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ओम स्थापक यच धर्मस्य सर्व धर्म स्वरूपने अवतार वरिष्ठा राम कृष्णाय ते नमः मां शारदा देवी गंभीरानंद जी महाराज द्वारा लिखित महाराज जी लिख रहे हैं अवश्य अवतार कारजा बली ए भाव गांर संपादन नवीन आदर्श संस्थापन बा मानव चित्ते आकर्षण मात्र निषेश तो होए ना अवतार का जो कार्य है पृथ्वी के ऊपर में वह कार्य भाव गांधीर संपादन अर्थात की यह आध्यात्मिक भाव जो है उसका पृथ्वी पर संपादन जैसे कि एक नया भाव लेकर के एक साधना करना हमको पता है कि चैतन्य महाप्रभु ने मधुर भाव की की स्थापना मतलब मधुर भाव तो था ही भागवत में ही था किंतु पिछले कुछ समय से वोह लुप्त हो गया था तो गौरांग महाप्रभु ने उसको पुनः जीवित किया पुनः जागृत किया और साधक लोग तो उसको लेकर के साधना कर ही रहे थे किंतु जनसाधारण में मधुर भाव क्या है मधुर भाव का सार तत्व क्या है वो गौरांग महाप्रभु ने उसको दिखाया और इसको लेकर के हमने लीला प्रसंग में से वो जो चैप्टर था मधुर भावे सार तत्व उसका भी हमने थोड़ा सा पाठ किया था यानी कि ऐसा होता है कि सभी युग में कोई ना कोई भाव एक प्रधान रहता है ऋषि मुनियों का शांत भाव था भगवान कृष्ण के समय देखेंगे तो बहुत सारे भावों का उस समय एक साथ में कॉमिनेशन चल रहा था उनके जो मित्र थे सुदामा वह सख्य भाव लेकर के साधना कर रहे थे भगवान महावीर जो है उनकी दास भाव की साधना थी भगवान कृष्ण की स्वयं उनका बालक भाव भी था और उनका उनके साथ में जो गोपियां थी उनका मधुर भाव भी था तो एक के बाद एक भाव साधना के द्वारा किस तरह से आप ईश्वर को प्राप्त कर सकते हैं उसको जन साधारण में उसका प्रचार किया जाता है तो भाव गांधीर संपादन एक नवीन आदर्श संस्थापन एक नए आदर्श की स्थापना जैसे कि रामकृष्ण अवतार में वो फेमस इंसिडेंट है कि ठाकुर कह रहे हैं कि वैष्णव लोगों के तीन कौन से वो आइडियल से कि वो जीवे दया और नाम नाम का गुणगान नाम करना सतत नाम जप करना तो जीवे दया जैसे ही ठाकुर ने बोला तो इमीडिएट उन्होंने क्या कहा कि तुम कौन होते हो जीव पर दया करने वाले और ऐसा कह के समाधि में चले गए कहा कि जीव नहीं शिव स्वयं उसकी आपको शिव समझ कर के उनकी पूजा करनी है तब स्वामी जी ने जब यह बात सुनी तो उन्होंने कहा कि जदी मुझे मौका मिलेगा तो ठाकुर ने आज पहली बात तो है कि और भी बहुत सारे लीला प्रसंग में शरत महाराज ने इस वर्णन इसका बहुत सुंदर वर्णन किया है इंसिडेंट इट सेल्फ जो है वो बड़ा फेमस है वो सबने पढ़ा है किंतु उसके बाद का जो है कि शरत महाराज जो लीला प्रसंग में लिखते हैं दैट इज आल्सो रिवीलिंग वो भी एक एक नया एक प्रकाश डालता है रामकृष्ण संघ की स्थापना के उस कुछ समय के ऊपर में लीला प्रसंग में शरद महाराज लिखते हैं कि हम सबने यह बात सुन तो ली कि ठाकुर ने कहा व समाधि में चले गए और जाने से पहले कहा कि तुम जीव के ऊपर में दया करने वाले तुम कौन होते हो तुम तो तुच्छ से तुच्छ एक व्यक्ति मात्र हो तुम कौन दया करने वाले तुम उनको जीव समझ कर के उनकी उपासना करोगे यह बात ठाकुर ने कह तो दी बाहर में आकर के जब हमने नरेंद्र के साथ में बात कर रहे थे तो नरेंद्र यानी कि स्वामी विवेकानंद उन्होंने कहा कि देखो ठाकुर ने आज कितनी बड़ी बात कह दी है यदि मेरा बस चले यदि मेरे पास में वह सामर्थ्य हो तो ठाकुर का यह महामंत्र शिव ज्ञाने जीव की सेवा में पूरे विश्व में प्रचार करूंगा तो शरत महाराज कहते हैं कि हम सभी लोगों ने यह बात सुनी तो सही किंतु इसके भीतर में इतना बड़ा तात्पर्य गां भीर है यह तो हम लोग समझ नहीं पाए नरेंद्र ने किस तरह से यह बात को पकड़ कर के ठाकुर बहुत कुछ बोलते रहते थे ठाकुर के पास आप बैठेंगे दो-तीन घंटा वो बोलते ही जाएंगे कथामृत में देखिए जिस जिस चैप्टर का कथामृत में संपूर्ण वर्णन है बहुत सारे बार माश महाशय ठाकुर के पास गए उन्होंने पूरा वर्णन नहीं दिया क्योंकि मुझे ऐसा लग रहा है मेरा पर्सनल थिरी ऐसा है कि ठाकुर उनके साथ में डायरेक्ट जो वार्तालाप करते होंगे उनके जो पर्सनल उनके जो इश्यूज होंगे उसके जो उपदेश देते होंगे उसको मास्टर महाशय ने कथामृत में नहीं लिख लिखा कहीं-कहीं लिखा है तो फिर वो उनका नाम बदल दिया है मणि या तो फिर मोहिनी मोहन इस तरह के नाम से उन्होंने इनडायरेक्ट वार्तालाप किया है किंतु उस पार्ट में भी आप देखेंगे कि पर्सनल किसी भी चीज इशू को टच नहीं किया गया तो ये एक बात है मास्टर महाशय अपने को जो छुपा करके रखते हैं स्वामी जी ने कहा है कि सोक्रेट डायलॉग इज प्लेटो ऑल ओवर तो वो एक दिस इज वन ऑफ द कैरेक्टरिस्टिक ऑफ कथामृत तो कथामृत में किंतु जिस जिस चैप्टर का मोर और लेस कंप्लीट वर्णन है जैसे कि विद्यासागर महाशय को मिलने के लिए गए हैं या तो फिर वो केशव के सेन के साथ में नौका विहार का दृश्य है वो देखेंगे कि कितना टाइम यह बड़े लोगों के पास में होगा ठाकुर के साथ बात करने के लिए घंटा दो घंटा भर य तो बहुत हो गया इतने में ही उतना सारा कुछ मास्टर महाशय ने लिखा है और हम मान लेते हैं कि इसके अलावा भी और कुछ-कुछ बातें हुई होगी तो वो पढ़ते पढ़ते हमको लगेगा कि कितना सारा टाइम माने ठाकुर जब किसी के साथ बात करते हैं तो कितना सब कुछ बोल लेते हैं तो शरत महाराज है यह हरि महाराज है यह लाटू महाराज है ठाकुर की कितनी ही बात सुनते होंगे ठाकुर की बात सुनकर के ही जन्म जन्मांतर के वो कर्म वगैरह जो है हमारे तो ये हो जाते हैं वो क्षय हो जाते हैं तो फिर वो याद रख कर के कि हां ठाकुर ने एगजैक्टली यही कहा था और कोई इस तरह से लिखता नहीं था एक आई थिंक राजा महाराज ने आई थिंक एक बार लिखने की कुछ शुरुआत की थी राजा महाराज की महापुरुष महाराज मैं एक्जेक्टली भूल गया तो ठाकुर ने ठाकुर समझ गए कि ये लिख रहा है वो ध्यान करके ध्यान से सुन रहा है और लिख रहा है क्योंकि जो लिखेगा उसको सुनना पड़ेगा बड़े अदर वाइज आप क्या करेंगे कि ठाकुर का भाव ग्रहण करेंगे रदर देन शब्द शब्द सब के सब याद नहीं रहेंगे आपको तो ठाकुर ने जैसे ही देखा कि वह इस तरह से सुन रहा है जैसे कि वो मेरे शब्दों को याद रखने की कोशिश कर रहा हो इमीडिएट ठाकुर ने कहा कि यह काम तुम्हारा नहीं है इसके लिए और कोई है तो और कोई मास्टर महाशय ठाकुर ने कहा था इसको इतनी ही कला क्यों दी तो फिर वो मां के साथ में बात कर रहा है मास्टर महाशय ने खुद इसका वर्णन किया है फिर ठाकुर मां ने कुछ कहा तो ठाकुर ने रिप्लाई में कहा अच्छा तारे इतनी कला से ही उसका काम हो जाएगा ठीक है कला यानी कि शक्ति माने 16 कला 16 कला से वो पूरा चंद्र की जो कलाए जो होती है 16 कला यानी कि पूर्ण चंद्र फिर एक कला यानी कि वो उसका कोस्पो डीम होता जाएगा दो कला तीन कला अभी इसका क्या एगजैक्टली मीनिंग है मुझे नहीं पता यह सब पुराने मेजर्स है किंतु जो भी है ठाकुर ने कहा कि इसको इतनी ही कला क्यों दी फिर मां ने कुछ कहा तो ठाकुर ने कहा अच्छा इसी से तुम्हारा काम हो जाएगा तो मास्टर महाशय तो हम लोग अनुमान करते हैं कि मास्ट महाशय के बारे में शायद ऐसा कहा होगा कि उनके भीतर में त्याग संसार त्याग करने की शायद इतनी व प्रचंड वैराग्य ना हो किंतु उनके पास में जो शक्ति है उससे कथामृत उनका लिख लिया जाएगा इतना उनके पास में अवश्य शक्ति है तो कथामृत में देखि कि इतने सारे बातें करते हैं तो शरद महाराज वगैरह ठाकुर के भाव ग्रहण करते हैं नहीं कि शब्द तो जब ये लोग सुनते हैं कि नरेंद ने इतनी सारी बातों में से एक बात जो है ऐसी पकड़ ली है कि जैसे कि वो एक बात को लेकर के पूरे युग को परिवर्तन कर सकते हैं आज रामकृष्ण मिशन की यह जो भाव है कि मनुष्य के प्रति सहृदयता कंपेज एंपैथी इसके ऊपर में ही पूरा जगत चलता है ऐसा नहीं कि ठाकुर अकेले हैं कंपेज के बारे में बात करने वाले भगवान बुद्ध के जीवन में भी देखिए कि वह पारधी एक था एक पंखी को मारने के लिए जा रहा था तो भगवान बुद्ध ने कहा उसको क्यों मारते हो तुमको मानस चाहिए तो मैं अपने शरीर में से वोना मानस जितना करेस्पॉन्डिंग्ली व पे व्यक्ति को ईश्वर मान कर के उसकी सेवा यानी कि साधना साधना के रूप में जो सेवा करना यह जो भाव है यह जो आइडियल है पूरे युग के लिए उपयोगी है आज दुनिया के जिस क्षेत्र कोने में जाएंगे या तो युद्ध चल रहा है या तो वेपंस इंडस्ट्री चल रही है आजकल के सबसे बड़े-बड़े इंडस्ट्रियलिस्ट कौन है तो यह वेपंस कांट्रैक्टर है हमको पता भी नहीं चलता वे लोग कहां-कहां पर ये शस्त्र अस्त्र बेचते हैं और इसमें से पैसा कमाते हैं और उसी पैसों से समाज को डिस्टेबलाइज करने का अनस्टेबलाइज्ड सब एक दूसरे के सामने में भीड़ रही है सुपर पावर एक दूसरे के साथ में कंपटीशन कर रहे हैं आजकल तो किसी के भी पास में न्यूक्लियर वेपन आ सकते हैं यहां से 10 इस ओर फेंक दिए वहां से 10 इस ओर फेंक दिए पूरा मानव सभ्यता ही खत्म हो जाएगा आज से पहले युद्ध होता था तो किसी एक कोने में युद्ध चल रहा है तो उसी कोने में रहता अभी किंतु मॉडर्न एज में दो चीज है एक तो सोशल मीडिया की वजह से युद्ध का जो वातावरण है पूरे विश्व में इंस्टेंट फैल जाता है एक चीज और न्यूक्लियर वेपन के पास इस तरह की शक्ति है कि युद्ध को किसी एक कॉर्नर में सीमित करके रखना बहुत ज्यादा दिनों तक संभव नहीं है जो भी हारता है वह सोचेगा मुझे यदि मरना ही है तो चलो मैं सामने वाले को पूरे जगत को अपने साथ में लेकर के जाऊंगा इस तरह की आइडियो जीी माइंड सेट रखने वाले सुसाइडल लोगों की कमी नहीं है आजकल और आजकल तो यह न्यूक्लियर टेक्नोलॉजी हम इंटरनेट प देखिए सब जगह पर इजली अवेलेबल है येय आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस बोलकर के एक नया असुर इन्होंने खड़ा किया है अभी इसका क्या हमारे जीवन के ऊपर में असर होगा पता नहीं तो यह पूरा जगत आप देखिए कि किस तरह के एक डिजास्टर की ओर जा रहा रहा है इस डिजास्टर में ठाकुर का यह भाव नहीं रहेगा कि आपके फेलो ह्यूमन बीइंग आपका पड़ोसी है आपका मित्र है आपके सा आप जिन लोगों के संपर्क में आते हैं जो गरीब लोग हैं जो मिसफॉर्चून जिनके साथ में अनफॉर्चूनेटली है किंतु इनके हृदय में इनके भीतर में उस ईश्वर को देखिए जिस ईश्वर की पूजा करने के लिए आप मंदिर में जाते हैं वरना तो एक हां दया करके किसी को पैसा दे देना वह कोई बहुत बड़ी बात नहीं है अमेरिका में तो वह बड़े-बड़े इंडस्ट्रियलिस्ट फाउंडेशन बना कर के जाते हैं चैरिटी फाउंडेशन कि हां मैं अपना पैसा यह यूनिवर्सिटी को देकर के जाता हूं मैं अपने लड़कों को नहीं दूंगा यूनिवर्सिटी को दूंगा ना कि रिसर्च में दूंगा ना कि यह वैक्सीन डेवलपमेंट में दूंगा ऐसा नोबल थॉट्स वाले अभी आजकल चल रहा है हालांकि इसके पीछे में भी इनडायरेक्टली स्वामी जी का हाथ है पोक्र स्टोरीज इस तरह की स्टोरी जो कि प्रूव नहीं हुई है तो एक अपोक्रोमेटिक इंडस्ट्रियलिस्ट ऑ ऑफ दैट टाइम स्वामी जी के पास आया और स्वामी जी के साथ में झगड़ा करके बोलने लगा कि यह क्या आप सब बात कर रहे हैं कि ये आपको चेरी स्वामी जी कहते हैं ना कि सबके भीतर में वही ब्राह्मण है तो आप क्यों दूसरे के साथ में ध् वेष करते हैं जीवन का उद्देश्य होना चाहिए प्रैक्टिकल वेदांत में जो उन्होंने लि कहा है कि जीवन का उद्देश्य होना चाहिए एक समभाव से रहना जिससे कि आपका अस्तित्व इस पृथ्वी पर लोगों के लिए आशीर्वाद समान हो जाए नहीं कि लोगों के लिए श्राप समान हो जाए तो रोके फेलर आ कर के स्वामी जी के साथ में झगड़ा करता है व आर्गुमेंट करता है फिर कुछ जिसने यह रेमसंस कहा है अभी यह रेमसंस का कंफर्मेशन अपने पास में नहीं है मेरी लुईस न्यू डिस्कवरी में इसका उ उल्लेख करके कहती है कि यह हमने सुना है किंतु क्या सुना कितना सुना इसके बारे में हमारे पास कंफर्मेशन नहीं है जिसने यह कहानी बताई वह बाहर में खड़ा था कमरे में रोके फेलर और स्वामी जी का झगड़ा हो रहा था झगड़ा माने वह चिल्ला रहा था तो वही वाला स्वामी जी एकदम शांति से उत्तर दे रहे थे कुछ देर के बाद में वह बड़े गुस्से से वह बाहर निकल गया और चला गया वहां से किंतु उस समय के बाद में उसने अपनी संपत्ति का ट्रस्ट बनाया रोके फ ट्रस्ट या तो फाउंडेशन व्ट एवर उसका नाम जो भी है और फिर उसके द्वारा उसने कहा कि चैरिटेबल एक्टिविटीज करेगा वो ट्रस्ट या फाउंडेशन क्या चैरिटेबल करता है एक्टिविटी पता नहीं किंतु यह बात कि धनी लोग ट्रस्ट बनाए गांधी जी का जो ट्रस्ट का आईडिया था वो सब कि धनी लोगों के का एक ट्रस्ट होना चाहिए उनके पास में जो संपत्ति है इट इज इन ट्रस्ट फॉर द सोसाइटी सोसाइटी का वो ट्रस्टी है और संपत्ति को उनको सोसाइटी के भले के लिए यूज करना है वो अल्फ्रेड नोबल का बड़ा ही एक फेमस उदाहरण है आजकल का जो नोबेल प्राइज वो शस्त्र बनाता था ये डायनामाइट का खोज शायद उसी ने किया था तो एक दिन ऐसा हुआ उसका भाई था उसका डेथ हो गया तो डेथ हो गया तो न्यूज़पेपर में समाचार आ गए कि मौत का सौदागर मर गया है आखिर मने वो विश्व पर बहुत बड़ा एक उपकार हुआ है मौत का सौदागर मर गया है वो वेपंस बनाता था तो अभी उसका भाई मर गया तो लोगों ने ऐसा मान लिया कुछ-कुछ न्यूजपेपर वालों ने कि अल्फ्रेड नोबेल हिमसेल्फ वही मर गया है तो अभी जब अल्फ्रेड नोबेल ने अपना खुद का य ओबिटुअरी यह पढ़ा पेपर में तो बड़ा ही वो दुखित हो गया कि अरे मुझे यह मौत का सौदागर कह रहे हैं ये क्या मेरी यह लिगसी है कि मैं डायनामाइट बना कर के जाता हूं मैं वेपंस बना कर के जाता हूं मैं काम करता हूं मेरी संपत्ति का मैं ट्रस्ट बनाऊंगा और इसमें से अ मानव जात के कल्याण के लिए फिजिक्स है केमिस्ट्री है बायोलॉजी है अ इन सबके क्षेत्र में जो सबसे बड़ा अवदान देगा उसको इसमें से एक प्राइज मिलेगा नोबेल प्राइज तो फिर उसने वह कमेटी बनाई उसके जो एग्जीक्यूटर्स थे ट्रस्टीस थे वो उस कमेटी में थे लेटर ऑन स्टॉकहोम एकेडमी जो वहां का नॉर्वे का है उन लोगों ने यह ले लिया अपने हाथ में तो जो भी है किंतु देखिए कि संपत्ति का सदुपयोग करना यह सब आइडिया स्वामी जी के ही दिए हुए हालांकि यह लोग कित एक्सेप्ट करते हैं नहीं करते हैं पता नहीं तो नए समय समय के अनुसार नए जमाने के अनुसार वही ओल्ड वाइन इन न्यू बोटल जद कहेंगे यदि टू यूज एक बाइबल का स्माइल जद यूज करके कहेंगे कि ओल्ड वाइन इन न्यू बोटल वही पुराने टीचिंग है किंतु आज के समय के अनुसार युग उपयोगी बना कर के लोगों के सामने प्रस्तुत करना तो यहां पर जो महाराज जी लिख रहे हैं कि अवतार ने सिर्फ इतना नहीं किया क्याक नहीं मने इतना तो किया ही है किंतु इसके अलावा भी उनका एक ग्रेटर मिशन है तो पहले तो लिस्ट करते हैं यह किया है यह किया है यह किया है गोइंग बियोंड दैट ही जज अ ग्रेटर मिशन तो वो लिस्ट कर रहे हैं उसमें सबने पहले देखा हमने भाव गांधीर संपादन दूसरा है नवीन आदर्श संस्थापन या तो फिर मानव चित्त के आकर्ष व तीसरा एक है मानव चित्ते आकर्षण मात्रे ही आकर्षण मानव के चित्त को आकर्षित करना एक है कि किसी भी देखो कि हम लोग किसी को ऐसे गुरु के रूप में कल भी हमने ये डिस्कस किया था कि हम लोग उपदेश किससे सुनेंगे यह नहीं है कि वैसे ही कोई भी उपदेश सुनना या तो फिर कोई भी उपदेश ग्रहण करना ये कोई बहुत बड़ी मतलब आपको जद कोई भी एक अच्छी किताब खोल कर के देख लेंगे तो आपको बहुत अच्छे अच्छे उपदेश उसमें से आपको मिल जाएंगे उपदेश ही यदि आपको पढ़ना है उपदेश ही आपको सुनना है तो उपदेश देने वाले लोगों की इस समाज में कमी नहीं है किंतु आप उन्हीं की बात ग्रहण करेंगे जिनके ऊपर में आपका विश्वास है जिनके जिनको कि आप रिस्पेक्ट करते हैं जिनको कि आप ट्रस्ट करते हैं तो यह ट्रस्ट अर्जन करना यह सबसे बड़ी बात है ट्रस्ट अर्जन करने के बाद में विश्वास और श्रद्धा अर्जन करने के बाद में आप उसको जो कहेंगे वह उसको सुनेगा उसका इंप्लीमेंट करेगा कि नहीं वह पता नहीं किंतु एटलीस्ट वो उसको सुनेगा तो मानव के चित्त का आकर्षण करना ये मास्टर महाशय का खुद का देखिए मास्टर महाशय तो बाइबल भी पड़े थे सब कुछ था उस समय एक ऐसी बात चल रही थी कि हां वो कथामृत जो है तो कथामृत क्या है ये गरीब ब्राह्मण एक अभन ब्राह्मण कालिका पुजारी ठाकुर के बारे में कोई कोई लोग इस तरह की बातें करते थे वो अनपढ कालिका पुजारी क्या ऐसी सब एकदम हाईएस्ट लेवल की फिलोसोफी की बातें थोड़ी ना करेगा ये मास्टर महाशय तो एमए थे बाइबल फाइबल सब पढ़ा था था तो उन्होंने अपने मन घड़न बहुत सारे उपदेश ठाकुर के मुंह से उन्होंने कहलवान वाले लोगों की कमी नहीं थी तो यह मास्टर महाशय कि जिन्होंने बहुत कुछ पढ़ा था एमए किया था मैच्योरिटी थी उनमें एक एक स्पिरिचुअल एक सेंस भी था उनका अदर वाइज वो क्यों ठाकुर को स्वीकार करते सब कुछ था किंतु फिर भी जब प्रथम दर्शन प्रथम दर्शन यानी कि प्रथम बार व कालीवाड़ा ए पहली बार ठाकुर को देखा तो उनका मन किस तरह से मोहित हो गया कि अरे जैसे कि भगवान सुखदेव स्वयं भागवत सुना रहे हो इस तरह से सुंदर पवित्र मधुर वातावरण वहां पर खड़ा हुआ है गंगा के किनारे कालीवाड़ा पहले एक काम करता हूं कालीवाड़ा हूं फिर यहां पर आकर के वापस आकर के ठाकुर को मिलता हूं तो ठाकुर को मिलकर के इतने प्रभावित हो गए बार-बार ठाकुर के पास आ रहे हैं और एक दो दिन के बाद ठाकुर बोलते हैं कि मोर को 4:00 बजे अफीम खिला दिया तो 4:00 बजे फिर से वो आ जाएगा तो मनुष्य का चित्त आकर्षण करना दैट इज मोर इंपोर्टेंट उसके बाद में आप जो भी उसको उपदेश देंगे वो ग्रहण करेगा वरना मास्टर महाशय ने क्या गीता या तो फिर बाइबल में कुछ नहीं पढ़ा होगा मास्टर महाशय का एक देखिए कि विद्या सागर को जब मिलने के लिए जाते हैं तो उसकी एक पूर्व भूमिका है कथामृत में है सुंदर पूर्व भूमिका लिखी है कि मास्टर ठाकुर कहते हैं कि तुम तो विद्यासागर के स्कूल में काम करते हो मुझे क्या उनको मिलने के लिए ले जाओगे मास्टर महाशय कहते ठीक है तो वो जा रहे हैं तो जाते जाते पहले मास्टर महाशय ने एक सुंदर पूर्व भूमिका लिखी है विद्यासागर के बारे में कि विद्यासागर ब्राह्मण थे वो तिलक करते थे जनऊ पहनते थे वो संध्या वंदना करते थे पत्र जब लिखते थे तो क्या ओम नमो नारायण की ऐसा कुछ पत्र के ऊपर में लिखते थे किंतु जब एक बार मास्टर महाशय ने उनको पूछा कि अपने जो शास्त्र है उसके बारे में आपका क्या मत है तो विद्यासागर ने क्या कहा कि ये ऋषि मुनि लोग जो है वो जो समझाने को गए वोह समझा नहीं पाए हैं य समझा समझा नहीं सके हैं हमको ठीक से तो अभी भीतर का रीडिंग बिटवीन द लाइन हमको यह लगेगा कि विद्यासागर का साथ में ऐसा भी कहना है कि ऋषि मुनि लोग खुद शायद नहीं समझ पाए हैं कि यह क्या समझाना चाहते हैं मुंह से तो बोलते हैं कि वो जो समझाने का प्रयत्न किए उसको ठीक से नहीं समझा पाए रीडिंग बिटवीन द लाइन ऐसा लगता है कि शायद ऋषि मुनि लोग स्वयं नहीं समझा पाए होंगे तो देखिए कि मास्टर महाशय का यह सब सेंस था एक सेंस ऑफ हिस्ट्री था सेंस ऑफ क्यूरियोसिटी था सेंस एक शास्त्र के भीतर में क्या लिखा है सब कुछ पता था ऐसा नहीं कि नहीं पता किंतु फिर भी संसारी कष्ट से तापित होकर के संसारी कष्ट से परेशान होकर के सुसाइड करने को जा रहे थे तो सुसाइड करना उनको रोका किसने ठाकुर के व्यक्तित्व ने रोका नहीं कि ठाकुर के उपदेश ने उपदेश तो माश महाश ने सुने फिर जीवन भर सुने जीवन भर उसका चिंतन मनन किया स्मरण मनन किया फिर उसको लिखा भी लिपि बद्ध भी किया विरजानंद जी की एक सुंदर रेमसंस है वो काली कृष्ण महाराज वो खगेन महाराज जो कि बाद में क्या उनका सन्यास नाम हुआ मैं भूल गया तो ये चार पांच लड़के जो कि बाद में रामकृष्ण संघ जॉइन करके बड़े बड़े से बड़े उनका नाम जो कि सबसे बड़े अपने सीनियर साधुओं में उनका नाम आता है बाद में तो और वरा नगर मठ में पहली बैच आफ्टर आफ्टर डायरेक्ट डिसाइल पहली बैच वो जो सबसे नए आने वाले लड़कों में डायरेक्ट डिसाइल के बाद में काली कृष्ण महाराज वर्णन करते हैं कि हमारे स्कूल के एक मास्टर महाशय थे तो उनको देख कर के हमको बड़ा ही उनके ऊपर में श्रद्धा आ गई थी कि देखिए कि बाकी सब टीचर जो होते हैं क्लास खत्म हो जाता है तो फिर अपने वो जो जहां पर टीचर लोग इकट्ठा होते हैं वहां पर जाकर के हंसी मजाक करते हैं गप लगाते हैं या तो फिर एक सामान्य व्यक्ति जैसा उनका वर्णन हो उनका बिहेवियर होता है है टीचर तो स्टूडेंट क्या है कि देखि कि यंग लड़के लोग है उनका एक एक असेसमेंट कैपेसिटी होता है वो हमको कभी पता नहीं चलता कि वो हमको इतना बारीकी से इतना क्लोज ऑब्जर्व कर रहे हैं किंतु वे लोग करते हैं और उसमें से अपने कंक्लूजन निकालते हैं तो मास्टर यह पार्टिकुलर मास्टर महाशय वह किसी के साथ में गप नहीं लगाएंगे जब रिसेस वगैरह होता है चुपचाप वो स्कूल की छत प चले जाएंगे और वहीं पर रहेंगे जब क्लास फिर से स्टार्ट होगा तो वापस आएंगे तो एक बार काली कृष्ण महाराज बाद में स्वामी विरजानंद जी महाराज अपने प्रेसिडेंट महाराज तो काली कृष्ण महाराज ने कहा कि मैं एक बार पीछे पीछे गया उनके देखा तो वो एक छोटी सी किताब खोल कर के उसमें से कुछ पाठ कर रहे थे वो पाठ करते करते चेहरे पर उनका चेहरा इतना प्रसन्न हो गया था तो मैंने सोचा कि क्या है इसके भीतर में तो उन्होंने बड़े ही डरते डरते जाकर के पूछा उनके साथ में बात किया तो माश महाशय तो बड़े खुश हो गए और कहा कि हां मैं तो ये तो रामकृष्ण परमहंस के बारे में मैं मैं वहां पर जाता था और मैं उनका डिसाइल हूं और उनके बारे में ठाकुर के बारे में बात करने की उन्होंने शुरुआत कर दी अभी मीनवाइल क्या हुआ था कि आपको पता होगा तो वरा नगर मठ की रचना ठाकुर के देह त्याग के बाद में दो एक ब्रांच हो गई थी दो उन्हें डिवीजन हो गया था डिवोर्स में डिवीजन अभी यह सब सुपरफिशियल है माने ये हमको वो जटिला कुटिला थकले लीला पुष्टा वो जटिला और कुटिला होने से लीला पोटाई होता है यानी कि वो इट थिकनस द प्लॉट इंग्लिश में कहेंगे वो इंटरेस्टिंग होती है स्टोरी तो व सब सरफेस प होता है वो अवतार की लीला में तो सरफेस सरफेस प ऐसा हुआ कि रामचंद्र दत्त महाशय और यह कुछ कुछ लोगों ने कहा कि ये नरेंद्र जो लड़कों को घर छोड़ कर के वहां पर एक मठ कर रहा है तो यह सब क्या सब पागलपन क्या नौटंकी उसने आरंभ किया है व एक एक मने एक किसी मूर्ति को बिठाए और मूर्ति की पूजा चालू करेगा यह सब नाटक करेगा क्या ये सब है ये तो परमहंस महाशय को हमने स्पर्श किया है उनकी सेवा की है हम तो धन्य हो गए हमको मुक्ति मिल गई है य तपस्या करने का यह सब संन्यास ग्रहण करने का कहां परमहंस महाशय ने किया है उनको पता नहीं है ठाकुर ये सब त्यागी शिष्यों को अलग से बुला कर के जब कोई गृहस्थ नहीं होता था तब उनको अलग से उपदेश देते थे उनको पता नहीं था तो उन्होंने वो काकड़ गाछी में ठाकुर के अस्थि वो स्थापित करके वहां पर एक नया एक अलग से चालू किया था तो उसकी भी बड़ी फेमस कहानी है कि शशि महाराज और निरंजन महाराज बड़े ही नाराज हो गए कि अरे ठाकुर के पूरे पूरे अस्थि ये लोग ले जाएंगे तो कैसे चलेगा तो उन्होंने नरेंद्र को कंप्लेन किया तो नरेंद्र ने बोला अरे देखो हम लोग तो भिखारी की तरह है हम तो हमारा कुछ रहने का ठिकाना नहीं खाने का ठिकाना नहीं ठाकुर के अस्थ लेकर के हम नित्य सेवा करने का जवाबदारी हम लोग कैसे लेंगे यदि वो सेवा करते हैं उनको करने दो नरेण का इस तरह से रिकन सालि भाव था नरेण यानी स्वामी विवेकानंद किंतु ये दो तो पूरे भैरव जैसे थे तो जिस रात को ठाकुर के अस्थि लेकर के काशीपुर में जिस उसी कमरे में रखे थे तो एक छोटा नया एक डिटेल मुझे रिसेंटली जानने को मिला है वहां की स्काईलाइट में से दोनों ने भीतर में प्रवेश किया दरवाजे को ताला लगा दिया था और मास्टर रामचंद्र दत्त महाशय वगैरह ताला लगा कर चले गए थे अस्थ भीतर में है सेफ है तो ये दोनों ने शशि महाराज निरंजन महाराज ने व वहां पे स्काईलाइट है अभी मैंने तो देखा नहीं अभी मैंने रिसेंटली इसको पढ़ा पढ़ते हैं हम सब कुछ किंतु कभी-कभी कोई नया इंफॉर्मेशन हमको स्ट्राइक होता है तो मैं जब काशीपुर में लास्ट टाइम गया था तब मुझे यह बात पता नहीं थी वरना मैं चेक करता कि वहां पर सही में स्काईलाइट है कि नहीं ठाकुर के कमरे में तो जो भी स्काईलाइट यानी कि छत पे एक थोड़ा सा एक ओपन रहता है वो काच वगैरह लगाया होता है जिससे कि थोड़ा सा धूप वगैरह आए तो जो भी है मैंने रेमसंस में पढ़ा कि स्काईलाइट के माध्यम से दोनों ने उस कमरे में प्रवेश किया और ज्यादातर अस्थ उठा लिए चोरी कर लिए और फिर बलराम बाबू के घर में रख दिए फिर जब रामनगर मठ की स्थापना हुई तो वहां पर उसकी ये सेवा पूजा चलने लगी किंतु देखिए नरेंद्र जो कहता था स्वामी जी जो कहते थे उसमें कुछ गलत नहीं है कि इन लोगों का तो कुछ ठिकाना नहीं है हम लोगों का यदि हम लोग कहां ये पूजा वगैरह करने को जाएंगे कैसे संभालेंगे तो सही में बलराम बाबू के घर में से ठाकुर के जो व्यव हृत वस्त्र वगैरह थे उसकी चोरी हो गई थी अभी मुझे पता नहीं कि अस्थि उस समय वहां के थे कि नहीं चोर लोगों ने उसके ऊपर नजर किया कि नहीं इतना डिटेल डिस्क्रिप्शन मैंने कहीं नहीं पढ़ा किंतु यह पक्का पता है कि चोरी हुई थी ठाकुर के व्यव हृत वस्त्र चले गए थे तो यदि अस्थि भी चले जाते तो कितना बड़ा डिजास्टर हो जाता तो जो भी है आजकल तो रामकृष्ण संघ के मेजर जितने भी बड़े-बड़े सेंटर है ठाकुर की अस्थि या तो फिर मां का अस्थि या ऐसा कुछ रहता है तो क्या है कि कितनी पवित्रता है इसकी वो तो नरन को किंतु यह बात पता था इसलिए वो बड़ा स्वामी जी बड़ा दूर का सोचते जो भी है तो यह वरा नगर मठ की स्थापना हुई तो यह इस तरह से था कि यहां पर रामचंद्र दत्त का काकड़ गाछी है और गृहस्थ लोगों का मिलने की जगह और यहां पर वरा नगर मठ में ये त्यागी लड़के बैठ कर के क्या सब वो तांडव नृत्य करते रहते हैं हंसी मजाक करते रहते हैं क्या सब करते हैं पागलपन ये ग्रोस लोग आपस में सोचते थे तो अभी उस समय अपने रामचंद्र दत्त नगर संकीर्तन करते थे अपने गौरांग महाप्रभु की स्टाइल में नगर कीर्तन करेंगे और वहां पर दीवाल पर बड़े-बड़े अक्षर में लिख देते थे कि काकड़ काछी मठ है वहां पर ठाकुर की पूजा होती है ये वो तो अपने काली कृष्ण महाराज ने इस तरह से दीवाल पर लिखा हुआ देखा था और वो कांकड़ काछी मठ गए और वो जाकर के रामचंद्र दत्त को मिले रामचंद्र दत्त को मिलकर के बड़े ही प्रसन्न हो गए थे फिर रामचंद्र दत्त ने और लगता ऐसा था रामचंद्र बाबू राम बाबू इस तरह से बात करते थे कि जैसे कि वही ठाकुर के प्रधान डिसाइल हो वही है और ठाकुर है और बाकी लोग है सब साइडलाइन प तो ये लोग मैंने ठाकुर के साथ यह बात किया मैंने ठाकुर का यह उत्सव किया ठाकुर ने मेरे साथ में ऐसा किया वो अपना बड़ा चढ़ा अभी ऐसा नहीं था कि उनका महत्व नहीं था कथामृत पढ़ेंगे तो राम बाबू के बारे में बहुत अच्छा सुंदर वर्णन है राम बाबू जो भी उत्सव होता है तो राम बाबू है यह गिरीश कोष है फिर वो मनो मोहन महाशय है यही लोग सब आगे रह कर के प्रधान भूमिका उनकी रहती थी उत्सव वगैरह संपादन करना किंतु उत्सव संपादन करना और जीव जीवन को परिवर्तित करना यह दो पूरी अलग चीजें है वो जीवन संपूर्ण रूप से परिवर्तन करना यह तो त्यागी शिष्यों ने किया तो जो भी है तो राम बाबू इस तरह से कहते थे कि मैं और परमहंस महाशय मैं और परमहंस महाशय तो ये लोग तो काली कृष्ण तो और बड़े ही वो प्रभावित हो गए थे किंतु जब मास्टर महाशय को मिले और मास्टर महाशय से प्रभावित हो गए तब मास्टर महाशय ने कहा कि तुम जद यदि ठाकुर के बारे में सही सही सुनना चाहते हो जानना चाहते हो तो तुम राम बाबू को छोड़ो तुम वरा नगर मठ में जाओ वहां प ये त्यागी लड़के रहते हैं वही उन्हीं लोगों ने हम लोग तो तुम हमारे से जितना भी इंप्रेस हो हम लोग गृहस्थ है किंतु त्यागी लड़के जो है उन्होंने ठाकुर का भाव सही सही ग्रहण किया है तो मास्टर महाशय ने ऐसा किया तो काली कृष्ण महाराज गए वो और एक दो उनके मित्र वरा नगर मठ में देखा बाहर से देखा तो थोड़ा सा ये श के मैंने थोड़ा सा ही ये विचलित हो गए वो पूरा वो खंडहर जैसा मकान है ग्राउंड फ्लोर प पूरा वो वो क्या सब वो धूल मिट्टी है वो वीड्स वगैरह उगे हुए हैं वो पूरा मतलब जैसे वो एडन हाउस जो होता है खंडहर उसके जैसा था तो फर्स्ट फ्लोर पगे बहुत बड़ा कमरा था एक होल और यह सब दोपहर का समय था भोजन के बाद का ये कुछ कुछ त्यागी संतान सब विश्राम कर रहे थे शशि महाराज थे शायद शशि महाराज का नाम उल्लेख मुझे याद है और तीन चार लोगों का नाम किया है मैं भूल गया तो जो भी है शशि महाराज को साथ जाकर के बात किया तो उन्होंने इतना प्रेम से उनको आवकारो बिठाया बात की अच्छा कहां से आते हो क्या नाम है क्या करते हो स्कूल में पढ़ते हो तो शशि महाराज तो फिर छोड़ने वाले नहीं है तो अच्छा तुम स्कूल में पढ़ते हो अच्छा मैं पूछता हूं तुम मैथमेटिक्स में ये प्रश्न का उत्तर दो उस प्रश्न का उत्तर तो ऐसा तो नहीं ना कि स्कूल में से भाग करके यहां पे आया हो क्योंकि ऐसे लोगों को हम यहां पे नहीं रखते जैसे मास्टर महाशय के साथ में सर्वप्रथम हुआ था मास्टर महाश आए तो ठाकुर उन्होंने मुंह से कुछ बोला नहीं ठाकुर समझ गए कि इसके मन में कुछ अभी दुविधा है तो शायद घर छोड़ने के बारे में सोच रहा है तो ठाकुर ने क्या कहा कि वो प्रताप का भाई आया था यहां पर दिन भर यहां पर पड़ा रहता है तो मैंने उसको डांटा कि अरे तुम्हारे बीवी बच्चे हैं घर है तो उनकी संभाल कौन करेगा क्या तुम्हारे प्रतिवेदन कि तुम्हारे ये साथ में घर के पास मेरे नेबर्स लोग करेंगे क्या तुम्हारे पड़ोसी लोग उसकी संभाल करेंगे जाओ घर जाओ और उनकी संभाल लो तो मैंने कोई जिसने संसार किया है वो कालीबाड़ी में रहेगा वो सब घरबार छोड़ कर के ठाकुर पसंद नहीं करते थे तो मास्टर महाशय के मन का भाव देख कर के उन्होंने शायद यह कहा होगा पता नहीं तो यहां पर सिमिलरली शशी महाराज ने सबसे पहले पूछा य स्कूल में क्या-क्या पढ़ रहे हो यह बताओ और जब भी बाद में भी जब भी ये काली कृष्ण महाराज आते थे तो मैथ्स के बारे में पूछते थे वो बड़े डर जाते थे कि अरे यार मेरा तो कोई पढ़ाई लिखाई में इतना ध्यान नहीं और मैं छूटने के लिए यहां पया तो ये लोग उसी की बात करते हैं तो जो भी है तो इतने प्रभावित हो गए त्यागी शिष्यों को मिलकर के कि उन्होंने धीरे-धीरे काकड़ काछी जाना बंद कर दिया काली कृष्ण महाराज स्वयं लिखते हैं विरजानंद जी महाराज स्वयं लिखते हैं अपनी रेमनी सेंस में कि हम लोग दो-तीन महीने में एक बार राम बाबू के वहां पे काकड़ काछी जाते थे इसलिए कि उनको बुरा ना लग जाए कि हम लोगों के साथ में इनका इतना अच्छा रिलेशन था और अभी बिल्कुल ही आना बंद कर दिया तो उनको बुरा ना लग जाए इसलिए हम लोग एक दो बार वहां पर कभी-कभी दो-तीन महीने में जाते थे तो देखिए राम बाबू तो गवर्नमेंट वो कोई केमिकल एग्जामिनर की ऑफिस में वो काम करते थे धनी थे इतना उनका बुद्धि था समाज में प्रतिष्ठा थी और कहां ये छोकरे वो घरबार छोड़ कर के पड़े हैं खंडहर में वो कोई खुद का ठिकाना नहीं है किंतु इन लोगों से इतने प्रभावित हो गए कालीकृष्ण महाराज ने आखिर में वहीं पर रहने का ठीक कर लिया और किस तरह से रहने का ठीक किया स्कूल में छुट्टी है तो शशि महाराज बोलते हैं तुम मैथमेटिक्स की किताब लेकर आ जाना मैं तुमको सिखाऊंगा तो काली कृष्ण महाराज कहते हैं ठीक है वो किताब लेकर के गए किंतु हुआ ऐसा कि एक दिन भी किताब खोली नहीं वो जाकर के ही शशि महाराज ने सीधा ठाकुर की सेवा में लगा दिया और शशि महाराज के साथ में रहना यानी कि ऐसी गाला गाली देते थे ऐसा डांटते थे बीच-बीच में काली कृष्ण महाराज लिखते हैं कि ऐसा एक भी दिन नहीं गया होगा कि मैं कभी रोया नहीं होगा उस दिन किसी ना किसी बात को लेकर के वो मतलब मुझे डांट पड़ी है किंतु फिर भी वह वरा नगर मठ में रहे वहां पर काकड़ गाछी नहीं गए तो मनुष्य के चित्त को आकर्षण करने की शक्ति यह अवतार में होती है तभी चित्त आकर्षण नहीं होगा तो आपका उपदेश कोई नहीं सुनेगा उपदेश तो व आप कोई भी किताब खोल कर के देख लीजिए हजार हजार उपदेश आपको मिल जाएंगे हो सकता है ठाकुर से अच्छा बोलने वाले लोगों की आजकल यह मोटिवेशनल स्पीकर क्या-क्या सब है वह बोलते रहते हैं वो बोलने वालों की कमी नहीं है किंतु चित्त आकर्षण करना तभी लोगों की श्रद्धा अर्जन करना तभी आप जो कहते हैं उसको लोग अपने सर पर रख देंगे तभी लोगों का लाइफ पर जीवन परिवर्तित होगा लाइफ ट्रांसफॉर्म होगा तो यहां पर गंभीरानंद जी महाराज लिखते हैं अवतार की कार्यावटम रहता है वह हम कल देखते हैं इसमें अवतरण का में इतना पावर है कि एक-एक सेंटेंस को लेकर के हम एक-एक क्लास कर सकते हैं मैंने इतना पहले पहले मैं पहली बार पढ़ा दूसरी बार पढ़ा टीसी से आने टीसी में आने से पहले टीसी में तब वो फटाफट फटाफट करके पढ़ लेते थे किंतु फिर जैसे ज्यादा ज्यादा हम लोग पढ़ते हैं और अपनी अंडरस्टैंडिंग एक्सपें होती है फिर अभी मैं कंप्लीट वर्क का फिर से स्टडी कर रहा हूं मुझे लगता है मैंने ठाकुर की कृपा से कंप्लीट वर्क्स को एडिट करने का दो बार मुका मिला है एक तो गुजराती में दूसरा इंग्लिश में ओरिजिनल इंग्लिश में बेलूर मठ में बैठ कर के गंगा के किनारे तो मैं जब यहां पर राजकोट में मेरा 2018 में पोस्टिंग हुआ तब मैं सोचता था मैं हूं एक कंप्लीट वर्स का एक्सपर्ट किंतु फिर कुछ पडेम जब स्टार्ट हुआ तो मैंने वो कोटेशन शेयर करना शुरू किया वो कुछ तो करना है सब कुछ बंद हो गया था उस समय यहां पर आश्रम बंद था हमारे स्टाफ आना बंद हो गए थे लॉकडाउन था कंप्लीट लॉकडाउन था और कुछ-कुछ साधुओं को भी कोरोना हो गया था तो वो भी क्वारंटाइन में थे मैं अकेला इतने बड़े पब्लिकेशन में बैठा रहता मैंने सोचा चलो कोटेशन शेयर करना शुरू करते हैं तो उस समय मैंने सीरियसली एक एक कोटेशन को निकाल करके शेयर करने के लिए थोड़ा समझना पड़ता है तब मुझे ऐसा लगा कि अरे बाप रे एक एक कोटेशन में कितना पावर है और आज मेरी जो हालत है मैंने वो कंप्लीट वर्क्स 5000 पेज का कंप्लीट वर्क्स है उसमें से मुश्किल से मैंने वो 10 50 60 पेज हो पाए इतने कोटेशन कलेक्ट किए किंतु मुझे लगता है कि जदी मैं ठीक-ठीक कोटेशन का मतलब स्वामी जी के शब्दों का स्टडी करूं तो मुझे कितने जन्म लेने पड़ेंगे स्वामी जी के कंप्लीट वर्ष को समझने के लिए स्वामी जी कहते हैं 1500 साल तक मेरा मिशन चलेगा यदि सही सही स्वामी जी के कंप्लीट वर्ष को वर्ड बाय वर्ड स्टडी करें तो हमको भी 1500 साल लगेंगे इसलिए मैं ठाकुर को कहता हूं मुक्ति फुक्तिया बार-बार आऊ बार-बार रामकृष्ण संघ के साथ में एसोसिएटेड हो साधु बनने का सौभाग्य मिलता है नहीं मिलता है पता नहीं किंतु एटलीस्ट आई शुड हैव द गुड फॉर्च्यून ऑफ रीडिंग कंप्लीट वर्क फॉर नेक्स्ट 15 यर्स 1500 इयर्स देन उसके बाद में जो करना वो करना ठीक है कल ओम शांति शा शं हरि ी राम