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ओम स्थापक यज धर्मस्य सर्व धर्म स्वरूपने अवतार वरिष्ठ राम कृष्णाय ते नमः मां शारदा देवी जीवन चरित्र स्वामी गंभीरानंद जी महाराज द्वारा लिखित अतरण काथ केमरा पाठ कोची बांगला पुस्तक पृष्ठ छोई जय मा जय महाराज जी लिख सबई सतो एकन प जंतो जा किछु कथा बोला गेलो सब किछु तो एकन अभी तक जो बात की गई यहां तक वह सब तो ठीक है चलो कि हमने मान लिया कि मां सीता और मां सती की तरह ही आध्यात्मिक जागरण के नव अभयदान के लिए मां शारदा देवी का आगमन हुआ है और इसके अलावा भी जो बात हुई कि आध्या शक्ति का आगमन क्यों होता है तो वह शत्रुओं का दानवों का विनाश करने के लिए और फिर जैसे कि हुआ हमारा डिस्कशन कि दानव बाहर के भी होते हैं और भीतर के भी होते हैं बाहर के दानवों का वध हो सकता है कि सहज है शुंभ निशुंभ का रक्त बीज का किंतु हमारे भीतर में हृदय में जो छपे हुए शत्रु है दानव है अविद्या अस्मिता राग द्वेष अभिनिवेश काम क्रोध मद लोभ मोह मत्सर इन सबका विनाश बहुत ही कठिन है तो इस विनाश के लिए मां एक मधुर स्वरूप एक अमल धवल लीला विलास हमारे सामने प्रस्तुत करती है और उस लीला विलास का चिंतन मनन करके हम अपने हृदय को परिशुद्ध बनाते हैं यह सब डिस्कशन हो गया किंतु अभी जो प्रश्न होता है महाराज जी कहते हैं तबू प्रश्न जागे इसके बाद में भी एक प्रश्न होता है समग्र विश्वे जन ज शक्ति अवतरण समग्र विश्व के कल्याण के लिए जिस शक्ति का अवतरण हुआ है तीनी नवीन सभ्यता ईते बछन एक खद्र पल्ली के आपना पीठ स्थान रूपे निर्वाचित कोलन केनो उन्होंने आज की सभ्यता है नवीन सभ्यता उससे बहुत दूर जाकर के एक छोटे से गांव में जन्म धारण करने का क्यों उन्होंने उचित समझा एक छोटे से गांव में उन्होंने जन्म क्यों लिया अभी यहां पर लिखा है कि बहुत दूर आज के कलकाता से जयराम बाटी जाना होगा तो कहीं इतना दूर का ही नहीं है आई थिंक दो-तीन घंटा लगता है जहां तक मुझे याद है बहुत पहले गया था तो जो भी है व हमको लगेगा कि अरे कहां इतना ज्यादा दूर है किंतु आज ये जो मॉडर्न कम्युनिकेशन और मॉडर्न ट्रांसपोर्ट के जो युग है उसमें लगता है कि अरे जयराम बाटी तो यहीं पर है वो एक फोन उठाएंगे मैसेज दे देंगे बात कर लेंगे किंतु उस समय ऐसा नहीं था मां को खुद को जब जयराम बाटी कामर पुकुर से दक्षिणेश्वर आना होता था तो चल कर के आती थी तेलो भेलो माठ वो तेलो भेलो का एक बहुत विकट मैदान बीच में होता था जहां पे डाकू लोग रहते थे और मने एक भयावह रास्ता था चल कर के आना पड़ता था कम्युनिकेशन के ऐसे कोई साधन नहीं थे तो उस समय की बात है 1850 1860 187 वो जो समय था जयराम बाटी और कामर पुकुर और कलकत्ता के बीच का दूरवणिनगर एकदम अपना बंगोली पल्ली ग्राम का कल्चर एकदम जैसे छोटा सा गांव बंगाल का होता है वहां भाव भक्ति एक सरल हृदय वाले नर नारी जहां पर रहते हैं खेती काम करके या तो फिर इतना छोटा मोटा काम करके अपना जीवन निर्वाह करते हैं शाम को जब समय मिलता है तो जात्रा नाटक वगैरह होते हैं यह पुराण में से किसी चरित्र का अभिनय होता है और उसको लेकर के वे लोग शांति से देख हैं और सो जाते हैं सुबह को जल्दी उठ कर के फिर से अपने काम में लग जाते हैं कहां ये आडंबर हीन जीवन बिना किसी तरह की बिना किसी घमंड का बिना किसी दाव पेच का एक ऐसा एक गांव का जीवन और कहां कलकाता का जीवन ज्यादातर लोग कोई प्रोडक्टिव काम तो करते ही नहीं है या तो ब्रिटिश गवर्नमेंट की चमचागिरी करेंगे उनके या तो फिर भी ट्रेडिंग और क्या-क्या सब बड़े शहर में होता है आपको तो पता ही है गिरीश घोष ने एक बार कहा था कि यदि मुझे पता चलता पहले से ही पता होता कि मेरे पाप फेंकने के लिए इतना बड़ा गड्डा मिल जाएगा मुझे श्री राम कृष्ण रूपी तो मैंने और कितने पाप कर लिए होते बहुत सारे पाप बढ़िया मजे से कर लेता फिर ठाकुर की शरण में जाकर के पाप मुक्त हो जाता तो वो मने ये बात से ही पता चल जाता है कि कलकाता में क्या-क्या होता होगा तो कहां कलकाता का कल्चर कहां जयराम बाटी का कल्चर अभी जद पूरे ब्रिटिश साम्राज्य में भारतीय धर्म वेदांत अद्वैत वेदांत या तो फिर यह शक्ति साधना शक्ति साधना अने ट्रेडिशनल सेंस में नहीं जो कि तंत्र के रिलेटेड है किंतु शक्ति साधना हमारे सेंस में राम कृष्ण संघ की दृष्टि से मां की पूजा य मां का ईश्वर के मातृ भाव का पूजन ईश्वर के मातृ भाव का चिंतन मनन स्मरण तो वो भाव ब्रिटिश साम्राज्य में और आज के आधुनिक अमेरिका व वगैरह वेस्टर्न कंट्रीज में फैलाना तो तो कलकाता में रह कर के ज्यादा बेटर होता ना वो पहले से ही जद उस कल्चर में मां बड़ी हुई होती वरना हमको तो पता है ना कि मां जब पहली बार कोलकाता उस पहली पहली बार जब आ रही थी तो वो पानी का वो नल कल जिसको बांग्लाते बोले पानी जहां से आता है जिस पाइप में से वो नल खोला तो एकदम सूसू करके आवाज होती है ना पहले तो वो थोड़ा सा हवा भर गया होता है वो हवा निकलती है फिर बाद में पानी आता है तो मां इतनी डर गई अरे ये हवा सुन कर के कि सूसू करके जो हवा जाती है अरे इसके भीतर में साप है बोलके मां चिल्ला उठी बाकी सब महिलाएं हंसने लगी मां को इतना भी नहीं पता था कि यह पानी वाला पाइप जो होता है उसमें कभी पानी भर जाता हवा भर जाती है तो खोलने से पहले हवा का आवाज आता है बाद में पानी आता है वो मां एक जगह पे वो मां कहती है कि मां के बारे में उनके सेवक महाराज लिखते हैं कि जो औरतें जो स्त्रियां वो घड़ी को को चाबी देना जानती है तो मां उससे बड़ी इंप्रेस हो जाती थी वो जयराम बाटी में किसी के घर के बारे में कहती है व बांडोज का घर एक था बोलो वहां पर उनकी एक पुत्र वधु आई है वो घड़ी को चाबी दे सकती है अरे बाप रे कितना बड़ा काम हो गया मैंने घड़ी को चाबी देना भी मां के लिए जद कोई महिला कोई स्त्री ऐसा कर सकती है तो मां के लिए बड़ी विस्मय की बात थी मैंने इतना वो कॉम्प्लिकेटेड चीज होती है ना घड़ी तो मैंने मां का जीवन भी इतना सरल था अभी ऐसा नहीं है कि गांव में सभी लोग सरल होते हैं किंतु जब अवतार का आगमन होता है तो सरलता सहजता वो चारों ओर फैल जाती है ठाकुर कहते हैं ना कि नंद घोष जितना सरल माने कि वृंदावन में भगवान कृष्ण आने वाले थे तो नंद घोष थे उनके भीतर में इतनी सरलता प्रकट हुई थी कि वह भगवान कृष्ण को लालन पालन कर सके तो ठाकुर खुद कहते है ना कि अर मा के सबा हाड़ो बोलतो मने चंद्रमणि देवी अपने मन में कुछ छुपा करके नहीं रख सकती थी जो कि जो भी चंद्रमणि देवी के सामने जो भी आएगा उनको अपने मन की बात जो जो भी है वो परिवार में बहुत कुछ सीक्रेट रखना होता है अपने फाइनेंस की क्या परिस्थिति है वगैरह वगैरह तो सब कुछ वो सबके सामने बोल देती थी बिना किसी द्विधा और संकोच के व इतनी सरल थी खुदीराम के बारे में तो पता ही है जहा कोरेन रघुवीर रघुवीर जोकर ऐसा बोलकर के वो माने वो उनका वही एक एटीट्यूड था जीवन के प्रति तो इतनी सरलता जब अवतार प्रकट होते हैं तब वहां पर होती है क्योंकि सहजता सरलता पवित्रता यही अवतार के जीवन की सबसे बड़ी सबसे बड़ा मैसेज है हम चाहे जैसे ज्ञान योग पढ़ते हैं ज्ञान योग में स्वामी जी अद्वैत वेदांत के बारे में हमको इतना सब कुछ बताते हैं तो यह सब चीजें क्या है कि हमारे इंटेलेक्चुअल स्टिमुलेशन के लिए अच्छी लगती है खास करके मेरे जैसे लोगों को थोड़ा बहुत पढ़ाई लिखाई क्या कर दिया पढ़ाई लिखाई का एक इनडाइजेशन क्या हो गया हमको सब इंटेलेक्चुअल पढ़ना पसंद आता है तो हमारे जैसे लोगों का मन भ्रमित करने के लिए यह सब शब्दों की यह फिलोसोफी की माया जाल की वे लोग रचना करते हैं किंतु जब एक बार इस जाल में हम लोग फस जाते हैं तो फिर पता चलता है कि हृदय की सरलता सहजता ही मन आध्यात्मिक धार्मिक जीवन का प्राण है आध्यात्मिक धार्मिक जीवन का वह फाउंडेशन है तो इसलिए जो बाल्य लीला होती है लीला का यह महात्म है भागवत में देखिए कि वृंदावन लीला का जो महात्म है भगवान कृष्ण के जीवन में वृंदावन लीला का जो महात्म है मने युद्ध हुआ युद्ध में भगवान कृष्ण सारथी हुए अर्जुन को गीता सुनाई गीता यानी कि हिंदू धर्म का फाउंडेशन टेक्स्ट उसका जो महात्म है वही महात्म वृंदावन लीला का है गोपियों के साथ रास खेल रहे हैं या तो फिर बाल बाल स्वरूप जब थे तब वो वही गोपियों के घर में जाकर के मक्खन चोरी करके खाते थे तो यह लीला का माधुर्य जो है वृंदावन में जो हमको देखने को मिला वह उसका इंपॉर्टेंस इतना ही है जो कि युद्ध के मैदान में खड़े रह कर के उन्होंने कृष्णा को गीता सुनाई थी वो फिलोसोफर किंग ग्रीक लिटरेचर में एंट ग्रीक लिटरेचर में वे लोग बोलते हैं कि सर्वश्रेष्ठ मनुष्य कौन है सिर्फ राजा नहीं जो कि राज करता है सिर्फ फिलोसोफर नहीं जो कि चिंतन करता है किंतु फिलोसोफर किंग अर्थात कि चिंतना मेंक जिनकी बुद्धि है ऐसा राजा क्यों ऐसा कहा है क्योंकि फिलोसोफर होता है वह सोच कर के शांत हो जाता है और राजा जो होता है यदि उसकी बुद्धि कम होती है तो ज्यादातर समय वह युद्ध के मैदान में दूसरों की संपत्ति हरण करने में या तो फिर प्रजा का शोषण करने में निकाल देगा किंतु जो फिलोसोफर कि होगा उसके भीतर में इतनी मेधा शक्ति इतना विजडम होगा कि वह सबके लिए एक सुंदर राज्य का निर्माण कर पाएगा जिसको कि हम अपने भारतीय परंपरा में राम राज्य कहते हैं सबको समान अधिकार मिलेगा यदि कोई बलवान व्यक्ति है और किसी कमजोर व्यक्ति है उसको शोषण कर रहा है तो राजा जाकर के वह कमजोर व्यक्ति का रक्षण करेगा राज्य के ऊपर में डाकुओं का या तो दूसरे किसी राजा का आक्रमण होने वाला है तो युद्ध के मैदान में राज्य का रक्षण करेगा तो एक विजडम जब किसी राजा में आ जाता है तो वहां की प्रजा सबसे ज्यादा खुश रहती है क्योंकि राजा फिलोसोफर किंग जिसको कहते हैं सबका हित देखता है क्योंकि उसको पता है कि मेरा हित सबके हित के भीतर में है देखिए आज के मॉडर्न युग में भी आधुनिक युग में भी आप यह देखेंगे कि जिस देश की पॉलिटिकल स्टेबिलिटी जिस देश में होती है वहां पर बिजनेस मैन्युफैक्चरिंग सबसे ज्यादा होता है और वहीं पर सबसे ज्यादा यह टैक्स कलेक्शन होता है क्योंकि आपकी जुडिशियस सिस्टम है आपकी लॉ एनफोर्समेंट सिस्टम है आपकी आर्मी है आपकी स्कूल्स कॉलेज हायर एजुकेशन सिस्टम है यह पंचायती राज राज मने वो ग्रास रूट लेवल का जो गवर्नेंस है सब कुछ जद ठीक-ठीक चलेगा तो वहां पर इकोनॉमिक्स बहुत ही तेजी से व डेवलप होगी वहां का इंडस्ट्रियल इजेशन फटाफट होगा व मैन्युफैक्चरिंग यह सर्विस सेक्टर इसका भी डेवलपमेंट होगा और इन टर्न गवर्नमेंट को इतना सारा टैक्स मिलेगा अब भारत में ही आप देखिए कुछ दिनों पहले मैं अभी दो-तीन दिन पहले ही मैं पढ़ रहा था कि जीएसटी कलेक्शन इस बार का जो है इट इज अ सेकंड हाईएस्ट 2017 के बाद का सेकंड हाई हास्ट जीएसटी कलेक्शन है और किसी में फोर्ब्स में ना कि वह ब्लूमबर्ग ऐसे कोई विदेशी न्यूज़पेपर में पढ़ रहा था कि इंडियन गवर्नमेंट के पास में टैक्स कलेक्शन इतना ज्यादा इस बार हुआ है कि दे विल बी एबल टू गवर्नमेंट लोक कल्याण के कार्य में ज्यादा पैसा डाल पाएगी अभी उनका एक नेगेटिव एंगल रहता है कि इससे इलेक्शन में फायदा होगा वो छोड़िए विदेशी लोगों को तो भारत की किसी ना किसी तरह से निंदा ही करनी है किंतु अब विदेशी लोग भी ऐसा कहते हैं कि उस समय जीएसटी जब स्टार्ट हुआ था तो लोग कितनी उसकी निंदा करते थे क्या-क्या बोलते थे गब्बर सिंह टैक्स ना कि ऐसा क्या-क्या बोलते रहते थे आज देखिए कि एक यूनिफाइड सिस्टम ऑफ टैक्स कलेक्शन है एक स्टैंडर्डाइज सिस्टम ऑफ टैक्स कलेक्शन है तो गवर्नमेंट की जो इनकम है इतनी बढ़ जाती है करप्शन करने का वो छोड़ दीजिए वो तो सभी जगह थोड़ा बहुत करप्शन होता ही है किंतु साथ-साथ में गवर्नमेंट के पास में यह पावर रहता है कि लोक कल्याण के कार्य के लिए आप इतना सारा पैसा खर्च कर सकते हैं तो यह एक स्टेबल गवर्नमेंट जहां पर रहेगी एक स्टेबल गवर्नेंस एक स्टेबल सिस्टम जहां पे रहेगी तो वहां पे सभी चीजों का अच्छे से एडवांसमेंट होगा तो यह ग्रीस में ऐसा बोलते हैं कि फिलोसोफर किंग जहां पे फिलोसोफर किंग होगा वह देश का सबसे अच्छा कल्याण होगा तो हमारे यहां पे भी यह वोरियर फिलोसोफर भगवान कृष्ण स्वयं युद्ध के मैदान में खड़े हैं कृष्णा की युद्ध करने की क्षमता के बारे में तो किसी को कोई डाउट होना ही नहीं चाहिए किंतु साथ-साथ में ही यह एक विजडम है विजडम की मनुष्य जीवन को किस तरह से रेगुलेट करना है अपने जीवन की किस तरह से उन्नति करनी है आध्यात्मिक भी और इंटेलेक्चुअल भी और सोशल भी इमोशनल भी इ जितने भी आयाम है जितने भी एस्पेक्ट है ह्यूमन लाइफ के सभी में आपकी उन्नति हो वह आपको फिलोसोफी सिखाती है यदि आपके पास में वो फिलोसॉफिकल क्षमता है सटल दृष्टि जो होती है फिलोसॉफिकल विजडम जति होता है तो आप अपने जीवन को तो एक बहुत ही सुंदर रूप से उसका गठन कर ही पाएंगे किंतु जिस समाज में आप रहते हैं उसको भी बड़ा ही अच्छे से आप गवर्न कर पाएंगे तो कृष्ण का एक वो स्वरूप है फिलोसोफर किंग वॉरियर फिलोसोफर कि वो युद्ध मने जो फिलोसोफी उसको प्रैक्टिकल करके वो दिखा सकते हैं सिर्फ वो हवाहवा में वो बातें नहीं करते वो फिलोसोफी को प्रैक्टिकल कर सकते हैं तो ऑन वन हैंड कृष्णा इज अ वॉरियर फिलोसोफर एंड ऑन दी अदर हैंड उनका यह जो एक सुमधुर भावात्मक स्वरूप है वृंदावन में बालकृष्ण के रूप में गोपियों का मक्खन चौराई करते चोरी कर किया करते थे और फिर जब बड़े हुए तो गोपियों के साथ में यह रासलीला जो उनकी थी मधुर भाव और बालक भाव और मातृ भाव ऑन वन हैंड एंड ऑन दी अदर हैंड वरियर फ फिलोसोफर ये दोनों भावों का इक्वल इंपॉर्टेंस है ठाकुर एक बार कथामृत में कहते हैं कि वहां पर पश्चिम में मैंने सुना है कि पश्चिम में यानी कि ये पश्चिम अर्थात कि बंगोल की दृष्टि से पश्चिम यानी कि नॉर्थ इंडिया वगैरह तो मैंने सुना है ठाकुर कहते हैं मैंने सुना है कि पश्चिम में भगवान कृष्ण का वो वृंदावन स्वरूप इतना पसंद नहीं करते जितना कि मथुरा स्वरूप या तो फिर ये युद्ध के मैदान में जो भगवान कृष्ण थे वो वाला स्वरूप ज्यादा पसंद किया करते क्या यह बात सही है ऐसा शायद वो लास्ट वाला सेंटेंस नहीं कहा किंतु इतना उन्होंने कहा है कि वो माने ऐसे कुछ लोग होते हैं जो कि जिनको कि भगवान कृष्ण का यह स्वरूप जो है भावात्मक स्वरूप वो अच्छा नहीं लगता उनको हमेशा ऐसा लगता है कि फिलोसोफर वॉरियर फिलोसोफर किंग ऐसा होना चाहिए हम हमारा आदर्श तो फिलोसोफी यदि हम अच्छे से समझना पढ़ना प्रैक्टिकल अप्लाई करना शुरू करें तो एट द एंड ऑफ द डे उसके भी में एक सुंदर भावात्मक स्वरूप ही निकल कर के आएगा जैसे कि वह जमीन में से वह हीरा निकालते हैं ना वो हीरा वो तो कोयले के जैसा दिखता है वो कोयले उसको आप वो ये करके उसको मने प्रॉपर्ली उसको प्रोसेस करेंगे तो इतना बड़ा कोयले का वो पत्थर होगा उसमें से एक छोटा सा हीरा निकलेगा तो माने क्या है कि उसको खुदाई करनी पड़ माइनिंग करना पड़ता है उसको प्रोसेस करना पड़ता है उसको शेप देना पड़ता है तब कहीं जाकर के हमको हीरा मिलता है तो वैसे ही फिफी का है फिलोसोफी हम जितना ही उसको प्रॉपर्ली माइंड करें फिलोसोफी के भीतर में जितना ही डीप डिगि करें उतना ही हमको पता चलेगा जो हीरा हमारे हाथ में आ रहा है वह एक सहज सरल हृदय वाला एक सुंदर व्यक्तित्व है जिसके सामने की सभी लोग नतमस्तक होते हैं तो उस सहजता सरलता को एक एक कहेंगे कि उसको एस्टेब्लिश करने के लिए सहजता सरलता को प्रतिपादित करने के लिए छोटे से गांव में मां और ठाकुर का जन्म हुआ था यह जिस तरह से वृंदावन लीला थी वैसे ही लीला प्रसंग में और इसी गंभीरानंद जी की पुस्तक में हम देखेंगे कि ठाकुर और मां का जो मां की जो बाल्य लीलाएं थी वह इतनी ही सुमधुर थी जो कि हमारे मन को भाज और उनका चिंतन मनन करके हमारा हृदय भी सुसंस्कृत सुपरिम हो तो महाराज जी ने पहले तो प्रश्न कर दिया कि छोटे से गांव में इनका जन्म क्यों हुआ है अभी मैंने जो एक उत्तर दिया है अभी महाराज भी एक उत्तर दे रहे महाराज जी क्या लिखते हैं गंभीरानंद जी महाराज र उत्तर के दब हालांकि मैंने दिया है मेरी छोटी सी बुद्धि यूज करके जहार अचिंत महिमा जगत सृष्टि स्थिति लोय होया थाके जिनकी प्रभाव से सृष्टि स्थिति लय होती है इस समग्र विश्व का तहर कोटी कार्जर कारण निर्णय आमरा समर्थ होई उनके जो कार्यकलाप है उसकी उसका लॉजिक समझने के लिए उसके पीछे का कोई कारण समझने के लिए क्या हम समर्थ है यही ठाकुर यही मां जिनकी इच्छा से स सृष्टि स्थिति प्रलय होता है वह कोई भी कार्य क्यों करते हैं वह समझने के लिए हमारी छोटी सी बुद्धि क्या सक्षम है तबु मानव बुद्धि निजे अपार गता जानिया ओ अनुसंधान बरतो होयना फिर भी मनुष्य की बुद्धि अपनी क्षुद्र का चिंतन अपना क्षुद्र समझने के बाद में भी यह सब बड़े-बड़े प्रश्नों का निराकरण करने के लिए बड़े-बड़े प्रश्नों का उत्तर खोजने के लिए हमेशा रत रहती है जैसे कि मैंने अपनी बुद्धि से सोचा ऐसे ही सभी लोग अपनी अपनी बुद्धि लगा कर के सोच सकते हैं कि क्यों छोटे से गांव में उनका जन्म हुआ आमरा ताई भाभी तो इसीलिए हम यह सोचते हैं जयराम बाटी की कोनो निज महिमा छलो जहार फले से ही सौभाग्य अधिकारी होलो जयराम बाटी की क्या अपनी कोई महिमा थी जिस वजह से वह आद्याशक्ति जगदंबा के जन्म देश बनने का सौभाग्य प्राप्त कर पाया जन्मभूमि बनने का सौभाग्य प्राप्त कर पाया बहु संधाने तमन किछु गोचर होए ना जयराम बाटी का ऐसा क्यासा महत्व था कि अध्य शक्ति जगदंबा स्वयं जन्म धारण करेगी बहु संधान करने के बाद में बहुत छानबीन करने के बाद में ऐसा कुछ भी दृष्टि गोचर नहीं हो रहा ऐसा कुछ भी नजर में नहीं आ रहा सुधु इतिहास शेर पृष्ठा गुली आमा दिग के स् मरण कोराया दे ज इतिहास के पन्ने हमको यह स्मरण करवा देते हैं श्री कृष्णर जन्म कुं शेर कारागार है श्री कृष्ण का जन्म कंस के केद खाने में कारागार में एवं शैश बाल और कशोर गोपाल गो गोप बालक मध्य यतो होया छलो भगवान कृष्ण का जन्म केद खान में और बचपन जो है वह वृंदावन में गोप बालक बालिकाओं के साथ में व्यतीत हुआ था यशु ख्रिस्त अश्व जन्म ग्रहण करिया शुत्र धर गृहे ललित लालि तो होया लेन भगवान कृष्ण एक छोटी सी अश्व शाला में उन्होंने जन्म ग्रहण किया था और शुत्र धर गृह लाली तो होया छले शुत्र धर गृह मुझे देखना पड़ेगा इसका अर्थ क्या है किंतु जहां तक मुझे ख्याल है भगवान कृष्ण जीसस के पिताजी कारपेंटर थे तो कारपेंटर के घर पर उनका बचपन बीता था श्री रामकृष्ण अख्या नामा का कार पुकुर ग्रामे ढेकी साले भूमि होया भगवान कृष्ण कामर पुकुर जैसे जिसका कोई महात्म नहीं है वहां पर ढेंकी शल ढेंकी शल का अर्थ पता है जहां पर धान को वो सेपरेट करते हैं उसका वह जो बाहर का वो जो लेयर होता है उसको सेपरेट करने के लिए वो ढेंकी होती है अभी ढेंकी का हिंदी नहीं पता किंतु ढेंकी शल जहां पर ढेंकी रहती है उस गृह में ठाकुर का जन्म हुआ था दक्षिणेश्वर मंदिरे देबल वृति स्वीकार कोरिया लेन दक्षिणेश्वर मंदिर में पुजारी का पद स्वीकार किया था आर समाज तात्विक सिद्धांत होते अमरा जानी ते पाई ज सोशल सोशल साइंस के दृष्टि से जद देखे तो हमको समझ में आता है कि देशेर नगरवासी शिखी तो और धनी को संप्रदाय चिंता विप्लव उपस्थित होले जातीय संस्कृति बहु काल जावत श्व शांत जीवन आश्रय पूर्वक अतो रोखा कोरिया थाके बड़े-बड़े शहर में नए-नए विचार आकर के विचारों की क्रांति चलती ही रहती है किंतु राष्ट्र का सही प्राण है वह छोटे से गांव में उसकी रक्षा होती है आजकल जो विचारों की क्रांति यह सोशल मीडिया का प्रभाव कहो ना कि आक्रमण कहो ये आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ये मॉडर्न टेक्नोलॉजी ये मॉडर्न आइडियाज मॉडर्न पॉलिटिक्स हमारे महानगरों को आंदोलित चंचल करता रहता है किंतु गांधी जी ने कहा है रियल इंडिया लीव्स इन द विलेजेस सही सही भारत है वो गांव में रहता है तो यह सोशल साइंस की दृष्टि से भी यदि देखें तो बड़े-बड़े शहरों में जो विचारों की क्रांति टेक्नोलॉजिकल रेवोल्यूशन वगैरह जो आते रहते हैं किंतु धार्मिक प्राण देश का उसकी सही सही रिप्रेजेंटेटिव हमारे गांव ही है विशेष तो भारतीय संस्कृति दरिद्र ब्राह्मण और कपरदक हीन धर्म गुरु दिग के आध्यात्मिक उच्चा सण छड़िया दिया अध्यात्म रख एक अद्भुत उपाय आविष्कार कोरिया छ खास करके यह भारतीय संस्कृति के बारे में देखिए कि एक दरिद्र ब्राह्मण है या एक दरिद्र धर्म गुरु है उसके लिए उच्च आसन जो है उसके लिए र् करके रखा है और इस तरह से धर्म की भारत में रक्षा की गई है आत्मरक्षा अद्भुत उपाय आविष्कार कोरिया छन वो कौन रोबर्ट क्लाइव ना की किसकी वो फेमस कहानी है कि वह सोच रहा था कि किस तरह से भारत की यह संस्कृति है उसको तोड़ दिया जाए तो देखा कि वो एक उसके ऑफिस में एक बड़ा ही पोजीशन वाला एक ऑफिसर ना कि क्लर्क एक है और देखा कि वो एक छोटे से वो एक ब्राह्मण के सामने वोह ब्राह्मण को प्रणाम कर रहा है अभी वह जो प्रणाम करने वाला ऑफिसर था और ब्राह्मण था दरिद्र था और छोटी पोस्ट वाला था कारकुन था तो उसने उसको बुला कर के पूछा कि अरे तुम ऑफिसर हो और क्यों एक इतने जी क्या पोजीशन लोअर पोजीशन में है दरिद्र है ऐसे ब्राह्मण को प्रणाम कर रहा हो यह तो कौन सा तुम्हारा थिंकिंग है तब उसने बताया कि नहीं ब्राह्मण तो हमारे लिए हमेशा के लिए प्रणम है तब उसने सोचा कि ब्राह्मणवाद जो है उसके ऊपर में आघात किया जाए ब्राह्मणों को एक नेगेटिव स्वरूप देकर के एक पूरा कल्चर स्टार्ट किया जाए यही रीजन है कि आजकल हम देखेंगे कि ब्राह्मण का शब्द आने से ही लोग यह हो जाते हैं अरे इन्होंने तो भारत का शोषण किया है भारत की जो वर्तमान अव्यवस्था कहो ना कि एक सोशल टेरियो कहो ये ब्राह्मण लोगों की वजह से आया है मैं खुद इस तरह से सोचना शुरू कर दिया था य साम्यवाद और यह सब विचार मेरे सर पर भी वो बड़े प्रभावित हो गए थे मैं भी सोचता था कि ब्राह्मण लोगों ने भारत के ये जो नीच जाति वाले हैं छोटी जाति वाले उनका शोषण किया है उनको आउटकास्ट कर दिया है यह सब मैं भी सोचता था एक्चुअली क्या है कि स्वामी जी ने हमको कहा है कि यह जो एक के बाद एक 1000 सालों से बाह्य आक्रमण होता रहा उसकी वजह से यह कास्ट सिस्टम हमारे यहां रिजडन हो गई और वो उसने हमारे समाज का सोसाइटी का वो डेवलपमेंट उसने रोक लिया नहीं कि ब्राह्मणों की वजह से हुआ बाह्य आक्रमण की वजह से हुआ है ब्राह्मण लोगों ने तो विद्या चिंता इसको तो बना करके रखा है इनके ऊपर में कितना ही अत्याचार हुआ कन्वर्ट करने का कितना भी प्रयत्न हुआ फिर भी हमारी संस्कृति आज जो जीवित है यही ब्राह्मण लोगों की वजह से है तो इन ब्राह्मणों को तो सम्मान देना चाहिए ना कि सतत उनके प्रति एक जाहिर में निंदा की जाती है तो ये एक पूरा उल्टा कार्य जो संस्कृति का हुआ है यह वो ब्रिटिश लोगों की कु नीति मने ब्रिटिश लोगों की यह जो चाणक्य नीति है उसका ये परिणाम है कि हमारी संस्कृति के धरोहर को ही हम लोग आज गाली देना शुरू कर द जिसको अपनी संस्कृति के ऊपर में एक एक घृणा जद प्रकट करवा दी जाए तो वह देश और समाज इमीडिएट वो डिटेरिटोरियलाइजेशन भारत को तोड़ने वाली शक्तियां आज भी बड़े ही सटल रूप से बड़े ही सूक्ष्म रूप से हमारे मन में हमारी ही संस्कृति के प्रति एक प्रश्नार्थक पाने में सक्सेसफुल रही है यह एक हमको बड़ा ही देखने का बात है और इसीलिए पहली बार एक ब्राह्मण अवतार हुए अभी तक व क्षत्रिय अवतार थे क्योंकि ब्राह्मण का समाज में एक स्थान था क्षत्रिय का एक स्थान था तो ब्राह्मण के जो फिलोसॉफिकल आइडियाज को प्रैक्टिकल करना है सोसाइटी में तो वो तो क्षत्रिय ही कर पाएगा आज पहली बार हुआ है कि ब्राह्मण के रूप में ब्राह्मण का शरीर धारण करके अवतार को भगवान विष्णु को आना पड़ा है क्यों क्योंकि जो विद्या बुद्धि का सम्मान हमारे वैदिक युग में था सहज था मने प्रतिदिन के जीवन में था और उसी विद्या बुद्धि का प्रैक्टिकल करने के लिए क्षत्रिय के रूप में शरीर धारण करके भगवान आए तो आज उस विद्या बुद्धि का सम्मान ऑलमोस्ट चला गया है माने आध्यात्मिक विद्या का वैसे वह सेकुलर नॉलेज के बारे में चलो बहुत लोग बहुत कुछ कहते होंगे आजकल तो माता-पिता अपने बच्चों को इतना मेहनत करके खर्च करके पढ़ाई लिखाई करवाते हैं दैट इज वन टाइप ऑफ लर्निंग बट स्पिरिचुअल लर्निंग यह विद्या और बुद्धि यानी कि आध्यात्मिक विद्या तो आध्यात्मिक विद्या के पुनः प्रतिष्ठान करने के लिए यह ब्राह्मण प्रथा ब्राह्मण ऐसा शब्द अभी नहीं यूज करना चाहिए मैं खुद ब्राह्मण नहीं हूं आप में से शायद बहुत सारे लोग ब्रा नहीं होंगे ब्राह्मण होने की आवश्यकता नहीं है किंतु विद्या के प्रति निष्ठा जो ब्राह्मण का प्रतीक है आध्यात्मिक विद्या के प्रति निष्ठा और श्रद्धा वह हमको पुनः जागृत करनी है र किंडल करनी है विशेषत भारतीय संस्कृति दरिद्र ब्राह्मण और कपरदक हीन धर्म गुरु के आध्यात्मिक उच्चा सन छड़िया दिया आतो खार एक अद्भुत उपाय आविष्कार करया छ भारतीय संस्कृति ने अपना सर्वश्रेष्ठ सन्मान दरिद्र धर्म गुरुओं के लिए रिजर्व रखा है दरिद्र धर्म गुरुओं को उच्चा सन दिया है और इस इस माध्यम से हमने अपने संस्कृति की रक्षा की है स्वामी जी कहते हैं ना कि विदेश में जाकर के बोलेंगे कोई बहुत बड़ा धनपति है बहुत बड़ा एक प्रिंस है काउंट है तो वह क्या बोलेगा कि मेरे वहां पर जाकर के कोई बहुत बड़ा धर्म गुरु है पादरी चर्च का वो क्या कहेगा कि मेरे एंसर थे ना रोब बेरस थे माने कि लोगों का लोगों को लूट करके वह धनपति हुए थे वो चर्च के बड़े-बड़े धर्म गुरु इस तरह से अपने को यह करते हैं अपना परिचय देते हैं क्योंकि उनकी दृष्टि से यह लोगों का धन लूटने वाला लोगों पे राज करने वाला यही समाज का सर्वश्रेष्ठ व्यक्ति है भारत में उल्टा है स्वामी जी कहते हैं भारत में कोई बहुत बड़ा राजा भी होगा तो वह अपना एंसे ही विल ट्रेस हिस एंसे टू सम पुअर सेंट और ब्र यदि कोई राजा भी रहेगा तो कहेगा कि मेरे पूर्वज कोई एक दरिद्र ब्राह्मण थे दरिद्र संत थे और उनके उनके उनका मैं वंशज हूं तो यह भारत और विदेश में जो डिफरेंस है कि समाज में सर्वोच्च सन्मान किसको देते हैं स्वामी जी ने कहा कि मैं एक गरीब संत हूं इसके बावजूद मुझे ये जो सन्मान मिल रहा है जो कि इसलिए नहीं कि मैं कोई बहुत बड़ा राजा हूं मैं बहुत सारा धन है या तो मैंने बहुत सारे लोगों के ऊपर में विजय प्राप्त किया है मैं संत हूं गरीब हूं फिर भी मुझे यह जो सम्मान प्राप्त हो रहा है यह भारत का चरित्र भारत का आदर्श दिखाता है जयराम बाटी की शई अध्यात्म संपद गरिया यह दरिद्र ब्राह्मण के प्रति अध्यात्म विद्या के प्रति सन्मान प्रदर्शित करने की क्षमता सन्मान प्रदर्शित करने की लालसा इससे क्या जयराम बाटी ग्राम समृद्ध था इसीलिए जयराम बाटी में क्या मां का जन्म हुआ यह प्रश्न करके गंभीरानंद जी महाराज अवतरण का समाप्त करते हैं तो अवतरण का ही हमने देखा कि इतने दिन चली और इसके बाद में फर्स्ट चैप्टर है शक्तिपीठ शक्तिपीठ अर्थात की जयराम बाटी ग्राम का डिस्क्रिप्शन और जहां पर मां शारदा का जन्म हुआ था माने इसके बाद से प्रॉपर किताब स्टार्ट होगी तो वो हम कल से देखें आज यही तक ओम शांति शांति शांति हरि ओम तसत श्री राम कृष्णर्पण मस्तु