Transcript
ओम संस्थापक धर्म अवतार लिखित कल हमने देखा महाराज नई शक्ति के जागरण के लिए और मां शक्ति के अवतरण के लिए भगवान श्री रामकृष्ण देव ने इस दोनों तथ्यों को प्रतिपादित करने के लिए या तो फिर स्थापित करने के लिए भगवान श्री रामकृष्ण देव ने क्या किया तो उसके बड़े में गंभीर नदी महाराज हमको बता रहे हैं रामकृष्ण अवतार स्त्री गुरु ग्रहण इसीलिए रामकृष्ण अवतार में स्त्री गुरु ग्रहण इसीलिए नई भाव से साधन इसीलिए सी अपनी सहअध्धर्मी को शिक्षा और दीक्षा देना इसीलिए मंत्र भाव का प्रचार तो यह 4 पॉइंट हमको गंभीर नदी महाराज कहते हैं की भगवान रामकृष्ण देव के द्वारा इस कार्य में क्या अवदान है हमको ये पता है की मां का क्या अवदान है ठाकुर के कार्य में ठाकुर जब ग्रहण करते हैं जन्म ग्रहण करते हैं या तो फिर धारा धाम पर अवतरित होते हैं तो शक्ति जो है मां शक्ति उनका क्या अवधान होता है वो तो हमने देखा किंतु अभी अवतार का क्या उड़ान है नई शक्ति के जादू नई शक्ति के मिशन में नई शक्ति के जगत कार्य और इसी में सबसे पहले है की स्त्री गुरु को ग्रहण करना अर्थात की भैरवी ब्राह्मणी अभी देखिए की हमको आज इतने सालों के बाद भारत में यह बैठ करके सुना की हां उन्होंने एक स्त्री से दीक्षा ली एक स्त्री से उन्होंने तंत्र या तो फिर शक्ति साधना उन्होंने सखी तो इस बात में को क्या वो इसमें कौन सी बड़ी बात है इसमें कौन सा कोई रिवॉल्यूशनरी आइडिया छुपा हुआ है किंतु यदि हम उसे समय के समाज को देखेंगे जबकि स्त्रियों की स्थिति बड़ी ही दयनीय थी यह इस्लाम के आक्रमण के बाद में स्त्रियों को पर्दा प्रथम में इसलिए जाना पड़ा था की उनकी सेफ्टी और सिक्योरिटी कहानी पर भी नहीं थी तो इसलिए सब समय उनको घर के भीतर में बैंड करके रखा जाता था और किसी भी पुरुष के सामने वो नहीं ए पाती थी अभी हमको पता है हमको पॉइंट हमको पता है मां जब कुछ पढ़ने की लक्ष्मी दीदी थोड़ी फॉरवर्ड थी एन अपने नेचर में तो वो लक्ष्मी दीदी यानी की ठाकुर की भांजी ठाकुर की भतीजी तो वो जब एक प्रथम भाग द्वितीय भाग ऐसा वो फर्स्ट पार्ट सेकंड पार्ट इस तरह से विद्यासागर की किताबें हैं पढ़ाई के लिए अल्फाबेट्स वगैरा सीखने के लिए वो पढ़ रही थी तो मां भी उसे समय मां की शादी तो बहुत ही छोटी उम्र में हो गई थी ये भी एक पॉइंट देखिए की कितनी छोटी उम्र में लड़कियों की शादी होती थी 5 साल 6 साल 8 साल 10 साल तो इतनी छोटी उम्र में मां शादी करके आई थी पढ़ाई स्कूल में जान की कोई बात ही नहीं थी एक बार शादी कर लेने के बाद में तो मां लक्ष्मी दीदी के साथ में बैठ करके जब यह पद्धति थी यह प्रथम भाग द्वितीय भाग उसे समय हृदय ने देख लिया तो हृदय ने क्या किया हृदय यानी की ठाकुर का भांजा और ठाकुर का सेवक तो उसने क्या किया मां के हाथ में से किताब छन ली और क्या कहा की लड़कियां यदि पढ़ाई लिखी कर लगी तो वो नाटक पड़ेगी नाटक यानी की यह प्ले वगैरा और नोबेल ये मतलब जिसके जिसमें सब बुरी बातें बताई जाति है इस तरह का कुछ पड़ेगी लड़कियां इसलिए लड़कियों को पढ़ाई लिखी नहीं करने देना चाहिए दूसरी बात दूसरा पॉइंट है की जब कनखल सेवा शर्म की शुरुआत हुई थी वहां पे जी तरह से हमारे जितने भी आश्रम में ठाकुर मां स्वामी जी का फोटोग्राफ लगाया जाता है श्री रूम में आ मंदिर ग्रुप में गर्भ में तो वहां पर भी ठाकुरमार स्वामी जी का फोटो लगाया गया था अभी एक दिन ऐसा हुआ की महापुरुष महाराज कनखल गए थे जाकर के मंदिर में जाकर देखा तो मां का फोटो गायब है ठाकुर और स्वामी जी दोनों बैठे हुए हैं तो महापुरुष महाराज ने पूछा अरे भाई मां का फोटो कहां गया बिना शक्ति के तुम अवतार की पूजा करोगे यह क्या ठीक हुआ क्या तो अभी यह वहां के साधु क्या बोलने लगे की महाराज जी यहां के साधुओं की ऐसी मान्यता है इस स्त्री को कभी भी गुरु नहीं बनाना चाहिए और इसीलिए मां का फोटो हटा दिया यह बात सुनकर के महापुरुष महाराष्ट्र बड़े दुखित भी हो गए थोड़े क्रोधित भी हो गए अरे ये क्या पागल जैसी बात कर रहे हो स्वयं आध्या शक्ति जगदंबा स्वयं इनका फोटो तुम हटा लोग और फिर तुमको पूजा करने से क्या लाभ होगा पहले मां का फोटो रखो और फिर यहां का जो साधु समाज है हरिद्वार का उनको जो बोलना है तो ये बोल करके फिर मां का फोटो वहां पे फिर से रखा गया तो देखिए की ये उसे समाज के उसे समय के समाज की स्थिति थी स्त्रियों को सब समय एक दूर तक रखा जाता था उनको पढ़ाई लिखी नहीं करने दी जाति थी और फिर वो जल्दी इस तरह की स्थिति है तो एक स्त्री को गुरु बनाना यह तो कितना बड़ा उसे समय एक रिवॉल्यूशनरी स्टेप कहा जाएगा अरे यह तो सही और सामने में अब भैरवी ब्राह्मणी के बड़े में भी थोड़ा सा सोच करके देखें की वह एक स्त्री थी और उसे समय उन्होंने कितने विरोध के भीतर में पढ़ाई लिखी सखी होगी क्योंकि बिना पढ़ाई लिखी के तो आप शक्तियों किसी भी तरह की साधना में अब सर्वोच्च शिखर पर हासिल नहीं हो सकते क्योंकि आपको किताबें पढ़नी होगी किसी गुरु के पास में तो सीखना ही होगा किंतु साथ-साथ में उसे आ उसे साधन पद्धति या तो फिर उसे दर्शन शास्त्र को डिस्क्राइब करती हुई बहुत ही जटिल किताबें का आपको अध्ययन करना पड़ेगा बिना इसके किसी भी तरह की सर्वोच्च सर्वांग साधना में सिद्ध होना संभव नहीं है ठाकुर के लिए था क्योंकि ठाकुर की बात ही अलग है उनको तो एक के बाद एक कितने गुरु मिलते गए किंतु भैरवी ब्राह्मणी के बड़े में तो ऐसा शायद नहीं था अभी यह भी एक बात है की जैसे की तोता पुरी के बड़े में हमको पता है की तोता पुरी का मठ कहां पे था वह पंजाब में था और इसके बड़े में एक अच्छा से कुछ आर्टिकल भी लिखे गए हैं हमको पता भी है की तोता पुरी के मठ में किस तरह से नए आए सन्यासियों को शिक्षा दी जाति थी वे लोग तो सब दिगंबर रहते थे तो पहले तो उनको ऐसा का दिया जाए की पहले ही दिन से दिगंबर हो तो बेचारे उनको तो थोड़ी सी शर्म आएगी इस तरह से रहने का अभ्यास नहीं है तो कहेंगे की पहले तुम ये ऊपर का वस्त्र निकाल करके रहने को सीखो फिर एक के बाद एक वस्त्र हटा करके धीरे-धीरे करके दिगंबर होने की प्रैक्टिस करो इसके बाद में इन लोगों को बड़े लंबे समय तक ध्यान में बैठना पड़ता था अभी ऐसा करने से तो आपको पर में दर्द होना शुरू हो जाएगा कमर में दर्द होना शुरू हो जाएगा तो इसका क्या सॉल्यूशन है पहले इन लोगों को बैठने के लिए बड़ा अच्छा सा एक गाड़ी दिया जाता था और उसके बाद में जैसे जैसे उसे गाड़ी पर लंबे टाइम तक बैठाया बैठ करके ध्यान करने की प्रैक्टिस होती गई इसके बाद में उनको एक पतला सा एक आसन दिया जाएगा बोलेंगे की अभी इसके ऊपर में बैठ करके ध्यान करना सीखो तो अभी पतले आसन पे लंबे समय बैठकर के ध्यान कर अभी क्या है की वो कमर है पर है वह सब बाय दिस टाइम आपका ट्रेन हो गया है फैट करके पहले दिन तो होगा नहीं तो धीरे-धीरे करके वो ट्रेनिंग देनी है फिर जब पतली पतले आसन के ऊपर में बैठ करके ध्यान करने का लंबे समय तक अभ्यास हो गया तो फिर कहेंगे की अब इस आसन को भी हटा लो और वैसे ही जमीन पर बैठकर के ध्यान करो तो यह पुरी साधन पद्धति उनकी मेथाडोलॉजी यह मठ कहां पे था यह सब हमको पता है हमारे कुछ कुछ साधु सन्यासियों ने यह पंजाब में है कहानी पे ये मठ में खुद तो गया नहीं और किंतु हमारे कुछ साधुओं ने उसकी मुलाकात भी मैंने फोटोग्राफ भी देखें हैं तो तोता पुरी के बैकग्राउंड क्या है उनका इतिहास क्या है हिस्ट्री क्या है हमको पता है किंतु मुझे नहीं पता की किसी ने भैरवी ब्राह्मणी के बड़े में इस तरह का कोई रिसर्च किया हो भैरवी ब्राह्मणी का ठाकुर के जीवन में आना ये एक चमत्कार से कम नहीं है उसे समय की स्थिति में एक स्त्री ये साहस करेगी की घर छोड़कर के अकेली रहे साधन भजन करके रहे और वह भी यह तो शक्तिशाड़ना आपको उसे मिशन में रहना होगा एकांत में रहना होगा अंधेरे में साधना करनी होगी तो उसके लिए कितना साहस चाहिए एवं आज के युग में भी स्त्रियां 10 बार सोचेगी इस तरह से यदि उनको कहा जाए की घर छोड़कर के रहो या तो फिर सोचेगी की हां मैं अभी घर छोड़ के चली जाति हूं और फिर मैं इस तरह से किसी मेरा एकांत जगह पर मैं जाकर के साथ ना करती हूं किसी गुरु के पास तो एवं आज भी स्त्रियां 100 बार सोचेगी देखिए रामकृष्ण मिशन और ये शारदा रामकृष्ण मिशन ये दोनों में आज के बेनिफिट क्या है आजकल लड़कों का मुझे पता है की मैं एक मैं जब छोटा था मैं एक लड़के को पहचानता था उसके साथ में मेरी बहुत बड़ी अच्छी मित्रता थी एक दिन वो भरूच बोल करके एक सिटी में राहत था अभी क्या है की ये भरूच सिटी जो है वो जो लोग नर्मदा परिक्रमा करते हैं तो नर्मदा नदी जब सागर के साथ में मिलित होती है वो इस भरूच सिटी में तो वहां पर जितने भी परिक्रमा वासी है वहां पे इकट्ठा होते हैं नर्मदा परिक्रमा करने वाले हजारों साधु संत त्यागी बैरागी ग्रह जो लोग भी परिक्रमा करते हैं भरूच के आसपास में वो इकट्ठा होते हैं वह सागर स्नान करते हैं और फिर यह जनरली परिक्रमा क्या होती है की ओंकारेश्वर आर्ट की मध्य प्रदेश से शुरू होकर के गुजरात तक आई है यह भरूच सिटी में तो वो नर्मदा के साउथ बैंक यानी की साउथ की और जो किनारा है दक्षिणी किनारे उसे किनारे पे वो शुरू करते हैं सागर में स्नान करते हैं फिर वहां से नर्मदा को नर्मदा तो आप क्रॉस नहीं कर सकते तो सागर में नौका में बैठकर के इस और आते हैं नॉर्थ बैंक यानी उत्तरी किनारे पर और फिर वहां से वापस जाते हैं फिर से ये ओंकारेश्वर तक या तो फिर अमरकंटक तो वहां पर जाकर के उनकी ये जो परिक्रमा है वो समाप्त होती है अमरकंटक से होती है सॉरी ओंकारेश्वर से नहीं तो इस तरह से वे लोग परिक्रमा समाप्त करते हैं तो देखिए की ये भरूच का महत्व कितना है यह नर्मदा परिक्रमा वीडियो के लिए और कितने ही साधु संतो के लिए तो मेरा यह मित्र भरूच में र रहा था अभी उसके माता-पिता को तो कुछ पता नहीं किया लड़के के मां में सदैव लिए किसी साधु के साथ बात करता है और वो इन लोगों से प्रभावित भी हो गया है मां-बाप को कुछ पता नहीं एक दिन ऐसा हुआ की वो लड़का घर छोड़ के ऐसा बोला की मैं जा रहा हूं थोड़ा सा कम के लिए वैसे ही पहने हुए कपड़े पहने हैं और जो और कुछ नहीं हाथ में लिया निकाल गया सीधा घर से और वापस ही नहीं आया अभी तो जैसे अभी शाम तक तो माता पिता जी माता जी और पिताजी तो ऐसा चिंता नहीं करेंगे लड़का है तो वो 10वीं 12वीं में पढ़ रहा है तो ठीक है अपने मित्र के साथ में खेल रहा होगा या जो भी है शाम हो गई घर नहीं ए रहा है और फिर जितने भी मित्र है सब कहानी जाकर के उन्होंने पूछना शुरू किया की अरे भाई हमारा लड़का आया है तो सब ने बोल दिया की नहीं वो तो आज हमारे यहां आया ही नहीं अब यह लोग बेचारे बड़े ही चिंता में पद गए और फिर अब जैसे रात पद गई वो ए नहीं रहा है अभी तो चारों और दौड़ हम मैच गई पुलिस में कंप्लेन लिखी गई वहां आस-पास के जितने इस तरह के वह साधु सन्यासी वगैरा थे उनको पूछना शुरू कर दिया अभी किसी साधु साधु के साथ में वो मिल गया होगा तो साधु थोड़ी ना बोलेगा क्या का लड़का हमारे साथ में लड़के ने पहले ही बता दिया होगा की मेरे माता-पिता की कभी भी मुझे परमिशन नहीं देंगे इस तरह से ये त्यागी वगैरागी बने के लिए वो मुझे जोर जबरदस्ती करके ले जाएंगे ऐसा कुछ शायद उसने बोल दिया होगा तो किसी ने ऐसा कहा नहीं की आपका लड़का हमारे पास में है या हमारे साथ है तो उसे दिन से लेकर के आज का दिन उसे लड़के के साथ में क्या हुआ किसी को पता नहीं और उसके माता जी पिताजी इतने मतलब अभी भी वो याद करते हैं तो रोटी हैं की यदि उसको साधु भी बन जाना था तो एक बार हमको बताता एक बार कहानी हमको मिलने के लिए आता क्या ऐसा नहीं है की वो समुद्र में डब गया है ये भी तो एक संभावना है की यदि उसका कोई भी बता पता नहीं है नदी अभी वहां पर तो जब नदी समुद्र को मिलती है जो बंगाल में रहते हैं कोलकाता में उनको पता है की गंगा जब सागर में मिलती है तो कितना उसका प्रचंड प्रवाह राहत है वहां पर पर फिसल की फिनिश अब गए वहां पर तो अभी यह लड़का क्या नदी में या सागर में गिर कर के मा गया या तो फिर वो किसी साधु के साथ में घर छोड़कर चला गया इसको पता तो ये अभी तक ऐसा होता था की यदि आपको साधु होना है तो आप फैट करके घर छोड़कर चले जाएंगे और माताजी पिताजी को कुछ पता नहीं चलेगा इसलिए चंद्रमणि देवी देखिए आपको छोटे थे और वो कमर कुकर में घर कमरपुर के बाहर में वो छोटी बंगाली में कहते हैं धर्मशाला यदि हम लोग नॉर्थ इंडियन लैंग्वेज उसे करेंगे तो की वहां पर जितने भी ये गंगासागर या तो फिर जगन्नाथ पुरी की यात्रा करने वाले साधु सन्यासी थे वे लोग का मार कुकर के गांव जो था उसके बाहर में आई हुई है जो धर्मशाला थी वहां पर रुकते थे और अब ये गधा घर को ये सब बड़ा पसंद आता था के साथ उनके पास में जाए उनके साथ में बातें करें उनसे भजन कान सीखे फिर उनके पास में वो पहने का वह सब करेगा फिर आकर के मां चंद्रमणि देवी को बोलना भी है की मां देखो साधु ने मुझे इतना अच्छा सुंदर गण भजन सिखाया मां बेचारी बड़ी परेशानी की अरे तुम साधुओं के साथ में जाकर के मिलते हो तुम मैं तुमको नहीं मिलने दूंगी ऐसा इतनी बेचारी वो नाराज हो गए फिर साधुओं ने आकर के मां को मां चंद्रमणि देवी को बोलना पड़ा की हम आपके आपके पुत्र को उठाकर के यहां से नहीं ले जाएंगे आप निश्चित रहिए तब कहानी जाकर के मां के हृदय में साढे रहो तो देखिए एक समय था जबकि साधु सन्यासी होना बैरागी होना यानी की घर के ऊपर में कितनी बड़ी आपत्ती माताजी पिताजी को तो ऐसा लगेगा की लड़का सही में वो मा गया अभी वह जैसे मैंने अपने मित्र के बड़े में बताया वह सही में मा गया लेकिन सही वो साधु हो गया किसी को पता नहीं है इसके बड़े में नो न्यूज़ एट जो यानी की यह जो एकदम ट्रेडिशनल सन्यासी जो की अपना श्रद्धा करते हैं यानी मैंने अपना श्रद्धा किया यानी की मैं मृत्यु हो मृत्यु हो गया समाज के साथ में मेरा जो भी रिलेशन है वो खत्म हो गया तो ये अपना सन्यास का ट्रेडीशन था किंतु रामकृष्ण मिशन या तो फिर ये रामकृष्ण शारदा शारदा रामकृष्ण मिशन यहां पर क्या होता है यह एक संघ है ये एक इंस्टीट्यूशन है यदि आपको यहां पे साधु होने के लिए आना है तो वे लोग हमको पूछते हैं एटलिस्ट की नॉमिनल तुम्हारे माता जी पिताजी को पता तो है ना की तुम यहां पे आए हो उनके आशीर्वाद लेकर आओ और फिर यदि आशीर्वाद नहीं देते हैं तो अभी तुम्हारी इच्छा है तो ए जो वो यहां पे इतने सारे केसेस इतने सारे मतलब मैं साधुओं के पास से इतने इंटरेस्टिंग इंटरेस्टिंग सब किस सुन हैं मैंने की आ मैं जैसे की आ एक सन्यासी है मैं उनसे उनको मैं बड़ी ही श्रद्धा करता हूं तो मुझे तो पता नहीं था इनके बड़े में मुझे बहुत सालों के बाद में मुझे दूसरे महाराज ने बताया की अरे देखो मैं उसे सन्यासी के साथ में उनके घर बन गया था उनके पिताजी की उम्र बहुत मतलब 89 प्लस थी बिल्कुल असहाय हो करके बिस्तर पर लेते हुए हैं घर में बुद्धि मां है और कोई नहीं है एक लोटा लड़का ये साधु है अब ये साधु यानी की वो बहुत ही हायर एजुकेशन में वो मास्टर्स ने ऐसा कुछ किया हुआ है यदि वो जब करता है या बिजनेस करता तो लाखों करोड़ काम सकता इतना हाली टैलेंटेड है अभी ये पिताजी माताजी तो बड़े ही वृद्ध अलग और उनके पास वो तो पहले से ही दरिद्रथ है तो कितना मेहनत करके लड़के को पटाया लिखिया सिखाया अभी वही लड़का बड़ा होकर के माताजी पिताजी की सेवा करने की बजे घर छोड़कर चला गया वहां ऊंगरेड फूल मैंने क्या बोलेंगे ऐसे लड़के होने के लिए तो अभी चलो ठीक है जब चला गया तो अब क्या कर सकते हैं जाकर के आप थोड़ा सा झगड़ा तो करेंगे लड़का नहीं मानेगा तो आप क्या कर लेंगे तो अभी यह पिताजी विरुद्ध हो गए हैं बिस्तर में लेते हुए खड़े भी नहीं हो सकते अभी यह दोनों महाराज जिंजो उनका सन्यासी लड़का है वह और उनके मित्र ये दोनों गए वहां पे और जाकर के पिताजी के साथ में थोड़ी बात की अभी अभी तो कितनी बात करेंगे आधा घंटा 15 घंटा हुआ अभी वो उनका लड़का जो उसने कहा चलो अभी चलते हैं तो अभी जो दूसरे वाले संज्ञा सी है वो कहते हैं अरे भाई रुक जो थोड़ा सा तुम अपनी इतने सालों के बाद में पहले बार अपने घर ए रहे हो पिताजी की अवस्था देखो थोड़ा सा पूछ लो की भाई क्या आवश्यकता है हम लोग कुछ जुगाड़ कर लेंगे तो वो उनका लड़का साधु वो कहता है की नहीं नहीं चलो टाइम हो गया चलने की शुरुआत करो अभी बस यहां पे बात खत्म हो गई तो वो पिताजी बिस्तर में से खड़े नहीं हो का रहे अपने लड़के का हाथ पकड़ लिया और बोलते हैं बेटा तुम मत जाना तुम जाओगे तो मैं जिंदा नहीं र पाऊंगा तो यह उनका लड़का ऐसा मतलब निष्ठुर हो करके हाथ चुडा लिया और बोलना है चलो निकलते हैं अभी उनके साथ ही सानिया सी है वो बेचारे रन जैसी अवस्था हो गई बोलना है अरे भाई तुम क्या निष्ठुर जैसा व्यवहार कर रहे हो थोड़ा सा रुक जाते हैं थोड़ा सा इनके साथ बात करते हैं तो नहीं नहीं वो अपने मित्र का हाथ पकड़ कर के खींच के ले गए और यहां पे पिताजी रो रहे हैं उनके मित्र को भी मैंने उनकी आंखों में से आंसू ए गए इन लड़के को नहीं बस बात दम हो गया मैंने सन्यास ले लिया इनके साथ में अभी कोई रिलेशन नहीं तो देखिए की सन्यास का जो आइडियल है की अपने घर के साथ में मित्रों के साथ में रिलेटिव्स के साथ में संपूर्ण रूप से एक के बार में आपको संबंध कैट देना है वह आइडियल किंतु देखिए की वो समय का जो आइडियल था रामकृष्ण मिशन या तो फिर शारदा मिशन में क्या है की पिताजी को पता राहत है उनको एक हत्यारा राहत है की हां चलो मेरा लड़का और कहानी मैंने कोई दुष्कर दुष्कर्म तो नहीं कर रहा या तो वो मा तो नहीं गया एटलिस्ट वो वहां पे तो है कुछ सोसाइटी के लिए कुछ कर तो रहा है ऐसा कुछ एक मतलब माताजी और पिताजी को थोड़ा सा एक हथियार राहत है भले लड़का उनके लिए कुछ कर ना पे किंतु यह तो पता है भाई लड़का खैरियत से है वो तो एक सुकून राहत है उनको तो किंतु यह आज की बात है पहले के जमाने में की अपने साधु बने या तो सन्यासी हुए आपको घर के साथ में माता जी पिताजी के साथ में संपूर्ण संबंध रिलेशन वहीं पे समाप्त हो गया उसे समय भैरवी ब्राह्मणी ने सन्यास लिया था भैरवी ब्राह्मणी ने घर छोड़ होगा भाई रवि ब्राह्मण ने डर डर एन यात्रा करते-करते उन्होंने साधना की होगी किंतु उसका क्या हिस्ट्री है क्या इतिहास है मैंने कहानी नहीं पढ़ा ऐसा शायद रिसर्च हुआ होगा मैं जनरली यह सब चीजों पर नजर रखना हूं किंतु मुझे इस तरह का कोई रिसर्च भैरवी ब्राह्मण के बड़े में नहीं पता चला जी तरह से हमारे पास में तोता पुरी के बड़े में है तो अभी हम सोच कर के देख सकते हैं की भैरवी ब्राह्मणी ने जी कठोर टी उसे समय किया होगा नई होकर के भी और बाद में ठाकुर को शिक्षा देने के लिए दीक्षा देने के लिए दक्षिणेश्वर आई होगी तो ठाकुर तो ठाकुर है भैरवी का जो महत्व है भैरवी ब्राह्मणी का जो महात्मे है वो कितना बड़ा है वो आप सोच कर के देख लीजिए ठाकुर ने स्त्री को रूप किया तो ये एक सेंटेंस में गंभीरानंद जी महाराज जो हमको कहते हैं इसका महात्मा कितना गंभीर है कितना दीप है वो हम सोच भी नहीं सकते भैरवी ब्राह्मणी के बड़े में पता नहीं कब यदि भविष्य में कुछ हमको मिलेगा कुछ रिसर्च होगा उसकी जो फास्ट लाइफ है पूर्व आश्रम है किस तरह से था यह सब हमको शायद कभी कुछ देखने को मिलेगा तो हम लोग तो बड़े ही भेज मां होंगे की इस तरह की इस तरीके के पास से ठाकुर ने शिक्षा ली और शक्ति मंत्र की दीक्षा ग्रहण की और शक्ति साधना की तो मां जगदंबा के पृथ्वी पर अवतार होने के यह जो वर्ल्ड मिशन है नई जाति का उत्थान उसमें ठाकुर ने कर पॉइंट गंभीर आनंद जी महाराज ने दिए की ठाकुर ने सहायता की उसमें सबसे पहले पॉइंट था की एक स्त्री गुरु को उन्होंने किया गुरु के पास से शक्ति साधना की थी अभी दूसरा पॉइंट है सीजन 9 साधन इसीलिए नई भाव की उन्होंने साधना की वो तो हो गई शक्ति साधना यह हो गई नई भाऊ की साधना नई भाऊ की साधना अर्थात की मधुर भावना देखिए की मधुर भाव की साधना का भी एक बहुत ही लंबा इतिहास है हमको भागवत पुराण में जन को मिलता है की अब ठाकुर कहते हैं ठाकुर खुद कहते हैं की बहुत सारे लोग हैं की मथुरा के कृष्णा को राजा कृष्णा को स्वीकार करते हैं किंतु यह वृंदावन के कृष्णा को यह गोपालक गोपालकृष्ण को बहुत सारे लोग शिकार नहीं करते वे लोग सोचते हैं की अरे भगवान विष्णु स्वयं पृथ्वी पर अवतरित होंगे तो वो तो राजा होकर के ही आएंगे वो कहां वो वृंदावन में यह गोपियों के साथ में वह लीला करते घूमेंगे नेकी फिर वो कहां वो गायों को चरवाने के लिए ले जाएंगे कहां वो मक्खन चोरी करके खाएंगे ने कहा वो गोपियों को परेशान करेंगे थोड़ा सा वह राधा के साथ में वह प्रणय करेंगे यह सब क्या नाटक लगा रखा है वो वृंदावन का कृष्णा जो है वो मीठे वो मिथ्या है जो ये राजा कृष्णा है जिन्होंने पांडवों को नीति शास्त्र का उन्होंने ज्ञान दिया अर्जुन को जिन्होंने गीता सुन वो कृष्णा ही सही कृष्णा है वो विश्वरूप जिनका था वो भगवान कृष्णा वहां पर वो गए द्वारका में द्वारिका में जाकर के वो युद्ध वगैरा किया वो कृष्णा सही कृष्णा है किंतु यह वृंदावन का कृष्णा जो है वो मिथ्या है या तो फिर इनके बड़े में कोई प्रमाण नहीं है ये बात बाद में ये वैष्णव साधकों ने उनको अपनी इमेजिनेशन में से निकाला है ऐसा कोई कोई लोग खाने वाले हैं ये ठाकुर ने भी इसका उल्लेख किया है तो देखिए की वृंदावन के कृष्णा वैसे तो भागवत में संपूर्ण विवरण है वृंदावन का रासलीला का वर्णन है किंतु इसको प्रचलित जो हुआ है अभी देखिए की प्रस्थान ट्रे जिसको कहा जाता है हिंदू धर्म का फंडामेंटल फिलोसॉफिकल बेसिस उसमें गीता है किंतु भागवत का नामोनिशान नहीं है तो अभी भागवत की यह जो महत्व जो है वो स्थापित की गई है ये भगवान कृष्णा चैतन्य गौरांग महाप्रभु के शिष्यों के द्वारा और ऑफ कोर्स गौरांग महाप्रभु स्वयं जी तरह से उन्होंने राधिका भाव में मधुर भाव में जो साधन भजन किया उसके द्वारा अभी आप का सकते हैं और इसका डिस्कशन लीला प्रसंग में शरद महाराज ने बड़ा ही विस्तृत रूप से किया है की एक पुरुष स्त्री के वस्त्र पहन करके हमारे मां में हो सकता है मधुर भावसार तत्व ऐसा करके एक अध्याय है लीला प्रश्न में उन्होंने बड़ी ही विषाद आलोचना इसके बड़े में की है तो इस अध्याय को हम नकल लीला प्रसंग रखूंगा साथ में और शरद महाराज मधुर भाव के बड़े में क्या कहते हैं और मधुर भाव का क्या इतिहास है ठाकुर ने मधुर भाव की साधना क्यों की और इससे नई जगत में जागरण में क्या सहायता मिलती है यह प्रश्न हो सकता है चलो ठाकुर ने मधुर भाव के साधना की तो की अभी ये आज की स्त्रियां जो है उनके आ उत्थान में उनकी प्रगति में यह इससे क्या लाभ होने वाला है अभी स्त्री गुरु को किया तो एक ताबू जिसको कहते हैं इंग्लिश शब्द है टेबल अर्थात की एक एक सामाजिक प्रथम निश्चित सामाजिक प्रथम उसको ठाकुर ने टोडा की चलो स्त्री गुरु नहीं कर सकते तो स्त्री गुरु उन्होंने किया तो एक सामाजिक प्रथम थी उसको ठाकुर ने टोडा की तो मधुर भाव साधन करने से आज स्त्रियों को किस तरह से अपने डेवलपमेंट में अपने उत्थान में सहायता मिल शक्ति है प्रश्न हो सकता है कल हम लोग लीला प्रश्न को साथ में रखेंगे शरद महाराज का मधुर भाव के बड़े में क्या कहना है उसको थोड़ा सा अध्ययन करेंगे स्त्रियों के उत्थान में स्त्रियों के जागरण के लिए ठाकुर का क्या उदार है उसको थोड़ा सा हम कल देखते हैं ओम शांति शांति हरि ओम तत्सत श्री राम कृष्णा