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Ma Sarada Life by Sw Gambhirananda ·

दैवाधीन : श्रीमाँ सारदा देवी : स्वामी गम्भीरानन्द लिखित : 20 June 2024

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ओम स्प काय च धर्मस्य सर्व धर्मा स्वरूपिणी अवतार वरिष्ठ या राम कृष्णा यते नमः श्री मां शारदा देवी का जीवन चरित्र का हम पाठ कर रहे हैं लेखक है पुस्तक के लेखक स्वामी गंभीरानंद जी महाराज और प्रकरण का नाम है देवाधि अर्थात की देवकी आधीन श्री मां शारदा देवी अच्छा कल हमने देखा कि किस तरह से गंभीरानंद जी का एक ही सेंटेंस कितना सुल दित ढंग से लिखा गया साहित्य की दृष्टि से भी और दर्शन शास्त्र की दृष्टि से भी कितना अमूल्य यह एक सेंटेंस श्री राम कृष्ण देव उनकी महिमा का तो सर्वप्रथम गान किया गया उसके बाद में श्री राम कृष्ण देव पूजिता श्री मां शारदा देवी यानी कि जद श्री राम कृष्ण देव की महिमा इतनी है तो मां की तो महिमा और भी कितनी होगी और इसके बाद में आखिर में यह कहा गया मां जदी चाहती तो अपने जीवन में अपने जीवन को कंफर्टेबल जीने के लिए दर्द रोग क्या यह ट्रीटमेंट के लिए जो चाहे वह कर सकती थी किंतु यह सब नहीं करके मां ने अपने पुरखों को अपने ग्राम्य देवताओं को अपने वडिलोपार्जित विद्या यदि जिसके भीतर में विद्या है जिस व्यक्ति में उसके भीतर में साथ-साथ में विनय भी है तो विनय और विद्या का जो संयोग होता है तभी उस आदमी की सही सही शोभा बढ़ती है मां का एक बड़ा ही फेमस सेंटेंस है हाथी र दांत सोना दिए गड़ा मोड़ा अर्थात कि हाथी का दांत जिसको कहते हैं आइवरी आईवरी बहुत ही वैल्युएबल होता है और आजकल तो यह सब आइवरी वगैरह बेन लग चुका है क्योंकि आईवरी अर्थात कि हाथी के दांत को काटने के लिए पहले तो लोग बहुत सारे हाथियों का शिकार करते थे तो अभी तो हाथियों के शिकार पर बैन लग गया है आइवरी के सेल पर भी बहुत सारा रिस्ट्रिक्शन है तो उस समय इतना नहीं था इसलिए उस समय के हिसाब से माने उस हाथी के दांत का या तो फिर आईवरी का उदाहरण दिया है उस मैंने हाथी का दांत तो है वैसे ही बहुत मूल्यवान और उसके ऊपर में मान लीजिए सोने का वरख लगाया हो यानी कि एक साधु जिसमें वह साधु तो है ही है किंतु साथ-साथ में विद्वता भी है तो यह साधु के जो गुण है त्याग और एकाग्रता और शरणागति उसके साथ में यदि विद्वत्ता का संयम हो संयोग हो तो उस साधु का जो गुण है वो कितने बढ़ जाएंगे अपने संग की दृष्टि से मां की दृष्टि से यहां पर वैसा ही एक संगम मां के जीवन में गंभीरानंद जी महाराज हमको दिखाते हैं कि किस तरह से साक्षात जगत जननी भगवती होने के बावजूद मां के भीतर में वड़ के प्रति उनके माताज के प्रति गांव के देवताओं के प्रति गांव की प्रथाओं के प्रति कितनी श्रद्धा थी उन्होंने इस गांव की प्रथाओं को तोड़ कर के नई प्रथाओं का गठन करने की के लिए जन्म नहीं लिया पुरानी प्रथाओं को की ही उसके भीतर में जो सार था वह सार हमको दिखा दिया है मां सिंहवाहिनी के सामने धरना देना और धरना देने से औषध प्राप्त होना दवाई प्राप्त होना इसके भीतर में से हम क्या सीखेंगे क्या हम यह सीखेंगे कि बीमार होने से हम लोग भी इस तरह से धरना देंगे वो एक सीख हो सकती है आजकल तो ऐसा कोई करेगा नहीं क्योंकि आज आजकल तो मॉडर्न मेडिसिन सहज प्राप्य है किंतु हमको इस घटना से क्या सीख लेना है कि जीवन की जो संग्राम की घड़ियां है जीवन में जो मुकाबले हैं जो चैलेंस से उसका सामना ईश्वर को समर्पित होकर के करना है यह समर्पण का भाव हमको इस घटना से लेना है नहीं कि यह कि ईश्वर के पास में हम ऐसी कोई चीज मांगे और इस बात का भी हमने डिस्कस किया था कि स्वामी जी का जो था कि स्वामी जी जाकर के मां काली के पास गए और बोल दिया कि ज्ञान दो भक्ति दो वैराग्य दो यह नहीं कि रोटी दो कपड़ा दो और मकान दो तो मां ने फिर किस तरह से अपने खुद के स्वास्थ्य के लिए दवाई मांगी मुझे नहीं लगता कि मां ने एगजैक्टली ऐसा कहा हो इस बात का भी हमने एनालिसिस किया था मुझे नहीं लगता कि मां ने दवाई ए सच मांगी हो मां ने सिर्फ यह कहा होगा कि उनके पति देव यानी कि श्री श्री रामकृष्णा और उनकी मां श्यामा सुंदरी देवी उनके ऊपर में मैं भार स्वरूप होकर के ना रहूं मैं उनके लिए उनकी मदद करने की बजह उनके लिए समस्या ना हो जाऊं मैं उनकी सेवा करने के लिए आई हूं नहीं कि वह मेरी सेवा करें यह मां ने सिंहवाहिनी के पास में मांगा होगा यह मेरा एक अनुमान तो अभी थोड़ा सा आगे देखते हैं स्वामीर अवस्था खन ल ना होले ओ स्वामी अर्थात की श्री राम कृष्ण देव मां के पति मां के पति की अवस्था उस समय असल यानी कि बहुत खराब नहीं होने के भी तिनी निजर दैहिक स्वच्छंद जन्नो तहर निकट अर्था दी याचना करिया तहा के विपत करे नाई स्वामी की आर्थिक अवस्था था बहुत खराब नहीं थी ठाकुर यदि चाहते तो मां के लिए जो चाहते वह बना लेते और ठाकुर ने किया भी है ठाकुर ने मां को पूछा था रात को कितनी रोटी खाती हो फिर जब मां ने बड़े ही संकोच पूर्वक उत्तर दिया तब उसके हिसाब से कैलकुलेशन करके उतना रुपया उन्होंने ठाकुर ने बलराम बसु की बलराम बसु को दे दिया था उनके सामने जमा रखा दिया था और बलराम बसु वही रुपया अपनी जमींदारी में लगा कर के उसमें से जो व्याज आता था प्रति माह मां को देते थे जिससे कि मां का खाने का तो एटलीस्ट गुजरान हो जाए ठाकुर के बाद में ठाकुर के चले जाने के बाद में मां को एटलीस्ट भूखा ना रहना पड़े और घर तो था ही ठाकुर ने कहा था मां को कि कामर पुकुर में अपना घर कभी मत छोड़ना मेदर परम ब पर भातो भालो किंतु पर घेरो भारो ना अर्थात कि मेय मेय अर्थात कि स्त्री लोग स्त्री लोग जदिया कि अन्न अन्न जदिया तो ठीक है उसमें कोई बहुत बड़ा समस्या असुविधा नहीं है किंतु असहाय होकर के किसी के घर में रहने को जाए तो वह बड़ा ही खराब बात है उससे बड़ी समस्या का वह उद्भव हो सकता है इसीलिए ठाकुर ने मां को कहा था कि कामर पुकुर में अपना घर रखना और बलराम बाबू को देकर के 00 ना कि इतना कुछ देकर के मां के लिए प्रति माह वो इतना तो मिल जाए कि जिससे खाने का जुगाड़ हो जाए और फिर इतना ही नहीं वह हृदय को बोल कर के मां के लिए वह सोने की चूड़ियां भी बना ली थी तो देखिए कि ठाकुर ने मां का तो पूरा बंदोबस्त किया था कर सकते थे ठाकुर ने यहां तक हृदय को कहा था कि अरे हृदय मैं चाहूं तो तुम्हारे पूरे कमार पुकुर को सोने से मढ कर के जा सकता हूं किंतु मुझे पता है कि ऐसा करने से कमार पुकुर को कोई लाभ नहीं होने वाला है और किसी को कोई लाभ नहीं होने वाला है क्यों क्योंकि जीवन में हमको जो कुछ भी प्राप्त करना है या चाहे धन वैभव हो चाहे मान सम्मान हो न कि चाहे आध्यात्मिकता हो वह सब कुछ हमको अपने बलबूते पे ही प्राप्त करना होगा यदि किसी की सहाय से हम कुछ प्राप्त करेंगे तो ज्यादा दिन टिकेगा नहीं यह बात जितनी धन वैभव के लिए सत्य है मथुर बाबू का ही उदाहरण मथुर बाबू के पास में जो संपत्ति थी वह तो रास मणि की थी और जब मथुर बाबू की पत्नी का शारीरिक समस्या प्रारंभ हो गई बीमारी प्रारंभ हो गई तब मथुर बाबू बड़े टेंशन में आ गए कि उनकी पत्नी की मृत्यु होगी तो रानी रास मणि की संपत्ति के ऊपर में उनका अधिकार है वह चला जाएगा एकदम दौड़ते दौड़ते ठाकुर के पास आए थे कहा पैसा चला जाएगा ना उसकी चिंता नहीं है किंतु आपकी सेवा से वंचित हो जाऊंगा उसकी चिंता है तो देखिए कि दूसरों की संपत्ति पर इस तरह से पा लेने से ऐसा होता है कभी भी जा सकती है वो कल्पतरु उद्दीन वर्ल्ड फेमस कल्पतरु उद्दीन ठाकुर सबको स्पर्श करके चैतन्य हो करके आशीर्वाद दे रहे हैं इसके बाद में ठाकुर की महास किंतु उस समय सभी जितने भी गृहस्थ शिष्य हैं सब ठाकुर के पास में यह आशीर्वाद मा रहे हैं किंतु त्यागी शिष्य है कोई भी उस समय वहां पर नहीं आया और जब ठाकुर की महासमाधि हुई उस समय दो विभाग हो गए हालांकि यह सब ऊपर ऊपर से होता है बहुत ज्यादा डीप इसमें रीड नहीं करना होता है किंतु फिर भी ऊपर ऊपर से तो दो डिवीजन हुए थे रामचंद्र दत्त कहता है कि ईश्वर अवतार वरिष्ठा ने स्वयं हमको स्पर्श किया है अभी साधना किस चीज के लिए ऑन दी अदर हैंड नर ने सभी त्यागी लड़कों को इकट्ठा करके के मठ की स्थापना की जहां पर दिन रात तपस्या जप ध्यान शास्त्र चर्चा हंसी मजाक त्याग प्रचंड त्याग प्रचंड सेवा का एक अखंड यज्ञ उन्होंने प्रज्वलित किया था वराह नगर मठ में और किसी ने जब राजा महाराज को पूछा कि ठाकुर ने तो आपको सब कुछ दे दिया है उसके बाद में इतनी तपस्या क्यों तो महाराज ने उत्तर दिया ए शब निजे पर निवार जन्नो यह सब कुछ अपना कर लेने के लिए ठाकुर ने तो दिया है किंतु साथ-साथ में ठाकुर ने ही कहा है इतना ही जब ध्यान तपस्या करना जितना मेरे रहते रहते करते हो तो यहां पर मां यदि चाहती तो अपने स्वामी के पास से श्री श्री ठाकुर के पास में बहुत कुछ मांग सकती थी किंतु निजर दैहिक स्वच्छंद देर जन्नो तहर निकट अर्था दि याचना कोरिया तहा के तो कोरे नाई अपने खुद के दैहिक स्वच्छंद के लिए दैहिक सुख उपभोग के लिए कुछ भी मांग करके माने ठाकुर को कभी भी परेशान नहीं किया किंबा मनः पीड़ा देनाई या तो फिर झगड़ा नहीं किया मास्टर महाशय ठाकुर को जाकर के कहते हैं कि मेरी स्त्री ऐसा कहती है कि आप मेरी देखभाल नहीं करते और यदि आप मेरी देखभाल क्यों नहीं करते आप नहीं करेंगे तो मैं आत्महत्या करूंगी तो यह बात मने मास्ट महाशय उस समय इतने टेंशन में थे यह नरेन वगैरह सब कुछ हंसी मजाक कर रहे थे तो ये लोग एकदम शांत हो गए अरे बाप रे इतना सीरियस मामला है क्या करेंगे इसके बाद में किंतु ठाकुर ने कहा कि देखो कि जो स्त्री ईश्वर पथ में बाधा दे उस स्त्री का त्याग करना चाहिए इतने गंभीरता पूर्वक कहा कि कोई कुछ बोल नहीं पा रहा है मास्टर महाशय खुद बड़े टेंशन में आ गए कि अरे यदि ऐसी स्त्री है अविद्या स्त्री जो कि उनके ईश्वर प्राप्ति के रास्ते में सहायता नहीं करेगी तो मेरा क्या होगा और यदि स्त्री आत्महत्या करेगी तो उस समय के कायदे कानून तो पता नहीं आज यदि ऐसा होगा तो सीधा जेल में जाना है यह सब तो बड़ा टेंशन वाला मामला है वो मास्टर महाशय बड़े टेंशन में बैठे थे खड़े थे उसी समय एका एक ठाकुर ने आकर के क्या कहा कि यदि आपका ईश्वर के ऊपर में सही सही विश्वास है तो सब आपके वश में आ जाएंगे दुष्ट लोग राजा और स्त्री सब लोग जनरली हमको परेशान कौन करता है तो ऐसे ही दुष्ट लोग परेशान करेंगे जिनके पास पैसा लिया है अभी वह उधार चुपता करने के लिए बार-बार हमारे घर आ रहे हैं ऐसे कुछ लोग होंगे झगड़ा करने वाले राजा अर्थात जो शासन करता है वे लोग परेशान करेंगे और घर में स्त्री परेशान करेगी तो ठाकुर कहते हैं यदि ईश्वर के ऊपर में जिसकी सही मति और गति है यह तीनों उसके वश में हो जाएंगे तब कहीं जाकर के मास्टर महाशय ने चैन की सांस ली वो जद आत्महत्या करते चा करूक आमी ताते की कोरेने वो वो जद आत्महत्या करनी चाहती है तो करे मैं उसमें क्या कर सकता हूं तो देखिए कि क्या होता है संसार में और रिवर्स भी इतना ही ट्रू है मीराबाई का उदाहरण देख लीजिए कि मीराबाई की इच्छा थी कि अपने उन्होंने तो सोचा था कि उन्होंने भगवान कृष्ण के साथ में विवाह किया है तो अभी जिस राजा के साथ में विवाह हुआ है वह तो सब समय डिमांड करता रहेगा देह सुख की वगैरह वो तो डिमांड करता रहेगा उसके भीतर में मीराबाई रही है इतना अत्याचार सहन करके यानी कि यह तो दोनों ओर से है और ठाकुर का एक सुंदर एक कहानी है ना कि ठाकुर बोलते हैं कि ठाकुर की कल्पना भी कैसी है देखिए कि आइडियल लाइफ हम सभी लोग सोचते हैं ना कि आइडियल लाइफ कैसा होना चाहिए मैं यदि सोचता हूं कि मेरे लिए आइडियल लाइफ क्या होनी चाहिए तो हिमालय में एक छोटी सी कुटीर है वो पूरी किताबों से भरी हुई है एक लड़का है वोह दिन रात तीन-चार बार मेरे लिए चाय बना देता है और बस मैं वहां पे लॉन्ग वॉक करूंगा दिन अर्ली मॉर्निंग और लेट इवनिंग को और दिन का पूरा टाइम या तो मैं पढ़ा पढ़ने में बताऊंगा या तो फिर लिखने में बताऊंगा और चाय पीता रहूंगा ये ये अपना सबका एक-एक होता है ना कल्पना कि व्हाट विल बी द आइडियल लाइफ फॉर मी तो ठाकुर ने भी ऐसी कल्पना की है मेरे लिए आइडियल लाइफ क्या होगी एक बाल विधवा होगी जिसके लंबे केश होंगे जिसके पास में एक बूढ़ी औरत रहती होगी उनकी सेवा करने के लिए छोटा-मोटा काम करने के लिए वहां पे छोटी कुटिया के सामने छोटे से गांव में छोटी कुटिया उसके सामने एक छोटा सा बागान जैसा होगा जिसमें यह सब्जी वगैरह उगा करके एक दो-तीन गाय होंगी जिसका दूध निकाल करके वह अपना जीवन गुजरा करेंगे और यह इतना जब समाप्त हो जाएगा तब अपने कमरे में जाकर के छुपके छुपके भगवान कृष्ण के लिए रोएंगे और तब भगवान कृष्ण प्रसन्न होकर के उनको आकर के दर्शन देंगे तो यह ठाकुर का सपना था तो देखिए कि जद विद्या का संसार होता है जो हम लोग सपना देखते हैं ना हमेशा ऐसा सोचते हैं विद्या का संसार हमको विध्या का संसार चाहिए ऐसा संसार चाहिए जिसमें सुख हो शं हो और साथ-साथ में ही जो साधक होगा वह चाहेगा कि उसका मन सब समय ईश्वर में पोया हुआ रहे और जो भी यह मान लीजिए सॉफ्टवेयर इंजीनियर होगा वह सोचेगा कि वो एक के बाद एक नई नई पप बनाता रहे जो साइंटिस्ट होगा वह सोचेगा जैसे न्यूटन है न्यूटन वहां पर वह लेक्चरर ना कि कहीं पर था वो यूनिवर्सिटी में मोस्ट प्रोबेबली ऑक्सफर्ड में ही था प्रोफेसर था तो उसका वही था कि दिन भर अपने कमरे में रहेगा और कुछ ना कुछ इनोवेशन कुछ ना कुछ डिस्कवरी करता रहेगा तो उस समय ऐसा हुआ कि एक बड़ा ही डिफिकल्ट मैथमेटिक्स का प्रूफ था तो वह प्रूफ लेकर के उसके मित्र एक दिन शाम को उनको मिलने के लिए आया न्यूटन को मिलने के लिए बोला कि यह बड़ा डिफिकल्ट अ ये पजल है ये कोयड़ा है मैथमेटिक्स का जिसको कि कोई सॉल्व नहीं कर सकता पता नहीं देखो तुम कुछ कर सकते हो कि नहीं तो न्यूटन ने कहा अच्छा ठीक है रखो इसको टेबल पे वो रख कर के वो चला गया रात भर बैठ कर के न्यूटन ने उसको सॉल्व भी कर दिया और एनोनिमस पोस्ट भी कर दिया तो कि देखो कि यह सॉल्व हो गया किंतु अपना नाम नहीं लिखा है न्यूटन को यह सब प्रसिद्धि वगैरह अच्छी नहीं लगती थी कि एनोनिमस पोस्ट किया है कि जिसको यह मिला इसका लेटर वो आकर के न्यूटन को क्या बोलता है पता है आई कैन रिकॉग्नाइज द लायन बाय इट्स प्रिंट ऑफ इट्स पो अर्थात की शेर का पंजा जो होता है उसकी जो प्रिंट होती है छाप होती है उस उसके ऊपर में से मैं शेर को पहचान सकता हूं अर्थात कि न्यूटन की जो बुद्धि मेदा शक्ति इतनी तीव्र थी कि उसने जो प्रूफ दिया वो प्रूफ न्यूटन के लेवल का व्यक्ति ही दे सकता था और वह प्रूफ देख कर के समझ गया कि यह यदि जिस शेर का पंजा है वह शेर यहीं पर है यही यही न्यूटन ही है देखिए कि हम सबका इस तरह से एक आइडियलिस्ट व्यू रहता है जो कि आदर्श को लेकर जीते हैं चाहे अध्यात्म के क्षेत्र में हो ना कि विज्ञान के क्षेत्र में हो ना कि टेक के फील्ड में हो ना कि यह ये कला म्यूजिक है या तो फिर स्पोर्ट जैसे कि यह क्रिकेट के यह सचिन तेंडुलकर वगैरह यह सभी लोग क्या चाहते हैं कि उन्होंने जिस ऑब्जेक्ट के लिए अपने जीवन को डेडिकेट किया है उसी में उनका ज्यादा से ज्यादा समय बीते विथ लीस्ट अमाउंट ऑफ डिस्ट्रक्शन तो देखिए कि यहां पर भी मां यदि चाहती तो ठाकुर के लिए कितनी समस्या का सृजन कर सकती थी किंतु मां ने ऐसा कभी नहीं का किया ना ही ठाकुर के पास में पैसे मांगे ना ही ठाकुर को और कुछ परेशान किया कि मुझे यह चाहिए वो चाहिए वो ठाकुर डरते भी थे कभी-कभी कि मां ऐसा कर देगी तो मेरा क्या होगा वो पहली बार जब मां आई थी तो ठाकुर ने पूछ ही लिया था कि क्या तुम मुझे संसार में खींच लेने के लिए आए हो तो मां ने तो स्पष्ट कहा था कि नहीं ईश्वर के रास्ते में आपको सहाय करने के लिए आई हूं किंतु फिर भी वो जब बालक वत हो जाते हैं ना ठाकुर तो बालक वत हो जाते थे नरेंद्र जोक भी कहता था वो एकदम सीरियसली ले लेते थे वो चातक पक्षी तो एक ठाकुर ने कहा देखो यह चातक पक्षी है तो नर ने कहा अरे नहीं यह चातक पक्षी कहां है ये तो चमगादड़ है तो ठाकुर बेचारे बड़े टेंशन में आ गए रोते-रोते मां के पास में गए मां अर्थात की मां काली मंदिर में मां के पास में गए रोते-रोते कहा मां तो फिर ये मैं चमगादड़ को यदि मैं चातक पक्षी समझता हूं तो मेरा तो इसका बात का तो तो ये अर्थ हुआ कि तुमने मुझे जो कुछ भी दिखाया बताया समझाया क्या सब कुछ गलत हो गया तब मां ने दर्शन देकर के कहा कि अरे वो तो बच्चा है वो क्या समझेगा व इसकी बात लेकर के इतना टेंशन क्यों करते हो तो ठाकुर फिर बड़े नाराज होकर के नरेंद्र के पास आए जा साला तुर्क दार सुन वोना साला मैं तुम्हारी बात सुनूंगा नहीं अभी से तो ठाकुर तो बालक स्वभाव थे वो टेंशन में आ जाते थे कभी-कभी तो एक बार ऐसा हुआ कि ठाकुर ने देख लिया कि वो जो घाट है गंगा का घाट वहां पे तो सब स्त्रियां आती है वो कपड़े धोने के लिए वगैरह करने के लिए तो दुनिया भर की बातें करेगी तो पता नहीं उनके पास में व उनकी कौन सी बात ठाकुर ने सुन ली ठाकुर टेंशन मने बड़े ही चिंतित होकर के नौबत में आए जहां पे मां बैठी थी व ठाकुर ने कहा कि देखो यह सब गंगा के घाट पे चांदनी के घाट पे यह सब स्त्रियां कपड़े धोने के लिए आती है और आकर के जो सब बातें करती है कि इसका पति जो है वो इसकी संभाल नहीं रखता ये संसार नहीं करता और यह संसार इसलिए नहीं करते क्योंकि उनका दिमाग में कोई डिफेक्ट है ब्रेन में कुछ प्रॉब्लम है या तो शारीरिक कुछ प्रॉब्लम है उसको तो यानी कि मां को मां शारदा देवी यदि ठाकुर के लिए कोई औषध का प्रयोग करें कोई अच्छे से कविराज को पूछ करके चुपके चुपके ठाकुर को कोई दवाई दिखा दवाई खिला दे तो उनका यह जो फिजिकल प्रॉब्लम ना कि मेंटल प्रॉब्लम जो भी होगा दूर हो जाएगा और बाकी सब पतियों की तरह अपनी पत्नी के साथ में वह भी संसार करेंगे तो ठाकुर कहते हैं कि देखो यह सब औरतें तो तुमको ऐसी सब सलाह देगी कि किसी के पास में से औषध लाकर के दवाई लाकर के मुझे छुपके छुपके खिलाने की तुम किंतु ऐसी सब बात मत करना ऐसा सब कुछ मत करना तुम इस तरह का कोई भी दवाई का प्रयोग मेरे ऊपर में मत करना मेरे पास में जो कुछ भी है सब कुछ है जो कि एक आदर्श पति के पास में होना चाहिए सब कुछ है ठाकुर ने मुझे श्वर ने मुझे सब कुछ दिया है फिजिकल फिटनेस भी दी है मेंटल फिटनेस भी दी है वही बात है कि मैं उस सबका इस्तेमाल करता हूं ईश्वर को प्राप्त करने के लिए नहीं कि संसार सुख एंजॉय करने के लिए इसलिए तुम मुझे ऐसी कोई दवाई वगैरह छुपके छुपके मत खिलाना ठाकुर को भी यह सब टेंशन हो जाता था और देखिए ऐसा होता भी था माने ठाकुर जो कह रहे हैं कोई हवाहवा में का एक शिष्य था तो अभी ठाकुर के पास आता था तो उसने ठीक कर लिया कि मैं संसार नहीं करूंगा अभी उसकी पत्नी बड़ी ही नाराज हो गई बोले कि शादी क्यों की यदि संसार नहीं करना है तो बच्चे नहीं होंगे तो संसार का क्या अर्थ है तो उसकी पत्नी ने ऐसे ही छुपके छुपके उसको कोई गोली कोई दवाई खिला दी थी और दवाई जो खिला दी उसका असर उसका एक डेंजरस असर हरीश के ऊपर में ऐसा हुआ कि वह पागल हो गया और पागल होकर के कामर पुकुर गया था और कामर पुकुर में मां के पीछे दौड़ने लगा मां भी बेचारी अपनी रक्षा करने के लिए वो कहीं वो क्या कुछ था उसके चारों ओर दौड़ने लगी किंतु फिर कितना दौड़ेगी बेचारी वो थक गई देखा कि हरिश तो पीछा ही नहीं छोड़ रहा तब मां कहती है कि निजर स्वरूप टा ऐसे पढ लो अर्थात कि मेरा असली स्वरूप है वो प्रकट हो गया उसको धक्का मार कर के उसको गिरा दिया उसकी छाती पर पैर रख के उसकी जीभ बाहर निकाल कर के जोर-जोर से उसको झापड़ मारने लगी तब कहीं जाकर के ठीक हुआ और जो सही स्वरूप अर्थात की वो बगला स्वरूप यानी दश महाविद्या में से जो बगला स्वरूप है वो स्वरूप आ गया तो देखिए कि यह ठाकुर का हवाहवा में स्पेक्युलेटिव में य सब बातें होती थी पति जद संसार नहीं करता है तो छुपके छुपके उसको ऐसी कोई दवाई दे दो जिससे कि उसको संसार करने की इच्छा उसके मन में जागृत हो जाए तो ठाकुर इसी बात से टेंशन लेकर के मां के पास में आए थे तो मां ने तो निश्चय ठाकुर को आश्वासन दिया कि मां का ऐसा कोई भी इरादा नहीं है कि ठाकुर को संसार के पथ में खींचने के लिए आए तो गंभीरानंद जी महाराज इसीलिए यहां पर कहते हैं कि ठाकुर की ना ही आर्थिक अवस्था इतनी खराब थी ना ही शारीरिक अवस्था इतनी खराब थी किंतु फिर भी मां ने कभी भी धन दौलत प्रतिष्ठा संसार के लिए ठक को परेशान कभी नहीं किया ठाकुर के साथ में झगड़ा कभी नहीं किया बरम पिा लय दारिद्रय मध्य मुख बुजिया रोग यंत्रणा भगिया छन एवं स्थल विशेष सुधु देवता रही निकट आकृति जाना इया छ ऐसी सब मांग नहीं करके ऐसे सब झगड़ा वगैरा नहीं करके माने क्या किया है में जो दारिद्र्य था वहां पर जाकर के दारिद्र्य में रह कर के ही चुपचाप मुंह बंद करके नीरवता पूर्वक जितना भी रोग यंत्रणा होता था शरीर में सब कुछ भुगत लिया है और यदि वह सहन नहीं होता सहन शक्तियों की सीमा को पार कर जाता है रोग और यंत्रणा तब कहीं जाकर के सिर्फ ईश्वर के पास में ही विनती की है ईश्वर को ही प्रार्थना की और किसी को जाकर परेशान कभी नहीं किया जेखाने ही प्रकार शरणागति एवं श्रीमती श्यामा सुंदरी देवीर न्याय देव द्वि च भक्ति मती माता जे गृहे गृहिणी शेखाने देवोता आविर्भाव अवश्यं भावी जहां पर इस तरह की शरणागति है जहां पर श्यामा सुंदरी देवी जैसी गृह कर्त्री घर की मालकिन जो घर की स्वामिनी है जो कि देव द्वीज परायण है देव अर्थात की देवता द्वीज अर्थात कि ब्राह्मण देवताओं की और ब्राह्मण की प्रति इतनी जिनकी श्रद्धा है ऐसी श्यामा सुंदरी देवी जहां पे इन दोनों का संयोग होगा जहां पर इन दोनों का मिलन होगा मां की तरह ईश्वर के ऊपर में संपूर्ण शरणागत श्यामा सुंदरी देवी की तरह ब्राह्मण के ऊपर में और भगवान के ऊपर में श्रद्धा और आस्था यह संयोग यह जो मिलन है जिस घर में होगा उस घर में देवता का आविर्भाव ना हो इस बात में आश्चर्य होगा देवता का आविर्भाव होगा तो कोई आश्चर्य की बात नहीं है देवता का आविर्भाव होने ही वाला है देखिए वह जो मां की जो कहानी है कि मां किस तरह से ब्राह्मण इन लोगों को इतना श्रद्धा करती है और मैंने इस तरह के झूठ मुठ के ब्राह्मण झूठ मुट के तो नहीं कहेंगे किंतु जो दुष्ट होते हैं ऐसे दुष्ट ब्राह्मण के प्रति भी बिकॉज के वह जन्म से ब्राह्मण है मां की श्रद्धा कितनी है यह हमने उदाहरण देखे हैं तो वो जो संस्कार है मां के भीतर में कहां से आया तो यहां पर गंभीरानंद जी महाराज लिखते हैं कि श्यामा सुंदरी देवी के भीतर में ही देव और द्वीज के प्रति श्रद्धा थी श्यामा सुंदरी देवी के भीतर में से ही यह संस्कार मां के भीतर में आया है और यह अपने वड़ी लों को देखिए कि इस तरह का श्रद्धा और सम्मान देना यह ठाकुर के भीतर में भी तो कितना था अपने बड़े भाई रामकुमार रामेश्वर इनके प्रति ठाकुर की श्रद्धा यह हलधार वगैरा हलधार कभी-कभी क्या बोलता था कि वो हलधार का था ना बड़ा सुंदर उसका है कि वो कभी-कभी ठाकुर से प्रभावित होकर के हलधार बोलता था कि देखो अभी मैंने तुमको समझ लिया है अभी मुझे पता चल गया है कि तुम ही अवतार हो वही सनातन पुरुषोत्तम भगवान राम फिर से देह धारण करके पृथ्वी पर आए हो मैं तुम अपने को जितना छुपाओ छुपा नहीं सकते मुझे मैं समझ गया हूं तुम्हारा सही स्वरूप तो ठाकुर के अच्छा अच्छी बात है देखो देखते हैं क्या है किंतु अधारी के साथ में प्रॉब्लम क्या था कि वो अध्यात्म रामायण पढ़ता था ज्ञान के ग्रंथ ज्ञान में तो क्या ज्ञान वेदांत में क्या लिखा है कि हमारे भीतर में जो आत्मन है वही ब्रह्मण है उसमें कोई अवतार स्पेशल आए ऐसी बात कहां पर है कोई जरूरत नहीं है अवतार के भीतर में जो ब्रह्मण है वो भी मेरे भीतर में है जद ये गधे के भीतर में जो ब्रह्मण है वो भी माने सभी के भीतर में वही ब्रह्मण है वही आत्मन है तो अवतार क्या और यह पेड़ ये पशु पक्षी और ये इंसान क्या क्या डिफरेंस है तो वो अध्यात्म रामायण ये सब मने वो ज्ञान के ग्रंथ पढ़ता था ना तो जब वो क्या कहता बोला जिसको बोलते हैं वो स्नफ गुजराती में कहते हैं छीनी मुझे पता नहीं हिंदी शब्द क्या है या तो वो नाक में वो स्नफ डाल कर के वो पैर प पैर चढ़ा कर के वो अध्यात्म रामायण का पाठ करने का शुरू करता था उस समय फिर ठाकुर वहां पर जाकर के खड़े हो जाएंगे कि अच्छा देखो तुम्हारे जिस ग्रंथ में जिस सनातन पुरुष परब्रह्म के बारे में जो लिखा है वो मैं ही हूं तो यह बात सुनकर के अभी तो उसका वो मन परिवर्तन हो गया ना का तो बोलेगा जाजा गंड मूर्ख तुम कहां से वो अवतार होने वाले हो अवतार कहां और यह परंपरा परब्रह्म कहां और तुम कहां जाओ जाओ यहां से तो ठाकुर बड़े हंसते हंसते चले जाते थे कभी-कभी ठाकुर पर इतना विश्वास कभी-कभी वोह जब यह ज्ञान के ग्रंथ पढ़ेगा तो ठाकुर को मूर्ख बता देगा एक बार क्या हुआ था ठाकुर दिगंबर होकर के एक पेड़ पर चढ़ गए थे और वहां से पेशाब कर रहे थे तो इसको ये जब कल्पना करेंगे इस दृश्य की तो हमको तो कितना हंसी आएगा और नेचुरली वो हलधार कहता है कि इसके सर के ऊपर में ब्रह्मराक्षस सवार हो गया है इसलिए ये सब नाटक करता है क्या उने किसी को भी संशय होगा ठाकुर जो जो कुछ करते थे वो ये सब देख कर के वो हृदय जाकर के देखा कि ठाकुर वो जो मां को भोग देने का जो पूरी वगैरह है वो बिल्ली को खिला देते हैं मां का जो बिस्तर है उसके ऊपर में खुद शहन कर लेते हैं और साथ-साथ में मां के साथ में वार्तालाप भी करते हैं पूछते हैं मां मैं क्या तुम्हारे साथ में सोऊं अच्छा तुम यह कह रहे हो कि मैं तुम्हारे साथ में सोऊ अच्छा ठीक है मैं सोता हूं बोल कर के मां के बिस्तर पर सन भी कर लेते हैं ठाकुर की ये जो सब कार्यकलाप थे आज हम लोग इस बात को ठाकुर का य जो बालक भाव है उसको लेकर के थोड़ा सा हम लोगों को बड़ा ही अच्छा लगता है पढ़ने के लिए किंतु हम मुझे तो डाउट है कि यदि मैं अपनी नजर के सामने ठाकुर की यह सब लीला देखता तो ठाकुर पागल है पागल हो गए हैं यह बात में कहां तक स्वीकार करता मुझे डाउट लग रहा कि मैं ऐसा सोचता कि ठाकुर अवतार है व पहला विचार यही आता कि ठाकुर पागल हो गया है यह जो हलदी है ना कि यह बाकी जो थे जो लोग ठाकुर के बारे में इस तरह से कटो वाक्य किया कर कहा करते थे य वो जो खजान च कालीवाड़ा वो मथुर बाबू को लेटर लिखता है कि जो छोटू भट्टाचार्य जो महाशय अर्थात की ठाकुर वो पागल हो गए हैं ना कि वो सब क्याक सब कर रहे हैं व आप आक के देखिए तो मथुर बाबू बिना किसी को बताए हुए अब चुपचाप अकेले आकर के एक बार मंदिर में जाकर के देख रहे हैं तो हृदय ने खुद कहा है जब ठाकुर पूजा करते थे उस समय जैसे कि मां का स्वयं मां काली का आविर्भाव होता था वहां का वातावरण ऐसा हो जाता कि कोई वहां पर सहसा एकाएक चला जाता तो उसके हृदय में ऐसा भय का संचार होता वह डर जाता क्यों क्योंकि मां नहीं चाहती कि ठाकुर जब पूजा करें तो उनको कोई विक्षेप दे इसलिए वहां का वातावरण ऐसा हो जाता था तो नेचुरली मथुर बाबू तो सा साक थे एक तरह से वह तो ईश्वर प्र उनके श्रद्धावन थे तो जाकर के देखा तो सही में जो ठाकुर को पूजा करते देखा मां के प्रति ठाकुर की भक्ति देखी उससे वह इतने प्रभावित हो गए कि उन्होंने रास मणि को कहा कि एक सच्चा पुजारी हमको मिला है एक सच्चा साधक मिला है मां जाग्रता होने ही वाली है मां काली जिनकी प्राण प्रतिष्ठा पूजा विधि से तो की किंतु जब तक कोई साधक मां की आराधना नहीं करता तब तक मां जाग्रता कैसे होगी जैसे सिंहवाहिनी की आराधना जब माने की मां शारदा ने तब कहीं जाकर के देवी जाग्रता हो गई तो वह जो विधि पूर्वक विधि विधान पूर्वक प्रतिमा में प्राण संचार करना वह एक चीज है और साधक वहां पर जाकर के साधना करें और उस साधना से प्रसन्न होकर के यह विग्रह जागृत हो जाए और साधक को आशीर्वाद दे दर्शन दे तो एक दूसरी बात होती है जनरली भारत में ऐसा ही होता आ रहा है कि जब कोई साधक साधना करता है सिद्धि प्राप्त करता है आशीर्वाद दर्शन प्राप्त करता है तब कहीं जाकर के वह विग्रह की या तो फिर मंदिर की स्थापना करता है भारत के जितने भी पुरातन मंदिर है उन सबके पीछे आपको साधक और साधना की बड़ी ही सुंदर कहानियां पढ़ने को मिल जाएगी तो यह है हमारी मां कि कितना यह यह जो पूरा सेंटेंस है इसको मैंने अंडरलाइन करके रखा है कि जहां पर मां के जैसी शरणागति है जहां पर श्यामा सुंदरी देवी जैसी देव और द्वीज के ऊपर में श्रद्धा है ऐसे घर में भगवान का या तो फिर देवता का आविर्भाव अवश्यं भावी है माने होना ही होना है अत एव निष्क र कुटी रे ओ राज राजेश्वरी जगद धात्री देवीर पूजा ते मोन आश्चर्य जनक न यहां से एक नया टॉपिक महाराज जी प्रारंभ करते हैं क्या कहते हैं निस्किन चन जिसके घर में अर्थ नहीं है धन नहीं है ऐसे दरिद्र की कुटीर में भी राज राजेश्वरी जग धात्री देवी की पूजा आश्चर्यजनक बात नहीं है तो अभी जग धात्री पूजा का प्रसंग आएगा हमको तो वैसे सभी को पता है जगत धात्री पूजा में क्या हुआ था कैसे जयराम बाटी में जगत धात्री पूजा प्रारंभ हुई तो गंभीरानंद जी महाराज वही हमको वो पुरानी वही हमको सबको पता है ऐसी सुंदर कहानी बताएंगे किंतु वही है कि हम लोग जो कहानी आपस में कहते हैं किसी आर्टिकल में पढ़ते हैं और किसी के मुंह से सुनते हैं वो और वही कहानी वही फैक्ट वही तथ्य गंभीरानंद जी अपनी साहित्यिक भाषा में बताएंगे तो उसको पढ़ने का एक अलग ही आनंद जिसको कि हम कल आज ओम शांति शांति शांति हरि ओम तत्सत श्री राम कृष्णर्पण मस्तु