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Ma Sarada Life by Sw Gambhirananda ·

दैवाधीन : श्रीमाँ सारदा देवी : स्वामी गम्भीरानन्द लिखित : 4 June 2024 96k

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ओ स्थापक च धर्मस्य सर्व धर्मा स्वरूप अवतार वरिष्ठ रम कृष्णा यते नमः यह अपना जो टॉपिक चल रहा है कुछ दिनों से मां के जीवन में जिस तरह से पेन एंड सफरिंग यह दर्द और कष्ट किस तरह से उनके जीवन के साथ में जड़ित है हम लोग जद एक महामानव की कल्पना करेंगे जैसे कि हमारे वेद है या हमारी कहानियां है उसमें जब भी ईश्वर की कल्पना होती है हम ईश्वर के बारे में क्या सोचते हैं कि हमारे पास जो नहीं है वह ईश्वर के पास है हमारे पास में क्या नहीं है हमारे पास में हम लोग क्या है हम लोग को क्या महसूस होता है मुझे लगता है मैं कमजोर हूं मुझे लगता है मेरी बुद्धि बड़ी ही सीमित है मुझे लगता है कि मेरे पास में शक्ति बड़ी ही सीमित है तो मुझे अपनी जो सीमाएं मेरी जो लिमिटेशंस मेरी जो वीकनेस मेरी यह जो यह शॉर्ट कमिंग्स यह जो मुझे दिखते हैं यह सब शॉर्टकमिंग्स लिमिटेशंस सीमाएं इसको मैं किसी महामानव के ऊपर में आरोपित करूंगा और उसकी पूजा करने का प्रयास करूंगा मेरे पास में शक्ति कम है मैं कमजोर हूं तो यह महामानव या तो यह भगवान या तो यह गड या तो एक एंजल या देवता ऐसे होंगे जिसके पास में बहुत शक्ति है मैं कमजोर हूं तो वह बड़ बड़े ही स्ट्रांग होंगे मेरे जीवन में सतत यह व्याधि और यह मृत्यु लगे हुए हैं तो उनके जीवन में कभी भी कोई व्याधि नहीं होगी और वह हमेशा अमर रहेंगे जैसे हम यह स्वर्ग की कल्पना करते हैं ना स्वर्ग की कल्पना में क्या है कि हमेशा वहां पर बहुत ही अच्छा खाना पना मिलता रहता है वहां पर लोग कभी बीमार नहीं होते वहां पर लोग हमेशा के लिए जीते हैं अमर है तो यह जो न लाइफ की जो शॉर्टकमिंग्स है उसको हम इस तरह से किसी सुपरमैन के ऊपर में आरोपित करते हैं यह वेस्टर्न फिलोसोफी है सुपरमैन की यह शोफ एनवर बोलकर के एक जर्मन फिलोसोफर था उसने यह एक फिलोसोफी डेवलप की थी कि मनुष्य को चाहिए एक ऐसा आइडियल जिसमें वह सब कुछ हो जो कि उसके पास में नहीं है इसी फिलोसोफी के बेस पर आज यह जो वेस्टर्न कॉमिक्स है यह वेस्टर्न सुपर सुपर हीरोज है यह पूरा जो जनर है लिटरेचर का कॉमिक कॉमिक बुक कहो ना कि यह सुपर हीरो कहो जिसमें यह सुपरमैन है वगैरह तो यह पूरा इसी के ऊपर में डेवलप हुआ है हम लोगों को यह जो नोवल है या तो फिर यह मूवीज है उसमें ये जो हीरो है हीरो कैसा चाहिए जो कि मेरे पास में नहीं है वो यह हीरो करेगा मेरे साथ में अन्याय होता है तो मैं अन्याय के सामने कुछ नहीं बोल पाऊ क्योंकि मुझे पता है मैं जैसे ही थोड़ा सा ही विरोध करूंगा तो वैसे ही इस तरह का एक सामने एक ऐसा प्रतिकार होगा कि जिससे कि मुझे अपना जीवन चलाना मुश्किल हो जाएगा मैं जद मान लीजिए मेरी जॉब है मैं जहां पर मैं नौकरी करता हूं वहां पर मेरे साथ में कुछ अन्याय होता है मैं कुछ नहीं बोल पाऊंगा बोलने के जाने से ही वहां पर जो मेरे बॉस है या तो मेरे जो ऊपर के अधिकारी है शायद मेरी जॉब छीन ले नौकरी छीन ले या तो मेरे पैसे कम कर दे तो मेरे परिवार के साथ में क्या होगा यह डर की वजह से मैं कुछ बोल नहीं पाऊंगा किंतु फिल्म में मैं उस हीरो को देखने को जाता हूं जिसके साथ में थोड़ा सा भी अन्याय होगा तो वह एंग्री यंग मैन की तरह व अन्याय का प्रतिकार करने के लिए सब विलन के साथ में फाइट करने के लिए वह तैयार हो जाएगा यह हम लोगों को यह अपने एक हमारा एक आइडियल रहता है कि ऐसे लोगों को जो कि बड़े स्ट्रंग है फि फली जो कि सब समय अपना अधिकार अपना वर्चस्व स्थापित कर सकते हैं उसको हम उनके बारे में हम देखना चाहते हैं सुनना चाहते हैं और इनको हम वरशिप करना चाहते हैं इनकी हम पूजा करना चाहते हैं इसलिए हमारे जो देवता है हमारे जो फिल्म के हीरो है जो स्टोरी के जो हम जिस कहानी के पात्र है उन सब में हम देखना चाहते हैं शक्ति और यह स्ट्रेंथ किंतु देखिए कि ठाकुर और मां का जीव कैसा है ऑन वन हैंड हमको पता है कि ईश्वर या तो भगवती स्वयं पृथ्वी पर यह पंचमहाभूत का देह धारण करके अवती ण हुए हैं किंतु इनका जीवन पढ़ेंगे तो बार-बार यही थीम यह जो हम लोगों के जीवन के साथ में जो हो रहा है वही थीम उनके जीवन के साथ में बुनी हुई है कब वोह बीमार है कब इतने कष्ट में इतने दर्द में जी रहे हैं कब उनके जो प्रेमी जन है उनके जो परिवार जन है उनके जो स्नेही जन है उनकी मृत्यु सब समय उनकी आंखों के सामने होती रहती है और इस मृत्यु से उनको इतना मन को इतना कष्ट पहुंचता है कितना दर्द होता है तो ये ऐसा क्यों जयदिश जद अवतार धारण करके पृथ्वी पर आते तो वो क्यों नहीं वो एक सुपरमैन की तरह ना कि हमारे पौराणिक पात्रों की तरह आते कि चार हाथ है फिर चारों हाथों में या तो आठ हाथ है सभी हाथ में एकएक अस्त्र शस्त्र है कोई भी यदि उनका अपमान करेगा या कोई भी उनका यदि कुछ भी किसी भी तरह से उनके साथ में अन्याय करेगा तो उसका वध कर देंगे मां जब दक्षिणेश्वर आई और हृदय उनकी अपमान करके उनका अपमान करके कहता है आप यहां से चली जाइए तो चुपचाप बेचारी चली गई पौराणिक कहानी की तरह उस राक्षस का वध क्यों नहीं कर दिया उसको पनिशमेंट क्यों नहीं दिया यह ब्रिटिश साम्राज्य चलो यह हृदय वगैरह तो छोटे-मोटे लोग थे ब्रिटिश साम्राज्य भारत में जिस तरह से भारतीयों का शोषण कर रहा था क्या वह ठाकुर और मां को नहीं पता था अपनी नजरों से क्या नहीं देख पा रहे थे कि गांव के गांव उजड़ जा रहे हैं ब्रिटिश गवर्नमेंट कल्चरल और पॉलिटिकली और इकोनॉमिकली भारत का शोषण कर रही है किंतु इतनी बड़ी महासत्ता जो कि सिर्फ भारत ही नहीं पूरे विश्व के कितने सारे देशों में अफ्रीका में जाए अफ्रीकन लोगों को गुलाम बना कर के उनको बेचना यह सब इन लोगों ने किया था तो यदि इतना सब अन्याय अत्याचार यदि यह ब्रिटिश राज कर रहा है तो क्या उनको पनिश करने का उनका यह कर्तव्य नहीं था क्या अपने कर्तव्य से होक के एक सामान्य व्यक्ति की तरह क्यों जी रहे हैं यह लोग उनके शरीर में भी बार-बार बीमारी आती जा रही है उनके जीवन में भी स्नेही जनों का बार-बार मृत्यु होता जा रहा है हम कैसे उनको कहेंगे कि हां यह अवतार है वो अलग कैटेगरी के हैं यदि उनका जीवन हमारे ही जीवन जैसा हो डिफरेंट कुछ ना दिखता हो एटलीस्ट बाहर से तो यह प्रश्न एक होता है और इसका कोई सहज सरल उत्तर नहीं है हम लोग अपनी पौराणिक कहानियों में ईश्वर को या तो ईश्वर के अवतार को जिस तरह का देखने का अ हमको एक हैबिट है कि हां यह भगवान राम है उन्होंने रावण का वध किया और फिर पूरे संसार के ऊपर में उन्होंने राज्य किया यहां पर भगवान कृष्ण है उन्होंने महाभारत के युद्ध के समय उन्होंने नीति प्रदान की पांडवों को पांडवों को जीत दिलाई और फिर धर्म का राज्य पूरे पृथ्वी पर स्थापित किया यह सब जब कहानियां पढ़ते हैं तो हमको लगता है कि हां भगवान राम अवतार है भगवान कृष्ण अवतार है किंतु ठाकुर और मां के जीवन में ऐसा तो क्या है माह्य दृष्टि से यदि देखें तो जो कि उनको अवतार के रूप में चिन्हित करता है अभी चलिए हम लोग जो कुछ लोग हैं आप या तो मैं हम लोगों ने ऑलरेडी ठाकुर और मां को अवतार के रूप में स्वीकार कर लिया है तो उनके जीवन की प्रत्येक घटना का बड़ा ही गहन एक अर्थ अर्थ घटन करने का हम प्रयास करते हैं किंतु ठाकुर और मां के फॉलोवर आज इस जगत में कितने हैं आज मा मान लीजिए भारत की 150 करोड़ की पॉपुलेशन है तो उसमें से चंद लोग होंगे जो कि ठाकुर और माथो अवतार के रूप में विश्वास करते होंगे शायद और बाकी ज्यादातर लोग हां स्वामी विवेकानंद एक प्रोफेट पेट्रियट थे यह तो सभी लोग मानते हैं अभी रिसेंटली जो सब घटनाएं हो रही है उसमें तो सभी को पता चलता है कि स्वामी विवेकानंद का प्रभाव भारतीय जनमानस के ऊपर में कितना है तो उस बात से तो कोई इंकार नहीं करता किंतु स्वामी विवेकानंद इज समथिंग बियोंड प्रोफेट पेट्रियट ही इज द प्रधान सेवक ऑफ ठाकुर एंड मदर हु वेर द अवतार दमसेल्स ये सेकंड स्टेज पर के जाकर के यह स्वीकार करना यह कितने लोग करते होंगे हां शायद लिप सर्विस देते होंगे चलो मैं स्वामी विवेकानंद ने विश्वास करता हूं और स्वामी विवेकानंद ठाकुर पर विश्वास करते थे तो चलो मैं ठाकुर को थोड़ा बहुत लिपस सर्विस दे देता हूं कि हां वो दक्षिणेश्वर में श्री श्री राम कृष्ण थे उनके यह स्वामी विवेकानंद शिष्य थे किंतु बियोंड दैट मेरे जीवन का परिवर्तन मेरे जीवन का गठन क्या मैं कथामृत में दिए हुए उपदेशों के अनुसार करूंगा ऐसे लोग आपको बहुत कम दिखाई देंगे तो अवतार होने का तात्पर्य क्या है यह प्रश्न होता है और इससे भी एक डीपर क्वेश्चन है ये पेन एंड सफरिंग यह दर्द और मृत्यु यह मनुष्य के जीवन के साथ में सतत जो संयुक्त है इसका क्या कोई डीपर मीनिंग है क्या यदि इसका कोई डीपर मीनिंग है इसका एक गहन एक अर्थ है तभी तो हम कह पाएंगे कि इसी वजह से यह ठाकुर और मां के जीवन के साथ में भी इतने गहन रूप से युक्त थे इस बारे में सुंदर कहानी है छोटी सी कहानी है खोखा महाराज की सुबोधा नंद जी की सुबोधा ंद जी उस समय काशी में रहते थे तो काशी में उनका एक भक्त एक दिवस आकर के उनको बता रहा है कि अच्छा मैंने आपको देखा कल रात को ना आप ढ़ बजे रात को 1:3 बजे मेरी गली में मेरी शेरी में आए थे जहां पर वह भक्त रहता है वहां पर और मैंने देखा कि आप उसी जो जिस लोकेलिटी जिस विस्तार में यह भक्त रहते था वहीं पर सुबोधा नंद जी की एक स्त्री भक्त रहती थी पास में ही तो यह भक्त सुबोधा नंद जी को कह रहा है कि महाराज जी मैंने देखा कि कल रात 1:30 बजे आप हमारी वह शेरी में आए थे और वह जो स्त्री भक्त है उसका हाथ पकड़ कर के आप उसको कहीं पर ले जा रहे हैं तो यह देख कर के मुझे बड़ा आश्चर्य हुआ मैंने सोचा कि महाराज जी जब भी इस शेरी में आते हैं तो अवश्य मेरे घर में आए और थोड़ा सा बैठेंगे और मेरे साथ में बात करेंगे ठाकुर और मां की तो आप मेरे घर में आए नहीं वो भी आए तो रात को 1:3 बजे और उस स्त्री भक्त का हाथ पकड़ कर के आप कहीं पर ले जा रहे हैं इसका क्या तात्पर्य है तो अभी सुबोधा अंद जी तो आश्चर्य चकित हो गए वह तो उस रात को वहां पर गए नहीं थे ना ही उस त्री भक्त का हाथ पकड़ कर के उसको कहीं पर ले जा रहे हैं उन्होंने पता किया तो पता चला कि रात ढ़ बजे उस स्त्री भक्त की मृत्यु हो गई थी अभी ये आश्चर्य की बात है कि जिसका मृत्यु जिस समय हुआ उसी समय यह उसके पड़ोसी ने देखा कि खोका महाराज उसका हाथ पकड़ कर के ले जा रहे हैं तो यह तो नेचरली हम अनुमान करेंगे कि यह तो कोई देवी घटना है तो खोका सुबोधा अंद जी जिनको हम खोका महाराज कहते हैं बालक सहज स्वभाव था तो उनका बाल सुलभ स्वभाव इसके लिए खोका शब्द बंगाली है उसका अर्थ है बालक तो यह खोका महाराज बोलकर के वह अपने संग में परिचित है तो खोका महाराज ने कहा कि मुझे तो समझ में नहीं आ रहा इस घटना का क्या तात्पर्य है रात को 1:30 बजे उसका मृत्यु हुआ और मैं उसका हाथ पकड़ कर के वहां से ले जा रहा हूं मुझे इस घटना का तात्पर्य नहीं समझ में आ रहा हो सकता है बाद में मैं तुमको कहीं पर जाकर जद मुझे कुछ समझ में आएगा तो मैं बताऊंगा तो अच्छा य ये घटना का तो वही विराम हुआ उसके कुछ समय बाद खोका महाराज बड़े ही बीमार हो गए बीमार हो गए पूरे शरीर में कष्ट हो रहा है डा जेंट्री उस समय का डा जेंट्री माने के हर किसी को चलते फिरते डा जेंट्री हो जाता था मां को तो हमने देखा बेचारी वह उसी की वजह से वह सिंहवाहिनी के सामने धरना देने के लिए गई थी तो अभी इनको भी यही हालत है डायेंट हो गया है लूज मोशन हो गया है पूरे शरीर में दर्द कर रहा है वो उन्हें किसी भी तरह से उनको शांति नहीं मिल रही वो छट फट छट फट कर रहे हैं अपने बिस्तर में लेटे लेटे और उस समय उनको उस त्री भक्त की बात याद आ गई और बात याद आई और उन्होंने अपने मन में ही मन में क्या सोचा पता है वह भक्त की खोका महाराज के ऊपर में इतनी श्रद्धा भक्ति थी कि खोका महाराज जब भी बीमार होते थे या तो उनको कभी भी किसी भी चीज की आवश्यकता होती थी वह दौड़ी आती थी और महाराज की सेवा करती थी उनके लिए जो पथ्य बनाना जो प्रॉपर डाइट उनको देना वगैरह दवाई वगैरह सब इंतजाम वह करती थी तो खोका महाराज मन में मन में सोच रहे हैं आज मुझे जो इतना कष्ट हो रहा है इतना दर्द हो रहा है तो तुम कहां पे हो उस स्त्री भक्त को उद्देश करके कह रहे हैं तुम कहां पे हो तुम तो हर समय मेरी सेवा इतनी करती थी आज देखो मेरी सेवा करने के लिए कोई नहीं है यह सब तो सब प्रव्रज्या करते थे तो कभी यहां पर कभी वहां पर तो मठ में तो रहते नहीं थे कंटीन्यूअसली तो कहीं पर रह रहे होंगे तो वहां पर ऐसी परिस्थिति थी कि सेवा करने वाला उनकी सार संभाल करने वाला कोई नहीं होगा शायद और खोखा महाराज के मन में यह बात आ गई जैसे ही उनके मन में यह बात आई वैसे ही आठन साल की एक बच्ची प्रकट हुई हवा में से और उनके सामने आकर के खड़ी हुई और उन्होंने कहा कि बच्ची ने कहा कि आपने मुझे क्यों बुलाया है तो खोखा महाराज तो एकदम आश्चर्य चकित हो गए पूछा तुम कौन हो तो उस बच्ची ने उत्तर दिया मैं वही स्त्री भक्त हूं जो कि आपकी भक्त थी और जिसने आप और जिसको कि आपने अभी पुकारा है तो खोखा महाराज तो एकदम आश्चर्य चकित अच्छा अभी वह तो उसकी उम्र तो ज्यादा हो गई निश्चय और यह तो एकदम बच्ची है आठन साल की तो ठीक है महाराज ने कहा कि देखो मेरी तो यह अवस्था है मुझे मेरी संभाल रखने वाला कोई नहीं है तो यह बच्ची छोटी सी अपने दोनों हाथों से महाराज को हवा दे रही है वो महाराज को भी एकदम एक ऐसा कोई दिव्य दर्शन होता है ना तो मन कैसा ये शरीर के कष्ट और दर्द से उर्ध्व चला जाता है तो महाराज को भी थोड़ा सा ऐसा अनुभव हुआ और शीतल हवा से जैसे कि उनका शरीर ठंडा और स्निग्ध हो गया शांत हो गया तो अब महाराज ने उस लड़की को पूछा कि अच्छा तो तो तुम बताओ तो तुम इतने दिन कहां पर थी क्या कर रही थी तो इस बच्ची ने उत्तर दिया कि मैं श्री श्री ठाकुर के पास में थी और उन्हीं की सेवा कर रही थी आप ही ने तो बताया था ठाकुर की सेवा करने के बारे में तो मैं उनके पास में थी और उनकी सेवा कर रही थी तो महाराज ने कहा अच्छा अच्छा मुझे वो बताओ कि उस दिन रात को क्या हुआ था जिस दिन तुम्हारी मृत्यु हुई थी क्योंकि उस पड़ोसी ने तो आकर के कहा था कि मैंने तुम्हारा हाथ पकड़ कर के मैं तुमको ले जा रहा हूं किंतु मुझे तो याद नहीं है मैं खुद तो वहां पर आया नहीं था बताओ उस दिन रात को क्या हुआ था तो ये बच्ची ने पता है क्या कहा कि आप कौन से जन्म की बात कर रहे हैं अभी जब मैंने यह कहानी पढ़ी थी मुझे भी एकदम एक पता है ना कुछ-कुछ सेंटेंस एकदम अपने को टच कर जाते हैं ये देखिए जन्म जन्मांतर की बात है कितने कितने जन्मों से हमारा किसी के साथ में कितना गहरा नाता है इस बच्ची को पता है कि सुबोधा नंद जी के साथ में मेरा एक नाता है भक्त भगवान का गुरु और शिष्या का किंतु कौन से जन्म में व कितने जन्म गए होंगे जहां पर सुबोधनंद जी उनके गुरु होंगे पता नहीं तो ये सेंटेंस सच मिरेकल सेंटेंस उसने पूछा कि कौन से जन्म की बात कर रहे है तो महाराज जी ने बताया कि राची में तुम जब थी उस समय की मैं बात कर रहा हूं मैं भी वहां पर था और हम लोग वहां पर रह रहे थे जद मैंने शुरू में काशी कहा होगा तो काशी नहीं राची ये राची में यह घटना हुई थी तो जो भी राची में तुम जब थी उस समय की मैं यह बात कर रहा हूं तो यह बच्ची ने कहा कि अच्छा मुझे याद आया उस दिन रात को क्या हुआ था पता है इसको खुद को वो यह बच्ची खुद माने उस स्त्री भक्त के रूप में जब थी स्त्री भक्त के जन्म में उस शरीर में जब वो थी उस दिन की उस रात की घटना मुझे याद आई उस रात को मैं भी बड़ी बीमार थी और मुझे इतना दर्द हो रहा था मेरे शरीर में कुछ भी करूं शांति नहीं मिल रही थी कुछ भी करूं यह दर्द जो है वह जा नहीं रहा था जीवन के ऊपर में संपूर्ण रूप से मैं निराश हो गई दर्द बढ़ता ही जा रहा है बढ़ता ही जा रहा है कैसे भी करके जीना अभी सहन नहीं हो रहा उस समय आप मेरे सामने प्रकट हुए आप अर्थात थ खोका महाराज आप मेरे सामने प्रकट हुए और आपने कहा च यहां से तो मैंने भी कहा कि इस तरह का शरीर रख के क्या करना है इस तरह का जीवन लेकर क्या करना है इतना दर्द इतना दर्द कैसे भी करके सुकून नहीं तो छोड़ती हूं इस शरीर को यह शरीर भले ही यहां पर पड़ा रहे तो वह शरीर छोड़ कर के खड़ी हुई और महाराज जी ने उसका हाथ पकड़ा और हाथ पकड़ कर के लेके गए अभी यह दोनों चल रहे हैं चल रहे हैं खोखा महाराज उसका हाथ पकड़ कर के उसको गाइड करके व रास्ते से जा रहे हैं वह भी उनके पीछे जा रही है आधे रास्ते में बहुत लंबा रास्ता था और यह स्त्री भक्त खोका महाराज के साथ में बात कर रही है खोका महाराज ने जो कुछ भी कहा होगा जो भी उपदेश दिए होंगे जो कोई भी आध्यात्मिक इंस्ट्रक्शन दी होगी उसके बारे में कि महाराज जी आपने ऐसा कहा था महाराज जी आपके साथ में यह बात हुई थी वगैरा वगैरा अभी अंधेरा रास्ता मध्य रात्रि आधे रास्ते पर पहुंच गए एकाएक खोका महाराज ने क्या कहा पता है तुम किसके साथ में बात कर रही हो मैं तो खोका महाराज नहीं हूं तो यह तो स्त्री भक्त ये खुद अपने जुबानी से वर्णन दे रही है वोह कहती है मैं तो बड़ी ही आश्चर्य चकित हो गई बड़ी ही डर भी गई हमारे साथ में भी तो ऐसा होगा यदि कोई हमारा आधी रात को हाथ पकड़ कर के अपना प्रियजन लेकर जाता है और आधे रास्ते में मध्य रात्रि है और कोई नहीं है जीवन और मृत्यु की बॉर्डर लाइन पर खड़े और एकाएक कहेगा तुम जिसको तुम मुझे जो समझते हो मैं वो नहीं हूं तो हम लोग कैसे डर जाएंगे तो ये स्त्री भक्त बड़ी आश्चर्य चकित होकर के कहती है तो कौन है आप आप यदि खोखा महाराज नहीं है तो आप कौन है तो खोखा महाराज ने उनके सामने देख कर के क्या कहा पता है मैं वो हूं जिसकी पूजा करने के लिए तुमको खोका ने बताया है खोका महाराज किनकी पूजा करने के बारे में कहेंगे तो यह स्त्री भक्त बड़ी ही आश्चर्य चकित होकर बोलती है तो फिर आपने खोखा महाराज का स्वरूप क्यों धारण किया है यह बताइए तो इन्होंने उत्तर दिया जो उनका हाथ पकड़ करके लेकर आए थे यहां तक कि मैं यदि खोका का रूप धारण नहीं करता तो तुम मुझे पहचानती कैसे तुम मुझ पर विश्वास कैसे करती तो यह स्त्री भक्त कहती है अच्छा अच्छा ठीक है अभी आप अपना सही स्वरूप बताइए तो सही स्वर किसका होगा श्री श्री ठाकुर स्वयं अपना सही स्वरूप धारण किए और यह भक्त स्त्री भक्त उसका वर्णन कर रही है उस रूप में जो शांति जो चंद्र की किरण की तरह स्निग्ध होता जो आशीर्वाद मय वह रूप ऐसा रूप जिसको कि आप वाणी में वर्णन नहीं कर सकते और यह रूप देख कर के मेरी पूरी श्रद्धा भक्ति उनके श्री चरणों में मेरा पूरा जीवन शरणागत होकर के समाहित हो गया यह पूरी घटना का वर्णन करके अभी यह बच्ची बच्ची का रूप लेकर के खोखा महाराज के पास में आई है तो तो महाराज को कहती है कि मैं अभी ठाकुर के ही पास में थी और उन्हीं की सेवा कर रही थी तब मैंने आपकी पुकार सुनी और मैं आपकी पुकार सुन कर के आपके पास में आई तो अब खोख महाराज को पूरी घटना का विवरण जो है वो पता चला कि अच्छा उस रात को ऐसा हुआ था ठीक है तो ठीक है अच्छा है अभी उनको भी मन को शांति देखिए दिव्य दर्शन ऐसी चीजें है कि हमारे शरीर हमारे मन को यह जो शरीर के कहां पर ऊपर ले जाएंगे यह शरीर पंचमहाभूत का पड़ा रहेगा उसके कष्ट उसके दुख उसके दर्द यह आध्यात्मिक अनुभूति के साथ में ही कहां अदृश्य हो जाएंगे यह हजार पेन किलर ले ले उसका जो असर हमारे पर नहीं करेगा इससे ज्यादा असर एक दिव्य दर्शन हमारे शरीर और मन के ऊपर में करता है तो यह पूरी घटना से यह दर्शन से यह पूरी कहानी से खोखा महाराज एकदम मन में एकदम शांति आ गई उन्होंने कहा अच्छा ठीक है तो अभी तुम अपने स्वधा चली जाओ वापस और जिनकी सेवा करती थी उन्हीं की जाकर के सेवा करो और यह स्त्री भक्त भी बच्ची का रूप लेकर जो आई थी वह श्री ठाकुर लोक में वह वापस चली गई श्री श्री ठाकुर के पास में तो देखिए कि हमको लगता है कि जिस युग की जो समस्याएं है सबसे बड़ी समस्या उस समस्या का समाधान करने के लिए अवतार का आगमन होता है वह जो पौराणिक युग था उस पौराणिक युग में यह राक्षसों का यह जो प्रभाव राक्षसों का अत्याचार इतना बढ़ गया होगा कि उस राक्षसों के अत्याचार को काटने के लिए उस राक्षसी शक्ति का दमन करने के लिए हो सकता है कि भगवान को इस तरह से वीर भाव में वीर भाव को लेकर के जन्म धारण करना पड़ा किंतु आज के युग की जो समस्याएं हैं यह हमारे यह ठाकुर जो कहते हैं ना कलिते अन्नगरामम ही शरीर को लेकर के ही है शरीर के विभिन्न दुख कष्ट दर्द यही सब लेकर के हमारा जीवन है आज यह होता है तो यह होता है आज के हवा में आज के पानी में आज की जमीन में इतना पोल्यूशन है इतना सब कुछ पॉइजन है इतना टॉक्सिक केमिकल मिले हुए हैं कि यह जो हम खाना खाते हैं यह जो हम पानी पीते हैं यह जो हवा हम सांस में लेते हैं उतना पॉइजन इसके साथ में मिला हुआ है कि शरीर पहले से ही उसका स्वास्थ्य जो है ना धीरे-धीरे करके बिगड़ता जाता है छोटी-छोटी उम्र में आज लोगों को शुगर हो जाता है हाइपरटेंशन हो जाता है यह कोरोनरी हार्ट डिसीज हो जाता है यह क्या-क्या सब हमको छोटी-छोटी उम्र में हो जाता है और यह तो सिर्फ फिजिकल पेन की बात हुई यह शारीरिक बीमारी की बात हुई यह मानसिक बीमारी ने आज के युग को आज के युवाओं को जिस तरह से घेर करके रखा है इसका सोल्यूशन क्या है यह पेन किलर या तो फिर यह मेडिसिन यह हार्ट का मेडिसिन न किय ब्लड प्रेशर बीपी का मेडिसिन ना यह शुगर का इंसुलिन यह सब है ना हैबिट फॉर्मिंग ड्रग्स है यह जो हेरोइन चरस गांजा यह जो शराब यह जो नशे की चीजें जो थी और है उससे भी ज्यादा डेंजरस यह नशा जो है आजकल दवाई का है दवाई का बिजनेस आजकल दुनिया का सबसे बड़ा बिजनेस है वहां पर 200 300 400 500 पर प्रॉफिट होता है कोई किसी को कुछ कह कह पाता नहीं है और इतना भयानक करप्शन होता है यह जो पूरी नेक्सस इसमें मुली हुई है तो यह जो और हम लोगों के सामने उपाय भी क्या है कुछ भी हुआ यह दवाई ले लो कुछ भी हुआ यह प्रिस्क्रिप्शन लिख दो कुछ भी हुआ इस डॉक्टर को जाकर के उसने यह कुछ बता दिया यह ट्रीटमेंट चालू कर दो और एक बार यह जो ट्रीटमेंट प्रारंभ की जीवन भर उसके भीतर में आप फसे रहे रहेंगे मैंने अपनी नजरों से मेरे जो नाना नानी दादा दादी उन लोगों का जो स्वास्थ्य देखा था कि इतनी बड़ी उम्र में भी बढ़िया मजे से रेगुलर खाना खाते थे कोई उनको दिक्कत नहीं होती थी हम बच्चे लोग जो खाना खाएंगे रोटी दाल बात चावल शाक वही वे लोग खाएंगे घर में खाना भी सब समय मैंने देखा है कि मेरे नाना नानी कभी कोई होटल में गए नहीं कभी बाहर का खाना खाया नहीं हमेशा वही एक ही सिंपल आहार पूरे जीवन भर करते रहे आखिरी घड़ी तक मैं जो खाता था वही उन्होंने खाया है आजकल तो खाने पीने में भी सब समय लग्जरियस हमको हुए मने फैंसी फूड चाहिए बाहर में जाएंगे क्या सब उलट-पुलट खा लेंगे और फिर घर में आकर के डायटिंग करेंगे घर में आएंगे कहेंगे यह तला हुआ नहीं चलेगा यह शुगर नहीं चलेगा यह नहीं चलेगा वो नहीं चलेगा बचपन से ही यह सब चालू हो जाता है तो ये आज के युग का जो रोग है आज के रु युग की जो सबसे बड़ी समस्या है वह है शारीरिक और मानसिक व्याधि और इसका एक ही सॉल्यूशन है आध्यात्मिक प्रगति ईश्वरीय दर्शन ऐसा कोई एक दर्शन जद हो जाए ऐसी एक आध्यात्मिक अनुभूति हो जाए तो हमारा मन कहां इस शरीर को छोड़ कर के ऐसा सुख शांति से विराज होगा ऐसा सुख शांति से रहेगा कि जिसकी हम कल्पना भी नहीं कर सकते तो आज के युग के इस बीमारी के इलाज के लिए इन लोगों के जीवन में भी वही बीमारी वही दुख वही दर्द बार-बार आते रहे और उन्होंने ऐसा नहीं है कि दवाई नहीं ली चलो वैद्य ने जो कहा मां जब दक्षिणेश्वर थी इसी घटना परंपरा में हमने देखा कि डाइजेंस हो गई है तो ठाकुर ने शंभू मलिक को बताया शंभू मल्लिक यह मथुर बाबू के जाने के बाद में ठाकुर का रसदार था तो उसने एक बड़े ही अच्छे वह वैद्यराज को रख कर के मां की चिकित्सा के लिए उन्होंने बड़ा प्रयास किया किंतु उस चिकित्सा से कोई फल नहीं मिला फिर ठाकुर को बहुत ज्यादा टेंशन ना हो इसके लिए मां फिर वहां से चली गई जयराम बाटी तो ऐसा तो नहीं है कि मां ने चिकित्सा नहीं करवाई या तो मां की चिकित्सा का कोई प्रयास नहीं हुआ है हुआ है कि चिकित्सा भी तो सब समय कार्यरत नहीं होगी तो फिर यह जो ये जो मानवीय वैद्य है वह जहां पर उसकी बुद्धि कम पड़ जाएगी उसकी अकल जहां पर रुक जाएगी वहां से यह नारायण वैद्य नारायण हरी रूपी जो वैद्य है उनकी दवाई वहां से प्रारंभ होगी गंगाजल रूपी उनकी दवाई वहां से प्रारंभ होगी ईश्वर य जो नाम है नाम रूपी दवाई वहां से प्रारंभ होगी तो यह जीवन अपना कलयुग में जिस तरह से हम जी रहे हैं उस जीवन के लिए जो दवाई हमको चाहिए वह दवाई देने के लिए इनका अवतरण हुआ है इसीलिए पूर्व पूर्व अवतारों के साथ में हम जब इनको मैच करवाते हैं उनका कंपैरिजन करते हैं तो कंपैरिजन में हमको आसमान जमीन का अंतर दिखता है किंतु एसेंशियल जो है जिस युग की जो समस्या है उसका समाधान करने के लिए ईश्वर का आगमन होना व एसेंशियल बॉटम लाइन सेम है तो आज हीत करफ ओम शांति शांति शांति हरि बोत श्री राम कृष्णा पर

Questions & Answers

मस्तु ये इस बार का जो जत है ना वो योगा स्पेशल रामकृष्ण जत व जो गुजराती मैगजीन यहां से जो पब्लिश होता है तो इसमें योगा स्पेशल इशू है इस बार का आपको मिल जाएगा कुछ दिन में शायद तो उसमें वह आर्टिकल है कि हाउ योगा इंपैक्ट्स हेल्थ यह इसके ऊपर में बहुत सारा साइंटिफिक स्टडी हुआ है और वेस्ट में तो साइकेट्रिस्ट होते हैं या तो फिर यह जो यह पेन मैनेजमेंट बोलकर के पूरा फील्ड है जिसमें कि अभी इसके जो एक्रेडिटेड प्रैक्टिस र जो होते हैं माने ऐसे वैसे वो हार्ड व तांत्रिक पात्र वगैरह नहीं माने जो उसके प्रॉपर जो जनरल फिजिशियन होते हैं यूनिवर्स यूनिवर्सिटी में से डिग्री लेकर आए हुए वे लोग आपको रिकमेंड करते हैं कि आप योगासन कीजिए अभी योगासन इज अ क्रूड फॉर्म ऑफ साधना किंतु फिर भी अभी इतना तो एक्सेप्ट कर लिया कि योगासन मेडिटेशन और प्राणायाम यह तीन ऐसी चीज है विच आर वेरी हेल्पफुल टू यू इन रिलीविंग पेन फिर उसमें तो अभी छोटा सा अभी मैगजीन है सब कुछ इंक्लूड करना मुश्किल नहीं है किंतु अभी जैसे कि वेटरन अमेरिका में ये वेटरन होते हैं ना आर्मी के जवान अभी यह कहां अफगानिस्तान है कहां यह मसूल है ना कि कहां यह इराक है कहां सीरिया है युद्ध के मैदान से फाइट करके वापस आए हैं किसी का हाथ इंप्यूट हो गया करना पड़ा है किसी की आंखें चली गई है किसी को इतना मतलब कुछ ना कुछ इन लोगों को फिजिकल ग्रेवियर इंजरी है सीरियस इ इंजरी है तो वो सीरियस इंजरी का सोल्यूशन क्या है आप पेन मेडिकेशन पर जद हैबिटेड हो जाएंगे तो आपका लाइफ तो गया उस समय यह जो वेटरन अर्थात कि आर्मी के सोल्जर्स उनको डॉक्टर्स रिकमेंड करते हैं कि आप योगा और मेडिटेशन कीजिए ये योगा मेडिटेशन आर्मी वेटरन ऐसा थोड़ा सा भी सर्च करेंगे इतनी सारी स्टडीज हुई है अमेरिका में अमेरिका में इतने सारे एक्रेडिटेड क्लिनिक्स है जो कि योगा और मेडि टेशन को एज ए थेरेपी यह लोग सिखाते हैं तो दिस इज अ वेरी वेल एस्टाब्लिशड अभी यह फैक्ट हो गया है कि पेन मैनेजमेंट में योगा मेडिटेशन फॉर्म्स अ वेरी एसेंशियल पार्ट और ये योगा और मेडिटेशन का जो भूत है पश्चिम को लगाने का वह किसने किया है वह स्वामी जी ने ही किया है भारत में अभी यह अवेयरनेस अभी अभी आ रही है ये आयुष जो है गवर्नमेंट का मिनिस्ट्री वह अभी धीरे-धीरे यह कर रहा है इंडिया में क्या है ना कि हम लोग पश्चिम से 50 साल पीछे चलते हैं तो अभी उन्होंने एक्सेप्ट किया है प्रॉपर उसमें ट्रीटमेंट में तो धीरे-धीरे करके इंडिया में भी आएगा इंडिया में क्या है कि जिसको यह सब चीजों को ना हम लोग धर्म के साथ में जुड़े हुए हैं यह मेरा धर्म है मैं इसको फॉलो कर रहा हूं विदेश में ऐसा है कि इसको रिलीजन से सेपरेट कर दिया है योगा और मेडिटेशन को इसको यह लोग प्योर एक लाइफ साइंस के रूप में देखते हैं तो बोलकर इसको एक एक प्रॉपर साइंस के साथ में कनेक्ट करना इन लोगों के लिए मुश्किल नहीं होता इंडिया में वही प्रॉब्लम हो जाता है मैं तो इस धर्म को फॉलो करता हूं इस भगवान को फॉलो करता हूं इस आश्रम को फॉलो करता हूं या उस गुरु को फॉलो करता हूं वो मुझे ऐसा बताते मैं ऐसा ही करूंगा तो व्हाट एवर एनी टाइप ऑफ साधना इज सॉर्ट ऑफ ए पेन मैनेजमेंट पेन रिलीव टेक्निक किंतु इसका एक साइंटिफिक स्टडी इंडिया में करना इसलिए थोड़ा सा मुश्किल हो जाता है क्योंकि अपनी श्रद्धा और आस्था से यह सब बातें जुड़ी हुई है सो दैट इज वन पॉइंट यहां पे यह हम कैसे बताएंगे कि क्योंकि देखिए यह आध्यात्मिक जगत में वास्तव क्या है और स्वप्न क्या है ठाकुर की वोह फेमस कहानी कि एक किसान का लड़के का मृत्यु हो गया और यह किसान रो ही नहीं रहा है तो उसकी बीवी उसको पूछती है कैसे कठोर दिन इंसान है आप आपका बच्चा का मृत्यु हो गया रो नहीं रहे तो किसान बोलता है मैं स्वप्ने में राजा हुआ था मेरे चार ना पांच ने इतने लड़के हुए थे राजकुमार सब स्वस्थ और इतने हैंडसम अभी सपना चला गया तो वे लोग भी चले गए तो मैं किसके लिए र मेरा ये किसान के लड़के के लिए र ना कि मेरा वो राजकुमार के लिए र तो ये स्वप्न जागृत सुश इसमें क्या सही क्या गलत ये कौन ठीक करेगा है ना तो अभी जो दिव्य चक्षु ठाकुर कहते हैं ना कि साधना करते-करते एक साधना का एक दिव्य शरीर प्रकट होता है बनता है उस दिव्य चक्षु प्रकट होते हैं उससे हम यह दिव्य दर्शन करते हैं तो हम कैसे कहेंगे मेरा यह जगत सही है ना कि वह दिव्य जगत सही है मेरा जो पर्सनल मानना है मेरे ऐसे कुछ कुछ मित्र है या तो फिर थे एक समय कि जिनके साथ में यह एजुकेशन सिस्टम कैसा होना चाहिए मैं यह सब डिस्कस करता रहता था तो उसमें हम लोग यही मेरा जो आइडियाज थे कि देखिए कि बचपन से ही फ्रॉम दी बाल मंदिर या तो फिर केजी हम कहेंगे किंडरगार्डन उसी से हम लोग जिस तरह से लैंग्वेज सिखाते हैं मैथमेटिक्स सिखाते हैं साइंस सिखाते हैं वैसे ही योगा और मेडिटेशन हमको सिखाना चाहिए यह देखिए मैं कहता हूं जैसे पश्चिम में आजकल चल रहा है यह जो योगा और मेडिटेशन को ना धर्म से सेपरेट कर दीजिए बिकॉज दिस आर यूनिवर्सल प्रैक्टिसेस आप अपने मन को शा शांत करें अपने मन को एक किसी ऑब्जेक्ट के ऊपर में एकाग्र करें मन में यह चित्त प्रसाद प्रकट करें मैत्री करुणा मुदिता उपेक्षा यह मेंटल हेल्थ क्या है उसको समझे कि बार-बार किसी एक नेगेटिव चीज के ऊपर में नेगेटिव घटना के ऊपर में सोचने से मेंटल स्ट्रेस खड़ा होता है यह जो साइकोलॉजी है मॉडर्न साइकोलॉजी वो योगा के साथ में कितनी ब्यूटीफुली मैच हो जाती है जिसको आजकल हम स्ट्रेस कहते हैं आजकल के जितने भी शारीरिक व्याधि है पहले ऐसा समझा पहले एक समय था कि जबक शारीरिक व्याधि का कारण था यह बैक्टीरिया या तो वायरस या तो फिजिकल इंजरी आज के मॉडर्न साइंस ने बैक्टीरिया वायरस या फिजिकल इंजरी या जेनेटिक डिफॉर्मेशन उससे जो व्याधि यां प्रकट होती है उसके ऊपर में काफी हद तक कंट्रोल पा लिया है किंतु यह जो साइकोसोमेटिक डिजीज है मन की विक्षिप्त से जो शरीर में प्रॉब्लम्स खड़े होते हैं लाइफस्टाइल डिसीज जिसको कहते हैं उसको आप कंटीन्यूअस रेगुलर मेडिसिन के अलावा इनके पास में कोई सोल्यूशन नहीं है शुगर क्यों होता है यह ब्लड प्रेशर क्यों बढ़ता है ये कोरोनरी आर्ट हार्ट डिसीज जो है वो क्यों होता है वो इसलिए होता है क्योंकि आपके मन में स्ट्रेस है ये स्ट्रेस आपके शरीर पर असर करता है तो ये जो मेंटल स्ट्रेस अर्थात कि किसी भी एक नेगेटिव घटना एक नेगेटिव इवेंट या तो फिर आपके साथ में जिनका नहीं ठीक से रिलेशन है उस व्यक्तियों के ऊपर में उनके बारे में सतत सोचते रहना यह इसका परिणाम तुम मन को इस तरह से डेवलप करें माइंड को इस तरह से ट्रेन करें इस तरह से मेंटल फिटनेस डेवलप करें कि मन को हम अपनी इच्छा अनुसार जिस ऑब्जेक्ट के ऊपर में लगाना चाहे वह लगा सकते हैं यह आजकल लाफिंग क्लब होता है लाफिंग क्लब क्या है सब कुछ-कुछ लोग सुबह सुबह को कुछ लोग किसी पार्क में ठा होंगे कोई एक जोक कहेगा तो बाकी सब लोग हसेंगे लाफ्टर इज द बेस्ट मेडिसिन यदि आप मॉडर्न साइंस जद यहां तक पहुंच गया है तो फिर वहां से ये योगा और मेडिटेशन इज वन स्टेप अहेड ये मैत्री करुणा मुदिता उपेक्षा मन की एकाग्रता यह शारीरिक यह जो भोग है उसको एक तरह से नियमन करना मेरी जिवा का जो भोग है कि सब समय मुझे अच्छा-अच्छा खाना चाहिए उसके ऊपर में थोड़ा सा नियंत्रण बाकी इंद्रियों के जितने भी भोग है उसको धीरे-धीरे करके नियंत्रित करते जाइए मैनेज करते जाइए यह ब्रह्मचर्य वगैरह तो चलो कि बहुत ही हायर लेवल की साधनाएं हो गई किंतु जिसको आजकल खाने पीने में लाइफस्टाइल में मॉडरेशन कहते हैं डिसिप्लिन कहते हैं वो तो कोई भी साइकेट्रिस्ट आपको कहेगा कि मॉडरेशन इज द बेस्ट वे ऑफ लाइफ तो यह मने लाफ्टर इज द बेस्ट मेडिसिन मॉडरेशन इज द बेस्ट वे ऑफ लाइफ फिर यह जो मने फ्रेंडशिप आजकल ये जो साइकोलॉजिकल स्टडी होती है उसमें क्या वे लोग उसका कंक्लूजन क्या है जो कि रेगुलर चर्च में जाता है जिसका एक अच्छा सा हेल्दी फैमिली लाइफ है उसका हेल्थ बाकी सब लोगों से बड़ा अच्छा रहता है दो ग्रुप बना दी है एक ग्रुप का एक हैप्पी फैमिली लाइफ है दूसरे ग्रुप का हैप्पी फैमिली लाइफ नहीं है उसकी फैमिली लाइफ में डाइवोर्स ही है या सिंगल पेरेंट है या तो फिर घर में झगड़े होते रहते हैं दो ग्रुप बना दिए अभी दोनों ग्रुप का लंबे टाइम तक स्टडी करो जिसका हेल्दी फैमिली लाइफ है आगे चल कर के देखेंगे उसका फिजिकल फिटनेस बेटर रहता है दूसरी फैमिली की वजह से तो योगा मेडिटेशन आध्यात्मिकता अल्टीमेटली तो यही है ना कि आप अपनी इंद्रियों के भोग को नियंत्रण में रखिए अपने मन को एकाग्र रखिए आसपास में जितने भी लोग हैं उनको हेल्पफुल होने का प्रयास कीजिए एक स्नेह का संबंध सबके साथ में रखिए ठाकुर को क्या पढ़ी थी कि एक अपने का गठन करके जाते चलो सबने सबको उन्होंने आध्यात्मिक साधना सिखा दी जैसे उन्होंने खुद की है किंतु उनको एक संघ का गठन करना ऐसा उन्होंने क्यों किया उन्होंने खुद ने तो ऐसा किया नहीं था भैरवी ब्राह्मणी के तीन शिष्य चंद्र गिरिजा और श्री श्री ठाकुर तो ठाकुर ने ऐसा क्यों नहीं कहा कि मैं चंद्र और गिरिजा को भी दक्षिणेश्वर में बुला लेता हूं और तीन लोग मिलाकर के एक संघ बनाते हैं ऐसा उन्होंने क्यों नहीं किया उन्होंने यह किया अपने डिसाइल्स के साथ में उन्होंने जो ट्रेडिशनल सिंगल पर्सन साधना होती थी वो तो उन्होंने की किंतु उनके खुद के शिष्यों को उन्होंने ट्रेडिशनल साधना के साथ-साथ में ही संगबिधन जद आप करेंगे स्ट्रंग मतलब उसमें अपने मन को संपूर्ण रूप से डाल देंगे तो आपको और किसी चीज की जरूरत नहीं है किंतु बाकी की जो नेक्स्ट जनरेशन है उनका शरीर और मन 100% दिन रात ईश्वरीय नाम चिंतन गुणगान कीर्तन करें इसके लिए उपयुक्त नहीं है कलित मने य मैं अ अन्न गत प्राण कली में अनगतला है तो ठाकुर को पता है तो यह संघ बनाया इसके लिए कि आपकी मेंटल हेल्थ वोह थोड़ी सी ठीक रहे तो जहां तक आज के साइकेट्रिस्ट पहुंच गए हैं उससे एक ही स्टेप आगे है यह योगा और मेडिटेशन तो मेरा ऐसा सोचना है कि स्कूल में फर्स्ट स्टैंडर्ड से ही योगा मेडिटेशन को साइंटिफिकली इंट्रोड्यूस किया जाए नहीं कि एज अ पार्ट ऑफ एनी रिलीजियस स्टडी जहां पे रिलीजन का नाम आप देंगे धर्म का नाम देंगे तो बात आएगी आपका किसके ऊपर में विश्वास है तो मुझे इस माता जी पर विश्वास है मेरा उस भगवान पर विश्वास है तो फिर वह विश्वास में बात आ जाएगी और झगड़ा चालू हो जाएगा अरे मेरे भगवान है तुम्हारे भगवान से बेटर है बट लीव द गॉड आउटसाइड ऑफ द इक्वेशन फॉर नाउ ट्रीट योगा एंड मेडिटेशन इज अ पार्ट ऑफ साइंटि स्टडीज एंड देन इंट्रोड्यूस इट इन द स्कूल और फिर आप देखिए कि बाय द टाइम बच्चा ग्रेजुएट होता है उसका फिजिकल और मेंटल फिटनेस किस लेवल तक पहुंच जाएगा यह जो इंटरनेशनल योगा डे है ना वो इतना मने बेस्ट एंडेवर मने बेस्ट काम यह गवर्नमेंट ने किया है मेरी दृष्टि से वन मने बाकी सब छोड़ देते हैं किंतु इस पर्टिकुलर पॉइंट की मैं बात करता हूं कि सही में योगा के बारे में अवेयरनेस आज के जगत को देना बहुत ही आवश्यक है खास कर के स्कूल चिल्ड्रन को योगा सिखाना उससे बेटर और कुछ नहीं है योगा मेडिटेशन दोनों स्कूल के बच्चों को सिखाइए उन बच्चों का भविष्य सुधर जाएगा एकदम यह इसमें कोई दो मत नहीं है