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Ma Sarada Life by Sw Gambhirananda ·

अवतरणिका : श्रीमाँ सारदा देवी : स्वामी गम्भीरानन्द लिखित : 11 Sept 2023

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ओम संस्थापक ना हो श्रीमान शारदा देवी जीवन चरित्र रखो सिर्फ राक्षसों का विनाश के लिए ही शक्ति का अवतरण नहीं होता किंतु एक नए आदर्श की स्थापना करने के लिए भी वह आई है जैसे की नारियों के आदर्श के बड़े में महाराज जी हमको बता रहे थे तो उसके बड़े में हमने कुछ बातें की थी हमने कहा था की जी तरह से युद्ध के मैदान पर शत्रुओं का विनाश शास्त्रों से करना वह तो उसके लिए तो आशिक अवतार आने से भी कम चल जाएगा किंतु यदि किसी का मां परिवर्तन करना है किसी का हृदय पर किसी का हृदय हमको जितना है उसके लिए सदगुण राशि हमको चाहिए हमारे भीतर में इतनी प्रचंड आध्यात्मिक शक्ति चाहिए की लोग अपने से आकर के हमारे हमारी बात सुना शुरू करें हमारे साथ में मित्रता बनाए हमारे मित्र हो इसके बड़े में हमने स्वामी जी का उदा हरण देखा था की किस तरह से भारत हतुलम किंतु स्वामी जी जब ब्रिटेन गए खास करके अमेरिका में तो फिर भी चलिए ठीक है की अमेरिका वाले रेडी थे उसे समय सभी देश से सभी तरह की विचारधाराओं को ग्रहण करने के लिए किंतु ब्रिटेन की स्थिति बिल्कुल अलग थी ब्रिटेन के लोग वैसे ही मानते थे की संयवर सेट्स अपन डी ब्रिटिश अंपायर अर्थात की ब्रिटिश अंपायर के ऊपर में सूरज कभी अष्ट नहीं होता इतना चारों और पुरी पृथ्वी पर फेल गया है की एक जगह पर यदि रात होगी तो कहानी ना कहानी तो दिन होने ही वाला था तो वहां पर जाकर के जब स्वामी जी ने वेदांत की बातें करना शुरू किया तो हम देखते हैं की किस तरह से एक के बाद एक लोग वहां के ब्रिटिश के न नई आकर के स्वामी जी की हाथों से मुक्त होकर के स्वामी जी के मित्र होने लगे और कुछ कुछ लोगों ने तो स्वामी जी की शिष्यत्व भी ग्रहण किया जिसमें से की मिस्टर और मिसेज और निवेदिता इन तीनों का नाम सर्वप्रथम आता है और बाद में और भी थे वो मिस मूलर थी फिर ये आईटी इस स्टडी था हालांकि इन दोनों ने तो बाद में स्वामी जी के साथ में झगड़ा कर लिया था किंतु और भी बहुत सारे थे जिनका की नाम आज हमारे सामने नहीं ए रहा जैसे की निवेदिता खुद कहती है वहां पर वह जी सिसेम क्लब जिसकी वो सदस्य थी उसकी एक और स्थापक एक ऐसी महिला जो की जिसका बहुत ही प्रतिष्ठित नाम था उसका जिसको की रॉयल यह जो पता है ना की अभी तो भारत में यह सब चला गया किंतु वहां पर ब्रिटेन में अभी भी है कोई जिनको की वे लोग मोबिलिटी कहते हैं इसको उनकी किताब मिलता है लोड या तो सर का तो ऐसे जो लोग होते हैं इनको की समाज में उनकी प्रतिष्ठा बहुत ज्यादा होती है तो ऐसे लोग भी आकर के स्वामी जी के सामने बैठकर के बड़े ही शांत चित से स्वामी जी की बातें सुनते थे यहां तक हमको पता है की वर्ल्ड पार्लियामेंट ऑफ रिलिजन में ब्रिटेन से ऑफीशियली वहां का जो ऑफिशल धर्म है प्रोटेस्टेंट धर्म वहां से किसी ने भी अपने रिप्रेजेंटेटिव को नहीं भेजो था वहां का जो में उनका यह जो पादरी है या तो फिर वहां पे जो में कार्डिनल की वहां का जो भी कहे वो सबसे बड़ा धर्म गुरु जो था उन लोगों का प्रोटेस्टेंट लोगों का उनको जब इनविटेशन मिला की हां अमेरिका में वर्ल्ड पार्लियामेंट ऑफ रिलिजन होने वाला है तब उसने उत्तर में ऐसा लिखा की यह किस तरह का नाटक आप लोग कर रहे हैं यदि धर्म पार्लियामेंट है उसका अर्थ तो यह हुआ की क्रिश्चियनिटी को हमने बाकी सब धर्म की तुलना में एक पाल स्टेटस देना है यह तो क्या कभी भी संभव है चर्च ऑफ इंग्लैंड की और से हम लोग कभी भी किसी भी तरह के ऑफिशल रिप्रेजेंटेटिव को नहीं भेजेंगे क्योंकि हम यह बात स्वीकार ही नहीं करते की क्रिश्चियन धर्म और किसी धर्म के समक्ष हो सकता है ऐसा करके चर्च ऑफ इंग्लैंड के सर्वोच्च सबसे जो सीनरी मोस्ट ऑफिशल जो थे जो पादरी उसने ऐसा लिख करके भेजो था तो हमको लगेगा की अरे देखो की अमेरिकन लोग इतने लिबरल है और ब्रिटिश लोग इतने रूढ़ि चुस्त है फिर घमंडी भी है फिर भारत पे राज भी करते हैं तो स्वामी जी जब कहानी जाकर के उनके चर्च वालों के साथ में बात करना शुरू करेंगे तो उनको बेचारे को कितना अपमान सहन करना पड़ेगा किंतु हुआ उल्टा ही एक्चुअली चर्च ऑफ इंग्लैंड के जितने भी प्रीचर्स थे या तो जितने भी यह उनके पृष्ठ थे इन लोगों के साथ में बात करके स्वामी जी को पता चला की वे लोग ऑलरेडी इतने लिबरल है की उन्होंने हिंदुइज्म बुद्धिस्म गीता ये सब चीजों का यह सब हमारे जो पूर्वी धर्म ग्रंथ है उनको पढ़ने की उन्होंने ऑलरेडी शुरू हुआ कर दी है और जब स्वामी जी वहां पर वेदांत के क्लास ले रहे थे तो वह लोग का रहे हैं की यू आर डी मिशनरी ऑफ डी ईस्ट तू डी चर्च ऑफ इंग्लैंड आप पूर्व से आए हैं इंग्लैंड का जो चर्च है उसको धर्म परिवर्तन करने के लिए और यह करने की जरूर है यहां तक उनको यह वहां के पृष्ठ बोल दिया करते थे तो स्वामी जी यह सुनकर के आश्चर्य चकित हो गए की अरे यह देखिए मैं तो यह सोचता था की अमेरिका में शुरू शुरू में मुझे जो अपमान सहन करना पड़ा है और अपमान इसलिए सहन करना पड़ा था की अमेरिका में यह जो कल लोग थे नीग्रो उनके प्रति बड़ी सी उनकी निम्न दृष्टि थी उनको वे लोग बड़ी घृणा के साथ में देखते थे इसलिए वहां पर सिविल वार हुई थी और नीग्रो लोग जो उनके गुलाम थे उनको मुक्त करने के लिए तो नीग्रो को गुलामी से मुक्त हो गए वो 1863 या समथिंग लाइक था ये सिविल वार 186 के आसपास में उसके स्वामी जी तो गए थे 1893 में तो भाई थे टाइम सिविल वार हो चुका था नीग्रो जो गुलाम थे वो मुक्त हो चुके थे किंतु नीग्रो लोगों के प्रति जो घृणा है तो स्वामी जी के शरीर को कलर तो थोड़ा सा कल था तो जहां पर भी चाहते थे तो कई किसी होटल में नहीं रुकना एकदम शुरू की बात है की होटल में नहीं रुकने देंगे कहानी रास्ते पे वो जो पगड़ी वगैरा पहन के चलेंगे तो लड़के लोग उनके ऊपर पत्थर फेंकेंगे यहां तक हो चुका है रास्ते में उनका अपमान किया गया है तो स्वामी जी सोचते थे की यदि इतना लिबरल अमेरिका है वहां पर भी मेरे साथ में इस तरह का अपमानजनक व्यवहार हुआ है तो ब्रिटेन में तो इससे यही ज्यादा क्या-क्या नहीं होगा किंतु आश्चर्य की बात है की ब्रिटेन में स्वामी जी को कहानी पे भी इस तरह के अपमान का भोग नहीं बन्ना पड़ा पहले से आखिर तक जितने लोगों के संपर्क में आए सब लोगों ने स्वामी जी के प्रति सर्वोच्च सम्मान प्रदर्शित किया और ये क्यों संभव हो पाया ऐसा हम लोग वैसे तो ऐसा नहीं है की ब्रिटेन के लोग वहां पर तैयार होकर के बैठे हैं की जो की भारत सई उसको सम्मान देना शुरू कर दो वरना तो भारत पे राज करते ही क्यों भारत को गुलाम बनाते ही क्यों भारत में से इतनी धन संपत्ति ल करके अपने देश को क्यों समृद्ध करते हैं ब्रिटेन के जितने भी क्राइम जो है क्राइम अगेंस्ट इंडियन सिविलाइजेशन दे आर वेरी ग्रेव बड़े ही सीरियस उसने हमारे विरोध में यह सब कार्य चाहिए खाने के लिए संविधान चाहिए खाना चाहिए तो भारत में उसे समय बंगाल में से खासकर के सब जगह से इतना सर अनाज और धन उन्होंने यूरोप में भेजना शुरू कर दिया की बंगाल में जो उसे समय फेम आया था काल आया था वो कितना भयानक था हजारों लाखों लोग मा गए इसका तो ऐसा भी नहीं है हमारे सामने आज तो ऐसा नहीं है की ब्रिटेन वाले लोग रेडी बैठे थे की जो भी भारतीय हमारे सामने आए उसको बड़ा सम्मान देकर के सर पे बिठाना शुरू कर दो हमारे प्रति तो वो घृणा की दृष्टि से ही देखते थे भारत देश को तो वो लूटने के लिए ही बैठे थे इसके बावजूद स्वामी जी को इतना सम्मान मिलन वह कोई चमत्कार से कम नहीं है और वो चमत्कार क्या था हमको पता है की ठाकुर और मां की शक्ति और स्वामी जी की खुद की साधना स्वामी जी खुद तो न नारायण ऋषि केवल स्वामी जी के भीतर में जो आध्यात्मिक शक्ति थी जो विंडो जो उनका जो ओजस था वह देखकर के लोग मोहित होकर के स्वत स्वामी जी के मित्र बने के लिए चले आते थे तो यहां पे सिर्फ ये नहीं की हमको सत्र का विनाश करना है लोगों का हृदय परिवर्तन करना है जब तक इस संसार में इस लाभ कम क्रोध इस सब चीजों में नेगेटिव इमोशन में दुबे हुए लोगों का हृदय परिवर्तित यदि हम नहीं कर पाएंगे तब तक इस समाज का कल्याण पृथ्वी का कल्याण संभव नहीं और सिर्फ चलो मां लो की हम लोग कभी-कभी सोचेंगे की अच्छा ठीक है की हमारे जीवन में ईश्वर नहीं है भक्ति नहीं है धर्म नहीं है तो क्या है हम लोग तो बड़े मजे से जीते हैं किंतु इस तरह से नहीं होने वाला है एक के बाद एक ऐसे युद्ध होंगे की जो युद्ध पुरी पृथ्वी का सफाई कर देंगे अभी सेकंड वर्ल्ड वार में तो चलो टॉप थे गोला बारूद था ज्यादा से ज्यादा विमान से गोला बारूद लिखने थे तो यदि एक बम यहां पर पद गया तो मां लीजिए की 10 15 मकान तोड़ेगा और मां लीजिए 15 20 लोगों को मारेगा किंतु आज यदि इस तरह का युद्ध होता है और एटम बम फेंकने की हम शुरुआत कर देते हैं तो एक-एक एटम बम एक एक शहर को धांश कर देगा अभी भारत के ऊपर में यदि 100 एटम बम गियर तो भारतवर्ष पूरा समाप्त हो जाएगा हमारी हजारों सालों की सभ्यता हमने ये जो आध्यात्मिक हमारे वंश गुरु शिष्य परंपरा से हमने जो एकत्रित किया है हमारी ये जो स्पिरिचुअल लर्निंग स्पिरिचुअल साइंस योग वेदांत सब कुछ वही का वही नष्ट हो जाएगा अमेरिका यूरोप पे यदि 100 बम गिर गए तो आज की यह जो साइंस और टेक्नोलॉजी है यह कंप्यूटर साइंस स्पेस साइंस एस्ट्रोनॉमी कॉस्मोलॉजी क्वांटम साइंस सब समाप्त हो जाएगा हम लोग आज से हजारों लाखों साल पहले जी तरह से जंगल में रहते थे और एक दूसरे के साथ में लड़कियों से मारपीट करते थे एक दूसरों की और पेड़ के ऊपर में से फल तोड़कर के खाता थे उसे जंगली अवस्था में वापस चले जाएंगे तो बात सिर्फ यह नहीं हमको अपने कल्याण के लिए व्यक्तिगत कल्याण के लिए धर्म की जरूर है किंतु यदि इस पृथ्वी पे ह्यूमन सिविलाइजेशन को टीके रहना होगा तब भी बिना धर्म के नहीं चलेगा यह सेकंड आ सेकंड वर्ल्ड वार के बाद में अमेरिका और सोवियत यूनियन के बीच में ये जो 50 साल 60 साल का ये जो कोल्ड वार चला अप तू 1988 जबकि सोवियत यूनियन का भी सजन हुआ तब तक तो वह इतना भयानक पीरियड था की अमेरिका और सोवियत यूनियन दोनों के पास में हजारों हजारों विमान और यह सब मरीन यह सब रेडी रहते थे इंटरकॉन्टिनेंटल बाल मिसाइल जिसमें की एटम बम रखें हुए हैं जैसे ही पता चला है की शत्रु का एक विमान यदि ए रहा है तो एकदम डर जाते थे पहले तो ऐसा होता था की यदि 10-15 शत्रु ए गए तो हम लोगों के इतना डर नहीं लगता था यदि अपने पास में बहुत बड़ी सी है तो आकर के थोड़े साथ देख लेते हैं की उनका इंटेंशन क्या है सही में युद्ध करने के लिए आए हैं ना की मित्रता करने के लिए आए हैं ऐसा हम लोगों को भरोसे से हम लोग सोच सकते थे किंतु आज इस तरह का भरोसा करने की बात ही नहीं है सोवियत यूनियन में से एक विमान ए रहा है और यदि उसमें 100 मां लीजिए थ्रेस 40 एटम बम होंगे और उसने गिरा दिए अमेरिका के ऊपर में फिनिश पूरा अमेरिका खत्म हो गया यानी की यदि एक भी विमान वहां से आता है उसका अर्थ है की अमेरिका के राष्ट्रपति को सामने हजारों विमान वहां पर भेज देना है और हजारों विमान हजारों बम फेंकेंगे सोवियत यूनियन को एक ही दिन में खत्म एक ही सेकंड में खत्म कर देना है जिससे की वह एक विमान यहां पर यदि आकर के कर बरसाए यदि एटम बम फेक तो सामने वो हमको भरोसा रहे की अमेरिका का तो विनाश होते हो गया सोवियत यूनियन का भी हो गया उन्हें भरोसा है की हमने सत्र को मार्कर के मारे हैं वैसे नहीं मारे हैं तो इतनी भयानक हेयर ट्रिगर स्थिति पे हम लोग इतने साल रहे 1945 से लेकर के 1988 समथिंग लाइक डेट तो उसमें न्यूक्लियर वार नहीं हुआ ये ठाकुरमार स्वामी जी के आशीर्वाद के अलावा ये और कोई संभव ही नहीं है की यह सब नहीं होता ये ठाकुरमार स्वामी जी का कोई पूछता है की सबसे बड़ा चमत्कार क्या है तो मैं यह कहता हूं की न्यूक्लियर वार नहीं हुआ जब अमेरिका और सोवियत यूनियन के बीच में दिस इस डी ग्रेटेस्ट मेरे कल ऑफ ठाकुर मां और स्वामी जी वरना मैंने उनके सब किस कहानी पड़े हैं की किस तरह से मिस्टेक करके या तो सोवियत यूनियन वालों ने मिस्टेक कर लिया की अमेरिका ने हमारे एटॉमिक अटैक किया है न्यूक्लियर अटैक किया अमेरिका वालों ने यह सोच लिया की अरे सोवियत यूनियन न्यूक्लियर अटैक कर रहा है अभी गलती से ये हो रहा है इस तरह की मिस अंडरस्टैंडिंग तो अभी जो लोग इस मशीन पे बैठे हैं ये सब कर मतलब मैन पूरे पृथ्वी के विनाश करने वाले कर रूपी मशीन के बटन जिन लोगों के हाथ में है वह लोगों के जजमेंट के ऊपर में है की अभी सामने काउंटर अटैक करना है की नहीं करना यदि उन्होंने बटन ढाबा दिया काउंटर अटैक कर दिया फिनिश ह्यूमन सिविलाइजेशन और फिर यह पूरे विश्व ब्रह्मांड में और कहानी कोई सिविलाइजेशन और कहानी यदि कोई स्पेसी ऑर्गेनिक पर्सिस का जन्म हुआ होगा तो वहीं पे कहानी पे जाकर के वह फिर से वो एक सिविलाइजेशन स्टार्ट होती पृथ्वी पर तो होना ही असंभव है क्योंकि फिर चारों और इस तरह का रेडियो एक्टिविटी फेल जाएगा की उसे रेडियो एक्टिविटी की वजह से लाखों साल तक पृथ्वी पर किसी भी तरह का जीवन संभव ही नहीं तो सोच लीजिए की हमारे मैन यह पृथ्वी पर हम लोग अभी भी जिंदा है और जिंदा रहेंगे उसके पीछे ठाकुरमार स्वामी जी के आशीर्वाद छोड़कर के और कुछ नहीं आज भी अमेरिका को ये डर है पहले सोवियत यूनियन का डर था अभी ये डर है की ये अभी तो न्यूक्लियर बम तो सब सूटकेस में इतने छोटे-छोटे हो गए हैं की आप शूट कैसे में उसको भर सकते हैं तो कोई टेररिस्ट में से ऐसा कोई न्यूक्लियर बम लेकर आएगा न्यूयॉर्क में फोड़ देगा तो फिनिश उनका जो इकोनॉमिक्स मिरेकल जो है आज अमेरिका का इकोनामिक इतना पावर है इस तरह से एक दो एटम बम गिरेगी तो अमेरिका का इकोनामिक पावर वहीं पर खत्म हो जाएगा अब जैसे वो जो दो विमान गियर थे न्यूयॉर्क में दो बिल्डिंग को टोडा था इस में अमेरिका बेचारा पूरा हाल गया था तो एक जल्दी न्यूयॉर्क में इस तरह से विमान में कोई टेररिस्ट न्यूक्लियर बम लेकर आएगा तो क्या होगा तो अभी इन लोगों को आज भी यह डर है की यह जो भयानक वेपन की सृष्टि तो कर दी है सजन तो कर दिया है किंतु इस करण रक्षा को अभी फिर से और चीनी बोतल में से बाहर निकाल जाति है और फिर पूछती है की आपको अभी क्या चाहिए बताइए वो आपको मुझे कोई कम देना होगा तो अभी वो आदमी क्या करता है की वो वो तो पहले बड़ा खुश हो जाता है की हां चलो मुझे बहुत सर पैसा चाहिए बहुत बड़ा एक महल चाहिए बहुत सारे नौकर चक्र चाहिए सनम और चाहिए ये चाहिए वो चाहिए वो सब मस्त राहत है हर बार वह जी नहीं ए करके उसको पूछता है की आपने मुझे बोतल में से निकाला अभी आप बताइए आपको क्या चाहिए तो अभी कुछ डर के बाद वो आदमी तो अभी आप कोई आदमी कितना भोग करेगा वो एक साथ में कितना 50 रसगुल्ला खाएगा इससे ज्यादा वो क्या खाएगा वो थोड़ा तक गया वो सब भोग करते करते बोला की अभी तुम बोतल में जाकर के रहो थोड़ा समय वरना फिर मैं बाद में तुमको बुलट हूं और कोई कम होगा तो जनी क्या कहता है की आपने बोतल में से निकाला है आपको मुझे कम देना होगा नहीं देंगे तो मैं आपको का जाऊंगा अभी ये आदमी बेचारा बड़ा डर गया की उसको निकाला है सब भूख कर लिया है अब ये बोतल में जान को तैयार नहीं बोलना है मेरे मुझे और ज्यादा कम दो वरना तुमको का जाऊंगा अभी क्या करूं क्या करूं तो उसने क्या किया की एक सीधी बना दी एक बड़ा की बहुत लंबी सीधी बनाऊं यहां से लेकर के आकाश तक जाए ऐसी सीडी तो जिन्होंने फ्रॉक करके स्टडी बना दी फिर बोला की अभी तुम सीडी के ऊपर छोड़ो और फिर नीचे उतारो फिर ऊपर चलो फिर नीचे उठो ये करते रहना बस तो जनी भी खुश होकर के उसको कम मिल गया वो आकाश तक जान वाली सीधी बनाई है चढ़ता है उतरता है चढ़ता है उतरता है अभी ये मैंने अभी ये न्यूक्लियर वेपंस का तो इतना आसन हाल नहीं है की आपने बोतल में से निकाला है इसको और कार्ड रक्षा की तरह अभी हमारे सामने बैठे हैं वो अटैक करके इसको बोतल में नहीं कोई ऐसा देश यदि ऐसा हम क्या भारत रहेगा की हम लोग न्यूक्लियर वेपन नहीं रखेंगे क्या उसका अर्थ है इस बात का चीन के पास से पाकिस्तान के पास है अमेरिका बोलेगा हम लोग नहीं रखेंगे न्यूक्लियर वेपन तो उसे इस बात का क्या अर्थ है यदि सभी देश मिलकर के ये कहे की हम में से कोई भी न्यूक्लियर वेपन नहीं रखेगा तो कोई टेररिस्ट के पास र जाएगा वो सबको धमकी देना शुरू कर देगा अर्थात न्यूक्लियर वेपन आप अभी इसको यहां से पृथ्वी पर से हटा नहीं सकते इट्स एन फैक्ट ऑफ लाइफ जी किसी पागल के हाथ में उसका वो आया एक दिन और उसने सोचा की मैं तो मारूंगा दुनिया को साथ में लेक जाऊंगा उसे दिन हमारा क्या होगा सोच के देखिए अभी यह सब और खास करके यह टेररिस्ट थ्रेट है यह अमेरिका को सबसे बड़ा डर यही ग रहा है की ओसामा बिन के लादेन के पास में उसे दिन सिर्फ विमान थे न्यूक्लियर वेपन ए जाता तो क्या होता तो देखिए की हमने साइंस और टेक्नोलॉजी ने किस तरह के बड़े-बड़े भस्मासुर को खड़ा किया है वो जो पुराण के जो भस्मासुर थे वो तो आदमी को खाकर के वो शांत हो जाते थे और मां आकर के उनको त्रिशूल से ना की वो फिर भगवान विष्णु आकर के सुदर्शन चक्र से उनका सर कैट देते तो वो चले जाते वो वहीं पे वो समाप्त हो जाते हैं किंतु यह न्यूक्लियर वेपन रुपए जो भस्मासुर फिर ये जो वायरस रूपी दूसरा एक भस्मासुर हमने बना दिया है ये कोरोना पांडेमिक में हमने देखा की यदि एक वायरस सबको पता है कोई मुंह से बोलना नहीं है की चिन्ह अपने लैबोरेट्री में ये वायरस बनाया है तो अभी वो वायरस बना करके सबके ऊपर में छोड़ भी दिया आप जानबूझकर के छोड़ की एक्सीडेंट ही छठ गया किसको पता कौन देखने को गया है किंतु हमने उसका परिणाम पुरी पृथ्वी ने भगत 2 साल तक सबको घर में बैंड रहना पड़ा इकोनामिक की क्या स्थिति हो गई लोगों की कितने लोगों की जान गई है यहां राजकोट आश्रम हमारे ही पब्लिकेशन विभाग के हमारे कितने अच्छे-अच्छे वॉलिंटियर्स का मतलब हमारे स्टाफ को कोरोना हो गया तो और उसको वह जो स्टेरॉयड के इंजेक्शन लेने पड़े उसके बाद से उसकी हेल्थ इतनी खराब हो गई इतनी खराब हो गई बेचारा अभी क्या करेगा तो देखिए की ये जो भस्मासुर यह रक्त भी ये सनबर्निशुंभ पहले के जो रक्षा थे वो तो फिर भी ठीक थे उनकी आप हत्या कर सकते थे उनका आप विनाश कर सकते थे आज का ये जो साइंस और टेक्नोलॉजी का दुरुपयोग करके जी तरह के रक्सन को हमने जन्म दिया है उसका इतना आसानी से कोई सॉल्यूशन एंटीडोते नहीं है यह कोरोना का तो हमने एंटीडोते निकाल दिया इमीडीएटली वो वैक्सीन करके किंतु एक के बाद एक कोई वायरस बनाता रहेगा या तो फिर ये और भी न्यूक्लियर न्यूक्लियर वेपन से केमिकल वेपंस एक है तो अभी यह तो साइंस और टेक्नोलॉजी हमको नए एक के बाद एक महाविनाशक शास्त्र हमारे हाथ में देते ही रहेंगे जो पागल आदमी के हाथ में यह शास्त्र कहा जाता है वह आदमी पुरी पृथ्वी को तबाह कर सकता है निशुल्क के पास में जितनी ताकत नहीं थी इतनी ताकत एक पागल आदमी आज ये वेपंस ऑफ मास डिस्ट्रक्शन जिसको कहते हैं डब्ल्यूएमडी ये वेपंस ऑफ मास डिस्ट्रक्शन डिस्ट्रक्शन जिनके हाथ में ए गया वो पागल आदमी शून्य शुभ भस्मासुर रक्तबीज ये कंस ये फिर कौरवों की पुरी सी इन लोगों से कहानी ज्यादा ताकतवर हो जाएगा तो अभी इस तरह के लोगों का खत्म यदि सामने आए तो हम कर सकते हैं छुपी बैठे हैं तो हम क्या कर लेंगे इसीलिए समाज का सोसाइटी का हृदय परिवर्तन होना आवश्यक है हम सबके भीतर में धर्म की जागृति हनी जरूरी है वरना आज जी तरह से हम लोग र रहे हैं सोच रहे हैं की हम लोग जहां पर हैं वैसे ही रहेंगे चलो हमको बड़ा भी नहीं होना और अच्छा नहीं होना अपना धर्म अपने पास में रखो तो इससे कोई मतलब यह सब बोलने से कुछ होने वाला नहीं हमको हमेशा ये ख्याल में रखना है भविष्य में की यदि इस तरह के वेपंस इस तरह के हमने यदि समाज के बड़े में नहीं सोचा इस तरह के बहुत सारे लोग हैं जो की मेंटली डिस्टर्ब रहते हैं वो क्या कुछ ड्रेस में रहते हैं ना की किसमे रहते हैं तो यदि ऐसे लोगों को हमने साधहरा नहीं दिया ऐसे लोगों को हमने प्रेम नहीं दिया ऐसे लोगों को हमने उसकी पीठ पर हाथ फ़िर के उनको मां को शांत नहीं किया तो यही लोग फिर इस तरह का कोई वेपन हाथ में उठा करके हमको ही करने के लिए आएंगे यह जो हम मैं छोटा था तो यह कॉमिक्स में बहुत पड़ता था तो मुझे बड़ा अच्छा लगता था यह सब न्यूज़ पेपर में आता था मैं बाजार में से भी खरीद करके लता था यह सब जितने भी कॉमिक्स पढ़ने हैं उसमें एक तरह का एक मेड साइंटिस्ट होता है वो मेड साइंटिस्ट पहले तो बड़ा अच्छा आदमी होने का पर्यटन करता है की हां मैं अच्छा हूंगा मेरे पास में जो साइंस है उसका कोई सदुपयोग करूंगा फिर कहानी ना कहानी से उसको बेचारे को कुछ धक्का लगता है कुछ उसको कष्ट मिलता है कोई उसका अपमान करता है या तो फिर वो किसी कार्य में निष्फल होता है तो फिर वो हताशा में चला जाता है डिप्रेशन में चला जाता है और यह डिप्रेशन फिर उसको गुस्सा दिलवाता है अच्छा मेरे साथ में ऐसा किया इन लोगों ने अभी मैं इनको समझ मजा दिखता हूं फिर वो अपने लैबोरेट्री में जाकर के कुछ एक्सपेरिमेंट करेगा पता नहीं किस तरह का वो कुछ विप खड़ा करेगा की उसके खुद के भीतर में कुछ ट्रांसपोर्टेशन हो जाएगा फिर वो लोगों को करने को दौड़ेगा फिर वो जो कोई आएगा सुपरमैन ना स्पाइडर-मैन वो जाकर के उसके साथ फाइट करेगा तो यह सब पढ़ना मुझे बड़ा अच्छा लगता था अरे वह यह देखो किस तरह से ये स्पाइडर-मैन उसके साथ में फाइट कर रहा है कॉमिक्स में ठीक है यदि वास्तविक में ऐसा हो जाए तो सोच कर देखिए की क्या होगा वास्तव में कोई स्पाइडर-मैन हमको बचाने के लिए नहीं आने वाला है हमको बचाने के लिए आने वाले हैं सिर्फ ठाकुर्मा और स्वामी जी और हमको कब बचाएंगे जबकि यह मेड साइंटिस्ट डिप्रेशन में जा रहा था उसे समय उसको डिप्रेशन से बचते तो बाद में उसके भीतर में ये क परिवर्तन नहीं आता तो इसके लिए मंत्र धर्म की स्थापना ही नहीं किंतु धार विश्वास को विनाश से बचाने के लिए एक नए आदर्श की स्थापना करने के लिए ठाकुरमार स्वामी जी का अवतरण हुआ है अभी महाराज आगे लिखने हैं भारतीय पुरातन संस्कृति परीक्षित आज ओ शिक्षक इसको हमने पढ़ा है की भारत की पुरातन संस्कृति के ग्राउंड में फलक पे आज इस ऐसी शक्ति यानी की ईश्वरीय शक्ति के आविर्भाव से एक अभूतपूर्व जागरण की संभावना प्रकट हुई है इस पुरातन संस्कृति के परिप्रेक्ष्य में इस पूरा अभी सैटरडे को वो जो g20 समेटा तो आपने देखा होगा की यह जो हमारे प्राइम मिनिस्टर मोदी जो सबको इनवाइट जो ग्रीट कर रहे हैं वह वेलकम कर रहा है सभी विश्व के सब बड़े-बड़े प्रेसिडेंट प्राइम मिनिस्टर को पीछे में वो कोणार्क का अपना सूर्य मंदिर है उसका चित्र रखा है देखिए की यह हमारी भारतीय संस्कृति धीरे-धीरे को लेकर के जी तरह से पुनर्जीवित हो रही है सभी क्षेत्र में सिर्फ यह नहीं है की धर्म के क्षेत्र में किंतु अर्थ नीति अर्थशास्त्र के क्षेत्र में एन की राजनीति के क्षेत्र में कोई भी क्षेत्र में हो हमारी संस्कृति का पुनः जागरण और इस पुनः जागरण के वो शीर्ष शिखर के ऊपर में विराजित यह दिव्या शक्ति का अवर भाव इससे एक नए जागरण की एक नई संभावना की लहर दिखे रही है विशेषता नई जगत हुए खास करके नई जगत में इस दिव्या शक्ति के आगमन का प्रभाव सुदूर प्रसारित बहुत दूर तक फैलेगा यह हम अनूप यह हमको ऐसा ग रहा है महाराज कहते हैं नई समाज उन्नतीर प्रयोजन चिंताएं स्वीकार करीबन नई समाज की उन्नति का प्रयोजन प्रत्येक सोने वाला व्यक्ति चिंता सील यानी की थिंकर फिलॉस्फर जो भी यह सब चीजों को लेकर के सोचता है वो हमेशा स्वीकार करेगा आचार्य जो स्वामी विवेकानंद कोरिया अमर बोली ते पराइज मातृ जातिर अमित अभ्युदय व्यतीरे के भारतीय कल्याण संभव पर नहीं आचार्य स्वामी विवेकानंद की बात में हम बात मिला करके का सकते हैं की जब तक मंत्र जाति का अभ्युदय नहीं होता अर्थात उत्थान नहीं होता तब तक भारत का कल्याण संभव नहीं है स्त्री गुरु ग्रहण इसीलिए रामकृष्ण अवतार में स्त्री गुरु का ग्रहण छह चेन्नई नई भवसदन इसीलिए ठाकुर ने नई भाव की साधना की थी मधुर भाव की साधना की थी श्री जननायक श्री अशोक धार्मिक शिखा दिखरा भर ग्रहण इसीलिए अपने सहअध्धर्मी की शिक्षा और शिक्षा का ठाकुर ने भर ग्रहण किया था श्री जानने मातृभाब प्रचार और इसलिए मंत्र भाव का प्रचार किया था देखिए बाकी सब तो हमने पढ़ा हुआ था ये लास्ट सेंटेंस जो है इसमें महाराज जी एक या दो लाइन में पूरा ठाकुर की यह जो बायोग्राफी लीला प्रसंग में जो है उसमें से एक जिस्ट निकाल कर के हमको दे देते हैं महाराज जी क्या कहते हैं श्री जानना रामकृष्ण अवतारी स्त्री गुरु ग्रहण यह नई जाति का उत्थान नहीं होगा तो भारत का भी अभ्युदय नहीं होगा इसलिए भगवान रामकृष्ण ने स्त्री गुरु को ग्रहण किया साधना की थी इसीलिए मां शारदा देवी की शिक्षा और दीक्षा का भर ग्रहण किया था और इसलिए मंत्र भाव का प्रचार किया था 4 पॉइंट हमको महाराज जी ने दिए हैं और इन चारों पॉइंट पर हमको थोड़ा सा डिटेल में डिस्कशन करने की जरूर है वह डिस्कशन हम कल से करेंगे आज यही तक ओम शांति शांति हरि ओम तत्सत श्री राम कृष्णा