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Ma Sarada Life by Sw Gambhirananda ·

अवतरणिका : श्रीमाँ सारदा देवी : स्वामी गम्भीरानन्द लिखित : 7 Nov 2023

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ओम स्थापक यज धर्मस्य सर्व धर्म स्वरूपे अवतार वरिष्ठ राम कृष्णाय ते नम श्री मां शारदा देवी स्वामी गंभीरानंद जी द्वारा लिखित अवतरण का में ही इतना दिन चले गए हैं मैंने कल देखा कि 31 के आसपास क्लास हो गए हैं हमारे तो मुझे पता नहीं कि पूरी किताब कब कंप्लीट होगी किंतु मैंने देखा है ठाकुर महा स्वामी जी का जीवन और कार्यकलाप उनके लीला प्रसंग यह सब चीजों में आप जितना समय डाले उतना ही आपकी आध्यात्मिक साधना के लिए वह अनुकूल होगा यानी हम लोग कई बार सोचते हैं यह जो जप है ध्यान है ईश्वर को प्रार्थना है मंदिर में जाना है यह इन सबको हम जिस तरह से रियल साधना कहते हैं कभी-कभी ऐसा मुझे लगता है तो इतना ही रियल यह लीला प्रसंग यह जिस तरह से कल हमने यह शब्द पढ़ा था अमल धवल लीला विलास यह लीला विलास का हम जितना चिंतन करें उतना ही यह जब ध्यान के इक्विवेलेंट यह फल देगा इस तरह से मुझे लग रहा है तो कल हमने देखा श्री मां शारदा देवी जीवने आमरा मातृत्व आदि देव भावे पराकाष्ठा देखीते पाइबो श्री मां के जीवन में हम मातृत्व जैसे भावों की पराकाष्ठा देख सकते हैं एवं धर्म मार्गे परिपराइटिस दूसरे हाथ में मॉडर्निटी है जिस तरह से मां नबत में रहती थी वैसे ही यह इसरों की साइंटिस्ट महिलाएं यह दोनों माने ट्रेडिशनल दोनों का ही परिचय या तो फिर दोनों की परिपट्स संबंध हम देखेंगे कि मां के जीवन में पुत्री के रूप में बहन के रूप में वधु के रूप में गृहिणी के रूप में और मां के रूप में मां के जितने भी रूप है मां के जो भाव है नारी जन उचित संबंध अवस्था विशेष आदर्शों स्थापित होया छ ये जो सब नारी जन उचित संबंध है वह और अवस्था विशेष कोई भी पार्ट पर्टिकुलर सिचुएशन खड़ी होती है तो उसके लिए क्या आदर्श है वह मां के जीवन में देखेंगे जैसे कि ठाकुर ने मां को कहा था कि बलराम की पत्नी बीमार है कैसे भी करके जयराम कोलकाता जाओ और उसकी खबर लो क्योंकि क्या है कि यह संघ है भक्तों का इनका गठन भी तो ठाकुर करके गए हैं इनको भी तो स्नेह के एक सूत्र में ठाकुर बांध करके गए हैं तो कोई भी तरह की अवस्था होगी या किसी भी तरह का भाव या संबंध होगा इन दोनों का आदर्श उसका चरितार्थ मां के जीवन में आदर्श स्थापित होया छ आदर्श स्थापित हुआ है एवं तहर अमल धवल लीला विलास स्वतः ई मानव मन के आकर्षण पूर्वक चिर धय वस्तु रूपे विराजित रहिया छ इसी सब परिमित स्थिति से गुजर करके मां का जो परिशुद्ध निर्मल बालिका की तरह एक इनोसेंट नादान एक लीला विलास है वह किस तरह से हमारे सामने एक मूवी की तरह वह पसार हो रहा है मानव मन को आकर्षण कर रहा है चिर धय वस्तु रूपे विराजित होया छ हम लोग जिसका चिंतन करते हैं जितना जिसका ध्यान करते हैं आराधना करते हैं उसका चीर काल के लिए जदी मां के इस लीला प्रसंगों का इस लीला विलास की ध्यान करें या आराधना करें तो वो और दूसरा कि जदी मां दुर्गा का जैसे कि बेलूरमठ में मां दुर्गा की पूजा होती है आठ हाथ है वह जया विजया है गणेश कार्तिक है वहां पुजारी महाराज वो 108 वो दीप से पूजा करते हैं वह सब भी है उसका भी एक महात्म है किंतु वह सब चीजों के प्रति हमारा मन कितना आकर्षित होगा वह एक है और मां के जीवन के प्रति मन कितना आकर्षित होगा वो दूसरी चीज है जैसे कि मैं अपने अपने खुद की बात करूं तो गुजरात में तो दुर्गा पूजा का ऐसा कोई कल्चर नहीं है यदि देखने को मिलता मुझे तो इसमें कोई ऐसा नहीं है कि कोई बहुत बड़ी कोई बहुत बड़ी बात हो गई यहां पर तो जैसे गणेश पूजा है नवरात्रि है दीपावली है उत्तरायण है गुजरात के अपने उत्सव है तो उसके लिए मैं कोई दुर्गा पूजा देखने के लिए या तो दुर्गा के प्रति श्रद्धा सम्मान से आकर्षित होकर के मैं अपना घर छोड़ कर के कलकत्ता चला जाऊंगा ऐसा मुझे नहीं लगता कि कभी होने वाला था यह मां का जीवन है मां के जीवन के प्रसंग है जिससे कि आकर्षित होकर के एक्चुअली बेलूरमठ तो मैं गया था स्वामी जी को पढ़ कर के जैसे हमारे वृद्ध सन्यासी सब समय कहा करते थे कोई भी रामकृष्ण मिशन में जवाइन करने को आता है लड़का तो पहले तो स्वामी जी से आकर्षित होकर के स्वामी जी की ये अग्नि मंत्र सुन कर के उससे प्रभावित होकर के उठो जागो और देह प्राप्ति तक लगे रहो तो उठ कर के जाग कर के धय प्राप्ति करने के लिए रामकृष्ण मिशन में आते हैं इसके बाद में जब ठाकुर के एक के बाद एक साधना हों का वर्णन पढ़ते हैं ठाकुर की यह लीला प्रसंग में देखिए कि उनकी जो सिद्धियां है 12 साल उन्होंने तपस्या की तो निर्विकल्प समाधि प्राप्त की और निर्विकल्प समाधि में जाने के बाद में किस-किस तरह के उनके दर्शन हुए और उसके बाद में भी कथामृत में हम पढ़ेंगे कि बार-बार ठाकुर को भाव हो रहा है ठाकुर को दर्शन हो रहा है और ठाकुर के पास में चमत्कारिक पावर था हमको पता है हालांकि इसका बहुत ज्यादा कोई वर्णन हम नहीं पढ़ते हैं क्योंकि रामकृष्ण मिशन की य पॉलिसी नहीं है कि चमत्कारों को कोई बढ़ावा देना या उसको कोई प्रश्रय देना तो यह सब देख कर के हमारे मन में एक बार तो स्वामी जी का अग्नि मंत्र सुनकर के साधु होने के लिए आ गए तो फिर यहां पर आकर देखा कि ठाकुर की तरह चलो 12 साल तपस्या करते हैं निर्विकल्प समाधि प्राप्त हो जाएगी इसके बाद में जीवन मुक्त हो जाएंगे किंतु 12 साल के बाद में पता चलता है कि 12 साल में हमसे कुछ नहीं होने वाला है 1200 साल में भी शायद कुछ हो क्योंकि ठाकुर की साधना तपस्या करने की कैपेसिटी हमारी तपस्या साधना करने की कैपेसिटी से करोड़ों करोड़ों गुना ज्यादा है तो फिर एक बार तो आ गए एक बार तो हमने साधना का साधना की शुरुआत कर दी साधन भजन जप ध्यान प्रार्थना वगैरे की शुरुआत कर दी यह निष्काम शुभ कर्म लोक कल्याण के लिए जो करते हैं उसका एक बार हमको टेस्ट मिल गया तो फिर तो ऐसा नहीं है कि हम लोग संसार में वापस जाएंगे रहना तो यहां पर ही है अभी तो क्योंकि क्या है कि हृदय और मन का यहां पर राम कृष्ण संघ के साथ में श्री राम कृष्ण के साथ में संबंध बैठ गया है रिलेशनशिप बैठ गया है अभी यह छोड़ कर के कहां पर जाएंगे किंतु फिर किस चीज को लेकर के रहेंगे कर्म या तो सिर्फ साधना इनफ नहीं है यह बात मैंने खुद ने अपने जीवन में अनुभूत अनुभूति की है अनुभव की है क्योंकि एक समय था मैं भी मैं सोचता था कि पूरे समाज में रेवोल्यूशन ला देंगे इस तरह से स्कूल और हॉस्पिटल बनाएंगे कि भारत की जो हम लोग देखते हैं पढ़ते हैं न्यूज़पेपर में कि मोर देन 40 पर पीपल लीव ऑन सबसिस्टेंस लेवल अर्थात कि मुश्किल से एक दिन का खाना जुट पाए इतना उनका कमाई है और एक दिन भी जद उनकी काम बंद रहा जैसे कि पडेम है ना कि दुष्का है नकी फ्लड है कोई भी नेचरल डिजास्टर है पॉलिटिकल टर्मल है तो सीधा सधी खाना बंद हो जाता है 40 करोड़ 50 करोड़ लोग भारत के इस तरह की भयानक बदतर परिस्थिति में रहते हैं तो जब यहां पर आया था तो मैं सोचता था कि पूरे भारत में रेवोल्यूशन ला देंगे स्वामी जी ने खुद ने कहा है 100000 मेन एंड विमेन फायर विथ द जल ऑफ होलीनेस एंड स्टिल विद द न फोर्टिफाइंग ऑफ लायन यह जो सब स्वामी जी के जो शब्द थे वह सुन कर के मैंने सोचा था कि पूरे भारत में फैल जाएंगे स्कूल हॉस्पिटल ये एंटरप्रेन्योरशिप यह सेल्फ हेल्प ग्रुप ये वो क्या एंटरप्राइज यह सब बना देंगे इंडस्ट्रियल रेवोल्यूशन ला देंगे भारत को पूरे विश्व में नंबर वन बना देंगे किंतु यह 20 साल के बाद पता चला इसमें से कुछ भी नहीं होने वाला इसलिए नहीं कि यह करना उचित नहीं है या तो नहीं होना चाहिए इसलिए कि मेरी वो कैपेसिटी नहीं कि मैं इतना सब कुछ कर पाऊं मेरी कैपेसिटी इतनी है कि जितना मुझे काम यहां पे दिया गया है संघ में एक डिपार्टमेंट में बैठ कर के ऑनेस्टली विथ डेडिकेशन इस डिपार्टमेंट को चलाना है मेरी इतनी ही कैपेसिटी है तो चलो अभी स्वामी जी से तो काम नहीं बना तो ठाकुर के पास चले जाते हैं ठाकुर की बात सुनकर के पता चला कि 12 साल एकदम प्रचंड तपस्या करेंगे तो निर्विकल्प समाधि प्राप्त होगी तो ठीक है चलो भारत में रेवोल्यूशन नहीं ला सके तो निर्विकल्प समाधि प्राप्त करते हैं व 12 साल के बाद पता चला इतना भी कैपेसिटी नहीं है अपने में वो 1200 साल तक तपस्या करने से भी जद निर्विकल्प समाधि मिलेगी कि नहीं पता नहीं तो फिर क्या करेंगे आखिर में आना है मां के पास मां का जो भालोबासा मां का प्रेम मां का ये जो दिन प्रतिदिन की जो जीवन चर्या है ये है अल्टीमेटली हमारा आदर्श हम लोग कोई बहुत एक्स्ट्रा ऑर्डिनरी पर्सन नहीं है कर्म की या साधना की कोई प्रचंड शक्ति अपने हाथ में नहीं है ठाकुर और स्वामी जी जो करके गए हैं उसके म 01 पर भी यदि हम कर्मा और साधना के रूप में अपने जीवन में उसको अपना सके अपने जीवन में उसको प्रैक्टिकल कर सिखा सके तो भी वो बहुत बड़ी बात है 01 पर तो फिर हम किस चीज को लेकर के अपना बाकी का जीवन निकालेंगे तो वो है मां काल लाइफ मां का जीवन मां के प्रसंग मां भी इसी तरह शुरू शुरू में मैं जब मां को पढ़ता था तो मैंने सोचा था अरे स्वामी जी को पढ़ लिया स्वामी जी के इतने सब चमत्कार है चमत्कार माने वो मेधा शक्ति इनकी इतनी है उनकी फिलोसॉफिकल पावर इतना है ठाकुर के दर्शन ठाकुर की अनुभूतियां ठाकुर की वाणी का प्रभाव इतना है तो मां के पास तो क्या से क्या नहीं होगा इस तरह से सोच कर के मां को पढ़ने की शुरुआत की थी और शुरू शुरू में जब हिंदी में मैं पढ़ता था किताब है तो आई वास सो डिसपे एक दो पेज पढ़ कर के वो अरूपानंद जी की स्मृति कथा थी वो मां की बातें वो मायर कथा जो बंगाली में है उसका हिंदी ट्रांसलेशन तो अरूपानंद जी की प्रथम सुमति कथा है वो पढ़ कर के दो-तीन पेज पढ़ कर के ही मैंने रख दी किताब मैंने कहा अरे इसमें तो कुछ नहीं है मां के पास नहीं स्वामी जी और ठाकुर की तरह कोई ऐसी मेधा शक्ति है कि हमारे मन के जो उलझे हुए प्रश्न वगैरह है हमारे मन की ये जो समस्या है उसका कोई उत्तर दे पाए ना कि हमको कोई इस तरह का कोई विजन दे पाए कि हां इतनी तपस्या करो या इतना कर्म करो तो पूरे भारत में रिवोल्यूशन आ जाएगा या तो अपने जीवन में रिवोल्यूशन आ जाएगा ऐसा भी तो कुछ नहीं है बस वह सीधी साधी बैठी है बेचारी वहां पर जयराम बाटी में क्वाल पाड़ा में कलकाता में वहां उद्बोधन में और भक्त लोग आते हैं तो आशीर्वाद करती है अपने हाथों से खाना बना कर के खिलाती है और बस वोह इस तरह की बातें करती है तो मुझे लगा कि अरे मां के जीवन में ऐसा तो क्या है फिर जब मैंने बांगला पढ़ना शुरू किया और बांगला में बंगोली लैंग्वेज में मायर कथा जो किताब है मां के संस्मरण वो जब पढ़ा तब मुझे सही में भीतर में से इस तरह की एक शांति मिली एक तरह का एक ऐसा एक अनुभूति हुई कि अरे यदि हमारे से स्वामी जी की तरह कर्म ना हो पाए ठाकुर की तरह साधना और सिद्धि ना प्राप्त कर पाए और तो एटलीस्ट मां का तो जीवन है मां तो है कि डे टू डे लाइफ में आध्यात्मिकता किस तरह से मेंटेन करके चलना है मां को देखिए नहीं कोई भी तरह का आपको कोई इस तरह का कोई प्रवचन नहीं देती है नाही मां को बार-बार कोई समाधि हो जाती है वही खाना बनाती है वही भक्तों के साथ बात करती है वही पागल लोगों के साथ में पागली मामी राधू नलिनी माकू वो काली मामा वरदा मामा प्रसन्न मामा ऐसे लोगों के साथ में रहती है और फिर भी इनका मन किस तरह की आध्यात्मिक भाव से भरपूर रहता है तो यह जो है कि आखिर में स्वामी जी के नाम सुनकर के स्वामी जी की बातें सुन करर के यहां पर आए यहां पर आने के बाद में ठाकुर की तरह साधना करने का प्रयत्न किया और आखिर में मां के स्नेह पाश से बद्ध हो कर के हम यहां पर रह रहे हैं इसलिए यहां पर लिखा है कि मानव मन को आकर्षण करके चीर धय स्तु रूपे विराजित रहिया छ मानव मन के मानव के मन को आकर्षित करके हमारे लिए चीर धेय है इस तरह से वह हमारे हृदय में विराजित है आगे महाराज जी लिखते हैं इहा की भाबे रु क्वास अथवा वास्तव तार अफू इंगी तो महाराज जी लिखते हैं कि मां हमारे लिए चीर धय है यह क्या भाव का एक प्रब एक भाव के प्रवाह में आकर के हम ऐसा कह रहे हैं क्या यह वास्तविक है जैसे मैंने अपना खुद का एक्सपीरियंस कहा तो मैं क्या यहां पर आकर के एक हम तो चार दीवार में बंद रहते हैं समाज के साथ में हमारा कोई रिलेशन नहीं होता और हमारा तो एक इंट्रोवर्ट लाइफ होता है एक अंतर्मुखी जीवन होता है तो हमारा एक छोटा सा एक जगत हमारे जिसको इको चेंबर बोलते हैं इंग्लिश में हम लोग हमारे ही साथ में बात करके हमारे ही अनुभवों के आधार पर हम लोग अपने विचारों का गठन करते हैं अपने जीवन को बनाते हैं तो यह इको चेंबर में रह कर के मैं अपनी ही बात सुन कर के मैं क्या कोई मिसगाइड तो नहीं हो रहा हूं भाव का उच्छवास अर्थात की लागण हों का अतिरेक इमोशनल वल्नरेबल या तो फिर इमोशनल इमोशन के प्रवाह में आकर के बह जाना क्या इस तरह यह जो महाराज जी कह रहे हैं कि मां हमारे लिए चीर धय है तो क्या मां के प्रति प्रेम वो एक भाव में आकर के हम बह तो नहीं गए ना कि ये वास्तविक है क्या बात है किसको पता आमरा पाठक के ए जीवन अनुदा बनाते ई प्रश्ने पुनरुत्थान आह्वान करी महाराज जी लिखते हैं कि ठीक है यह प्रश्न आपने किया ये प्रश्न हमारे मन में होगा कि मां का जीवन यह हम उसकी प्रशंसा मां के प्रति श्रद्धा भक्ति जो प्रकट कर रहे हैं वह हमारे इमोशन का अतिरेक है लागण हों का अतिरेक है न कि ये वास्तविकता है तो महाराज जी कहते हैं इस पूरी किताब का पाठ करके जीवन का अनुदान करके आखिर में यह प्रश्न हम लोग पाठकों को फिर से करेंगे मैं कहूंगा कि पूरा जीवन पढ़ लो और फिर आखिर में यह प्रश्न फिर से होगा कि मां के प्रति श्रद्धा भक्ति है तो वह क्या आपकी लागण हों का अतिरेक है माने ओवर इमोशनल हो ओवर सेंटीमेंटल हो गए हैं ना कि यह वास्तविकता है तो मां के जीवन को अच्छे से स्टडी करें बाद में यह प्रश्न होगा किंतु आमा देर विश्वास किंतु महाराज कहते हैं कि हमारा विश्वास है तिनी स्वयं तत् पूर्वे तथ संधान पाया संदेह निर्म निरमुक्त हो बन पाठक जीवन का अनु दवन है अनु देय है वह समाप्त होने से पहले ही शुरुआत के कुछ समय बाद ही तथ संधान सत्य का संधान पाकर करके सत्य को पहचान करके संदेह निरमुक्त होई बेन संदेह मुक्त हो जाएगा यह पूरी किताब पढ़ कर के आखिर में यह प्रश्न का उत्तर देने की जरूरत नहीं पड़ेगी मां के जीवन के प्रसंग वह एक बार जैसे एक के बाद एक शुरू होंगे हमारा हृदय में से जो भी संदेह है वह वहीं पर अदृश्य हो जाएगा अभी एक बहुत ही इंपॉर्टेंट पॉइंट महाराज उपस्प्रिंग महाराज जी लिखते हैं गंभीरानंद जी महाराज तबे एखाने बोलिया राखा आवश्यक यहां पर यह कहने की आवश्यकता है आमरा जे चरित्रे आलोचना अग्रसर होते छी हम जिस चरित्र की आलोचना चिंतन मनन स्मरण करने के लिए आगे बढ़ रहे हैं उहा और कोई समानांतर आपको देखने को नहीं मिलेगा यह किसका चरित्र मां का चरित्र मां का चरित्र अनन्य साधारण है इसके समान कोई चरित्र आपको नहीं देखने को मिलने वाला है सतन उहा सार्थक तार मान ओ अन्य बद परिणाम हम जिस चरित्र की आलोचना कर रहे हैं वो यूनिक है जिससे कि इसका परिणाम क्या है इससे हमको क्या कंक्लूजन निकलता है कि यह चरित्र सफल है कि नहीं इसके जो मानदंड है उसके यह जो मेजरमेंट है वह अन्य जीवन चरित्र से अलग है और कोई जीवन चरित्र होगा तो हम उसको किस तरह से उसका सक्सेस या फेलियर निर्धारित करेंगे स्वामी जी ने विदेश में जाकर के इतने सुंदर भाषण दिए कि हजारों हजारों नर नारी स्वामी जी के शिष्य होकर के शिष्य हमारे भारतीय अर्थ में तो नहीं नहीं किंतु वहां के अमेरिकन अर्थ में फॉलोअर्स और एडमायब्रांड और दर्शन की सार्थकता भी इनको पता थी स्वामी जी कहते हैं कि ठाकुर यदि किसी के चरित्र का आकलन करते थे कहते थे कि यह आदमी इस तरह का है तो वह वही होगा बाद में जाकर के हमने उस व्यक्ति के जीवन में देखा है वह यदि बूढ़ा भी हो जाए तो ठाकुर ने जिस तरह से उसका असेसमेंट किया है उसी तरह उसका लाइफ चलता है तो ठाकुर के जो दर्शन थे उनकी अनुभूतियां थी सब सही सही था तो ठाकुर का जीवन सक्सेस है कि फेलियर है किस तरह से डिसाइड करेंगे उनकी समाधि उनके दर्शन और उनके शिष्यों को दिए गए हुए आशीर्वाद 1 जनवरी को उन्होंने सबको स्पर्श करके कहा तु मादर चैतन्य हो जिनको जिनको स्पर्श किया उनको उसी समय किसी ना किसी आध्यात्मिक अनुभूति हुई थी स्वामी जी का देखि कि इतने प्रवचन इतनी मेधा शक्ति कंप्लीट वर्ष पढ़कर लगेगा कि व क्या प्रचंड उनकी फिलोसॉफिकल अंडरस्टैंडिंग है तो वो जो जीवन चरित्र है उनके जो मेजरमेंट है सक्सेस और फेलियर के और मां का जो जीवन है उसकी जो सक्सेस और फेलियर फेलियर तो नहीं कहेंगे किंतु मां के जीवन का आप मेजरमेंट या तो अनुदान या किस तरह से मानदंड जिसको महाराज जी ने शब्द प्रयोग किया है वह अनन्य होगा वह एक यूनिक होगा क्योंकि मां का जीवन भी यूनिक है अनन्य साधारण सतन उहा सार्थक तार मान मां का जीवन यूनिक है इसी इसीलिए उसकी सार्थकता अर्थात की सक्सेस या तो फिर उसका क्या रिलेव उसका जो मान या तो मेजरमेंट है वह भी यूनिक होना चाहिए समसामयिक जगत ज अति मानव मूर्ति गुली अकस्मात स्फीति लाभ करिया समसामयिक जगत में हम देखते हैं कि कभी-कभी कोई व्यक्ति अचानक एका एक फेमस हो जाता है कीर्ति प्राप्त कर लेता है सडन उसका नाम यश चारों ओर फैल जाता है किछु काल विस्मय उत्पादनात इतिहास पृष्ठा होते चीर दिनर जन्नो बिलन होया जाए कुछ समय लोगों के हृदय में लोगों के मन में विस्मय का उत्पादन करेंगे और उसके बाद में हमेशा के लिए इतिहास के पन्नों में अदृश्य हो जाएंगे छुप जाएंगे आजकल हम इस तरह के कितने ही लोगों को देखते हैं यह स्पोर्ट्समैन हो ना कि मूवी स्टार्स हो ना कि पॉलिटिशियन हो ना कि इंडस्ट्रियलिस्ट हो ना कि इनोवेट ना साइंटिस्ट हो सडन पता चला कि किसी का नाम चारों ओर चल रहा है वो टेड टॉक दे रहा है ना कि वह कोई बहुत बड़ा एंकर उसका इंटरव्यू कर रहा है ना सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है कुछ दिनों के बाद देखा तो उसका नाम ही चला गया मैंने वो कौन था नई जनरेशन को उसके बारे में कुछ पता भी नहीं है आज हम यदि बाकी सब सोशल मीडिया वालों को तो छोड़ ही दीजिए पुरानी जनरेशन के यह फिल्म स्टार थे या तो फिर यह क्रिकेटर्स थे ना कि इंडस्ट्रियलिस्ट थे ना कि ये साइंटिस्ट थे ना कि यह पॉलिटिशियन थे आज के जमाने में या तो फिर इस नई पीढ़ी में नई जनरेशन में कौन इनको पहचानता है इंदिरा गांधी ने पाकिस्तान के दो टुकड़े कर दिए तो अभी वह इतिहास इंदिरा गांधी का आज किसको याद है कि किसको पता है महात्मा गांधी के बारे में हम थोड़ा बहुत जो स्कूल में पढ़ते हैं सो पढ़ते हैं तो इसके लिए हमको थोड़ा बहुत पता है अदर वाइज इतने सारे फ्रीडम फाइटर्स थे जिनका चरित्र अद्भुत था जैसे कि विनोबा भवे है मेरे पर्सनल फेवरेट मैं उनको जब भी उनके बारे में पहली बार पढ़ना शुरू किया मुझे आश्चर्य होगा यह भूदान मूवमेंट उन्होंने जाकर के गांव-गांव शहर शहर में जाकर के जमींदारों को कन्वींस किया कि आपके पास में जो फालो जमीन है जिसका कि आप यूज नहीं कर रहे हैं उसको आप अपने किसानों को दे दीजिए जोके आपके खेत मजदूर हैं तो उनका भी कल्याण होगा आपको भी आशीर्वाद प्राप्त होगा और यदि ऐसा नहीं करेंगे तो जैसे चाइना और रशिया में यह कम्युनिस्ट रेवोल्यूशन आया था यह जमींदारों को मार करके उनकी जमीन हड़प ली गई थी इस तरह से कुछ हो जाता भारत में तो ऐसा नहीं होकर के भगवान के नाम पे धर्म के नाम पे जमींदारों ने अपनी जमीन किसानों को बांटी तो ये कितनी बड़ी साइलेंट रेवोल्यूशन है हमको अभी तक ज्यादातर अपने भारतीयों को इस बात का पता भी नहीं है कि कम्युनिस्ट रेवोल्यूशन आना वो नहीं आया भारत में इसके पीछे विनोबा भावे का कितना बड़ा हाथ है यह जो कोऑपरेटिव मूवमेंट है गुजरात में खास करके वो मने कोई पूंजीपतियों के हाथ में से बड़े-बड़े इंडस्ट्रीज को निकाल कर के जो लोग सामान्य कार्यकर है सामान्य वर्कर है उनके हाथ में यह पावर आना यह कितना बड़ा कार्य है वो कोऑपरेटिव मूवमेंट्स वग रे का वो हमको अभी तक पता ही नहीं कितने ही लोग है यह डॉक्टर कुरियन है अमूल वाले ऐसे कितने ही लोग हैं आई टू हैव ए ड्रीम डॉक्टर कुरियन की एक किताब है आई टू हैड ए ड्रीम हैव ए ड्रीम ना के हैड ए ड्रीम वो बोल गया तो बहुत सुंदर किताब है पढ़ने लायक है कि किस तरह से वो कोऑपरेटिव मिल्क मूवमेंट की उन्होंने शुरुआत की उसका जो विजन जो है वो उन्होंने देखा मैंने टीसी में पढ़ा था ये किताब अभी मैं डिटेल तो मैं सब भूल गया हूं 10 साल से भी ज्यादा टाइम हो गया 15 साल हो गया 2012 में पढ़ी थी 10 साल हो गए तो किंतु मुझे अभी भी वो जो फीलिंग है वो किताब पढ़ करर के वो जो मुझे फीलिंग हो रही थी अरे वाह इतना अच्छा उन्होंने काम किया है कितना सुंदर काम किया अभी आज की जनरेशन को डॉक्टर कुरियन कौन है ये वाइट रेवोल्यूशन क्या है ये ग्रीन रेवोल्यूशन क्या है वो किसी को कुछ पता नहीं तो ऐसा यहां प महाराज जी लिखते हैं कि आज के जमाने में या तो हमेशा से ऐसा होता रहा है कि कोई कोई व्यक्ति सडन फेमस हो जाता है कोई अच्छा कार्य कर लेता है उसके बाद में इतिहास के पन्नों में वह अदृश्य हो जाता है हालांकि यहां पर महाराज जी थोड़ा सा नेगेटिव अर्थ में कहते हैं ऐसे लोग जो कि सोशल मीडिया पर वायरल होते हैं आज के सोशल मीडिया उस समय के न्यूज़पेपर और उससे भी पहले वह जो वॉर लीडर होते थे उन्होंने बहुत बड़ा युद्ध जीत लिया तो चारों ओर नाम हो गया फिर वह गया तो उसकी डायनेस्टी भी उसके साथ में खत्म हो गई जो भी वो राज्य उसने जीते थे वह भी उससे अलग हो गए तो ऐसे वायरल व्यक्तित्व इतिहास में कितने ही हुए कितने ही है कितने ही होंगे ऐसे लोग आएंगे जाएंगे तो यह तो एक है साथ में ही ऐसे कितने ही लोग हैं जो कि साइलेंटली काम किए जा रहे हैं और इनको हम हमेशा के लिए भूलते जा रहे हैं आज की जनरेशन में मेरी जनरेशन की जो बात करूं मेरी ज अभी तो मैं बूढ़ा होने को लगा हूं अभी ये मुझे वो नजदीक के नंबर आ गए हैं जैसे हमारे फैमिली में ऐसा कहते थे वो दूर के नंबर है तब तक ठीक है नजदीक के नंबर आ जाने से वो आपका बुढ़ापा शुरू हो गया है तो अभी यह पहली बार कल में लेकर आए ये प्रोग्रेसिव ग्लास है यह चश्मे तो मुझे लग रहा है कि अभी नई जनरेशन के साथ में मेरा ऐसा कोई ऐसा लगता नहीं है कि इनके साथ में मनमल हो उनके विचार मेरे विचार बहुत डिफरेंट लग रहे हैं तो मेरी जनरेशन की बात करूं तो मैं एटलीस्ट जब स्कूल में था तो मैं महात्मा गांधी को पढ़ता था विनोबा भावे को पढ़ता था ये तो ये लोग जिन्होंने देश के लिए समाज के लिए इतना सब कुछ किया यह लोग भी धीरे-धीरे करके हमारी नजर से ओझल हो रहा है हमारी नजर से अदृश्य हो रहा है तो ऐसे कितने ही व्यक्तित्व है जो कि डिजर्व करते हैं फेम और जो कि फेम डिजर्व नहीं करते ऐसे दोनों तरह के आए और गए सडन फेमस हो गए और इतिहास के पन्नों में अदृश्य भी हो गए अथवा ज सकल जीवन कर्म चाचल बागा डंबर बा जत्रा दीर विकट संघर्ष उत्पादन पूर्वक तत्कालिक सभ्यता के संकटा पन्न करें अथवा वह सब जीवन जो कि कर्म चाचल बहुत ज्यादा काम करेंगे काम करने की बजाय कर्म चाचल का एक अर्थ यह भी होता है कि मैं यह काम कर रहा हूं ऐसा बोलक चिल्लाते ज्यादा है काम की वजह तो जिनका कर्म चाचल ज्यादा है वागा डंबर माने वोह बात करते हैं बहुत ज्यादा है बकबक करते रहते हैं सब जगह पर जाकर के कि मैंने यह किया मैंने वह किया या यंत्रा दीर विकट संघर्ष उत्पादन पूर्वक तत्कालिक सभ्यता के संकटा पन्न करें यंत्र के विकट प्रयोग से इस सभ्यता को तत्कालीन सभ्यता को संकट में डालते हैं यंत्रों का उपयोग करके सभ्यता को संकट में डालने वाले कौन है उनके बारे में तो हमको सब पता है यह पता नहीं यह कोरोना वायरस कहां से आया क्या हुआ उसके साथ में किंतु पूरे पृथ्वी को उसने जो डैमेज किया है इकोनॉमिकली और ह्यूमन कोस्ट हमने दी है पता नहीं व प्रॉपर उसका असेसमेंट हुआ है कि भी नहीं कितने लाखों लोग मर गए इसका क्या प्रॉपर रिकॉर्ड है कि भी नहीं वह हमको पता नहीं और वॉर के बारे में तो हम क्या कहे यह मिसाइल है रॉकेट है मशीन गन है और सबसे ऊपर में देखिए ये ये बायोलॉजिकल केमिकल वरफेन है यह न्यूक्लियर वेपंस है ये यंत्र की सहाय से यंत्र का उपयोग करके सभ्यता को संकट में डाल देने वाले ऐसे लोग कितने ही है एवं इतिहा शेर अध्याय विशेष के चीर कलंक तो करिया राखे जो यंत्र की सहाय से स मानव समाज को संकट में डालते हैं और इतिहास के पन्नों में हमेशा के लिए चीर कलंकित हो जाते तीन लोगों के बारे में यहां पर महाराज जी ने बताया जिनका कि कर्म चांच बहुत ज्यादा है जिन लोगों में वागा आडंबर है बातों करने की बातें करने की बड़ी ही कैपेसिटी है और तीसरे लोग है कि जो की यंत्र की सहाय से पूरी सभ्यता को खतरे में डाल देते हैं और इतिहास के पन्नों में जिनका नाम हमेशा से कलंकित हो जाता है श्री श्री शारदा देवीर जीवनी सेही खण चमत चमक प्रद तरेर नहे श्री श्री मां शारदा देवी की जीवनी यहां पर महाराज जी क्या कहते हैं क्षणिक चमक प्रद क्षण भर के लिए चमत्कारिक कर देगी लोगों को विस्मय में डाल देगी इस तरह की नहीं है लोगों को क्षण भर के लिए मोहित कर देने वाले कौन-कौन है जिन लोगों का बड़ा ही कर्म चाचल है कर्म चाचल वालों को हम पहचानते ही है कि बहुत ज्यादा काम करते रहेंगे जैसे कि आजकल यह आईटी का बड़ा चला है कोई भी अभी यह मैं अभी कुछ दो-तीन दिन पहले यह सेम ओल्ट मैन है ओपन एआई का उसके बाद उसको मैं एक दो लेक्चर में सुन रहा था उसको वो टॉक्स वगैरह होती है ना youtube2 जीपीटी एआई एजेंट है उसने वो रेवोल्यूशन ला दिया है तो यह जिन लोगों का कर्म चाचल बहुत ज्यादा है देखिए कैसे फट करके ये फेमस हो गया कुछ कुछ एक दो साल पहले ना कि कुछ महीनों पहले इसका नाम भी किसी ने नहीं सुना था सडन उसने उसने जो इनोवेशन या तो फिर उसका जो इंडस्ट्रियल जो डेवलपमेंट है उसकी वजह से उसका नाम कहां चला गया है वो एन विडिया बोलकर के एक चीप व है चीप मेकिंग कंपनी है उसका वह जो सीईओ है वो चाइनीज नाम है उसका नाम मुझे याद नहीं रहता उसके भी मैं दो-तीन टॉक्स मैंने सुने हैं वो भी एन वडिया का वो ग्राफिकल चिप जो है वो इतना मतलब आज आजकल एआई मशीनस को पावर करने के लिए वह इस्तेमाल होता है कि एन विडिया का स्टॉक अभी इतना उठ गया है वन ऑफ दने जो ट्रिलियन डॉलर कंपनी कही जाती है इस तरह से व एनवीडीया का नाम आ गया तो उसका सीईओ है ऐसे लोग फटाफट करके वह ख्याति प्राप्त कर लेंगे क्योंकि उन्होंने कर्म करके एफिशिएंटली कर्म करके एक ऐसी प्रोडक्ट यूज तैयार की है जो कि पूरे समाज में फैल जाए और सबका अच्छा भी करे बुरा कुछ नहीं है आर्टिफिशियल इंटे इजेंस ना कि ये ग्राफिकल चिप्स बोलो ना कि ग्राफिकल सीपीयू जीपीयू जिसको कहते हैं तो यह सबका अच्छा इस्तेमाल करने से हमारे लिए फायदा तो है ही है अच्छे-अच्छे मेडिकल मशीन हम बना सकते हैं मेडिकल डायग्नोसिस और ट्रीटमेंट के लिए वो भी है किंतु फिर इस सब चीजों को लेकर के बातों को बढ़ाने वाले लोग भी बहुत है वागा आडंबर करने वाले और फिर इसी यंत्रों का माध्यम से इसी यंत्रों की सहाय से मानव समाज को संकट में डाल देने वाले लोगों की भी कमी नहीं है यह कोरोना है य कि ये वर है ना किय मशीन गन है ना कि ये न्यूक्लियर वेपंस है यह सब यह सब उदाहरण है आज जो इनोवेशन हमको वही जीपीयू ग्राफिकल प्रोसेसर हमको इतना अच्छा लग रहा है वही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस हमको इतना यूजफुल हो रहा है अपने काम में इसी का इस्तेमाल करके ऐसा वो कोई विमान बनाएंगे ऐसा कोई रॉकेट बनाएंगे ऐसी कोई मिसाइल बनाएंगे ऐसा कोई वेपन बनाएंगे कि कि हमी को आ कर के खा जाएगा तब लगेगा कि अरे भाई यह सब डेवलपमेंट करने की क्या जरूरत थ तो ऐसे लोग फटफट करके वायरल भी हो जाते हैं ख्यातनाम भी हो जाते हैं और फिर आखिर में ऐसा कुछ कर देंगे कि इतिहास के पन्नों में चीर कलंकित होक के भी रह जाएंगे किसको पता किंतु श्री श्री मां शारदा देवी का जीवन उनकी कक्षा का नहीं है उनकी तरह का नहीं है तो किस तरह का है वो हम कल देखेंगे ओम शांति शांति शांति हरि ओम श्री राम कृष्णर्पण मस्तु