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Meditation ·

Guided Meditation || श्रीरामकृष्ण ध्यान || 3 Apr 2026

मङ्गलाचरण

ओम स्थापकायच धर्मस्य सर्व धर्म स्वरूपण अवतार वरिष्ठाय राम कृष्णाायते नमः

Method of Meditation

मेडिटेशन हम जब सीखते हैं तो एक तो उद्देश उद्देश्य होता है हमारे सामने कि हमको पूर्णत्व प्राप्त करना है। एक तो मैं अपूर्ण हूं और मुझे पूर्णत्व प्राप्त करना है। इसके लिए यह एक जर्नी है हमारा और दूसरा एक मेथड ऑफ मेडिटेशन है कि हमको स्वीकार कर लेना है कि मैं पूर्ण ही हूं और पूर्ण होकर के मैं पूर्ण में मिलित हो रहा हूं। तो यह जो है मेथड कहिए ना कि मन का भाव कहिए। यह आपको सहज रूप से आध्यात्मिक जीवन के उच्च से उच्चतर आयाम की ओर ले जाता है। तो जैसे आज हम ध्यान करेंगे। तो पहले तो ध्यान का जो बेसिक मेथड्स है, हमारी जो बेसिक टेक्निक है, फिर से मैं आपको याद करवा दूं कि आंख बंद नहीं करनी है। यह क्वेश्चन मेरे पास में बार-बार आ रहा है। मुझे किसी किसी ने फोन करके कहा कि हम लोग तो अभी तक आंख बंद करके ही ध्यान करते थे। तो फिर अब आंख थोड़ा सा खुला रहता है तो हमारा मन एकाग्र नहीं हो पाता। देखिए आप थोड़ा सा प्रयास कीजिए धीरे-धीरे करके आपको समझ में आएगा कि यह जो मेथड है आंख को जिस तरह से मैंने पिछली बार भी कहा था। पहले तो आंख पूरी बंद कर देनी है। राइट? फिर उसको एक मिलीमीटर जस्ट स्मालेस्ट ऑफ अमाउंट बिल्कुल थोड़ा सा उसको ओपन करना है। बिल्कुल थोड़ा सा हेयर क्रैक वो पता है वो

Correct word is “Hairline fracture”

फ्रैक्चर होता है तो हेयर क्रैक फ्रैक्चर कहते हैं। फ्रैक्चर कहते हैं। अर्थात कि यह जो बाल जो होते हैं ना अपना उसकी जो थिकनेस होती है उतना सा वह फ्रैक्चर अपने हड्डी में होता है। तो उसको हेयर क्रैक फ्रैक्चर कहते हैं। तो वैसा ही हल्का सा आपको थोड़ा सा खुला रखना है। यदि आप अपनी आंखों को संपूर्ण बंद रखेंगे तो होगा क्या? आपका अटेंशन जो है आपके माइंड के भीतर में चला आएगा। और यहां पर अटेंशन आने के बाद में सबसे बड़ा प्रॉब्लम यह होगा कि मन जो है हमारा वो तमस का घर है। एक्चुअली देखिए कि जिन लोगों ने योग शास्त्र का अभ्यास किया है सबको पता है पिछली बार भी हमने ठाकुर ने जो कहा था उसका स्टडी किया था। ठाकुर ने क्या कहा? हृदय में ध्यान करना वह है विष्णु योग। और यह जो आज्ञा चक्र है उसके ऊपर में ध्यान करना वह है शिव योग। किंतु क्या है कि यह विष्णु योग सहज है जबकि यह शिव योग है। अपने मस्तिष्क के ऊपर में ध्यान करना वो कठिन है। आपको यदि एक लंबा प्रैक्टिस है ध्यान करने का और ध्यान करने का अर्थ भी क्या है? वह भी हमने कल पिछली बार देखा था कि देखिए कि एनीथिंग लेस देन वन आवर 1 घंटे से कम में कुछ होता नहीं है। एक घंटा तो सिर्फ हमको सेटल डाउन होने में होता है। 1 घंटे के बाद में तो अपना मन एक्चुअली एकाग्र होता है। तो यह बात ध्यान में रखनी है। सही-सही ध्यान तो तभी कहा जाएगा जब कि आप 2 घंटा, ढाई घंटा, 3 घंटा करें। 1 घंटे से कम में ध्यान होता ही नहीं है। 1 घंटे से कम यदि हमको बैठना है तो बेटर है कि हम जप करें। जप बहुत ही सहज विधि है। यदि कर के ऊपर में जप करें या तो फिर माला के साथ में जप करें ना कि जप करने की बहुत सारी टेक्निक है। जैसे कि बुद्धिज्म में एक है कि वो जो छोटे-छोटे राउंड जो पत्थर जो होते हैं ना वो एक बास्केट में यहां पर रखते हैं। फिर एक दो बास्केट रहती है। यह जो ओवर ग्लास की तरह अवर ग्लास आपने देखा होगा पिछले पुरानी स्टाइल का ओवर ग्लास ऐसा इस तरह का शेप रहता है। उसमें ऊपर में रेती होती है। धीरे-धीरे करते रेती ऊपर के ग्लास में से नीचे के ग्लास में आती है। तो वैसे ही दो बास्केट रखनी है। एक बास्केट में यह चना है या छोटे-छोटे पत्थर है वह रखने हैं भर के और दूसरी बास्केट खाली रखनी है। और एक बास्केट में से एक पत्थर उठाकर के आपको दूसरी बास्केट में रखा तो हो गया एक जप। जैसे कि मान लीजिए मेरा मंत्र है जय श्री राम। तो एक बास्केट में से उठा के दूसरी बास्केट में रखा जय श्री राम। फिर से एक पत्थर यहां से यहां रखा जय श्री राम। आप जितनी भी बार एक पत्थर को यहां से यहां शिफ्ट करेंगे उतनी बार आपको जय श्री राम मंत्र का उच्चारण करना है। सो बहुत सारी मेथड है बुद्धिज्म में एक वॉकिंग मेडिटेशन है। वॉकिंग मेडिटेशन का क्या अर्थ है कि मैं एक जगह पर स्थिर होकर नहीं बैठ सकता। तो मैं क्या करूंगा? एक कोर्ट यारार्ड है या गार्डन जैसा है। वहां पर सर्कल में मैं वॉक करूंगा, टहलूंगा और मेरे प्रत्येक फुटस्टेप के साथ में मैं एक मंत्र का जप करूंगा। तो पहला स्टेप लिया जय श्री राम। दूसरा स्टेप लिया जय श्री राम। तीसरा स्टेप लिया जय श्री राम। तो ऐसा करके प्रत्येक फुटस्टप के साथ में आपको मंत्र का पाठ करना है। तो क्या है कि मंत्र जप सहज है। यदि आपके पास में अल्पसमय है तो आप कर सकते हैं। यदि फिजिकल फिटनेस ऐसा नहीं है कि स्थिरम सुखम आसनम। आसन का डेफिनेशन क्या है? स्थिर होकर के सुख पूर्वक आप बैठ पाए तो वह प्रॉपर आसन है। तो यदि आप स्थिर होकर के सुख पूर्वक ना बैठ पाए तो उसके लिए जप है। 1 घंटे से कम आपके पास में समय है तो आपके पास में जप है। जप करने के बाद में 5 मिनट 10 मिनट के लिए आप ध्यान कर सकते हैं। वो वि इज वेरी गुड। किंतु जिसको हम प्रॉपर ध्यान कहते हैं, जिसका कि योग शास्त्र में वर्णन है, जिसका वर्णन ठाकुर करते हैं। जिसका वर्णन स्वामी जी करते हैं। यह जो प्रॉपर मेडिटेशन है, वि इज कंप्लीटली डिफरेंट, डिफिकल्ट है। और इसीलिए यह जो अपना क्लास है, हमको यह डिफिकल्ट चीज सीखनी है। सुबह का क्लास और इस क्लास में डिफरेंस क्या है? सुबह के क्लास में आप सभी लोग अटेंड करते हैं। सुनकर के आनंद करते हैं और वहीं तक अपना काम समाप्त हो जाता है। यहां पे इस क्लास में आपको एक डिफिकल्ट कार्य करना है। ध्यान करना है। ध्यान जन्म जन्मांतर से मन की शुद्धता होने से कोई मनुष्य जो है वह ध्यान करने के बारे में सोचता है। वरना तो ज्यादातर आप लोगों को देखिए भगवान ने उनको फिजिकल फिटनेस भी दी है, मेंटल फिटनेस भी दी है। हिंदू भी है किंतु कभी भी ध्यान करने के बारे में सपने में भी नहीं सोचेंगे। तो आप लोग इस तरह से ध्यान सीखने के लिए यहां पर आए हैं। माने आप सोच लीजिए कि कितने जन्मों का सुकृति कितने जन्मों का शुभ आपके संस्कार संचित हुए हैं। बोल के आप आए यहां पे आए हैं। तो वह तो एक है। अभी देखिए कि ध्यान में करना क्या है? बेसिक मेथड हमने आंख को पहले बंद करके हल्का सा उसको खोलना है। यह बहुत ही ख्याल में रखिए। पूर्ण रूप से जैसे हम सोते हैं वैसे ही आंख बंद कर दिया तो मन जो है तमस में डूब जाएगा। भटकने लगेगा। इसलिए यह बहुत ही इंपॉर्टेंट बात याद रखनी है। पहले आंख बंद किया फिर हल्का सा उसको खोला। दिस इज स्टेप नंबर वन। स्टेप नंबर टू क्या है? अपने हृदय के ऊपर में मन को एकाग्र करना है। अपने हृदय में श्री रामकृष्ण देव का चिंतन करना है। अपने हृदय को मंदिर में परिणत करना है। अब जैसे कि आप दो-तीन तरह की कल्पना कर सकते हैं। या तो ठाकुर अह गर्भ गृह में मंदिर में बैठे हैं। वो विजुअलाइज मैं यहां पे करूं अपने हार्ट में ना कि फिर जैसे मेरा खुद का फेवरेट विजुअलाइजेशन है कि ठाकुर अपने कमरे में दक्षिणेश्वर में बैठे हैं। वो जो खाट है ठाकुर का उसके ऊपर में पास में ही मां भी विराजमान है खाट के ऊपर में और जमीन के ऊपर में सभी गुरु भाई विराजमान है। सब ध्यान कर रहे हैं। मैं भी उनके बीच में बैठा हूं। और मेरा फिक्स पोजीशन है कि वह जो गंगा की ओर जो वरांडा है वहां जो दरवाजा है एग्जजेक्टली वहां पर बैठता हूं। सुहानी चांदनी रात है। आकाश में चांद का प्रकाश चारों ओर विस्तरित हो रहा है। यहां पे ठाकुर के कमरे के बाहर में ही पुष्प उद्यान है और इसके बाद में ही कल कल निनादिनी भागीरथी गंगा का पानी बह रहा है। तो इसको हमको हार्ट में विजुअलाइज करना है। अभी मुझे मेरे पास में एक प्रश्न ऐसा आया था कि मैं हार्ट में विजुअलाइज हार्ट को लोकेट नहीं कर पा रहा हूं। यह एक मेरे पास में प्रश्न आया। तो देखिए थोड़ा सा प्रैक्टिस लगेगा। यदि आपको हार्ट में अपने मन को एकाग्र नहीं कर पाते हैं तो हार्ट खोजने के लिए थोड़ा टाइम लगेगा। प्रैक्टिस लगेगा। एक इजी उपाय यह है कि देखिए जैसे ठाकुर अपने भ्रू मध्य पे मन को एकाग्र नहीं कर पाते थे। तो फिर यह तोतापुरी ने क्या किया था? कांच का एक टुकड़ा लेकर के यहां पर ठाकुर को चुभो दिया था। तो अभी यह जो पेन होता है अभी तोतापुरी कहते हैं उसके ऊपर में मन को एकाग्र करो। तो देखिए यदि हार्ट आप लोकेट नहीं कर पाते तो अपने हृदय के ऊपर में सीने के ऊपर में एक तरह से इस तरह से हाथ रखिए। यह जो स्पर्श होगा यह स्पर्श का सेंसेशन जो है उसके ऊपर में मन को कीजिए एकाग्र। तो आपको हार्ट लोकेट हो जाएगा। यह तो एक बात है। और एक प्रश्न मेरे पास में आया था। सी आप लोग प्रश्न करते हैं तो मैं अपना यह जो है इवॉल्व कर सकता हूं। और एक क्वेश्चन आया था कि यह तो हमारा डिस्कस हुआ था कि यह अनाहत चक्र है, विशुद्ध चक्र है, आज्ञा चक्र है। तो, यह अनाहत चक्र है कहां पे? यह अपनी जो स्पाइनल कॉर्ड है वह तो सेंटर में है और हार्ट तो थोड़ा सा अपना लेफ्ट साइड पे है। तो कहां पे एग्जैक्टली फोकस करना है? सेंटर में करना है कि लेफ्ट साइड पे करना है जहां पे हार्ट है। तो मेरा उत्तर यह था कि देखिए ये जो है ना आप जहां पे फोकस कर सकते हैं कीजिए। सेंटर में कर सकते हैं तो सेंटर में कीजिए। साइड पे कर सकते हैं लेफ्ट हैंड साइड पे तो लेफ्ट हैंड साइड पे कीजिए। कुछ समय के बाद में देखेंगे कि वह ऑटोमेटिक एडजस्ट हो जाता है। यह ऑटो सेटिंग होता है ना आजकल तो सब एआई आ गया है। पहले सब मैनुअल सेटिंग होता था। अभी ऑटो सेटिंग है। तो यहां पे भी थोड़ा सा आप प्रैक्टिस करेंगे ना देखेंगे सब ऑटो सेटिंग होता जाएगा। तो बस बात यही है माइंड को यहां पे लोकलाइज करना है। हृदय के ऊपर में ये सेंटर में हो कि लेफ्ट साइड में हो डज नॉट मैटर। कि एक बार यहां पर लोकलाइजेशन हो गया। फिर आप जैसे-जैसे प्रैक्टिस करते जाएंगे वैसे-वैसे देखेंगे कि उसको जहां पर लोकेट होना है वह अपने से लोकेट हो जाएगा। ये एक हो गया। तो और तीसरी बात है कि गीता चेंटिंग का हम सहारा लेते हैं। गीता चेंटिंग का क्या पर्पस है? देखिए मैं यहां पे एक साल मैंने एव्री सैटरडे गाइडेड मेडिटेशन का क्लास लिया है। मैंने बहुत सारे विभिन्न तरह के एक्सपेरिमेंट किए और मैंने सभी तरह के एक्सपेरिमेंट करके यह पाया कि मन को एकाग्र करने के लिए मन की चंचलता से फाइट करने के लिए आपको आत्मश्रद्धा चाहिए। विल पावर चाहिए। संकल्प शक्ति चाहिए। और यह संकल्प शक्ति आत्मश्रद्धा मन को जागृत करना कैसे होगा? जो लोग पार्टिसिपेंट आते हैं क्लास में वो तो चाहे जॉब कर रहे थे बाहर में या तो फिर बाहर में कहीं पर ट्रैफिक में फंसे हुए थे या तो फिर घर में किसी प्रॉब्लम में फंसे थे वहां से सीधे आकर के क्लास में बैठते हैं। अभी मैं यदि उनको कहूं ध्यान कीजिए तो पहले तो उनका मन ही उनको साथ नहीं देता। तो मन उनको साथ दे। मन उनके कंट्रोल में वश में आए। इसके लिए एक चाबुक की जरूरत है। जो घोड़े जो होते हैं ना अभी तो आजकल हम ऑटोमेटेड कार में बैठते हैं। यह जो इंजन वाली गाड़ी में घोड़ा गाड़ी वाला कांसेप्ट ही हम लोग भूल गए हैं। किंतु देखिए एक इंटरेस्टिंग कहानी है कि एक बार मां और राजा महाराज वो कहीं पे गए थे। आई थिंक काशी की ही यह घटना है। तो वहां पे जाने के बाद में राजा महाराज जिस गाड़ी में आए थे घोड़ा गाड़ी में तो राजा महाराज ने कहा मां आप इसमें चले जाइए और आपकी जो घोड़ा गाड़ी है उसमें मैं चला जाता हूं। तो मां ने अच्छा ठीक है अब राजा महाराज की इच्छा है तो तो मां जिस घोड़ा गाड़ी में आई थी उस घोड़ा गाड़ी में राजा महाराज बैठकर के जा रहे हैं। अभी थोड़ा सा ही आगे बढ़े उसमें यह घोड़ा ऐसा पागल की तरह उछलना शुरू किया कि जो गाड़ी है सीधी वह रास्ते के साइड में उलट करके गिर पड़ी। राजा महाराज भी गिरे और खून बहने लगा काफी जगहों से। तो मां को जब बाद में यह पता चला तो मां ने कहा देखो यह जो आप है ना वो मेरे ही दृश्य वो भविष्य मेरे ही ये नसीब में लिखी थी राजा ने उस आप को विपद को अपने ऊपर खींच लिया मुझे बचाने के लिए तो यह देखिए यह घोड़ा जो है घोड़ा गाड़ी में बैठने से पता चलेगा घोड़ा कैसे पागल की तरह दौड़ता है हमारा मन भी यह जैसे स्वामी जी ने कहा पहले तो बंदर है फिर उसने शराब पिया है। फिर उसको बिच्छी ने काटा है। फिर उसके ऊपर में भूत सवार हुआ है। तो यह है हमारा मन। इस मन को ले ध्यान करना है। तो मन को चाबुक मारने के लिए मन को वश में लाने के लिए मेथड क्या है? तो मेथड है गीता चटिंग। गीता चटिंग गीता के पवित्र श्लोक जैसे ही हम उसका पाठ करेंगे हमारे चारों ओर एक पवित्र वातावरण खड़ा होगा। इस पवित्रता को हमको इंटरनलाइज करना है। इस पवित्र जो वाइबेशंस है उसको हमको रिवर्स करके अपने हृदय में प्रवेश करवा करके उस पवित्रता का सहारा लेकर के यह चंचल मन है उसको चाबुक मार के उसको सीधा जो एक गंतव्य है उसका जो टारगेट है उसके ऊपर में उसको एकाग्र करना है। तो यह हो गया हमारा गीता चटिंग का पर्पस। राइट? सो, हमारी जो मेडिटेशन की मेथड है बहुत ही सहज है। पहले तो आंखें पूर्ण बंद करके थोड़ी सी हल्की सी ओपन करनी है। स्टेप वन उस स्टेप वन तो होगा हमारा गीता चटिंग। गीता चटिंग करेंगे। हमारा मन जो है एकदम एक डिसिप्लिंड वे में अपना मन आ जाएगा। तो यह पहला स्टेप हो जाएगा। सेकंड स्टेप होगा जब हम ध्यान प्रारंभ करेंगे। आंखें पूर्ण बंद करके थोड़ी सी ओपन करनी है। और थर्ड स्टेप है ठाकुर को अपने हृदय में विजुअलाइज करना है। तो यह सिंपल थ्री स्टेप फार्मूला मैंने डेवलप किया है। तो

Gita Chanting

आज फिर से प्रारंभ करते हैं गीता चेंटिंग का। मैंने आप सबको कहा ही था कि गीता का 12th चैप्टर का पाठ करेंगे। मेथड कैसी है? सेम मेथड कि मैं दो बार प्रत्येक पद का पाठ करूंगा। यदि आपको आता है आप दोनों बार मेरे साथ में पाठ कीजिए बहुत अच्छा रहेगा। यदि नहीं आता है तो एक बार मुझे सुनकर के फिर मेरे साथ में दोहराइए। गलती होती है उसकी चिंता मत कीजिएगा। धीरे-धीरे यह सीखेंगे किंतु आपकी आवाज जो है क्लियर होनी चाहिए। मंत्रोार जो है मंत्र का जो पाठ है एकदम क्लियर होना चाहिए। तो यह है मेथड। हम लोग 12th चैप्टर का प्रारंभ करते हैं। अथः द्वादशोध्यायः अर्जुन उवाच एवं सतत युक्ताय भक्त परपासते भक्त पर्यपासते ये चाप्यक्षम व्यक्तम ये चाप्यक्षम व्यक्तम तेशाम के योग वित्तमा आई होप के सबको 12th चैप्टर मिला होगा। चैप्टर नंबर 12 चैप्टर नंबर 12 [गला साफ़ करने की आवाज़] श्री भगवान वाच श्री भगवान वाच मैयावेश मनो ये माम मैयावेश मनो ये माम नित्य युक्ता उपासते नित्य युक्ता उपासते श्रद्धया परयोपता तेमे युक्त तमामता ते युक्त तमामता येत त्वक्षरम निरदेश्यम येत त्वक्षरम निर्देश्यम अव्यक्तम पर्युपासते सर्वत्र गम चिंत्यम च सर्वत्र गम चिंत्यम च कूटस्थ मचलम ध्रुवंम कूटस्थ मचलम ध्रुवम सनयम्द्रिय ग्रामम सनयम्द्रिय ग्रामम सर्वत्र समबुद्धय ते प्राप्तवती मामेव ते प्राप्तवती मामेव सर्वभूत ते रता सर्वभहते रता क्लेशोध तरस्तेशाम क्लेशोध तरस्तेशाम अव्यक्त चेतसाम अव्यक्त चेतसाम अव्यक्त गतिर दुखम अव्यक्त गतिर दुखम देहवदभीवाप्यते देहवदभवाप्यते येत सर्वाण कर्माण मई सन्यस मत पराह मई सन्यस मत परा अनन्य न योगन माध्यायंत उपासते माध्यायंत उपासते तेशाहम समुदता तेशाहम समुधता मृत्यु संसार सागरात भवामी न चरात पार्थ मैया वेशित चेतसाम मैया वेशित चेतसा मव मन आस्त मव मन आधस्त म बुद्धिम निवेशय निवसव अत उध्वम न संशयः अथितम समाधान अथितम समाधान न शको स्थिरम न शको स्थिरम अभ्यास योग ततो अभ्यास योग ततो मामच्छा तुम धनंजय अभ्यासेप्य समर्थोसी अभ्यासेप्य समर्थोसी मतकर्म परमो भव मत कर्म परमो भव मदमप कर्माण मदथमप करण कुरवन सिद्धि मवाप्ससीसी वेरी गुड अभी ध्यान करेंगे जिस तरह से

Practice of Meditation

मैंने कहा आंखों को एक बार संपूर्ण रूप से बंद करके हल हल्का सा उसको खोल दीजिए। अपने हृदय के ऊपर में अपनी छाती के ऊपर में एक बार हाथ रख के यदि आवश्यकता है उसको लोकलाइज कर दीजिए। अपनी प्राण शक्ति को अपनी चेतना को और फिर विजुअलाइज कीजिए। ठाकुर का कमरा है। हृदय में ही विजुअलाइज कीजिए। ठाकुर का कमरा है। ठाकुर अपने खाट के ऊपर में अपने बेड के ऊपर में बैठे हैं। मां भी है। सभी गुरु भाई जमीन के ऊपर में बैठे हैं। ध्यान मुद्रा में [संगीत] हम भी वहां पर सबके साथ में उपस्थित हैं। ओम जैसे-जैसे आपका मन ध्यान में गहराई में डूबता जाता है। वैसे वैसे ही जितनी भी पॉजिटिव इमोशंस है, [संगीत] जितना भी मनुष्य के मन में सर्वश्रेष्ठ है, जो भी हमारा दिव्यत्व है, वो दिव्यत्व धीरे-धीरे करके प्रकाशित होना शुरू होगा। कमरे में जैसे आपने बड़ी ही सुंदर खुशबू वाली अगरबत्ती रखी है। उसको प्रगटाने के बाद में जैसे [संगीत] उसकी सुस धीरे-धीरे कमरे में फैलती जाती है। वैसे ही [संगीत] यह हमारे मन का दिव्यत्व यह आत्म तत्व ईश्वर की उपस्थिति जैसे कि यह खुशबू की तरह हमारे मन में फैलती जाएगी। हम पूर्ण है ही है। पूर्णत्व प्राप्त करने की यात्रा किसको करनी है? जो कि अपूर्ण है वह करें। हम तो पूर्ण ही हैं। ईश्वर के प्रति मेरा अनुराग तो है ही है। अनुराग प्राप्त करने के लिए साधना करने की आवश्यकता है ही नहीं। वह अनुराग को ही मन के भीतर में हमको प्रगटित करना है। ईश्वर की कृपा, ईश्वर का आशीर्वाद हमारे हृदय में ऑलरेडी उपस्थित है। बस हमको उसको अनुभव करना है। [संगीत] बस हमारा यह जो तृतीय नेत्र है उसको जैसे ही हम ओपन करेंगे वैसे ही हम ईश्वर की करुणा को इसी दृष्टि से निहार पाएंगे देख पाएंगे। ठाकुर के सामने हम विराजित हैं। ठाकुर का जो उतफुल उत्साह आनंद से भरपूर ठाकुर का जो प्राण शक्ति ठाकुर का मन हमारे साथ में एकाकार हो रहा है। भाे हसे कांधे नाचे गाए भाव में आकर के हंसते हैं नृत्य करते हैं रोते हैं और गाते हैं। ठाकुर का यह जो उल्लसित भक्ति है वह उल्लसित भक्ति प्रफुल्लता ठाकुर की मेरे भी हृदय में प्रगटित हो रही है। मां की करुणा, मां की ममता, मां का हमारे प्रति स्नेह, प्रेम जैसे कि मां के हृदय में से मेरे हृदय में प्रवाहित हो रहा है। गुरु भाइयों की आत्मश्रद्धा गुरु भाइयों का श्री राम कृष्ण मां शारदा के प्रति संपूर्ण निष्ठा संपूर्ण शरणागति यह मेरे भी हृदय में प्रकटित हो रहा है। ठाकुर मां स्वामी जी राजा महाराज, बाबूराम महाराज, महापुरुष महाराज, काली महाराज, लाटू महाराज, सुबोध महाराज, शशि महाराज, शरद महाराज सभी के जो गुण है सभी मेरे हृदय में भी [संगीत] प्रस्फुटित हो रहे हैं। विकसित हो रहे हैं। मैं भी गुरु भाइयों में से ही एक हूं। मैं भी ठाकुर का स्नेह का संतान हूं। हरि ओम।

Method of Meditation

तो यह हो गया ध्यान करने का सहज उपाय। सर्वप्रथम हमको गीता चटिंग करना है। इसके बाद में आंखों को बंद करके हल्का सा ओपन करना है और फिर अपने हृदय में विजुअलाइज करना है कि हम भी ठाकुर मां स्वामी जी और गुरु भाइयों के साथ में उसी चिर परिचित कमरा मास्टर महाशय जब ठाकुर के कमरे का वर्णन करते हैं तो लिखते हैं चिर परिचित कमरा है ना जैसे कि उस कमरे के साथ में जन्म जन्मा धन्मांतर का हमारा संबंध बना हुआ है। वही वह दक्षिणेश्वर का गार्डन वहां पर गंगा है। यहां पर ठाकुर अपना कमरे में है। वहां पर मां काली स्वयं जाग्रता होकर के विराज कर रही है। यहां पर नहबत में देखेंगे। मां विराजित है। तो यह जो चीर परिचित जो हमारा संबंध है दक्षिणेश्वर के साथ में वही दक्षिणेश्वर को अपने हृदय में लाकर के स्थापित करना है। और देखेंगे धीरे-धीरे करके जैसे हमारी ध्यान की गहराई बढ़ती जाएगी। यही दक्षिणेश्वर हृदय में से प्रगटित होकर के अपने घर जो है अपना अपने ये जो फैमिली मेंबर्स है वो सभी को धीरे-धीरे करके पॉजिटिवली अफेक्ट करना शुरू करेगा। तो यह है ध्यान की सहज मेथड। आपको यदि ध्यान की मेथड के बारे में कोई भी प्रश्न है ध्यान की मेथड के बारे में नहीं कि फिलॉसोफी के बारे में। फिलॉसोफिकल कोई भी क्वेश्चन है तो सुबह को अपने क्लास में आप कर सकते हैं। यह जो हमने ध्यान किया उसके रिलेटेड यदि कोई संदेह संशय है तो मैं आपका माइक्रोफोन ऑन कर रहा हूं। यदि आपको प्रश्न है तो कर सकते हैं।

प्रश्न: आँख बिच बिच में बंध हो जाती है तो क्या करे?

उसमें देखिए कभी-कभी बंद भी होगा, कभी-कभी ब्लिंक भी होगा। उससे कोई दिक्कत नहीं है। इवेंचुअली किंतु मेजॉरिटी टाइम खुला रहना चाहिए तो इतना इतना मैनेज करेंगे तो चलेगा

प्रश्न: ठाकुर के कमरे से मेरा मन मायावती चला जाता है. वहाँ मैंने बहोत ध्यान किया था. तो ये ठीक है?

ना कोई दिक्कत नहीं है। जैसे मेरा कभी-कभी होता है कि वही जो गंगा में मैं नौका में बैठकर के दक्षिणेश्वर की ओर जा रहा हूं। तो कभी-कभी यह विजुलाइज़ करता हूं। कभी-कभी यहां पे समुंदर के किनारे पे मैं बैठा हूं। उसको विजुअलाइज करता हूं। मैं जो आपको कहता हूं वह सिर्फ एक गाइडेंस के रूप में है। कोई भी मन को शांति प्रदान करने वाला सीन होना चाहिए। बस उतना काफी है। कई बार मैं अपना गांव मैं कभी छुट्टियों में गांव में जाता था। बड़ा सुंदर परिवेश तो वो उसको मैं विजुअलाइज करता हूं। हालांकि वहां ना ही मंदिर है ना ही और कुछ। परिवारजन ही है सब किंतु वह भी एक देखिए मन को शांत करना है। मन को एकाग्र करना है। मन को पॉजिटिविटी से भरना है। उसके लिए जो कुछ भी बन पड़े वो आपको विजुअलाइज करना है। सो जोर जबरदस्ती कुछ नहीं करना। सहज रूप से जो हो वही करना है। ठीक है? तो

Gita Chanting

फिर अभी हम गीता चेंटिंग फिर से करते हैं। फिर से यह जो साइकिल कि गीता चटिंग फिर ध्यान यह फिर से दोहराएंगे। श्लोक नंबर अपना 11 से प्रारंभ करते हैं। श्लोक नंबर 11 फिर सेम मेथड कि मैं दो बार दोहराऊंगा। आप मेरे साथ में भी चेंट कर सकते हैं। मेरे फर्स्ट टाइम भी कर सकते हैं। दोनों टाइम कर सकते हैं। अथै तदप्य शक्तोसी करतुम मध्य माितः करतुम मध्यग माशितः सर्व कर्म फलत्यागम ततः कुरु यतात्मवान ततः कुर यतात्मवान श्रेय ज्ञानमभ्यासात श्रेयो ज्ञानमभ्यासात ज्ञान ध्यानम विशेष्यते ध्याना कर्म फल त्याग ध्यानात कर्म फल त्याग त्यागा रनंतरम त्यागा रनंतरम अध्वष्टा सर्वभता नाम अध्वष्टा सर्वभता नाम मैत्र करुणव च मैत्र करुण एवच निर्ममो निरहंकार सम दुख सुखक्षमी संतुष्ट सततम योगी यतात्मा दृढ़ निश्चयः मर्पीत मनो बुद्धि मर्पीत मनो बुद्धि योम भक्त समे प्रिय यो भक्त समे प्रिय यसमानो द्विजते लोको यस्मानो द्विजते लोको लोनो द्विजते चयः लो द्विजते चयः हर्षमर्ष भयो द्वगै हर्षमर्ष भयो द्वेग मुक्तो यह सच में प्रिय अनपेक्ष सुचिर दक्ष अनपेक्ष सुचि दक्ष उदासीनो गतव्यथः उदासीनो गतव्यथः सर्ंभ परित्यागी सर्वारंभ परित्यागी योद भक्त समे प्रिय यो मद भक्त समे प्रिय यो नशति न द्वष्ट यो नशति न द्वेष्टि न शोचति न काक्षति शुभा शुभ परित्यागी शुभा शुभ परित्यागी गी भक्ति मान्य समय प्रिय भक्ति मान्य समे प्रिय समह शत्रो च मित्र्रे च समह शत्रो च मित्र्रे च तथा मानापमानयो तथा मानापमानयो शीतोष्ण सुख सुख दुखेशु शीतोष्ण सुख दुखेशु समह संग विवर्जितः तुल्य निंदा स्तुति मौनी संतुष्टो ये केन चेत संतुष्टो ये न के न चेत अकेत स्थिर मति अकेत स्थिर मति भक्तिमान में प्रियो नरह भक्तिमान में प्रियो नरह येत धर्म्यामदम यथोक्तम परपा उपासते यथोक्तम परपासते श्रद्धा मत परमा श्रद्धा मत परमा भक्ते तव में प्रिया भक्ते तव में प्रिया ओम तत्सद इति ओम तत्सद इति श्रीमद् भगवत गीतासु श्रीमद् भगवत गीता सु उपनिषद सु उपनिषद सु ब्रह्म विद्यायाम योग शास्त्रे योग शास्त्रे श्री कृष्णार्जुन संवादे श्री कृष्णार संवादे भक्ति योगो नाम द्वादशोध्याय

Practice of Meditation

वेरी गुड फिर से वही ध्यान करेंगे आंखों को हल्का सा खुला रख के हृदय के भीतर में वही चिर परिचित ठाकुर का कमरा विजुअलाइज करना है। और यदि दक्षिणेश्वर ना हो तो कोई भी ऐसी जगह जहां पर मन शांत होता है वहां विजुअलाइज करना है। ठाकुर का उल्लसित ब्रह्म ज्ञान मां की ममता स्वामी [संगीत] विवेकानंद का आत्मश्रद्धा गुरु भाइयों की गुरु निष्ठा यह सब मेरे भी हृदय में प्रगटित [संगीत] हो रहे हैं। ठाकुर ने जिस स्नेह के बंधन से गुरु भाइयों को बांधा था उसी स्नेह के बंधन में मुझे भी बांध दिया है। मैं भी ठाकुर का जो अंतरंग वर्तुल है, सर्कल है, उसका एक अभिन्न हिस्सा हो चुका हूं। ओम शांति शांति शांति हरि ओम तत्सत श्री राम कृष्णपणमस्तु थैंक यू।