Invocation
ओम स्थापक यच धर्मस्य सर्व धर्म स्वरूपने अवतार वरिष्ठ राम कृष्णाय ते नमः श्री मां शारदा देवी का जीवन चरित्र लेखक है स्वामी गंभीरानंद जी महाराज और जिस चैप्टर का हम पाठ कर रहे हैं उसका नाम है रव साधना अभी कल हमने देखा कि गंभीरानंद जी महाराज ने यह जो चैप्टर लिखा है इस चैप्टर का जो मुख्य थीम है वह यह दिखाना है कि श्री मां शारदा देवी के जीवन में जिस तरह से उन्होंने नीरवता पूर्ण साधना की उस साधना का तात्पर्य क्या है और साधना के रिलेटेड विभिन्न घटना क्या है और यह चैप्टर स्टार्ट होने से पहले हमने यह भी देखा कि आप इस तरह का डिवीजन कैसे कर सकते हैं मां के जीवन में जैसे कि निवेदिता ने स्वामी विवेकानंद की स्वामी विवेकानंद के कंप्लीट वर्ष की जो इंट्रोडक्शन में जो लिखा है कि स्वामी विवेकानंद ने रिलीजन और यह सेकुलर लाइफ स्पिरिचुअल और सेकुलर इन दोनों के बीच की जो भेद रेखा थी वह हमेशा के लिए मिटा दी है आज हम जो जो लोग राम कृष्ण संघ की भावधारानी ब्रह्म साक्षात्कार होने के बाद में हमको समझ में आएगा कि उसी ब्रह्मण की विभिन्न किरणों से यह पूरा संसार बना हुआ है पूरा संसार भास मान है तो यह प्रश्न होने के बाद में कि यदि संसार और सन्यास इन दोनों के बीच में सही में देखा जाए तो इतना कोई डिफरेंस नहीं है यदि आप आदर्श सन्यासी है और यदि आप आदर्श संसारी है या तो फिर गृहस्थ है तो हम दोनों को एक ही रास्ते पर जाना है एक ही उद्देश्य के लिए हमको गति करनी है यात्रा करनी है यदि आदर्श सन्यासी है तो वह जप ध्यान साधन भजन पूजा पाठ यह शास्त्र पाठ फिर यह तीर्थ दर्शन तीर्थ यात्रा यह सब करके वह वही ईश्वर को प्राप्त करेगा जो कि एक गृहस्थ यदि वह राजा है तो वह राज्य धर्म पालन करके वही ईश्वर को प्राप्त करेगा और यदि गृहिणी है तो वह सती धर्म का पालन करके भी वही ईश्वर को प्राप्त करेगी यदि अपने अपने मार्ग में निष्ठा है तो हम सभी को एक ही लक्ष्य की ओर जाना है तो यह डिवीजन तो हमारे हिंदू धर्म में नहीं है खास करके श्री रामकृष्ण देव की भावधारानी है तो फिर यहां पर प्रश्न जैसे कि गं रानंद जी महाराज ने कल उठाया था कि आप साधना के रिलेटेड अलग से थीम लेकर के क्यों एक चैप्टर की रचना करते हैं यह और फिर दूसरी बात है देखिए कि जद आप जितने भी प्रसंग इस चैप्टर में दिए गए हैं यह कोई स्पेसिफिकली जब ध्यान मेडिटेशन स्पिरिचुअलिटी प्रेयर जो कि ट्रेडिशनल कंपोनेंट कहे जाता है साधना के उसके रिलेटेड नहीं है यह चैप्टर में उसी तरह की घटनाओं का वर्ण है जिस तरह की घटनाएं हमने अभी तक होती हुई देखी है तो फिर नेचरली यह प्रश्न होगा महाराज जी ने कहा है थोड़ा सा पेशेंस रखिए आपको समझ में आ जाएगा तो चलिए पेशेंस के साथ में इस चैप्टर में वर्णित जो प्रसंग है उसका पाठ करते हैं सबसे पहले प्रसंग आता है एक भैरवी ब्राह्मणी का अभी देखिए कि महाराज जी ने पहले ही यह डिवीजन बता दिया है कि एक ओरिजिनल भैरवी ब्राह्मणी थी जो कि दक्षिणेश्वर आकर के ठाकुर को तंत्र साधना में उन्होंने दीक्षित किया था शक्ति साधना में दीक्षित किया था और शक्ति साधना के जितने भी आयाम है उन सबका एक के बाद एक ठाकुर के पास में अनुष्ठान करवाया था तो वह एक भैरवी ब्राह्मणी थी जो कि कामर पुकुर भी गई थी वहां पर मां शारदा देवी के साथ में उनकी मुलाकात भी हुई थी मां शारदा देवी के साथ के कुछ प्रसंग भी है और उसके बाद में वह भैरवी ब्राह्मणी दक्षिणेश्वर से चली गई थी यहां पर एक दूसरी भैरवी जब मां दक्षिणेश्वर थी उस समय दक्षिणेश्वर आती है यह उसका प्रसंग है महाराज जी गंभीरानंद जी महाराज क्या लिखते हैं तद व्यतीत आर एक जन भैरवी कथाओ आमरा जानी ते पारी इसके अलावा और एक भैरवी के बारे में हमको पता है एक भैरवी की कहानी हमको पता है एक दिन श्री रामकृष्ण श्री मां के बोली लेन आज एक जन भैरवी आश बे एक दिन श्री रामकृष्ण देव ने मां शारदा को कहा कि आज एक भैरवी आश यहां पर दक्षिणेश्वर काली मंदिर में आएगी आज एक जन भैरवी आश बे तार जनने एक कानी कापड़ी राखब ताकि दते होवे उसके लिए एक कपड़ा एक वस्त्र रंग करके रखना उसको देना होगा मुझे ऐसा लग रहा है कि गरवा रंग करने के बारे में ठाकुर ने मां को बताया होगा जनरली जैसे आपको पता होगा यदि आप धोती है या साड़ी है यह पहले जिस तरह से कॉटन का बनता था वह ओरिजिनल फॉर्म में जद आप लेने को जाते तो फिर वह सफेद रंग का ही बनता सफेद रंग का ही मिलता क्योंकि कॉटन से सब कुछ तैयार होता था और यह केमिकल रंग इतना सब वह उस समय पॉपुलर नहीं था तो जदिया है गेरुआ रंग करना है तो घर में ही वह जैसे वह आता है कलर आता है उसमें डुबो करके उसको रंग किया जाता था हम लोग साधु लोग आज तक इसी तरह से रंग करते हैं गेरुआ रंग मिलता है वो गेरुआ रंग को पानी की बाल्टी में डाल देते हैं फिर पानी के साथ में मिक्स करके जब भी आप देखेंगे आपने यदि दीक्षा ली होगी हमारे संघ में प्रेसिडेंट परम पूजनीय प्रेसिडेंट महाराज या तो फिर पूजनीय वाइस प्रेसिडेंट महाराज के पास में तो आपने दक्षिणा के रूप में धोती दिया होगा धोती या तो वस्त्र दिया होगा और ज्यादातर वह सफेद कलर का ही होता है तो फिर क्या होता है जैसे अभी यहां पर दीक्षा हुई थी पूजनीय सुहितानंद जी महाराज यहां पर आए थे थे तो दीक्षा होने के बाद में देखा कि बहुत सारी धोती इकट्ठा हो गई है तो हम लोग जब साधु लोग उनको प्रणाम करने को जाते हैं महाराज जी को तो हम सबको एक-एक करके वह धोती देंगे तो इस तरह से हमारे पास में कपड़े आते हैं तो यह धोती को फिर क्या करना है सफेद धोती होता है सफेद वस्त्र होता है तो उसको गेरुआ रंग में उसको डुबा करके उसको रंग करना होता है ये एक ट्रेडिशनल आई है तो यहां पे भी अ ठाकुर ने मां को कहा कि एक भैरवी ब्राह्मणी आएगी गेरुआ वस्त्र यह लोग पहनते हैं जनरली तो सफेद कपड़ा सफेद साड़ी इसको ले लेकर के गेरवा रंग उसको कर देना ई दिन काली मंदिरे भोग रागे पर शही भैरवी आशी ले ठाकुरे सही तहर अनेक कथा वार्ता होलो उस दिन काली मंदिर में भोग वगैरा समाप्त हो जाने के बाद में वही भैरवी ब्राह्मणी आई और उसकी ठाकुर के साथ में बहुत बहुत लंबी वार्तालाप चला उसका एबम तीनी किछु दिन दक्षिणेश्वर थाक गले और वह कुछ दिन दक्षिणेश्वर में रह गई भैरवी एक टू माथा गरम छीलो भैरवी का सर थोड़ा सा गर्म था अर्थात की उसका टेंपर थोड़ा सा ज्यादा था बाद बाद में गुस्सा हो जाती थी तिनी सर्वदा श्री मा के जेमन रखना बखन कोरीते तमनी आभार शशाई तेन वो भैरवी जैसे सब समय मां को एक तरह से प्रोटेक्ट करके रखती थी मां को असुविधा ना हो इसका वह ख्याल रखती थी मां के लिए सब समय वह चिंतित रहती थी क्यों क्योंकि उनका एक मातृ स्वभाव था तो मां शारदा के लिए उनकी चिंता हमेशा से थी किंतु तमनी आबार शशाई तेन किंतु जिस तरह से वह मां के लिए चिंतित रहती मां के कल्याण साधन के लिए वह तत्पर रहती मां को कहीं पर असुविधा ना हो इसका वह ख्याल रखती तो साथ-साथ में ही वो उनको उनके ऊपर में शासन भी करती उनको डिसिप्लिन करने का उनको डांटने का काम भी करती कहती तू आमार जनन पां भात राखब ना राखी तो तोके त्रिशूल कोरे मेरे राखो तो कहती वो भैरवी ब्राह्मणी मां को क्या कहती कि तुम मेरे लिए पां भात रख देना और यदि पां आता भात नहीं रखो गी तो मैं मेरे पास में जो त्रिशूल है उससे तुमको मार दूंगी अच्छा अभी पाता बात क्या है बंगाली लोगों को तो पता ही होगा जो भात बनता है घर में उसको फिर आप ज्यादा समय नहीं रख पाते हैं वह तो बासी हो जाएगा यदि एक दो दिन रखना है वो फ्रिज का तो उस समय कोई चलन नहीं था तो यह लोग क्या करते हैं कि उसको पानी में भिगो करके रख देते हैं तो पानी में भिगो करके रखेंगे तो दूसरे दिन भी वह खाने लायक होगा उसको यह लोग पां आता भात कहते हैं हालांकि पां आता भात खाने से नींद वगैरह बहुत ज्यादा आता है क्योंकि वह फर्मेंटेशन जैसा थोड़ा सा हो जाता है किंतु खैर दैट इज अनदर मैटर तो बेलूर मठ में पहली बार मैंने पां आता भात खाया था मैंने पूछा यह है क्या अलग तरीके से बनता है ना कि क्या है बोला नहीं नहीं कल का ही भात है उसको भिगा दिया है पानी में बस मैंने कहा अच्छा तो थोड़ा सा खा लेते हैं तो खैर तो इस तरह से किसी-किसी को पां आता भात अच्छा लगता है क्योंकि फर्मेंटेड हो जाता है तो उसका टेस्ट भी थोड़ा सा बदल जाता है तो यहां पे भैरवी मां को कहती है कि तुम मेरे लिए पां भात रख देना क्योंकि क्या आप लोग जब साधन भजन करते हैं तो फिर यह समय का ख्याल नहीं रहता है जब ठाकुर साधन करते थे साधना करते थे काली मंदिर में पंचवटी के नीचे में बैठ कर के या तो फिर वह बेलतला में जाकर के तब समय कहां चला जाता था पता नहीं रहता था उस समय भी खाने का घंटी बजेगा काली मंदिर में सभी को एक साथ में खाने के लिए बैठना है तो उसके लिए आपको सब समय तैयार रहना है कि हां खाने का समय आ गया अभी मैं अपना मेडिटेशन या तो फिर अपना कंसंट्रेशन उसको छोड़ कर के वहां मंदिर के वह भोजनालय में जाऊं वहां पर खाऊं फिर आकर के मैं मेडिटेशन करूं इस तरह से फिर समय की वह चिंता नहीं रहती समय की चिंता आप कर ही नहीं सकते यदि आपको सही सही साधन भजन में डूब जाना है तो इसीलिए भैरवी ने शायद कहा होगा अभी यह मैं अनुमान करके कह रहा हूं कि पां भात रख देने से क्या होता है कि वह समय जभी चला भी जाता है भोजन का तो भी आप आराम से उसको खा सकते हैं तो भैरवी ने कहा कि वह किस भी को कोई भी एक समय आएगी बिना किसी टाइम के वह आएगी तो पां भात रहने से फटाक करके खा सकती है और यदि नहीं रखो गी तो मैं तुमको त्रिशूल से मार दूंगी श्या श्री मायर भय होई तो किंतु ठाकुर बोली तेन अभी यह त्रिशूल से मार देने की बात से मां को डर तो लगेगा ही थोड़ा सा किंतु फिर उन्होंने ठाकुर को भी जाकर कहा होगा तो यह भैरवी तो ऐसी बात कर रही है मुझे त्रिशूल से मार देगी यदि मैं उसके लिए पां भात नहीं रखूंगी तो तो फिर ठाकुर कहते थे तोमार भोई नहीं वो ठीक ठीक भैरवी से जनन एक टू माथा गरम तुमको चिंता करने की जरूरत नहीं है वह ठीक-ठीक भैरवी है इसके लिए उसका सर थोड़ा सा गर्म है देखिए कि यह शक्ति साधना है उसके बारे में ठाकुर ने ही कहा है कि बड़ी उत्कट बड़ी ही विकट साधनाएं होती है क्यों शक्ति साधना का एक अंग जो कि बड़ा प्रसिद्ध है जनरल पॉपुलेशन में अ शब साधना शब साधना का अर्थ क्या है कि आपको आधी रात को किसी स्मशान में जाना है वहां पर जलाने के लिए चीता पे जलाने के लिए यदि कोई शब डेड बॉडी लाया गया होगा तो उस डेड बॉडी को लेकर के आपको जमीन पर रखना है फिर उसके ऊपर में सब विधि करनी है फिर उसी डेड बॉडी के ऊपर में उसी शब के ऊपर में बैठ कर के मेडिटेशन करना है और फिर ठाकुर यह भी कहते हैं कभी-कभी क्या होता है कि श एकदम मुंह फाड़ करके आपके सामने देखेगा आपको भय दिखाएगा तो उस समय यह मुड़ी है या नाश्ता ऐसा कुछ लेकर के आपको पास में रखना है चना या मूंग ऐसा कुछ और जब शब मुंह खोलता है आपको डराने के लिए डेड बॉडी तो उसके मुंह में डाल देना है तो जिससे वह खाते-खाते ठंडा हो जाए शांत हो जाए तो इस तरह की साधना उसमें करनी होती है अभी देखिए कि प्रश्न है कि इस तरह की साधना का क्या तात्पर्य है या तो फिर महात्म्य क्या है या तो फिर इन सब चीजों की असर भी होती है कि नहीं वगैरह वगैरह यह प्रश्न है यह पंच मकार को लेकर के जो साधनाएं होती थी यह भैरवी चक्र जिसके बारे में हृदय ने कहा था हृदय अर्थात कि ठाकुर का भांजा ठाकुर का सेवक वो वो तो था बड़ा ही लं लंबा चौड़ा और बड़ा ही पहलवान की तरह सशक्त उसका स्ट्रांग बॉडी था किंतु जब वह वराह नगर मठ में एक बार आया था एकदम दुबला पतला हो गया था और उसका हेल्थ भी जैसे टूट गया था कमर भी जुग गई थी तो यह राजा महाराज तो देख कर के बड़े आश्चर्य चकित हो गए पूछा हृदय को अरे तुम्ही तो गुंडा शोंडा छिले य रकम केमन करे होलो अर्थात तुम तो हट्ट कट्टे थे गुंडे जैसे अभी यह क्या हो गया तुम्हारे शरीर को तो यह हृदय कहता है कि आप एक रात में एक से ज्यादा भैरवी चक्र करेंगे तो क्या होगा तो राजा महाराज नाराज हो गए अरे उसका लड़का भी उस समय साथ में था और हृदय क्या करता था घर-घर जाकर के कपड़े बेचता था व डोर टू डोर सेल्समैन का काम करता था साथ में उसका लड़का भी था तो वह जैसे ही ऐसा कहा हृदय ने कि एक रात में दो-तीन भैरवी चक्र करेंगे तो क्या होगा हेल्थ तो टूटने ही वाला है तो राजा महाराज ने नाराज हो कर के बोला यह तुम अपने लड़के के सामने कैसी बातें कर रहे हो यदि तुमको कोई उत्तर ही देना था तो कहना था कि भाई मैं बाद में बताऊंगा या तो फिर शब्दों को बदल कर के कुछ बोलना था तो जो भी है भैरवी चक्र का अर्थ ही वही है कि वह कोई एक तंत्र साधना करने को बैठेगा साथ में कुछ स्त्रियां रहेगी और फिर वह शराब मध्य पान करेगा शराब पिएगा और फिर स्त्रियों को लेकर के दुराचार करेगा ऐसा उस समय के समाज में चलता था तो उसकी वजह से तंत्र साधना या शक्ति साधना का बड़ा दुर नाम हुआ था तो किंतु देखिए कि यहां पर ठाकुर कहते हैं कि यह ठीक-ठीक भैरवी है यह तंत्र साधना के नाम पर शक्ति साधना के नाम पे शराब पी कर के दुराचार करना यह सब नहीं करती है वह ठीक-ठीक शक्ति साधना के जितने भी अंग उपांग है उसका अनुष्ठान करती होगी और इसीलिए उसका सर थोड़ा सा गर्म है सर गर्म क्यों रहेगा टेंपर हाई क्यों रहेगा बीच-बीच में नाराज क्यों हो जाएंगे इजली इतना क् क्योंकि ये साधनाएं बड़ी उत्कट होती है शक्ति साधनाएं यदि आप ठीक-ठीक उसको करने का प्रयास करेंगे तो पता चलेगा कि आपको अपने मन को 100% कंसंट्रेट करके रखना होगा और तनिक भर भी अपने भीतर में किसी भी तरह का लोभ मोह यह सब ना प्रवेश कर ले उसके प्रति आपको बड़ा ही सजा ग रहना होगा जैसे कि ठाकुर ठाकुर के मन में कभी इस तरह से वासना का उदय होता वासना का उदय होता नहीं किंतु उनको लगता कि वासना का उदय हो रहा है इमीडिएट वह जैसे कि बड़े ही जोर से गुस्सा करके वोह बोलते कि तुम क्या मेरा बिगाड़ लेने वाली हो तुम क्या कर लोगी मेरा ऐसा करके चिल्ला उठते तो मास्टर महाशय यह सब देखते और फिर वह अपना अनुमान करके कथामृत में लिखेंगे कि क्या वह माया रूपी वो कोई माया का स्वरूप धारण करके उनके मन को प्रलोभन करने के लिए क्या किसी ने आगमन किया है उनके मन के भीतर में इसलिए ठाकुर ऐसी बातें कर रहे हैं क्योंकि देखिए जब हम साधना करते हैं किसी भी तरह की आध्यात्मिक साधना स्पिरिचुअल प्रैक्टिसेस करते हैं तो दो एस्पेक्ट होते हैं एक तो है कि हमको साधना करनी है वो एक बड़ी इंपॉर्टेंट बात है साधना करने के लिए आपके जीवन में एक तरह की नियमितता चाहिए यदि मैं ठीक किया कि मैं आज बैठ कर के प्रतिदिन आधा घंटा मेडिटेशन करूंगा आधा घंटा जप करूंगा तो वह आधा घंटा मेडिटेशन आपको प्रतिदिन करना होगा जीवन के जितने दिन बचे हैं तब तक आपको मेडिटेशन करना होगा तब कहीं जाकर के उसका कुछ अच्छे से आपको लाभ मिले आप यदि ऐसा बोलेंगे मैं वीक एंड में बैठ कर के तीन-चार घंटा मेडिटेशन कर लूंगा फिर वीक डेज में और कुछ नहीं करूंगा अर्थात कि जब मेरा स्कूल कॉलेज या तो फिर यह जॉब है बिजनेस है चलता रहेगा तब तक तो मेरे पास में टाइम ही नहीं है सैटरडे संडे जद थोड़ा टाइम मिलता है तो मैं बैठ करके पूरे स पूरे सप्ताह का वह मैं निपटा लूंगा तो ऐसा करके नहीं चलेगा या तो फिर यदि आप ऐसा कहते हैं कि मैं वीकेंड में करूंगा तो वीकेंड में भी आपको नियमित करना होगा जितने जीवन के वीकेंड बचे हैं उतने वीक एंड को आपको एकदम रेगुलरली नियमित रूप से मेडिटेशन करना होगा य रेगुलेरिटी इज अ बहुत बड़ा फैक्टर है टू बिकम एक्सपर्ट टू बिकम सिद्ध इन मेडिटेशन तो यह तो एक एस्पेक्ट हो गया दूसरा एस्पेक्ट है कि मन के भीतर में जब कामना वासनाओं का उदय होता है जिसको कि हम शड रिपु कहते हैं म मद लोभ मोह मत्सर वगैरा काम क्रोध मद लोभ मोह मत्सर वगैरह तो इन क्षण रिपं के साथ में सब समय हमको लड़ते रहना है उस समय लड़ते लड़ते लड़ते यदि अपना विल पावर है अपनी संकल्प शक्ति है थोड़ा सा भी यदि वीक हो गया तो माया फट कर के आक के अपने सर के ऊपर में बैठ जाएगी फिर अपने को इस तरह से नचाए गी जैसे कि वह जो आर्टिस्ट होते वह कठपुतली को किस तरह से नचाते हैं यह पपेट शो कभी देखा होगा आजकल तो यह सब देखने को नहीं मिलता हम लोग तो जब छोटे थे तो हमारे वह सोसाइटी में इस तरह से हुआ करता था उस समय तो यह मोबाइल वगैरह इतना था नहीं तो एंटरटेनमेंट के कोई साधन भी नहीं थे हम लोग जैसे ही शाम हुई स्कूल से वापस आए तो हमारे अपने मित्रों के साथ साथ में या तो वह क्रिकेट खेलेंगे वह जो गली होती है शेरी वहां में या तो फिर यह हाइड एन सक जिसको संता कोकड़ी कहते हैं गुजराती में या तो फिर ये यही कुछ ना कुछ खेलते रहेंगे अपने मित्रों के साथ में और फिर उसमें इस तरह के लोग भी कुछ आते हैं पपेट शो आता है तो वह पपेट आप देखेंगे कि एक आदमी है पर्दे के पीछे में रह कर के वह जो गुड़ियां होती है कठपुतलियां पपेट्स उसको वह नचाते रहता है वो दोरी बांधी हुई है तरह से तो यदि हम इस कामना वासना का एक बार शिकार हो जाए तो फिर अपना जीवन पूरा जैसे कि उनके भरोसे दे देना हो गया वह हमको एक कठपुतली की तरह एक पपेट की तरह पूरा जीवन भर नचाए गी तो इससे बचने के लिए विल पावर बड़ा ही स्ट्रांग चाहिए जैसे ही थोड़ी सी भी वासना अपने मन में उदय होती है जैसे ही थोड़ा सा भी काम भाव जिसको कि लष्टम ग्रीड वगैरा जो बैड डिजायर्स है जैसे ही अपने मन में थोड़े से भी प्रकट होते हैं वैसे ही यह संकल्प रूपी विल पावर रूपी यह खड़ग निकाल कर के एकदम धमकी दे कर के कहना है खड़ग यानी कि स्वर्ड तलवार तलवार का एक स्वरूप है वह तो उसको निकाल करके उसको एकदम धमकी दे कर के कहना है कि बिल्कुल मेरे मन में प्रवेश करने का प्रयास किया तो एकदम काट दूंगा इस स्वर्ड से लेकर के इस खड़ग से लेकर करके यह धमकी देने की कैपेसिटी अपने मन में होनी चाहिए तभी हम इस लस्ट ग्रीड वगैरह से कामिनी कांचन जिसको कि ठाकुर कहते थे उससे हम मुक्ति पा पाएंगे और जिसका विल पावर थोड़ा सा भी कम है उसको देखेंगे कि इस तरह के लोग बड़े ही सहजता से काम भाव के शिकार हो जाते हैं ठाकुर जिसको कहते थे धीमे तेताला अर्थात कि वो एक भिजा हुआ एक पापड़ की तरह वो जिस और जैसे ही जब ध्यान करने को बैठे हैं मेडिटेशन करने को बैठे हैं जैसे ही मेडिटेशन करने को बैठे भीतर से ऐसा समाचार आया कि मेरे अभी पैरों में दर्द कर रहा है तो हम सोचेंगे अच्छा ठीक है चलो पैरों में दर्द कर रहा है छोड़ दो मेडिटेशन अभी बाद में बैठेंगे फिर कुछ समय के बाद में बैठे तो भाई भीतर में से दूसरा एक न्यूज़ आया कि अभी मुझे चाय पीने की इच्छा हुई है तो फिहाल सोचा अच्छा ठीक है चलो चाय बना कर के पी लेते हैं बाद में बैठते हैं फिर बैठे तो फिर तीसरा समाचार आया कि अरे नहीं अभी और मने हर समय हम कुछ भी करते रहेंगे देखेंगे कि कुछ ना कुछ व्याघात कुछ ना कुछ उसमें इंटरप्शन आते रहेंगे और जैसे ही ये इंटरप्शन आए वैसे ही हम मेडिटेशन छोड़ कर के दूसरा कार्य करना शुरू कर देंगे अपने भीतर में थोड़ा सा भी ये विल पावर नहीं है कि हां हम डट कर के बैठे कहे कि नहीं जब तक ये मेरा आधा घंटे का व्रत ये जो प्रॉमिस मैंने अपने आपको किया है कि मैं प्रतिदिन आधा घंटा जब ध्यान करूंगा ही करूंगा जब तक वह समाप्त ना हो जाए तब तक खड़े नहीं होना यहां से यह संकल्प शक्ति विल पावर जब तक नहीं जन्मे हमारे भीतर में तब तक हम स्पिरिचुअल लाइफ में आध्यात्मिक क्षेत्र में बहुत ज्यादा आगे नहीं बढ़ पाएंगे तो यह विल पावर जिसमें होता है वह सही सही तपस्वी होते हैं और अभी देखिए एक तो हो गया कि विल पावर का बड़ा आवश्यकता है दूसरी ही और जो शक्ति साधना करता है तंत्र साधना करता है अभी देखिए कि तंत्र साधना और बाकी सब साधना में डिफरेंस क्या है आप वेदांत साधना करते हैं जो कि अद्वैत साधना है या तो फिर आप भक्ति साधना करते हैं ध्व साधना वैष्णव साधना उन सब में क्या होता है कि साधना में इट सेल्फ बड़ी प्योरिटी होती है वेदांत आपको कहेगा कि स्मरण मनन निदिद्यासन अर्थात कि आपको मैं ब्रह्मण हूं वह जो महामंत्र है उस महामंत्र के बारे में आपको स्मरण करना है उसके बारे में मनन करना है उसके बारे में निदिद्यासन करना है महावाक्य जिसको कहते हैं वेदांत में अभी वैष्णव साधना लंगे तो फिर उसमें भक्ति है श्रद्धा है प्रार्थना है शरणागति है पूजा पाठ है तीर्थ यात्रा है साधु संग है इस तरह की पवित्र बातें आती है तो वेदांत और वैष्णव साधना पद्धति ही इतनी पवित्र है कि साधना करते-करते एटलीस्ट आपके मन में कोई बहुत ज्यादा विकार नहीं प्रकाशित होगा साधना समाप्त करके जैसे ही आप दिन प्रतिदिन का कार्य चालू करेंगे उस समय मन में कुछ प्रॉब्लम हो सकता है किंतु साधन पद्धतियां अपने आप में बड़ी प्योर होती है तो आपका नॉर्मल विल पावर थोड़ा सा स्ट्रांग करने से आप काम चला सकते हैं शक्ति साधना का प्रॉब्लम यह है कि उसकी साधन पद्धति है वह थोड़ी सी विचित्र है थोड़ी सी ही नहीं बहुत ज्यादा विचित्र है जैसे कि ठाकुर खुद जब शक्ति साधना करते थे तो भैरवी ब्राह्मणी ने क्या किया था एक अ स्कूल जिसको कहते हैं मनुष्य का जो यह स्कूल होता है अर्थात कि मनुष्य का डेड बॉडी उसके भीतर में यह जो सर का यह जो स्केलेटन होता है खोपरी जिसको बोलते हैं हिंदी में तो यह स्कूल लेकर के उसके भीतर में मनुष्य मांस का एक टुकड़ा रखा उसको राधा और फिर उसको ठाकुर को कहा कि ठाकुर आप इसको भक्षण कीजिए तो ठाकुर तो एकदम बड़े ही घृणा में बोलते हैं कि एकदम घृणा होगी तो इस तरह की स्कूल के भीतर में आप मनुष्य मांस का टुकड़ा किसी को ऑफर करेंगे कौन खाएगा तो किंतु क्या है कि देखिए ईश्वर साधना यदि करनी है तो लज्जा घृणा भय यह सब त्याग करना होगा तो अभी आपको यह त्याग करने के लिए जाती अभिमान है कि मैं ब्राह्मण हूं वगैरह त्याग तो आपको करना ही पड़ेगा तो वह त्याग करने के लिए आपको यह सब करना है तो चलो यह भी आपने थोड़ा बहुत खा लिया किंतु जिस दिन भैरवी ब्राह्मणी एक सुंदर युवती को लेकर के आई उसको निव स्त्र किया और ठाकुर को कहा कि उसकी गोद में बैठ कर के अभी आप मंत्र जप कीजिए तब ठाकुर ने कहा कि अरे जगदंबा मेरी यह कैसी परीक्षा ले रही है किंतु खैर यह आपको काम भावना के ऊपर में भी विजय प्राप्त करना है कैसे भी कर कि इस साधना में उत्तीर्ण तो होना ही है तो ठाकुर ने मां मां करते-करते उस युवती की गोद में बैठे और जैसे जप करने का प्रारंभ किया वैसे ही उनका मन उच्च समाधि में मग्न हो गया भाव राज्य में डूब गया तो फिर उसके बाद में भैरवी ठाकुर को कहती है कि आप वीरासिंघे बड़ी डेंजरस है जो लोभ जो प्रलोभन आपको दिन प्र प्रतिदिन के कार्य में आएंगे वैष्णव साधना या वेदांत साधना में वह लोभ और प्रलोभन शक्ति साधना में साधना का ही एक पार्ट है अभी देखिए कि साधना करते-करते ही प्रलोभन आते हैं साधना करते-करते ही भय आता है साधना करते-करते ही घृणा प्रकट होती है तो यह भय लोभ घृणा उसका सामना करने के लिए आपका जो विल पावर होना चाहिए वो भयानक विल पावर होना चाहिए यदि एक भयानक स्ट्रांग विल पावर नहीं रहेगा तो शक्ति साधना इजली आपके मन को भ्रष्ट कर देगी तो इसीलिए यहां पर ठाकुर कहते हैं कि यह भैरवी जो है वो ठीक-ठीक साधिका है ठीक-ठीक भैरवी है उत्कट साधनाएं उसने की है और उस साधना करके बाद में भी उसने अपने मन को ठिकाने पर रखा है यानी कि इसका विल पावर इसका गुस्सा करने की शक्ति उसको प्रलोभन में डालने वाली शक्तियां जब सामने आती है तो उसका मुकाबला करने का जो एक एक भीतर में से जो जोश उत्साह होता है व इतना स्ट्रांग है और इसकी वजह से इसका सर थोड़ा सा गर्म है यानी कि वह हाई टेंपर है शॉर्ट टेंपर है छोटी-छोटी बातों में नाराज हो जाती है इसलिए ठाकुर ने मां को कहा कि वह ठीक-ठीक भैरवी है इसलिए तुमको ऐसा कहती है कि पां आता भात रखो वरना तो त्रिशूल से मार दूंगी तुमको किसी भी तरह की चिंता करने की जरूरत नहीं वह कि कभी भी तुमको मारेगी नहीं तो इस तरह से यह पूरान दोनों के बीच में डायलॉग हुआ महाराज जी आगे लिखते हैं भैरवी कोनो कोनो दिन य तो भिखा कोरिया आनी तेन सात आठ दिन चली तो यही भैरवी कभी-कभी इतनी भिक्षा करके ले आती कि सात से आठ दिन तक चलती वह भिक्षा तो इसलिए कालीबाड़ी र खजान च बोली तेन मां तुही केनो बायरे बखाई जाओ खाने ते पारो कालीवाड़ा भजन जी कहता कि मां भैरवी ब्राह्मणी को कि मां तुम बाहर में भिक्षा करने के लिए क्यों जाती हो तुम यहां पर ही भिक्षा प्राप्त कर सकती हो तो जैसे ही वह ऐसा कहता अभी ब्राह्मणी तो है शॉर्ट टेंपर यदि आपको उसको ऐसा कहेंगे पूछेंगे कि आप इस तरह का काम क्यों करते हैं तो उसका तो टेंपर एकदम जाने ही वाला है तो भैरवी क्या कहती तू या हमार काल नेमी मामा तोर कथाए विश्वास की माने तुम मेरे काल नेमी मामा हो तुम जो कहोगे इस बात मैं विश्वास कैसे रखूं कालनेमी एक राक्षस था रावण ने भेजा था जब हनुमान लक्ष्मण को जब इंजरी हुई थी लक्ष्मण जब घायल हो गए थे युद्ध मैदान में और उनके लिए व औषधि लाने के लिए हनुमान जी को भेजा गया था उस समय रावण ने इस कालनेमी राक्षस को भेजा था कहा था कि कैसे भी करके तुम हनुमान का वध कर दो तो मैं तुमको मेरा आधा राज्य दूंगा तो खैर हनुमान जी का वध करना तो इतना आसान नहीं है वो राक्षस का ही वध हो गया किंतु वो था राक्षस कालनेमी तो यहां पर वो भैरवी कहती है तुम मेरे कालनेमी मामा हो अर्थात कि तुम एक राक्षसी व्यक्ति हो राक्षसी तो तुम जो कहोगे उस बात पर मैं विश्वास कैसे करूं आज तुम कहते हो कि कालीवाड़ा ले लो कल बोलोगे नहीं मिलेगी भिक्षा तो फिर मैं कहां पर जाऊंगी इसके लिए मैं भिक्षा तो बाहर से ही करूंगी देखिए कि अभी यह छोटी सी बात है किंतु छोटी सी बात में भी यह जो भैरवी का जो टेंपर है वह कैसा दिखाई देता है और ये जैसे कि अपने शास्त्र में दुर्वासा मुनि की बात है कि उनका टेंपर बड़ा हाई था बाद बाद में वह नाराज हो जाते थे तो हमको कभी-कभी होता है कि जो आध्यात्मिक व्यक्ति होते हैं वे लोग गुस्सा इतना क्यों करते हैं यह बात मैंने भी फेस की है कोई कोई अच्छे साधु मुझे मिले हैं देखा है कि उनका भी बड़े शॉर्ट टेंपर होते हैं तो मैंने सोचा कि ऐसा क्यों है भाई तो यह सबके पीछे में किंतु लॉजिक वही है कि साधना करते-करते मन के सामने प्रलोभन आएंगे ही आएंगे और प्रलोभन का सामना करने के लिए विल पावर बड़ा ही प्रचंड सशक्त होना चाहिए वरना तो यह प्रलोभन हमको खा जाएंगे हमको कठपुतली बना देंगे बाहर से साधक का भेष रचा हुआ है भीतर में से सब खोखला है तो ऐसी परिस्थिति ना आ जाए इसके लिए तलवार लेकर के खड़ग लेकर के सब समय तैयार रहना है जैसे ही माया अपना मन लुभाने के लिए आती है वैसे ही धमकी देके कहना है भागो यहां से वरना काट देता हूं इस तलवार से तो यह शक्ति जब होगी तो नेचुरली है कि टेंपर थोड़ा सा शॉर्ट तो हो ही जाएगा तो इसको हमको थोड़ा सहन करना है देखिए कि टेंपर शॉर्ट होना या गुस्सा करना तमस से भी होता है बहुत सारे तामसिक लोग होते हैं जो कि छोटी-छोटी बातों में गुस्सा करते हैं तो इस तमस से बने हुए गुस्से को और यह साधना से प्रकट हुए गुस्से को कभी हमको इक्वेट नहीं करना है इन दोनों में आसमान जमीन का फर्क है तमस से बना हुआ गुस्सा इसलिए प्रकट होता है कि कामना वासना के व भोग में जब विघ्न पड़ता है तब इनको गुस्सा आता है जो व्यक्ति जभी वह लोलुप अवस्था में होता है तो अभी एक बड़ा ही सुंदर उदाहरण है मां का ही है मां उद्बोधन में रहती थी तो अभी मां का उस समय बालिका भाव आखिर आखिरी दिन में मां का कैसा एकदम बालिका भाव जैसा हो गया था तो एक दिन मां अपने वो उद्बोधन के फर्स्ट फ्लोर पर रहती थी बाहर में एक वरांडा जैसा वरांडा जैसा है एक गैलरी जैसा है तो वहां पे मां किसी कारण से गई तो अभी वहां पे क्या है ना कि पास में ही कुछ अ प्रॉस्टिट्यूट्स रहा करती थी तो अभी आज का उद्बोधन देख कर के यह बात सुनक आश्चर्य होगी किंतु खैर उस समय में ऐसा था तो मां अपने वो वो गैलरी में गई वहां पे रांडे में और देखा कि एक आदमी है कि जहां पर यह नाच गान हो रहा है स्त्रियों का वह वहां पर जाने का प्रयास कर रहा है किंतु वह दरवाजा बंद था और उसको प्रवेश नहीं मिल रहा था हो सकता है कि उसके पास में पैसे नहीं होंगे जो भी कारण है तो वह आदमी कभी इधर से नजर डालता है व खिड़की में से कभी वह दरवाजे में से प्रवेश करने का प्रयास करता है किंतु प्रवेश नहीं कर पाता है तो एकदम फ्रस्ट्रेट हो जाता है तो वो देख कर के मां एकदम बच्ची की तरह हंसते-हंसते वो एक डिवोटा है लेडी डिवटी वहां पे बैठी थी उसको बुला कर के कहती है देखो देखो वो आदमी को देखो उसकी वासना के भोग में जब बाधा पड़ती है तो कैसा फ्रस्ट्रेट होकर के कभी खिड़की से देखता है कभी दरवाजे से प्रवेश करने का प्रयास करता है बिल्कुल बच्ची की तरह खुश होकर के मां ये बता रही है जो ये लेडी डिवटी जिसने कि ये रेमनी सेंस लिखा है वो बोलती है कि मैंने वो जा करर के देखा तो सही में वो आदमी बेचारा फ्रस्ट्रेट हो गया था गुस्सा करता है वहां से प्रवेश करने का एंटर करने का प्रयास करता है कभी यहां से एंट्री करने का प्रयास करता है लेकिन तु कर नहीं पाता है तो मां कहती है देखिए वासना के भोग में जब भी कभी भी इस तरह का यह आएगा किसी भी तरह का डिस्ट्रक्शन आएगा तो फिर देखिए कि व आदमी किस तरह से नाराज हो जाता है तो यहां पे भी देखिए कि तमस से प्रकट हुआ गुस्सा और साधना से प्रकट हुआ गुस्सा ये दोनों कंप्लीट डिफरेंट है इन दोनों को कभी इक्वेट नहीं करना है जब भी आप कोई भी मनुष्य गुस्सा करता है और क्या है कि हम लोगों के पास में एक अंतर दृष्टि होती है इंस्टिंक्ट होती है जब भी हम सामने वाले के साथ में बात करते हैं हमको समझ में आता है कि यह किस तरह से किस पर्पस से बिहेव कर रहा है यदि साधना से प्रकट हुआ गुस्सा है तो वह जब हम पर गुस्सा करेगा ना हम बहुत ज्यादा माइंड नहीं करेंगे अपने संघ में इसको कहा जाता है कि यह कर्म आपका वो ये धीरे-धीरे करके क्षय हो रहे हैं यदि ऐसे किसी साधु के साथ में आपका पोस्टिंग हुआ है जो कि बड़े गुस्सा वाले हैं तो उनकी डांट सुन कर के हमारे सीनियर साधु कहेंगे कि यह जो बड़े गुस्सा वाले साधु हैं ना उनकी डांट सुनोगे तुम्हारे कर्म अक्षय हो जाएंगे अच्छा है तुम्हारे लिए तो हम भी बड़े अपने को ब्लेसेडनेस वाले साधु की डांट सुनी तो हमको आशीर्वाद मिला यह जन्म जन्मांतर क्योंकि क्या है कि डांट सुनने से मन में गुस्सा आता है एक अपने भी मन में गुस्सा आएगा कि वह क्यों मुझे डांटते हैं किंतु गुस्स आने के साथ-साथ में ही हमको वह शरणागति का भाव लाना है कि अरे ठाकुर के लिए तो हम सभी लोग यहां पर इकट्ठा हुए हैं तो ठाकुर के प्रति हमारी शरणागति बढ़े अपना अहंकार खत्म हो इसके लिए तो हम यहां पर आए हैं उस साधु ने मुझे यदि डांटा है उस बड़े महाराज ने यदि मुझे डांटा है और मेरे मन में गुस्सा हुआ है इसका अर्थ है कि मेरे मन में अहंकार प्रकट हुआ है तो इस अहंकार के सामने यदि मैं किसी भी तरह से आवाज नहीं उठाऊं गा तो फिर क्या होगा कि मैं अपनी साधना में पूर्णता प्राप्ति नहीं कर पाऊंगा इसके लिए जब भी कोई हमको डांटता है इमीडिएट मन में जो गुस्सा आता है उस गुस्से को हमको कंट्रोल करना है उसको सब्लाइम करना है उसको ट्रांसड्यूसर करके हम लोग अपने अहंकार के ऊपर में विजय प्राप्त करेंगे तो यह सब समय अपने अहंकार के ऊपर में विजय प्राप्त करने की साधना ना हमारे मन में चलती रहती है जैसे ही मेरे मन में गुस्सा आया तो वैसे ही उसके ऊपर में कंट्रोल करना है क्योंकि मुझे अहंकार से मुक्ति पानी है यदि कोई मुझे डांटता है और मुझे एकदम उससे भी गुस्सा आया तो उसके ऊपर में भी मुझे विजय प्राप्त करनी है ऑन द अदर हैंड जब माया मेरा अहित करने को आएगी एक विषम स्वरूप धारण करके लोलुपता कामुकता का स्वरूप धारण करके माया जद मेरे पास में आती है तो वही अहंकार वही व क्रोध रूपी शत्र उठा कर के उसको मारना है यानी कि ये अहंकार और क्रोध को सब्लाइम करना है ठाकुर क्या कहते हैं कि गुस्सा है अहंकार है वैसे तो वह जाएगा नहीं उसको मोड़ फिर देना है अर्थात कि उसका उसका जिस डायरेक्शन में जा रहा है उस डायरेक्शन में से उसकी डायरेक्शन चेंज कर देनी है किस तरह से यदि मैं तामसिक हूं और मेरे मन में गुस्सा आता है तो क्यों आता है क्योंकि मैं कुछ विषय के भोग है वोह भोगना चाहता हूं उसमें की बाधा आ रही है उसमें डिसर पशन आ रहा है इसलिए मेरे मन में गुस्सा आता है अच्छा गुस्सा आता है ठीक है वेरी गुड अभी उसी गुस्से को तुम उसका डायरेक्शन चेंज कर दो माया जब मेरा अहित करने को आएगी उसी के सामने यह गुस्स रूपी शस्त्र उठाओ उसी माया को काट दो तो यह गुस्सा हमने गुस्से का यह नहीं कि हमने गुस्से से मुक्ति प्राप्त कर ली है क्रोध से मुक्ति प्राप्त कर ली है हमने क्रोध को सुसंस्कृत किया है क्रोध को हमने ट्रांस ड कर दिया है उसको सूक्ष्म स्वरूप सब्लाइम कर दिया है तो ट्रांसडिफरेंटशिएशन सेंडिंग माय डिजायर्स फ्रॉम द वर्ल्डली थिंग्स टू द हायर थिंग्स सो दिस इज द साधना और यहां पे भी देखिए कि किस तरह से यह भैरवी ब्राह्मणी है उसका गुस्सा बड़ा ज्यादा था तो साधना करते-करते उसने यह गुस्सा रूपी य क्रोध रूपी शस्त्र को उसने ऐसा तीक्षण करके रखा था कि जैसे ही माया उसके सामने आएगी फट करके वोह माया को काट देगी और इसीलिए यहां पर छोटी-छोटी बातों में कि कालीवाड़ा जांची ने कहा कि आप यहां पर भिक्षा ले लीजिए तो उसके सामने वह क्रोधित होकर के कहती है कि तुम्हारी बात पर विश्वास क्या है तुम तो काल नेमी राक्षस हो आज भिक्षा दोगे कल नहीं दोगे मुझे क्या पता इसलिए बेटर है कि मैं अपनी भिक्षा को मैं अपना ही व्यवस्था करूंगी तो यहां पर बात सिर्फ यह नहीं है कि कौन से प्रसंग हो रहे हैं कालीवाड़ा जी के साथ में क्या बात हो रही है या तो फिर मां के साथ में क्या बात हो रही है यहां पर देखना है कि भैरवी ब्राह्मणी की साइको लजी क्या है ठाकुर किस तरह से यह साइकोलॉजी समझ कर के एकदम परफेक्ट करके बोल देते थे कि भैरवी ब्राह्मणी का क्रोध है वह तमस से प्रकट नहीं हुआ है अपने किसी डिजायर में डिसर पशन खड़ा हो तो क्रोध आएगा उस समय यदि हम मर्डर करने को भी तैयार हो जाएंगे आज जगत में इतना क्राइम क्यों है लोग क्यों मर्डर करते हैं दूसरों की हत्या क्यों करते हैं क्योंकि मुझे यह भोग चाहिए यह मुझे मेरी डिजायर की चीज है डिजायर के सब आइटम्स से वह मुझे चाहिए नहीं मिल रहे हैं तो मैं मर्डर करूंगा ये जैसे न्यूजपेपर में हम पढ़ते हैं छोटी-छोटी बातों में अभी वह वाइफ ने हस्बैंड को पैसा नहीं दिया शराब पीने के लिए तो हस्बैंड ने उसकी हत्या कर दी या तो मैं इस तरह के छोटी-छोटी बातों में ही मुझे पैसा नहीं मिला मुझे यह खिलौना चाहिए था नहीं मिला यह चाहिए था नहीं मिला इसलिए गुस्से में आकर हत्या कर दी तो वो तमस से प्रकट हुआ क्रोध और यह साधना से प्रकट हुआ हुआ क्रोध ये दोनों में डिफरेंस है ठाकुर ने ये डिफरेंस समझ लिया और इसलिए मां को कहते हैं कि तुमको डर रखने की जरूरत नहीं है वो ठीक-ठीक ब्राह्मणी है इसलिए वो ऐसी बातें करती है अच्छा अभी इसके बाद में दूसरा प्रसंग है दक्षिणेश्वर जखन श्री मां और लखी देवी एक संगे थाकी तेन तखन ठाकुर भोर रात्रे नटाई सचे जाय बार पथे नवते पार्श्व आशिया डाकी तेन ओ लखी उठ रे उठ तोर खड़ी के तोल रे आर कतो घूमू भी रात पहाते चलो गंगाजल मुखे दिए मार नाम करो ध्यान जब आरंभ करे दे दक्षिणेश्वर में जब श्री मां शारदा देवी और लक्ष्मी देवी अर्थात कि ठाकुर के भाई की पुत्री उसका नाम था लक्ष्मी देवी जब एक साथ में रहते थे नबत में रहते थे उस समय ठाकुर सुबह को एकदम अर्ली मॉर्निंग को 3 बजे शौच के लिए जाएंगे टॉयलेट के लिए जाएंगे उस समय तो इंडोर प्लंबिंग था नहीं तो गंगा के किनारे ही झावतला बोरक के वहीं दक्षिणेश्वर में एक जगह है जहां पर आपको खुले में टॉयलेट करना होता था शौच करने के लिए जाना होता था तो सुबह को 3 बजे ठाकुर शौच करने के लिए जाएंगे अभी ठाकुर का कमरा और यह झाऊ तला यह दोनों के बीच में ही नबत आता है और नबत वही जगह जहां पर मां शारदा देवी रहा करती थी तो ठाकुर नौबत के पास में से जब पसार होंगे सुबह को 3:00 बजे वो चिल्ला करके कहेंगे लक्ष्मी को अभी क्या है मां का नाम देकर के पुकारना तो ठीक नहीं रहेगा वह सब ओल्ल्ड वर्ल्ड कन्वेंशंस होते थे मां ठाकुर का नाम देक नहीं पुकारेगी ठाकुर मां का नाम देक नहीं पुकारेंगे वो सब होता था तो लक्ष्मी दीदी के नाम पर मां को कहते हैं जैसे ठाकुर वो कहानी कहते हैं ना कि वह नई-नई बहू घर में आई है तो सास उसको डांटना चाहती है तो अभी नई बहू को कैसे कुछ कहे तो व फिर अपनी लड़कियों को डांटते है तो लड़की को काटने का अर्थ है कि लड़की के माध्यम से बहु तक वो मैसेज जाएगा कि इस तरह से नहीं करना है तो यहां पर भी वो ठाकुर कहना चाहते हैं मां को किंतु बोल रहे हैं लक्ष्मी को कि अरे लक्ष्मी खड़ी हो जा इतना सुबह हो गया है तो तुम्हारी वो चाची है उसको भी उठा और कितना घूम सोगी रात तो चलने को आई खत्म होने को आई गंगाजल से अपना मुंह धोलो फिर वो मां जगदंबा का नाम करो मेडिटेशन जप ध्यान आरंभ कर दो ऐसा करके ठाकुर चिल्लाते थे तब क्या होता था श्री मां और लखी देवीर घूम पातल हुई आशिया छ काज तरा तख नहीं उठिया पड़ी तन अभी क्या है कि यह सालों साल से अर्ली मॉर्निंग उठने का अभ्यास मां को भी हो गया था लक्ष्मी दीदी को भी हो गया था तो बाय द टाइम जब ठाकुर आते थे सुबह को 3:00 बजे उठाने के लिए तो ऑलरेडी उनकी नींद जो है वो समाप्त होने की ही थी और ठाकुर ने जैसे ही कहा वैसे ही यह लोग उठ जाती थी तबे शीते समय ठाकुरे ाा पायले श्रीमा मध्य मध्य लखी देवी के आरो निद्रा सुजोक दीवार जन्नई बोध होए आस्ते आस्ते बोली तेन किंतु क्या है ठंडी के दिन में विंटर सीजन में लक्ष्मी दीदी को और थोड़ी सी नींद मिले इसलिए मां शारदा देवी धीरे-धीरे से लक्ष्मी दीदी को कहती तू चुप कर और चोखे घूमना तुम कुछ बोलो मत चुपचाप थोड़ा सा ज्यादा सो लो क्योंकि क्या है विंटर सीजन में हम सबको पता है कि थोड़ा सा ज्यादा सोने का यदि मिलता है समय तो बड़ा अच्छा लगता है तो मां लक्ष्मी दीदी को कहेगी तुम चुपचाप लेटी रहो व ठाकुर की आंखों में तो वैसे ही नींद नहीं है वैसे ही तो वह पूरी रात सोते नहीं है बिना मतलब के वो झूठ मूठ के 3:00 बजे चिल्लाना शुरू कर देते हैं एक काम करो तुम और थोड़ा सा सो लो एनो उठ बार समय होई नहीं काक कोकिल डाके नहीं ड़ा दशनी अभी भी उठने का नींद में से उठने का समय नहीं हुआ है कवे है या तो कोकिल है यानी कि नाइटिंगेल नाइटिंगेल ये जो पक्षी होते हैं सुबह होते ही ये सब पक्षी अपना कलरव शुरू कर देते हैं जद आप प्राकृतिक जगह पर रहते होंगे तो तो दक्षिणेश्वर तो बड़ी ही सुंदर प्राकृतिक जगह थी तो इसलिए मां शारदा देवी लक्ष्मी दीदी को कहती है कि व तुम थोड़ा सा और सोलो सुबह तो हुई नहीं है पंखियो की ये जो पुकार है कलरव है वो भी तो सुनाई नहीं दे रहा है इसलिए थोड़ा सा ज्यादा सोलो कुछ भी मुंह से बोलना मत अब जब मां ऐसा कहती तब क्या होता ठाकुर तहा देर साड़ा ना पाले किंबा घूम भांगे नहीं मने करले कौतुक छले दर्ज नीचे जल ढलिया देते अभी ठाकुर जब वापस आएंगे शौच करके टॉयलेट से और झावतला से देखेंगे कि वहां पर दिया नहीं जल रहा है नबत के भीतर में यह लोग तो जद उठ जाएंगे तो दिया वगैरह जलाएंगे फिर वह हाथ मुंह धोएंगे फिर व वहां पर जब के लिए बैठेंगे तो थोड़ी सी आवाज भी होगी तो ना ही आवाज सुनाई दे रही है ना ही दिए का प्रकाश दिख रहा है तो फिर ठाकुर क्या करेंगे वह गंगा में से पानी लेकर के एक बाल्टी दरवाजा जो होता है उसके नीचे में से एक बाल्टी पानी फेंक देंगे भीतर में नबत के तो अभी क्या है ये लोग तो जमीन पर ही सोते थे खाट वगैरह तो कुछ था नहीं तो जैसे ही वह दरवाजे के नीचे में से पानी आया फट करके मां को और लक्ष्मी दीदी को उठकर खड़ा हो जाना पड़ता था क्योंकि यदि पानी भीतर में आ गया तो जिस चटाई के ऊपर में वो सो रहे हैं ब्लैंकेट के ऊपर में वो भीग जाएगा वो भीगे तो फिर उसको सुखाना एक तो बहुत बड़ी तकलीफ की बात है इसलिए ठाकुर ऐसा करते तखन बिछाना भिज बार भोए तहरा ताड़ा तड़ी उठिया पड़ी तेन एक एक दिन भिज आओ जाई तो अब जैसे ठाकुर पानी डाल देते दरवाजे के नीचे में से तब दोनों लक्ष्मी दीदी और मां खड़ी हो जाती कि यह बिछाना अर्थात कि बेड है जिस पर सोते थे वो भीग जाएगा और कभी-कभी भीग भी जाता था क्या करेंगे रूप करार फले क्रम लखी दीदीर अति प्रत्युष सज्जा ताग अभ्यास होया गया छेलो ऐसा करके करके ही लक्ष्मी दीदी का यह अभ्यास हो गया था कि बड़ी ही अर्ली मॉर्निंग हमेशा उठ जाती श्री मायर अनेक रात्रि थाकी ते निद्रा कथा पूर्वी लिपिबद्ध होया छ और मां का तो पता ही है सबको कि बड़ी ही अर्ली मॉर्निंग उठ जाती थी तो मां की यह बात तो सभी को पता है तो साथ में यहां पर लक्ष्मी दीदी को भी ये प्रैक्टिस हो गई थी ठाकुर इस तरह से लोगों को नींद से उठा कर के जब ध्यान करने को बिठाते थे अच्छा तो अभी आज यहीं तक अभी कल अभी कल तो नहीं मंडे को फिर से मिलते हैं ओम शांति शांति शांति हरि ओम तत्सत श्री राम कृष्णर्पण मस्तु हमारे ट्रेनिंग सेंटर में क्या होता था एक ब्रह्मचारी की ड्यूटी होती थी उसको हम घंटा ड्यूटी कहते थे तो सुबह को एकदम अर्ली मॉर्निंग वह 3:30 को उसको उठ जाना होता था और घंटा बजाना होता था पूरे ट्रेनिंग सेंटर में उसको ले जाकर के तो सभी को उठाने के लिए तो उसमें भी कोई कोई ब्रह्मचारी होते थे ना वो बड़े ही उनको अपनी ड्यूटी को सीरियसली लेते थे तो उनको पता रहता था कि कौन घंटी लगाने से उठ जाता है और कौन नहीं उठता जो नहीं उठेंगे ना उसके सर पर जाकर घंटी बजाएंगे मने ठाकुर स्वामी जी भी यह राजा महाराज एक दिन बेलूर मठ बना है नियम बना है कि सबको मंगल आरती में जाना है पक्का नियम से जाना है अभी राजा महाराज वगैरह तो क्या है जीवन भर जब ध्यान किया है पूरा अभी वो वृंदावन की घटना पता है ना कि वो प्रतिदिन वृंदावन में राजा महाराज थे स्वामी ब्रह्मानंद प्रतिदिन मध्यरात्रि को उठ करर के जप करना है तो एक दिन रात को ना उठ पाए तो फिर देखा कि एक बाबाजी अशरीरी बाबाजी माने प्रकाश के देह धारण किए हुए एक बाबाजी आकर के उनको उठा रहे हैं नींद में से कि उठ उठ तो तुम्हारा जब का समय हो गया तब राजा महाराज उठ खड़े हुए और जैसे ही ये प्रकाशमान बाबा जी को देखा वैष्णव बाबा जी तब उनको पता चला कि वृंदावन में इस तरह के बहुत सारे कोई साधक रहते हैं जो कि शरीर त्याग कर दिए हैं किंतु दूसरे साधकों को सहाय करने के लिए इस तरह से घूमते रहते हैं तो यही राजा महाराज जब बेलूर मठ में वो घंटी लगाना है तो उठना है तो नहीं उठ पाए तो स्वामी जी ने नियम किया कि आपको भिक्षा करके खाना होगा जिस दिन मंगल आरती में नहीं पाए तो अभी नियम तो सभी को पालन करना है राजा महाराज नहीं उठ पाए तो राजा महाराज को भी भिक्षा करना है तो स्वामी जी ने कहा राजा आज तुमको भिक्षा करके खाना होगा यहां किचन में से तुमको नहीं मिलेगा तो राजा महाराज कहते हैं ठीक है चलो अभी बड़े भाई कहते हैं गुरु वत गुरु पुत्रे शु तो गुरुवथा जेष्ठ जेष्ठ पिता ऐसा कुछ है तो मने हां ज्येष्ठ भ्राता समम पिता हां तो बड़े भाई है पिता जैसे हैं तो इसके पीछे की कहानी क्या है सब स्वामी जी अमेरिका से वापस आए और राजा महाराज ने उनको प्रणाम प्रणाम किया और यह बात कही ज्येष्ठ भ्राता समम पिता तो सामने स्वामी जी ने राजा महाराज को प्रणाम किया और कहा गुरु वत गुरु पुत्रे शु या दो एक दूसरे के प्रति कैसी श्रद्धा है दोनों की तो यही राजा महाराज को स्वामी जी कहते भिक्षा करके लाओ राजा महाराज भिक्षा करने के लिए निकले यहां पर स्वामी जी किचन में खाना नहीं ही खाते हैं वो वेट कर रहे हैं कब राजा महाराज आएंगे वापस जब राजा महाराज भिक्षा करके आए तो स्वामी जी ने कहा अरे देखो आज बहुत दिनों के बाद भिक्षा का अन्न खाने का पुण्य मिलेगा बोलकर के दोनों भिक्षा खाने लगे सो यह पूरा ट्रेडिशनल रहा है हां गुस्सा इसलिए करते थे क्योंकि वह
प्रश्न: मैंने सुना है कि बाबूराम महाराज बहुत गुस्सैल स्वभाव के थे।
बेलूरमठ में ट्रेनी अंडर ट्रेनी ब्रह्मचारी का जिमा उनके सर पर था तो अभी तो सब नए-नए आए हैं तो फिर तो डांटना तो पड़ेगा ही वरना कोई काम ठीक से नहीं करेगा तो उसके लिए अदर वाइज राजा महाराज बड़े मजे से रहते थे क्यों क्योंकि कोई जिम्मा नहीं था सब कुछ तो बाबूराम महाराज हैंडल कर रहे [हंसी] हैं तो अभी हमारे भी ट्रेनिंग सेंटर में मैं था तो अभी जिस आचार्य महाराज का ड्यूटी है सबको पढ़ाना अभी वह आप क्लास लेने को जा रहे देख रहे आधे लोगों का इंटरेस्ट ही नहीं तो फिर तो आपको थोड़ा सा तो भी थोड़ा दिखाना पड़ेगा ना आंख लाल करनी पड़ेगी वरना तो कैसे चलेगा किंतु यह गुस्सा जो है वह तपस्या का गुस्सा है वह उसका गुस्सा नहीं है तमस का गुस्सा नहीं है व जो ठाकुर की कहानी है ना वह पिताजी अपने लड़के को कहते हैं तुम शराब पीना छोड़ दो तो लड़का बोलता है आप थोड़ा टेस्ट तो कीजिए फिर टेस्ट करने के बाद पिताजी कहते हैं तुमको छोड़ना है छोड़ो मैं नहीं छोड़ने वाला [हंसी] वही वो वो ठाकुर के पास में जो आते हैं अभी य मास्टर महाशय एक आदमी को लेकर आए बोला कि तुमको ऐसी वो शराबी था बोला ऐसा तुमको एकदम स्ट्रांग शराब पिलाता हूं तो बोला अच्छा तो चलो चलते हैं तो ठाकुर के पास ऐसा बोल के लेके आए तो ठाकुर ऐसी बातें करते हैं फिर सामने देखिए मैं अपना खुद का एक्सपीरियंस
प्रश्न: संकल्प शक्ति बढ़ाने का सबसे अच्छा तरीका क्या है?
बताऊं आपको मैं मैं जब यहां पर आया था ना तो मैं ऐसा सोचता था कि अ जैसे ठाकुर खुद कहते हैं ना कि आप जैसे ही सूरज के नजदीक जाते जाएंगे वैसे ही पृथ्वी से दूर होते जाएंगे आपको अलग से कोई पृथ्वी से दूर जाना नहीं है तो साधना जैसे-जैसे करते जाएंगे तो जिस तरह से बाकी सब गुण राजी है सत्य अहिंसा अस्ते मैत्री करुणा मुदिता यह सब गुण जैसे विकसित होते हैं साधन करते-करते तो वैसे ही आपकी यह विल पावर भी विकसित होगा तो ऐसा एक एक कांसेप्ट था मेरे माइंड में तो किंतु मैंने देखा कि विल पावर एक ऐसा चीज है ना कि उसको आपको एक सेपरेटली डेवलप करना पड़ेगा व माने इसके बिना आपका काम नहीं चलने वाला है यदि मैं यह सोचूं कि हां मेरे मन में शरणागति जागृत हो तो आप आपने गुरु से आपने मंत्र लिया है दीक्षा ली है गुरु महाराज ने कहा है कि दिन में 108 जप करो 1008 करो जितना हो सके आधा घंटा एक घंटा जितना हो सके करो तो वह मैं कर रहा हूं और यह करके करके प्रतिदिन जप करके ध्यान करके मंदिर में जाकर के यह कर्म ज्ञान भक्ति ध्यान यह जो चार रास्ते हमको बताए गए हैं उसका अनुष्ठान करके मैं ये आशा रखता हूं कि हां शरणागति का भाव मेरा बढ़ेगा धीरे-धीरे अहंकार मेरा क्षय होगा ये कामना वासनाओं के प्रति ये जो है सब मेरा आकर्षण वो कम होगा ये एक वैलिड अपेक्षा है और यह अपेक्षा पूर्ण भी होती है किंतु यदि आपको विल पावर को बढ़ाना है तो आपको उसके लिए सेपरेट प्रयास करना पड़ेगा और इस प्रयास में सही में बताए तो और कुछ मतलब यह नहीं है कोई बच्चा स्टडी करता है तो आजकल मां-बाप उसको वह शंख पुष्पी वगैरह वह कितना सब कुछ उसको खिलाते हैं कि बोलेंगे कि यह खाएगा तो उसका ब्रेन थोड़ा सा तेज होगा किंतु सही बात में यदि आपको स्टडी करना है तो एक ही उपाय है कि स्टडी कीजिए देयर इज नो अदर सब्सीट्यूट टू स्टडी स्टडी इज द ओनली वे ऑफ स्टडिंग अब हजार शंख पुष्पी खा ले हजार चवन प्रास खा ले इट्स नॉट गोइंग टू सब्सीट्यूट योर डेली स्टडी डेली प्रैक्टिस तो विल पावर में भी ऐसा है आप हजार चीजें कर लीजिए ओनली विल पावर कैन गिव यू विल पावर देर आर नो सब्सीट्यूट्स बाकी जितनी भी साधनाएं है वह सब आपको जब ध्यान करके धीरे-धीरे आती रहेगी बट विल पावर यू विल हैव टू डेवलप अब जैसे मैं खुद का बताऊं मैं मैं वहां पे था नागपुर में मेरा पोस्टिंग हुआ था मैंने जॉइन किया बेलूर मठ में तो बेलूर मठ में जॉइन करने के बाद में मेरा नागपुर पोस्ट हुआ तो अभी क्या है कि पहले तो जॉइन करने से पहले तो दिमाग में हजारों चीजें चलती है किंतु एक सत विचार भी था जिस विचार को लेकर मैं यहां पर आया था किंतु जैसे ही मैंने जॉइन किया ये ब्रह्मचारी के कपड़े पहने तो मुझे लगा कि नहीं मन पर कंट्रोल लाना चाहिए अदर वाइज देयर इज नो वे कि फिर बाहर से कपड़े ही पहने हैं भीतर में से भ्रष्टाचार चल रहा है मेरा जीवन भी बर्बाद होगा बिना मतलब का बड़ा ही स्ट्रांग मुझे यह सब लेना है मैंने जो ठाकुर ने कहा है तो मैं क्या करता था पता है अ यदि आप नागपुर गए होंगे तो दो कैंपस है एक तो एक कैंपस में मंदिर है और साधु निवास है और दूसरे कैंपस में लाइब्रेरी है और पब्लिकेशन डिपार्टमेंट है बीच में एक रास्ता है तो अभी मैं रहता था वो टेंपल तो मेरा बड़ा शौक पहले से ही था तो प्रतिदिन मैं लाइब्रेरी वाले कैंपस में जाकर के दो-तीन घंटा बिताता था और फिर वापस अपने वो टेंपल कैंपस में वापस आता था अभी क्या था कि रास्ते के ऊपर में ही एक काली मंदिर है अबी यह काली मंदिर जिसने बनाया है उसी ने मठ चालू करने के लिए नागपुर मठ के लिए जमीन दी थी और इस तरह से जमीन का उसने डिवाइड किया था कि एक पोर्शन में काली मंदिर बने और एक पोर्शन में अपना रामकृष्ण मठ बने इस तरह से डिवाइड करके रखा था तो काली मंदिर का एंट्रेंस था किंतु रास्ते से तो मैं जब भी वो टेंपल कैंपस में वापस आता था मैंने देखा कि काली मंदिर है तो अभी एक दिन मैंने क्या किया वहां नागपुर में पोस्टिंग होने के आई थिंक एक महीने के बाद में ही पहली बार मैं काली मंदिर में गया और मां काली के सामने हाथ जोड़ कर के कहा कि आपने जिस तरह से ठाकुर की रक्षा की थी जिस तरह से ठाकुर के मन को आपने एकदम सशक्त बनाया था ठाकुर को साधना में सिद्धि प्राप्त करवाई थी आप मुझे भी थोड़ा सा सहाय कर दीजिए मैं ठाकुर के पास में भी बोल सकता हूं किंतु महाकाली का एक महात्म है हमारे रामकृष्ण संघ में तो फिर और मूर्ति भी ऐसे थोड़ी दक्षिणेश्वर जैसी थी वहां पर तो वो जाकर के बड़ा सिंसियर दो हाथ जोड़ कर के प्रार्थना करता था और मैंने उसके बाद में ऐसा नियम बना लिया जनरली मैं मंदिर मंदिर में कभी बहुत कम जाता हूं ब मतलब नवत गया हूं और बस यहां जवाइन करने के बाद में अपने मंदिर में जो जाना पड़ता है है वो तो एक जाना ही पड़ेगा अदर वाइज ये ट्रेडिशनल मंदिर है उसमें बड़ा रेयरली में जाता हूं तो किंतु दैट वाज वन पीरियड इन माय लाइफ मेरा मैं 2 साल वहां पर नागपुर में था प्रतिदिन एक महीने के बाद में यह प्रैक्टिस चालू की थी प्रतिदिन काली मंदिर में जाता था दो हाथ जोड़ कर के मां को प्रार्थना करता था कि यह एक चीज तुम मुझे दो यह मन के ऊपर में मेरा कंट्रोल हो बाकी सब मैं ठाकुर से मांग लूंगा ये चीज आपने ठाकुर को दी थी आप मुझे दीजिए सो उसके लिए वो एकदम मैंने लगना पड़ेगा आपको जैसे वो ठाकुर कहते हैं ना जब तूफान आता है तब वो जो खलासी होता है वो एकदम कमर कस के वो कैसे भी करके वह तूफान को पार कर लेता है फिर बैठ कर के आराम से शांति से तंबाकू खाएगा तो यहां पे भी आपको कमर कस के एक बार मेहनत कर लेनी है जैसे ही कामना वासना व थोड़ी ठंडी हुई उसके बाद में आप शांति से रहिए बट जब तक ये झड़ चल रही है देयर इज नो अदर सब्सीट्यूट फॉर स्ट्रांग विल पावर स्ट्रांग प्रैक्टिस मैंने वो आप हज प्रोटीन पाउडर खा ले आपको एक्सरसाइज इ नो सब्सीट्यूट टू एक्सरसाइज और एक्चुअली ना यह बात मुझे आज तक आश्चर्य होता है कि मैं मंदिर में चला कैसे गया जनरली ऐसा रास्ते में मंदिर आएगा मैं जाऊंगा नहीं मैं कब जाऊंगा एकांत जगह है और बैठ कर के मेडिटेशन करने की सुविधा है तो मैं जाऊंगा तो वोह मैं चला गया मांग लिया दैट इज सरप्राइजिंग इवन टू मी
प्रश्न: क्या ब्रह्म मुहूर्त ध्यान करने का सर्वोत्तम समय है?
टुडे एक एक है एक ब्रह्म मुहूर्त का महात्म अपने शास्त्रों में तो बड़ा ही अच्छे अच्छे से वर्णित है कि ब्रह्म मुहूर्त में यदि आप साधना करते हैं तो उसका बहुत ही अच्छा फल मल्टीपल होकर के मिलेगा यह एक बात है दूसरी एक बात है राजा महाराज कहा करते थे कि प्रत्येक जगह का एक महत्व है समय एक होता है जैसे कि वह भुवनेश्वर में थे तो कहते थे आधी रात को जो जप करेंगे उसका एकदम जबरदस्त फल मिलेगा और बेलूर मठ में वो जप करने का समय ब्रह्म मुहूर्त का कहा जाता है राजा महाराज का यह सब कहना है तो वो एक स्थान महात्मा के हिसाब से वो समय चेंज होता रहता है तो वह भी एक देखना पड़ेगा इन जनरल ब्रह्म मुहूर्त इज अ परफेक्ट रूल कि वो नियम का पालन करेंगे तो सब जगह पर अच्छा ही फल मिलेगा किंतु यदि आपने एकदम डीप में जाना है ना तो जब ध्यान आधी रात को करके ना अर्ली मॉर्निंग करके ना दोपहर को करके तीन संध्या होती है तो चार संध्या होती है एक तो है कि तीन संध्या अर्ली मॉर्निंग इवनिंग और आफ्टरनून और मिडनाइट चार संध्या होती है तो चारों संध्या हों प करके देख लेना है कि कौन से में ज्यादा वो हमको बेनिफिट होता है देन यू कैन कंटिन्यू डूइंग दैट किंतु क्या है कि देखिए वो सब तो अभी एकदम उच्च कक्षा के साधक है उनके लिए है कि मिडनाइट को जप करने से बहुत फल मिलता है तो फिर अभी साधकों को फिर क्या है सुबह को उठ कर के ना ही घर की चिंता करनी है ना ही खाना बनाना है तो उनके लिए ठीक है जिनको फिर ये सब इवन रामकृष्ण मिशन में भी हम सबको तो अभी ये क्लास खत्म होगा तो मुझे ऑफिस में जाकर बैठना है फिर मुझे यह नहीं कह पाऊंगा कि मैं आधी रात को जब कर रहा था तो दिन में ऑफिस में नहीं जाऊंगा ऐसा तो चलेगा नहीं सो वो थोड़ा एक प्रैक्टिकल भी होता है तो इन दैट वे ब्रह्म मुहूर्त इ बेस्ट किंतु यदि आप सही सही डीप में जाना चाहते हैं तो फिर चारों संध्या हों पर एक बार करके देख लेना है देखिए कौन सा फल अच्छा मिलता है हां आज राजा महाराज की तिथि पूजा है बिल्कुल ठीक बिल्कुल ठीक बिल्कुल ठीक