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ओ स्थापक य ज धर्मस्य सर्व धर्म स्वरूपने अवतार वरिष्ठ राम कृष्णाय ते नम श्री मां शारदा देवी स्वामी गंभीरानंद जी महाराज द्वारा लिखित कल हमने देखा कि मां के आगमन के पहले मां का जो पूर्व भूमिका है वह गंभीरानंद जी ने हमको बताई कि किस तरह से श्यामा सुंदरी देवी वहां पर कुंभार लोगों की वह भट्ठी होती है वहां पर गई थी वहां पर बिल्व वृक्ष के ऊपर में से एक छोटी सी बालिका नीचे उतरी और उसने अपने दोनों छोटे-छोटे बाहू उनकी गलों में परो दिए और कहा कि मैं आपके घर आ रही हूं जैसे वह रामचंद्र को भी अपने पिताजी को भी कहा था तो वैसे हमने यह पूर्व भूमिका दे देखी आज हम देखते हैं कि मां का अवतरण की घटना क्रम काल पूर्ण होई आशी लो धीरे-धीरे करके गर्भ का समय अभी प्रसव का समय अभी आ रहा है एकन हेमंत अबोसान ओ शीते आरंभ हेमंत यानी कि ऑटम ऑटम ऋतु का अवसान हो रहा है और शीत यानी कि विंटर सीजन स्टार्ट हो रही है बांगला पलीर इहा सर्बा पेखा सुखेर समय वेस्ट बंगोल का के जो गांव है उसमें सबसे ज्यादा सुंदर समय कौन सा समय कि जहां पर जिस समय सबसे ज्यादा वो मौसम और रूत और फिर उसके वह जो प्राकृतिक सौंदर्य सब तरह से एक बहुत ही सुखमय समय ठंडी का समय तो हमको पता है कि वैसे ही स्वास्थ्य के लिए अच्छा होता है एक चीज और दूसरा है कि जो प्राकृतिक सौंदर्य जो धारण करती है पृथ्वी उस समय उसका भी उसी तरह से एक सौंदर्य है माने बांगला का स खास करके व ग्राम्य विस्तार का सबसे सुंदर समय बाहर कार्ज बेश कार्ज शेषे ग्रामर कृषक कुल कृषि लब्ध शस्य गृहे आन्या खेत्रो लोखी के भांडार स्थापन पूर्वक आनंदे बा सिते छ बाहर का कार्य ग्राम का कार्य शेष करके समाप्त करके किसान अपना अपनी जो खेती की जो उपज है उसको अपने भंडार गृह में उसको जगा देकर के फिर आनंद से विचरण कर रहे हैं आनंदे भाषित आनंद से विचरण कर रहे हैं जयराम बाटर प्रांतर रोबी शशर श्यामल श्री छोड़या पड़ते छ जयराम बाटी के ग्राम में रवि शशर शामल श्री कितना सुंदर एक कवित्वम म यह विवरण है श्यामल श्री अर्थात की वो ग्रीनरी जद उसको बड़ा ही सिंपल ट्रांसलेशन करना है रवि शस्य खरीफ पाक जो होता है उसका सौंदर्य छोड़या पड़ते छे चारों ओर फेल रहा है गृहे गृहे नवा नेर उत्सव होया गया छ घर घर में नव अन्ना का उत्सव हो रहा है नव अन्न यह बांगला का एक स्पेसिफिक एक उत्सव है बहुत ही सुंदर हम लोग बेलूर मठ में थे तो वो नव अन्न का वो जो पायस वह बना कर के ठाकुर को ऑफर करते थे और हम लोग खाते थे तो वो नव अन्न का उत्सव ये गुजरात में यह ट्रेडिशनल अलग सभी जैसे सभी विस्तार की सभी राज्य की अपनी-अपनी ट्रेडिशनल इंडिया का पोंगल है तो वैसे ही यहां पर नव अन्न का उत्सव जो नया अन्न हो जो उपजा है उसका ठाकुर को भोग धराए वो पायस बनाएंगे खीर बनाएंगे और फिर वो सब बच्चे बूढ़े बच्चे आबा वृद्ध वनिता जैसे वो स्टोरी लिखते हैं ना तो स्टोरी में इस तरह से लिखते हैं आबा वृद्ध वनीता अर्थात की सभी का उसमें उल्लेख आ जाए तो वो सभी लोग उसको आनंद से उसका आहार करते हैं घर घर में नव अन्न का उत्सव चल रहा है एकन तांत्रिक कुले प्रख्यात पौष काली दोषों ने साधक वर्गों उत्सुक तांत्रिक वर्ग में प्रख्यात पौष काली है उसके दर्शन के लिए साधक वर्ग उत्सुक है अभी यह पौष काली क्या है मुझे पता नहीं और इसका मैंने गुजराती ट्रांसलेशन देखा तो यह सेंटेंस ही उसमें उड़ा दिया है वो तांत्रिक शब्द से शायद ये लोग डर गए होंगे अभी क्या है कि आजकल समय समय के अनुसार कुछ-कुछ शब्दों का कोनोटेशन जिसको बोलते हैं ना कोनोटेशंस अर्थात कि उसका क्या तात्पर्य करेंगे तो तांत्रिक शब्द का थोड़ा सा अभी एक डिफरेंट टाइप का एक होता है इंटरप्रिटेशन इसलिए शायद उन्होंने गुजराती में छोड़ दिया होगा तो जो भी है हमको तो पता है कि ठाकुर ने तांत्रिक साधना की थी अभी आजकल हम लोग कहते हैं कि तंत्र शब्द नहीं यूज करके शक्ति साधना कहना है वह बेटर वर्ड है तो जो भी है वो लीला प्रसंग में तो तंत्र शब्द यूज किया है और यदि पता होगा तो शरत महाराज ने पूर्णा अभिषेक किया था पूर्ण अभिषेक अर्थात की तंत्र साधना की दीक्षा उन्होंने पूर्णा अभिषेक करके तंत्र साधना की दीक्षा करने का प्रयत्न किया था पौष काली दर्श ने साधक वर्ग उत्सुक पौष काली के दर्शन के लिए साधक वर्ग उत्सुक है एवं एकन होते पौष पावणे कल्पना खुद्रो बालक बालिका मोने लालसा जगाते छ पौष पावणो छोटे बच्चे बच्चियों के मन में लालसा का उदय कर रही है पौष पर्व क्या है यह भी मुझे नहीं पता तो जो भी है आबार ख्रिस्त समाज जिसूर आशु जन्मो सवे आयोजन व्यापत क्रिस्टा समाज क्रिश्चियन सोसाइटी या जो लोग क्रिश्चियन है वह जीसस के आविर्भाव अर्थात क्रिसमस की उजव्या हो रहे हैं अभी मुझे यह पता है कि क्रिस्मस क्या है और यह है अपनी एजुकेशन इंडियन एजुकेशन की डिफेक्ट हम लोगों को अपने ट्रे ल उत्सव अपने खुद के स्टेट या तो अपने खुद के विस्तार के पता होते हैं और वहां कहीं दूर अमेरिका में क्या हो रहा है वह ज्यादा पता होता है हम ही लोग आपस आपस में क्या करते हैं उसका हमको इतना ज्यादा नहीं पता होता क्योंकि हमको वह एजुकेशन सिस्टम में भारत के विभिन्न प्रांत विभिन्न तरह की ट्रेडीशन विभिन्न तरह की यह भाषाएं वह सब सिखाने की बजाय मातृभाषा एक सिखाते हैं और फिर साथ में अंग्रेजी सिखाते हैं यह किस तरह का वैचिंग वैसे मैं बेलूर मठ में बहुत लंबा टाइम रहा हूं और वैसे बंगोली ट्रेडिशनल में थोड़ा बहुत परिचय है रामकृष्ण विवेकानंद साहित्य बहुत अच्छे से पढ़ा है बंगोली में किंतु मैं बंगोली ट्रेडीशन सभी ट्रेडीशन से इतना अवगत नहीं हूं क्योंकि बेलूर मठ में रहना यानी कि आपको ऑलरेडी रामकृष्ण विवेकानंद संघ में जो उत्सव जो ट्रेडिशनल रही है उसी के साथ हम फैमिलियर होते हैं तो यहां पर लिखा पौष पार्वणविदुव उत्सव आयोजन व्यापत क्रिश्चन लो क्रिश्चन लोग जो है जीसस के जन्मोत्सव के सेलिब्रेशन के लिए तैयारी कर रहे हैं आरद के दक्षिणायन शेषे उत्तरायण देवगण जागर ईते छे दक्षिणायन के अंत में उत्तरायण की जो वो सूरज की वो जो उसको समर सोल स्टाई बोलते हैं विंटर सोल स्टाई होता है एक समर सोल स्टा होता है यानी कि वो जो सूर्य की गति वो मुझे एगजैक्टली वो क्या एस्ट्रोनॉमिकली है वो भी मैं भूल गया उसको पढ़ा था मैंने महाभारत में है वो एक बड़ा ही वो कि भीष्म पितामह उनको वो शर सैया पर पड़े हुए हैं और अभी शरीर बहुत कष्ट हो रहा है किंतु फिर भी शरीर त्याग नहीं कर रहे कह रहे हैं कि जब उत्तरायण उत्तरा भिम मुख सूर्य की गति होगी तब मैं शरीर त्याग करूंगा तो जब तक दक्षिणायन रहा उन्होंने शरीर धारण करके रखा और कृष्ण ने अर्जुन को कहा कि जाकर के धर्मराज युधिष्ठिर युधिष्ठिर को कहा कि किस तरह से राज्य शासन करना है उसका उपदेश आप भीष्म पितामह के पास से लेकर आइए तो इतना कष्ट होने के बावजूद भी उन्होंने उत्तरायण तक राह देखी तो इसी से पता चलता है कि इसका हमारे शास्त्र में कितना इंपॉर्टेंस है और यहां पर पांडवों को यह फायदा हो गया कि भीष्म पितामह जैसे नीति और राज्य शासन के और कोई एक्सपर्ट मिलना उस समय मुश्किल था तो उन्हीं के पास से राज्य शासन के बारे में उन्होंने कुछ ना कुछ शिक्षा प्राप्त की एमन समय दिबा बसाने रात्रि देवीर उज्जवल तारका खोची तो कृष्णं चले जयराम बाटर श्रम क्लां तो देहो आवतो होले रामचंद्र खद्र गृहो आनंद मुखरी तो कोरिया बाप रे बहुत ही लंबा सेंटेंस है और इस और यह सब कुछ चल रहा है सोसाइटी में और यहां पर दीबा अशान दिन का अंत हो गया है दिन का अवसान हो गया है रात्रि देवीर उज्जवल तार का खोच कृष्णांकोविल उसको आनंद से मुखरित करके 1260 बंगा देर आठ पौष यह बंगोली डेट है 1260 बंगा आठ पौष अर्थात की 18530 वार को कृष्णा सपत कणा सप्तमी तिथि को रात के दो दंड नौ पल अभी यह भी मुझे नहीं पता है कि दो दंड नौ पल अर्थात की कौन सा समय होगा मुझे देखना पड़ेगा एक बार अति शुभ क्षण है अति शुभ क्षण में श्री जुक्ता शारदा मणि देवी भूमि होलेन शारदा मणि देवी का पृथ्वी पर अवतरण हुआ अभी यहां पर एक बड़ा सा एक यह है फुट नोट है महाराज जी लिखते हैं फुट नोट में नाम करण संबंध स्वामी गौरी स्वरानंद एक दिन श्री मां के जयराम बाटी ते जिज्ञासा कोरिया छले नामकरण के बारे में स्वामी गौरेश्वर नंद ने जयराम बाटी में एक बार मां को पूछा था यह शारदा देवी नाम कहां से आया उसके बारे में महाराज जी बोलते हैं मां अपनार नाम टी की अपनार मां पसंद करे रेखे लेन उन्होंने कहा कि मां आपका नाम है शारदा क्या आपकी मां श्यामा सुंदरी देवी ने पसंद किया था श्री मा द उतरे बोल लेन माने उसके उत्तर में कहा था ना बाबा नहीं बेटा अर मां अमार नाम रेखे लेन खेमन कररी मेरी मां ने मेरा नाम रखा था खेमन कररी क्षेम करी अर्थात की जो क्षेम जो लाती है वह है क्षेम कररी क्षेम अर्थात की शुभ शुभ लाभ आमी होबार आगे आमार मासी मा खाने से दिनसे तार एकटी मे हो मेरे मन से पूर्व मेरी वो जो मासी मां जो यहां पर उस दिन आई थी उनकी एक लड़की हुई थी मासी मा तार नाम रखे छले शारदा मासी मा ने उस लड़की का नाम रखा था शारदा श में माराजा बार पोरी आमी होई उस लड़की के देहांत के बाद में ही मेरा जन्म हुआ मासी मा अर मां के बोलेन मासी मां ने मेरी मां को कहा था दीदी तोर मेर नाम की बदले शारदा राखो ता होले आमी मने करब हमार शारदा तोर काछ एछ मासी माने अपनी बड़ी बहन यानी कि मां की मां को कहा था दीदी तुम अपनी लड़की का नाम बदल करके शारदा रखो जिससे कि मुझे ऐसा लगेगा कि मेरी जो मृत लड़की है वह फिर से पृथ्वी पर आई है इस शारदा के रूप में इस न इस लड़की के रूप में एवम आमी ओके देख के भूले थाक बो और मैं उसको देख कर के मेरा कष्ट मेरा दुख मेरा शौक उसको मैं विस्मृत कर जाऊंगी उसको मैं भूल जाऊंगी ताई ते अर मां अर नाम शारदा रख लेन उसी के बाद मेरी मां ने मेरा नाम रखा शारदा देखिए कितनी सुंदर छोटी सी कहानी है कितनी सुंदर कहानी है कि देखिए कि ऐसा होता है ना कि गांव में तो कभी भी मेडिकल फैसिलिटी का अभाव होता है तो बच्चों का जन्म होना उस समय वो एक प्रॉपर एक मिडवाइफ जिनको कहते हैं उनका उपस्थित रहना सब समय शायद वो पॉसिबल नहीं होता मैं झारखंड में था वहां पर रांची में ट्राइबल डिस्ट्रिक्ट में हमारा काम चलता था तो वहां पर हमने देखा कि बहुत सारी स्त्रियों का प्रसव के समय मृत्यु होता है क्योंकि वहां पर प्रॉपर्ली ट्रेन एक मिडवाइफ है प्रसव के समय सहाय करने के लिए उनका उपस्थिति नहीं होती है तो उसी की वजह से बच्चा या तो फिर बच्चे के प्रसव में कुछ डिफेक्ट रह जाती है या तो फिर मां को कोई बड़ी क्षति होती है और इसी से वह जो बच्चों का देहांत छोटी उम्र में होना या तो मां का मृत्यु होना यह सब बड़ी ही सहज कथाएं हैं गांव में जाकर के देखेंगे तो तो इसीलिए मां की छोटी श्यामा सुंदरी देवी की छोटी बहन अभी मैं अनुमान करके कह रहा हूं कि छोटी बहन होगी क्योंकि यहां पर मासी मां करके उन्होंने पुकारा है तो उनकी की छोटी बहन जदी मने अपने पिताजी की लड़की यानी कि जिसको बोलते हैं सगी बहन गुजराती में कहते हैं या तो फिर पिराई यानी कि काका या मामा की लड़की वो पता नहीं किंतु यहां पर लिखा है मासी मा तो उनकी छोटी बहन उनकी लड़की का नाम था शारदा छोटी उम्र में उसका देहांत हो गया उसका मृत्यु हो गया तो जब मां का जन्म हुआ तो श्यामा सुंदरी देवी ने क्षेम कररी नाम रखा बड़ा ही सुंदर नाम है किंतु जद देखिए कि यह कैसा विधि का वैचिंग दंबा का नाम तो जो भी नाम होगा वह अच्छा ही होगा वो शुभ ही होगा व किंतु मुझे पर्सनली ऐसा लगता है कि शारदा नाम जो है वोह हमको क्योंकि हमको तो स्मरण मनन करना है जप भी करना है प्रार्थना भी करनी है तो क्मक नाम थोड़ा सा डिफिकल्ट लग जाता है बोलने में और स्मरण मनन करने में जबकि शारदा इतना सहज सरल नाम है और सरस्वती जो कि उनका स्वभाव था ठाकुर ने जिस तरह से कहा था शारदा सरस्वती ज्ञान देने के लिए आई है यदि ठाकुर ऐसा कहते क्षेम कररी सरस्वती ज्ञान देने के लिए तो कैसा लगता हमको तो इसीलिए मां का जद नाम देखेंगे तो इस तरह से जो भी विधि का वैचिंग है मा का जो नाम शारदा हुआ वह हम लोगों के लिए भक्तों के लिए अच्छा ही हुआ चीरे मंगल शंख ध्वनी ते आकृष्ट ग्रामवासी से शुभ संवाद विदत होया नवजात शिशूर अशेष मंगल कामना कोरीते लागलो अचरे यानी कि शीघ्र ही जैसे बच्चे का जन्म होता है तो शंख ध्वनि होता है तो वहां पर रामचंद्र के घर में शंख ध्वनि होने लगा गांव वासियों को पता चला कि हां बच्चे का जन्म हुआ है और वो सभी उनको बधाई देने के लिए वहां पर वो आने लगे मंगल कामना करीत लागी लो बच्चे की मंगल कामना बच्चे की और मां की मंगल कामना करने लगे जथा काले जन्मपत्रिका संपाद तो होई ले समय के अनुसार जन्म पत्रिका जब बनाई गई जन्म कुंडली जब बनाई गई कोन्या राश श्री तो नाम राखा होलो श्रीमती ठाकुर मणि देवी कन्या का राशि के अनुसार नाम रखा गया ठाकुर मणि देवी श्रीमती ठाकुर मणि देवी देखिए यह भी एक दूसरा नाम है माका एवं लोक बिश्र तो नाम होलो शारदा मणि और लोगों के बीच में जो प्रचलित नाम हुआ वो है शारदा मणि देवी अधुना उह सुधु शारदा परिणत होया छ अभी आज के समय में भक्तों में हम शारदा मणि नहीं करके सिर्फ मां शारदा करके ही मां को पुकारते हैं और यहां पर दूसरी पाद टिका है दूसरी फुटनोट है स्वामी शारदानंद जीर अनुरोध श्री जुक्तो नारायण चंद्र ज्योतिर भूषण कतो श्री श्री मायर कोष्ठ परिशिष्ट देवा होलो शारदानंद जी महाराज ने मां की जन्म कुंडली ब थी नारायण चंद्र ज्योतिर भूषण ऐसे करके एक ज्योतिष थे उनके द्वारा वह कुंडली यहां पर परिशिष्ट में दी गई है शारदा देवी पिता माता प्रथम संतान लेन शारदा देवी थी मां और पिताजी की प्रथम संतान ताहर परर क्रम कादंबिनी नाम नी कन्या एवं प्रसन्न कुमार उमेश चंद्र काली कुमार वरदा प्रसाद अभय चरण नामक पांच पुत्र ई ब्राह्मण दंपति गृहो अलंकृत करेन इसके बाद क्रमा क्रमानुसार कादंबिनी नामक कन्या और प्रसन्न कुमार उमेश चंद्र काली कुमार वरदा प्रसाद और अभय चरण नामक पांच लड़के उस ब्राह्मण दंपति के ग्रह गृह को आलोकित करके भूमि हुए थे उन्होंने जन्म ग्रहण किया था कोकन ग्रामर श्री जुक्तो सुधा राम चक्रवर्ती सहीद कादंबिनी देवीर विवाह होया छलो कोकन ग्राम के श्री युक्त सुधा राम चक्रवर्ती के साथ कादंबिनी देवी का विवाह हुआ था तीनी ओल्पो यो से अप पुत्र अवस्था एवं उमेश जनेर उन्मे से 18 19 बर बय से ब बाहेर पूर्वे देह त्याग करे कादंबरी देवी का अल्प वयस में अपु तरक अवस्था में ही उमेश उन यवने उनमें से 18 19 वर वय से वि बाहेर पूर्वे देहो त्याग होए अपु तरक अवस्था अर्थात की पुत्र नहीं हुआ था यवन के प्रारंभ में ही उनका देहांत हुआ अच्छा उमेश अर्थात की मां का भाई यानी कि कादंबिनी देवी का अल्प वयस में बिना पुत्र के ही देहांत हुआ था और का यवन के प्रारंभ में ही 18 या 19 वर्ष की उम्र में ही विवाह के पूर्वे ही देह त्याग हुआ था दोनों का देह त्याग हो चुका था अभय और डॉक्टर अभय और डॉक्टरी शिख अवतो परे देहो रोखा करेन अभय ने डॉक्टरी की शिक्षा ली थी मेडिकल ट्रेनिंग ली थी और किंतु वो मेडिकल ट्रेनिंग लेने के बाद में ही कुछ ही समय में उसका भी देह त्याग हुआ था ताहर कन्या राधा रानीर कोथा आमा दिग के परे बहु बार आलोचना करते होई बे सेही पागली राधु उनकी इस उमेश की अभय की लड़की राधा उसके बारे में बाद में हमको बहुत सारा चर्चा उसके बारे में बहुत सारी चर्चा हमको बाद में करनी है अपर भ्राता उपार्जन खोम होया पथक पथक गृहो निर्माण करेन अन्य सब भाई थे वो उपार्जन क्म अर्थात की उनकी वो उमर हो गई कि जब वह अपना खुद का परिवार चला सकते हैं अपने खुद की इनकम अर्जन कर सकते हैं इनकम कर सकते हैं तो उन्होंने बाद में पृथक पृथक होकर के गृह निर्माण किया अलग-अलग अपना घर का निर्माण किया काली कुमार अर्थात की मेजो ददा पत्रु भटार दक्षिण दक्षिणे ग्रामर दक्षिण पश्चिम जाता जाते ज खुद्रो पथ आचे ताहर दक्षिण पार्श्व नूतन आबास स्थापन करें काली कुमार अर्थात की बीच वाले जो भाई थे या मामा पत्रु भटार दक्षिण पत्रु भटा अर्थात कि अपने पिताजी का जो घर है उसके दक्षिण में गाम के दक्षिण पश्चिम में यातायात अर्थात की आने जाने का जो छोटा सा रास्ता है उसके दक्षिण बाजू में अपना नया घर का अपने नए आवास की स्थापना की थी काली मामार बाड़ी उत्तर पश्चिम में बरोदा प्रसादे बाड़ी काली मामार वाड़ी की जो उत्तर पश्चिम है वहां पर वरदा प्रसाद मामा की बाड़ी थी या तो फिर घर था ई बाड़ी ठीक दक्षिण पश्चिम कोण रास्ता अपर पार्श्व कोलू गड़ नामक पुकुर उसी घर के ठीक दक्षिण पश्चिम के कोने में अर्थात की कॉर्नर में कोलू गड़े नाम का एक तालाब था उ हाते मामा देर बासन माजा कापड़ी दैन दिन का चलितो इस कलु गेड़े नामक तालाब में मामा का बर्तन धोना कपड़े धोना हाथ मुख धोना वगैरे दैनंदिन काज चलता था मातृमंदिर दक्षिणे एवं काली मामार बाड़ी उत्तरे प्रसन्न कुमारे बाड़ी अर्थात की बड़ो मामार बाड़ी मातृ मंदिर की दक्षिण में एवं काली मामा की घर के उत्तर में प्रसन्न कुमार अर्थात की सबसे बड़े मामा का घर था ओई बाड़ी ज घोरे श्रीमा बहु काल बास कोरिया छिले वर्तमान ताहा बेलूर मठर नामे कतो हुया मातृ मंदिर अंतर्भरती कर लिया गया है और आज का जो मातृ मंदिर नामक आश्रम जो पर सर है उसमें उसका अंतर्भरती थी पुण्य पुकुर पुण्य पुकुरे तीरे मायर नूतन बाड़ी इत्यादि एकन मातृ मंदिरे रही अंश विशेष पास में ही पुण्य पुकुर है और पुण्य पुकुर के किनारे मां का नया घर आज मां के आश्रम मातृमंदिर आश्रम है उसी का वह एक पार्ट है उसी में उसको समावेश किया गया है प्रसन्न मामार जे घोर खानी संप्रति क्रय कोरा होया छ प्रसन्न मामा का जो घर अभी नया नया खरीदा गया है उ हार ठीक उत्तरे सूरज मामार गोहेर प्रवेश द्वार उसी के ठीक उत्तर में सूर्य मामा के घर का प्रवेश द्वार है सूर्य मामा कौन है मुझे नहीं पता माता ठाकुरानी मध्यम खुलता श्री जुक्तो ईश्वर चंद्रे एकमात्र पुत्र अच्छा लखा है कि वो रामचंद्र के जो मध्यम भ्राता थे उनके एकमात्र पुत्र थे सूर्य मामा जेष्ठो खुल्लो ता त्रैलोक्य शास्त्रो पंडित छिले उनके बड़े खुलता अर्थात की काका के लड़के त्रैलोक्य शास्त्रज्ञ पंडित छ पंडित थे बीबाहेर ओल्प पोरे तीनी जने अपु तरक अस्थाई देहो त्याग करेन विवाह के कुछ दिन के बाद में ही युवान अवस्था में ही बिना किसी पुत्र को जन्म दिए उन्होंने देह त्याग किया ताहा संबंध की छुई जाना नाही उनके संबंध में कुछ भी हमको पता नहीं है कनिष्ठ खुलता नील माधव अकृत दार और शेष पर जंतो रामचंद्र परिवार भुक्त लेन कनिष्ठ काका के ल काका के लड़के कनिष्ठ लड़के कनिष्ठ काका के लड़के नील माधव अकृत दार अर्थात कि किसी भी तरह का अर्थ उपार्जन किसी भी तरह का कार्य नहीं करते थे और आखिरी तक वह रामचंद्र के परिवार के ही सदस्य के रूप में रहे थे बहुत सारा डिस्क्रिप्शन है इसमें तो इसमें जो डिस्क्रिप्शन हमने पढ़ा वो तो स्वयं वो अपना एक्सप्लेनेशन देता ही है इसके बाद में मा के जीवन की जो एक के बाद एक घटना एक के बाद एक प्रसंग प्रारंभ होंगे ठाकुर के बारे में जब बात स्टार्ट होगी तब हमको थोड़ा सा और आनंद आएगा मैं सोचता था कि कभी-कभी मैंने जब य किताब इसको पढ़ने की शुरुआत की इस किताब के ऊपर में सोचने की शुरुआत की तो मैंने सोचा कि हम लोग डिस्क्रिप्शन छोड़ देते हैं और जो फिलोसॉफिकल पॉइंट है या तो फिर जो इंपोर्टेंट इंपोर्टेंट प्रसंग है उसी को लेते हैं किंतु फिर आखिर में मैंने ने सोचा कि मेरे खुद के लिए ऐसा मैं खुद मेरा भी तो यहां पर एक पाठ हो जाता है तो ऐसा एक क्लास हो कि जहां पर पूरा शब्द सह प्रत्येक शब्दों का पाठ हो चुका है भले ही चाहे इसको समाप्त करने में हमको थोड़ा सा देरी हो किंतु एटलीस्ट मुझे एक संतोष मिलेगा कि मां की जीवनी क्योंकि मां का जीवन जो है वो सिर्फ घटना वली या तो सिर्फ दर्शन या तो फिलोसोफी या तो सिर्फ नरेशन या तो सिर्फ वर्णन यहां तक सीमित नहीं है यह शास्त्र है और जैसे भागवत है गीता है उपनिषद है हमारे पुराण है इसका जो महात्म्य है वही महात्म्य इसी किताब का है तो भले ही चाहे समय लगे भले ही चाहे बीच-बीच में थोड़ा सा बोरिंग हो जाए और भले ही चाहे खास करके बंगोल के गांव के जो रीति रिवाज इसके बारे में मैं बहुत ज्यादा उसके साथ में परिचित नहीं हूं किंतु फिर भी मेरे मन की खुशी के लिए हम सभी शब्द एक बार इस क्लास में पढ़ लेंगे फिर मैंने जितना ही समय लगे इसको भले ही चाहे लगे तो इसके लिए हम लोग शब्द सह ही इसका पाठ करते जाएंगे हमारे यदि शास्त्र कहे जाए रामकृष्ण संघ के तो देखिए कि छह किताबें है जिसका कि सर्वोपरि महत्व है सबसे ज्यादा महत्व इन छह किताबों का है मां के बारे में यदि कहा जाए तो मां का जीवनी गंभीरा ंद जी का और फिर है मायर कथा मां के प्रसंग संस्मरण का वो समन्वय है कलेक्शन है अभी कहा जाएगा कि मां के कलेक्शन मां के संस्मरण के कलेक्शन और भी है तो सिर्फ हम लोग क्यों मायर कथा को उस इतना प्राधान्य देते हैं तो प्राधान्य इसलिए क्योंकि शारदानंद जी महाराज उस समय उद्बोधन में उपस्थित थे और उन्होंने इस किताब का उनके उनकी नजर के सामने यह किताब प्रकाशित हुई थी तो मायर कथा था का जो मैटर है वह 100% ऑथेंटिक है और शरद महाराज के द्वारा वह वो माने उस उन्होंने उसकी अनुमति दी है छापने की इसके लिए उसका व महात्म है वरना यदि बायोग्राफी ही कही जाए मां की तो अभी देखिए कि चेतनानंद जी की इतनी बड़ी 700 पेज की बायोग्राफी पब्लिश हुई है बहुत सुंदर है डिवाइन प्ले होली मदर श्रीमा शारदा देवीस डिवाइन प्ले इसका गुजराती ट्रांसलेशन भी अभी हमने किया है किंतु शास्त्र की दृष्टि से देखा जाए तो गंभीरानंद जी महाराज की अभी ठाकुर का हमको पता है लीला प्रसंग और कथामृत और स्वामी जी का पता है युग नायक कुछ बेंगोली में है युग नायक और इंग्लिश में है लाइफ ऑफ स्वामी विवेकानंद बाय ईस्टर्न एंड वेस्टर्न डिसाइल वो उनकी बायोग्राफी है और कंप्लीट वर्क्स है उनका यानी कि लाइफ एंड टीचिंग तीनों का कंप्लीट वर्क्स और बायोग्राफी स्वामी जी का लीला प्रसंग कथामृत और ठाकुर का और यह मां का जीवनी गंभीरानंद जी का और यह मायर कथा ये छह किताब अपने शास्त्र की तरह इन छह का इंपॉर्टेंस है और इन छह किताब का हम जितना स्टडी कर पाए उतना ही हमारे लिए कम है जितना स्टडी करेंगे प्रत्येक शब्द से हमको एक मंत्र की तरह हमारे मन में हमारे हृदय में हमारी जिवा के ऊपर में इसकी गुंज होगी और इसका एक पवित्र एक ओजस हमारे हृदय में वह प्रवेश करेगा तो आज यहीं तक आई थिंक कल सैटरडे है तो फिर हमारा नेक्स्ट क्लास होगा मंड ओम शांति शांति शांति हरि ओम तस्त श्री राम कृष्णा अर्पण मस्तु