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ओ स्थापक यच धर्मस्य सर्व धर्म स्वरूपने अवतार वरिष्ठ राम कृष्णाय ते नम मां शारदा देवी का जीवन चरित्र जीवन और उपदेश गंभीरानंद जी महाराज द्वारा लिखित कल हमने देखा कि गंभीरानंद जी महाराज एक सेंटेंस में इतना सुंदर एक बात हमको बताते हैं मैं फिर से उस सेंटेंस को पढ़ लेता हूं पिता माता दारिद्रय संसारे मायर शैशव और बाल अतिबा तो होले व परस्पर प्रति स्नेह और प्रीति और श्रद्धा अशेष अवकाश प्रदान पूर्वक सेही दारिद्र्य ई परिवार दैनंदिन जीवन के बड़ो मधुमय कोरिया तुलिया छलो तीन तीन लाइन का सेंटेंस है बहुत बड़ा है किंतु इसका अर्थ है इतना ही सुंदर है जैसे एक श्लोक की तरह है गीता है रामचरित मानस है पाठ करेंगे चंडी है तो उसमें किस तरह से श्लोक आते हैं प्रत्येक श्लोक का एक ऐसा एक इंपोर्टेंस रहता है वैसे ही देखिए कि इस सेंटेंस का कितना सुंदर अर्थ होता है कितना सुंदर इसका भावा इसका एक यह है लिखने लिखा भी है इतनी सुंदर तरीके से कि अपना बचपन एक दरिद्र परिवार में बीतने के बावजूद मां के परिवार में एक दूसरों के प्रति भाइयों की बह छोटे भाई है मां तो उनकी बड़ी बहन है पिताजी की और माताजी की अपने लड़कों के प्रति बच्चों की अपने पिताजी और माताजी के प्रति यह जो एक भाव प्रीति और श्रद्धा का जो संबंध था वह इतना मधुमय था महाराज ने शब्द यूज किया है मधुमय मधु मधु अर्थात की हनी जो हनी से जो मध से भरपूर है वो है मधुमय जो स्वीट है मध की तरह वो स्वीट है उसका टेस्ट तो इस तरह से एक मधुमय संसार को बना दिया था आपस में श्रद्धा और प्रीति की वजह से परिवार दरिद्र है कभी-कभी हमको ऐसा लगेगा कि अरे दरिद्र परिवार है पैसे नहीं है तो बेचार को तो ठीक से खाने की व्यवस्था यदि मान लीजिए कि बहुत ठंड होती है तो गर्म कपड़े बहुत बारिश होती है तो उस समय तो पता है ना कि वह खड़ की छत होती थी जो पुआल जिसको हिंदी में कहते हैं जब धान होता है उसको काटते हैं जो पुआल होता है उसकी व छत बनाते हैं तो इस तरह के घर में रहते थे और यदि बहुत जोर से तूफान बारिश हो गया तो घर में पानी गिरेगा क्या से क्या नहीं हो जाएगा खेती में अभी देखिए इसके बाद में ही मां ने कहा है कि कीट का आक्रमण होने की वजह से खेती में जो धान लगा था सब नष्ट हो गया तो ऐसा भी जो नेचुरल डिजास्टर है बीमारी है या कुछ भी है वह जब आता है तब भी जो परिवार के भीतर में जो मधुमय एक रिलेशनशिप जो है एक दूसरे के प्रति उसकी वजह से जैसे ऐसा लगेगा आप स्वर्ग में रहते हैं ऐसा कभी नहीं होगा कि हां कि ज ऐसा नहीं है कि कष्ट महसूस नहीं होता है ऐसा नहीं है कि रामचंद्र देख नहीं पाते कि हां ठीक से यदि जतन ना किया जाए तो उन के बच्चों के बड़े होने में उनके बच्चों की जो जिस तरह से केयर करनी चाहिए उसमें त्रुटि रह सकती है यह तो पता है कि धन के अभाव में लालन पालन लालन पालन ठीक से करना बच्चों का थोड़ा कठिन होता है सब कुछ पता है किंतु फिर भी यह कठिनाई के भीतर में प्रतिदिन के संघर्ष में रह कर के भी दैनंदिन जीवन जैसे महाराज कहते हैं दिन प्रतिदिन का जीवन जिस तरह से मधुमय हो गया उसकी तो हम कल्पना ही कर सकते हैं बड़ो ही मधुमय कोरिया तुलिया लो बड़ा ही सुंदर मधुमय उसने बना दिया था तो यह सेंटेंस कल हमने देखा और मैंने मैं देखता हूं कि किताब को पढ़ते पढ़ते वैसे लगता है कि एक सिंपल नरेशन है किंतु बीच-बीच में ऐसे एक इंपोर्टेंट सेंटेंस महाराज जी लिखते हैं कि उसके ऊपर में आप कितना ही चिंतन मनन स्मरण कर सकते हैं जितने भी देखिए जीसस का जन्म अभी तो क्रिसमस गया जीसस का जन्म भी इसी तरह से एक स्टेबल में हुआ था चारों ओर वो जो वो जो पशु वगैरह थे और वहीं पर उन माता मेरी ने जीसस को जन्म दिया भगवान कृष्ण का जन्म कारागार में हुआ था हालांकि वह राजा के पुत्र थे राजवंश में उन्होंने जन्म लिया था किंतु बचपन तो वृंदावन में बीता था अभी वृंदावन में ऐसा लगेगा कि हां आज वृंदावन लीला को देख कर के हम को ऐसा आकर्षण होगा कि चलो हम भी वृंदावन में जाकर के रहे किंतु जो लोग उस समय वहां पर रहते होंगे उनकी डे टू डे स्ट्रगल कितनी होगी उसको तो हम अनुमान ही कर सकते हैं या तो फिर कभी-कभी अनुमान भी नहीं कर सकते जैसे कि वो इंद्र ने वहां पर इस तरह से वह बारिश किया कि सब कुछ डूबने को बैठा था बैठा था तो भगवान कृष्ण नहीं होते बचाने के लिए तो पता नहीं क्या होता तो वो दैनंदिन स्ट्रगल जहां भी है वो हमको बाहर से कभी नहीं समझ में आता व वहां पर रहने से समझ में आता है तो उसके भीतर में भी यदि एक दूसरे के प्रति आपके परिवार जनों के साथ में आपके मित्रों के साथ में एक मधुमय संबंध होने से आपका जीवन एक भीतर से आनंद से भर जाएगा देखिए एक कंट्रक्शन है बहुत बार हम लोग सोचते हैं कि हमको एक फाइनेंशियल सिक्योरिटी चाहिए और उसके लिए हमको जो भी करना पड़े वह जायज है या तो फिर कहेंगे कि फाइनेंशियल सिक्योरिटी ही अपने जीवन का एक बहुत ही इंपॉर्टेंट गोल होना चाहिए किंतु देखिए कि यह जो अपनी जो एंट ट्रेडीशन है ना यहां पे सिर्फ भारतीय ट्रेडीशन नहीं तो वेस्टर्न ट्रेडीशन ये ईस्टर्न ट्रेडिशनल जम है वहां पर जो संघ का गठन हुआ भारत में यह जो जॉइंट फैमिली की बात यह जो स्टार्ट हुई फिर विदेश में जाएंगे पश्चिम में वहां पर सभी कम्युनिटीज में सभी एरियाज में एक एक लोकल चर्च हुआ करता था और चर्च का जो यह है उन्हें उसका हेड उसको पास्टर कहते हैं पास्टर अर्थात की यह शब्द है जिसके पास में बहुत सारे पशु है पशुओं को जो मैनेज करता है पशुपति इसका एग्जैक्ट ट्रांसलेशन होगा पशुपति तो पास्टर तो वो पेस्टर का क्या काम है कि वो उसका काम है कि अपना जो फ्लोक है ये फ्लोक शब्द वे लोग यूज करते हैं फ्लोक अर्थात की अगेन ये पशुपालन में से यह शब्द आया है उस चर्च के जितने मेंबर्स है उस सब मेंबर्स की केयर करना माने ये मिडिवल टाइम्स में होता था बाद बाद में चर्च में करप्शन आने की वजह से बहुत सारे उसमें वह शाखा प्रशाखा एं हो गई किंतु ओरिजिनल जो चर्च था ओरिजिनल हम बुद्धिस्ट विहार कहेंगे कि जिस तरह से संघ बद्ध होकर के रहने की शुरुआत की तो यह क्यों हुआ क्योंकि मनुष्य को मनुष्य का साथ चाहिए इवन आध्यात्मिक जीवन में भी रामकृष्ण संघ का ही सबसे बड़ा उदाहरण कि स्वामी जी जब वहां पर थे काशी में तो बलराम बाबू के का मृत्यु हो गया उसका उनका देहांत हो गया तो स्वामी जी कहते हैं मैं कलकत्ता जाता हूं मेरे गुरु भाई का देहांत हो गया तो प्रम द बाबू वैसे ही प्रदा दास बाबू को मन में ऐसे ही थोड़ा सा स्वामी जी के प्रति थोड़ा शुरू शुरू में उनका रिलेशन बहुत अच्छा था किंतु बाद बाद में वो देखते हैं क्या अरे तो ट्रेडिशनल सन्यासी की तरह नहीं रहते तो ऐसा करके उनके मन में थोड़ा ये होने लगा था स्वामी जी जी के प्रति द्वेष भाव उसमें भी जब स्वामी जी ने यह कहा कि मैं अपने गुरु भाई के देहांत होने की वजह से कलकाता जा रहा हूं उनके परिवार को शांतना देने के लिए तो प्रम ददा बोलने लगी अरे आप तो सन्यासी है आपने तो जगत त्याग कर दिया है आपको यह सब गुरु भाई क्या गुरु भाई के परिवार को सांत्वना देना यह सब माया के बंधन में आप क्यों रहते हैं तो स्वामी जी उसका क्या उत्तर देते उन्होंने कहा कि ठाकुर ने हमको जिस तरह से बनाया है उस तरह से हम इसके अलावा इसका कोई उत्तर नहीं है तो जिस तरह से हम लोग साथ में मिलकर के रहते हैं ठाकुर के पास में जितने भी आते थे ठाकुर ने स्नेह के बंधन में उनको बांधा था बोलकर के ये लोग आते थे वरना तो देखिए कि एक आध्यात्मिक इच्छा होने के बावजूद भी आप किसी एक पार्टिकुलर जगह पर जाकर के रहेंगे वो बहुत कुछ डिपेंड करता है कि वहां का जगह का आपको आकर्षण कैसा है वरना यदि मुझे साधु ही होना है तो साधु संप्रदाय बहुत सारे हैं या तो फिर मैं सीधा हिमालय में जाकर के जहां पे ऋषिकेश है हरिद्वार है यह सब काशी है वृंदावन है जो कि सन्यासियों की जगह है वहां पर जाकर के ना रहू मैं क्यों राजकोट में रहता हूं राजकोट में ऐसा कोई तीर्थस्थान वगैरह कुछ नहीं है वैसे तो भारत की मिट्टी मिट्टी में कण कण में आध्यात्मिकता बुनी हुई है इसमें तो प्रश्न नहीं किंतु राजकोट का पार्टिकुलर तो ऐसा कोई महात्म नहीं है स्थान का ही महात्म कहे तो काशी है अयोध्या है वृंदावन है ऋषिकेश है हिमालय अमरनाथ यह सब जगह है सन्यासियों के लिए राजकोट में मैं क्यों रहता हूं क्योंकि यह संघ है संघ जहां पर है वह जगह पवित्र हो जाती है यहां पर ठाकुर का मंदिर है संघ बद्ध होकर के साधु लोग रहते हैं ठाकुर की सेवा होती है साधु सेवा होती है जन सेवा होती है तो इसकी वजह से यह जगह यह आश्रम यह मिट्टी यहां की पवित्र हो गई है तो आध्यात्मिक सफर के लिए यह बेनिफिशियल है तो यह साथ में मिलकर के आप जहां-जहां पर भी रहेंगे वहां वहां पर देखेंगे कि भगवान का उद्भव भगवान की उपस्थिति अवश्य होगी तो एक बहुत ही सुंदर सेंटेंस महाराज जी ने यहां पर लिखा है अभी जैसे हमने कल देखा था कि मां अपने खुद के पूर्व जीवन के बारे में अपने बालिका जीवन के बारे में मां खुद क्या कहती है वह उन्होंने कहा है जिसको कि महाराज ने यहां पर लिखा है मां कहती है भाई देर निए गंगाई नाते जेतु मैं अपने भाइयों को लेकर के गंगा में नहाने के लिए जाती थी अमोदर नदी छलो जनो आमदर गंगा वहां पर अमोदर नदी थी तो मां कहती है अमोदर नदी ही थी हमारी गंगा वहां तो गंगा वहां से हो कर के नहीं जाती अमोदर नदी होकर के जाती है वो जयराम बाटी जो लोग मैंने गए होंगे वहां पर प्रवास किया होगा दर्शन किया होगा तो आपको पता होगा कि मातृमंदिर जहां पर मां का अभी आज हमारा आश्रम है वहां पास में ही थोड़े ही दूर 152 मिनट की वॉकिंग डिस्टेंस पर ही वो अमोदर नदी है तो मां कहती है कि वोह अमोदर नदी ही हमारी गंगा थी गंगा स्नान कोरे शेखाने बोसे मुड़ी खे आबार ओदर निय बाड़ी आतम गंगा स्नान करके वहां पर बैठ कर के मुड़ी अ अर्थात की मुरमुरा हिंदी में कहते हैं गुजराती में कहते हैं मम तो वो मुरमुरा लेकर के जाते थे साथ में और फिर वो गंगा स्नान करने के बाद में वहीं पर बैठते थे मुरमुरा खाते थे और फिर वापस आते थे ये देखिए वो ठाकुर की जो कहानी है ना कि ठाकुर ने अपने वो वो जो वस्त्र में वो बांध दिया था मुरमुरा और वो लेकर के रास्ते में खाते खाते जा रहे थे खेत में से और नील आकाश में शुभ्र सफेद बत कों की हार देखकर के पंक्ति माला देख कर के ठाकुर को समाधि हो गई वो पहली समाधि ठाकुर के जीवन की तो देखिए कि वो उस समय के बच्चों का ऐसा था कि आजकल हम यह जो लंच पैकेट वो सब फास्ट फूड लेकर के जाते थे तो मुरमुरा था वो ओरिजिनल फास्ट फूड उस समय का कि उसको लेकर के बच्चे लोग जाते थे बाहर में कहीं गंगा स्नान करने के लिए जाएंगे नदी में वो स्नान करने के लिए जाएंगे या तो फिर ठाकुर की तरह खेत में भ्रमण करने के लिए जाएंगे तो फिर वहां पर खाते जाते-जाते या तो फिर बैठ कर के वो मुरमुरा खाते थे व माने वो भी एक मने इमेजिन करके हम देख सकते हैं कि कितना सुंदर वो दृश्य होगा छोटे-छोटे भाई है अपने वो वो तूफान मस्ती करते होंगे एक भाई इधर दौड़ता है दूसरा कोई एक दूसरे के साथ में वो फाइट करते हैं जैसे छोटे बच्चे का होता है और बड़ी बहन को कंप्लेन करते हैं दीदी देखो इसने ऐसा किया दूसरा बच्चा बोलता है कि अरे नहीं पहले इसने मुझे धक्का मारा ऐसा वो बच्चों में तो झगड़ा झट चलता रहता है बड़ी बहन का कर्तव्य है कि उनको ठिकाने लाए सबको होए तो बीच-बीच में पनिश करे बीच-बीच में हो तो ठीक से उनको प्रेम से आदर से शांत करें और उनको स्नान करा करके फिर वहां पर बैठना अमोदर नदी के किनारे और फिर वहां पर मुड़ी खाना मुड़ी खाना और फिर घर वापस आना देखिए कि सिंपल जीवन है कुछ नहीं है आजकल सोशल मीडिया के जमाने में यह जो फास्ट ये जो वर्ल्ड है अपना अभी यहां पर एक डिवटी अपने आए थे कुछ दिनों पहले वो मुझे बता रहे थे कि उनकी डॉटर है वो हाई स्कूल में पढ़ती है तो वह कहते हैं कि हम लोग जहां पर रहते हैं वहां पर बहुत ही सुंदर प्लेग्राउंड है और बहुत ने सेफ और सिक्योर है और हम लोग चाहते हैं कि हमारे बच्चे प्लेग्राउंड में जाकर के खेले तो मैं अपनी डॉटर को सब समय कहता हूं कि तुम जाओ वहां पर खेलो किंतु उसका ऐसा है कि जैसे वो स्कूल से आती है और फिर कुछ ही समय के बाद में वो मोबाइल लेकर के बैठ जाती है फिर उसी में उसका पूरा जीवन है तो यह भाई कहता है कि मैंने उसको मॉनिटर करने का प्रयास किया कि मोबाइल में क्या करती तो ठीक है अच्छी ही बात है जो उनका जो सिलेबस है जो एजुकेशन है उसी के रिलेटेड वह सर्च करती है या वीडियो देखती है या तो फिर होमवर्क के लिए जो कुछ भी करना है वही सब करती है और कुछ नहीं है किंतु फिर भी वह भाई कहते हैं कि हम लोगों का जैसे जीवन था उनकी उम्र शायद 50 55 की होगी तो कि हम लोगों का जैसा जीवन था कि स्कूल से आते ही दफ्तर साड में रख कर के सीधा दौड़ कर के जाकर के वो वो गली में वो होती है स्ट्रीट वहां पर जाकर के खेलते थे अपने मित्रों के साथ में आजकल मैं देख रहा हूं कि हमारे जो बच्चे हैं पूरा उनका अंतर्मुखी जाना घूमना खेलना यह सब उनको आता ही नहीं है या तो फिर इनको इंटरेस्ट ही नहीं है पता नहीं यह मोबाइल ये डिजिटल वर्ल्ड उसमें क्या ऐसा रखा है कि उनकी पूरी प्राण शक्ति खा लेता है और फिर इसका साइड इफेक्ट क्या होता है कि फिजिकल फिटनेस वो उससे सफर होती है बचपन में ज्यादा नहीं पता चलता किंतु यह ओबेसिटी है वह जब एक बार लग जाती है आपके भीतर में वह फैट वो ऑर्गन्स में एक बार कलेक्ट होना शुरू हो जाती है वो जिस उम्र पे आपको स्ट्रेन उस वर्क करना है खेलना है दौड़ना है यह सब करना है वो नहीं करने से वो फैट डिपॉजिट होना शुरू हो जाती है तो आज अभी आजकल ऐसा होता है जो मिडल एजेस में जो बॉडी स्ट्रक्चर होता है कि मिडल एज में क्या होता है अभी जैसे मेरा है कि मुझे दिन भर बैठ कर के ही काम करना है मेरे पास ऑप्शन ही नहीं है तो यह बैठ कर के काम करने से हम सब में यह फैट डिपॉजिट होना शुरू हो जाती है तो ये अभी तक ऐसा होता था मिडिल एजेस में यह होता था अभी बचपन में ऐसा होने लगा है बच्चों के जीवन में मिडिल स्कूल में पढ़ते हैं हाई स्कूल में पढ़ते हैं उसमें अभी वो फैट डिपॉजिट होना शुरू हो गया और फिर पता नहीं बाद में किस तरह के वह प्रॉब्लम्स में पड़ेंगे जैसे आज मिडल एज में होता है वोह बचपन में आजकल होने लगा है तो देखिए कि जीवन आज हमारा कितना परिवर्तित हो गया है उस समय अभी आज हम देखते हैं कि पहले का समय कितना मतलब एक सरल था एक कितना ही एक इनोसेंट युग था जो कि आज चला गया है कि बच्चों को लेकर अपने छोटे भाइयों को लेकर के गंगा वो नदी में स्नान करने के लिए जाना फिर वहां पर थोड़ा खेलना कूदना एक दूसरे को साथ में थोड़ा झगड़ा करना थोड़ा आदर प्रेम सहानुभूति दिखाना फिर वहां बैठ कर के थोड़े से मुरमुरा खाना और फिर घर चले आना माने वो भी एक जीवन था ना वो सिर्फ मां के जीवन में ही नहीं वो तो एक कॉमन था उस समय आज का जीवन हमारा कितना आर्टिफिशियल हो गया है देखिए सब बातों को पढ़ कर के हमको लगता है मां कहती है आगे आमार बराबर एक टू गंगाबाई छीलो मेरा सब समय हमेशा के लिए गंगा के प्रति एक प्रबल आकर्षण था गंगाबाई बाई अर्थात की एक ऑब्सेशन जैसे कि शची बाई अर्थात की स्वच्छता के प्रति एक ऑब्सेशन एक आकर्षण तो वैसे गंगाबाई गंगा की प्रति एक आकर्षण मां कहती है मेरी हमेशा से गंगा के प्रति एक आकर्षण हमेशा के लिए था मेरा अन्यान्य काज संबंध तीनी कोहिया छिले बाकी सब कार्य के बारे में माने कहा था छले बेलाई गोला समान जोले ने में गरुर जन्नो दोल घास केटे छी मैं जब छोटी थी तब गले के जितना गले तक जहां पर पानी था जो खेत में फ्लटरिंग होता है खेत में तभी वह धान अच्छे से होता है तो गले के जितना पानी होता है उस तरह के खेत में जाकर के मैंने गाय के लिए दल घास अर्थात कि गाय को खाने का जो चार है वो काटा है अभी जनरली ऐसा होता है कि खेत में आप देखेंगे कि किसान लोग क्या करते हैं अपना घुटन तक होता है वो पानी वो उसमें उतना फ्लुंग करते हैं तो अभी तो मां मां छोटी थी मां की साइज भी छोटी हाइट भी छोटी होगी तो किसान के लिए यदि वो घुटन तक पानी होगा उनके पिताजी के लिए तो मां के लिए तो गले भर तक पानी आ जाता होगा तो इस तरह से जहां पर गला भर पानी है उस तरह के फ्लडेड खेत में जाकर के ये घास काटना वो जो आरी होती है ना आरी से घास काटते हैं तो ऐसा भी माने किया है खेते मुनिश देर जन्नो मुड़ी निय जेतु खेत में जो लेबरर्स काम करते हैं खेत मजदूर उनके लिए मैं मुरमुरा लेकर के जाती थी एक ब छोर पोंगो पाले शोब धान केटे छीलो एक साल पोंगोपाल अर्थात की एक तरह का कीट एक तरह का पेस्ट तो उसने सब धान काट दिया था खेते खेते शही धान कुड़िए छी खेत खेत में जाकर के मैंने वह काटा हुआ धान था वह कलेक्ट किया था देखिए उस समय भी ऐसा था कि कब कहां से क्या नेचरल डिजास्टर आ जाए अभी आज जैसे फसल वीमा योजना वगैरह जो है किसानों के लिए उस समय तो नहीं था धन नष्ट हो गया तो बस आपका उस साल भी पूरा गया और फिर जमींदारी प्रथा जहां पर होती है वहां तो जमींदार यह नहीं सुनेगा कि नेचुरल डिजास्टर की वजह से धन नष्ट धान नष्ट हो गया है वो कैसे भी करके आपके घर में घुस करके वह जो बर्तन वगैरह जो भी है वो वस्त्र बर्तन उठा कर के ले जाएंगे तो किस तरह का वह भी एक जीवन था आज हम जितने सेफ और सिक्योर होते जा रहे हैं उतना ही हम प्रकृति से भी दूर जाते जा रहे हैं और अपने भीतर में जो वेल स्प्रिंग है आध्यात्मिक जो झरना बह रहा है उससे भी हम उसमें वो डुबकी लगाने की बजाय बीच-बीच में उस हम लोग एक एक किस तरह का एक विचित्र लाइफ स्टाइल हम लोगों ने सिलेक्ट किया है अभी जो अपने क्लास में आते हैं निश्चय आप लोग वेरी सिंसियर है बोलकर के क्लास में आते हैं और आपका लाइफ बड़ा ही डिफरेंट होगा किंतु अदर वाइज हम समाज की ओर देखें तो जैसे वह कभी-कभी कोई डिवटी आ कर के मुझे बताता है अभी एक लड़का आया था कुछ दिनों पहले वैसे वो मेरे पास में बीच-बीच में आता है मैंने सोचता था कि बहुत अच्छा लड़का है मुझे बोलता है कि मैं भी पहले ड्रग्स लेता था अभी मैंने बंद कर दिया है मैंने कहा क्या बात करते हो रे तुमको देख कर के लगता नहीं है तुम ऐसा करते होंगे किंतु क्या है देखिए कि लड़कों का चरित्र अपने घर में ठीक होता होगा माता-पिता अच्छे संस्कार देते होंगे किंतु जैसे ही बाहर गए मित्रों की संगत में ऐसे लगे व अच्छी संगत होने से अच्छा फल मिलता है बुरी संगत में बुरा फल मिलता है तो ऐसी संगत में पड़ गया होगा और यह सब उसने चालू कर दिया होगा अभी वह बोलता है मैं आश्रम में आता हूं रेगुलर और अभी यह सब चीजों से मैं छूटना चाहता हूं या तो छूट गया हूं देखिए कि हम लोग कभी इमेजिन भी नहीं करेंगे ऐसी ऐसी जगह पर यह सब कु नीतिया कु दूषण जिसको कहते हैं वह सब चले गए हैं तो इसलिए जो मां का जीवन सिर्फ आध्यात्मिक दृष्टि से ही नहीं एक प्रकृति के साथ में तादात्म्य होकर के रहने का यह भी एक हमको यहां से सीखना है बहुत बार देखिए कि एक पोस्ट इंडस्ट्रियल वर्ल्ड जो है ना हमाराय बड़ा ही विचित्र वर्ल्ड है ये इंडस्ट्रियल इजेशन की वजह से यह जो हमारी डिस्ट्रीब्यूटर कम्युनिटीज थी वह सबको एक अर्बनाइजेशन अर्बन एरियाज में डेंसली पॉपुलेशन होगा आधे घंटे का फिर भी वहां पर पता है कि उनके बगल वाले खेत में जो घर है वहां कौन रह रहा है कोई भी आपत्ति आने से कोई भी वो प्रॉब्लम होने से वे लोग जाकर के हेल्प करेंगे आज शहरों में ऐसा होता है फ्लैट में रहते हैं यहां पास में ही दूसरा फ्लैट है यहां तीसरा अपने जो फ्लोर पे जो कौन रहता है आपको पता नहीं है मने जितना आदमी एक दूसरे के साथ-साथ रहता है पास में आता है अर्बन एरियाज में इतना ही वो मन से एक दूसरे के दूर जाते जाते हैं और गांव में है कि आप वैसे फिजिकली एक दूसरो से दूर रहते हैं किंतु मन से इतना ही पास रहते हैं तो अभी हो सकता है कि यह पोस्ट इंडस्ट्रियल जो वर्ल्ड है इसके बाद में पडेम के बाद में अभी एक फिर से खास करके यह जो अमेरिका वगैरह वेस्टर्न कंट्रीज में ये वर्क फ्रॉम होम यह जो डिजिटल जो टेक्नोलॉजी जैसे-जैसे डेवलप हो रही है तो वैसे अभी एक आशा बनी है कि हां चलो हम सबर्स भी हम वहां पर रह कर के बिना क्यूट किए अर्थात कि सबर्ट में से सिटी में आए बिना अपने घर में रह कर के काम कर सकते हैं ऐसी पॉसिबिलिटीज ये डिजिटल टेक्नोलॉजी हमको दे रही है तो डिजिटल टेक्नोलॉजी के प्रॉमिस भी है पेरिल्स भी है पता नहीं यह हमारे जीवन को किस तरह से चालित करेगी मैं यह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस वगैरह जो न्यूज है जनरली देखता रहता हूं और उसको जब पढ़ता हूं फिर जब मां का जीवन पढ़ता हूं ठाकुर का जीवन पढ़ता हूं देखिए कि कितना ज्यादा कंट्रास्ट कितना बड़ा विरोधाभास है किंतु ऐसा नहीं है कि हम यह उस गांव के जीवन में वापस जा पाएंगे ऐसा कभी होने वाला नहीं है यदि हम जबरदस्ती अपना डेवलपमेंट अपना इवोल्यूशन रोक कर के रखेंगे जैसा हमने भूतकाल में किया था तो जो परिस्थिति हमारे साथ में हुई थी 1000 साल की गुलामी जिन लोगों के पास में एडवांस टेक्नोलॉजी है उन लोगों ने आकर के हमको गुलाम बना कर के रखा यानी कि अभी यह ऑप्शन अपने पास में नहीं है कि टेक्नोलॉजी का परहेज करें टेक्नोलॉजी से दूर जा कर के रहे टेक्नोलॉजी को तो अपनाना ही होगा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस बोलो मॉडर्न कम्युनिकेशन टेलीकम्युनिकेशन इंटरनेट डिजिटाइजेशन इंडस्ट्रियल इजेशन जो कुछ भी बोलो उसको तो हमको अपनाना ही होगा किंतु इसके साथ-साथ में कैसे हम वोह जो पुराने रूरल डेज थे किस तरह से यह जो रूरल सिविलाइजेशन के साथ में हम वापस जा पाए इसके बारे में भी सोचना होगा क्योंकि जो मैंने स्टडी किया है मुझे नहीं लगता कि यह अर्बनाइजेशन हमारा सोल्यूशन है आध्यात्मिक जीवन के लिए यदि आप सीरियसली आध्यात्मिक होना चाहते हैं यू विल हैव टू गो बैक टू रूरल डेज दोस रूरल कम्युनिटी लाइफस्टाइल वहां पर तो हमको जाना ही पड़ेगा तो यह दोनों का संगम हम कैसे कर पाएंगे ऑन वन हैंड हम टेक्नो लजी को भी बना करके रखे ऑन वन हैंड हम इंडस्ट्रियल इजेशन में ही इतने ही डेवलप हो जैसे चाइना में देखिए यह जो टेस्ला का गीगा फैक्टरी मैं कभी-कभी वो देखता हूं अरे बाप रे एक शहर की साइज की तो एक फैक्ट्री है पूरे रोबोट से उसमें काम कर रहे हैं और सब कुछ प्रोग्रामिंग आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और रोबोटिक्स ये दो है तो देखिए कि हम इसका इस्तेमाल करके अपने को इस चीज से छुड़ा सकते हैं कि एआई प्रोग्राम बना दो और रोबोट्स बना दो मैकेनिकल डिवाइस जो कि मैन्युफैक्चरिंग करती रहे और वहां पर वोह एक इंडस्ट्रियल जोन हो और एक अपना रूरल कम्युनिटी लिविंग स्पेस हो जहां पे भी हम एक्चुअली रहे और वो रिमोट से रिमोट कंट्रोल से या तो फिर ये टेली कम्युनिकेशन की हेल्प से हम यह सब इंडस्ट्रियल सेंटर को मैनेज करें हमको वहां पर जाकर के रहने की जरूरत नहीं या तो फिर एक स्टेप एडवांस सोच सोच सकते हैं कि मैन्युफैक्चरिंग को पूरा स्पेस में भेज दो ऑर्बिटल फैक्ट्रीज बना दो वहां पर मैन्युफैक्चरिंग होता रहेगा जो भी पोल्यूशन है वहां से ही सीधा सूरज के भीतर में वो स्पेसशिप भेज करके जितने भी पोल्यूटेंट है टॉक्सिक केमिकल्स है वो सूरज के भीतर में फेंक दो तो वो भी नष्ट हो जाएंगे और पृथ्वी भी अपनी ग्रीनरी की ओर वापस जाएगी ने देखिए कि टेक्नोलॉजी का हेल्प करके हमको फिर से वही दिनों की ओर वापस जाना है जबकि हमारे पास में चैन और सुकून हो कि चलो अपने बच्चों को लेकर के अपने छोटे भाई बहन को लेकर के मैं नदी में नहाने के लिए जाता हूं वहां पर खेलता हूं वहां पे उन के साथ में बातें करता हूं किनारे पर बैठ कर के वह कुछ नाश्ता करता हूं मुड़ी खाता हूं और फिर वापस आ जाता हूं वो दिन की ओर वापस जाना है एट द सेम टाइम वी विल हैव टू मेंटेन दिस इंडस्ट्रियल इजेशन ये किस तरह से होगा देखिए कि फ्यूचर हमको कहां पे ले जाता है यदि ब्लाइंड इंडस्ट्रियल इजेशन की ओर गए तो डिजास्टर निश्चित है जैसे यह पडेम पडेम ने बहुत लोगों की आंखें खोल इसके प्रॉपर इंप्लीकेशंस अभी भी हमको समझ में नहीं आए इतना डेंसली पॉपुलेशन एरियाज में हम रहते हैं एक बार जो वायरल हुआ डिसीज तो पता नहीं किस तरह का डिजास्टर वो लेकर के आएगा तो ये इंप्लीकेशंस अभी-अभी धीरे-धीरे अपने सर में बैठ रही है यह जो वर्ल्ड वॉर्स शुकन ठाकुर की कृपा है भारत व वर्ल्ड वॉर का पार्ट नहीं था मैंने भारत से सैनिक ले गए थे भारत से धान ले गए थे तो यहां पर दुष्का पड़ा था किंतु एटलीस्ट वर्ल्ड वॉर यहां पे तो प्ले आउट नहीं हुआ हमारे शहरों में हमारे गांव में हमारे जंगलों में तो युद्ध नहीं हुआ वो ठाकुर की कृपा है किंतु जिन लोगों ने अभी यूरोप की परिस्थिति देखिए डी पॉपुलेशन की समस्या होती है बिना माइग्रेंट के चलेगा नहीं और माइग्रेंट्स आते हैं तो आपस में झगड़ा करते हैं यही लोग तो देखिए कि वेस्ट की जो परिस्थिति है पोस्ट पोस्ट इंडस्ट्रियल वर्ल्ड उन का जो है उससे हमको बचना है अवर पोस्ट पोस्ट इंडस्ट्रियल वर्ल्ड शुड बी मच बेटर ठाकुर म स्वामी जी जैसे दक्षिणेश्वर है जयराम बाटी है कमार पुकुर है यह सब हमारे आदर्श होने चाहिए विथ टेक्नोलॉजी एक हाथ में दूसरे हाथ में दक्षिणेश्वर जयराम बाटी और कमार बोकर पता नहीं हम लोग इस डायरेक्शन में जा पाएंगे कि भी नहीं या तो फिर हमारे ये जो गवर्निंग क्लास है या तो फिर यह जो जनरल पब्लिक है उनको यह बात समझ में भी आएगी कि नहीं वो पता नहीं अभी भविष्य किस ओर है मैं हमेशा यह सब चीजों के बारे में सोचता हूं कि किस तरह का भविष्य होना चाहिए किस तरह से यह मैसेज जो है लोगों को देना चाहिए कि वो गलती ना कर बैठे कि जो हजार साल पहले हमने की थी कि टेक्नोलॉजी और साइंस को ही छोड़ दो और यह गलती ना कर बैठे कि जो आज का वेस्ट कर रहा है कि इंडस्ट्रियल इजेशन को इस हद तक उन्होंने अपना लिया किय डी पॉपुलेशन है फिर यह जो माइग्रेंट की जो रिफ्यूजी क्राइसिस है यह सब क्राइसिस में हम लोग ना फस जाए अपना खुद का पॉपुलेशन तो है हम लोग इतने सारे हिंदू साथ में मिलकर के आराम से हम लोग रह सकते हैं वही है कि ऑन वन हैंड आध्यात्मिक जीवन धारा माने सिर्फ यह नहीं है कि मैं अपना व्यक्तिगत जीवन आध्यात्मिक करूं किंतु ये जो सोसाइटी है ना वो आध्यात्मिक स्पिरिचुअल इंजीनियरिंग की मदद से इस सोसाइटी का गठन करना है नॉट ऑन इंडस्ट्रियल इंजीनियरिंग बट स्पिरिचुअल इंजीनियरिंग य स् स्लिटी को किस तरह से आप सिटी प्लानिंग में ले आएंगे स्पिरिचुअलिटी को आप किस तरह से आपका कांस्टिट्यूशन है आपके लो कोर्ट है आपकी पुलिस सिस्टम है एजुकेशन सिस्टम है स्पिरिचुअलिटी को किस तरह से प्रत्येक क्षेत्र में ले जाएंगे यह हमको बहुत ही ध्यान से देखना है स्पिरिचुअल इंजीनियरिंग करना है दैट इज द वे फॉरवर्ड फॉर इंडिया महाराज जी आगे लिखते हैं बाल्य पाठ्य भ्यान तीनी बोलिया छिले बचपन में स्टडी करने के बारे में मां ने कहा था पाठ्य अभ्यास पाठ्य अभ्यास करने के बारे में मां ने कहा था छले बेलाई प्रसन्न रामनाथ रामनाथ लेन ज्ञाती भाई ओरा स पाठशाला जेतो में जब छोटी थी तब प्रसन्न अर्थात की मां का छोटा भाई और रामनाथ जो कि उनके ज्ञाती भाई थे यह लोग सब पाठशाला में जाते थे ओदर सोंगे कोखोनो कोखोनो जे तुम उनके साथ में कभी-कभी जाती थी कभी-कभी ताते एक टू सीखे लम उसी में थोड़ा सा सीखा था हमको लगता है कि मां को पढ़ना लिखना नहीं आता होगा मां पढ़ लेती थी बाद में भी मां ने कहा है कि दक्षिणेश्वर में जब मां थी तब मां को लक्ष्मी दीदी का बड़ा ही अग्रेसिव नेचर था तो व कहीं पर किसी जगह पर जाकर के के वो कामर पुकुर जब जाती थी तो लक्ष्मी दीदी जाकर के पाठशाला में सीख कर के आती थी और मां को थोड़ा सा सिखाती थी तो मां के पास में किताब देख कर के वो हृदय था उसने वो किताब छीन ली कि क्या पढ़ना लिखना सीख कर के आखिर में क्या नाटक नोवल पढ़े गी क्या ऐसा बोल कर के वो हृदय ने किताब मां के पास से छीन ली थी तो किंतु फिर भी मां ने छुपके छुपके वो दूसरी किताब का बंदोबस्त किया जुगाड़ किया उसमें से सीख रही थी और इसके बाद में मां जब दक्षिणेश्वर थी ठाकुर को कैंसर हुआ था ठाकुर को वहां पर ले गए थे कलकत्ता ट्रीटमेंट के लिए उस समय कुछ दिनों के लिए मां दक्षिणेश्वर थी बाद में जब ठाकुर को काशीपुर ले आए ठाकुर ने कहा कि मेरा पथ्य तो मां ही बनाएगी तब मां ने जाकर के काशीपुर रहना शुरू किया किंतु बीच में कुछ समय था जब मां दक्षिणेश्वर अकेली थी तो उस समय एक औरत वहां पे एक महिला वहां पे स्नान करने के लिए आती थी गंगा में तो वो मां को थोड़ा बहुत सिखाया करती थी मां ने खुद ने कहा है कि मैं रामायण वगैरह जो है वह पढ़ लिया करती थी और एक जगह पर मां ने अपने हाथ से साइन की है मां करके ऐसा लिखा है जहां तक मुझे ख्याल है अपना खुद के हैंडराइटिंग से मां का इतना ही हमारे पास में अवेलेबल है वह हैंड वो साइन मैंने एक किताब में देखा था एक किसी ने पत्र लिखा था मां को और पत्र में मां को लिखा था मां आप अपने अपने खुद के हस्ताक्षर से अपना नाम लिख कर के भेजना ऐसा उन्होंने रिक्वेस्ट किया था तो पत्र के अंत में मां ने अपना मां ऐसा बंगड़ी में सिर्फ मां एक अक्षर उन्होंने लिखा था तो जहां तक मुझे ख्याल है मां के खुद के हैंडराइटिंग में यही एक अवेलेबल है वो देखा था मैंने व ऐसे छोटा बच्चा जिस तरह से व लिखता है ना बिल्कुल छोटे बच्चे जैसा वो हैंडराइटिंग है मां का तो बेचारी मां लिख नहीं पाती थी इतना अच्छे से किंतु पढ़ लिया करती थी मायर बाल कालेर ल संक्षिप्त और बिन्न स्मृति तितो प्रत्यक्ष दर्शी देर मुखे आरो किछु किछु जाना गया छ मां के बाल्यकाल के बारे में मां ने खुद ने अपने बारे में जो कहा था इसके अलावा प्रत्यक्ष दर्शी अर्थात कि जो वहां पर उपस्थित थे उन्होंने मां के बाल्य जीवन के बारे में हमको कुछ कुछ बताया है मायर छेल बेलर संगिनी राज मुख जे देर भगिनी अघोर मण बोलेन मा जब छोटी थी तब उनकी सहेली थी राज मुख जे बोलकर के एक व्यक्ति था उनकी बहन थी अघोर मणि तो अघोर मणि ने कहा था मां खूब सादा सीधे छले मां बड़ी ही सरल थी ताते सरलता जेनो मूर्ति मती छलो मां के भीतर में सरलता जैसे मूर्ति मंत बन कर के दिख रही थी खेलाई तार संगे कखन कारो झगड़ा होई नहीं खेल खेल में मां के साथ में किसी का झगड़ा नहीं हुआ था मां प्राय कोतागिरी साज तेन मां हमेशा करता अर्थात की घर का जो वडील है वो वडील या तो गिन्नी अर्थात की जो जो सबसे बड़ी उम्र में जो महिला होती है घर में मां जो कि घर को चलाती है तो करता बा गिन्नी घर का पुरुष जो सबसे उम्र में बड़ा होता है या तो गिन्नी जो कि मला सबसे बड़ी उम्र में होती है वो बनती खेल खेल में वो खेल खेल घर घर खेलते हैं तो इस तरह से मां जब घर-घर खेलती थी तब पुतुल गड़े खेला कोते बटे किंतु काली और लोखी घोड़े फूल बेल पाता दिए पूजो करते भालो बासन पुतल माने मूर्ति बनाना जो खेल खेल में मूर्ति बनाना उनको अच्छा लगता था मूर्ति किस चीज की बनाएंगे पुतला किस चीज का बनाएंगे तो शायद यहां पर लिखा नहीं है मैं अनुमान के करके कह रहा हूं कि गीली मिट्टी का यह लोग पुतला बनाते होंगे तो मिट्टी का पुतला बना कर के उस तरह का खेल यह लोग खेलते थे किंतु किस तरह की मूर्ति बनाते थे काली या तो लक्ष्मी की काली या लक्ष्मी की मूर्ति बनाएंगे मां बनाएगी और उनको फूल प्रदान करेगी बेल पाता दिए फूल बेल पाता दिए पूजो करते भालो बास देन मां लक्ष्मी या तो फिर काली की मूर्ति बनाएगी मां और फिर मूर्ति को पुतले को बेल और फूल देकर के पूजा करना मां को बड़ा ही पसंद था अन्नान मेदर म माझे माझे झगड़ा होले मां ऐसे मिट दिए ता देर म भाव कोरिय दते जब दूसरी सब लड़कियों के भीतर में झगड़ा होता था तो मां आती थी उन लड़कियों में सुलह करवा देती थी और उनका झगड़ा मिटा देती थी एक बार बार जगद धात्री पूजर समय होलद पुकुरे राम हृदय घोशाल उपस्थित लेन एक बार जग धात्री पूजा के समय हल्द पुकुर करके एक गांव होगा वहां के राम हृदय घोशाल उपस्थित थे मां के जगत धात्री सामने ध्यान करते देखे तिनी अबक होए नेक खण दाए देखते लाग ले मां को जगत धात्री के सामने ध्यान करती हुई देख कर के वो यह जो थे राम हृदय घोशाल बड़ी लंबी देर तक अवाक होक के मां को देखने लगे किंतु के जगत धात्री के मां किछुई ठीक करते पारले ना मां जगत धात्री के सामने बैठ कर के बालिका शारदा ध्यान कर रही है और यह जो भाई है वह खड़े होकर के देखते हैं किंतु लंबे समय तक देखने के बावजूद यह नहीं समझ पाए कि जगत धात्री कौन है और मां कौन है तो खन भय पालिए गलन भय लगा और भाग गए देखिए मां ध्यान कर रही है और जैसे बिल्कुल यह तो शिव पूजा के समय ठाकुर शिव सजे थे व कामर पुकुर में वो शिव पूजा थी शिवरात्रि के दिन वो फिर वह शिव का नाटक चल रहा था और जिसको जो शिव का पात्र करने वाला था वह बीमार हो गया ठाकुर शिव का पात्र लेकर के जब स्टेज के ऊपर आए वो ध्यान में मग्न हो गए शिव बन कर के यहां पर भी देखिए कि ठीक वैसी घटना जगत धात्री पूजा है मां की मूर्ति के सामने अपनी मां शारदा छोटी बालिका बैठ कर के ध्यान कर रही है और यह जो है राम हृदय वो सामने खड़े रह कर के सोचते हैं कि अरे यह मां है ना कि जगत धात्री है बड़ी लंबी देर तक देखते रहे समझ नहीं पाए फिर ऐसे डर गए कि डर के मारे वहां से भाग गए देखिए कि इन सबके जीवन में किसी समान समान घटनाएं होती है और वही बचपन से ही मां के जीवन में यह जो ऐश्वरीय आवेश उसी समय से आता था तो आज यही तक कल फिर से मिलते हैं ओम शांति शांति शांति हरि ओम तसत श्री राम कृष्णर्पण मस्तु