Transcript
ओम स्थापक यच धर्मस्य सर्व धर्म स्वरूपने अवतार वरिष्ठ राम कृष्णाय ते नमः श्री मां शारदा देवी का जीवन चरित्र अवतरण का में से हम पाठ कर रहे हैं बंगाली पुस्तक है उसका पृष्ठ संख्या है पांच कल हमने देखा कि गंभीरानंद जी महाराज कहते हैं शारदा देवी का जीवन चरित्र अन्य लोगों से किस तरह से डिफरेंट है तो वह अन्य लोग कौन है तो महाराज जी ने तीन क्राइटेरिया रखे हैं सर्वप्रथम तो जिनके भीतर में कर्म चांच है कर्म चांच किनके भीतर आजकल के ये जो टेक्स सीईओ आप देखते हैं व उनको देख कर के हमको बड़ा ही आजकल के लड़के बड़े ही इंप्रेस हो जाते हैं होना भी चाहिए मैं भी था एक समय ये बिल गेट्स और यह सब क्याक नाम हम लोग आजकल सुन सुते हैं आजकल लेटेस्ट जो है यह सेम ऑल्टमैन वो ओपन एआई का सीईओ तो देखिए कि इन लोगों ने अपनी प्रतिभा और कार्य शक्ति की सहाय से किस तरह की टेक्नोलॉजी डेवलप की है जो कि अपने जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में प्रवेश करके हमारे जीवन को समृद्ध करते हैं यह तो एक बात है और साथ में किंतु गंभीरानंद जी यह भी लिखते हैं कि यंत्रों की सहाय से मानव समाज के ऊपर में महान विकट एक भयानक एक परिस्थिति खड़ देना खड़ी कर देना एक भयानक संकट ला देना ऐसे लोग भी ऐसे इस जगत में है तो यही टेक्नोलॉजी आप देखिए कि कर्म चाचल जिनके जीवन में है वे लोग एक ऐसा टेक्नोलॉजी खड़ा करेंगे जो कि लगेगा अरे वाह बहुत अच्छा है बाद में एक ऐसे लोग प्रकार के लोग खड़े होंगे वही लोग इसी टेक्नोलॉजी का यूज करके एक ऐसी महान विकट परिस्थिति मानव समाज के लिए खड़ी करेंगे कि जिनका नाम इतिहास के पन्नों में चीर कलंकित हो जाएगा तो टेक्नोलॉजी का प्लस और माइनस दोनों है और साथ में महाराज जी ने एक तीसरा भी कैटेगरी बताया था वाग विडंबना वाघ विदं यानी कि जो लोग सतत कुछ ना कुछ बोलते रहते हैं किंतु जिनके वाघ आडंबर वाघ आडंबर तो जो लोग बोलते तो रहते हैं बहुत कुछ उनमें ना ही किसी मने कार्य करने की क्षमता होती है ना ही कुछ पॉजिटिव कंट्रीब्यूशन करने की क्षमता तो यह लोग बग बग बहुत ज्यादा करते हैं तो ये तीनों कैटेगरी के लोगों के बारे में हमने पढ़ा है न्यूजपेपर में दिन प्रतिदिन हम लोग पढ़ते रहते हैं किंतु साथ में महाराज जी लिखते हैं गंभीरानंद जी महाराज किंतु जय महान जीवन चरित्र जे महान चरित्र समूह नीरव साधन फले मानव संस्कृति के उच्चतर सूर्य बांध दिया जाए किंतु जो महान जीवन चरित्र नीरव साधना के करके मनुष्य संस्कृति को एक उच्च स्तर पर बांध करके जाते हैं जहा देर प्रभा समसामयिक दृष्टि ते क्षीण मने होले हो जिनकी प्रभा या तो फिर जिनका प्रभाव समसामयिक दृष्टि से अर्थात कि आज हम देख रहे हैं कि आज समसामयिक हुए हम ठाकुर महा स्वामी जी के 150 200 साल तो कोई बहुत बड़ी बात नहीं है आज हमको लगता है कि अरे ठाकुर म स्वामी जी को कितने लोग पहचानते हैं जैसे मैंने कहा था कि कितने लोग दीक्षित होंगे 101 लाख लोग होंगे हमारे एडमाइन 6 सात करोड़ है भारत की पॉपुलेशन 150 करोड़ है विश्व की पॉपुलेशन 750 800 करोड़ है तो उसमें से ठाकुर महा स्वामी जी के पहचानने वाले दीक्षित फॉलोअर्स अनुयाई डिवटी कितने होंगे 01 पर 1 पर ज्यादा से ज्यादा इससे ज्यादा तो नहीं होंगे तो समसामयिक दृष्टि से जिनका चरित्र हमको बहुत ज्यादा प्रभावशाली नहीं लगता आज के न्यूजपेपर में सोशल मीडिया पर ठाकुर महा स्वामी जी की बातें वायरल नहीं होती होती है तो किसी नेगेटिव कांटेक्ट में होती है जैसे कि बीच में हुआ था कि एक किसी एक मोट ल स्पीकर ने स्वामी जी के बारे में कुछ बोल दिया तो बहुत सारे लोगों को बुरा लगा इसलिए नहीं जैसे मेरा खुद का यह अनुमान है इसलिए शायद नहीं होगा कि स्वामी जी के बारे में बोला किंतु शायद इसलिए होगा कि चलो एक मौका है इसके साथ में झगड़ा किया जाए तो यह सब क्या है कि सोशल मीडिया यह पब्लिक मीडिया जो है वह एक कंट्रोवर्सी इनको बड़ा अच्छा लगता है तो वोह कंट्रोवर्शियल शायद वायरल होते होंगे किंतु ठाकुर महा स्वामी जी जैसे दिन प्रतिदिन यह जो मैसेज मैं यहां से भेजता हूं कितने लोगों को भेजता हूं बहुत रेयरली मुझे सामने कुछ ऐसा पॉजिटिव फीडबैक मिलता है कि हां हमने इस मैसेज को पढ़ा और हमको अच्छा लगा पहले शुरू शुरू में मिलता था कि यहां से हिंदी में भेजा ठाकुर का कोटेशन स्वामी जी का मेनली स्वामी जी का ही भेजते हैं हमारे सोशल मीडिया पर वैसे काफी फॉलोअर्स है तो किंतु फॉलोअर्स से किंतु मैंने देखा है कि इनका एंगेजमेंट इतना नहीं है हां ठीक है वो मैसेज शायद रिसीव कर लेते होंगे शायद फॉरवर्ड भी कर लेते होंगे किंतु पढ़ते कितना होंगे पता नहीं पढ़ने के बाद में कुछ जीवन में इसके बारे में चिंतन मनन भी करते होंगे कि पता नहीं क्योंकि यदि पढ़ते हैं और आप उसके बारे में सोचते हैं तो आपके मन में प्रश्न होगा एक्चुअली ये जो क्लासेस शुरू हुए उसे किसी ने अपने ही एक रीडर ने मुझे प्रश्न करना शुरू किया और फिर मैंने कहा कि अरे यदि रेगुलर क्वेश्चन है तो क्यों नहीं go8 के ऊपर में हम लोग कुछ दिनों के लिए इस तरह से बात करें क्लासेस करें तो व क्लासेस जो प्रारंभ हुए तो बीच में कुछ समय के लिए बंद हो गए थे फिर से स्टार्ट हुए तो ऐसा करते-करते मोर देन वन एंड हाफ इयर्स हो गया है तो किसी ने प्रश्न किया तो मुझे पता चला कि हां भाई चलो कोई तो इसके बारे में सोच रहा है वरना ज्यादातर लोग वो मैसेज लेंगे और पढ़ेंगे तो पढ़ेंगे वरना फॉरवर्ड करेंगे क्या सोचेंगे पता नहीं तो ठाकुर महास्वामी जी का जीवन ऐसा कोई वायरल होने योग्य नहीं है वायरल होने की डेफिनेशन वायरल होने की यह जो सब कंडीशन वो ठाकुर मा स्वामी जी के लाइफ और टीचिंग में नहीं है तो हमको लगेगा कि अरे इनके बारे में तो हम ना ही टीवी पर देखते हैं ना ही सोशल मीडिया में पढ़ते हैं तो उन्होंने क्या कर लिया है तो महाराज जी लिखते हैं समसामयिक दृष्टि ते क्षीण मने होलेयो सम सामायिक दृष्टि से आज हमको करेंटली ऐसा लगता है कि इसका ज्यादा कोई प्रभाव नहीं है दीर्घ काल स्थाई होय एवं क्रम विस्तार लाभ करिया थाके दीर्घ काल स्थाई होता है और क्रमशः विस्तार प्राप्त होता है श्री श्री माता ठाकुरानीर पूत चरित्र तहा देर परजय भुक्त जिनका जीवन चरित्र एकदम नीरव साधना से भरा हुआ है और जिनकी साधना के प्रभाव से इस भूमि को बल प्राप्त होता है धर्म का सिं होता है जैसे कि गुलाब का पौधा है तो हम उसमें खाद डालते हैं उसका केयर करते हैं तो वैसे ही यह जो यह व फर्टाइल भारत की धर्म भूमि को इनकी साधना सिंचित करती है और इससे भारत की भूमि और सिर्फ भारत ही क्यों पूरे विश्व में देखेंगे कि धर्म भाव जो जागृत रहता है तो ऐसे ही कुछ नीरव साधकों की वजह से यह वेस्ट में भी देखिए सेंट फ्रांसिस ऑफ एसीसी या तो सेंट टेरेसा ऑफ एवला जिनका जीवन चरित्र पढ़ेंगे तो लगेगा कि अरे वाह इन्होंने किस तरह से नीरव साधना की है और नीरव का तो पता नहीं किंतु साधना उन्होंने जेन्युइन की है और जेन्युइन साधना करके वेस्टर्न इंस्टीट्यूशंस और वेस्टर्न सोसाइटी को कितना बल उन्होंने दिया है तो वैसे ही बुद्धिज्म है वैसे ही जैनिज्म है सखि जम है कोई भी धर्म हो कोई भी सिंसियर रिलीजन हो उनके भीतर में संत महापुरुष आते ही जाएंगे जिनकी साधना की वजह से वोह धर्म धर्म भूमि और धर्म साधक ये सभी लोग बल प्राप्त करेंगे उन सभी के भीतर में एक नई एक रोशनी एक नई ऊर्जा नया सत्व नए ओजस का प्रभाव जागृत होगा आगे में महाराज जी लिखते हैं शुद्धू तहान है सिर्फ इतना ही नहीं सती सीता प्रवृति जे शकोल प्रातः स्मरणीय देर आगमन धर्म जीवने पंकल बदूर तो सिर्फ इतना ही नहीं सती सीता वगर जो प्रातः स्मरणीय देवियां है कितना सुंदर शब्द प्रयोग किया है जिनका नाम स्मरण हम सुबह में करते हैं उनको कहते हैं प्रातः स्मरणीय और देखिए ऐसे भीय का समय है और अपने क्लास में हम इनका नाम ले रहे हैं आप शायद आपके घर में यदि छोटा सा फोटोग्राफ वगैरह भी होगा ठाकुर मा स्वामी जी का एक छोटा श्रायन भी होगा तो भी आप प्रणाम करके सीताराम भगवान कृष्ण भगवान राम राम कृष्णा इनका जप ध्यान प्रार्थना वगैरह करते होंगे सुबह को जिनको याद किया जाता है सुबह को जिनका स्मरण किया जाता है वैसे इनको कहते हैं प्रातः स्मरणीय और स्त्रीलिंग इसलिए प्रातः स्मरणीय सती सीता जैसी प्रातः स्मरणीय देवियों के आगमन से धर्म जीवन की पंकल होता पंकल शब्द का अर्थ पं पंक अर्थात कादवनद होता है तो पंकल होता यानी कि मलिन कीचड़ विदुर तो हो जो विदूत होता है धर्म जीवन की मलिन दूर होती है और नब अभुदय सूत्रपात होया छलो और नव अभ्युदय का प्रारंभ हुआ था सूत्रपात नव अभ्युदय कितना सुंदर शब्द श्री मायर जीवनी तहा देर सम श्रेणी ते स्थापन श्री मां का जीवन ऐसे ही सती और सीता इनके समकक्ष सम श्रेणी ते वो मां का जीवन आता है जिनके आगमन से सती और सीता ऐसी देवियों का स्मरण सुबह में हमको करने योग्य है इनके आगमन से धर्म जीवन की मलिन जो दूर हुई थी और नव अभ्युदय का सूत्रपात हुआ था उनके जीवन की सम श्रेणी में हम मां का जीवन रख सकते हैं अभी एक प्रश्न होता है कि यहां पर महाराज जी ने कहा कि सती और सीता दोनों का नाम लिया तो जनरली जितने भी हम हिंदू हैं मां सीता के बारे में मां सती के बारे में तो हमको बहुत कुछ पता ही है किंतु फिर भी मैं आज सुबह को सोच रहा था मां सीता के बारे में और फिर मुझे याद आया कि स्वामी जी ने सीता के बारे में मां सीता के बारे में क्या कहा है तो यहां पर सजीस ऑफ इंडिया बोलकर के स्वामी जी का एक प्रवचन है वॉल्यूम थ्री कंप्लीट वर्ष का वॉल्यूम थ्री और उसमें पेज नंबर 255 के ऊपर में मां सीता के बारे में स्वामी जी ने बहुत ही सुंदर संक्षिप्त में किंतु बहुत ही सुंदर लिखा है वह थोड़ा सा मैं एक बार पढ़ता हूं स्वामी जी लिखते हैं एंड वट टू स्पीक ऑफ सीता सीता के बारे में क्या कहना यू मे एग्जॉस्ट द लिटरेचर ऑफ द वर्ल्ड दैट इज पास्ट इतिहास का जो साहित्य है उसको छान करके वह समाप्त कर दो एंड आई मे अशोर यू दैट यू विल हैव टू एग्जॉस्ट द लिटरेचर ऑफ द वर्ल्ड ऑफ द फ्यूचर और भविष्य में जो धर्म साहित्य आने वाला है उसको भी पूरा छान लो बिफोर फाइंडिंग अनदर सीता भूतकाल में जो धार्मिक साहित्य हुआ था लिखा गया था प्रकाशित हुआ था वर्तमान में भविष्य में जितना भी धार्मिक साहित्य लिखा जाएगा प्रकाशित होगा जिसके बारे में स्मरण मनन होगा वह पूरा छानबीन कर दो आपको शायद दूसरी सिता ना मिले सीता इज यूनिक सीता अनन्य है सीता के जैसा और कोई नहीं दैट कैरेक्टर वास डिपिक्टेड वंस एंड फॉर ऑल सीता का चरित्र हमेशा के लिए एक बार जो लिखा गया सो लिखा गया वंस एंड फॉर ऑल देयर मे हैव बीन सेवरल रामास पर हैप्स शायद हो सकता है कि एक से ज्यादा राम का जन्म हुआ हो एक से ज्यादा राम के बारे में लिखा गया हो बट नेवर मोर देन वन सीता किंतु एक से ज्यादा सीता धार्मिक साहित्य में मानव जीवन के इतिहास में नहीं मिलेगी और यही बात हम ठाकुर के बारे में भी कह सकते हैं कि भूतकाल का पूरा धार्मिक साहित्य संत महापुरुषों का जीवन चरित्र वर्तमान का भविष्य का सब पूरा छानबीन कर लो शायद दूसरे रामकृष्ण मिल सकते हैं किंतु दूसरी मां शारदा शायद दूसरी नहीं मिलेगी मां के बारे में भी मां का जो जीवन चरित्र एक बार जो लिखा गया एक बार जो हमारे हृदय में अंकित हो गया तो मां के जैसा जीवन चरित्र और नहीं आने वाला है आप कहेंगे कि मां सीता थी तो मां सीता का एक अनन्य स्थान है एक यूनिक पोजीशन है मां सती का एक यूनिक पोजीशन है और मां शारदा का है एक एक युग में शक्ति का जो एकएक प्रादुर्भाव होता है सभी का एक-एक यूनिक स्थान होता है भगवान विष्णु के अवतार शायद एक के बाद एक कितने ही आए किंतु आध्या शक्ति जब अवतार धारण करती है और इनकी जो लीला विलास है अमल धवल लीला विलास वो जो एक बार अंकित होता है तो वह हमेशा के लिए वो एक चरित्र हमेशा यूनिक ही रहता है दूसरा नहीं मिलेगा शी इज द वेरी टाइप ऑफ द ट्रू इंडियन वुमन एक आदर्श भारतीय नारी का वो एक आदर्श एक भारतीय नारी का वह आदर्श है फॉर ऑल द इंडियन आइडियल ऑफ अ परफेक्टेड वुमन हैव ग्रोन आउट ऑफ दैट वन लाइफ ऑफ सीता एक आदर्श भारतीय नारी किस तरह की होनी चाहिए एक भारतीय नारी का आदर्श क्या होना चाहिए वह जितने भी हमने चिंतन किया गया है उसके बारे में लिखा गया है वह सभी आदर्श मां सीता के जीवन में से ही प्रकट हुए हैं एंड हियर शी स्टैंड्स और यहां पर व है दिस थाउजेंड्स ऑफ इयर्स हजारों सालों से कमांडिंग द वरशिप ऑफ एव्री मैन वुमन एंड चाइल्ड थ्रू आउट द लेंथ एंड ब्रेड ऑफ द लैंड ऑफ आर्यावर्थ आर्यावर्थ की यह जो भूमि है भारत का जो देश है इस पूरे भारत देश के आबा वृद्ध वनिता हिंदी में जिस तरह से कहते हैं बच्चे बूढ़े पुरुष और स्त्री सभी की श्रद्धा और पूजा जो प्राप्त कर रही है वह यह सीता है देर शी विल ऑलवेज बी हमेशा से यह सीता तो रहेगी ही दिस ग्लोरियस सीता एक भव्य सीता का मां सीता का चरित्र पोरर देन प्योरिटी इट सेल्फ शुद्ध शुद्धता से भी ज्यादा परिशुद्ध ऑल पेशेंस एंड ऑल सफरिंग जितनी भी सहनशीलता है जितना भी कष्ट सहन करने की क्षमता है वह सब मां सीता के भीतर में है यह जो हमने एक साइलेंट एक नीरव साधना करके एक परिवार को जैसे देखो कि संत की साधना होती है ईश्वर को प्राप्त करने के लिए और एक नारी की साधना होती है परिवार की रक्षा करने के लिए परिवार का पोषण करने ने के लिए यदि संत ठीक से साधना करता है तो धार्मिक जीवन जो है उस देश का उस समाज का वह बलप्रदा होगा वह बलिष्ठ होगा और स्त्री जद नीरव से साधना करती है शांति से अपना काम करती है तो वह परिवार सक्षम होगा यह परिवार और समाज दोनों को सक्षम करने की जरूरत है यदि देश को स्ट्रांग होना है यह हमारे इंडियन एंटरप्रेन्योर्स विदेश में जाकर के इतना प्रसिद्धि क्यों लाभ करते हैं विदेश में जाकर के इतना सक्सेसफुल क्यों होते हैं मैंने बहुत पहले एक आर्टिकल पढ़ा था कि इंडियन सीईओ का सीईओ का ये जो मल्टीकल्चरलिज्म जो है ना वो बड़ा ही इफेक्टिव होता है क्यों क्योंकि हम भारत में इतनी सारी लैंग्वेजेस है इतनी सारी ये सबकल्चरस है इतनी सारी कास्ट है ये इतने सारे ग्रुप्स है लोगों के कि फिर इन लोग सभी के साथ में हमको डीएल करना होता है तो हम लोगों से पहले से ही यह मल्टीकल्चरलिज्म मल्टीलिंगुअलिज्म मल्टी रिलीज निज्म यह हमारे में बचपन से ही आ जाता है मैं जब छोटा था तो मैं देखता था मेरे क्लास में एक सिख लड़का भी था एक मुस्लिम लड़का भी था एक जैन लड़का भी था एक हिंदू भी था एक क्रिश्चन भी था वो तो मैं खुद इस तरह से पढ़ा हूं स्कूल में कभी ऐसा नहीं हुआ कि अरे यह लोग अलग है वो लोग अलग है कोई सिंदी था कोई पंजाबी था कोई मराठी था कोई गुजराती कोई बंगाली तो यह सब आपस आपस में ऐसे दो-तीन लड़के मिलेंगे तो अपनी भाषा में बात करेंगे और बाकी हम सबसे बात करेंगे तो या तो उन्होंने गुजराती सीख ली है या तो फिर वह हिंदी में बात करें मेरे जो मेरे एक दो जो बेस्ट फ्रेंड है एक मराठी था एक मारवाड़ी था तो हमारे लिए यह सहज है यह मल्टीकल्चरल जीवन जीना ये जिनका कल्चर हमारे से डिफरेंट है ऐसे लोगों से काम करना तो इसीलिए जो अपने इंडियन जो टेक पर्सन जो होते हैं वो जब अमेरिका जाते हैं इंजीनियर्स वगैरह तो वो लोग अमेरिका में तो क्या है वैसे ही मल्टीकल्चरलिज्म है कोई फ्रेंच है कोई रशियन है कोई चाइनीज है कोई जापानीज है कोई इंडियन तो कोई पाकिस्तानी है तो सबके साथ में बैठ कर के काम करना है वहां तो ऐसा नहीं चलेगा भाई मेरा देश ये तुम्हारा देश हो एक ही कंपनी है सबको गोल है टारगेट है सबके सामने वो मार्केटिंग का प्रोडक्ट डेवलपमेंट का सबके साथ में बैठ के काम करना ही है आपको तो हमारे जो इंडियंस है वो बाय डिफॉल्ट माने वो बचपन से ही ये जो शिक्षा प्राप्त करते हैं दूसरे दूसरे तरह के लोगों के साथ काम करने की तो वो एनवायरमेंट में परफेक्टली फिट हो जाते हैं कोई कोरियन होगा जापानीज होगा जर्मन होगा फ्रेंच होगा उनको तो पहले इंग्लिश बोलने में तकलीफ होता है फिल कल्चरल सुपीरियोर का एक भाव रहता है कि हम लोग श्रेष्ठ हैं दूसरे लोग मूर्ख है तो फिर उनको थोड़ी ना कोई आप बॉस बनाएंगे तो पता देगा और वहां पर तो यह सब नहीं चलेगा ना आपका तो टारगेट है तो यह हम लोग पहले से ही डिफरेंट टाइप के लोगों के साथ में काम करने की शिक्षा प्राप्त की अभी यह प्रश्न होगा कि ऐसा क्यों है कि हम लोग ये मल्टीकल्चरलिज्म में सक्सेसफुल है चलो क्लास स्कूल के लेवल पर तो हम सक्सेस है बोलकर के बिजनेस के लेवल पर जब हम ग्रेजुएट होंगे तब हमारे पास में सेम स्किल वो अपग्रेड होती है अप स्केल होती है किंतु फिर प्रश्न होगा कि स्कूल में हम कैसे सक्सेसफुल हो गए स्कूल में क्यों नहीं झगड़ा हो रहा दूसरे लोगों के साथ में तो फिर मैं जब चिंतन कर रहा था मुझे पता चला ये जो अपना जॉइंट फैमिली है उसी में से ये स्किल फिर जो उसका ओरिजिन जो है ये अपने जॉइंट फैमिली में है ये मैं खुद अपने खुद के परिवार की बात करूं मेरे पिताजी तीन भाई थे मेरी मां के परिवार में मसाल जिसको कहते हैं मामा का घर छुट्टी में मामा के घर जाते थे तो वहां प भी एक बड़ा ही हरा भरा संयुक्त कुटुंब था तो चाचा चाची काका काकी फुई फुआ मामा मामी वो दादा दादी नाना नानी सबके साथ में वो भतीजा वो भतीजी सबके साथ में हमको बैठना है काम करना है खेलना है रहना है खाना है पीना है हंसी मजाक करना है झगड़ा भी करना है तो यह जो जॉइंट फैमिली में सब डिफरेंट डिफरेंट टाइप के कैरेक्टर्स सबके मेरे खुद के फैमिली की बात करूं तो मतलब मैं सही में क्या है मतलब एक नोवल लिख सकते हैं इस तरह के सब डिफरेंट डिफरेंट कैरेक्टर है कभी-कभी इनके साथ में हंसी म भी होती है कभी गुस्सा भी बहुत आ जाता है किंतु पूरा हम साथ में रहे तो वह जो डिफरेंट कैरेक्टरिस्टिक के पूरे विभिन्न विभिन्न स्वभाव के लोगों के साथ में काम करने की रहने की जो हैबिट हमको बचपन से ही मिली थी तो वही स्किल फिर अप स्केल होकर के वह क्लासरूम में जाती है स्कूल में जाती है फिर वही अपग्रेड होकर के अपने बिजनेस या तो फिर पोस्ट ग्रेजुएशन जो कुछ भी करेंगे जॉब वगैरह उसमें वह अप्लाई होती है तो किंतु मैं उस समय जो नहीं पता चलता था जो कि आज मां का जीवन पढ़के यह सब चिंतन करके समझ में आ रहा है कि हमारे संयुक्त कुटुंब की जो महिलाएं थी मेरी मां नानी बाकी सब काकी चाची इनका देखिए कि यदि कुछ भी प्रॉब्लम होता या कुछ भी होता है ना सबसे ज्यादा इनको सहन करना पड़ता है यह लोग नीरव चुपचाप यह जो सहन करने की उनकी जो क्षमता होती है बोल करर के फैमिली साथ में टिका था वरना कोई जद झगड़ा करने की शुरुआत कर देगी मुझे यहां पर नहीं रहना तो पुरुष लोग साथ में नहीं रह पाएंगे पुरुष लोग जो साथ में रह पाते थे बड़े-बड़े ईगो सबके होते हैं ऐसा नहीं है कि आप रिलेटिव है तो ईगो बीच में नहीं आएगा मैंने देखा ईगो क्लेश फैमिली में होता ही होता है स्त्रियां जो है वह ईगो क्लेश को बफर करती है बोलकर के वे लोग साथ में रह पाते हैं और जहां पे जो स्त्रियां साथ में रहने को तैयार नहीं होती वोह संयुक्त कुटुंब टिकेगा ही नहीं फिर वह सेपरेट हो आजकल का जैसे है कि ये सहन शक्ति पूरी चली गई है आजकल यह न्यूक्लियर फैमिली जो हो गए हैं बचपन से ही लड़के लड़कियां अकेले रहते हैं अपने घर में ज्यादा से ज्यादा भाई बहन होंगे बस और किसी के साथ में काम करने की रहने की अपने को एडजस्ट करने की हैबिट नहीं हुई है तो वह हैबिट वहां पर नहीं है तो स्कूल में भी जाकर के थोड़े झगड़े वगैरा होना शुरू हो जाएगा और फिर जॉब में जाएंगे बिजनेस करेंगे तो पता नहीं किस तरह से वे लोग एडजस्ट करेंगे तो ये एडजस्टमेंट का जो भाव है चुपचाप सहन करने की यह जो नीलकंठ की तरह जहर पान करने की जो क्षमता है वह एक्चुअली स्त्रियों में ही सबसे ज्यादा है भगवान शिव ने हलाहल विष का पान किया किंतु वोह जो एक बार जो हो गया सो हो गया अपनी स्त्रियां अपनी मां अपनी नानी दादी दिन प्रतिदिन यह हलाहल पान करती है बोलकर के अपना एक समाज टिका हुआ था और बोलकर के आज हम एक इकोनॉमिकली सक्सेसफुल कंट्री हो पाए वरना आप भारत के साथ में डी कॉलोनाइज हुए जितने भी देशों को देखिए वो मिलिट्री को सिविल वर ना किय वॉर ऑफ इंडिपेंडेंस ना खूना मर की ना वो क्लास वॉर ऐसा सब नहीं करके किसी को तो पहले इंडिपेंडेंस नहीं मिला और इंडिपेंडेंस मिला है तो डेमोक्रेसी नहीं टिकी और डेमोक्रेसी शायद टिक गई है तो फिर वह इकोनॉमिकल प्रोस्पेरिटी नहीं आई तो यह फैमिली से ही यह जो स्ट्रेंथ अपनी खड़ी होती है एक धार्मिक जीवन में एक परिवार में यह दोनों स्ट्रेंथ जो है अपने साधु संतों की और अपनी स्त्रियों की इसी ने भारत को आज एक श्रेष्ठ देश की श्रेष्ठ व की ओर भारत देश को आज वो ले जा रहा है इसलिए स्वामी जी कहते हैं सीता पोरर देन प्योरिटी इट सेल्फ शुद्धता से भी परिशुद्ध ऑल पेशेंस ऑल सफरिंग सहन शक्ति का श्रेष्ठ जिनके जीवन में है वो शी हु सफर्ड ट लाइफ ऑफ सफरिंग विदाउट अ मरमर कष्ट भरा जीवन उन्होंने एक भी शब्द कहे बिना सहन किया शी द एवर चेस्ट द एवर प्योर वाइफ संपूर्ण पवित्र पत्नी जो रही शी द आइडियल ऑफ द पीपल द आइडियल ऑफ द गॉड्स द ग्रेट सीता लोगों के आदर्श भगवान के ईश्वर मने देवताओं के भी आदर्श मां सीता द ग्रेट सीता भव्य सीता अवर नेशनल गॉड शी मस्ट ऑलवेज रिमन हमारे देश की जननी देश की भाग्य विधत्री देश की ईश्वरी वो हमेशा रहेगी एंड एवरी वन ऑफ अस नोज हर टू वेल टू रिक्वायर मच डिली हम उनको इतना अच्छे से जानते हैं कि जिनके जीवन के बारे में बहुत सारी बातें करने की जरूरत नहीं है बचपन से ही हमने अभी हमारा जनरेशन का ऐसा था कि हमने ज्यादा किताबें नहीं पढ़ते थे तो एटलीस्ट वो टीवी सीरियल तो देखा करते थे रामायण आज का पता नहीं क्या होता है किंतु हमने टीवी में तो मां का चरित्र अच्छे से देखा है बाद में जब मैं जॉइन करने को आया था मैं रांची में था उस समय तब मैंने वाल्मीकि रामायण पढ़ा था थोड़ा डिसपिटर था कि जो पॉपुलर जो बहुत सारी स्टोरिया है व वाल्मीकि रामायण में नहीं है बाद में रामचरित मानस में वो आई है जैसे कि वोह लक्ष्मण रेखा लक्ष्मण रेखा का प्रसंग वो ओरिजिनल संस्कृत में नहीं है वह बाद में वह आया है तो जो भी है ड्रामे इजेशन बाद में आया होगा किंतु जो शुभ्र चरित्र है वो तो हमेशा से वहां पर था ऑल अवर माइथोलॉजी में वेनिश हमारी जितनी भी यह कहानियां है पौराणिक कहानियां वो शायद अदृश्य हो जाए इवन अवर वेदास में डिपार्ट हमारे वेद भी हो सकता है कि मनुष्य की स्मृति से विलुप्त हो जाए एंड अवर संस्कृत लैंग्वेज में वेनिश फॉरएवर हमारी संस्कृत भाषा भी हम चाहे हमेशा के लिए विस्मृत हो जाए बट सो लंग एस देयर विल बी फाइव इवन इफ ओनली स्पीकिंग द मोस्ट वल्गर पेटो इज संस्कृत को तो भूल जाइए यदि बहुत ही विकृत हुई कोई भाषा भी शायद यह पांच हिंदू मिलकर के बोलते होंगे देयर विल बी द स्टोरी ऑफ सीता प्रेजेंट मां सीता की कहानियां वहां पर उपस्थित रहेगी जीवंत रहेगी इन पांच हिंदुओं के भीतर में मार्क माय वर्ड्स इ शब्दों को नोंद करके रखो सीता हैज गोन इन टू द वेरी वाइट्स ऑफ अवर रेस हमारे आध्यात्मिक जीवन ये भारत का जो मानव समुदाय है ये हमारे कण हमारे रक्त की कण कण में मां सीता का प्रवेश हो चुका है शी इज देयर इन द ब्लड ऑफ एवरी हिंदू मैन एंड वुमन प्रत्येक हिंदू नर नारी के रक्त के प्रत्येक कण कण में मां सीता विराजमान है वी आर ऑल चिल्ड्रन ऑफ सीता हम सभी मां सीता के संतान एनी अटेंट टू मॉडर्नाइज अवर वीमेन हमारी स्त्रियों को आधुनिक करने का जो कोई भी प्रयत्न होगा इफ इट ट्राइस टू टेक अवर वीमेन अवे फ्रॉम दैट आइडियल ऑफ सीता यदि वह हमारी यदि हमारी स्त्रियों को आधुनिक करने का कोई भी प्रयास जो मां सीता के आदर्श से उनको दूर ले जाएगा इज इमीडिएट अ फेलर एज वी सी एवरी डे वह तत् क्त निष्फल होगा जो कि हम दिन प्रतिदिन देख रहे हैं और दिन प्रतिदिन हम देख रहे हैं न्यूजपेपर सोशल मीडिया सभी लोग देख रहे हैं ज्यादा कुछ कहने की जरूरत नहीं है कि मां सीता के आदर्श से दूर होकर के यदि नारी चरित्र की रचना की गई नारी चरित्र का आदर्श स्थापित करने का प्रयास किया गया वह विफल ही होगा द वीमेन ऑफ इंडिया मस्ट ग्रो एंड डेवलप इन द फुटप्रिंट्स ऑफ सीता भारत की स्त्रियों को सीता के जो पद चिन्ह है उसी पर चलना होगा एंड दैट इज द ओनली वे और यही एकमात्र उपाय है स्वामी जी वॉल्यूम थ्री ऑफ कंप्लीट वर्क्स तो यह स्वामी जी का मां सीता के बारे में कहना है और इसीलिए गंभीरानंद जी महाराज कहते हैं यह जो सीता सती रूपी प्रात स्मरणीय देवियां है उनका जो जीवन चरित्र है उसी जीवन चरित्र की सम श्रेणी पर मां शारदा का जीवन चरित्र है तो वह जीवन चरित्र क्या उसके बारे में हम आगे फिर कल देखेंगे आज यही तक ओम शांति शांति शांति हरि ओम तत्सत श्री राम कृष्णर्पण मस्तु