई बीमार हो गया था शायद उनका पुत्र मैं अभी एगजैक्टली भूल गया और उनका प्राण जाने की अवस्था थी तो उन्होंने कहा कि देखो मुझे इस उम्र में इस तरह का शोक ना हो मृत्यु शोक मुझे ना हो ऐसा आपको करना ही पड़ेगा तब मां कहती है कि अरे उसमें मैं क्या कर सकती हूं जिसका जो समय आता है जाने का वह तो फिर यमराज सबको लेकर जाते हैं यमराज ने ठाकुर के लिए नहीं रुके यमराज स्वामी जी के लिए नहीं रुके तो यमराज क्या उनके लड़के के लिए ना कि उनके जो भी रिलेटिव है उनके लिए थोड़ी ना रुकने वाले हैं यमराज अपना अपना काम करेंगे हमको अपना काम करना है जन्म मृत्यु जरा व्याधि की जो चक्र है उससे हमको एक समझना है किय प्रकृति का नियम है इसके भीतर में रहना है और साथ-साथ में बैंक में इतना बैलेंस बना के रखना है वे लोग उस तरह का बैंक बैलेंस रखते हैं हमको इस तरह का बैंक बैलेंस रखना है कि जबक इस तरह की व्याधि बीमारी आ जाए तो हमारा मन इससे विचलित या तो विचलित तो होगा फिर हमारा मन टूट ना जाए तो इस तरह से हमको बना कर ये तो जीवन है जीवन में आप इस तरह से आज उनकी बारी है कल आपकी बारी कल परसों मेरी बारी सबको तो यह है तो मृत्यु का इस तरह का शोक आप क्यों कर रहे हैं तो किंतु फिर भी यह तो कोले महाशय रोते ही जाते हैं रोते ही जाते हैं उम्र हो गई है फिर तो मां को थोड़ा टेंशन हो गया तो उन्होंने कहा अच्छा अच्छा ठीक है कि चलो मैं उनके लिए प्रार्थना करती हूं ऐसा करके कुछ शांतोना दी तब कहीं जाकर के वो शांत हुए फिर वो नीचे में जाकर के बैठे शरद महाराज के पास में और मां ने उनको थोड़ा प्रसाद भेज दिया ठाकुर का कहना कि वो वृद्ध महाशय को ये प्रसाद फिर वह जब गए तब मां कहती है कि देखिए यह धन और वैभव का इतना जो घमंड था पूरे जीवन कभी भी आकर के किसी के साथ में अच्छे से बात नहीं की और आज यह परिस्थिति आ गई तो ठाकुर के सामने मां के सामने आकर के इस तरह से रो रहे हैं तो देखिए कि यह देवत्व का प्रकाश किस तरह से इनके जीवन में होता है कि अभी एक बात है कि मनुष्य के जीवन में जब संकट आएगा तो वह किसी के भी सामने जाकर के वह व नतमस्तक हो जाएगा कुछ भी करने से जदी चलो हम जीवन में कुछ मिल जाए किंतु फिर कलकाता में इस तरह से आपको जद मिन्नत ही माननी है तो बहुत सारी जगह है वो काली घाट है वो दक्षिणेश्वर मां काली का मंदिर है वहां जाकर के काली के सामने आप कह सकते हैं मां के ही पास क्यों आए यह दिव्यता का प्रकाश फिर मां ने कहा कि इनकी जो पुत्र वधु है वह हमेशा दक्षिणेश्वर आया करती थी वहां जयराम बाटी में उनको मिलती थी तो उसी पुत्र प्र वधु ने ही इनको कहा होगा कि जाइए मां शारदा के पास जाकर के आप विनती कीजिए उनको मन्नत मानिए तब कहीं जाकर के हम बच जाएंगे तो इसलिए वो आए हैं तो देखिए कि इनके जीवन में हम लोग कुछ भी मानते हो कि हां यह देवी है यह सरस्वती है हमको ज्ञान देने के लिए आई है वहां पर वर्ल्ड पार्लिमेंट ऑफ रिलीजन में स्वामी जी ने सरस्वती का नाम लेकर के अपना प्रवचन देने की शुरुआत की हम लोग चाहे के बारे में कुछ भी मानते हो मां खुद अपना मानवी स्वरूप ही हमारे सामने प्रकट करती थी किंतु आमरा ज कालेर कोथा लिखी सेही समय उर्ध्व लोक होते धाम सद्य समाग मा देवो मानवे संधि स्थले अस्थान पूर्वक मूर्त लीला कोन भावे रूपर अधिकतर गुरु तो आरोप करी बेन ताहा जेनो सहसा स्थिर कोरीते पारित छिले ना अरे बाप रे इतना बड़ा सेंटेंस और वो भी इतना इंपोर्टेंट वो जैसे वो महाभारत लिखने की जब शुरुआत हुई ना व्यास भगवान ने गणेश व्यास मुनि ने गणेश भगवान को कहा कि आपको लिखना होगा और आपको अनवरत लिखना होगा ना वो कौन सी कंडीशन थी हां गणेश भगवान ने कहा व्यास मुनि को कि मैं आपके लिए लिख ने के लिए तैयार हूं किंतु आप जो श्लोक बोलते हैं उसमें आपको अटकना नहीं है अनवरत बोलते रहना है सतत श्लोक के बाद श्लोक बोलते रहना है जैसे ही आप श्लोक बोलते बोलते अटक गए मैं यहां से खड़े होकर के चला जाऊंगा तो व्यास मुनि ने सामने दूसरी शरत रखी भगवान गणेश के सामने कि आपको समझ कर के लिखना है बिना समझे आपको नहीं लिखना है तो ठीक है दोनों ने यह ठीक किया अभी वह व्यास मुनि एक के बाद एक अनर्गल श्लोक बोले जा रहे हैं और अभी मनुष्य की बुद्धि देखिए वो कैसे ही आपकी डिविली हो किंतु इस शरीर में जब जन्म धारण किया है पंच महाभूत के शरीर में कुछ तो लिमिटेशन है तो व्यास मुनि को बीच-बीच में कुछ सोचना पड़ता था अभी डर यह है कि जैसे सोचने के लिए रुकेंगे गणेश भगवान खड़े होकर चले जाएंगे तो वो क्या करते बीच-बीच में कुट श्लोक डाल देते थे चार पांच श्लोक के बाद में एक कुट श्लोक आएगा तो वो कुट श्लोक अर्थात की इतना कठिन उसका अर्थ रहेगा या तो फिर उसका अर्थ इतना गहन रहेगा कि उसको ठीक से समझने के लिए सोचने के लिए भगवान गणेश को टाइम लग जाएगा तो जितना समय भगवान लिख कर के समझ कर के लिखेंगे तब तक तो व्यास मुनि दूसरे चार पांच लोक बना देंगे तो ऐसे ही महाराज जी कुछ सरल सेंटेंस हमारे सामने रखते हैं फिर इस तरह के कुछ कुट सेंटेंस कुट लोक हमारे सामने रख देते हैं तो यह भी इतना ही सुंदर और इतना ही गहन इसका अर्थ है महाराज जी क्या लिखते हैं कि बाद के समय में हम लोग मां को भले ही चाहे जिस किसी स्वरूप से देखते हो मां ने तो अपना मानवीय स्वरूप ही हमारे सामने प्रकट किया है परंतु मां का जब आविर्भाव पृथ्वी पर हुआ है उस समय की जो हम यह बात लिख रहे हैं मां के बाल्यकाल की उस समय उर्ध्व लोग से इस लोक में सद्य समाग अभी जिनका आगमन हुआ है लोक अर्थात की स्वर्ग लोक और हह लोक अर्थात की पृथ्वी लोक तो धाम धाम अर्थात की यह जगत तो उर्ध्व लोक से यह धाम अर्थात की इस जगत में जिनका सद्य समाग सद्य जिनका अभी अभी जिनका आगमन हुआ है मां देवो मानत्व संधि स्थले अस्थान पूर्वक देव और मनुष्य की संधि स्थल पर अवस्था करती हुई यह मां इस मृत्य लीला में अर्थात की इस मनुष्य लीला में किस भाव के ऊपर में ज्यादा गुरुत्व आरोप करेगी वह जैसे कि वह ठीक नहीं कर पा रही है हम जिस समय की बात कह रहे हैं मां के बचपन की मां के बचपन अर्थात की मां तो स्वर्ग लोक में से पृथ्वी लोक पर अभी प्रकट हुई है अभी इनका आगमन हुआ है तो पृथ्वी लोक को पृथ्वी लोक को समझ कर के पृथ्वी के जो लोग है उसको उनको समझ कर के लोगों की उनके माता-पिता भाई बहन थी एक गांव वाले है ठाकुर के साथ में विवाह होने वाला है इन सबका मन समझ करके अपना मनुष्यवकाशा वह मां जैसे कि ठीक नहीं कर पा रही है और इस समय मां गुरुत्व य मनुष्य क्व और देवत्व इन दोनों के संधि स्थल पर खड़ी हुई है कितना सुंदर शब्द है यहां पर मैंने इसके अंडर इस शब्द के भी नीचे अंडरलाइन की है देव मानत्व संधि स्थल ये टीसी में मैंने पढ़ा था यह ऐसे कितना 15 साल हो गए उस समय यह पहली बार जब किताब पढ़ी थी इस शब्द के नीचे में अंडरलाइन की है देव मानत्व संधि स्थल देवत्व और मनुष्यवकाशा होता है कि जब पहलवान होता है और जिसके शरीर में बहुत ही शक्ति होती है जब वह कुश्ती करने की शुरुआत करता है तो वह किसी को कितना जोर से धक्का मारेगा तो सामने के ऊपर में क्या असर होगी वह शुरू शुरू में ठीक नहीं कर पाता किसी को धक्का जोर से मार दिया तो वह बेचारा एकदम गिर गया तो यह तो ठीक नहीं है धीरे से धक्का मारो जैसे वो हार जाए किंतु उसको इजा ना हो ऐसे किसको पता नहीं है कि मेरी स्ट्रेंथ क्या है किस तरह से मुझे अपनी ताकत का इस्तेमाल करना है ये जो रोबोट बनाते हैं ना आजकल तो रोबोट को देखेंगे कि वैसे बड़े-बड़े कारों को उठा कर के कारों को गोल घुमा करके चारों ओर पेंटिंग कर देंगे किंतु एक जैसे कि मान लीजिए एक अंडा है एक एग है तो एग को उठाना उसको आपको कितनी शक्ति चाहिए रोबोट के हाथ में कि जैसे अंडे को उठा भी पाए और अंडे को तोड़ भी ना दे यह सही सही डेलिकेट चीजों को किस तरह से हैंडल करना यह रोबोट के लिए सबसे बड़ा टेस्ट है कि सामने की चीज जिसको वह स्पर्श करता है जिसके साथ में वह काम करता है उसकी इन्हेरेंट स्ट्रेंथ कितनी है वह समझ कर के उसके साथ में काम किया जाए थोड़ा सा ही ज्यादा जोर दे दिया तो अंडा टूट जाएगा तो यह जो रोबोटिक एक्सपेरिमेंट होते हैं उसके वीडियो में कभी देखता हूं तो इस तरह से होता है कि एक रोबोट जो है व बड़ा ही सक्सेसफुल है उसने अंडा अपने हाथ में उठा लिया रोबोट सक्सेसफुल हम सोचेंगे अरे बड़ी-बड़ी कारों को उठा लेता है कौन सी बड़ी बात है तो अंडा उठा लेना कौन सी बड़ी बात है किंतु वही सबसे बड़ा टेस्ट है क्योंकि कार को थोड़ा सा जोर से भी पकड़ेगा तो कार को कुछ होने वाला नहीं है बड़े-बड़े एयरक्राफ्ट बना देते हैं रोबोट्स बड़े-बड़े मशीन बना देते हैं तो मशीन को थोड़ा जोर से भी पकड़ने से कोई फर्क नहीं पड़ने वाला अंडे को थोड़ा सा जोर से पकड़ेंगे अंडा टूट जाएगा काच का ग्लास है जिसमें पानी भरा है उसको उठा करके किसी पेशेंट को देना है हॉस्पिटल में रोबोट को रखा है काम करने के लिए थोड़ा सा भी प्रेशर देगा तो काच टूट जाएगा पानी गिर जाएगा चारों ओर तो जिनके पास में प्रचंड शक्ति है उनको जद कोई डेलिकेट कार्य करना है तो हमेशा थोड़ा सा एक्सपेरिमेंट करना पड़ता है कितने ही काच के गिलास कितने ही अंडे तोड़े होंगे तब कहीं रोबोट को ट्रेनिंग मिली होगी कि हां व मशीन को बड़े-बड़े एक टन का मशीन दो टन का मशीन ना कि चार पांच कार वो उठा लेता है वोह उसको पेंटिंग करने के लिए ना कि उसको रिपेयर करने के लिए वह सब ठीक है किंतु यह काच का ग्लास जब उठाता हूं तब मुझे इतना ही प्रेशर देना है वह एक्सपेरिमेंट करके आता है तो वैसे ही यहां पे मां के भीतर में देवत्व फूट फूट करके भरा हुआ है देवत्व और मनुष्यवकाशा करें कि जिससे हमको प्रेरणा भी मिले और हम मां से दूर भी ना चले जाए यह दोनों को बैलेंस मेंटेन करना कितना इंपॉर्टेंट है थोड़ा सा भी देवत्व नहीं प्रकाश करेगी तो रामकृष्ण संघ स्थापना ही नहीं हुई होती आज इतने सारे लोग देश विदेश में साधु सन्यासी भक्त वॉलंटस में आए हैं हमको कुछ ना कुछ अनुभूति तो हुई है भले ही चाहे बहुत ही कम हो किंतु अनुभूति तो हुई है बोलकर के ही तो हम लोग यहां पर आए हैं संसारी हो ना कि साधु हो यहां पर आना है थोड़ा समय देना है निष्ठा देनी है कुछ ना कुछ तो अनुभूति हुई होगी तो वो अनुभूति इतना तो प्रकाश मां को देना पड़ेगा अदर वाइज तो यह राम कृष्ण संग चलता ही नहीं मन में इतना संताप है या तो फिर मन में इतना ध्वंस सोल्यूशन मां के पास मिलता है मां के पास में आकर के मन को सुकून मिलता है मन का यह जो युद्ध है तुमुल युद्ध वह शांत हो जाता है तो इतनी शक्ति तो मां को प्रकट करनी होगी वरना तो हम लोग आएंगे ही नहीं किंतु साथ साथ में ही फिर इत नी शक्ति ना प्रकट कर दे कि मां को हम जैसे कि हॉस्पिटल में जाते हैं ना हम डॉक्टर के पास में कि हां चलो मुझे अभी आज यह बुखार हो गया है आप औषध दे दो आप दवाई दे दो मेरा काम हो गया खत्म मैं यहां से निकल जाता हूं डॉक्टर के पास हम थोड़ी ना जाकर के डॉक्टर की स्तुति वगैरह करने लगते हैं डॉक्टर को पैसा दिया उसके सामने दवाई के सामने मामला खत्म हो गया तो वैसे ही यह तो भगवान है क्या है वहां जाकर के श्रीफल ऑफर कर दिया कुछ मिठाई ऑफर कर दी वो फूल वगैरह दे दिया प्रणामी दक्षिणा दे दी मंदिर के पुजारी को और बस हो गया अपना काम कर लिया निकल गए वो तो भगवान है भगवान का तो काम ही है हमको आशीर्वाद देना कौन सी बड़ी बात है कि उनके सामने बैठ कर के हम अपने जीवन को परिवर्तित करें तो ये किस बात को कितना गुरुत्व देना इनफ ह्यूमैनिटी दिखानी है कि जिससे कि हमको ऐसा लगे अरे मां तपस्या करती है तो मैं क्यों नहीं तपस्या कर सकता मां पंच तपा की है तो मैं एक तपा तो करूं कम से कम और बीच-बीच में अपनी लाइफ में एटलीस्ट एक बार मनुष्यवकाशा मां को दिखाना है और साथ-साथ में ही देवत्व का भी इतना प्रकाश दिखाना है कि जब ऐसी कोई क्राइसिस आ जाए कि जिसके सामने हमारी तपस्या हमारी प्रार्थना हमारे पूरे जीवन का जो कोई भी शांति सुकून हमने अर्जन किया है वह सब किसी काम का ना रहे तब सिर्फ मां के आशीर्वाद से ही मन को सुकून मिले तब कहीं जाकर के संपूर्ण शरणागत होकर के मां के सामने अपने मन घर में जद मां का फोटो रखा है या तो मिशन में आश्रम में जो मंदिर में जो मां का फोटो है दो हाथ जोड़ कर के बड़े ही सरल रूप से मां को प्रार्थना की कि मां मेरे जीवन में यह हो रहा है आप आशीर्वाद दो तो मैं इसको भी पार कर जाऊं तो यह मां को इतना देवत्व अवश्य दिखाना है कि जिससे हमारी हम मां को जाकर के प्रार्थना कर पाए और इतना देवत्व नहीं दिखाना है कि प्रार्थना करके छोड़ दे चलो भाई मां को प्रार्थना करती हो गई अभी अपने जीवन को परिवर्तित करने की जरूरत नहीं है तो यह देवत्व और मानवत्वम स्थल पे यह दोनों के संगम के ऊपर में मां खड़ी है और किस बात के ऊपर में कितना गुरुत्व देना किस चीज का प्रकाश किस गुण का प्रकाश ज्यादा दिखाना वो मां अभी जैसे ठीक नहीं कर पा रही कोई एक सामान्य बालिका होगी रास्ते में जा रही है अंधेरा रास्ता है खुला मैदान है कोई एक डाकू आ गया उनके सामने और एकदम चिल्ला करके बोलता है कौन हो रे तुम तो यह यदि सिर्फ मनुष्यवकाशा होता सिर्फ मनुष्यवकाशा कि हां ऐसे फट कर के भीतर में से वो एक प्रकाशित वो हृदय में से ही एक बात आई कि बाबा मैं आपकी बेटी हूं और जैसे ही मां ने ऐसा कहा वो डाका तुझे डाकू था उस उसके हृदय में एकदम एक पितृ भाव का एक आवेश हुआ पितृ भाव प्रकट हुआ और कहता है कि नहीं बेटिया तुमको डरने की जरूरत नहीं है मेरी मेरी स्त्री है मेरी पत्नी यही पीछे में ही आ रही है हम तुमको तुम्हारे पति के घर ले जाएंगे दक्षिणेश्वर हम हमको ले जाएंगे तो इतना देवत्व दिखाना है कि जिससे कि उनके आसपास में जो भी लोग हो वह थोड़ा सा उनके प्रति श्रद्धा भक्ति करें और इतना ही नहीं मनुष्य तोव दिखाना कि इस तरह की क्राइसिस में फिर वो हम लोग इस तरह से बिल्कुल बच्चे की तरह बिल्कुल एक सामान्य अ बालिका की तरह बिहेव करें ऐसा भी नहीं करना तो ये दोनों का बैलेंस मां उस समय सीख रही थी तो जैसे एक्सपेरिमेंट करते करते फिर प्रॉपर बैलेंस आता है तो वो प्रॉपर बैलेंस हमको बाद के समय में दिखा कि मां जब जरूरत होती है देवत्व का प्रकाश करती है जब जरूरत नहीं होती मनुष्य भाव में रहती है वो जैसे कि उनको सिद्ध हस्त हो गया है लोगों का मन समझ में आ गया है कितना देवत्व का प्रकाश करने से यह अपने धर्म पथ पर अच्छे से आगे बढ़ पाएगा यह अंदाज मां को उनके भक्तों को देख कर के शिष्यों को देख कर के आ जाता था ये मां के शिष्यों की बातें जब पढ़ेंगे ना वरदा महाराज है फिर ये गौरेश्वर आनंद जी महाराज है राममय महाराज है इन सब की बातें हम पढ़ेंगे तो हमको लगेगा कि अरे मां को जैसे बिल्कुल एक मां की तरह घर में मां है लोगों के लिए खाना बनाती है दो-तीन अच्छी बातें करती है ऐसे रूप में देखते हैं और कोई कोई भक्ति की बातें सुनेंगे जैसे कि मां के घर में एक बच्ची रहती थी थोड़ा बहुत काम कर दिया करती थी वासना बाला देवी उनका नाम जयराम बाटी में अभी भी उनका घर है तो मां छोटी बच्ची थी मां के साथ में रह कर के थोड़ा बहुत काम किया करती थी तो वह अभी मां ने उनको एक रात को कह दिया कि उनके पास में एक गांव में मेला था तो वहां पर जाने की बड़ी इच्छा थी तो मां ने कह दिया कि भाई वहां पर मत जाना आज वरना सभी लोग गए हैं मेले में तो मैं अकेली हो जाऊंगी तुम साथ में रहना मेरे तो ये बच्ची को तो बड़ा बुरा लग गया किंतु क्या करें मां ने आदेश दिया है कुछ कर भी नहीं सकती रात को सोई है अभी आधी रात को सडन नींद खुल गई देखा कि जैसे कि ये वही मां अपने घर की वही मां वो जैसे कि पूरी कुटिया को प्रकाशित करके जगत दादी के रूप में वो वहां पर बैठी हुई है और उनका दर्शन करके बच्ची का मन तृप्त हो गया तो अभी ये बच्ची के मन में कष्ट भी ना हो और साथ-साथ में ही वो देवी रूप समझ कर के फिर सेवा करनी है आप देवी समझ कर के फिर सेवा करना कितना कठिन होता है सब समय एक डर रहता है अरे मेरे से थोड़ी सी भी गलती हो गई तो शराप मिल जाएगी तो गलती तो मनुष्य के स्वभाव में वो है गलती तो होती ही रहती है तो फिर आप किसी इसलिए जो सेवा अपराध के बारे में जो हम कुछ दिन पहले डिस्कस कर रहे थे एक डर लगता है कि प्रेसिडेंट महाराज है या तो फिर डायरेक्ट डिसाइल है इनकी सेवा करने से ठाकुर की मां की इतना अपने को संभाल करके रखना पड़ता है थोड़ा सा भी गलती हो गया तो कोई श्राप ना दे दे पूरा जीवन अपना खत्म ना हो जाए ऐसा भी तो एक डर रहता है तो फिर अभी इस तरह से डर रखने से तो काम नहीं होगा म मां को तो अपना मनुष्य स्वभाव मनुष्य स्वरूप दिखाना पड़ेगा कि भले चाहे दो तीन गलती हो भी जाए किंतु यह बच्ची बेचारी अपना काम करती रहे और इतना प्रकाश अवश्य दिखाना है कि उसके मन का जो संताप है वह वहीं पर समाप्त हो जाए तो यह बैलेंस मां के जीवन में लोगों को समझ कर के किस गुण का कितना प्रभाव कितना प्रकाश दिखाना मां को बाद में समझ में आया था किंतु अभी सध प पर आई है अभी अभी पृथ्वी पर आई है अपने भीतर की जो दिवाइन डिवाइन सत्ता जो है दिव्य सत्ता उसके प्रकाश से लोगों के मन में कितना कब कहां क्या असर होगा वह मां ठीक से समझ नहीं पा रही तो इसीलिए महाराज जी ने इतना सुंदर सेंटेंस यहां पर लिखा है आमरा जे कालेर कोथा बोली ते छी फिर से एक बार पढ़ता हूं हम जिस समय की बात कर रहे हैं सेही समय उधव लोक ईते धा में सत्य समाग उस समय उधव लोक अर्थात की स्वर्ग लोक में से धाम अर्थात की पृथ्वी पर सत्य समाग अभी अभी जिनका आगमन हुआ है ऐसी मा देव मानत्व संधि स्थले अस्थान पूर्वक देवत्व और मानवत्वम स्थल पर अवस्था पूर्वक अवस्था करती हुई मर्त्य लीला कौन भाब ऊपर अधिकतर गुरुत्व आरोप करी बेन इस मर्त्य लीला में इस मनुष्य लीला में किस भाव के ऊपर में ज्यादा गुरुत्व देगी किस भाव का ज्यादा प्रकाश करेगी ताहा जेनो सोहोसा स्थिर कोरीते पारित छिले ना वो जैसे कि अभी ठीक ठीक समझ नहीं पा रही ठीक ठीक निर्णय नहीं ले पा रही अथवा दव विधान तहर शैशव ओ बालो लखते अलौकिक शक्ति ते परिवेट तो चलो या तो यह या तो फिर दैव विधान से अर्थात की ईश्वर की इच्छा से ही उनका शैशव और बाल्य लखते अज जानते ही अलौकिक शक्ति ते परि टि तो छीलो अलौकिक शक्ति से ही घिरा हुआ था या तो फिर मां ठीक नहीं कर पा रही कि देवत्व का कितना प्रकाश करना जिससे कि लोग प्रेरणा भी प्राप्त करें और डर भी ना जाए या तो यह बात है या तो दूसरी बात है कि ईश्वर की ही इच्छा ऐसी है कि मां का शैशव और बाल्य जीवन देवत्व से ही भरपूर भरा हो देवत्व की स्वास देवत्व का प्रकाश मां के बाल्य और शैशव जीवन को इतना मधुमय कर दे महाराज का ही शब्द मधुमय कर देना इतना मधुमय कर दे कि हम जितनी बार इसका पाठ करें जितनी बार इसका स्मरण मनन चिंतन करें निदिद्यासन करें उतना ही हमारा मन श्रद्धा भक्ति सरलता विश्वास और एक साधना के रास्ते पर चलने की प्रेरणा से भर जाए तो आज यही तक कल फिर से मिलते हैं ओम शांति शांति शांति हरि ओम तत्सत श्री राम कृष्णा अर्पण मस्तु