Skip to transcript
ClassesSaradakosh

Ma Sarada Life by Sw Gambhirananda ·

अवतरणिका : श्रीमाँ सारदा देवी : स्वामी गम्भीरानन्द लिखित : 23 Oct 2023

Transcript

ओम स्थापक यच धर्मस्य सर्वधर्म स्वरूप अवतार षय राम कृष्णाय तो आज से श्री मां शारदा देवी स्वामी गंभीरानंद जी के द्वारा लिखित यह बायोग्राफी जो है उसमें से हम पाठ करेंगे हम लोगों ने ऑलरेडी अवतरण का में से कुछ एक दो पेजेस पाठ किए हैं बंगाली में से मैं पाठ कर रहा हूं इसलिए क्योंकि जैसे मैंने पहले भी बताया था मेरी खुद की एक ऐसी पॉलिसी है कि जो टेक्स्ट ओरिजिनल जिस लैंग्वेज में लिखी गई है उसी लैंग्वेज में उसका पाट करना उसको स्टडी करना रीड करना जिससे कि ट्रांसलेशन में कुछ भी मैं मिस ना करूं और बिकॉज कि मैं खुद गुजराती में मैंने ट्रांसलेशन किया है गुजराती में ट्रांसलेटेड किताबें पढ़ी है इसके अलावा भी जब मैं बेलूरमठ में था कंप्लीट वर्क्स पर काम कर रहा था तो स्वामी जी ने जो लेटर्स या तो उनका जो डिस्कशन बंगोली में है रेमन सेंस जैसे कि शरद चंद्र चक्रवर्ती का उसका मैंने इंग्लिश ट्रांसलेशन देखा है एंड इट लीव्स मतलब देर इज अ रूम फॉर ए ग्रेट इंप्रूवमेंट ऐसा कह सकते हैं क्योंकि ट्रांसलेशन कभी भी एक्यूरेट नहीं होता जो लोग ट्रांसलेशन करते हैं उन लोगों के साथ में दो एक डायलमाइट्रिप कर रहा था तो आशुतोष मित्र त्रिगुणा तिता नंद जी के कजीन वो मां को मिलने के लिए गए तो जाकर के मिले तो मां ने कहा ए ठाकुर है तुम प्रणाम करो ठाकुर को तो उन्होंने ठाकुर को प्रणाम किया और फिर अभी वो तो बिल्कुल पहली बार गए हैं ना वो तो मां के साथ में इतना कोई परिचय भी नहीं है मां की महत्ता मां का मां की महिमा वो भी कुछ पता नहीं है वो बोले कि ठाकुर को प्रणाम करो यानी कि वो तो मूर्ति है फोटो है तो ठाकुर तो चलो फोटो को तो सभी लोग प्रणाम करते हैं मंदिर में जाकर के वो तो कोई नई बात नहीं फिर वो सीधे-सीधे चले जा रहे थे तो मा ने कहा अरे आमा के पेनाम कर लेना केनो अर्थात मुझे प्रणाम क्यों नहीं किया किंतु माने जो शब्द यूज किया है पेनाम माने एकदम वो मधुर एक ग्राम्य शब्द तो अभी इसका ट्रांसलेशन में हिंदी कोई भी लैंग्वेज में देखेंगे तो वहां पर ऐसा ही लिखा होगा कि मुझे प्रणाम क्यों नहीं किया किंतु मैंने गुजराती में क्या किया मैंने एगजैक्टली माका शब्द यूज किया कि मुझे पेन मुझे पेन नाम क्यों नहीं किया और फिर मैंने फुट नोट में ब्रैकेट में लिखा कि मां प्रणाम की जगह पेनाम शब्द यूज करती है एक ग्राम्य ढंग से बात करने जब वो मां बात करती है तब वो इस तरह के सुमधुर शब्द मां यूज करती थी तो ऐसा करके एक फुट नोट लिखा मैंने तो देखिए कि जद एक सिंपल सिंपल ट्रांसलेशन करेंगे तो भाष्य भाषा का एक मधुरता एक बात करने का एक ढंग वोह सब चला जाता है बेसिक आइडिया शायद रह जाएंगे किंतु उसके पीछे का जो भाव है जो माधुर्य है जो लालित्य है वह सब मिस हो जाएगा इसके लिए मैं जब बिल्कुल पहले दिन रामकृष्ण मिशन में जवाइन करने के लिए आया था टी नगर में गया था तो कमलानंद जी थे वहां के हेड अभी मुझे तो किसी ने बताया था कि तुम वहां टी नगर में जाना वहां पर आश्रम है चेन्नई में तो वहां पर तुम जाकर के बात करना किसी एक साधु के साथ में अभी वो साधु तो महंत नहीं थे मुझे मुझे इतना पता था तो मैं जाकर के उनका उनका वेट कर रहा था उनका महाराज का नाम था अरि वड़गम महाराज जिनको मैं मिलने के लिए आया था तो थोड़ी देर में वहां पर किस में जाकर के बोला एकदम अर्ली मॉर्निंग को पहुंच गया था जैसे ही ब्रेकफास्ट का ही टाइम होगा आई थिंक 7:00 बजे के आसपास का तो मैं जब गया तो आश्रम तो वैसे छोटा सा है कैंपस बहुत बड़ा है किंतु बिल्डिंग एरिया जो है वो थोड़ा छोटा है तो मैं जाकर के किसी को पूछा कि अरि वर्गम से मिलना है और वो तो नाम भी अभी मैं इतना इजली इसको प्रोनाउंस कर पाता हूं यह तमिल नाम भी प्रोनाउंस करना थोड़ा मुश्किल होता है तो मुझे जिन साधु ने बताया था तुम जाकर उनको मिलना बोला था हरि महाराज को मिलना है ऐसा जाकर बोलना तो ठीक है मैंने जाक के बोला किसी को तो बोला यहां पे वेट कीजिए महाराज जा रहे हैं व ब्रेकफास्ट कर रहे होंगे शायद तो मैं वहां पर बैठा था तो एक वृद्ध साधु आकर के मेरे पास में आकर के बैठ गए और बड़े जली उनका नेचर देख कर के ही समझ में आता है चेहरे पर मुस्कान है बड़े हंसी मुख के साथ मेरे साथ बात कर रहा है तो मैंने सोचा होंगे कोई साधु ऐसे ही यहां पर तो रिटायर हो करर के रहते होंगे उन्होंने मे मुझे पूछना शुरू कर दिया कि कहां से आए हो क्या नाम है वगैरह वगैरह फिर मुझे बोला कि व्हाट इज योर मदर टंग इंग्लिश में बात कर रहे थे चेन्नई में थे ये तो तो मैंने कहा कि माय मदर टंग इज गुजराती तो बोला कि हु इज योर मदर मैंने कहा दिस क्वेश्चन इज वेरी टिपिकल क्वेश्चन माय मदर इज मा शारदा देवी आई हैव कम हियर टू जॉइन एस ए मंक देन व्हाट इज योर मदर टंग माय मदर टंग इज बेंगली सो यू स्टार्ट लर्निंग बंगोली राइट नाउ इमीडिएट सी वी वेर इन चेन्नई एंड दिस मंक आई थिंक कमलानंद जी लेटर ऑन आई रिलाइज ही इज द हेड ऑफ द सेंटर हिज नेम इज कमलानंद जी महाराज ही हिमसेल्फ इ आई थिंक कन्नड नॉट तमिल बट ही वास कन्नड ही पास्ड अवे रिसेंटली आई थिंक अ ईयर अगो और सो सो ही हिमसेल्फ वास कन्नड बट ही टोल्ड मीट यू स्टार्ट लर्निंग बंगोली दैट विल हेल्प यू वेरी मच इन योर स्पिरिचुअल लाइफ तो मैं इमीडिएट कुछ ही दिनों के बाद बाद में आ आई स्टार्टेड लर्निंग बंगोली सो आई हैव फाइंड मैंने मुझे इतना बेनिफिट हुआ है बांगला सीख कर के क्योंकि मैंने इमीडिएट मैं समझ गया गुजराती में तो रामकृष्ण विवेकानंद लिटरेचर इतना ज्यादा ट्रांसलेटेड नहीं है मैं उस समय थोड़ी हिंदी किताबें पढ़ता था तो हिंदी और ओरिजिनल बंगोली में डिफरेंस इतना ग्रेट है जैसे फॉर एग्जांपल मैंने कोइंसिडेंस कहो ना किय दैवी कृपा कहो ना कि क्या कहोगे मैं बांगला सीखना शुरू किया तो मैं मेरा सिंपल स्ट्रेटेजी था कि एक साइड में मैं बंगोली कथामृत रखता था और एक साइड में मैं हिंदी कथामृत रखता था बाय दैट टाइम मैं पीपीटीसी पहुंच गया था बेलूर मठ में तो मैं बेलूर मठ में तो क्या है कि ज्यादातर बंगोली ब्रह्मचारी थे मेरे साथ में तो मैंने किसी को पूछा मुझे अल्फाबेट्स मुझे थोड़ा सा बता दो तो एक बंगोली ब्रह्मचारी ने सब बंगोली अल्फाबेट लिख दिए और उसके सामने वोह हिंदी अल्फाबेट मुझे बता दिया तो इतना मुख करके पढ़ पढ़ना शुरू कर देना अल्फाबेट मुख करना कोई बहुत बड़ी बात नहीं है इट विल टेक ऑलमोस्ट ओनली थ्री टू फोर डेज तो तीन चार दिन में ही मैंने बांगला पढ़ना शुरू कर दिया किस तरह का कोइंसिडेंस है ना कि जो भी पहला मुझे याद है अभी भी जो बंगाली कथामृत हिंदी कथामृत साथ साथ में रखा रैंडम खोला और जो पहला लाइन जो मैंने पढ़ा व पहला ही लाइन मैंने अभी तक मुझे याद है बांगला में लिखा है जला ज सालारा हरि नामे मतो होए नाचते पार में ना को बेना माने जो साले हरि नाम में मत्त होकर के नाचते नाच नहीं नाच पाएंगे उन सालों का कभी कुछ भी नहीं होने वाला है अब मैंने कहा अरे मैंने कुछ गलत पड़ा लगता है ये ठाकुर साला वगैरह कहां से कहते हैं हम लोग तो घर से आए हैं संसार से आए हैं ऐसी क्या कहेंगे अपशब्द या तो अभद्र भाषा यूज करना ये ठाकुर थोड़ी ना ये सब करेंगे और यह सब क्या गुजराती में सब सैनिटाइज वर्जन मैंने कथामृत का एक बार पढ़ा था और ठाकुर को आलू का सब्जी खिलाते हैं और ठाकुर बड़ी ही सुंदर भाषा में बात करते हैं तो गुजराती कथामृत में पढ़ के गया था और ये बंगाली कथामृत में मैं देख रहा हूं कि लैंग्वेज पूरी डिफरेंट है और ठाकुर का मतलब यह क्या है मैं कुछ गलत तो नहीं पढ़ रहा फिर मैंने वो ब्रह्मचारी जिसने मुझे अल्फाबेट बताया था मैंने उसको बुला करके पूछा मैंने य शाला ही लिखाने क्यार किछ हुआ मैंने ये साला ही लिखा है ना कि और कुछ है मैंने कहा साला ही लिखा है तो मैंने कहा इसका अर्थ वही होता है जो हिंदी में होता है वही होता है तो अभी ट्रांसलेशन में कथामृत का फिलोसोफी तो जाएगा नहीं फिलोसोफी विल रिमन एज इट इज किंतु बहुत सारी समय हमको देख कर के सोच करके समझना पड़ता है कि हम लोगों का लोकल कल्चर का सेंसिटिविटी क्या है और उसके अनुसार अभी जैसे गुजरात है तो गुजरात में धर्म को लेकर के सेंसिटिविटी थोड़ी ज्यादा है 10 बार सोच समझ करके हमको ट्रांसलेट करना पड़ता है अभी रिसेंटली एक ट्रांसलेशन अ ये प्राइवेट क्लास है इसलिए मैं बता रहा हूं बात स्वामी जी का मैं कोई इंसिडेंट ट्रांसलेट कर रहा था उसमें लिखा था कि अमेरिका में थे एक डिसाइल है थॉमस एलन वो स्वामी जी को मिलने के लिए गए तो स्वामी जी को मिलने के लिए गए देखा कि अभी एक धर्म गुरु इंडिया से आए हैं तो अभी क्या ओ कल्ट वगैरा में इन लोगों को तो बड़ा इंटरेस्ट रहता है ना तो सोच के गए होंगे कि बड़े धीर गंभीर स्वभाव के कोई आदमी बैठे होंगे वो सब वो पगड़ी पहन के और वो उनका ईस्टन सूट जो स्वामी जी का शिकागो पोज में जो स्वामी जी ने कपड़े पहने हैं इस तरह का पहन के और स्वामी जी के फोटो भी इस तरह से बड़े प्रचलित थे तो ऐसा धीर गंभीर भाव में ध्यान मग्न कोई सन्या कोई ईस्टन ओल्ट गुरु को मैं देखने को जा रहा हूं जा करर के देखा क्या स्वामी जी चेयर पर बैठे हैं वो मॉर्निंग गाउन पहन कर के अमेरिका का और नाइट गाउन जिसको कहते हैं और फिर चिरू पी रहे हैं पैर प पैर लगा कर के बैठे चिरू पी रहे हैं बढ़िया मज से और उनके बाल लंबे-लंबे बाल है वो स्वामी जी की जो डिसाइल्स थी लेडी डिसाइल सब उनको स्वामी जी बाल काटते थे तो पसंद नहीं आता था स्वामी जी को बोल दिया था बाल लंबे रखने बड़े अच्छे लगते हैं आपको तो वो कैलिफोर्निया का वो जो पोज है जहां स्वामी जी ऐसा अदब लगा कर के खड़े हैं उसमें देखिए स्वामी जी के बाल कितने सुंदर वेवी और लंबे हैं तो उस तरह के लं व वही वो कैलिफोर्निया पोजी है उस समय स्वामी जी लंबे रखते थे स्नान करके आए होंगे तो बाल थोड़े से वेर विखर थे और बढ़िया मजे से वो मॉर्निंग गाउन पहन के वो चिरक पी रहे थे तो वो उसने देखा अरे दिस इज हाउ इंडियन गुरु बिहेव्स और इंडियन गुरु वर्क्स बट द मोमेंट स्वामी जी ने बात करना शुरू किया ही वाज इमीडिएट इ अभी यह ट्रांसलेशन मैंने किया हमारे बड़े महाराज के पास में निखिलेश्वरानंद जी के पास में गया वो तो सब कुछ पढ़ते हैं पब्लिश होने से पहले तो पढ़ कर के फिर जो भी कुछ भी उनका कमेंट्स होगा अंडरलाइन करके कमेंट लिख कर के देंगे तो वो वापस आया उनके पास में जाकर के प्रूफ तो यह चिरू पी रहे हैं उसके नीचे में अंडरलाइन करके लिखा है इसको निकाल [हंसी] दो मैंने कहा ठीक है वो भी एक बात है कि सब सेंसिटिविटी देखिए अखंडानंद जी महाराज राजस्थान में ना कि गुजरात में कहीं से एक जगह से उन्होंने स्वामी जी को एक लेटर लिखा तो अभी वो लेटर तो मुझे नहीं याद कि वो प्रिजर्व है कि नहीं किंतु उसके रिप्लाई में स्वामी जी ने उनको लिखा कि किस तरह से इस सब एरिया में काम करना चाहिए तो मांसाहार को लेकर के एक बात थी अभी बंगोल का कल्चर है कि वहां पर इजली आप मछली खाएंगे वगैरह जो कुछ भी खाएंगे कोई बहुत बड़ी बात नहीं है ब्राह्मण लोग भी खाते हैं तो वैष्णव जो होंगे वो नहीं खाएंगे किंतु शक्त जो है वो लोग आराम से खाएंगे उनको कोई दिक्कत नहीं होता तो स्वामी जी ने उसके लेटर में बंगोली में उत्तर दिया है बिकॉज कि ये बंगोली है उसका इंग्लिश पता नहीं किस तरह का किया होगा बंगोली में स्वामी जी ने लिखा है जिस जगह का कल्चर में कोई चीज अनुरूप नहीं है तो बंगोली में लिखा है तद दंडे त्याग करवे तद दंडे दैट मींस इंस्टेंट इमीडिएट त्याग करवे टू जस्ट लेट इट गो जस्ट रिनाउंस इट यानी कि यहां की गुजरात राजस्थान जैनिज्म का प्रभाव ज्यादा है तो यहां के कल्चर में हमारा जो स्वभाव या हमारी जो हैबिट या तो हमारी जो लाइफस्टाइल जो यहां पर एक्सेप्ट नहीं होती उसको इमीडिएट रिनाउंस इट इमीडिएट मॉडिफाई इट इमीडिएट चेंज इट जैसे कि मेरा खुद का एक पर्सनल अनुभव है हम लोग बंगोल में थोड़ा घूमते फिरते हैं तो लोगों का हम रामकृष्ण मिशन के साधुओं के साथ में एक फैमिलियरिटी भी होता है क्योंकि बहुत पुरखो उनके बहुत दो-तीन जनरेशन से रामकृष्ण विवेकानंद के बारे में जानते भी आए हैं बहुत सारे ने दीक्षा भी ली है और दो तीन डिवटी इकट्ठा होंगे मैंने देखा था बेलून मट में एक बार दो डिवटी का वॉलेटर का झगड़ा हो गया हम लोगों का ड्यूटी लगता है ना कोई भी तिथि पूजा के दिन तो जैसे स्वामी जी के मंदिर में खड़े रहना है गार्ड गार्ड ड्यूटी करना है तो जैसे भीड़भाड़ जद ज्यादा हो जाए तो थोड़ा लोगों को लाइन में रखना है वगैरह वगैरह वसे कोई प्रॉब्लम होता नहीं है कभी तु फिर भी वो नॉमिनली हम सबका गार्ड ड्यूटी रहता है और सभी के अंडर में सभी साधु के अंडर में दो तीन वॉलेटर रहते हैं तो मेरा वो हमेशा के लिए था मैं जब मठ में था कि स्वामी जी का समाधि मंदिर में ही मेरा गार्ड ड्यूटी आएगा क्योंकि मैं स्वामी जी का कंप्लीट काम कर रहा था तो पता नहीं लोगों को ऐसा लग कि इसको स्वामी जी के साथ में एसोसिएशन है तो वहां पर एक बार व खड़ा था तो वैसे खड़े ही रहना और कुछ करना नहीं है वो दो दो तीन वॉलेटर थे मेरे साथ में कोई बात को लेकर के झगड़ा हो गया तो एक बोलता है हमार दादा य बीरेश्वरा आनंद जी थे देख तो वही बोल हमार दादा गंभीर म एक वयर कहता है कि मेरे जो जो नाना है या दादा है वो वीरेश्वरा अंद जी से दीक्षित है वो दूसरा बोलता है मेरे जो ये जो नाना है वोह गंभीरानंद जी से दीक्षित है तुमको क्या कहना है तो क्या है कि रामकृष्ण मिशन के साथ में उनकी काफी फैमिलियरिटी होती है तो वहां पर हम लोग मुक्त रूप से घूम सकते हैं बात कर सकते हैं यहां तक कि बाजार में जाकर के खड़े रह करर के कुछ खाना भी है तो दैट इज ओके किंतु गुजरात वगैरा में यह सब करना मैं एक बार राजकोट से लीमड़ी जा रहा था बस में बैठ कर के और मुझे ये चॉकलेट खाने का मुझे एक थोड़ा सा एक प्रेम है चॉकलेट के ऊपर में तो मैंने वहां से रास्ते में से वोह रुकता है ना लंबा जो जर्नी वाला बस तो एक जगह पर रुका मैं वहां स्टोर में से जाकर के वो केटबरी न की कुछ ऐसा कुछ लिया फिर जब बस चालू हुआ तो मैं अपनी जगह पर जाकर के बैठ गया और खोल कर के मैं खा रहा हूं फ दो-तीन मिनट के बाद में देखा आसपास के जितने भी वो थे सहयात्री मेरे सामने ऐसा घुर घुर करके देख रहे हैं मैंने कहा कि क्या हो गया फिर दो-तीन मिनट के बाद में मुझे पता चला कि अरे मैं साधू के कपड़े पहनाऊ और चॉकलेट खा रहा इमीडिएट चॉकलेट को रप करके पॉकेट में रख दिया तो यहां पर साधुओ का किस तरह का बिहेवियर है हमारे तमाल महाराज कहा करते थे मुझे तो इतना घूमना फिरना नहीं हुआ तमाल महाराज क्या वैल्यू एजुकेशन के लिए यह 150 रथ यात्रा वगैरह करने के लिए बहुत घूमे तमाल महाराज व राजकोट के एक साधु थे अभी उनका स्विटजरलैंड जिनेवा में पोस्टिंग हुआ है तो उस समय वो गुजरात में बहुत घूमे थे तो वो अपना वैसे बंगोली है थोड़ा फॉरवर्ड नेचर रहता है लोगों के साथ बात करने का मिक्स होने का वो एक बार ऐसा कहीं से आ कर के कह रहे थे कि गुजरात में लोग साधुओं के पास में क्या अपेक्षा रखते हैं पता है थोड़ा सा वल्गर लैंग्वेज में हम लोग साधु आपस में इस तरह बात करेंगे डजन मैटर अभी साधु पेशाब भी नहीं करेगा साधु खाना भी नहीं खाएगा साधु का कोई भी बॉडी फंक्शन नहीं होगा बॉडी फंक्शन उनका और कोई वर्ड यूज किया व्ट एवर किंतु उसको सिर्फ एक जगह पर बैठ कर के लोगों के आ प्रणाम ग्रहण करना है यह गुजरात के लोगों का साधुओं के प्रति अपेक्षा है कि ही विल हैव नो नॉर्मल फंक्शन वो एक एक अलग जगत में रहेगा अलग रीत से रहेगा ऐसा भी क्या कभी होता है किंतु देखिए वो अभी बिकॉज की स्वामी जी का भी कहना है रामकृष्ण मिशन का भी है कि जहां पर जिस तरह से रहते हैं तो उस तरह के होकर के रहना है हमको तो इसीलिए मैं ज गुजराती ट्रांसलेशन जब करता हूं या हिंदी ट्रांसलेशन पढ़ता हूं मुझे हमेशा लगता है मिसिंग आउट समथिंग खास करके स्वामी जी का स्वामी जी की जो चलित बांगला दो दो तरह की बांगला में स्वामी जी लिखते थे एक तो साधू बांगला अर्थात की प्योर संस्कृत बेस्ड लैंग्वेज व एक भारतीय पत्रिका बंगाल से पब्लिश होती थी उसकी एडिटर उसका नाम मैं भूल गया शी वाज वेरी क्लोज शी वो एक महिला थी और टैगोर फैमिली के साथ में संबंध था उनका तो वो वहां उसकी भारतीय पत्रिका की वो एडिटर थी संपादक थी तो उसको स्वामी जी एक लेटर लिखते हैं तो इतना धीर गंभीर वो लेटर है वो पढ़ कर के हमको लगेगा कि अरे बाप रे साहित्य के कौन से उच्च सोपान सर करके स्वामी जी इस तरह से लैंग्वेज यूज करके लिख रहे हैं दूसरा एक लेटर शुद्धाओ लेटर लिखे हैं इस तरह की बांगला यूज की है जैसे कि शुद्ध संस्कृत ही चलता हो किंतु बस लेटर्स जो है अल्फाबेट है वो बेंगोली यूज किए हो ऑन द अदर हैंड कभी-कभी ये शरद चंद्र चक्रवर्ती के साथ में जो वार्तालाप हो रहा है या तो फिर अपने गुरु भाइयों को जो बंगोली लेटर लिखते हैं उसमें स्वामी जी चलित बांगला यदि उसका ट्रांसलेशन करना है तो सड़क छाप हिंदी जिसको हम कहते हैं इस तरह की चलित बांगला में वो लेटर लिखते हैं और उस लेटर में स्वामी जी इतनी शार्प लैंग्वेज यूज करते हैं कि जैसे हमारा हृदय बो जिसको बांगला सही सही में आता है ना वो बड़ा ही हर्षत फुल हो जाएगा कि हां यह बात स्वामी जी की हमारे हृदय को बिल्कुल भीतर में जाकर के टच करती है तो समथिंग फिनोम जिन लोगों को बांगला सही सही आती है और जिन लोगों ने स्वामी जी के चलित बांगला में लिखे हुए लेटर पढ़े हैं उनको लगेगा कि यही उनका गीता और बाइबल है इससे ज्यादा और कुछ पढ़ने की जरूरत नहीं है फुल ऑफ स्पिरिचुअलिटी किंतु एट द सेम टाइम इतना तीव्र इतना ती कटाक्ष होगा किसी भी तरह के दिखावे के प्रति किसी भी तरह के सोशल कन्वेंशन के प्रति कि जैसे कि वह हजारों सालों के वो हम लोग एक्सक वेशन करते हैं ना आर्कियोलॉजिस्ट कहां पर पता चला कि ये कोई छोटा सा नगर है ना कि छोटी सी मूर्ति है वो जमीन में से खोद के निकाली ने कि समुद्र में से निकाली तो उसके ऊपर में सेंचुरी ऑफ मिलेनिया ऑफ वो डर्ट वगैरह लग जाता है तो किस तरह से वो धीरे-धीरे करके वो उसके ऊपर का वो आवरण निकाल करके के उसका जो प्रिस्टाइन रूप है उसका सही स्वरूप है वो उजागर करते हैं वैसे ही स्वामी जी कटाक्ष रूपी इस तरह के वो चाबुक मारेंगे इस तरह के हथोड़े के घा करेंगे कि उसके पीछे रही हुई स्पिरिचुअलिटी फट करके हमारे सामने वो उजागर हो जाएगी सो दिस इज द बेनिफिट ऑफ लर्निंग ओरिजिनल लैंग्वेज एंड रीडिंग एनी टेक्स्ट इन ओरिजिनल तो गंभीरानंद जी महाराज की भी यह किताब है मैं ओरिजिनल इ बंगाली में से ही पाठ करूंगा साथ में हिंदी में एक्सप्लेनेशन देंगे तो अभी तक हमने देखा कि किस तरह से अभी अवतरण का में गंभीरानंद जी हमको बताते हैं कि अवतार का जिस तरह से पृथ्वी पर आगमन होता है वैसे ही शक्ति का भी इस पृथ्वी पर आगमन होता है अवतार का एक वर्ल्ड मिशन होता है शक्ति का भी आध्या शक्ति जग जगदंबा का भी इसी तरह से एक वर्ल्ड मिशन होता है और इस वर्ल्ड मिशन को लेकर के दोनों में क्या पार्थ क्य है हालांकि दोनों दोनों आते हैं एक दूसरे के पूरक होक के यथा नेर दाहिद ही अग्नि की जो दाहिद है वैसे ही अवतार की यह शक्ति है जगदंबा तो यह एक रिलेशनशिप जो हमको बताता है किंतु मतलब दे आर वेरी इंडिस्टिंक्ट दे आर आल्सो वेरी कनेक्टेड आल्सो भी एक एक पार्टिकुलर उनका एक मिशन रहता है जगदंबा का मिशन है कि नारी जाति का जागरण और नारी जाति के जागरण के लिए पर्टिकुलर अभी कभी-कभी अपने मास्टर महाशय ने मास्टर महाशय ने शुरू शुरू में जब कथामृत लिखा तो ठाकुर का जैसे मैंने कहा कि जिन लोगों ने ठाकुर को ओरिजिनल बंगोली में पढ़े पता है कि ठाकुर गाला गाली करने में बिल्कुल पीछे नहीं पड़ते थे बिल्कुल धम धम करके वो गाली देते थे वो बात करते थे इस तरह से तो उनके जो शिष्य है उन लोगों को मतलब जैसे कि जो लोग अपने हृदय में से बोलते हैं ना उनको अपनी लैंग्वेज को सुसंस्कृत त करने की जरूरत नहीं होती जैसे हम लोग एक दूसरे के साथ बात करते हैं हम लोग बड़े ही संभल करके बड़े ही सिविलाइज तरीके से बात करेंगे दूसरे के मन को कष्ट ना हो और हमारी लैंग्वेज भी बड़ी ही वो कल्चर्सल से देख रहा हूं इसी तरह से मैंने ईश्वर को देखा है तो जिसने ईश्वर को इस तरह से देखा है वह कभी सोशल कन्वेंशन की च नहीं करता स्पिरिचुअल जो ग्राउंड ट्रुथ है जो कोर उसका जो है वह हमको बताएंगे और साथ में ऐसी चाबुक भी मारेंगे कि हमारे मन के ऊपर में अंधश्रद्धा या तो घमंड या तो क्रोध या तो फिर हमारे पूर्व जन्म के जो संस्कार है वो चाबुक खा कर के वो उसका वो ध्वंस हो जाएंगे ये दिस वाज वन ऑफ द ग्रेट रीजन कि ठाकुर के पास में ये डिसाइल इतने गृहस्थ और सन्यासी त्यागी शिष्य आकर के जमा हुए थे हमको कभी-कभी लीला प्रसंग या तो कथामृत पढ़ कर के लगता है कि अरे ठाकुर तो चलो वी रिस्पेक्ट ठाकुर यह सब किताबें पढ़ कर के ठाकुर के प्रति हमारी रिस्पेक्ट हजारों गुना बढ़ जाती है ठाकुर लीला प्रसंग में वर्णन है कि जिस वटवृक्ष के नीचे में बैठ कर के ठाकुर ध्यान करते थे उनके शरीर में से इतना ताप इतना गर्मी प्रगट प्रकट होता था इतना हीट प्रकट होता था कि वो वटवृक्ष के जो पत्ते हैं वो तक जल जाते थे भैरवी ब्राह्मणी उनको स्पर्श नहीं कर पाती थी एक कंबल कहां से लाकर के ठाकुर के शरीर को आवृत करके कंबल द्वारा पकड़ कर के गंगा में ले जाकर के उनके शरीर को नहला थी उनको शुद्ध करती थी तो यह सब वर्णन पढ़ के ठाकुर के प्रति हमारी श्रद्धा अवश्य प्रकट होती है किंतु किसी को अपना जीवन दे देना यह कितना बड़ा कितनी बड़ी बात है अपना घर का आकर्षण जो होता है वो छोटी मोटी बात नहीं है संसार का आकर्षण वो महामाया का यह बंधन जो है जन्म जन्मांतर का हमारे सर के ऊपर में बैठा हुआ है तो वैसे ही थोड़ी ना चला जाएगा जैसे मां ने वो कहा है कि पहले ब्रह्मा ने सृष्टि की रचना की तो पहले सर्वप्रथम चार कुमारों को बनाया अभी यह सनत सुनंदन वगैरह तो उन्होंने उनको पहले ही समझ में आ गया कि सृष्टि संसार असार है और ब्रह्मा ब्रह्म ही सत्य है जगत मिथ्या है जगत असार है तो उन्होंने जब ध्यान तपस्या करके इमीडिएट ब्रह्म ज्ञान प्राप्ति कर ली और ब्रह्मण शरीर त्याग कर दिया तो ब्रह्मा ने सोचा कि इस तरह से तो सृष्टि का प्रारंभ नहीं होगा फिर उन्होंने 12 प्रजा प्रतियों की रचना की 10 12 जितने भी है तो वो प्रजापति प्रजापति हों ने फिर यह वैदिक कर्मकांड का आश्रय लेकर के फिर संसार प्रारंभ किया तो यह ब्रह्मा का ही एक खेल है यह मां का ही ठाकुर बोल तो कुड़ी लखेर एकटा दूट केटे हे हाथ चापड़ी हे हेश दाव मा हाथ चापड़ी मने जो पतंग उड़ती है काइट जो उड़ती है हवा में उस कुड़ी लखे माने लाखों लाखों पतंग जो हवा में उड़ ती है उसमें से एक दो पतंग को काट कर के हेश दाव मा हाथ चापड़ी हस्ती हस्ती मां तालियां बजाती है हजारों पतंग पतंग हवा में उड़ती है किंतु उसकी जो दोरी दोरी जो होती है उसका वो जो चोटी जो होती है उसकी चोटली वो मां के हाथ में रहती है किंतु एक दो को काट देती है वो मुक्त गगन में विचर हुई वो चली जाती है तब उनको देख कर के मां हसती हंसती तालियां बजाती है किंतु एक दो ही बाकी लाखों पतंग उसकी दौर या तो उनकी चोटी हम सबकी चोटली मां के में रहती है तो यह फट करके संसार में से विमुक्त होना संभव नहीं तो इतने सारे संस संसारी और त्यागी शिष्य ठाकुर को अपना जीवन सर्वस्व दे दिए तो हमको प्रश्न होता है कि ऐसा तो ठाकुर में क्या था कि हां किताबें पढ़कर उनके प्रति रिस्पेक्ट आता है किंतु हमने तो उनको डे टू डे लाइफ में देखा नहीं तो डे टू डे लाइफ का वर्णन जो है ना किंतु वो हमारे पास में सही सही आया नहीं है कथामृत जो उसका फर्स्ट एडिशन मास्टर महाशय ने पब्लिश किया उसका एक ड्राफ्ट कॉपी स्वामी जी के पास भेजा तो वो ड्राफ्ट कॉपी पढ़ कर के स्वामी जी ने कहा उनको कि देखो कि आपने ठाकुर का जो वर्णन किया है वो बड़ा ही एक्यूरेट है स्वामी जी ने वो लेटर वो बड़ा फेमस लेटर है कथामृत में उसका फर्स्ट पेज पे ही दिया है सोक्रेट डायलॉग्स आर प्लेटो ऑल ओवर बट हियर यू हैव केप्ट योरसेल्फ परफेक्टली हिडन अर्थात कि सोक्रेट के जो डायलॉग है वो प्लेटो ने अपने पूरे मन घं बना दिए हैं क्या पता सोक्रेट ने सही सही किया क्या कहा क्या नहीं कहा किंतु उसके जो डिसाइल है प्लेटो उसने अपने मन में से बहुत सारा कुछ यहां पे निकाल के रखा है जबकि ठाकुर के बारे में ऐसा नहीं कथामृत में से ठाकुर रियल ठाकुर रिफ्लेक्ट हो कर के आते हैं यू हैव केप्ट योरसेल्फ परफेक्टली हिडन आपने अपने को संपूर्ण रूप से छुपा करके रखा है बहुत अच्छी बात है किंतु यहां पे एक प्रॉब्लम है कि ठाकुर एज इट इज जो थे उनको रिफ्लेक्ट करना वो थोड़ा सा डेंजरस था स्वामी जी ने साथ में लिखा कि ठाकुर ने ये जो भाषा यूज की है वो उन्होंने सिर्फ लड़के और पुरुषों के सामने यूज की है उस समय जबक कोई स्त्रियां वहां पर नहीं थी जबकि यह किताब जब पब्लिश होकर के उसका ये सबके घर में जाएगी तो स्त्रियां भी इसको पढ़े गी तो वो जब इस तरह की भाषा सुनेगी ठाकुर की तो उनको बड़ा ही आघात लगेगा इसीलिए इस तरह की जो शब्द है स्वामी जी ने लिखा इस तरह के शब्द अभी हमको अनुमान करके सोच लेना एक इस तरह के शब्द तो उस तरह के शब्द यहां से निकाल दो इसको सेंसर कर दो कथामृत में ऑलरेडी जो साला वगैरा जो हम पढ़ रहे हैं ट इज अ सेंसर्ड वर्जन वो ऑलरेडी सैनिटाइज वर्जन है तो ये हम अनुमान करके फिर थोड़ा सा मसाला डाल करके सोच करके बोल सकते हैं कि रियल ठाकुर वो सो जनन सो चाइल्डलाइक एंड उनकी जो भाषा थी स्टार्टिंग में ही मास्टर महाशय ने कथामृत में लिखा है वो थोड़े से तोतला थे तो ये थोड़े से तोत लाते थे और ग्राम्य भाषा यूज करते थे और गाली देते थे ये मिक्स करके वर्णन हम एक अनुमान करके कर सकते हैं कि ठाकुर का व्यवहार आचरण उनका लाइफ कितना सुमधुर होगा जैसे एक छोटा बच्चा है बिना मन में किसी भी तरह का भेदभाव किसी भी तरह का द्वेष विद्वेष कुछ भी रखे बिना कंप्लीट ट्रांसपेरेंट हृदय में जो है वह मुंह से बोल देता है तो उसको देख कर के वो हम लोगों का हृदय गलित ना हो जाए द्रवित ना हो जाए और उनके प्रति शरणागत ना हो जाए ऐसा कभी होगा ही नहीं जो राक्षस पत्थर दिल लोग हैं उस समय के जो कुछ खजांची वगैरह थे कालीवाड़ा कुर की इस तरह की निंदा किया करते थे तो हमको म मन में होगा कि हाय रे किस तरह के अभागे है हम लोग आज ठाकुर के देह त्याग 18864 स 150 साल के बाद आए सब समय ये यह सोचते रहते हैं आंख बन के जब ध्यान करते हैं कि चलो हम लोग भी दक्षिणेश्वर में चले गए हैं ठाकुर के उस छोटे से कमरे में यह त्यागी लड़के बैठे हैं उनके साथ में हम भी बैठे हैं और यहां पर गंगा बह रही है रात्रि का समय है चांदनी है मास्टर महाशय वर्णन इतना सुंदर करते हैं कि हमको ध्यान करने में इमेजिनेशन करने में बड़ा ही सुविधा हो तो हम लोग 150 साल के बाद में और डेज साल के बाद में भी लोग इस तरह की कल्पना करते रहेंगे जबकि यह खजांची ये सब लोग ठाकुर के साथ में रहकर के अभागे ठाकुर को ठाकुर की निंदा करते थे क्या सब बातें है यह सब तो जो भी है ऐसे लोग भी होते हैं मुमती भी होते हैं मैं तो कहता हूं कि यदि इस तरह के खजांची फजन च जो लोग ठाकुर एक बार योगानंद जी की एक बात है योगानंद जी यानी कि योगेंद्र महाराज एकदम ठाकुर के पास आ रहे थे शुरू शुरू में योगानंद जी का थोड़ा सा संदेहाम मन था तो डाउटिंग थॉमस कह सकते हैं अपने ऑर्डर में वो उनका एक वो कहानी तो फेमस है कि रात को ठाकुर नहीं थे खड़े हो करर के देखा अरे दिन में कामिनी कांचन त्याग की बात करते हैं रात में जाकर के मां के पास जाते हैं नौबत में जाकर के मैं खड़ा रहता हूं नबत के सामने देखता हूं कि क्या करते हैं वो बाहर आने से ही पकड़ता हूं फिर देखा कि झावतला के पास से आ रहा है झावतला माने वो तो अटैच बाथरूम टॉयलेट नहीं था तो झावतला में सोच के लिए जाना पड़ता था तो उनको देख कर के ही बड़े शर्मिंदा हो गए तो वैसे ही उनका थोड़ा डाउटफुल नेचर था तो एक दिन गए ठाकुर के पास देखा कि ठाकुर बार-बार विचलित होकर के इधर उधर देख रहे हैं पूछ रहे हैं कि अरे आरती भोग हो गया है मंदिर में यहां पर कुछ आया नहीं है मां का प्रसाद क्या बात है मां का प्रसाद क्यों नहीं है मां का प्रसाद क्यों नहीं ऐसा बोलकर के विचलित हो रहे है तो योग महाराज ने सोचा कि आखिर में तो वह ब बामुन बांगला तो बोले बामुन बामुन अर्थात चाल कोला बांधा बामुन अर्थात की जो गृहस्थ लोग होते हैं उनके घर में विधि करने के लिए किसी ब्राह्मण को रखा है वो उनके परदादा से ही व फैमिली के साथ में अटैचमेंट है तो चाल कोला चाल अर्थात धान और कोला अर्थात की केला यानी कि किसी भी तरह का फल तो कोई भी ब्राह्मण आएगा और उसको दक्षिणा देंगे धान के रूप में फल के रूप में पैसों के रूप में और वो कोई भी विधि वगैरह है वो करके जाएगा तो चालक वाला बांधा बामुन यानी कि उनकी वो पूर्व जन्म से ही वो किसी के घर में वो पैसा लेकर के या किसी धन लेकर के विधि करवाते हैं तो योगेंद्र महाराज ने सोचा अरे प्रसाद नहीं है इसलिए इतने व्याकुल हो रहा है तो आखिर में तो व चाल कोला बाधा बाम नहीं तो आखिर में तो व तो वही है तो ठाकुर अंतरिया इटली समझ गए बोला कि देखो कि रास मणी ने तो मंदिर करके गई है उसमें सब धन पैसों की व्यवस्था करके गई है इसके लिए कि यह जो मां का प्रसाद है वह यहां के गरीब साधु जो भी सन्यासी वैरागी है भिखारी है इन लोगों को प्रसाद धन धन्य मिले उसके लिए किंतु यह खजान जी है या तो यह उस समय के कुछ कुछ पुजारी है वे लोग क्या करते हैं मां का ये जो प्रसाद है वो ले जाकर के उनके कोई किसी ना किसी की अविद्या को रखा है अविद्या को जाकर के दे देते हैं अभी अविद्या शब्द यूज किया है अर्थात कि दुष्चक्र ने क्या शब्द यूज किया होगा वो पता नहीं किंतु किताब में लिखा है कि वो अपनी अविद्या को जाकर के दे देते हैं तो इससे तो बेटर है कि प्रसाद यहां पर आए और तुम लोग जो जेनुइन साधक हो आप लोगों को थोड़ा सा प्रसाद मिले इसलिए मैं यहां पर इतना विचलित हो रहा हूं देखिए ठाकुर का दूर दृष्टि किस तरह का है और तो की प्रैक्टिलिटी ठाकुर का प्रैक्टिलिटी भी इस तरह का था व मास्ट महाशय को एक बार बोलते हैं कि अरे तो छाता कहां गया मास्ट महाशय बोलते हैं वहां पर रख करके आया हूं मैं वहां पर पंचवटी में ठाकुर ने बोला हमार वस्त्र थाके ना और तब छाता भली ना मने पहनने के जो वस्त्र है वो भी मैं ठीक नहीं रख पाता हूं कभी भाव में विभोर हो गए तो फिर दिगंबर होकर के वो नृत्य करना वो भाव में चले जाते दिगंबर होकर के तभी भी मैं कभी छाता नहीं भूलता और तुम लोग संसार लेकर के घर लेकर बैठे हो तुम लोगों को तो ये सब चीजों की बड़ी चिंता होनी चाहिए तुम छाता रख कर के आए किस तरह का ये बिहेवियर है तुम्हारा तो ठाकुर ठाकुर और मां दोनों का अपना अपना एक मिशन है पृथ्वी के ऊपर में और मां का खास करके जो मिशन है नारी जाति का पुनः जागरण और यह मिशन किस तरह से मां आध्या शक्ति जगदंबा पृथ्वी पर आकर के यह करती है उसको अप्लाई करती है उसको इंप्लीमेंट करती है इसके बारे में यह पूरी अवतरण का है फुल ऑफ फिलोसोफी इस तरह की डीप फिलोसोफी मां के बारे में अपने ऑर्डर में इतने जेनुइन साधु और स्कलर गंभीरानंद जी बोथ मने साधक ग्रेट साधक एंड ही वाज अ ग्रेट स्कलर और ही हैड ग्रेट मने विजनस एंड एवरीथिंग तो उनके उनके द्वारा लिखा हुआ यह जो फॉरवर्ड है पूर्व भूमिका है इट्स फुल ऑफ फिलोसोफी इसका पाठ हमने कुछ दिन तक किया और कल से भी इस इस पूरा सप्ताह यह पूरी अवतरण का का हम पाठ करेंगे उसमें से कुछ ना कुछ डिस्कस करेंगे तो आज यहीं तक कल फिर से मिलते हैं यस यस एक मिनट एक मिनट एक मिनट एक मिनट एडवेंटम का बंगाली में बता देता हूं अच्छा शक्तिपीठ का क्या है यहां पर पहला है अवतरण का दूसरा है शक्तिपीठ तो शक्तिपीठ है क्या वहां पर आपका फर्स्ट और सेकंड चैप्टर कौन सा है हा ब्लेस हैमलेट जो है वो शक्तिपीठ है उसके पहले वाला जो होगा वो अवतरण अच्छा ओम शांति शांति शांति हरि ओम तसत श्री राम कृष्णा