Transcript
ओम मुस्तफा का रिश्ता देवी जीवन कथा गंभीर आनंद जी महाराज द्वारा लिखित कल हमने देखा की महाराज जी क्या कहते हैं शत्रुओं का विनाश दो तरह से हो सकता है एक तो पापी और उसके पाप दोनों का आप वध कर दें और उसका पृथ्वी के ऊपर से उसको समाप्त कर दें पृथ्वी के ऊपर से उसका विनाश कर दे ये एक रास्ता है दूसरा रास्ता है की सदगुण राशि ये शब्द महाराज जी ने उसे किया है सदगुण राशि से हम शत्रु का दिल जीत ले शत्रु का हृदय परिवर्तन कर ले यह शत्रु का जब हम हृदय परिवर्तन कर देखिए हमारे आ दिव्यानंद जी के बड़े में शायद आपने सुना होगा अभी तो हमारे दीक्षा गुरु भी है जय में जाते थे और जय में प्रवचन करते थे मैंने जब पहले बार सुना उसे समय आई थिंक में ट्रेनिंग सेंटर में था ना की मैं जस्ट जॉइन किया था तो जब मैंने सुना की वह उसे समय शारदा पीठ के अध्यक्ष महाराष्ट्र तो मैंने जब सुना की महाराज जी जय में जाते हैं और कैदियों को प्रवचन देते हैं तो मुझे लगा की इस तरह से टाइम वेस्ट करने से क्या लाभ है यदि आपको आपके पास में समय और एनर्जी है प्रवचन देना चाहते स्टूडेंट को प्रवचन दीजिए स्टूडेंट यदि कुछ सीखेंगे तो वो क्या है की उनका खुद का भविष्य बनेगा और पूरे भारत देश का नया निर्माण होगा क्योंकि कैदियों को आप रिफॉर्म करने से क्या लाभ होने वाला है उन्होंने जिन्होंने एक बार पाप के रास्ते पे चलना शुरू कर दिया अभी उनमें क्या इतना आसानी से ठाकुरमार स्वामी जी की दो बटन से क्या उनके जीवन में परिवर्तन होने वाला है मुझे नहीं लगता की ये होगा किंतु यदि आप कोई यंग परसों है कोई लड़का है लड़की है कॉलेज के स्कूल के स्टूडेंट से उनको उनका क्या है फॉर्मेटिव पीरियड है ये फॉर्मेटिव पीरियड में यदि जी तरह से वह जो ओयस्टर होता है ना ओयस्टर वो उसके घर में रेती का एक दाना चला जाता है वह जो चिप होता है उसके भीतर में तब वो क्या करता है उसके ऊपर में लेयर्स को एड करता राहत है और लेयर्स एड करते-करते उसका मोती बन जाता है तो फॉर्मेटिव पीरियड में यदि उसके भीतर में सी ठाकुरमार स्वामी जी के नाम का जीवन का उपदेश का दाल दिया गया तो बड़ा हो करके ही बिल विकम मैं गुड सिटिजन ही बिल बी कम मैं गुड फादर गुड हसबैंड गुड सन इट्स बिल बी एन मल्टीप्लिकेशन ऑफ अवर एयरपोर्ट हम लोग जो एफर्ट लगाते हैं उसका एक प्रॉपर एक आउटपुट मिलेगा हमारे एयरपोर्ट का मल्टीप्लिकेशन होगा वैसे ही तो साधु इतने कम है इस जगत में और फिर हम लोग इस तरह से कैदियों को रिफॉर्म करने के पीछे जोड़ेंगे हमारी एनर्जी दाल देंगे तो उससे क्या लाभ होने वाला है उसे समय में इस तरह से सोचता था किंतु अभी मैं इस तरह से नहीं सोचता हूं क्यों क्योंकि हमको सबको ठाकुर रास्ता बताते हैं दिव्यानंद जी के मां में यह बात जो आई होगी की हां जय में जाकर के प्रवचन करना है तो वह भी तो ठाकुर ने ही बताया होगा वो भी तो मैन ही बताया होगा मैं कौन होता हूं यह खाने वाला की महाराज जी को क्या करना चाहिए क्या नहीं करना चाहिए एक चीज दूसरा की कब कहां पे किसी का किस तरह से जीवन परिवर्तन हो जाए आप कुछ बोल नहीं सकते अपने हो सकता है की हजारों स्टूडेंट को ठाकुरमार स्वामी जी के खास करके स्वामी जी पर मैंने स्टूडेंट को तो स्वामी जी अच्छे लगेंगे वो एक विराटव पूर्ण उपदेश स्वामी जी का एक शौर्य पूर्ण जीवन एक अराइज और अवैध का मैसेज वो स्टूडेंट को ज्यादा अच्छा लगेगा तो आप स्वामी जी के बड़े में स्टूडेंट को हजारों बातें बता दीजिए हो सकता है वो कुछ भी ग्रहण ना करें और एक कैदी को एक आदमी जिसने ऑलरेडी पाप किया हुआ है उसको उसे शायद सोच ही रहा है की मैं अपना जीवन का किस तरह से परिवर्तन करूं और महाराज जी के मुंह एक अच्छी सी बात सुन ली और हो सकता है की इस को पकड़ करके वह धीरे-धीरे करके इस जन्म में नहीं तो अगले जन्म में अपने को रिफॉर्म करने की शुरुआत करेगा तो यह कौन बता सकता है की ठाकुर मां स्वामी जी का मैसेज किसके पास किस तरह से कैसे जाएगा वो तो हमने ही बता सकते तो जिसको जी तरह से अच्छा लगे वो ठाकुर वी स्वामी जी की वाणी फैलानी चाहिए तो यहां पे महाराज जी इसलिए कहते हैं की अभी यह तो हम लोग तो साधुओं का पर्यटन तो कोई साधु कोई भी कितना ही बड़ा हो हम लोगों का पर्यटन तो बहुत ही सामान्य अल्प राहत है मां का जीवन मैन जो किया वो सही सही पर्यटन है वो सही सही रियल पावर है मां की वाणी मां का जीवन दिस इस डी रियल पावर हम लोग तो सिर्फ एक मीडियम है ना हम लोग तो मां की वाणी को लोगों तक पहुंच देते हैं की हां मैन ऐसा कहा सुनिए मां के जीवन में यह घटना हुई है उसको उसका स्मरण मनन कीजिए मैन इस पर्टिकुलर बात इशू कोई प्रॉब्लम लेकर मां के पास में आता है की अभी जैसे कोई इस बार सैटरडे को मेरा क्लास था जैसे की मेरा एवरेज सैटरडे यहां पे मैं मां के ऊपर में मंत्र चरण में मेरा क्लास होता है इसमें गंभीरानंद जी के किताब में से ही मैं थोड़ा सा पाठ करता हूं और मैं उसमें से थोड़ा सा एक्सप्लेन देता हूं तो इस बार जी तरह से मैं कुछ प्रश्न पढ़ रहा था तो उसमें देखिए की मां क्या कहती है की मां कहती है एक और की क्या मैं विधि नियम का पालनपुर करके मैं यदि जब ध्यान करना पर्यटन करता हूं तो विधि नियम मेरे सर के ऊपर भी इतना बड़ा बोझ बन जाते हैं की मैं फिर जब ध्यान करना मैं छोड़ देता हूं एक भक्ति आकर के मां को कहता है मां में सुबह को बिना चाय पिए जाप नहीं कर सकता अभी हमने तो सुना है की गुरु महाराज जो कहते हैं जो हमने शास्त्रों में पढ़ा है धार्मिक की लोगों में पड़ा है संतो के मुंह से सुना है की सुबह को उठकर के बिना खाए पिए सबसे पहले खाली पेट आपको भगवान की पूजा करनी है और जाप करना है तो मैं तो बिना कुछ खाए जाप नहीं कर सकता पूजा भी नहीं कर सकता मुझे कम से कम एक कप चाय तो पीना ही पड़ेगा तो मां में क्या करूं तो मैन कहा अरे तुम मेरे लड़के हो मेरी संतान हो तुमको यह सब चीजों से सोने से क्या लाभ है क्या वो तुमको क्या टेंशन है यह सब चीजों का तुम चाय पियो और जब करो मैं तुमको कोई मैन तुमको कोई यह नहीं होगा तुम्हारा कोई भी अनिष्ट नहीं होगा अशुभ नहीं होगा मैं कहती हूं तो मां इस तरह से लोगों को किस तरह से उनकी समस्याओं में जब वो पढ़ने हैं तब आश्वासन देती है एक के बाद एक ऐसे कितने सारे प्रसंग गंभीराना जी महाराज ने इकट्ठा किया हैं स्त्रियों का वह समय जबकि कहा जाता है की उनको पूजा वगैरा नहीं करना चाहिए तो जाकर के किसी ने मां को पूछा की मां में इस समय पूजा कर शक्ति हूं की नहीं मैन कहा क्यों नहीं कर शक्ति अवश्य कर शक्ति हो देखो की जो शास्त्र में इतने सालों से जो पढ़ने ए रहे हैं उसके विरुद्ध में मैन ऐसा फैट करके बोल दिया की हां अवश्य उसे समय भी तुम पूजा कर सकते हो किंतु एक बात है यदि अब तुम्हारे मां में कोई संशय है तो पूजा इस तरह से उसे समय मत करो मां में संदेह नहीं रहना चाहिए जी तरह से महापुरुष महाराज कहते थे गुरु कृष्णा वैष्णव तीन एयर दयालु एक केयर दया बिन अरब से मैन गुरु कृष्णा और विष्णु तीन की दया हुई किंतु बिना एक की दया के वह हमारा सर्वनाश हुआ वो एक को वो एक है हमारा मां मां में यदि संदेह है संशय है तो फिर उसे समय हमको थोड़ा सा सावधानी पूर्वक बरतने की जरूर है मैन कहा की मेरे पे पूरा विश्वास है तो तुम जी समय चाहे उसे समय पूजा कर शक्ति हो मेरे पर विश्वास नहीं है तो फिर तुमको जी तरह से शास्त्र कर लेते हैं उसे तरह से करो देखो मां का जो सॉल्यूशन है कितना क्लियर है शास्त्र सबके लिए है और महकी भक्तों किन के लिए है जिनका की मां के ऊपर में संपूर्ण विश्वास है ये संपूर्ण विश्वास मां के ऊपर में होना ये बात जो हम सीखने हैं और हमारे हृदय को जो शांति मिलती है ये हुआ हृदय परिवर्तन तो इसीलिए गंभीरानंद जी महाराज कहते हैं दो तरह से शत्रुओं का विनाश होता है एक तो रक्षा जो की पाप में डूबा हुआ है उसका सहर करके दूसरे हमारे भीतर में यह पाप एक के बाद एक सर उठाते हैं हमको कोई दुष्कर या करने के लिए प्रेरित करते हैं हमारे मां में कोई क भाव कोई खराब विचार प्रकट करने का पर्यटन करते हैं उसके सामने लड़ना उसका संघार करना और उसका सहर कौन करेगा हमारे में तो इतनी शक्ति नहीं है की मैं अपने जितने भी खराब विचार मेरे मां में आते हैं उसके सामने लाड सुकून मेरे पास में शक्ति है मां की मां की बातें सुनूंगा मां को सुकून मिलेगा और वो शांति वो भरोसा वो विश्वास वो संपूर्ण आत्मसमर्पण वो सदगुण राशि मां में से मेरे में प्रवेश करेगी और वो सदगुण राशि मेरे भीतर में जो यह पाप रूपी शत्रु है उसका शंकर करेगी तो दो तरह से शत्रुओं का विनाश होता है अभी महाराज जी आगे लिखने हैं युद्ध में हरि विनाश अर्थात की शत्रुओं का सहर रक्सन का शहर करने से ज्यादा सत्व गन के प्रभाव से उसका मनोज है उसका हृदय परिवर्तन करना अधिकतर बहुत ज्यादा बहुत ज्यादा शक्ति का परिचायक है शक्ति की पहचान है मैं किसी का वध तो कर दूंगा किंतु किसी का हृदय परिवर्तन करना ये कितनी बड़ी बात है आप सोच करके देखिए आजकल के हमारा ये जो पॉपुलर कलर है जो हम टेलीविजन में देखते हैं जो हम सिनेमा में देखते हैं जो हम किताबें में पढ़ने हैं की जिसने थोड़ा सा पाप किया उसका वध कर दो और वध करने वाला जो है वह हीरो बनकर पूरे जगत में उसकी पूजा होगी यह हमारे जो हीरो स्पन है आजकल जो एंग्री यंग मां जिसको कहते हैं की जो फटाफट करके वह फाइट करने के लिए तैयार होता है तो अभी इस तरह के इसको क्या कहते हैं पता है साइकोलॉजी में इसको कहते हैं सुपरमैन मित शॉप इन ओवर था ना की मोस्ट प्रोबेबली वही था वो क्या था बड़ा ही व्यक्त था फिजिकल और मेंटली भी थोड़ा सा विथ था और उसे समय जर्मनी में क्या था की एक सुपरमैन की कल्पना वो वहां पे उनको सिखाई गई है की एक पुरुष कैसा होना चाहिए वो फिजिकल स्ट्रांग है वो देखने में बड़ा ही अट्रैक्टिव है बड़ा ही हैंडसम है बड़ा ही इंटेलिजेंट है बड़ा ही स्ट्रांग उसका बिल पावर है वो जब भी स्टेट के अगेंस्ट में अर्थात की राष्ट्र के विरोध में कोई कोई ऐसी बातें करेगा या राष्ट्र के विरोध में कोई राष्ट्र के ऊपर में अटैक करेगा तो वो शत्रुओं का वो जो दुश्मन है उसका सुधार करने के लिए सदा तट पर राहत है ग्रेट वारियर ऐसा करके एक सुपरमैन का एक चित्र खड़ा किया गया था तो ये जो जिसको की ये फाग मैन जान सामान्य में जान समुदाय में इस तरह की जो बातें चलती थी उसका मूर्ति मंत्र स्वरूप उसको फिलोसॉफिज करके ये शो पेन हावर ने दिया था और ये सुपरमैन मीत के इस तरह से हमको अपना जीवन गठित करना चाहिए की हम लोग हमेशा फाइट करने के लिए तैयार रहते हैं तो ये जर्मन फिलॉस्फर की फिलासफी से प्रभावित होकर के जर्मनी में पुरी जेनरेशन आफ्टर जेनरेशन ऐसे लोगों की यंग लड़कों की निकली की उन्होंने यह सोच लिया की युद्ध के मैदान में शत्रुओं का विजय वो मनुष्यता का या तो पुरुषोत्व का सर्वश्रेष्ठ परिचय ऐसा सोच कर के उन्होंने मार्शल ट्रेनिंग लेना शुरू कर दिया और वहां पर आर्मी ज्यादा से ज्यादा स्ट्रांग होती गई और फिर एक दिन ऐसा आया की हिटलर नाम का एक पागल आदमी इस आदमी के सर के पर मैं बैठ गया और उसने कहा की ये जितने भी शत्रु है उन सबका सहर करो अपने पास में इतनी स्ट्रांग आर्मी है तो हम इस आर्मी का क्या करेंगे ये लड़के लोग जो इतने पिछले 100 साल से 50 साल से ये सुपरमैन मीत पढ़ने आए हैं सुपरमैन हमको सुपरमैन बन्ना है ऐसा वो जो सीखने आए हैं इसका कुछ तो फिर आउटपुट निकालना चाहिए तो हिटलर ने इस आर्मी को लेकर के यूरोप में जो तूफान मचाया विच वे कॉल्ड आज एन सेकंड वर्ल्ड वार इतने लोगों का हत्या की इतने लोगों पर अत्याचार किया इतने लोगों को कंसंट्रेशन कैंप में भेज दिया क्या से क्या पागलपन उसने नहीं किया तो ये आइडिया जो है की शत्रुओं का विनाश करना पुरुषोत्व का परिचय है दिस इस एन वेरी डेंजरस आइडिया हमारे पुराण में देखिए यह जो सुपरमैन मीत जिसको की शॉप इन ओवर ने डेवलप किया था आज के मॉडर्न जर्मनी में उसके अगेंस्ट में हमारे पुराने की बात सुनिए भगवान राम और भगवान कृष्णा दोनों वारियर है युद्ध के क्षेत्र में शत्रुओं का विनाश करते हैं किंतु साथ-साथ में ही ये दोनों पुरुषोत्तम है इन दोनों की क्षमा धैर्य जिसको किस स्त्री जानो चित भाव कहते हैं ना ठाकुर में दोनों बहुत हैं पुरुष का भी भाव था स्त्री का भी जब वीर रस या तो फिर भाव में ए जाएंगे तो पूरे वीर की तरफ किंतु जो स्त्री भाव भी जो होता है साथ-साथ में जिसके लोगों के प्रति अनुकंपा लोगों के प्रति सहानुभूति सिंपाठी कंपैशन ये कंपैशन जो है वो भी पुरुष के भीतर में रहनी चाहिए तभी वह पुरुषोत्तम सही परिचय का निर्माण नहीं होगा इसलिए आज के जमाने में देखिए की किस तरह से इंबैलेंस चल रहा है हम लोग सोचते हैं की स्ट्रांग होना चाहिए बात-बात में गुस्सा हो जाए बात-बात में यदि हम छोटी मोती चीजों के लिए झगड़ ले किसी को हम दांत दें हम अपना अधिकार दूसरों से छन ले तो मैं बहुत बड़ा मर्दन वाला व्यक्ति हूं और यदि मैं दूसरों के साथ में झगड़ा नहीं सकता तो फिर मैं बिल्कुल निकम्मा हूं इस तरह से बचपन से ही लड़कों के मां में ये सब फालतू बातें गुस्सा दी जाति है तो यहां पे मां का जो अवतरण है वो सिर्फ ये नहीं की नई जाति का उदाहरण करने के लिए उनको सम्मान देने के लिए उनका समाज में एक सर्वोच्च स्थान बनाने के लिए मां का अवतरण हुआ है शक्ति का किंतु साथ में ही पुरुष के जो दोनों गन हैं विराटव और धैर्य और क्षमा यह अर्धनारीश्वर भगवान शिवा की जो कल्पना है यह दोनों गन ये पुरुष में होने चाहिए नई स्त्री में जो बगल स्वरूप वो हरीश जायरा उसे समय मां कुकर में थी वो हरीश बोलकर ठाकुर का एक पागल शिष्य मां के पीछे दौड़ने लगा तो मां तो पहले वो इधर उधर दौड़ अपने को बचाने के लिए अपनी रक्षा करने के लिए देखा की वो हरीश वो सुन ही नहीं रहा है तो फिर क्या किया उसको धक्का मार के जमीन पे फेक दिया उसकी छाती पे पर रखा जीव एक हाथ से जीप खींच और दूध से हाथ से इतने तमाचे मार अरे उसको की वो पूरा ठंडा हो गया बांग्ला स्वरूप मां का वीर स्वरूप तो मां के भीतर में एक क्षमा धैर्य सहानुभूति अनुकंपा भालोबाशा प्रेम आशीर्वाद ये सब गन तो थे हिट है साथ में विराट वी का भी गन था यह दोनों गन इकट्ठा होने से परफेक्ट मनुष्य की स्त्री का हो की पुरुष कहो परफेक्ट मनुष्य की रचना होती है तो इसीलिए युद्ध के मैदान में शत्रुओं का विनाश शत्रुओं पे विजय वो आसन है किंतु यदि अपने मां में ऐसा नहीं है की फिर यदि हमारे मां में कंपटीशन है दया है और करुणा है तो फिर जो हमारा हिट करने को आता है उसको हम छोड़ दें वो गांधीजी की वो बात है ना गांधी जी अहिंसा सीखने थे सबको अभी पार्टीशन हुआ और ये लाहौर ना की कराची से कुछ हिंदू लोग आए इस और ए गए उसे समय तो कितना रायोते होता था क्या-क्या सब अत्याचार हुए हम सब लोग ने पढ़े हैं तो उसे समय एक हिंदुओं का ग्रुप यह पाकिस्तान उसे अभी तो पाकिस्तान हो गया था उसे वहां से आया गांधी जी को मिलने के लिए गया अभी उन लोगों ने खाने लगा की महात्मा जी आपने तो कहा है अनिल सा का प्रचार करना अहिंसा का पालनपुर करना तो इसलिए वो जो डाकू गुंडे लोग ए गए हमारी स्त्रियों को खींचकर के ले गए तो हमने उसका अधिकार नहीं किया हमने अहिंसा का पालनपुर किया तो सुनकर के गांधी जी इतने नाराज हो गए क्रोधित हो गए अरे मूर्ख ये अहिंसा थोड़ी ना है ये तो ये तो ये है मैंने कवर्ड डिक है ये तो आपकी पुरी डरपोक आप डरपोक हो गए हो आईटी डरने की बात हुई है ये जो कवरेज जिसको कहते हैं इंग्लिश में दिस इस नोट अहिंसा कायरता कायरता शब्द है हिंदी में कायरता और अहिंसा में बहुत बड़ा डिफरेंस है कर कौन है जो की अपने को या तो अपने परिवारजनों का या तो अपने देश को प्रोटेस्ट नहीं कर सकता और अहिंसक कौन है जिसके पास में प्रचंड शक्ति है किंतु वह चाहता है की उसका अहित करने वाले अहित करने के लिए जो आए हैं वो उसको एक चेस दे अपने को रिफॉर्म करने के लिए उसकी उसके प्रति उसकी जो समस्या है उसको समझ करके थोड़ा सा mp3 दिखाएं उसको थोड़ा सा हेल्प करने को पयत है की भैया आदमी बड़ा क्यों हो गया है देखो तो क्या उसके बचपन में उसके साथ में कोई कटु व्यवहार हुआ है बोलकर के बड़ा होकर के उसका साइकोलॉजिकल डिस्टरबेंस हो गया है लेट मी सी थोड़ा सा mp3 रख करके देखो की उसके साथ में क्या प्रॉब्लम है हां फिर वो ठीक नहीं होगा तो दो झापड़ मार देने है किंतु एटलिस्ट सर्वप्रथम तो उसके प्रति दया दिखाने चाहिए तो डेट इस कॉल्ड अहिंसा एन ये गांधीजी की ही एक दूसरी बात है गांधी जी का सबसे बड़ा लड़का वो एक एक दिन की बात है की गांधी जी कहानी से जा रहे थे तो कुछ लोग इकट्ठा हुए हैं और कुछ जाट लोग जाट ही ना की मैं भूल गया एक्जेक्टली वो कुछ लोग इकट्ठा हो गए और गांधी जी के साथ में आर्गुमेंट करने लगे फ्रीडम मूवमेंट पे इतना कॉम्प्लिकेटेड टॉपिक है बहुत सारे इश्यूज फार्मर्स के ट्रेडर्स के मरचेंट्स के स्टेट क्राफ्ट के होते हैं तो गांधीजी का सभी इश्यूज के ऊपर में सभी प्रॉब्लम के ऊपर में एक पोजीशन राहत था की हां भारत देश ऐसा करना चाहिए भारत देश का संविधान ऐसा होना चाहिए हमारा फ्रीडम मूवमेंट पर यह डायरेक्शन रहेगा तो यह लोग कुछ लोग आर्गुमेंट करने के लिए इकट्ठा हो गए और फिर वो बात बात में वो इतना वो बात इतना आगे बाढ़ गया की वो लोग गांधी जी को धक्का मार करके वो पाठक दिया जमीन के ऊपर में और क्या मारपीट की होगी शायद तो उसे समय गांधी जी का बड़ा लड़का उनके साथ में नहीं था बाद में वो मिला और पिताजी को पूछा की पिताजी आप तो अहिंसा का पालनपुर करने की इतनी साड़ी बातें करते हैं तो मैं यदि आपके साथ में होता और इन लोगों ने आपके ऊपर में हाथ उठाया आपने खुद ने तो अपना सेल्फ डिफेंस नहीं किया क्योंकि अब तो अहिंसा वाले हैं पूरे मुझे क्या करना चाहिए था जल्दी में आपके साथ में राहत मेरा क्या कर्तव्य होता है तो गांधीजी ने उसको कहा तुम्हारा मेरे लड़के के हिसाब से कर्तव्य होता मुझे डिफेंड करना यदि उसके लिए हाथ भी उठाना पड़े तो वो भी वो धर्म के क्षेत्र में आता है तो देखिए की दया क्षमा धैर्य वगैरा स्त्री जनोजित गुना का डेवलपमेंट होना इसका अर्थ यह नहीं है की कमजोर हो जाना या तो फिर कर हो जाना ये पुरुषोत्व और तृत्व या तो फिर पुरुष के गन जो विरक्त है जो एक मर्दानगी वाला भाव है उसे टूटी के जो गन है एक आशीर्वाद जिनके मां में जिनके हृदय में सब समय राहत है ये दोनों गन जब परफेक्टली डेवलप हो गए तब एक परफेक्ट मनुष्य का डेवलपमेंट होगा ताई वर्तमान अवतार अस्त्र बाहुल्य सिंह नगर जांबा समर कोलाहल्ली के प्रभाव से शत्रुओं का मां का विजय प्राप्त करना यह बहुत कठिन है इसीलिए महाराज जी लिखने हैं की वर्तमान अवतारी वर्तमान अवतार यानी की ठाकुर और मां के पास में अस्त्र बाहुल्य यह जो मां दुर्गा के आठ हाथ देखते हैं और सभी हाथों में एक एक अस्त्र जो देखते हैं इस तरह का अस्तर भी हम लोग यदि ये जो तीर देख लेंगे वो वो और अरा तो हम देख करके समझ लेंगे की ये भगवान राम की निशानी है भगवान राम का सिंबल है सुदर्शन चक्र देख लेंगे तो इम्मीडिएटली समझ जाएंगे की हां यह भगवान कृष्णा की निशानी है तो पता चल जाएगा की हां ये मां दुर्गा तो यहां पर इन लोगों का कोई अस्त्र नहीं था की हां ये अस्त्र इनका पर्टिकुलर ये साधन है यहां पर अस्त्र बाहुल्य है सिंह गर्जन वी समर को गर्जन या तो फिर युद्ध के क्षेत्र में जाकर के व्रत को दिखाना समर कोलाहल श्रीधा के क्षेत्र में विरक्त दिखाना वह भी नहीं है अच्छे सुधु लज्जा विनय सदाचार पवित्रता कल्याण स्क्रबहा और ईशान अप होती क्या है सिर्फ लज्जा है विनय है सदाचार है पवित्रता है कल्याण शुरू है यानी की पूरे जगत का भला हो यह उनके मां में भाव है वो ईशानुभूति इस अनुभूति ईश्वर की अनुभूति यह सदगुण ही है आज के अवतार में ठाकुर कहो ना की मां को स्पेसिफिकली मां के बड़े में मां के हृदय में मां के भीतर में यह सदगुण है बोलकर के पूरा जगत मां के वाश में आता है देखिए यह जो ब्रिटिश लोग भारत पर राज्य करते थे कल भी हमने देखा की अमेरिकन या तो ब्रिटिश को समाचार पत्रों में आप रखेंगे की भारत के बड़े में इतना सब उल्टा-पुल्टा लिखा जाता है वहीं से स्वामी जी ये गोरे डिसीप्ल को ले कर के मां के चरणों में रख दिए और निवेदिता के साथ में पहले मुलाकात का वर्णन है वो मां स्वामी जी ने निवेदिता को मां के पास में भेजो अभी किंतु हृदय में बड़ा डर है की मां तो पड़ा गैर में अर्थात ये जो रूढ़ि चुस्त गांव में बधाई हुई है तो मां निवेदिता को किस तरह से ग्रहण करेगी ब्लैक्जो बोलकर के क्या उसको भाग देगी क्या ये लेक्चर लोगों से दूर रहना है क्या मां क्या नहीं करेगी ये डर स्वामी जी को है किंतु मां के ऊपर में श्रद्धा भक्ति भी है तो निवेदिता को भेजो साथ में स्वामी स्वरूपानंद जी को भी भेजो स्वरूपानंद जी विद्वान और वो मायावती में एडिटर भी थे बाद में तो उनको भेजो दोनों को साथ में अभी निवेदिता निवेदिता को ऑलरेडी पता है की मां की महिमा क्या है बड़ी ही विनय पूर्वक श्रद्धा पूर्वक जा करके मां को प्रणाम करती है चरण स्पर्श करके प्रणाम करती तो मैन पूछा बांग्ला में तो मैंने तुम्हारा नाम क्या है तो फिर वह स्वरूपानंद जी थे ट्रांसलेट करने वाले तो उन्होंने निविदा को बोला की मां पूछ रही है की आपका नाम क्या है तो निवेदन उत्तर दिया मी नाम इसे मार्गरेट एलिजाबेथ नोबल तो अभी वो ट्रांसलेट करके मां को बताया तो मां कहती है की मैं तो इतना लंबा नाम याद नहीं रख पाऊंगी मैं तुमको खाकी करके प्राकरूंगी अभी खुद की बंगाली शब्द है उसका अर्थ है छोटी बच्ची बेबी तो अभी जैसे ही स्वरूपानंद जी ने निवेदिता को बोला है की मधुर बिल नोट बी एबल तू रिमेंबर सच है लॉन्ग में सही बिल कॉल यू बेबी तो निवेदिता इतनी खुश हो गई यस यस आई एम मदर बेबी आई एम मदर बेबी ऐसा खुश होकर के स्वामी जी के पास में जाकर के बोलती है की यस मदर अलाउड मी तू मेक प्रणाम तू हर टच हर फिट गोरे लोगों ने भारत को गुलाम बना कर रखा है और यही इन लोगों की यह औरत यहां से लेकर आई है मां के प्रति इतना श्रद्धा भक्ति विनय प्रकाशित करती है तो ये जितने भी गन जो लिखे हैं सदाचार पवित्रता कल्याणपुर लज्जा विनय ईशानुभूति ये यदि मां में नहीं होते तो क्या निवेदिता इतना उसका एग्रेसिव नेचर था की क्या वो मां के प्रति इतनी श्रद्धा भक्तिमान हो शक्ति थी वो कभी नहीं हो शक्ति तो शत्रुओं का सहर करके उनके ऊपर में विजय प्राप्त नहीं किया है जो गोरे लोग हमारे भारत देश के ऊपर में इतना अत्याचार किया हैं इस गोरे लोगों का हृदय परिवर्तन करके मैन आशीर्वाद देकर के उनका मां जीता है और आज देखिए की वही ब्रिटेन में एक इंडियन प्राइम मिनिस्टर है 100 साल के भीतर में ही ऐसा हो गया की उनकी सर्वोच्च उन्हें एडमिनिस्ट्रेटिव पोजीशन उसके ऊपर में एक भारतीय बैठा हुआ है तो गोरे लोगों का हृदय परिवर्तन नहीं होता हमारे प्रति सब समय वो घृणा का भाव राहत तो क्या एक इंडियन को प्राइम मिनिस्टर बनाते कभी नहीं बनाते हैं अभी वो कितना सक्सेसफुल होता है नहीं होता है कुछ ठीक नहीं है अमेरिका में ऑलरेडी एक हाफ इंडियन वो वाइस प्रेसिडेंट है और एक इंडियन जो है वो प्रेसीडेंशियल रेस में खड़ा हुआ है तो 100 साल सव सो साल में ही हमारा हमारे प्रति एकदम टच दृष्टि रखना वाले गोरे लोगों का पूरा किस हद तक हृदय परिवर्तन हुआ है वो हमको अभी हमको लगता है की ये सुंदर पीछे इन्हें आईआईटी पास कर लिया बोलकर के वो गूगल का सीईओ हो गया है वो जो सत्य नेडेला है वो बहुत ज्यादा बुद्धिमान है बोलकर के माइक्रोसॉफ्ट का सीईओ हुआ है किंतु उनकी बुद्धि ही सिर्फ करगढ़ नहीं यहां पे मां का भी आशीर्वाद है बोल करके उन गोरे लोगों के ऊपर के हृदय के ऊपर में हमने विजय प्राप्त किया है नहीं की उनके देश के ऊपर में तो आज यही तो कल फिर से मिलते हैं ओम शांति