Skip to transcript
ClassesSaradakosh

Ma Sarada Life by Sw Gambhirananda ·

स्वामी का पैतृक निवास || श्रीमाँ सारदा देवी : स्वामी गम्भीरानन्द लिखित || 10 Apr 2026

मङ्गलाचरण

ओम स्थापकाय च धर्मस्य सर्व धर्म स्वरूपण अवतार वरिष्ठाय राम कृष्णाायते नमः

भक्तवत्सल श्रीरामकृष्ण और निर्धन स्त्री की प्रेरक कथा

बलराम बाबू के घर में एक विधवा स्त्री रहती थी उसका नाम था भानी तो ठाकुर के प्रति उनकी बड़ी भक्ति थी तो एक दिन हुआ ऐसा कि बलराम बाबू के घर की कुछ स्त्रियां दक्षिणेश्वर जा रही है ठाकुर का दर्शन करने के लिए। तो उन्होंने क्या किया बाजार में से अच्छा अच्छा मिठाई महंगा वाला परचेस किया और ठाकुर को ऑफर करने के लिए वो ले जाने वाली है अभी यह भाणी जो थी बलराम बाबू ने उसको दया करके अपने घर में रखा तो था किंतु वह थी विधवा और थी बड़ी गरीब तो उसके पास में खुद का तो ऐसा कोई रुपया था नहीं कि वह बाजार से अच्छा मिठाई खरीद करके ठाकुर के लिए भेजे वहां पे जो बाकी सब स्त्रियां जा रही थी उनके साथ में तो बेचारी ने क्या किया उसके पास में जो थोड़ा सा अल्प परिमाण पैसा था उससे उसने कुछ सामग्री खरीद की और उसमें से उसने पीठा बनाया पीठे अभी पीठे एक बंगाली आइटम है स्वीट है तो यह बना करके किंतु क्या है कि बेचारी गरीब थी और पैसा तो इतना था नहीं बोल के यह जो पीठे है उसकी क्वालिटी वह इतनी अच्छी नहीं थी। तो उसने अभी क्या है भीतर में बड़ी इच्छा है कि ठाकुर को भेजें ठाकुर को ऑफर करें। किंतु साथ में यह लज्जा भी है कि बाकी जो स्त्रियां इतना अच्छा अच्छा खाना ले जा रही है और उसका जो यह पीठा है वो जो उसकी क्वालिटी तो बिल्कुल खराब है। तो उसने क्या किया? जिस हांडी के भीतर में मिट्टी की जिस हांडी के भीतर में मिठाइयां रखी जाने वाली थी उसमें सबसे नीचे उसने अपना यह मिठाई रख दी और फिर जो बाकी महंगे वाली मिठाइयां है बाकी सब स्त्रियों ने ऊपर में रख दी और फिर यह हांडी लेकर के यह लोग ठाकुर के पास में जाएंगे तो क्या है कि अभी एटलीस्ट भाविनी को यह तो संतोष होगा कि मैंने ठाकुर को कुछ भेजा है मेरे हाथों से बनाया हुआ भले ही ठाकुर चाहे ना खाए क्योंकि हांडी में इतनी सारी मिठाइयां थी और सबसे अच्छी मिठाई सबसे ऊपर में थी। तो ठाकुर को यदि खाना भी है तो ऊपर वाली अच्छी मिठाई तीन चार एक दो खा लेंगे और बाकी हो सकता है कि भक्तों में बांट दे। तो एटलीस्ट ठाकुर को ऑफर करना भी हुआ। एट द सेम टाइम ठाकुर यह अच्छा क्वालिटी नहीं है। वह वाला मिठाई ना खाए। वो भी अच्छा ही है एक तरह से देखें तो तो ठीक है वो भामिनी ने बेचारी ने ऐसा करके वो अपना पीठ है वो जो है वो छुपा करके ठाकुर के पास भेजे अभी यह बलराम बाबू के घर की स्त्रियां दक्षिणेश्वर आई ठाकुर के साथ में वार्तालाप कर रही है प्रणाम वगैरह किया होगा फिर यह जो मिठाई की हांडी है जैसे ही ठाकुर को ऑफर की एकाएक ठाकुर के मन में एक तरह का बालक भाव प्रकट हुआ और जीिद करके कहने लगे कि अच्छा एक काम करो यह हांडी को उल्टाओ और उसमें जो सबसे नीचे वाली मिठाई है वह मुझे खाने को दो। तो बाकी सब स्त्रियां कहती है ठाकुर एकास तरह की बातें क्यों कर रहा है? माने कोई भी आपको आप इसको कोई चीज देंगे किसी को हांडी में भर के मिठाई वगैरह तो कोई ऐसा थोड़ी ना कहेगा कि उसमें से सबसे नीचे वाला मुझे निकाल के दो। वह तो जो ऊपर है वही खाएंगे। ये तो सामान्य लॉजिक है। किंतु नहीं। ठाकुर कहते हैं कि सबसे नीचे वाला जो है मिठाई वही मुझे चाहिए। तो अभी बाकी सब स्त्रियों को पता है कि वह जो नीचे में जो पीठे हैं वो भामिनी ने भेजे हैं किंतु उसका क्वालिटी अच्छा नहीं है। वो ठाकुर खाएंगे तो उनको अच्छा नहीं लगेगा। हो सकता है कि पेट भी बिगड़ जाए। ठाकुर का तो सब सेंसिटिव था ना बहुत कुछ। तो उन्होंने कहा ठाकुर को पहले तो पटाने का प्रयास किया, फुसलाने का प्रयास किया कि अरे आप इस तरह से नीचे वाला क्यों खाते हैं? ऊपर वाला जो है अच्छा अच्छा वो ले लीजिए। किंतु ठाकुर ऐसा जिद करके बैठे हैं बालक भव में आकर के नहीं वह नीचे वाला जो है वही मुझे चाहिए तो फिर बाकी सब स्त्रियां क्या करेगी तो हांडी में से उल्टा करके जो सबसे नीचे वाले जो पीठे थे वो भामिनी ने भेजे थे वो ठाकुर को दिए और ठाकुर बड़े प्रेम के साथ में बड़े आनंद के साथ में उसको आ गए। अभी नेचुरली सब स्त्रियों को तो पता ही है कि ठाकुर तो क्या है कि भक्त के हृदय का जो भाव है वह देखते हैं। सो सबको पता चल गया कि देखिए भामिनी ने सही में ठाकुर के प्रति बड़ी ही श्रद्धा भक्ति पूर्वक इसको भेजा होगा और मन में ही मन में ठाकुर को प्रार्थना की होगी बोलकर के ठाकुर ने वह वाली मिठाई उनकी खाई है ग्रहण की है। तो फिर वे लोग जब वापस आई बलराम भवन में और भानी को बताया कि देखो तुम्हारी मिठाई ठाकुर ने मांग करके खाई है तो उसको बेचारी को मन में इतना संतुष्टि हुई भीतर में से इतना उसको आनंद आया कि देखो कि एक जो गरीब है जिसके पास में देने को कुछ भी नहीं है वह यदि हृदय से प्रार्थना यदि करेंगे ठाकुर को कि हां ठाकुर मेरा यह जो अल्प परिमाण जो मेरा है आपको ऑफरिंग उसको ग्रहण कीजिए। आपके आशीर्वाद दीजिए। तो देखिए कि ठाकुर कैसे नहीं सुनेंगे। सो एक सुंदर घटना। अच्छा अभी मां की लाइफ स्वामी गंभीरानंद जी महाराज द्वारा लिखित उसमें एक नया चैप्टर प्रारंभ हो रहा है। स्वामीर भी अर्थात कि स्वामी अर्थात कि पति ठाकुर उनका घर ठाकुर के घर कामार पुकुर मां वापस

community life (गृहस्थाश्रम) में तपस्या का आदर्श : माँ सारदा

जा रही है। तो उस दिनों की घटना अह तीर्थ यात्रा से वापस आकर के गंभीरानंद जी हमको बता रहे हैं। कल ही हमने थोड़ा सा इसका पूर्व भूमिका के रूप में देखा था कि मां के जीवन में अति व कष्ट के दिन अभी प्रारंभ हो रहे हैं। और इस कष्ट में भी किंतु हम देखेंगे कि भीतर भीतर में ठाकुर के दर्शन सतत चल रहे हैं। भीतर भीतर में जैसे कल गंभीरानंद जी ने कहा नित्य मिलनोत्सव नित्य ठाकुर के साथ में मिलन रूपी उत्सव मां के हृदय में तो चल ही रहा है और साथ में गंभीरानंद जी ने यह भी कहा कि चर्म चक्षुओं चर्म चक्षुओं से भी अर्थात कि इस बाह्य आंखों के द्वारा भी चक्षुओं के द्वारा भी मां को ठाकुर का दर्शन होता था। तो यह दर्शन परंपरा एक तो अखंड है और साथ में ही यह सामाजिक विपर्यय या तो फिर कहेंगे कि यह सामाजिक दुख कष्ट मां के जीवन में है। यह देखिए हम सबके लिए एक सीख लेने की इसमें बात है। हमने हमको तो पता है कि जिस तरह से मैंने ठाकुर मां स्वामी जी के जीवन का एनालिसिस किया है। ठाकुर एग्ेंंपलीफाई आवर स्पिरिचुअल स्ट्राइविंग। ईश्वर प्राप्त करने की हमारी जो आकांक्षा है, मुमुक्षुत्व है, उसको ठाकुर रिप्रेजेंट करते हैं। हम जिस लोगों के साथ में जिस परिवेश में रहते हैं, फैमिली हो ना कि आश्रम हो। हमको तो लोगों के साथ में रहना होगा। लोगों के साथ में इंटरेक्ट इंटरेक्शन करना होगा। एक ही बार माने संपूर्ण रूप से आप समाज को छोड़कर के वन में कहीं रहने को चले जाए तो बात अलग है। किंतु जब तक आप लोगों के साथ में संपर्क करते हैं, संपर्क रखते हैं उस तब तक आपको एक तरह का कम्युनिटी लाइफ लीड करना होगा। तो यह अपने परिवार का कम्युनिटी लाइफ हो ना कि यह आश्रम का कम्युनिटी लाइफ हो ना कि अपना वर्क प्लेस हो। यूजुअली मनुष्य के सामने दो तरह की कम्युनिटी लाइफ होती है। एक तो फैमिली एंड फ्रेंड सर्कल होता है। दूसरा अपना एक वर्क एक एनवायरमेंट होता है। स्टूडेंट है तो आपका एक एकेडेमिक एनवायरमेंट होगा। स्कूल होगा, कॉलेज होगा, ट्यूशन क्लासेस होंगे। तो आप जहां पर भी जाएंगे आपको मनुष्यों के साथ में रहना है। दूसरे मनुष्यों का संग छोड़ के त्याग करके बिल्कुल अकेले आप नहीं रह सकते। तो यह जो कम्युनिटी लाइफ है उसमें भी किंतु देखिए कि हमेशा ऐसा होता है कि मनुष्य को जो सबसे ज्यादा कष्ट देता है ना उसके अपने अपने ही लोग होते हैं। अपने करीबी लोग ही होते हैं जो कि मनुष्य को सबसे ज्यादा कष्ट देता है। आज पाकिस्तान ने भारत पे टेररिस्ट अटैक किया उससे मुझे गुस्सा बहुत आएगा। किंतु मन में जो कष्ट होना है जो नो डाउट वह गुस्सा आएगा क्रोध आएगा बदला लेने की भावना प्रकट होगी जिसका मृत्यु हुआ है एटक में उसके प्रति दुख प्रकट होगा एवरीथिंग इज देयर किंतु जिसके साथ में हम घर कर रहे हैं पति हो या पत्नी हो पुत्र हो ना पुत्रवधू हो मां हो ना कि पिताजी हो चाचा चाची भाई-बहन यह पड़ोसी हो मित्र हो मित्र के मित्र को अपने वर्क प्लेस एनवायरमेंट है। अपने बॉस है, अपने कलीग्स है, अपने एंप्लाइजज़ है। यह जो जिन लोगों के साथ में हमको डे टू डे इंटरेक्शन करना होता है, यदि वह हमारे साथ में बैड बिहेवियर करना शुरू कर दे, तो फिर मन को जो कष्ट होता है, वह एक पूरा डिफरेंट लेवल पे ही होता है। और ऐसा रेयरली कोई व्यक्ति आपको मिलेगा वो इस तरह की कम्युनिटी में रहता है जहां पर सब कुछ उसके अनुसार चल रहा हो। कोई राजा होता है बड़ा या तो कोई ट्रिलियनर बिलियनर मिलियनर यह लोग सब होते हैं तो शायद हो सकता है वे लोग उनके आसपास में जो लोग रहते हैं उनको मैनेज कर पाए क्योंकि क्या है खुशामदखोरों की एक तो बड़ी ये होती है ना एक बड़ी टीम रहती है ऐसे लोगों के साथ में तो वे लोग तो शायद इस तरह से अपने को खुशामदखोरों से घिर करके रख सकते हैं तो एक दिन ठाकुर इसको मिलने को गए थे यदुम मल्लिक मोस्ट प्रोबेबबली तो ठाकुर कहते हैं उसको मुंह पे कहते हैं तुम यह सब खुशामदखोर को अपने पास में क्यों रखते हो माने ऐसे जो बड़े लोग होते हैं ना धनी लोग होते हैं उनके आसपास में इस तरह से उनकी चाटुकारिता बांग्ला वर्ड है उनको उनकी प्रज़ करके उनकी चमचागिरी करके उनकी प्रशंसा करके अपना कोई बेनिफिट निकाल लेती है तो ऐसे लोगों को वो जो बड़े लोग जो होते हैं ऐसे लोगों से घिरे हुए रहते हैं क्योंकि क्योंकि क्या है पता है इसके पीछे का साइकोलॉजी क्या है कि यह जो रियल कम्युनिटी लाइफ है उसमें कष्ट आपको मिलना ही मिलना है। ऐसा कोई कम्युनिटी नहीं इस जगत में जो कि 100% मेरे मेरी इच्छा को पोषण करता हो। मेरे ईगो को पोषण करता हो। 100% मुझे खुश करने के लिए वह रहता हो। ऐसा संभव ही नहीं। तो फिर यह बड़े लोग अपने मन को ज्यादा कष्ट ना मिले इसलिए इस तरह से खुशामदखोरों से घिर करके रहते हैं। तो ठाकुर ने पूछा तुम ही भांड रखो कहो इस तरह के खुशामदखोर को क्यों रखते हो? तो वो उत्तर देता है मल्लिक कौन सा मलिक भूल गया मोस्ट प्रोबेब्ली यदु मलिक वो कहता है तुम ही उद्धार करवे बोले तुम इन लोगों का उद्धार करोगे तो इसलिए मुझे चिंता नहीं है और ज्यादा कुछ [हंसी] तो देखिए कि ये बड़े लोग जो है ये लोग इस तरह से खुशामदखोर रखते हैं अपने आसपास में वो अपने को किसी तरह से एक तरह से क्या कहेंगे कि शेल्टर में रख सकते हैं प्रोटेक्शन में रख सकते हैं कम्युनिटी लाइफ में किंतु ज्यादातर लोग जो है हम हम लोग हम लोग इस तरह की खुशामदखोरों से या इस तरह से लोगों से अपने को गिर कर नहीं रख सकते जो कि हमेशा हमारी इच्छा के अनुसार कार्य करें या तो हमारी पसंद के अनुसार कार्य करें। तो क्या है कम्युनिटी लाइफ का अर्थ ही है कि थोड़ा बहुत कष्ट हमको मिलना है जो हमारे सबसे तकरीबी लोग हैं जो हमारे सबसे करीबी लोग हैं जो कि हमारे सबसे इंटिमेट रिलेशन रिलेटिव्स हैं या तो फ्रेंड्स हैं उनसे कष्ट तो हमको मिलना ही है। तो मां का जीवन देखिए जैसे ही मां कामार पुकुर आगमन करती है। तभी से यह जो फ्रेंड्स, यह जो रिलेटिव्स यह फ्रेंड्स तो मां के जीवन में मां की सहेलियां बहुत थी। एक उनकी सहेलियां मां को मिलने के लिए आई भी थी वहां पे दक्षिणेश्वर में। सो दैट इज अनदर मैटर। किंतु ये जो रिलेटिव्स है मां के और फिर यह बाकी भक्तगण जो कि बाद में आएंगे मां के पास में मां का आशीर्वाद ग्रहण करने के लिए। तो उन्होंने मां को कहीं कम कष्ट नहीं दिया है। इवन भक्त भी आते थे तो ऐसा नाटक करते थे कुछ-कुछ कि मां को बेचारी को म बड़ी परेशानी होती थी। सो ऑल दो स्टोरीज नाउ बिगिंस कि एक कम्युनिटी लाइफ में कैसे रहा जाए। आपके आसपास के जो लोग होंगे आपको कष्ट देंगे। देखिए सभी लोग कष्ट नहीं देंगे। किसी किसी के आगमन से आपको बड़ा आनंद आएगा। किसी किसी के साथ में वार्तालाप करने से आपको बड़ी खुशी होगी। यह जो शरद महाराज है, स्वामी जी है, यह राजा महाराज है, यह राममई महाराज वगैरह जो मां के सेवक थे उनके आगमन से जय राम बाटी में या तो फिर मां जब कोलकाता जाएगी, उनके साथ में उन वो लोग जब मां को प्रणाम करने को आएंगे तो मां को कितना आनंद होता था। तो आनंद भी है और दुख भी है। हंसी भी है, रुलाई भी है। यही है संसार। यही है कम्युनिटी लाइफ। इसके अलावा आप यदि यह कहेंगे कि मुझे एक ऐसी कम्युनिटी में रहना है। मुझे एक ऐसे फैमिली में रहना है जिसमें मेरे फादर हो ना कि मदर, हस्बैंड हो ना कि वाइफ, सन हो ना कि डॉटर, भाई हो ना कि बहन, चाचा हो ना चाची। सभी लोग मेरी इच्छा के अनुसार मेरी पसंद के अनुसार कार्य करें। मेरी पसंद के अनुसार मेरे साथ बिहेव करें तो यह कभी नहीं होने वाला। तो यह तो एक हो गया कि कम्युनिटी लाइफ दुख और आनंद कष्ट और हंसीखुशी दोनों से भरी हुई है। इस कम्युनिटी लाइफ में एक आदर्श किस तरह से स्थापित करना है। किस तरह से अपना जो आध्यात्मिक जीवन है, अपनी आध्यात्मिक यात्रा है, अपना यह जो मुमुक्षत्व है, उसको बनाए रखना है। एट द सेम टाइम कम्युनिटी में रहना है। यहां पे भी देखिए हम लोग आश्रम में रहते हैं। आप लोग जो साधु संग करते हैं नियमित रूप से आपको पता ही होगा कि ऐसा कोई आश्रम नहीं कि जहां पे कोई एक साधु यह कहे कि यहां पे सब कुछ अच्छा है। ये अच्छा बुरा और यह बुरा मेरी दृष्टि से है। दूसरे लोग कहेंगे कि भाई तुम्हारे साथ में रहकर के हमको कष्ट हो रहा है। तो फिर हमको यह भी तो सोचना है कि मेरा खुद का बिहेवियर दूसरों को कितना कष्ट देता है। क्योंकि अल्टीमेटली तो यही है। आप 10 लोगों के साथ में रहते हैं और दिन रात यह सोचते हैं कि यह ऐसा है, यह ऐसा है, वह ऐसा है। तो फिर आप उसको जाकर पूछिए कि अच्छा मैं कैसा हूं। वो आपको उसी लैंग्वेज में उत्तर देगा जिस लैंग्वेज में आप उसके बारे में सोच रहे हैं। तो क्या है कि अल्टीमेटली तो अपने ऊपर में ही आ जाता है। कम्युनिटी लाइफ इज अ ग्रेट लर्निंग अपॉर्चुनिटी। अल्टीमेटली तो वेदांत क्या है? वेदांत कहता है कि हमको अपनी जो दृष्टि है, अपना जो रिफ्लेक्शन है, वह भीतर में घुमाना है। अपना यह जो एनालिटिकल कैपेबिलिटी है, उसको भीतर में घुमाना है। अपने को एनालाइज करना है। अपने ऊपर में रिफ्लेक्शन करना है। अपने अपने खुद को हमको डिसेक्ट करना है। डिसेक्ट करके देखना है कि हमारे भीतर में क्या है। भीतर में जितना भी कचरा है उसको काट करके फेंक देना है। मान लीजिए आप जंगल में अकेले रह के तपस्या करते हैं। आपके पास में यह जानने का अपॉर्चुनिटी नहीं आएगा। समझने का ओपोरर्चुनिटी नहीं आएगा कि मेरे खुद के नेचर में कितना एंगुलरिटीज है। मेरे खुद के भीतर में कितना काम, क्रोध, मद, लोभ, मोह, मत्सर, षड, भरे पड़े हैं। यह हमको तभी पता चलेगा जबकि हम कम्युनिटी में रहते हैं। कम्युनिटी में रह के दूसरों का हमारे साथ में जो बिहेवियर है, उसको देखकर के ही हमको समझ में आएगा कि हमको अपने को अभी भी इंप्रूव करने की कितनी आवश्यकता है। दो

दो प्रकार के साधक—दूसरों को दोष देने वाले और स्वयं को सुधारने वाले

तरह के लोग होते हैं। एक तरह के लोग हैं। जैसे ही उन वह किसी से नाराज हो जाएंगे। जैसे ही वह थोड़े से दूसरों का उनको बिहेवियर अच्छा नहीं लगेगा। साथ में ही वो सबको गाली देना सबकी निंदा शुरू करेंगे। और दूसरे टाइप के लोग हैं, साधक लोग जो है वे लोग यदि ऐसा होगा कि दूसरे वाले सामने वाले का बिहेवियर मेरे साथ में अच्छा नहीं है तो यह जो पूरा एनालिटिकल उसकी ये जो सेंस है ना वह अपनी ओर घुमाएगा और यह देखना शुरू करेगा कि भाई मेरे में कहां पे कमी रह गई है कि सामने वाले को मेरे साथ में बदसुलकी करनी पड़ती है। सामने वाले को मेरे साथ में मिस बिहेव करना पड़ता है। देखिए एक तो होता है एक्सप्लइटेशन। जो लोग एक्सप्लइटेशन करते हैं लोगों का कमजोर लोगों का उनकी तो बात अलग है। किसी के साथ में आप एक्सप्लइटेटिव रिलेशनशिप में है तो अब जैसे एक लेडी यहां पे आई थी मेरी ऑफिस में मुझे मिलने के लिए। तो उसने कहा कि मैं योगा वगैरह सीखना चाहती हूं। तो ठीक है। मैंने थोड़ा सा बताया यहां पर योगा क्लासेस होते हैं। एक टीचर आते हैं बाहर से। अच्छा है वो लड़का बहुत अच्छा सिखाएगा और मेडिटेशन के क्लास होते हैं यहां पे वगैरह-वगैरह मैंने थोड़ा सा बताया फिर मैंने पूछा कि फिर वो मुझे पूछने लगी ये ठाकुर मां स्वामी जी के बारे में तो यह तो फिर एक पूरा डिफरेंट टॉपिक स्टार्ट होता है वो एक क्या है फिर भी योगा मेडिटेशन को आप सेुलर रूप में लोगों को बता सकते हैं किंतु एक बार आध्यात्मिकता की इनर लाइफ की बात प्रारंभ की ठाकुर मास्वामी जी की तो वी आर स्क्वली विद इन द टेरिटरी ऑफ रिलीजन एंड स्पिरिचुअलिटी। तो मैंने थोड़ा सा पूछा कि आपका बैकग्राउंड क्या है? वह बताइए। तो उसने कहा कि शी इज मैरिड। वह एक बड़ी इंटरनेशनल कंपनी में प्रोजेक्ट मैनेजर है बेंगलुरु में। कुछ दिनों के लिए यहां पे आई है। फिर वह चली जाएगी। तो मैंने कहा तो यू आर वेरी फॉरर्चूनेट कि आप इतना पैसा भी है। आपके पास में इतना टैलेंट भी है और फिर आप योगा मेडिटेशन सीखना चाहते हैं। यू आर वेरी फॉरर्चूनेट। जो मैंने ऐसा कहा तो इमीडिएटली फिर उसने बेचारी ने अपनी आत्मकथा कहना प्रारंभ किया। उसने उसका जिसके साथ में मैरिज हुआ है वह उसको बहुत ही अब्यूज करता है। उसको मारता है। उसको कमरे में पुर करके रख देता है। ऐसा सब मैं तो सुनकर के ऐसा आश्चर्यचकित हो गया। हम लोग न्यूज़ पेपर में यह सब देखते हैं, सुनते हैं। टीवी में यह सब न्यूज़ में देखते हैं। किंतु नजर के सामने ऐसा कोई केस देखना देखिए मैंने रांची में बहुत काम किया। कष्ट क्या है मुझे पता है वहां पर यह जो यंग एज से ही लड़के लड़कियों को वहां जो माइन होती है ना कोयले की माइन ऐसा कुछ वहां पर काम करना पड़ता है वो जो डस्ट लंग्स के भीतर में जाएगी उनका बड़ी ही यंग एज में डेथ हो जाएगा 30 35 साल की उम्र में ही और फिर आप उनको यह करेंगे ऑटोप्सी करेंगे और उनके लंग्स ओपन करके देखेंगे देखिए पूरा भीतर से काले हो गए हैं। सो यह सब कष्ट मुझे पता है क्या है? किंतु ये जो सांसारिक कष्ट जो है ना जो लोग एक मिडिल क्लास एक फैमिली में से आते हैं नॉर्मल फैमिली में से हमने इस तरह का कष्ट कभी नहीं देखा फैमिली लाइफ में। तो मुझे इतना ये हुआ शौक हुआ। मैं मैंने कहा अरे बाप रे ऐसा भी होता है सब। ऑफ कोर्स हम पढ़ते हैं न्यूज़पेपर में नजरों से कभी नहीं देखते। तो देखिए कि वो मुझे फिर पूछ रही है कि मुझे क्या करना चाहिए? मैंने कहा देखिए आपको इमीडिएटली डिवोर्स ले लेना चाहिए। अभी आपको पुत्र संतान या नहीं हुआ है। माने अभी तक तो आप लड़का लड़की नहीं हुए हैं। तो क्या है कि अभी आप डिवोर्स लेके एक सेपरेट लाइफ स्टार्ट कर सकते हैं। एक बार लड़का या लड़की हो गया तो फिर यह फैमिली लाइफ में से निकलना बहुत मुश्किल है। और मैंने कहा इस तरह का आदमी जो कि एक असहाय स्त्री के ऊपर में हाथ उठाता है। उसका किसी जन्म में कुछ होने वाला नहीं। यह इसको आप बोलेंगे धर्म के रास्ते पर ले आकर के उसका थोड़ा सा हृदय परिवर्तन करें। यह लोग राक्षस जैसे हैं। वह जो एक दाना काली जो शराब पी के घर आता था, अपनी पत्नी को परेशान करता था और वह फिर मां के पास में गई और मां ने उसको बिल पत्र पे वो लिख के दे दिया वगैरह वो वो एक लेवल की बात है। यह जो एक नॉर्मल लेवल पर हम लोग रहते हैं यदि आपसिव रिलेशनशिप में है तो उसको छोड़ के निकल जाना ज्यादा उचित है। तो एनीवे वो लड़की फिर से कभी आई नहीं। वो आश्रम में ना ही वह योगा मेडिटेशन का क्लास किया। सो एनीवे दैट इज अब हम क्या कर सकते हैं इससे ज्यादा किंतु देखिए वो जो एक अब्यूसिव रिलेशनशिप होती है पुट दैट असाइड वो उसमें आपको निकल जाना ज्यादा उचित है किंतु एक जो नॉर्मल रिलेशनशिप होती है अपने सभी के घरों में तो क्या है कि कोई ना कोई ऐसा पागल जैसा बिहेवियर करेगा ही करेगा जिससे कि हमारे मन को बहुत कष्ट होगा। मैंने अपने खुद के फैमिली में यह सब कुछ देखा है। दूसरों के फैमिली में भी यह सब देखा है। अब और क्या है छोटी-छोटी चीजों को लेकर के आप ऐसा नहीं है कि फैमिली तोड़ के आप निकल जाए। यह भी संभव नहीं। राइट? अब कहां जाएंगे? सब जगह पे तो सेम ही है। फिर हमारे यहां पे भी एक आश्रम से ट्रांसफर ले दूसरे आश्रम में गए। वहां अच्छा नहीं लगा तो तीसरे में गए। अब कितने आश्रम चेंज करेंगे? सभी आश्रम में प्लस माइनस अच्छा बुरा कोई किसी के साथ में अच्छा पटता है किसी के साथ में नहीं अच्छा पट्टा दिस इज एवरीवेयर आप एक समय आएगा कि आपको अपने को फिर मॉडिफाई करना अपने को रीइजीनियर करना प्रारंभ करना होगा भीतर से ही एक फ्लोर रेडी होना चाहिए। इस फ्लोर के नीचे हमको गिरना नहीं है। यह जो हमारे एक आचार्य थे अह आशुतोष महाराज वो बाद में निकल गए संघ छोड़कर के किंतु आशुतोषंद जी सॉरी आशुतोषंद जी सो वो संघ छोड़कर के निकल गए बाद में किंतु वो उस समय हमारे आचार्य थे। अभी वह वहां पर रह रहे हैं। वो जो अरुणाचलम है ना यह रमण महर्षि का वहां पर वह रह रहे हैं। किंतु उस समय हमारे आचार्य थे तो वह एक बहुत अच्छी बात कहते थे कि देखो तुम लोग जप ध्यान करके कहते हो कि सिर्फ जब ध्यान करके रहना आध्यात्मिक जीवन में तो ऐसा करके मत करो क्योंकि क्या है सब समय आप जब ध्यान करके नहीं रह सकते हैं। कुछ समय तो आपको जब ध्यान रोकना पड़ेगा। उस समय ना आपका जो माइंड है ना ऐसा ना हो जाए बिल्कुल गड्ढे में गिरे तो आपको एक मिडिल लेवल पर माइंड को स्टॉप करने के लिए रीडिंग का हैबिट बनाना है। यह रीडिंग का हैबिट जब मैं जब ध्यान नहीं कर रहा हूं तो रीडिंग कर रहा हूं। तो क्या है जब ध्यान करते-करते तो माइंड काफी ऊपर उठ गया। किंतु फिर जैसे ही यह बंद किया तो ऐसा ना हो जाए सीधा गड्ढे में जाके गिरे। तो बीच में कहीं पे अटक जाए उसके लिए रीडिंग का हैबिट। हालांकि वो हमारे एकेडेमिक मोनेस्टिक लाइफ के कॉन्टेक्स्ट में कह रहे थे। किंतु यह जो फ्लोरिंग का जो कांसेप्ट है एक फ्लोरिंग हमारा चाहिए। एक बेस लाइन चाहिए जिसके कि नीचे मन गिरे नहीं। इसके लिए ना हमने हमको अपने को रीइजीनियर करना पड़ेगा। वरना क्या होगा? हम जिस कम्युनिटी में रहते हैं, जिस फैमिली लाइफ में फैमिली या आश्रम या वर्क प्लेस या तो फिर अपना एकेडेमिक एनवायरमेंट जहां पे भी जाएंगे अच्छा बुरा प्लस माइनस पॉजिटिव नेगेटिव सब जगह पे यदि हम साधना करके अपने मन को एक लेवल पे ना लेके आए तो फिर क्या होगा? अपना मन जो है ना सीधा सीसो करेगा। सीसो अर्थात क्या है? पता है माने कभी एकदम माने आनंद की ऊंचाई पर चला जाएगा। कभी बिल्कुल डिप्रेशन के गड्ढे में जाकर डिप्रेशन हताशा रूपी गड्ढे में जाकर के गिरेगा। और यह बहुत सारे लोगों के लाइफ में होता है। इसको कभी-कभी ना मेनिक डिप्रेसिव साइकोसिस भी कहते हैं। अर्थात कि कभी खुश हो गए तो इतने खुश हो गए और यदि डिप्रेस हो गए तो इतने डिप्रेस हो गए कि सुसाइड के बारे में सोचना शुरू करेंगे। तो यह जो आपका जो वाइल्ड स्विंग जो है अपने मूड में अपने बिहेवियर में वह नहीं आना चाहिए। एक फ्लोरिंग रहना चाहिए। बियों्ड दिस आपको गिरना भी नहीं है और बियों्ड दिस आपको अपने मन को ज्यादा उठने भी नहीं देना है। यह आश्चर्य की बात है। किंतु यह बहुत इंपॉर्टेंट है। स्वामी जी कहते हैं कि जो लोग ठाकुर के साथ में नृत्य करते थे ऐसे लोगों को स्वामी जी ने अच्छे से ऑब्जर्व किया है। उन्होंने देखा है कि जो लोग भाव की एक्ससी में बहुत ज्यादा आ जाते हैं ना बाद में ही उनका इतना ही चरित्र का पतन होता है। तो यह बहुत ज्यादा स्टेटिक हो जाना एक बहुत ही ज्यादा इसको क्या कहते हैं ना एडिक्शन कहते हैं। एडिक्शन क्या है? एडिक्शन है कि हमको सब समय एक्साइटमेंट चाहिए। हमको सब समय ऐसा कुछ बूस्ट चाहिए अपने मूड को। यह बूस्ट यदि नहीं मिलेगा तो क्या होगा कि मैं एकदम डिप्रेशन में चला जाऊंगा। इसको कहते हैं एडिक्शन। तो ये जो भाव का भी एडिक्शन हो जाएगा। यदि आपका एक फ्लोरिंग रेडी नहीं है तो। तो यह फ्लोर है वो है ऑब्वियसली काम कांचन त्याग किंतु वो तो एक

जहाँ शत्रुता है, वहाँ शांति नहीं। पहले करें मित्रता, फिर करें ध्यान।

म प्रॉपर काम कांचन त्याग तो एक लंबी यात्रा है किंतु क्या है कि एक तरह का मॉडरेशन होना चाहिए अपने बिहेवियर में लोगों के प्रति करुणा सहानुभूति होनी चाहिए। यदि मेरा किसी के साथ में नहीं भी पट रहा है। मैं कभी-कभी मेडिटेशन सिखाता हूं तो मैं यह कहता हूं कि मेडिटेशन का प्रारंभ कीजिए। उस लोगों को स्मरण करके कि जिन्होंने आपको सबसे ज्यादा कष्ट दिया है और फिर उनके प्रति आप अपने आशीर्वाद भेजिए। आप कहिए ईश्वर को प्रार्थना कीजिए कि मैंने जितना पुण्य ग्रहण किया है उन सबको दे दो कि जिन्होंने मुझे इतना कष्ट दिया है और ऐसा करके आप यह अकाउंट क्लोज कर दीजिए। वरना क्या होगा कि आप उनके साथ में विद्वेष भाव रखकर के जप में ध्यान में प्रवेशने का प्रयास करेंगे। प्रॉब्लम क्या होगा कि भीतर में जैसे ही आप थोड़ा सा प्रवेश किया साथ में ही सबसे पहले उसी का चेहरा दिखाई देगा। ठाकुर का चेहरा बाद में दिखाई देगा। सबसे पहले उसका चेहरा दिखाई देगा। ठाकुर के साथ में वार्तालाप बाद में होंगे। सब सब सबसे पहले उसके साथ में झगड़ा प्रारंभ हो जाएगा। तो जिसके साथ में अपना एनिमिटी है, जिसके साथ में अपना विद्वेष है, जिसके साथ में अपनी शत्रुता है, सबसे पहले ध्यान में प्रवेश करने से पहले उनको याद करके कहिए कि तुम्हारा जितना भी दोष है, मेरी दृष्टि से अभी वह कहेगा कि मेरा दोष है। मैं कहूंगा उसका दोष है। सो मेरी दृष्टि से तुम्हारा जो भी दोष है सब मैं क्षमा करता हूं। मैंने जितना भी पुण्य जप ध्यान करके अभी तक बटोरा है सब तुमको अर्पण करता हूं। ठाकुर को प्रार्थना करता हूं। ठाकुर उसका कल्याण करो। तो फिर ऐसा करके फिर आप ध्यान में प्रवेश कीजिए। वो अकाउंट क्लोज कर दीजिए। यदि वह अकाउंट ओपन है और मैं ध्यान करने का प्रयास कर रहा हूं। आध्यात्मिक जीवन में प्रवेश करने का प्रयास कर रहा हूं। वह कभी समाप्त नहीं होगा। यह जो अमेरिका में एक अल्कोहल एनोनिमस करके है तो उसमें क्या होता है अभी ओरिजिनली बनाया गया था अल्कोहल का यानी कि शराब का यह जो एडिक्शन है उससे मुक्त होने के लिए बाकी बाद बात बादबाद में सब तरह के एडिक्शन से मुक्ति के लिए लोग प्रयास कर रहे हैं तो उसमें क्या है एक कांसेप्ट है कि यदि आप ये अल्कोहल से मुक्त होने का प्रयास करते हैं ना लोग एडिक्शन में जाते क्यों हैं फ्रस्ट्रेशन की वजह से तो फ्रस्ट्रेशन को माने उन लोगों का साइकोलॉजी बड़ा क्लियर है। देखिए एकदम साइकोलॉजी पकड़ पकड़ करके एडिक्शन से मुक्ति आपको दिलवाएंगे। फ्रस्ट्रेशन है ना जीवन में जीवन में डिप्रेशन है तो अदरवाइज तो एक नॉर्मल पर्सन देखिए विदेश में वैसे तो सभी लोग अल्कोहल सेवन करते हैं। वहां पे तो नॉर्मल है क्योंकि ठंड इतना पड़ता है। तो वो ना कल्चर का पार्ट है। सो ऐसा नहीं है कि आपको संपूर्ण रूप से बंद कर देना है अल्कोहल सेवन। वे लोग ऐसा इंसिस्ट नहीं करेंगे। किंतु ये जो एडिक्शन जो था एक्सेसिव अल्कोहल का जो सेवन कर रहे हैं और फिर उससे आपके फैमिली लाइफ में वर्क लाइफ में जो डिसररप्शन खड़ा होता है उससे बचना है। सो दैट इज व्हाट देयर एंटायर सिस्टम इज। तो और यह एक्सेसिव शराब का सेवन कब करेंगे? आप जीवन में फ्रस्ट्रेशन है, जीवन में गोल नहीं है, पपजलेस है। या तो फिर किसी के साथ में ऐसा एनमिटी हो गया है जिसके प्रति मन में सब समय विद्वेष का भाव रहता है। तो इन लोगों का एक कांसेप्ट क्या है पता है? शराब छोड़ना है ना शराब छोड़ने के जो स्टेप्स है उसमें एक स्टेप है कि जिसको आपने गाली दिया है, जिसके साथ में आपने फाइट किया है, जिसके साथ में आपने मिस बिहेव किया है, सबको जाकर के आप एपोलॉजी आप उनके पास में मांगिए। उनके फॉरगिवनेस कि हमको जाकर के कहिए कि मैंने आपके साथ में मिस बिहेव किया उसके लिए आप मुझे क्षमा कर दीजिए। तो म सी द साइकोलॉजी ऑफ़ दिस कि आपको वो अकाउंट क्लोज करने होंगे एडिक्शन से मुक्ति पाने के लिए। वरना तो फिर अभी आपने यह मीटिंग वगैरह अटेंड किया। कुछ इंस्पिरेशनल क्लासेस अटेंड किए। इंस्पिरेशन इंस्पिरेशनल टीचर्स को सुना तो फिर क्या है कि उस समय तो मुझे लगा हां चलो अभी तो बस मुक्ति हो ही गई शराब से किंतु फिर पता है ना वो ठाकुर की कहानी कि गंगा में स्नान करने को जाते हैं पाप वगैरह जो है वो पेड़ के ऊपर में बैठे रहते हैं जैसे ही गंगा में से बाहर निकले वो फट करके पाप वगैरह आपके सर पर आ करके बैठ जाएंगे तो ये डिप्रेशन फ्रस्ट्रेशन एनमिटी वगैरह जो है आप इंस्पिरेशनल क्लासेस अटेंड करेंगे तो तब तक आपका सब ठीक हो जाएगा| जैसे ही क्लास समाप्त हुआ बाहर निकले फिर से वह सर पे बैठ जाएगा। तो क्या है अकाउंट क्लोज करना है। सब एक के बाद एक अकाउंट क्लोज कर रहे हैं। सो इन दैट प्रोसेस कि क्षमा मांगनी है सबके पास जाकर के। आपने किसके साथ मिस बिहेव किया जाकर के कहिए कि आप मुझे क्षमा कर दीजिए। मेरा गलती था। मेरा गलती नहीं भी है। तो भी मेरा गलती है। बोल के वह अकाउंट क्लोज करना है। सो दैट इज़ वन ऑफ़ देयर टेक्निक। सो सी कि यहां पे भी आध्यात्मिक जीवन में भी ये जो कम्युनिटी लाइफ है हमको सबसे ज्यादा कष्ट जो देता है वो कम्युनिटी लाइफ ही है। देखिए पैसों का कष्ट एक है। इकोनॉमिकल एक कष्ट है। एक सिविलाइजेशनल लेवल का कष्ट है। जैसे कि देश में अभी अब जैसे कि यह वहां वॉर हो रहा है। यहां पे वो खाना बनाने के लिए गेस नहीं मिल रहा है। सो वो तो एक हो गया सिविलाइजेशनल लेवल का। यह पेंडेमिक आ गया। फिर ये कहीं पर क्लाउड बस्ट हो गया, सुनामी आ गया। दी आर म वो कॉस्मिक लेवल के कष्ट तो है ही है किंतु साथ में ही यह जो इंटमेट लेवल पर जो कष्ट है उसका निर्वाचन माने उसको उससे मुक्ति कैसे प्राप्त करना उसके साथ में डीएल कैसे करना उसके भीतर में रहना कैसे और उसमें भी रह के भी अपने को एक आध्यात्मिक ऊंचाई पर कैसे ले जाना यह मां का जीवन जो है वि इज एग्ेंपलरी इन दिस मैटर तो यहां से इस चैप्टर से जो वो वो सब कहानियां है मां के जीवन की जो कि हम सभी लोग सुनते आए हैं। सुनकर के हृदय को सांत्वना मिलती है। वह सब कहानियां अभी यहां से प्रारंभ होती है।

कामारपुकुर की यात्रा से पहले—माँ सारदा का दक्षिणेश्वर दर्शन

क्या कहते हैं गंभीरानंद जी महाराज? श्री मां कोलकाता आगमनांतर पख काल बलराम गहे थाकिया कामार पुकुर चोली श्री मां कोलकाता आने के बाद में एक सप्ताह पक्ष यानी कि आई थिंक 15 दिन सो व्हाटएवर बलराम गृह में रहकर के कामार पुकुर चली यात्रा पूर्वे दक्षिणेश्वर गया समस्त देव देवी के प्रणाम कर ले यात्रा करने से पहले दक्षिणेश्वर जाकर के सभी देव देवियों को प्रणाम किया एवं श्री रामकृष्ण स्मृति चिन्ह गुली के आर एक बार प्राण भरिया दिख्या ले ले और श्री रामकृष्ण के स्मृति चिन्ह को फिर से एक बार प्राण भर के दर्शन कर लिया। देखिए यह दिन मां के जीवन का कितना कष्ट का दिन होगा। इतनी सुंदर सब यादें इतनी सब साधन भजन तपस्या इसी नहबत में ठाकुर के कमरे में भवतारिणी के मंदिर में गंगा के किनारे यह जो हंस कुकुर बेलतला ये जो ये सब जो उन्हें प्राण के साथ में यह सब जो लैंडमार्क्स है वहां के वह तो जुड़े हुए हैं। प्रत्येक जगह पे ठाकुर की कितनी स्मृतियां हैं उनकी। सो उसको त्याग करना, त्याग करके एक ऐसे जीवन में प्रवेश करना जहां पर कि सब कुछ अनिश्चित है। तो देखिए कि कितना कष्ट उस दिन मां को हुआ होगा। किंतु फिर क्या है कि यह जो मिलना और बिछड़ना, मिलन और वियोग यही तो है जीवन। तो सब स्मृति चिन्ह को एक बार मां ने प्राण भर के देख लिया। मुझे याद नहीं आ रहा है कि मां फिर दक्षिणेश्वर कब वापस आई थी। ऐसा कोई रेमिनेशंस मुझे याद नहीं आ रहा कि फिर मां कभी दक्षिणेश्वर आई हो। निश्चय आई होगी किंतु मुझे याद नहीं आ रहा। देखिए किसी एक जगह के साथ में आपका इतना गहरा संबंध होना और फिर उसी संबंध को संपूर्ण रूप से विच्छेद हो जाना यह भी तो कम कष्ट की बात नहीं है। स्वामी योगानंद

कामारपुकुर में माँ सारदा का वनवास प्रारंभ

गोलापमा प्रभुति श्री मां के कामारपुर कुर परिजनो पोछाइया दीार्जनो शंगे चली ले स्वामी योगानंद गोलापमा वगैरह मां के साथ में जो लोग वहां पे ये तीर्थ यात्रा करने के लिए गए थे उसमें से ही कुछ लोग मां को कामार पुकुर तक पहुंचाने के लिए साथ में चले। यह कैसा है पता है? [हंसी] यह जो डोंगरे जी महाराज है ना डोंगरे जी महाराज एक मैंने उनका यह सुन रहा था रामायण का प्रसंग तो भगवान राम ने ठीक कर दिया है कि मां सीता को वनवास में भेजना है तो लक्ष्मण को बुलाया कहा कि मां सीता को ले मां फिर गर्भवती है तो वैसे ही तो कष्ट में है फिर वन में छोड़ के आएंगे तो क्या होगा लक्ष्मण को कहा कि मां को तुम जाकर के वन में छोड़कर के चले आओ तो लक्ष्मण तो बेचारा इतना दुखी हो गया भगवान राम को बार-बार विनती कर रहा है कि मां को इस स्थिति में माने वैसे भी तो मां सीता को आप वन में छोड़ के आए किस तरह का पागलपन है वो भी यह गर्भवती है इस स्थिति में आप वहां पर ले जाएंगे किंतु फिर क्या है भगवान राम तो भगवान राम है मर्यादा पुरुषोत्तम एक बार डिसीजन ले लिया तो ले लिया तो फिर यह लक्ष्मण मां सीता को उनके निवास स्थान में जाता है वह बड़े ही हाथ जोड़ के विनती करके कहता है कि मां भगवान राम ने आपको मेरे साथ में यात्रा करने के लिए कहा है। तो मां सीता कहती है अच्छा भगवान का आदेश है चलो अवश्य चलते हैं। बोल के बिना किसी तैयारी के ऐसा कोई प्रिपेरेशन किए लक्ष्मण ले गए तो तो देवर है उनके तो भरोसे के वो तो उनके साथ में वनवास भी किया। सब कुछ तो इतने ट्रस्टेड पर्सन जिसको कहते हैं तो उनके साथ में गई तो लक्ष्मण जी ने मां को कहा रथ में आप विराजमान होइए फिर वो रथ चला रहा है दोनों ही लोग हैं और कोई नहीं तो मां सीता बैठी है फिर अब रथ कहीं मंदिर की ओर जाने की वजह कहीं रमणीय स्थान पर जाने की वजह वन की ओर जा रहा है तो मां सीता बार-बार पूछती है कि अरे तुम मुझे इस ऐसी कौन सी जगह पर ले जा रहे हो यहां पे जनमानव नहीं है। निस्तब्ध है। सब कुछ वन है। यह तुम मुझे कहां ले जा रहे हो? तो बेचारे लक्ष्मण क्या उत्तर देंगे? तो वो ले जा रहे हैं। वन में जा रहे हैं। फिर घनघोर वन होने लगा। मां सीता बेचारी भयभीत हो गई कि अरे तुम मुझे कहां पर ले आए हो? मुझे तो कुछ समझ में ही नहीं आ रहा। और बेचारे लक्ष्मण उत्तर देना चाहते हुए भी भगवान राम की आज्ञा है। बोलकर के मुंह से एक शब्द नहीं निकल रहा। हृदय मन व्यथित हो रहा है। डोंगरे जी ये कहानी कहते हैं ना आंखों में से आंसू के आंसू निकल रहे हैं और वह बोलते जा रहे हैं। उन्हें अद्भुत लक्ष्मण कुछ बोल नहीं पा रहा है और यहां पर मां सीता भयभीत हो रही है। फिर जब बिल्कुल घने जंगल में जाकर के खड़े रहे तब फिर जाकर के लक्ष्मण ने रथ में से उतर के मां को कहा कि मां अभी आप रथ में से नीचे पधारिए। तो मां सीता नीचे उतरी। फिर लक्ष्मण ने कहा सीक्रेट जो था कि भगवान राम ने कहा है कि मैं आपको इस तरह से वन में रख के वापस चला जाऊं। तो मां सीता को इतना म दुख हुआ भीतर से साथ में ही देखिए भगवान का आदेश है तो लक्ष्मण के साथ में तो झगड़ा करने से कोई लाभ नहीं है। वह तो बेचारा भगवान के आदेश का पालन कर रहा है। तो मां भीतर में से दुखित है। यहां पर लक्ष्मण रो रहा है कि मां को छोड़कर के जाना है और मां सीता उसको आशीर्वाद दे रही है कि बेटा ठीक है तुम्हारा तो कोई गलती नहीं। तुमको भगवान का आदेश का पालन कर रहे हो तो उसमें से तुम्हारा कुछ नहीं है। तो फिर लक्ष्मण छोड़कर के मां को वापस जा रहा है। तो डोंगरे जी ये कहानी कह रहे हैं और आंखों में से आंसुओं की धारा निकल रही है। तो यहां पे भी देखिए कि मां को लेकर के यह लोग योगानंद जी गोलापमा कामार पुकुर जाते हैं। ताबारे वर्धमान पथे गया छिले। उस समय वे लोग वर्धमान के पथ से गए थे। हाथ जथेष् पाथे छिलोना हाथ में रास्ते में पाथेय अर्थात कि पथ में खर्चा करने के लिए जो पैसा चाहिए वह था नहीं ताई वर्धमान परजन तो रेले जया शकुल के उचालन परजन तो प्राय आठ क्रोश पथ पद ब्रजे जते होया छो हाथ में पैसे नहीं थे बोल के पाथेय नहीं था बोल के वर्धमान तक वे लोग रेल में गए गए ट्रेन में गए और फिर वहां से सबको उचालन ये जगह का नाम है वहां तक लगभग आठ क्रोश पथ आठ क्रोश यह कौन सा मेजरमेंट यूनिट है नहीं पता आप बाद में चेक कर सकते हैं इतना रास्ता उनको पैदल जाना पड़ा था पदवजे पैदल जाना पड़ा था इहाते श्री मां खूब क्लांत होइया पड़े यह पैदल चलकर के इतना मां बड़ी ही थकान महसूस बहुत ही टायर्ड हो गई थी क्लांत होया पड़े बहुत ही क्लांत हो गई थी थक गई थी उचाल ने गुलाब मा कोनो प्रकारारे एकू खिचड़ी रिया दिल खुदता श्री मां ताहा खया बार-बार बोलिया छिले उचालन में जाकर के गुलाब मा ने कैसे भी करके थोड़ा सा खिचड़ी बना के मां को खिलाया तो शुद्धिता श्री मां देखिए मां को भूख लगी है क्षुधा हुई है तो क्षुधिता श्री मां भूख की भूख से कष्ट पा रही श्री मां ने उसको खाकर के बार-बार कहा था ओ गुलाब तुम्ही की अमृत ही रह दे छो अरे गुलाब तुमने क्या अमृत ही बनाया है क्या अमृत ही रदा है देखिए इतना सा एक सामान्य खिचड़ी भी मां को इतनी भूख लगी है कि उसको खा के उनको लगता है कि जैसे कि अमृत खाया है वही यह जो सीता का वनवास एग्जजेक्टली उसी तरह से मां का यह कामार पुकुर के दिन अभी प्रारंभ हो रहे हैं। अभी इसके बारे में ज्यादा है। मां का जब नेक्स्ट क्लास आएगा तब देखेंगे। आज शाम को मेडिटेशन का क्लास है तो उसके बाद में मंडे मॉर्निंग। ओम शांति शांति शांति हरि ओम तत्सत श्री राम कृष्णपणमस्तु

एक भक्त : आपने कहा कि ध्यान करने से पहले अपने शत्रुओं को अपना पुण्य अर्पित कर दें। किंतु फिर अपने पास क्या रह जाएगा?

देखिए द्वेष करेंगे ना तो पुण्य अपने से चला जाएगा माने द्वेष जो है पुण्य खा जाता है तो पुण्य देना आइदर और जाना ही है। आप वंटरीली दे ना कि इनवोलंटियरली दे। बेटर है कि वंटरीली पुण्य देंगे तो और डबल होकर वापस आएगा। [हंसी] इसमें भी चतुर आई है। किंतु इस भाव से नहीं देना है। अगेन ठाकुर तो हृदय समझते हैं। इस भाव से दिया कि वैसे ही तो मेरा द्वेष है। मेरा पुण्य खा जा रहा है। तो बेटर है कि मैं सामने से दे दूं तो मुझे डबल होकर वापस मिलेगा। यह यदि कैलकुलेशन करके देंगे तो और ज्यादा खत्म हो जाएगा पुण्य।

एक भक्त : हम वेदांत में पढ़ते तो हैं कि जगत माया है। किंतु आपने एक नई अंतर्दृष्टि insight दी कि परिवार में रहने से हमें पता चलता है कि हमारी अपनी कमियाँ कहाँ हैं और हमें स्वयं में कहाँ सुधार करना है।

विश्वम दर्पण दृश्यमानम नगरी तुल्यम निजांतर्गतम [हंसी] दक्षिणामूर्ति मैं जब जॉइ करने को बेलूर मठ में गया था बिल्कुल पहली बार तो बेलूर मठ में क्या है हेड क्वटर्स में नाइट क्लास होता है तो हेड क्वटर्स में कौन रहते हैं तो जनरल सेक्रेटरी महाराज फिर चार असिस्टेंट जनरल सेक्रेटरी महाराज और अपने ऑर्डर के जो बेस्ट ऑफ द बेस्ट ब्रेन है वो वहां पर वो कोई रिलीफ इंचार्ज है कोई पीएफ इंचार्ज है कोई ऑडिट इंचार्ज है कोई लॉ इंचार्ज कोई रिलीफ इंचार्ज बेस्ट ब्रेन ऑफ ओवरऑर्डर तो सब वहां पे नाइट क्लास होता है खाने के बाद में और पहले तो थोड़ा रीडिंग होता है फिर दुनिया भर के गपगपाटे लगते हैं। सो दैट वाज़ द हाईलाइट ऑफ माय डे। दिन भर तो आपको म आपका खिंचाई कर ही देते धुलाई कर ही देते हैं। आपका जो रूटीन है सुबह 3:30 से लेकर के बट एट द एंड ऑफ द डे दैट वाज़ अ रियल हाईलाइट वो गप लगाने में इतना सब कुछ सुन मतलब बेस्ट ऑफ द बेस्ट है अपने ऑर्डर के वो गप भी करते हैं ना तो उसमें इतना सीखने को मिलता है मोर देन कि हमारे क्लास में जितना सीखते थे तो एक दिन ऐसे ही बात चल रहा है शिवमयानंद जी उस समय असिस्टेंट जनरल सेक्रेटरी थे तो बैठे-बैठे गप कर रहे हैं कि मैं वहां पर घूमने और उनका क्या है वो झोला कंधे पर डाल के वो निकल लेंगे उनका ऐसा प्रोटोकॉल प्रोटोकॉल जैसा कुछ नहीं इतने सीनियर है इंस्पाइट ऑफ दैट तो ऐसा घूमतेघूमते क्रिश्चियन सेमिनरी में चले गए तो एबोट के साथ में बात कर रहा है तो उन्होंने पूछा शिवमयानंद जी ने व्हाट पिनंस डू यू परफॉर्म मुझे एग्जैक्टली अभी भी याद है उनके जो जिस शब्द महाराज ने यूज़ किए थे एग्जैक्टली यही शब्द महाराज कहते हैं कि आई आस्क थे बेंगली में बोले अबाउट के जिज्ञास को लोग व्हाट पिनेंस डू यू परफॉर्म और वो उत्तर दिलो वन सेंटेंस उत्तर कम्युनिटी लाइफ [हंसी] आई स्टिल रिमेंबर एज इट इज जैसा महाराज ने कहा था। [हंसी] माने दिस इज इन अदर ट्रेडिशंस आल्सो दे अंडरस्टैंड कि आप ऐसे आप जैसे भगवान बुद्ध की एक तरह की तपस्या थी कि बिना खाए पिए लंबा उपवास करके आप रहते हैं। जैसे जैनिज्म में एक बेसिकली होता है ऑस्टेरिटी का अर्थ है फिजिकल ऑस्टेरिटी। अह माने दिगंबर तो माने एकदम एक एक्सट्रीम लेवल पे है कि वस्त्र भी परिधान नहीं करने हैं। दिक अंबर दिशाओं के वस्त्र पहनना है। सो दैट इज़ अनदर लेवल ऑफ़ एक्सट्रीम फिजिकल ऑस्टेरिटी। किंतु ये जो अपना डे टू डे लाइफ है उसमें भी दैट इफ वी कैन टर्न इट इंटू ऑस्टेरिटी। इफ वी विश। हम आपको एक पैर पे खड़े रहे कि 1000 साल तपस्या किया। सालों के सालों आप भूखे रहे। दैट इज़ वन टाइप ऑफ़ ऑस्टेरिटी। एंड जहां पे हम है दैट दैट प्लेस इटसेल्फ कैन टर्न इंटू ए टेंपल दैट इटसेल्फ कैन टर्न इनू हिमालय

एक भक्त : हम वेदांत में पढ़ते तो हैं कि जगत माया है। इसलिए संसार त्याग करना आवश्यक है

वो भी कीजिए माने ऐसा नहीं कि वो नहीं करना है। महाभारत में तो हमने देखा ना वो गांधारी है। धृतराष्ट्र है। महाभारत के युद्ध के बाद में राजमहल वगैरह छोड़ के वन में जाकर रह रहे हैं। सो ऐसा नहीं है कि वह गोल नहीं है। किंतु बात यह है कि जब तक वह ना आए तब तक हाथ पर हाथ रख के नहीं बैठे रहना है। दैट इज द थिंग। लेट एवरीथिंग गो इनू पैरेलल। अपना तो ठाकुर ने कहा ही है ना कि लोग कोई कोई होता है शहनाई का सिर्फ एक सुर बजाता है। मैं तो सभी राग रागिणियां बजाता हूं। सो लेट एवरीथिंग बी देयर इन आवर लाइफ। माने वो जो वहां पे रास्ते से जा रहे हैं। कुछ डकैत आ गए तो ठाकुर ने सबका नाम लेना शुरू कर दिया। राम राम काली काली महावीर महावीर जे खाटे जो काम करें [हंसी] म अपने को इसमें भी क्यों स्ट्रेटिफाई कर दूं कि भाई घर में ही रहकर साधना करनी है हैव ऑल ऑप्शंस ओपन

एक भक्त : लगता है की माँ अपने परिवार में ये पगली मामी, काली मामा, या राधू वगैरह को सुधारने का प्रयास नहीं करती। बस अपने से तपस्या किये जा रही थी.

ना मां डांटती थी इन सबको एक मनसा बोल के लड़का आया जयराम भाटी में तो मां को कहा मां सन्यास ्यास चाहिए तो माने सन्यास दिया और फिर वह बड़ा सुंदर गायक था तो फिर सन्यास के गिरवा वस्त्र धारण करके वहां वह जो कोर्टयार्ड है वहां बैठकर के गान कर रहा है मां के काली कीर्तन और मां और बाकी सब जो थी संगिनिया वहां पर वरांडे में बैठकर के सुन रही है तो फिर नलिनी कहती है कि अरे देखो मां ने इतने अच्छे लड़के को सन्यास दे दिया अभी वह कहां वो अपनी मां की सेवा करेगा अपना कुल म उज्जलित करेगा। वह नहीं अभी हरिद्वार जाकर के रोगियों के मल मूत्र साफ करेगा। फिर यह नलिनी कहती है मां तुमने ऐसा क्यों किया? उसको सन्यास लेना है तो लेने दो। तुम उसको क्यों सन्यास देती हो? तुम पाप में क्यों पड़ती हो? मां ने कुछ तो सुना। किंतु फिर जब नलिनी बोले ही जा रही है। फिर मां ने जो उसको डांट दी है। कहा कि क्या तुम सभी लोग तुम्हारी तरह इस जगत में जन्म लेते हैं? क्या ये माने संसार में पड़ना सूअर की तरह साल साल बच्चे होना तुमको इतना कष्ट हुआ है इसके बावजूद तुम पति के पास में जाती हो तुमको शर्म नहीं आती क्या मेरे पास में रह के तुमने क्या सीखा फिर तुम यदि अपने पति के पास जाओगी तो मैं तुमको यहां से भगा दूंगी नहीं रहने दूंगी समझ लिया माने ऐसा डांट के कहा [हंसी] किंतु जैसा आपने कहा कि एक फिर वो जो बकबक करी जा रही थी नलिनी तो फिर मां से नहीं रहा गए और बोलना पड़ा। अदरवाइज मां ऐसा सामने से नहीं कहती। दैट इज देयर। [हंसी]

एक भक्त : माँ ने ठाकुर के साथ दक्षिणेश्वर में रह कर साधना, तपस्या, और आदर्श का सर्वोच्च अनुभव प्राप्त किया था. बाद में फिर मूढ़ तामसिक परिवारजनों के साथ रहना कितना कष्टकर रहा होगा।

जयराम भाटी में जब मां थी तो क्या पॉजिटिव ये था कि फिर तो संतानों का आगमन त्यागी संतानों का आगमन प्रारंभ हो चुका था। कामार कुकुर के सही में कष्ट के दिन थे क्योंकि किसी के साथ कोई संपर्क नहीं था। सो दैट वाज रियली पेनफुल जय राम भाटी में किंतु फिर भी एक नियमित रूप से आना जाना लगा रहता था। फिर एक बार जैसे क्वालपाड़ा हो गया तो तो फिर बस वहां पर डेली कोई ना कोई आता था। सो दैट इज देयर एक दिन की कहानी है कि किसी त्यागी संतान ने ही लिखी है कि मां रास्ते की ओर माने रहा माने नजर रख के खड़ी है और बीच-बीच में कह रही है कई ठाकुर आज तो कोई आया नहीं। तुमने तो कहा था रोज कोई ना कोई आएगा। आज कोई नहीं आया। आज कोई नहीं आया। ऐसा बोल के घर से बाहर निकल रही है। भीतर में जा रही है। और एकाएक भक्त एक संतान आ गया। मां इतनी खुश हो गई। चलो आज कोई तो आया माने जिसको कि मैं आशीर्वाद दे सकती हूं। जिसको मैं खाना बना के खिला सकती हूं। सो बाय दैट टाइम जय राम भाटी में डेली आना जाना लगा रहता था। किंतु कामार कुकुर इस रियली म वनवास ही है। हरि महाराज है ना हरि महाराज एक बार कहते हैं कि एक समय था कि लोग गंगा के घाट पर जाकर के स्नान करने को जाते थे तो आजू-बाजू में जो लोग म स्नान करने को खड़े हैं उनके सबके साथ में कितना गप लगाते थे। सबके साथ में कितना फ्रेंडशिप हो जाता था। और आजकल तो मैं देखता हूं गंगा के किनारे जाते हैं तो स्नान करके चुपचाप चले जाते हैं। वह किसी के साथ बात ही नहीं करते। ये क्या सब चल रहा है? अब ये हरि महाराज के टाइम में 1920 के जबकि मोबाइल का कोई नामोनिशान नहीं था।

एक भक्त : स्वामीजी किस हिसाब से माँ सीता को भारतीय स्त्रियों का आदर्श बता रहे है?

देखिए मां के साथ में भी सेम चीज है ना। अब जैसे मेरी बहन है वो अमेरिका में रहती है। उसको जॉब करनी पड़ती है। सो मैं उसको क्या यह बताऊंगा कि मां की तरह तुम नहबत में रहो। इतनी सी चार दीवारी के भीतर में तुम्हारा पति जो कहता है सब सुन लो और फिर घुमटा टान के रहो पुरुषों के सामने मत जाओ घर से बाहर मत निकलो व्हाट म मां का जीवन का मैं उसको क्या बताऊंगा राइट एक जो एक आज की एक मॉडर्न वूमन है वो नौकरी करती है आज सिर्फ अमेरिका में नहीं सिर्फ इंडिया में भी आप देखिए कि जो मॉडर्नाइजेशन वुमेन एंपावरमेंट की ये जो सब चल रहा है हम मां का जीवन इनको कैसे समझाएंगे क्या है मां के जीवन में वे लोग तो देख के ही कह दे कि इसमें से कुछ भी मेरे रिलेवेंट नहीं। राइट? क्योंकि मैं राजकोट में था तो तीन लेडी डिवोटी आती थी। तीनों सिस्टर हैं। तीनों अनमैरिड है। एक हाई कोर्ट में वकील है। दो प्रोफेसर है और अपने-अपने डिपार्टमेंट की हेड है। तो देखिए कि वे लोग कहते हैं कि हमको सबसे ज्यादा आदर्श बने अनुप्रेरणा मिलती है मां की लाइफ से। तो फिर मुझे प्रश्न होता है कि हाउ इज दिस इवन पॉसिबल? एक हाई कोर्ट के लॉयर को मां की लाइफ में से क्या प्रेरणा मिलने वाली है? एक यूनिवर्सिटी प्रोफेसर को हेड ऑफ द डिपार्टमेंट को मां की लाइफ में से क्या प्रेरणा मिलने वाली है? सो दैट क्वेश्चन इज़ देयर थिंग इज दैट दे हैव टू डिसाइड। हम लोग कौन होते हैं यह कहने वाले कि आप लोग मां की लाइफ में से यह प्रेरणा लें। स्त्रियों को यह सोचना है कि कैसे प्रेरणा लेनी है। देखिए किसी ने स्वामी जी को पूछा कि स्त्री स्त्री जागरण कैसे हो? तो स्वामी जी ने कहा मैं क्या स्त्री हूं कि तुम मुझे पूछोगे स्त्रियों को यह देखना है। किंतु बीइंग स्वामी जी स्वामी जी गिव्स मेनी आईडियाज। सो [हंसी] बीइंग अस हम लोग एक अनुमान करके कह सकते हैं। देखिए कि मां के जीवन में यह जो लज्जा पटावृता वो तो था ही था। किंतु साथ में ही ना दूसरों के प्रति सहानुभूति कितनी थी? साहस कितना था। राइट? मां के जीवन में साहस या करेज कहे कि जो भी नजर के सामने आता है, जो भी क्राइसिस आती है, मां ने उसको फेस किया है। डिप्रेशन में या हताशा में कभी नहीं चली गई। क्राइसिस के बाद क्राइसिस मां के जीवन में आई है। खुद को तो बीमारी बार-बार हुई है। ठाकुर के कैंसर के दिनों की आप घटना देखिए कि किस तरह से कमर कस के मां ने ठाकुर की सेवा की है। श्यामपुकुर में और काशीपुर में। सो दैट करेज मां के पास में था। लीडरशिप क्वालिटी मां के पास में थी। ठाकुर को कैंसर हुआ तब से वो बोलने का कष्ट नरेंद्र वगैरह सभी गुरु भाई अभी मां के पास में से अपेक्षा रख रहे हैं कि मां उनको गाइड करेगी। सो दैट लीडरशिप क्वालिटी मां के भीतर में थी। किस तरह से 10 लोगों के साथ में रहा जाए वो मां को पता था। एक उदाहरण है। मां कहती है कि यह जो राधु वो उसका ससुराल और यह नलिनी और मां को मां को उसका ससुराल। तो क्या है कि तीन लड़कियां हैं। तीनों का ससुराल है। तो अब जैसे अपने सभी घरों में यह प्रथा है कि उत्सव के दिनों में ससुराल में कुछ आपको गिफ्ट भेजनी है। तो यहां पर मां सब मां के पास में तो काफी कुछ आता था। साड़ी, फल, मिठाई सबको बांट रही है। अभी हुआ ऐसा कि जैसे ही वो नलिनी या माकू को कुछ देने का प्रयास करेगी तो पागली मम्मी आकर चिल्लाएगी। सब उनको दे दिया। मेरी बच्ची को कुछ नहीं दिया और राधु को कुछ देने को जाएगी। तो नलिनी आकर चिल्लाएगी कि अरे हमको कुछ नहीं दिया। सब राधु को दे दिया। तो यह पागली मामी और यह नलिनी दोनों का फिर 12वां चंद्रवा दोनों में झगड़ा होगा। तो यह गिफ्ट बांटना सबसे म हेडेक का काम है। तो मां कहती है मैं विपरीत युक्ति करती हूं। राधु को कुछ देना है तो मैं नलिनी को पूछूंगी कि अच्छा नलिनी बताओ तो इसको मैं इतनाइतना दूं तो चलेगा। तो फिर नलिनी सामने से कहेगी कि नहीं मां देखो अपना तो एक स्टैंडर्ड मेंटेन करना है। वो तो पागली उसकी मां भी पागली। हम लोग ऐसा पागलपन क्यों करने को जाए? आप थोड़ा ज्यादा दे दीजिए। अपने घर की वो जो एक मर्यादा आपको मेंटेन करनी है तो मर्यादा [हंसी] के अनुसार जो है आप थोड़ा सा ज्यादा दीजिए तो जो है कि वो नलिनी खुद कहेगी कि हां उसको थोड़ा सा ज्यादा दे दो। फिर ये नलिनी को कुछ देना है तो फिर माने ऐसा मां कहती है कि क्या है कि सबको थोड़ा-थोड़ा ये ऑथर ऑथॉरिटी दे कर के अपने को थोड़ा सा पीछे रह करके रहना है। इससे क्या है कि लोगों में झगड़ा नहीं होगा। सो ऑल दिस लीडरशिप क्वालिटी मां के भीतर में थी। आध्यात्मिकता तो थी ही थी कि किस तरह से स्पिरिचुअल लाइफ में आगे बढ़ा जाए। सो ऑल ऑफ दिस थिंग देयर आर देयर इन मदर्स लाइफ। उन्हें हमको क्या है कि कुछ लेना है और कुछ नहीं लेना है। दैट वी हैव टू डिसाइड कि क्या लेंगे क्या नहीं लेंगे। लज्जा होनी चाहिए। किंतु हां देखिए सब कुछ कॉन्टेक्स्ट करके लेना है। अभी आप नौकरी करते हैं और कहेंगे मैं पुरुषों के साथ बात ना करूं तो ऐसा पॉसिबल नहीं है। जैसे मैंने हाई कोर्ट की वो वकील है लेडी उनका उदाहरण दिया। हाई कोर्ट में जाएंगे और ये पगले लोगों के साथ में डीएल ना करें। हाउ इज दैट इवन पॉसिबल। राइट? सो सब कुछ कॉन्टेक्स्ट को करके लेना है। माने ऐसा नहीं है कि माने जो जो कुछ भी है मां के जीवन में एज इट इज कॉपी पेस्ट करना है। यह कभी नहीं होगा। आपको मुझे क्या रिलेवेंट है उसको लेना।