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ओम स्थापना करना नारीत्व के एक आदर्श की स्थापना स्त्री जनोजित एक आदर्श की स्थापना यह भी शक्ति के अवतरण का एक प्रयोजन है यह बात हमने कल अच्छी थी आज हम देखते हैं की गंभीर महाराज आगे क्या लिखने हैं साथ में महाराज ने कल यह भी बताया था की यदि असुरों का विनाश करना है तो आशिक अवतार के अवतरण से भी अवतार का आशिक जन्मागरण करते हैं तो भी उससे भी रक्सन का सहर हो जाएगा किंतु पूरे समाज में आध्यात्मिक चेतन का नवजागरण करना है वो सदगुण के मध्य से तो उसके लिए तो पूर्ण अवतार के आने की आवश्यकता अवश्य रहती है आगे महाराज जी लिखने हैं भारत और पुरातन संस्कृति जिसको की रंगमंच कहते हैं भारत की पुरातन संस्कृति के रंग मंच पर आज ऐसी शक्ति यानी की ईश्वरीय शक्ति हम का सकते हैं की यदि पृथ्वी पे या तो फिर भारत की यह जो उसे समय था की बहुत सारे लोग सोचते थे की ये जी तरह से खासकर के दो नए धर्म विषयों में उसे समय चारों और अपना नाम चल चारों और उनका विजय पता का लहरा रहे थे ये तो नए धर्म कौन से हैं इस्लाम और क्रिश्चियनिटी हालांकि क्रिश्चियनिटी 2000 साल पुराना है किंतु उसकी कंपेयर में ये तो अफ्रीका के धर्म और एशिया के धर्म हजारों हजारों साल पुराने थे तो और है तो उन लोगों के ऊपर में आक्रमण करके उन्होंने पुराने धर्म को हटा करके अपने नए धर्म की स्थापना की तो हर जहां पर भी गए इजिप्ट का आप देखिए की इजिप्ट के जो फेरो उन्होंने बहुत बड़े-बड़े पिरामिड बनाए और उलगता था उसे समय के पूरे विश्व में उसने आज से 8000 साल पहले 6000 साल पहले जब भी वो पिरामिड बने की शुरुआत हुई होगी वो पिरामिड बनाने वाली जो संस्कृति है वो इतनी पावरफुल थी इतनी क्षमताशा ली थी की पूरे विश्व में उसके उसका ये ट्रेड और मर्चेंडाइज रिलेशन था हमको पुरानी कर संस्कृतियों हैं एक तो मांग को वाली कलर एक सिंधु वाली सिविलाइजेशन दूसरा है की यूफोरिटीज वाली सिविलाइजेशन या तो फिर कहेंगे की मेसोपोटामिया सिविलाइजेशन और चौथी है यह नील रिवर वाली सिविलाइजेशन कर बड़ी नदियां थी पुरी पृथ्वी पर और चारों नदियों के आसपास में एक पुराना उसे समय का एक सिविलाइजेशन बन करके तैयार हो रहा था यह कब की घटना है मां लीजिए आज से तकरीबन आठ से नो हजार साल पहले की बात है की उफोरेट इस इन टिगरिस या तुम मेसोपोटामिया अर्थात आज का इराक सिंदूर रिवर वाली सिविलाइजेशन यानी की आज का पाकिस्तान किंतु वो प्राय वो तो हमारी भारतीय संस्कृति का ही वह मैन भारतीय संस्कृति का उद्योगी वहां से हुआ तीसरी थी ये हुआंग हो रिवर बेली यानी की जो चीन में है चौथी है यह नील जो की इजिप्ट में है ये कर रिवर वाली सिविलाइजेशन जहां पे एक्सकैवेशन करके हमारे आर्कियोलॉजिस्ट को सबसे ज्यादा प्रूफ मिले हैं जो पोटरी और वो जो सब आर्टीफैक्ट मिलते हैं ना उसका कार्बन डेटिंग करके पता चला है है की बाकी सब जगह पर जो भी आर्कियोलॉजिकल आर्टीफैक्ट मिले हैं उन सब की कंपेयर में यह कर नदियों के तट पर एक्सकैवेशन करके जो आर्टीफैक्ट मिले वो सबसे ज्यादा पुराने है इसका अर्थ यह नहीं है की हमारी गंगा नदी के किनारे या तो कावेरी नदी के किनारे या तो नर्मदा के किनारे कोई असिएंट सिविलाइजेशन नहीं थी ऐसा खाने का बिल्कुल बात नहीं है वही है की आर्कियोलॉजी की दृष्टि से एक्सकैवेशन करके हमको सिंधु नदी के किनारे जो मिला है वो आज कार्बन दिन डेटिंग की उन्होंने मॉडर्न जो सब मेथाडोलॉजी का ही जाति है उसकी आ जांच पड़ताल में सबसे पुरानी वह पी गई है तो आप बाकी चारों को देखिए की उफोरेट इस टिगरिस और नई यह दोनों पुरातन संस्कृति थी और उनके धर्मठिन वो इस्लाम और क्रिश्चियनिटी के आने से पूरे ढंग से हो गए भांग और चाइनीस जो कलर था या तो फिर चाइनीस धर्म था उन्होंने अपने कलर को तो बच्चा के रखा जो कन्फ्यूशियस कलर वो अपने को कहते हैं किंतु उनका धर्म वह भारत में से बुद्धिस्म के जान के बाद में वो तू आईएसएम की अभी तू जिम के ट्रेस है बताओ ये सब बड़ा ही स्ट्रांग उसका एक सब कलर है किंतु मेजर रिलिजन बोला जाएगा चीन का या तो फिर जापान का कोरिया का इंडोनेशिया ये जो सब स्टंट और साउथ ईस्ट एशिया कंट्रीज है उन सब का तो मेजर रिलिजन है बुद्धिस्म तो देखिए की कर में से तीन सिविलाइजेशन ऐसी है की बाहर से आए हुए धर्म ने उनके ऊपर में विजय प्राप्त कर ली वहां के जो इंडीजीनस या तो फिर कहेंगे उसे भूमि से प्रकट हुए जो धर्मत है है वह धर्म धीरे-धीरे करके कल के प्रवाह में भाखड़ा के चले गए किंतु भारत के साथ में ऐसा नहीं हुआ यह सिंधु वाली सिविलाइजेशन या तो फिर गंजेटिक वाली सिविलाइजेशन या तो फिर कावेरी बेली या तो फिर ये नर्मदा यह जो हमारी बड़ी नदियों के आसपास में जो ओरिजिनल प्रीहिस्टोरिक सिविलाइजेशन जो खड़ी हुई थी उसकी सभ्यता संस्कृति लैंग्वेज कलर आगे वेल आगे रिलिजन अभी तक वही है हां ये भारतीय धर्म में या तो फिर वैदिक धर्म में चढ़ा उतार अवश्य आए हैं सबसे बड़ा आक्रमण जड़ी कहा जाए तीन बड़े-बड़े आक्रमण हिंदू धर्म के हिंदू धर्म नहीं करके मैं कहूंगा की वैदिक धर्म के ऊपर में हुए सबसे बड़ा पहले आक्रमण हुआ था बुद्धिस्म का भगवान बुद्ध के अनुयायियों का उन्होंने कहा की वेद में यह जो सब रिचुअल्स से यह जो सैक्रिफिस है वहां पर जो ब्राह्मण कलर जो है जो लोगों को ठग रहा है ऐसा वो लोगों के मां में बुद्ध बुद्ध के अनुयायियों लोगों को मां में बिठा रहे थे की आपके जो ब्राह्मण है वो पूरा ब्राह्मण कलर वो जड़ मोड से करप्ट हो गया है इसकी बजाएं आप बहुत धर्म को अपना ले बहुत बुद्धम शरण गच्छामि धम्म शरण गच्छामि संगम शरण गच्छामि बुद्ध धम्मा और संघ यह जो ट्री फैक्टर जो है इनको अपना ले आपके हिंदू वैदिक रिचुअल की जगह पे ब्रह्मीनिज्म की जगह पे तो वह एक आक्रमण हुआ किंतु हमको पता है की बुधीराम आखिर में चाहे जितना भी फैला हो भगवान शंकराचार्य के आने के बाद में उन्होंने हिंदू धर्म की पुनः स्थापना की और बुद्धिस्म को आखिर में भारत में से पूरा सिमेंट लिया गया भारत में से बुद्धिस्म कहानी कहानी एक दो जगह पे शायद टीका होगा और आज के जो बौद्ध है वह तो अंबेडकर ने जो बौद्ध धर्म स्वीकार किया था और उनके जो अनुयाई है वो बौद्ध है वो नव बहुत जिनको कहते हैं किंतु वह जो ओरिजिनल बौद्ध धर्म के अनुयाई भारत में मुट्ठी भारी बच्चे हुए हैं आज बौद्ध धर्म ज्यादातर ईस्ट एशिया कंट्रीज और साउथ स्टेशन कंटेंस में फैला हुआ है तो एक आक्रमण हिंदू धर्म में दूसरा आक्रमण हुआ इस्लाम का और तीसरा हुआ क्रिश्चियनिटी का धर्म का मैं पॉलीटिकल नहीं का रहा धर्म की बात कर रहा हूं ऐसा नया धर्म आता है और लोगों को इक्वलिटी देता है लोगों को डिग्निटी देता है लोगों को पति देता है तब जब पुराने धर्म के अनुयाई जो बड़े लोग जो है उनको तो लगता है की हमारा धर्म सब ठीक-ठाक चल रहा है लुब्धक प्रतिस्प्रीत जो समाज के वो जो ये प्रतिष्ठित लोग हैं उनको धर्म से कोई दिक्कत नहीं है किंतु समाज में जो पिछड़ा वर्ग है वो सोचता है की अरे मैं इस धर्म का अनुयाई भी हूं धर्म की निष्ठापूर्वक आराधना साधना भी कर रहा हूं किंतु फिर भी समाज में जो मेरा स्थान है वो किसी गिनती का नहीं है समाज में मुझे चारों और से धुटकारा जा रहा है समाज में मुझे चारों और से मेरी अव्वा गणना हो रही है ऐसा जब सामाजिक जो पतित लोग हैं उनको नया धर्म देता है उनको नया धर्म एक नई डिग्निटी देता है लोग धर्म परिवर्तन इसलिए नहीं करते क्योंकि उनको अपने पुरखा का धर्म अच्छा नहीं लगता लोग धर्म परिवर्तन जो करते हैं वो इसलिए शुरू करते हैं उनकी सामाजिक स्थिति इस हद तक वह बतर हो जाति है की उसे समाज में उनका रहना मुश्किल हो जाता है और वो नए समाज को खोजना को जाते हैं तो इसीलिए लोग नया धर्म ये करते हैं अंगीकार करते हैं नए धर्म में कन्वर्जन करते हैं तो यह दूसरा बड़ा आक्रमण हिंदू धर्म पे या तो वैदिक धर्म पे ऊपर में हुआ दूसरा और तीसरा दृश्य नीति और इस्लाम का उन्होंने हमारे समाज के पिछड़ी वर्ग को एक नई आशा दिलाई एक नया भरोसा दिलाया की हां आपके धर्म में आपकी जी तरह से सामाजिक आर्थिक अव्वा गणना हो रही है उसका प्रतिकार आप हमारे धर्म अंगीकार कर लीजिए हमारा धर्म स्वीकार कर लीजिए हम आपको एक नया डिग्निटी देंगे बोलकर के काफी लोगों ने उसे धर्म में चले जाना शुरू किया किंतु साथ-साथ में हिंदू धर्म में भी रिफॉर्म की प्रारंभ हो गया था सबसे बड़ा झुलांत उदाहरण है भगवान श्री कृष्णा चैतन्य किस तरह से उन्होंने नगर कीर्तन करके जागी मंगाई जिससे बिल्कुल आसुरी कुर्ती के लोग हैं उनका भी हृदय जीत लिया वो हम वो मतलब ये हिंदू धर्म के भीतर में जो पावर है वो अन्य तीन असिएंट सिविलाइजेशन या असिएंट रिलिजन के भीतर में नहीं था आपको पता है की आज का जन्माष्टमी की जन्म और वृंदावन लीला जी तरह से हम लोग उनका इतना श्रद्धा पूर्वक उसका पालनपुर करते हैं उसके प्रति हम अपने निष्ठावान है यह सब पूरा शुरू करवाया गया था भगवान कृष्णा चैतन्य और उनके गोसाई अनुयायियों के द्वारा जो की जाकर के वो जीव को स्वामी और वगैरा वो वृंदावन में जाकर के रहे और भक्ति शास्त्र के एक के बाद एक धर्म ग की रचना करने की शुरुआत की थी तब से कहानी जाकर के भगवान कृष्णा का जन्म और वृंदावन लीला अपने हिंदू धर्म में एक उसका एक स्पेशल एक उसका इंर्पोटेंस स्थापित हुआ है उसका एक अपना एक जैसे ठाकुर कहते हैं ना की पश्चिम में लोग क्या करते हैं की मथुरा के कृष्णा को तो स्वीकार करते हैं किंतु वृंदावन के कृष्णा को स्वीकार नहीं करते वृंदावन के कृष्णा की क्या खासियत है मथुरा के जो कृष्णा है वो राजा है वह युद्ध करवाते हैं युद्ध में लोगों को एडवाइस देते हैं असुरों का विनाश करते हैं जबकि वृंदावन के कृष्णा बिल्कुल डिफरेंट है वृंदावन के कृष्णा हंसते हैं खेलने हैं गोपियों के साथ में रासलीला करते हैं बच्चे छोटे बच्चे होकर के मां यशोदा को परेशान करते हैं कहानी से मक्खन चूड़ा कर के का लेंगे कहानी किस गोपी के घर में जाकर के क्या चूड़ा लेंगे क्या किसी को बचपन करेंगे इसी वो हरकतें करेंगे गोपिया जाकर के मां यशोदा को कंप्लेंट करने के लिए जाएगी की मां देखो तुम्हारा बच्चा आकर के हमारे घर में इस तरह से दुश्मनी कर रहा है दोस्तो में बंगाली शब्द है उसका हिंदी अर्थ होगा की किस तरह से यह तूफान मचा रहा है नटखट लड़का जो होता है ना वो किस तरह से वो तूफान मचता है किंतु देखिए की मां कभी भी उसको पनिश नहीं करेगी क्योंकि मां मचा के रखा है शांत हो जो ऐसा डेट भी मुझे किंतु भीतर में भीतर में जो हरशॉट फूल वो हर्ष उसका शुरू होगा उससे वह उसके मतलब इतना प्रेम का बंधन बच्चे के साथ में वो बंता है की कभी मुंह से डांटना से भी कभी उसके हृदय में अपने बच्चे के प्रति कोई भी कटुवाद नहीं रहेगा तो ये जो मां यशोदा का बाल कृष्णा के साथ में जो संबंध था फिर बाल कृष्णा की ये जो नटखट यह दुष्टमी करने की ये जो पूरा नेचर था इस सब चीजों का अभ्यास करके स्टडी करके ये वैष्णव गोस्वामियों ने भक्ति रसायन शास्त्र की रचना की जिसमें छह भाव जो है उन्होंने साधना के लिए हमारे सामने रखें जैसे की भगवान जैसे की सुदामा का सखिया भाव है जैसे महावीर का दसी भाव है जैसे मां यशोदा का मंत्र भाव है बाल कृष्णा का संतान भाव है जैसे गोपियों का या मारा था का मधुर भाव है रुचियां का शांत भाव है तो ये शांत सखियां वात्सल्य बाल्य और मंत्र भाव उसे सखी भाव ये जो छह भाव है छह भावों का इकट्ठा करके हम लोग ईश्वर प्रताप की साधना कर सकते हैं दिस इस कंपलीटली यूनिक कंट्री ऑफ वैष्णव स्कूल ऑफ थॉट वैष्णव स्कूल ऑफ साधना जिसने की भारत को बच्चा के रखा ये इस्लाम और क्रिश्चियनिटी के आक्रमण के सामने फिर जब भगवान राम कृष्णा का अवतरण हुआ मां शारदा देवी का अवतरण हुआ तब ये आक्रमणों को संपूर्ण रूप से भारत में से के दिया गया तो देखिए की कर असिएंट सिविलाइजेशन थी यह हुआ मेरी सिविलाइजेशन जो चीन की थी इफेक्टिव या तो मेसोपोटामिया सिविलाइजेशन जो की इराक में थी और नील सिविलाइजेशन जो की चिप में थी ये तीनों सिविलाइजेशन के जो ओरिजिनल इंडीजीनस धर्मत थे वो बाहर के आए हुए धर्म के द्वारा पराजित हो गए थे किंतु हमारे सिंधु वाली सिविलाइजेशन गंगा वैली सिविलाइजेशन ये हमारा जो ओरिजिनल वैदिक धर्म है उसने बच्चा के रखा है इतना ही नहीं एक अवतारों की पुरी परंपरा अवतारों की पुरी हर माला आकर के हमारे धर्म को बार-बार पुनर्जीवित करती जा रही है इसीलिए महाराज यहां पे कहते हैं की भारत की पूरा पुरातन संस्कृति की परिप्रेक्षयाते पुरातन यानी की हजारों साल पुरानी ये जो हमारी संस्कृति एवं उसके कांटेक्ट कर दी है अभी जब महाराज लिख रहे थे तब भी वैसे तो हम लोग आजाद हो चुके थे भारत जो है उसमें से ब्रिटिश साम्राज्य चला जा चुका था किंतु फिर भी जी तरह की आर्थिक कटौती में से देश बार-बार पसार होता था उससे लोगों के मां में संदेह तो राहत ही था की ये जो हमारा ये जो हार्ड वन फ्रीडम जो है बहुत ही परिश्रम करके हमने ये स्वतंत्रता प्राप्त की है वो टिक पाएगी की नहीं या तो फिर हजार साल की हमारी ये जो गुलामी मानसिकता है उसकी वजह से हम लोग फिर से किसी अभी वो लोग ब्रिटिश और ये लोग चले गए तो यहां पे चाइनीस खड़े हो गए थे और 65 पे हमारे पे हमला कर दिया था ऑलरेडी बहुत साड़ी जमीन हमारी उन्होंने हड़प ली थी तो उसे समय भी आज भी है तो वह प्रश्न होता ही है क्या मिलिट्री ली सोशली इकोनॉमिकली रिलीजियस फिलोसॉफिकल हमारे में वो स्ट्रैंथ है की हम लोग चीन के सामने खड़े हो पे तो ये संदेह संशय सब समय उसे समय तो था ही था तो महाराज कहते हैं की इस पाठभुमि पे इतनी पुरातन संस्कृति है उसको बार-बार पुनर्जीवित होना है ऐसा नहीं है की बाकी पुरातन संस्कृतियों की तरह हमारी संस्कृति कल के प्रवाह में बा जाएगी स्वामी जी एक बात बहुत सुंदर कहते हैं यदि भगवान मानो फिर से पृथ्वी पर ए जाए फिर से भारत की भूमि पे ए जाए तो वो आश्चर्य चकित हो जाएंगे अच्छा पहले तो कहते हैं की जहां पर सीजर रहते थे वह कैपिटल कैपिटल है वहां पर वह जो सीजर पुराने जमाने के रोम का रोम का सॉरी गिरीश का नहीं रोम का रोमन साम्राज्य पूरे पृथ्वी पर आज पुरी पृथ्वी पर तो नहीं किंतु पूरे मेडिटरेनियन सी शोर आसपास में जो फैला हुआ था वहां पर शुरू करें तो कहां स्कॉटलैंड और ब्रिटेन से लेकर के यहां ईस्ट में जाए तो कहां जेरूसलम फिलिस्तीन वह पूरे मेडिटरेनियन सीशोर यानी की नॉर्दर्न यूरोप स्टंट वेस्टर्न यूरोप और नॉर्दर्न अफ्रीका की ये जो पुरी रम है वहां पे जो रोमन अंपायर फैला हुआ था उसके एक ग्लोरी डेज थे उसका एक उसकी सीढ़ियां की एक पराकाष्ठा के कुछ दिन थे तो कैपिटल बोल करके रूम में जगह है जहां पे सिक्सर्स रहा करते थे आज वो 2000 साल हो गए हैं उसे बात को आज क्या है तो उसे कैपिटल पे मैकिया अपने जेल बंटी है और वो सीजर यदि वापस ए जाएगा तो उसमें उसकी जो ओरिजिनल संस्कृति या धर्म था वहां पर वो पंछियों की उन्होंने पंछी जुपिटर है ना की वो ये उनके आईसीसी कितने भगवान की अलग-अलग कोड सेंड कोड इसकी पूजा थे वह धर्म चला गया उसकी जगह क्रिश्चियनिटी अगेन किंतु भगवान मानो भारत में आज फिर से वापस ए जाएंगे तो उनको वही देखने को मिलेगा जो की उन्होंने अपने समय में देखा था उनको नया कुछ नहीं मिलेगा देखिए स्वामी जी ने इस ये जो कहा इसके पीछे बहुत सारे लेयर्स हैं ऐसा नहीं है की अब स्वामी जी तो फिगर्टिव स्पीच उसे करते हैं तो ऐसा नहीं है की कैपिटल पे सही सही मैकिया यानी की स्पाइडर अपने जेल बनते हैं कैपिटल आज बहुत ही भाव जगह है बहुत सारे हजारों टूरिस्ट जाते हैं बहुत बड़ी इनकम का सोर्स है वो गवर्नमेंट के लिए वहां मकड़ी झूले बन्ना का प्रश्न ही नहीं आता और भारत ने ऐसा नहीं है की भारत वैसे का वैसा ही रहा है बहुत सर आज हमारा इसरो चंद्रयान भेज रहा है चंद के ऊपर में हमारा आदित्य सूर्य की परिक्रमा करने को गया है मंगलयान मार्स ग्रह जो है उसकी मुलाकात ले रहा है तो कोई भारत वो वैदिक संस्कृति वाला भारत भी नहीं रहा किंतु जो स्वामी जी कहना चाहते हैं इन इट्स एसेंशियल एस्पेक्ट जो हिंदू धर्म का जो एसेंशियल एस्पेक्ट था हिंदू धर्म का एसेंशियल स्पेक्ट क्या है कर महावाक्य हम ब्राह्मणी मेरा सही स्वरूप वो ब्राह्मण है तत्व मसीह डेट तुम 80 तुम वही हो जो की सर्वोच्च ब्राह्मण जो सर्वोच्च ब्राह्मण है वही तुमको किंतु मैं अर्थात की ये मां बुद्धि प्राप्त करके जड़ी में अपना शरीर स्वरूप पहचानता हूं तो मेरा सही स्वरूप सर्वव्यापी ब्राह्मण है तो यह जो मा वाक्य है ये है हिंदू संस्कृति का आधार स्तंभ और यह महावतया हमारे हिंदू धर्म के आज भी आदर्श स्तंभ फाउंडेशन स्टोन बने हुए हैं जबकि रोम में जाएंगे तो पूरे पंथ्यों ने आने की कितने ही गॉडजेंट गोडेसेस की पूजा होती थी सीजर हिमसेल्फ पोस्ट कंसीडर गॉड सीजर को भी ये लोग देवता मां करके पूजा करते थे वो पूरा चला गया है और वह होली त्रिनिटी ए गया है फादर सन और होली घोस्ट उन्हें क्रिश्चियनिटी का तो वहां पर पूरा धर्म चेंज हो गया हमारा नहीं हुआ हमारे फाउंडेशन वालुज अभी भी वैसी की वैसी ही है और इसीलिए महाराज जी लिखने हैं की पुरातन संस्कृति के परिप्रेक्ष्य में इस देवी संस्कृति एक देवी शक्ति का आगमन प्रभात का सुजान है विशेषता नई जगत बिहार कर जो सुदूर प्राची जगत में इसका कार्य सुदूर प्रसारित बहुत दूर तक प्रसारित होगा मैं ऐसा सोच करके ऐसी में एनम अनुमान कर सकता हूं यह अनुमान हम कर सकते हैं नई जगत में मां का आगमन की जो मां के आगमन की जो संभावना है मां के आगमन की जो रिप्ले इफेक्ट है उसका जो उसका रिजल्ट जो है वो नई जगत में उसके उत्थान के लिए सुदूर प्रसारित होगा कहां-कहां तक देखिए आज चंद्र ग्रहण के वो फोटोग्राफ्स इसरो के देखें इतनी साड़ी स्त्रियां साइंटिस्ट लेडी साइंटिस्ट वहां पर खड़ी है वो देख करके हमको कितना गर्व होता है और किसी भी स्पेस एजेंसीज को ले लीजिए वहां के सक्सेस होते हैं तो जो फोटोग्राफी लोग रिलीज करते हैं खासकर के नासा के ये तो मैंने बहुत बार देखें हैं कहानी पे भी आपको इतनी लेडीज साइंटिस्ट आपको देखने को नहीं मिलेगी जितनी की आपको इसरो में दिखती है और ये हमारे बड़े-बड़े मिशन की जो डायरेक्टर होती है वो भी स्त्रियां होती है तो ये कितना बड़ा ये जो जागरण और धीरे-धीरे उसकी रिप्पल इफेक्ट आज कहानी पे हमको देखने को मिल रही है मां के पास में एक बहुत साड़ी डिवोधी औरतें आई थी तो एक ने आकर के कहा मां क्या करूं मेरी बच्ची की उम्र 14 साल हो गई है और शादी नहीं हो रही मैं बड़ी परेशान हूं अभी उसे समय तो था ना 10-12 साल हुआ शादी करवा दो तो मैन क्या कहा मां की खुद की शादी हुई थी कितनी छोटी उम्र में 5-6 साल की उम्र में तो किंतु मां क्या कहती है अरे उसको निवेदिता स्कूल में भारती करवा दो वहां पर कुछ सीखेगी अच्छा तो जहां पर भी जी घर में जाएगी उसके भले के लिए वो कर उसका कल्याण होगा वो जी समाज में जाएगी कल्याण हो मां आप सबको बोलती है की निवेदिता स्कूल में अपनी बछिया को रख दो तो मां खुद जी तरह से बड़ी हुई है किंतु वह लोग तो सामाजिक व्यवस्था को तोड़ने के लिए नहीं आए थे ऐसा नहीं कहा की वो बागड़ी के लड़के को लड़का बोलना है की मैं एक बागड़ी के आप बोल ले तो और किछु बोलो ना किंतु भक्ति के बेटा बोल ले तोमर होटलों के मैदान से जा रही थी वो बात भी अर्थात बद्दी एक जाट थे छोटी जाट मैन निम्न जाति उसे समय की वो डाकू ए गया तो मैन क्या का दिया पिताजी मैं आपकी बेटी हूं शारदा तो वह डाकू था और एकदम वो मां का दिव्या बालिका स्वरूप देखकर के शांत हो गया और वो मां को दक्षिणेश्वर ठाकुर के पास खुद ले गया तो वो डाकू था जाट का बैग दी तो उसको आप बोलने में तुमको शर्म नहीं आई और बात भी लड़के को दीक्षा देने में तुम को शर्म ए रही है ऐसा जब उससे बोला तब मैन फिर कहा अच्छा ठीक है मैं तुमको दीक्षा देती हूं तो यह नहीं तोड़ने के लिए आई है सामाजिक व्यवस्था को पुरानी व्यवस्था खराब है बुरी है गलत है ऐसा कभी नहीं कहा गया ऐसा कहा गया की वो यदि अच्छा था तो लेटेस्ट तू बटर लेटेस्ट को ऑफ स्वामी जी कहते हैं सिविलाइजेशन नेवर गोस फ्रॉम एरर तू ट्रुथ वे ऑलवेज को फ्रॉम लोअर ट्रुथ तू हायर ट्रुथ तो वो जो सामाजिक प्रथम थी उसको तोड़ने की कहानी पे बात नहीं है उसका भी सम्मान करना चाहिए जी सामाजिक स्थिति से वह प्रथम है आई है वो उसे समय के अनुसार वो ठीक ही थी अभी समय बादल गया है समय के साथ में नई प्रथाओं का जन्म लेना आवश्यक है तो इसीलिए जब मां का जो आगमन हुआ हमने ऐसा कभी नहीं कहा की नई के लज्जाशीलता नई का यह मातृत्व नई का यह जो स्त्री सुलभ स्नेहा जो होता है इसको छोड़ करके आज ही मॉडर्न कुछ कुछ विदेशी बातें चलती है की यह यम मधुर हुड या तो फिर यह आ मैन जो नई के जो गन है उसको छोड़ दिया जाए फिर तेज दिया जाए पुरुषों के गुना को अपना लिया जाए तभी हमको फ्रीडम मिलेगा तभी हमारा समाज में कुछ स्थान होगा ऐसा एक वेस्टर्न वालुज और कलर जो आज चल रहा है उसके विरोध में मां का यह जो वालुज है स्त्रियों के जो गन है उसको रखते हुए फिर स्त्रियों को समाज में एक इक्वल स्थान देना वो मां का जीवन भर का कार्य है नई समाज और उन्नतीर प्रयोजन चिंताशील व्यक्ति मंत्र ही स्वीकार करीबन नई समाज की उन्नति का प्रयोजन चिंताशील व्यक्ति यानी की जो चिंतक है समाज की परिस्थितियों के ऊपर में सोचते हैं वो सभी स्वीकार करेंगे स्वामी जी कहते थे की लड़कों का मठ बाद में होगा पहले स्त्रियों का मठ होगा बेलूर मठ आ स्वामी ठाकुर की महासमाधि के बाद में पूरे भारत में भ्रमण करके वो देखिए वो स्वामी जी का पता है ना की उन्होंने परिव्राजक के रूप में भ्रमण करने की शुरुआत कैसे हुई पहले तो वो पहरी बाबा और यह प्रमाण अश्वामित्र वगैरा के पास जाते रहे वेदांत सीखने के लिए साधना करने के लिए किंतु फिर उन्होंने ठीक किया की यह वेदांत भी सिख लिया गया है साधना भी वो हड्डियों की वगैरा जो जितनी हनी थी हो गई है अभी जाकर के मैं अल्मोड़ा में जाऊंगा गुफा में बैठकर के निर्विकार का समाधि में शरीर त्याग दूंगा बोलकर के अल्मोड़ा यानी की हिमालय में गए एक गुफा में बैठे और समाधि में मगन रहते थे ज्यादा समय ज्यादातर समय और साथ में स्वामी शारदानंद जी महाराज थे बाद में रामकृष्ण संघ के महासचिव यानी की जनरल सेक्रेटरी हुए थे उसे समय जनरल सेक्रेटरी नाम नहीं था उसे समय महासचिव के पद को सेक्रेटरी ही कहा जाता था तो शारदानंद जी महाराज उसे समय उनके साथ में थे वो भिक्षा करके लेकर आते थे स्वामी जी को खिलाने थे स्वामी जी वो भिक्षा ग्रहण करके थोड़ी बहुत भिक्षा ग्रहण करके ज्यादातर समय समाधि में रहते थे उसे समय स्वामी जी के परिवार में यह समाचार आया की उनकी बहन ने आत्महत्या कर दी है तो ये समाचार लेकर के स्वामी जी के छोटे भाई महेंद्र नाथ डेट वराह नगर मठ में आए तो वहां पे शशि महाराज वगैरा थे उनको बताया की उनकी बहन ने इस तरह से सुसाइड कर लिया है तो लोग बड़े चिंतित हो गए बोले की अब क्या करना चाहिए किसी ने बोला स्वामी जी को समाचार दे किंतु स्वामी जी ने तो ठीक किया है की समाधि में मैं शरीर त्याग दूंगा तो अभी क्या किया जाए तो कहानी जाकर के उन्होंने ठीक किया की शर्ट महाराज को यह समाचार दिया जाए फिर शरद महाराज जो ठीक समझे वो करें बोल करके वो उसे दिन बारिश हो रही थी घुटनों तक छाती तक पानी था उसे समय कलकत्ता में और जो कोलकाता में रहते पता है इस तरह से गंगा किनारे आसपास में आप जाएंगे पानी होगा तो कब कहानी जाकर के बेहतर के गंगा में चले जाएंगे कुछ ठीक नहीं है तो इस तरह के धुआंधार बारिश बिजली बादल अंधेरा उसे मतलब जैसे की प्रलय हो रहा है इस तरह का स्थिति था उसे दिन कोलकाता में इस तरह के प्रलय की अवस्था में ये कुछ कुरूभाई टेलीग्राम ऑफिस में जाकर के अल्मोड़ा में शरद महाराज को टेलीग्राम करते हैं की स्वामी जी सिस्टर इस कमिटेड सुसाइड नहीं ऐसा कुछ तो फिर जब शरत महाराज को टेलीग्राम मिलता है वो भी बड़े चिंता में पढ़ने स्वामी जी ने तो कहा है की मैं अभी बस शरीर त्याग दूंगा अभी समाधि ही एक मंत्र मेरा जीवन है तो क्या किया जाए समाचार तो बड़ा ही दुखद है स्वामी जी को तो बताना ही पड़ेगा जाकर के स्वामी जी को बताया तब स्वामी जी ने क्या किया वो अपनी बहन के मृत्यु के लिए वह दुखी हो सकते थे किंतु यह तो स्वामी विवेकानंद स्वयं है युग आचार्य युग नायक है वो तो कोई हमारे जैसे सामान्य व्यक्ति नहीं है की अपने परिवारजनों की मृत्यु के ऊपर में शोक करें उनका उनकी दृष्टि के सामने पूरे भारत देश की अवस्था फेल गई उन्होंने सोचा की यदि मेरी ही बहन की यह स्थिति है तो भारत में नारियों की क्या स्थिति होगी कितनी दयनीय स्थिति है तो उनके लिए भाई होकर के मैं उनके लिए कुछ करने की बजे मैं हिमालय में गुफा में बैठा हुआ समाधि में धिक्कार है मुझे ऐसा बोलकर के स्वामी जी ने फिर गुफा त्याग करके हिमालय में से जमीन ऊपर भारत की भूमि पे अवतरण किया और वहां से स्त्रियों की समस्या भारत की समस्या यह पूरा चिंतन करते-करते भारत भ्रमण करके कन्याकुमारी के उसे टापू के जब बैठे थे तब कहानी जाकर के उनको वो विश्व संदेश मिला था ठाकुर ने कहा था विदेश में जो वहां की संस्कृति नहीं वहां का विज्ञान इंजीनियरिंग टेक्नोलॉजी भारत में लेकर आओ भारत में आध्यात्मिकता वहां पर फैलाव यह दोनों का जब संगम होगा साइंस टेक्नोलॉजी और इंजीनियरिंग तब कहानी जाकर के सर्वश्रेष्ठ सिविलाइजेशन की रचना होगी तब ठाकुर का यह आदेश प्राप्त करके स्वामी जी वहां पे गए थे और वहां पे जान के बाद में वो मटकी स्थापना करनी है तो बार-बार अपने पत्रों में लिखने हैं की लड़कों का मठ बाद में होगा पहले स्त्रियों का मठ होगा मां के आसपास में गोलापमा योगिन्मा गौरी मां ये जो सब उनकी अनुयायिइयां है उनको लेकर के सबसे पहले स्त्रियों के मठ की स्थापना करनी है तो ऐसा का के बार-बार स्वामी जी पत्र लिखने हैं हालांकि उसे समय जो सामाजिक परिस्थितियों पॉलीटिकल कंडीशंस थी इसकी वजह से मां का मठ तो 1963 वह मां की वह जन्म सहस्त्र शताब्दी थी उसे समय वह हुआ एस्टेब्लिश बेलूर मठ सबसे पहले हो गया किंतु जो भी है की स्वामी जी के मां में यह बात थी यह जो कहा गया है की जितने भी चिंता सील व्यक्ति है वे लोग स्वीकार करते हैं की नई समाज की उन्नति का प्रयोजन है तो ये प्रयोजन सबसे पहले स्वामी जी ने समझा था हमारे भारत में चिंता शेल लोगों के भीतर में दूसरे लोग थे यह विधवा विवाह सती प्रथम यह सब का विरोध करने वाले बहुत लोग थे किंतु यह क्या रिफॉर्म ऊपर ऊपर से थे विधवाओं के स्वामी जी कहते हैं एक विधवा के दो पति होना की तीन पट्टी हो इससे थोड़ी ना बोल समाज की स्थिति सुधारने वाली है स्त्रियों को शिक्षा चाहिए शिक्षा जब मिलेगी तब कहानी जाकर के स्त्रियों की अवस्था की उन्नति होगी तो यह उसका उसका रूट डायग्नोसिस करके उसका यह करने वाले उसका ट्रीटमेंट है सबसे पहले श्री राम