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Ma Sarada Life by Sw Gambhirananda ·

दैवाधीन : श्रीमाँ सारदा देवी : स्वामी गम्भीरानन्द लिखित : 7 June 2024

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ओम स्थापक च धर्मस्य सर्वधर्म स्वरूपने अवतार वरिष्ठ राम कृष्णाय ते नमः श्री मां शारदा देवी स्वामी गंभीरानंद जी महाराज हमने देखा कि किस तरह से मां के जीवन में एक के बाद एक बीमारी आती जाती है और किस तरह से मां दैव के ऊपर में ईश्वर के ऊपर में आधीन रह कर के इसका इलाज करती है ऐसा नहीं कि मेडिकल ट्रीटमेंट नहीं लेती वह तो लिही है किंतु साथ में ईश्वर भी एक बहुत बड़ी सहाय है थोड़ा सा आगे पढ़ते हैं अभी जैसे सिंहवाहिनी के बारे में बात हुई श्री मायर आरोग्य लाभ दर्शने आशा भीतो दूर दूरा तरे बहु लोक मानत कोरिया सिद्ध काम होय मां के इस आरोग्य लाभ की वजह से बहुत सारे लोगों के भीतर में आशा का संचार हुआ उन्होंने सिंहवाहिनी के पास में धरना देकर के उनको भी आरोग्य लाभ हुआ एवं देवी स्थाने मृति का प्रयोग रोग मुक्त होए और साथ में ही देवी स्थान अर्थात कि मंदिर के सामने पड़ी हुई मिट्टी का सेवन करने से रोग मुक्त हुए तथा बहु भक्तो आशीते लागलो वहां पर बहुत सारे भक्तों का आना जाना लग गया सबसे पहले तो यह बात फैल गई कि हां मां ने वहां पर धरना दिया है और उससे सिंहवाहिनी ने खुश होकर के उनको दर्शन दिया है यह तो एक बात फैल गई कि वहां की मिट्टी में एक कोई जादुई शक्ति है कोई दिव्य शक्ति है यह दोनों बात फैलने से उस विस्तार के बहुत सारे लोग वहां पर आने लगे सिंहवाहिनी के मंदिर में और या तो धरना देकर के या तो फिर थोड़ी सी मिट्टी खा कर के उन्होंने अपनी बीमारी का इलाज करना शुरू किया यह भी एक बड़ी ही दुख की बात है कि उस समय हेल्थ फैसिलिटी आरोग्य केंद्र वगैरह उसकी कितनी वहां पर अभाव होगा कि लोगों के पास में इसके अलावा और कोई उपाय ही नहीं कि सोचे कि चलो वहां पर मंदिर में जाकर के धरना दे और धरना देकर के कुछ हमको मिले तभी तो कुछ जीवन में होगा ऐसा जो परिस्थिति थी कि एक समय था भारत में सतयुग था और इवन बाद में भी कि जब अच्छे राजा राज करते थे तब क्या था कि प्रजा की संभाल रखना उनका एक बहुत बड़ा कर्तव्य था कोई ऋषि मुनि जो कि राजा के सलाहकार थे होते थे वह राजा को हमेशा यह बताया करते थे कि प्रजा को सुखी रखना है प्रजा को शांत रखना है वरना तो प्रजा यदि असु कीी होगी प्रजा जद अशांत होगी प्रजा यदि दुखित होगी तो राज्य हमेशा खतरे में आ जाएगा तो यह हमारे ऋषियों की जो सनातन जो उपदेश था राजाओं को वो जिन राजाओं ने उसका पालन किया उनका राज्य अच्छे से चला और जिन्होंने पालन नहीं किया उनको देखिए कि जैसे शत्रु का आक्रमण होता है तो जिस जनून से जिस देश प्रेम के साथ में सैनिकों को और प्रजा को युद्ध करना चाहिए वह नहीं करके उन्होंने थोड़ी सी बात में ही हथियार डाल दिए और वह राजा की हार हो गई तो इसलिए बात सिर्फ यह नहीं है कि जब आप प्रजा के लिए फैसिलिटी अच्छी देते हैं इससे प्रजा का कल्याण होता है राजा का भी कल्याण इसी से होता है यह जो मां ने कहा था ना कि बड़ा ही फेमस इंसिडेंट हमने पहले भी एक दो बार डिस्कस किया है कि जयराम बाटी के आसपास में ही कहीं पे कोई क्रांतिकारी रहता था फ्रीडम फाइटर तो एक दिन पुलिस वाले आए उसको गिरफ्तार करने के लिए तो वह क्रांतिकारी तो वहां पर नहीं था किंतु उसकी पत्नी थी जो कि प्रेग्नेंट थी तो अभी पुलिस वालों ने क्या किया क्रांतिकारी हाथ में नहीं आया तो उसकी पत्नी को गिरफ्तार करके ले जाने लगे और उस समय की जो प्रथा है उसके लिए पालखी या ऐसा कुछ बंदोबस्त करना चाहिए था स्त्रियों के लिए इस तरह से वह पैदल चलकर तो नहीं जाएगी किंतु फिर भी ऐसी कोई व्यवस्था किए बिना उसका हाथ पकड़ कर के भरे बाजार में खुलेआम उसको ले गए यह तो कितनी अपमान की बात है मां के पास में जैसे ही यह खबर आया इमीडिएट मां क्रोधित होकर के बोल उठी कि वहां पर क्या कोई मर्द का बच्चा नहीं था कि पुलिस वाले को दो झापड़ मार के उस स्त्री की रक्षा करें उसको बचा ले किंतु खैर ऐसा तो होने वाला नहीं गवर्नमेंट के साथ में दो झापड़ मारने से तो गवर्नमेंट के साथ में काम होता नहीं है कभी भी आज की मॉडर्न गवर्नमेंट बड़ी ही स्ट्रांग होती है ये सब दृष्टि से तो जो भी है मां ने उस दिन फिर तो देरी से समाचार आया उस दिन शाम को मां उस दिन बड़ी ही उद्विग्न थी और मां के आसपास में जितने भी साधु भक्त थे परिवार जन थे वे लोग भी बड़े टेंशन में थे मां को इतना उद् विघ्न कभी नहीं देखा था और मां यदि इस तरह से क्रोध करेगी तो पता नहीं क्या से क्या हो जाएगा किंतु फिर देरी रात को खबर आया कि उस महिला को छोड़ दिया गया है किंतु उस दिन बाद में मां ने कहा था कि मुझे लगता है कि विक्टोरिया का पुण्य का घड़ा भर चुका है और अभी उसके राज्य का अंत होने वाला है तो देखिए कि मां की जो भविष्यवाणी बिल्कुल ठीक हुई और कुछ ही समय में हमको आजादी भी मिली और आजादी मिली तो वो भी तो कैसे कि ब्रिटिश लोगों को सफर तो करना पड़ा मैं बहुत बार सोचता हूं यह एक प्रश्न मेरे मन में आया था पहले भी आया था अभी भी आता है कि भारत का जो सबसे ज्यादा अकल्याणेंकीलम के प्रति बड़ा ही क्रोध था स्वामी जी ने खुद ने यह सब कहा है किंतु मैं जब खुद ब्रिटेन गया ब्रिटिश लोगों के साथ में पर्सनल व्यक्तिगत मुलाकात हुई तब मैं ब्रिटिश कैरेक्टर जो है माने उन लोगों का जो कैरेक्टर उसका मैं बड़ा फैन हो गया उन लोगों के भीतर में स्टेड फास्टनेस है उन लोगों के भीतर में धैर्य है एक अटल एक उन लोग आत्म श्रद्धा है कि हां हम लोगों का जन्म हुआ है कुछ बड़ा कार्य करने के लिए हमारे देश बांधव में यह श्रद्धा का अभाव है बोलकर के हमारी अधोगति हुई है स्वामी जी ने यहां तक कह दिया ऐसा नहीं कहा कि हां फिर तो वैसे तो स्वामी जी के बहुत सारे स्टेटमेंट है जब भी स्वामी जी सेकंड टाइम भारत लौटे और ब्रिटिश गवर्नमेंट की वह जो क्रॉस हेयर्स जिसको कहते हैं ना उनकी उनकी कटु दृष्टि में रामकृष्ण मिशन उनकी दृष्टि में आया और पता चला कि धीरे-धीरे करके रामकृष्ण मिशन का प्रभाव तो बढ़ता ही जाता है यह लोग वो सब अच्छे-अच्छे कार्य करते हैं जो कि गवर्नमेंट को करने चाहिए जहां पर भी अकाल पड़ा है जहां पर भी प्लेग हो रहा है वहां प ये लोग रिलीफ करते हैं जो कि एक्चुअली गवर्नमेंट को करनी चाहिए तो इनका तो सुनाम सुयश बढ़ता जाता है और लोग धीरे-धीरे इनकी बात सुन रहे हैं और इतना ही नहीं बहुत सारे क्रांतिकारी गवर्नमेंट से बच कर के गवर्नमेंट से छुप कर के रामकृष्ण मिशन में आकर के योगदान देते हैं साधुओं के रूप में तो इस पुलिस ये सीआईडी वाले जयराम बाटी प्रतिदिन जाते थे वहां पर कौन-कौन रहता है कौन-कौन वहां पर खाना खाते हैं वगैरह सबका नाम लिख देते थे रजिस्टर में ऐसा ही उद्बोधन में भी आते थे बीच-बीच में वह फिर क्वाल पाड़ा में भी जाते थे इसलिए कोई क्रांतिकारी यदि मां के पास में दीक्षा लेने को आता तो फिर यह लोग कहते भाई तुम यहां पर मत रहो और मां को परेशान मत करो मां हालांकि यह सब सुनती नहीं थी मां दीक्षा दे ही देती थी किंतु फिर भी यह लोग बस हमारे साधु थोड़े टेंशन में रहते थे इस तरह से कि सीआईडी वाले सब समय मां के पास में आते हैं एक मां का एक शिष्य था आई थिंक ललित चट्टोपाध्याय ना कि वही मोस्ट प्रोबेबली तो उसने क्या किया कि उस विस्तार का जो पुलिस का एक बहुत बड़ा अधिकारी था उसको लेकर के जयराम बाटी आया और जयराम बाटी आकर के व मैंने उसकी यह इच्छा है कि बड़े-बड़े अधिकारी लोगों को मां के पास में ले आए तो दो तरह से फायदा होता है कि अधिकारी लोगों को भी मां के आशीर्वाद मिले और उनका जो रामकृष्ण मिशन का जो रिलीफ वर्क उस विस्तार में चल रहा है तो गवर्नमेंट उसमें बहुत ज्यादा इंटरफेयर ना करें और हो सके तो सहाय करें तो यहां पर भी आजकल भी हम लोग अपने आश्रम में वीआईपी गेस्ट को इनवाइट करते हैं और वीआईपी गेस्ट मुलाकात भी लेते हैं हमारे आश्रम की तो वो सब वहां से स्टार्ट हुआ था तो ये मां का डिवोटा इस बहुत बड़े पुलिस ऑफिसर को लेकर के वहां पर जयराम बाटी आया वो पुलिस ऑफिसर इंडियन ही था कोई तो वो अभी यह तो बड़ा पुलिस ऑफिसर है ना उसको हैबिट है लोगों को धम धमकाने की लोगों को धमक देने की बड़ा ही गुरूर बड़ ही घमंड और मां कौन है उसको क्या पता तो यह उसका पहचान वाला था तो उसकी बात सुन कर के वह चला आया ऐसा नहीं है कि मां के ऊपर ऐसी कोई श्रद्धा भक्ति थी तो आकर के जूते पहन कर के ही मां के वो जो बरामदा होता है वो उसके ऊपर में उठ गया और बरामदा में चलने लगा टहलने लगा जैसे कि वह कोई बहुत बड़ा राजा है तो मां ने खुद ने कहा है कि जूते भी निकालने का उसमें यह नहीं है शिष्टाचार तो जो भी है मां तो अपने वो जो चादर वगैरह जो मैंने घुमता लगा कर के वगैरह जो होता है मां का जो स्टाइल तो वैसे ही वो मां घुमता वगैरह लगा कर के अपने कमरे में जो जयराम बाटी आप लोग गए होंगे तो मां का कमरा देखा होगा कि कितना छोटा सा कमरा है बाहर से आप पूरा क्लियर देख सकते हैं क्योंकि इधर-उधर छुपने की तो कोई जगह नहीं है तो बीच में वह सेंटर में वो कोर्ट लगाया हुआ है और उसके ऊपर में मां बैठ गई घुमता वगैरह लगा कर के अभी यह जो भक्त था माने खुद ने ये सब वर्णन किया है बाद में कि वो भक्त मेरे सामने पुलिस ऑफिस सर की बड़ी-बड़ी प्रशंसा करने लगा जैसे कि वह पुलिस ऑफिसर वहां का राजा हो और बड़ा ही दयालु हो और लोगों पर उसकी कितनी ही कृपा हो ऐसा करके फिर आखिर में उसने कहा कि मां अभी यह पुलिस ऑफिसर तो हमारा मित्र जैसा हो गया है तो यहां पे ये जो पुलिस सीआईडी वाले आते हैं ना तो व सीआईडी वालों से जो नाम लिखवाने के लिए क्वेश्चन करने के लिए बार-बार में कि यहां पर कौन आता है कौन क्रांतिकारी आता है यहां पर क्या गवर्मेंट के विरुद्ध में क्या षडयंत्र हो रहा है ऐसा जो प्रश्न करने के लिए पुलिस वाले आते हैं तो पुलिस वाले आना बंद हो जाएंगे तो फिर यही भक्त मां को इतना कहा फिर पुलिस ऑफिसर को क्या कहता है पता है कि हां यहां पर वैसे तो आपके सीआईडी वाले बहुत सारे आते हैं किंतु मां को ये सब चीजों से डर नहीं लगता मां ने इमीडिएट कहा अरे बाबा क्या बात करते हो मुझे तो बहुत डर लगता है इन लोगों के आने से मां बो बचपना जैसा है उनका मां का स्वभाव है तो जैसा ही मां ने ऐसा कहा तो फिर वो पुलिस वाले में शायद हो सकता है थोड़ी सी अकल आई हो उसने थोड़े से शिष्टाचार के साथ में कहा तो मा तुम चिंता मत करो कि अभी यह लोग आकर के आपको परेशान नहीं करेंगे जो भी है यह कोई भी राज्य होता है गवर्नमेंट होती है राजा होता है उनका पुण्य काम करने का तभी तक चलता है जब तक उनके राज्य में प्रजा सुखी होती है फिर उनको बेसिक चीजों के लिए परेशानी उठानी पड़े तो फिर वह राज्य सलामत नहीं रहता तो यहां पर भी पता नहीं कैसी परिस्थिति होगी कि लोगों को बीमार होने से ना ही डॉक्टर मिलते हैं ना ही वैद्य कविराज सीधा आ कर के मां के मंदिर में मिन्नत माननी पड़ती है 1282 बंगा देर शोल फाल्गुन अर्थात 27 फेब्रुअरी 187 6 श्री श्री ठाकुरे शुभ जन्मतिथि दिवस है तहा रत्न गर्भा जननी श्री जुक्ता चंद्रा ण देवी भगवत पथे मिलतो होलेन ठाकुर का शुभ जन्मदिन 27 फेब्रुवारी 187 187 6 ठाकुर का शुभ जन्मदिन था ठाकुर की मां उनके बारे में यहां पर शब्द प्रयोग किया है रत्न गर्भा जिनके गर्भ में रत्न का जन्म हुआ रत्न जैसे पुत्र का जन्म हुआ वैसी रत्न गर्भा जननी श्री जुक्ता चंद्रमणि देवी भगवत पथे मिलित होलेन भगवान के श्रीपद में मिलित हो गई उनका देहांत हुआ उनकी महासमाधि हुई तखन तहर वयस 85 बचर होया छलो उस समय उनकी उम्र थी 85 85 साल अंतिम काले वृद्धा के अंतर्जली करान होया छलो आखिरी समय में वृद्धा को अंतर्जली कर किया गया था अंतर्जली अर्थात कि गंगा के किनारे गंगा में थोड़ा सा डुबा करके उनको रखते हैं मृत्यु के समय में जिससे कि मृत्यु गंगा के जल में हो यह रानी रासमंच मणि ने कहा कि देखो देखो मां आई है और जैसे ही उन्होंने ऐसा कहा जितने भी दिए थे सब बुझ गए एकाएक और मां काली जिसका कि मंदिर भवता आरणी जिसका कि मंदिर इन्होंने बनाया है रास मणि ने उनके श्री चरणों में वह विलीन हो गई तो ऐसे ही अभी यहां पे चंद्रा मणि देवी के अंतिम समय में ऐसा कुछ चमत्कार वगैरह कुछ हुआ होगा कि नहीं यह तो हमको नहीं पता किंतु एक बात हमको पता है कि ठाकुर जब तर्पण करने के लिए गए अपनी मां का तब देखा कि गलित हस्त अ अर्थात कि जैसे ही हाथ में गंगाजल लेते हैं हाथ में से पानी निकल जाता है हाथ में पानी टिकता ही नहीं है तो ठाकुर तो ये देख करर के बड़े ही टेंशन में आ गए और बोलने लगे कि अरे यह मेरे साथ में क्या हुआ तो किसी ने बताया कि इसको गलित हस्त कहते हैं आपने तो सन्यास धारण किया है सन्यास लिया है हालांकि भले अपनी मां के साथ में रहते हैं तोतापुरी ने ही कहा था याद हो तो तोतापुरी के साथ में ठाकुर का लंबा डिस्कशन हुआ था तोतापुरी ने ही कहा था कि अपनी पत्नी के साथ में सन्यासी यदि रहता है तो उसमें सन्यासी का टेस्ट होगा और यदि वह सफलता पूर्वक बिना किसी काम गंध के वह अपनी पत्नी के साथ में संबंध रख सकता है रह सकता है तो वह सही सही में सन्यास की सर्वोच्च श्रेणी में शामिल होगा अर्थात कि पत्नी के साथ में कोई भी शारीरिक संबंध ना रखे उसको धार्मिक उपदेश दे तो सन्यासी सर्वश्रेष्ठ कहा जाएगा यह बात तो तोतापुरी ने ही को कही थी तो इसीलिए दूसरी बात है कि जब तोतापुरी ने यह कहा कि जब पहली बार तोतापुरी जी आए थे काली मंदिर में देखा कि ठाकुर को देख कर के ही समझ गए कि वेदांत का यह श्रेष्ठ अधिकारी है तो उन्होंने इमीडिएट कहा विदान साधना करने के लिए तुम बड़े ही उपयुक्त हो तुम चाहो तो मैं तुमको दीक्षा देकर के साधना करवा सकता हूं तो उस समय और दीक्षा मने साधना करने के लिए तो सन्यास ग्रहण करना होगा वेदांत के धना करने के लिए तो ठाकुर ने क्या कहा था मेरी मां जीवित है और नबत में रहती है तो यदि मां को पता ना चले इस तरह से सीक्रेट यदि मुझे संन्यास दे सकते हो तो मैं संन्यास लूंगा तो तोतापरी उसमें सहमत हो गए थे कि भले चाहे इस तरह से तो मां को शायद चंद्रा मणि देवी को शायद नहीं होगा पता कि ठाकुर ने सन्यास लिया है किंतु यह जो यह बात सिर्फ हवा हवा में नहीं है ना कि ठाकुर के साथ में जो कुछ कुछ भी होता है वो तो बिल्कुल शास्त्र सहमत शास्त्र में जो कहा गया है एगजैक्टली वही ठाकुर के साथ में होगा अनजाने में भी ठाकुर शास्त्र विरुद्ध कार्य नहीं कर पाएंगे तो सन्यास लिया सन्यासी की जो साधना है वो की और उस सन्यासी की साधना में सफल हुए निर्विकल्प समाधि प्राप्त हुई इसके बाद में यदि ठाकुर ने यह सोचा होगा कि वह सामान्य जीवन जी पाएंगे वह तो संभव ही नहीं और मां का जब तर्पण ना कि ऐसा कुछ करने को गए तो व भी नहीं कर पाए क्योंकि वह तो शास्त्र विरुद्ध हो जाएगा हाथ में गंगाजल जैसे ही लिया हाथ में से पानी पड़ जाने लगा तो ठाकुर के साथ में जो कुछ भी होता है एकदम शास्त्र सत होता है क्योंकि ठाकुर का जन्म ही हुआ है शास्त्रों को पुनः अभी ऐसा तो नहीं कहेंगे कि जीवन दान देने के लिए या पुनर्जीवित करने के लिए शास्त्र तो हमेशा जीवित ही कहते हैं उसका पुनः प्रचार करने के लिए उसको पुनः विख्यात बनाने के लिए एक समय ऐसा आ गया था वो आक्रमणों के दिनों के दौरान कि बार-बार हम लोग जो हार जा रहे हैं बार-बार हमको जो डिफीट मिलती है उसका यह तो शायद अर्थ नहीं कि हमारे पुरखे हमको जो सिखा के गए हैं वह सब गलत गलत है क्या हमको अपनी संस्कृति अपनी सभ्यता छोड़ कर के विदेशी संस्कृति सभ्यता अप अपना लेनी पड़ेगी क्या वो जो संदेह जो प्रकट हो गया था कुछ लोगों में वह संदेह का भंजन करने के लिए शास्त्रों की महिमा को पुनः प्रतिष्ठित करने के लिए इनका आगमन हुआ था अंतिम काले वृद्धा के अंतर्जली करान होया छलो आखिरी समय में वृद्धा अर्थात की चंद्रमणि देवी को गंगा के किनारे लाया गया था गंगा के किनारे ही उनका देह त्याग हुआ था एवं श्री श्री ठाकुर ल चंदन और तुलसी लैया तहर पादो पद्य अंजलि प्रदान करिया लेन ठाकुर फूल चंदन और तुलसी लेकर के अपने मां के पैरों में अंजलि प्रदान की थी माता ठाकुरानी तखन जयराम बाटी ते अखे भुगते लेन अपनी मां शारदा उस समय जयराम बाटी में बीमारी से भुगत रही थी श्री मायर समय तखन खूब मंद चलित मंदो बोलते ईए कहा जाएगा कि वह समय मां के जीवन का बड़ा ही खराब समय बीत रहा था बड़ा ही अनफॉर्चूनेटली कि मुझे पता नहीं उनके जीवन में फॉर्चूनेटली लगी है या तो फिर खुद की बीमारी है फिर जद उनके यह बच्चे बेचारे दरबदर भटक रहे हैं तो मां वहां पर बध गया गई देखा कि वह वहां पर बौद्ध बिखल कितने सुंदर वो आहार विहार में रहते हैं विहार माने बौद्ध मठ में तो माने वो भगवान को प्रार्थना ठाकुर को प्रार्थना की कि ठाकुर तुम्हारे बच्चे बेचारे दरबदर भटक रहे हैं उनके रहने के लिए कुछ व्यवस्था करो अभी उनके रहने के लिए कुछ व्यवस्था हुई तो यह पूरा जगत आकर के पूरे जगत के जितने भी भक्त नर नारी वृद्ध बालक सब आ करर के उनके पैरों में कोई कुछ डिमांड करता है किसकी यह डिमांड है कुछ यह मांगता है कुछ ये मां के जीवन में बेचारी के शांति कहां पे है वो चंद्रमणि श्यामा सुंदरी देवी मां की मां ने एक बार कहा था कि मेरी बिची शारदा मां पुकार भी कभी सुन नहीं पाई बच्चे छोटे-छोटे बच्चे होते हैं तो कैसी मां मां करके पुकार करती है तो मां का हृदय कैसे हर्षो फुल हो जाता है कैसे आनंद से भर जाता है तो मां शारदा के तो कोई संतान हुए नहीं ठाकुर तो बेचा शिव सन्यासी वो कहां से संतान होने वाले हैं तो अभी जैसे ही किंतु ठाकुर ने यह बात सुनी इन्हीं श्यामा सुंदरी देवी को कहा कि आप चिंता मत कीजिए एक दिन इतने सारे संतान आ जाएंगे कि उनकी मां मां वाणी सुनकर के आपकी बेटी बिचारी परेशान हो जाएगी तो वही हुआ था आखिर में मां के जीवन में फॉर्चूनेटली हैं कि मां का जीवन में यह बड़ा ही अनफॉर्चूनेटली शोक ईते मुक्ति पाई बार पूर्वे तीनी पुनर बार मलेरिया कोबोले पड़ी लेन क्योंकि शारीरिक व्याधि ऑलरेडी यह डा जेंट्री वगैरह तो हो ही रहा है पिताजी का मृत्यु हुआ है साथ में ही उनकी सास का चंद्रा मणि देवी का भी मृत्यु हो गया है तो यह सब आघात विघा यह सबसे मुक्ति मिली उससे पहले तो फिर वह मलेरिया की शिकार हो गई मलेरिया के रोग से आक्रांत हो गई प्ली हा बाड़िया जावाई तहा के काया पाट बदनगंज गिया उहा दागा ते होलो प्लीहा अभी प्लीहा क्या है पता नहीं वो बढ़ जाने की वजह से उनको काया पाट बदनगंज ये गांव या शहर का नाम होगा पास का वहां पर जाकर के उसको जलाना पड़ा ही दागा ब्यापार शे कालेर एक बिकट ग्राम्य चिकित्सा यह जो जलाना यह जलाना वो भयानक एक विकट भयानक ग्राम्य चिकित्सा थी उहा ते रोगर उपशम होई तो कि ना निर्धारण कोरा कठिन किंतु रोगर पखे उहा अशेष यंत्रणा दायक छलो यह जलाना इसकी बजह से रोग का उपशम होता कि नहीं यह तो पता नहीं किंतु रोगी के लिए यह बड़ा ही पीड़ा जनक था बड़ा ही यंत्रणा दायक था स्नानेर पर रोगी के शवाया तीन चारी जन लोग तहर हाथ पा चापि धरी तो स्नान के बाद में कैसे यह जलाने की बात होती थी स्नान वहां पर रोगी जाएगा वह स्नान करेगा स्नान के बाद में वह लेट जाएगा फिर चार पांच लोग उसके हाथ पैर पकड़ के रखेंगे जहा ते से उठिया ना पाला जिसकी वजह से वो उठ कर के दौड़ के भाग ना जाए वहां से तार पर एक व्यक्ति एक जलं तो फल काट दिया पेटर ऊपर का कतो जाएगा घस तो वो स्नान करने के बाद लेट जाएगा तीन चार लोग उसके हाथ पैर पकड़ करके रखेंगे उसके बाद में एक व्यक्ति एक जला ला जला हुआ कोयला वह जो चमचे में से पकड़ करके चमचे की मदद से पकड़ करके उसके पेट के आसपास में उसको घिस उते चामरा पुड़िया ज रोगी चित्कार करी तो उससे चमड़ी जल जाने की वजह से रोगी चित्कार करता चिल्लाता सोना जाय श्री श्री ठाकुरो पलीहा द आगाई बार जन्नो काया पाटे हाट तोलाई गया लेन सुना है कि श्री श्री ठाकुर भी इसी तरह से यह ट्रीटमेंट लेने के लिए वहां पर काया पाठ हाट तला गया लेन श्री जुक्ता श्यामा सुंदरी कन्या के लैया काया पाटे हाट तला जखन उपस्थित पलेन श्यामा सुंदरी देवी अपनी बिटिया मां शारदा को लेकर के इस ट्रीटमेंट दिलवाने के लिए जब वहां पर उपस्थित हुई खन थाक शिव मंदिरे अन्य लोके रूप लीखा चिकित्सा चलते छलो उस समय वहां के शिव मंदिर में दूसरे लोगों की इस तरह की जलाने की चिकित्सा चल रही थी श्री मां शब्द खलन माने सब देखा एवं रोगी देर आर्त नाद सुनी लेन और रोगियों की चित्कार भी सुनी जथा समय तिनी स्नान सारिया आले जोन पोए अग्रसर होया तहा के धरी ते गेलो जब वो स्नान करके आई वो कोयला उनके वो उसकी वो जो उसके लिए तो तीन चार लोग आगे आए जैसे कि वे लोग उनके हाथ और पैर पकड़ के रखे तो जैसे दूसरे रोगियों की तरह वह भी व वहां से चलेने जाए किंतु मां बोली लेन किंतु मां ने कहा ना काव के धरते हो बे ना किसी को पकड़ने की जरूरत नहीं है आमी निजे ही चुप करे सुए थाक मैं अपने से चुपचाप सोई रहूंगी वास्तविक तिनी से अमानुष यंत्रणा निरब चकोरी लेन और सही सही में उन्होंने वोह अमानवीय अमानुष भयावह यंत्रणा चुपचाप सहन की जब उनके पेट के ऊपर में भी यह जला हुआ कोयला लगाया गया परे जे कोन कार हो पलीहा वृद्धि सारिया गेलो बाद में जो किसी भी कारण से भी हो यह बुखार उनका ठीक हो गया अभी यह बात सुनकर के तो बहुत सारे प्रश्न भी आते हैं अ सबसे पहला प्रश्न तो यह आएगा कि फिर दूसरी बार मां सिंहवाहिनी के पास में क्यों नहीं गई और यह भी एक अमूजा करुुर भी यह ट्रीटमेंट लेने के लिए गए थे यह वेस्टर्न यह क्या है ना कि जब कोई प्रॉपर ट्रीटमेंट हमारे पास नहीं रहता तब मनुष्य आखिर में क्या करेगा वह जो किसी भी चीज उसके सामने आ जाएगी उसका वह अ माने आखिर में यदि कुछ नहीं चलता तो ये ले लो वेस्टर्न मेडिसिन में ऐसी ही एक भयानक ट्रीटमेंट है जिसको कि यह लोग ब्लीडिंग कहते हैं जब कोई भी रोगी उसका रोग बहुत बढ़ जाता है या पागलपन का दौरा आ जाता है ऐसा कुछ भी हो जाता है तो वहां के डॉक्टर क्या करते हैं पता है उसकी वो जो कोई वेन है उसके रक्त जो ये जो है जिसको वेन या कि जो उसका हाथ काट देंगे थोड़ा सा जिससे कि ब्लीडिंग चालू हो जाए अभी क्या होता है ब्लीडिंग होने से तो मनुष्य बड़ा ही वीक हो जाता है कमज जर हो जाता है तो वह दर्द के मारे जो छट पटाता है चिल्लाता है क्या-क्या नहीं करता दर्द के मारे हम तो देखते हैं कि क्या असर होती है आजकल की तरह पेन किलर या मॉर्फिन वह तो इतना कोई इजली अवेलेबल नहीं था उस समय में तो वो जब बहुत चिल्लाएगा तो उसका ब्लीडिंग करेंगे उसको उसका हाथ जैसा कुछ काट देंगे कोई वेन काट देंगे ब्लीडिंग होगा तो इतना कमजोर हो जाएगा कि बेचारा चुपचाप पड़ा रहेगा ये भी डेंजरस चिकित्सा है वो मने रोगी को ठीक तो पता नहीं करें रोग का क्या होगा पता नहीं रोग से रोग की ट्रीटमेंट इतनी भयानक होती है कि रोग का उपशम हो जाता है तो कभी-कभी ऐसा होता है ना कि हाथ में कांटा लगा तो जहां पर कांटा लगा बड़ा बड़ा ही दर्द होता है तो हम लोग कभी-कभी क्या करते हैं उस दर्द को भूलने के लिए हम और कहीं प जोर से उस उस जगह को हम अपना नाखून या ऐसा कुछ मारते हैं तो दूसरी जगह पर दर्द बढ़ जाता है तो पहला वाला दर्द भुला दिया जाता है तो यह इस तरह की सब भयानक ट्रीटमेंट थी वो ट्रीटमेंट लेकर के इतना दर्द होगा कि वो ओरिजिनल रोग का दर्द आप भूल जाएंगे तो ये ब्लीडिंग भी ऐसा ट्रीटमेंट है कि व आपको बुखार हुआ है ना कि क्या हुआ है वो आपको ब्लीडिंग ऐसा करवाएंगे कि उतने कमजोर हो जाएंगे कि वो ओरिजिनल वो पेन भूल जाएंगे आप और यहां पर भी कोयला लगाना बाप रे वो जला हुआ कोयला किसी को लगाएंगे तो कितना कष्ट होगा वो कैसा चिल्लाएगा वो मने ऑटोमेटिक आपके जो बुखार बुखार होंगे वो बेचारे भाग जाएंगे ये वो इस तरह की वो भयानक ट्रीटमेंट थ वो जो स्वामी जी का वो फेमस इंसिडेंट है ना कश्मीर गए थे और किसी के सर पर भूत सवार हो गया तो लोगों ने क्या किया कि गर्म कोयले का डाम उसको देने लगे टेस्ट करने के लिए कि सही सही में भूत उसके ऊपर में सवार हुआ है कि नहीं तो गर्म कोयले का डाम दे रहे उसको कुछ नहीं हुआ तो अभी स्वामी जी तो साधु थे तो लोगों ने सोचा कि ये साधु महात्मा है इनको बुला के ले आते हैं यदि वो उसका कुछ ट्रीटमेंट कर पाए तो स्वामी जी ने जाकर के देखा में उसको डाम दे रहे हैं उसको कुछ नहीं हो रहा तो स्वामी जी ने सोचा पहले तो मैं यह देखता हूं कि कुछ नाटक तो नहीं हो रहा है कोयला ठंडा तो नहीं है जैसे ही कोयले को स्पर्श किया स्वामी जी का हाथ जल गया स्वामी जी चिल्ला उठे स्वामी जी जद इस कोयले जला हुआ कोयला लगने से ऐसा उनको दर्द हुआ होगा तो सोच के देखिए कि मां को कितना दर्द हुआ होगा जो भी है फिर स्वामी जी तो बोले कि मैं वो जले हुए मेरी सिर्फ एक स्पर्श किया था उस स्पर्श से मेरे हाथ में इतनी जलन हो रही है कि मेरी तो ली गायब हो गई मैं समझ में ही नहीं आ रही कि मैं क्या करूं इस परिस्थिति में आखिर में उन्होंने क्या किया कि वह जिसके सर के ऊपर में भूत सवार हुआ था उसके सर पर हाथ रख कर के थोड़ा सा जप कर दिया हो सकता है इससे यदि वो ठीक हो जाए तो यह सब मने रोग से तो रोग की ट्रीटमेंट ऐसी भयानक है कि भयानक ट्रीटमेंट देख कर के रोग भी बेचारा भाग जाएगा कि भले जाने दो मुझे ये और वैसा ही बेचारा इस नए ट्रीटमेंट से तड़प रहा है मुझे उसको कष्ट देने की जरूरत नहीं है और ठाकुर भी गए थे वहां पर ये ठाकुर के बारे में ऐसी ऐसी सब नई नई कहानियां कभी-कभी हमको मिलती है हम पढ़ते सब कुछ है ठाकुर के बारे में पढ़ा सब कुछ है किंतु सब कुछ याद नहीं रहता तो अब जब ऐसा सडन कुछ पढ़ने में आता है तो या आश्चर्य अरे अच्छा ठाकुर ने ऐसा भी किया था अरे वाह क्या बात है तो अच्छा तो आज यहीं तक कल फिर से मिलते हैं ओम शांति शांति शांति ते ह तस श्री राम कृष्णा पर

Questions & Answers

मस्तु यह तो अधिकारी के ऊपर में है कि हम किस साधना के किस स्टेज में है जब साधना का प्रारंभ करते हैं अब जैसे वैदिक पीरियड में ही कहा गया है कि आपको ब्रह्मचर्य आश्रम है फिर गृहस्थ आश्रम है फिर वानप्रस्थाश्रम में बाद में संन्यास आश्रम है वैदिक जज में तो बड़ा स्पष्ट है ब्रह्मचर्य आश्रम के बाद में डायरेक्ट सन्यास आश्रम तो जो उच्च अधिकारी है उन्हीं के लिए है तो इवेंचर सन्यास के पास जा सन्यास ग्रहण कीजिए नॉट नेसेसरी कि इस जन्म में जन्म जन्मांतर की साधना भी होगी तो बात ये है कि ठाकुर की अब जैसे इसी मां के जीवन में अब भी एक दो पैराग्राफ के बाद में ही आएगा मां ने कहा है कि आदर्श के लिए जो करना पड़ता है वह मैंने बहुत बड़ा चढ़ा करके किया है तो इन लोगों का जीवन था सिर्फ साधना करना और सिद्धि प्राप्त करना नहीं आदर्श का स्थापन करना तो आदर्श का स्थापना करने के लिए जो करना पड़ता है उन्होंने किया और अपने अपने संघ में ही देखिए ना मास्टर महाशय है बलराम बाबू है गिरीश कोष है नाग महाशय है गोलाप मा योगेन मा कितने है कि जिनका जीवन गोपालेर मा अघोर मणि देवी जिनका जीवन त्याग भक्ति श्रद्धा ना से भरा हुआ था तो अपनी यात्रा में आप कहां पर है वहां पर ऑटोमेटिक यह सब होने लगेगा मैं उस समय लखनऊ में था एक एक एनजीओ में काम करता था तो अभी पता है ना लखनऊ में वो जो वहां का जो एक खास प्रकार का कपड़ा जो है कुर्ता वगैरह वो बड़ा ही फेमस है हां चिकन चिकन यस यस एकट तो वो बड़ा फेमस है वहां पर तो वहां पर मैं बीच-बीच में पहली बार यहां पर तो हम शर्ट पहनते हैं वहां पर ये सब कुर्ता फर्ता पहनने की शुरुआत की तो मैं बीच-बीच में जाता था एक बार मैंने देखा एक ऑरेंज कलर का कुर्ता माने कपड़ा तो मुझे बड़ा पसंद आ गया तो वो ले लिया फिर उसके वो जो उसका कुर्ता बना कर के वो पहनने लगा तो सब लोग बोलते हैं अरे ये क्या कर रहे हो तुम ये ये ऑरेंज कलर का क्यों पहना है मैंने कहा मुझे ये कलर बड़ा पसंद है ये सब चीजें क्या है कि उस समय मुझे समझ में नहीं आया किंतु धीरे-धीरे करके आपका माइंड ऑटोमेटिक उस डायरेक्शन में जाना शुरू होगा उसमें आपको फिर यह प्लान नहीं करना पड़ता है कि अच्छा मुझे यदि वेदांत साधना करनी है तो मुझे यह करना पड़ेगा ऐसा प्लान नहीं होता ऑटोमेटिक ही आपका मन उस डायरेक्शन में जाना शुरू हो जाता है किंतु यह है कि जोर जबरदस्ती करके कुछ नहीं करना है जो कि अपने शास्त्र इस बारे में बड़े स्पष्ट है धीरे-धीरे करके हो शांति से हो मां जब आखिरी बार जयराम पार्टी से कलकाता जाने के लिए निकली तो बहुत सारे गांव वाले इकट्ठा हो गए थे सबको एक अंदाजा आ गया कि अभी नहीं लगता कि मां जयराम बाटी वापस आएगी क्योंकि मां की बीमारी तो बढ़ती ही जाती है मां कमजोर होती ही जाती है और सन्यासी लोगों ने ठीक कर दिया है कि मां को प्रॉपर ट्रीटमेंट अभी दिए बिना हम लोग उनको जाने नहीं देंगे वापस नहीं आने देंगे तो सब लोगों के मन में एक अंदाज आ ही गया तो मां अभी जा रही है सब गांव वाले मां के पीछे पीछे जा रहे हैं अ और बार-बार विनती करते हैं कि मां वापस आना वापस आना तो मां भी भरोसा देती है कि हां क्यों नहीं वापस आऊंगी अवश्य आऊंगी फिर जब वह गांव की सीमा तक जयराम बाटी की सीमा तक चले गए और पालखी में बैठने की समय आया तो मां ने क्या कहा झुक कर के गांव की मिट्टी थोड़ी सी अपने सर पर लगाई और क्या कहा कि जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गात अपी गरीयसी माने संस्कृत में यह बात कही है कि जननी जन्मभूमि स्वर्ग से भी महत है महान है तो यह जयराम बाटी की मिट्टी का यह आदर आश्चर्य होता है माने मैंने जब पहली बार पढ़ा तो मैंने सोचा कि यह जो थीम है पार्टिकुलर थीम यह तो अपने लिटरेचर में वैसे तो बहुत ज्यादा नहीं दिखती है कि जन्मभूमि के ऊपर में इतना प्रेम स्वामी जी का पैट्रियोटिज्म का एक बात है कि जब अमेरिका से वापस आए वहां कोलंबो की भूमि में वह मिट्टी में गड़ा गड़ी देने लगे मिट्टी में वो रेंगने लगे तो वोने आ लोटने लगे तो वो तो एक कि स्वामी जी का एक पैट्रियोटिज्म बड़ा ही स्ट्रांग था कि तो मां के जीवन में ऐसा कोई आईडिया इतना तो डेवलप नहीं हुआ होगा इन लोगों के मन में भी किंतु बहुत ज्यादा सुनने में नहीं आता तो जो वहां की मिट्टी की महिमा का माने इस तरह से प्रचार किया है तो मिट्टी में ही कुछ होना चाहिए ये सब कॉम्प्लेक्शन इक्वेशन कि वो सिंहवाहिनी का प्रताप मां का ख का वहां पर आगमन मिट्टी का वहां पर सब मिलकर के होगा यह भी एक बात है कि जिस परिस्थिति में जिस देश और काल में यह लोग रह रहे हैं वहां की जो प्रथा है इन्होंने फॉलो की है ठाकुर महा स्वामी जी ने उन्होंने खुद कहा है कि हम लोग तो कोई पुरानी प्रथाओं को तोड़ने के लिए नहीं आए उसकी पुष्टि करके उसका जो सार तत्व है उसको कैरी फॉरवर्ड करने के लिए आए हैं यदि हम आज की लैंग्वेज में यदि इसको एक्सप्लेन करें तो वो बिल्कुल ठीक है कि सिंहवाहिनी के पास में जाना या तो फिर बीमारी से राहत पाने के लिए ईश्वर को प्रार्थना करना उस समय की मेडिकल ट्रीटमेंट ही अवेलेबल नहीं है तो मनुष्य को तो कुछ तो करना है शरणागति इससे आती है और हो सकता है कि प्रार्थना करने से मन भी थोड़ा सा हल्का होता है तो दैट इज आपने बिल्कुल ठीक कहा कि यह सब कंटेक्सुअल है किंतु गोइंग बियोंड ट देर इज अनदर फैक्टर वो फैक्टर है कि हम कॉन्शसनेस के किस लेवल पर है क्योंकि देखिए कि जिस चीज को हम जनरली अ अपनी नॉर्मल कॉन्शियस लेवल पर रहकर नहीं समझ पाते नहीं देख पाते ऐसी कितनी ही चीजें सुपरकॉन्शियस लेवल पे होती है जैसे कि ठाकुर का जो वो विजन था जब वह हृदय को थोड़ा सा स्पर्श क्या कर दिया हृदय ने देखा कि वह और ठाकुर आकाश मार्ग से जा रहे हैं किसी वोह मने प्रकाश से आवर्त होकर के किसी देवता की तरह अ स्वामी जी का एक विजन था कि देखा कि उन्होंने आदि ल के सत्य युग के ऋषियों को देखा कि वह गंगा के किनारे बैठे हुए वो पुराने श्लोकों की आवृत्ति कर रहे हैं रचाओ की स्तोत्र की आवृत्ति कर रहे हैं आकाश में जैसे कि वो घने बादल मंडरा रहे हैं चारों ओर बर्फ के पहाड़ है तो यह दृश्य देख कर के यह विजन देख कर के स्वामी जी को पता चला कि उस ट्रेडिशनल युग में किस तरह से रचाओ की आवृत्ति होती थी चैटिंग किस तरह से होता था तो यह भी तो एक सुपर नेचुरल कहो कि सुपर कॉन्शियस एक वर्ल्ड है वहां से चीजें बिल्कुल अलग तरह से दिखती है आज हमको दिखेगा शायद कि हम मंदिर में जाएंगे यह जो पंचमहाभूत की ये जो जड़ आंखों से हमको सिर्फ शायद मिट्टी की ही प्रतिमा दिखेगी सिंहवाहिनी की हो सकता है कि हायर लेवल कॉन्शसनेस प चले जाए और हायर डायमेंशन जब ओपन हो जाए तो वहां पर हमको और कोई मने एक दिव्य दर्शन भी हो सकता है कुछ भी हो सकता है जैसे आजकल फिजिक्स में है ना कि ये चार डायमेंशन है स्पेस और टाइम की अभी यहां पर यदि हम हायर डायमेंशन में यदि कोई भी ऑब्जेक्ट को देखें वो बिल्कुल डिफरेंट तरह का दिखेगा जैसे कि ये टेसरे क्ट वगैरह है वो वोने हायर डायमेंशन ऑब्जेक्ट है जो कि हम थ्री फोर डायमेंशन में एक तरह से दिखते हैं हायर डायमेंशन से हम यदि देखें तो बिल्कुल अलग से दिखेंगे उसके बहुत सारे एस्पेक्ट है जो कि इस डायमेंशन में छुपे हुए हैं तो यहां पे भी वही फिजिक्स का कांसेप्ट को थोड़ा सा यहां पर ले लिया जाए तो इस नॉर्मल लेवल कॉन्शसनेस पर हमको यह मिट्टी की प्रतिमा दिखती है या मिट्टी का मंदिर दिखता है या तो फिर सिंपल मिट्टी दिखती है जमीन पर पड़ी हुई हायर लेवल कॉन्शसनेस प हो सकता है हमको और ही कुछ दिखे तो दिस इज आल्सो पॉसिबल हम लोगों की यहां पे अभी प्रॉब्लम क्या है कि हम लोगों को ऐसी ना ही कोई अनुभूति हुई है ना ही हम ऐसे कॉन्शसनेस के लेवल प अभी तक हम गए हैं सो हमको तो किताब पढ़ कर के सिर्फ अनुमान ही करना है कि हां ऐसा हो सकता है या ऐसा हो सकता है