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Meditation ·

Meditation मिट गया 'मैं', रह गए केवल 'वो' 29 Dec 2025

मङ्गलाचरण

ओम स्थापकाय च धर्मस्य सर्व धर्म स्वरूपिणे अवतार वरिष्ठाय राम कृष्णाायते नमः

ध्यान की पराकाष्ठा: मिट गया 'मैं', रह गए केवल 'वो'

यहां पे मैं स्टूडेंट्स के क्लास लेता हूं। उसमें गाइडेड मेडिटेशन सिखाता हूं। सो एक मेथड है उसका मैंने नाम दिया है एबीसी टू एसएसएस। एबीसी टू एसएसएस देखिए कि जो कि स्पिरिचुअल जर्नी है हमारी वो किस तरह से चलती है। जब भी हम स्टार्ट करेंगे एक बच्चा होता है। जब भी उसका जन्म होता है तो वह जगत में क्या देखता है? सबसे पहले तो अपनी मां को ही देखता है। मां ही जैसे कि बच्चे बच्चे का पूरा जगत है। बच्चे का पूरा वर्तमान भविष्य है। उसी के ऊपर में तो वह निर्भर करके जीता है। मां ही उसकी केयर करती है। मां ही उसको खिलाती है। माही तो उसको स्नेह करती है। मां ही तो 24 घंटे उसके साथ में रहती है। वो छोटा बच्चा रोएगा भी तो वह कष्ट भी होगा तो भी मां के लिए ही रोएगा। वो यदि कुछ शैतानी करता है और मां उसको मारती है तो भी तो वह रोता मां के ही गोद में जाकर बैठेगा। तो क्या है कि बचपन से लेकर के मैं और मां इस तरह से एक डलिटी में हम लोग रहते हैं। तो यह जो धर्म है या तो आध्यात्मिक जीवन है या तो स्पिरिचुअलिटी है उसमें भी इसी तरह से हम लोग प्रारंभ करते हैं कि मैं हूं और ईश्वर। अभी यह ईश्वर के साथ में मेरा किस तरह का नाता है वह सब कुछ डिफाइन करता है कि मेरी यह जो जर्नी है स्पिरिचुअल जर्नी वह किस तरह से होगी? अभी फॉर एग्जांपल हम मेडिटेशन प्रारंभ करते हैं। तो पतंजलि में जिस तरह से पतंजलि पतंजलि योग सूत्र में जिस तरह से धारणा ध्यान समाधि की डेफिनेशन है देश बंध चित्तस्य धारणा तत प्रत्यय एकानता ध्यानम तदैव अर्थ मात्र निर्भासम स्वरूप शून्यम इव समाधि अर्थात कि एक है ऑब्जेक्ट इस ऑब्जेक्ट के प्रति अपने मन को एकाग्र करना यह हो गया ध्यान का प्रथम स्टेज जिसको कहेंगे धारणा। अभी सेकंड स्टेज में क्या होगा? मन को एकाग्र किया है इस ऑब्जेक्ट के ऊपर में। अभी धीरे-धीरे करके मेरे मन में से बाकी सब विचार बाकी जितना भी डिस्ट्रक्शन डिस्ट्रैक्शन और डिसपेयर जो कुछ भी चल रहा है डिस्टरबेंस वह सब चला जाता है और जो ऑब्जेक्ट है जिसके ऊपर में मैं ध्यान कर रहा हूं वही ऑब्जेक्ट ही रह जाएगा। बाकी सब चला जाएगा। एक तानता बैठ जाएगी। एक लय से मेरा मन बस ऑब्जेक्ट की ओर ही धवित होगा। तो वह हो गया ध्यान। और फिर ऐसा होगा कि जैसे-जैसे मेरे मन में से जितने भी डिस्टरबेंस है, डिस्ट्रैक्शन है, डिस्पेयर है, डिप्रेशन है, सब जैसे जाता जाएगा, सिर्फ वह जो ऑब्जेक्ट है ध्यान का वही एक रह जाएगा। तो स्वरूप शून्यम इव मेरा जो अहम है मेरे यह जो संस्कार है, मन, बुद्धि, चित्त, अहंकार है, वह सब जैसे कि गल जाएगा और रह जाएगा वही एकमात्र ऑब्जेक्ट जिसके कि ऊपर में मैं ध्यान कर रहा था। ऑब्जेक्ट ही रहेगा और कुछ नहीं रहेगा तो होगी समाधि। ठाकुर कहते हैं ना कभी मैं सोचता हूं आमी। आमी और तुम ही तुम ही। मैं कभी-कभी मैं सोचता हूं मैं मैं हूं और तुम तुम हो। किंतु कभी-कभी हो जाता है तुम ही तुम तुम्ही तुम ही होए जाए किंतु कभी-कभी तुम ही तुम हो जाती हो। मेरा मैं खोजने से भी नहीं मिलता। तो वो कभी-कभी लगता है कि मैं मैं हूं। ईश्वर ईश्वर है। या तो फिर जो ऑब्जेक्ट ऑफ मेडिटेशन है वह ऑब्जेक्ट डिफरेंट है। मैं डिफरेंट हूं। किंतु कभी-कभी होता है कि ईश्वर ही रह जाता है। आत्मन ही रह जाता है। ब्रह्मन ही रह जाता है। काली, दुर्गा, शिव, विष्णु, कृष्ण, राम जिसकी आराधना, उपासना कर रहे थे, वही रह जाएंगे। और यह जो भक्त है, यह जो छोटा मैं हूं, यह जो मेरा अहम है, यह सब कुछ जैसे कि पिघल जाएगा। सच्चिदानंद समुंदर में विघटित हो जाएगा। विगलित हो जाएगा। तो वह हो गई समाधि। तो देखिए कि यह जर्नी है द्वैत से अद्वैत तक की। भले ही चाहे जितने भी साधु, संत, महात्मा, योगी, प्रॉफेट, अवतार जो भी आए हैं आध्यात्मिक जगत में उन्होंने यह द्वैत या अद्वैत शब्दों का प्रयोग ना किया हो। उन्होंने अपनी-अपनी भाषा में यह सब कुछ कहा हो। किंतु देखिए कि अल्टीमेटली तो आपको यूनिटी की ओर ही जाना है। जैसे कि बाइबल में भी जीसस कहते हैं आई एंड माय फादर आर वन। अर्थात कि प्रारंभ तो किया था कि जो फादर इन हेवन है उनकी उनको प्रेयर करके उनको प्रार्थना करके उनके सामने सरेंडर करके किंतु धीरे-धीरे हुआ कि फादर के साथ में एकीभूतता एकात्मता हो गई। यह पिछली बार हमने यह स्टिग्माटा का कांसेप्ट देखा था कि जो क्रिश्चियन सेंट्स है उनके हाथ में यह जो इंजरी की साइन हो जाती है। क्यों? क्योंकि जीसस को क्रुसिफाई किया गया था तो हाथ में खिले मारे गए थे। चर्च पे उनको क्रॉस पे उनको बांध करके तो फिर क्या है कि यदि आप जीसस के साथ में एकीभूत हो जाते हैं वो इमिटेशन ऑफ क्राइस्ट स्वामी जी का फेवरेट बुक तो क्राइस्ट का इमिटेशन करके करके क्राइस्ट ही हो जाते हैं तो फिर वो क्राइस्ट के वो जो इंजरी की जो यह सब साइंस थी वह अपने भी बॉडी में प्रकट होगी इसको कहेंगे स्टिग्माटा तो देखिए कि द्वैत से अद्वैत तक की यात्रा जो कि घनघोर द्वैतिक रिलीजन है। जैसे कि क्रिश्चियनिटी वहां पर भी अल्टीमेटली तो आपको अद्वैत की ओर ही ले जाना है। अद्वैत की ओर ही जाना है। या तो फादर इन हेवन के साथ में एक ही भूत एकाकार होना है। या तो फिर जीसस के साथ में तो यह तो हिंदू धर्म में देखिए कि अद्वैत फिलॉसोफी काफी सिस्टमेटिकली काफी एक्सटेंसिवली डेवलप की गई है। तो हमारे यहां जितने भी संत हैं, जितने भी महापुरुष है, देखेंगे थोड़ा सा डिटेल स्टडी करेंगे तो पता चलेगा भक्ति भाव से प्रारंभ तो उन्होंने किया है। भक्ति रस से भरपूर दोहा भजन वगैरह की रचना भी उन्होंने हो सकती है कि किया है। किंतु अल्टीमेटली तो उनको वही अद्वैत आनंद में ही डुबकी लगानी है। ठाकुर की वह जो उपमा कि यह जो नमक की गुड़िया समुंदर मापने के लिए गई तो समुंदर में डुबकी लगाई। फिर अभी बाहर आकर कौन खबर देगा? क्यों ऐसा हो गया? क्योंकि समुंदर तो पूरा नमक का ही बना है। नमक यानी कि साल्ट जो है वह समुंदर के पानी में पिघला हुआ है। तो एक साल्ट की गुड़िया है। नमक की गुड़िया तो वह यदि समुंदर में डाइव लगाएगी तो वह भी तो पिघल करके समुंदर के साथ में एकाकार ही तो हो जाएगी। वो डिॉल्व ही तो हो जाएगी समुंदर में। उसका यह जो इंडिविजुअल एग्जिस्टेंस है वो कहां गायब हो जाएगा? तो देखिए कि यह जो इमेजरी है या तो यह जो कॉस्मिक स्पिरिचुअल जर्नी है इसको हम समष्टि स्पिरिचुअल जर्नी है इसको हम इंडिविजुअल लेवल पे व्यष्टि लेवल पर किस तरह से रिफ्लेक्ट करें किस तरह से यह जो अपना 10,000 साल का हो ना 500 साल का हो जितना भी पुराना अपना यह आध्यात्मिक वारसा है और सिर्फ भारत का ही नहीं पूरे विश्व भर का तो इस वारसे का यह जो अल्टीमेट अंडरस्टैंडिंग है कि द्वैत से अद्वैत की ओर जाना है हमको। इस अंडरस्टैंडिंग को हम मेडिटेशन की मेथड में किस तरह से रिफ्लेक्ट करें। तो देखिए कि एक मेथड जैसे कि मैं डिस्क्राइब करता हूं। मान लीजिए अ

ध्यान: हृदय में सुंदर सागर की कल्पना करें और उस पर मन एकाग्र करें

इसको हम प्रारंभ कैसे करेंगे? एक ब्यूटीफुल सीन क्रिएट करेंगे। अब जैसे कि समुंदर का किनारा है। यहां पर ही समुंदर है तो मैं कभी-कभी सुबह जाकर के वॉकिंग के लिए जाता हूं। फिर थोड़ा सा थक जाऊंगा चलते-चलते तो वहां पर रेती में मैं बैठूंगा। समुंदर के किनारे रेती जो है वो सैंड बीच जो है उस पर मैं बैठूंगा। अभी देखिए कि मेरी नजर के सामने कितना सुंदर नजारा है। एक तो है अनंत विराट विशाल महासागर। उसकी यह जो लहरें हैं लहरें आकर के यह सीोर के साथ में समुंदर के किनारे के साथ में आकर के कंटिन्यूसली आकर के टकराती है। उसका यह जो धीर गंभीर रुद्र निनाद जो होता है समुंदर की लहरों का वह म्यूजिक इतना हिप्नोटाइजिंग है। वह वहां पर बैठकर के थोड़ा सा आप अपने को उसमें डाल देंगे ना तो ऐसा लगेगा जैसे यह समुंदर की लहरों का यह म्यूजिक वही जैसे कि सब कुछ है। रुद्र संगीत यह जो रुद्र राग भैरव राग यदि मैं मुझे तो राग वगैरह की ऐसी कोई समझ नहीं है। किंतु यदि यह समुंदर की लहरों का बीच के साथ में टकराना इसको यदि कोई राग की उपमा देनी ही होगी तो मुझे लगता है कि यह भैरव राग कह सकते हैं। बड़ा सुंदर आवाज आता है राग और रागिणी की तरह। उसके बाद में देखिए कि विशाल विराट अनंत आकाश है। जैसे कि उसमें यह जो बादल है अभी क्या है कि समुंदर की यह जो होराइजन है पृथ्वी की होराइजोन जनरली शहर या गांव में जहां पे भी आप रहते होंगे रेयरली होराइजोन देखने को मिलती है। क्षितिज जिसको कहते हैं। क्यों? क्योंकि चारों ओर इतने सारे मकान है, इतनी भीड़भाड़ है कि 15 20 फुट ना कि इससे ज्यादा तो देखना ही मुश्किल है आजकल सिटीज में। किंतु समुंदर के किनारे आपको सीधी होराइजन दिखती है क्योंकि फिर समुंदर के ऊपर में समुंदर की सतह के ऊपर में सरफेस पे कुछ भी होता नहीं है तो सीधी होराइजन दिखती है और होराइजन के उस पार क्षितज के उस पार सूर्योदय होता है तो वह जो सुबह का सूर्य है उसको तो आप नजर से देख सकते हैं थोड़ा सा सूरज ऊपर उठता है सा उठने के बाद में उसके बाद में आप सूरज के सामने नहीं देख सकते क्योंकि उसका यह जो प्रकाश है वह इतना उग्र हो जाता है कि आंखों को झुलसा देगा, आंखों को जला देगा। तो किंतु यह जो राइजिंग सन है उसको आप आराम से देख सकते हैं। तो वह जो देखिए बेलून मठ में भी बेलून मठ में मेन टेंपल है। वहां पर सुबह को हम लोग ध्यान करते हैं मेन टेंपल के भीतर में बैठकर के। किंतु उसके बाद में जब यह सूर्योदय होता है ना उस समय में क्या करता था बाहर में आ जाता था बाहर में यह जो चौ ये जो है प्लेटफार्म जैसा मंदिर की चारों ओर वहां पर खड़े रह के मैं उगते सूर्य का दर्शन करता था आप देखिए आपको यदि बेलूर मठ गए होंगे तो मंदिर की और गंगा गंगा नदी है तो गंगा नदी ऑलमोस्ट 2 किलोमीटर ना इतनी चौड़ी है और यहां पे ठाकुर का मंदिर है। बीच में एक लंबा लोन है। ग्रीन लोन है और फिर गंगा नदी है। गंगा नदी के किनारे मठ के भीतर में राजा महाराज का समाधि मंदिर है। मां शारदा का समाधि मंदिर है और फिर स्वामी जी का समाधि मंदिर। तो यूजुअली मैं देखता था कि यह राजा महाराज या मां के समाधि मंदिर के आसपास में ही कहीं पर सूर्योदय होता है। तो वो जो सूर्योदय देखने का एक बहुत बड़ा सद्भाग्य मुझे सालों तक मिला। किंतु वहां पर प्रॉब्लम क्या है पता है ना कि गंगा की उस ओर तो मकान है और जो सूर्योदय होता है तो पहला सूर्य जो है पहली किरण है वह तो मकान के पीछे में ही छुपी हुई है और फिर थोड़ा सा ऊपर उठ जाता है तब सूरज का दर्शन होता है तो उस सूरज के सामने आप ज्यादा देर तक देख नहीं सकते तो किंतु यहां पे ऐसा है कि समुंदर के उस पार तो कुछ है नहीं तो यह जो सुबह के सूर्य का प्रथम थंब जो किरण है वह इतना सॉफ्ट होता है आंखों के लिए इतना वो जैसे कि यह होता है सुकून देने वाला तो आप आराम से उसका दर्शन कर सकते हैं और फिर यह अनंत नील आकाश है और यह सुबह का यह जो कूल ब्रिज जो है ठंडा पवन वो बह रहा है तो इमेजिन दिस सीन इन आवर हार्ट। यह जितना भी हम इमेजिनेशन करते हैं या कंस्ट्रक्ट क्रिएट करते हैं, इस तरह से हमेशा हार्ट के भीतर में ही करना है। कभी भी ब्रेन के भीतर नहीं करना। ब्रेन को स्विच ऑफ कर देना है। क्योंकि यह ब्रेन है पाकिस्तान और यह हार्ट है इंडिया। यह पाकिस्तान से ये सब समय यह टेररिस्ट को भेजता रहता है। तो यह जितने भी अपने नेगेटिव थॉट्स है जितना भी यह काम, क्रोध, मद, लोभ, मोह, मत्सर वगैरह सब जो है वो अपने ब्रेन में ही प्रकट होता है। और जहां पे मेडिटेशन की यह जो यज्ञ यज्ञशाला पुराने आश्रमों में आप जाएंगे मैं वहां पे नर्मदा किनारे जब भ्रमण कर रहा था पुराने-पुराने आश्रम है बहुत सारे उस सब आश्रमों में आप जाएंगे ना तो वहां पे एक छोटा सा कमरा जैसा होगा और उसमें वो बड़े अक्षर से लिखा होगा यज्ञशाला अर्थात कि वहां पे यह होम होता है और होमा अग्नि जलता है और यह होम हवन वगैरह होता है। तो यह हृदय यदि है अपनी यज्ञशाला तो वहां पर सब समय आकर के वह हवन में हड्डी डालने का कार्य करता है। यह अपना ब्रेन तो यह ब्रेन जो है कंप्लीटली स्विच ऑफ कर देना है। माइंड को कंप्लीटली ब्लैंक कर देना है। और फिर हार्ट जो है हार्ट कम्स अलाइव। यह जो कंस्ट्रक्ट हमने क्रिएट किया है दैट हार्ट कम्स अलाइव। अभी यहां पर हमको इस जो पूरा कंस्ट्रक्ट को थोड़ा सा और ग्राउंडेड करना है रियलिटी में यदि और थोड़ा सा उनको रियलिस्टिक बनाना है तो क्या है कि यह जो अपनी सेंसेस जो है अपनी सेंसेस को एंगेज करना है। जैसे कि अभी ठंडा हवा ठंडी हवा जो है कूल ब्रिज जो कि समुंदर के ऊपर में बह रही है वह हमारी स्किन को टच होती है। हमको स्पर्श करती है। तो कैसा एक कूलिंग एक सुदिंग इफेक्ट होता है। तो यह हो गया कि सेंस ऑफ टच को हमने एंगेज किया। इसको एक्टिवली हमको कंस्ट्रक्ट करना है। इसको एक्टिवली इमेजिन करना है हार्ट के भीतर में कि वही समुंदर के किनारे बैठा हूं। यह अनंत समुंदर, अनंत आकाश ऊपर में और वह सूर्योदय क्षितिज के परे बियों्ड होराइजोन हो रहा है। तो अभी जैसे कि कूल ब्रिज को हमने एक्सपीरियंस किया। फिर जैसे कि सेंस ऑफ स्मेल यह जो समुंदर की जो फ्रेगरेंस है मॉर्निंग फ्रेगरेंस वो आकर के उसका जो जो सुगंध जो है वो उसको मैं उसका आनंद ले रहा हूं। तो यह सेंस ऑफ स्मेल जो है उसको एंगेज करना है। फिर जैसे कि सेंस ऑफ साइड आंखों से तो हम इतना सुंदर दृश्य देख ही रहे हैं तो वह तो एक एंगेज है ही है। फिर जैसे कि सेंस ऑफ टच है तो यह समुंदर की किनारे की यह जो रेती है उसके ऊपर में हम बैठते हैं तो कैसा एक सुंदर एक फीलिंग होता है। आजकल पता है ना वो आयुर्वेदिक एक्यूप्रेशर शूज लोग पहनते हैं कि आप पैर में पहनेंगे तो अपने पैरों के जो बॉटम जो है वहां पे यह उस तरह से होंगे आपको छोटे-छोटे ये राइज इस तरह से होंगे। इसके ऊपर में पैर रखने से ऐसा लगेगा कि आपके जैसे पैरों को मसाज हो रहा है। तो इस तरह के एक्यूप्रेशर शूज आते हैं। स्लीपर आते हैं जो लोग पहनते हैं। डॉक्टर लोग खुद आपको कहेंगे ब्लड प्रेशर या ऐसा कुछ है तो कहेंगे कि एक्यूप्रेशर वाले शूज या चप्पल पहना कीजिए। जिससे कि आप जब चलते हैं तो आपके पैरों के यह जो बॉटम है वहां पे जब ऐसा चुभता है थोड़ा सा तो यह ब्लड सर्कुलेशन बढ़ेगा अपना बॉडी में। ऐसा ही लोग डॉक्टर कहता है। तो मैं हमेशा समुंदर के किनारे चप्पल निकाल करके चलता हूं। क्योंकि यह जो रेती है, रेती जो पैरों में जब चुबती है, इतना सुंदर एक्यूप्रेशर वाला फीलिंग आता है। बहुत अच्छा लगता है। तो आप यदि वहां पर बैठे हैं तो देखिए कि वह जो रेती का यह जो एक कर्कशपन जो है अपनी स्किन को इस तरह से मसाज कर रहा है। एक तरह का सुधिंग फीलिंग दे रहा है। तो, यह सेंस ऑफ टच हो गया। इसको क्या कहेंगे? ग्राउंडिंग कहेंगे ना कि कहेंगे कि इसको रियलिस्टिक करना कंस्ट्रक्ट को सेंस ऑफ साइट सुंदर दृश्य देख रहे हैं। सेंस ऑफ स्मेल वो जो समुंदर का यह जो फ्रेगरेंस हम आस्वादन कर रहे हैं। सेंस ऑफ हियरिंग कि यह जो समुंदर की लहरें जो है वह भैरव राग में जिस तरह से टकरा रही है किनारे के साथ में बार-बार उसमें हम अपने को खो दे रहे हैं। सेंस ऑफ टच है जिससे कि हम इस रेती को स्पर्श करके एक एक्यूप्रेशर वाला सुधिंग फीलिंग हम ग्रहण कर रहे हैं। तो अपनी सेंसेस को जो है एंगेज करना है। क्योंकि क्या है मनुष्य जो होता है यूजुअली सेंस के ऊपर में ही जीता है। सेंस के माध्यम से ही वह सब कुछ करता है। तो सेंसेस को एंगेज करने से यह कंस्ट्रक्ट जो है हमारे लिए काफी रियलिस्टिक हो जाता है। तो यह हो गया कि हमारे मेडिटेशन का प्रारंभ। हमने मेडिटेशन प्रारंभ किया। हृदय के भीतर में यह कंस्ट्रक्ट क्रिएट किया और फिर कंस्ट्रक्ट को हमने सेंसेस के ऊपर में ग्राउंड किया है। ग्राउंडिंग किया है उसका ह्यूमन एक्सपीरियंस के भीतर में जिससे कि यह कंस्ट्रक्ट हमारे लिए रियलिस्टिक हो जाए। जिससे कि जितने भी और बाकी जितने भी आइडियाज हैं यह जो ब्रेन रूपी पाकिस्तान जो भेज रहा है हार्ट रूपी इंडिया के ऊपर में वो सबको हम ब्लॉक कर पाए क्योंकि यह सेंसेस को एंगेज करना मन को एंगेज करना यह ऐसा है कि मान लीजिए एक गिलास में पानी आप पूरा भर देते हैं तो और कुछ भीतर में डालने का अभी कुछ संभावना नहीं है तो वैसे ही अपनी पूरी सेंसेस को आपको एंगेज कर देना है। पूरे माइंड को एंगेज कर देना है कंस्ट्रक्ट करके जिससे कि और कुछ इसको ओवरवेल्म करने का या इस पे अटैक करने का प्रयास ना करें। तो यह हो गया कंस्ट्रक्ट का प्रारंभ। अभी देखिए मैं जब भी यह वॉकिंग के लिए

ध्यान की 'अग्नि': संस्कारों को जलाने की प्रक्रिया

जाता हूं तो देखता हूं कि वहां पे यह जो रास्ता जो है वो रास्ता क्या है ना म्युनिसिपालिटी वाले ब्लॉक कर देते हैं दोनों साइड से। तो जिससे कि आप रास्ते के ऊपर में वॉकिंग कर सकते हैं। बहुत सारे लोगों को रेती के ऊपर में चलना अच्छा नहीं लगता। थोड़ा सा टायरिंग भी है रेती पे चलना और फिर यह जूते वगैरह जो पहने होते हैं उसमें रेती घुस जाती है। तो उन लोगों को रोड पर चलना ही अच्छा लगता है। तो मैं देखता हूं कि रोड रोड ही भरा रहता है। रेती पर चलने वाले लोगों की संख्या बड़ी अल्प है। तो यह रोड पर चलते हैं, वॉकिंग करते हैं। बगल में ही समुंदर है। और फिर क्या है पता है? वहां पर किनारे पर बहुत सारे स्टॉल है। तो यह स्टॉल में ये क्या करते हैं? यह कुछ ना कुछ हेल्थ ड्रिंक है वगैरह सेल करेंगे क्योंकि पता है कि यह जो क्राउड है मॉर्निंग वक वाला यह सब हेल्थ फ्रीक है या तो हेल्थ फनेटिक है तो उनको यह हेल्थ ड्रिंक वगैरह अच्छा लगता है। उसमें भी कुछ-कुछ लोग तो ऐसे ही होते हैं कि वॉकिंग का बहाना लेकर के आते हैं अपने मित्रों को लेकर के फिर वहां पर साइड वॉक जो है वहां पर सुंदर बैठने की जगह है। तो वहां पर बैठकर गप लगाएंगे। थोड़ा सा वॉक किया 10-15 मिनट फिर बैठ के गप लगाया और फिर गप लगाते लगाते फिर यह जो हेल्थ ड्रिंक वगैरह है पीते रहते हैं। तो वहां पे एक जूस मिलता है। बड़ा पॉपुलर है यहां पे। उसको यह लोग एबी सी जूस कहते हैं। ए फॉर एप्पल, बी फॉर बीटर रूट, सी फॉर कैरट। तो एप्पल, बीटर रूट, कैरट ये तीनों को मिक्स करके जूस बनाते हैं। तो एबीसी जूस। तो यह एबीसी जूस आप पिएंगे अर्ली मॉर्निंग को तो यह जो नरिशमेंट जो है यह जो विटामिंस है यह मिनरल्स है यह जो एसेंशियल जो इंग्रेडिएंट्स है इन तीन वेजिटेबल के आपको कंसंट्रेटेड मात्रा में मिल जाएंगे। तो अर्ली मॉर्निंग यानी कि हवा पानी भी शुद्ध है। वातावरण भी बढ़िया है। अपना फिजिकल फिटनेस भी अर्ली मॉर्निंग को अच्छा ही रहता है। ऊपर में से आप हेल्थ ड्रिंक पिएंगे तो आपको बड़ा अच्छा लगता है। तो क्या है कि यह एबीसी जूस जो है क्यों पिया जाता है? क्योंकि हमको इसमें से यह नरिशमेंट मिलता है। तो यह जो कंस्ट्रक्ट है इसको हम कहेंगे एबीसी कंस्ट्रक्ट। क्यों? क्योंकि यह जो पूरा जो सीन हमने क्रिएट किया है। इस सीन में से ना हमारे हृदय को हमारे मन को नरिशमेंट मिलता है। यह जो एबीसी जूस जैसा नरिशमेंट वो जो पूरे सीन में से पूरे यह कंस्ट्रक्ट में से मिलता है। इस नरिशमेंट को हम ग्रहण करते हैं। देखिए एक होम में दूसरा है यह पूरा सुंदर विशाल जगत। ऊपर में नील आकाश, यह नील समुंदर, यह जो सूर्योदय है, ठंडी हवा है, यह रेती का यह जो मसाजिंग जो प्रेजेंस है, यह फ्रेगरेंस है, यह जो लहरों का यह जो संगीत है, यह सब मिलाकर के मेरे मन और मेरे हृदय को नरिशमेंट देता है। तो यह जो एबीसी जूस जिस तरह से मुझे नरिशमेंट देता है तो यह सीन जो है पूरा यह सीन भी मुझे नरिश करता है। मुझे हेल्दी बनाता है। मुझे भीतर में से मेरे मन के लिए जो एसेंशियल इंग्रेडिएंट्स है ये हेल्दी कॉन्शियसनेस के लिए एक हेल्दी माइंड के लिए वो सब एसेंशियल इंग्रेडिएंट्स इस पूरे विश्व में से इस कंस्ट्रक्ट में से मुझे मिलते हैं। हैप्पीनेस मिलता है। पीस ऑफ माइंड मिलता है। डिस्ट्रैक्शन फ्री टाइम मिलता है। ईश्वर का मैं चिंतन कर सकता हूं। मैंने खुद ने पिछले दिन पिछले सप्ताह पिछले महीने क्या किया? उसका मैं एक सेल्फ एनालिसिस कर सकता हूं। क्या मैंने जो भी एक्टिविटीज जो भी एक्शन ली है, जो भी मेरा बिहेवियर था, वह बिहेवियर का करेक्ट था? मैंने क्या ऐसा कोई कार्य किया है जिसकी वजह से मैं कर्म के बंधन में फंस जाऊंगा? यदि किया है तो रिविजिट दैट एक्शन या और दैट बिहेवियर और दैट डे दैट इवेंट मैं इस तरह से सोच करके सेल्फ एनालिसिस करतेकरते सेल्फ रिले रिफ्लेक्शन करते-करते मुझे याद आया कि पिछले ही सप्ताह मैंने किसी के साथ में बहुत बुरा व्यवहार किया है। अभी देखिए कि दूसरे के साथ में बुरा व्यवहार करना यानी कि कर्म के बंधन तो मुझे लगेंगे ही लगेंगे और फिर इस कर्म के बंधन को काटना भी तो अभी कितना मुश्किल है। तो देखिए कि एक शॉर्टकट आजमाइए अपने मन क्योंकि क्या है कि यह सब घटनाएं तो समय और अवकाश के परे है ना। अपना मन तो समय और अवकाश के पर है। घटना अवश्य टाइम एंड स्पेस के भीतर में लोकलाइज्ड है। ग्राउंडेड है। किंतु अपना जो मन जो अपना जो आत्मन जो है दैट आत्मन इज नॉट ग्राउंडेड विद इन दिस स्पेस टाइम कॉम्प्लेक्स। राइट? तो स्पेस टाइम कंस्ट्रक्ट आत्मन इज बिय्ड स्पेस, टाइम, मैटर, एनर्जी एंड चेन ऑफ कोज़ेशन। तो आप उसी घटना को फिर से रिवजिट कीजिए। इस सेल्फ रिफ्लेक्शन के दौरान और जो बुरा बिहेव किया था उसी घटना को आप रिवाइंड कीजिए, रिप्ले कीजिए एंड यू बिहेव बेटर दिस टाइम। तो यह जो मन के भीतर में उस व्यक्ति के प्रति जो मेरा बुरा व्यवहार था उसको मैंने अभी इस टाइम इस टाइम मैं जो अपने माइंड में उसको रिप्ले कर रहा हूं उसको मैंने अच्छे व्यवहार में परिणत कर दिया। तो क्या होगा कि उस बुरे व्यवहार का यह जो बुरा फल मुझे जो मिला था और इस बुरे फल को काटने के लिए जो कुछ तपस्या वगैरह मुझे करनी थी वह सब बुरा फल ही नहीं मिलेगा क्योंकि इस घटना को ही मैंने रीाइट कर दिया है। बहुत बार हम सोचेंगे क्या ऐसा हो सकता है कि जितने भी पाप किए हो पाप से हम मुक्त हो जाए तो हां देखिए उस लेवल का हमको कंसंट्रेशन लाना होगा। ठाकुर की वही फेमस बात गिरीश को कहते हैं कि लहसुन की बाटी को सिर्फ धोने से लहसुन की गंध नहीं जाएगी। किंतु लहसुन की बाटी को अग्नि में जलाने से अवश्य यह गंध चली जाएगी। तो क्या है कि यह जो अग्नि में जलाना यह है एक तरह का मेडिटेशन। यह मेडिटेशन आप मेहनत करके रेगुलर कीजिए। कष्ट होगा। मन के भीतर में से बहुत ज्यादा रेस्टलेसनेस प्रकट होगा। किंतु रेस्टलेसनेस को काट दीजिए। कैसे भी करके कंस्ट्रक्ट बना करके सेल्फ रिफ्लेक्ट करके जितने भी पिछले कर्म थे हमारे दुष्कर्म किए हो, कुकर्म किए हो, उसको रिप्ले कीजिए। और फिर उसको रीाइट कीजिए। यू कैन रीाइट योर पास्ट। अपने इतिहास को हम फिर से लिख सकते हैं। जितने भी कर्म हमने किए हैं सबको हम कर्म को बदल सकते हैं। कर्म के फल को वहीं पर काट सकते हैं। क्योंकि यदि हम सही-सही में अद्वैत पर विश्वास करते हैं, तो यह जो माया के जगत में जो कुछ भी हो रहा है, यह कोई पत्थर पर तनी हुई लकीर थोड़ी ना है कि यह हुआ सो हुआ। अभी अनंत समय के लिए मुझे इसका भोग करना पड़ेगा। ऐसा कुछ नहीं है। जो रेती में बनाया हुआ चलचित्र एक चित्र ही तो है ना यह अपने संस्कार तो उसको मिटा करके दूसरा चित्र बना दीजिए। देखिए कि अपने संस्कार शुद्ध हो जाएंगे। इतना ही तो करना है। तो यह सेल्फ रिफ्लेक्शन हमको वहां पर बैठ के करना है। तो यह हो गया फर्स्ट स्टेज कि एबीसी स्टेज। जैसे कि एबीसी जूस में से हम लोगों को यह नरिशमेंट मिलता है। वैसे ही इस कंस्ट्रक्ट में से हमको नरिशमेंट मिलता है। इसके बाद का स्टेज

ध्यान की गर्जना: अपने भीतर के शेर को जगाएं

क्या है? देखिए ये जो अपना जर्नी है हिंदू धर्म का या तो कोई भी धर्म वो भले ही चाहे द्वैत अद्वैत वाली टर्मिनोलॉजी को स्वीकार करें ना करें। हम सबकी तो जर्नी है द्वैत से अद्वैत की ओर। तो एक बार हम लोग बैठे एक बार हमने अपने हार्ट में यह कंस्ट्रक्ट बनाया एक बार हमने इसको सेंसेस जो है हमारी उसमें ग्राउंड किया और फिर इसके बाद में यह सेल्फ रिफ्लेक्शन प्रारंभ किया कि जितने भी पास्ट कर्म है उसको मैं रीाइट करता जाता हूं। मैं अपने बिहेवियर को और अपने यह जो एकशंस है उसको मैं हाईएस्ट एथिकल और मोरल स्टैंडर्ड पर रखता हूं। यह एक बार हमने किया। उसके बाद में देखिए कि सेकंड स्टेज प्रारंभ होता है। वह है अद्वैत का। यह था द्वैत कि मैं हूं और यह पूरा यह समुंदर है, आकाश है, यह सूरज है, लहरों की यह संगीत है, यह रेती का कर्कशपन है। यह सब है। ये मैं हूं और बाकी सब कुछ है। किंतु फिर सेकंड स्टेज में बिकम द सन इटसेल्फ। मेरा जो देह है यह जो मेरा छोटा अहम है यह जो छोटा यह मेरा अहंकार है उसको मैं जैसे कि वही अनंत नील महासमुंदर में पिघल देता हूं। मैं उसमें जंप लगाता हूं खड़े होकर के और इस समुंदर के भीतर में जैसे कि मैं नमक की गुड़िया हूं। समुंदर में मैंने झंपलाया और समुंदर के भीतर में मैं पिघल करके समुंदर के साथ एकाकार हो गया। फिर जैसे कि सूरज की गर्मी से मैं यह जो बाष्प होकर के हवा में उड़ रहा हूं। आकाश के साथ में एकाकार हो गया। सूरज के साथ में एकाकार हो गया। मेरा अपना जो इंडिविजुअल एग्जिस्टेंस था वो एग्जिस्टेंस क्यों था? क्योंकि यह कर्म के बंधन ने तो यह अष्टपाश में मुझे बांध के रखा था। यह ऐसा है सोचिए कि एक हाथी है महा प्रचंड शक्तिशाली हाथी इस हाथी को आप चैन से बांध करके रखते हैं। तो जब तक आपने चैन से बांध के रखा है हाथी बेचारा कुछ नहीं कर पाता। किंतु जैसे ही आपने यह चैन तोड़ दिया हाथी बड़े ही आनंद से विचरण करता है। तो वैसे ही यह जो अपना जो आत्मन है अभी आत्मन को तो बांध नहीं सकते किंतु यह आत्मन का रिफ्लेक्शन जो हमारे भीतर में है इसको कि यह जो कर्म रूपी बादल है उसको जैसे कि उसने ग्रसित कर दिया है। जैसे कि उसके ऊपर में एक्लिप्स जैसा हो गया है। तो, क्या है कि यह जो कर्म के बंधन के जितने भी यह पाश है, अष्टपाश लज्जा, घृणा, भय, जाति, कूल, शील, मान और अभिमान ये जो अष्टपाश से हमने उसको बांध के रखा था। देखिए आप बहुत बार हम लोगों को अब जैसे कि एक सिंपल सा उदाहरण मैं अपना ही बताता हूं। मैं बहुत ज्यादा इंट्रोवर्ट हूं। लोगों के साथ में इंटरेक्ट करना, लोगों के साथ में फ्रेंडशिप करना, एक अच्छे से बात करना मेरे से नहीं होता। बीइंग इंट्रोवर्ट। तो क्या है कि मैं अपना अकेले-अकेले बैठकर के स्टडी करता रहता हूं। कार्य करता रहता हूं। जो कुछ भी है करता रहता हूं। लोगों को ऐसा लगता है कि यह बड़ा घमंडी है और घमंड के मारे अहंकार के मारे मेरे से बात नहीं कर रहा। अभी मैं क्या है? उसका यह जो परसेप्शन है मेरे बारे में मैं समझता हूं कि मेरे बारे में इस तरह से नेगेटिव सोचता भी है। किंतु समहाऊ ना यह जो एक इंट्रोवर्ट का यह जो बैरियर जो मैंने खड़ा करके रखा है अपने चारों ओर कि बस एक महत कार्य के लिए जीना है। यह चिट चैट के लिए स्मॉल टॉक के लिए टाइम पास के लिए मेरे पास टाइम नहीं है। यह सभी चीजों को मैं इस तरह से निम्न दृष्टि से देखता हूं। गप लगाना, बातें करना, फ्रेंडशिप करना इज अ वेस्ट ऑफ टाइम। इसकी वजह कुछ अच्छा सा करें, कुछ महत कार्य करें। ऐसा मेरे माइंड में बहुत पहले से बैठा है। तो, यह बैरियर जैसा मैंने एक बना के रखा है कि लोगों के साथ में एक सहज रूप से वार्तालाप करना मेरे से नहीं होता। तो अभी क्या है ना यह बैरियर ना धीरे-धीरे करके एक लज्जा घृणा भय इसका एक एक स्वरूप धारण कर लिया है। लज्जा इसलिए होती है कि अभी बोलने का हैबिट नहीं है तो कहां आप सामने से जाकर के किसी के साथ बात करेंगे। घृणा इसलिए होती है कि यह स्मॉल टॉक है। यह हंसी मजाक करना है। मित्रता करना है। यह सब वेस्टेज ऑफ टाइम है। एक महत कार्य के लिए जीवन देना है। फिर एक भय होता है। भय इस तरह से होता है कि मैं यदि उसके साथ बात करने को जाऊंगा और यदि वह मुझे रिसोंड नहीं करेगा तो वो सामने यदि मेरा अपमान करेगा तो यदि मुझे इग्नोर करेगा तो तो यह भय रहता है। तो यह लज्जा, घृणा, भय, फिर जाति, कुल, शील, मान, अभिमान यह जितने भी पाश है, पाश से हमने अपने को बांध के रखा है। बोल कर के ही तो मैं एक छोटा सा देह लेकर के समुंदर के किनारे बैठा हूं। अभी आपको यह फर्स्ट स्टेज ऑफ कंस्ट्रक्ट है। एबीसी स्टेज। एबीसी स्टेज में क्या करना है कि यह जितने भी यह घटनावली है अपने जीवन की जहां पर मैंने जितने भी बिहेवियर किए हैं अष्टपाश में बंद करके यह लज्जा के मारे मैंने इस तरह का किया भय के मारे ऐसा कुछ किया घृणा के मारे ऐसा कुछ किया मान और अभिमान के वश में आकर के मैंने ऐसा कुछ किया या तो फिर यह डरिपु है तो उसके आवेश में आकर के मैंने जो जो कुछ किया है वह सभी कार्यों को जैसे कि वाइट वाश करते जाना है। वह सभी घटनाओं को रीाइट करना है। ठाकुर और मां और स्वामी जी तीनों को देखिए तीनों को इस घटना में बिठाइए कि वे तीन लोग क्या करेंगे? इस घटना यदि होगी और वह तीनों का कंसंट्रेटेड एसेंस यदि मेरे में होता या इन तीनों में से कोई एक होते तो वे लोग किस तरह से बिहेव करते। इस तरह से बिहेव आप अपने मन में वह सामने वाले व्यक्ति के प्रति कीजिए। इस तरह से बिहेव आप उस घटना में कीजिए। उस इवेंट में कीजिए। देखिए कि वो इवेंट है वो घटना है रीाइट हो जाएगी। पास्ट विल रीाइट इटसेल्फ। यह जो घटना के ये जो जितने भी कर्म फल लगे थे सब कट जाएंगे। तो ऐसा सेल्फ रिफ्लेक्ट करतेकरते अपने पास्ट को रीाइट करतेकरते आप यह जो छोटा सा देह है जो कि समुंदर के किनारे बैठा है उसको आप तोड़ दे सकते हैं। लज्जाशील कुल जाति ये जो मान अभिमान जो जो कुछ भी अष्टपाश से आपने बांध के रखा है वो अष्टपाश जैसे कि बिखर जाएंगे और इसके भीतर जो आत्मन है वो आत्मन जैसे ये देह रूपी पिंजर को तोड़ कर के बाहर आकर के प्रगटित होगा और फिर यही आत्मन जो है ये विशाल समुंदर ये समुंदर की लहरों का संगीत ये अनंत आकाश आकाश यह आकाश के परे क्षितिज से परे जो सूर्योदय हो रहा है उसमें जाकर के एकाकार हो जाएगा एकीभूत हो जाएगा और यह होगा आपका अद्वैत अनुभूति और ऐसा आप कंस्ट्रक्ट कर सकते हैं ऐसा मत सोचिए कि जब तक ना कि यह दगधबीज ना हो जाए मेरे काम कांचन के प्रति जो भी आकर्षण है तब तक मुझे अद्वैत अनुभूति नहीं होगी इस यह भी एक सेल्फ हिप्नोटिज्म हमने अपने पे करके करके रखा है। जस्ट इमेजिन दैट यू आर हैविंग दिस अद्वैत अनुभूति। स्वीकार कर लीजिए कि हां इसी नील आकाश के साथ में मैं मिल गया हूं। इसी ये जो अनंत समुंदर में मैं पिघल गया हूं। वही यह जो सुबह का सूर्य है उसके साथ में मैं एकाकार हो गया हूं। जैसे ही यह अनुभूति करेंगे ना तो यह जो तीन एस है ना सन, सी और स्काई उसके साथ में आप एकीकृत हो जाएंगे। तो देखिए कि वह ध्वत वाला फेस एबीसी जो एबीसी जूस आप पीते हैं यानी कि कंस्ट्रक्ट में से नरिशमेंट आप ग्रहण करते हैं। आप सेपरेट है, कंस्ट्रक्ट सेपरेट है और समुंदर अलग है, आकाश अलग है। वहां से लेकर के आप अपने को सन, सी और स्काई एस एस एस इन तीन एस के साथ में एकाकार कर देते हैं। तो इसको मैंने नाम दिया है एबीसी टू एस एस एस। यह जो मेथड है द्वैत से अद्वैत तक जैसे ही यह सेल्फ रिफ्लेक्ट मैं करता गया सेल्फ रिफ्लेक्ट करतेकरते भीतर में पास्ट भूतकाल की जितनी भी घटनाएं हैं जो कि मेरे मन को व्यथित कर रही है जो कि मेरे मन में एक तरह से डिप्रेशन खड़ा कर रही है जो कि मेरे पर संस्कारों का बंधन डाल रही है। वह सब घटनाओं को रिवजिट कीजिए। मान लीजिए कि आप ठाकुर मां स्वामी जी स्वयं हैं। उस घटना में आप पार्टिसिपेट करते हैं। और व्हाट इज दी हाईएस्ट आइडियल? कोई भी बिहेवियर है। उस बिहेवियर का हाईएस्ट आइडियल कौन सा है? कोई भी घटना में आप मां किस तरह से यहां पर वो बिहेव करेगी? स्वामी जी किस तरह से बिहेव करेंगे? ठाकुर किस तरह से करेंगे? एक और हम तो ठाकुर मा स्वामी जी की यह कहानियां है, घटनाएं हैं, उपदेश है। सतत उसका श्रवण मनन निधि्यासन करते आ रहे हैं। अभी तो तीन साल हो गए इस क्लास को प्रारंभ हुए और बाकी सब जगहों पर भी आपने सुना ही होगा। तो क्या है कि ठाकुर मास्वामी जी का जो बिहेवियर है हमको पता है। हम एक सहज अनुमान कर ही सकते हैं। तो उस बिहेवियर को उस घटनावली में आप प्रवेश करवाइए और जैसे ही वह घटना रीाइट होगी साथ में ही जितने भी कर्म के बंधन है कट जाएंगे और आप अद्वैत अनुभूति आपको होगी। यह हो सकता है। वह कोई बहुत मुश्किल बात नहीं है। कोई बहुत डिफिकल्ट बात नहीं है। और फिर आप यह जो एबी सी से ये एस एस एस वाले स्टेज में पहुंच गए। सन सी और स्काई के साथ में एकाकार हो गए। उसके बाद में क्या? तो स्वामी जी के दो कोटेशन है। मैंने यहां पर कलेक्ट किए हैं। क्या कहते हैं स्वामी? यू आर लायंस। यू आर सोल्स प्योर इनफाइनाइट एंड परफेक्ट आप सिंह है आप आत्मन है प्योर शुद्ध अनंत और परफेक्ट है द नाइट द माइट ऑफ द यूनिवर्स इज विद इन यू पूरे विश्व ब्रह्मांड की जो अनंत शक्ति है वह हमारे भीतर में है। व्हाई विपेस्ट धाऊ माय फ्रेंड क्यों रोते हो मेरे मित्र? देयर इज नाइदर बर्थ नर डेथ फॉर दी। तुम्हारे लिए ना ही तो जन्म है ना ही मृत्यु देयर इज नो डिसीज नो मिरी फॉर दी तुम्हारे लिए ना ही तो यह जरा है ना ही व्याधि है ना ही कोई रोग है ना ही यह मृत्यु है ना ही कोई यह मिजरी है ना ही कोई दुख दर्द है बट धाऊ आर्ट लाइक द इनफाइनाइट स्काई तुम हो एक अनंत आकाश क्लाउड्स ऑफ वेरियस कलर कलर्स कम ओवर इट। विभिन्न रंग के बादल है। यह आकाश के ऊपर में आते तो रहेंगे। प्ले फॉर ए मोमेंट। थोड़ा बहुत खेलेंगे भी। देन वेनिश और फिर अदृश्य हो जाएंगे। यह बादल अर्थात कि हमारे यह जो जो ब्रेन रूपी पाकिस्तान ये जो टेररिस्ट बेचता है वो यह जितने भी नेगेटिव थॉट है बादल के रूप में आएंगे। हम यहां से आकाश को देख रहे हैं। कभी-कभी लगता है आकाश बादलों से घिरा है। किंतु कुछ ही क्षण के बाद में बादल भी बह जाएंगे और जो अनंत नील आकाश है वह वैसा ही दिखने लगेगा। तो यह बादल आएंगे जाएंगे। इससे हमको क्या फर्क पड़ता है? थोड़ा बहुत खेलेंगे और फिर चले ही जाएंगे। बट द स्काई इज एवर द सेम इटरनल ब्लू। किंतु यह जो आकाश है वैसा ही कि वैसा ही अनंत नील आकाश वैसे का वैसा ही रहेगा। तो देखिए कि यह जो हम अपने पास्ट को रीाइट कर सकते हैं। कोई हम भूतकाल के बंधन में नहीं फंसे हैं। ना ही हम किसी भी तरह के भविष्य के बंधन में फंसे हैं। ना ही हम किसी वर्तमान के बंधन में फंसे हैं। एक बार हम अपने को सन, सी और स्काई के साथ में एकाकार कर ले। फिर देखिए कि यह विश्व ब्रह्मांड की अनंत शक्ति मेरे में प्रवेश करती है। यही अनंत शक्ति ही मेरा सही स्वरूप है। और यह जो अपने को एक छोटा सा मनुष्य देह वो समुंदर के किनारे बैठा हुआ में मान रहा था वही एक स्वप्न है। वही एक भ्रम है। सही में तो देखिए कि मैं समुंदर के किनारे बैठा नहीं। मैं तो समुंदर स्वयं हूं। मेक द हार्ट लाइक एन ओशन। हृदय को एक विराट अनंत समुंदर बना दो। गो बियों्ड ऑल द ट्राइफल्स ऑफ द वर्ल्ड। जगत की ये जो भी छोटी-मोटी घटनावली है उसके परे चले जाओ। बी मेड वि जॉय इवन एट इवल। इवन यदि हम कोई गलत कार्य भी देखते हैं, गलत करते हुए भी देखते हैं किसी को इससे भी जैसे कि आनंद से आत्माहारा हो जाओ। क्यों? क्योंकि जो सही जो गलत कर रहा है वह भी तो वही मां काली है। जिसके साथ में यह गलत हो रहा है वह भी तो वही मां काली है। यदि मैं किसी के साथ में बुरा व्यवहार करता हूं तो मेरे भी भीतर में वही मां काली जिसके साथ में बुरा व्यवहार हो रहा है वह भी तो मां काली। इस घटना को आप रीाइट कर सकते हैं। अपने बिहेवियर को भूतकाल में जाकर के चेंज कर सकते हैं और अच्छे से री बिहेवियर कर सकते हैं अपने को। सी द वर्ल्ड एज अ पिक्चर एंड देन एंजॉय इट्स ब्यूटी। विश्व को एक सुंदर चित्र के रूप में देखो और उसके सौंदर्य का आनंद उठाओ। यह जो ग्राउंडिंग कि अपनी जितनी भी सेंसेस है वह चाहे वह सेंस ऑफ साइट हो वह जो इतने सुंदर नजारे का आनंद ले रही है सेंस ऑफ हियरिंग हो कि समुंदर की लहरों का संगीत सुन रही है ना कि सेंस ऑफ टच हो ना कि यह जो रेती का यह जो एक्यूप्रेशर सुधिंग है उसका आनंद ले रही है ना कि यह सेंस ऑफ स्मेल हो कि यह जो फ्रेगरेंस है मॉर्निंग और समुंदर की उसको आनंद ले रही है सी द वर्ल्ड एज अ पिक्चर एंड देन एंजॉय इट्स ब्यूटी। जगत को एक पिक्चर के रूप में देखो। उसके सौंदर्य का आनंद उठाओ। नोइंग दैट नथिंग अफेक्ट्स यू। यह जान के कि इस जगत में ऐसा कुछ नहीं है जो कि आपको अफेक्ट कर सके। मेरा यह जो कल का बिहेवियर, मेरा आज का बिहेवियर, आने वाले कल का बिहेवियर सब कुछ मैं रीाइट कर सकता हूं। मेरे चरित्र को, मेरे संस्कार को संपूर्ण रूप से मैं रीइजीनियर कर सकता हूं। रिकंस्ट्रक्ट कर सकता हूं। जिस क्षण में यह सोचता हूं कि अरे यह मैं छोटा सा अहम हूं और फिर यह जो मेरा भूतकाल है मेरे गले में घंटी के पत्थर की तरह बंधा है। वही मुझे ले डूबेगा। उसके बारे में मैं कुछ नहीं कर पाऊंगा। पता नहीं जन्म जन्मांतर की तपस्या लगेगी। इस कर्म को काटने के लिए वह सब कुछ भूल जाओ। यह मैं आत्मन हूं। आत्मन के ऊपर में किसी भी तरह के कर्म का बंधन नहीं है। हां, कुछ गलतियां कर दी भूतकाल में जाकर के उसको रीाइट कर दो। चिल्ड्रन फाइंडिंग ग्लास बीड्स इन अ मड पडल। दैट इज द गुड ऑफ द वर्ल्ड। यह जो मिट्टी का यह जो कीचड़ का एक छोटा सा यह गड्ढा है। उसके भीतर में बच्चे खेलते हैं और यह जो सुंदर कांच के टुकड़े उनको मिलते हैं। यह जगत है। जगत क्या है? यह कीचड़ का गड्ढा ही है। उसमें यह जो कलर रंगीन ग्लास के टुकड़े हैं, वही यह हमारी यह जो सेंस ऑब्जेक्ट के पीछे दौड़ना, बड़ा कैरियर, बड़ी गाड़ी, बड़ा यह विमान में जर्नी करना, यह बड़ी-बड़ी टूर करना, हॉलिडे में जाना, अच्छा फैमिली चाहिए, अच्छा पैसा, बैंक बैलेंस चाहिए, प्रेस्टीज चाहिए। यह सब क्या है? कीचड़ में पड़े हुए कांच के टुकड़े। इससे ज्यादा और कुछ नहीं है। दैट इज द गुड ऑफ द वर्ल्ड। यही है जगत। इससे ज्यादा और कुछ नहीं। लुक एट इट विद कॉम कॉम्प्लेसेंसी। एक अनंत शांति से अनंत वैराग्य से इस जगत को देखो। सी गुड एंड इवल एस द सेम। अच्छा और बुरा दोनों को एकाकार एक ही रूप से देखो। बोथ आर मियरली गॉड्स प्ले एंजॉय ऑल। दोनों ही जैसे कि ईश्वर की लीला मात्र है। पूरे इस लीला का आनंद उठाओ। हां, मैं इस लीला का पार्ट हूं। हां, मैं कभी अच्छे कर्म करता हूं। हां, मैं कभी बुरे कर्म करता हूं। किंतु यह अच्छे कर्म या बुरे कर्म मुझे बांधते नहीं है। मेरा यह मुझे डिफाइन नहीं करते हैं। मेरा डेफिनेशन तो है सच्चित आनंद। नहीं कि ये रोटी कपड़ा मकान के पीछे दौड़ने वाला एक जीव जो कि इस प्रलोभन के मारे लोगों को कष्ट देता है। लोगों को अब्यूज करता है। जो भयभीत होकर के रहता है। जो उसका शोषण करने को आता है, उसके सामने झुक जाता है। वो जो एक भ्रम मैंने खड़ा करके रखा है, इस भ्रम से अपने को मुक्त करो। यह सब जगत है ईश्वर की लीला। एंजॉय ऑल। इस लीला का आनंद उठाओ। तो यह देखिए कि द्वैत से अद्वैत तक की हमारी यात्रा है। हम लोग सोच जितना ही यह सोचते रहेंगे कि हां मैं यह छोटा सा अहम हूं। छोटा सा मनुष्य देह हूं। इससे ज्यादा मैं कुछ नहीं। जितना हम अपने को सेल्फ हिप्नोटाइज करने को जाएंगे, उतना ही हो जाएंगे। और जितना हम अपने को हिप्नोटिज्म से मुक्त करके यह अनंत आकाश अनंत समुंदर के साथ में एकाकार करेंगे तो उतना ही हम वही होते जाएंगे। एंजॉय ऑल इस पूरे विश्व का यह जो मेरे अनंत स्वरूप है उसका हमको आनंद उठाना है। सो दिस एक मेथड ऑफ मेडिटेशन मैं इस हमारे स्टूडेंट्स के साथ में डिस्कस कर रहा है। ओके। सो अभी नेक्स्ट क्लास कल और इस सप्ताह है हमारा रामकृष्ण लीला प्रसंग शरद महाराज द्वारा लिखित जो कि अभी हम कल से स्टार्ट करेंगे। ओम शांति शांति शांति हरि ओम तत्सत श्री राम कृष्णपणमस्तु

प्रश्न: क्या ध्यान से कर्म का फल कट जाएगा? क्या दुश्मनों के अहित करने पर भी हम कुछ न करें?

देखिए ऐसा होगा कि व्यवहार में कभी-कभी हम इस तरह का व्यवहार कर बैठे जो कि हमको बाद में ठीक ना लगे तो यह तो कोई जीवन का अंत नहीं है ना वह ध्यान करने के समय फिर से उस घटना को रिवजिट कीजिए और रीाइट कीजिए उसको। यह भी तो अपने हाथ में ही है। और भी एक देखिए इसमें कि देखिए कोई भी व्यक्ति इस तरह का बिहेवियर करता है ना तो क्या है कि वो उसके उसके कर्म का भोग वो भोगतेगा। है ना? अब ऐसा तो नहीं है कि कोई भी व्यक्ति के पास में लाइसेंस है, बुरे से बुरा काम करते ही जाओ और उसका कोई फल ना मिले। ऐसा तो हो नहीं सकता है ना। वह यदि दूसरों के साथ में दुर्व्यवहार करता है तो उसका फल तो उसको अवश्य भुगतना है। आज नहीं ना कल कल नहीं ना परसों। बहुत बार हम लोग सोचते हैं कि मैं बदला लूंगा कि उसने मेरे साथ में ऐसा किया तो मैं भी उसके साथ में ऐसा कुछ करूंगा। तो बदला लेने से क्या है? हम दोनों वही कर्म के जाल में ज्यादा से ज्यादा फंसते जाएंगे। हमको उसको इग्नोर करना है। वो उसका जो कर्म है उसका फल ठाकुर ही उसको दे देंगे। ये तो है ना? तो उसकी चिंता मुझे नहीं करनी। मुझे अपना जो बिहेवियर है उसको एक स्टैंडर्ड लेवल पर रखना है। और उसके कर्म का फल तो उसको मिलना ही है। तो उसके लिए मुझे क्या टेंशन लेना? उसके लिए तो ठाकुर बैठे हैं।

प्रश्न: सोशल गैदरिंग में जाना बहुत फ्रस्ट्रेटिंग होता है। हमें दुनिया भर की सांसारिक बातें सुननी पड़ती हैं। इससे हम आध्यात्मिक से गिर जाते है. क्या इसका कोई सलूशन है?

देखिए सही में बताऊं तो मैं खुद ये सब चीजों को बहुत ही अवॉइड करता हूं। जितने भी सोशल ओकेजन है क्योंकि सोशल ओकेजन मुझे डिप्रेस ही करते हैं और कुछ नहीं करते। मैं घर में था उस समय भी और यहां पे भी सेम थिंग कि भले ही चाहे मिलने वाले इस लाइन के हैं किंतु फिर भी यदि ओकेजन सोशल है तो सही में मुझे भी इतना यह नहीं और व्हाट कैन बी द सॉल्यूशन देखिए ऑब्लिगेशन तो हम सब पे हैं। राइट? तो ऑब्लिगेशन का पालन तो करना है। क्योंकि अल्टीमेटली उनकी जरूरत के समय हम गए हैं तो हमारी जरूरत के समय वे लोग आएंगे। वह भी तो एक लेनदेन है इस संसार का। हमको भी तो जरूरत पड़ेगा ही लोगों का। तो हम लोग यदि के बुलाएंगे तो वे लोग कहेंगे हमारे बुलाने से नहीं आते तो तुम्हारे बुलाने पर हम क्यों आए? ऐसा एक विद संसार ये सब तो है ही है। अवॉयड भी नहीं कर सकते और लाइक भी नहीं कर सकते। यह देखिए यही तो घटनाएं हमको वैराग्य दिलवाती है ना कि यह जगत मिथ्या है माया है यही तो सब हमको वैराग्य दिलवाता है ना विडम क्या है ना आपको किताब पढ़ के मिल सकता है जो है ना आपको प्रैक्टिकल करके करने हैं और मैंने इस सिचुएशन को हमेशा अवॉइड किया है ठीक ही है कि देखिए जगत में रहकर ठाकुर कहते हैं ना काजल की कोठरी में रहना है और कहेंगे कि मुझे काला ना लगे ऐसा तो संभव ही नहीं आप आप आइडियल दे सकते हैं कि आप कादव में वो कमल के पद्म के फूल की तरह रहिए। किंतु वह कमल के फूल होकर कादव में कितने लोग रह सकते हैं? ज्यादातर तो हमारा वही वाला हालत है। काजल की कोठरी में रहना है और काजल लगना है। तो इसीलिए यह है ना यह कंस्ट्रक्ट वगैरह यह सेल्फ रिफ्लेक्शन क्यों है? कि हम अपने पास्ट को रीाइट कर रहे हैं। जो कोई भी घटना हुई उसने जो कोई भी संस्कार हम पे छोड़े वह सब संस्कार को हम रीराइट करते हैं। वो रीाइट करना ही होगा। अदरवाइज और कोई उपाय नहीं है अपने पास।

प्रश्न: यदि कोई हमारी प्रशंसा करे तो हमारा घमंड बढ़ जाता है. क्या इस घमंड से छुटकारा पाने का कोई सलूशन है?

इसका एक हैक बताता हूं। इसका मेरे पास में है उपाय। मैं बहुत पहले जब जॉइ ही किया था। मैं कामरार पुकुर गया था। तो अभी एक सीनियर ब्रह्मचारी महाराज है। उन्होंने मुझे प्रणाम किया यह सोच के कि यह सीनियर होंगे। तो एक्चुअली अपने यहां तो पता है ना कि जूनियर ही सीनियर को प्रणाम करेगा। तो वह मुझे प्रणाम कर रहे हैं और मैं पूछ रहा हूं कि महाराज आपका जॉइनिंग डेट वगैरह क्या है? और प्रणाम करने से पता चला कि वह मेरे से सीनियर है। अब पहचानते नहीं एक दूसरे को पहली बार मिले हैं। तो एक तो मैंने कहा महाराज आपको मुझे प्रणाम नहीं करना था। यह तो ठीक नहीं हुआ। ऐसा मैं मुंह से बोल रहा हूं। तो सामने में एक दूसरे सीनियर साधु खड़े थे। वह मुझे बोलते हैं अरे यह सब क्या बेतुकी बातें करते हो? तुम सामने प्रणाम करो। प्रणाम को लौटा दो। तो यह बैलेंस हो जाएगा। तो मुंह से इतना बोलने की जरूरत नहीं है। तो मैंने सामने प्रणाम किया। प्रणाम लौटा दिया और हमारा बैलेंस हो गया। तो यहां पे भी ऐसे प्रज़ यदि कोई करता है तो सामने उसको प्रज़ करो। उसका प्रज़ लौटा दो तो बैलेंस जीरो हो जाएगा। कि निंदा में ऐसा नहीं करना है। किंतु कोई निंदा कर रहे हो और सामने में निंदा करूं। वो ऐसा नहीं करना है। प्रज़ में आप ऐसा कर सकते हैं। सामने उनको प्रज़ कर दो बैलेंस हो जाएगा। नहीं तो देखिए काम कांचन बहुत हमारे ऑर्डर में यह बात बड़ी प्रसिद्ध है। काम कांचन से मुक्ति फिर भी हो जाएगी। नेम एंड फेम से नहीं होती। सो ये तो बड़ी प्रसिद्ध है हमारे ऑर्डर में यह बात।

प्रश्न: काम कांचन के सामने तो पूरा इंस्टीटूशन चौकन्ना है, किन्तु name और fame के सामने कोई अलर्ट नहीं

वैसे इंस्टिट्यूशन के भीतर में देखेंगे ना आपको ईगो के तोड़ने वाले बहुत सारी घटना होती रहती है। यदि इफ यू कैन टेक लेसन फ्रॉम दैट कोई भी इंस्टीट्यूशन में जापान में एक कहावत है कि द थंब दैट स्टक्स आउट इट विल बी कट ऑफ अर्थात कि आप ऐसा हाथ करके रखते हैं। उसमें यह अंगूठा ऊंचा करके रखा तो यह अंगूठे को काट देंगे। ऐसा एक जापान में कहावत है। सो इज अ पार्ट ऑफ एनी इंस्टिट्यूशन। कोई अपने स्टेशन से बड़ा होना जाएगा तो 10 लोग आकर के उसका अहम तोड़ने के लिए तैयार रहते हैं। बट यू हैव टू टेक दिस लेसन इन अ पॉजिटिव वे कि मेरा जो अहम बढ़ रहा था उसके सामने यह है। तो वरना फिर क्या होगा? भीतर में से क्रोध प्रकट होगा। फिर मैं बदला लेने का प्रयास करूंगा। तो फिर पूरा गया मामला हादसा।

प्रश्न: अपने विचारो को ढक देना, या अपनी स्वतंत्रता को दबा देना इसका एक भयावह परिणाम यह है की अपनी आत्मश्रद्धा ख़तम हो जाती है. हम कर्म करने के लायक नहीं रहते। यह बात सही है तो?

ना यू आर यू आर राइट यू आर परफेक्टली राइट देखिए ये भारत हजार साल के तमस में क्यों डूब गया इसको कहते हैं ग्रुप थिंग ये जाति नाती वाला ग्रुप थिंग था कि आपको आपको हमको फॉलो करना है ये सोशल कन्वेंशन को वरना आपका हुक्का पानी बंद कर देंगे आपको नाथ से बाहर निकाल देंगे तो यह नाच से बाहर निकालना इतना बड़ा पनिशमेंट था कि वो जो एक ग्रुप थिंक जिसको कहते हैं ना ग्रुप थिंक के बाहर में कोई सोच ही नहीं सकता परिणाम यह आया कि यूरोप यहां पे रेनेसा के ऊपर में इतना आगे बढ़ गया। हम लोग वो ग्रुप थिंक और यह जो गार्डरियो प्रवाह गुजराती में कहते हैं उसमें ऐसे फंस गए अपने को ऐसा तमस के जाल में बांध दिया कि कुछ भी नया सोचने की अभी क्षमता नहीं रही। बोल कर के तो हजार साल की गुलामी आन पड़ी। सो ऑब्वियसली कि इसके तो दोनों पहलू है कि आपको अपनी नेम एंड फ्रेम को कंट्रोल में रखना है। एट द सेम टाइम तमस में नहीं डूब जाना है। और इसीलिए तो आपको अद्वैत की ओर जाना होगा। अद्वैत इज द परफेक्ट सॉल्यूशन। आपको ईगो भी नहीं है। एट द सेम टाइम यू आर इनफाइनाइट ब्लू स्काई। व्हिच इज फुल ऑफ स्ट्रेंथ एंड आत्मश्रद्धा।

प्रश्न: अद्वैत वेदांत का सहारा लेकर सामाजिक व्यवहारों से कैसे मुक्ति पाई जाये?

नहीं यू हैव टू वर्क इट आउट योरसेल्फ। मैं मेरा मेरा तो सिंपल सॉल्यूशन है। मेरा तो सिंपल सॉल्यूशन है। अवॉयड एवरीथिंग किंतु मैं साधु हूं। मेरे लिए वो सब पॉसिबल है। आपके लिए नहीं। अब जैसे देखिए एक सिंपल उदाहरण मैं बताता हूं। मैंने बीच में कहा था ना हमारा जो रसोइया था उसका डेथ हो गया। तो उस दिन रात को जिस दिन डेथ हुआ सब लोग यहां से गए उसके भाई के घर क्योंकि एक कन्वेंशन है आपको जाना पड़ेगा तो मुझे भी फोन किया कि तुम आ रहे हो क्या तो मैंने कहा देखो भाई मेरी इच्छा नहीं है अभी इस समय कहीं जाने की रात को 11:00 बज गए अभी इस समय जाना वापस आना यानी मान लीजिए पूरी रात गई अभी आज की जऊंगा तो तो मुझे नहीं जाना तो अभी क्या है कि मैं तो साधु हूं मैं ऐसा बोल दूंगा कि रात को 11:00 बजे ऐसा डेथ हुआ है तो नहीं जाऊंगा तो मेरे यह चलेगा। मैं मुझे लगता है कि आपको जाना पड़ेगा। आपको विद इन दैट सोसाइटी उस कुछ कुछ जो व्यवहार है वह करने पड़ेंगे। देखिए मैं मैं एक बात बताता हूं यहां पे मैं लास्ट टाइम इस तरह से डेथ में गया था ना बाबा का डेथ हो गया था। वो जो लिमड़ी वाले महाराज है ना आदि भवानंद जी तो कोरोना में डेथ हो गया था उनका तो राजकोट में थे हम लोग। तो अभी क्या है? बाबा के साथ में मेरा अच्छा एक था कनेक्शन। मैं लिमड़ी में था इतने साल। तो अभी क्रिमेशन के लिए जा रहे हैं। तो मुझे भी तो जाना पड़ेगा ना। अभी इसको मैं अवॉइड नहीं कर सकता था। तो ठीक है चलो चलते हैं। दोपहर को 3:00 बजे का टाइम था तो मैंने सोचा एट द मोस्ट क्या 6:00 बजे तक वापस आ जाएंगे। अनकन्वीनिएंट कुछ नहीं है यहां पे। तो 3:00 बजे निकले हम काफी सब साधु डिवोटीज थे। राजकोट की ही बात है। अभी देखिए कोरोना का समय चल रहा है और यह जितने भी क्रिमेटोरियम है ना उसको कोरोना के लिए एक्सक्लूसिव जो कुछ रखे थे वहां पर कोरोना वाले को ही डेथ जो होता है उसको बर्न करना है बॉडी को और और कोई नहीं जा सकता वहां पे ये जो साथ में जाने वाले वो बॉडी को आपको गवर्नमेंट को दे देना है। गवर्नमेंट ही बॉडी को बंद करके आपको एशिस वगैरह दे देंगे। वो किंतु पापा का डेथ कोरोना में नहीं हुआ था। तो हम लोग जा सकते थे। प्रॉब्लम यही है कि ये जो नॉन कोरोना डेथ है उसके लिए जो श्मशान है वो कहां बाहर में आपको जाना है क्योंकि सिटी के सभी श्मशान कोरोना के लिए ब्लॉक कर दिया। तो वहां पे गए जाते-जाते ही पूरा एक डेढ़ घंटा लगा। फिर वहां जा देखा तो डेड बॉडी का लाइन है। यह पहली बार क्योंकि कोरोना में सब ब्लॉक हो गया है तो नॉन कोरोना वाले सब है। यहां डेड बॉडी का लाइन डेड बॉडीज को लाइन में रखा है और फिर दो शेड है जहां पर बर्न करते हैं। तो हमको पता चला कि हमारी बारी जब नंबर ऑफ बॉडीज काउंट किया रात को 9:00 बजे आएगी। तो अभी क्या करेंगे? वापस जाना भी एक डेढ़ घंटे का जर्नी है। फिर वापस आएंगे 3 घंटा। तो वैसे ही 3 घंटा इधरउधर हमको वहां 3 घंटा जाकर के आए ना 3 घंटा यहां वेट करें वही एक ही चीज है तो तीन ना 4:00 बजे से हम वेट कर रहे हैं कर रहे कर रहे हैं रात को 9:00 बजे तो हमारा नंबर आया और फिर बॉडी बंद करते हैं तो आपका 2 घंटा तो मिनिमम जाना है वो स्तोत्र पाठ वगैरह होगा तो देखिए अब ऐसा था कि वहां पे मेरे माइंडसेट वाले वो तो साधु ही है ना तो सब दो-तीन साधु थे तो इसके साथ में मैंने अच्छे से गप लगाना चालू कर दिया। ठाकुर मां स्वामी जी यही सब इसकी बातें वगैरह वगैरह करके वो जो तीन-चार घंटे कहां चले गए पता नहीं चला। सो दिस इज वन सॉल्यूशन वी कैन हैव कि अपने माइंडसेट वाले जो है उनको थोड़ा रेडी करके रखना है भाई सोशल कन्वेंशन में जहां पे भी हम मिलते हैं लेट अस हैव आवर सेपरेट ग्रुप एंड लेट अस टॉक अबाउट दिस ओनली रेदर देन अबाउट एनीथिंग एल्स। वो ठाकुर की कहानी है ना कि एक भूत है तो भूत मित्र खोज रहा है तो जो भी अपघात से मृत्यु होता है तो खुशख होकर के दौड़ा जाता है फिर पता चलता है उसका मृत्यु नहीं हुआ बच गया है तो दुखी हो के वापस आ जाता ऐसे लोगों को भूत को खोजना है हमारे जैसे